नारायण साईं कुरूक्षेत्र से गिरफ्तार
आशाराम बापू को फंसाया जा रहा है - धर्मपत्नी
आसाराम बापू मुझसे विवाह करने के पश्चात केवल सात वर्षों में गृहस्थी से विरक्त हो गए थे । उन्होंने ब्रह्मचर्य स्वीकार किया था । तत्पश्चात मैं उन्हें गुरु मानने लगी । अत: इतने वर्ष गृहस्थी से विरक्ति स्वीकार किया पुरुष लैंगिक शोषण का दुष्कर्म नहीं करेगा । उन्हें फंसाया जा रहा है, ऐसा आरोप बापू की धर्मपत्नी श्रीमती लक्ष्मीबाई द्वारा लगाया गया है । निर्दोष हैं आसाराम बापू, सोनिया के इशारे पर ईसाई कर रहे धर्मान्तरण - सिंघल
आशाराम बापू पर समाचार प्रसारित करने की शैली पर इंडिया टीवी को चेतावनी
आसाराम बापू के महिला आश्रम पर बेबुनियाद और असत्य आरोप - गुजरात महिला आयोग
आसाराम बापू को फंसाने के लिए रचे गये षड्यंत्र का पर्दाफाश-सुरक्षा गार्ड पर केस दर्ज
आसाराम बापू के आश्रम में अवैध निर्माण को तोड़ने का काम शुरू
गुजरात में आसाराम बापू के आश्रम को जिला प्रशासन ने अवैध निर्माण को तोड़ने का काम शुरू कर दिया है।गुजरात के नवसारी जिले में आसाराम बापू के भैरवी आश्रम को जिला प्रशासन के दस्ते ने अवैध निर्माण को तोड़ने का काम शुरू कर दिया है।17 हजार 620 वर्ग मीटर पर अवैध निर्माण किया हुआ है जिसे तोड़ने का काम जिला प्रशासन के लोगों ने शुरू कर दिया है वहां गौशाला और सतसंग हाल बना हुआ है।गौरतलब है कि गुजरात हाई कोर्ट में बापू के आश्रम के पास अतिक्रमण को लेकर एक जनहित याचिका दर्ज की गई थी।
आसाराम बापू पर अब कानून का फंदा कसता जा रहा है। अहमदाबाद कलेक्टर ने कहा कि जल्द ही अहमदाबाद के साबरमती में आसाराम बापू की अवैध कब्जे वाली जमीन पर बुलडोजर चल सकता है।
कलेक्टर के मुताबिक अब तक आसाराम की तरफ से इस जमीन के बारे में कोई सफाई नहीं दी गयी है, जिसके कारण यह फैसला लिया जा सकता है।
मालूम हो कि अहमदाबाद के साबरमती में आसाराम बापू ने 66 हजार वर्ग मीटर की जमीन पर कब्जा कर रखा है, जिस पर उनसे जवाब मांगा गया था और अब जवाब देने की अवधि खत्म होने के कारण यह कार्रवाई हो सकती है।
आसाराम आश्रम ने उजागर की, 'आज तक' द्वारा किये गए तथाकथित स्टिंग ऑपरेशन की वास्तविकता
क्लिक करके बड़ा देख सकतें हैं या इस लिंक पर भी जा सकतें हैं :
http://www.ashram.org/Press/PressView/tabid/912/smid/1860/ArticleID/648/reftab/364/Default.aspx
आशाराम बापू के मणिमहेश पर्वत के बयान पर तीखी आलोचना
वृहत संहिता के अनुसार, ईश्वर वहीं क्रीड़ा करते हैं जहां झीलों की गोद में कमल खिलते हों और सूर्य की किरणें उसके पत्तों के बीच से झांकती हो, जहां हंस कमल के फूलों के बीच क्रीड़ा करते हों...जहां प्राकृतिक सौंदर्य की अद्भुत छटा बिखरी पड़ी हो।' हिमालय पर्वत का दृश्य इससे भिन्न नहीं है। इसलिए इस पर्वत को ईश्वर का निवास स्थान भी कहा गया है। भगवदगीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है, 'पर्वतों में मैं हिमालय हूं।' यही वजह है कि हिंदू धर्म में हिमालय पर्वत को विशेष स्थान प्राप्त है। हिंदुओं के पवीत्रतम नदी गंगा का उद्भव भी इसी हिमालय पर्वत से होता है।
