गांधी हत्या के पीछे लॉर्ड माउंटबॅटन आैर नेहरू : डॉ. सुब्रह्मण्यम् स्वामी
Subramanian Swamy Bold Repliys to Muslim Clerics' Six Questions
A delegation of Muslim clerics led by the Sunni Ulema Council's General Secretary had in February met RSS functionary Indresh and posed six questions to the Sangh including whether it has prepared a format to turn India into a Hindu 'rashtra'.नेहरू भी नेताजी की हत्या की साजिश में थे शामिल : स्वामी
उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में जापान व जर्मनी की हार के बाद उनके पास कोई चारा नहीं बचा और उन्होंने अपने को छिपाने के लिए झूठी अफवाहें फैला दीं कि एक हवाई जहाज दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। जबकि, तीन सितंबर 1945 को अमेरिका ने ताइवान पर कब्जा कर लिया और सीआइए ने रिपोर्ट में कहा कि ताइवान में पिछले 6 माह में कोई विमान दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुआ, जबकि 16 अगस्त 1945 को नेताजी वियतनाम के शहर साइगॉन से भाग मंचूरिया चले गए थे और उस समय यह शहर रूस के अधीन था।
वहां पर सोवियत संघ के प्रमुख जोसेफ स्टालिन ने उन्हें गिरफ्तार कर साइबेरिया की याकुतस्क जेल में डाल दिया। इसकी जानकारी 26 दिसंबर 1945 को नेहरू को लग गई और उन्होंने अपने टाइपिस्ट श्यामलाल से अंग्रेजी सरकार के नाम एक पत्र लिखवाया कि उन्हें पहले से ही पता था कि स्टालिन बदमाश है और वह झूठ बोलता है। नेहरू ने अंग्रेजों को बताया कि स्टालिन ने नेताजी को कैद में रखा हुआ है और उन्होंने हम सब से जानकारी छिपाई है। 1953 में रूस ने ब्रिटेन सरकार के दबाव में नेताजी को मरवा दिया था।
44 लाख 50 हजार मंदिर सरकार के नियंत्रण में जबकि मस्जिद और चर्च एक भी नहीं - स्वामी
सुब्रमण्यम स्वामी के विरोध पर द हिंदू के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन को हटाया
सुब्रमण्यम स्वामी ने सिद्धार्थ वरदराजन की विदेशी नागरिकता पर मुकदमा किया और इसी बहाने ''दि हिंदू'' ने उन्हें संपादकीय मूल्यों से खिलवाड़ करने वाला करार देकर खानदानी कारोबार में अचानक गिरी मक्खी की तरह निकाल बाहर किया। ये इस्तीफा नहीं है, भले इसे इस्तीफा बताया जा रहा हो।चिदंबरम को भी जेल की हवा खानी होगी - डा. सुब्रहमण्यम स्वामी
सुब्रह्मण्यम ब्लैक मेलरों का उस्ताद - दिग्गी
दिग्विजय सिंह ने जनता पार्टी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी पर निशाना साधते हुए उन्हें ब्लैक मेलरों का उस्ताद कहा है। दिग्विजय ने कहा कि स्वामी सिर्फ लच्छेदार बाते करना जानते हैं। उन्होंने चिदंबरम पर सुब्रह्मण्यम स्वामी और बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा के आरोपों की निंदा करते हुए कहा कि चिदंबरम एक योग्य और ईमानदार शक्स हैं।उन पर किसी तरह के आरोप का सवाल ही नहीं उठता। इससे पहले कल सुब्रह्मण्यम स्वामी ने 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले का जिक्र करते हुए कहा था कि इस घोटाले में सोनिया गांधी समेत यूपीए के कई बड़े नेता शामिल हैं।
