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अमेरिका में दो इमामों को शक के आधार पर विमान से उतारा

अमेरिका में एक पायलट ने दो मुस्लिम धार्मिक नेताओं को विमान में बैठने को लेकर आपत्ति जताई और उन्‍हें विमान से बाहर उतार दिया। मेम्फिस यूनिवर्सिटी से जुड़े मसूद उर रहमान का आरोप है कि उन्‍हें और उनके साथ बैठे एक अन्‍य ईमाम को विमान से उतरने को कहा गया। मेम्फिस के रहने वाले रहमान का कहना है कि वो विमान में सवार होने के वक्‍त परंपरागत भारतीय पोशाक में थे जबकि उनके साथी मोहम्‍मद जगुलौल अरबी वेशभूषा में थे।

रहमान ने कहा कि शुक्रवार को सुबह 8:40 बजे विमान को रवाना होना था, इसके लिए उन्‍हें सुरक्षा जांच के बाद विमान में सवार होने के लिए हरी झंडी भी मिल गई। विमान अभी थोड़ी दूर चला ही था कि विमान के पायलट ने घोषणा की कि विमान को लौटना पड़ेगा। विमान लौटा तो ईमाम को विमान से उतरने को कहा गया। मुस्लिम धर्मगुरूओं को बोर्डिंग गेट पर जाने को कहा गया क्‍योंकि पायलट ने इन दो मु‍साफिरों को साथ लेकर विमान उड़ाने से इनकार कर दिया। वजह बताई गई कि इन दो मुसाफिरों की वजह से अन्‍य मुसाफिरों को दिक्‍कत हो रही है।

रहमान ने कहा, 'नस्‍ली भेदभाव के चलते हमारे साथ ऐसा बर्ताव किया गया। उन्‍हें हमारे धर्म की जानकारी नहीं है इसलिए उन्‍होंने हमारे साथ ऐसा किया। यदि वो इस्‍लाम का मतलब समझते तो ऐसा नहीं करते।'

घटना मेम्फिस इंटरनेशनल एयरपोर्ट की है। इन दोनों मुसाफिरों को डेल्‍टा कनेक्‍शन की फ्लाइट से नॉर्थ कैरोलाइना के शारलोट जाना था। अटलांटा में ट्रांसपोर्टेशन सिक्‍यूरिटी एडमिनिस्‍ट्रेशन के प्रवक्‍ता जॉन एलन ने इस घटना की पुष्टि की और कहा कि इस घटना से उनका कोई लेना देना नहीं है। डेल्‍टा एयर लाइन्‍स की प्रवक्‍ता ने बताया कि यह फ्लाइट अटलांटा स्थित अटलांटिक साउथ ईस्‍ट एयरलाइंस द्वारा संचालित होती है। अटलांटिक साउथ ईस्‍ट एयरलाइंस के प्रवक्‍ता जेरेक बीम ने कहा, 'हम सुरक्षा के मामले में किसी तरह की कोताही नहीं बरतते। मामले की जांच की जा रही है।' बीम ने हालांकि इस घटना के लिए माफी भी मांग ली है।

रहमान ने कहा कि डेल्‍टा एयरलाइंस के अधिकारियों ने पायलट से आधे घंटे से अधिक बात की लेकिन उसने मौलाना को विमान में बैठाने से इनकार कर दिया। बाद में इन लोगों को प्रतीक्षालय में ले जाया गया और दूसरे विमान से भेजा गया। इन मौलानाओं ने वाशिंगटन स्थित काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्‍लामिक रिलेशंस में अपनी शिकायत दर्ज करा दी है।

