नेताजी के परिवार और देश से किया वादा निभायेंगें प्रधानमंत्री मोदी


भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 14 अक्टूबर, 2015 को नई दिल्ली में अपने आवास पर नेताजी के परिवार के सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में घोषणा की थी कि भारत सरकार नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित फाइलों को सार्वजनिक करेगी और उन्हें जनता के लिए सुलभ बनाएगी। 

उपर्युक्‍त घोषणा का अनुपालन करते हुए 33 फाइलों की पहली खेप प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा सार्वजनिक की गई थी और 4 दिसंबर, 2015 को भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार को सौंप दी गई थी। 

इसके बाद गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने भी अपने पास मौजूद संबंधि‍त संग्रह में शामिल नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित फाइलों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी, जिन्‍हें बाद में भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार को स्थानांतरित कर दिया गया। कुछ और फाइलों को पीएमओ से भी स्थानांतरित कर दिया गया था। 

इस दिशा में पहले कदम के रूप में भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार प्रारंभिक संरक्षण उपायों और डिजिटलीकरण के बाद नेताजी से संबंधित 100 फाइलों को सार्वजनिक तौर पर उपलब्‍ध करा रहा है। 

नेताजी की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री इन फाइलों की डिजिटल प्रतियां सार्वजनिक तौर पर उपलब्‍ध कराएंगे। इससे इन फाइलों को सुलभ कराए जाने के लिए लंबे समय से चली आ रही जनता की मांग पूरी होगी। यही नहीं, इससे विद्वानों को नेताजी पर आगे और अनुसंधान करने में भी सुविधा होगी। 

इतना ही नहीं, भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार ने नेताजी पर 25 फाइलों की डिजिटल प्रतियों को हर महीने सार्वजनिक तौर पर उपलब्‍ध कराने की योजना बनाई है। 

उल्‍लेखनीय है कि भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार को वर्ष 1997 में रक्षा मंत्रालय से इंडियन नेशनल आर्मी (आजाद हिंद फौज) से संबंधित 990 फाइलें प्राप्त हुई थीं और वर्ष 2012 में खोसला आयोग (271 फाइलें/आइटम) और न्यायमूर्ति मुखर्जी जांच आयोग (759 फाइलें/आइटम) से संबंधित कुल 1030 फाइलें/आइटम गृह मंत्रालय से प्राप्‍त हुए थे। ये सभी फाइलें/आइटम सार्वजनिक रिकॉर्ड नियम, 1997 के तहत जनता के लिए पहले से ही उपलब्‍ध हैं। 

EESL ने 5 करोड़ LED बल्ब वितरित करने का लक्ष्य पूरा किया


एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसिज लिमिटेड (ईईएसएल) ने डोमेस्टिक एफिशिएंट लाइटिंग प्रोग्राम- डीईएलपी के अंतर्गत बृहस्‍पतिवार सुबह पांच करोड़ एलईडी बल्‍ब वितरित करने का लक्ष्‍य प्राप्‍त कर लिया। विद्युत, कोयला और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल ने ईईएसएल को इस महत्‍वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई दी है। उन्‍होंने ट्विटर पर जारी अपने संदेश में कहा, ‘पांच करोड़ एलईडी बल्‍ब वितरित करने के लिए बधाई। वे अगले दो महीनों में यह आंकड़ा लगभग दुगुना कर देंगे।‘

ईईएसएल के अनुसार, फरवरी के आखिरी तक 7 करोड़ और मार्च, 2016 तक 9-10 करोड़ एलईडी बल्‍ब वितरित कर दिये जायेंगे। डीईएलपी योजना से रोजाना 1,76,87,005 किलोवाट घंटा ऊर्जा बचाने में सहायता मिलेगी जो 6,95,14,059 रूपये मूल्‍य की बचत होगी। यह 1,583 मेगावॉट का पीक लोड टालने में भी मदद करता है। इन्कन्डेसन्ट बल्‍ब की जगह एलईडी बल्‍ब लगाने से वातावरण में कार्बनडाइआक्‍साइट के उत्‍सर्जन में 14,469 टन की कमी आती है। 

विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई ईईएसएल ने अपनी प्रमुख पहल डोमेस्टिक एफिशिएंट लाइटिंग प्रोग्राम- डीईएलपी के अंतर्गत एलईडी बल्‍ब वितरित करने का उत्‍तरदायित्‍व ग्रहण किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 5 जनवरी, 2015 को डीईएलपी योजना का शुभारंभ किया था। यह योजना इस समय देश के 19 राज्‍यों और संघशासित प्रदेशों में चलाई जा रही है तथा इसके दायरे में अन्‍य राज्‍यों को भी तेजी से शामिल किया जा रहा है। 

डीईएलपी का लक्ष्‍य देश में बिके 77 करोड़ इन्कन्डेसन्ट बल्‍बों के स्‍थान पर एलईडी बल्‍ब लगाना है। इसके परिणामस्‍वरूप हर साल 20,000 मेगावॉट लोड में कटौती होगी, 100 बिलियन किलोवॉट घंटा ऊर्जा की बचत होगी और ग्रीन हाउस गैसों के उत्‍सर्जन की दिशा में 80 मिलियन टन की बचत होगी। 4 रूपये प्रति किलोवॉट घंटा औसत शुल्‍क दर मान लिये जाने पर उपभोक्‍ताओं के बिजली के बिलों में सालाना 40,000 करोड़ रूपये की बचत होगी। 

पृष्‍ठभूमि :

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने डीईएलपी योजना का शुभारंभ जनवरी, 2015 को किया था। इसे 100 शहरों में कार्यान्वित किया जा रहा है। इस योजना के माध्‍यम से घरेलू उपभोक्‍ताओं को उत्‍तम गुणवत्‍ता वाले एलईडी बल्‍ब 100-105 रूपये की रियायती दर पर उपलब्‍ध कराये गये, जबकि इन बल्‍बों की बाजार में कीमत 350 से 450 रूपये है। डीईएलपी की योजना ने समुच्‍चयन और पारदर्शी खरीद के माध्‍यम से एलईडी बल्‍बों के बाजार मूल्‍य को भी महत्‍वपूर्ण रूप से प्रभावित किया है। ईईएसएल जून, 2015 को एलईडी बल्‍ब 73 रूपये में खरीदने में सक्षम हो सकी जबकि फरवरी 2014 में इन्‍हें 310 रूपये में खरीदा गया था, इस प्रकार इस मूल्‍य में 75 प्रतिशत से ज्‍यादा कमी आई। 

डीईएलपी का लक्ष्‍य देश में बिके 77 करोड़ इन्कन्डेसन्ट बल्‍बों के स्‍थान पर एलईडी बल्‍ब लगाना है। इसके परिणामस्‍वरूप हर साल 20,000 मेगावॉट लोड में कटौती होगी, 100 बिलियन किलोवॉट घंटा ऊर्जा की बचत होगी और ग्रीन हाउस गैसों के उत्‍सर्जन की दिशा में 80 मिलियन टन की बचत होगी। 4 रूपये प्रति किलोवॉट घंटा औसत शुल्‍क दर मान लिये जाने पर उपभोक्‍ताओं के बिजली के बिलों में सालाना 40,000 करोड़ रूपये की बचत होगी। 

डीईएलपी डैश्बोर्ड :

राष्‍ट्रीय डीईएलपी डैश्बोर्ड एक एकीकृत, समयोचित और वेब आधारित डैश्‍बोर्ड है जो राष्‍ट्रीय स्‍तर पर वितरित एलईडी बल्‍बों की संख्‍या को तत्‍काल दर्शाता है और 15 सेकेंड के अंतराल पर गतिशीलता के साथ नया हो जाता है। इसे डीईएलपी योजना कार्यान्वित कर रहे विविध राज्‍यों से समयोचित रूप से मिलने वाली जानकारी को जोड़कर प्राप्‍त किया जाता है। इस योजना की प्र‍गति का जायजा http://www.delp.in/के माध्‍यम से लिया जा सकता है। 

