अपने आंदोलन की कामयाबी न देख अन्ना को याद आये रामदेव

फिल्म नगरी मुंबई के बॉक्स ऑफिस पर अपने आंदोलन को पहले जैसी अपार कामयाबी मिलते देख, अन्ना ने अपनी स्टार कास्ट में फेरबदल का फैसला किया है। लोकपाल आंदोलन के पार्ट-3 में अब उन्होंने पुराने सह-कलाकार बाबा रामदेव को भी न्योता भेजा है।

इसी तरह पिछले कुछ समय के दौरान साथ छोड़ने वाले अन्य नेताओं और संगठित समूहों को जोड़ने की कोशिश भी शुरू हो गई है।भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का मिलकर आगाज करने वाले अन्ना और रामदेव के रिश्तों में पिछले नौ महीने के दौरान बहुत उतार-चढ़ाव आए हैं।

अब तक संसाधनों के बजाय लोगों के स्वत: स्फूर्त समर्थन पर चलते रहे आंदोलन को मुंबई में वैसी भीड़ नहीं खींच पाता देख अन्ना ने तुंरत अपने पुराने साथी को याद किया। लंबे समय बाद बाबा रामदेव से उनकी फोन पर बातचीत हुई। तरत-फुरत में एलान भी हो गया।

अन्ना ने कहा कि तीन दिन के उनके अनशन के बीच रामदेव भी आएंगे। हालांकि अब तक रामदेव की ओर से अपने कार्यक्रम का एलान नहीं हुआ है। इसी तरह टीम अन्ना अपने कुछ पुराने साथियों को भी टटोल रही है। इनमें से कुछ के लौटने से बड़ी संख्या में उनके समर्थक भी जुड़ सकते हैं।टीम अन्ना के लिए राहत की बात यह रही कि यहां फिल्मी दुनिया वालों ने उन्हें ज्यादा निराश नहीं किया।

संगीतकार विशाल से लेकर मशहूर कलाकार अनुपम खेर और निर्देशक प्रीतीश नंदी भी देर तक मंच पर जमे रहे। इसी तरह प्रतिज्ञा सीरियल में ठाकुर सज्जन सिंह की भूमिका निभाने वाले अनुपम श्याम ने भी यहां अन्ना को जनता का असली नायक बताया। अगले दो दिन के दौरान भी अन्ना को फिल्मी कलाकारों का सहयोग मिलने की उम्मीद है।

राहुल गांधी का झूठा सपना चकनाचूर हो गया - यशवंत सिन्हा

लोकपाल बिल को लेकर राहुल गांधी ने एक ही बार संसद में अपनी बात रखी और लोकपाल-लोकायुक्त को संवैधानिक दर्जा देने की मांग कर खुद को इस बहस में गेम चेंजर की तरह ला खड़ा किया।

हालांकि आज उनका ये सपना चकनाचूर हो गया जब इस बाबत लोकसभा में संविधान संशोधन प्रस्ताव लेकर आई सरकार को मुंह की खानी पड़ी और प्रस्ताव बहुमत के अभाव में खारिज हो गया।राहुल की मांग को सरकार और कांग्रेस ने अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया था।

यही वजह है कि लोकसभा में इस मुद्दे पर मिली हार का ठीकरा अब वो बीजेपी व एनडीए के सिर फोड़ रही है। जब लोकसभा में प्रस्ताव गिरा तो सदन के नेता प्रणब मुखर्जी ने इसे लोकतंत्र के लिए दुखद दिन बताया। कार्मिक मंत्री नारायण सामी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि बीजेपी का आज पर्दाफाश हो गया है। वहीं केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा कि बीजेपी ड्रामेबाज है और अब अन्ना हजारे को इन्हें अपने मंच पर नहीं चढ़ने देना चाहिए।दूसरी ओर बीजेपी सरकार को पटखनी देकर उत्साहित है। उसने कहा है कि ये सरकार की हार है और उसे अब सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है।

बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि सरकार के पास जब बहुमत था ही नहीं तो वो क्यों संविधान संशोधन प्रस्ताव लेकर आई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक झूठा सपना कांग्रेसियों को दिखा रहे थे वो टूट गया है। दूसरा सपना राहुल यूपी का दिखा रहे हैं वो वहां विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद टूट जाएगा।

टीम अन्‍ना को जन लोकपाल बिल पारित होने पर अब भी संदेह

टीम अन्ना को जन लोकपाल बिल पारित होने पर अब भी संदेह है। टीम के सदस् प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार और राजनीतिक दलों पर अभी भी भरोसा नहीं किया जा सकता। इन पर कड़ी नजर रखनी होगी, ताकि संसद में पारित प्रस्ताव के अनुकूल जन लोकपाल बिल पारित हो सके। उन्होंने मांग की कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुला कर एक महीने के भीतर बिल पारित कराए।

टीम अन्‍ना को डर इस बात का है कि मामला स्‍थायी संसदीय समिति में लटक सकता है। उसे लगता है कि 27 अगस्‍त को संसद में पारित प्रस्‍ताव का हश्र संसदीय समिति में जाने के बाद वही हो सकता है जो बाकी प्रस्‍तावों का होता है।

जिस तरह इस बिल के साथ जनभावना जुड़ी हुई है, उसे देखते हुए सरकार के लिए इसे लटकाना आसान नहीं होगा। राजनीतिक विश्‍लेषक योगेंद्र यादव मानते हैं कि अगर सरकार यह बिल लाने में देरी करती है या कमजोर विधेयक लाती है तो भ्रष्‍टाचार से निपटने के मामले में उसकी विश्‍वसनीयता खत्‍म हो जाएगी। यह जोखिम सरकार को कदम पीछे खींचने से रोकेगा।

वरुण गाँधी के भाषण में दिखी राहुल गाँधी से ज्यादा देशभक्ति

पढ़िए वरुण का पूरा भाषण...

इस आंदोलन ने देश के युवाओं को संगठित कर दिया है। उनकी आवाज को एक कर दिया और यह सुनिश्चित कर दिया है कि जब युवा खड़े होंगे तो देश में बदलाव आएगा। यह भारत के लिए एक नया अनुभव है।

पिछले दो तीन हफ्तों से मैं भी इस बहस को सुन-देख रहा हूं। मुझे लगता है कि संसद और देश के लोगों के बीच एक खाई पैदा की जा रही है। यदि ऐसा है तो फिर यह देश के भविष्य के लिए खतरा है।

जब आप इतिहास को पढ़ते हैं तो यह एहसास होता है कि गुलामी के वक्त सरकार सर्वोपरि थी लेकिन आजादी के बाद देश की जनता सर्वोपरी हो गई। आज बीजेपी और कई अन्य पार्रटियों ने संसद में देश की जनता के प्रति विश्वास जाहिर किया है। यह लोगों की आस्था का सम्मान है। हम यह कह सकते हैं कि यह एक शांत क्रांति थी। लेकिन यह भी सच है कि यह शांत नहीं रही है। इस क्रांति ने देश को जगा दिया है।

आज देश हमारी ओर उम्मीद से देख रहा है। देश को हम पर विश्वास है। पिछले दो हफ्तों में हमने देखा है कि लोग इस बात पर बहस कर रहे हैं कि संसद की गरिमा को बचाया जाना चाहिए। लेकिन यहां सवाल यह है कि सांसदों की गरिमा की हम ख्याल रखते हैं तो फिर लोगों की गरिमा का ख्याल कौन रखेगा।

हमे यह स्वीकार करना पड़ेगा की लोग ही सर्वोपरि है हमारे लोकतंत्र में एक बार चुने जाने के बाद नकारे जाने का प्रवाधान नहीं है। लोग ही हमारी ताकत हैं। हमें जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतरा चाहिए। आज हम भ्रष्टाचार पर बहस कर रहे हैं। इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या संसद का यह बहस सत्र बुलाया जाना सही है या नहीं। मैं इस बात पर बहस नहीं करना चाहूंगा।