जुलाई-अगस्त के दौरान पवित्र मणिमहेश झील हजारों तीर्थयात्रियों से भर जाता है। यहीं पर सात दिनों तक चलने वाले मेला का आयोजन भी किया जाता है। यह मेला जन्माष्टमी के दिन समाप्त होता है। जिस तिथि को यह उत्सव समाप्त होता है उसी दिन भरमौर के प्रधान पूजारी मणिमहेश डल के लिए यात्रा प्रारंभ करते हैं। यात्रा के दौरान कैलाश चोटि (18,556) झील के निर्मल जल से सराबोर हो जाता है। कैलाश चोटि के ठीक नीचे से मणीमहेश गंगा का उदभव होता है। इस नदी का कुछ अंश झील से होकर एक बहुत ही खूबसूरत झरने के रूप में बाहर निकलती है। पवित्र झील की परिक्रमा (तीन बार) करने से पहले झील में स्नान करके संगमरमर से निर्मित भगवान शिव की चौमुख वाले मूर्ति की पूजा अर्चना की जाती है। कैलाश पर्वत की चोटि पर चट्टान के आकार में बने शिवलिंग का इस यात्रा में पूजा की जाती है। अगर मौसम उपयुक्त रहता है तो तीर्थयात्री भगवान शिव के इस मूर्ति का दर्शन लाभ लेते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार कैलाश उनकी अनेक आपदाओं से रक्षा करता है, यही वजह है कि स्थानीय लोगों में महान कैलाश के लिए काफी श्रद्धा और विश्वास है। यात्रा शुरू होने से पहले गद्दी वाले अपने भेड़ों के साथ पहाड़ों पर चढ़ते हैं और रास्ते से अवरोधकों को यात्रियों के लिए हटाते हैं। ताकि यात्रा सुगम और कम कष्टप्रद हो। कैलाश चोटि के नीचे एक बहुत बड़ा हिमाच्छादित मैदान है जिसको भगवान शिव के क्रीड़ास्थल 'शिव का चौगान' के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि यहीं पर भगवान शिव और देवी पार्वती क्रीड़ा करते हैं। वहीं झील के कुछ पहले जल का दो स्रोत है। इसको शिव क्रोत्रि और गौरि कुंड के नाम से जाना जाता है।
चंबा के पुलिस उपायुक्त देवेश कुमार ने बताया, ""छ़डी यात्रा के लिए सारे प्रबंध कर लिए गए हैं। यह यात्रा चंबा जिले में 1,000 वर्ष पुराने लक्ष्मीनारायण मंदिर से शुरू होगी।"" वर्ष में एक बार एक महीने तक चलने वाली पवित्र "मणिमहेश तीर्थयात्रा" की शुरूआत 20 अगस्त को हुई थी और यह 15 सितंबर को राधाअष्टमी के दिन समाप्त हो जाएगी। राधाअष्टमी के दिन ही हजारों श्रद्धालू मणिमहेश झील में स्नान करते हैं। इस तीर्थस्थान के बारे में कहा जाता है कि श्रद्धालु कैलाश पर्वत का दर्शन तभी कर पाते हैं जब भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। जब यह चोटी बादलों के पीछे छुप जाती है तो माना जाता है कि भगवान शिव प्रसन्न नहीं हुए।
तो इस बार आशाराम बापू भी अपने हेलीकाप्टर से इस यात्रा के लिए पहुचे और वापस आने पर उन्होंने कहा वहां कोई मणि - वणी नहीं है, असली मणि तो मेरे पास है, जो मेरे सत्संग का लाभ उठाता है उसे इस यात्रा करने को कोई जरुरत ही नहीं है. मेरे लिए यह यात्रा एक सजा के सामान थी.
आशाराम जी के इस बयान की स्थानीय लोगों में काफी आलोचना हो रही है और सभी धार्मिक और सामाजिक संघटनो ने भरी रोष भी जताया है, हिन्दू जागरण मंच ने कहा की आशाराम जी ने मणि तो नहीं देखी लेकिन उनका स्टिंग ऑपरेशन सभी ने देखा है.
शिवसेना ने कहा है कि आशाराम जी को अपने इस बयान के लिए पूरे देश से माफ़ी मांगनी चाहिए.
पूरा हिमाचल प्रदेश आशाराम जी के इस बयान से अचंभित है और आशाराम जी के प्रति लोगो की आस्था में भारी कमी आ गई है, लोग तो यहाँ तक बोल रहें हैं कि आशाराम जी को दंभ हो गया है, वो टीवी के भगवान् बन गएँ हैं.





