सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले में 13 साल बाद सभी आरोपी बरी


सोहराबुद्दीन शेख-तुलसीराम प्रजापति कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में आज (21 दिसंबर) 13 साल सीबीआई की विशेष कोर्ट ने सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है. वर्ष 2005 के इस मामले में ये 22 लोग मुकदमे का सामना कर रहे थे. इनमें ज्यादातर पुलिसकर्मी हैं. मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही थी. वहीं कोर्ट ने कहा है कि तुलसी प्रजापति को साजिश के तहत मारने की बात गलत है. 22 पुलिसवालों पर आरोप साबित नहीं होते हैं. मामले में लगे आरोप यकीन करने लायक नहीं.

इस केस में आरोपी रहे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को 2014 में आरोप मुक्त कर दिया गया था. शाह इन घटनाओं के वक्त गुजरात के गृह मंत्री थे. मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के करीब 92 गवाह मुकर गए थे. इस महीने की शुरुआत में आखिरी दलीलें पूरी किए जाने के बाद सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश एसजे शर्मा ने कहा था कि वह 21 दिसंबर को फैसला सुनाएंगे. ज्यादातर आरोपी गुजरात और राजस्थान के कनिष्ठ स्तर के पुलिस अधिकारी हैं.

अदालत ने सीबीआई के आरोपपत्र में नामजद 38 लोगों में 16 को सबूत के अभाव में आरोपमुक्त कर दिया है. इनमें अमित शाह, राजस्थान के तत्कालीन गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया, गुजरात पुलिस के पूर्व प्रमुख पी सी पांडे और गुजरात पुलिस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी डीजी वंजारा शामिल हैं.


सीबीआई के मुताबिक, आतंकवादियों से संबंध रखने वाला कथित गैंगेस्टर शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और उसके सहयोगी प्रजापति को गुजरात पुलिस ने एक बस से उस वक्त अगवा कर लिया था, जब वे लोग 22 और 23 नवंबर 2005 की दरम्यिानी रात हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे.

सीबीआई के मुताबिक, शेख की 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के पास कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई. उसकी पत्नी को तीन दिन बाद मार डाला गया और उसके शव को ठिकाने लगा दिया गया. साल भर बाद 27 दिसंबर 2006 को प्रजापति की गुजरात और राजस्थान पुलिस ने गुजरात-राजस्थान सीमा के पास चापरी में कथित फर्जी मुठभेड़ में गोली मार कर हत्या कर दी. अभियोजन ने इस मामले में 210 गवाहों से पूछताछ की, जिनमें से 92 मुकर गए.

इस बीच, बुधवार को अभियोजन के दो गवाहों ने अदालत से दरख्वास्त की कि उनसे फिर से पूछताछ की जाए. इनमें से एक का नाम आजम खान है और वह शेख का सहयोगी था. उसने अपनी याचिका में दावा किया है कि शेख पर कथित तौर पर गोली चलाने वाले आरोपी एवं पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान ने उसे धमकी दी थी कि यदि उसने मुंह खोला तो उसे झूठे मामले में फंसा दिया जाएगा. एक अन्य गवाह एक पेट्रोल पंप का मालिक महेंद्र जाला है. अदालत दोनों याचिकाओं पर शुक्रवार को फैसला करेगी.

अरविंद केजरीवाल के दफ्तर पर सीबीआई ने मारा छापा, ऑफिस सील


दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दफ्तर पर सीबीआई ने मंगलवार सुबह छापा मारा है।  जानकारी के अनुसार, सीबीआई की टीम आज सुबह दिल्‍ली सचिवालय पहुंची और तीसरी मंजिल पर छापा मारा। बताया जाता है कि इस मंजिल पर मुख्‍यमंत्री का कार्यालय है। वहीं, दिल्‍ली सरकार ने छापे की कार्रवाई का दावा किया है।

बताया जा रहा है कि छापे के बाद सीएम केजरीवाल का दफ्तर सील कर दिया गया। छापे की वजह अभी मालूम नहीं हो पाई है। इस दौरान किसी भी कर्मचारी को अंदर जाने से रोक दिया गया है। 

केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि सीबीआई ने उनके दफ्तर पर छापेमारी की है। सीबीआई की छापेमारी के बाद केजरीवाल ने ट्वीट कर पीएम मोदी पर निशाना साधा है। पीएम मोदी मेरा राजनीतिक मुकाबल नहीं कर सके तो अब कायरता दिखा रहे हैं। केजरीवाल इस घटना के बाद घर से ऑफिस के लिए निकले हैं।

