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सशक्त लोकपाल के लिए भाजपा का अन्ना को पूरा आश्वासन

अन्ना हज़ारे और उनके साथी कार्यकर्ताओं ने आज यहां भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। इसमें समाज के सदस्यों को प्रभावी और सशक्त लोकपाल के मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल के समर्थन का आश्वासन मिला।

हज़ारे, अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी के साथ करीब डेढ़ घंटे चली इस अहम बैठक में लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली,, जसवंत सिंह, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह, वेंकैया नायडू, अनंत कुमार, एस एस अहलूवालिया और रविशंकर प्रसाद जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

विदेश यात्रा पर जाने के कारण बैठक में पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी शामिल नहीं हुए।

बैठक के बाद भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने हज़ारे पक्ष को आश्वासन दिया है कि भाजपा प्रभावी और मजबूत लोकपाल के गठन की उनकी मांग का समर्थन करेगी। हज़ारे पक्ष से मिलने के बाद लोकपाल के मुद्दे पर पार्टी का औपचारिक रुख तय करने के लिये भाजपा के शीर्ष नेताओं ने अलग से बैठक की। इस मुद्दे पर कल राजग की भी बैठक होने वाली है।’’ उन्होंने कहा कि हज़ारे पक्ष के साथ चर्चा काफी अच्छी और सार्थक रही। इसमें लोकपाल विधेयक के दोनों मसौदों पर चर्चा हुई। कुछ मुद्दों पर हज़ारे पक्ष ने स्थिति स्पष्ट की।

हज़ारे से संवाददाताओं से बातचीत में भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ हुई बातचीत पर ‘पूर्ण संतुष्टि’ जताई। उन्होंने कहा कि बातचीत सार्थक रही और भाजपा नेताओं ने हमारा पक्ष ध्यानपूर्वक सुना। हमने दोनों मसौदों पर चर्चा की। अब यह देखना होगा कि संसद में किस तरह का विधेयक पेश होता है और राजनीतिक दलों क्या रुख रहता है।’’

मध्यप्रदेश सरकार की पहल: जच्चा-बच्चा को नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं

मध्य प्रदेश अब में जच्चा-बच्चा को शासकीय चिकित्सालयों में नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। राज्य सरकार ने नि:शुल्क चिकित्सा की व्यवस्था शुरूआत मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के मकसद से की है।

राज्य सरकार द्वारा अस्तित्व में लाई गई नई व्यवस्था के मुताबिक शासकीय चिकित्सा संस्थाओ में महिलाओं को प्रसव, सीजेरियन ऑपरेशन, दवाएं एवं सामग्री, सभी प्रकार की जांच, भोजन, ब्लड एवं परिवहन सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके अलावा महिला को घर से स्वास्थ्य संस्था तक आने, आवश्यकता प़डने पर किसी ब़डे चिकित्सालय में रेफर करने तथा छुट्टी मिलने पर घर तक जाने के लिए नि:शुल्क वाहन उपलब्ध करवाया जाएगा।

इसके साथ ही जननी को सभी प्रकार के उपभोक्ता शुल्क से भी छूट दी गई है , जिसमें अस्पताल में भर्ती होने पर या डाक्टर को दिखाने पर बनाए जाने वाले पर्चे का शुल्क शमिल है। महिलाओं की ही तरह नवजात शिशुओं को भी शासकीय चिकित्सालयो में नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।

शिशु
एवं मातृ-मृत्यु दर में कमी लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उसी क़डी मेें सरकार ने सिर्फ जिला अस्पतालों में मिलने वाली नि:शुल्क आहार व्यवस्था का निचली चिकित्सा संस्थाओं तक विस्तार किया है बल्कि मां एवं नवजात शिशु के लिए शासकीय चिकित्सालयों में स्वास्थ्य सेवाएं नि:शुल्क कर दी हैं।

हमारे लिए राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ अछूत नहीं - अन्ना हजारे

गांधीवादी समाजसेवी अन्ना हज़ारे के लिए राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ अछूत नहीं है. उनका कहना है कि अगर ज़रूरत पड़ी को उन्हें आरएसएस से मदद लेने में कोई संकोच नहीं होगा.