मैं उत्तर प्रदेश से आता हूं। उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में बाढ़ आ गई है। लोगों को ज्यादा से ज्यादा हजार रुपए की राहत मिलती हैं। लेकिन जब हम कॉमनवेल्थ या २जी घोटाले पर नजर डालते हैं तो यह लाखों करोड़ में होता है। यह इतनी रकम होती है जिससे कई हजार गांवों का विकास किया जा सकता है। कई हजार कॉलेज खोले जा सकते हैं।

लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। आप मेरी आवाज को बंद नहीं कर सकते। मैं सवाल करता हूं कि क्या हमारे देश में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त नहीं हो गई है? तथ्य अभी भी वही है।

हमारे सभी व्यवस्थाएं टूट गई हैं। कारण हमारे पास धन नहीं है। कितनी योजनाए हैं जो सही उद्देश्य के साथ शुरु की जाती हैं लेकिन पैसे की कमी के कारण पूरी नहीं हो पाती। क्यों? हम भ्रष्टाचार की बात कर रहे हैं। लेकिन क्या हमारे पास भ्रष्टाचार से लड़ने का कोई सिस्टम है? क्या हम न्यायव्यवस्था, सतर्कता विभाग, सीबीआई पर सवाल नहीं उठा सकते?

देश की सड़कों से आ रही आवाजों से साफ होता है कि हमारे देश में अब कोई व्यवस्था नहीं रह गई है। हम ये क्यों सोच लेते हैं कि एक बार चुने जाने के बाद हम ही सबकुछ हैं। हमें यह समझना होगा कि युवा सड़क पर क्यों हैं।

वो सड़क पर इसलिए हैं कि हमारे देश को भ्रष्टाचार ने ध्वस्त कर दिया है। रिश्वत देकर नौकरी पाने वाले उम्र भर के लिए अपना आत्मसम्मान खो देते हैं। युवा सड़क पर इसलिए हैं क्योंकि वो सम्मान से जीना चाहते हैं। रिश्वत और भ्रष्टाचार सिर्फ एक खास वर्ग को ही प्रभावित नहीं करता है। इससे हमारा पूरा समाज प्रभावित होता है।

इस बात को बार बार कहा जा रहा है कि अन्ना हजारे के आंदोलन के पीछे बीजेपी है। लेकिन तथ्य यही है कि यह आंदोलन लोगों का है। ये वो ज्वालामुखी है जो लंबे वक्त से शांत था। लेकिन आज अन्ना हजारे और लोगों के पीछे खड़े होकर बीजेपी सम्मानित महसूस कर रही है। और अब हम सामने आकर इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।

मेरे जीवन का सबसे अच्छा अनुभव वह था जब मैं रामलीला मैदान में युवाओं के बीच जाकर बैठा। वहां एक व्यक्ति ने मुझसे कहा कि अन्ना हजारे एक व्यक्ति नहीं है एक सोच है वो हमारे देश को फिर से महान बनाने के लिए इस सोच की जीत आवश्यक है। मैं सिर्फ यह कह रहा हूं कि हम सब लोग, चाहे कांग्रेस हो, हम हो या वामपंथी हो उन्हें हमारे देश के नवनिर्माण के लिए इस सोच को जिताना चाहिए।

अन्ना को एक बार फिर धोका दे रही कांग्रेस

प्रशांत भूषण ने कहा कि कल उन्हें यह भरोसा दिया गया था कि आज संसद में वोटिंग होगी लेकिन संसद में वोटिंग नहीं हो रही। प्रशांत भूषण ने कहा कि हमें अभी यह बताया गया है कि इस पर वोटिंग नहीं होगी। बहस नियम १९३ के तहत हो रही है इसलिए इस बहस के आधार पर प्रस्ताव पास नहीं होगा।

