इमरान खान ने इस्लाम छोड़ अपनाया हिंदू धर्म, पूर्वजों थे सूर्यवंशी


नोएडा के इमरान खान ने अपना धर्म बदल लिया है। अब वे इस्लाम की बजाय हिंदू धर्म का पालन कर रहे हैं। उन्होंने अपना नाम भी बदलकर राम राघव रख लिया है। उनका दावा है कि उनके पूर्वज सूर्यवंशी ठाकुर थे, जिन्होंने पूर्व में किन्हीं परिस्थितियों में आकर इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। लेकिन अब वे अपनी जिंदगी एक हिंदू के रुप में गुजारना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने सनातन धर्म या हिंदू धर्म अपनाना स्वीकार कर लिया है। ग्रेटर नोएडा के भगवान विश्वनाथ मंदिर में अगले शनिवार (17 अगस्त) को उनके हिंदू धर्म में प्रवेश को धार्मिक प्रक्रिया के जरिये पूरा किया जाएगा। 


इमरान खान पुत्र जफरुद्दीन खान ने अमर उजाला को बताया कि वे पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं, और स्वयं का व्यवसाय करते हैं। उन्होंने धर्म बदलने का निर्णय पूरी तरह अपनी इच्छा से लिया है। उनके ऊपर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है और इसके बाबत एफीडेविट बनवाकर उन्होंने इसकी घोषणा भी की है। 

परिवार में हर धर्म समान
उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि उनका परिवार सूर्यवंशी ठाकुर था। राघव गोत्र के बड़गूजर के रुप में उनकी पहचान हुआ करती थी। लेकिन किन्हीं कारणों से उनके पूर्वजों ने धर्म परिवर्तन कर लिया था। लेकिन धर्म परिवर्तन के बाद भी उनके परिवार में हिंदुओं के त्योहार समान रुप से मनाए जाते थे। ईद और बकरीद के साथ-साथ वे हिंदू परिवारों के साथ मिलकर हमेशा दिवाली और होली मनाते आए हैं। ऐसे में उनके परिवार की खुली सोच ने उन्हें अपने अंदर और बाहर झांकने की अनुमति दी और अब उन्होंने स्वयं को पूर्णरुपेण हिंदू बनाने का निश्चय कर लिया। 

परिवार से कोई बाधा नहीं
इमरान खान उर्फ राम राघव ने कहा कि उनके परिवार की तरफ से किसी ने उनके फैसले का कोई विरोध नहीं किया है। उनके परिवार में दो भाई हैं और दोनों उच्च शिक्षित हैं। परिवार में उनकी पत्नी भी हैं। लेकिन किसी भी सदस्य ने उनके इस फैसले का विरोध नहीं किया है। इमरान को उम्मीद है कि हो सकता है कि उनके धर्म के परिवर्तन के बाद उनके भाई भी हिंदू धर्म में वापसी करें।  



मुस्लिम लड़की ने अपनाया हिंदू धर्म, कारण जानकार हो जायेंगे दंग


एक मुस्लिम लड़की ने हिंदू धर्म अपना लिया। शपथपत्र देकर खुद का धर्म परिवर्तन कर हिंदू धर्म अपनाने की जानकारी लड़की ने दी। लेकिन इसके पीछे उसने जो वजह बताई है उसे जाने बिना आप नहीं रह पाएंगे।

हल्द्वानी के बनभूलपुरा निवासी एक मुस्लिम लड़की ने शुक्रवार को सिटी मजिस्ट्रेट को शपथपत्र देकर हिंदू धर्म अपनाने की जानकारी दी और परिजनों से सुरक्षा की गुहार लगाई। लड़की का कहना है कि मुस्लिम धर्म में महिलाओं के प्रति संकुचित सोच और वहां स्वतंत्रता से जीने का अधिकार न होने के कारण उसने हिंदू धर्म अपनाया है। लिहाजा भविष्य में उसे शहनवाज के बजाय सुनीता के नाम से जाना जाए। इधर, सिटी मजिस्ट्रेट ने मामले की जांच पुलिस को सौंप दी है।

जानकारी के मुताबिक बनभूलपुरा निवासी मकबूल अहमद की पुत्री शहनवाज (22) शुक्रवार को कुछ लोगों के साथ सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंची। शहनवाज ने सिटी मजिस्ट्रेट को शपथपत्र देकर खुद के हिंदू धर्म अपनाने की जानकारी दी। सिटी मजिस्ट्रेट को दिए शपथ पत्र में शहनवाज ने कहा है कि मुस्लिम धर्म में महिलाओं के प्रति संकुचित सोच के चलते उसने अन्य धर्मों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उसे पता चला कि हिंदू धर्म में महिलाओं को स्वतंत्र होकर जीने का अधिकार है और वहां किसी तरह की कोई धार्मिक पाबंदी भी नहीं है।

शपथपत्र में शहनवाज ने कहा कि मुस्लिम परिवार में तमाम पाबंदियों के चलते उसने अपना नाम सुनीता रख लिया है। उसका कहना है कि इस संबंध में वह पहले ही जिलाधिकारी को शपथ पत्र भेज चुकी है। धर्म परिवर्तन किए जाने पर परिजनों द्वारा उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई है। शहनवाज ने सिटी मजिस्ट्रेट से सुरक्षा की गुहार लगाते हुए अभिलेखों में भी नाम व धर्म परिवर्तन कराने की मांग की है। 

इधर सिटी मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय ने बताया कि लड़की द्वारा धर्म परिवर्तन के संबंध में शपथ पत्र दिया गया है। उन्होंने इसे लड़की का व्यक्तिगत मामला बताते हुए कहा कि महिला द्वारा किन परिस्थितियों में धर्म परिवर्तन किया गया है अथवा कहीं किसी व्यक्ति अथवा संस्था द्वारा लड़की को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर तो नहीं किया गया है इस संबंध में जांच के लिए मामला पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है।