यूपी कांग्रेस कमेटी ने दिग्विजय सिंह पद से हटाए जाने की मांग की

कांग्रेस महासचिव उत्तर प्रदेश के प्रभारी दिग्विजय सिंह के बड़बोलेपन से पार्टी की वाराणसी इकाई में विरोध का स्वर फूट पड़ा है और उन्हें प्रदेश प्रभारी पद से हटाए जाने की मांग की गई है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता राजेश खत्री ने शनिवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि दिग्विजय सिंह पार्टी के जुझारू, सक्रिय, समर्पित कार्यकर्ताओं को अपने क्रियाकलापों से लगातार हतोत्साहित एवं अपमानित कर रहे हैं। बीते महीनों में दिग्विजय ने पार्टी नीतियों से हटकर अन्ना हजारे के आंदोलन, बाबा रामदेव, बटला हाउस मुठभेड़, हिंदू आतंकवाद और ओसामा बिन लादेन प्रकरणों पर भी सार्वजनिक बयान देकर पार्टी की छवि खराब की है।

खत्री ने कहा कि हम कार्यकर्तागण पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी का ध्यान इस ओर आकृष्ट करते हुए मांग करते है कि दिग्विजय सिंह को यूपी प्रभारी के कार्यभार से हटाया जाए अन्यथा मिशन 2012 की सफलता पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।

स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया कि दिग्विजय के प्रदेश प्रभारी पद पर रहते हुए ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्यों के चुनाव में पदों की बंदरबांट की गई।

Australian designer designed Swimwear featuring image of the Maa Lakshmi

ऑस्ट्रेलिया में हुए एक फैशन शो में मॉडलों की ड्रेस ने बवाल मचा दिया है। सिडनी में पांच मई को इस फैशन शो में डिजाइनर लीजा ब्लू ने जो कलेक्शन पेश किया उसमें हिंदू देवी-देवताओं के चित्रों को अश्लील तरीके से इस्तेमाल किया गया था।


A model parades swimwear featuring the Hindu goddess Maa Lakshmi by Lisa Blue during the Australian Fashion Week spring/summer collections show in Sydney on May 5, 2011. The annual festival showcases over 50 renowned and up-and-coming designers from across Australia.





Activists of Bharatiya Janata Party (BJP) hold photocopies of a model wearing swimwear featuring Hindu Goddess Lakshmi and the Australian flag, in Hyderabad on May 6, 2011 during a protest against Australian designer Lisa Blue who designed swimwear featuring the image of the Hindu Goddess Lakshmi Devi. The controversy began during Australian Fashion Week held in Sydney when models walked the ramp in the said swimwear which can be considered an insult to members of the Indian community.

अण्णा हजारे करेंगें पुणे के चैरिटी आयुक्त पर मानहानि का केस

जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे ने अपने गैर सरकारी संगठनहिन्द स्वराज ट्रस्टको पुणे के चैरिटी आयुक्त द्वारा भेजे गए नोटिस को लेकर एक मानहानि याचिका दायर करने का फैसला किया है।

सहायक चैरिटी आयुक्त के कार्यालय ने अण्णा को एक पत्र लिख कर यह कहते हुए माफी मांगी कि नोटिस गलती से भेजा गया। लेकिन, अन्ना ने मानहानि याचिका दाखिल करने का फैसला किया है।

उन्होंने अहमदनगर जिले स्थित रालेगन सिद्धी में संवाददाताओं से कहा ‘मेरे लिए यह रहस्य है कि यह नोटिस क्यों भेजा गया।’ अण्णाने कहा कि उन्होंने पूछताछ की और उन्हें बताया कि ट्रस्ट ने सभी मानदंडों का पालन किया है।

सामाजिक कार्यकर्ता और भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाने वाले अन्ना के वकील ने पुष्टि की कि संबद्ध अधिकारी के खिलाफ मानहानि याचिका दायर की जाएगी।

चैरिटी आयुक्त ने ट्रस्ट से पूछा था कि ऑडिट की हुई सभी रिपोर्ट पेश करने के आदेश का पालन न करने पर उसके खिलाफ मामला दायर क्यों नहीं किया जा सकता।

