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उमा भारती ने 560 करोड़ रुपए की नमामि‍ गंगे परि‍योजनाओं का शि‍लान्‍यास कि‍या


केंद्रीय जल संसाधन, नदी वि‍कास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने कानपुर में गंगा बैराज पर नमामि‍ गंगे कार्यक्रम के तहत वि‍भि‍न्‍न परि‍योजनाओं का शि‍लान्‍यास कि‍या। इनमें 63 करोड़ रुपए की लागत से सीसामऊ नाले की अवरोधन और दि‍शा परि‍वर्तन योजना, नेटवर्किंग के लि‍ए 397 करोड़ रुपए की नेटवर्किंग योजना, बि‍ठूर में नदी तट के वि‍कास के लि‍ए 100 करोड़ रुपए की योजनाएं और वहां 14 घाटों और 5 शवदाह गृहों का निर्माण शामि‍ल है। इस अवसर पर उन्‍होंने कहा कि‍ उनका मंत्रालय  हाइब्रिड एन्यूटी आधारित पी पी पी मॉडल के माध्यम से शोधित जल के पुनः इस्तेमाल के लिए बाज़ार विकसित करेगा जिससे एसटीपी और ईटीपी से निकलने वाला जल वापस नदी में न जाये। मंत्री महोदया ने कहा कि‍ इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों के साथ समझौता ज्ञापन भी किये जा रहे हैं| उन्‍होंने कहा,‍ ‘’हम गंगा जी के संरक्षण के लि‍ए निर्धारि‍त प्रक्रि‍या से गुजरेंगे। कि‍सी भी जल्‍दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेंगे जि‍ससे कि‍ आबंटि‍त धनराशि‍ व्‍यर्थ न जाए।‘’


कार्यक्रम में अपने अध्यक्षीय संबोधन में कानपुर से लोकसभा सदस्‍य डॉ मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि गंगा की आज जो दुर्दशा हो रही है उसके लिए हम सभी जिम्मेदार हैं। हमें गंगा के प्रति अपने स्वभाव में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है| उन्होंने सुझाव दि‍या कि‍ गंगा का इतिहास बताने वाले एक दृश्‍य और श्रव्‍य कार्यक्रम के माध्यम से लोगों में इस अभि‍यान के प्रति‍ जागरूकता फैलाई जा सकती है|  


उल्‍लेखनीय है कि‍ जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा सात राज्यों - उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और हरियाणा में नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाली गतिविधियों का क्रियान्वयन प्राथमिकता के तौर पर किया जा रहा है। इसी के तहत 7 जुलाई 2016 को सातों राज्यों में 231 परियोजनाओं का एक ही समय पर अलग-अलग स्थानों पर एक साथ शुभारंभ किया गया । इसमें विभिन्न घाटों के नवीनीकरण, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का पुनर्वास एवं विकास, वृक्षारोपण व जैव विविधता संरक्षण की परियोजनाएं शामि‍ल हैं। कानपुर में प्रवेश स्तर की गतिविधियों के अंतर्गत 11 घाटों और 2 शवदाह गृहों के निर्माण का काम शुरु कि‍या गया।  

इस अवसर पर प्रख्यात नृत्यांगना आरुषी और उनकी टीम द्वारा गंगा जी पर एक नृत्य नाटिका भी प्रस्‍तुत की गई।  

दुनिया में भारतीय सैनिकों की आत्‍मशक्ति की बराबरी नहीं: उमा भारती


केन्‍द्रीय जल संसाधन एवं नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने कहा है कि देश के पूर्वोत्‍तर तथा कश्‍मीर में अशांति और आंतरिक सुरक्षा का सामना करते हुए हमारे पुलिस बल, अर्द्धसैनिक बल के जवान और सैन्‍यकर्मी सुविधा उपलब्‍ध न होने के बावजूद हमेशा देश की सुरक्षा के प्रति समर्पित रहे हैं। ‘ उनकी आत्‍मशक्ति का दुनिया में कोई बराबरी नहीं है।’ वे आज नागपुर में सीआरपीएफ कर्मियों द्वारा हिंगना रोड स्थित केन्‍द्रीय सुरक्षित पुलिस बल(सीआरपीएफ) समूह केन्‍द्र में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम में बोल रही थीं।

सुश्री भारती रक्षा बंधन के अवसर पर सीआरपीएफ जवानों, अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्‍यों का स्‍वागत किया और जवानों तथा अधिकारियों के माथे पर तिलक लगाकर रक्षाबंधन समारोह में भाग लिया।

उन्‍होंने कहा ‘राष्‍ट्र की सुरक्षा या तो दुश्‍मनों को मार कर सुनिश्चित की जा सकती है या फिर अपनी बलिदानी देकर। हमारे अर्द्धसैनक बलों और अन्‍य सुरक्षा बलों के जवान पूर्ण देशभक्ति से प्रेरित और पूर्ण समर्पण के साथ लगातार काम कर रहे हैं। वे हमेशा तैयार रहते हैं। सुरक्षा कर्मियों के लिए महिला सम्‍मान सबसे अहम है।’ उन्‍होंने कहा कि हिमालय में सीमा पर शहादत प्राप्‍त करने वाले सैनिक और योगी दोनों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंत्री महोदया ने कहा कि पुलिस व सेना की वर्दी धारण करने वाली महिलाएं इसके साथ अच्‍छी पत्‍नी, माता और बहन की उत्‍तरदायित्‍व का भी निर्वाह करती हैं। इस अवसर पर सुश्री भारती ने सीआरपीएफ परिसर में पौधारोपण भी किया। 