धर्म परिवर्तन कर चुके दलितों को आरक्षण का लाभ नहीं

केंद्र सरकार ने उस याचिका का विरोध करने का फैसला लिया है, जिसमें मांग की गई है कि हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई या इस्लाम धर्म अपनाने वाले दलितों का एससी का दर्जा बरकरार रखा जाए। सरकार का तर्क है कि जातिवाद और छुआछूत सिर्फ हिंदू धर्म में ही हैं और शेड्यूल्ड कास्ट्स नाम से अलग कैटिगरी इसी वजह से बनानी पड़ी है।

SC स्टेटस अभी यह सिर्फ हिंदुओं, सिखों और बौद्धों के लिए सीमित है। एक याचिका में मांग की गई है कि इस दर्जे को धर्म आधारित न रखते हुए उन हिंदू 'अछूतों' को भी दिया जाए, जो इस्लाम या ईसाई धर्म अपना लेते हैं।

इस मांग के विरोध में बीजेपी सरकार का कहना है कि 'छुआछूत' हिन्दू धर्म का एक बुरा पहलू थी और इसने प्रभावित जातियों को इज्जत, आत्म सम्मान और अन्य मानवीय अधिकारों से वंचित रखा। इस कुप्रथा को सिर्फ हिंदू धर्म से जोड़ते हुए सरकार कहती है कि 'सामाजिक पिछड़ापन' धर्मांतरण करने वालों को उन दलितों जैसी स्थिति में नहीं लाता, जो 'छुआछूत' की वजह से पिछड़ेपन के शिकार हुए हैं।

तर्क यह दिया गया है कि संविधान विधायिका में दलितों और आदिवासियों को आरक्षण इसलिए देता है, ताकि उनके साथ सदियों से हुए सामाजिक अन्याय की भरपाई की जा सके। और अगर इस बेनिफिट को धर्मांतरण करने वालों भी दिया जाने लगा, तो यह एससी और एसटी से संबंध रखने वाले लोगों के हितों पर कब्जा करने जैसा होगा।

बीजेपी सरकार ने इस मसले पर साफ स्टैंड ले लिया है, लेकिन यूपीए सरकार ने 2005 में इस मुद्दे की स्टडी के लिए नैशनल कमिशन बनाकर थोड़ा और टाइम लेने की रणनीति अपनाई थी। इसके बाद उसने 2011 में 'जाति और आर्थिक आधार पर जनगणना' के डेटा का इंतजार करने का फैसला किया था।

सामाजिक न्याय मंत्रालय ने केंद्रीय कानून मंत्रालय को विस्तृत डीटेल देते हुए कहा है कि धर्मांतरण करने वालों को एससी का दर्जा देने की मांग करने वाली याचिका का विरोध किया जाए।

तीन माह का हिंदू बच्चा चुराकर, खतना कर मुस्लिम बनाया

( फाइल फोटो, वास्तविक घटना से कोई सम्बन्ध नहीं )
बरेली के सुभाषनगर के युवक ने कर्जा चुकाने के लिए गाजियाबाद से तीन माह का हिंदू बच्चा चुराकर दस हजार रुपये में बरेली के एक मुस्लिम को बेचा। एक अन्य मामले में गिरफ्तारी के बाद उसने चोरी की वारदात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने बच्चा बरामद कर उसके मां-बाप की खोजबीन की है। यह बच्चा गाजियाबाद के एक हिंदू दंपती का है। उसके मां-बाप आज सूचना मिलने पर बरेली के सुभाषनगर थाने पहुंच गए हैं।

बरेली के सुभाषनगर के गांव मिलक रोंधी निवासी गिरीश पुत्र मोतीराम साल भर पहले गाजियाबाद में विजयनगर क्षेत्र के मुहल्ला बहरामपुर में मंगल बाजार के पास किराए पर रहता था। वहां से करीब सात महीने पहले गिरीश उसी मकान में किराए पर रहने वाले कासगंज के ङ्क्षहदू दंपती का तीन महीने का बेटा चोरी कर भाग निकला था। उसकी तलाश में गाजियाबाद पुलिस गिरीश के गांव भी आई थी लेकिन वह नहीं मिला। बच्चे को यहां लाने के बाद गिरीश नवाबगंज में झाड़ फूंक करने वाले कुर्बान मियां के पास इदरीश बनकर रहने लगा। वहां उसने पत्नी की मौत होने और बच्चा अपना बताया। बच्चे को पालने में गिरीश ने असमर्थता जताते हुए नवाबगंज में नई बस्ती स्थित मदीना मस्जिद के पास रहने वाले मुहम्मद इसराइल को दस हजार रुपये में बेच दिया। वहां पर गिरीश ने किसी को कानोंकान यह भनक नहीं लगने दी कि बच्चा गाजियाबाद से चोरी कर लाया गया है। इसराइल ने बच्चा लेने के बाद उसका खतना भी करा दिया।

इसी बीच बुधवार दोपहर सुभाषनगर में रामगंगा चौकी इंचार्ज उमेश यादव ने गिरीश को पकड़ लिया। गिरीश पर थाना सुभाषनगर में जनवरी 2013 का अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज है। वह महेशपुर ठाकुरान निवासी बुधपाल की बाइक मांगकर ले गया और फिर वापस नहीं की। इसी बीच पुलिस को जानकारी मिली कि गिरीश की तलाश में गाजियाबाद पुलिस भी उसके गांव आई थी। जब सख्ती से पूछताछ हुई तो उसने बच्चा चोरी करने की घटना स्वीकार कर ली। इसके बाद थाना सुभाषनगर की टीम नवाबगंज गई और बच्चा व इसराइल को थाने ले आई। इसराइल से पूछताछ हुई तो उसने बच्चे का नाम मुहम्मद हुमैर बताते हुए अपने पास उसके पहुंचने की पूरी कहानी बताई। इसी बीच कहानी में एक नया मोड़ ये भी आया कि करीब 25 दिन पहले इदरीश बना गिरीश नवाबगंज के गांव लाईखेड़ा की एक मुस्लिम युवती को भगा ले गया और कलियर शरीफ जाकर निकाह कर लिया।