इससे पहले ‘नेशनल एंटी करप्शन पब्लिक पॉवर’ ने चैरिटी आयुक्त से संपर्क कर आरोप लगाया था कि ट्रस्ट ने 2008- 09 में पांच लाख रुपए उधार लिए थे जबकि उसकी सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) राशि 50 लाख रुपए तथा उसकी संपत्ति की कीमत करीब 23.49 लाख रुपए थी। ‘नेशनल एंटी करप्शन पब्लिक पॉवर’ के अनुसार ट्रस्ट ने आयुक्त को दी गई अपनी रिपोर्ट में यह ब्यौरा नहीं दिया था।

बसपा विधायक शेखर तिवारी को आजीवन कारावास

उत्तर प्रदेश में लखनऊ के सत्र न्यायालय ने हत्या के मामले में बहुजन समाज पार्टी के विधायक शेखर तिवारी सहित दस लोगों को आजीवन कारावास का दंड सुनाया है।

औरैया ज़िले में वर्ष 2008 में हुए इंजीनियर मनोज गुप्ता हत्याकांड मामले में आज अपर ज़िला जज वीरेन्द्र कुमार की पीठ ने मामले के आरोपी बसपा विधायक शेखर तिवारी के साथ-साथ अन्य अभियुक्तों विनय तिवारी, राम बाबू, योगेन्द्र दोहरे उर्फ भाटिया, मनोज अवस्थी, देवेन्द्र राजपूत, संतोष तिवारी, गजराज सिंह, पाल सिंह और डिबियापुर थाने के पूर्व प्रभारी होशियार सिंह को आजीवन कारावास तथा 68-68 हजार रुपए जुर्माने की सज़ा सुनाई।

शेखर तिवारी औरैया से बसपा के विधायक हैं।

तिवारी की पत्नी विभा तिवारी को साक्ष्य मिटाने के अपराध में ढाई साल की जेल और साढ़े चार हजार रुपए जुर्माने की सज़ा सुनाई गई है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार 23 दिसम्बर 2008 की रात औरैया के डिबियापुर थाना क्षेत्र में इंजीनियर मनोज गुप्ता की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। यह हत्या कथित रूप से मुख्यमंत्री मायावती के जन्मदिन के जश्न के लिए धन देने से मना करने पर की गई थी।

वारदात में मारे गए इंजीनियर की पत्नी शशि गुप्ता ने इस मामले में विधायक समेत 11 लोगों के विरुद्ध डिबियापुर में मुक़द्दमा दर्ज कराया था।

पाकिस्तान में नई कार्यवाही के लिए अमेरिका को पूरा अधिकार

वाइट हाउस ने घोषणा की है कि पाकिस्तान के भीतर नई कार्यवाही के लिए अमेरिका अपने अधिकार को सुरक्षित समझता है। हमारे संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार वाइट हाउस ने एक विज्ञप्ति जारी करके घोषणा की है कि उस आक्रमण के बाद जिसमें आतंकवादी संगठन का प्रमुख ओसामा बिन लादेन मारा गया, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा पाकिस्तान के भीतर नई कार्यवाही के लिए वाशिंगटन के अधिकार को सुरक्षित मानते हैं।

वाइट
हाउस के एक प्रवक्ता जे कर्नी से एक पत्रकार सम्मेलन में जब यह पूछा गया कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति पाकिस्तान के अंदर संदिग्ध व्यक्तियों के विरुद्ध फिर कार्यवाही के लिए तैयार हैं तो उन्होंने इसका सकारात्मक उत्तर दिया।

ये बातें ऐसी स्थिति में सामने आ रही हैं जब ओसामा बिन लादेन की मृत्यु के बाद अमेरिका में युद्ध विरोधियों ने बारम्बार घोषणा की है कि अब अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में बने रहने तथा युद्ध जारी रखने के लिए अमेरिका के पास कोई औचित्य नहीं बचा है।

इसी
प्रकार अमेरिका में युद्ध विरोधियों ने मांग की है कि बिन लादेन की मृत्यु और अलक़ायदा के अधिकांश नेताओं की गिरफ्तारी के बाद आतंकवाद के नाम जारी युद्ध समाप्त हो जायेगा परंतु आम जनमत की अपेक्षा के विपरीत अमेरिकी विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन ने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि वाशिंगटन बिन लादेन के मारे जाने के बावजूद अफ़ग़ानिस्तान में बना रहेगा।

