पंजाब में 5 खालिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल


राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से हथियारों, विस्फोटकों और मादक पदार्थों की तस्करी से संबंधित मामले में इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन (आईएसवाईएफ) के प्रमुख समेत पांच खालिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ यहां एक विशेष अदालत में शुक्रवार को आरोपपत्र दायर किया।

एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा कि आईएसवाईएफ के प्रमुख लखबीर सिंह रोडे उर्फ बाबा (पंजाब के मोगा निवासी) के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया गया जो पाकिस्तान में छिपा है।

उसके चार गिरफ्तार हो चुके साथियों-हरमेश सिंह उर्फ काली (फिरोजपुर के किलचे गांव निवासी), दरवेश सिंह उर्फ शिंदा (भैंके वाले झुग्गे निवासी), गुरमुख सिंह (जालंधर के न्यू हरदयाल नगर निवासी) और फगवाड़ा-कपूरथला के गुरू नानकपुरा निवासी गगनदीप सिंह के खिलाफ भी आरोपपत्र दायर किया गया।

एनआईए ने कहा कि शुरू में फिरोजपुर के ममदोट थाने में 25 अगस्त, 2021 को मामला दर्ज किया गया था और बाद में छह नवंबर, 2021 को एजेंसी ने पुन: मामला दर्ज किया।

एनआईए ने कहा कि रोडे और उसके साथियों ने पाकिस्तान से ड्रोन से हथियार आदि की अवैध खेप भेजी थी।

हुर्रियत कांफ्रेंस अध्यक्ष का बेटा हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ

मोहम्मद अशरफ सेराय का बेटा जुनैद अशरफ तहरीक-ए-हुर्रियत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ सेराय का बेटा हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया है । जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शनिवार को इस संबंध में जानकारी दी । एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “सेराय का २६ साल का बेटा जुनैद अशरफ हिजबुल मुजाहिदीन से जुड गया है ।”

सेहराय को १९ मार्च को तहरीक-ए-हुर्रियत (TeH) का अध्यक्ष बनाया गया है । उन्होंने १५ सालों तक अध्यक्ष रहे सय्यद अली शाह गिलानी की जगह ली है । पुलिस ने बताया कि जुनैद अशरफ शुक्रवार की नमाज के बाद से गायब है । उन्होंने बताया, “एके ४७ राइफल के साथ जुनैद अशरफ की एक फोटो शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है ।”

इस फोटो के कैप्शन में लिखा है, “कश्मीर यूनिवर्सिटी के बिजनेस में मास्टर की पढाई करनेवाले जुनैद अशरफ का कोड नेम अमार भाई है ।

जुनैद के परिवारवालों ने शनिवार को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में लिखाई थी ।

मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश में हुए घटनाक्रमों पर राजनाथ सिंह का वक्तव्य


मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में 7 एवं 8 मार्च, 2017 को हुए घटनाक्रमों के संबंध में लोकसभा में गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा दिया गया वक्तव्य -

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 07 मार्च, 2017 को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर मध्य प्रदेश के जिला शाजापुर में जबड़ी रेलवे स्टेशन के नजदीक गाड़ी नम्बर 59320, भोपाल-उज्जैन पैसेंजर के सामान्‍य कोच में एक विस्फोट हुआ। इस विस्फोट में 10 रेलयात्री घायल हुए और रेलवे की सम्पत्ति को भी नुकसान पहुंचा। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। फिलहाल सभी घायलों की स्थिति खतरे से बाहर है।

उपरोक्‍त घटना के संबंध में जी आर पी उज्जैन थाने में रेल गार्ड से प्राप्‍त जानकारी के आधार पर मामले की जांच के लिए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3/4 के अंतर्गत केस दर्ज किया गया है, जिसकी संख्‍या 47/17 है।

घटना की सूचना प्राप्त होते ही मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक तथा अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे तथा घटना की जांच के संबंध में प्राथमिक स्‍तर पर आवश्‍यक कार्रवाई शुरू कर दी। घटनास्थल की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि आरोपियों द्वारा विस्फोट को अंजाम देने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विस्फोटक पदार्थों से तैयार आईईडी का उपयोग किया गया था। 

घटना की जांच के संबंध में मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा केन्द्रीय एजेंसियों के साथ पर्याप्‍त तालमेल स्थापित किया गया। इसके बाद, प्राप्त सूचना के आधार पर मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा होशंगाबाद जिले के पिपरिया नामक स्थान पर वाहन जांच के दौरान 03 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। संदिग्‍धों से पूछताछ के दौरान उपरोक्‍त घटना में इनका हाथ होने की आशंका के आधार पर इन्‍हें गिरफ्तार कर लिया गया। संपूर्ण घटनाक्रम की आगे की कार्रवाई केन्द्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई है और विस्‍फोट में शामिल अन्‍य अभियुक्तों के संबंध में जानकारी एकत्रित की जा रही है।

संदिग्‍धों से की गई पूछताछ तथा अन्य उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने लखनऊ, इटावा, कानपुर और औरैया में विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। 

लखनऊ में काकोरी थाना के अंतर्गत हाजी कॉलोनी स्थित एक मकान में कानपुर निवासी मोहम्मद सैफुल्लाह उर्फ अली के किराये पर रहने की सूचना प्राप्त हुई। एटीएस उत्‍तर प्रदेश द्वारा उक्त मकान की घेराबंदी की गई और संदिग्‍ध सैफुल्लाह को गिरफ़तार करने के प्रयास किए गए। मगर उसने आत्मसमर्पण करने से इंकार कर दिया और एटीएस पर गोलीबारी शुरू कर दी। अंततः लगभग 12 घंटे के प्रयास के बाद एटीएस की टीम ने उस कमरे में प्रवेश किया जहां सैफुल्लाह छिपा हुआ था तथा फिर इसके बाद आमने-सामने हुई मुठभेड़ में इस संदिग्ध आतंकी को मार गिराया गया। मृतक के कमरे से 08 पिस्टल, 630 जिंदा कारतूस सहित डेढ़ लाख रुपये नकद, लगभग 45 ग्राम सोना, 03 मोबाइल फोन, 4 सिमकार्ड और 02 वायरलेस सेट के साथ-साथ कुछ विदेशी मुद्रा भी बरामद की गई।

घटना के संबंध में थाना लखनऊ स्थित एटीएस पुलिस थाने में अपराध संख्या 2/2017 धारा 307/121ए/122/123/124-ए आईपीसी, 3/4/25/27 आर्म्‍स एक्‍ट और 16/18/23 यूएपीए के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।

एटीएस कानपुर इकाई द्वारा जाजमउ थाना क्षेत्र से एक अन्य संदिग्‍ध को गिरफ्तार किया गया जिसके विरुद्ध अपराध संख्या 3/2017 धारा 121/121।/123/124ए आईपीसी और यूएपीए की धारा 16/18/23/38 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।