नौकरी दिलाने के नाम पर हिन्दू को मुस्लिम बना दिया

तहसील दिवस पर लखनऊ की पिण्डरा तहसील में कुछ इसी तरह की फरियाद लेकर पहुंचे पुरारघुनाथपुर निवासी कृष्ण मोहन मिश्र ने सनसनी फैला दी।

एयरपोर्ट में संविदा पर नौकरी दिलाने के नाम पर इस्लाम धर्म कुबूल कराने का आरोप लगाते हुए उप जिलाधिकारी (पिण्डरा) एके शुक्ल को प्रार्थनापत्र दिया।

धर्मातरण के मुद्दे पर फरियादी ने आरोप लगाया कि एयरपोर्ट पर पिछले सात साल से वह संविदा पर बतौर लोडर काम कर रहा है। एक समुदाय के कई लोगों को स्थायी नौकरी दे दी गई लेकिन मेरे लिए इस्लाम धर्म कुबूल करने पर ही नौकरी देने की शर्त रख दी गई। 

कृष्ण मोहन मिश्र के अनुसार उसे मजबूरन इस्लाम धर्म कुबूल करना पड़ा। यह सुनकर तहसील दिवस में मौजूद अधिकारी सकते में आ गए। बहरहाल, उप जिलाधिकारी एके शुक्ल ने थानाध्यक्ष फूलपुर को मामले की जांचकर कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

मध्यप्रदेश में 10 मुस्लिमों ने विधिवत घर वापसी की

मध्यप्रदेश के खनियांधाना के बुकर्रा व छिरवाहा गांव के कुछ दलित परिवारों का धर्मातरण कर मुस्लिम धर्म अपनाने के मामले का गुरूवार को नाटकीय पटाक्षेप हो गया। हिन्दूवादी संगठनों और दलित समाज के नेताओं की मौजूदगी में मनीराम, तुलाराम, सरदार व अनरत सहित 10 लोगों ने खनियांधाना के टेकरी सरकार मंदिर में विधिवत मंत्रोच्चार के बीच पुन: हिन्दू धर्म अपना लिया है।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अब्दुल्ला बन चुके मनीराम ने न केवल इस्लामिक पहनावा उतार दिया, बल्कि उसने दाढ़ी भी कटवा दी। हिन्दू धर्म को पुन: अपनाने की इच्छा के बाद गुरूवार दोपहर इन सभी नहला धुलाकर व पुरूषों को सफेद धोती व बनियान कुर्ता पहनाया गया,जबकि महिलाओं को नई साड़ी, मंदिर में हिन्दू धर्म से जुड़े मंत्रों के उच्चारण और यज्ञ के बीच इन लोगों ने पुन: हिन्दू धर्म अपनाने की घोषणा की।

इस पूरे मामले की खास बात यह रही कि पुन: हिन्दू धर्म अपनाने वाले इन लोगों का इस बार भी यही कहना था कि वे बिना किसी दबाव के पुन: हिन्दू धर्म अपना रहे हैं।

गुरूवार को हिन्दू रीति रिवाजों के साथ जिन 10 लोगों ने पुन: हिन्दू धर्म अपनाया है,उनमें तुलाराम (अब्दुल करीम) पुत्र प्रीतम, मनीराम (अब्दुल्ला) पुत्र रघुवर, नीलेश पुत्र मनीराम, मक्खो (अमीना) पत्नी मनीराम, प्रीतम पुत्र रघुना, गीता पत्नी प्रीतम, समरत पुत्र रघुना तथा सरदार (इलियास) पुत्र समरत, राजेश उर्फ राजू पुत्र समरत एवं समरत की पत्नी शामिल हैं।

घर वापसी कार्यक्रम रोका तो भुगतने होंगे गंभीर परिणाम-विहिप

अलीगढ़ में क्रिसमस पर प्रस्तावित 'घर वापसी' (धर्म परिवर्तन) के कार्यक्रम को संघ परिवार हर कीमत पर करने पर आमादा है। विश्व हिंदू परिषद ने को एलान कर दिया कि सरकार ने कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

विहिप के ब्रज प्रांत अध्यक्ष प्रमोद जाजू ने शुक्रवार को कासगंज में कहा कि इस कार्यक्रम को धर्मांतरण कहना गलत है, क्योंकि हम सिर्फ उन लोगों को वापस बुला रहे हैं, जो पूर्व में विभिन्न कारणों से हिंदू धर्म को छोड़ गए थे। लिहाजा, यह घर वापसी कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ का कार्यक्रम तय है, जिसमें कोई तब्दीली नहीं होगी।

संघ परिवार की गुरिल्ला नीति सबसे सफल रणनीति मानी जाती है। जब भी विवादित कार्यक्रम हुए, संघ परिवार ने इसी रणनीति का सहारा लिया। तैयारी यह है कि अगर सरकार कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाती है और हिंदू नेताओं की गिरफ्तारी होती है, तब भी कार्यक्रम में लोग पहुंचेंगे। इसके लिए दो-दो तीन-तीन टीमें तैयार की जा रही हैं। अगर प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी भी हो जाती है, तब भी कार्यक्रम में लोग पहुंचेंगे। चाहे भेष बदलकर जाना पड़े या अन्य किसी भी तरह, मगर कार्यक्रम जरूर होगा।