केन्‍द्रीय सुरक्षित पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिरीक्षक श्री सुनील सिंह और उपनिरीक्षक श्री अखिलेश प्रताप सिंह तथा सीआरपीएफ अधिकारियों एवं जवानों के परिवारों के सदस्‍यों ने भारी संख्‍या में इस कार्यक्रम में भाग लिया। 

रेलवे अधिकारियों को मिलेगी एमबीए डिग्री, यूनिवर्सिटी से हुआ करार


भारतीय रेलवे ने रेलवे के परिवीक्षाधीन अधिकारियों को रेलवे के विशिष्‍ट क्षेत्रों में एमबीए डिग्री प्रदान करने के लिए महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, वडोदरा के साथ गठबंधन किया 

रेल मंत्रालय ने अपने कर्मचारियों को प्रोफेशनल दृष्टि से और कार्य सक्षम बनाने के उद्देश्‍य से एक महत्‍वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने अधिकारियों को एमबीए डिग्री हासिल करने के लिए भेजने का निर्णय लिया है। तदनुसार, रेलवे अधिकारियों को प्रशिक्षण देने वाले शीर्ष भारतीय रेलवे प्रशिक्षण संस्‍थान यानी भारतीय रेलवे की राष्ट्रीय अकादमी (नायर), वडोदरा ने भारतीय रेल लेखा सेवा (आईआरएएस), भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा (आईआरपीएस) और भारतीय रेलवे स्टोर सेवा (आईआरएसएस) से संबंधित रेलवे के परिवीक्षाधीन अधिकारियों को रेलवे के विशिष्‍ट क्षेत्रों में एमबीए डिग्री प्रदान करने के लिए महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, वडोदरा के साथ एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किए हैं। रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु की गरिमामय उपस्थिति में इसी सप्‍ताह इस एमओयू पर हस्‍ताक्षर किए गए। इसे रेलवे के विशिष्‍ट क्षेत्रों में रेलवे के परिवीक्षाधीन अधिकारियों की प्रोफेशनल प्रबंधन शिक्षा को बेहतर करने की दृष्टि से एक महत्‍वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह कार्यक्रम अगस्‍त, 2016 से ही शुरू हो जाएगा।

भारतीय रेलवे की राष्ट्रीय अकादमी में फिलहाल प्रशिक्षण पा रहे रेलवे के परिवीक्षाधीन अधिकारीगण अध्‍ययन करके संबंधित क्षेत्रों जैसे कि वित्‍त, मानव संसाधन प्रबंधन, उत्‍पादन व परिचालन प्रबंधन एवं विपणन प्रबंधन में विशेषज्ञता के साथ विश्‍वविद्यालय से एमबीए डिग्री प्राप्‍त करेंगे।

इस औपचारिक गठबंधन से महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय को अपने स्‍तर पर रेलवे अधिकारियों के साथ-साथ एमबीए के लिए विद्यार्थियों के चयन में मदद मिलेगी। इन विद्यार्थियों को भी संबंधित विषयों में एमबीए डिग्री प्रदान की जाएगी। यही नहीं, रेलवे से जुड़े बुनियादी ढांचागत निर्माण ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं, मेट्रो एवं पोर्ट रेलवे की जरूरतें भी इससे पूरी हो सकेंगी। वे यूपीएससी द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षा में शामिल होकर रेलवे में नौकरी की तलाश भी कर सकते हैं।

औषधीय पादप बोर्ड जयपुर औषधीय पौधों का राष्‍ट्रीय अभियान शुरू करेगा


आयुष मंत्रालय के अधीन राष्‍ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) 20-21 अगस्‍त,2016 को जयपुर में जड़ी-बूटियों पर एक राष्‍ट्रीय अभियान की शुरुआत करेगा। यह अभियान जयपुर के दुर्गापुर में कृषि प्रबंधन राज्‍य संस्‍थान में आरंभ किया जाएगा।

अभियान में जड़ी-बूटियों की खेती में लगभग 500 किसान हिस्‍सा लेंगे। इस अवसर पर चर्चा-बैठक और गोष्‍ठी का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें औषधीय पौधों से संबंधित किसान, विशेषज्ञ, व्‍यापारी, उद्योग और अन्‍य हितधारक शामिल होंगे। इस आयोजन से अधिकतर हितधारकों को लाभ होगा।

वर्ष 2000 में अपनी स्‍थापना के समय से ही एनएमपीबी देश में औषधीय पौधों के विकास के लिए काम कर रहा है। इस समय एनएमपीबी औषधीय पौधों के संरक्षण, खेती, अनुसंधान, विपणन और गुणवत्‍ता का संबर्द्धन कर रहा है।