अन्ना
ने कहा, 'मेरे लिए दूसरे संस्थानों की तरह आरएसएस कोई अछूत नहीं है। अगर जरूरत पड़ी तो उनसे बात करेंगे. हम एकता चाहते हैं।'

इस
सवाल पर कि क्या वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी बातचीत करेंगे, हज़ारे ने कहा, 'हां, आरएसएस से भी. वे हमारे दुश्मन नहीं हैं.'

राकांपा
प्रमुख शरद पवार की 'बाबाओं और अन्नाओं' से दूरी बनाकर रखने संबंधी टिप्पणी पर कहा, 'हम भी हमारा काम इसलिये कर पा रहे हैं क्योंकि पवार हमसे दूर हैं.'

मुगलों के अंतिम वंशज ने माँगा बहादुरशाह जफर के लिए 'भारत रत्न'

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मुगल खानदान के अंतिम वंशज होने का दावा करने वाले याकूब हबीबुद्दीन तसी ने बहादुरशाह जफर को देश के सर्वोच्च नागरिकता सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजे जाने की मांग की है।

मुगल बादशाह शाहआलम के उर्स के मौके पर हैदराबाद से दिल्ली आए हबीबुद्दीन ने कहा कि वह केंद्र सरकार से लगातार इस बात का आग्रह करते रहे हैं कि देश के महान स्वतंत्रता सेनानी और 1857 की क्रांति के हीरो बहादुरशाह जफर को देश के सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया जाए।

उन्होंने कहा कि वह संसद में बहादुरशाह जफर की प्रतिमा लगाए जाने का आग्रह भी केंद्र सरकार से कर चुके हैं। उन्होंने ताजमहल के खराब रखरखाव और अपर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था पर निराशा भी जाहिर की।

मंहगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर जनता के सामने खड़े होने से घबराई कांग्रेस

मंहगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर जनता के सामने खड़े होने से घबराई कांग्रेस पार्टी ने अब अपने प्रदेशाध्यक्ष की सभा को कार्यकर्ताओं तक ही सीमित कर दिया है। पहले नए प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान की सभा राज्य स्तरीय भव्य होने जा रही थी, लेकिन हाल ही में डीजल रसोई गैस की कीमत में हुई बढ़ोतरी ने पार्टी को बैकफुट पर ला दिया है।

पार्टी
सूत्रों के अनुसार, स्थिति को देखते हुए फिलहाल राज्य सरकार के मंत्री, कांग्रेसी विधायक, हारे हुए प्रत्याशी और राजनीतिक नियुक्ति पाने के लिए कतार में लगे नेताओं को अपने-अपने क्षेत्र से कार्यकर्ताओं को लाने के निर्देश दिए गए हैं।

यहीं
नहीं इसके अलावा आम जनता और अन्य लोगों को फिलहाल रैली से दूर रखा गया है। कुछ हजार में सिमटे : नए प्रदेशाध्यक्ष की पहली सभा के लिए सभी कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता अपनी-अपनी ओर से भीड़ जुटाने में जुट गए थे। यहां तक की जिलाध्यक्ष स्तर के नेता भी लोगों को आमंत्रण देने में लगे थे।

अब
प्रदेशाध्यक्ष के निर्देशों के चलते इन लोगों ने भी भीड़ जुटाने का काम रोक दिया है। माना जा रहा है कि अब प्रदेशाध्यक्ष की सभा कुछ हजार कार्यकर्ताओं पर ही सिमट गई है।

रामलीला मैदान में पुलिस ज्यादती की शिकार राजबाला अत्यंत गंभीर

योग गुरू बाबा रामदेव के अनशन के खिलाफ इस महीने की शुरूआत में रामलीला मैदान में की गई कार्रवाई के दौरान घायल 51 वर्षीया महिला राजबाला की रीढ़ क्षतिग्रस्त है और उसकी हालत अत्यंत गंभीर है।

