मध्य प्रदेश सरकार की एक सार्थक पहल

मध्यप्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े विद्या भारती के साथ 13.5 करोड़ रुपए का एक करार किया है। इस करार में विद्या भारती की बाल पत्रिकादेवव्रतको मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में मुफ्त बांटने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत पत्रिका मध्यप्रदेश के एक लाख 10 हजार स्कूलों तक पहुंचाई जाएगी।

1977 में जब विद्या भारती की स्थापना की गई थी, तो इसका उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में हिंदुत्व को स्थापित करना था और आज तकरीबन 25 लाख विद्यार्थी इस संस्थान के तहत पंजीकृत हैं और 18 हजार संस्थानों को इसके द्वारा संचालित किया जा रहा है।

यह एक तरह का सांस्कृतिक गठबंधन है, जो स्कूलों में हिंदुत्व की शिक्षा को मजबूत बनाते हुए भविष्य के लिए एक पीढ़ी तैयार करेगा। संघ ने देश में जनसंगठनों की एक ऐसी संरचना तैयार की है, जो जीवन के हर क्षेत्र में हिंदुत्व के मुताबिक व्यक्ति की धार्मिक प्रतिपूर्ति करती है। यह एक स्थिति है जिसमें देश का संविधान भले ही धर्मनिरपेक्षता जैसे शब्दों को टंकित करके बंद कर दिया गया हो, पर वृहद पैमाने पर फैले इन संगठनों ने देश की बड़ी आबादी के बच्चों में पैदा होते ही संस्कारों और नैतिकताओं के रूप में हिंदुत्व का बीजारोपण किया है।

मध्यप्रदेश सरकार बाल पत्रिका को राज्य के सभी स्कूलों में वितरित करते हुए संघ के इसी दृष्टिकोण को स्थापित करने का एक सरकारी कार्यक्रम चलाएगी, जो मध्यप्रदेश के बच्चों को धार्मिक आख्यानों व कल्पित कथाओं से लैस एक हिंदू के रूप में निर्मित करेगा।

जहाँ एक और पी. चितंबरम 'भगवा' को आतंकवाद से जोड़कर देख रहें हैं वहीँ दूसरी और मध्य प्रदेश सरकार का यह निर्णय एक साहसिक कदम ही कहा जायेगा.

तुझसे नाराज़ नहीं चिदंबरम हैरान हूँ मैं - मनमोहन सिंह

ममता बनर्जी केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम को लगातार झूठा साबित करती रही है और माओवादियों के लिए उनके दिल में अपार प्रेम हैं और इससे भी ज्यादा विचित्र बात यह है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चिदंबरम की बजाय ममता बनर्जी का साथ देने में लगे हैं। इसी सप्ताह ममता बनर्जी से मिलने के लिए प्रधानमंत्री ने अपने दो बड़े कार्यक्रम टाले जिसमें एक राजनयिक रात्रिभोज भी था।

ममता बनर्जी देर तक प्रधानमंत्री के साथ रही और उन्होंने माओवादियो से निपटने की गृह मंत्रालय की शैली की आलोचना की। खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की राय यही है। माओवादियों से वे बार बार हर संभव मौके पर अपील कर रहे हैं कि वे बातचीत के लिए सामने आए और हिंसा का रास्ता छोड़ दे। प्रधानमंत्री तो यहां तक कह चुके हैं कि माओवादी हमारे अपने ही आदमी है और उनसे उनके दुख के कारण पूछे जा सकते हैं।

उधर चिदंबरम प्रधानमंत्री की इस परम नरम मुद्रा से काफी दुखी है। उन्होंने बार बार ऐलान किया है कि ऑपरेशन ग्रीन हंट के जरिए उन्होंने माओवादियों से आर पार की लड़ाई का जब ऐलान कर ही दिया है तो माओवादियों के प्रति इतना प्यार दिखा कर प्रधानमंत्री आखिर साबित क्या करना चाहते हैं?
मगर प्रधानमंत्री की नाराजगी चिदंबरम के साथ माओवाद को ले कर ही नहीं है, वे भगवा आतंकवाद के नाम पर दिए गए चिदंबरम के बयान से भी काफी आहत है। आज तक जब इस देश में आतंकवाद को मुस्लिम या इस्लामी नहीं कहा गया तो फिर भगवा या हिंदू आतंकवाद शब्द कहां से आ गया और उसे खुद गृह मंत्री ने मान्यता क्यों दे दी? यूपीए सरकार के खिलाफ भाजपा का यह अब एक सबसे नया हथियार है और यह हथियार चिदंबरम की मेहरबानी से मिला है।

दरअसल प्रधानमंत्री ममता बनर्जी से मिलने के बाद चिदंबरम को बुलाते समय इतनी नाराजगी में थे कि चिदंबरम ने खुद प्रणब मुखर्जी और एके एंटनी से अनुरोध किया कि वे भी इस बैठक में आए। प्रधानमंत्री पहले ही इन दोनों का बुला चुके थे। चिदंबरम ने ममता बनर्जी की शिकायत को नाजायज बताया जिसमें ममता ने कहा था कि माओवादियों के खिलाफ जो केंद्रीय अर्धसैनिक बल आए हैं उनका फायदा वामपंथी उठा रहे हैं। वैसे भी ममता बनर्जी लालगढ़ की अपनी चर्चित रैली में माओवादियों के नेता आजाद की मौत को ले कर इसे फर्जी मुठभेड़ कह चुकी है और इसकी जांच की मांग भी कर चुकी है।

इस बात की संभावना कम है कि चिदंबरम को हटाया जाएगा या उनकी जगह कोई नया गृह मंत्री ला कर उन्हें किसी दूसरे विभाग में भेजा जाएगा लेकिन उन पर निगरानी करने के लिए बहुत सारे उपाय सोचे गए हैं और इन उपायों के पीछे प्रधानमंत्री ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से अपने तर्कों के आधार पर अनुमति भी ले ली है।

कश्मीरियों को "आजादी" चाहिए, नौकरी नहीं - जोशी

भाजपा ने गुरूवार को संसद में सरकार पर कश्मीर घाटी में तनावपूर्ण हालात से निपटने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि कश्मीरी देश से अलग होने की मांग कर रहे हैं न कि नौकरी या आर्थिक विकास की।

कश्मीर घाटी में फैली हिंसा में 11 जून से ही अब तक 64 लोग मारे जा चुके हैं। जम्मू एवं कश्मीर की स्थिति पर बहस के दौरान लोकसभा में भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम से कहा कि वह कश्मीरियों से स्पष्ट तौर पर कहें कि उनकी "आजादी" या स्वायत्तता की मांग उचित नहीं है। जोशी ने कहा, ""कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और दुनिया की कोई भी ताकत उसे भारत से अलग नहीं कर सकती।""