वहीं, सीबीआई डायरेक्‍टर अनिल सिन्‍हा ने कहा है कि केजरीवाल के दफ्तर पर छापा नहीं मारा गया है। सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर छापा मारा गया है।

सीबीआई की एफआईआर से कांग्रेस में हडकंप

कोयला घोटाले को लेकर सीबीआई की ताजा एफआईआर विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए सियासी मुसीबत बन गई है।

विपक्ष को घोटाले का ताजा मुद्दा मिलने से कांग्रेस के लिए मुकाबला करना कठिन हो सकता है। खासकर आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमारमंगलम बिड़ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से पार्टी की परेशान और बढ़ गई है।

अभी कुछ दिन पहले ही कुमारमंगलम राहुल गांधी के साथ मंच पर एक साथ बैठे नजर आए थे। उत्तर प्रदेश के जगदीशपुर में फूड पार्क के शिलान्यास के मौके पर राहुल और बिड़ला साथ-साथ नजर आए थे।

सीबीआई के मामला दर्ज करने पर पार्टी बोलने से बच रही है। पार्टी प्रवक्ता मीम अफजल ने कहा कि सीबीआई की जांच जारी है।

जब तक जांच पूरी नहीं होती, इन मुद्दों पर बोलना ठीक नहीं है। वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साध दिया है।
भाजपा ने कहा है कि जनता भ्रष्टाचार के लिए कांग्रेस को माफ नहीं करेगी।

पार्टी और सरकार में कई लोग कोयले की कालिख से पुते हुए हैं। वहीं कांग्रेस के अंदरखाने मानना है कि सीबीआई की ताजा एफआईआर से एक बार फिर भ्रष्टाचार का मुद्दा उजागर हो गया है, जिससे मुकाबला करना पार्टी को मुश्किल पड़ेगा।

दिग्विजय सिंह पर सीबीआई का शिकंजा कसा


वक्त बेवक्त अपने उलजलूल बयानों को लेकर विवादों मे रहने वाले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह इस बार बड़ी मुश्किल में घिरते दिख रहे हैं। इंदौर के आइलैंड मॉल के निर्माण में अनियमितता के आरोप की जांच अब CBI करेगी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने इस मामले में पहले की क्लीन चिट को मानने से इनकार कर दिया।

विपक्ष पर भ्रष्टाचार के आरोपों की झड़ी लागाने वाले दिग्विजय सिंह को अब आइलैंड मॉल निर्माण मामले में CBI जांच से गुजरना होगा। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह समेत 6 लोगों को मिली क्लीन चिट को मानने से इनकार कर दिया है साथ ही कोर्ट ने सीबीआई को इंदौर के आइलैंड मॉल मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

याचिकाकर्ता का आरोप था कि दिग्विजय ने शॉपिंग मॉल संचालकों को करोड़ों रुपए का अवैध फायदा पहुंचाया। इस मामले में 12 फरवरी 2009 को मामला दर्ज किया गया था। हालांकि मध्य प्रदेश के आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच में दिग्विजय सिंह समेत सभी आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी।

आपको बता दें कि इंदौर का आइलैंड मॉल प्रदेश का पहला मॉल था जिसके निर्माण को लेकर सवाल उठे थे।

लिब्रहान आयोग की रपट झूठ का पुलिंदा - सीबीआई

लिब्रहान आयोग की रपट को सीबीआई ने एक बार फिर से खारिज कर दिया है। सीबीआइ ने स्पष्ट कर दिया है कि अयोध्या के विवादित ढांचे को गिराने के लिए किसी साजिश के तहत धन जुटाए जाने की आयोग की आशंका निराधार है। सीबीआइ ने पिछले साल ही आयोग की रपट के आधार पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी समेत कुछ अन्य भाजपा व संघ नेताओं की भूमिका की नए सिरे से जांच से इंकार कर दिया था, पर गृह मंत्री पी. चिदंबरम चाहते थे कि नए सिरे से जांच होनी चाहिए।

सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय के अनुरोध पर ढांचा ध्वंस के लिए जुटाए गए धन के स्रोतों की विस्तृत जांच की गई, लेकिन ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला, जिससे पता चले कि साजिश के तहत बड़ी मात्रा में धन जुटाया गया था। उनके अनुसार, 6 दिसंबर, 1992 को कारसेवा के आयोजन से जुड़ी संस्थाओं एवं ट्रस्टों के सभी खातों की जांच कर ली गई है। कार सेवा के दौरान ट्रस्टों व संस्थाओं के खातों में महज कुछ लाख रुपये ही जमा थे, वो भी लंबे समय में धीरे-धीरे जमा हुए थे। उक्त तिथि को ही विवादित ढांचा गिराया गया था।