हमारा
कहना यह है कि कल जब नियम १८४ के तहत नोटिस दिया गया था तो फिर उसके तहत बहस क्यों नहीं हुई। पूरे देश की जनता को यह जानने का हक है कि कौन सी पार्टी और कौन से सांसद किस तरफ खड़े हैं। आज सदन में वोटिंग न कराना अन्ना हजारे की मांग की अनादर है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार धोखा कर रही है। चार दिन में तीन बार ऐसा हो गया है कि सरकार एक बार बात मानती है, फिर मुकर जाती है। सरकार कह रही है कि भाजपा आपके खिलाफ वोट करना चाहती है। पर यह सदन को तय करने दिया जाना चाहिए। कल रात को वोटिंग का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब कहा जा रहा है कि वोटिंग में भाजपा आपके विरोध होगी।

टीम
अन्‍ना की ओर से सरकार का यह रुख सामने आने के कुछ ही मिनट पहले रामलीला मैदान के मंच से टीम अन्‍ना की सदस्‍य किरण बेदी ने कह दिया कि देश को जीत मुबारक हो। बेदी ने बताया कि टीम अन्‍ना सरकार से मिलने गई है। संसद में ज्‍यादातर पार्टियों ने अन्‍ना की मांगों का समर्थन किया है। कांग्रेस ने भी कुछ शर्तों के साथ प्रस्‍ताव का समर्थन कर दिया है।

लेकिन
माना जा रहा है कि बेदी ने जोश में आकर तथ्‍यों की जांच किए बिना जीत का ऐलान कर दिया, क्‍योंकि कुछ ही देर बाद उन्‍होंने भूल सुधार करते हुए कहा कि अभी प्रार्थना की जरूरत है। अन्‍ना जैसा प्रस्‍ताव चाहते हैं, वैसा कुछ होता नहीं दिख रहा। इसलिए प्रार्थना करें कि उन्‍हें सदबुद्धि आए।

राहुल गांधी के बयान की चौतरफा आलोचना

लोकपाल को अलग संवैधानिक संस्था बनाने के राहुल गांधी के बयान पर टीम अन्ना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.अन्ना की सहयोगी किरन बेदी ने बिना राहुल का नाम लिए कहा कि एक लोकपाल से भ्रष्टाचार दूर नहीं होगा तो कम से कम एक लोकपाल तो बनाना चाहिए.

किरन ने आगे कहा कि एवरेस्ट पर चढ़ने से पहले एक पहाड़ी पर तो चढ़ना होगा, कम से कम एक कदम तो आगे बढ़ाना चाहिए.

अन्ना के सहयोगी जस्टिस संतोष हेगड़े ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले वो जनलोकपाल बिल पास करवाएं क्योंकि लोकपाल को संवैधानिक संस्था बनाने में सरकार को 20-30 साल लगेंगे औऱ हम इसका इंतजार नहीं कर सकते.

गौरतलब है कि राहुल ने संसद में कहा था कि सिर्फ लोकपाल से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा, लोकपाल भी भ्रष्ट हो सकता है. राहुल गांधी ने पूरी बहस को एक नई दिशा देते हुए कहा कि चुनाव आयोग की तरह ही लोकपाल एक अलग संवैधानिक संस्था हो.

सशक्त लोकपाल के लिए भाजपा का अन्ना को पूरा आश्वासन

अन्ना हज़ारे और उनके साथी कार्यकर्ताओं ने आज यहां भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। इसमें समाज के सदस्यों को प्रभावी और सशक्त लोकपाल के मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल के समर्थन का आश्वासन मिला।

हज़ारे, अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी के साथ करीब डेढ़ घंटे चली इस अहम बैठक में लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली,, जसवंत सिंह, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह, वेंकैया नायडू, अनंत कुमार, एस एस अहलूवालिया और रविशंकर प्रसाद जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

विदेश यात्रा पर जाने के कारण बैठक में पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी शामिल नहीं हुए।

बैठक के बाद भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने हज़ारे पक्ष को आश्वासन दिया है कि भाजपा प्रभावी और मजबूत लोकपाल के गठन की उनकी मांग का समर्थन करेगी। हज़ारे पक्ष से मिलने के बाद लोकपाल के मुद्दे पर पार्टी का औपचारिक रुख तय करने के लिये भाजपा के शीर्ष नेताओं ने अलग से बैठक की। इस मुद्दे पर कल राजग की भी बैठक होने वाली है।’’ उन्होंने कहा कि हज़ारे पक्ष के साथ चर्चा काफी अच्छी और सार्थक रही। इसमें लोकपाल विधेयक के दोनों मसौदों पर चर्चा हुई। कुछ मुद्दों पर हज़ारे पक्ष ने स्थिति स्पष्ट की।