उन्होंने कहा, ""सरकार कहती है कि उनकी शिकायतें वाजिब हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि वे शिकायतें क्या हैं। क्या भारत वहां अपनी सेना भेज रहा है या फिर हम कश्मीर पर कब्जा कर रहे हैं उनकी शिकायतें क्या हैंक् आजादी की मांग के अलावा उनकी कुछ शिकायतें नहीं हैं। अगर इसी को आप उनकी जायज माग बता रहे हैं, तो उन्हें को स्पष्ट रूप से बता दीजिए कि आजादी या स्वायत्तता संभव नहीं है, यह व्यवहारिक नहीं है।""

संसद में जोशी की इस टिप्पणी पर नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के श्ौफुद्दीन शारिक और महबूब बेग ने आपत्ति जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार ने नेकां सांसदों को किसी तरह शांत कराकर उन्हें वापस अपनी सीट पर वापस भेजा। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सर्वदलीय बैठक संबंधी बयान का मखौल उ़डाने वाली कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सईद अली गिलानी की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार को जम्मू एवं कश्मीर में पैसा नहीं लगाना चाहिए। जोशी ने कहा, ""गिलानी कह चुके हैं कि यह बैठकें उनके लिए महत्वपूर्ण नहंी हैं क्योंकि इस तरह की बैठकों से कश्मीर की आजादी हासिल नहीं की जा सकती।""

जोशी ने लोकसभा में कहा, ""कश्मीरियों का कहना है कि उन्हें भारत से स्वतंत्रता चाहिए। यदि यह समस्या है तो सरकार इसे कैसे हल करेगी। सरकार उनके साथ किस तरह की बातचीत करेगी। यदि सरकार राज्य को स्वायत्ता देने पर विचार कर रही है तो उसे सोचना चाहिए कि उसके बाद पूर्वोत्तर की क्या स्थिति होगी।""

जोशी ने कहा कि सरकार जम्मू एवं कश्मीर को 94,000 करो़ड रूपये दे चुकी है जहां की आबादी हमारे देश की जनसंख्या का मात्र एक या दो प्रतिशत ही है। यह कल्पना करने वाली बात है कि एक या दो प्रतिशत आबादी वाले राज्य को हमारे बजट का 10-12 फीसदी हिस्सा दे दिया जाता है।

कांग्रेस ने सीबीआई को नरेंद्र मोदी की सुपारी दी

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने उन्हें राजनीतिक रूप से समाप्त करने के लिए और राज्य के विकास को रोकने के लिए सीबीआई को उनके नाम की सुपारी दी है।

अहमदाबाद नगर निगम के एक समारोह में मोदी ने कहा कि गुजरात के विकास को कांग्रेस पचा नहीं पा रही है। उसने सीबीआई को उनका राजनीतिक आधार खत्म करने और राज्य के विकास को बाधित करने की सुपारी दी है। मोदी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि गुजरात की जनता इसका सही जवाब देगी।

इंदिरा गांधी का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री ने जब देश पर आपातकाल थोपा था उस समय भी गुजरात की जनता ने उन्हें उपयुक्त जवाब दिया था। कांग्रेस के जो नेता सीबीआई का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं, गुजरात की जनता इस बार भी उन्हें जरूर सबक सिखाएगी।

मोदी के बयान पर कांग्रेस नेत्री अंबिका सोनी ने कहा कि केंद्र सरकार किसी को लगी डर की बीमारी दूर करने में कोई मदद नहीं कर सकती। मोदी का बयान उनके सहयोगी अमित शाह के पकड़े जाने के बाद पैदा हुई घबराहट है।

नानावटी आयोग को नहीं मिले मोदी के खिलाफ पर्याप्त सबूत

गोधरा कांड के बाद हुए गुजरात दंगों की जांच कर रहे नानावटी आयोग ने कहा है कि आयोग के सामने अब तक पेश किए गए सबूत नरेंद्र मोदी को समन भेजने के लिए नाकाफी है। हालांकि आयोग ने कहा कि यदि आयोग के सामने भविष्य में और सबूत आते हैं तो नरेंद्र मोदी को भी समन भेजा जा सकता है।

जब अधिवक्ता मुकुल सिन्हा ने सफाई पेश की कि राज्य सरकार ने गुजरात हाई कोर्ट को पहले ही जानकारी दे दी थी कि नरेंद्र मोदी को पूछताछ के लिए बुलाए न जाने पर फैसला अंतिम नहीं है तो इस पर आयोग ने सफाई दी की यह समन पूर्व गृह राज्य मंत्री गोर्धन जदाफिया और पुलिस अधिकारी आरजे सावानी से संबद्ध था और नरेंद्र मोदी से संबद्ध नहीं था।

हालांकि जस्टिस नानावटी ने साफ किया कि यदि भविष्य में आयोग के सामने ऎसे सबूत आए और आयोग को किसी को भी समन भेजने की जरूरत महसूस हुई तो आयोग समन भेजेगा।

लश्कर-ए-तैयबा पंजाब में फिर आतंकवाद फैलाने की कोशिश में

खुफिया ब्यूरो ने चेतावनी दी है कि भारत से विद्वेष रकने वाली अंतरराष्ट्रीय आधार वाली एजेंसियां सिख उग्रवादी संगठनों और लश्कर--तैयबा के बीच गठजो़ड कर पंजाब में सिख उग्रवाद को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही हैं। खुफिया ब्यूरो के निदेशक राजीव माथुर ने राज्यों के पुलिस मुखियाओं के सम्मेलन में कहा, अंतरराष्ट्रीय बेस का इस्तेमाल कर सिख उग्रवाद को पुनर्जीवित करने का प्रयास एक अन्य चिंताजनक रूझान है।
उन्होंने कहा कि विदेश स्थित विद्वेषपूर्ण एजेंसियों की ओर से सिख आतंकवादी तत्वों को फिर से सक्रिय करने के प्रयास स्पष्ट नजर आ रहे हैं। वे बब्बर खालसा और खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स जैसे सिख आतंकवादी संगठनों और लश्कर के बीच गठजो़ड बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वे पंजाब में आतंकवादी हिंसा की साजिश के लिए अपने संसाधन जुटा रहे हैं। इस माह की शुरूआत में गृह राज्यमंत्री अजय माकन ने भी आगाह किया था कि सिख उग्रवादी संगठन आतंकवाद को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं। माकन ने कहा था कि पंजाब में आतंकवादी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने की कोशिश करने में संलग्न रहे संगठनों पर नजर रखी जा रही है। बब्बर खालसा इंटरनेशनल, इंटरनेशनल सिख यूथ फैडरेशन, खालिस्तान कमांडो फोर्स और खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स को गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) संशोधन कानून 2004 के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया गया है

यह कांग्रेस की तुष्टीकरण की पॉलिसी है - राजीव प्रताप रुड़ी

केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के भगवा आतंक संबंधी बयान पर बीजेपी ने एतराज जताया है। बीजेपी ने कहा कि सरकार हर तरफ समस्याओं से घिरी है। और ऐसे में गृह मंत्री समस्या से ध्यान बांटने के लिए इस तरह का बयान दे रहे हैं। यह कांग्रेस की तुष्टीकरण की पॉलिसी है। गृह मंत्री पी.चिदंबरम के एक बयान पर बीजेपी नेता राजीव प्रताप रुड़ी ने कहा कि चिदंबरम तुष्टिकरण पॉलिसी के तहत इस तरह का बयान दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार के सामने कई समस्याएं हैं। कश्मीर अशांत है, घोटाले हुए हैं और न्यूक्लियर सप्लायर बिल का मुद्दा है। इन तमाम समस्यायों के बीच घिरे चिदंबरम भगवा आतंक की बात देश का ध्यान असल समस्या से भटकाने के लिए कर रहे हैं।