विवादित ढांचा गिराए जाने के सभी पहलुओं की जांच कर साजिश में शामिल भाजपा एवं विहिप नेताओं के खिलाफ 1993 में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और अदालती कार्रवाई भी चल रही है। लिब्रहान आयोग ने इनके साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और अन्य कई भाजपा एवं संघ नेताओं की भूमिका की जांच करने की सिफारिश कर दी थी। अधिकारियों का मानना है कि ऐसा सिर्फ रिपोर्ट को सनसनीखेज बनाने के लिए किया गया है।

लिब्रहान आयोग :

गठन : विवादित ढांचा गिराए जाने के दस दिनों के भीतर 16 दिसंबर, 1992 में लिब्रहान आयोग का गठन किया गया।

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एम एस लिब्रहान के नेतृत्व में एक सदस्यीय आयोग को 3 माह के भीतर यानि 16 मार्च, 1993 को रिपोर्ट सौंपनी थी। आयोग तय समय सीमा में रिपोर्ट नहीं दे सका। लिहाजा, आयोग को बार-बार विस्तार दिया गया, अंतिम रूप से 30 जून, 2009 को न्यायाधीश लिब्रहान ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को रिपोर्ट सौंपी

वर्ष : 16 साल 7 माह [16 दिसंबर 1992-30 जून 2009]

विस्तार : 48 बार

बैठकें : 399

खर्च : करीब नौ करोड़

बाबरी विध्वंस मामले में आडवाणी पर मामला समाप्त नहीं-सीबीआई

अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने के मामले को लेकर सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह आडवाणी के खिलाफ साजिश रचने का मामला समाप्त करने के खिलाफ है। सीबीआई ने कहा कि इस मामले में आडवाणी के साथ साथ अन्य नेताओं और कार सेवकों पर भी मामला चलें। विवादित ढांचा गिराने के मामले को लेकर दो एफआईआर दर्ज की गई है। 

एफआईआर नंबर 197/92 कारसेवकों के खिलाफ दर्ज की गई थी जबकि एफआईआर नंबर 198/92 में आडवाणी,मुरली मनोहर जोशी,उमा भारती,विनय कटियार,अशोक सिंघल,गिरिराज किशोर,विष्णु हरि डालमिया और साध्वी ऋतम्भरा का नाम है। इन सभी पर भड़काऊ भाषण के जरिए कार सेवकों को उकसाने का आरोप है। 

सीबीआई ने हाल ही में दायर शपथ पत्र में कहा कि यह संभव नहीं है कि पहली प्राथमिकी से कुछ को हटा दिया जाए,क्योंकि ढांचा गिराने में उनका सीधा हाथ नहीं था। दोनों एफआईआर अलग नहीं हैं।

सोनिया गाँधी ने भगाया था क्वात्रोच्चि को भारत से (पढ़िए पूरा सच )

स्वीडन के पूर्व पुलिस प्रमुख स्टेन लिंडस्ट्रोम ने दावा किया है कि बोफोर्स तोप दलाली मामले के आरोपी इतालवी व्यापारी ओत्तावियो क्वात्रोच्चि को बचाने में पूर्व प्रधानमंत्री ने अहम भूमिका निभाई थी 

काफी समय तक राजीव गांधी का नाम भी इस मामले के अभियुक्तों की सूची में शामिल रहा लेकिन उनकी मौत के बाद नाम फाइल से हटा दिया गया। सीबीआई को इस मामले की जांच सौंपी गयी लेकिन सरकारें बदलने पर सीबीआई की जांच की दिशा भी लगातार बदलती रही। एक दौर था, जब जोगिन्दर सिंह सीबीआई चीफ थे तो एजेंसी स्वीडन से महत्वपूर्ण दस्तावेज लाने में सफल हो गयी थी। जोगिन्दर सिंह ने तब दावा किया था कि केस सुलझा लिया गया है। बस, देरी है तो क्वात्रोक्की को प्रत्यर्पण कर भारत लाकर अदालत में पेश करने की। उनके हटने के बाद सीबीआई की चाल ही बदल गयी। इस बीच कई ऐसे दांवपेंच खेले गये कि क्वात्रोक्की को राहत मिलती गयी। दिल्ली की एक अदालत ने हिंदुजा बंधुओं को रिहा किया तो सीबीआई ने लंदन की अदालत से कह दिया कि क्वात्रोक्की के खिलाफ कोई सबूत ही नहीं हैं। अदालत ने क्वात्रोक्की के सील खातों को खोलने के आदेश जारी कर दिये। नतीजतन क्वात्रोक्की ने रातों-रात उन खातों से पैसा निकाल लिया।