अलीगढ़ जैसा ही कार्यक्रम पिछले वर्ष क्रिसमस के दिन यहां कछला गंगा घाट पर हो चुका है। इस कार्यक्रम में प्रदेश के 11 जिलों से आए 5500 लोगों ने ईसाई धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपनाया था।

जबसे धर्मांतरण का मुद्दा सुर्खियों में आया है, सरकारी मशीनरी हरकत में है। गृह सचिव ने पिछले वर्षों में एटा-कासगंज में हुए धर्मांतरण कार्यक्रमों की रिपोर्ट मांगी है। यह जानकारी भी भेजने को कहा गया है कि धर्म जागरण समिति का नेटवर्क कैसा है। कौन-कौन लोग इससे जुड़े हैं। इस पर खुफिया तंत्र सभी जानकारी जुटा रहा है।

जबरन धर्मांतरण न होता तो आज इस्लाम अस्तित्व में नहीं होता - तसलीमा

धर्मांतरण विवाद में जानी-मानी लेखिका तसलीमा नसरीन ने भी दखल देते हुए दो टूक शब्दों से सच्चाई स्वीकार करते हुए कहा है कि अगर गरीब मुस्लिम पैसे और भोजन के लिए हिंदू धर्म ग्रहण करना चाहते हैं तो उन्हें ऐसा करने दिया जाए। गरीब हिंदू भी इसी कारण इस्लाम और ईसाइयत को अपनाते हैं। दरअसल मजहब बिकता है।

अपने बेबाक लेखन के कारण कट्टरपंथियों के निशाने पर रहने वालीं तसलीमा ने ट्वीट के जरिये यह भी कहा है कि इस्लाम में जबरन धर्मांतरण की मनाही है। बाद में ऐसा होने लगा। जबरन धर्मांतरण न होता तो आज इस्लाम अस्तित्व में नहीं होता। तसलीमा ने जबरन धर्मांतरण का विरोध करते हुए कहा है कि वह हिंदुओं के धर्मांतरण के लिए मुस्लिम और ईसाइयों को दोषी ठहराती रही हैं और यही कारण है कि जब हिंदू भी ऐसा करते हैं तो उन्हें बुरा लगता है।

उनके मुताबिक उपासना पद्धति के चयन की स्वतंत्रता होनी चाहिए। लोगों को हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, यहूदी या फिर नास्तिक बनने की छूट मिलनी चाहिए। तसलीमा ने अपने पूर्वजों को मूर्तिपूजक बताते हुए कहा कि वे हिंदू से मुसलमान बने।

15 हजार मुसलमानों की घर वापसी की घोषणा

उत्‍तर प्रदेश के आगरा में धर्म परिवर्तन के मामले में नया मोड़ आ गया है। मुसलमान से हिंदू बनने के एक दिन बाद ही दो शख्‍स ने बजरंग दल के लोगों पर जबरदस्‍ती धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। बुधवार को यह मामला संसद में भी उठा। इस पर चर्चा की मांग करते हुए विपक्ष ने हंगामा किया। लेकिन आरएसएस से जुड़े धर्म जागरण मंच के उत्‍तर प्रदेश प्रमुख ने एलान किया है कि 25 दिसंबर को 15 हजार लोगों का धर्म परिवर्तन करा कर उन्‍हें हिंदू बनाया जाएगा। वहीं, इस पूरे मामले पर बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि अगर इस तरह की घटनाओं को नहीं रोका गया तो इससे पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो जाएगा।

मायावती ने कहा, ‘‘आगरा में धर्म परिवर्तन का मुद्दा गंभीर है। इस तरह की खबरें हैं कि आगरा के बाद अलीगढ़ में भी यही दोहराया जाने वाला है। केंद्र और यूपी सरकार को इस मामले को गंभीरता से देखना चाहिए। चूंकि, कानून व्यवस्था राज्य का विषय है इसलिए सपा सरकार को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। धर्म परिवर्तन के लिए लालच दिया गया है और इसके पीछे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानी आरएसएस के सहयोगी संगठन बजरंग दल का हाथ है।’’

सोमवार को मुस्लिम परिवारों के ३८७ सदस्यों की हिंदू धर्म में वापसी कराई गई थी। इन लोगों ने धर्म परिवर्तन की रस्‍म के बाद पूजा की और काली माता की आरती उतारी। लेकिन मंगलवार को इन्‍हीं लोगों ने नमाज पढ़ी और कहा कि वे मुस्लिम हैं। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि धर्म जागरण प्रकल्प और बजरंग दल के लोगों ने उन्हें बीपीएल कार्ड और प्लॉट का लालच देकर फोटो खिंचाने के लिए कहा था। उन्हें ये नहीं मालूम था कि उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। लेकिन इस बारे में मुकदमा दर्ज कराने वाले इस्‍माइल ने सोमवार को अपना नाम राजकुमार बताया था। वो प्रसाद भी बांट रहे थे।

धर्म जागरण प्रकल्प का कहना है कि सभी मुस्लिमों को उनकी मर्जी से हिंदू बनाया गया था। सोमवार को देवरी रोड स्थित वेद नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के धर्म जागरण प्रकल्प और बजरंग दल ने धर्मांतरण कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसमें वेद नगर के रहने वाले करीब ६० परिवारों के ३८७ सदस्यों को हवन कराकर हिंदू बनाया गया। धर्म जागरण प्रकल्प ने कहा था कि इन परिवारों के पूर्वज कभी हिंदू थे। अब इन लोगों की फिर से घर वापसी हुई है।