ये गतिविधियां औषधीय पौधों की खेती से संबंधित राष्‍ट्रीय आयुष अभियान की केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना के अंतर्गत ज‍ड़ी-बूटियों के विकास, संरक्षण और उनके सतत प्रबंधन के लिए चलाई जा रही हैं।

स्‍वतंत्रता सैनिक सम्‍मान पेंशन योजना के अंतर्गत पेंशन में वृद्धि की गई


केंद्रीय स्‍वतंत्रता सेनानी पेंशनधारियों और उनके योग्‍य आश्रितों की मौजूदा पेंशन योजना को पुनर्गठित किया गया है। इसका ब्‍योरा इस प्रकार है-

क्रम संख्‍या
स्‍वतंत्रता सेनानी वर्ग
मौजूदा पेंशन की रकम   (प्रति माह)
बढ़ी हुई पेंशन की रकम (प्रति माह)
1.
पूर्व-अंडमान राजनीतिक बंदी/जीवनसाथी
Rs.24,775/-
Rs.30,000/-
2.
ब्रिटिश राज्‍य  के बाहर पीडि़त स्‍वतंत्रता सेनानी/जीवनसाथी
Rs.23,085/-
Rs.28,000/-
3.
आईएनए सहित अन्‍य स्‍वतंत्रता सेनानी/जीवनसाथी
Rs.21,395/-
Rs.26,000/-
4.
 आश्रित माता-पिता/ योग्‍य पुत्रियां (एक समय में अधिकतम तीन पुत्रियां)
Rs.3,380/- (आश्रित माता-पिता)
Rs.5,070/- (पुत्रियां)
स्‍वतंत्रता सेनानी के लिए स्‍वीकृत कुल रकम का 50 प्रतिशत,जो .13,000रुपये से लेकर 15,000रुपये के बीच होगा।
  
संशोधित दर 15 अगस्‍त, 2016 से प्रभावी होगी।
औद्योगिक कामगारों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक पर आधारित मौजूदा महंगाई राहत प्रणाली वार्षिक आधार पर स्‍वतंत्रता सेनानी पेंशनधारियों पर भी लागू होती रही है, जिसे अब हटा लिया गया है। उसके स्‍थान पर वर्ष में दो बार केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों पर लागू होने वाली महंगाई भत्‍ता प्रणाली को प्रभावी बनाया गया है।

इस निर्णय से स्‍वतंत्रता सैनिक सम्‍मान पेंशन योजना, 1980 के तहत सभी स्‍वतंत्रता सेनानियों,जीवनसाथियों तथा मृत स्‍वतंत्रता सेनानियों के माता-पिता/ योग्‍य पुत्री पेंशनधारियों को लाभ होगा। अब तक योजना के तहत कुल 1,71,605 स्‍वतंत्रता सेनानियों और उनके योग्‍य आश्रितों को पेंशन स्‍वीकृत की गई है। इस समय योजना के दायरे में 37,981 स्‍वतंत्रता सेनानी और उनके योग्‍य आश्रित पेंशनधारी आते हैं। इनमें से 11,690 खुद स्‍वतंत्रता सेनानी हैं। इसके अलावा 24,792 जीवनसाथी (विधवा/विधुर) और 1499 पु‍त्री पेंशनधारी हैं।

1969 में भारत सरकार ने पोर्ट ब्‍लेयर की सेलुलर जेल में बंद स्‍वतंत्रता सेनानियों के सम्‍मान में ‘पूर्व-अंडमान राजनीतिक बंदी पेंशन योजना’ शुरू की थी। वर्ष 1972 में हमारी स्‍वतंत्रता की 25वीं वर्षगांठ की स्‍मृति में स्‍वतंत्रता सेनानियों की पेंशन के लिए एक नियमित योजना शुरू की गई थी। इसके बाद 1 अगस्‍त, 1980 से प्रभावी होने वाली ‘स्‍वतंत्रता सैनिक सम्‍मान पेंशन योजना’ नामक एक उदार योजना चलाई जा रही है। योजना के तहत स्‍वतंत्रता सेनानियों के अलावा मृत स्‍वतंत्रता सेना‍नियों के जीवनसाथी (विधवा/विधुर), अविवाहित और बेरोजगार पुत्रियों (एक समय में अधिकतम तीन) तथा माता-पिता पेंशन के लिए योग्‍य हैं।

कांग्रेसी दिग्विजय सिंह ने कश्मीर को बताया ‘भारत के कब्जे वाला कश्मीर’


जिहादी आतंकवादी ओसामा बिन लादेनको ‘आेसामाजी’ कहनेवाले (मौलाना) दिग्विजय सिंह से आैर क्या अपेक्षा कर सकते है ? 