हज़ारे से संवाददाताओं से बातचीत में भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ हुई बातचीत पर ‘पूर्ण संतुष्टि’ जताई। उन्होंने कहा कि बातचीत सार्थक रही और भाजपा नेताओं ने हमारा पक्ष ध्यानपूर्वक सुना। हमने दोनों मसौदों पर चर्चा की। अब यह देखना होगा कि संसद में किस तरह का विधेयक पेश होता है और राजनीतिक दलों क्या रुख रहता है।’’

अन्ना हजारे की टीम ने लोकपाल पर आडवाणी से मुलाकात की

लोकपाल विधेयक पर सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की टीम के सदस्यों ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की.उन्होंने कहा कि वे जल्द ही सामाजिक संगठनों की ओर से तैयार प्रस्तावित लोकपाल विधेयक का मसौदा पार्टी को सौपेंगे.

डिया अगेंस्ट करप्शन के प्रवक्ता ने बताया कि लोकपाल विधेयक पर सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी और मनीष सिसौदिया ने आडवाणी से मुलाकात की.प्रवक्ता ने बताया कि आडवाणी के साथ हमारी छोटी सी मुलाकात हुई. लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली के शहर से बाहर होने की वजह से हमने विधेयक का प्रारूप बाद में सौंपने का फैसला किया.

उल्लेखनीय है कि लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए सरकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की कई बैठक हुई. लेकिन उनके बीच सहमति नहीं बन पाई. सरकार का कहना है कि वह एक अगस्त से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में विधेयक पेश करेगी.

वहीं, गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने सख्त लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर 16 अगस्त से एक बार फिर आमरण अनशन की चेतावनी दी है.

शांति भूषण को बिना लॉट्री के ही मिल गए प्लाट

जन लोकपाल बिल ड्राफ्ट करने के लिए बनी समिति के सह अध्यक्ष शांति भूषण के पाक-साफ होने पर उठ रहे सवाल और गहरा गए हैं। शांति और उनके बेटे जयंत भूषण ने उत्तर प्रदेश सरकार से 7 करोड़ रुपये के दो फार्महाउस बाजार दर से करीब चौथाई कीमत में ही हासिल कर लिए हैं। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने विवेकाधीन कोटे से दोनों पिता-पुत्र के नाम ये फार्महाउस अलॉट किए हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने शांति भूषण और उनके बेटे प्रशांत भूषण से मांग की है कि वे जन लोकपाल बिल का मसौदा तैयार कर रही कमेटी से इस्तीफा दें।

शांति भूषण ने पिछले सप्‍ताह अपनी संपत्ति की घोषणा करते हुए बताया कि नोएडा में 10 हजार वर्ग मीटर का खेती लायक एक प्‍लॉट उनके पास है। लेकिन अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्‍सप्रेस' के मुताबिक उन्‍होंने यह नहीं बताया कि यह जमीन उत्‍तर प्रदेश की मायावती सरकार ने विवेकाधीन कोटे से यह जमीन उन्‍हें अलॉट की थी। यही नहीं, सरकार ने उनके वकील बेटे जयंत भूषण को 10 हजार वर्गमीटर का एक और फार्महाउस अलॉट किया। जयंत ने नोएडा पार्क मामले में अदालत में मायावती सरकार की पैरवी भी की थी।

यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि सरकार द्वारा विवेकाधीन कोटे से किसी को जमीन का आवंटन करने का मसला भ्रष्‍टाचार पर बने मंत्रियों के समूह (जीओएम) के एजेंडे में अहम मुद्दा है। हालांकि जयंत भूषण ने एक टीवी चैनल से बातचीत में मीडिया में आ रही इन खबरों को पूरी तक 'बकवास' करार दिया है। उन्‍होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है।

