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डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन पर फीस माफ़


डिजिटल और कार्ड से भुगतान को बढ़ावा देने के लिए वित्त् मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) से जनता के हित को ध्यान में रखते हुए लेन-देन के लिए फीस चार्ज नहीं करने को कहा है 

नकदी के बजाय कार्ड और डिजिटल साधनों से भुगतान को बढ़ावा देने के केंद्र सरकार के उद्देश्य हेतु भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 1000 रूपये तक के तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस), एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) और असंरचित पूरक सेवा डाटा (यूएसएसडी) से लेन-देन को तर्कसंगत बनाते हुए 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2017 तक चार्जेज में छूट दी है। भारतीय रिजर्व बैंक ने 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2017 तक डेबिट कार्ड से 2000 रूपये तक के लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को भी तर्कसंगत बनाया है।

इससे आगे बढ़ते हुए डिजिटल और कार्ड से भुगतान को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस), वित्त मंत्रालय ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को जनता के हित में तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस) और एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) से भुगतान करने पर चार्ज नहीं लेने को कहा है, साथ ही नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) के जरिए 1000 रूपये से ज्यादा के भुगतान पर भी सिर्फ सेवा कर ही लेने को कहा है। इसके साथ असंरचित पूरक सेवा डाटा (यूएसएसडी) के जरिए 1000 रूपये से ज्यादा के भुगतान पर भी पचास पैसे की छूट देने को कहा है।

यह 31.03.2017 तक के सभी लेनदेन के लिए लागू होगा।

रेल में RAC सीटों की संख्या बढ़ाई गई ताकि यात्री अधिक संख्या में बैठ सकें


रेल मंत्रालय ने विभिन्न श्रेणियों के गैर - एलएचबी डिब्बों में सीट रद्द होने पर आरक्षण (आरएसी) के रूप में निर्धारित सीटों की संख्या में संशोधन करने का फैसला किया है। इस कदम से रेलों में अधिक संख्या में यात्रियों को यात्रा करने में मदद मिलेगी : 

           
 श्रेणी


मौजूदा
संशोधित
आरएसी यात्रियों के लिए निर्धारित बर्थ की संख्या
बैठने की सुविधा कराए गए आरएसी यात्रियों की संख्या
आरएसी यात्रियों को उपलब्ध करायी गई अतिरिक्त  सीटों की संख्या
बैठे की जगह उपलब्ध कराए जाने वाले अतिरिक्त आरएसी यात्रियों की संख्या
आरएसी यात्रियों के लिए निर्धारित सीटों की कुल संख्या
कंफर्म सीट उपलब्ध कराए जाने वाले  आरएसी यात्रियों की कुल संख्या
स्लीपर (एसएल)

5 साइड  लोअर बर्थ
10
साइड लोअर बर्थ
4
7 (साइड लोअर)
14
3एसी

साइड लोअर बर्थ
4
साइड लोअर बर्थ
4
4 (साइड लोअर)
8
2एसी

लोअर बर्थ (केबिन में)
4
साइड लोअर बर्थ
2
3 (साइड लोअर)
6

बढ़ी हुई आरएसी सीटें उन रेल गाड़ियों में उपलब्ध होंगी जिनमें 16 जनवरी, 2017 से बुकिंग शुरू की जायेंगी।

नोटबंदी : किसानों को फसल ऋण चुकाने हेतु 60 दिन की ग्रेस अवधि मिली


विनिर्दिष्ट बैंक नोट (एसबीएन) के हाल में विमुद्रीकरण के बाद सरकार निर्धारित समय सीमा के अधीन ऋण बकाया के भुगतान में किसानों द्वारा सामना की जा रही बाधाओं से अवगत है। अपने ऋण बकाया के भुगतान के लिए किसानों द्वारा कुछ अधिक समय की आवश्यगकता को देखते हुए सरकार ने दिनांक 21 नवंबर, 2016 के आरबीआई के परिपत्र के आधार पर ऐसे किसानों को 60 दिन की ग्रेस अवधि देने का निर्णय लिया है जिनका फसल ऋण 1 नवंबर, 2016 और 31 दिसंबर, 2016 के बीच देय है और यदि किसान भुगतान की तारीख से 60 दिनों के भीतर इसे चुका देते हैं तो वे वर्ष 2016-17 हेतु शीघ्र अदायगी प्रोत्साहन हेतु पात्र होंगे।

ग्रामीण क्षेत्र और कृषक समुदाय के विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार बुनियादी स्तमर पर 7 प्रतिशत प्रतिवर्ष की कम दरों पर फसल ऋण देती है। नियत तारीख के अंदर ऋणों के शीघ्र भुगतान तथा एक वर्ष की अधिकतम अवधि के लिए किसानों को 3 प्रतिशत प्रतिवर्ष का प्रोत्सााहन दिया जाता है। शीघ्र भुगतान करने वाले किसान 4 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लघु आवधिक ऋण प्राप्तव कर सकते हैं। तथापि यह शीघ्र अदायगी प्रोत्साशहन उन किसानों के लिए लागू नहीं है जो ऐसे ऋणों को प्राप्तस करने के एक वर्ष बाद भुगतान करते हैं।


अब कांट्रेक्ट लेबर को भी मिल सकेगा ईपीएफ का लाभ


ईपीएफओ सरकारी विभागों में ठेका श्रमिकों को कवर करने के लिए कदम उठाता है 

जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 15 जनवरी, 2017 कर दिया गया है 

केंद्रीय न्यासी बोर्ड की एक उप-समिति, ईपीएफ की 7 नवंबर, 2016 को बैठक हुई। समिति को पता चला कि ठेका श्रमिकों की कवरेज 89.25 लाख से बढ़कर 1.02 करोड़ हो गई है। देश में बड़ी संख्या में ठेका श्रमिक अभी भी पीएफ लाभ से वंचित है। इसका कारण यह है कि केन्द्र सरकार के अनेक विभाग/संगठन ईपीएफ और एमपी एक्‍ट, 1952 के दायरे में नहीं आते। सभी कामगारों के मूल अधिकार के रूप में सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे सहित ऐसी सभी श्रेणियों को बाहर रखे जाने के कार्य को रद्द करने के लिए भारत सरकार से सिफारिश करने का निर्णय लिया गया। 

समिति ने यह भी कहा कि ठेका मजदूरों के खातों का हस्‍तांतरण अब यूनिवर्सल खाता संख्या (यूएएन) के माध्‍यम से संभव है। इसलिए ठेका श्रमिकों को आधार यूएएन का पूरा उपयोग करने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाए। समिति ने सरकार से यह भी सिफारिश की है कि ईपीएफओ के अधीन मौजूदा वेतन सीमा को 15,000 रूपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000/- रूपये प्रति माह कर दी जाए।

अपर केन्द्रीय भविष्‍य निधि आयुक्‍तों की बैठक की जोनल समीक्षा 26 नवंबर 2016 को हुई, जिसमें सभी संभागों के अपर केन्द्रीय भविष्‍य निधि आयुक्‍तों को यह सलाह दी गई कि सभी ठेका श्रमिकों की कवरेज सुनिश्चित करने के लिए राज्‍य सरकारों से सम्‍पर्क करें, ताकि राज्‍यों के सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, राज्‍य निगमों, राज्‍य सरकार के विभागों और राज्‍यों के सार्वजनिक निर्माण विभागों से यह कार्य करने के लिए कहा जा सके। कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 के तहत पेंशन धारकों द्वारा जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की आखिरी तिथि बढ़ाकर 15 जनवरी, 2017 कर दी गई है। ईपीएफओ के लगभग 54 लाख पेंशनधारक है। 

कार्यकारी समिति, सीबीटी, ईपीएफ 24 नवंबर 2016 का पुनर्गठन किया गया था। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव इस कार्यकारी समिति के अध्यक्ष हैं। सीबीटी, ईपीएफ की कार्यकारी समिति की 87वीं बैठक, 12 दिसंबर, 2016 को आयोजित करने का कार्यक्रम है।

ईपीएफओ ने माह के दौरान 18,501 शिकायतों का निपटारा किया और 3153 मामले लंबित है। लंबित शिकायतों में से 82 प्रतिशत केवल 07 दिन पहले ही प्राप्‍त हुई हैं। 

आयकर अधिनियम की धारा 44 AD के तहत अब 6% ही लाभ मिलेगा


सरकार का बैंकिंग चैनल/डिजिटल साधनों से प्राप्‍त राशि और प्राप्तियों के संदर्भ में आयकर अधिनियम की धारा 44एडी के तहत मानित मुनाफे को कम करने का फैसला 

आयकर अधिनिमय,1961(अधिनियम) की धारा 44एडी के तहत कुछ करदाताओं (उदाहरण के लिए व्‍यक्तिगत ,एचयूएफ या एलएलपी को छोड़कर किसी साझेदारी फर्म) जिनका करोबार दो करोड़ रुपये या इसे कम है के लिए कुल कारोबार पर मानित मुनाफे का प्रावधान 8 प्रतिशत है।

सरकार के कम नकदी व्‍यवस्‍था की ओर बढ़ने के मिशन को प्राप्‍त करने के लिए छोटे व्‍यापारियों को प्रोत्‍साहित करने /लगातार डिजिटल साधनों से भुगतान स्‍वीकार करने के लिए अधिनियम की धारा 44एडी के तहत लगने वाली मौजूदा मानित लाभ की दर 8 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। यह दर वित्‍तीय वर्ष 2016-17 के दौरान बैंकिंग चैनल/डिजिटल साधनों के माध्‍यम से प्राप्‍त कुल कारोबार या सकल प्राप्तियों के संदर्भ में ही लागू होगी।

हालांकि नकद प्राप्तियों के मामले में कुल कारोबार या सकल प्राप्तियों के संदर्भ में अधिनियम की धारा 44 एडी के तहत मानित मुनाफे की मौजूदा दर 8 प्रतिशत ही जारी रहेगी।

इस संदर्भ में विधायी संशोधन 2017 के वित्‍त विधेयक में लाया जाएगा।

आयकर अधिनियम, 1961 के तहत राजनीतिक दलों की स्थिति का स्‍पष्‍टीकरण

 कुछ समाचार पत्रों में छपी रिपोर्ट से इस तरह के गलत संकेत मिलते हैं कि पुराने करेंसी नोटों को जमा करने के परिप्रेक्ष्‍य में चुनाव आयोग में पंजीकृत राजनीतिक दलों के आयकर रिटर्न की कोई जांच नहीं हो सकती। ऐसा लगता है कि इस तरह के निष्‍कर्ष इस तथ्‍य की वजह से निकाले गए हैं कि राजनीतिक दलों की आय को खंड-13ए के तहत आयकर से छूट प्राप्‍त है।

इस परिप्रेक्ष्‍य में निम्‍नलिखित स्‍पष्‍टीकरणों को ध्‍यान में रखे जाने की जरूत है –

1. आयकर से छूट कुछ खास शर्तों के तहत केवल पंजीकृत राजनीतिक दलों को दी जाती है। जिनका जिक्र खंड-13ए में है। इसमें बहीखातों का रख-रखाव तथा अन्‍य दस्‍तावेज शामिल हैं, जिससे निर्धारण अधिकारी उनकी आय को घटाने में समर्थ हो सकें।

2. 20,000 रुपये से अधिक के प्रत्‍येक स्‍वैच्छिक योगदान के संबंध में राजनीतिक दल को ऐसा योगदान देने वाले व्‍यक्ति के नाम एवं पते समेत ऐसे योगदानों के रिकॉर्ड का रख-रखाव करना होगा।

