#TheKashmirFiles पत्नी को खिलाए पति के खून से सने चावल, देखिए कश्मीरी हिंदुओं की दर्दनाक दास्तां


कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार और पलायन पर बेस्ड फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' (The Kashmir Files) इन दिनों चर्चा में है। थिएटर्स से फिल्म देखकर बाहर निकलने वाले लोग अपने आंसू नहीं रोक पा रहे हैं। ऐसे कई वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि बॉलीवुड में पहली बार किसी डायरेक्टर ने इतनी हिम्मत दिखाते हुए 32 साल पहले कश्मीरी हिंदुओं के साथ हुई बर्बरता की सच्चाई दिखाने की कोशिश की है। वहीं, दो साल पहले नवंबर, 2019 में पॉलिटिकल कमेंटेटर सुनंदा वशिष्ठ ने कश्मीरी हिंदुओं के खिलाफ 1990 में हुई दर्दनाक दास्तां को बयां किया था। 

मानवाधिकारों पर अमेरिकी कांग्रेस में हुई बैठक में सुनंदा वशिष्ठ ने एक ऐसी घटना को याद किया जिसे सुनकर सब शॉक्ड रह गए। उन्होंने 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों के साथ आतंकवादियों की हैवानियत को बताया था। 

सुनंदा वशिष्ठ के मुताबिक, कश्मीर में उनका और उनके लोगों की पूरी जिंदगी कट्टरपंथी इस्लाम की वजह से बर्बाद हो गई। इतना ही नहीं, उन्होंने टीचर गिरिजा टिक्कू और बीके गंजू जैसे लोगों के साथ हुई अमानवीय घटनाओं का भी जिक्र किया।

सुनंदा वशिष्ठ के मुताबिक, आतंकियों ने बांदीपोरा की टीचर गिरिजा टिक्कू को पहले किडनैप किया और फिर उन्हें बर्बरता के साथ काट डाला। गिरिजा टिक्कू को मारने से पहले उनके साथ गैंगरेप भी किया गया। उनके साथ ऐसा करने वालों में वो लोग शामिल थे, जिन्हें गिरिजा टिक्कू ने पढ़ाया था। 

सुनंदा वशिष्ठ के मुताबिक, कश्मीरी पंडित (Kashmiri Pandit) बीके गंजू जैसे लोगों को पड़ोसियों पर विश्वास करने के बदले सिर्फ और सिर्फ धोखा मिला। बीके गंजू को आतंकवादियों ने कंटेनर में ही गोली मार दी थी। इसके बाद उनकी पत्नी को खून से सने चावल खिलाए थे। बीके गंजू के बारे में आतंकियों को पूरी जानकारी उनके पड़ोसियों ने दी थी। 

वैसे, कश्मीर घाटी (Kashmir Ghati) में हिंदुओं की हत्‍या का सिलसिला 1989 से ही शुरू हो चुका था। सबसे पहले पंडित टीका लाल टपलू की हत्‍या की गई। श्रीनगर में सरेआम टपलू को गोलियों से भून दिया गया। वह कश्‍मीरी पंडितों के बड़े नेता थे। आरोप जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट के आतंकियों पर लगा लेकिन कभी किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं हुआ। 

इसके डेढ़ महीने बाद रिटायर्ड जज नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी गई। गंजू ने जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के नेता मकबूल भट्ट को मौत की सजा सुनाई थी। गंजू की पत्नी को किडनैप कर लिया गया और उसके बाद वो कभी नहीं मिलीं।

4 जनवरी 1990 को श्रीनगर से छपने वाले एक उर्दू अखबार में हिजबुल मुजाहिदीन का एक बयान छपा। इसमें हिंदुओं को घाटी छोड़ने के लिए कहा गया था। इस वक्‍त तक घाटी का माहौल बेहद खराब हो चुका था। हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ भाषणों की भरमार थी। उन्‍हें खुलेआम कश्मीर छोड़ने या फिर इस्लाम कबूल करने की धमकियां दी जा रही थीं। 