इटालियन व्यवसायी ओट्टावियो क्वात्रोची, जिसका नाम बोफोर्स घोटाले में का़फी उछला, के गांधी परिवार के साथ घनिष्ठ संबंध थे और उनके घर में बेरोकटोक आना-जाना था. यह नया खुलासा आईबी के एक अफसर नरेश चंद्र गोसांई और क्वात्रोची के ड्राइवर शशिधरण ने सीबीआई के सामने किया. गोसांई स्वर्गीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एसपीजी सुरक्षा में था और बाद में 1987 से 1989 के बीच सोनिया गांधी का पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर भी रहा था. खुलासे के मुताबिक़, राजीव गांधी के कार्यकाल में क्वात्रोची और उसकी पत्नी मारिया का प्रधानमंत्री आवास में बेरोकटोक आना-जाना था. 1993 में भारत से भागने के पहले तक गांधी परिवार के घर पर क्वात्रोची की आवाजाही बनी रही. शशिधरण का बयान क्वात्रोची की कार की लॉगबुक पर आधारित है, जो कि स्नैम प्रोगेत्ती नाम की इटालियन कंपनी द्वारा रखी जाती थी और जिसका रीजनल डायरेक्टर क्वात्रोची था.

गोसांई के मुताबिक़, प्रधानमंत्री आवास पर निजी गाड़ियों के आने पर सख्त रोक है. बस क्वात्रोची और उसकी पत्नी के लिए ही कोई नियम-क़ानून नहीं था. गोसांई कहते हैं कि प्रधानमंत्री आवास के अंदर जाने के लिए पास बनवाना ज़रूरी होता है, लेकिन क्वात्रोची और उसके परिवार के सदस्यों के लिए पहले से ही हमेशा एक पास तैयार रहता था, ताकि वे कभी भी आ-जा सकें. प्रधानमंत्री आवास पर तैनात होने वाले सारे एसपीजी अधिकारी क्वात्रोची और उसके परिवारजनों को पहचानते थे, जिसकी वजह से उनकी पहचान की जांच नहीं होती थी.

2007 में रेड कार्नर नोटिस के बल पर ही क्वात्रोक्की को अर्जेन्टिना पुलिस ने गिरफ्तार किया। वह बीस-पच्चीस दिन तक पुलिस की हिरासत में रहा। सीबीआई ने काफी समय बाद इसका खुलासा किया। सीबीआई ने उसके प्रत्यर्पण के लिए वहां की कोर्ट में काफी देर से अर्जी दाखिल की। तकनीकी आधार पर उस अर्जी को खारिज कर दिया गया, लेकिन सीबीआई ने उसके खिलाफ वहां की ऊंची अदालत में जाना मुनासिब नहीं समझा। नतीजतन क्वात्रोक्की जमानत पर रिहा होकर अपने देश इटली चला गया। पिछले बारह साल से वहइंटरपोल के रेड कार्नर नोटिस की सूची में है। सीबीआई अगर उसका नाम इस सूची से हटाने की अपील करने जा रही है तो इसका सीधा सा मतलब यही है कि कानून मंत्रालय, अटार्नी जनरल और सीबीआई क्वात्रोक्की को बोफोर्स मामले में दलाली खाने के मामले में क्लीन चिट देने जा रही है।

गांधी परिवार से क्वात्रोची की निकटता बोफोर्स कांड में उसका नाम आने के बाद भी बनी रही. शशिधरण के बयान के अनुसार, 1985 में क्वात्रोची और मारिया क्वात्रोची राजीव और सोनिया के घर दिन में दो-तीन बार आते थे. शशिधरण क्वात्रोची की डीआईए 6253 नंबर की मर्सिडीज चलाता था. शशि कहता है कि जब कभी भी सोनिया गांधी के माता-पिता भारत आते थे, तब वह उन्हें क्वात्रोची के घर ले जाता था. वे दिन भर वहीं रहते थे और मारिया क्वात्रोची उन्हें खरीदारी के लिए घुमाने ले जाती थी. वे साल में 4 या 5 बार भारत आते थे. शशिधरण की कार लॉगबुक के रिकॉर्ड के अनुसार, क्वात्रोची 1989 से 1993 के बीच सोनिया और राजीव से 41 बार मिला.