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए, जम्मू- कश्मीर को ‘भारत अधिकृत कश्मीर’ कह डाला।

मीडिया के प्रश्न किए जाने पर कांग्रेस नेता तुरंत अपने बयान में सुधार करते हुए सफाई देने लगा और फिर उसने कहा कि, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, पंतप्रधान मोदी को भारत में रह रहें कश्मीरियों की बजाय पाक अधिकृत कश्मीर और बलूचिस्तान की ज्यादा चिंता है।

उसने कहा, ‘कश्मीर में हिंसा के परिस्थिति के बाद भी सरकार कश्मीरियों से बात करने को तैयार नहीं है। यह मामला विश्वास कायम करके ही सुलझाया जा सकता है। फिर चाहे ‘पाक अधिकृत कश्मीर हो या भारत अधिकृत कश्मीर’ हमें बातचीत के माध्यम से विश्वास कायम कर इस समस्या को सुलझाना होगा।’

मीडिया के प्रश्नों पर सफाई देते हुए उसने कहा, ‘मेरा मतलब भारत प्रशासित से था। हमें वहां ( जम्मू-कश्मीर) की जनता का दिल जीतना चाहिए। उन्हें विश्वास में लेना चाहिए। पाकिस्तान कश्मीर में घुसपैठ करता है, वो वहां आतंकी भेजता है। इसलिए उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इस क्षेत्र में मेरा पूरा समर्थन अफ्स्पां के साथ है।’

रेलकर्मी साक्षी मलिक की ओलंपिक में जीत पर मिलेगा 50 लाख रुपये का पुरस्कार

भारतीय रेल कर्मी साक्षी मलिक ने रियो ओलंपिक 2016 में भारत का पदक हासिल करने का लंबा इंतजार समाप्‍त किया 

साक्षी मलिक ने 58 किलोग्राम वर्ग की महिला फ्रीस्‍टाइल कुश्‍ती में ओलंपिक का कांस्‍य पदक जीता
 
रेलवे ने खेलों को प्रोत्‍साहन देने की अपनी प्रतिबद्धता के जरिये देश को फिर से गौरवान्वित किया
 
तीनों रेल मंत्रियों ने साक्षी मलिक को उनकी उपलब्‍धता पर बधाई दी
 
साक्षी मलिक को निर्धारित 50 लाख रुपये नकद पुरस्‍कार और राजपत्रित अधिकारी पद पर पदोन्‍नति दी जाएगी
 
ओलंपिक में इस सफलता से भारत में महिला कुश्‍ती दल को बढ़ावा देने में भारतीय रेल की शानदार भूमिका
 
रियो ओलंपिक्‍स भारतीय दल में एक तिहाई सदस्‍य रेलवे के खिलाड़ी हैं जो किसी ओलंपिक में अब तक की सर्वाधिक संख्‍या है



भारतीय रेल कर्मी साक्षी मलिक ने देश के लिए रियो ओलंपिक्‍स 2016 में पहला पदक हासिल किया। रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु, संचार राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) एवं रेल राज्‍य मंत्री श्री मनोज सिन्‍हा और रेल राज्‍य मंत्री श्री राजन गोहेन ने साक्षी मलिक को देश को गौरवान्वित करने तथा उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी है। पूरा रेल विभाग आज गर्व महसूस कर रहा है, क्‍योंकि भारतीय रेल ने आज देश को एक शानदार सफलता प्रदान की है।

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भारतीय रेल कर्मी साक्षी मलिक ने रियो ओलंपिक 2016 में भारत को बहुप्रतीक्षित पदक दिलाया। 

साक्षी मलिक ने 58 किलोग्राम वर्ग की महिला फ्रीस्‍टाइल कुश्‍ती में ओलंपिक कांस्‍य पदक जीता। साक्षी मलिक ने भारत के लिए ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली ‘महिला पहलवान’ बनकर इतिहास रच दिया है। जुझारु महिला पहलवान साक्षी मलिक ने पदक जीतने का भारत का लम्‍बा इंतजार समाप्‍त किया। उन्‍होंने किरगिजस्‍तान की अलसुलू टिनीबेकोवा को प्‍लेऑफ प्रतियोगिता में 8-5 से हराकर 58 किलोग्राम वर्ग में कांस्‍य पर कब्‍जा किया। इसके पहले भारतीय रेल की एक अन्‍य कर्मी विनेश फोगट घायल हो जाने के कारण मुकाबले से हट गई थीं। घायल होने के पहले वे शानदार प्रदर्शन  कर रही थीं और 48 किलोग्राम वर्ग में उनसे पदक जीतने की उम्‍मीद थी। उल्‍लेखनीय है कि भारतीय रेल ने पहली बार पूरी महिला पहलवान टीम को आगे बढ़ाया और इस तरह कुश्‍ती के क्षेत्र में भारतीय महिलाओं को आकर्षित करके उनके लिए खिलाड़ी के रूप में एक नया विकल्‍प उपलब्‍ध कराया है।

साक्षी मलिक इस समय उत्‍तर रेलवे के दिल्‍ली प्रखंड में वाणिज्‍य विभाग में कार्यरत हैं। भारतीय रेल ने हर तरह की सुविधाएं प्रदान करके सक्षी मलिक को एक शानदार पहलवान के रूप में आगे बढ़ाया है। उन्‍हें कई तरह के प्रोत्‍साहन भी दिए गए हैं। रेल विभाग के कुश्‍ती  कोच श्री कुलदीप मलिक ने ओलंपिक की बड़ी प्रतिस्‍पर्धाओं के लिए रेलवे की महिला पहलवानों को तैयार किया था। भारतीय रेल के खेल निदेशालय ने हर स्‍तर पर उनके प्रशिक्षण के लिए खेल एवं युवा मामलों के मंत्रालय के साथ समन्‍वय किया था।