ओसामा बिन लादेन तो 2001 में ही मर चुका था

शिकागो में एक रेडियो उद्घोषक का कहना है कि ओसामा बिन लादेन दस वर्ष पहले ही मर चुका था।

इस अमरीकी लेखक और उद्घोषक स्टीफ़न लिंडमैन ने बुधवार को प्रेस टीवी से एक साक्षात्कार में कहा कि अलक़ाएदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन की मृत्यु के बारे में अमरीकी संचार माध्यमों की रिपोर्टें वास्तविकता पर आधारित नहीं हैं क्योंकि वह वर्ष 2001 में मर चुका था।

लिंडमैंन
ने कहा कि बिन लादेन की मौत की कहानी गढ़ी हुई है और वाइट हाउस के अधिकारियों के लिए प्रचारिक हथकंडा है।

"ओसामा जी" कई वर्षों से पाक में रह रहे थे - दिग्विजय सिंह

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने अब दुर्दांत आतंकी ओसामा बिन लादेन को 'ओसामा जी' कह कर संबोधित किया है। वह आज लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेस को संबोधित कर रहा था। इसी दौरान उसने कहा कि चाहे कितना भी बड़ा आतंकवादी हो, मरने के बाद उसे उसके धर्मानुसार ही दफनाया जाता है।

दिग्विजय बोला, 'ओसामा जी कई वर्षों से पाक में रह रहे थे पाक आर्मी ने क्‍यों नहीं कुछ किया? अमेरिका ने मारने के बाद समुद्र में फेंक कर अच्छा नहीं किया। अपने देश में भी मुंबई हमलों में मारे गए लोगों को उनके धर्म के अनुसार दफन किया गया।'

दिग्विजय ने इस बात को सिरे से खारिज किया कि वह पार्टी लाइन से अलग जाकर कुछ बोल रहे हैं। उसने यह भी कहा कि पार्टी हाईकमान की तरफ से उन्‍हें नियंत्रण रखने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है।

उसने इस बात से भी इंकार किया कि, लादेन के बारे में उसके द्वारा दिए गए बयान से पार्टी हाईकमान नाराज है। उसने कहा, 'मैंने ओसामा के दफन करने के तरीके पर सवाल उठाया है।' लादेन को सोमवार को अमेरिकी कमांडो ने मार कर समुद्र में दफना दिया था।

विपक्षी दलों का मानना है कि कांग्रेस की निगाह उत्‍तर प्रदेश में 2012 में होने वाले विधानसभा चुनावों पर है। इसलिए मुस्लिम वोटों को ध्यान में रखकर ऐसे बयान दिए जा रहे हैं।

गाय की जुगाली से जलेंगे चूल्हे, दौड़ेंगी गाड़ियां

इंदौर जिले के गवर्नमेंट वेटरनेरी डॉक्टर महाविद्यालय से पीजी स्तर पर अनुसंधान कर रहे जुल्फकार-उल-हक ने गाय और भैस की जुगाली के दौरान निकलने वाली मीथेन गैस को इकट्ठा करके इसे तरल ईंधन में बदलने की परियोजना का खाका तैयार किया है।

उन्होंने
बताया है कि जिस डेयरी फार्म की परिकल्पना को आकार देने की कोशिश में जुटा हूं, उसमें मवेशियों को आहार दिए जाने के बाद उनके मुंह पर विशेष नलियां लगा दी जाएंगी। हक ने बताया कि ये नलियां पशुओं की जुगाली और डकार के दौरान निकलने वाली मीथेन गैस को जमा करेगी, जिसे एक चैम्बर में पहुंचाकर तरल ईंधन में बदल दिया जाएगा।