इसके बाद वकील प्रेमनाथ भट को मार दिया गया। 13 फरवरी 1990 को श्रीनगर के टेलीविजन केंद्र के निदेशक लासा कौल की हत्या कर दी गई। ये तो वो लोग हैं, जो रसूख वाले थे। साधारण लोगों की हत्या की तो गिनती भी नहीं की जा सकती। एक तरफ कश्मीर घाटी में दहशत का माहौल था तो दूसरी तरफ फारुख अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर में 70 अपराधी जेल से रिहा किए थे।

इसके बाद तो कश्मीरी हिंदुओं के मकानों व धर्मस्थलों पर हमले शुरू हो गए। कश्मीरी हिंदू नेताओं, बुद्धिजीवियों और यहां तक की महिलाओं को भी निशाना बनाया जाने लगा था। एक सर्वे के मुताबिक, कश्मीर में आतंकवाद का दौर शुरु होने से पहले वहां 1242 शहरों, कस्बों और गांवों में करीब तीन लाख कश्मीरी पंडित परिवार रहते थे। लेकिन कश्मीर में हिंदुओं के नरसंहार और पलायन के बाद 242 जगहों पर सिर्फ 808 परिवार रह गए हैं। 

जम्‍मू और कश्‍मीर में सरकारी सेवाओं में आरक्षण लागू हुआ



मंत्रिमंडल ने संविधान (जम्‍मू और कश्‍मीर में लागू होने के लिए) संशोधन आदेश,2019 को स्‍वीकृति दी 

जम्‍मू और कश्‍मीर में सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए पदोन्‍नति लाभ जम्‍मू और कश्‍मीर में शिक्षा संस्‍थानों तथा सार्वजनिक रोजगार में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संविधान (जम्‍मू और कश्‍मीर में लागू होने के लिए) संशोधन आदेश, 2019 के माध्‍यम से संविधान (जम्‍मू और कश्‍मीर में लागू होने के लिए) आदेश,1954 में संशोधन के संबंध में जम्‍मू और कश्‍मीर सरकार के प्रस्‍ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। इससे राष्‍ट्रपति द्वारा अनुच्‍छेद 370 की धारा (1) के अंतर्गत जारी संविधान (जम्‍मू और कश्‍मीर में लागू होने के लिए) संशोधन आदेश,2019 द्वारा संविधान (77वां संशोधन) अधिनियम,1955 तथा संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम,2019 से संशोधित भारत के संविधान के प्रासंगिक प्रावधान लागू होंगे।

प्रभाव:

अधिसूचित होने पर यह आदेश सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों को पदोनत्ति लाभ का मार्ग प्रशस्‍त करेगा और जम्‍मू और कश्‍मीर में सरकारी रोजगार में वर्तमान आरक्षण के अतिरिक्‍त आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत तक आरक्षण का लाभ प्रदान करेगा।

पृष्‍ठभूमि: समानता और समावेश:

संविधान (77वां संशोधन) अधिनियम 1955 को भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 16 की धारा 4 के बाद धारा (4ए) जोड़कर लागू किया गया। धारा (4ए) में सेवा में अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों को पदोन्‍नति लाभ देने का प्रावधान है। संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम 2019 देश में जम्‍मू और कश्‍मीर को छोड़कर लागू किया गया है और जम्‍मू और कश्‍मीर तक अधिनियम के विस्‍तार से राज्‍य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण का लाभ प्राप्‍त होगा। 



आतंकवादी बुरहान के नाम पर रख दिया सडक का नाम


अलगाववादियों ने दक्षिण कश्मीर में एक सड़क मार्ग का नाम हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान के नाम पर रखा है। सडक पर बुरहान का पोस्टर भी लगाया गया है। संबंधित सुरक्षा एजेंसियां और कश्मीर विशेषज्ञ इसे कश्मीर में सुधरते हालात को फिर बिगाडने और स्थानीय युवकों को आतंकवाद की तरफ ले जाने की नई साजिश बता रहे हैं।

बुरहान के नाम पर रखी गई सडक त्राल को नवादल के रास्ते अवंतीपोर से जोडती है। बुरहान त्राल का ही रहने वाला था। आप को बता दे की, सुरक्षाबलों ने आठ जुलाई को बुरहान वानी को एक मुठभेड़ में मार गिराया था। १९९० से लेकर २००५ तक त्राल को आतंकी गतिविधियों के चलते कश्मीर का कंधार भी कहा जाता रहा है।

कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों और अलगाववादियों के साथ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने बुरहान की मौत पर कश्मीर में अलगाववादी भावनाओं को खूब भडकाया। हालांकि बुरहान के नाम पर सडक का नामकरण किए जाने की यह पहली घटना है।

हुर्रियत नेता इम्तियाज अहमद रेशी ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सडक का नाम बदलने का फैसला स्थानीय लोगों ने बैठक में लिया था। एक समारोह में मैं खुद उसमें सम्मिलित था।

56 इंच : भारत ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकियों को मारा


भारतीय सेना ने कहा है कि उसने पाकिस्तान के साथ लगती नियंत्रण रेखा के पास चरमपंथी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक्स की हैं.

पूंछ और उरी में हुए आतंकी हमले में जवानों की शहादत का बदला भारत ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकियों को ढेर कर के लिया है. DGMO और विदेश मंत्रालय की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह खुलासा किया गया कि भारतीय फौज ने बुधवार देर रात नियंत्रण रेखा को पार करते हुए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक किया.

भारतीय सेना के डीजीएमओ लेफ़्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने कहा, "ये स्ट्राइक्स बुधवार रात को उनके अड्डों पर की गईं, जब ये पक्की जानकारी मिली कि आतंकवादी नियंत्रण रेखा पर जमा हो रहे हैं."

उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान के डीजीएनओ से इस बारे में बात की गई है और उन्हें बता दिया गया है कि ये स्ट्राइक्स ख़त्म हो चुकी हैं और फ़िलहाल इनको जारी नहीं रखा जाएगा.

लेफ़्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह का कहना था भारत किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है. सेना के डीजीएमओ का कहना था कि चरमपंथी भारत में घुसकर कई अहम शहरों पर हमला करने की योजना रखते थे.

उनके मुताबिक़ पुंछ सेक्टर में ही सिंतबर में घुसपैठ की तक़रीबन 20 कोशिशें हुई हैं जिन्हें भारतीय सेना ने नाकाम किया. उन्होंने ये भी कहा कि वो कुछ लोगों को पकड़ने में भी कामयाब हुई जिन्होंने कथित तौर पर ये माना कि उनकी ट्रेनिंग पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हुई थी. जिसके बाद उन्हें हथियार मुहैया करवाए गए.

पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि गोलीबारी रात के ढाई बजे से शुरू हुई और सुबह के आठ बजे तक जारी रही.
पाकिस्तानी सेना के मुताबिक़ नियंत्रण रेखा पर 'बिना किसी उकसावे के' भारत की तरफ़ से भिम्बर, हॉट स्प्रिंग, केल और लीपा सेक्टरों में फ़ायरिंग हुई.'

पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि "भारत की ओर से कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हुई है, ये सीमा पार से फायरिंग थी जो पहले भी होती रही है."

पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि "अगर पाकिस्तान की ज़मीन पर कोई सर्जिकल स्ट्राइक हुई तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा."

पाकिस्तान के चैनल पीटीवी के मुताबिक़, प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने 'भारत के खुले अत्याचार' की कड़ी निंदा की है और "मारे गए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी है."

नवाज़ शरीफ़ ने भारतीय सेना के हमले की निंदा की जिसमें दो पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई है. शरीफ़ ने कहा है कि शांति की हमारी ख़्वाहिश को कमज़ोरी नहीं समझा जाना चाहिए और हमारे सैनिक सीमा की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.


जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त 10,000 विशेष पुलिस अधिकारी तैनात


केन्द्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने जम्मू-कश्मीर के पुलिस विभाग में अतिरिक्त 10,000 विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) की तैनाती को मंजूरी दी है।

इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और यह अतिरिक्त संख्या एसपीओ के मौजूदा बल के अलावा है। अतिरिक्त एसपीओ का उपयोग विशेषकर सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में किया जाएगा। 10,000 एसपीओ के संदर्भ में केन्द्र द्वारा राज्य सरकार को व्यय की प्रतिपूर्ति वर्तमान स्वीकृत सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही की जाएगी।

कर्मचारी अब किसी भी एयरलायन्स से LTC पर जम्मू-कश्मीर में बिता सकेंगे छुट्टियां



जम्मू एवं कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने किसी भी एयरलायन्स से एलटीसी पर जम्मू एवं कश्मीर का दौरा करने की सुविधा देने का फैसला किया है

जम्मू एवं कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने केन्द्र सरकार के कर्मचारियों को 25 सितंबर 2016 से दो वर्ष की अवधि के लिए के लिए विशेष छूट योजना के तहत किसी भी एयरलायन्स से एलटीसी पर जम्मू एवं कश्मीर का दौरा करने की सुविधा देने का फैसला किया है।

कांग्रेसी दिग्विजय सिंह ने कश्मीर को बताया ‘भारत के कब्जे वाला कश्मीर’


जिहादी आतंकवादी ओसामा बिन लादेनको ‘आेसामाजी’ कहनेवाले (मौलाना) दिग्विजय सिंह से आैर क्या अपेक्षा कर सकते है ? 

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए, जम्मू- कश्मीर को ‘भारत अधिकृत कश्मीर’ कह डाला।

मीडिया के प्रश्न किए जाने पर कांग्रेस नेता तुरंत अपने बयान में सुधार करते हुए सफाई देने लगा और फिर उसने कहा कि, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, पंतप्रधान मोदी को भारत में रह रहें कश्मीरियों की बजाय पाक अधिकृत कश्मीर और बलूचिस्तान की ज्यादा चिंता है।

उसने कहा, ‘कश्मीर में हिंसा के परिस्थिति के बाद भी सरकार कश्मीरियों से बात करने को तैयार नहीं है। यह मामला विश्वास कायम करके ही सुलझाया जा सकता है। फिर चाहे ‘पाक अधिकृत कश्मीर हो या भारत अधिकृत कश्मीर’ हमें बातचीत के माध्यम से विश्वास कायम कर इस समस्या को सुलझाना होगा।’

मीडिया के प्रश्नों पर सफाई देते हुए उसने कहा, ‘मेरा मतलब भारत प्रशासित से था। हमें वहां ( जम्मू-कश्मीर) की जनता का दिल जीतना चाहिए। उन्हें विश्वास में लेना चाहिए। पाकिस्तान कश्मीर में घुसपैठ करता है, वो वहां आतंकी भेजता है। इसलिए उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इस क्षेत्र में मेरा पूरा समर्थन अफ्स्पां के साथ है।’

पढ़िए जम्‍मू-कश्‍मीर पर राजनाथ सिंह का राज्‍यसभा में पूरा वक्‍तव्‍य



माननीय सभापति महोदय, 

कश्‍मीर घाटी में उत्‍पन्‍न स्‍थिति के संबंध में मैंने दिनांक 18 जुलाई को इस सदन को अवगत कराया था। 

तत्‍पश्‍चात् 23 एवं 24 जुलाई को मैंने श्रीनगर और अनंतनाग का दौरा किया। लगभग 30 विभिन्‍न प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत की, जिनमें सब्‍जी-फल उत्‍पादक, नौका चालक, विभिन्‍न समुदाय के संगठन, विकास मंचों के प्रतिनिधि, युवा उद्यमी वर्ग के लोग, Chamber of Commerce,कार्यरत एवं सेवानिवृत्‍त सरकारी कर्मी एवं पर्यटन व्‍यवसायी शामिल हैं। 

माननीय मुख्‍यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल तथा सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों से मिलकर मैंने स्‍थिति का जायजा लिया। 

राजनीतिक आकलन हेतु मैं करीब-करीब सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी मिला। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने मुझसे मिलने से इंकार किया, जिससे दुर्भाग्‍यवश उनके प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिल सका। 

दिनांक 8 अगस्‍त को जम्‍मू-कश्‍मीर की माननीय मुख्‍यमंत्री से दिल्‍ली में पुन: चर्चा भी हुई। 