खेलों के शुरू होने के पहले रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभारक प्रभु ने पहले ही यह घोषणा कर दी थी कि साक्षी मलिक को 50 लाख रुपये का पुरस्‍कार दिया जाएगा और उन्‍हें अपनी पसंद के जोनल रेल कार्यालय में राजपत्रित अधिकारी के पद पर पदोन्‍नति दी जाएगी।

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भारतीय रेल कर्मी साक्षी मलिक ने 58 किलोग्राम वर्ग की महिला फ्रीस्‍टाइल कुश्‍ती में ओलंपिक कांस्‍य पदक जीता।

खेलों और खिलाडि़यों को प्रोत्‍साहित करने तथा हर प्रकार का समर्थन प्रदान करने की भारतीय रेल की समृ‍द्ध परंपरा रही है। भारतीय रेल देश में हर प्रकार की खेल गतिविधि में सबसे आगे रहा है। पिछले कई वर्षों के दौरान, अपनी स्‍थापना के समय से ही भारतीय रेल के खिलाडि़यों ने ओलंपिक्‍स, ऐशियाड एवं अन्‍य अंतरराष्‍ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलतापूर्वक देश का प्रतिनिधित्‍व किया है। रियो ओलंपिक्‍स में शामिल होने वाले भारतीय दल में एक तिहाई खिला‍ड़ी भारतीय रेल से संबंधित हैं, जिससे यह साबित होता है कि देश में खेलों को प्रोत्‍साहित करने के लिए रेल विभाग अत्‍यंत प्रतिबद्ध है। भारतीय रेल द्वारा प्रोत्‍साहित खिलाडि़यों ने समय-समय पर अपनी निपुणता जाहिर की है और देश को गौरवान्वित किया है।

भारतीय रेलवे में इस सीजन पटरियों के आसपास 5 लाख पेड़ लगाए जाएंगे


रेलवे की भूमि पर वृक्षारोपण के लिए भारतीय रेलवे ने हरियाणा और पंजाब के राज्‍य वन विभागों के साथ एक मॉडल समझौते पर हस्‍ताक्षर करने का निर्णय लिया है। 

इस समझौते से रेलवे की भूमि पर वनीकरण के संबंध में निम्‍नलिखित बेहतरी का मार्ग प्रशस्‍त हुआ है: 

  • रेलवे हरित भारत मिशन में व्‍यापक योगदान दे सकती है। 
  • वन विभाग वृक्षारोपण के साथ-साथ पेड़ों के रख-रखाव एवं निपटान में संलग्‍न है। वन विभाग इस तरह वनीकरण में बेहद आवश्‍यक विशेषज्ञता सुनिश्चित करने में संलग्‍न है।
  • वन विभाग द्वारा रेलवे भूमि सीमा पर रेल पटरियों के किनारे वृक्षारोपण हो सकेगा। रेलवे द्वारा किसी भी समय इस तरह की भूमि की बहाली के प्रावधान के साथ इस तरह की भूमि की घोषणा संरक्षित वन के रूप में किए बिना ही वृक्षारोपण संभव हो पाएगा, जिससे रेलवे के कामकाज/विकास परियोजनाओं में किसी भी तरह की बाधा नहीं होगी।
  • अतिक्रमण से रेलवे की भूमि की रक्षा हो सकेगी। 

पर्यावरण मंत्री ने आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत सुविधाएं जनता को समर्पित की


पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) अनिल माधव दवे ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत मध्‍यप्रदेश में सिहोर जिले की जहानपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत निर्मित अनेक सुविधाएं लोगों को समर्पित की। इस गांव में करीब 100 परिवार रहते हैं। मंत्री ने नर्मदा नदी की परिक्रमा करने वाले लोगों के लिए विशेष रूप से बनाए गया एक रेनबसेरा और लोगों को खुले में शौच जाने से रोकने के लिए बनाया गया एक शौचालय समर्पित किया। 

श्री दवे ने एक वाटर फिल्‍टर प्‍लांट का उद्घाटन भी किया, जिसका लक्ष्‍य प्रति परिवार प्रतिदिन 20-25 लीटर पेयजल उपलब्‍ध कराना है। उन्‍होंने लोगों को सांस्‍कृतिक ग‍तिविधियों के लिए प्रेरित करने हेतु एक ओडिटोरियम और पंचायत भवन भी जनता को स‍मर्पित किया। मंत्री ने इस अवसर पर एक पौधा भी लगाया। उन्‍होंने गांव के बच्‍चों को स्‍कूल की वर्दी भी वितरित की और स्‍वयंसेवी संगठन की महिला सदस्‍यों के साथ विचार विमर्श भी किया। 

श्री दवे ने विभिन्‍न जारी निर्माण कार्यों की समीक्षा के लिए संबद्ध विभागों के अधिकारियों के साथ एक बैठक भी आयोजित की। 

Deshbhakti Manthan

Wishing all the Hindustanis a very happy Raksha Bandhan----- JagdishKumar

भारत और बांग्लादेश मिलकर बनायेंगे बांग्लादेश मुक्ति युद्ध पर फिल्म

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भारत और बांग्लादेश संयुक्त रूप से 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध पर डॉक्युमेंट्री फिल्म बनाएंगे 