उपरोक्त के अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा इटावा और औरैया से दो अन्य अभियुक्तों को भी उपरोक्त संदिग्ध आतंकवादियों को हथियार उपलब्‍ध कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अब तक इस घटनाक्रम में कुल 6 गिरफ्तारियां हुई हैं।

उपरोक्त घटनाक्रम राज्य पुलिस और केन्द्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण है। दोनों राज्यों की पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई की बदौलत देश की सुरक्षा व्‍यवस्‍था के संबंध में मौजूदा खतरे को टालने में सफलता प्राप्त हुई है। इस प्रकरण की आगे की जांच एनआईए को सौंपी जाएगी।

आतंकवादी बुरहान के नाम पर रख दिया सडक का नाम


अलगाववादियों ने दक्षिण कश्मीर में एक सड़क मार्ग का नाम हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान के नाम पर रखा है। सडक पर बुरहान का पोस्टर भी लगाया गया है। संबंधित सुरक्षा एजेंसियां और कश्मीर विशेषज्ञ इसे कश्मीर में सुधरते हालात को फिर बिगाडने और स्थानीय युवकों को आतंकवाद की तरफ ले जाने की नई साजिश बता रहे हैं।

बुरहान के नाम पर रखी गई सडक त्राल को नवादल के रास्ते अवंतीपोर से जोडती है। बुरहान त्राल का ही रहने वाला था। आप को बता दे की, सुरक्षाबलों ने आठ जुलाई को बुरहान वानी को एक मुठभेड़ में मार गिराया था। १९९० से लेकर २००५ तक त्राल को आतंकी गतिविधियों के चलते कश्मीर का कंधार भी कहा जाता रहा है।

कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों और अलगाववादियों के साथ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने बुरहान की मौत पर कश्मीर में अलगाववादी भावनाओं को खूब भडकाया। हालांकि बुरहान के नाम पर सडक का नामकरण किए जाने की यह पहली घटना है।

हुर्रियत नेता इम्तियाज अहमद रेशी ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सडक का नाम बदलने का फैसला स्थानीय लोगों ने बैठक में लिया था। एक समारोह में मैं खुद उसमें सम्मिलित था।

अब पढ़िए #DGMO द्वारा जारी #SerjicalStrike पर पूरा प्रेस नोट


यह गंभीर चिंता का विषय है कि जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पार से आतंकवादियों की घुसपैठ लगातार जारी है, जो क्रमश: पूंछ और उड़ी में 11 और 18 सितंबर 2016 को हुए आतंकवादी हमलों के रूप में परिलक्षित हुआ है। भारतीय सेना ने इस वर्ष नियंत्रण रेखा पर करीब 20 घुसपैठ के प्रयासों को नाकाम करने में सफलता प्राप्त की है।

इन आतंकवादी हमलों और घुसपैठ की कोशिशों के दौरान हमें कई ऐसी चीजें जैसे जीपीएस और सामान मिले हैं जिनका सीधा संबंध पाकिस्तान से है। पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के रहने वाले पकड़े गये आतंकवादियों ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें प्रशिक्षण और हथियार पाकिस्तान में या पाकिस्तान के नियंत्रण वाले इलाके में मिले हैं। हमने यह मामला उच्चतम राजनयिक स्तर पर और सैन्य चैनलों के माध्यम से भी उठाया था । भारत ने अपने बयान को सत्यापित करने के लिए पाकिस्तान के इन गिरफ्तार आतंकवादियों को दूतावास सहायता की पेशकश की है। इसके साथ ही हमने यह भी प्रस्ताव दिया था कि पूंछ और उड़ी में मारे गये आतंकवादियों के उंगलियों के निशान और डीएनए के नमूने जांच के लिए पाकिस्तान को उपलब्ध करा सकते हैं।

हमारे लगातार आग्रह के बावजूद पाकिस्तान द्वारा जनवरी 2004 में की गई अपनी प्रतिबद्धता, पाकिस्तान अपनी जमीन या अपने नियंत्रण में आने वाले इलाके को भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल की इजाजत नहीं देगा, का सम्मान करना चाहिए। लेकिन नियंत्रण रेखा के पार से घुसपैठ और आतंकवादी गतिविधियों में कोई कमी नहीं आई है।

अगर क्षति सीमित था, तो यह मुख्य रूप से घुसपैठ में आतंकवादियों को निष्क्रिय करने में बहु-स्तरीय जवाबी घुसपैठ ग्रिड में तैनात हमारे सैनिकों के प्रयासों की वजह से था जिन्होंने आतंकवादियों के घुसपैठ को निष्क्रिय करने में सफलता प्राप्त किया। मौजूदा खतरे को देखते हुए भारतीय सशस्त्र बलों को अत्यधिक सतर्क कर दिया गया है।

विशिष्ट और विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कि कुछ आतंकवादी घुसपैठ करने के लिए नियंत्रण रेखा पर तैयार हैं जो जम्मू-कश्मीर और दूसरे महानगरों में आतंकवादी हमलों को अंजाम देंगे। ऐसे में भारतीय सेना ने सर्जिकल हमले करते हुए आतंकवादियों के घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम कर दिया है। हमारा यह अभियान इस पर केन्द्रित था कि ये आतंकवादी किसी भी सूरत में अपने मंसूबों में कामयाब न हो पायें ।

आतंकवादियों के खिलाफ इस अभियान के दौरान आतंकवादियों को तो नुकसान पहुंचाया ही गया साथ ही उनको समर्थन देने वालों को भी बख्शा नहीं गया है। आतंकवादियों को निष्क्रिय करने के उद्देश्य से इस काम को अंजाम दिया गया। हमें इसे आगे जारी रखने की कोई योजना नहीं है। हालांकि भारतीय सशस्त्र बल किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

मैं पाकिस्तान सेना के डीजीएमओ के साथ लगातार संपर्क में हूं और हमने उन्हें इस बारे में अवगत करा दिया है कि यह इस क्षेत्र में शांति और सौहार्द बनाए रखने की भारत की मंशा है।लेकिन किसी भी सूरत में नियंत्रण रेखा के पार से आंतकवादियों को हम अपने देश के नागरिकों पर हमले की अनुमति नहीं दे सकते। हम पाकिस्तान को जनवरी 2004 में की गई प्रतिबद्धता कि पाकिस्तान अपनी जमीन या अपने नियंत्रण में आने वाले इलाके को भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल की इजाजत नहीं देगा, को याद दिलाना चाहते हैं और हम पाकिस्तानी सेना से यह आशा करते हैं कि पाकिस्तानी सेना इस क्षेत्र से आतंकवाद के को मिटाने में हमारा सहयोग करे।


56 इंच : भारत ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकियों को मारा


भारतीय सेना ने कहा है कि उसने पाकिस्तान के साथ लगती नियंत्रण रेखा के पास चरमपंथी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक्स की हैं.