3. ऐसे प्रत्‍येक राजनीतिक दल के खातों का एक चार्टर्ड एकाउंटेंड द्वारा लेखा परीक्षण किया जाएगा।

4. राजनीतिक दल को एक अनुशंसित समय सीमा के भीतर ऐसे प्राप्‍त अनुदानों के बारे में चुनाव आयोग को एक रिपोर्ट प्रस्‍तुत करनी होगी।

आयकर अधिनियम में राजनीतिक दलों के खातों की जांच करने के लिए पर्याप्‍त प्रावधान हैं तथा ऐसे राजनीतिक दल रिटर्न भरने समेत आयकर के अन्‍य प्रावधानों के भी विषय हैं।

केंद्र ने पशु क्रूरता निवारण नियम, 2016 की अधिसूचना की


सरकार ने पशु क्रूरता निवारण (पालतू पशु की दुकान) नियम, 2016 की अधिसूचना की घोषणा कर दी है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री अनिल माधव दवे ने मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह पालतू पशुओं की दुकान (पैट शॉप्स) को विनियमित करने के लिए है। श्री दवे ने कहा कि यह एक ऐसा क्षेत्र था जो कि अनियंत्रित था। मंत्री महोदय ने यह भी कहा कि सभी हितधारकों और राज्यों से सुझाव भी मांगे जाएंगे। 

मंत्रालय सार्वजनिक सूचना के लिए भारतीय राजपत्र में प्रस्तावित मसौदा नियम अधिसूचित करेगी। अधिसूचना मंत्रालय की वेबसाइट पर होगी। कोई भी व्यक्ति इन नियमों के प्रकाशित होने के बाद 30 तीनों के भीतर संबंधित समौदे पर लिखित रूप से विचार के लिए उप सचिव, पशु कल्याण प्रभाग, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली को अपने सुझाव भेजे सकता है। 

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पास जानवरों पर अनावश्यक दर्द या पीड़ा रोकने के लिए और पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम के लिए पशु क्रूरता निवारण (पीसीए) अधिनियम, 1960 लागू करने का अधिकार है। 

उद्देश्य: 

इन नियमों का उद्देश्य पालतू पशुओं की दुकानों को जवाबदेह बनाना और इन दुकानों में पशुओं के प्रति क्रूरता को रोकना है। प्रस्तावित नियम इस प्रकार है: 

(i) प्रत्येक पालतू पशु दुकान के मालिक को अपने राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के पशु कल्याण बोर्ड में खुद को पंजीकृत कराना होगा। 

(ii) राज्य बोर्ड, एक वेटरिनेरी प्रैक्टिशनर और पशु क्रूरता निवारण सोसायटी के एक प्रतिनिधि द्वारा निरीक्षण के बाद ही दुकान पंजीकृत हो पाएगी। 

(iii) इस नियम में दुकान में पक्षियों, बिल्लियों, कुत्तों, खरगोश, गिनी पिग, हम्सटर, चूहों के लिए स्थान को परिभाषित किया गया है। 

(iv) इसके अलावा इसमें बुनियादी सुविधाओं, बिजली बैक-अप, सामान्य देखभाल, पशु चिकित्सा देखभाल और पशुओं के रखरखाव के लिए अन्य आवश्यकताओं को भी परिभाषित किया गया है। 

(v) पशुओं की दुकान में उनकी बिक्री, उनकी मृत्य, उनके बीमार होने का पूरा रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य बनाया गया है। 

(vi) प्रत्येक पालतू पशु की दुकान के मालिक को पिछले वर्ष के दौरान पशुओं की खरीद, बिक्री व अन्य महत्वपूर्ण जानकारी का ब्योरा और राज्य बोर्ड द्वारा पूछी गई अहम जानकारी को पूरी सालाना रिपोर्ट के रूप में जमा कराना होगा। 

नियमों का उल्लंघन: 

प्रस्तावित नियमों के पूरा न होने पर दुकान का पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही पशुओं की जब्त कर पशु कल्याण संगठन या फिर बोर्ड से मान्यता प्राप्त रेस्क्यू सेंटर को सौंप दिया जाएगा।

रिपोर्ट कार्ड : 1 अप्रैल 2017 से लागू हो जाएगा #GST


जीएसटी को लागू करने पर रिपोर्ट कार्ड, भारत सरकार ने जीएसटी को लागू करने की दिशा में अब तक कुछ भी समय नहीं गंवाया है 

जीएसटी परिषद में विचार-विमर्श अत्यंत सौहार्दपूर्ण रहे हैं और अब तक सभी निर्णय आम सहमति से लिए गए हैं 

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिए संविधान संशोधन विधेयक पर आम सहमति तक पहुंचने में लगे समय की तुलना में संबंधित विधेयक के पारित होने के बाद के घटनाक्रमों से यह पता चलता है कि भारत सरकार और राज्यों ने जीएसटी को लागू करने के लिए समस्त आवश्यक कदम उठाने की दिशा में उल्लेखनीय काम किया है। नीचे पेश किए गए रिपोर्ट कार्ड से यह साफ पता चलता है कि भारत सरकार ने जीएसटी को लागू करने की दिशा में अब तक कुछ भी समय नहीं गंवाया है :

जीएसटी से जुड़े संविधान संशोधन अधिनियम पर 8 सितंबर, 2016 को राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के महज एक सप्ताह के भीतर कैबिनेट ने सचिवालय के साथ जीएसटी परिषद का सृजन कर दिया। संविधान के अनुच्छेद 279ए के तहत जीएसटी परिषद को जीएसटी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर केंद्र एवं राज्यों के समक्ष सिफारिशें पेश करने का अधिकार दे दिया गया है। किन-किन वस्तुओं एवं सेवाओं पर जीएसटी लगाया जा सकता है, किन-किन वस्तुओं एवं सेवाओं को जीएसटी से मुक्त रखा जा सकता है, कुल कारोबार की सीमा क्या हो, जिससे नीचे की वस्तुओं एवं सेवाओं को जीएसटी से मुक्त रखा जा सकता है और जीएसटी के बैंड के साथ न्यूनतम दरों सहित जीएसटी की दरें तय करना इन मुद्दों में शामिल हैं।

12 सितंबर, 2016 को जीएसटी परिषद की अधिसूचना जारी होने के बाद से लेकर अब तक परिषद की छह बैठकें नई दिल्ली में हो चुकी हैं। ये बैठकें 22-23 सितंबर 2016, 30 सितंबर, 18-19 अक्टूबर, 3-4 नवम्बर, 2-3 दिसंबर और 11 दिसंबर 2016 को आयोजित की गईं। इन बैठकों के दौरान अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गए हैं, जिससे 01 अप्रैल, 2017 से जीएसटी को लागू करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

जीएसटी परिषद की इन छह बैठकों में लिये गए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय निम्नलिखित हैं –

  • जीएसटी से छूट के लिए सीमा सामान्य राज्यों के लिए 20 लाख रुपये होगी (संविधान के अनुच्छेद 279ए में उल्लिखित विशेष श्रेणी वाले राज्यों के लिए सीमा 10 लाख रुपये होगी)
  • संरचना योजना से लाभ उठाने की सीमा 50 लाख रुपये होगी। सेवा प्रदाताओं को संरचना योजना के दायरे से बाहर रखा जाएगा।
  • जीएसटी को लागू करने के कारण राज्यों को राजस्व नुकसान की भरपाई 5 वर्षों तक करने हेतु राज्य के राजस्व के लिए आधार वर्ष 2015-16 होगा और 14 फीसदी की निश्चित वृद्धि दर इस पर लागू होगी।
  • जीएसटी के तहत वस्तुओं के लिए दरों के बैंड 5, 12, 18 एवं 28 फीसदी होंगे और इसके अलावा छूट प्राप्त वस्तुओं की एक श्रेणी होगी। यही नहीं, राज्यों को मुआवजे की अदायकी के लिए कुछ विशेष वस्तुओं जैसे की लक्जरी कारों, एरेटेड ड्रिंक, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर 28 फीसदी की दर के अलावा उपकर लगाया जाएगा।


जीएसटी परिषद में विचार-विमर्श अत्यंत सौहार्दपूर्ण रहे हैं और अब तक सभी निर्णय आम सहमति से लिए गए हैं। परिषद के सदस्य अत्यंत सकारात्मक नजरिये के साथ बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं और तय समय सीमा के मुताबिक जीएसटी को लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं। 

डिजिटल भुगतान की जागरूकता के लिए लगेगा #DigiDhanMela


डिजिटल भुगतान विकल्प के लोभों के बारे में जन जागरुकता जगाने के लिए इलेक्ट्रानिक्स तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में दो दिन(17-18 दिसंबर,2016) का डिजिधन मेला #DigiDhanMela आयोजित कर रहा है। इस मेले का लक्ष्य डिजिटल लेनदेन के लिए यूजर को डाउनलोडिंग, इंस्टॉलिंग और विभिन् डिजिटल भुगतान प्रणालियों की जानकारी देना है। इससे नागरिकों और व्यापारियों को डिजिधन बाजार के माध्यम से रियल टाइम डिजिटल लेनेदेन में सहयोग मिलेगा। 

डिजिधन मेले में बैंकों, दूरसंचार कंपनियों, मोबाइल वॉलेट आपरेटरों, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क कंपनियों , आधार सक्षम भुगतान प्रणाली(एईपीएस) वेंडरों ,डाक विभाग(विपणन एसोसियेशनों के माध्यम से)केंद्रीय भंडार जैसे कोआपरेटिव तथा सफल जैसे संगठित फल, सब्जी चेनों, मिल्क बूथों तथा कृषि उत्पाद बाजार समितियों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। 

मेले में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों को डिजिटल भुगतान के लिए विभिन्न विकल्पों की जानकारी दी जाएगी। वे विजिटरों को विभिन्न ऐप्प की डाउनलोडिंग , इंस्टॉलिंग तथा डिजिटल लेनदेन करने में सहायता देंगे । दो दिन के मेले में लोगों को बैंक खाता खोलने, आधार नामांकन कराने तथा वर्तमान खातों को एईपीएस खाता सक्षम बनाने में सहायता दी जाएगी। 

आधार नामांकन के इच्छुक नागरिकों से अपने साथ निम्नलिखित कागजात लाने का अनुरोध किया जाता हैः

नाम और फोटो के साथ पहचान पत्र

आवासीय पते का प्रमाण

जन्म तिथि का प्रमाण(पैन कार्ड, पासपोर्ट तथा जन्म प्रमाण पत्र) 

नागरिकों को ऐप्प सक्षम होने के लिए अपने बैंक खाते का विवरण रखना होगा। 

व्यापारियों को उनके खातों को डिजिटल सक्षम बनाने के लिए निम्नलिखित कागजात रखने होंगेः

कंपनी का प्रमाण

पैन कार्ड(मालिक और कंपनी का) 

केवाईसी(ड्राइविंग लाइसेंस ,पासपोर्ट,आधार कार्ड,मतदाता पहचान पत्र)-कोई एक

बैंक खाते का विवरण तथा आईएफएससी कोड

डिजिधन मेले के बाद राज्य तथा बैंक शाखा स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएंगे। इस मेले का लक्ष्य शहरी लोगों को आकर्षित करना है। मेले में वाई-फाई सुविधा उपलब्ध होगी ताकि लोग मोबाइल ऐप्प डाउनलोड और इंस्टॉल कर सकें।