कश्‍मीर घाटी में उत्‍पन्‍न स्‍थिति के बारे में जो आशंकाएं व्‍यक्‍त की गई हैं और कदाचित वे आशंकाएं माननीय सदस्‍यों को भी होंगी, उन पर मैं कुछ कहना चाहूंगा। दिनांक 9 जुलाई से लगातार चल रहे कर्फ्यू से आम जनता को राशन आदि नहीं मिल रहा है, यह एक आशंका है। मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍यों को बताना चाहूंगा कि कश्‍मीर घाटी में कोई Blanket कर्फ्यू नहीं है। विभिन्‍न जिलों में, कतिपय स्‍थानों पर आवश्‍यकतानुसार कर्फ्यू लगाया गया है, और स्‍थिति में सुधार होने पर उसको हटाने अथवा उसमें ढील की कार्रवाई की गई है। हां, हो सकता है कि स्‍थिति अगर पुन: खराब हुई तो कर्फ्यू पुन: लगाया गया हो। 

वास्‍तव में, अगर आम जनता को असुविधा हुई है, तो वह पाकिस्‍तान से प्रेरित अलगाववादी नेताओं द्वारा दिनांक 9 जुलाई से निरंतर, बिना किसी Break के, हड़ताल का आह्वान है। इससे, जिन शहरों, या जिन स्‍थानों में, कर्फ्यू नहीं भी होता है, वहां भय से बाजार नहीं खुल पाते हैं। अत: वास्‍तव में, अपनी स्‍वार्थ पूर्ति के लिए, अपने आपको Relevant रखने की दृष्‍टि से, आम जनता को असुविधा पहुंचाने का प्रयास अलगाववादी नेताओं ने किया है। और मैं निश्‍चितता के साथ कह सकता हूं कि यह पाकिस्‍तान से प्रेरित है। हड़ताल का कार्यक्रम रावलपिंडी में तय होता है, श्रीनगर में नहीं। 

अलगाववादियों की इस अमानवीय Strategy के बावजूद, यह कहना होगा कि राज्‍य सरकार ने आम जनता की सुविधा हेतु जो कार्य किया है, वह सराहनीय है। 

उदाहरणार्थ, इस अवधि में राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा स्‍कीम के तहत लगभग 95 प्रतिशत अनाज का वितरण हुआ है। औसतन बांटे जाने वाली करीब 48 हजार क्विंटल चीनी की तुलना में लगभग 34 हजार क्‍विंटल का वितरण हो चुका है। इस अवधि में लगभग 3 लाख 10 हजार LPG Cylinders का विक्रय भी हो चुका है। 

माननीय सभापति महोदय, घाटी में सभी आवश्‍यक वस्‍तुओं का स्‍टॉक भी उपलब्‍ध है। उदाहरणार्थ, श्रीनगर में करीब 23 सौ क्‍विंटल चीनी उपलब्‍ध है। विभिन्‍न Petroleum Companies के पास 18 दिन का एलपीजी स्‍टॉक तथा 19 दिनों के लिए पेट्रोल और 32 दिनों के लिए मिट्टी का तेल भी उपलब्‍ध है। 

इसी प्रकार, घाटी में आम तौर पर उपलब्‍ध फल-सब्‍जी का भी क्रय-विक्रय राज्‍य सरकार समय-समय पर कर्फ्यू में ढील देकर सुनिश्‍चित कर चुकी है। इसी प्रकार तड़के दूध का वितरण भी कराया गया है। दिनांक 14 जुलाई से लेकर 8 अगस्त तक की अवधि के दौरान आवश्‍यक वस्‍तुओं, फल-सब्‍जी आदि लेकर 5,600 ट्रक घाटी में पहुंच चुके हैं। 

मैं यह नहीं कह सकता कि घाटी की जनता बिल्‍कुल आम जीवन बसर कर रही है। हड़ताल से आर्थिक और वाणिज्यिक गतिविधियां बंद हैं, जिससे कई वर्गों की आमदनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। लेकिन जो स्‍थिति घाटी में कुछ Vested interest और Misguided elements ने पैदा की है, उस स्‍थिति में जो भी आम जनता की सुविधा के लिए किया जा सकता है, वह राज्‍य सरकार ने किया है, और कर रही है। 