माइक्रोसाइट: 

माइक्रोसाइट www.iledtheway.in के माध्‍यम से, उपभोक्‍ता एलईडी बल्‍बों के इस्‍तेमाल की शपथ ले सकते हैं, जो सुरक्षित हैं, ज्‍यादा रोशनी से भरपूर हैं और कम ऊर्जा की खपत करते हैं। माइक्रोसाइट के विजिटर होम पेज पर प्रमुखता से प्रदर्शित होने वाले ‘टेक अ प्‍लेज’ टैब को क्लिक करके इस मुहिम से जुड़ सकते हैं। 

उपभोक्‍ताओं को मिलने वाले लाभ: 

इस योजना के अंतर्गत, घरेलू उपभोक्‍ताओं को उच्‍च गुणवत्‍ता वाले ऊर्जा दक्ष एलईडी बल्‍ब निर्धारित केंद्रों पर बाजार मूल्‍य से एक-तिहाई दाम पर वितरित किये जा रहे हैं। इससे उपभोक्‍ताओं के बिजली के बिल में हर साल एक एलईडी बल्‍ब पर 160 रूपये से 400 रूपये की कटौती होने का अनुमान है, इस प्रकार बल्‍ब की कीमत एक साल से भी कम समय में वसूल हो जाती है। डीईएलपी योजना के अंतर्गत मिलने वाले एलईडी बल्‍ब बाजार में उपलब्‍ध अन्‍य बल्‍बों से तकनीकी रूप से श्रेष्‍ठ हैं। 

डीईएलपी के अंतर्गत खरीदा गया 7 वॉट के एलईडी 60 वॉट के इन्कन्डेसन्ट बल्‍ब जितनी और ज्‍यादातर मामलों में बेहतर प्रबलता और रोशनी देता है। 60 वॉट के इन्कन्डेसन्ट बल्‍ब की लूमन आउटपुट 450 लूमन्‍स है जबकि डीईएलपी योजना के अंतर्गत वितरित किये जा रहे 7 वॉट के एलईडी बल्‍ब की लूमन आउटपुट 600 लूमन्‍स है। एलईडी प्रकाश स्रोत से किसी स्‍थान पर पड़ने वाले लूमन्‍स का अनुपात परंपरागत प्रकाश स्रोत से कहीं ज्‍यादा अधिक है। इस योजना के अंतर्गत वितरित किये जा रहे एलईडी बल्‍ब तीन साल नि:शुल्‍क बदले जाने की वॉरन्टी के साथ उपलब्‍ध हैं। इस योजना के अंतर्गत दिये गये एलईडी बल्‍ब सीएफएल और अन्‍य इन्कन्डेसन्ट बल्‍ब की तुलना में 50 से 80 प्रतिशत ज्‍यादा कारगर हैं। 

अब हैक नहीं हो सकेगी IRCTC वेबसाइट, पढ़िए कारण


रेल मंत्रालय ने स्वचालित सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हुए टिकट बुकिंग पर नियंत्रण करने के लिए आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर विभिन्न कदम उठाए हैं। भारतीय रेल द्वारा इस संबंध में आज (19 जनवरी, 2016) एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में आईआरसीटीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, श्री डॉ. ए.के. मनोचा, सीआरआईएस के प्रबंध निदेशक श्री संजय दास, सी एंड आईएस के कार्यकारी निदेशक श्री यू. हजारिका और रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। स्वचालित सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हुए रेल टिकट बुकिंग नियंत्रित करने के लिए आईआरसीटीसी और सीआरआईएस ने विभिन्न उपाय किये हैं।

