कांग्रेस नेता शशि थरूर मोदी सरकार की विदेश नीति से खुश


कांग्रेस प्रवक्ता टीवी चैनलों पर यूक्रेन से भारतीयों की वापसी के मुद्दे पर सरकार की असफलता गिनाते नहीं थक रहे लेकिन पार्टी सांसद शशि थरूर सरकार की विदेश नीति से गदगद हैं। उन्होंने विदेश मंत्री और उनकी टीम की जमकर तारीफ की है। थरूर ने विदेश मंत्रालय की तरफ से बुलाई गई मीटिंग में शामिल होने के बाद कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनकी टीम ने एक-एक सवाल का जिस गहराई से जवाब दिया है, वह बेहद प्रशंसनीय है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि विदेश नीति तो ऐसी ही होनी चाहिए। इस मीटिंग में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी शामिल थे।

विदेश मंत्रालय ने रूस-यूक्रेन युद्ध से पैदा हुए संकट पर गुरुवार को सलाहकार समिति की बैठक बुलाई। बैठक में छह राजनीतिक दलों के नौ सांसदों ने हिस्सा लिया। इन सभी ने मौजूदा संकट से निपटने के लिए सुझाव तो दिए ही, एक-से-बढ़कर एक सवाल भी दागे जिनका विदेश मंत्रालय ने विस्तृत जवाब दिया। इससे शशि थरूर इतने संतुष्ट हुए कि उन्होंने विदेश मंत्री की तारीफों के पुल बांध दिए।

थरूर ने ट्वीट कर कहा, 'यूक्रेन पर विदेश मंत्रालय की सलाहकार समिति की आज सुबह बुलाई गई बैठक जबर्दस्त रही। हमारे सवालों और चिंताओं पर विस्तृत और बिल्कुल सटीक जवाबों के लिए डॉ. एस जयशंकर और उनके सहयोगियों का धन्यवाद।' थरूर ने मोदी सरकार की विदेश नीति की तारीफ में कसीदे पढ़ डाले। उन्होंने लिखा, विदेश नीति में यही जोश-ओ-खरोश दिखनी चाहिए। हमने कई बिंदुओं पर बातचीत की। विदेश मंत्री इसकी जानकारी देगा। यह शानदार मीटिंग थी। हम सभी एकजुट हैं।

थरूर ने कहा कि बैठक में शामिल सांसदों ने विदेश मंत्रालय से ही बयान जारी करने का आग्रह किया है। उन्होंने लिखा, 'मैंने मीडिया के आग्रह पर कोई टिप्पणी नहीं की क्योंकि यह गुप्त बैठक थी। हालांकि, हमने विदेश मंत्रालय से रटा-रटाया नहीं, विस्तृत बयान जारी करने की अपील की है। मीटिंग बेहत रचनात्मक भावना से संचालित हुई और सभी दलों ने हमारे नागरिकों की सुरक्षित घर वापसी के मुद्दे पर एकजुटता का इजहार किया।' सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी ने मीटिंग में चीन और पाकिस्तान के रूस के करीब आने का मुद्दा उठाया, फिर कहा कि प्राथमिकता अभी यूक्रेन से छात्रों को निकालना है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि हमें प्रतिक्रिया में देर हुई और एडवाइजरी भ्रमित कर रही थीं।

वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मौजूदा हालात पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र अपने को लेकर उधेड़बुन में थे, लेकिन यूक्रेन सरकार ने उन्हें भरोसा दिलाया। सूत्रों ने बताया कि जयशंकर ने मीटिंग में भारतीयों की घर वापसी और ताजा हालात पर प्रजेंटेशन दिया। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में रूस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पर वोटिंग से दूर रहने की नीति का समर्थन किया। थरूर ने कहा कि जब भी राष्ट्रीय हितों की बात होती है तो भारत सर्वप्रथम की नीति पर पक्ष-विपक्ष एकजुट हो जाते हैं। वहीं, विदेश मंत्री ने भी मीटिंग पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बैठक में मुद्दे के सामरिक और मानवीय पहलुओं पर अच्छी चर्चा हुई।

मोदी सरकार का अगला एजेंडा POK को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना: जितेंद्र सिंह


नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद हमारा अगला एजेंडा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना है. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिनों की सबसे बड़ी उपलब्धि में जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करना है. उन्होंने देश विरोधी काम करने वाले लोगों और ताकतों को चेतावनी देते हुए कहा कि, 'यह मानसिकता है कि आप कुछ भी करके बच निकलेंगे. अब आप बच कर निकल नहीं पाएंगे, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए आपको कीमत चुकानी होगी.'

पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने पारित किया था संकल्प:

ऊधमपुर-कठुआ लोकसभा सीट से सांसद जितेंद्र सिंह ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के विषय पर कहा कि, ‘यह केवल मेरी या मेरी पार्टी की प्रतिबद्धता नहीं है बल्कि यह 1994 में पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा संसद से सर्वसम्मति से पारित कराया गया संकल्प है. यह एक स्वीकार्य रुख है.’

अनुच्छेद 370 हटाने पर भारत के अनुकूल है पूरी दुनिया का रुख

अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त करने पर पाकिस्तान की ओर से शुरू किये गए दुष्प्रचार अभियान पर सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया का रुख भारत के अनुकूल है. उन्होंने कहा, कुछ देश जो भारत के रुख से सहमत नहीं थे, अब वे हमारे रुख से सहमत हैं. सिंह ने कहा कि कश्मीर में आम आदमी भारत सरकार से मिलने वाले लाभों को लेकर खुश है.

कश्मीर में कर्फ्यू नहीं, केवल कुछ पाबंदियां लगी हुई हैं

केंद्रीय मंत्री ने अपनी बात के समर्थन में कहा कि, कश्मीर न तो बंद है और ना ही कर्फ्यू के साए में है, बल्कि वहां केवल कुछ पाबंदियां लगी हुई हैं. सिंह ने देश विरोधी लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अपनी उस मानसिकता को बदलना पड़ेगा कि वे कुछ भी करके आसानी से बच निकलेंगे. आतंकियों द्वारा आम लोगों की हत्या किए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें पाकिस्तान का हाथ है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “हमें, कश्मीर कर्फ्यू के साए में है और पूरी तरह से बंद है, जैसे बयानों की निंदा करने की जरूरत है. कश्मीर बंद नहीं है. वहां कर्फ्यू नहीं है. अगर कर्फ्यू होता तो लोगों को बाहर निकलने के लिए ‘कर्फ्यू पास’ की जरूरत होती.” उन्होंने कहा कि कश्मीर में धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं.

इंटरनेट पर रोक हटाने को इच्छुक है सरकार

इंटरनेट सेवा बंद रखने के बारे में मोदी के मंत्री ने कहा कि, 'हम इंटरनेट सेवा को जल्द से जल्द बहाल करना चाहते हैं. इसके लिए प्रयोग के तौर एक कोशिश की गई थी लेकिन सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो डाले गए, इसलिए फैसले की फिर से समीक्षा करनी पड़ी.' जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार इन पाबंदियों को खत्म करने और इंटरनेट पर रोक हटाने को इच्छुक है.

बड़ा फैसला : जम्मू से श्रीनगर सभी जवानों को अब हवाई रास्ते से भेजा जाएगा


पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद सतर्क केंद्र सरकार ने गुरुवार को बड़ा फैसला लिया है. अब जम्मू-कश्मीर में तैनात सभी सुरक्षाबल के जवान जम्मू से श्रीनगर सड़क से यात्रा नहीं करेंगे. सभी जवानों को अब हवाई रास्ते से भेजा जाएगा. इस आदेश को गुरुवार से ही लागू कर दिया गया है. इस आदेश के बारे में बुधवार देर शाम ही सुरक्षाबलों के प्रमुखों को अवगत करा दिया गया है.  

ये आदेश असम रायफल्स, बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और एनएसजी समेत सभी जवानों पर लागू होगा. यानी जो भी जवान अपनी ड्यूटी से लौट रहा हो, उसका ट्रांसफर हुआ हो या फिर घर से लौट रहा हो, उन सभी जवानों को जम्मू बेस कैंप या नई दिल्ली से श्रीनगर हवाई रास्ते से ही भेजा जाएगा. इतना ही नहीं अगर कोई जवान श्रीनगर से लौट रहा है तो भी उसे हवाई सुविधा मिलेगी.

पहले ये सुविधा सीनियर रैंक के अधिकारियों को मिलती थी, लेकिन अब सभी जवानों पर ये नियम लागू होगा. गुरुवार को गृह मंत्रालय की ओर से ट्वीट कर इस फैसले की जानकारी दी गई.