मालूम हो कि चिदंबरम ने आज कहा कि पिछले 21 महीनों से आतंक की कोई घटना नहीं आई है। भगवा आतंक का मामला सामने आया है। आज से शुरू हुई राज्‍य पुलिस प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्‍बरम ने ये बातें कही। हालांकि उन्‍होंने आश्‍वस्‍त किया कि सरकार आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है

गृह मंत्री पी चिदंबरम को 'भगवा आंतकवाद' का दौरा पड़ा

गृह मंत्री पी चिदंबरम को 'भगवा आंतकवाद' का दौरा फिर से पड़ गया है इस बार उन्होंने चेतावनी दी है कि देश में युवाओं को उग्रवादी बनाने की कोशिशें हो रही हैं. उन्होंने कहा है कि कई बम धमाकों में 'भगवा आंतकवाद' नाम के नए चलन की भूमिका उजागर हुई है.
पी चिदंबरम देश में पुलिस बल के प्रमुखों की एक कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे. यहां उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा पर खुलकर बात की. उन्होंने जम्मू कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर भी चिंता जाहिर की. हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही प्रदर्शनकारियों तक पहुंचने के लिए एक शुरुआती कदम खोज लिया जाएगा और बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा.

उन्होंने युवाओं को उग्र बनाने पर भी चिंता जताई. चिदंबरम ने कहा, "देश में नौजवान लड़के-लड़कियों को उग्र बनाने की कोशिशों की इजाजत नहीं दी जा सकती. इसके अलावा भगवा आतंकवाद का नया चलन उजागर हुआ है, जिसकी हाल ही में हुए कई बम धमाकों में भूमिका सामने आई है."

गौरतलब है कि देश में हुए कई बम धमाकों में कट्टर हिंदू संगठनों की भूमिका की बात जांच एजेंसियों ने कही है. मालेगांव में हुए बम धमाकों के सिलसिले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और उनके कुछ साथियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. प्रज्ञा गुजरात में अपना हिंदू संगठन चला रही थीं. इस मामले में सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल समेत कुछ और लोगों को भी गिरफ्त में लिया गया है. इन सभी के दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों से जुड़े होने की बात सामने आई है.

अजमेर की दरगाह पर 2007 में हुए एक बम धमाके के बारे में भी जांच एजेंसियों की शक की सुई दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों की ओर घूमती रही है. मई 2007 में हैदराबाद में और उसके बाद अजमेर में धमाके हुए थे. जांच एजेंसियों ने कहा है कि इन दोनों धमाकों में इस्तेमाल किए गए बम एक ही दिन बनाए गए. इस सिलसिले में कई गिरफ्तारियां हुई हैं. हालांकि जांच में अभी तक कोई पुख्ता सबूत हासिल हुआ हो, ऐसा पुलिस ने नहीं बताया है.

धमाकों के तार दक्षिणपंथी ताकतों से जुड़े होने की खबरों ने देश में बहस छेड़ रखी है. और चिदंबरम का यह साफ साफ कहना कि देश में भगवा आतंकवाद मौजूद है, इस बहस को और हवा दे सकता है. आप भी अपनी राय दें ..

बर्न कुरान डे पर रोक

पादरी टेरी जोंस के चर्चित बर्न कुरान डे पर रोक लगा दी गयी है. फ्लोरिडा के अग्निशामक विभाग ने कहा है अमेरिकी कानून के अनुसार धार्मिक पुस्तकों को नहीं जलाया जा सकता.

फ्लोरिडा के मेयर क्रेग लो ने अग्निशामक विभाग के निर्णय का स्वागत किया है. पर
, टेरी जोंस का कहना है हम हर हाल में कार्यक्रम करेंगे.

मिस्र के विश्व प्रसिद्ध विश्वविद्यालय अल अजहर की सुप्रीम काउंसिल ने इसे नफरत और भेदभाव की पराकाष्ठा बताया है. चैलेंज ऑफ इसलाम के लेखक व वाशिंगटन स्थित अमेरिकन विवि के प्रोफ़ेसर अकबर अहमद ने कहा है जोंस का कदम पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति के विचारों से भिन्न है. पूर्व राष्ट्रपति थॉमस जेफरसन निजी तौर पर कुरान रखते थे. उन्होंने पहली बार बतौर राष्ट्रपति इफ्तार की दावत भी दी थी.

काउंसिल ऑन अमेरिकन इसलामिक रिलेशन (केयर) ने कुरान की शिक्षाओं के प्रति जागरूकता के लिए इसकी एक लाख प्रतियां वितरित करने की घोषणा की. संस्था के प्रवक्ता इब्राहीम हूपर ने कहा कि कार्यक्रम के प्रति लोगों का रुख उत्साहवर्धक है.

फ्लोरिडा इंटर फ़ेथ फोरम ने बर्न कुरआन डे के खिलाफ
10 सितंबर को कार्यक्रम करने की घोषणा की है. फोरम में ईसाई, मुसलिम, यहूदी व हिंदू शामिल हैं. फोरम सभी धर्मो के लोगों के बीच आपसी तालमेल व शांति पर जोर देगा.

राजनीति हिन्दू-मुसलमानों को बांट रही है : सुदर्शन

राजनीति हिन्दू-मुसलमानों को बांट रही है यह राजनीति का बिषैलापन है जो दोनों धर्मों के लोगों को आपस में लड़ा रहा है। यह बात आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक केसी सुदर्शन ने ग्वालियर में शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में कही।

कार्यक्रम का आयोजन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ग्वालियर इकाई द्वारा किया गया। इसका विषय था मुसलमान और उनकी मातृभूमि। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए श्री सुदर्शन ने कहा कि भारत की संस्कृति सनातन है इसका पिछले पांच हजार साल का इतिहास इतना उज्जवल है कि सारी दुनिया उसकी नकल कर रही है।

इसी भारतीय संस्कृति की परस्पर सहिष्णुता की मिसाल देखिए कि पिछले दो हजार साल से यहूदी पारसियों को दुनिया के हर देश में दुत्कार अत्याचार मिले लेकिन भारत ही एक मात्र देश है जहां इन दोनों धर्मों के लोगों को सम्मानजनक रूप से रहने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना के बाद से देश में कुछ लोगों ने अफवाह फैला दी कि आरएसएस मुसलमानों का दुश्मन है लेकिन ऐसा नही है। संघ मुसलमानों को भी इसी देश की संतान मानता है और देश के लिए की गई कुर्बानियों में मुसलमनों का भी महत्वपूर्ण योगदान है।