दरअसल नोएडा में इस जमीन के आवंटन का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक मुकदमे की विषय वस्‍तु है। यह मुकदमा एक अन्‍य आवंटी पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विकास सिंह की ओर से दायर किया गया है। इन्‍होंने इन आवंटनों को रद्द करने की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि उन्‍हें बतौर 'सजा' इस फार्महाउस का 'खराब' हिस्‍सा आवंटित किया गया। इसके बाद उन्‍होंने इस फार्महाउस के आवंटन के तरीके को लेकर कई बार शिकायतें की हैं।

विकास सिंह के मुताबिक हर फार्महाउस की कीमत साढ़े तीन करोड़ रुपये है और आवंटियों को आवंटन के समय इसका महज 10 फीसदी यानी 35 लाख रुपये देने थे। बाकी रकम 16 किश्‍तों में देनी थी।

लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने वाली संयुक्‍त समि‍ल में शामिल सिविल सोसायटी के नुमाइंदों ने हाल में अपनी संपत्ति का ब्‍यौरा सार्वजनिक किया था। समिति की पहली बैठक से पहले ही शांति भूषण विवादों में आ गए जब उनकी एक कथित सीडी सामने आई। सिविल सोसायटी के सदस्‍यों का आरोप है कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है।

इधर कांग्रेस उत्तर प्रदेश इकाई की अध्यक्ष रीता बहुगुणा ने कहा है कि इस विवाद के बाद शांति भूषण और उनके बेटे प्रशांत भूषण को जन लोकपाल बिल बनाने वाली कमेटी से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांति भूषण को पूरे मामले की जानकारी का खुलासा करना चाहिए।

बौखलाई कांग्रेस का अन्ना पर पलटवार

लोकपाल बिल को पटरी से उतारने की कोशिश की तोहमत जड़ते हुए संप्रग नेतृत्व को कठघरे में खड़ा करने को लेकर कांग्रेस ने समाजसेवी अन्ना हजारे पर जवाबी आक्रामक वार किया है।

सोनिया
गांधी को लिखे गए खत से बौखलाई कांग्रेस ने साफ कहा है कि अन्ना और उनकी टीम राजनीतिक नेताओं की जुबान पर जिस तरह की तालाबंदी चाहती है वह तो लोकतंत्र को मौत की राह पर ले जाएगा।

इस बयान के जरिए वस्तुतः कांग्रेस ने पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह और संचार मंत्री कपिल सिब्बल की शिकायत वाले सोनिया गांधी को लिखे पत्र में उठाए गए सवालों को दरकिनार कर दिया है। इतना ही नहीं परोक्ष रूप से कांग्रेस ने यह संदेश भी अन्ना और उनकी टीम को दे दिया है कि पार्टी दिग्विजय के बयानों से पूरी तरह इत्तफाक रखती है। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने दिग्विजय की अन्ना के अनशन से लेकर लोकपाल बिल मसौदा समिति के सिविल सोसाइटी के सदस्यों पर उठाए सवालों को दुष्प्रचार अभियान मानने से इनकार करते हुए कहा कि निजी विचार जाहिर करना कोई अपराध नहीं है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भ्रष्टाचार पर जब बहस छिड़ी है तो कई तरह के सवाल उठेंगे ही, ऐसे में भारत सरीखे मुखर लोकतंत्र में विचारों की अभिव्यक्ति को कैसे रोका जा सकता है। मनीष ने कहा कि बहस में दूसरे पक्ष के विचारों पर तालाबंदी की शर्त रखना तो लोकतंत्र को मौत की ओर ले जाने सरीखा होगा। वहीं संप्रग सरकार के सियासी गलियारे में भी अन्ना के बयान को लेकर असहजता की स्थिति है।