उन्होंने ए राजा को सिर्फ एक मोहरा बताते हुए कहा कि राजा से बड़े दोषी चिदंबरम हैं। स्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पूरे मामले पर अपनी आंखें बंद कर रखी हैं।
भारत का पहला इस्लामिक बैंक केरल में
भारत में पहले इस्लामिक बैंक का रास्ता करीब-करीब साफ हो गया है। केरल हाई कोर्ट ने केरल राज्य औद्योगिक विकास निगम (केएसआईडीसी) की मदद से राज्य में एक इस्लामिक बैंक की तर्ज पर वित्तीय संस्थान खोलने को चुनौती देने वाली दो जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया। जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी और हिंदू एक्या वेदी ने इसे चुनौती देते हुए कहा था कि राज्य की ओर से एक धर्म विशेष के आधार पर चलने वाला बैंक खोले जाने से संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा। चीफ जस्टिस जे. चेलामेश्वर और जस्टिस पी.आर. मेनन की डिवीजन बेंच ने स्वामी के तर्कों को नहीं माना। हाई कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी ने कहा कि यह फैसले की पूरी कॉपी पढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट में जाने पर फैसला करेंगे।
बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता यह नहीं बता पाए कि जिस सरकारी आदेश को चुनौती दी गई है, वह किस तरह प्रत्यक्ष तौर पर एक विशेष धर्म को बढ़ावा दे रहा है। सरकार ने अपने रुख का पक्ष लेते हुए दलील दी थी कि निवेश पूरी तरह कमर्शल है और इससे संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं होगा।
कंपनीज एक्ट के तहत रजिस्टर्ड अल बरख फाइनैंशल सर्विसेज ने अदालत को आश्वासन दिया था कि वित्तीय संस्थान की फंडिंग देश के कानूनों और शरीयत के सिद्धांतों के अनुसार होगी। स्वामी की दलील थी कि संविधान के अनुच्छेद 27 में राज्य सरकार की किसी इकाई (इस मामले में केएसआईडीसी) के इस्लामिक बैंकिंग जैसे वेंचर में शामिल होने पर प्रतिबंध है।
स्वामी ने कहा था कि इस्लाम की धार्मिक संहिता शरीयत के सिद्धांतों में ब्याज का भुगतान और इसे हासिल करना भी मना है और इसके साथ ही कुछ ऐसी गतिविधियों पर भी प्रतिबंध है जो भारतीय कानूनों के तहत वैध हैं। स्वामी का कहना था कि केएसआईडीसी को अल बरख फाइनैंशल सर्विसेज नाम की कंपनी प्रमोट करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। बैंक में इस्लामिक विद्वानों को भी शामिल किया जाएगा। ये विद्वान शरीयत के सिद्धांतों के पालन को लेकर सलाह देंगे।
केरल सरकार ने दिसंबर 2009 में इस्लामिक बैंक खोलने की योजना बनाई थी। लेकिन हाई कोर्ट ने पिछले साल अप्रैल में याचिका स्वीकार करने के समय निर्देश दिया था कि सरकार और इसके संस्थान इस्लामिक बैंक की तर्ज पर बनने वाली फाइनैंशल कंपनी में वित्तीय या किसी अन्य तरह से भागीदारी न करें। हाई कोर्ट ने रिजर्व बैंक, वित्त मंत्रालय, केरल राज्य औद्योगिक विकास निगम को नोटिस भेजा था। केरल राज्य औद्योगिक विकास निगम के पास अल-बरख का 11 % शेयर है।
लाल चौक पर तिरंगा नहीं तो जम्मू कश्मीर में केंद्र शासन हो - सुब्रमण्यम स्वामी