नवंबर, 2016 में 135316.19 करोड़ रुपये मूल्‍य का निर्यात किया गया



वाणिज्यिक वस्‍तुओं का व्‍यापार:

निर्यात (इसमें पुनर्निर्यात भी शामिल है):

पिछले दो माह से निर्यात में दर्ज किया जा रहा सुधार का रुख नवंबर, 2016 के दौरान भी बरकरार रहा। नवंबर, 2016 के दौरान 20009.58 मिलियन अमेरिकी डॉलर (135316.19 करोड़ रुपये) मूल्‍य की वस्‍तुओं का निर्यात किया गया, जो नवंबर 2015 में हुए निर्यात के मुकाबले डॉलर के लिहाज से 2.29 फीसदी ज्‍यादा है और रुपये के लिहाज से भी 4.63 फीसदी ज्‍यादा है।

नवंबर 2016 में गैर-पेट्रोलियम निर्यात 17602.33 मिलियन अमेरिकी डॉलर का हुआ, जबकि नवंबर 2015 में इनका निर्यात 17232.25 मिलियन अमेरिकी डॉलर का हुआ था। इस तरह गैर-पेट्रोलियम निर्यात में इस दौरान 2.1 फीसदी की वृद्धि‍ दर्ज की गई।

विश्व व्यापार संगठन के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2016 के दौरान निर्यात में वृद्धि पिछले साल के समान महीने के मुकाबले संयुक्त राज्य अमेरिका (0.25 फीसदी) और जापान (9.81 फीसदी) में दर्ज की गई है। वहीं, सितंबर 2016 के दौरान निर्यात में कमी पिछले साल के समान महीने के मुकाबले चीन (-10.15 फीसदी) और यूरोपीय संघ (-0.57 फीसदी) में दर्ज की गई है।

आयात:

नवंबर, 2016 के दौरान 33018.45 मिलियन अमेरिकी डॉलर (223289.57 करोड़ रुपये) मूल्‍य की वस्‍तुओं का आयात किया गया, जो नवंबर 2015 में हुए आयात के मुकाबले डॉलर के लिहाज से 10.44 फीसदी ज्‍यादा है और रुपये के लिहाज से भी 12.96 फीसदी ज्‍यादा है।

कच्‍चे तेल एवं गैर-तेल का आयात:

नवंबर, 2016 के दौरान 6837.76 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्‍य के तेल का आयात किया गया, जो पिछले साल के समान महीने में हुए आयात के मुकाबले 5.89 फीसदी ज्‍यादा है। इसी तरह नवंबर, 2016 के दौरान 26180.69 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्‍य का गैर-तेल आयात होने का अनुमान है, जो पिछले साल के समान महीने में हुए आयात के मुकाबले 11.70 फीसदी ज्‍यादा है।
व्‍यापार संतुलन

वाणिज्यि‍क वस्‍तुएं : 

अप्रैल-नवंबर, 2016-17 के दौरान व्‍यापार घाटा 66178.82 मिलियन अमेरिकी डॉलर का रहने का अनुमान है, जो अप्रैल-नवंबर 2015-16 में दर्ज किए गए 88574.09 मिलियन अमेरिकी डॉलर के व्‍यापार घाटे से 25.28 फीसदी कम है।

राष्ट्रगानका अपमान करनेवालों को कारगिल में -50 डिग्री में छोड देना चाहिए :अभिजीत


गायक अभिजीत भट्टाचार्य ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरल के दौरान फिल्म शुरू होने से पहले बजे राष्ट्रगान के लिए खड़े नहीं होनेवालों के विरुद्ध काफी कड़ी सजा की बात कही है।

अभिजीत ने पीटीआई के एक समाचारपत्र को रीट्वीट करते हुए उन ६ लोगों को कड़ी सजा देने की मांग की है, जो फिल्म से पहले बजने वाले राष्ट्रगान के लिए खड़े नहीं हुए थे। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, ‘उन्हें कारगिल में -५० डिग्री के तापमान के बीच छोड़ देना चाहिए। जुल्म की शुरुआत होने दीजिए। #जय हिंद।’

बिना बुर्का अपनी फोटो ट्वीट करनेवाली मुस्लिम लड़की गिरफ्तार


सऊदी अरब की राजधानी रियाद में सोमवार को एक महिला को बुर्का पहने बिना फोटो ट्वीट करने के कारण बन्दी बनाया गया ।

पुलिस प्रवक्ता फवाज अल मैमन ने महिला का नाम घोषित नहीं किया परंतु कुछ वेबसाइट्स ने महिला का नाम मलक अल-शहरी बताया है। महिला ने बीते महीने बुर्के के बिना अपनी फोटो पोस्ट की थी जिसके बाद सोशल मीडिया पर उसकी काफी आलोचना हो रही थी।

मैमन ने एक बयान जारी कर बताया, ‘महिला ने रियाद के पॉप्युलर कैफे के बाहर खड़े होकर यह तस्वीर खिंचवाई है। तस्वीर में महिला ने सऊदी सोसायटी के नियमों के अनुसार इस्लामिक हेडस्कार्फ नहीं पहना है। महिला की उम्र २० से ३० के बीच बताई जा रही है। महिला के किसी गैर मर्द से संबंध भी बताए जा रहे हैं।’ महिला को फिलहाल जेल ले जाया गया है।

रियाद पुलिस ने बताया कि, महिला ने उन नियमों का उल्लंघन किया है जो सऊदी में लागू हैं। बता दें कि सऊदी में महिलाओं के ऊपर कई प्रतिबंध है। सऊदी अकेला ऐसा देश है जहां महिलाएं ड्राइविंग तक नहीं कर सकती। सऊदी में महिलाओं को घर से निकलने पर सर से पैर तक खुद को ढकना जरूरी है।

बैंगलुरु में 60 देशों के सैंकड़ों लोगों ने ‘हिन्दू धर्म’ का स्वीकार किया


हाल ही में यहां के नित्यानंद मठ में संपन्न एक धार्मिक विधि के समय विश्‍वभर के ६० देशों के सहस्रों लोगोंद्वारा हिन्दू धर्म का स्वीकार किया गया।

विविध धार्मिक विधि, जीवनपद्धति एवं पूजा-अर्चना कर इन विदेशी नागरिकों के हिन्दू नाम रखे गए। किसी को यदि हिन्दू होना हो, तो पारंपरिक शैवपंथीय मठों में लाखों वर्षों से समय दीक्षा, निर्वाण दीक्षा एवं आचार्य अभिषेक इन ४ दीक्षाओं को अपनाया जाता है।

विगत १० वर्षों में बंगळुरू के स्वामी नित्यानंद मठ में १० लाख से भी अधिक विदेश नागरिकों ने वैध रूप से हिन्दू धर्म में प्रवेश किया है। नित्यानंत मठ में हालही में संपन्न २१ दिवसीय ‘सदाशिवहोम’ नामक धार्मिक कार्यक्रम में सहस्रों विदेशी लोगों को हिन्दू धर्म की दीक्षा दी गई। इस धार्मिक कार्यक्रम में सम्मिलित होने के कारण लाखों लोगों के दुख, रोग तथा अन्य कष्ट दूर होकर अब वे आनंद के साथ अपना जीवन व्यतित कर रहे हैं, ऐसा मठ की ओर से बताया गया।

स्वामी परमहंस नित्यानंद मदुराई मठ के प्रमुख हैं। वे महानिर्वाणी आखाडे के महामंडलेश्‍वर भी हैं, साथ ही वे नित्यानंद ज्ञानपीठ के संस्थापक हैं। इस में आंतरराष्ट्रीय संस्था में योग एवं ध्यान का अध्ययन किया जाता है।

विदेशों में स्थित चर्चों का निर्मनुष्य होना तथा वहां के सहस्रों ईसाईयों का हिन्दू बनना, इस से ‘हिन्दू धर्म’ का आध्यात्मिक महत्त्व ध्यान में आता है ! जिस दिन भारत के पाखंडी पुरोगामियों के ध्यान में यह आएगा, वह सुदिन होगा !

जनजातीय समुदाय की आजीविका के लिए राष्‍ट्रीय संसाधन केंद्र की शुरूआत


केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय, संयुक्‍त राष्‍ट्र विकास कार्यक्रम और राष्‍ट्रीय जनजातीय वित्‍त एवं विकास निगम के सहयोग से जनजातीय समुदाय की आजीविका के लिए राष्‍ट्रीय संसाधन केंद्र की शुरूआत करने जा रहा है। ‘वन जीवन’ नामक इस केंद्र की शुरूआत केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम आगामी 22 दिसंबर को भुवनेश्‍वर में करेंगे। इस अवसर पर केंद्र की वेबसाइट और ई-ज्ञान मंच की भी शुरूआत की जाएगी।

अगले दिन जनजातीय क्षेत्रों में जनजातीय समुदाय के कौशल और उद्यमियता विकास पर एक राष्‍ट्रीय कार्यशाला का आयोजन होगा। इस कार्यशाला में वन आधारित उपजों के बेहतर उत्‍पादन के तरीकों और उनके विपणन पर भी चर्चा होगी। कार्यशाला में पूर्व केंद्रीय जनजातीय सचिव डॉ. ऋषिकेश पांडा और तत्‍कालीन योजना आयेाग के पूर्व सचिव डॉ एन सी सक्‍सेना समेत कई विशेषज्ञ और केंद्र तथा राज्‍य सरकारों के वरिष्‍ठ अधिकारी भाग लेंगे।

पहले चरण में ‘वन जीवन’ छह राज्‍यों के उन चुनिंदा जिलों के लिए कार्य करेगा जहां आदिवासी समुदाय का मानव विकास सूचकांक बहुत नीचे है। ये राज्‍य हैं- ओडिशा, असम, गुजरात, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान और तेलंगाना। दूसरे चरण में यह केंद्र अरूणाचल प्रदेश, छत्‍तीसगढ़, झारखंड, महाराष्‍ट्र, मेघालय और त्रिपुरा के लिए कार्य करेगा।

इस कार्यक्रम के तहत स्‍थानीय स्‍तर पर आदिवासी समुदाय के पास उपलब्‍ध कौशल और संसाधनों के आधार पर उनकी उद्यमिता विकास पर ध्‍यान केंद्रित किया जाएगा। उपरोक्‍त उद्देश्‍य के लिए विभिन्‍न सरकारी कार्यक्रमों के लिए आवंटित धनराशि के समुचित उपयोग के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। कुल मिलाकर यह राष्‍ट्रीय संसाधन केंद्र आदिवासियों के बीच उद्यमिता कौशल को बढ़ावा देने से संबंधित सभी पहलुओं पर ध्‍यान देगा जिससे जनजातीय समुदाय में उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा सके।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 366.64 लाख किसान कवर किये गये


प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 366.64 लाख (26.50 प्रतिशत) किसान कवर किये गये और इस दर के आधार पर 2016-17 में खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए 30 प्रतिशत का निर्धारित लक्ष्‍य पार होने की संभावना है 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) का देश में खरीफ 2016 से शुभारंभ हुआ और इसने पहले सीजन में ही बहुत प्रभावी प्रगति की है। आज की तारीख तक इस योजना के तहत 366.64 लाख किसान (26.50 प्रतिशत) आ चुके हैं और इस दर के आधार पर 2016-17 में खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए 30 प्रतिशत का निर्धारित लक्ष्‍य पार होने की संभावना है। 