मीथेन उन ग्रीनहाउस गैसों में शामिल है, जिनकी ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ाने में अहम भूमिका मानी जाती है। हक ने कहा, मीथेन को ईंधन के रूप में वाहनों और खाना पकाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। चूंकि, देश में मवेशियों की आबादी दुनिया के दूसरे मुल्कों के मुकाबले बेहद ज्यादा है।

लिहाजा
, इस तरह की परियोजना से ग्लोबल वॉर्मिंग पर नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। हक ने बताया कि एक अनुमान है कि जुगाली करने वाला मवेशी आमतौर पर दिन भर में 250 से 500 लीटर मीथेन वातावरण में छोड़ सकता है। लिहाजा इस बारे में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय खासा चिंतित है।


अब पाकिस्तान ने अमेरिका को धमकी दी

पाकिस्तान में घुस कर लादेन को मार गिराने वाले अमेरिका को अब पाकिस्तान चेतावनी दे रहा है। पाकिस्तान ने अमेरिका को दोबारा ऐसा करने की चेतावनी दी है। पाकिस्तान ने अमेरिका के ऑपरेशन को 'अनधिकृत और एकतरफा ऐक्शन' बताते हुए कहा 'पाकिस्तान सरकार पक्के तौर पर यह बता रही है कि भविष्य में अमेरिका समेत कोई भी देश ऐसी कार्रवाई करने की कोशिश करे। ऐसे काम सहयोग को कमजोर करते हैं और इससे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर खतरा पैदा होता है।'

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि सरकार को अमेरिकी ऑपरेशन की जानकारी नहीं थी। अमेरिकी हेलिकॉप्टर पाकिस्तानी रेडार की नजरों से बचकर पाकिस्तानी एयरस्पेस में आए थे। सूचना मिलने पर पाकिस्तानी जेटों ने भी उड़ान भरी थी। अमेरिका ने जिस तरह अभियान चलाया वह चिंताजनक है।

दूसरी तरफ अमेरिका ने पाकिस्तान के इस दावे को मानने से इनकार कर दिया है कि वह अपनी धरती पर ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी से अंजान था।

अमेरिका के डिप्टी नैशनल सिक्युरिटी अडवाइजर जॉन ब्रेनन ने मंगलवार को कहा कि लादेन जिस देश में लंबे समय से छुपा था, वहां उसका कोई सपोर्ट सिस्टम न हो, यह बात कुछ हजम नहीं होती। मैं यह अटकल नहीं लगाना चाहता कि सपोर्ट किस तरह का हो सकता है, लेकिन अमेरिका मानता है कि वह पाकिस्तान में छह साल से ज्यादा समय से रह रहा था। लादेन का पाकिस्तान की राजधानी के इतने नजदीक पाया जाना सवाल खड़े करता है। अमेरिका के कई सीनियर अधिकारी पाकिस्तानी अधिकारियों के संपर्क में हैं। लेकिन वे भी लादेन की मौजूदगी के बारे में इतनी ही हैरत में हैं, जितने कि हम थे।

इस बीच सीआईए चीफ लियोन पैनेटा ने कहा है कि अमेरिकी अधिकारियों को शक था कि पाकिस्तानी साथ काम करने से ऑपरेशन को लीक कर देते।

दिग्विजय सिंह ने लादेन के शव को समुद्र में दफनाने की निंदा की

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अल कायदा के नेता ओसामा बिन लादेन के शव को समुद्र में दफनाने की निंदा की है। और कहा है कि किसी भी शव को समुद्र में डालना, मुस्लिम धर्म के खिलाफ है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि कोई कितना भी बड़ा अपराधी क्यों हो, लेकिन उसके अंतिम समय में उसके धार्मिक रिवाजों का सम्मान करना चाहिए।

सिंह ने इस बात पर भी आश्चर्य व्यक्त किया कि ओसामा के पाकिस्तान में रहने की वहां की सरकार को कोई जानकारी नहीं थी।

अमेरिका ने, इस डर से कि ओसामा को दफनाए जाने के बाद वहां स्मारक बनाया जा सकता है, उसकी लाश को सोमवार को समुद्र में दफना दिया था। हालांकि अमेरिका ने दावा किया था कि शव को मुस्लिम धर्म के पूरे रीति रिवाजों से दफनाया गया है, लेकिन कई धर्मगुरुओं ने इसकी आलोचना की है।