विवादित ढांचा विध्वंस के मामले में गवाही शुरू

अयोध्या के विवादित ढांचा विध्वंस मामले में आज लखनउ की विशेष अदालत में गवाही शुरू हो गई।
विशेष न्यायाधीश - अयोध्या प्रकरण: वीरेन्द्र कुमार की अदालत के समक्ष सीबीआई की ओर से पहले गवाह के रप में रामजन्मभूमि थाना अयोध्या के तत्कालीन थानाध्यक्ष प्रियंवदा नाथ शुक्ल को पेश किया गया। गवाही के बाद अब 31 अगस्त को जिरह होगी।
सीबीआई के अधिवक्ता केपी सिंह ने बताया कि इस गवाह ने ही छह दिसम्बर 1992 को विवादित ढांचा विध्वंस के बाद मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में सीबीआई ने विवेचना के बाद आरोप पत्र दाखिल किया था। न्यायालय ने मामले के अभियुक्तों पर आरोप तय करने के बाद अब गवाही की कार्यवाही शुर कर दी है। कोर्ट ने पिछले हफ्ते इस मामले में फैजाबाद के तत्कालीन जिलाधिकारी आरएन श्रीवास्तव समेत 23 अभियुक्तों पर आरोप निर्धारण के बाद गवाही के लिए 23 अगस्त की तारीख तय की थी।

अयोध्या की शास्त्रीय सीमा में कोई मस्जिद नहीं बनेगी: तोगड़िया

देश भर में तीन महीने तक चलने वाले अभियान का प्रारम्भ करते हुए विश्व हिन्दू परिषद् के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री डा़ प्रवीण भाई तोगड़िया ने कहा कि संतों के आदेशानुसार भगवान श्रीराम का मंदिर जन्मभूमि पर ही बनेगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या की शास्त्रीय सीमा में कोई मस्जिद नहीं बनेगी।

दिल्ली के पहाड़गंज स्थिति उदासीन आश्रम के सामने हुई धर्म सभा में तोगड़िया ने कहा कि गत साढ़े चार सौ वर्षो के इतिहास में कभी कोई मस्जिद श्रीराम जन्मभूमि पर नहीं बनी और न ही जन्मस्थली की पूजा और परिक्रमा कभी रूकी है। जबकि तब देश में न तो मुस्लिम थे न इस्लाम का कोई नाम था।

उन्होंने कहा कि आदिकाल से लेकर आज तक अयोध्या की परिक्रमा और उसकी पूजा अनेक अवरोधों के बावजूद हिन्दू समाज ने कभी नही छोड़ी। सन् 1528 में विदेशी मुस्लिम लुटेरा बाबर ने भगवान के मंदिर को ध्वस्त कर गया किन्तु हिन्दुओं की आस्था और विश्वास को कोई आज तक नहीं डिगा पाया। विश्वभर के हिन्दुओं का यह संकल्प है कि जन्मस्थली पर हम मंदिर बनाक र ही रहेंगे, साथ ही कहा कि मंदिर निर्माण को कोई रोक नहीं सकता।

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए
विहिप की प्रेरणा से श्रीहनुमत शक्ति जागरण समिति द्वारा दिल्ली में कई कार्यक्रम व संकल्प सभाएं आयोजित की गईं। राजधानी में 21 स्थानों पर एक साथ आयोजित इन धर्म सभाओं में हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लेकर अपने आराध्य भगवान श्रीराम के जन्म स्थान पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए संकल्प लिया।

राम चरित मानस के रचयिता महाकवि तुलसी दास जी की जयन्ती पर आयोजित इन धर्म सभाओं में अनेक वक्ताओं ने जनता को रामजन्म भूमि के विषय में विशिष्ट जानकारियां देकर संकल्प दिलाया साथ ही यह भी मांग की गई कि सोमनाथ की तर्ज पर संसद में कानून बनाकर जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण हो।

समिति के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए मीडिया प्रमुख विनोद बसंल ने बताया कि हनुमान चालीसा का यह पाठ दिल्ली के पांच हजार से अधिक मंदिरों में नियमित रूप से संतों के सानिध्य में होगा जो 17 नवम्बर से देवोत्थान एकादशी तक चलेगा। इसमें राजधानी के करोड़ों लोग भाग लेकर संकल्प लेंगे। इन कार्यक्रमों में हिन्दू समाज के हर मत पंथ, सम्प्रदाय व विचारधारा के लोग भाग लेंगे।

पाक में हिंदू बाढ़पीड़ितों को गोमांस परोसा गया

पाकिस्तान में विनाशकारी बाढ़ से बेघर हुए सैकड़ों अल्पसंख्यक हिंदुओं को प्रशासन ने कराची स्थित राहत शिविर में गोमांस परोस दिया जिसके बाद समुदाय के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किया। बागरी औरवाघारी आदिवासी समुदाय के इन हिंदुओं की संख्या करीब छह सौ है। ये ल्यारी क्षेत्र में बनाए गए राहत शिविर मेंचार हजार बाढ़ पीडि़तों के साथ रह रहे हैं।

शिविर में रह रहे एक हिंदू मोहन बागरी ने स्थानीय मीडिया से कहा, 'हम हिंदू हैं। हमारे धर्म में गोमांस खाना वर्जित है। लेकिन, हमें गोमांस दिया गया जो कि अस्वीकार्य है।' चेहरे पर पारंपरिक टैटू बनवाए और लहंगा पहने कई महिलाओं ने अपने बच्चों के साथ शिविर छोड़ दिया और मांग की कि उन्हें कहीं और स्थानांतरित कर दिया जाए।

विरोध प्रदर्शन के बाद सिंध प्रांत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के अधिकारी तुरंत शिविर पहुंचे और मामले के हल के लिए हस्तक्षेप किया। प्रांतीय अल्पसंख्यक मंत्री मोहन मल कोहिस्तानी ने कहा, 'ऐसा गलतफहमी से हुआ।

यह आहार शिविर में रह रहे लोगों के लिए था, लेकिन प्रशासन इस बात से अवगत नहीं था कि वे किस धर्म से ताल्लुक रखते हैं। बहरहाल, हमने व्यवस्थाएं की हैं और अब उन्हें अपना खाना पकाने के लिए राशन दिया जाएगा।

रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहनों का ही त्यौहार नहीं है

उत्‍तर भारत में मुख्य रूप से श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला रक्षाबंधन त्‍यौहार भाई का बहन के प्रति प्‍यार का प्रतीक है।

इसी दिन बहनें अपने भाइयों की दीर्घायु के लिए उनकी कलाई में राखी बांधती है और बदले में भाई भी अपनी बहन को उसकी हर प्रकार से रक्षा करने का वचन उपहार के रूप में देते हैं।


विजय का प्रतीक है रेशमी धागा


राजपूत जब लड़ाई पर जाते थे तब महिलाएं उनको माथे पर कुमकुम तिलक लगाने के साथ-साथ हाथ में रेशमी धागा भी बांधती थी। इस विश्वास के साथ कि यह धागा उन्हे विजयश्री के साथ वापस ले आएगा।