पूंछ और उरी में हुए आतंकी हमले में जवानों की शहादत का बदला भारत ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकियों को ढेर कर के लिया है. DGMO और विदेश मंत्रालय की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह खुलासा किया गया कि भारतीय फौज ने बुधवार देर रात नियंत्रण रेखा को पार करते हुए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक किया.

भारतीय सेना के डीजीएमओ लेफ़्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने कहा, "ये स्ट्राइक्स बुधवार रात को उनके अड्डों पर की गईं, जब ये पक्की जानकारी मिली कि आतंकवादी नियंत्रण रेखा पर जमा हो रहे हैं."

उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान के डीजीएनओ से इस बारे में बात की गई है और उन्हें बता दिया गया है कि ये स्ट्राइक्स ख़त्म हो चुकी हैं और फ़िलहाल इनको जारी नहीं रखा जाएगा.

लेफ़्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह का कहना था भारत किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है. सेना के डीजीएमओ का कहना था कि चरमपंथी भारत में घुसकर कई अहम शहरों पर हमला करने की योजना रखते थे.

उनके मुताबिक़ पुंछ सेक्टर में ही सिंतबर में घुसपैठ की तक़रीबन 20 कोशिशें हुई हैं जिन्हें भारतीय सेना ने नाकाम किया. उन्होंने ये भी कहा कि वो कुछ लोगों को पकड़ने में भी कामयाब हुई जिन्होंने कथित तौर पर ये माना कि उनकी ट्रेनिंग पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हुई थी. जिसके बाद उन्हें हथियार मुहैया करवाए गए.

पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि गोलीबारी रात के ढाई बजे से शुरू हुई और सुबह के आठ बजे तक जारी रही.
पाकिस्तानी सेना के मुताबिक़ नियंत्रण रेखा पर 'बिना किसी उकसावे के' भारत की तरफ़ से भिम्बर, हॉट स्प्रिंग, केल और लीपा सेक्टरों में फ़ायरिंग हुई.'

पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि "भारत की ओर से कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हुई है, ये सीमा पार से फायरिंग थी जो पहले भी होती रही है."

पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि "अगर पाकिस्तान की ज़मीन पर कोई सर्जिकल स्ट्राइक हुई तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा."

पाकिस्तान के चैनल पीटीवी के मुताबिक़, प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने 'भारत के खुले अत्याचार' की कड़ी निंदा की है और "मारे गए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी है."

नवाज़ शरीफ़ ने भारतीय सेना के हमले की निंदा की जिसमें दो पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई है. शरीफ़ ने कहा है कि शांति की हमारी ख़्वाहिश को कमज़ोरी नहीं समझा जाना चाहिए और हमारे सैनिक सीमा की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.


लश्कर-ए-तैयबा की फिदायीन थी इशरत जहां : डेविड हेडली


अहमदाबाद में पुलिस मुठभेड़ में मारी गयी इशरत जहां लश्कर-ए-तैयबा की फिदायीन थी। ये खुलासा मुंबई हमलों का आरोपी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने की। एनआईए टीम की शिकागो दौरे के समय हेडली ने ये खुलासा किया। इशरत की लश्कर-ए-तैयबा में खुंखार आतंकी मुजम्मिल ने की थी।

2004 में इशरत जहां के मुठभेड़ पर गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह और गुजरात पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा था। हेडली के इस खुलासे के बाद इस मुद्दे पर चल रही राजनीति पर विराम लग सकता है। इशरत जहां के साथ मुठभेड़ में दो और आतंकी मारे गए थे जो पाकिस्तानी मूल के थे।

26/11 आतंकी हमले की सुनवाई कर रही सत्र अदालत ने पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली को सरकारी गवाह बनने की इजाजत दे दी है। अदालत ने उसे कुछ शर्तो पर सजा से माफी दे दी है। मुंबई आतंकी हमले के अभियुक्त हेडली को अमेरिका से यहां की अदालत में गुरुवार शाम वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये पेश किया गया। इस दौरान हेडली ने सरकारी गवाह बनने के बदले सजा से माफी की मांग की। इस पर अभियोजन पक्ष ने कहा कि उसे कुछ शर्तो के साथ हेडली का प्रस्ताव मंजूर है।

हेडली को अब अगले साल आठ फरवरी को अभियोजन पक्ष के गवाह के तौर पर वीडियो लिंक के जरिये अदालत में पेश किया जाएगा। उसके बयान से हमले के पीछे पाकिस्तानी आतंकियों की भूमिका बेनकाब होने की उम्मीद है।

लश्कर आतंकी को मुंबई हमलों के सिलसिले में 11 मामलों में अभियुक्त बनाया गया है। उसने अपने खिलाफ आरोपों को स्वीकार कर लिया है। हेडली ने कहा कि मैं इन अपराधों में अपनी भूमिका स्वीकार करता हूं। मैं अदालत में गवाह के तौर पर हाजिर होने के लिए भी तैयार हूं।लश्कर आतंकी ने कहा कि अगर अदालत से मुझे माफी मिले तो मैं इस पूरी घटना के संबंध में सवालों का जबाव देने के लिए तैयार हूं। इस मामले में सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने भी अदालत को बताया कि हेडली माफी के बदले गवाह बनने के लिए तैयार है। इसके बाद निकम ने जांच अधिकारियों से सलाह-मशविरे के लिए कुछ वक्त मांगा। इस पर अदालत को आधे घंटे के लिए स्थगित कर दिया गया।

हेडली ने अदालत को बताया कि इसी तरह के आरोपों के तहत मुझे अमेरिकी अदालत में गुनहगार ठहराया गया था। उल्लेखनीय है कि अमेरिकी अदालत पहले ही मुंबई हमलों के लिए हेडली को 35 साल कैद की सजा सुना चुकी है। मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को हुए हमलों में लगभग 170 लोग मारे गए थे। हेडली अमेरिकी अदालत के सामने पहले ही स्वीकार कर चुका है कि उसने कई बार मुंबई का दौरा किया था और ये दौरे हमलों की योजना से जुड़े थे।

मुस्लिम आक्रान्ताओं के नाम वाले साइन बोर्डो पर कालिख पोती

मुस्लिम शासकों और आक्रान्ताओं के नाम पर रखी गई सड़कों के नाम वाले रोड साइन पर हिंदू संगठन शिव सेना हिंदुस्‍तान ने कालिक पोत दी। इसके अलावा उस पर पोस्‍टर भी चिपका दिए गए। पोस्‍टर में लिखा था भारत में इस्‍लामीकरण मंजूर नहीं। सफर में मुश्‍िकलें आएं तो हिम्‍मत बढ़ती है। कोई अगर रास्‍ता रोके तो जरूरत और बढ़ती है। जय हिंद! जय भारत!

