गांधी हत्या के पीछे लॉर्ड माउंटबॅटन आैर नेहरू : डॉ. सुब्रह्मण्यम् स्वामी


मॉनसून सत्र में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने महात्मा गांधी की हत्या का मामला उठाते हुए कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया। तत्कालीन नेहरू सरकार पर निशाना साधते हुए स्वामी ने गांधी की हत्या को लेकर कांग्रेस से तीन प्रश्न पूछे। उन्होंने गांधी के पोस्टमॉर्टम की कोई जानकारी नहीं होने को लेकर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि, गांधी को आरएसएस ने नहीं अंग्रेजों ने मारा था।

स्वामी ने राज्यसभा में गांधी जी की हत्या का मुद्दा उठाते हुए तीन सवाल किए। स्वामी ने पूछा कि, ‘गांधी जी पर कितनी गोलियां दागी गर्इ, इसके बारे में किसी को कुछ पता है ? उनके पार्थि‍व शरीर का पोस्टमॉर्टम क्यों नहीं हुआ, इसकी जानकारी नहीं है ? और जब गोली लगी थी तो गांधी जी को अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया और फिर बिरला हाउस में क्यों लिटाया गया ?’

स्वामी ने आगे कहा कि, वह 15 अगस्त के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और महात्मा गांधी की हत्या पर तथ्य सामने रखेंगे। उन्होंने कहा, ‘जब काँग्रेस सरकार थी, तब हमने राष्ट्रपति को भी लिखा था। हमने कहा था कि, गांधी को ब्रिटिश लोगों ने मारा था। उन्होंने कहा कि, कुछ ऐसी जानकारियां है कि माउंटबेटन और जवाहर लाल नेहरू दोनों का यह षड्यंत्र था।

स्वामी ने आगे कहा कि, उन्होंने नेशनल आर्काइव से गांधी जी के बारे में जानकारी ली है, जिसके बाद ही ये प्रश्न उठे हैं। उन्होंने कहा कि, ‘हमारे पास सरदार पटेल की एक चिट्टी है, जिसमें पटेल ने जवाहर लाल नेहरू को लिखा था कि गांधी की हत्या में अारएसएस का कोई हाथ नहीं है’।

Subramanian Swamy Bold Repliys to Muslim Clerics' Six Questions

A delegation of Muslim clerics led by the Sunni Ulema Council's General Secretary had in February met RSS functionary Indresh and posed six questions to the Sangh including whether it has prepared a format to turn India into a Hindu 'rashtra'.

The Muslim delegation claimed that Indresh refused to answer their questions and instead said that a conference of Muslim organisations should be called where he would give the answers.

"Our first question was whether RSS considers India a Hindu country. The second one was whether RSS has prepared a format to turn India into a Hindu 'rashtra'. The third one was whether this Hindu 'rashtra' will be according to Hindu religious texts or RSS has chalked out a new philosophy," he said.

Salees said, "The fourth question was what they want on religious conversion. The fifth one was what type of 'rashtra prem' (patriotism) RSS wants from Muslims. The sixth one was how RSS views Islam," he said. He said that these were the six questions which Indreshji "failed" to answer.

"They (RSS) did not have any format. They are shouting about 'Hindu rashtra' only on the basis of propaganda," he alleged.

Salees feared that if Hindu Rashtra was built on Hindu texts, Dalits could once again not be allowed to enter temples.

"We asked whether a new philosophy has been chalked out by RSS. If a new philosophy has been chalked out that means Hindu religion is not religious culture. In that case, anyone can convert," he said.

BJP leader Subramanian Swamy took it to twitter to answer these six questions and here is what he had to say:

Q1: Whether India is a Hindu Country? 

A: India is Hindustan that is a land of Hindus and those others who are of Hindu descent or ancestry.

Q2: Whether there is a format to make India into Hindu Rashtra. 

A2: No.We are bound by the Constitution with a Basic Structure unamendable. But the Directive Principle of the Constitution with other easily amendable Articles e.g., 370 de facto makes it a Hindutva Constitution.

Q3: Will this Constitution be according to Hindu religious texts. 

A3: No. It will be secular because India will be a Hindustan Republic.

Q4: What does Hindutva mean for religious conversion? 