इसके तहत कुल 388.62 लाख हेक्‍टेयर रकबा आया और 141339 करोड़ रूपये की राशि का बीमा हुआ। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को सरकार ने नई योजना के रूप में शुरू किया है, क्‍योंकि पहली मौजूदा बीमा योजनाएं किसानों की बीमा कवरेज की सभी अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पा रही थी।

खरीफ 2015, की तुलना में, इस सीजन के प्रदर्शन में किसानों की कवरेज के रूप में 18.50 प्रतिशत, रकबे की कवरेज के रूप में 15 प्रतिशत और बीमा राशि के रूप में 104 प्रतिशत का सुधार हुआ है। ऐसा गंभीर रूप से सूखा प्रभावित सीजनों के बावजूद हुआ, इसके तहत कवर किये गये किसानों की संख्‍या 309 लाख (22.33 प्रतिशत), कुल कवरेज रकबा 339 लाख हेक्टेयर और बीमित राशि रुपये 69,307 करोड़ रुपये थी। खरीफ 2016 के दौरान कार्य प्रदर्शन बेहतर रहा। हालांकि कुछ प्रारंभिक कठिनाईयां भी सामने आई। 

खरीफ 2015 की तुलना में खरीफ 2016 की उपलब्धियां विशेष रूप से महत्‍वपूर्ण हैं, क्‍योंकि खरीफ 2015 में अधिकांश राज्यों में ऋण लेने वाले किसानों के लिए बीमा का लाभ उठाने की अंतिम तिथि 30 सितंबर, 2016 निर्धारित की थी और फसल बीमा के तहत नामांकन में सूखे की लंबी अवधि के बाद बहुत बढ़ोतरी हुई, जबकि यह साल सामान्‍य मानसून का रहा और बीमा का लाभ उठाने वालों की संख्‍या कम रहीं। बीमा का लाभ उठाने की अंतिम तिथि को 31 जुलाई, 2016 से बढ़ाकर 10 अगस्त, 2016 कर दिया गया था। 

इसके अलावा, गैर-ऋणी किसानों की कवरेज के रूप में 6 गुना से भी अधिक की भारी बढ़ोतरी हुई है, जहां खरीफ 2015 में यह संख्‍या 14.88 लाख थी, वहीं खरीफ 2016 में बढ़कर 102.6 लाख हो गई। जो यह दर्शाती है कि इस योजना को गैर-ऋणी किसानों ने भी अच्‍छी तरह से अपनाया है। यह इसलिये संभव हुआ है, क्‍योंकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में यह प्रावधान है कि बीमित राशि वित्त के पैमाने के बराबर होनी चाहिए, जो यह दर्शाती है कि इसमें पहली योजनाओं की तुलना में किसानों के अधिक जोखिम को कवर किया गया है। 

सौरऊर्जा निगम ने शुरू की छत वाले सौर पैनलों की सबसे बडी परियोजना


एसईसीआई ने सरकारी क्षेत्र के लिए 1000 मेगावाट के छत पर लगने वाले सौर पीवी योजना शुरू की 

एसईसीआई जारी करेगा छत पर लगने वाली सबसे बडी सौर परियोजना की निविदा, छत पर लगने वाले सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र को बड़े स्तर पर बढ़ावा मिलने की उम्मीद 

वर्ष 2022 तक 40 गीगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना करने के भारत सरकार के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाते हुए भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों में ग्रिड से जुड़े छत पर लगने वाले सौर क्षमता को विकसित करने के लिए भारतीय सौर ऊर्जा निगम लिमिटेड (एसईसीआई) आज 1000 मेगावाट क्षमता की निविदा जारी करेगा। एसईसीआई द्वारा छत पर स्थापित की जाने वाली यह सबसे बडी सौर परियोजना है और छत पर लगने वाले सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में इससे बड़े स्तर पर बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

दुनियाभर की बड़ी परियोजनाओं में से एक 1000 मेगावाट की यह निविदा एक ऐसा कदम है, जो देसभर में छत पर लगने वाले सौर क्षमता पैनलों को तेज़ी से आगे बढ़ाएगा और रिहायशी/संस्थानिक एवं सामाजिक क्षेत्र में ईमारतों आदि पर लगाए जाने वाले एसईसीआई की 500 मेगावाट क्षमता वाली पिछली निविदा को पीछे छोड़कर उससे कई कदम आगे निकल जाएगा।

एसईसीआई छत पर लगने वाले सौर ऊर्जा संयंत्रों के क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र का प्रमुख उपक्रम है। यह विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत 54 मेगावट क्षमता की कई छत पर लगने वाली सौर परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है।

1000 मेगावाट के इस आगामी निविदा का उद्देश्य मुख्य रूप से केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में सौर ऊर्जा का सदुपयोग करना है। इस निविदा की मुख्य विशेषता, इसकी अभिनव “उपलब्धि आधारित प्रोत्साहन योजना” है, जिसमें तय किए गए लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मंत्रालयों/विभागों को उनके प्रदर्शन के आधार पर धन के रूप में प्रोत्साहन दिया जाएगा।

इस योजना में, छत पर लगे सौर ऊर्जा संयंत्र से जुड़े ग्रिड को एमएनआरई के लिए प्रोत्साहन के रूप में आर्थिक सहायता के साथ स्थापित किया जाएगा। इस व्यवस्था के अंतर्गत सृजित की गई ऊर्जा को ईमारत की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए प्रयोग में लाया जाएगा और यदि अतिरिक्त ऊर्जा का सृजन होता है तो उसे ग्रिड के अंदर विभिन्न माध्यमों से सुरक्षित कर संबंधित राज्य के उपयोग के लिए उसका प्रबंध किया जाएगा।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय एसईसीआई को 21 मंत्रालय/विभागों का आवंटन कर चुका है, इसमें मानव संसाधन विकास मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्रालय आदि शामिल हैं। मंत्रालयों ने इस परियोजना में भागीदार बनने के प्रति अपनी गहरी रुचि और उत्साह दिखाया है और स्वच्छ ऊर्जा पहल की दिशा में अपने कार्यालयों/ईमारतों की छतों पर ग्रिड से जुड़े एसपीवी ऊर्जा संयंत्रों के कार्यान्वयन के लिए एमएनआरई को “हरित ऊर्जा वचनबद्धता प्रमाणपत्र” उपलब्ध कराने के प्रति अपनी वचनबद्धता का आश्वासन दिया है ताकि ग्लोबल वार्मिंग को कम नियंत्रित करने की दिशा में राष्ट्रीय हित में योगदान दिया जा सके। विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों को एमएनआरई/एसईसीआई द्वारा ग्रिड से जुड़े छत आधारित सौर ऊर्जा संयंत्र प्रणाली के बारे में विस्तार से अवगत भी कराया गया है।

इस प्रणाली के कार्यान्वन के लिए एमएनआरई ने विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की मांग संबंधी जानकारी भी इकट्ठा कर ली है। एमएनआरई और इस परियोजना में रूचि रखने वाले विभिन्न मंत्रालयों द्वारा उपलब्ध कराई गई चिन्हित जगहों के आधार पर, एसईसीआई वहां संभावनाओं का मूल्यांकर कर रही है, जिसे सौर पीवी निर्माता (सोलर पीवी डेवलपर्स - एसपीडी) को उपलब्ध कराया जाएगा।

एसपीडी का चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी बोली प्रक्रिया का पालन करते हुए राज्य स्तर पर किया गया है, जिसके तहत एक राज्य एक दर का प्रावधान एसपीडी के लिए किया गया है। 1000 मेगावाट क्षमता को CAPEX और RESCO के बीच 30/70 के अनुपात में कार्यान्वयन के लिए वितरित किया जाएगा।

इस योजना में एमएनआरई के परामर्श से एसईसीआई भुगतान सुरक्षा प्रणाली को भी शुरू कर रहा है, जोकि छत आधारित कार्यक्रम के इतिहास में पहली बार हो रहा है। एसईसीआई ने वित्तीय संस्थानों (एफआई) जैसे कि आईआरईडीए और एसबीआई के साथ विशेष छूट पैकेजों के आधार पर ऋण के निष्पादन के लिए समझौता भी किया है। ये बैंक एवं वित्तीय संस्थान इस कार्यक्रम के तहत सौर पीवी परियोजना को अपनाने वाले संस्थानों आदि को विभिन्न तरह की छूट सहित ऋण उपलब्ध कराएंगे ताकि सौर ऊर्जा एवं हरित ऊर्जा के प्रति इन्हें प्रोत्साहित किया जा सके।

डिजिटल पेमेन्ट प्रोत्साहन योजना से अब आप भी पा सकतें हैं पुरस्कार


पिछले ढाई वर्ष में भ्रष्टाचार एवं कालेधन के खिलाफ भारत सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। एक हजार और पाँच सौ रूपये के नोट को बंद करने संबंधित निर्णय भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1000 और 500 के नोट के ढेर ने देश के अंर्थतंत्र में अनेक बुराइयों को आश्रय दिया। भविष्य में भी देश फिर से एक बार भ्रष्टाचार एवं काले धन का शिकार न हो, इसलिए भविष्यलक्षी स्थाई योजनाओं को लागू करना बहुत ही आवश्यक है।

आज तकनीक (technology) के  माध्यम से ऑनलाइन पेमेंट, मोबाइल बैंकिंग , ई-वॉलेट, डेबिट कार्ड के ज़रिए डिजिटल बिज़नेस ट्रांसज़ेक्शन संभव है। ऐसे कई वैकल्पिक साधनों के ज़रिए डिजिटल से डिजी-धन (digi-dhan) की  दिशा में बढ़ने में मदद मिलेगी। अफ्रीका में केन्या  जैसे विकासशील देश न  ऐसा करके दिखाया है। भारत जैसा देश जिसकी 65% जनसंख्या 35 वर्ष की आयु से कम है, भारत जो पूरी दुनिया में आईटी कौशल के लिए जाना जाता है, भारत जिसके करोड़ों-करोड़ अनपढ़ और गरीब व्यक्ति ईवीएम से वोट देते हैं, ऐसी क्षमता वाले देश के नागरिक निश्चित ही मौजूदा अर्थव्यवस्था को डिजिटल अर्थव्यवस्था में बदलने में सक्षम हैं। जो अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। 

इस सपने को पूरा करने के लिए, ई-पेमेंट (e-payment) को बढ़ावा देना, ई-वॉलेट (e-wallet) और मोबाइल बैंकिग के प्रचलन को बढ़ाना, डिजिटल (digital ) से समाज को डिजी-धन (digi-dhan) की ओर ले जाना अपरिहार्य हो गया है। 1000 और 500 रू. के नोटों के विमुद्रीकरण के पश्चात डिजिटल पेमेन्ट्स में काफी वृद्धि हुई है। यह आवश्यक है कि इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का प्रचलन समाज के हर वर्ग में फैले। अतः नीति आयोग स्तर पर यह निर्णय लिया गया है कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) से अनुरोध किया जाए कि वह डिजीटल पेमेंट को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई योजना शीघ्र लागू करें। उल्लेखनीय है कि NPCI एक गैर-लाभकारी कम्पनी है जो भारत को कैशलेस समाज की ओर ले जाने के लिए प्रयासरत है।

प्रोत्साहन योजना के मुख्य बिन्दु:

वो उपभोक्ता (Consumers) और विक्रेता (Merchants) जो इलेक्टॉनिक पेमेंट (Electronic Payment) का उपयोग करते हैं, इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