अल अजहर के इमाम शेख अहमद अल तैय्यब, जो सुन्नी मुस्लिम समुदाय के सबसे बड़े नेता हैं, के सलाहकार महमूद अजब के अनुसार किसी भी शव को समुद्र में डालना शव का अपमान है और मुस्लिम धर्म इसकी इजाजत नहीं देता। अजब ने कहा कि कोई भी व्यक्ति किस तरह मारा गया, यह अलग विषय है, लेकिन उसकी अंतिम क्रिया के समय उसकी धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। इस्लाम में शव को केवल दफनाने की इजाजत है।

काउंसिल ऑफ नार्थ अमेरिका के मुजम्मिल एच हक्कानी ने भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति की समुद्री यात्रा के दौरान मौत हो जाए, तो लाश को समुद्र में रीति रिवाज के साथ डाला जा सकता है, लेकिन ओसामा बिन लादेन की लाश को समुद्र में दफनाना गलत है।

बीजेपी ने कहा, अफजल गुरु पर सरकार ले निर्णय

इसी बीच बीजेपी ने कहा है कि अमेरिका ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में घुसकर 9/11 के हमले की सजा दे सकता है, लेकिन केंद्र सरकार अभी तक संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरु, जो हमारी ही गिरफ्त में है, को ही सजा नहीं दे सकी है। बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि मुंबई में हुए हमले के आरोपी भी पाकिस्तान में पनाह पाए हैं और भारत सरकार को उन्हें भारत लाने के नए सिरे से प्रयास करना चाहिए।

जन-गण-मन का कड़वा सच


यह वो गीत जिसे हम गाते है ...

Jana-gana-mana-adhinayaka, jaya he
Bharata-bhagya-vidhata.
Punjab-Sindh-Gujarat-Maratha
Dravida-Utkala-Banga
Vindhya-Himachala-Yamuna-Ganga
Uchchala-Jaladhi-taranga.
Tava shubha name jage,
Tava shubha asisa mage,
Gahe tava jaya gatha,
Jana-gana-mangala-dayaka jaya he
Bharata-bhagya-vidhata.
Jaya he, jaya he, jaya he,

Jaya jaya jaya, jaya he!

और यह है बंग्ला मे मूल गीत

জনগণমন-অধিনায়ক জয় হে ভারতভাগ্যবিধাতা!

পঞ্জাব সিন্ধু গুজরাট মরাঠা দ্রাবিড় উৎকল বঙ্গ

বিন্ধ্য হিমাচল যমুনা গঙ্গা উচ্ছলজলধিতরঙ্গ

তব শুভ নামে জাগে, তব শুভ আশিষ মাগে,

গাহে তব জয়গাথা।

জনগণমঙ্গলদায়ক জয় হে ভারতভাগ্যবিধাতা!

জয় হে, জয় হে, জয় হে, জয় জয় জয় জয় হে।।



অহরহ তব আহ্বান প্রচারিত, শুনি তব উদার বাণী

হিন্দু বৌদ্ধ শিখ জৈন পারসিক মুসলমান খৃস্টানী

পূরব পশ্চিম আসে তব সিংহাসন-পাশে

প্রেমহার হয় গাঁথা।

জনগণ-ঐক্য-বিধায়ক জয় হে ভারতভাগ্যবিধাতা!

জয় হে, জয় হে, জয় হে, জয় জয় জয় জয় হে।।



পতন-অভ্যুদয়-বন্ধুর পন্থা, যুগ যুগ ধাবিত যাত্রী।

হে চিরসারথি, তব রথচক্রে মুখরিত পথ দিনরাত্রি।

দারুণ বিপ্লব-মাঝে তব শঙ্খধ্বনি বাজে

সঙ্কটদুঃখত্রাতা।

জনগণপথপরিচায়ক জয় হে ভারতভাগ্যবিধাতা!