जनता पार्टी प्रमुख सुब्रमण्यम स्वामी ने केंद्र को श्रीनगर के लालचौक पर तिरंगा फहराने को लेकर दायित्व बाध्य करार देते हुए रविवार को कहा कि यदि राज्य सरकार वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराने में सहयोग करने में विफल रहती है तो जम्मू कश्मीर में केंद्र शासन लगा दिया जाना चाहिए।स्वामी ने यहां जारी एक बयान में कहा कि संविधान में उल्लेखित नियमों के पालना के तहत संप्रग सरकार का यह दायित्व है कि वह लाल चौक पर आधिकारिक रूप से तिरंगा फहराए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मामलों की केबिनेट समिति ने वर्ष 1991 में जनवरी के पहले सप्ताह में इस संबंध में एक प्रस्ताव मंजूर किया था।
उन्होंने कहा कि उस समय चंद्रशेखर प्रधानमंत्री थे और वह केंद्रीय कानून, न्याय एवं वाणिज्य मंत्री थे। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ मंत्री एवं सीसीपीए का सदस्य होने के नाते मैं यह मुद्दा सीसीपीए में उठाया था क्योंकि वी पी सिंह सरकार ने इस मामले पर विचार करने के बाद वर्ष 1990 में लाल चौक पर झंडा फहराने की परंपरा पर रोक लगाने का फैसला किया क्योंकि इससे राज्य की जनता की भावनाओं को ठेस पहुंच सकती थी।
स्वामी ने कहा कि चंद्रशेखर सेवा प्रमुख, गुप्तचर प्रमुखों और केबिनेट सचिव से बात करने के बाद मुझसे सहमत हुए और निर्देश दिया कि सरकार झंडा फहराए और यदि कोई समस्या खड़ी होती है तो सेना सुरक्षा मुहैया कराए। उन्होंने कहा कि राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने बाद में इससे सहमति जताने के साथ ही 26 जनवरी 1991 को तिरंगा झंडा फहराए जाने के दौरान शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने में सहयोग प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि लाल चौक को कोई बाजार क्षेत्र नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक स्थान है जिसे तत्कालीन मुख्यमंत्री भी स्वीकार कर चुके हैं इसलिए वह मांग करते हैं कि 26 जनवरी को वहां पर तिरंगा फहराया जाए। यदि राज्य सरकार सहयोग नहीं करती है तो राज्य में केंद्र शासन घोषित करके शासन व्यवस्था सेना को सौंप दिया जाए।
कपिल सिब्बल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे सुब्रमण्यम स्वामी
2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने वाले जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने सोमवार को कहा कि दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल के खिलाफ अदालत की अवमानना का मुकदमा चलाने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।स्वामी ने यहां कहा कि स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर नियंत्रक व महालेखा परीक्षक [कैग] की रिपोर्ट पर सिब्बल का बयान अदालत की अवमानना है और एक-दो दिन के भीतर वे इस संबंध में अदालत में याचिका दाखिल कर देंगे।
गौरतलब है कि सिब्बल ने हाल ही में कहा था कि कैग रिपोर्ट में 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर 1.76 लाख करोड़ रुपये के नुकसान की बात पूरी तरह भ्रामक है।
सुब्रमण्यम स्वामी ने बाल ठाकरे मुलाकात की...
जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने आज शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे से मुलाकात कर उनसे देश को भ्रष्टाचार से मुक्त बनाने के लिये अपनी अग्रणी भूमिका निभाने का अनुराध किया ।ठाकरे से मुलाकात के बाद स्वामी ने संवाददाताओं को बताया कि यहां भ्रष्टाचार के खिलाफ एक रैली का आयोजन किया जायेगा। इस अभियान में भाग लेने के लिये विभिन्न दलों के साथ ही उन पार्टियों को भी शामिल करने की कोशिशें की जा रही हैं जो संप्रग का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाले की संयुक्त संसदीय दल से जांच कराने से महज प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का अपमान होगा, जिसके चलते वह इस्तीफा दे सकते हैं।
स्पेक्ट्रम घोटाले में सोनिया गांधी की बहनों को भी 60% मिला - सुब्रमण्यम स्वामी
जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी अब 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जद में कांग्रेस व यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी ले आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पौने दो लाख करोड़ रुपये के 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में 60 हजार करोड़ रुपये घूस में बांटी गई, जिसमें चार लोग हिस्सेदार थे। इस घूस में सोनिया गांधी की दो बहनों का हिस्सा 30-30 प्रतिशत है। दस जनपथ को घोटाले का केंद्र बिंदु बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सब कुछ जानते हुए भी मूक दर्शक बने रहे।स्पेक्ट्रम मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई से पहले अपने घर आराम करने देहरादून पहुंचे स्वामी ने पत्रकार वार्ता के दौरान 2 जी मामले में कांग्रेस नेतृत्व पर कई आरोप लगाए। स्वामी ने दावा किया इस घोटाले में घूस के तौर पर बांटे गए 60 हजार करोड़ रुपये का दस प्रतिशत हिस्सा पूर्व संचार मंत्री ए राजा को गया। तीस प्रतिशत तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि और 30-30 प्रतिशत सोनिया गांधी को दो बहनों नाडिया और अनुष्का को गया है। हालांकि, इसके कोई दस्तावेजी सबूत उन्होंने उपलब्ध नहीं कराए।
स्वामी ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि अमेरिका से स्पेक्ट्रम मामले में हुए लेन-देन का रिकार्ड भी मंगाया जाए। साथ ही उन्होंने पूर्व मंत्री ए राजा की सुरक्षा की मांग भी प्रधानमंत्री से की है।
उनका कहना था कि ए राजा की सबसे अच्छी सुरक्षा तभी हो सकती है जब वो जेल में हों या फिर उन्हें हाउस अरेस्ट किया जाए। स्वामी ने राजा की सुरक्षा को लेकर लिखी चिट्ठी के जवाब में प्रधानमंत्री की ओर से आए पत्र को भी सार्वजनिक किया। इस पत्र में कहा गया है कि ए राजा को उच्च स्तरीय सुरक्षा दी जा रही है और स्पेक्ट्रम डील के बैंक रिकार्ड की जानकारी के लिए अमेरिकी सरकार से कहा जा रहा है।
ए राजा की चिंता की वजह पूछे जाने पर स्वामी ने कहा कि इस महा घोटाले की सारी जानकारी राजा के पास है। इस मामले में अरब देशों के अंडरवर्ल्ड के लोग भी शामिल हैं। राजा की हत्या कर वे सबूत मिटाना चाहेंगे। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव मुहिम में सहयोग करने पर भी खुद को तैयार बताया।
अटार्नी जनरल द्वारा प्रधानमंत्री का पक्ष रखना गलत - सुब्रमण्यम स्वामी
स्पेक्ट्रम घोटाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए जनता पार्टी के अध्यक्ष ने इस मामले में अटार्नी जनरल द्वारा प्रधानमंत्री का पक्ष रखे जाने पर आपत्ति जताई है। स्वामी का कहना है कि इससे हितों का टकराव होगा। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से लिखित जवाब मांगे जाने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए अटॉर्नी जनरल जी ई वाहनवती की मदद ली है। इससे पहले अदालत में सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम अब दूरसंचार मंत्रालय का पक्ष रखेंगे।सूत्रों के मुताबिक पीएमओ अब तक अदालत में सरकार का पक्ष रखे जाने के रवैये से संतुष्ट नहीं है इसलिए सरकार ने अपनी ‘लीगल टीम’ में बदलाव किए हैं। हालांकि स्वामी ने कहा है कि उन्हें इस बात से आपत्ति नहीं है कि वाहनवती अदालत में प्रधानमंत्री का पक्ष रखेंगे लेकिन यदि वह 2जी स्पेक्ट्रम मामले के लिए कोर्ट में खडे़ होते हैं तो इस पर उन्हें आपत्ति है क्योंकि राजा ने वाहनवती से स्पेक्ट्रम मसले पर कानूनी राय मांगी थी। हालांकि वाहनवती ने इससे इनकार किया है कि उन्हें दूरसंचार मंत्रालय को किसी तरह की राय दी है। अटार्नी जनरल ने यह भी कहा कि स्पेक्ट्रम मामले में अदालत में प्रधानमंत्री का पक्ष रखने से हितों का टकराव नहीं होगा।