इस योजना में दो तरह की प्रोत्साहन धनराशि की व्यवस्था है-
  • प्रत्येक सप्ताह भाग्यशाली विजेताओं को नकद पुरस्कार दिए जाने की रूपरेखा बनाई जाएगी।
  • हर तीन माह में उपभोक्ताओं में से कुछ को एक बड़ा पुरस्कार दिया जाएगा।
  • योजना में यह ध्यान रखा जाएगा कि गरीबों,निम्न-मध्यम वर्ग तथा छोटे व्यापारियों को प्राथमिकता मिले
  • इस योजना में निम्न प्रकार के डिजिटल पेमेंट्स (Digital Payments) अनुमन्य होगें- USSD, AEPS, UPI और RuPay Card
  • विक्रेताओं के लिए उनके द्वारा स्थापित POS मशीन पर किये गये  ट्रांज़ेक्शंस (Transactions) इस योजना हेतु मान्य होगीं।
  • योजना की रुपरेखा शीध्र ही देश के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी किन्तु यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसे जितने लोग डिजिटल पेमेन्ट प्रणाली का उपयोग कर रहे है वे इस योजना के लाभ उठाने के हक़दार होंगे
  • वर्तमान में दो प्रकार के सुझाव चल रहे हैं कि प्रोत्साहन योजना 6 महीने चलाई जाए अथवा एक वर्ष तक चलाई जाए।
  • राज्य सरकारों, उनके उपक्रमों, जिलों, महानगर निगमों एवं पंचायतों में भी जहां कैशलेस ट्रांज़ेक्शंस (Cashless Transactions को प्रोत्साहित करने हेतू उल्लेखनीय कार्य किया गया हो, उन्हें भी पुरस्कृत किया जाएगा।

रेडियो स्‍टेशनों खोलने के लिए उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों को 90% एवं अन्‍य राज्‍यों को 75% सब्सिडी


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय समुदाय रेडियो स्‍टेशनों की स्‍थापना के लिए उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों को 90 फीसदी सब्सिडी एवं अन्‍य राज्‍यों को 75 फीसदी सब्सिडी उपलब्‍ध कराएगा : वेंकैया नायडू 

सुशासन के लिए केंद्र एवं राज्‍यों के बीच सहयोग अपरिहार्य : कर्नल राठौर 


दूरदर्शन उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों के लिए अरुण प्रभा चैनल आरंभ करेगा

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री वेंकैया नायडू ने अपनी समापन टिप्‍पणियों में घोषणा की कि समुदाय रेडियो स्‍टेशनों की स्‍थापना के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों को 90 फीसदी सब्सिडी एवं अन्‍य राज्‍यों को 75 फीसदी सब्सिडी उपलब्‍ध कराएगा। समुदाय रेडियो स्‍टेशन एक असाधारण माध्‍यम है जो स्‍थानीयकृत भाषाओं (कंटेंट) में सूचनाओं का प्रसार करता है। उन्‍होंने इसका जिक्र भी किया कि जनवरी के पहले पखवाड़े में दूरदर्शन उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों के लिए अरुण प्रभा चैनल आरंभ करेगा। यह चैनल स्‍थानीय संस्‍कृति की समृद्धि, विविधता एवं अनेकता को प्रदर्शित करेगा तथा उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों को समस्‍त भारत से एकीकृत करने का समेकित प्रयास करेगा।

श्री वेंकैया नायडू ने आगे बताया कि भारत सरकार सूचना एवं संप्रेषण के प्रसार प्रचार की दिशा में एक व्‍यापक एवं समेकित दृष्टिकोण के लिए राज्‍यों के परामर्श से एक राष्‍ट्रीय सूचना एवं संचार नीति का निर्माण करेगी। राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कारों में सर्वाधिक फिल्‍म अनुकूल राज्‍य का पुरस्‍कार समावेशित किए जाने के बारे में बोलते हुए उन्‍होंने कहा कि राज्‍यों को इस पहल पर फोकस करना चाहिए क्‍योंकि इससे न केवल राजस्‍व में बढोतरी होगी बल्कि यह राज्‍य में पर्यटन को भी बढावा देगा। इस परिप्रेक्ष्‍य में आज पहले उन्‍होंने सर्वाधिक फिल्‍म अनुकूल राज्‍य के पुरस्‍कार के लिए एक करोड़ रुपये के नकद पुरस्‍कार की भी की ।

इससे पहले, इस अवसर पर बोलते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्‍य मंत्री कर्नल राज्‍यवर्द्धन राठौर ने कहा कि सुशासन के लिए केंद्र एवं राज्‍यों के बीच सहयोग अपरिहार्य है और देश के विकास की गाथा लिखने के लिए टीम इंडिया के रुप में आगे बढ़ने की जरुरत है। सूचना का प्रसार एवं फीडबैक का विश्‍लेषण संचार परिदृश्‍य की समग्र प्रक्रिया का एक महत्‍वपूर्ण तत्‍व है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्‍य मंत्री कर्नल राज्‍यवर्द्धन राठौर आज नई दिल्‍ली के विज्ञान भवन में 28वें राज्‍य सूचना मंत्रियों के सम्‍मेलन को संबोधित कर रहे थे।

इसे और अधिक स्‍पष्‍ट करते हुए उन्‍होंने कहा कि सूचना का संग्रह एवं उसका प्रसार एक अनवरत प्रक्रिया है और केंद्र तथा राज्‍यों को एक ऐसी पारिस्थितिकी प्रणाली के सृजन के लिए एकजुट होने की आवश्‍यकता है जो नागरिकों को प्रबुद्ध बनाने में सक्षम हो।

सूचना के प्रसार की प्रक्रिया में सरकारी प्रसारणकर्ता की भूमिका के बारे में जानकारी देते हुए कर्नल राठौर ने कहा कि दूरदर्शन एवं आकाशवाणी को न केवल भौगोलिक रूप से लोगों से जुड़ने की आवश्‍यकता है बल्कि उन्‍हें सामग्रियों एवं कार्यक्रमों पर भी फोकस करने की जरुरत है। उन्‍होंने मीडिया इकाइयों तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत प्रशिक्षण संस्‍थानों द्वारा किए जा रहे कार्यकलापों का भी जिक्र किया।    

अमूल की नई इकाईयों के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री का गजब का भाषण


मंच पर विराजमान सभी महुनुभाव और बनासकांठा के मेरे प्यारे भाईयों और बहनों, 

आपको लगता होगा आपना नरेन्‍द्र भई हिन्‍दी में केम बोले छ, 

अरे देश को भी तो पता चलना चाहिए कि बनासकांठा का किसान कैसा काम करता है। मरूभूमि में भी जान भरने की ताकत अगर है, तो बनासकांठा के किसान में है, उत्‍तर गुजरात के किसान में है। जो अपना पसीना बहा करके जमीन में जान भर देता है। और इसलिए देश को पता चले कि इस बनासकांठा जिला, पाकिस्‍तान की सीमा पर, बिना पानी; बिना बरसात; रेगिस्‍तान जैसी जिंदगी गुजारता हुआ इंसान अपने पराक्रम से, पुरुषार्थ से अपने भाग्‍य को कैसे बदल सकता है, इसका ये जीता जागता उदाहरण ये जिले के नागरिक हैं; उनका पुरुषार्थ है, और उनकी सफलताएँ हैं। 

भाइयो, बहनों! मुझे बताया गया 25-27 साल के बाद कोई प्रधानमंत्री का बनासकांठा जिले में आने का हुआ है। भाइयो, बहनों में आपके बीच में प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, इस धरती की संतान के रूप में आया हूं। इस मिट्टी ने मुझे बड़ा किया है। और मैं आज विशेष रूप से आया हूं, श्रद्धेय गलबाभाई को; उनकी तपस्‍या को नमन करने के लिए आया हूं। लाखों पशुओं की तरफ से, लाखों परिवारों की तरफ से, बनासकांठा की बंजर भूमि की तरफ से मैं आज गलबाभाई की शताब्‍दी के समारोह की शुरुआत उनको शत् शत् नमन करता हूँ; इन सबकी तरफ से नमन करता हूं। 

आप कल्‍पना कीजिए, आज से 50 साल पहले जब गलबाभाई की उम्र 50 साल की थी, आठ छोटी छोटी दूध मंडली; उससे शुरू किया और आज किसानों के सहयोग से, पुरुषार्थ से, परिश्रम से, और उसमें भी बनासकांठा की, उत्‍तर गुजरात की मेरी माताओं, बहनों के पुरुषार्थ के कारण; जिन्‍होंने पशुपालन को परिवार की सेवा का हिस्‍सा बना दिया; उन्‍होंने श्‍वेत क्रांति ला दी। आज बनास डेयरी की भी स्‍वर्णिम जयंती का अवसर है। ऐसा सुयोग है कि एक तरफ इस महान आंदोलन के जनक, श्‍वेत क्रांति के जनक गलबा भाई की शताब्‍दी, और दूसरी तरफ उन्‍हीं के हाथों से बोया गया पौधा, आठ मंडली से शुरू हुआ पौधा, आज बनास डेयरी के रूप में वटवृक्ष बन गया है; उसकी स्‍वर्णिम जयंती का ये अवसर है। और इसलिए इस 50 वर्ष में जिन-जिन महानुभावों ने इस बनास डेयरी को चलाया, आगे बढ़ाया, इस ऊंचाई पर ले गए, अनेक चेयरमैन आए होंगे, अनेक व्‍यवस्‍थापक आए होंगे, अनेक कर्मचारी रहे होंगे, मैं आज इस 50 साल की यात्रा में जिन-जिन लोगों ने योगदान दिया है, उन सबका दृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, उनका साधुवाद करता हूं। 

भाइयो, बहनों! आप मुम्‍बई जाएँ, सूरत जाएँ, किसी और इलाके में जाएं तो कठिनाइयों में ही जिंदगी गुजारने के लिए गुजरात से कौन आया है, तो ज्‍यादातर पता चलता था कच्‍छ और बनासकांठा के लोग अपना गांव, अपना इलाका छोड़ करके रोजी-रोटी कमाने के लिए कहीं बाहर जाते थे, क्‍योंकि यहां कोई प्राकृतिक संसाधन नहीं थे। और भाइयो, बहनों हम पहले से कह रहे थे एक बार मां नर्मदा हमारी इस बनास की धरती को आ करके छू लेगी, मेरा किसान मिट्टी को सोना बना करके रख देगा। आज उसने बनास की इस सूखी धरती को, इस रेगिस्‍तान वाली धरती को सोने में तब्‍दील कर दिया है। 

मुझे बराबर याद है, मैं नया-नया मुख्‍यमंत्री बना था। कई सारे सवालिया निशान मेरे लिए लगाए जाते थे। ये मोदी! मुख्‍यमंत्री! क्‍या करेगा! ये तो कभी! गावं का सरपंच नहीं रहा! कभी चुनाव नहीं लड़ा! इसको क्‍या आएगा! बड़ी मजाक उड़ती थी। उस समय मेरा सबसे पहला सार्वजनिक कार्यक्रम डीसा में हुआ था, इसी धरती पर हुआ था; इसी मैदान में हुआ था। और वो था लोक कल्‍याण मेला। और उस दिन मैंने जो नजारा देखा था आज उससे अनेक गुना नजारा बड़ा मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं। 