A4:Under the Constitution conversion illegal if induced by bribe or force. If induced then de-conversion I.e., uninduced Gharwapsi is legal and Constitutional no matter how long ago conversion had taken place.

Q5:What is Hindu view of Islam? 

A5: Islam is an established religious theology. Hindus believe that God can be reached through Islam. But Hindus believe that the 800 years of Islamic violence against Hindus  and Hindu institutions have to be acknowledged and addressed. A step is to voluntarily agree to shift the offending masjids in Mathura, Ayodhya, and Varanasi to other acceptable suitable locations.

Q6: What kind of Rashtra prem do  Hindus want from Muslims? 

A6: Same as from Hindus & other Indians. Our public policies should be guided by national interests and not by sectional interests. Hindustani Muslims should accept nation's support for Israel just as Tamils should SL 

These are my personal views to be presented to VIrat Hindustan Sangam meeting for adoption in  in Mumbai on May 2&3

नेहरू भी नेताजी की हत्या की साजिश में थे शामिल : स्वामी

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की हत्या की साजिश में शामिल थे।

उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में जापान व जर्मनी की हार के बाद उनके पास कोई चारा नहीं बचा और उन्होंने अपने को छिपाने के लिए झूठी अफवाहें फैला दीं कि एक हवाई जहाज दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। जबकि, तीन सितंबर 1945 को अमेरिका ने ताइवान पर कब्जा कर लिया और सीआइए ने रिपोर्ट में कहा कि ताइवान में पिछले 6 माह में कोई विमान दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुआ, जबकि 16 अगस्त 1945 को नेताजी वियतनाम के शहर साइगॉन से भाग मंचूरिया चले गए थे और उस समय यह शहर रूस के अधीन था।

वहां पर सोवियत संघ के प्रमुख जोसेफ स्टालिन ने उन्हें गिरफ्तार कर साइबेरिया की याकुतस्क जेल में डाल दिया। इसकी जानकारी 26 दिसंबर 1945 को नेहरू को लग गई और उन्होंने अपने टाइपिस्ट श्यामलाल से अंग्रेजी सरकार के नाम एक पत्र लिखवाया कि उन्हें पहले से ही पता था कि स्टालिन बदमाश है और वह झूठ बोलता है। नेहरू ने अंग्रेजों को बताया कि स्टालिन ने नेताजी को कैद में रखा हुआ है और उन्होंने हम सब से जानकारी छिपाई है। 1953 में रूस ने ब्रिटेन सरकार के दबाव में नेताजी को मरवा दिया था।

44 लाख 50 हजार मंदिर सरकार के नियंत्रण में जबकि मस्जिद और चर्च एक भी नहीं - स्वामी

‘रोटरी क्लब ऑफ म्हापसा’ द्वारा आयोजित अर्पण व्याख्यान माला में ‘क्या न्यायव्यवस्था का एक ही मार्ग रह गया है ?’ विषय पर बोलते हुए डॉ. सुब्रह्मण्यम् स्वामी ने प्रतिपादित किया कि देश के ४४ लाख ५० सहस्र मंदिरों को सरकार द्वारा नियंत्रण में लिया गया है; जबकि एक भी मस्जिद अथवा चर्च नियंत्रण में नहीं लिया गया । मंदिर की कुल आयमें से केवल ६ से ७ प्रतिशत निधि मंदिर की व्यवस्था पर व्यय की जाती है । शेष निधि भ्रष्टाचार द्वारा हडप की जाती है । मंदिरों से प्राप्त निधि हज यात्राके लिए दी जाती है । संसद, प्रशासन एवं पत्रकारिता लोकतंत्रके ये तीन स्तंभ ढह गए हैं । उन्हें खडा करने के लिए न्यायसंस्था उत्तम पर्याय है । इस पर्याय का उचित उपयोग कर न्यायालयीन अंकुश द्वारा पूरी बिगडी व्यवस्था में सुधार लाना संभव है । 

इस अवसर पर डॉ. स्वामीने श्रोताओं को रामसेतु का तोडना एवं केरल के नटराज मंदिर का सरकारी करण रोकने हेतु सफलता पूर्वक की गई न्यायालयीन लडाई के संदर्भ में बताया ।