ऑल इंडिया रेडियो 23 अगस्त को आकाशवाणी मैत्री का शुभारंभ करेगा 

श्री वैंकेया नायडू ने बांग्लादेश के सूचना मंत्री श्री हसनउल-हक-इनू से चर्चा की 

सूचना और प्रसारण मंत्री श्री एम. वैंकेया नायडू ने कहा कि आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सूचना का प्रसार महत्वपूर्ण है, जो भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए चिंता का विषय है। समय पर सही सूचना के प्रचार प्रसार से अफवाहों और झूठ से बचा जा सकता है तथा लोगों के बीच सहयोग और समझ की भावना भरी जा सकती है। मंत्री महोदय ने यह बात आज यहां बांग्लादेश के सूचना मंत्री श्री हसनउल-हक-इनू और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ विचार-विमर्श के दौरान कही। इस बैठक में सूचना और प्रसारण मंत्रालय में सचिव श्री अजय मित्तल और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

श्री नायडू ने अपने बांग्लादेशी समकक्ष को बताया कि ऑल इंडिया रेडियो 23 अगस्त, 2016 को “आकाशवाणी मैत्री” शीर्षक से बांग्लादेश और बंगाली प्रवासी भारतीयों के लिए विशेष सेवा का शुभारंभ करेगा। महामहिम राष्ट्रपति इस चैनल का उद्घाटन करेंगे जो दोनों देशों के बीच सौहार्द सेतू के रूप में कार्य करेगा। श्री नायडू ने बताया कि दोनों देशों के बीच संबंधों से समान विरासत और संस्कृति को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

चर्चा के दौरान भारत और बांग्लादेश कई मुद्दों पर सहयोग के लिए राजी हुए। दोनों मंत्री संयुक्त रूप से 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध पर डॉक्युमेंट्री तैयार करने में सहयोग करने पर सहमत हुए। श्री नायडू ने कहा कि इसके लिए फिल्म प्रभाग, दूरदर्शन और अन्य मीडिया इकाईयों के पास उपलब्ध अभिलेखीय सामग्री का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएगा। इस डॉक्युमेंट्री को 2021 में बांग्लादेश की स्वाधीनता की 50वीं सालगिरह के अवसर पर प्रदर्शित करने का प्रस्ताव है। श्री नायडू ने श्री हसनउल-हक-इनू के 2020 में बांग्लादेश के राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की 100वीं जयंती के उपलक्ष्य में बांग्लादेश द्वारा निर्मित की जा रही मेगा मूवी के निर्माण में मदद करने के प्रस्ताव पर भी सहमति व्यक्त की।

दोनों देश संयुक्त दृश्य-श्रव्य सह निर्माण के समझौते के प्रस्ताव पर मिलकर कार्य करने पर सहमत हुए। बांग्लादेश में भारतीय फिल्म महोत्सव और भारत में बांग्लादेश फिल्म महोत्सव आयोजित करने पर भी सहमति बनी। बांग्लादेश के मंत्री ने 1935 में बंगाली भाषा में प्रमतेश बरुआ द्वारा निर्देशित देवदास के सेलुलाइड संस्करण प्रदान करने के श्री नायडू के अनुरोध को भी स्वीकार कर लिया। इससे पहले बांग्लादेश ने एनएफएआई को इस फिल्म का डीवीडी संस्करण प्रदान किया था। दोनों देशों के बीच मुक्त फिल्म व्यापार सुविधा के संबंध में श्री नायडू ने कहा कि बांग्लादेश को उन कानूनी प्रावधानों में छूट देने पर विचार करना चाहिए जिनके तहत वहां कई भारतीय फिल्में प्रतिबंधित है। प्रतिबंध हटाने से स्थानीय फिल्म उद्योग पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मंत्री महोदय ने बांग्लादेश के युवा फिल्म निर्माताओं और उद्यमियों को भारतीय फिल्म और प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण देने की भी पेशकश की। उन्होंने कहा कि फिल्मों के संयुक्त निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एनएफडीसी और बांग्लादेश फिल्म विकास निगम तथा डिजिटिकरण और अभिलेख तैयार करने के लिए एनएफएआई और बांग्लादेश फिल्म आरकाइव्स के बीच सहयोगात्मक उपाय शुरू किये जाएंगे।

इस दौरान दोनों मंत्री मीडिया के लोगों, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के संबद्ध अधिकारियों तथा दूरदर्शन और बांग्लादेश में उसके समकक्ष के बीच आदान-प्रदान कार्यक्रम के लिए क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने और प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित करने पर भी सहमत हुए।

प्रधानमंत्री द्वारा 70वें स्‍वतंत्रता दिवस पर लाल किले के प्राचीर से राष्‍ट्र को संबोधन


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 70वें स्‍वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले के प्राचीर से राष्‍ट्र को संबोधित किया।

श्री नरेन्‍द्र मोदी ने महात्‍मा गांधी, सरदार पटेल, पंडित जवाहरलाल नेहरू तथा असंख्‍य लोगों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्‍होने अपने जीवन का बलिदान दिया ताकि स्‍व्‍राज्‍य प्राप्‍त किया जा सके। 