इंटरनेट टिकटिंग :

वर्ष 2002 में आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर इंटरनेट द्वारा टिकट की बुकिंग शुरू की गई थी, जिसमें पहले दिन 29 टिकट बुक किये गये थे, जबकि आज एक ही दिन में 13 लाख से भी अधिक टिकटों की बुकिंग हो रही है। 

आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर इंटरनेट के द्वारा टिकटों की बुकिंग में पिछले वर्षों के दौरान उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है और कुल आरक्षित टिकटों में इसकी हिस्सेदारी में भी उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है।

नेक्स्ट जनरेशन ई-टिकट प्रणाली (एनजीईटी) :

ई-टिकटिंग की बढ़ती हुई मांग और क्षमता की कमी के कारण टिकट बुकिंग करने की प्रक्रिया में समस्याएं और वेबसाइट के धीमेपन और अनुपलब्धता की शिकायतें प्राप्‍त हुई। टिकटों की बढ़ती हुई बुकिंग को संभालने के लिए नेक्स्ट जनरेशन ई-टिकट प्रणाली (एनजीईटी) का 28 अप्रैल, 2014 को शुभारंभ किया गया। इसकी क्षमता 2000 टिकट से बढ़ाकर 7200 टिकट प्रति मिनट कर दी गई। वेबसाइट और आईआरसीटीसी की वेबसाइट के माध्‍यम से अब टिकटों को आसानी और तेजी से बुक किया जा सकता है। 

स्क्रिप्टिंग:

स्क्रिप्टिंग या स्क्रिप्ट भाषा एक प्रोग्रामिंग भाषा है, जो विशेष रन-टाइम वातावरण के लिए स्क्रिप्‍ट प्रोग्राम में मदद करती है। स्क्रिप्टिंग भाषा संकलन की बजाय अकसर व्याख्यित होती है। स्क्रिप्टिंग प्रौद्योगिकी ग्राहक के वेब पन्नों में आंकड़ों के भरने की प्रक्रिया को स्वचालित करने के लिए भी उपयोगी है। स्क्रिप्टिंग गूगल क्रोम, मोजरिला और अन्य ब्राउज़रों में उपलब्ध है।

कैप्चा:

कैप्चा स्वचालित रूप से मानव और कंप्यूटर को जानकारी देता है। यह एक प्रोग्राम है, जो वेबसाइट की हमलों से सुरक्षा करता है और कैप्चा प्रौद्योगिकी स्क्रिप्टिंग या अन्य कंप्यूटर प्रोग्राम का उपयोग करते हुए कई स्वचालित अनुरोधों का सृजन करता है। सामान्य तौर पर, एक कैप्चा स्वचालित स्क्रिप्ट द्वारा दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रयोग किया जाता है।

आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर स्क्रिप्टिंग:

तत्काल और एआरपी (अग्रिम आरक्षण अवधि) टिकटों की मांग दिन प्रतिदिन बढ़ रही है, इसलिए तेजी से बुकिंग के लिए टिकट बुकिंग प्रक्रिया के दौरान विभिन्न फॉमों को भरने के लिए ग्राहकों की ओर से वेब पेजों में आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर स्क्रिप्टिंग प्रौद्योगिकी का उपयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। इसलिए टिकट बुकिंग प्रक्रिया के दौरान प्रयुक्त फार्म भरने के लिए ब्‍लैक टीएस सॉफ्टवेयर विकसित करने के लिए प्रोग्राम द्वारा स्क्रिप्टिंग प्रौद्योगिकी और उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्क्रिप्टिंग के लिए उपयोग किये जाने वाली किसी भी वेबसाइट के प्रोग्रामों द्वारा ग्राहकों द्वारा मानदंडों को आराम से देखा जा सकता है

स्वचालित सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल करके इंटरनेट टिकट बुकिंग की सुविधा का दुरुपयोग रोकने के लिए आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर रोकथाम लागू की गई है। 