ग़ौरतलब है कि क्वात्रोची और सोनिया गांधी, 1991 में राजीव गांधी की मृत्यु के बाद भी एक-दूसरे से पहले की ही तरह मिलते रहे. शशि कहता है कि मई 1991 के बाद क्वात्रोची 21 बार दस जनपथ गया. जब क्वात्रोची भारत छोड़ रहा था, तब शशि ड्राईवर ने खुद 29 जुलाई 1993 को उसे एयरपोर्ट तक पहुंचाया था. उस वक्त क्वात्रोची के पास एक ब्रीफकेस के अलावा कुछ नहीं था और उसने शशि से कहा कि वह एक जरूरी मीटिंग के लिए जा रहा है. यह अजीब बात थी, क्योंकि आमतौर पर जब भी क्वात्रोची को कार चाहिए होती थी तो वह पहले शशि को बता देता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ.

इन सारे खुलासों पर भारत सरकार खामोश है और सोनिया गांधी भी, जबकि सीबीआई को दिए गए बयान पर सरकार की प्रतिक्रिया आनी चाहिए और सोनिया गांधी की भी.



चारा चोर लालू को सीबीआई से अब भी रहत नहीं

सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाला मामले में आरजेडी अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को राहत नहीं दी है। विशेष अदालत ने लालू यादव सहित 11 अन् की वह याचिक खारिज कर दी है जिसमें उन्होंने खुद को आरोप मुक् करने की अपील की थी। इस मामले में 2004 से बहस चल रही है। इसके अलावा अदालत ने इन सभी आरोपियों को 29 अगस् को अदालत में पेश होने का आदेश भी दिया गया है।

अपना फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा कि याचिका में ऐसा कोई सुबूत नहीं जुटाया गया जिससे यह साफ हो कि ये लोग इसमें आरोपी नहीं हैं। इस मामले में 1996 में कुल मिलाकर 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। इनके खिलाफ 2003 में मामला दर्ज किया था। यह मामला भागलपुर का है। जहां फर्जी कागजों की मदद से कोषागार से लगभग 43 लाख रुपए निकालने का मामला सामने आया था। इस मामले में अभी 34 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही है। जबकि बाकी कुछ फरार हैं और कुछ की मौत हो चुकी है जबकि 6 लोग सरकारी गवाह बन गए हैं।

कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में सरकारी अफसरों और नेताओं की मिलीभगत के कारण ही यह घोटाला हुआ था। इसमें सप्‍लायर से लेकर नेतागढ़ और नौकरशाह शामिल थे। बंदरबांट के इस खेल में मुख्‍यमंत्री लालू प्रसाद यादव भी शामिल थे। इस घोटालें में राजनेताओं की ही मुख्‍य भूमिका थी। इस मामले में लालू सहित 11 अन्‍य ने याचिका दायर की थी जिसे खारिज कर दिया गया था।

सीबीआई को कानूनी तरीके से ही दूंगा जबाब - आचार्य बालकृष्ण

सीबीआई द्वारा मुकदमा दर्ज करने से आहत पंतजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने केंद्र सरकार पर पलटवार किया है। कहा है कि सीबीआई ने केंद्र के इशारे पर महंगाई के मुद्दे से देश का ध्यान हटाने के लिए यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि मैंने कोई गलत काम नहीं किया है। मैं कोई अपराधी नहीं जो डरकर भाग जाऊं।

मैं कानूनी कार्रवाई का जवाब कानूनी तरीके से दूंगा।सीबीआई द्वारा मुकदमा दर्ज करने के बाद आचार्य बालकृष्ण ने कहा-'शनिवार रात अफवाह उड़ाई गई कि मैं कहीं चला गया हूं। मैं हरिद्वार छोड़ कर कहीं नहीं जा रहा हूं। सीबीआइ ने मुझ पर क्या आरोप लगाए गए हैं, मुझे अभी इसकी अधिकृत जानकारी नहीं है।

ऐसे
में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। अगर सीबीआइ इस संदर्भ में कोई पूछताछ करती हैं तो उसके हर सवाल का जवाब प्रमाण सहित देने को तैयार हूं।'आचार्य ने दावा किया कि उन्होंने अपना पासपोर्ट विधिसम्मत तरीके से पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए बनवाया है।

इसमें
किसी भी किस्म का कोई गलत दस्तावेज या गलत जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि उनका जन्म हरिद्वार के दादूबाग इलाके में हुआ। वह जन्म से भारतीय हैं। नेपाल से संबंधित सवाल पर उन्होंने कहा-'ये जानकारी मेरे माता-पिता से लीजिए, मुझसे ये सवाल क्यों किए जाते हैं?

अगर
मेरे माता-पिता नेपाली हैं तो इसमें मेरा तो कोई गुनाह नहीं, फिर मुझे क्यों तंग क्यों किया जा रहा है?'