- दिल्ली से श्रीनगर, श्रीनगर से दिल्ली, जम्मू से श्रीनगर, श्रीनगर से दिल्ली रूट पर सभी जवानों को फायदा

- करीब 7 लाख 80 हजार जवानों को इस फैसले का सीधा लाभ मिलेगा

- इनमें कॉन्स्टेबल, हेड कॉन्स्टेबल, अस्सिटेंट सब इन्सपेक्टर को भी मिलेगा लाभ

14 फरवरी को जो पुलवामा में आतंकी हमला हुआ था, तब सुरक्षाबलों का एक बड़ा काफिला सड़क के रास्ते जम्मू से श्रीनगर जा रहा था. इसी का फायदा उठाते हुए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ने सीआरपीएफ के जवानों को निशाना बनाया था.

तब 78 वाहनों में करीब 2500 जवान जम्मू से श्रीनगर जा रहे थे, उसी दौरान जब काफिला पुलवामा में पहुंचा. तो जैश के लोकल आतंकी आदिल अहमद डार ने अपनी विस्फोटक से भरी गाड़ी को जवानों के काफिले में घुसा दिया था, जिसकी वजह से धमाका हुआ और 40 जवान शहीद हो गए थे.

गौरतलब है कि इससे पहले भी हमले के तुरंत बाद गृह मंत्रालय ने बड़ा फैसला करते हुए ऐलान किया था कि जब सेना का काफिला किसी रास्ते से गुजर रहा होगा, तो वहां आम लोगों को अपना वाहन लाने की इजाजत नहीं होगी.

सरकार इसके अलावा भी कई बड़े फैसले ले चुकी है. जिसमें जम्मू-कश्मीर में रह रहे अलगाववादी नेताओं को मिली सुरक्षा वापस ले ली गई थी. वहीं सेना के जवानों के काफिले के रूट और नियमों में भी कई तरह के बदलाव किए गए हैं.

उज्ज्वला योजना के तहत एक करोड़ से भी अधिक गैस कनेक्शन जारी किए गए


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत देश की गरीबी रेखा से रहने वाले परिवारों की महिलाओं के नाम मुफ्त एलपीजी गैस उपलब्ध कराने के निमित्त एक करोड़ से भी अधिक गैस कनेक्शन जारी होने के अवसर पर पैट्रोलियम और गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया। 

उन्होंने बताया कि योजना लागू होने के बाद 6 महीने की छोटी सी अवधि में 35 राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के 638 जिलों को इस योजना के तहत लाया गया है और 1.81 करोड़ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 1.5 करोड़ कनेक्शनों को मंजूर करके लाभार्थियों को जारी कर दिया गया है। इस योजना के तहत सबसे अधिक संख्या में पांच राज्यों को कनेक्शन जारी किए गए हैं जिनमें उत्तर प्रदेश (34.55 लाख), मध्य प्रदेश (13.32 लाख), राजस्थान (12.94 लाख), बिहार (10.34 लाख) और पश्चिम बंगाल (7.66 लाख) शामिल हैं। इसके अलावा सीतापुर (1.29 लाख), इलाहाबाद (1.26 लाख), कुशीनगर (1.16 लाख), उन्नाव (87,752) और गोंडा (84,173) सबसे अधिक संख्या में कनेक्शन जारी किए जाने वाले जिलों में सबसे ऊपर हैं।

देश में पीएमयूवाई के तहत हर माह लगभग 22 से 25 लाख नए कनेक्शन जारी किए जा रहे हैं। इस योजना से समाज के कमजोर तबकों अर्थात एससी/ एसटी को सबसे अधिक लाभ मिल रहा है जिन्हें 44 प्रतिशत कनेक्शन जारी किए गए हैं। 

मंत्री महोदय ने यह भी बताया कि सभी एलपीजी उपभोक्ताओं को सुरक्षा मानदंडों के अनुपालन के बारे में शिक्षित करने के लिए नवम्बर से शुरू होने वाली 4 महीनों की अवधि के दौरान एक व्यापक सुरक्षा जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। 

मोदी सरकार नया उद्यम शुरू करने वाले युवाओं को देगी प्रोत्‍साहन


एनडीए सरकार के दो साल पूरा होने के अवसर पर केंद्रीय पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार), युवा मामले और खेल (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार नया उद्यम शुरू करने वाले युवाओं और उद्यमियों को प्रोत्‍साहन देगी। 

युवा मामले विभाग की बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि संयोग से उनके पास पूर्वोत्‍तर क्षेत्र और युवा मामले, दोनों का ही प्रभार है, इसलिए वे दोनों मंत्रालयों के मध्‍य एक-दूसरे के प्रयास को पूरक बनाने के लिए तालमेल स्‍थापित करने का प्रयास करेंगे ताकि पूरे देश के युवाओं को पूर्वोत्‍तर में उद्यमिता स्‍थापित करने के लिए प्रोत्‍साहित किया जा सके। चूंकि पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में जैविक उत्‍पादों की व्‍यापक गैर-अन्‍वेषित संभावनाएं मौजूद हैं। उन्‍होंने कहा कि पूर्वोत्‍तर विकास मंत्रालय की ओर से इस क्षेत्र में किसी उद्यम की शुरूआत करने वाले युवा के लिए ‘उद्यम पूंजी निधि’ स्‍थापित करने का निर्णय लिया है। 

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने उल्‍लेख किया कि 16 जनवरी को स्टार्ट अप इंडिया पहल की शुरूआत के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कुछ सर्वाधिक अतुल्‍य प्रोत्‍साहनों की घोषणा की थी जिसमें तीन महीने की निकास अवधि का प्रावधान शामिल था जिसके दौरान किसी नौजवान को कार्य जारी रखने या किसी अन्‍य विकल्‍प को चुनने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा स्‍टार्ट अप इंडिया कार्यक्रम में प्रारंभिक अवधि के लिए कर में छूट देने का भी प्रावधान है। उन्‍होंने सुझाव दिया कि युवा मामलों के मंत्रालय को इन सभी प्रावधानों के बारे में युवाओं को जागरूक करने के लिए पूरे देश में जागरूकता शिविरों और कार्यशालाओं का आयोजन करना चाहिए। 

उन्‍होंने कहा कि पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय, पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में उद्यम शुरू करने के लिए उद्यम पूंजी निधि उपलब्‍ध करायेगा। युवा मामले विभाग, नेहरू युवा केंद्र और अन्‍य युवा केंद्रों जैसे प्रतिष्‍ठानों के माध्‍यम से अतिरिक्‍त सहायता उपलब्‍ध करायेगा। डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि युवा मामले विभाग ने आज के 2016 भारत में विशिष्‍ट महत्‍ता हासिल की है क्‍योंकि देश की आबादी का 60 प्रतिशत से भी अधिक हिस्‍सा 35 वर्ष से कम आयु का है। स्‍टार्ट अप इंडिया मिशन का नेतृत्‍व देश के युवा करेंगे जिन्‍हें अंतत: भारत को अगले कुछ वर्षों मे विश्‍व की एक शक्ति में परिवर्तित करना है। इस बैठक में युवा मामले मंत्रालय के सचिव श्री राजीव गुप्‍ता और मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी मौजूद थे। 

#HFCL बरौनी को पुरुत्थान के लिए 1916.14 करोड़ और 56 एकड़ भूमि


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रीमंडल ने हिंदुस्तान फर्टीलाइजर कॉरपोरेशन लिमिटेड (HFCL) के वित्तिय नवीनीकरण को मंजूरी दे दी है। मंत्रीमंडल ने इसे भारत सरकार की तरफ से दिए गए 1916.14 करोड़ रुपये (31.01.2015 तक) के ऋण और उस पर लगने वाले ब्याज (31.03.2015 तक ब्याज की राशि थी 7163.35 करोड़ रुपये) को छोड़ने (माफ करने) को मंजूरी दी है। मंत्रीमंडल ने एचएफसीएल पर बिहार राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड के बकाया के निपटारे के लिए बरौनी ईकाई की एश डाइक की 56 एकड़ जमीन को स्थानांतरित करने को भी मंजूरी दे दी है। 

मंत्रीमंडल की मंजूरी से एचएफसीएल को बीआईएफआर के पंजीकरण से अलग होने में मदद मिलेगी और यह इसके लिए सकारात्मक होगा। इससे एचएफसीएल के तेजी से पुनरुत्थान का रास्ता साफ होगा। यह ईकाई अभी निष्क्रिय पड़ी हुई है और जनवरी 1999 से इसका संचालन बंद है। यहां यह बताना जरूरी होगा कि देश के पूर्वी हिस्से में केवल नामरूप (असम) में दो छोटी ईकाइयों को छोड़ दें तो, यूरिया उत्पादन की कोई भी ईकाई नहीं है। 