डॉ. स्वामीने कहा, ‘भ्रष्टाचार तथा काम के बोझ के कारण जनप्रतिनिधि साधारण जनता की समस्याओं पर समाधान नहीं ढूंढ पाते । प्रशासकीय तंत्र भ्रष्टता से ग्रसित हैं । ऐसी स्थितिमें न्यायालय में जाना ही उपयुक्त पर्याय सिद्ध होता है । जो लोग न्यायालय में नहीं जा सकते उनके लिए न्यायालय ने जनहित की दृष्टि से वर्ष १९८१ में न्यायालय में जाने का अधिकार दिया । तदुपरांत जनहित याचिका का पर्याय आया । केवल भारत में जनहित याचिका प्रविष्ट करने का अधिकार है, जो देश में अधिकाधिक जागृत शिक्षित वर्ग सिद्ध होने का परिणाम है । मैंने २-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के विरुद्ध न्यायालय में याचिका प्रविष्ट की थी, जिसके फलस्वरूप न्यायालय ने सरकार द्वारा दिया गया २-जी स्पेक्ट्रम का ठेका निरस्त कर दिया ।’

न्यायालयीन लडाई द्वारा डॉ. सुब्रह्मण्यम् स्वामी का हिंदुओं को न्याय दिलाने के उदाहरण:

डॉ. स्वामीने कहा,

१. ‘रामद्वारा सेतु का निर्माण कार्य किया गया, यह सत्य इतिहास है । हिंदुद्वेषी करुणानिधि ने ऐसा सेतु तोडने का निर्णय लिया । इसके विरुद्ध याचिका प्रविष्ट कर मैंने न्यायालय को पटाया कि सेतुसमुद्रम् प्रकल्प किस प्रकार से व्ययकारी (खर्चीला) है । इसलिए न्यायालय ने यह प्रकल्प रोका ।

२. केरल के चिदंबरम् गांव में १ सहस्र ५०० वर्ष पूर्वका नटराज मंदिर सरकार द्वारा नियंत्रण में लिया गया था । वहां पूजा करनेवाले पुजारियों को मंदिर से हटा दिया गया था । इसके विरुद्ध मैंने न्यायालयीन लडाई की एवं मंदिर का प्रशासन वापस न्यासियोंको देने के लिए बाध्य किया । पूजा करना भक्त का अधिकार है । धर्मनिरपेक्ष सरकार मंदिर कैसे चला सकती है ? भविष्य में कोई सरकार मंदिर का व्यवस्थापन हाथ में लेने का साहस नहीं करेगी ।

सुब्रमण्‍यम स्‍वामी के विरोध पर द हिंदू के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन को हटाया

सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने सिद्धार्थ वरदराजन की विदेशी नागरिकता पर मुकदमा किया और इसी बहाने ''दि हिंदू'' ने उन्‍हें संपादकीय मूल्‍यों से खिलवाड़ करने वाला करार देकर खानदानी कारोबार में अचानक गिरी मक्‍खी की तरह निकाल बाहर किया। ये इस्‍तीफा नहीं है, भले इसे इस्‍तीफा बताया जा रहा हो।

खबर में इस बात पर ध्‍यान दीजिएगा जब एन.राम कहते हैं कि तमिलनाडु में नरेंद्र मोदी की दो बार रैली हुई लेकिन उसे पहले पन्‍ने पर नहीं लिया गया क्‍योंकि सिद्धार्थ ने समाचार डेस्‍क को निर्देश दिए थे कि मोदी की कोई खबर पहले पन्‍ने पर नहीं लेनी है। यही बात अखबार के संपादकीय मूल्‍यों के खिलाफ चली गई। एन. राम के मुताबिक, ''समाचार और विचार में कोई फर्क नहीं बरता जा रहा था।''

यह बहाना नया नहीं है। यह बरसों पुराना आज़माया फॉर्मूला हमेशा ऐसे वक्‍त में काम आता है जब किसी को नौकरी से निकालना होता है। बस, इस पर नज़र रखिए कि इस मोदीमय फि़ज़ा में किन्‍हें नौकरियां मिल रही हैं और किनकी नौकरियां जा रही हैं। अपने आप खेल समझ में आ जाएगा।