शिव सेना हिंदुस्‍तान के नाम से लगाए गए इन पोस्‍टरों में राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष के रूप में राजिंदर सिंह, राष्‍ट्रीय महासचिव चरण सिंह, राष्‍ट्रीय सचिव दिनेश कुमार, सचिव विनय सोनकर का नाम लिखा है। संगठन के अध्‍यक्ष राजिंदर सिंह ने बताया कि करीब 17 सदस्‍यों ने तीन टीमों में बंटकर इस अभियान को 13-14 मई की रात में 11 से एक बजे के बीच पूरा किया।

यह पूछे जाने पर कि ऐसे करने से उन्‍हें पुलिस कार्रवाई का डर नहीं लग रहा है। राजिंदर ने कहा कि उन्‍हें शिकायत दर्ज करने दें। यदि देश का कानून हमें दोषी पाता है, तो हम सजा भुगतने के लिए तैयार हैं। हमने कोई वास्‍तविक नुकसान नहीं किया है। यह प्रतीकात्‍मक नुकसान है।

पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार को हम इस बारे में कई बार पत्र लिख चुके हैं। हम इस देश जिसे हिंदुस्‍तान कहते हैं, वहां मुस्लिमों के नाम पर सड़कों का नाम रखने का विरोध दर्ज करा चुके हैं। सभी हिंदू अब नरेंद्र मोदी जैसी हमारे नेता की ओर देख रह हैं और उम्‍मीद है कि वह हमारी चिंता को लेकर कुछ समाधान जरूर करेंगे।

सरेंडर आतंकवादियों के सहारे पाक फैला रहा घाटी में आतंकवाद - भाजपा

प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि आतंकवादियों के पुनर्वास का सीधा फायदा उठाने में जुटा पाकिस्तान सरेंडर आतंकवादियों के सहारे राज्य में हालात बिगाड़ने की कोशिशों में जुटा है। आतंकवाद के प्रति स्थानीय सहयोग में कमी को देखते हुए नेपाल मार्ग से राज्य में आ रहे आतंकवादियों का अपने मकसद के लिए इस्तेमाल करने के प्रयास कर रहा है।

भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य व मुख्य प्रवक्ता डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि खुफिया एजेंसियों को इसकी पुख्ता जानकारी होने के बाद भी राज्य सरकार पुनर्वास नीति के नाम पर राजनीति कर रही है। यह नीति बनाने वाली नेशनल कांफ्रेंस-कांग्रेस सरकार को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को दांव पर लगाकर 400 आतंकवादी नेपाल मार्ग से आकर राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं। पुनर्वास को लेकर राज्य, केंद्र सरकार की नीयत संदिग्ध है। जिस नीति को सरकार की मंजूरी मिली थी, उसे नेपाल मार्ग से वापसी को कोई जिक्र नहीं था।

पुनर्वास नीति के नाम पर लोगों को गुमराह किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि तय की गई शर्तो के अनुसार वापसी के बाद उन पर पूरी नजर रखनी थी। न सिर्फ उनके राज्य वापसी के तरीके से समझौता किया गया अपितु उनके आने के बाद सुरक्षा दृष्टि से उठाए जाने वाले कदम भी नजरअंदाज कर दिए गए।

भाजपा नेता ने कहा कि इन आतंकवादियों के साथ कश्मीर में हजारों ऐसे सरेंडर आतंकवादी है जो सजा काटने के बाद अब सड़कों पर हैं। अगर पाकिस्तान फिर से उन्हें बरगलाने में कामयाब हो गया तो आने वाले समय में हालात बद से बदतर हो जाएंगे। आइएसआइ पहले ही अगले वर्ष अफगान आतंकवादियों को राज्य में घुसाने की तैयारी में है।

सोहराबुद्दीन एक आतंकवादी था, धर्मात्मा नहीं ... (एक बार जरुर पढ़े)


सोहराबुद्दीन को एक दिन इसी तरह मरना था। पुलिस उसे नहीं उड़ाती, तो कोई महात्मा या धर्मात्मा किस्म का सामान्य व्यक्ति उसे गोली से भूनने को मजबूर हो जाता। राजस्थान में विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया के मामले में सबसे ज्यादा गौर करने लायक बात यह है कि सीबीआई नामक सरकारी तोता आखिर किसके लिए उनको अपराधी साबित करने पर तुला हुआ है। एक दुर्दांत और कमीने किस्म का कुख्यात, अपराधी सोहराबुद्दीन शेख। तो एक तरफ राजनीति में मानवीय  मूल्यों, आदर्श एवं नैतिकता की सर्वश्रेष्ठ मिसाल गुलाब चंद कटारिया। दोनों में कोई तुलना ही नहीं। हमारी कांग्रेस के नेता अकसर अपने भाषणों में मुसलमानों के अपराध को कम साबित करने की कोशिश में अकसर कहते रहते हैं कि अपराधी का कोई धरम नहीं होता। लेकिन होता है। नहीं होता, तो गुलाब चंद कटारिया जैसे निष्पाप, निष्कलंक और निरपराध व्यक्ति को फांसने से पहले सोहराबुद्दीन जैसे दुर्दांत अपराधी के पाप भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

देश भर में इस तरह का माहौल बन गया है जैसे, सोहराबुद्दीन कोई आपकी हमारी तरह सामान्य आदमी था। देश की सरकार ने भले ही छुपाया है, पर आइए, अपन बताते हैं। सोहराबुदीन शेख हमारे देश के बहुत सारे कांग्रेसी नेताओं की याददाश्त में बहुत ही मासूम और एक छोटे मोटे चोर के रूप में दर्ज है। 26 नवंबर 2005 को गुजरात और राजस्थान पुलिस के एक जॉइंट ऑपरेशन में सोहराबुद्दीन को गोलियों से उड़ा दिया गया। उसने राजस्थान और गुजरात के मार्बल व्यवसायियों से बहुत बड़ी बड़ी फिरौती वसूली का धंधा जोर शोर से शुरू कर दिया था। असल में सोहराबुदीन एक आतंकवादी था और जिसके खिलाफ खतरनाक हथियारों की तस्करी व रखने के केस चल रहे थे। उसके अलावा विभिन्न आतंकवादी गतिविधियां चलाने तथा क़त्ल करने तथा करवाने के भी मुक़दमे थे। उस पर कुल 56 मामले दर्ज हैं। इसके अलावा गुजरात के सीएम को मारने की साजिश भी रच रहा था।