भाई के कानों के पर भोजली लगाने की प्रथा

भारत के अनेक प्रांतों में श्रावण पूर्णिमा के दिन बहनों के द्वारा भाई के कानों के ऊपर भोजली या भुजरियां लगाने की प्रथा भी है। भाई इसके बदले में अपनी बहन को उपहार या धन देते हैं।

रक्षाबंधन के दिन संपूर्ण होती है अमरनाथ यात्रा

अमरनाथ की अतिविख्यात धार्मिक यात्रा गुरुपूर्णिमा से प्रारंभ होकर रक्षाबंधन के दिन संपूर्ण होती है। कहते हैं इसी दिन यहां का हिमानी शिवलिंग भी पूरा होता है।

कथा (रक्षाबंधन) :

रक्षाबंधन के सन्दर्भ में अनेकों पौराणिक व ऐतिहासिक कथाएं प्रचलित हैं-

1.महाभारत के अनुसार जब श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया था, तब उनकी तर्जनी अंगुली में चोट आ गई थी। उस समय पांडवों की पत्‍नी द्रौपदी ने भगवान कृष्‍ण की कलाई से बहते खून को रोकने के लिए अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर बांधा था। वह श्रावण मास की पूर्णिमा का ही दिन था। इस प्रकार उन दोनों के बीच भाई-बहन का बंधन विकसित हुआ था, तथा भगवान श्री कृष्‍ण ने भी द्रौपदी को रक्षा करने का वचन दिया था। श्रीकृष्ण ने चीरहरण के समय उनकी साड़ी को बढ़ाकर अपनी बहन की रक्षा कौरवों से की थी।

2. भविष्य पुराण के अनुसार देव व दानवों में जब युद्ध हो रहा था, उस दौरान दानवों को हावी होते देख इन्द्र घबरा कर बृहस्पति के पास गये। वहां बैठी इंद्र की पत्नी इंद्राणी सब सुन रही थी। उन्होंने रेशम के धागे को मंत्रों की शक्ति से पवित्र कर अपने पति के हाथ पर बांध दिया। संयोगवश वह श्रावण पूर्णिमा का दिन था।

तभी से लोगों को विश्वास है कि इंद्र युद्ध में इसी धागे की बदौलत विजयी हुए थे। इसी कारण श्रावण पूर्णिमा के दिन यह धागा बांधने की प्रथा चली आ रही है। यह धागा धन,शक्ति, हर्ष और विजय देने में पूरी तरह समर्थ माना जाता है।

ऐतिहासिक कथा :

एक बार मेवाड़ की महारानी कर्मवती को बहादुरशाह द्वारा मेवाड़ पर हमला करने की पूर्वसूचना मिली। उस समय रानी युद्ध लड़ऩे में असमर्थ थी। उसने मुगल राजा हुमायूं को राखी भेज कर अपनी व अपने राज्य की रक्षा करने के लिए उससे याचना की। मुसलमान होते हुए भी हुमायूँ ने राखी की लाज रखी और मेवाड़ पहुँच कर बहादुरशाह के विरूद्ध मेवाड़ की ओर से लड़ते हुए कर्मवती व उसके राज्य की रक्षा की।

सहमति से बने या फिर संघर्ष से, राम मंदिर बनेगा जरूर: भागवत

राम मंदिर निर्माण के अपने प्रण को दुहराते हुये राष्टीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने कहा है कि यह तय है कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होगा, चाहे वह सहमति से बने या फिर संघर्ष से.

आरएसएस अध्यक्ष मोहन भागवत ने कल रात एक फंक्शन के दौरान कहा कि राम मंदिर करोडों हिन्दुओं के विश्वास का मामला है. इसलिए हम ये पक्का आश्वासन देते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर बनेगा चाहे वह सहमति से बने या फिर संघर्ष से.

उन्होंने कहा कि आजादी के समय से ही लोगों का रूझान और मांग रहा है कि अयोध्या में राम मंदिर बने. साथ ही उन्होंने कहा कि सभी ऐतिहासिक और पुरातात्विक प्रमाण ये बताते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर ही था.

भागवत हनुमान चालिसा पाठ के साथ श्री हनुमान शक्ति जागरण समिति के एक लोक जागरूकता प्रोग्राम का उद्घाटन कर रहे थे. इस तरह का पाठ विदर्भ क्षेत्र के लगभग 20 शहरों में किया गया.

कश्मीरी पंडितों के सब्र का बांध टूटा

कश्मीर की आग अब दिल्ली तक पहुंच गई है। हुर्रियत के कंट्टरवादी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी द्वारा दिए गए बयान पर रविवार को दिल्ली में रह रहे विस्थापित कश्मीरी पंडित उग्र हो उठे। उन्होंने जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे कंट्टरपंथी नेता समर्थकों पर हमले का प्रयास किया।

हालांकि पुलिस ने इससे पहले ही दो दर्जन के करीब कश्मीरी पंडितों को हिरासत में ले लिया। जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। मालूम हो कि कश्मीर के मौजूदा हालात के विरोध में कंट्टरपंथी तथा विस्थापित कश्मीरी पंडितों का एक-एक वर्ग जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहा है। कंट्टरपंथी कश्मीर में हिंसा भरे माहौल के लिए सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं कश्मीरी पंडित शांति बहाली के लिए केंद्र के हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

शनिवार को संसद हमले में आरोपी रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रो. एसएआर गिलानी के जंतर-मंतर पर दिए गए भाषण से कश्मीरी पंडित बेहद आहत हैं। कश्मीरी पंडित समिति दिल्ली के अध्यक्ष राजेश कौल ने कहा कि सरकार की ढुलमुल नीति के कारण कश्मीर में हिंसा का माहौल पैदा हुआ है। गुरमीत सिंह ने कहा कि सियासी कारणों से कश्मीर समस्या पैदा की गई है। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम के मीडिया कोआर्डिनेटर मनोज खंडेलवाल ने कहा कि आतंकवाद समर्थक जम्मू-कश्मीर को अस्थिर करने में लगे हैं। कश्मीरी पंडित समर्थक मुस्लिम मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक जमीर अहमद ने शायरी के माध्यम से अपनी बात रखी।

हिसार में मंदिरों और दरगाहों पर चला पीला पंजा

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार शनिवार को पीडब्ल्यूडी के नेशनल हाईवे विंग ने चौधरीवास के पास सरकारी जमीन पर बने मंदिर को तोड़ दिया। ग्रामीणों ने एतराज भी जताया लेकिन भारी पुलिस फोर्स के सामने किसी की नहीं चली। मंदिर की शिव मूर्ति और हनुमान मूर्ति को निकालकर किनारे रख दिया गया।

राष्ट्रीय राजमार्ग 65 पर तोड़ा गया यह मंदिर चार से पांच साल पुराना है। तहसीलदार ओपी बिश्नोई के नेतृत्व में पुलिस और प्रशासन का अमला शाम करीब साढ़े चार बजे गांव पहुंचा। जब इन लोगों ने जेसीबी से मंदिर को गिराने की शुरूआत की तो भारी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए। अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई में नेशनल हाईवे विंग के एसडीओ फूलचंद मेहरा, जेई महेंद्र सिंह और अशोक मिश्रा शामिल थे।