द हिंदू के संपादक पद से सिद्धार्थ वरदराजन के इस्तीफे के एक दिन बाद इस अखबार के कार्यकारी संपादक एम के वेणु ने भी इस्तीफा दे दिया। कस्तूरी ऐंड संकेएसएल के चेयरमैन का पदभार संभालने वाले एन राम ने मंगलवार को वेणु के इस्तीफे की पुष्टि की है। बिजनेस स्टैंडर्ड के सवालों पर एम के वेणु ने कहा, मैंने कार्यकारी संपादक के पद से इस्तीफा दे दिया है और जल्द ही दूसरे विकल्पों की तलाश करूंगा। यहां इस बात का उल्लेख किया जा सकता है कि वरदराजन ने कहा था कि हिंदू के मालिकों ने इसे पारिवारिक कारोबार की तरह चलाने का फैसला किया है, लिहाजा मैं द हिंदू से इस्तीफा दे रहा हूं। व्यवस्था में परिवर्तन के चलते दोनों ने इस्तीफे दिए हैं।

चिदंबरम को भी जेल की हवा खानी होगी - डा. सुब्रहमण्यम स्वामी

केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम को घेरने में जुटी जनता पार्टी ने उनसे इस्तीफे की मांग की है। पार्टी ने यूपीए अध्यक्ष को आड़े हाथों लेते हुए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को देश का अगला राष्ट्रपति बनाए जाने की भी मांग की है।

राजधानी में बृहस्पतिवार को पत्रकारों से बातचीत में जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. सुब्रहमण्यम स्वामी ने कहा कि टूजी स्पेक्ट्रम व टेलीकॉम घोटाले में चिदंबरम की भूमिका के बारे में वह कोर्ट को बहुत कुछ बता चुके हैं। चिदंबरम को भी जेल की हवा खानी होगी।

उन्होंने कहा करीब 25 वर्ष पहले मेरठ में हुए नरसंहार की घटना में चिदंबरम की भूमिका रही थी। इससे जुड़े कई सबूत उनके पास हैं वह मामले में चिदंबरम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिमनल कोर्ट जाने को तैयार हैं। इस बारे में प्रधानमंत्री को अवगत करा चुके हैं। पिछली लोकसभा चुनाव में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के जो आरोप चिदंबरम पर लगे थे, आज उस पर मद्रास हाइकोर्ट की मदुरै खंडपीठ ने अपनी मुहर लगा दी है। 

ऐसे में अब यह साबित हो चुका है कि भ्रष्टाचार से गृहमंत्री का गहरा नाता रहा है। अब गृहमंत्री को नैतिकता के आधार पर त्यागपत्र दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री से इसकी मांग करते हैं। अध्यक्ष ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री ऐसा नहीं कर सकते तो उन्हें भी अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है लिहाजा उन्हें भी इस्तीफा दे देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि डा.एपीजे अब्दुल कलाम को देश का अगला राष्ट्रपति बनाया जाना चाहिए। इस मसले पर सभी विपक्षी दलों को एकजुट होने की जरूरत है।

सुब्रहमण्यम स्वामी ने कहा कि अन्ना टीम प्रधानमंत्री व अन्य सहयोगियों के खिलाफ तो खुलकर मैदान में सामने आ गई लेकिन संप्रग अध्यक्ष सोनिया गाँधी के बारे में कुछ भी नहीं बोलती। आखिर अन्ना टीम का सोनिया के प्रति साफ्ट कार्नर क्यों है।

जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुब्रहमण्यम स्वामी ने बृहस्पतिवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की। यह मुलाकात लगभग दस मिनट की रही। दोनो तरफ से इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया। पत्रकारों के सवाल के जवाब में स्वामी ने कहा कि वह आज लखनऊ आए तो पता चला कि मुलायम सिंह यादव भी लखनऊ में हैं, इसलिए उनसे मुलाकात करने के लिए चले आए।

सुब्रमण्यम स्वामी राजग में शामिल होंगे

सुब्रमण्यम स्वामी की जनता पार्टी को राजग सहयोगी दल के रूप में शामिल करेगी। भाजपा सांसद एस एस आहलूवालिया ने रविवार को यह जानकारी दी।