देश में यूरिया की वार्षिक खपत 320 एलएमटी है जिसमें 245 एलएमटी का उत्पादन देश में होता है जबकि बाकी आयात किया जाता है। बरौनी में नई ईकाई के लगने से बिहार, पश्चिम बंगाल व झारखंड में यूरिया की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सकेगा। इससे पश्चिमी व मध्य क्षेत्रों से यूरिया ढोकर लाने के लिए रेलवे व सड़क यातायात पर पड़ने वाला बोझ भी कम होगा और इससे सरकारी सब्सिडी में भी बचत होगी। इस यूनिट से 400 प्रत्यक्ष और 1200 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 

बरौनी ईकाई, गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) द्वारा बिछायी जा रही जगदीशपुर-हल्दिया गैस पाइपलाइन के लिए भी मुख्य ईकाई के तौर पर होगी जो कि पूर्वी भारत में विकास व आर्थिक उन्नति व ढांचागत विकास के लिए काफी अहम है। 

अटल योजनाओं को 6 राज्‍यों के 13 नगरों में 495 करोड़ रुपए मंजूर


अटल मिशन योजनाओं को 6 राज्‍यों के 13 नगरों में 495 करोड़ रुपए के परिव्‍यय के साथ 2015-16 के लिए मंजूरी मिली 

केंद्र सरकार 425 करोड़ रुपए की सहायता मुहैया कराएगी 

असम मूलभूत बुनियादी ढांचे में 186 करोड़ रुपए ; जम्‍मू-कश्‍मीर 171 करोड़ रुपए, गोवा 59 करोड़ रुपए, त्रिपुरा 37 करोड़ रुपए, मेघालय 23 करोड़ रुपए, पुदुचेरी 18.97 करोड़ रुपए निवेश करेगा 

अभी तक 483 नगरों के लिए मूलभूत बुनियादी ढांचे में 20,491 करोड़ रुपए के निवेश को मंजूरी मिली 

त्रिपुरा ने शहरी क्षेत्रों में स्‍वच्‍छ भारत अभियान को क्रियान्‍वित करने पर सहमति जताई 

असम को शौचालयों के निर्माण में तेजी लाने को कहा गया 

शहरी विकास मंत्रालय ने आज 2015-16 के लिए अटल कायाकल्‍प एवं शहरी रूपांतरण कार्य योजना मिशन (अमृत) के तहत 6 राज्‍यों के 13 नगरों में जलापूर्ति, सीवरेज नेटवर्क एवं सेप्टेज प्रबंधन, तूफान जल निकासी, शहरी परिवहन एवं हरित स्थलों के प्रावधान के लिए 495.11 करोड़ रुपए के निवेश को मंजूरी दे दी। शहरी विकास सचिव श्री मधुसूदन प्रसाद की अध्‍यक्षता में एक अंत: मंत्रीस्तरीय शीर्ष कमेटी में गुवाहाटी, जम्‍मू, श्रीनगर, पणजी, शिलौंग, अगरतल्‍ला और पुदुचेरी समेत 13 नगरों की निवेश योजनाओं को मंजूरी दे दी है। 

495.11 करोड़ रुपए की कुल परियोजना लागत में से केंद्र सरकार 425 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान करेगी। 

राज्‍यवार मंजूरी प्राप्‍त निवेश इस प्रकार हैं: असम 186.27 करोड़ रुपए, जम्‍मू-कश्‍मीर 171 करोड़ रुपए, गोवा 59.44 करोड़ रुपए, त्रिपुरा 36.62 करोड़ रुपए, मेघालय 22.81 करोड़ रुपए और पुदुचेरी 18.97 करोड़ रुपए। 

केंद्र सरकार पूर्वोत्‍तर राज्‍यों एवं जम्मू-कश्‍मीर के संदर्भ में योजना लागतों का 90 प्रतिशत, पुदुचेरी के लिए 100 प्रतिशत एवं गोवा के लिए लागत का 50 प्रतिशत वहन करेगी। 

इसी के अनुरूप 2015-16 के लिए असम को 169.34 करोड़ रुपए, त्रिपुरा 32.96 करोड़ रुपए, मेघालय 20.53 करोड़ रुपए, जम्‍मू-कश्‍मीर 153.90 करोड़ रुपए, गोवा 29.72 करोड़ रुपए और पुदुचेरी 18.97 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता प्रदान की जाएगी। 

अटल मिशन का लक्ष्‍य जलापूर्ति और सीवर कनेक्‍शनों, जलापूर्ति बढ़ाने, सीवरेज नेटवर्क सेवाओं तथा हरित स्‍थलों को बढ़ावा देने के अतिरिक्‍त तूफान जल निकासी के साथ 500 मिशन नगरों के सभी शहरी परिवारों में ये सुविधाएं सुनिश्‍चित करना है। 

मंजूरी प्राप्‍त कुल निवेशों में से 201.86 करोड़ रुपए जलापूर्ति बढ़ाने पर, 116.10 करोड़ रुपए सीवरेज नेटवर्क को विस्‍तारित करने एवं सेप्‍टेज प्रबंधन पर, 85 करोड़ रुपए गैर-मोटर परिवहन के साथ शहरी परिवहन को बढ़ाने पर, 77.37 करोड़ रुपए तूफान जल निकासी परियोजनाओं पर एवं 14.69 करोड़ रुपए हरेक स्‍थल मुहैया कराने पर खर्च किए जाएंगे। 

जम्‍मू एवं कश्‍मीर में जम्‍मू में 22.50 करोड़ रुपए, अनंतनाग 15.00 करोड़ रुपए एवं श्रीनगर में 13 करोड़ रुपए समेत सीवरेज एवं सेप्‍टेज प्रबंधन पर 50.50 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। श्रीनगर में 50 करोड़ रुपए, जम्‍मू में 22 करोड़ रुपए एवं अनंतनाग में 5.00 करोड़ रुपए समेत जल निकासी सुविधाएं प्रदान करने पर 77 करोड़ रुपए का व्‍यय किया जाएगा। श्रीनगर में 15 करोड़ रुपए, जम्‍मू में 13 करोड़ रुपए एवं लेह में 5 करोड़ रुपए के साथ शहरी परिवहन को बेहतर बनाया जाएगा। श्रीनगर, जम्‍मू, अनंतनाग एवं लेह में 5.50 करोड़ रुपए की लागत से हरित स्‍थलों के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।

असम में नागोन में 51.79 करोड़ रुपए की लागत से, डिब्रूगढ में 46.51 करोड़ रुपए एवं सिलचर में 43.20 करोड़ रुपए की लागत से जलापूर्ति को बढ़ाया जाएगा। पहले निकासी परियोजनाओं पर राज्‍य सरकार द्वारा अन्‍य 40 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का प्रस्‍ताव था, इसे अब गुवाहाटी समेत चार मिशन नगरों में जलापूर्ति बढ़ाने एवं सीवरेज नेटवर्क पर खर्च किया जाएगा। इन तीन नगरों एवं गुवाहाटी में 4.73 करोड़ रुपए की लागत से हरित स्‍थलों का विकास किया जाएगा। 

मेघालय के शिलौंग में 22.22 करोड़ रुपए की लागत से सीवरेज एवं सेप्‍टेज परियोजना शुरू की जाएगी एवं 59 लाख की लागत से हरित स्‍थलों का विकास किया जाएगा। 

त्रिपुरा के अगरतल्‍ला में जलापूर्ति को बेहतर बनाने पर 32.50 करोड़ रुपए, शहरी परिवहन पर 2.12 करोड़ रुपए एवं हरित स्‍थलों को बेहतर बनाने पर 2.00 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। 

गोवा के पणजी में पेडेस्‍ट्रानाइजेशन ऑफ सिटी स्‍क्‍वायर, फुटपाथों, साइडवॉक्‍स एवं वॉकवेज जैसी शहरी परिवहन परियोजनाओं को 49.97 करोड़ रुपए एवं 7.38 करोड़ रुपए की लागत से सीवरेज एवं सेप्‍टेज प्रबंधन कार्य, 36 लाख रुपए प्रत्‍येक की लागत से जल निकासी एवं जलापूर्ति परियोजनाओं एवं हरित स्‍थलों के विकास पर 1.40 करोड रुपए खर्च किये जाएंगे। 

पुद्दुचेरी में जलापूर्ति को 5.76 करोड रुपये की लागत से एवं ओलगरेट 6.7 करोड रुपये की लागत से बेहतर बनाया जाएगा। ये दोनों शहरी स्थानीय निकाय सीवरेज परियोजनाओं पर 3 – 3 करोड रुपये खर्च करेंगे। इन शहरी क्षेत्रों में हरित स्थल मुहैया कराने पर 47 लाख रुपये की राशि खर्च की जाएगी। 