मंगलवार को अखबारों में यह खबर छपी तो मुसलमानों ने इसे धोखा बताया। उन्‍होंने काली माता की मूर्ति को वहीं रहने वाले एक क्षत्रिय के कमरे में रख दिया और नमाज अता की। उन्होंने बताया कि उनसे कहा गया था कि संगठन के किसी बड़े पदाधिकारी के सामने एक आयोजन में फोटो भर खिंचाना है। इसके बाद उन्हें बीपीएल राशन कार्ड और प्लॉट दिलवाए जाएंगे। उन्हें धर्म परिवर्तन के बारे में कुछ नहीं बताया गया था।

इस्‍माइल की पत्‍नी मोनिरा बेगम का कहना है कि धर्म जागरण ईसाई परियोजना के ब्रज प्रांत प्रमुख नंद किशोर पंद्रह दिन से धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश कर रहे थे। उनके मुताबिक, इस्‍माइल को बस्‍ती में मंदिर बनवाने के एवज में सभी के बीपीएल कार्ड बनवाने का वादा किया गया।

प्रार्थना सभा की आड़ में चलता है धर्म परिवर्तन का खेल: विहिप

ईसाई मिशनरी लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाते हैं। उनका ज्यादा निशाना हिंदू परिवारों पर होता है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह बात मंगलवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के जिलाध्यक्ष पंडित सुरेश शर्मा, प्रांत संपर्क प्रमुख कमलजीत सेतिया व धर्म जागरण समन्वय विभाग के विभाग प्रमुख संजीव तलवाड़ ने संयुक्त रूप से कही।

तीनों नेताओं ने दावा किया प्रार्थना सभा की आड़ में ईसाई मिशनरी धर्म परिवर्तन की चाल चलती हैं। इनके झांसे में आए 2306 परिवारों की कुछ समय पहले घर वापसी करवाई गई है। ये परिवार लालच और बहकावे में आकर धर्म परिवर्तन कर बैठे थे। ज्यादा निशाना गुरदासपुर के सीमा के साथ सटे गांवों को बनाया जा रहा है। इन नेताओं ने दावा किया कि विदेशी ताकतों के हाथों में खेलते हुए धर्म परिवर्तन का हथकंडा अपनाकर हिंदू समाज को बांटने की नापाक कोशिश की जाती है। साथ ही सवाल किया की कि जो लोग खुद को आज ईसाई कहते फिर रहे हैं, वह ही बताएं कि उनका पिछोकड़ क्या था? उन्होंने आह्वान किया कि हिंदू समाज इनकी चालों में न आए। क्योंकि यह सब्जबाग दिखाकर परिवारों को बांट कर उन्हें लड़ाने की साजिश रचते हैं।

29 अक्टूबर को रोशन ग्राउंड में आयोजित की गई मसीही सत्संग को विफल बनाने का उन्होंने तमाम हिंदू संगठनों का तहेदिल से धन्यवाद किया। ईसाई प्रतिनिधि दावा कर रहे थे कि मसीही सत्संग में 25 हजार संगत पहुंचेगी, लेकिन पंडाल में उपस्थिति 1500 से भी कम थी। इस मौके पर नगेंद्र गुप्ता, बलजीत राजा, सौरव इत्यादि मौजूद थे।

विहिप नेता कमलजीत सेतिया ने कहा कि ईसाई समागमों में योजनाबद्ध ढंग से लोगों को बहकाया जाता है। योजना के तहत समागम में इनके ही व्यक्ति उठते हैं और दावा करते हैं कि ईसाई बनने पर उन्हें सुख शांति मिली है। प्रार्थना से उनकी बीमारी ठीक हो गई। जबकि असलियत में यह सब धर्म परिवर्तन करवाने के लिए लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि रोशन ग्राउंड में आयोजित मसीही सत्संग की वीडियोग्राफी प्रशासन से हासिल करके देखी जाएगी, अगर कहीं पर कुछ गलत पाए जाने पर शिकायत भी होगी।

11 ईसाईयों ने पुन: हिन्दू धर्म अपनाया

वर्षो पहले हिन्दु धर्म को छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने वाले छह परिवार के 11 सदस्य वापस हिन्दु धर्म को अपना लिया है। उनके स्वधर्म वापसी को लेकर बजरंग दल की ओर से यहां विश्वशांति धर्मरक्षा यज्ञ का आयोजन किया गया और उनके हिन्दु धर्म में वापसी का स्वागत किया गया।

रविवार के दिन, विश्वशांति यज्ञ से पूर्व भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। महानदी के मारवाड़ी घाट से निकली यह शोभायात्रा नगर परिक्रमा करते हुए गंगाधर मंडप पहुंची, जहां यज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर, बिहार के लखीसराय से आए विश्व हिन्दु परिषद के संत भरत दास रामायणी महाराज ने हिन्दु धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसके महत्व के बारे में बताया और वापस हिन्दु धर्म में लौटने वाले परिवारों को संस्कृति दीक्षा दी। 

क्षेत्रीय धर्म प्रचार प्रमुख अच्युतानंद कर ने हिन्दु धर्म को धर्मातरीकरण से बचाए जाने पर जोर दिया। इस कार्यक्रम का संचालन बजरंग दल के प्रांतीय प्रमुख सुधीर रंजन बहिदार ने और यक्ष कार्य का संचालन चंद्रकांत पाणिग्राही ने किया। इस अवसर पर, विश्व हिन्दु परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष प्रदीप बहिदार, संगठन सचिव शरत प्रधान, आनंद प्रधान, विपिन गड़नायक, बुलू महापात्र, मुन्ना मुंडा, संतोष राउत, हेमंत मेहेर, विश्वनाथ पंडा एवं अन्य उपस्थित रहे।

नगमा और जॉनी लिवर कर रहे ईसाइत का प्रचार विहिप छेड़ेगा आन्दोलन


विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने बॉलीवुड अभिनेत्री नगमा और जॉनी लिवर के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की धमकी दी है। दोनों दलों का आरोप है कि ये दोनों ईसाइत का प्रचार कर रहे हैं तथा हिंदुओं का धर्मातरण कर रहे हैं।