वहीँ शहर से तीन किलोमीटर की दूर राधा स्वामी आश्रम के सामने नेशनल हाईवे पर सालों पुरानी बाबा ठंडा-गर्म पीर की दरगाह शनिवार को प्रशासन ने गिरा दी। नेशनल हाईवे विभाग ने पीला पंजा चला पूरे भवन को ढहा दिया। पीर दरगाह पर चली इस कार्रवाई को ड्यूटी मजिस्ट्रेट व हिसार के तहसीलदार ओपी बिश्नोई, नेशनल हाईवे विभाग के एसडीओ फूल चंद मेहरा व थाना प्रभारी रणबीर सिंह के नेतृत्व में अंजाम दिया।

प्रशासन की ओर से शनिवार को पीर दरगाह पर पीला पंजा चलाए जाने के दौरान किसी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुख्ता बंदोबस्त किए हुए थे तथा यहां भारी पुलिस बल लगाया गया था। प्रशासन ने शनिवार दोपहर को दरगाह पर बनी बाउंड्री व तीन कमरों को ढहाना शुरू कर दिया। करीब तीन घंटों कार्रवाई चली।

साथ ही, नेशनल हाईवे विंग के निशाने पर ऑटो मार्केट के पास स्थित मंदिर और जीजेयू के निकट स्थित मंदिर भी हैं। सूत्रों ने बताया कि ऑटो मार्केट के पास के मंदिर को भी शनिवार को ही तोड़ा जाना था, लेकिन बजरंग दल ने डीसी से मिलकर यह निर्णय फिलहाल स्थगित करवा दिया।

हिंदुओं की रावलपिंडी में सील किये गए मंदिर खोलने की मांग

पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं ने मांग की है कि रावलपिंडी का सील मंदिर खोला जाए. उन्होंने अधिकारियों से अपील की है कि वे रावलपिंडी का स्वामी नारायण मंदिर खोलें जो 1992 में बंद कर दिया गया था.

पाकिस्तान के हिंदू समुदाय की मांग है कि रावलपिंडी का यह मंदिर फिर से खोला जाए ताकि वे इसमें फिर से पूजा पाठ कर सकें. हिंदू सिख सोशल वेलफेयर परिषद के अध्यक्ष जगमोहन कुमार अरोड़ा ने कहा कि संघीय लोकपाल ने 1996 में आदेश दिया था कि इस मंदिर को खोला जाए.

संपत्ति खाली करवाने के लिए जिम्मेदार बोर्ड (ईटीपीबी) ने अब भी मंदिर को बिना कोई कारण बताए सील करके रखा है. मंदिर 1992 से बंद है. बताया जाता है कि इस मंदिर की देख रेख करने वाले दंपत्ति ने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया और उसके बाद इस मंदिर के हिस्सों को वो किराए पर देने लगे.

अरोड़ा ने आरोप लगाया है कि मंदिर की जमीन षडयंत्र के तहत बेचने की कोशिश की जा रही है और इसकी जगह पर एक प्लाजा बनाने की योजना है. अरोड़ा ने कहा कि हिंदू समुदाय ऐसा कतई नहीं होने देगा.

उन्होंने इटीपीबी से अपील की कि वो उन लोगों को पकड़े जो रावलपिंडी के ग्वालामंडी इलाके के मंदिर की जमीन को बेचने की कोशिश कर रहे हैं. अरोड़ा का कहना था कि इससे सिर्फ विभाग ही नहीं पूरे देश की छवि खराब होगी. अरोड़ा ने कहा, "पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी संविधान के रक्षक हैं उन्हें धर्मों की आजादी सुनिश्चित करनी चाहिए."

चर्च के पादरी टेरी जोंस द्वारा कुरआन शरीफ जलाने की घोषणा से रोष

अमेरिका के फलोरिडा में चर्च के पादरी टेरी जोंस द्वारा 11 सितंबर को पवित्र कुरआन शरीफ जलाने की घोषणा से मुस्लिम व बोहरा समाज में रोष व्याप्त है। रतलाम (मध्य प्रदेश) जिला वक्फ कमेटी और इमाम ग्रुप के तत्वावधान में रविवार को सर्वर्धम जुलूस निकाल कर टेरी जॉन घोषणा का जोरदार विरोध किया गया। जूलुस में हजारों लोग शामिल हुए।

जुलूस में मुस्लिम व बोहरा समाज के लोग टेरी जोंस और आंतकवाद विरोधी और इंसानियत संबंधी नारे लिखी तख्तियां लिए चल रहे थे। जिला पंचायत तिराहे पर राज्यपाल के नाम कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे जिला पंचायत सीईओ केआर जैन को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान युवाओं के एक ग्रुप ने अमेरिकी झंडे का प्रतीक भी फूंका और टेरी जोंस विरोधी लिखे नारों की तख्तियों को पीटकर आक्रोश व्यक्त किया।

शहीद चौक से वक्फ कमेटी और इमाम ग्रुप के बैनर तले निकाले गए जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। जैसे-जैसे जुलूस आगे बढ़ता गया वैसे-वैसे मुस्लिम धर्मावंलबी जुलूस में जुड़ते गए। शहीद चौक से शुरू हुआ जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होता हुआ जिला पंचायत चौराहा पहुंचा। यहां सभा का आयोजन किया गया, इसके बाद ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में राज्यपाल से संयुक्त राष्ट्र संघ को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने बाबत अनुरोध करने की मांग की गई है।

मुंबई में सुरक्षाकर्मी की हत्या कर मंदिर में डकैती

मुंबई में रविवार त़डके डकैतों ने एक जैन मंदिर से 300,000 रूपये से अधिक मूल्य के आभूषण लूट लिए और एक सुरक्षाकर्मी की हत्या कर दी तथा एक अन्य को घायल कर दिया।

पुलिस ने बताया कि यह घटना रविवार त़डके तकरीबन तीन बजे पश्चिमोत्तर मुंबई में बोरीवली के नंदीश्वर दिगंबर जैन मंदिर में हुई। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार सात हथियारबंद डकैत मंदिर में घुस गए और उन्होंने वहां तैनात दो सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर दिया और मूर्तियों के गहने और जेवरात लूट ले गए। डकैतों ने 55 वर्षीय सुरक्षाकर्मी देवी लाल की हत्या कर दी। एक अन्य सुरक्षाकर्मी 30 साल के राम प्रसाद जोशी को नाजुक हालत में भगवती अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने डकैतों को पक़डने के लिए मुहिम शुरू कर दी है। कहा जा रहा है कि बदमाशों ने काली कमीजे और गहरे रंग की पतलून पहन रखी थी।

अनुच्छेद 370 को समाप्त किया जाए : बिट्टा

केंद्र और राज्य सरकार से कश्मीर के सिखों की सुरक्षा करने तथा संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की मांग की गई है।