कांग्रेस के इशारों पर काम करती है सीबीआई - ठाकरे

शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने मंगलवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) पर कांग्रेस के इशारों पर काम करने का आरोप लगाया। साथ ही ठाकरे ने कहा कि सीबीआई को कांग्रेस ब्यूरो ऑफ इनवेस्टीगेशन कहना गलत नहीं होगा।
शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में ठाकरे ने लिखा है कि विरोधियों को शांत रखने के लिए कांग्रेस सीबीआई को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।

ठाकरे ने कहा कि कांग्रेस, मायावती और मुलायम जैसे लोगों के खिलाफ इसे हथियार के तौर पर प्रयोग करती है और जब वे कांग्रेस की सहायता के लिए तैयार हो जाते हैं तो इस हथियार को पुन: वापस ले लेती है। 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला, राष्ट्रमंडल खेल घोटाला, आरूषि हत्याकांड और आदर्श सोसाइटी जैसे घोटालों का हवाला देते हुए ठाकरे ने कहा, सीबीआई हजारों मामलों की जांच कर रही है लेकिन कुछ मामलों में ही दोरूिशें को सजा हो पाती है और बाकी मामलों को वह भूल जाती है।

सीबीआई की जांच एक ढोंग के अलावा कुछ नहीं है। आदर्श घोटाले के बारे में ठाकरे ने कहा कि सीबीआई ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और 12 अन्य लोगों को आदर्श सोसाइटी घोटाले में आरोपी बनाया है और राज्य भर में विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की। ठाकरे ने कहा कि सीबीआई के छापेमारी और जांच करने का नाटक कर रही है और यह नाटक जल्द से जल्द समाप्त होना चाहिए।

मालेगांव विस्फोट : मुस्लिमों युवकों की ज़मानत का सीबीआई ने किया विरोध

मालेगांव धमाकों में गिरफ्तार हैदराबाद के नौ मुस्लिमों युवकों की ज़मानत का सीबीआई ने विरोध किया है। सीबीआई ने कहा है कि असीमानंद के कबूलनामे की अभी जांच चल रही है।

मालेगांव धमाकों के सिलसिले में गिरफ्तार नौ मुस्लिम युवकों की रिहाई की याचिका का सीबीआई ने विरोध किया है। सीबीआई का कहना है कि धमाकों में अपना गुनाह स्वीकार करने वाले असीमानंद के कबूलनामे की अभी जांच चल रही है लिहाज़ा बाकी आरोपियों को अभी ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए।

अरुषि के पिता राजेश तलवार पर अदालत परिसर में हमला

बहुचर्चित आरुषि तलवार हत्याकांड मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत परिसर में मंगलवार को राजेश तलवार पर एक अज्ञात व्यक्ति ने हमला कर दिया। हमले में तलवार को चोट लगी और उनके सिर से खून निकलते देखा गया।

हमलावर शख्स की वहां मौजूद भीड़ ने जमकर पिटाई कर दी है, जिसके बाद आरोपी शख्स को पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ कर रही है। जानकारी के मुताबिक आरोपी शख्स लखनऊ का रहने वाला है।

12 बजे आरुषि हत्याकांड मामले पर सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर अदालत में सुनवाई होगी।

ज्ञात हो कि इससे पहले शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान विशेष अदालत ने इस हत्याकांड से जुड़े दस्तावेज आरुषि के पिता राजेश तलवार को न देने का आदेश दिया था। अदालत ने यह आदेश आदेश तलवार को 'संदिग्ध अभियुक्त' बताने के बाद दिया था।

कैग की रिपोर्ट पर कपिल सिब्बल का बयान दुर्भाग्यपूर्ण - सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के संबंध में कैग की रिपोर्ट को कमतर आंकने वाले बयानों को लेकर दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल की खिंचाई की और उनसे जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार करने को कहा.

न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एके गांगुली की पीठ ने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है. मंत्री को जिम्मेदारी का कुछ अहसास होना चाहिए.’ न्यायालय ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह किसी के भी बयानों से प्रभावित हुए बिना घोटाले की जांच करे.

कैग ने अनुमान व्यक्त किया है कि पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.पीठ ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि 2जी घोटाले की पड़ताल कर रही सीबीआई मीडिया सहित किसी के भी द्वारा कहीं भी दिए जाने वाले बयानों से प्रभावित हुए बिना जांच करेगी.’

सिब्बल ने कैग के आकलन को ‘पूरी तरह त्रुटिपूर्ण और निराधार’ करार दिया था.