सोहराबुदीन मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के एक गाँव का रहने वाला था। वहां वो एक ट्रक ड्राईवर था। इस दौरान वह छोटा दाऊद और बाबू पठान नाम के दो दूसरे ड्राइवरों के संपर्क में आया। ये दोनों अंडरवर्ल्ड डान दाऊद इब्राहीम के लिए हथियारों की तस्करी करते थे। उनके साथ सोहराबुद्दीन ने भी हथियारों की तस्करी शुरू कर दी। और तस्करी का पैमाना इतना बड़ा था कि सोहराबुद्दीन ने अपने गांव में हथियारों का गोदाम बना डाला। उसके इस गोदाम से पुलिस छापे के दौरान दो एके – 56 राइफलें और कुल 24 एके – 47 रायफलें बरामद हुई। मुठभेड़ के बाद सोहराबुद्दीन के कपड़ों से मिले दो सिम कार्ड पाकिस्तान के कराची निकले। दोनों की कॉल डिटेल साबित करती है कि सोहराबुद्दीन उन दोनों का इस्तेमाल काफी लंबे समय से कर रहा था। इस सिम कार्ड के जरिए सोहराबुद्दीन पाकिस्तान में दाऊद के करीबियों एवं लश्कर के लोगों से बात किया करता था। कॉल डीटेल्स से साबित होता है कि पुलिस से जिस मुठभंड़ में सोहराबुद्दीन मारा गया, उससे कुछ वक्त पहले ही उसकी कई बार कराची बात हुई थी। देश में हुए विभिन्न विस्फोटो तथा आतंकवादी हमलों में इसका हाथ था। 14 फरवरी 1998 को हुए कोयम्बटूर ब्लास्ट में विस्फोटक पहुंचाने में सोहराबुद्दीन की भूमिका जांच में साबित भी हो चुकी है।

पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद जब सोहराबुदीन की लाश उसके गांव पहुंची तो लोगों ने भारत विरोधी नारे लगाये, और पाकिस्तान की भरपूर जय जय कार हुई। लोगों ने सोहराबुद्दीन की लाश का एक जेहादी की तरह स्वागत किया। यही नहीं, हथियारों की स्मगलिंग के दौरान सोहराबुद्दीन ने जो बहुत सारे तोप-तमंचे अपने गांव वालों को तोहफे में दिए थे, उनसे लोगों ने गोलियां भी चलाई। सोहराबुद्दीन की यह असलियत सरकार के साए में छुप गई है। सरकारी तोता हमारे निष्कलंक राजनेताओं को लपेटने की कोशिश में कितनी भी साजिशें रचे। पर, सबसे पहले यह भी जान लेना जरूरी है कि सोहराबुद्दीन शेख कोई धर्मात्मा नहीं था। सोहराबुद्दीन जैसे कमीनों के लिए आदर्श पुरुषों को फंसाने से कोई मतलब नहीं निकलेगा। सोहराबुद्दीन को तो एक दिन इसी तरह मरना था।

निरंजन परिहार

देशद्रोही ओवैसी को आखिर गिरफ्तार किया गया


भड़काऊ भाषण देने वाला देशद्रोही मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) का नेता और अकबरुद्दीन ओवैसी को देर से सही, लेकिन गिरफ्तार कर लिया गया है। इससे पहले आदिलाबाद जिले के निर्मल टाउन पुलिस का एक दल मंगलवार सुबह अकबरुद्दीन के निवास स्थान पहुंचा और उसे जांच के लिए गांधी अस्पताल ले जाया गया। विशेषज्ञों का एक दल लगभग तीन घंटे तक उसकी जांच करता रहा। इसके बाद सामने आया कि ओवैसी को हर्निया है और उसकी एक जांघ में गोली लगी है, जिसकी वजह से वो ज्‍यादा चल फिर नहीं सकता हैं। इसके बाद जांच अधिकारी ने उसे सुनवाई के लिए फिट पाया और कुछ ही देर बाद खबर आई कि ओवैसी को अरेस्‍ट कर लिया गया।   

हैदराबाद में गांधी अस्पताल के बाहर अकबरुद्दीन ओवैसी के समर्थकों ने तोड़फोड़ की थी। समर्थकों ने उस समय हंगामा मचाया जब मंगलवार को ओवैसी का मेडिकल टेस्ट हो रहा था। यहां सुबह से ही हजारों की तादाद में ओवैसी के समर्थक जमा थे। दोपहर को ओवैसी समर्थकों ने अस्पताल के बाहर एक बस पर हमला किया और तोड़फोड़ की। समर्थकों को काबू करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। ओवैसी ने पुलिस के सामने प्रस्तुत होने के लिए चार दिन का वक्त मांगा था और अपने खिलाफ दर्ज हुए मामलों में राहत पाने के लिए वह हाईकोर्ट की शरण में भी गए था। पुलिस मंगलवार सुबह उसे उसके बंजारा हिल्स स्थित घर से हेल्थ चैकअप के लिए गांधी अस्पताल ले गई जहां उसका मेडिकल चैकअप किया गया। 

ओवैसी ने 24 दिसंबर को हैदराबाद के आदिलाबाद में हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिया था, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद 25 दिसंबर को ओवैसी लंदन चला गया। इस बीच उसका जहरीला भाषण यू ट्यूब पर आ गया और देखते ही देखते बवाल मचना शुरू हो गया। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए आंध्र प्रदेश की अदालत ने ओवैसी के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज किया, लेकिन ओवैसी लंदन भाग गया था और पुलिस उसके घर पर नोटिस चिपका कर लौट आई। इसके बाद 7 जनवरी यानी सोमवार को ओवैसी हैदराबाद लौटा तो समर्थकों ने बड़े जोर शोर से उसका स्‍वागत किया, लेकिन आंध्र प्रदेश की पुलिस मूक दर्शक बनी रही। इसके बाद ओवैसी ने पुलिस से चार दिन का समय मांगा और फिर हाईकोर्ट में गिरफ्तारी के खिलाफ अपील डाल दी। आंध्र प्रदेश्‍ा पुलिस पर सवाल उठने लगे थे तो अगले दिन यानी मंगलवार को ओवैसी का मेडिकल टेस्‍ट कराया गया। मेडिकल टेस्‍ट में सामने आया कि ओवैसी को हर्निया की शिकायत है। उसके एक जांघ में गोली लगी है, जिसकी वजह से वो ज्‍यादा चल फिर नहीं सकता हैं। तब जाकर उसे गिरफ्तार किया गया. 

अकबरउद्दीन ओवैसी ने भारतीय न्‍याय व्‍यवस्‍था पर सवाल उठाए और मुंबई हमलों के आरोपी अजमल आमिर कसाब की तुलना गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी से कर दी। ओवैसी ने कहा, ‘क्‍या नाम है उस बच्‍चे का...कसाब, वो पाकिस्‍तान से आता है। हथियारों के साथ आता है और हिंदुस्‍तान के 200 मासूमों की जान लेता है। हिंदुस्‍तान में उसे फांसी दी जाती है, लेकिन नरेंद्र मोदी जो 2000 मुस्लिमों की जान लेता है। उसे पीएम की गद्दी देने की तैयारी की जा रही है।’ ओवैसी ने बाबरी मस्जिद से लेकर उन सभी मुद्दों पर जहर उगला, जिनसे देश की शांति भंग हो सकती है। ओवैसी ने विशेष तौर पर मोदी को निशाना बनाया और उन्‍हें गुजरात आने की चुनौती भी दे डाली।