अखिल भारतीय आतंकवाद निरोधक मोर्चे के प्रमुख मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने कहा है कि यह पहला मौका नहीं है, इससे पहले कश्मीरी पंडितों और अन्य हिंदुओं के साथ क्या हुआ यह जगजाहिर है।

अब वहां सिखों की सुरक्षा का सवाल है जिस पर केंद्र तथा राज्य सरकारों को गंभीरता पूर्वक विचार करना होगा।

उन्होंने कहा कि अब सरकारें वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति से बचे। अनुच्छेद 370 को समाप्त करने का यही सही वक्त है। इस समस्या के समाधान के लिए सूबे को फौज के हवाले करना बेहतर है। यह आईएसआई की बड़ी सोची समझी साजिश है जो धीरे-धीरे वहां से प्रत्येक समुदाय के उन लोगों को हटाने पर लगी हुई है जो अलगाववाद का विरोध करते हैं।

इस मुद्दे पर अकाली दल की वरिष्ठ नेता बीवी जागिर कौर ने कहा कि सबसे बड़ा मुद्दा कश्मीर में सिखों की सुरक्षा का है। जबरन धर्म परिवर्तन कराने की आतंकवादियों की कोशिशों का सिख माकूल जवाब देंगे। जैसा वहां हो रहा है वह दुखदायी है।

परमाणु करार की धारा 17 (ब) के लिये भाजपा और वामदल के एक सुर

परमाणु दायित्व विधेयक की राह में भाजपा और वाम दलों ने रविवार को तब ताजा अवरोध पैदा कर दिए जब उन्होंने कहा कि वे आपूर्तिकर्ता के दायित्व को कम करने की किसी भी कोशिश का विरोध करेंगे।

भाजपा और वाम दलों ने विधेयक के मसौदे में किये गये एक संशोधन पर आशंकाएं जताते हुए कहा है कि इसके जरिए गंभीर लापरवाही या खराब आपूर्ति करने के नतीजतन परमाणु हादसा होने की स्थिति में विदेशी कंपनियों के अधिकारों की रक्षा की जा रही है।

भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा कि हम इस बारे में बेहद स्पष्ट हैं कि (आपूर्तिकर्ता के दायित्व से संबंधित) धारा 17 (ब) को कमजोर नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि हमारी बात सुनी जाने की जरूरत है। कैबिनेट की ओर से मंजूर इस संशोधन के जरिए अगर इसे कमजोर किया जाता है तो भाजपा इसका विरोध करेगी और इस पर आपत्ति जताएगी।

वाम दलों ने साफ तौर पर कहा है कि वे असैन्य परमाणु दायित्व के मसौदे में इस तरह के बदलाव को मंजूर नहीं करेंगे।

भाकपा नेता डी राजा ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि वाम दल इन नये बदलावों से सहमत हो सकते हैं कि अगर जानबूझकर या इरादतन दुर्घटना होती है तभी ऑपरेटर आपूर्तिकर्ता से (क्षतिपूर्ति की) मांग कर खुद की मदद कर सकता है। हम इसे निष्पक्ष और वैध तर्क नहीं मानते।

केंद्रीय कैबिनेट ने शनिवार को जिन 18 सिफारिशों को मंजूर किया, उनमें से एक सिफारिश कहती है कि अगर किसी ऑपरेटर को आपूर्तिकर्ता से क्षतिपूर्ति का दावा करना है तो परमाणु संयंत्र में दुर्घटना इरादतन किये गये कत्य के नतीजतन होनी चाहिये।

बदलाव के बाद धारा 17 कहती है कि परमाणु हादसे की क्षतिपूर्ति का धारा छह के अनुरूप भुगतान करने के बाद परमाणु प्रतिष्ठान के ऑपरेटर के पास खुद की मदद का अधिकार होगा।

यह धारा कहती है कि ऐसा अधिकार तब होगा जब...
(अ) - इस तरह का अधिकार अनुबंध में लिखित रूप से व्यक्त हो और
(ब) - परमाणु हादसा प्रकट या छिपी हुई खामी, खराब मानकों वाली सामग्री की आपूर्ति, खराब उपकरण या खराब सेवाओं के चलते अथवा साम्रगी, उपकरण या सेवाओं के आपूर्तिकर्ता की गंभीर लापरवाही के चलते हुआ हो और
(स) - परमाणु हादसा नाभिकीय क्षति पहुंचाने के इरादे के साथ किसी व्यक्ति के चूक या गड़बड़ी करने के नतीजतन हुआ हो।

भाजपा और वाम दल महसूस करते हैं कि उपबंध (ब) और (स) में परमाणु हादसे के संबंध में इरादा शब्द के जिक्र से आपूर्तिकर्ता को उसकी जिम्मेदार से बच निकलने का रास्ता मिल सकता है क्योंकि इस तरह की किसी दुर्घटना में इरादा साबित करना मुश्किल होगा।

परमाणु क्षति असैन्य दायित्व विधेयक 2010 को इस बदलाव सहित 17 अन्य सिफारिशों के साथ लोकसभा में 25 अगस्त को पेश किया जाना है।

चार वाम दलों माकपा, भाकपा, फॉरवर्ड ब्लॉक और आरएसपी ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि सरकार ने जो प्रस्तावित संशोधन किए हैं, उनमें परमाणु उपकरणों के विदेशी आपूर्तिकर्ताओं और घरेलू निजी कंपनियों के हितों की रक्षा के मकसद से मूल विधेयक के प्रावधानों को और भी कमजोर किया गया है।

ये बदलाव खराब या कम मानक वाले उपकरण अथवा सामग्री देने के लिये आपूर्तिकर्ता को तब उत्तरदाई बनाते हैं जब यह साबित हो जाये कि उसने इस तरह की आपूर्ति परमाणु क्षति पहुंचाने के इरादे से की और इसी के नतीजतन हादसा हुआ। वक्तव्य कहता है कि इस संशोधन के तहत आपूर्तिकर्ता का दायित्व तय करना असंभव हो गया है।

वाम दलों की दलील है कि हालांकि, संसद की स्थायी समिति ने तो साफ तौर पर सिफारिश की थी कि परमाणु प्रतिष्ठान में कोई निजी ऑपरेटर नहीं होगा, लेकिन सरकार ने जो संशोधन किए हैं उनके मुताबिक निजी कंपनियां, जब कभी उन्हें अनुमति मिले, व्यापक राज सहायता के साथ परमाणु उर्जा में ऑपरेटर बन सकेंगी।

वाम दलों का आरोप है कि यह साफ है कि यह सब विदेशी परमाणु आपूर्तिकर्ताओं और घरेलू निगमित खेमों के दबाव में किया गया है। कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने बीते चार से पांच महीने में खुले नजरिए का परिचय दिया है।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, यथासंभव व्यापक आम सहमति निर्मित करने की सरकार की कोशिश के तहत सभी राजनीतिक दलों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया गया है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि जिस मसौदे पर सहमति बनी थी उससे कुछ भटकाव हुआ है। अब जो भाषा प्रयोग की जा रही है उसमें आपूर्तिकर्ता के दायित्व को काफी कुछ कमजोर किया जा रहा है।