भाइयो, बहनों! मुझे बराबर याद है बनासकांठा के किसान मुझपे बहुत नाराज रहते थे, गुस्‍सा करते थे। कभी-कभी मेरे पुतले जलाते थे। और फिर मैं हिम्‍मत करके उनके बीच जाता था। और मैं उनको कहता था कि अगर बनासकांठा का भाग्‍य बदलना है तो हमें पानी बचाना पड़ेगा, बिजली के तार छोड़ने पड़ेंगे। किसान को बिजली नहीं पानी चाहिए; ये बात मैं उस समय बताता था; नाराजी मोलता था, लेकिन ये मेरा सौभाग्‍य है कि वो ही बनासकांठा, वही मेरे बनासकांठा के किसान, उन्‍होंने मेरी बात को सर आंखो पर चढ़ाया, और आज Drip Irrigation में टपर सिंचाई में (Sprinkler में), पूरे गुजरात में नम्‍बर एक पर ला करके खड़ा कर दिया। मैं उन सभी किसानों को, मैं आज उन सभी किसानों को सर झुका करके नमन करता हूं। उन्‍होंने न अपना भाग्‍य बदला ऐसा नहीं है, उन्‍होंने आने वाली अनेक अनेक पीढि़यों का भी भाग्‍य बदल दिया है। 

मुझे याद है, 2007 या 08 का वर्ष होगा, ऐसा ही एक किसानों के लिए कार्यक्रम मेरा था, तो मैं बनासकांठा में आया था। तो हमारे एक मित्र हैं, दिव्‍यांग हैं श्री गेना जी। गेना जी हमारे लाखनी तहसील से हैं। तो गेना जी चल तो पाते नहीं हैं, दिव्‍यांग हैं, लेकिन बड़े प्रगतिशील किसान हैं। वो इतना बड़ा दाड़म ले करके; अनार ले करके मुझे भेंट करने आए, नारियल से भी बड़ा था। मैं हैरान था, मैंने उनसे पूछा भाई ये कमाल कैसे किया है आपने? बोले साहब आज तो मेरे खेत में पूरे जिले के लोग देखने के लिए आते हैं, और आप देखना धीरे-धीरे दाड़म की खेती में बनासकांठा आगे निकल जाएगा। एक गांव के मेरे गेना जी सरकारी गोरिया के हैं ना गेनाजी! आए होंगे कहीं शायद बैठे होंगे। हमारे गेना जी कहीं बैठे होंगे। क्‍या कमाल करके रख दिया, भाइयो, बहनों बनासकांठा के किसान ने, प्रगतिशील किसान के रूप में अपनी छवि छोड़ी है और एक-दो किसान नहीं, एक आंदोलन खड़ा हुआ है। आज भी बनासकांठा ने प्रति हेक्‍टेयर आलू की पैदावार का जो रिकॉर्ड किया है उसका रिकॉर्ड को कोई तोड़ नहीं पाया। ये काम बनासकांठा ने कर दिखाया है। आज बनासकांठा Potatoes के लिए भी जाने लगा है। 

भाइयो, बहनों! किसान के लिए कुछ चीजें कैसी वरदान होती हैं। गलबाभाई ने जब डेयरी का काम शुरू किया, जहां पानी न हो रेगिस्‍तान हो, 10 साल में 7 साल अकाल रहता हो; जहां किसान ईश्‍वर की इच्‍छा पर ही जिंदगी गुजारता हो; उसके लिए तो आत्‍महत्‍या एक ही रास्‍ता बच जाता था। लेकिन इस जिले ने किसानों को पशुपालन की ओर मोड़ दिया, दुग्‍धपालन की ओर मोड़ दिया और पशुओं की सेवा करते-करते, दुग्‍ध क्रांति करते-करते अपने परिवार को चलाया, बच्‍चों को भी पढ़ाया और जीवन को आगे ले गए। 

भाइयो, बहनों! यही बनासकांठा, यही गुजरात, जिसने श्‍वेत क्रांति का नेतृत्‍व किया था; आज मुझे खुशी हुई कि बनास डेयरी ने श्‍वेत क्रांति के साथ-साथ Sweet क्रांति का भी बिगुल बताया है। जहां श्‍वेत क्रांति हुई वहां अब Sweet क्रांति भी होने वाली है। मधु क्रांति! शहद! बनास ने डेयरी के दूध की जैसी व्‍यवस्‍था की है किसानों को शहद के लिए मधुमक्‍खी पालन के लिए। ट्रेनिंग देना शुरू किया। आज उस Honey में से पहला packaging बना करके उन्‍होंने market में रखा हे। मेरा पूरा विश्‍वास है गुजरात में जो डेयरी का network है, और करीब-करीब सभी जिलों में डेयरी का network है, किसानों की समितियां बनी हुई हैं। दूध के साथ-साथ खेतों में अगर मधुमक्‍खी पालन भी किसान पकड़ लें तो जैसे दूध भरने जाते हैं, वैसे मधु भरने जाएंगे, मद भरने जाएंगे, शहद, honey ले जाएंगे, और डेयरी की गाडि़यों में दूध भी जाएगा, शहद भी जाएगा। Extra Profit, Extra Benefit, अतिरिक्‍त कमाई का एक नया रास्‍ता, गुजरात के भी डेयरी, सभी किसान, इस रास्‍ते पर चल करके एक श्‍वेत क्रांति के साथ-साथ Sweet क्रांति को भी ला सकते हैं ऐसा मेरा विश्‍वास है। दुनिया में शहद की मांग है, बहुत बड़ा market है। अगर हम शहद में भी आगे निकल जाएं, और जब नर्मदा का पानी आया है। नर्मदा के नजदीकी इलाकों में तो बहुत बड़ी मात्रा में इसका लाभ मिलता है। Fertilizer उपयोग करने के तरीके बदलने पड़ते हैं, लेकिन लाभ इतना बड़ा होता है और जैसा बनाकांठा के किसान का मन बदला है, ये भी बदल के रहेगा ऐसा मुझे विश्‍वास है। 

आज बनास डेयरी ने Amul Brand के साथ Cheese का Production का भी एक प्‍लांट शुरू किया। गुजरात में जितनी भी डेयरियां वो Cheese के काम से चली हुई हैं, आप हैरान होंगे दुनिया के कई देश हैं, वे Amul के Brand की Cheese मांगते हैं। जितनी पैदावार होती है तुरंत उठ जाती है, लोग, ग्राहक मिल जाते हैं। आज उसमें एक इजाफा बनास डेयरी के द्वारा हो रहा है, मैं उनको बधाई देता हूं। एक बहुत बड़ा initiative आज डेयरी ने लिया है, KanKrej की गायद्, इस नस्ल का मूल्‍य हम जानते हैं, वैज्ञानिक तरीकों ने भी गिर की गाय, KanKrej (कांक्रेच) की गाय, इसका महात्‍मय स्‍वीकार किया है। अब A2 Milk, जिस KanKrej की गाय के दूध की एक विशेषताएं हैं, विशेष तत्‍व हैं, उसको आज उन्‍होंने मार्केट में रखा है। जो Health Conscious लोग हैं, जहां बच्‍चों को कुपोषण की समस्‍या है, ऐसे बच्‍चों के लिए A2 Milk, KanKrej गाय का A2 Milk उनके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए उपकारक होने वाला है, ऐसा एक भगीरथ काम भी आज यहां शुरू हुआ है। यहां KanKrej की नस्‍ल को बढ़ावा देना, उसमें सुधार करना, उसकी क्षमता में सुधार करना, उसकी per capita milk production बढ़ाना, उसके लिए भी वैज्ञानिक तरीके चल रहे हैं। 

मैं बनास में जब आया हूं तब मैं बनास डेयरी से चाहूंगा कि वो एक काम और भी करे, और कर सकते हैं। बनास हो, सांभर डेयरी हो, दुग्‍ध सागर डेयरी हो; ये तीनों मिल करके भी कर सकते हैं। दो चीजें हम ऐसी पैदा करते हैं, हमारे किसान; लेकिन हम सस्‍ते में बेच देते हैं। और जो हम castor की खेती करते हैं, दिवेला; एरेंडा। 80 percent खेती हमारे यहां होती है, उसका उत्‍पादन। उस पर इतनी value addition होती है, इतनी process होती है। सारी दुनिया के महत्‍वपूर्ण technology में space shuttle की technology में ये Castor के Oil से बनी हुई चीजें सबसे सफल रहती हैं। लेकिन हम जो हैं, अभी भी हमारा दिवेला, एरेंडा जो कहें; ऐसे का ऐसा बेच देते हैं। ये बनास, दुग्‍धसागर, सांभर एक research Centre बनाएं और हम, हमारे किसान जो यहां पर castor पैदा करते हैं, एरंडा पैदा करते हैं, दिवेला पैदा करते हैं, उसमें value addition कैसे करें और हमारा ये कीमती संपत्ति पानी के मोल से बाहर चली जाती है, उसे हम बचाएं। 

दूसरा है ईसबगोल। इसबगोल की ताकत बहुत बड़ी ताकत है। उसमें बहुत value addition हो सकता है। जब कुरियन जिंदा थे, तो श्रीमान कुरियन जी को मैंने कहा था कि आप ईसबगोल पर value addition पर काम कीजिए। उन्‍होंने प्रारंभ किया था, आइसक्रम बनाई थी ईसबगोल का। और आइसक्रीम का नाम दिया था ईसबकूल। आनंद में शुरूआत की थी उन्‍होंने उस समय। इतना बड़ा Global Market है ईसबगोल का। उसके संबंध में भी अगर वैज्ञानिक तरीके से हम काम करें तो बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं, और हमें लाना चाहिए। 

भाइयो, बहनों इन दिनों पूरे देश में इस बात की चर्चा चल रही है नोटों का क्‍या होगा? आप मुझे बताइए, आठ तारीख के पहले 100 की नोट की कोई कीमत थी क्‍या? 50 के नोट की कोई कीमत थी क्‍या? 20 की नोट की कोई कीमत थी क्‍या? छोटे को कोई पूछता था क्‍या? हर कोई बड़ों को ही पूछता था। हजार, पांच सौ; हजार, पांच सौ; हजार, पांच सौ। आठ तारीख के बाद देश देखिए 100 का मूल्‍य कैसा बढ़ गया, कैसी ताकत बढ़ गई उसकी, जान आ गई जैसे। 

भाइयो, बहनों! जैसे आठ तारीख के पहले बड़ों-बड़ों की पूछ होती थी, हजार और पांच सौ की ही गिनती गिनी जाती थी, 20, 50, 100 को कोई पूछता नहीं था, छोटे की तरफ कोई देखता नहीं था। आठ तारीख के बाद बड़ों की ओर कोई देखने को तैयार नहीं है, सब छोटे के लिए तैयार हो गए हैं भाइयो। ये फर्क आया है और जैसे बड़ी नोट नहीं छोटी नोट की ताकत बढ़ी है; बड़े लोग नहीं, छोटे लोगों की ताकत बढ़ाने के लिए ये बहुत बड़ा फैसला मैंने किया है। देश का गरीब, देश का सामान्‍य मानवी, जैसे 100 रुपये की ताकत बढ़ गई, वैसे गरीब की ताकत बढ़ाने के लिए ये मैंने काम किया है। आप कल्‍पना कर सकते हैं भाइयो, आपने देखा होगा कुछ भी खरीद करने जाओ, कच्‍चा बिल कि पक्‍का बिल? बिल मांगोगे तो छोटा व्‍यापारी भी कहता है नहीं, नहीं बिल-विल लेना है तो दूसरी दुकान पर जाओ। कैश देना है तो ले आओ; ऐसा ही चला। मकान चाहिए, मकान वाला कहता है चैक में इतना, रोकड़े में इतना। अब वो गरीब आदमी रोकड़ा लायेगा कहां से? 