वीएचपी नेता उमेश राणे ने आरोप लगाया कि बेस्ट की बसों व मुंबई रेलवे स्टेशन पर बड़े-बड़े होर्डिग लगे हैं। इनमें जॉली लिवर व नगमा के फोटो लगे हैं जिनमें वे ईसाइत का प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर वे जल्दी ही यह विज्ञापन नहीं रूकवाते हैं तो इन दोनों के घरों के बाहर हवन व आरती की जाएगी। एक न्यूज चैनल ने राणे के हवाले से कहा कि नगमा व जॉनी ख्रिश्चन मिशनरीज के साथ मिलकर काम कर रहे हैं तथा हिंदुओं का धर्मातरण करवा रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि १८ कहानियों वाली एक किताब में दोनों एक्टर्स को यह कहते हुए दिखाया गया है कि ईसाई बनने के बाद से उनका जीवन ही बदल गया। अगर वे इसे नहीं रोकते हैं तो हम उन्हें पाठ पढ़ाएंगे।

निर्दोष हैं आसाराम बापू, सोनिया के इशारे पर ईसाई कर रहे धर्मान्तरण - सिंघल

वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक अशोक सिंहल ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी के इशारे पर हिंदुओं का जानबूझकर धर्मांतरण किया गया है। वीएचपी के ऑफिस में आयोजित प्रेस कॉन्फ़्रेंस में उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के ही इशारे पर कनाडा के ईसाई धर्म गुरु पीटर यंग्रीन को नियम-कानून ताक पर रखकर प्रयाग में चंगाई महोत्सव में हिस्सा लेने की अनुमति दी गई। इतना ही नहीं, सिंहल ने एक बार फिर कहा है कि आसाराम निर्दोष हैं।

अशोक सिंहल ने कहा कि पीटर यंग्रीन वही व्यक्ति हैं, जिसको अटल सरकार के दौरान भारत आने का वीजा नहीं दिया गया था। यंग्रीन को कॉन्फ़्रेंस वीजा दिया गया है। इस तरह के वीजा से केवल सरकारी संस्थाओं के कार्यक्रम में ही भाग लिया जा सकता है, वो भी भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की अनुमति के साथ। सिंहल ने कहा कि सोनिया के इशारे और मुलायम के आशीर्वाद से इलाहाबाद में कानून को ताक पर रखकर चंगाई महोत्सव का आयोजन किया गया।

सिंहल ने बताया कि भारत में 1969 के बाद से मिशनरी वीजा बंद हो चुका है। सोनिया गांधी के इशारे पर पीटर यंग्रीन को वीजा दिलाया गया। भारत का कानून उन्हें भारत में चंगाई सभाओं का आयोजन करने और धर्मांतरण कराने का अधिकार नहीं देता। सिंहल ने कहा कि हजारों साल पुरानी जिस संस्कृति का भारत में जन्म हुआ, चंगाई सभाओं के माध्यम से उसकी हत्या की कोशिश की जा रही है। आज हिंदू भारतीय धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए डटकर मुकाबला करने को तैयार है। प्रयाग में 10 हजार से ज्यादा नवयुवकों ने जिस तरह शांतिपूर्वक पीटर यंग्रीन का विरोध किया, वह इस बात का गवाह है।

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक अशोक सिंहल की निगाह में अब भी आसाराम बापू निर्दोष हैं। उन्होंने कहा कि हम उनको आज भी संत मानते हैं। उन्होंने कहा कि वह मीडिया में आसाराम बापू के ट्रायल का विरोध करते हैं। वीएचपी नेता ने कहा कि आने वाले समय में रेप का आरोप लगानी वाली महिलाओं का सच सामने आ जाएगा।

पेरू निवासी युवक दाह संस्कार की रस्म से प्रभावित होकर हिन्दू बना

सात समंदर पार दक्षिण अमेरिका के पेरू निवासी एक ड्रम प्लेयर ने दाह संस्कार की रस्म से प्रभावित होकर हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया है।

काशी आकर उसने तीर्थ पुरोहित की मदद से बृहस्पतिवार सुबह गंगा तट पर अपने पिता और चाचा की अस्थियां विसर्जित की। साथ ही सविधि कर्मकांड भी किया। उसकी मानें तो मोक्ष के लिए जल्द ही उसके वतन के और लोग भी इस संस्कृति से जुड़ सकते हैं। इससे पहले वह ईसाई था।

पेरू के लिमा शहर निवासी सेरजियो विल्लाविसेन्सियो के हिंदू संस्कृति से प्रभावित होने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। वह 2010 में वाराणसी घूमने आया तो जीवन में पहली बार मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट पर शवों को चिताओं पर रखकर जलाते देख कौतूहल से भर गया था।

इसके बाद सेरजियो ने अंतिम संस्कार की इस भारतीय परंपरा को समझने के लिए हिंदू आचार्यों की भी मदद ली।

वतन जाने के बाद जब उसके पिता हिपोलिटो विल्लाविसेन्सियो का निधन हुआ, तब मां लूरदेच और अन्य रिश्तेदारों, पड़ोसियों की तमाम जिद के बाद भी सेरजियो ने अपने पिता के शव को दफनाने नहीं दिया।

उसकी पत्नी निकोल जो अमेरिकन कहानीकार है, वह भी अपने श्वसुर को दफनाने के ही पक्ष में थी। फिर भी सेरजियो ने पेरू में हिंदू प्राइस्ट (पुजारी) की तलाश की और हिंदू रीति के अनुसार अपने पिता के शव को चिता पर जलाया। मुंह में सोना, तुलसी डालने की भी रस्म पूरी की गई थी।