चिकित्सकों ने सोमवार को यह जानकारी दी। जी.बी. पंत अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एन. शशि गुरूराजा ने एक बयान में कहा, ""घायल महिला को लगातार वेंटिलेटर का सहारा दिया जा रहा है और उसकी हालत अत्यंत गंभीर है।""

उन्होंने कहा कि राजबाला होश में है और इशारों में बात करती है। उसका पांच जून को रीढ़ की हड्डी का आपरेशन हुआ था। गर्दन के नीचे उसका पूरा शरीर पक्षाघात से ग्रस्त है।

बयान में कहा गया है, ""उसकी ह्वदयगति और रक्तचाप में कोई भारी बदलाव नहीं आया है। उसके आवश्यक अंग मशीनों के सहारे कार्य कर रहे हैं।""

मंहगाई से त्रस्त भाजपा नेता प्रभात झा ने मांगी इच्छामृत्यु

बीजेपी की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष प्रभात झा ने महंगाई को मौत के बराबर बताते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील से इच्छामृत्यु की मांग की है। प्रभात ने इच्छामृत्यु के लिए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील को लेटर लिखा है।प्रभात द्वारा राष्ट्रपति को लिखे गए लेटर में कहा गया है कि कांग्रेस की गठबंधन वाली सरकार ने 100 दिन में महंगाई कम करने का भरोसा दिलाया था मगर सत्ता हासिल करने के सात साल बाद भी इस पर काबू नहीं पाया जा सका है, बल्कि महंगाई मौत का पर्याय बन चुकी है।

लेटर में आगे कहा गया है कि देश के 115 करोड़ लोग महंगाई की मार से जूझ रहे हैं। इतना ही नहीं उनके लिए यह महंगाई समस्या बन चुकी है, लिहाजा वह इससे छुटकारा पाने के लिए इच्छामृत्यु चाहते हैं।प्रभात झा ने कहा है कि राष्ट्रपति देश की 115 करोड़ आबादी की मां है, इसलिए उनसे अपेक्षा करते हैं कि वह देश की जनता की खातिर जरूरी पहल करेंगी।

प्रभात
ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के अलावा अपनी पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी, नेता विपक्ष सुषमा स्वराज को भी इच्छा मृत्यु वाले लेटर की कॉपी भेजी है।हालांकि कांग्रेस ने प्रभात झा के इस काम को राजनीति से प्रेरित बताया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने कहा, ‘मुझे लगता है प्रभात झा का अपनी पार्टी के नेताओं से कुछ मनमुटाव है इसीलिए उन्होंने ऐसा फैसला किया है।

कश्मीर समस्या नेहरू परिवार का एक विशेष ‘तोहफा’ - आडवाणी

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का मानना है कि कश्मीर समस्या देश को दिया गया नेहरू परिवार का विशेषउपहारहै और विभाजन के समय इसका समाधान कर पाने में जवाहर लाल नेहरू की असफलता की देश भारी कीमत चुका रहा है।

आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि दुख की बात है कि न तो दिल्ली में नेहरू सरकार और न हीश्रीनगर में शेख अब्दुल्ला सरकार ने कभी इस बात को माना कि जम्मू-कश्मीर का भारत संघ में पूरी तरह एकीकरण करने की जरूरत है।

शेख अब्दुल्ला के मामले में समस्या यह थी कि उनकी एक तरह से स्वतंत्र कश्मीर का एकछत्र नेता बनने की महत्वाकांक्षा थी, जबकि नेहरूजी की ओर से इस मामले में साहस और दूरदर्शिता की कमी रही।