पंजीकरण:

स्वचालित पंजीकरण रोकने के लिए पंजीकरण पृष्ठ पर आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर कैप्चा को लागू किया गया है। 

किसी व्‍यक्ति द्वारा अपने मोबाइल पर कई पंजीकरण रोकने के लिए वेबसाइट पर एक मोबाइल एक रजिस्‍ट्रेशन भी लागू किया गया है। 

बुकिंग:

यात्री आरक्षण फॉर्म भरने में कम से कम समय लगाना सुनिश्चित करना। 

न्यूनतम भुगतान समय चेक भुगतान की प्रक्रिया के लिए लागू किया हैं।

केवल दो तत्काल टिकट एकल यूजर आईडी के लिए बुक किये जा सकते हैं। 

माह में अधिकतम 10 टिकट एक यूजर आईडी पर बुक किये जा सकते हैं।

एक यूजर को एक समय में एक बिंदु पर केवल एक ही लॉगिन कर सकता है।

एक आईपी पते पर केवल दो तत्काल टिकट प्राप्‍त किये जा सकते है। 

ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) नेट बैंकिंग भुगतान विकल्पों में किया गया है।

कैप्चा लॉग इन आरक्षण फार्म पेज और भुगतान पेज पर लागू किया गया है। 

टिकट की बुकिंग में लगने वाले समय :

नेक्स्ट जनरेशन ई-टिकट प्रणाली (एनजीईटी) एक मिनट में 15000 टिकट के काम को संभालने में सक्षम है। इसलिए एक सैकेंड में 250 टिकट सा‍थ-साथ बुक किये जा सकते है। 35 सैकेंड से भी कम समय में एक टिकट बुक किया जा सकता है।

वेबसाइट का दुरूपयोग रोकने के लिए विभिन्न जांच और कैप्‍चा लागू किये गये है। पीआरएस काउंटरों पर जहां मानवीय प्रक्रिया के माध्‍यम से 35 सैकेंड में बुक करना संभव है, वहीं स्क्रिप्टिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग करके भी पहले 35 सैकेंडों में तत्‍काल टिकट बुक करना संभव नहीं है। 

हैकिंग नियंत्रण करने के लिए सुरक्षा उपाय 

एनजीर्इटी प्रणाली में गहरी रक्षा के साथ बहुस्तरीय सुरक्षा:

फ्रंट एंड बैक एंड फ़ायरवॉल, नेटवर्क घुसपैठ की रोकथाम प्रणाली, वेब अनुप्रयोग फ़ायरवॉल, सुरक्षा जानकारी इवेंट मैनेजमेंट (एसआईईएम), होस्‍ट घुसपैठ निवारण प्रणाली (एचआर्इपीएस, वेब/ऐप सर्वर हार्डनिंग, डाटाबेस सर्वर हार्डनिंग आदि से युक्‍त डाटा केन्‍द्र में अति आधुनिक सुरक्षा सॉफ्टवेयर अनुप्रयोग में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए श्रेष्‍ठ प्रक्रिया अपनाना, जिनके कारण एनजीईटी प्रणाली में कोई हैकिंग प्रयास सफल नहीं होता। 

थर्ड पार्टी ऑडिट 

समय-समय पर बाहरी ऑडिट का आयोजन किया जाता है। अभी हाल में किये गये ऑडिट में ऑडिट करने वाली एजेंसी ने यह प्रमाणित किया है कि वेब अनुप्रयोग शीर्ष 10 ओडब्‍ल्‍यूएएसपी और अन्‍य किसी भी ज्ञात खामियों से मुक्‍त है। इसलिये होस्टिंग हेतु सुरक्षित है। 