सोहराबुद्दीन केस : पुलिस अधिकारी एन के अमीन ने सरकारी गवाह बनने से किया इनकार

गुजरात के सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले आरोपी पुलिस अधिकारी एन के अमीन ने वर्ष 2005 की इस घटना मामले में क्षमादान और सरकारी गवाह बनने के लिए दायर अपनी याचिका वापस ले ली।

सीबीआई ने गुजरात उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के समक्ष अमीन को इस मामले में मुख्य गवाह करार दिया था। अमीन ने अपने वकील जगदीश रमानी द्वारा अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ए वाई दवे के समक्ष एक आवेदन दायर कर पूर्व में दायर अपनी याचिका को वापस लेने का अनुरोध किया।

अमीन ने छह महीने पहले सीबीआई अदालत के समक्ष एक आवेदन दायर किया था जिसमें उसने इस मामले में सरकारी गवाह बनने की इच्छा जतायी थी।

ढाई साल की जांच के बाद सीबीआई ने अरुषि हत्या कांड की जांच की फाइल बंद की

नोएडा के बहुचर्चित आरुषि तलवार मर्डर केस में करीब ढाई साल की जांच के बाद भी केंद्रीय जांच ब्यूरो ( सीबीआई ) के हाथ कुछ भी नहीं लगा। सीबीआई ने गाजियाबाद के स्पेशल कोर्ट में जांच करने के लिए पर्याप्त सबूत मिलने की बात कहते हुए इसकी जांच को बंद करने की रिपोर्ट फाइल कर दी। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि उसे घटना स्थल पर पर्याप्त सबूत नहीं मिल पाए थे।।

नोएडा के जलवायु विहार अपार्टमेंट में 16 मई 2008 को आरुषि का शव मिला था। अगले ही दिन यानी 17 मई को घर की छत पर नौकर हेमराज भी मृत मिला था। 15 दिनों तक केस पर काम करने के बाद यूपी पुलिस के किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाने के कारण इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। एक जून 2008 को जॉइंट डायरेक्टर अरुण कुमार के नेतृत्व में सीबीआई ने आरुषि के पिता राजेश तलवार की गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले की जांच शुरू की।

राजेश तलवार 50 दिनों तक जेल में भी रहे थे। बीआई ने इस मामले में आरुषि के पिता डॉ. राजेश तलवार के कपाउंडर कृष्णा को आरोपी बनाया था। उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना था कि शवों के पोस्टमार्टम के बाद यह बात सामने आई कि दोनों हत्याओं में एक ही तरह के हथियार का इस्तेमाल किया गया।

कलमाड़ी के आशियानों पर सीबीआई के छापे

कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान वित्तीय गड़बडियों को लेकर ऑर्गनाइजिंग कमिटी के अध्यक्ष रहे कांग्रेस एमपी सुरेश कलमाड़ी के घरों पर सीबीआई ने शुक्रवार सुबह छापे मारे। सीबीआई ने कलमाड़ी के दिल्ली और पुणे स्थित आवासों पर छापे मारे हैं।

सीबीआई ने इन दोनों जगहों पर स्थित उनके कुल चार ठिकानों पर छापे मारे हैं। सूत्रों का कहना है कि कॉमनवेल्थ घोटाले से संबंधित कई महत्वपूर्ण कागजातों के गायब होने के बाद यह छापे मारे जा रहे हैं। सीबीआई इससे पहले आयोजन समिति से जुड़े कई अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है।

सीबीआई यह बात पहले भी कह चुकी है कि कलमाड़ी और उनके साथी सीबीआई के काम में टांग अड़ा रहे हैं। उनके सहयोगी टी एस दरबारी और संजय मोहिन्द्रू फिलहाल जेल में हैं। आज शाम तक कलमाड़ी के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज करवाई जा सकती है।

गिरफ्तारी की आशंका से राजा अपोलो में भर्ती हुए

2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में पूर्व टेलिकॉम मंत्री . राजा को तलब किया गया है। उन्हें सीबीआई ने समन भेज दिया है। सीबीआई उनसे पूछताछ करना चाहती है। मगर अचानक राजा की तबीयत खराब हो गई और वह अस्पताल में भर्ती हो गए हैं।

अब राजा अब किसी भी वक्त गिरफ्तार हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ काफी सबूत मिल चुके हैं और उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक सीबीआई राजा से उनके निवेश, रकम के स्रोत और पिछले कुछ वर्षों के बैंक ट्रांजैक्शंस के बारे में पूछताछ करना चाहती है।

सूत्रों के मुताबिक खुद राजा को भी इस बात का अंदाजा हो गया है कि वह कभी भी सीबीआई के हत्थे चढ़ सकते हैं। उन्होंने पार्टी प्रमुख करुणानिधि से मुलाकात के लिए समय मांगा है।