सुब्रह्मण्यम ब्लैक मेलरों का उस्ताद - दिग्गी

दिग्विजय सिंह ने जनता पार्टी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी पर निशाना साधते हुए उन्हें ब्लैक मेलरों का उस्ताद कहा है। दिग्विजय ने कहा कि स्वामी सिर्फ लच्छेदार बाते करना जानते हैं। उन्होंने चिदंबरम पर सुब्रह्मण्यम स्वामी और बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा के आरोपों की निंदा करते हुए कहा कि चिदंबरम एक योग्य और ईमानदार शक्स हैं।

उन
पर किसी तरह के आरोप का सवाल ही नहीं उठता। इससे पहले कल सुब्रह्मण्यम स्वामी ने 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले का जिक्र करते हुए कहा था कि इस घोटाले में सोनिया गांधी समेत यूपीए के कई बड़े नेता शामिल हैं।

उन्होंने ए राजा को सिर्फ एक मोहरा बताते हुए कहा कि राजा से बड़े दोषी चिदंबरम हैं। स्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पूरे मामले पर अपनी आंखें बंद कर रखी हैं।

भारत का पहला इस्लामिक बैंक केरल में

भारत में पहले इस्लामिक बैंक का रास्ता करीब-करीब साफ हो गया है। केरल हाई कोर्ट ने केरल राज्य औद्योगिक विकास निगम (केएसआईडीसी) की मदद से राज्य में एक इस्लामिक बैंक की तर्ज पर वित्तीय संस्थान खोलने को चुनौती देने वाली दो जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया।

जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी और हिंदू एक्या वेदी ने इसे चुनौती देते हुए कहा था कि राज्य की ओर से एक धर्म विशेष के आधार पर चलने वाला बैंक खोले जाने से संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा। चीफ जस्टिस जे. चेलामेश्वर और जस्टिस पी.आर. मेनन की डिवीजन बेंच ने स्वामी के तर्कों को नहीं माना। हाई कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी ने कहा कि यह फैसले की पूरी कॉपी पढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट में जाने पर फैसला करेंगे।

बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता यह नहीं बता पाए कि जिस सरकारी आदेश को चुनौती दी गई है, वह किस तरह प्रत्यक्ष तौर पर एक विशेष धर्म को बढ़ावा दे रहा है। सरकार ने अपने रुख का पक्ष लेते हुए दलील दी थी कि निवेश पूरी तरह कमर्शल है और इससे संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं होगा।

कंपनीज एक्ट के तहत रजिस्टर्ड अल बरख फाइनैंशल सर्विसेज ने अदालत को आश्वासन दिया था कि वित्तीय संस्थान की फंडिंग देश के कानूनों और शरीयत के सिद्धांतों के अनुसार होगी। स्वामी की दलील थी कि संविधान के अनुच्छेद 27 में राज्य सरकार की किसी इकाई (इस मामले में केएसआईडीसी) के इस्लामिक बैंकिंग जैसे वेंचर में शामिल होने पर प्रतिबंध है।

स्वामी ने कहा था कि इस्लाम की धार्मिक संहिता शरीयत के सिद्धांतों में ब्याज का भुगतान और इसे हासिल करना भी मना है और इसके साथ ही कुछ ऐसी गतिविधियों पर भी प्रतिबंध है जो भारतीय कानूनों के तहत वैध हैं। स्वामी का कहना था कि केएसआईडीसी को अल बरख फाइनैंशल सर्विसेज नाम की कंपनी प्रमोट करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। बैंक में इस्लामिक विद्वानों को भी शामिल किया जाएगा। ये विद्वान शरीयत के सिद्धांतों के पालन को लेकर सलाह देंगे।


केरल सरकार ने दिसंबर 2009 में इस्लामिक बैंक खोलने की योजना बनाई थी। लेकिन हाई कोर्ट ने पिछले साल अप्रैल में याचिका स्वीकार करने के समय निर्देश दिया था कि सरकार और इसके संस्थान इस्लामिक बैंक की तर्ज पर बनने वाली फाइनैंशल कंपनी में वित्तीय या किसी अन्य तरह से भागीदारी न करें। हाई कोर्ट ने रिजर्व बैंक, वित्त मंत्रालय, केरल राज्य औद्योगिक विकास निगम को नोटिस भेजा था। केरल राज्य औद्योगिक विकास निगम के पास अल-बरख का 11 % शेयर है।