त्रिपुरा सरकार ने आखिरकार राज्य में शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान को क्रियान्वित करने पर सहमति जता दी है। यह सूचना राज्य सरकार के प्रमुख सचिव श्री संजय राकेश ने शहरी विकास मंत्रालय को प्रेषित कर दी है। राज्य सरकार का मानना था कि केंद्र सरकार द्वारा प्रति शौचालय 4 हजार रुपये की मुहैया करायी जा रही केंद्रीय सहायता पर्याप्त नहीं है। श्री राकेश ने आज जानकारी दी कि राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों में एकल परिवार शौचालयों के निर्माण के लिए 12 हजार रुपये प्रत्येक की सहायता देने का फैसला किया है। 

शीर्ष समिति ने आज असम में शौचालयों के निर्माण में धीमी प्रगति पर चिंता जताई और राज्य सरकार से इसमें तेजी लाने का आग्रह किया। 

इन मंजूरियों के साथ, शहरी विकास मंत्रालय ने अभी तक 20,491 करोड़ रुपए के निवेश से 26 राज्‍यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 483 मिशन नगरों में पानी के नल के प्रावधान समेत जलापूर्ति बढ़ाने, एकल परिवारों में सीवर कनेक्शन के प्रावधान समेत सीवरेज नेटवर्क सेवाओं को विस्तारित करने, तूफान जल निकासी, शहरी परिवहन एवं हरित स्थलों के विकास के लिए 2015-16 के लिए अटल मिशन कार्य योजनाओं को मंजूरी दे दी है।

सरकार ने 607 करोड़ रुपये के #FDI के दस प्रस्‍तावों को दी मंजूरी

विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की 22 जनवरी 2016 को आयोजित 231वीं बैठक की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने तकरीबन 607 करोड़ रुपये के प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के दस प्रस्‍तावों को मंजूरी दी है और 5856.51 करोड़ रुपये के एफडीआई वाले एक प्रस्‍ताव के लिए सीसीईए से अनुमोदन लेने की सिफारिश की है।

निम्‍नलिखित दस (10) प्रस्‍तावों को मंजूरी दी गई है:

क्रम
संख्‍या
मद संख्‍या
आवेदक का नाम
 प्रस्‍ताव का सार
क्षेत्र
एफडीआई(करोड़ रुपये में )
1
2
मेसर्स एट्रिया कन्वर्जेन्स टेक्‍नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड
वर्तमान अप्रवासी शेयरधारकों से अपने शेयर अरगन (मॉरीशस) लिमिटेड और टीएएफवीसीआई इंवेस्‍टर्स लिमिटेड को हस्‍तांतरित करने के लिए मंजूरी मांगी गई है।
दूरसंचार
कुछ नहीं
2
4
 मेसर्स ग्‍लेनमार्क फार्मास्‍यूटिकल्‍स लिमिटेड
1,03,000 इक्विटी शेयरों का कर्मचारियों (विदेशी नागरिक) के लिए उनके पूंजी विकल्‍प के आधार पर आवंटन के लिए मंजूरी मांगी गई है, जो कंपनी की चुकता शेयर पूंजी का 0.03 प्रतिशत है।
फार्मा
3.34
3
6
मेसर्स यूरोनेट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बेंगलुरू
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 20 अक्‍टूबर 2015 को जारी किए गए परिपत्र के अनुसार भारत बिल भुगतान प्रणाली परिचालन इकाई (बीबीपीओयू) के रूप में कार्य करने की मंजूरी मांगी गई है।
एनबीएफसी
कुछ नहीं
4
7
मेसर्स एमक्‍योर फार्मास्‍यूटिकल्‍स लिमिटेड
 चार अप्रवासी कर्मचारियों को 0.28 प्रतिशत तक के  अतिरिक्‍त ईएसओपी जारी करने की मंजूरी मांगी गई है।
फार्मा
57.4
5
8
मेसर्स एवीएच रिसोर्सेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
मेसर्स एकरमैन्‍स एंड वैन हारेन एनवी, बेल्जियम के डब्‍ल्‍यूओएस द्वारा अपनी प्रबंधकीय सलाहकार और निवेश कंपनी को एक कोर निवेश कंपनी में बदलने के लिए मंजूरी मांगी गई है।
सीआईसी
कुछ नहीं
6
9
मेसर्स सिप्ला लिमिटेड
एफआईएल कैपिटल इनवेस्‍टमेंट्स (मॉरीशस) IIलिमिटेड से मेसर्स सिप्ला हेल्‍थ केयर लिमिटेड (सिप्ला लिमिटेड की एक डब्‍ल्‍यूओएस) में शुरुआती 128.96 करोड़ रुपये के निवेश और शुरुआती निवेश बंद होने के बाद एफआईएल कैपिटल इनवेस्‍टमेंट्स (मॉरीशस) IIलिमिटेड द्वारा एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी (यानी सिप्ला हेल्‍थ केयर लिमिटेड) में 16.26 करोड़ रुपये तक के निवेश की मंजूरी मांगी गई।
फार्मा
145.22
7
15
मेसर्स अल्‍सटॉम
मैन्‍यूफैक्‍चरिंग इंडिया लिमिटेड
(i) मेसर्स अल्स्‍टोम
मैन्‍यूफैक्‍चरिंग इंडिया लिमिटेड ने 20-11-2015 से 20-07-2017 की अवधि के लिए पूंजी रोक कर अपनी निवेश कंपनी मेसर्स मधेपुरा एसपीवी के लिए निवेश करने की मंजूरी मांगी।

(ii)  इसके बाद एफआईपीवी मंजूरी की आश्‍यकता नहीं है और बाद की अवधि में मैसर्स अल्स्‍टोम मैन्‍यूफैक्‍चरिंग इंडिया लिमिटेड केवल एक निवेश कंपनी होगी तथा अपना कार्य शुरू कर देगी।
रेलवे इंफ्राट्रक्‍चर
400
8
17
मेसर्स कैप्रिकॉर्न
वेंचर्स लिमिटेड
मेसर्स कैप्रिकॉन
वेंचर्स लिमिटेड ने मैक्‍स इंडिया के शेयर धारकों के शेयर मैक्‍स इंडिया लिमिटेड में जारी करने की मंजूरी मांगी है जहां मैक्‍स इंडिया के प्रत्‍येक शेयर धारक कंपनी में 5:1 के अनुपात से अपना शेयर जारी करेंगे और मेसर्स कैप्रिकोर्न, मैक्‍स स्‍पेशियेलिटिज फिल्‍मस लिमिटेड की धारक कंपनी बन जाएगी।
स्‍वास्‍थ्‍य, चिकित्‍सीय अनुसंधान और संबंधित गतिविधियां
कुछ नहीं
9
24
डेन नेटवर्क्‍स  लिमिटेड
डेन नेटवर्क्‍स  लिमिटेड को दिनांक 14-8-2015 के अनुमोदन पत्र में एफआईआई/एनआरआई/एफपीआई की ओर  से 74 प्रतिशत तक कंपनी में निवेश की  मंजूरी प्रदान की गई थी। अब कंपनी ने शेयरों या क्‍यूआईआई/ एडीआर/ जीडीआर/ एफसीसीबी जैसी प्रतिभू‍तियों या अन्‍य अनुमति प्राप्‍त प्रतिभूतियों के जरिये  कंपनी में विदेशी निवेश की अनुमति मांगी है। अनुमोदित सीमा के भीतर निवेश की मंजूरी मांगी गई है।
दूरसंचार     
कुछ नहीं
10
26
मेसर्स सेलेस्टिस फार्मास्‍यूटिकल्‍स प्राइवेट लिमिटेड
कंपनी के 51 प्रतिशत शेयरों को  मौजूदा शेयरधारकों (निवासी भारतीय) के 32354 पूर्ण चुकता इक्विटी का  हस्‍तांतरण कर और कंपनी के 38053 नये शेयर खरीद कर मेसर्स अभाया इंवेस्‍टमेंट्स लिमिटेड, ब्रिटेन में निवेश करने  की मंजूरी मांगी गई है।
फार्मा
1.06
 प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश नीति 2015 के पैराग्राफ 5.2.2 के अंतर्गत  
मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईएद्वारा मंजूरी के लिए निम्‍नलिखित एक (01)प्रस्‍ताव की सिफारिश की गई है।

क्रम संख्‍या
मद संख्‍या
आवेदक का नाम 
प्रस्‍ताव का सार
क्षेत्र
एफडीआई (करोड़ रुपये में)






1
1
मेसर्स एटीसीएशिया पे‍सिफिकपीटीई. लिमिटेड
मेसर्स एटीसी एशिया पे‍सिफिक पीटीई. लिमिटेड (एटीसी सिंगापुर) द्वारा मौजूदा शेयरधारकों से शेयर हस्‍तांतरण के जरिये मेसर्स विओम नेटवर्क्‍स लिमिटेड की 51 प्रतिशत शेयरधारिता के अधिग्रहण की मंजूरी मांगी गई है।
दूरसंचार
(आईपी-I)
5856.51