জয় হে, জয় হে, জয় হে, জয় জয় জয় জয় হে।।



ঘোরতিমিরঘন নিবিড় নিশীথে পীড়িত মূর্ছিত দেশে

জাগ্রত ছিল তব অবিচল মঙ্গল নতনয়নে অনিমেষে।

দুঃস্বপ্নে আতঙ্কে রক্ষা করিলে অঙ্কে

স্নেহময়ী তুমি মাতা।

জনগণদুঃখত্রায়ক জয় হে ভারতভাগ্যবিধাতা!

জয় হে, জয় হে, জয় হে, জয় জয় জয় জয় হে।।



রাত্রি প্রভাতিল, উদিল রবিচ্ছবি পূর্ব-উদয়গিরিভালে –

গাহে বিহঙ্গম, পূণ্য সমীরণ নবজীবনরস ঢালে।

তব করুণারুণরাগে নিদ্রিত ভারত জাগে

তব চরণে নত মাথা।

জয় জয় জয় হে জয় রাজেশ্বর ভারতভাগ্যবিধাতা!
জয় হে, জয় হে, জয় হে, জয় জয় জয় জয় হে।।

और यह है सच --

अंग्रेजों ने भारत के लोगों को शांत करने के लिए जो अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह से भरे हुए थे। अंग्रेजी राजा को भारत में आमंत्रित किया। जार्ज पंचम भारत में आया सन 1911 में। और जब जार्ज पंचम भारत में आया तो इन अंग्रेज अधिकारियों ने जार्ज पंचम के स्वागत के लिए एक गीत लिखवाया। और उस गीत का नाम है -जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्यविधाता


क्योंकि इस गीत के सारे के सारे शब्द अंग्रेजी राजा जार्ज पंचम की स्तुति का गान हैं। जन गण मन अधिनायक, अधिनायक माने सुपरहीरो। भारत की जनता है, भारत के जो लोग हैं उनके तुम सुपरहीरो, तुम्हारी जय हो। माने कौन? - जार्ज पंचम। इस गीत को जिन्होंने लिखा वो थे श्री रवींद्रनाथ टैगोर। उन्होने एक चिट्ठी में उन्होंने अपने बहनोई को लिखा है जो थे सुरेंद्रनाथ बनर्जी और लंदन में रहते थे। आई सी एस आफिसर थे। उनको उन्होंने लिखा है कि ये गीत मेरे उपर अंग्रेज अधिकारियों ने दबाव डलवाकर लिखवाया है, वंदे मातरम् के पैरेलल। क्योंकि उस समय भारत में हर जगह उद्घोष था वंदे मातरम् का।

रवींद्रनाथ टैंगोर के परिवार के ज्यादा लोगों ने अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कम्पनी में काम किया। उनके बड़े भाई जो अवनींद्रनाथ टैगोर थे वो ईस्ट इंडिया कम्पनी के बहुत सालों तक कलकत्ता डिविजन के डायरेक्टर रहे। काफी पैसा उनके परिवार का ईस्ट इंडिया कम्पनी में लगा था। तो अंग्रेजों से बहुत सहानुभूति थी- रवींद्रनाथ टैंगोर की। ये सहानुभूति खतम हुई 1919 में जब जलियांवाला बाग हत्या कांड हुआ। और गांधी जी ने रवींद्रनाथ टैगोर को गाली देते हुए कहा कि अभी भी तुम्हारी आंखों से अंग्रेजियत का पर्दा नहीं उतरता तो कब उतरेगा? तुम अंग्रेजों के इतने चाटुकार कैसे हो गए? तुम इनके इतने समर्थक कैसे हो गए? आप जानते हैं