स्वामी ने कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी के उस बयान की भी कड़ी आलोचना की जिसमें उन्होंने कहा था कि चूंकि जनता पार्टी नेता ने कोर्ट में कोई शिकायत नहीं दर्ज की है इसलिए राजा के खिलाफ मुकदमा चलाए जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। स्वामी ने कहा, 'यही सवाल सॉलिसिटर जनरल ने क्यों नहीं किया था जब वे सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के किसी जज ने भी यह सवाल नहीं खड़ा किया।'
स्वामी ने 2जी स्पेक्ट्रम मामले में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा के खिलाफ मुकदमा चलाए जाने के लिए प्रधानमंत्री की ओर से निर्देश दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। करीब 1.76 लाख करोड़ के इस घोटाले के चलते दूरसंचार मंत्री की कुर्सी गंवाने वाले ए. राजा के खिलाफ पीएम की चुप्पी पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लिखित जवाब देने के लिए शनिवार तक मोहलत दी है। इस मामले पर अगली सुनवाई 23 नवंबर को होनी है।
वाहनवती ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने उनसे इस मामले में प्रधानमंत्री का प्रतिनिधित्व करने को कहा है। बहरहाल उन्होंने यह बताने से इंकार कर दिया कि सरकार ने उनको इस संबंध में कोई विशेष निर्देश दिया है या नहीं। इस बारे में जब सुब्रमण्यम से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार और दूरसंचार मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करते रहेंगे जबकि अटार्नी जनरल प्रधानमंत्री के प्रतिनिधि होंगे।
केंद्र सरकार दे लिखित में जवाब प्रधानमंत्री की चुप्पी पर-सुप्रीम कोर्ट
2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में पूर्व टेलिकॉम मिनिस्टर ए. राजा के खिलाफ जांच के लिए मंजूरी देने में प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए केंद्र सरकार से लिखित में जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को प्रधानमंत्री से कहा कि वह शनिवार तक एफिडेविट दाखिल करें। हालांकि सॉलिसिटर जनरल ने अनुरोध किया कि पीएम की ओर से किसी अधिकारी को एफिडेविट दाखिल करने की इजाजत दी जाए तो कोर्ट तैयार हो गया। सॉलिसिटर जनरल ने बाद में कहा कि एफिडेविट शुक्रवार तक दाखिल कर दिया जाएगा। जस्टिस जी.एस.सिंघवी और ए. के. गांगुली की बेंच ने कहा कि मामला 'काफी सीरियस' है। कोर्ट ने यह भी कहा कि 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन पर सीएजी की जो रिपोर्ट संसद में रखी गई है, वह 'खुलासे' करने वाली है। एक एनजीओ की ओर से पेश एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट में कही गई बातें डैमेजिंग (हिला देने वाली) हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि आप इस डैमेजिंग क्यों कह रहे हैं, यह खुलासे करने वाली रिपोर्ट है।
कोर्ट जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें राजा के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी के लिए पीएम को निर्देश देने की मांग की गई थी। स्वामी ने कहा कि मैं इस मसले पर पूरा रेकॉर्ड पेश कर सकता हूं। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल (सरकारी वकील) से कहा कि इस मसले का ब्यौरा हलफनामे में दें, ताकि आप कल यह न कह सकें कि हमें रेकॉर्ड पेश करने का मौका नहीं दिया गया। स्वामी अपना एफिडेविट सोमवार तक दाखिल कर सकते हैं। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई होगी।
सॉलिसिटर जनरल की बातों पर कोर्ट ने कहा कि ये सारी बातें मौखिक हैं। अगर हमने पाया कि कुछ बात कोर्ट से छुपाई गई है तो यह काफी सीरियस मसला होगा। सो एफिडेविट दाखिल करना उचित होगा। कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पीएम या पीएमओ के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की है। उसने सवाल पूछे हैं और हम इनका जवाब देंगे।