भाइयो, बहनों! इस प्रकार से नोटें छापते गए, छापते गए, छापते गए और देश, उसका अर्थतंत्र, ये नोटों के ढेर के नीचे ही दबने लग गया। भाइयो, बहनों मेरी लड़ाई है आतंकवाद के खिलाफ, आतं‍कवादियों को ताकत मिलती है जाली नोट से। और हम तो सीमा पार क्‍या हो रहा है, सब जानते हैं पड़ौस में ही रहते हैं। कैसी मुसीबतें हमें झेलनी पड़ी हैं, ये बनासकांठा पाटन जिले के लोग ज्‍यादा जानते हैं। 

भाइयो, बहनों! जाली नोट के कारोबारी, हिन्‍दुस्‍तान में जितना हो-हल्‍ला है ना उससे ज्‍यादा बाहर है, जाली नोटों के कारोबारियों में बाहर है। नक्‍सलवाद, सारे नौजवान surrender होकर वापस आने लगे हैं। हर किसी को लगता है अब मुख्‍य धारा में वापस आना चाहिए। आतंकवादियों को जहां से ताकत मिलती थी उन रास्‍तों को रोकने में सफल हुए हैं। ये जाली नोट का कारोबार, उसका मृत्‍युघंट, एक निर्णय से किया है भाइयो, बहनों। भ्रष्‍टाचार, कालाधन, ये भ्रष्‍टाचार और काले धन में पीड़ा किसको होती थी? किसी बेईमान को न भ्रष्‍टाचार से परेशानी थी, न काले धन से परेशानी थी। अरे एक भ्रष्‍टाचारी को दूसरे भ्रष्‍टाचारी को कुछ देना भी पड़ता था तो भी देने वाला भ्रष्‍टाचारी दुखी नहीं था। अगर दुखी कोई था तो इस देश का ईमानदार नागरिक दुखी था। परेशान था तो इस देश का ईमानदार नागरिक परेशान था। 70 साल तक इन ईमानदार लोगों को; 70 साल तक इन ईमानदार लोगों को आपने लूटा, आपने परेशान किया, उसको जीना मुश्किल कर दिया। आज मैं जब इमानदारों के साथ खड़ा हूं, तब ईमानदारों को भड़काया जा रहा है, और मुझे खुशी है मेरे देश के ईमानदार नागरिकों ने लाखों भड़काने के बावजूद भी सरकार के इस निर्णय का साथ दिया है। मैं सवा सौ करोड़ देशवासियों को शत् शत् नमन करता हूं कि इतने बड़े काम में उन्‍होंने मेरी मदद की। 

भाइयो, बहनों! आजकल बड़े बुद्धिमान लोग भाषण सुनाते हैं कि मोदीजी आपने इतना बड़ा निर्णय किया, लेकिन हमारे जीते जी तो कोई लाभ नहीं मिलेगा; मरने के बाद मिलेगा। भाइयो, बहनों हमारे देश में एक चारबाग ऋषि हो गए, ये चारबाग ऋषि कहते थे:- ’’ऋणम कृत्‍वा, घृत्‍तम पीवेत’’ वो कहते थे अरे! मृत्‍यु के बाद क्‍या होने वाला है? कौन जानता है, जो मौज करनी है अभी कर लो; जो खाना है खा लो, घी पीना है पी लो; आनंद से जी लो। इस चारबाग की Philosophy को कभी भी हिन्‍दुस्‍तान ने स्‍वीकार नहीं किया। हमारा तो देश ऐसा है, बूढ़ा गरीब मां बाप; पैसे बहुत कम हों तो बूढ़ा और बूढ़ी मां बात करते हैं कि ऐसा करो शाम को सब्‍जी बनाना बंद कर दो, थोड़े पैसे बच जाएंगे तो मरने के बाद बच्‍चों के काम आ जाएंगे। मेरा देश मरने के‍ बाद मेरा क्‍या होगा, ये कभी चिन्‍ता नहीं करता है; मेरा देश, मेरे बाद की पीढि़यों का भला क्‍या हो, ये सोचने वाला देश है। मेरा देश स्‍वार्थी लोगों का देश नहीं है। मेरे देश का चिन्‍तन सुख के लिए, खुद के सुख के‍ लिए जीने वाला नहीं है। मेरे देश का चिन्‍तन भावी पीढि़यों के सुख के‍ लिए चलने वाला है। ये नए चारबाग लोग जो पैदा हुए हैं ‘’ऋणम कृत्‍वा, घृत्‍तम पीवेत’’ ये जो बातें करने वाले लोग हैं, उनको पचास बार सोचना पड़ेगा। 

भाइयो, बहनों! आपने देखा होगा Parliament चल नहीं रही है, चलने दी नहीं जा रही है। हमारे देश के राष्‍ट्रपति, सार्वजनिक जीवन में इतना लम्‍बा अनुभव है; शासन चलाने वाले श्रेष्‍ठत्‍तम लोगों में से हमारे राष्‍ट्रपति जी रहे हैं। वो अलग राजनीतिक धारा में पले-बढ़े हैं। लेकिन देश की संसद में जो कुछ भी हो रहा था उससे इतने पीडि़त हो गए, इतने दुखी हो गए कि दो दिन पहले उनको सांसदों को सार्वजनिक रूप से टोकना पड़ा। विरोध पक्ष को नाम दे करके टोकना पड़ा। और मैं हैरान हूं, सरकार कहती है हम चर्चा चाहते हैं, सरकार कहती है कि प्रधानमंत्री बोलने के लिए तैयार हैं, सरकार कहती है प्रधानमंत्री आ करके कहने को तैयार हैं, लेकिन उनको मालूम है उनका झूठ टिक नहीं पाता है और इसलिए वो चर्चा से भागते रहे हैं, और इसलिए लोकसभा में मुझे नहीं बोलने दिया जाता; मैंने जनसभा में बोलने का रास्‍ता चु‍न लिया है भाइयो। और जिस दिन मौका मिलेगा लोकसभा में भी सवा सौ करोड़ देशवासियों की आवाज मैं जरूर पहुंचाने का प्रयास करूंगा मेरे भाइयो, बहनों। 

भाइयो, बहनों! मैं विरोधी दल के मित्रों से, आज महात्‍मा गांधी की इस धरती से, सरदार वल्‍लभभाई पटेल की इस धरती से सार्वजनिक रूप से आग्रह करना चाहता हूं। जब चुनाव होते हैं, जब चुनाव होते हैं हम सभी दल एक-दूसरे के खिलाफ बोलते हैं; आरोप प्रत्‍यारोपण करते हैं, अच्‍छी और बुरी नीतियों की चर्चा करते हैं, हर प्रकार से अपने विरोधियों पर जैसा मार कर सकते हैं करने की कोशिश करते हैं; सभी दल करते हैं। भारतीय जनता पार्टी भी करेगी, कांग्रेस भी करेगी, बाकी सब छोटे-मोटे दल भी; सब करते हैं। लेकिन सभी पार्टियां एक काम जरूर करती हैं, क्‍या? मतदाता सूची को ठीक करना, अधिकत्‍तम लोग मतदान करने आएं इसकी चिन्‍ता करना; मतदाताओं को कैसे बटन दबाना; वो सिखाना, सभी दल करते हैं। एक तरफ तो नीतियों का विरोध करते हैं, दूसरे को पराजित करने की ताकत लगाते हैं, लेकिन दूसरी तरफ सब मतदाता सूची पर ध्‍यान देते हैं, Electronic Voting Machine पर ध्‍यान देते हैं, अधिक लोग मतदान करने आएं इस पर ध्‍यान देते हैं, क्‍यो? क्‍योंकि लोकशाही हम सबकी जिम्‍मेवारी है। 

मैं विरोध पक्ष के मित्रों से कहना चाहता हूं, आप ये तो नहीं कहने की हिम्‍मत कर रहे हो कि मोदी हजार और पांच सौ वाला नोट वापिस ले लो क्‍योंकि आपको पता है कि जनता का मिजाज बदला हुआ है। हां! कुछ लोगों ने कहा, अच्‍छा मोदी जी ये तो ठीक है लेकिन ऐसा करो एक हफ्ते के लिए रोक लो। क्‍यों भाई! ये हफ्ते में कौन सा जादू होने वाला था? ये एक हफ्ता रोकने का इरादा क्‍या था? लेकिन कोई दल ये नहीं कहता है कि निर्णय को Roll Back करो। सब दल कहते हैं, ठीक से लागू करो। मैं सभी दलों से कहना चाहता हूं कि जैसे चुनाव में हम एक-दूसरे का घोर विरोध करते हैं, लेकिन मतदान बढ़ाने के लिए मेहनत करते हैं, मतदाता सूची के लिए मेहनत करते हैं, Electronic Machine की training के लिए मेहनत करते हैं, आज समय की मांग है कि आप खुल करके मेरा विरोध करिए, मेरी आलोचना करिए, लेकिन लोगों को Banking सिखाने के लिए काम कीजिए, Electronic पद्धति से पैसे कैसे लिए जाते, दिए जाते ये सिखाइए। हम सब मिल करके देश को भाग्‍य बदलने का एक ऐसा उत्‍तम अवसर आया है, हम सब उसको काम करें। और आप भी फायदा उठाइए। 

मुझे खुशी होगी मेरे विरोधी दल के लोग जन-जन को इस काम में लगा करके अगर राजनीतिक फायदा उठाते हैं तो देश का भला हुआ इसका मुझे आनंद होगा भाइयो। अरे! राजनीति से ऊपर राष्‍ट्रनीति होती है, दल से बड़ा देश होता है; भाइयों बहनों गरीबों पर बातें करना अलग होती हैं; गरीबों के लिए नीतियां बना करके कठोरता से लागू करने के लिए समर्पण का भाव लगता है, और समर्पित भाव से आज ये सरकार आपकी सेवा में लगी है। 

भाइयो, बहनों! मैंने पहले दिन से कहा है, ये निर्णय मामूली नहीं है मेरे भाइयो, बहनों! बहुत मुश्किल भरा निर्णय है, कठिन निर्णय है। और मैंने कहा था बहुत तकलीफ पड़ेगी; मैंने कहा था मुसीबत आएगी, और 50 दिन ये तकलीफ होगी ही होगी। और तकलीफ रोजमर्रा थोड़ी बढ़ती भी जाएगी, लेकिन 50 दिन के बाद मैंने हिसाब-किताब लगाया है, वो एकदम से धीरे-धीरे, धीरे-धीरे करके पहले जैसी स्थिति की तरफ आगे बढ़ेगा। 50 दिन तक ये कठिनाइयां रहने वाली हैं। 50 दिन के बाद आप ही देखेंगे कि धीरे-धीरे-धीरे आपकी आंखों के सामने परिस्थितियां सुधरती नजर आ जाएंगी। 