सुरक्षा सतर्कता के लिए सीईआरटी-इन पर इंटरनेट ट्रेफिक की रियल टाइम फीड : इंटरनेट गेटवे रूटर्स के माध्‍यम से पैकिट हेडर्स के ट्रेफिक के पारगमन के लिए सीईआरटी-इन के रियल टाइम में उनके विश्लेषण और रिपोर्टिंग के लिए अग्रेसित किया जाता है। इसके जवाब में, सीईआरटी-इन रियल टाइम अलर्ट भेजता है (कुछ मामलों में दुर्भावनापूर्ण गतिविधि का पता चला है)। 

सुरेश प्रभु ने वाशिंगटन में विश्व बैंक के समक्ष भारतीय रेल की उपलब्धियाँ रखी


केंद्रीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने 13 जनवरी 2015 से 15 जनवरी 2015 तक विश्व बैंक के अनुरोध पर वाशिंगटन डीसी,अमेरिका का आधिकारिक दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्व बैंक के पूर्ण सत्र “परिवहन और शहर –जलवायु परिवर्तन पर लक्ष्य प्राप्ति के मुख्य संचालक” को संबोधित किया। अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान श्री प्रभु ने कई संगोष्ठियों,सम्मेलन,बैठकों और कार्यक्रमों में भाग लिया

विश्व बैंक के पूर्ण सत्र “परिवहन और शहर –जलवायु परिवर्तन पर लक्ष्य प्राप्ति के मुख्य संचालक” को संबोधित करते हुए रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने भारतीय रेल द्वारा कम लागत में दीर्धकालिक परिवहन प्रदान करने की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल अपनी ऊर्जा आवश्यकतों को पूर्ण करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के श्रोतों जैसे सौर और पवन ऊर्जा का प्रयोग करने के साथ-साथ दीर्धकालिक लक्ष्यों को प्राप्त करने और दक्षता में सुधार के लिए ऊर्जा लेखा परीक्षण करा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी दीर्धकालिक परिवहन समाधान को आर्थिक रूप से सुगम, सामाजिक रूप से उचित और पर्यावरण के अनुकूल होना चाहिए। उन्होंने बहुतंत्रीय परिवहन प्रणाली को बनाने का समर्थन करते हुए कहा इससे रेल और सड़क ढांचे एक दूसरे का पूरक बनेगें और एकीकृत परिवहन प्रणाली का निर्माण हो सकेगा। 

विश्व बैंक और आईएफसी अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक में रेल मंत्री श्री प्रभु ने भारतीय रेल के विस्तार,आधुनिकीकरण, विकेंद्रीकरण, निर्णय लेने, क्षमता में सुधार करने, यात्रियों की आशाओं के अनुरूप कार्य करने, स्वच्छ ऊर्जा का प्रयोग करने,इलेक्ट्रानिक ठेके द्वारा अधिक पारदर्शिता की शुरूआत करने और प्रवृत्ति बदलने जैसे विषयो पर भारतीय रेल के प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने विशेष तौर पर अपने मंत्रालय की नई शुरूआतों और भारतीय रेल के साथ विश्व बैंक की भागीदारी पर विश्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष एक प्रस्तुति भी दी। विश्व बैंक और आईएफसी भारतीय रेल को इसके लक्ष्य प्राप्त करने में सहयोग के लिए मिलजुलकर कर कार्य कर रहे हैं। 

रेल मंत्री श्री प्रभु ने अपने दौरे में अमेरिका के परिवहन मंत्री श्री एंटोनी फाक्स से भी मुलाकात की। बैठक के दौरान श्री फाक्स की भारत यात्रा के दौरान अप्रैल 2015 में हस्ताक्षर किए गए सहयोग सहमति पत्र के अनुरूप परिवहन क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को ओर मजबूत करने पर विचार विमर्श हुआ। श्री प्रभु ने दोनों देशों के बीच परिवहन क्षेत्र में ज्ञान के आदान-प्रदान, प्रौद्योगिकी सहयोग और व्यापार सहयोग के क्षेत्र में अपार संभावनाओं का जिक्र किया। दोनो पक्ष संयुक्त कार्यशाला और एक दूसरे देशो में दौरे के द्वारा रेलवे सुरक्षा और क्षमता निर्माण में सहयोग को ओर प्रगाढ़ करने पर सहमत हुए। 