चिता पर शव रखने से पहले स्नान कराने के बाद घी का लेप भी कराया गया था। इसके बाद उसके चाचा अलजेंद्रो ओरे का निधन हुआ तब उनका भी उसने दाह संस्कार किया लेकिन इतना विधि-विधान नहीं हो सका था। पिता और चाचा की अस्थियां चुनकर घर में रख ली थी।

बृहस्पतिवार को सेरजियो ने अपने पिता और चाचा की अस्थियां गंगा में विसर्जित की। तुलसी घाट से लगे भदैनी पंप घाट पर उसने अस्थियों के विसर्जन के बाद श्राद्ध और पिंडदान कर अपने पुरखों के मोक्ष की रस्म भी पूरी कर ली।

सेरजियो ने अमर उजाला को बताया कि पूर्वजों को दफनाने की ही परंपरा थी लेकिन जब वह अपने पिता के शव को चिता पर मुखाग्नि दे रहा था तब वह दृश्य देखने के लिए न सिर्फ तमाम लोग पहुंचे बल्कि इस प्रक्रिया के बारे में जानकारी भी ली।

उसे उम्मीद है कि अंतिम संस्कार की इस परंपरा का और लोग भी वहां जल्द ही अनुकरण कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के 19 परिवारों के 109 लोग ईसाई से पुनः हिंदू बने

छत्तीसगढ़ में ग्राम पंचायत जामजुनवानी के गांव नवराटिकरा के जनजातीय परिवारों ने युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से भटकते देख फिर से अपने पुरखों का धर्म अपना लिया। गांव के 19 परिवारों के 109 लोग ईसाई से हिंदू बन गए। स्थानीय लोग बताते हैं कि यहां के वनवासियों को प्रलोभन देकर वर्षों पहले उनका धर्मांतरण कराया गया था। इस कारण आदिवासियों की प्राचीन संस्कृति विलुप्त होने के कगार पर है और युवा पीढ़ी पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है।

गांव नरवाटिकरा में 'जात भीतर' कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें पूर्व अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री गणेश राम भगत भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि वनवासियों का धर्मांतरण रोकने के लिए सभी को अपनी भागीदारी निभाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वनवासियों का धर्मांतरण होने के बाद इस वर्ग के युवक जघन्य अपराधों की ओर प्रेरित होने लगे हैं। विकास की राह से भटकने वाले इन युवकों को अच्छे रास्ते पर ले जाने के लिए जात भीतर कार्यक्रम आदिवासियों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

भगत ने ग्राम नरवाटिकरा में 19 परिवार के 109 लोगों को उनके मूल धर्म हिंदू में वापसी कराई। यहां के सरना स्थल में एकत्रित ग्रामवासियों ने अपने धर्मांतरण को लेकर पश्चाताप किया। इस कार्यक्रम में हिंदू धर्म में वापसी करने वाला परिवार कोरोंजो एक्का, कपील एक्का, संजय लकड़ा व बीरबल मिंज का कहना था कि उनके पुरखों ने धर्मांतरण कर लिया था, दूसरे धर्म में रहकर वे घुटन और अकेलापन महसूस कर रहे थे

जुलू राम का कहना था कि हिंदू धर्म से भटकने के बाद उनकी युवा पीढ़ी अपराध की दुनिया में भटक गई थी। अपने प्राचीन त्योहार और समाज के रीति रिवाजों से दूर चले जाने का उन्हें बेहद अफसोस है, इसलिए उन्होंने हिंदू धर्म में लौटने का फैसला किया है। जात भीतर कार्यक्रम होने से पूरे गांव में उत्साह का माहौल है। पुराने हिंदू परिवार के लोगों ने इन्हें एक दिन पहले सरना स्थल पर बैठाकर उन्हें हिंदू धर्म अपनाने का संकल्प दिलाया था। इसके बाद गांव में जनसभा का भी आयोजन किया गया।

पूर्व मंत्री भगत ने जनसभा में कहा कि जब भी मनुष्य अपनी भूल को समझ लेता है, उसी दिन से उसका नया सबेरा शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा कि नरवाटिकरा के लोगों ने पाश्चात्य संस्कृति को छोड़ने का जो साहस दिखाया है, इससे अन्य सैकड़ों लोगों को भी विकास की मुख्य धारा से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।

भगत ने कहा, 'हम लोग अपने दिवंगत नेता दिलीप सिंह जूदेव के दिखाए मार्ग पर चलकर उनके सपनों को साकार करने का प्रयास कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि जूदेव ने भी 'आपरेशन घर वापसी' कार्यक्रम चलाकर हजारों वनवासियों को नया रास्ता दिखाया था। जनसभा में जशपुर के प्रमुख हिंदू नेता रामप्रकाश पांडेय, सत्यप्रकाश तिवारी, डॉ.आजाद, रम्मू शर्मा, बिशु शर्मा, रोशन साय पैंकरा, बलदेव जोशी सहित वनवासी कल्याण आश्रम के कई प्रमुख लोग उपस्थित थे।

पाक में 18 हिंदूओ को धर्मपरिवर्तन कर मुस्लिम बनाया

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के खानपुर इलाके में हिंदू परिवार के 18 सदस्यों ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सात पुरुषों और 11 महिलाओं ने मंगलवार को एक समारोह में इस्लाम धर्म स्वीकार किया। यह समारोह ख्वाजा गुलाम फरीद के संरक्षक मियां गौस मोहम्मद की देखरेख में आयोजित हुआ था।

सरकारी समाचार एजेंसी एपीपी के अनुसार परिवार के मुखिया समाराम ने अपना नया नाम मोहम्मद शरीफ रखा है। 