NDA शासन में थर्मल पावर क्षमता में 30,000 मेगावाट से ज्‍यादा वृद्धि : पीयूष गोयल


केंद्रीय विद्युत, कोयला और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल ने कहा कि वर्तमान सरकार के पिछले 20 महीनों के कार्यकाल के दौरान थर्मल पावर यानी तापीय ऊर्जा की 30,000 मेगावाट से ज्‍यादा क्षमता की वृद्धि हुई है। आज कोलकाता में इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित परस्‍पर संवादात्‍मक सत्र को संबोधित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए बुनियादी ढांचे का सबसे महत्वपूर्ण घटक होने के नाते सरकार विद्युत के क्षेत्र पर बहुत जोर दे रही है। उन्‍होंने जोर देते हुए कहा कि भारत का कोयला उत्पादन 9.6% से काफी बढ़ गया है जिससे कोयले के हमारे आयात में उल्लेखनीय कमी हुई है, और अब हमारा मंत्रालय कोयले के लिए और अधिक विपणन सुविधाओं पर बल दे रहा है। 

श्री गोयल ने कहा कि सरकार द्वारा सब्‍सडाइज्‍ड दर पर 5 करोड़ 36 लाख एलईडी बल्‍ब वितरित किए जा चुके हैं जिसके कारण प्रति बल्‍ब की कीमत 310 रुपए से घटकर 64 रुपए हो गई है और जल्‍दी ही यह आम आदमी की पहुंच तक आ जाएगी। उन्‍होंने आगे बताया कि इसके परिणामस्‍वरूप बिजली की खपत में 1600 मेगावाट की कमी आएगी और इस साल मार्च तक 10 करोड़ एलईडी बल्‍ब वितरित किए जाने का लक्ष्‍य है। इसके परिणामस्‍वरूप बिजली की खपत और प्रदूषण में बहुत ज्‍यादा कमी आएगी। 

ट्रांसमिशन (संचरण) के बारे में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के दौरान संचरण लाइन के 22,000 सर्किट किलोमीटर तैयार की गई है, जोकि एक रिकॉर्ड है। पिछले 18 महीनों के दौरान, 71 प्रतिशत अतिरिक्‍त संचरण क्षमता पैदा की गई है और 2019 तक इसके 200 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। 

ऊर्जा क्षेत्र में कहावत है कि पनबिजली, सौर, पवन और अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों - जोकि पर्यावरण के अनुकूल हैं, - कोयला और गैस जैसी थर्मल ऊर्जा के साथ ही साथ नाभिकीय ऊर्जा को एकीकृत करने के लिए समन्वित और सामंजस्यपूर्ण नजरिया समय की जरूरत है, और श्री गोयल ने आश्वासन दिया है कि सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है। मंत्री ने कहा कि उनका सपना है कि सस्‍ती कीमत पर चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली उपलब्‍ध हो। 

कोयला क्षेत्र के बारे में श्री गोयल ने बताया कि कोयला खानों की खुली, पारदर्शी और प्रतिस्‍पर्द्धी नीलामी से न सिर्फ राज्‍य को राजस्‍व प्राप्‍त हुआ है बल्कि कोयले के उत्‍पादन में भी वृद्धि हुई है। 

अन्‍य लोगों के अलावा इस सत्र को पूर्व विद्युत सचिव श्री अनिल राजदान ने भी संबोधित किया। 

पढ़िए केंद्रीय कर्मचारियों के लिए LTC के नए नियम

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने छुट्टी यात्रा रियायत (एलटीसी) दावों के आवेदन और निपटान में सरकारी कर्मचारियों को पेश आ रही परेशानियों को आसान बना दिया है। 

विभाग ने एलटीसी दावों की जांच की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने का निर्णय लिया है। छुट्टी की स्वीकृति, एलटीसी के लिए अग्रिम राशि की मंजूरी, डीडीओ और पीएओ द्वारा पांच- पांच दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है। दावे के निपटान से पहले एलटीसी दावे के सत्यापन के लिए दस दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है। अगर सरकारी कर्मचारी की तैनाती मुख्यालय से दूर किसी स्थान पर है तो उसके मामले में दो दिन का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। प्रस्तावित एलटीसी यात्रा के संबंध में छुट्टी स्वीकृत करने वाले अधिकारी संबंधित कर्मचारी से स्व-सत्यापन प्राप्त करेंगे। इससे पूर्व एलटीसी यात्रा करने से पूर्व कर्मचारियों को इस मामले में अपने नियंत्रण अधिकारी को सूचित करना आवश्यक था। 

एलटीसी का लाभ उठाते समय अनुपालन किए जाने वाले दिशानिर्देशों की एक प्रति सरकारी कर्मचारी को एलटीसी के लिए आवेदन करते समय उपलब्ध करायी जाए। 

जोजिला दर्रा टेंडर प्रक्रिया नियमानुसार हुई : राजमार्ग मंत्रालय


मीडिया के एक हिस्‍से में जोजिला दर्रे के निर्माण के लिए अनुबंध दिए जाने में कथित रूप से अनियमितता की खबरें छपी हैं। इस बारे में जानकारी दी जाती है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय किसी भी अनुबंध को देने में पूरी पारदर्शिता बरतते हुए सभी नियमों का पालन करता है। इस मामले में भी बोली को तकनीकी रूप से योग्‍य पाए जाने के बाद पूरे तौर-तरीकों का पालन करते हुए अनुबंध प्रदान किया गया। वित्‍तीय बोली खोली गई और उद्धृत की गई ‘सेमी एन्‍यूटी’ राशि इस कार्य को दिए जाने के लिए सीसीईए की मंजूरी के अनुरूप पाई गई। 

आगे यह भी जानकारी दी जाती है कि जोजिला दर्रा अनुबंध प्रदान किए जाने के लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाई गई। इसका तरीका बीओटी (एन्‍यूटी) है तथा 7 वर्षों की निर्माण अवधि समेत 22 वर्ष की रियायत अवधि है। 

जोजिला दर्रे के निर्माण से एनएच : 1डी (न्‍यू एनएच-1) के श्रीनगर से कारगिल/लेह की कंनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। जोजिला दर्रे के लिए डीपीआर 2012-13 में तैयार किया गया था। आर्थिक मामलों पर गठित मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने 17-10-2013 को अपनी बैठक में बीओटी (एन्‍यूटी) तरीके पर आधारित 9090 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत के साथ इस परियोजना को मंजूरी दी थी। 

भाजपा अध्यक्ष का देशवासियों के नाम खुला पत्र


प्रिय बंधुवर/भगिनी,

सप्रेम नमस्कार!

आपको एवं आपके परिवार को नव वर्ष मंगलमय हो।

आप सबके सहयोग एवं समर्थन से प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की पूर्ण बहुमत की सरकार मई 2014 में बनी है। श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार गांव, गरीब, सेना के जवान, नौजवान, किसानों को समर्पित है। मानवता के आधार पर पड़ोसी एवं अन्य देशों से हमारे संबंध मजबूत हुए हैं। दलित, शोषित, पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए एवं रोजगार को बढ़ावा देने के लिए यह सरकार लगातार कार्यरत है।

मोदी सरकार ने 19 महीनों में प्रारम्भ की गई जनकल्याणार्थ योजनाएं जैसे :-

  •  मेक इन इंडिया
  • डिजिटल इंडिया
  • बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना
  • प्रधानमंत्री जन-धन योजना
  • स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना
  • स्वच्छ भारत अभियान
  • नमामि गंगे अभियान
  • JAM - जनधन-आधार-मोबाइल
  • उदय-उज्जवल डिस्काॅम एश्योरेंस योजना
  • सांसद आदर्श योजना


इत्यादि किये गये कार्यों का विस्तृत विवरण आपकी जानकारी एवं चर्चा के लिए नीचे संलग्न है।

आपसे अनुरोध है कि समय-समय पर अपने सुझाव हमें bjp.suggestion@gmail.com पर भेजें, हमें प्रसन्नता होगी।

आइये, हम सब मिल कर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का निर्माण करें एवं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी के नेतृत्व में चल रही सरकार को मजबूती के साथ संबल प्रदान करें।

विश्व के सबसे बड़े राजनैतिक दल भारतीय जनता पार्टी की ओर से मैं आपको बहुत- बहुत शुभकामनायें देता हूं।

धन्यवाद,

आपका,
अमित शाह



प्रधानमंत्री ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की आधारशिला फलक का अनावरण किया


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नोएडा के सेक्टर 62 में दिल्ली - मेरठ एक्सप्रेसवे की आधारशिला फलक का अनावरण किया। 

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने ब्रितानी शासन से आजादी के लिए 1857 के आंदोलन में मेरठ की भूमिका का स्मरण किया और कहा कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे प्रदूषण से मुक्ति प्रदान करेगा। 