यूएस एक्जिम बैंक के अध्यक्ष श्री फ्रेड पी. हुजबर्ग के साथ बैठक के दौरान रेल मंत्री ने भविष्य में भारत के रेल क्षेत्र में निवेश और व्यापार के मद्देनजर भारत पर केंद्रित वित्तीय माडल की योजना की संभावना पर भी विचार किया। बैठक में दोनो पक्ष भारत के आधारभूत ढांचे में रूचि रखने वाले संभावित दीर्धकालिक निवेशकों के लिए रोड शो पर संयुक्त रूप से कार्य करने पर सहमत हुए।

श्री प्रभु ने ओवरसिज प्राइवेट इनवेस्टमेंट कार्पोरेशन( ओपीआईसी) के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री एलिजाबेथ एल. लिटिलफील्ड से भी मुलाकात की और भारतीय रेल में ओपीआईसी के वित्तीय सहयोग की संभावनाओं पर विचार विर्मश किया। 

इस दौरे में भारत अमेरिका व्यापार परिषद ने एक गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने अमेरिका के व्यापरियों के लिए निवेश के अवसरों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होनें बताया कि भारतीय रेल ने यात्री और माल भाडे के किरायो में पारदर्शिता, निजी-सार्वजनिक भागीदारी और ऊर्जा दक्षता सुनिश्चित करने के लिए नियामक ढांचे का मसौदा तैयार किया है।यह मसौदा वेबसाइट पर जनता की राय जानने के लिए उपलब्ध है। कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी कंपनियो ने सूचना-प्रौद्योगिकी,निर्माण,अनुसंधान,वित्त और स्टेशनों के विकास आदि क्षेत्रो में अपनी क्षमता और दक्षता प्रदान करने का प्रस्ताव दिया।

विचार विमर्श के दौरान रेल मंत्री ने आगामी पांच वर्षों में 142 बिलियन अमेरिकी डॉलर निवेश करने के बारे में बताते हुए कहा कि आशा है कि अगले पांच वर्षों में यह निवेश दुगना होगा। वर्ष 2015 के रेल बजट में की गई घोषणाओं के अनुरूप 110 सुधार कार्यक्रमों को लागू किया है। रेलवे आधारभूत ढांचे के अधिकांश क्षेत्रों उपनगरीय रेल,मेट्रो रेल,लोकोमोटिव,निर्माण और रखरखाव,सिग्नल,बिजली के कार्य और निर्धारित माल भाडे की लाइनों में 100 प्रतिशत निजी निवेश की अनुमति प्रदान की गई है। 

श्री प्रभु ने क्रियान्यन के स्तर पर कई परियोजनाओं का जिक्र किया। इनमें निर्धारित माल भाडा कारिडोर, तेज गति वाली रेल, अधिक यातायात वाले क्षेत्रो में रेल पटरियों को दुगना और तिगुना करना,400 रेलवे स्टेशनों और सिग्नल प्रणाली का आधुनिकीकरण करने और सुरक्षा के उपाय में सुधार शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय रेल ने जीई और एल्सटाम को 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर के ठेके देने में पूर्ण रुप से पारदर्शी प्रकिया अपनाई गई। उन्होंने जापान से मिलने वाले निवेश का जिक्र किया और कहा कि जापान अत्यधिक रिआयती दरों पर ऋण देकर भारत को पहली बुलेट ट्रेन चलाने में सहयोग कर रहा है। रेल विभाग अमेरिका सहित कई देशों के साथ सहयोग कर रहा है। उन्होंने अमेरिका के व्यापारियों से उभरते हुए निवेश के अवसरों का लाभ उठाने के लिए कहा। 

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