पुलिस ने ओवैसी पर गैर जमानती धाराओं, 121, 153A और 295A के तहत मामला दर्ज किया है, ऐसे में उसे चार दिन तक क्‍यों दिया गया? दूसरी ओर मौका देखकर ओवैसी ने हाईकोर्ट में अपनी गिरफ्तारी रोकने के लिए याचिका डाल दी थी, लेकिन वो इसमें कामयाब नहीं हो सका।  

आतंकवादी के समधी को प्रधानमंत्री कार्यालय की अनुशंसा पर वीजा


पूर्व क्रिकेटर और माफिया सरगना दाउद इब्राहिम के समधी जावेद मियांदाद को दिल्ली आने के लिए वीजा देने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भाजपा और शिवसेना के अलावा कांग्रेस के एक सांसद ने भी मियांदाद को वीजा देने का कड़ा विरोध किया है। विशेषज्ञ भी दाउद के समधी को वीजा दिए जाने पर सवाल खड़े कर रहे हैं। 

विशेषज्ञों का सवाल है कि क्या भारत सरकार मुंबई के जख्म को भूल गई है। खबर यह भी है कि मियांदाद को कोलकाता में खेले गए दूसरे वनडे के बाद सम्मानित किया जाना था लेकिन वह नहीं आए। पीसीबी के चीफ जका अशरफ ने कहा है कि जहां तक मुझे जानकारी है उन्होंने वीजा के लिए आवेदन नहीं किया है। इसलिए वह नहीं आए। 

खबर है कि भारत सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों की आपत्ति के बावजूद मियांदाद को वीजा दिया है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक मियांदाद को वीजा देने का फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय के स्तर पर हुआ था। एक खुफिया अधिकारी ने बताया कि मियांदाद को वीजा देने का फैसला पूरी तरह से राजनीतिक और कूटनीतक है। दिसंबर में पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक की भारत यात्रा को मंजूरी दी गई थी। उसी आधार पर मियांदाद को वीजा देने का फैसला लिया गया। खुफिया एजेंसिया इस कदम से हैरान नहीं है। वे भारत सरकार के फैसले से खुश नहीं है।

एक खुफिया अधिकारी के मुताबिक 2005 में जब दाउद इब्राहिम की बेटी की शादी मियांदाद के बेटे से हुई थी तब से उसका परिवार खुफिया एजेंसियों की नजर में था। तब सैद्धांति तौर पर यह फैसला लिया गया था उन्हें भारत आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। तब से इस मामले में कुछ भी बदलाव नहीं हुआ है। हमें उन्हें भारत आने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। मियांदाद को भारत आने से रोकने का फैसला तब के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और आईबीए के प्रमुख ईएसएल नरसिम्हन ने लिया था। नारायणन इस समय पश्चिम बंगाल के राज्यपाल हैं और नरसिम्हन आंध्र प्रदेश के।

हाफिज सईद के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं - मलिक


पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक ने कहा कि मुंबई हमले की साजिश रचने वाले हाफिज सईद को गिरफ्तार करने के लिए भरोसेमंद सबूत नहीं थे और उसने बाबरी मस्जिद कांड का हवाला देते हुए उसकी तुलना नवंबर 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले से कर दी । 

भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सरल वीजा समझौते को लागू करने पहुंचे मलिक पाकिस्तानी सेना द्वारा करगिल हीरो कैप्टन सौरभ कालिया को दी गई यातना के मुद्दे को भी खारिज करते नजर आए । 


भारत की ओर से लगातार डाले जा रहे दबाव के बाद भी पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक ने 26/11 के मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई का कोई संकेत नहीं दिया है। दिल्ली पहुंचते ही मलिक ने रिपोर्टर्स से कहा, 'हाफिज सईद से हमें कोई 'प्यार' नहीं है। यहां से जाने से पहले यदि मुझे आज भी कोई सूचना मिलती है तो मैं उसकी गिरफ्तारी का आदेश दूंगा।'

मलिक ने कहा कि सईद के खिलाफ भारत के दिए सुबूत पुख्ता नहीं हैं। उनके अनुसार हमले के दौरान एकमात्र जिंदा पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब का बयान सईद के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त नहीं है। यहीं नहीं, भारत विरोधी आतंकियों को पाकिस्तानी सरकार के संरक्षण से इनकार करते हुए उन्होंने इसके लिए सरकार से इतर के कुछ असामाजिक तत्वों को जिम्मेदार ठहराया। 

मलिक ने सईद पर कहा कि बहुत दुष्प्रचार चल रहा है और पाकिस्तान पर काफी दबाव है। उन्होंने कहा, 'मुझे केवल सूचनाओं वाले डोजियर मिल रहे हैं।' उन्होंने कहा कि सईद तीन बार गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन अदालत ने उसके खिलाफ सुबूतों को खारिज कर दिया।

इससे पहले भारत रवाना होने से पहले मलिक ने कहा कि वह अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पाकिस्तान यात्रा का सरकारी न्योता फिर से सौंपेंगे। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी पहले ही सिंह को पाकिस्तान यात्रा का न्योता दे चुके हैं। मलिक ने दिल्ली के लिए रवाना होने से पूर्व मीडिया को यह बात कही। उन्होंने कहा, 'मैं भी प्रधानमंत्री सिंह को हमारे नेतृत्व की ओर से यात्रा का न्योता दूंगा।'

लश्कर-ए-तैयबा ने माता वैष्णो देवी मंदिर पर हमले की धमकी दी


आतंकी गुट लश्कर-ए-तैयबा ने माता वैष्णो देवी के भवन व कटड़ा के आधार शिविर पर हमले की धमकी दी है। कटड़ा स्थित एक निजी होटल के मैनेजर को भेजी ई-मेल में लश्कर ने लिखा है कि वह अजमल कसाब की फांसी का हिसाब लेगा, अगर इस हमले को रोक सकते हो तो रोक लो। 26/11 की बरसी से ठीक पहले लश्कर की इस धमकी को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर सभी संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। कसाब को फांसी दिए जाने के बाद लश्कर और तालिबान पहले ही भारतीयों पर हमले की धमकी दे चुके हैं। पुलिस यह भी पता लगाने में जुट गई है कि वाकई ई-मेल लश्कर ने ही भेजा है या किसी की शरारत है।

जानकारी के अनुसार, शनिवार रात कटड़ा-रियासी मार्ग पर स्थित एक निजी होटल के मैनेजर को उसके लैपटॉप पर लश्कर के नाम से धमकी भरा ई-मेल आया। इसमें कसाब की मौत का बदला लेने के लिए वैष्णो देवी भवन व आधार शिविर को उड़ाने की बात कही गई है। होटल मैनेजर ने तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी। देर रात ही कटड़ा से भवन तक सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई।