विकास के लिए लोगों की आकांक्षाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अच्छी सड़कें विकास की प्रथम पूर्व- शर्तों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विकास को बढ़ावा देगा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के जरिये देश को आपस में जोड़ने के विजन का स्मरण किया। 

प्रधानमंत्री ने किसानों के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना समेत अन्य विकास योजनाओं की चर्चा की। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रेणी - III एवं श्रेणी - IV वर्गों में सरकारी नौकरियों के लिए साक्षात्कार को खत्म करने के द्वारा सरकार 1 जनवरी, 2016 को देश के युवाओं को एक अनोखा उपहार दे रही है। 

प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से 2016 में एक संकल्प करने की अपील की कि वे संसद का कार्य चलने देंगे और गरीबों के लाभ के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत के नागरिकों ने अपने प्रतिनिधियों का निर्वाचन संसद में बहस करने, परिचर्चा करने एवं विचार-विमर्श करने के लिए किया है इसलिए यह उनका दायित्व है। 

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक, केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा एवं केंद्रीय राज्य मंत्री श्री पी राधाकृष्णन भी उपस्थित थे। 

जरुर पढ़िए: कैसे देश के कोयला क्षेत्र के इतिहास को मोदी सरकार ने स्वर्णाक्षरों में लिख दिया


कोयला खदान (विशेष प्रावधान) विधेयक 2015 पारित; कोयला खदान नीलामी के लिए सुदृढ़ और पारदर्शी प्रणाली स्थापित 

केंद्र ने 31 कोयला खदानों की नीलामी की; अन्य 42 कोयला खदान राज्य कंपनियों को आबंटित

कोयला उत्‍पादक राज्‍यों के लिए खान के जीवनकाल के दौरान अनुमानित 3.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संभावित राजस्‍व

वित्त वर्ष 16 के पहले 8 महीनों में सीआईएल का कोयला उत्पादन और उठाव क्रमशः 8.8 प्रतिशत तथा 9.8 प्रतिशत बढ़ा; 2020 तक एक बिलियन टन उत्पादन की तैयारी

कोयला धारक राज्यों को 1395 करोड़ रुपये से अधिक अंतरित

डब्ल्यूसीएल ने 10 खदान खोले, अगले 26 महीनों में 26 खदान खोले जाएंगे

वर्ष 2015 कोयला खदानों की कुशल और पारदर्शी नीलामी किए जाने के कारण देश के कोयला क्षेत्र के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।  नई सरकार द्वारा कोयला खदानों की सफल नीलामी ने यह साबित किया है कि सरकार के निष्पक्ष और पारदर्शी नीलामी कराने के निर्णय से बड़े पैमाने पर देश को लाभ हुआ है क्योंकि नीलामी से भारत ने वास्तव में स्वर्ण खदान पर प्रहार किया है।

उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद सुदृढ़ और पारदर्शी प्रणाली बनाने के लिए एक अध्यादेश जारी किया गया ताकि अदालत द्वारा निरस्त किए गए 204 कोयला खदानों को फिर से आबंटित करने का कानूनी अधिकार सरकार को मिले और यह सुनिश्चित हो कि नीलामी और सरकारी कंपनियों को आबंटन के जरिए चुने गए नए आबंटियों को भूमि तथा अन्य संबद्ध खदान अवसंरचनाओं के साथ स्वाधिकार प्राप्त हो। संसद ने 20 मार्च, 2015 को कोयला खदान (विशेष प्रावधान) विधेयक 2015 पारित किया। इस विधेयक ने अध्यादेश का स्थान लिया। कोयला खदान (विशेष प्रावधान) विधेयक 2015  के अंतर्गत  केंद्र सरकार ने अब तक तीन भागों में 31 कोयला खदानों की सफलतापूर्वक नीलामी की और 42 खदानों/ब्लाकों का आबंटन केंद्र या राज्य सरकार की कंपनियों को किया। नीलामी की सफलता की हर तरफ प्रशंसा हुई है, इससे न केवल यह सुनिश्चित हुआ है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के आलोक में अर्थव्यवस्था में कोई व्यवधान नहीं आया है बल्कि इससे कुशलता और पारदर्शिता के नए मानक तय हुए हैं। अनुमान है कि राज्यों को नीलामी के केवल तीन दौर से ही 30 साल के स्तर का 3.44 लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। चौथे दौर में अनियंत्रित क्षेत्र के लिए 8 कोयला खदानों(अनुसूची III) की नीलामी की घोषणा भी कर दी गई है।

नीलाम/आबंटित किए गए 34 कोयला खदानों में से 9 खदानों में उत्पादन शुरु हो गया है और 5 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ है। शेष खदानों में 2/3 महीनों में उत्पदान शुरु हो जाएगा।

अप्रैल-नवंबर में कोल इंडिया लिमिटेड(सीआईएल)  का उत्पादन 8.8 प्रतिशत बढ़ कर 321.38 मीट्रिक टन हुआ और उठाव में 9.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई

सीआईएल ने उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने, कोयले की गुणवत्ता में सुधार करने, कुशलता बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा के लिए 1 अप्रैल, 2016 से उपभोक्ताओं को दलन किया हुआ कोयले की सप्लाई करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सीआईएल ने अक्टूबर 2017 से कोयला ग्रेड 10 और इससे ऊपर के ग्रेड का स्वच्छ कोयला सप्लाई करने के लिए 15 कोयला धुलाई मशीनें स्थापित करने की प्रक्रिया शुरु कर दी है।

अभी तक 19 ताप कोयला संयंत्रों के लिए लिंकेज को विवेकसंगत बनाया है और इससे ढुलाई लागत में 1423 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

कोयला मंत्रालय के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और उपलब्धियों का विवरण

कोयला खदान नीलीमी और आबंटनः

कोयला खदान (विशेष प्रावधान) विधेयक 2015 के प्रावधानों के अंतर्गत केंद्र सरकार ने अब तक सफलतापूर्वक 31 कोयला खदानों की नीलामी की है और 42 कोयला खदानों /ब्लाकों का आबंटन केंद्र या राज्य सरकार की कंपनियों को किया है। 73 कोयला खदानों ( नीलामी के जरिए 31 कोयला ब्लाकों तथा आबंटन के जरिए 42 कोयला ब्लाकों) की नीलामी से 3.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि मिली है जो पूरी तरह कोयला उत्पादक राज्यों को दिए जाएंगे।

कोयला उत्पादक राज्यों को प्राप्त होने वाले राजस्व में टेंडर दस्तावेज में दिया गया अग्रिम भुगतान, नीलामी से प्राप्तियां और कोयला उत्पादन के प्रति टन पर रॉयल्टी शामिल है। कोयला उत्पादक राज्यों को 31 कोयला खदानों की नीलामी की तिथि से खदान जीवन /लीज के दौरान प्राप्त होने वाला अनुमानित राजस्व 1,96,698 करोड़ रुपये का होगा। इसके अतिरिक्त केंद्र और राज्य सरकार की कंपनियों को 42 कोयला ब्लाकों के आबंटन से कोयला उत्पादक राज्यों को 1,48,275 करोड़ रुपये मिलेंगे। उपभोक्ताओं के लिए बिजली शुल्क में होने वाली कमी लगभग 69,310.97 करोड़ रुपये की होगी।  

 बजट सत्र के पहले भाग में संसद के दोनों सदनों ने कोयला खदान(विशेष प्रावधान) विधेयक 2015 पारित किया और इस तरह अध्यादेश ने विधेयक का स्थान लिया।

कोयला खदान (विशेष प्रावधान) विधेयक 2015 के प्रमुख आकर्षण:

  • नए अधिनियम में पारदर्शी बोली प्रक्रिया यानी ई-नीलामी  के माध्यम से कोयला खदानों के आबंटन का प्रावधान है।
  • कोयला खदानों की ई-नीलामी से कोयला खदान संचालनों में निरंतरता सुनिश्चित होगी और कोयला संसाधनों के अधिकतम उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • नए अधिनियम में निजी कंपनियों के सीमित उपयोग के लिए कोयला ब्लाकों की ई-नीलामी का तथा राज्य तथा केंद्र के सावर्जनिक प्रतिष्ठानों को सीधे तौर पर खदान आबंटित करने का प्रावधान है ।
  • इसमें विस्थापित लोगों के लिए पुनर्वास और मुआवजे का प्रावधान है।
  • यह छोटे, मझोले तथा काटेज उद्योंगों के लिए विशेष रूप से कोयला बेचने में सहायक है ताकि इस क्षेत्र में रोजगार और आय बढ़े ।

      
कोयला क्षेत्र में भारतीय कंपनियां और विदेशी कंपनियों की भारतीय सहायक कंपनियां  वाणिज्यिक खदान की पात्र होंगी। इस प्रावधान से वैश्विक खदान कंपनियां आकर्षित होंगी और यह क्षेत्र स्पर्धी और लागत कुशल होगा।

    

*one coal mine is regionally explored and accordingly no estimates have been made.