भाजपा नेता के मुताबिक, अनुच्छेद 370, जिसे पंडित नेहरू ने भी एक अस्थायी प्रावधान घोषित किया था, उसे अब तक रद्द नहीं किया गया है। इसी का परिणाम है कि पाकिस्तान के भारत विरोधी प्रतिष्ठानों द्वारा मदद पा रहे अलगाववादी बल कश्मीर में लगातार अपना जहरीला प्रचार कर रहे हैं। ये बल लगातार यह फैला रहे हैं कि भारत से जम्मू-कश्मीर का जुड़ना अंतिम नहीं था और खास तौर पर कश्मीर, भारत का भाग नहीं है।

आडवाणी ने लिखा है कि विभाजन के समय पर ही कश्मीर मुद्दे का समाधान कर पाने में नेहरू की असफलता की देश भारी कीमत चुका रहा है और नेहरू की इस भूल की उपेक्षा नहीं की जा सकती।

आडवाणी के मुताबिक, गौर करने वाली बात यह है कि गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल सभी दूसरी राजशाही वाली सियासतों का भारत संघ में एकीकरण करने में सफल रहे। जब उनमें से किसी ने दुविधा दिखाई या पाकिस्तान में शामिल होने की इच्छा जाहिर की, तो पटेल ने उन्हें उनकी जगह दिखा दी। उदाहरण के लिए, हैदराबाद के निजाम के सशस्त्र विद्रोह को कुचल दिया गया।

उन्होंने लिखा है कि जम्मू-कश्मीर राजशाही वाला एकमात्र ऐसा राज्य था, जिसे भारत से जोड़े जाने की प्रक्रिया सीधे प्रधानमंत्री नेहरू की देखरेख में हो रही थी। कश्मीर को पाने के लिए भारत के खिलाफ पाकिस्तान की 1947 की पहली जंग ने भी नेहरू सरकार को इस बात का बेहतरीन मौका दिया था कि वह न केवल हमला करने वालों को खदेड़ देती, बल्कि पाकिस्तान के साथ हमेशा के लिए कश्मीर मुद्दे को सुलझा देती।

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने लिखा है कि भारत ने ऐसा दूसरा बड़ा मौका 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी गंवाया, जिसमें भारत ने न केवल पाकिस्तान को हराया, बल्कि पाकिस्तान के लगभग 90000 युद्धबंदी भी भारत में आ गए।

आडवाणी ने लिखा है कि देश के लोगों को यह पता होना चाहिए कि कश्मीर समस्या देश के लोगों के लिए नेहरू परिवार का एक विशेष ‘तोहफा’ है। आडवाणी के मुताबिक, इस ‘तोहफे’ के छह परिणाम आज तक देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका पहला परिणाम, पाकिस्तान की ओर से सबसे पहले कश्मीर और बाद में भारत के विभिन्न हिस्सों में सीमा पार से आतंकवाद का निर्यात है।

आडवाणी ने लिखा, ‘दूसरा, पाकिस्तान की ओर से कश्मीर और बाद में देश के दूसरे हिस्सों में फैले धार्मिक चरमपंथ का निर्यात। तीसरा, हमारे सुरक्षा बलों के हजारों जवानों और नागरिकों की मौत। चौथा, सैन्य और अर्धसैनिक बलों पर खर्च होने वाले हजारों करोड़ों रुपए। आडवाणी ने लिखा है कि इसी ‘तोहफे’ की बदौलत बाहरी ताकतें भारत और पाकिस्तान के तनावपूर्ण संबंधों का फायदा उठा रही हैं।

भाजपा नेता ने लिखा है कि इस तोहफे का अंतिम नुकसान कश्मीरी पंडितों के पूरे समुदाय को उठाना पड़ रहा है, जो अपनी जमीन से विस्थापित होकर अपनी ही मातृभूमि में शरणार्थी बनकर रहने को मजबूर हो गए हैं।

केंद्र सरकार ने चीन से डरकर लद्दाख में कई प्रोजेक्ट्स का काम रोका

चीन की सीमा से सटे लद्दाख के डेमचेक इलाके मे बनाए जा राहे यात्री शेड पर चीन द्वारा आपत्ति जताने के बाद भारत ने प्रोजेक्ट का निमार्ण कार्य रोक दिया है। उधर चीन बेखौफ होकर भारतीय सीमा पर सड़क से लेकर बांध तक बनाए जा रहा है।