उन्‍होंने कहा कि 125 करोड़ भारतीयों ने अब यह संकल्‍प लिया है कि वे स्‍वराज्‍य से ‘सुराज’ की यात्रा को पूरा करेंगें। उन्‍होंने कहा कि सुराज की प्राप्ति के लिए, त्‍याग, कड़े परिश्रम, अनुशासन, समर्पण और साहस की आवश्‍यकता होती है और उन्‍होंने कहा कि पंचायत से लेकर संसद तक प्रत्‍येक संस्‍था को इस लक्ष्‍य की दिशा में मिलजुल कर काम करना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय था कि जब सरकार आरोपों से आकंठ डूबी हुई थी। उन्‍होंने ने कहा कि यह सरकार इसकी बजाय आकांक्षाओं से घिरी हुई है। उन्‍होंने कहा कि जहां उम्‍मीद आकांक्षाओं को बढ़ावा देती है, वहीं इससे सुराज की ओर तेज़ी से बढ़ने की ऊर्जा भी मिलती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वे सरकार द्वारा किए गए कार्य पर प्रकाश नहीं डालना चाहते अपितु सरकार के कार्य-संस्‍कृति का उल्‍लेख करना चाहेंगे। 

प्रधानमंत्री ने संवेदनशीलता, दायित्‍व, जवाबदेही, पारदर्शिता, दक्षता तथा सुशासन जैसे सुराज के विभिन्‍न तत्‍वों को परिभाषित किया। उन्‍होंने प्रमुख अस्‍तपतालों में पंजीकरण, आयकर रिफण्‍ड की तत्‍परता से वापसी, पासपोर्ट डिलीवरी प्रक्रिया में तेज़ी से कंपनी का पंजीकरण तथा सरकारी नौकरियों में समूह ग और समूह घ के पदों के लिए साक्षात्‍कार समाप्‍त किए जाने के केंद्र सरकार के कामकाज के उदाहरणों के माध्‍यम से इन प्रत्‍येक तत्‍वों को समझाने को प्रयास किया।

प्रधानमंत्री ने उल्‍लेख किया कि सुशासन के महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में सेवा प्रदान करने की गति किस प्रकार बढ़ी है। इस संदर्भ में उन्‍होने ग्रामीण सड़क निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा उत्‍पादन क्षमता निर्माण, पारेषण लाइन बिछाने तथा रसोई गैस कनेक्‍शनों का उदाहरण दिया। 

प्रधानमंत्री ने कतिपय क्षेत्रों जैसे कि जनधन योजना के अंर्तगत थोड़े से समय में 21 करोड़ बैंक खाते का खुलना, ग्रामीण क्षेत्रों में 2 करोड़ शौचालयों का निर्माण तथा बिजली की सुविधा से वंचित 10 हजार गांवों को विद्युतीकरण के काम हो जाने के बारे में बड़े पैमाने पर अपने विचार रखे।

एलईडी बल्‍बों के विषय पर प्रधानमंत्री ने बताया कि इनके मूल्‍यों में भारी कमी की गई है ताकि अधिक से अधिक आम लोगों के बीच इसकी पहुंच बन सके। उन्‍होंने कहा कि बड़े पैमाने पर एलईडी बल्‍बों के इस्‍तेमाल से बिजली की खपत में भारी बचत होगी। 

प्रधानमंत्री ने लगातार दो अकालों के बाद भी पर्याप्त फसलों का उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए सराहा। उन्होंने किसानों की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष दालों की बुवाई की दिशा में भारी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कृषि के क्षेत्र की दिशा में सरकार के समन्वित दृष्टिकोण को स्पष्ट किया जिसमें मृदा, स्वास्थ्य कार्ड, सिचाईं, सौर पंप बीजस उर्वरक तथा फसल बीमा शमिल है। 

श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार का ध्यान एक राष्ट्रीय पहचान का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सुधार, निष्पादन, परिवर्तन है। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान प्रतीकात्मक की अपेक्षा सारभूत कार्य, विच्छिन्न विकास की अपेक्षा समेकित विकास तथा पात्रता की अपेक्षा सशक्तिकरण की ओर कहीं अधिक केंद्रित है।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि किस प्रकार उनकी सरकार अटके पड़े अथवा काफी समय से लंबित परियोजनाओं को पूरा करने में जुटी है और महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए अपेक्षित समय में किस प्रकार कमी कर रही है। 

प्रभावी परिणाम देने के उदाहरण पेश करते हुए प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि गन्ने की बकाया राशि की मंजूरी, नए एलपीजी कनेक्शन और एयर इंडिया तथा बीएसएनएल जैसे सार्वजनिक उपक्रमों को किस प्रकार संचालन मुनाफों में लाया गया। पारदर्शिता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि सब्सिडी राशि को किस प्रकार जरूरतमंदों को देकर इसका बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुशासन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुई प्रगति को अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने भी स्वीकार किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं कल्याण की दिशा में सरकार ने नरम और समन्वित दृष्टिकोण अपनाया है। जिसमें बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना तथा उज्जवला योजना जैसे कार्यक्रम शामिल हैं ताकि महिलाओं की शारीरिक, शैक्षिक एवं वित्तीय बेहतरी सुनिश्चित हो सकें। इस संबंध में उन्होंने कई अन्य सरकारी पहलों का उल्लेख किया। 