स्पर्धी बोली नियम, 2012 के अंतर्गत 10 क्षेत्रीय स्तर पर खोजे गए कोयला ब्लाक केंद्र/राज्य सरकार की कंपनियों को दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय रूप में खोजे गए 10 लिग्नाइट ब्लाकों को गुजरात सरकार की कंपनियों को आबंटित किया गया है।

कोयला प्रदान करने वाले संबंधित राज्‍यों को (31 अक्‍टूबर, 2015 तक) पहले ही और मासिक भुगतान के तहत 1395,69,77046.25 करोड़ रुपये प्राप्‍त हो चुके हैं।   



अनुसूची II के 34 नीलाम किए गए( 17 नीलाम और 17 आबंटित ) खदानों में से 09 खदानों में उत्पादन शुरु हो गया है।  इन 09 खदानों में सितंबर, 2015 तक 4.823 मिलियन टन (अस्थाई) उत्पादन हुआ। शेष खदान मंजूरी के विभिन्न चरणों में हैं।



  
 चौथे चरण की नीलामी  जनवरी 2016 में शुरु होगी और इसमें अनियंत्रित क्षेत्र यानी लौह एवं इस्पात, सीमेंट, कैप्टीव पावर प्लांट आदि के लिए अनुसूची II के नौ खदान नीलाम होंगे।

 कोयला उत्पादनः
 वर्ष 205-16 की पहली छमाही(अप्रैल-सितंबर) के दौरान कच्चे कोयले का उत्पादन 275.29 एमटी हुआ। पिछले वर्ष इसी अवधि में 264.54 एमटी कच्चे कोयले का उत्पादन हुआ था। इस तरह अप्रैल-सितंबर, 2015 के दौरान कोयला उत्पादन में 4.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

 सीआईएल ने ( अप्रैल-नवंबर 2015 में ) कोयला उत्पादन और उठाव में रिकार्ड वृद्धि दर्ज की
 कोल इंडिया लिमिटेड(सीआईएल) ने अप्रैल-नवंबर 2015 के दौरान कोयला उत्पादन और उठाव में क्रमशः 8.8 प्रतिशत और 9.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।  सीआईएल ने अप्रैल-नवंबर 2015 के दौरान 26 मिलियन टन अधिक कोयला उत्पादन किया । उठाव पर भी जोर दिया गया और इस तरह इस अवधि में उठाव 30.44 मिलियन टन अधिक हुआ।

सीआईएल ने अप्रैल-नवंबर 2015 में कुल 321.38 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया। पिछले वर्ष इसी अवधि में 295.40 मिलियन टन का उत्पादन किया था। इस तरह कोयला उत्पादन में सीआईएल ने 8.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।  सीआईएलकी लगभग सभी सहायक कोयला उत्पादक कंपनियों ने उत्पादन में सकारात्मकता दिखाई। कोयले का उठाव अप्रैल- नवंबर 2005 में 341.13 मिलियन टन कोयले का उठाव किया गया जबकि यह उठाव पिछले साल की इसी अवधि में 310.70 मिलियन टन था। इस प्रकार उठाव में 9.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
   


अप्रैल-नवंबर 2015 में कोयले का उठाव पिछले वर्ष की इसी अवधि के उठाव की तुलना में ढाई गुना अधिक है।

कोयला आयात में कमीः

कोयले का अधिक उत्पादन का परिणाम यह हुआ है कि कोयले के आयात में कमी आई है। पिछले वर्ष से कोयले के आयात में 4.56 प्रतिशत की कमी आई है।


  
टीटीपीएस में कोयले का स्टॉकः

कोयले से चलने वाले विद्युत उत्पादन संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त स्टॉक है। नवंबर 2015 के अंत तक  कोई भी विद्युत उत्पादन संयंत्र सुपर क्रिटिकल नहीं है। केवल एक संयंत्र संकट की स्थिति यानी क्रिटिकल है । ताप विद्युत संयंत्रों में 27 मिलियन टन कोयला है जो 21 दिनों का स्टॉक है।  नवंबर 2014 की इसी अवधि में विद्युत संयंत्रों में कोयले का स्टॉक 10.85 मिलियन टन था जो केवल 7 दिनों का स्टॉक था। 50 बिजली संयंत्र क्रिटिकल थे जिसमें से 30 सुपर क्रिटिकल थे।

कोयला गुणवत्ताः

गुणवत्ता संपन्न कोयला उत्पादन के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं।  कोयला कंपनियों और बिजली संयंत्रों के बीच के विवाद को सुलझाने तथा कोयले की गुणव्ता सुधारने के लिए थर्ड पार्टी सैंपलिंग के लिए नए नियम जारी किए गए हैं। नई नियमों के अनुसार  बिजली संयंत्र और कोयला कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि संयुक्त रूप से सीआईएमएफआर द्वारा नियुक्त थर्ड पार्टी एजेंसी के बीआईएस मानकों के अनुसार एकत्रित नमूनों को देखेंगे। नमूना एकत्रित करने के 18 कार्य दिवसों के अंदर  एजेंसी विश्लेषण रिपोर्ट देगी।  सरकार ने निर्णय लिया है कि 1 जनवरी 2016 से कोयला आवश्यक स्तर तक दलन के बाद भेजा जाएगा।

 कोयला सफाईः

सरकार ने निर्णय लिया है कि 1 अक्टूबर, 2017 से  साफ-सफाई के बाद ही जी10 स्तर का कोयला भेजा जाएगा।  यह निर्णय कोयले की गुणवत्ता की समस्या को सुझाने के लिए लिया गया है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सीआईएल कुल 112.6 एमटीवाई क्षमता की 15 नई सफाई मशीनें  स्थापित कर रही है।  इनमें से 6 कोकिंग कोल सफाई की मशीनें हैं जिनकी कुल क्षमता 18.6 एमटीवाई है। 9 गैर-कुकिंग कोयले की सफाई मशीनों की कुल क्षमता 94.0 एमटीवाई है। इन सफाई मशीनों के अतिरिक्त 11.6 एमटीवाई की 3 मशीनें निर्माणाधीन हैं।

कोल लिंकेज को विवेकसंगत बनानाः

लिंकेजेज को विवेकसंगत बनाने के लिए जून 2014 में अंतर मंत्रालय कार्य बल(आईएमटीएफ) गठित किया गया । आईएमटीएफ की सिफारिशों के आधार पर पहले चरण के अंतर्गत 15 बिजली संयंत्रों के लिए  कोयला स्रोत को विवेकसंगत बना लिया गया है। 19 एमटी कोयले की आवाजाही को विवेकसंगत बनाए जाने से परिवहन लागत में 877 करोड़ रुपये की वार्षिक पुनरावर्ती बचत हुई है। चरण 2 के प्रस्तावों के अंतर्गत 4 ताप विद्युत संयंत्रों के लिए 2.4 एमटी कोयले की ढुलाई को विवेकसंगत बनाया गया है। इससे  प्रति वर्ष 563 करोड़ रुपये की पुनरावर्ती बचत होगी।

सीआईएल द्वारा ईंधन सप्लाई ठेकेः  

चयन प्रक्रिया के रूप में स्पर्धी बोली के माध्यम से कोल लिंकेजेज / एलओए की नीलामी सहित विभिन्न माडलों पर विचार करने तथा सभी हितधारकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिकतम संरचना की सिफारिश करने के लिए जनवरी 2015 में एक अंतर-मंत्रालय समिति(आईएमसी) बनाई गई है।

विद्युत और गैर-विद्युत  क्षेत्रों के लिए पृथक ई-नीलामी खिड़कीः

दीर्घ और मध्यम अवधि के पीपीए धारकों के लिए 5एमटी की ई-नीलामी खिड़की खोली गई है। इसका आधार मूल्य सीआईएल का अधिसूचित मूल्य प्लस 20 प्रतिशत प्रीमियम है। लघु अवधि के पीपीए या ‘नो पीपीए ‘ धारकों के लिए 5 एमटी की एक ई-नीलामी खिड़की खोली गई है जिसका आधार मूल्य सीआईएल का अधिसूचित मूल्य प्लस 40 प्रतिशत प्रीमियम है।

 इसी प्रकार,  सीआईएल द्वारा गैर-विद्युत क्षेत्र के लिए 4 एमटी की अलग ई-नीलामी खिड़की खोली जा रही है जिसमें वर्तमान एमओयू गैर-विद्युत उपभोक्ता अन्य गैर-विद्युत उपभोक्ताओं के साथ शामिल हो सकते हैं। यह खिड़की केवल गैर-विद्युत क्षेत्र के एंड यूजरों के लिए उपलब्ध होगी और इसमें व्यवसायी शामिल नहीं हो सकते।