ऊधमपुर-रियासी रेंज के डीआइजी जगजीत कुमार सहित पुलिस व सुरक्षा एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी कटड़ा पहुंच गए। रविवार लैपटॉप को जब्त कर सुरक्षा एजेंसियां ई-मेल की जांच में जुटी हैं। जम्मू से आइबी की एक टीम भी कटड़ा पहुंच गई है। आइजी दिलबाग सिंह ने बताया कि धमकी भरा ई-मेल बेंगलूर से आया है। आगे की जांच के लिए टीम जल्द बेंगलूर रवाना होगी। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

डीआइजी जगजीत कुमार ने कहा कि जल्द ही पता लगा लिया जाएगा कि ई-मेल किसने भेजा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए भवन, यात्रा मार्ग व आधार शिविर कटड़ा में चौकसी बेहद मजबूत कर दी गई है। गौरतलब है कि 2003 में हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी मुहम्मद यूसुफ ने बाण गंगा के समीप गुलशन कुमार के लंगर पर ग्रेनेड से हमला किया था। इसमें सात श्रद्धालु मारे गए थे और 50 घायल हुए थे।

कंधार विमान अपहरण का आरोपी मेहराजुद्दीन गिरफ्तार


जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एयर इंडिया के IC-814 विमान अपहरण कांड के एक आरोपी को किश्तवाड़ से गिरफ्तार किया है। मेहराजुद्दीन उर्फ जावेद नाम का ये संदिग्ध आतंकी कश्मीर का ही रहने वाला है और युनाइटेड जेहाद काउन्सिल का फंड ऑर्गेनाइजर है।

लश्कर का सक्रिय मिलिटेंट रह चुका मेहराजुद्दीन 1992 में कश्मीर से पाकिस्तान गया था और ये मौलाना मसूद अजहर का दायां हाथ भी रह चुका है। यह बुधवार देर रात ही नेपाल के रास्ते जम्मू पहुंचा था और रात को किश्तवाड़ जा रहा था। जहां नाके पर उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस को पहले ही मेहराजुद्दीन के आने की खुफिया जानकारी मिल चुकी थी।

खबर है कि मेहराजुद्दीन लश्कर में नई भर्तियां करने के लिए भारत आया था। विमान अपहरण कांड के बाद वह नेपाल के रास्ते पाक चला गया था जिसके बाद पुनः उसने नेपाल में अपना ठिकाना बनाया था।

कश्मीरी पंडितों को सात दिन के अंदर वादी छोड़ने का फरमान

उमर अब्दुल्ला सरकार पंडितों की वापसी लायक माहौल बनने के लाख दावे करे, लेकिन आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने कश्मीरी पंडितों को सात दिन के अंदर वादी छोड़ने का फरमान सुनाया है।

इस धमकी के बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर संदिग्ध तत्वों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है। इस बीच, आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के दोनों गुटों ने कश्मीरी विस्थापितों को सुरक्षा का यकीन दिलाते हुए कहा कि वह इस धमकी को गंभीरता से न लें। 

यह किसी सुरक्षा एजेंसी की कश्मीरी पंडितों और कश्मीरी मुस्लिमों के बीच मतभेद पैदा करने की साजिश है। विभिन्न आतंकी संगठनों के साझा मंच यूनाइटेड जेहाद काउंसिल और हिजबुल मुजाहिदीन के सुप्रीमो सल्लाहुदीन ने भी कश्मीरी पंडितों को मिली इस धमकी की निंदा करते हुए इसे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की साजिश करार दिया है।

आतंकी संगठन ने यह धमकी पोस्टर लगाकर नहीं बल्कि डाक के जरिये एक खत भेजकर दी है। यह खत बडगाम जिले के शेखपोरा इलाके में कश्मीरी पंडितों के लिए बनाई गई आवासीय कॉलोनी के अध्यक्ष के नाम भेजा गया है। जैश कमांडर जुबैर ने इस खत में कश्मीरी पंडितों को सात दिन के अंदर कश्मीर छोड़ने का फरमान सुनाया है। 

खत में कश्मीर में गैर इस्लामिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर जेहाद को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। इस धमकी के बाद न सिर्फ शेखपोरा में बल्कि वादी के अन्य हिस्सों में रह रहे कश्मीरी पंडितों में भी भय पैदा हो गया है।

दिल्ली विस्फोट: हिज्बुल के आतंकवादी शाकिर हुसैन की पत्नी तस्लीमा गिरफ्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय परिसर में पिछले साल हुए विस्फोट के सिलसिले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी.एनआईए. ने जम्मू.कश्मीर के किश्तवाड जिले में हिज्बुल मुजाहिदीन के एक आतंकवादी की पत्नी समेत उसके परिवार के तीन सदस्यों को आज हिरासत में ले लिया.

सूत्रों ने बताया कि हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादी शाकिर हुसैन की पत्नी तस्लीमा बी. मां और ससुर को जिले के टाटापानी इलाके में हिरासत में लिया गया1 उनसे दिल्ली उच्च न्यायालय विस्फोट मामले में इस वांछित फरार आतंकवादी की जानकारी हासिल करने के लिए पूछताछ की जा रही है.

उन्होंने बताया कि एनआईए टीम और स्थानीय पुलिस इस मामले में कथित भूमिका के लिए किश्तवाड क्षेत्र में हिज्बुल मुजाहिदीन के तीन अतिवांछित आतंकवादियों.. छोटा हाफिज. जुनैद और अकरम की तलाश कर रही है1 उनका पता लगाने के लिए कई तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं.

एनआईए ने इस मामले में एक किशोर समेत तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है. दिल्ली उच्च न्यायालय परिसर में पिछले साल सितम्बर में हुए विस्फोट में 15 व्यक्तियों की मौत हो गई थी और 80 अन्य घायल हो गए थे1

फ़रार सिमी आतंकी मंजर इमामुद्दीन के घर की होगी कुर्की

झारखंड की राजधानी रांची में बरियातू स्थित अपने घर से फ़रार सिमी आतंकी मंजर इमामुद्दीन के घर की शीघ्र ही नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेन्सी एनआईए के अनुरोध पर कुर्की की जायेगी.रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रवीण कुमार ने गुरुवार को कहा कि एनआईए के दल ने यहां बरियातू स्थित सिमी आतंकी मंजर की गिरफ्तारी के प्रयास किये लेकिन वह उसके हाथ नहीं लग सका.

अब एनआईए ने जिला पुलिस से उसके घर की कुर्की की कार्रवाई के लिए अनुरोध किया है जिसके लिए वह शीघ्र हैदराबाद की अदालत से कुर्की का आदेश लेकर रांची पुलिस को भेजेगा.प्रवीण कुमार ने बताया कि जैसे ही एनआईए द्वारा अदालती आदेश जिला पुलिस को मिलेगा मंजर के घर की कुर्की की जायेगी.