इसी बीच सीबीआई का समन मिलते ही अचानक राजा की तबीयत खराब हो गई। खबर है कि वह चेन्नै के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती हो गए हैं। डॉक्टर उनकी जांच कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक राजा सेहत के ही आधार पर अंतरिम जमानत पाने की भी कोशिश कर रहे हैं।

सोहराबुद्दीन मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की खिंचाई की

उच्चतम न्यायालय ने आज केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की इस बात के लिए जमकर खिंचाई की कि उपयुक्त स्थानांतरण याचिका तथा विशेष कारणों के बिना आखिर किस आधार पर वह सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले का स्थानांतरण गुजरात से बाहर करने की अनुमति मांग रही है।

गौरतलब है कि सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी की हत्या के मामले में गुजरात के पूर्व गृह राज्यमंत्री अमित शाह और 12 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों पर मुकदमा चल रहा है और इनमें से कई अधिकारी जेल की सीखचों के पीछे हैं।

न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति आर. एम. लोढ़ा की खंडपीठ ने सीबीआई से पूछा कि उपयुक्त स्थानांतरण याचिका दाखिल किए बिना तथा अन्य कारणों को बिना बताए वह किस आधार पर इस मामले के गुजरात से बाहर स्थानांतरण की अनुमति मांग सकती है।

सीबीआई ने गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा अमित शाह को जमानत देने के मामले में उसकी जमानत रद्द करने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उच्चतम न्यायालय ने आज इस मामले की सुनवाई 24 जनवरी तक टाल दी और तब तक अमित शाह को गुजरात से बाहर ही रहना पड़ेगा।

करुणानिधि की बेटी कनीमोझी के NGO पर CBI का छापा

सीबीआई द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में समूचे तमिलनाडु में मारे जा रहे छापों के क्रम में आज मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की बेटी एवं सांसद कनीमोझी से जुड़े एक गैर सरकारी संगठन :एनजीओ: तथा पूर्व दूरसंचार मंत्री राजा के एक लेखा परीक्षक के कार्यालय की तलाशी ली गई

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी ने पेरंबलूर स्थित राजा के पैतृक गांव वेलूर स्थित घर पर भी छापा मारा ।

राजा के आवास के अतिरिक्त अधिकारियों ने वरिष्ठ पत्रकार एवं तमिल पत्रिका ‘नक्कीरन’ के सह संपादक कामराज राजा के लेखा परीक्षक सुब्रमण्यम तथा तिरुचिरापलली चेन्नई और पेरंबलूर स्थित राजा के रिश्तेदारों तथा घनिष्ठ सहयोगियों के परिसरों पर भी छापे मारे ।

कामराज को द्रमुक के काफी करीब माना जाता है ।

खुद को गैर लाभ वाला संगठन बताने वाले एनजीओ ‘तमिल मैयम’ पर भी सीबीआई ने छापा मारा । कनीमोझी इस संगठन के निदेशक मंडल में शामिल हैं जबकि रेव जगत गस्पर राज इसके प्रबंध ट्रस्टी हैं ।

पाकिस्तानियों ने सीबीआई की वेबसाइट हैक की

शुक्रवार रात सीबीआई की वेबसाइट को 'पाकिस्तान साइबर आर्मी' ने हैक कर लिया। उसने साइट पर 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे भी लिख दिए। सीबीआई की साइट पर हुई इस हैकिंग ने भारतीय साइबर सुरक्षा पर कई सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि सीबीआई साइट को देश की सबसे सुरक्षित साइट माना जाता है।

वेबसाइट पर पोस्ट किए गए मेसेज में पाकिस्तान साइबर आर्मी ने अपने दावे में कहा है कि यह 'इंडियन साइबर आर्मी' द्वारा पाकिस्तानी वेबसाइटों की हैकिंग के जवाब में किया गया है। इसमें सीबीआई का मजाक उड़ाते हुए कहा गया है, 'हम पहले ही कह चुके हैं कि हम भले ही सो रहे हैं, लेकिन हमारी मौत नहीं हुई है... पीसीए (पाकिस्तान साइबर आर्मी) को याद रखो।'

पीसीए का कहना है, 'हम भारत की हरेक वेबसाइट को हैक करने की ताकत रखते हैं और हम इसका अपने लोकल सर्वर की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। हम तुम्हारे 31 हजार 337 हैकर्स को कहना चाहते हैं तुम बच्चे हो, जाओ कुछ और किताबें पढ़ो।'

फिलहाल सीबीआई ने अपनी वेबसाइट को बंद कर दिया है और उसके सॉफ्टवेर इंजिनियर साईट को दुरुस्त करने में जुटे हुयें हैं ..

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