सरकार
से जुड़े शीर्ष सूत्रों का साफ कहना है कि जब भ्रष्टाचार पर अन्ना की इंडिया अगेंस्ट करप्शन ने उच्च नैतिक मानदंड की लक्ष्मण रेखा देश के सामने तय कर दी है तो उनके सदस्यों को भी इसकी कसौटी पर कसने के लिए तैयार होना चाहिए। दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल के कार्यालय ने भी बयान जारी कर पलटवार करते हुए अन्ना के पत्र पर ही सवाल उठाए। सिब्बल ने कहा कि मसौदा समिति की बातें लीक कराने का उनके आरोप तथ्यों से परे है।

झूठे आरोप लगाने पर दिग्गी को नोटिस

लोकपाल विधेयक का स्वरूप तय करने के लिए गठित संयुक्त समिति में सिविल सोसायटी के प्रतिनिधि प्रशांत भूषण ने कहा है कि वह कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह को एक कानूनी नोटिस भेजेंगे। सिंह ने उन्हें और उनके पिता शांति भूषण पर इलाहाबाद की एक सम्पत्ति पर स्टांप शुल्क अदा न करने का आरोप लगाया है।

पेशे से वकील भूषण ने एक टेलीविजन चैनल पर कहा, ' दिग्विजय सिंह आरोप लगाने के लिए लोगों को चुनते हैं...अब कांग्रेस की जवाब देने की बारी है कि उनके महासचिव ने संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल किए बगैर कैसे आरोप लगा दिए। ' भूषण ने कहा कि वह सिंह को कानूनी नोटिस भेजेंगे।

आरोपों को खारिज करते हुए भूषण ने पत्रकारों को पहले बताया था कि उस मकान को उनके पिता ने खरीदा जो एक किराएदार की सम्पत्ति थी। उन्होंने कहा, ' मकान का स्टांप शुल्क करीब 666,000 रुपए था जिसका भुगतान किया गया और इस संबंध में एक आवेदन स्टांप शुल्क कलेक्टर को भेजा गया। ' भूषण ने कहा, ' आवेदन में यह भी कहा गया कि यदि इसके बाद भी शुल्क बनता है तो उसका भुगतान कर दिया जाएगा। ' उन्होंने कहा कि इस बारे में वह शीघ्र ही पूरे विवरण जारी करेंगे।

लोकपाल बिलः पहली बैठक के बाद ही सदस्‍य बैकफुट पर

भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए बनी संयुक्‍त ड्राफ्ट समिति की पहली बैठक में ही सरकार ने अन्‍ना हजारे की मांग को अनसुना कर दिया। सरकार ने तय किया है कि समिति की बैठक की वीडियोग्राफी नहीं होगी। इसका ऑडियो रिकार्ड होगा और ब्‍यौरा समय समय पर देश के लोगों को बताया जाएगा। अन्‍ना ने अनशन तोड़ने के बाद कहा था कि बैठक की वीडियोग्राफी हो और पूरे देश की जनता को दिखाया जाए।

समिति की पहली बैठक में सिविल सोसायटी के कुछ प्रस्ताव हटा दिए गए हैं। इसके अलावा सरकार ने सिविल सोसायटी की ओर से तैयार जन लोकपाल बिल के प्रारूप को भी मसौदे का आधार मानने से इनकार कर दिया। जन लोकपाल बिल में जज और मंत्री को निलंबित करने का प्रस्ताव था, लेकिन सरकारी सूत्रों के मुताबिक इन दोनों प्रस्तावों को संयुक्त मसौदे से हटा दिया गया है।

सिविल सोसायटी के सदस्‍य प्रशांत भूषण ने कहा, ' फिलहाल वीडियो रिकॉर्डिंग पर सहमति नहीं बन सकी है। लेकिन बैठक में सभी ने यह माना कि ठोस, कारगर और स्‍वतंत्र लोकपाल बिल आज के समय की जरूरत है।' उन्‍होंने कहा, '2 मई को होने वाली बैठक में जन लोकपाल बिल के मूलभूत सिद्धांतों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा हर हफ्ते कम से कम एक बैठक जरूरी होगी।'

ऍसा लग रहा है कि बिल पर पहली बैठक के बाद ही सिविल सोसायटी के सदस्‍य बैकफुट पर आ गए हैं।

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