लाल चौक पर तिरंगा नहीं तो जम्मू कश्मीर में केंद्र शासन हो - सुब्रमण्यम स्वामी

जनता पार्टी प्रमुख सुब्रमण्यम स्वामी ने केंद्र को श्रीनगर के लालचौक पर तिरंगा फहराने को लेकर दायित्व बाध्य करार देते हुए रविवार को कहा कि यदि राज्य सरकार वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराने में सहयोग करने में विफल रहती है तो जम्मू कश्मीर में केंद्र शासन लगा दिया जाना चाहिए।

स्वामी ने यहां जारी एक बयान में कहा कि संविधान में उल्लेखित नियमों के पालना के तहत संप्रग सरकार का यह दायित्व है कि वह लाल चौक पर आधिकारिक रूप से तिरंगा फहराए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मामलों की केबिनेट समिति ने वर्ष 1991 में जनवरी के पहले सप्ताह में इस संबंध में एक प्रस्ताव मंजूर किया था।

उन्होंने कहा कि उस समय चंद्रशेखर प्रधानमंत्री थे और वह केंद्रीय कानून, न्याय एवं वाणिज्य मंत्री थे। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ मंत्री एवं सीसीपीए का सदस्य होने के नाते मैं यह मुद्दा सीसीपीए में उठाया था क्योंकि वी पी सिंह सरकार ने इस मामले पर विचार करने के बाद वर्ष 1990 में लाल चौक पर झंडा फहराने की परंपरा पर रोक लगाने का फैसला किया क्योंकि इससे राज्य की जनता की भावनाओं को ठेस पहुंच सकती थी।

स्वामी ने कहा कि चंद्रशेखर सेवा प्रमुख, गुप्तचर प्रमुखों और केबिनेट सचिव से बात करने के बाद मुझसे सहमत हुए और निर्देश दिया कि सरकार झंडा फहराए और यदि कोई समस्या खड़ी होती है तो सेना सुरक्षा मुहैया कराए। उन्होंने कहा कि राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने बाद में इससे सहमति जताने के साथ ही 26 जनवरी 1991 को तिरंगा झंडा फहराए जाने के दौरान शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने में सहयोग प्रदान किया।

उन्होंने कहा कि लाल चौक को कोई बाजार क्षेत्र नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक स्थान है जिसे तत्कालीन मुख्यमंत्री भी स्वीकार कर चुके हैं इसलिए वह मांग करते हैं कि 26 जनवरी को वहां पर तिरंगा फहराया जाए। यदि राज्य सरकार सहयोग नहीं करती है तो राज्य में केंद्र शासन घोषित करके शासन व्यवस्था सेना को सौंप दिया जाए।

कपिल सिब्बल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे सुब्रमण्यम स्वामी

2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने वाले जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने सोमवार को कहा कि दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल के खिलाफ अदालत की अवमानना का मुकदमा चलाने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

स्वामी ने यहां कहा कि स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर नियंत्रक व महालेखा परीक्षक [कैग] की रिपोर्ट पर सिब्बल का बयान अदालत की अवमानना है और एक-दो दिन के भीतर वे इस संबंध में अदालत में याचिका दाखिल कर देंगे।

गौरतलब है कि सिब्बल ने हाल ही में कहा था कि कैग रिपोर्ट में 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर 1.76 लाख करोड़ रुपये के नुकसान की बात पूरी तरह भ्रामक है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने बाल ठाकरे मुलाकात की...

जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने आज शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे से मुलाकात कर उनसे देश को भ्रष्टाचार से मुक्त बनाने के लिये अपनी अग्रणी भूमिका निभाने का अनुराध किया

ठाकरे से मुलाकात के बाद स्वामी ने संवाददाताओं को बताया कि यहां भ्रष्टाचार के खिलाफ एक रैली का आयोजन किया जायेगा। इस अभियान में भाग लेने के लिये विभिन्न दलों के साथ ही उन पार्टियों को भी शामिल करने की कोशिशें की जा रही हैं जो संप्रग का हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाले की संयुक्त संसदीय दल से जांच कराने से महज प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का अपमान होगा, जिसके चलते वह इस्तीफा दे सकते हैं।