यह पूछने पर कि क्या भाजपा अपने पूर्व के रूख में बदलाव करेगी तो जेटली ने कहा कि सभी तथ्यों को देखने के बाद पार्टी निर्णय करेगी। पहले पार्टी ने विधेयक के समर्थन का रूख अपनाया था।

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस बदलाव के लिए सरकारी की ओर से किसी ने भी मुख्य विपक्षी पार्टी को जानकारी नहीं दी है। महत्वपूर्ण रूप से, न तो मूल विधेयक और न ही इस पर गौर करने वाली स्थाई संसदीय समिति की सिफारिश में ऐसे किसी प्रस्ताव का जिक्र था।

सिर्फ इसी सप्ताह की शुरुआत में सरकार ने ऐसा किया जब धारा 17 के उपबंध (अ) और (ब) के बीच और शब्द के इस्तेमाल को लेकर विवाद पैदा हुआ। असल में भाजपा और वाम दलों ने कहा था कि और शब्द के इस्तेमाल से परमाणु हादसा होने की स्थिति में आपूर्तिकर्ता का दायित्व कम हो जाता है। इसके बाद सरकार ने और शब्द को निकाल दिया लेकिन धारा 17 में शब्द इरादे (इन्टेन्ट) को शामिल कर दिया।

खसरे के टीके और विटामिन ए की बूंदें दिए से हुई चार बच्चों की मौत

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बाहरी छोर पर मोहनलालगंज पुलिस थाना क्षेत्र में खसरे के टीके और विटामिन ए की बूंदें दिए जाने के बाद शनिवार को हुई चार बच्चों की मौत के मामले में आज स्वास्थ्य विभाग ने अभियुक्तों के नाम का उल्लेख किए बिना एक प्राथमिकी दर्ज करा दी है.


स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खसरे के टीके से चार बच्चों की मौत के मामले में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर निदेशक एसए रिजवी ने मोहनलालगंज थाने में आज एक प्राथमिकी दर्ज करायी है, मगर उसमें किसी के नाम का उल्लेख नहीं है.

मोहनलालगंज थाने के मनवा
, रामपुर और खेरा गांव में कल सरकारी डाक्टरों की एक टीम द्वारा खसरे के टीके लगाए जाने और हेपेटाइटिस बी के टीकाकरण तथा विटामिन ए की दवा पिलाए जाने के थोड़ी ही देर बाद चार बच्चों की मौत हो गयी थी.

सरकार ने उस हादसे के बाद एक डॉक्टर सहित स्वास्थ्य विभाग के पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था और मामले की मजिस्ट्रेटी जांच करायी जा रही है. केन्द्र सरकार की एक टीम ने भी घटना की जानकारी के लिए आज चारों गांवों का दौरा किया.

शत्रुघ्न सिन्हा ने नरेन्द्र मोदी और वरुण गांधी से बिहार में चुनाव प्रचार की मांग की

बिहार विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी और वरुण गांधी प्रचार करेंगे या नहीं, इस सवाल पर बीजेपी नेतृत्व खुलकर कुछ बोल नहीं पा रहा है। दूसरी तरफ, पार्टी के कई दिग्गज इन दोनों नेताओं से चुनाव प्रचार करवाने की मांग कर आलाकमान के सामने आए दिन मुसीबत खड़ी कर रहे हैं। इस कड़ी में बिहार के सांसद और ऐक्टर शत्रुघ्न सिन्हा का नाम भी जुड़ गया है। सिन्हा ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और सांसद वरुण गांधी को बिहार विधानसभा के लिए चुनाव प्रचार में शामिल किए जाने की वकालत की है।

पटना में पत्रकारों से बात करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि चुनाव में प्रचार करने के लिए कौन आए और कौन नहीं आए यह तो पार्टी के बड़े नेताओं को तय करना है, लेकिन मेरी निजी राय है कि बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मोदी और वरुण, दोनों को आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्य के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की यह अपेक्षा है कि प्रचार के दौरान उनके आने से पार्टी को फायदा होगा। इस कारण उनको चुनाव प्रचार में बुलाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि इसके पहले भी शॉटगन के नाम से मशहूर सांसद ने इन दोनों नेताओं को प्रचार में शामिल करने की बात कही थी। गौरतलब है कि बिहार के कई मंत्री भी कई मौकों पर खुले तौर पर दोनों नेताओं को चुनाव प्रचार के दौरान बिहार आने की आवश्यकता जताई है।

आयोग के हवाले हो सासंदो की वेतन वृद्धि - आडवाणी

अमूमन सभी राजनीतिक दल के सांसदों का दबाव देखते हुए केंद्र सरकार भले ही इस बार वेतन बढ़ोतरी का फैसला संसदीय समिति की सलाह पर कर रही हो, लेकिन भविष्य में खुद को इस विवाद से दूर रखने की कवायद भी शीर्ष स्तर पर शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष और प्रमुख विपक्षी दल इस बात पर सहमत नजर आ रहे हैं कि आगे से सांसदों के वेतन-भत्ते बढ़ाने का फैसला कोई आयोग या अधिकारप्राप्त समूह करे तो बेहतर होगा। भारतीय जनता पार्टी की ओर से खुद शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी ने इस तरह की पहल की है।

सूत्रों के मुताबिक आडवाणी ने गृह मंत्री पी चिदंबरम से बातचीत के दौरान अपने इस मत से अवगत करा दिया था कि भविष्य में वेतन बढ़ाने का फैसला एक आयोग बनाकर उसके सुपुर्द कर दिया जाए, जिसे कानूनी अधिकार हासिल हो। उन्होंने अपनी राय से लोकसभा में सदन के नेता और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को अवगत कराया है। भाजपा नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने भी इसी तरह का मत जाहिर करते हुए स्पष्ट किया है कि सांसदों को आम कर्मचारियों की तरह अपने वेतन के लिए हो-हल्ला मचाना ठीक नहीं है। लिहाजा बेहतर होगा कि इस प्रक्रिया को सूचकांक से जोड़ दिया जाए।

वहीं कांग्रेस की ओर से केंद्रीय मंत्रिमंडल में कई मंत्री भी खुद से वेतन बढ़ाने का फैसला करने की मुखालफत कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, पी चिदंबरम समेत कुछ मंत्री इस बात की पैरवी कर रहे हैं कि सांसदों के वेतन के बारे में खुद ही कोई फैसला करना ठीक नहीं है। कैबिनेट में मतभेद के चलते ही एक बैठक में वेतन बढ़ोतरी का फैसला नहीं हो पाया था। सूत्रों का कहना है कि सरकार के भीतर इस बात पर मंथन हो रहा है कि कोई ऐसा रास्ता तलाशा जाए जिससे खुद को तोहमत से बचाया जा सके। सूत्रों के मुताबिक वेतन बढ़ाने संबंधी विधेयक संसद में पेश करते समय सरकार भविष्य में इस तरह के फैसले की प्रक्रिया के बारे में भी ठोस फैसले की घोषणा कर सकती है।

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