समारोह में इलाके के कई प्रमुख लोग मौजूद थे।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू समुदाय के लोगों का जबरन धर्मांतरण किए जाने की खबरें पहले भी आती रही हैं।

हिंदू समुदाय के नेताओं का आरोप रहा है कि समुदाय की कई महिलाओं का अपहरण किया गया तथा जबरन उनकी शादी मुस्लिम युवकों से करा दी गई।

धर्म परिवर्तन कर बने ईसाई, फिर मुसीबत आने पर भागे शनिदेव की शरण में

डॉ. यासीन अतीत में हिंदू परिवार से रहे हैं और उसका वास्ता अमृतसर से है। बंटवारे के बाद परिवार इधर-उधर हो गए। इनके बुजुर्गों ने बाद में ईसाई धर्म अपना लिया, बावजूद इसके ये लोग इस्लाम के साथ हिंदू और सिख सभी धर्मों का आदर करते हैं।

डॉ. यासीन ने बताया कि वह अस्पताल चला कर लोगों की सेवा करते हैं। विगत में पाकिस्तान सरकार ने उनकी एनजीओ 'चाइना मेडिकेयर वेल्फेयर हेल्थ सेंटर' को अस्पताल, वृद्ध आश्रम और अनाथ आश्रम खोलने के लिए 34 कनाल जगह भी उपलब्ध कराई है। 

दूसरी बार भारत आए यासीन ने बताया कि वह काफी दिन से परेशान थे, परिवार में कलह के अलावा मियां-बीवी में भी अक्सर तकरार होती रहती है। वहां पर एक पंडित के पास गए तो उसने शनि की नाराजगी की बात बताई, और कहा कि आप जो कुछ करते अथवा करना चाहते हैं उसका उलट होता है। बात-बात पर गुस्सा आता है। मियां-बीवी में न चाहते हुए भी अक्सर झगड़ा हो जाता है। यह सब शनि की उग्र दृष्टि के कारण हो रहा है, इसकी पूजा करवाएं सब ठीक हो जाएगा'  मगर वहां पर इसकी पूजा की कोई व्यवस्था नहीं है।और फिर डॉ. यासीन जिया और उनकी बीवी डॉ. रोजी जिया सरहद पार आ गए शनि की पूजा करवाने। 

यहां आकर वह दरबार साहिब, दुग्र्याणा तीर्थ और चर्च भी गए। इसके बाद दरबार साहिब के पास स्थित बड़े शनि मंदिर में भी माथा टेका। इस दौरान वह लोग अपने यहां खोले जाने वाले आश्रमों की जानकारी लेने के लिए पिंगलवाड़ा और यतीम खाना भी गए। 

इसके बाद ननकाना साहिब सिख यात्री जत्था के प्रधान स्वर्ण सिंह गिल के नेतृत्व में छेहर्टा स्थित इंडस्ट्रियल एरिया स्थित शिव मंदिर में इस दंपती ने शनि देव की पूजा की। यहां पं. राम परवेश मिश्रा ने पूरे विधि विधान के साथ पूजा करवाई और सिरोपा डाल कर सम्मानित भी किया। डॉ. रोजी ने बताया कि वापसी पर वह यहां से शनि देव की प्रतिमा भी ले जाएंगे और वहां पर दोनों मुल्कों और परिवार की बेहतरी के लिए पूजा किया करेंगे। 

ईसाई धर्म प्रचारक ने हिन्दू धर्म अपनाया

धर्म परिवर्तन को लेकर सुर्खियों में आए हरियाणा के अलेवा गांव में रविवार को फिर से ग्रामीणों की बैठक हुई। बैठक में आर्य समाज के प्रदेश उप प्रधान ओपी सिंह व आचार्य राजेंद्र सिंह ने शिरकत की। बैठक में धर्म परिवर्तन किए गए लोगों के लिए यज्ञ का आयोजन किया गया। इस दौरान फिर से हिदू धर्म में शामिल होने वाले लोगों ने ग्रामीणों को विश्वास दिलाया कि वे हिन्दू ही रहेगे। इस दौरान ईसाई धर्म प्रचारक सत्यवान ने दोबारा से हिंदू धर्म अपनाया।

गत दिनों गाव अलेवा उस समय सुर्खियों में आ गया था, जब तीन दर्जन से अधिक परिवारों ने गाव अलेवा निवासी सत्यवान के घर पर होने वाले ईसाई सत्संग में धर्म परिवर्तन कर लिया था, लेकिन एक दिन बाद ही धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों ने फिर से हिदू धर्म कबूल कर लिया। लोगों ने आरोप लगाया कि वह संदिग्ध लोगों के बहकावे में आ गए थे और उन्हीं के कहे पर धर्म परिवर्तन कर लिया था।

रविवार को आर्य समाज के प्रतिनिधियों व गण्यमान्य लोगों की मौजूदगी में गाव की वाल्मीकि चौपाल प्रांगण में यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ के दौरान फिर से हिदू धर्म में शामिल हुए लोगों ने आहुति डाली व भगवान महर्षि वाल्मीकि के चित्र के सामने खड़ा होकर ईसाई धर्म कबूल करने के लिए क्षमा याचना की। ईसाई धर्म प्रचारक अलेवा निवासी सत्यवान ने कहा कि वह सदा से हिदू थे और हिदू ही रहेंगे। 

पंचायत के दौरान वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने अज्ञानतावश जो हिंदू धर्म से ईसाई धर्म के प्रचार में हिस्सा लिया था, अब वे दोबारा से बिरादरी के लोगों के बीच हिंदू धर्म को अपनाकर स्वयं महर्षि वाल्मीकि के चित्र के समक्ष क्षमा याचना की। इस मौके पर सरपंच बलबीर चहल, युवा इनेलो नेता सुरजीत अलेवा, लाला घनश्याम आदि उपस्थित रहे।

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