1911 में ये गान जब लिख दिया तो उन्होंने अपने बहनोई को कहा कि ये गान तो मैंने अंग्रेजों के कहने पर लिखा है। शब्दों का अर्थ अच्छा नहीं है। इसलिए कृपया इसको न गाया जाए तो अच्छा है। लेकिन अंत में एक लाइन लिख दिया कि ये चिट्ठी किसी को न दिखायें क्योंकि मैं सिर्फ आप तक ये सीमित रखना चाहता हूं। कभी मेरी मृत्यु हो जाए तो जरुर सबको बताएं। 1941 में रवींद्रनाथ टैगोर की मृत्यु हो गई। तब बनर्जी साहब की कृपा से ये चिट्ठी लोगों के सामने आई। और उन्होंने पूरे देश को कहा कि जन गण मन को न गाया जाय।

उसी बीच में कांग्रेस पार्टी थोड़ी उभर चुकी थी और एक बड़ा संगठन बन चुकी थी। कांग्रेस में जबतक लोकमान्य तिलक थे , लाला लाजपत राय थे, विपिन चंद्र पाल थे तब तक वंदे मातरम् ही गाया गया। बाद में आप जानते हैं कि लोकमान्य तिलक का कांग्रेस के नेताओं से मतभेद हुआ। और कांग्रेस के नेताओं में उनका सबसे ज्यादा मतभेद हुआ पंडित मोतीलाल नेहरु के साथ। क्योंकि मोतीलाल नेहरुजी की योजना ये थी कि अंग्रेजों के साथ कोई संयोजित सरकार बने -कोलीसन गवर्मेंट। और उसके लिए वो बार-बार कहते थे। और लोकमान्य तिलक कहते थे कि अंग्रेजों के साथ मिलकर सरकार बनाना तो भारत के लोगों को धोखा देना है। तो इस मुद्दे पर मतभेद था। तो ये कांग्रेस से निकल गये। तो फिर इन्होंने एक गरम दल बनाया। तो कांग्रेस के दो हिस्से हो गए।

1919 के पहले रवींद्रनाथ टैगोर के लिखे गये लेख सब अंग्रेजी सरकार के समर्थन में हैं। फिर 1919 के बाद उन्होंने जो लेख लिखे हैं वो थोड़े-थोड़े उनके विरोध में गये। तो जन गण मन ऐसा गान है जो उन्होंने लिख दिया जार्ज पंचम के लिए। और हम हिन्दुस्तानियों ने पंडित नेहरु के कहने पर उसको राष्ट्रगान बना लिया। जबकि 318 सांसद संसदीय समिति जो थी न सॉरी कंस्टिट्यूएंट एसेम्बली के 318 लोग वो कहते थे कि वंदे मातरम् होना चाहिए। अकेले नेहरुजी कहते थे जन गण मन होना चाहिए। और नेहरुजी माने वीटो, उस जमाने का। आप में बहुत सारे बुजुर्ग जिन्होंने नेहरुजी को देखा है, यहां हैं। नेहरुजी माने वीटो। नेहरुजी ने जो कहा वही कानून। नेहरुजी ने कहा वही आदेश। नेहरुजी ने कहा वही कैबिनेट का फैसला। और जो नेहरुजी ये धमकी दें कि मैं सरकार छोड़ रहा हूं तो पूरी कांग्रेस हिलना शुरु हो जाती। उस जमाने में इंडिया इज नेहरु, नेहरु इज इंडिया ये नारा। बाद में इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा ये नारा। तो इस तरह का वो था जैसे नीरो के समय में जैसे क्लौडियस के समय में वैसे ये। तो नेहरुजी का कहना माने अंतिम वाक्य तो कांग्रेस ने स्वीकार कर लिया कि भई यही ठीक है।

फिर इन्होंने तब तक इसको लटकाकर रखा जब तक गांधीजी की हत्या नहीं हुई। गांधीजी की हत्या के बाद इसको पिटारे में से निकाल लिया और जन गण मन को राष्ट्रगान घोषित किया। अब विद्रोह की स्थिति ना आये पूरे देश में, तो वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत का दर्जा दे दिया। कि भई ये भी चले और ये भी चले, वो जो क्या कहना दोनों को संतोष रहे। तो ये है इतिहास।


अब हम तय करें कि क्या गाना है

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