साल 2010 से ही डेमचेक इलाके में यात्री शेड का निर्माण किया जा रहा है। चीन ने 2010 में इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। गृह मंत्रालय द्वारा नवंबर 2010 में जम्मू कश्मीर सरकार को भेजे गए पत्र से खुलासा हुआ है कि केंद्र सरकार ने प्रोजेक्ट का कार्य रोकने के आदेश दिए थे। मंत्रालय ने लिखा था कि "आप डेमचेक इलाके में तब तक किसी भी प्रकार का कोई भी निर्माण कार्य नहीं कर सकते जब तक रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की क्लीसयरेंस न मिल जाए।"

लद्दाख ऑटोनोमस हिल डेवलेपमेंट काउंसिल (एलएचडीसी) में सरकार के इस फैसले के प्रति काफी नाराजी है। एलएचडीसी के सदस्य गुरमीत दोरजी सिंह ने कहा कि लद्दाख के लो सरकार के फैसले के बाद ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। एलएचडीयी के लोग अब वहां पर शत्री शेड तो क्या रक्षा मंत्रालय की अनुमति के बिना अपने घर तक नहीं बना पा रहे हैं।

गुरमीत
ने कहा कि चीन हमारी सीमाओं पर निमार्ण किए जा रहा है जबकि हमें यात्री शेड भी नहीं बनाने दिया गया। दिल्ली मे एयर कंडीशंन कमरों में बैठे लोग कैसे फैसला कर सकते हैं कि हमारे लोगों के लिए क्या उचित है और क्या अनुचित।

उधर मंत्रालय के बाद लद्दाख क्षेत्र में सभी सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों का काम रोक दिया गया है। सरकार के इस फैसले पर क्षेत्र के लोग सवाल उठा रहे हैं।

सीबीआई को कानूनी तरीके से ही दूंगा जबाब - आचार्य बालकृष्ण

सीबीआई द्वारा मुकदमा दर्ज करने से आहत पंतजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने केंद्र सरकार पर पलटवार किया है। कहा है कि सीबीआई ने केंद्र के इशारे पर महंगाई के मुद्दे से देश का ध्यान हटाने के लिए यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि मैंने कोई गलत काम नहीं किया है। मैं कोई अपराधी नहीं जो डरकर भाग जाऊं।

मैं कानूनी कार्रवाई का जवाब कानूनी तरीके से दूंगा।सीबीआई द्वारा मुकदमा दर्ज करने के बाद आचार्य बालकृष्ण ने कहा-'शनिवार रात अफवाह उड़ाई गई कि मैं कहीं चला गया हूं। मैं हरिद्वार छोड़ कर कहीं नहीं जा रहा हूं। सीबीआइ ने मुझ पर क्या आरोप लगाए गए हैं, मुझे अभी इसकी अधिकृत जानकारी नहीं है।

ऐसे
में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। अगर सीबीआइ इस संदर्भ में कोई पूछताछ करती हैं तो उसके हर सवाल का जवाब प्रमाण सहित देने को तैयार हूं।'आचार्य ने दावा किया कि उन्होंने अपना पासपोर्ट विधिसम्मत तरीके से पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए बनवाया है।

इसमें
किसी भी किस्म का कोई गलत दस्तावेज या गलत जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि उनका जन्म हरिद्वार के दादूबाग इलाके में हुआ। वह जन्म से भारतीय हैं। नेपाल से संबंधित सवाल पर उन्होंने कहा-'ये जानकारी मेरे माता-पिता से लीजिए, मुझसे ये सवाल क्यों किए जाते हैं?

अगर
मेरे माता-पिता नेपाली हैं तो इसमें मेरा तो कोई गुनाह नहीं, फिर मुझे क्यों तंग क्यों किया जा रहा है?'

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