सामाजिक एकता पर अपना सशक्त संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रत्येक भारतीय को रामानुजाचार्य, महात्मा गांधी और बाबा साहेब आंबेडकर सरीखे हमारे महान संतों, दार्शनिकों के शांति, एकता एवं भाईचारे के संदेश का पालन करना चाहिए। 

प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार की विभिन्न पहल एवं कार्यक्रम युवाओं के लिए रोजगार निर्माण में योगदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मॉडल दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम के चलते सप्ताह के सातों दिन दुकान खोलने में सुविधा रहेगी। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार बड़े फैसलें लेने में किसी प्रकार का संकोच नहीं करती उन्होंने एक रैंक एक पेंशन, नेता जी की फाइलों का खुलासा तथा बांग्लादेश के साथ भूमि सीमा करार का इस संदर्भ में उल्लेख किया। 

प्रधानमंत्री ने आंतकवादियों को शहीदों के रूप में महिमा मंडित करने के प्रयासों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि सारा विश्व भारतीय के मानवीय दृष्टिकोण को सराहेगा और सभी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों की एक स्वर में भर्त्सना करेगा। 

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को आगे ले जाने की दिशा में आम संकल्प लेने का लोगों से आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कुछ नई पहल की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की मासिक पेंशन 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रूपये कर दी गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश भर में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित संग्रहालयों और स्मारकों के निर्माण की दिशा में काम करेगी। सरकार निर्धन लोगों के लिए अस्पताल में ईलाज की लागत पर एक लाख रुपये तक खर्च वहन करेगी। 

#DDUGJY के तहत अब तक 10,051 गांवों में पहुँच गई बिजली

डीडीयूजीजेवाई के तहत अब तक 10,051 गांवों में बिजली पहुंचाई गई, पिछले सप्ताह 398 गांवों में बिजली पहुंचाई गई 

देश भर के 398 गांवों में पिछले हफ्ते 08 से 14 अगस्त, 2016 के बीच #DDUGJY दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) के तहत बिजली पहुंचाई गई। विद्युतिकरण किए गए गांवो में अरूणाचल प्रदेश के 02, असम के 60, बिहार- 28,  छत्तीसगढ़-11 झारखंड- 91, मध्‍य प्रदेश- 28, मणिपुर-11, मेघालय- 36, ओडिशा-67, राजस्थान-18, उत्‍तर प्रदेश-32 और हिमाचल प्रदेश, मिजोरम तथा नगालैंड के 4-4 एवं जम्मू-कश्मीर तथा उत्तराखंड का एक-एक गांव शामिल हैं। देश भर के गांवों में जारी विद्युतीकरण के काम में हो रही प्रगति की जानकारी http://garv.gov.in/dashboard से भी प्राप्त की जा सकती है। 

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 मौजूदा विद्युतीकरण प्रक्रिया के बारे में जानकारी:

स्‍वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के राष्‍ट्र को दिए संबोधन पर अमल करते हुए भारत सरकार ने 1000  दिन के भीतर यानी  01 मई, 2018 तक शेष  18,452 गैर-विद्युतीकृत गांवों में विद्युतीकरण करने का फैसला किया है। इस परियोजना को अभियान के रूप में शुरू किया गया है और विद्युतीकरण की रणनीति में कार्यान्‍वयन की अवधि 12 महीनों में सीमित करना तथा गांवों के विद्युतीकरण की प्रक्रिया को निगरानी के लिए निश्चित समयावधि सहित 12 स्‍तरों में विभाजित किया गया है।

अब तक 10,051 गांवों का विद्युतीकृत किया जा चुका है। शेष 8,401  गांवों में से 525 गांवों में कोई बसा‍वट नहीं हैं।  5,088  गांवों तक ग्रिड के माध्‍यम से बिजली पहुंचाई जानी है,  भौगोलिक बाधाओं के कारण 2,595 गांवों तक  ऑफ ग्रिड के माध्‍यम से बिजली पहुंचाई जानी है तथा 193 गांवों का विद्युतिकरण स्‍वयं राज्‍य सरकार द्वारा किया जाएगा।

अप्रैल, 2015  से 14 अगस्‍त, 2015 तक 1654 गांवों का विद्युतिकरण किया गया और सरकार द्वारा मिशन मोड में पहल किए जाने के बाद 15 अगस्‍त, 2015 से 14 अगस्त, 2016 तक 8,397 अतिरिक्‍त गांवों का विद्युतिकरण किया गया।

इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए ग्राम विद्युत अभियंता  (जीवीए) के  जरिए  बारीकी नजर रखी जा रही है और नियमित अंतराल पर कई अन्‍य कदम उठाए जा रहे हैं, जैसे आरपीएम बैठक के दौरान  मासिक आधार पर प्रगति की समीक्षा और उन गांवों की सूची को भी राज्‍य की बिजली कंपनियों से साझा किया जा है जहां विद्युतीकरण की प्रकिया जारी है। साथ ही ऐसे गांवों की भी पहचान की जाती है, जहां विद्युतीकरण की प्रक्रिया देरी से चल रही है।     

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