स्पेक्ट्रम घोटाले में सोनिया गांधी की बहनों को भी 60% मिला - सुब्रमण्यम स्वामी

जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी अब 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जद में कांग्रेस यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी ले आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पौने दो लाख करोड़ रुपये के 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में 60 हजार करोड़ रुपये घूस में बांटी गई, जिसमें चार लोग हिस्सेदार थे। इस घूस में सोनिया गांधी की दो बहनों का हिस्सा 30-30 प्रतिशत है। दस जनपथ को घोटाले का केंद्र बिंदु बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सब कुछ जानते हुए भी मूक दर्शक बने रहे।

स्पेक्ट्रम मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई से पहले अपने घर आराम करने देहरादून पहुंचे स्वामी ने पत्रकार वार्ता के दौरान 2 जी मामले में कांग्रेस नेतृत्व पर कई आरोप लगाए। स्वामी ने दावा किया इस घोटाले में घूस के तौर पर बांटे गए 60 हजार करोड़ रुपये का दस प्रतिशत हिस्सा पूर्व संचार मंत्री ए राजा को गया। तीस प्रतिशत तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि और 30-30 प्रतिशत सोनिया गांधी को दो बहनों नाडिया और अनुष्का को गया है। हालांकि, इसके कोई दस्तावेजी सबूत उन्होंने उपलब्ध नहीं कराए।

स्वामी ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि अमेरिका से स्पेक्ट्रम मामले में हुए लेन-देन का रिकार्ड भी मंगाया जाए। साथ ही उन्होंने पूर्व मंत्री ए राजा की सुरक्षा की मांग भी प्रधानमंत्री से की है।

उनका कहना था कि ए राजा की सबसे अच्छी सुरक्षा तभी हो सकती है जब वो जेल में हों या फिर उन्हें हाउस अरेस्ट किया जाए। स्वामी ने राजा की सुरक्षा को लेकर लिखी चिट्ठी के जवाब में प्रधानमंत्री की ओर से आए पत्र को भी सार्वजनिक किया। इस पत्र में कहा गया है कि ए राजा को उच्च स्तरीय सुरक्षा दी जा रही है और स्पेक्ट्रम डील के बैंक रिकार्ड की जानकारी के लिए अमेरिकी सरकार से कहा जा रहा है।

ए राजा की चिंता की वजह पूछे जाने पर स्वामी ने कहा कि इस महा घोटाले की सारी जानकारी राजा के पास है। इस मामले में अरब देशों के अंडरव‌र्ल्ड के लोग भी शामिल हैं। राजा की हत्या कर वे सबूत मिटाना चाहेंगे। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव मुहिम में सहयोग करने पर भी खुद को तैयार बताया।

अटार्नी जनरल द्वारा प्रधानमंत्री का पक्ष रखना गलत - सुब्रमण्यम स्वामी

स्‍पेक्‍ट्रम घोटाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए जनता पार्टी के अध्‍यक्ष ने इस मामले में अटार्नी जनरल द्वारा प्रधानमंत्री का पक्ष रखे जाने पर आपत्ति जताई है। स्‍वामी का कहना है कि इससे हितों का टकराव होगा। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से लिखित जवाब मांगे जाने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए अटॉर्नी जनरल जी ई वाहनवती की मदद ली है। इससे पहले अदालत में सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्‍यम अब दूरसंचार मंत्रालय का पक्ष रखेंगे।

सूत्रों के मुताबिक पीएमओ अब तक अदालत में सरकार का पक्ष रखे जाने के रवैये से संतुष्‍ट नहीं है इसलिए सरकार ने अपनी ‘लीगल टीम’ में बदलाव किए हैं। हालांकि स्‍वामी ने कहा है कि उन्‍हें इस बात से आपत्ति नहीं है कि वाहनवती अदालत में प्रधानमंत्री का पक्ष रखेंगे लेकिन यदि वह 2जी स्‍पेक्‍ट्रम मामले के लिए कोर्ट में खडे़ होते हैं तो इस पर उन्‍हें आपत्ति है क्‍योंकि राजा ने वाहनवती से स्‍पेक्‍ट्रम मसले पर कानूनी राय मांगी थी। हालांकि वाहनवती ने इससे इनकार किया है कि उन्‍हें दूरसंचार मंत्रालय को किसी तरह की राय दी है। अटार्नी जनरल ने यह भी कहा कि स्‍पेक्‍ट्रम मामले में अदालत में प्रधानमंत्री का पक्ष रखने से हितों का टकराव नहीं होगा।