पिछले सप्ताह मुंबई विस्फ़ोटों के बाद उनमें संलिप्तता के शक पर एनआईए की टीम मंजर से पूछताछ के लिए यहां आई थी लेकिन मंजर के परिजनों ने उसे यहां से भगा दिया और उसे एनआईए के हाथ नहीं पडने दिया.उन्होंने दावा कि मंजर निर्दोष है और उसके अपराध का प्रमाण देने पर ही उसे एनआईए के हवाले किया जायेगा. जिसके बाद एनआईए का दल बैरंग वापस चला गया था.

मंजर पर अहमदाबाद की जेल में बंद इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी दानिश के साथ मिलकर सिमी में युवकों की भर्ती करने और आतंक फ़ैलाने का आरोप है.

उमर अब्दुल्ला की आतंकियों से अपील - घाटी में आतंक सर्दियों में फैलाएं

सीमा पार से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ की खबरों के बीच राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि घाटी में पर्यटकों को कोई खतरा नहीं हैं। उन्होंने आतंकियों से भी कहा कि वे गर्मियों में अशांति फैलाएं। यदि ऐसा करना है तो सदियों में करें।

उन्होंने बताया कि पर्यटकों से घुसपैठ के संबंध को जोड़ना गलत है। अगर आपको यह लगता है कि घुसपैठ हुई है और पर्यटकों को जाने की जरूरत है तो यह गलत है। अगर वे (घुसपैठिए) आए हैं तो हम उनसे निपटेंगे। उन्होंने कहा कि घाटी में पर्यटकों को कोई खतरा नहीं हैं।

खबरों के मुताबिक कुपवाड़ा और गुरेज सेक्टर के जरिए 35 से 40 आतंकवादियों ने घाटी में प्रवेश किया है और इनमें से अधिकतर लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य है।

मुख्यमंत्री ने अलगाववादियों को कहा कि आप गर्मियों में कश्मीर में क्यों अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, जब कश्मीर में भारी संख्या में पर्यटक आ रहे हैं? उन्होंने कहा कि अगर आप यहां अशांति फैलाना चाहते है तो यह काम सर्दियों में करें। आप गर्मियों में यह क्यों करते है? यहां बहुत से ऐसे लोग हैं जो कि पर्यटकों से होने वाली आमदनी से कमाई करते हैं। आप उनकी जिंदगी बर्बाद करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं।

कसाब की फांसी पर पक्की मुहर, दो बरी

मुंबई हमलों में गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकी अजमल आमिर कसाब को दी गई फांसी की सजा पर सुनवाई करते हुए सोमवार को बांबे हाई कोर्ट ने फांसी के फैसला को बरकरार रखा है। आज बांबे हाईकोर्ट में जस्टिस रंजना देसाई और आर.वी.मोरे की बेंच ने कसाब की फांसी पर पक्की मुहर लगा दी।

इससे पहले कसाब की वकील फरहाना शाह ने कहा, 'वह बहुत कमजोर और थका हुआ लगता है। शायद वह स्वस्थ नहीं है। वह मुश्किल से किसी से बात करता है और उसकी वे आदतें बदल गई हैं, जिसके लिए वह जाना जाता है।'

शाह ने विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सोमवार को बंबई हाई कोर्ट में कसाब की पेशी से संबंध में ऑर्थर रोड स्थित सेंट्रल जेल में उससे छोटी सी मुलाकात की थी। आज अदालत ने इस मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाया है।

फरहाना ने कहा कि कसाब बहुत गुमसुम, हतोत्साहित और उदास दिख रहा था। फरहाना ने कहा, 'वह कोई अखबार चाहता था, लेकिन मेरे पास अखबार नहीं था। उसका घमंड गायब हो गया है। जब मैंने उससे कहा कि फैसले के समय विडियो कैमरे के सामने उसे मौजूद रहना है, तो वह तुरंत तैयार हो गया।'

उसके पूर्व के स्वभाव में यह बड़ा बदलाव था। इसके पहले एक शुरुआती सुनवाई के दौरान उसने हिंसक रुख दिखाया था। उसने तब विडियो कैमरे पर थूक दिया था। उसने फांसी की सजा को अस्वीकार कर दिया था और खुद को अमेरिका भेजने की मांग की थी।

गौरतलब है कि लोअर कोर्ट के स्पेशल जज एम.एल.ताहिलयानी ने मई 2010 में कसाब को फांसी की सजा सुनाई थी।

मुबंई हमलों की रैकी में मदद करने के आरोपी बनाए गए शबाउद्दीन और फहीम अंसारी को कोर्ट ने बरी कर दिया है। मामले की जांच कर रही एटीएस फहीम अंसारी और शबाउद्दीन के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाई। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में इन दोनों भारतीय आरोपियों को बरी कर दिया है।


मुंबई हमलों में गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकी अजमल आमिर कसाब को दी गई फांसी की सजा पर सुनवाई करते हुए सोमवार को बांबे हाई कोर्ट ने फांसी के फैसला को बरकरार रखा है। आज बांबे हाईकोर्ट में जस्टिस रंजना देसाई और आर.वी.मोरे की बेंच ने कसाब की फांसी पर पक्की मुहर लगा दी।

इससे पहले कसाब की वकील फरहाना शाह ने कहा, 'वह बहुत कमजोर और थका हुआ लगता है। शायद वह स्वस्थ नहीं है। वह मुश्किल से किसी से बात करता है और उसकी वे आदतें बदल गई हैं, जिसके लिए वह जाना जाता है।'

शाह ने विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सोमवार को बंबई हाई कोर्ट में कसाब की पेशी से संबंध में ऑर्थर रोड स्थित सेंट्रल जेल में उससे छोटी सी मुलाकात की थी। आज अदालत ने इस मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाया है।
फरहाना ने कहा कि कसाब बहुत गुमसुम, हतोत्साहित और उदास दिख रहा था। फरहाना ने कहा, 'वह कोई अखबार चाहता था, लेकिन मेरे पास अखबार नहीं था। उसका घमंड गायब हो गया है। जब मैंने उससे कहा कि फैसले के समय विडियो कैमरे के सामने उसे मौजूद रहना है, तो वह तुरंत तैयार हो गया।'

उसके पूर्व के स्वभाव में यह बड़ा बदलाव था। इसके पहले एक शुरुआती सुनवाई के दौरान उसने हिंसक रुख दिखाया था। उसने तब विडियो कैमरे पर थूक दिया था। उसने फांसी की सजा को अस्वीकार कर दिया था और खुद को अमेरिका भेजने की मांग की थी।

गौरतलब है कि लोअर कोर्ट के स्पेशल जज एम.एल.ताहिलयानी ने मई 2010 में कसाब को फांसी की सजा सुनाई थी।

मुबंई हमलों की रैकी में मदद करने के आरोपी बनाए गए शबाउद्दीन और फहीम अंसारी को कोर्ट ने बरी कर दिया है। मामले की जांच कर रही एटीएस फहीम अंसारी और शबाउद्दीन के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाई। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में इन दोनों भारतीय आरोपियों को बरी कर दिया है।

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