एक बिलियन टन कोयला उत्पादन लक्ष्य के लिए सीआईएल की तैयारीः

 कोल इंडिया लिमिटेड(सीआईएल) ने 2019-20 तक 1 बिलियन टन कोयला उत्पादन लक्ष्य प्राप्त करने के लिए रोड मैप बनाया है जिसमें अपनाई जाने वाली रणनीतियां हैं।  2019-20 तक देश में 7 प्रतिशत वृद्धि की दर से कोयले की अनुमानित मांग 1,200 मिलियन टन होगी। सीआईएल  का उत्पादन लक्ष्य 1 बिलियन टन का है ,जिसमें से 908 मिलियन टन का उत्पादन चिन्हित परियोजनाओं से होगा।  शेष मात्रा को साझा करने, 1 बिलियन टन का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए परियोजनाओं को चिन्हित करने की प्रक्रिया जारी है।  सीआईएल की दो सहायक कंपनियां – संबलपुर की महानदी कोल फील्ड्स लिमिटेड और बिलासपुर की साउथ ईस्टर्न  कोल फील्ड्स लिमिटेड- क्रमशः 250एमटी और 240 एमटी के योगदान के साथ सीआईएल की लक्ष्य प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगी। खनिक की निर्भरता महत्वपूर्ण रेल लाइनों के समय पर पूरा होने , समय से भूमि अधिग्रहण और हरित मंजूरी पर है।

 सीआईएल ने 2014-15 के 494.80एमटी कोला उत्पादन स्तर को बढ़ाकर 908.1एमटी करने के लिए अगले पांच वर्षों  में 57,000 करोड़ रुपये निवेश करने का निश्चय किया है। यह 2019-20 तक 1 बिलियन टन कोयला उत्पादन लक्ष्य के लिए रोड मैप का हिस्सा है।

डब्ल्यूसीएल 36 महीनों में 36 खदान खोलेगी;2020 तक 100एमटी उत्पादन लक्ष्यः

2020 तक सीआईएल के 1 बिलियन टन कोयला उत्पादन लक्ष्य में मदद देने के लिए वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) अपने उत्पादन में 150 प्रतिशत की वृद्धि करने की योजना बना रही है।  कंपनी ने पिछले 10 महीनों में 10 खदान खोले हैं और अगले 26 महीनों में 26 खदान खोलेगी। इस नियोजित विस्तार के कारण वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड ने 2020 तक अपना उत्पादन 150 प्रतिशत बढ़ा कर 60एमटी से 100एमटी करने का निश्चय किया है।

एनसीएल प्रगति की राह परः

नेवेली लिग्नाइट कारपोरेशन(एनसीएल) ने अपनी लिग्नाइट खनन क्षमता 31.10.2015 को 30.60एमटीपीए कर ली। कंपनी ने अपनी विद्युत् उत्पादन क्षमता 2740 मेगावाट(मार्च 2015 में) से बढ़ा कर 4263.50 मेगावाट कर ली है। इसमें 10 मेगा वाट सौर तथा 13.5 मेगा वाट पवन विद्युत है। एनसीएल ने 2025 तक अपने लिग्नाइट तथा कोयला खदानों से प्राप्त ईंधन सुरक्षा के साथ 19,000 मेगावाट की विद्युत कंपनी बनने का निश्चय किया है।

रेलवे तथा राज्य सरकारों के साथ सहमति ज्ञापनः

 कोयला उत्पादन की नियोजित वृद्धि तथा खोज को बनाए रखने के उद्देश्य से संयुक्त उद्य बनाकर रेल अवसंरचना विकसित करने के लिए रेल मंत्रालय , ओडिशा , झारखंड और छत्तीसगढ़ सरकार के साथ सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

कोयला परियोजना मॉनिटरिंग पोर्टल(ई-सीपीएमपी):

मंत्रालय में परियोजनाओं की शीघ्र मंजूरी तथा राज्य सरकार और केंद्र सरकार की कोयला परियोजनाओं जुड़े लंबित मामले निपटाने के लिए मंत्रालय ने परियोजना मॉनिटरिंग पोर्टल (ई-सीपीएमपी) स्थापित किया है।

स्वच्छ भारत अभियान में योगदानः

कोयला मंत्रालय  विद्युत तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ मिलकर एक वर्ष के अंदर सरकारी स्कूलों में कुल एक लाख शौचालय बनाने के लिए संकल्पबद्ध है। सावर्जनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान एनटीपीसी, आरईस, पीजीसीआईएल, पीएफसी, एनएचपीसी, एसजेवीएनएल, टीएचडीसी, एनईईपीसीओ, सीआईएल,एनएलसी तथा आआरईडीए स्वच्छ भारत अभियान में शामिल हुए। तीन मंत्रालयों ने सामूहिक रूप से एक वर्ष की छोटी अवधि में सरकारी स्कूलों में 1.28 लाख शौचालयों  का निर्माण किया जो 1 लाख शौचालय के संकल्प से अधिक है।  इनमें से 55,286 शौचालय सीआईएल तथा उसकी सहायक कंपनियों की ओर से बनाए गए। 

Join our WhatsApp Group

Join our WhatsApp Group
Join our WhatsApp Group

फेसबुक समूह:

फेसबुक पेज:

शीर्षक

भाजपा कांग्रेस मुस्लिम नरेन्द्र मोदी हिन्दू कश्मीर अन्तराष्ट्रीय खबरें पाकिस्तान मंदिर सोनिया गाँधी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राहुल गाँधी मोदी सरकार अयोध्या विश्व हिन्दू परिषद् लखनऊ जम्मू उत्तर प्रदेश मुंबई गुजरात दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश श्रीनगर स्वामी रामदेव मनमोहन सिंह अन्ना हजारे लेख बिहार विधानसभा चुनाव बिहार लालकृष्ण आडवाणी मस्जिद स्पेक्ट्रम घोटाला अहमदाबाद अमेरिका नितिन गडकरी सुप्रीम कोर्ट चुनाव पटना भोपाल कर्नाटक सपा सीबीआई आतंकवाद आतंकवादी पी चिदंबरम ईसाई बांग्लादेश हिमाचल प्रदेश उमा भारती बेंगलुरु केरल अरुंधती राय जयपुर पंजाब इस्लामाबाद उमर अब्दुल्ला डा़ प्रवीण भाई तोगड़िया धर्म परिवर्तन महाराष्ट्र सैयद अली शाह गिलानी हिन्दुराष्ट्र अरुण जेटली मोहन भागवत राष्ट्रमंडल खेल वाशिंगटन शिवसेना इंदौर गंगा दवा उद्योग हिंदू कश्मीरी पंडित गोधरा कांड बलात्कार भाजपायूमो मंहगाई यूपीए साध्वी प्रज्ञा सुब्रमण्यम स्वामी चीन बी. एस. येदियुरप्पा भ्रष्टाचार शिवराज सिंह चौहान हिंदुत्व हैदराबाद इलाहाबाद काला धन गौ-हत्या चंडीगढ़ चेन्नई तमिलनाडु नीतीश कुमार शीला दीक्षित सुषमा स्वराज हरियाणा अशोक सिंघल कोलकाता जन लोकपाल विधेयक नई दिल्ली नागपुर मायावती मुजफ्फरनगर मुलायम सिंह रविशंकर प्रसाद स्वामी अग्निवेश अखिल भारतीय हिन्दू महासभा आजम खां उत्तराखंड फिल्म जगत ममता बनर्जी लालू यादव अजमेर प्रणव मुखर्जी बंगाल मालेगांव विस्फोट विकीलीक्स अटल बिहारी वाजपेयी आशाराम बापू ओसामा बिन लादेन नक्सली अरविंद केजरीवाल एबीवीपी कपिल सिब्बल क्रिकेट तरुण विजय तृणमूल कांग्रेस बजरंग दल बसपा बाल ठाकरे राजिस्थान वरुण गांधी वीडियो सोहराबुद्दीन केस हरिद्वार असम गोवा मनीष तिवारी शिमला सिख विरोधी दंगे सिमी इसराइल एनडीए कल्याण सिंह पेट्रोल प्रेम कुमार धूमल सैयद अहमद बुखारी अनुच्छेद 370 जदयू भारत स्वाभिमान मंच हिंदू जनजागृति समिति आम आदमी पार्टी विडियो-Video हिंदू युवा वाहिनी कोयला घोटाला मुस्लिम लीग छत्तीसगढ़ हिंदू जागरण मंच सीवान
registration for Z.com Research India

लोकप्रिय ख़बरें

ख़बरें और भी ...

राष्ट्रवादी समाचार. Powered by Blogger.

नियमित पाठक