स्‍वामी ने कांग्रेस प्रवक्‍ता मनीष तिवारी के उस बयान की भी कड़ी आलोचना की जिसमें उन्‍होंने कहा था कि चूंकि जनता पार्टी नेता ने कोर्ट में कोई शिकायत नहीं दर्ज की है इसलिए राजा के खिलाफ मुकदमा चलाए जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। स्‍वामी ने कहा, 'यही सवाल सॉलिसिटर जनरल ने क्‍यों नहीं किया था जब वे सरकार का प्रतिनिधित्‍व कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के किसी जज ने भी यह सवाल नहीं खड़ा किया।'

स्‍वामी ने 2जी स्‍पेक्‍ट्रम मामले में तत्‍कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा के खिलाफ मुकदमा चलाए जाने के लिए प्रधानमंत्री की ओर से निर्देश दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। करीब 1.76 लाख करोड़ के इस घोटाले के चलते दूरसंचार मंत्री की कुर्सी गंवाने वाले ए. राजा के खिलाफ पीएम की चुप्‍पी पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लिखित जवाब देने के लिए शनिवार तक मोहलत दी है। इस मामले पर अगली सुनवाई 23 नवंबर को होनी है।

वाहनवती ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने उनसे इस मामले में प्रधानमंत्री का प्रतिनिधित्व करने को कहा है। बहरहाल उन्होंने यह बताने से इंकार कर दिया कि सरकार ने उनको इस संबंध में कोई विशेष निर्देश दिया है या नहीं। इस बारे में जब सुब्रमण्‍यम से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार और दूरसंचार मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करते रहेंगे जबकि अटार्नी जनरल प्रधानमंत्री के प्रतिनिधि होंगे।

केंद्र सरकार दे लिखित में जवाब प्रधानमंत्री की चुप्पी पर-सुप्रीम कोर्ट

2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में पूर्व टेलिकॉम मिनिस्टर . राजा के खिलाफ जांच के लिए मंजूरी देने में प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए केंद्र सरकार से लिखित में जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को प्रधानमंत्री से कहा कि वह शनिवार तक एफिडेविट दाखिल करें। हालांकि सॉलिसिटर जनरल ने अनुरोध किया कि पीएम की ओर से किसी अधिकारी को एफिडेविट दाखिल करने की इजाजत दी जाए तो कोर्ट तैयार हो गया। सॉलिसिटर जनरल ने बाद में कहा कि एफिडेविट शुक्रवार तक दाखिल कर दिया जाएगा।

जस्टिस जी.एस.सिंघवी और ए. के. गांगुली की बेंच ने कहा कि मामला 'काफी सीरियस' है। कोर्ट ने यह भी कहा कि 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन पर सीएजी की जो रिपोर्ट संसद में रखी गई है, वह 'खुलासे' करने वाली है। एक एनजीओ की ओर से पेश एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट में कही गई बातें डैमेजिंग (हिला देने वाली) हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि आप इस डैमेजिंग क्यों कह रहे हैं, यह खुलासे करने वाली रिपोर्ट है।

कोर्ट जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें राजा के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी के लिए पीएम को निर्देश देने की मांग की गई थी। स्वामी ने कहा कि मैं इस मसले पर पूरा रेकॉर्ड पेश कर सकता हूं। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल (सरकारी वकील) से कहा कि इस मसले का ब्यौरा हलफनामे में दें, ताकि आप कल यह न कह सकें कि हमें रेकॉर्ड पेश करने का मौका नहीं दिया गया। स्वामी अपना एफिडेविट सोमवार तक दाखिल कर सकते हैं। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई होगी।

सॉलिसिटर जनरल की बातों पर कोर्ट ने कहा कि ये सारी बातें मौखिक हैं। अगर हमने पाया कि कुछ बात कोर्ट से छुपाई गई है तो यह काफी सीरियस मसला होगा। सो एफिडेविट दाखिल करना उचित होगा। कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पीएम या पीएमओ के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की है। उसने सवाल पूछे हैं और हम इनका जवाब देंगे।

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