भाइयो, बहनों! देश भ्रष्‍टाचार से मुक्‍त करने का एक महत्‍वपूर्ण कदम है, और कुछ लोग आपने देखा होगा; इन दिनों सरकार बराबर पीछे लग गई है, बैंक वाले जेल में जा रहे हैं; बड़े-बड़े गठ्ठे ले करके भागे हुए लोग जेल जा रहे हैं; चारों तरफ! उनको लगा था कि ठीक है मोदी जी 1000, 500 के बंद कर देता है, हम पिछले दरवाजे से कुछ कर लेंगे, लेकिन उनको मालूम नहीं था, मोदी ने पिछले दरवाजे पर भी कैमरे लगाए हुए हैं। ये सब के सब पकड़े जाने वाले हैं, कोई बचने वाला नहीं यहां। दो महीना, तीन महीना, छह महीना, जिन्‍होंने भी आठ तारीख के बाद नए पाप किए हैं, वो तो‍ किसी हालत में बचने वाले नहीं हैं भाइयो, बहनों। उनको सजा भुगतनी पड़ेगी। सवा सौ करोड़ देशवासियों के सपनों को चूर-चूर करने का पाप जिन्‍होंने किया है वो बचने वाले नहीं हैं, ये मैं देशवासियों को विश्‍वास दिलाना चाहता हूं। 

भाइयो, बहनों! आपने मुसीबत झेली है, तकलीफ झेली है, अभी भी झेलनी है। आपका आशीर्वाद देश के लिए और जो लोग कहते हैं न ईमानदार लोग लाइन में खड़े हैं, ईमानदार अपने लिए नहीं खड़ा रहता है, वो देश के‍ लिए खड़ा रहता है भाइयो, बहनों; वो देश के लिए खड़ा रहता है। 

और इसलिए, दूसरा! आज जमाना बदल चुका है भाई। एक जमाना था हमारे दादा-दादी, उनसे सुनेंगे तो बताते थे कि हमारे जमाने में तो ‘’चांदी का गाढ़ाना पेड़ा जोड़ो रुपयो होतो एमके आपण ने’’ कि बैलगाड़ी के पहिए जितना बड़ा रुपया चांदी का हम देखते थे, उपयोग करते थे। भाइयो, बहनों! ये चांदी के रुपये से बदलते, बदलते, बदलते कितनी mettle बदल गई, तांबा आया, और आया, न जाने क्‍या क्‍या आया। और धीरे धीरे करके हम कागज में चले गए कि नहीं चले गए? अब याद आता है कि चांदी का रुपया होगा तभी रुपया माना जाएगा याद आता है क्‍या? अब वो रुपया कागज का भी हमारी जिंदगी का हिस्‍सा बन गया। कभी चांदी का रुपया हुआ करता था, धीरे-धीरे कागज का रुपया आ गया। 

भाइयो, बहनों! अब वक्‍त बदल चुका है, अब तो आपके मोबाइल फोन में ही आपका बैंक आ गया है। आपक बटुआ भी आपके मोबाइल फोन में है। आप चाय पीने जाएं, बटन दबाएं, चाय वाले को पैसा पहुंच जाएगा, receipt मिल जाएगी। बीच में लोग cheque देते थे, cheque फाड़ते थे, दो महीने के बाद पता चलता था कि cheque वापिस आया, बाद में केस कोर्ट में है; जो सबसे ज्‍यादा केस चलते हैं, वो cheque वापिस आने के चलते हैं। आप नौजवानों का धन्‍यवाद आपने बहुत बड़ा काम उठाया है, मैं आपको बधाई देता हूं और बनासकंठा जिले को आप ई, ई-बटुआ से जोड़ दीजिए भाइयो। लोगों को E-Mobile Banking से जोड़ने में सफल होंगे मुझे विश्‍वास है। 

भाइयो, बहनों! हम जानते हैं, कि आप वो कागज के नोटों का भी जमाना पूरा होने जा रहा है। अब तो आपके मोबाइल फोन में आपकी बैंक है। एक बार बैंक में जमा हो गया, आपको बैंक में कतार में खड़े रहने की जरूरत नहीं है, आपको एटीएम के बाहर लाइन लगाने की जरूरत नहीं है, आपको टाइम बरबाद करने की जरूरत नहीं है। अखबार में advertisement आता है, TV पर advertisement आता है। आप अपने मोबाइल फोन से, अगर आपके पैसे बैंक में पड़े हैं; तो आप अपने पैसों का जो खरीदना, खरीद सकते हैं। cheque तो bounce होता था, इसमें तो जैसे ही पैसे दोगे, तो सामने receipt आज जाता है, पैसा मिल गया या पैसा पहुंच गया। कोई बाउंस-वाउंस होता ही नहीं, वहीं पर पता चल जाता है कि रुपया गया कि नहीं गया। 

भाइयो, बहनों! हिन्‍दुस्‍तान दुनिया में तेज गति से आगे जाना चाहता है। ये नोटों के बंडलों के ढेर, ये नोटों के पहाड़, हमारे अर्थतंत्र को दबोच रहे हैं। काले धन और भ्रष्‍टाचारियों को वो काम आ रहे हैं। गरीब की ताकत कम हो रही है, जैसे हजार के नोट की कीमत थी, सौ की नहीं थी; अमीर की थी, गरीब की नहीं थी; आज गरीब की भी ताकत बढ़ गई है, सौ के नोट की भी ताकत बढ़ गई है। और अगर आपने ई-बटुआ पढ़ लिया, बैंकों की कतारें खत्‍म करके बैंक को ही अपने मोबाइल में ले गए, आपको बैंक की कतार में जाने की जरूरत नहीं; बैंक आपके मोबाइल की कतार में खड़ी हो जाएगी। मैं आपसे आग्रह करता हूं, मैं देशवासियों से आग्रह करता हूं, मैं मीडिया के मित्रों से विशेष प्रार्थना करता चाहता हूं; मोदी की आलोचना करना आपका हक है, आज जरूर कीजिए। कतार में जो खड़े रहे हैं उनको तकलीफ हो रही है, वो आप दिखाते हैं; मुझे कोई शिकायत नहीं है, लेकिन साथ-साथ आप ये भी सिखाइए कि अब कतार में खड़े रहने की जरूरत नहीं है, बैंक आपके मोबाइल फोन की कतार में खड़ा हो जाएगा। बैंक वाला आएगा कि मुझे आपके यहां रख लो, वो दिन आ सकते हैं, Technology उपलब्‍ध है, व्‍यवस्‍था उपलब्‍ध है, 

भाइयो, बहनों! अब देश भ्रष्‍टाचार सहन नहीं करेगा। अब देश जाली नोट सहन नहीं करेगा। अब देश काला धन सहन नहीं करेगा। गरीबों को लूटने का खेल, मध्‍यम वर्ग को शोषण करने का खेल अब नहीं चलेगा और इसलिए मुझे आपके आशीर्वाद चाहिए। खड़े रह करके दोनों हाथ से तालियां बजा करके मुझे आशीर्वाद दीजिए, मेरे गुजरात के भाइयो, बहनों। मेरे डीसा के भाइयो, बहनों आशीर्वाद दीजिए। पूरे ताकत से आशीर्वाद दीजिए। 

भारत माता की, जय 
भारत माता की, जय 
भारत माता की, जय 

ये लड़ाई, ये लड़ाई भारत का भाग्‍य बदलने की है, ये लड़ाई भ्रष्‍टाचार को खत्‍म करने की है, ये लड़ाई काले धन का खात्‍मा बुलाने के लिए है, ये लड़ाई जाली नोटों से देश को मुक्‍त कराने की है, और उसमें इस बनास की धरती ने मुझे आशीर्वाद दिए, मैं आप सबका बहुत-बहुत आभारी हूं। आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। फिर से बोलिए भारत माता की, जय, पूरी ताकत से बोलिए, पूरा देश सुन रहा है 

भारत माता की, जय 
भारत माता की, जय 

बहुत, बहुत धन्‍यवाद। 

बैंकों को नगदी जमा करते समय नए-पुराने नोटों का सही ब्यौरा लेने का निर्देश


वित्‍त मंत्रालय ने पीएसबी के सभी एमडी एवं सीईओ/सीएमडी, आईबीए के अध्‍यक्ष को एक पत्र के माध्‍यम से निर्देश दिया कि देश की सभी बैंक शाखाओं को पुराने एवं नए करेंसी नोटों में नकदी जमा को सही तरीके से प्रदर्शित करने के लिए सावधान कर दिया जाए और ग्राहकों को इसके बारे में सूचित किया जाए ; इस बारे में क्‍या कार्रवाई की गई, उसकी रिपोर्ट 16.12.2016 तक दी जाए 

भारत सरकार के वित्‍त मंत्रालय ने अपने वित्‍तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के माध्‍यम से सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों (पीएसबी) एवं भारतीय बैंकर एसोसिएशन (आईबीए) को कहा है कि वे इसे शत प्रतिशत (100 फीसदी) सुनिश्चित करें कि नई करेंसी की जमाएं ग्राहकों के प्रतिपन्‍नों (काउंटफ्वॉयल) में समुचित तरीके से प्रदर्शित हो। डीएफएस ने पीएसबी के सभी प्रबंध निदेशकों (एमडी) एवं मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ)/ अध्‍यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी), आईबीए के अध्‍यक्ष को संबोधित एक पत्र में कहा है कि एसबीएन एवं नॉन-एसबीएन, जैसा भी मामला हो, से संबंधित रिकॉर्डों का बैंक रिकॉर्ड में एवं ग्राहकों के रिकॉर्ड दोनों में ही, रखरखाव अनिवार्य है। पत्र में यह भी कहा गया कि हालांकि अधिकांश बैंक ग्राहकों को सही जानकारी उपलब्‍ध करा रहे हैं, फिर भी यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसा बिना किसी विफलता के शत प्रतिशत मामलों में हो, देश की सभी बैंक शाखाओं को सावधान कर दिया जाए कि वे पुराने एवं नए करेंसी नोटों में नकदी जमा को सही तरीके से प्रदर्शित करें और ग्राहकों को इसके बारे में सूचित करें। 

मंत्रालय ने पीएसबी के सभी एमडी एवं सीईओ/सीएमडी, आईबीए के अध्‍यक्ष को कहा है कि इसका पालन निष्‍ठापूर्वक किया जाना चाहिए और इस बारे में किसी भी विचलन को रोका जाना चाहिए और अगर ऐसी बात सामने आती है तो इस पर तत्‍काल और दृढ़तापूर्वक कार्रवाई होनी चाहिए। 

पत्र में आगे कहा गया है कि आम लोगों को शिक्षित बनाने के लिए बैंकों को अपनी संबंधित बैंक शाखाओं में प्रमुखता से एक चिह्न (स्‍थानीय भाषा समेत) प्रदर्शित करनी चाहिए और ग्राहकों से डिपोजिट स्लिप भरने और सुस्‍पष्‍ट तरीके से पुराने एवं नए करेंसी नोटों की जानकारी देने का आग्रह करना चाहिए।

डीएफएस ने पीएसबी के सभी एमडी एवं सीईओ/सीएमडी, आईबीए के अध्‍यक्ष को इस पर तत्‍काल विचार करने को कहा है और इस बारे में क्‍या कार्रवाई की गई, उसकी रिपोर्ट 16.12.2016 तक देने को कहा है।

मंत्रालय ने विमुद्रीकरण के बाद, विशेष रूप से, जब पुरानी करेंसी स्‍वीकार की जा रही थी और 24 नवंबर, 2016 तक, जब एक निर्दिष्‍ट सीमा तक पुरानी करेंसी के नोट बदलने की अनुमति दी गई थी, बैंकों द्वारा निभाई गई भूमिका की भी सराहना की। 

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