दूसरी आशंका यह व्‍यक्‍त की जाती है कि पर्याप्‍त चिकित्‍सा सुविधा उपलब्‍ध नहीं है। कश्‍मीर में हो रही हिंसा में 2656 मरीज विभिन्‍न अस्‍पताल पहुंचे, जिनमें से 2564 को इलाज के बाद Discharge किया जा चुका है। अब करीब 100 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 51 ऐसे हैं जिनकी आंखों में चोटें आई हैं। दुर्भाग्‍यवश Stone pelting से करीब 100 Ambulances क्षतिग्रस्‍त होने के बावजूद, इस अवधि में 400 से अधिक Ambulances कार्यशील रहीं

इस अवधि में करीब 5 लाख सामान्‍य मरीजों का भी OPD में इलाज किया गया, जिनमें से करीब 33 हजार Indoor Patients थे। लगभग 8 हजार छोटी-बड़ी Surgeries इस अवधि में की गई हैं और जहां आवश्‍यक हुआ है, मरीजों को दिल्‍ली में भी इलाज हेतु लाया गया है। दिल्‍ली के AIIMS तथा मुम्‍बई के आदित्‍य ज्‍योति अस्‍पताल के Eye-Surgery करने वाले दल श्रीनगर होकर आए, और उन्‍होंने वहां चल रहे इलाज पर अपनी संतुष्‍टि व्‍यक्‍त की है। 

माननीय सभापति महोदय, पेलेट गन्‍स की चर्चा पिछली बार इस सदन में हो चुकी है। जैसा कि मैंने पहले बताया, इस Weapon को 2010 में Non-lethal मानकर Introduce किया गया था। जैसा कि मैंने लोकसभा में आश्‍वस्‍त किया था, अन्‍य Viable Non-lethal Technologies की संभावनाओं पर गौर करने हेतु मैंने वरिष्‍ठ अधिकारियों की एक Committee गठित कर दी है। 

माननीय सभापति महोदय, दिनांक 18 जुलाई को, जब इस सम्‍माननीय सदन में इस मुद्दे पर पहले चर्चा हुई थी, तब वर्तमान Agitation में 567 घटनाएं हो चुकी थीं। इन घटनाओं में 33 Civilians की एवं 01 सुरक्षाकर्मी की मृत्‍यु हुई थी। 1948 Civilians तथा 1739 सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे। तत्‍पश्‍चात्, दिनांक 08 अगस्‍त तक, 451 घटनाएं और हो चुकी हैं। इनमें 10 Civilians और 01 सुरक्षाकर्मी की मृत्‍यु हुई है। 1408 Civilians और 2776 सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। 

माननीय सभापति, कश्‍मीर भारत का ताज है। हमने आजादी धर्मनिरपेक्षता और Equality for all के आधार पर जीती है और इन्‍हीं को हमारे संविधान का केंद्र बिंदु बनाया है। हमारे नापाक पड़ोसी से भिन्‍न, हमारा समाज एकता और समानता की आधारशिला पर खड़ा है। कश्‍मीरियों के लिए हमारा दिल उतना ही धड़कता है, जितना कि उड़ीसा या असम के लिए, तमिलनाडु या केरल के लिए, गुजरात या राजस्‍थान के लिए। हमारे मन में न कोई भेद है, न भाव। मानवता हमारी भारतीयता की पहचान है। हमारे घर के किसी भी सदस्‍य को कोई शिकायत हो, तो हम उसको मिल-बैठकर सुलझा सकते हैं, और सुलझाना चाहते हैं। बातचीत हेतु हमारे दरवाजे भारत के हर नागरिक के लिए हमेशा खुले हैं। जैसा कि प्रधानमंत्री जी ने कल कहा, अन्‍य बच्‍चों के माफिक कश्‍मीरी बच्‍चों के हाथ में पत्‍थर नहीं, किताबें होनी चाहिए, कलम होनी चाहिए, Bat-ball होना चाहिए। ऐसा हम अपनी ईमानदारी से, अपने Good Intent से, अपनी मेहनत से और आपसी बातचीत से सुनिश्‍चित करेंगे। 

कुछ हफ्ता-दो हफ्ता पूर्व पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा था कि उनको उस दिन का इंतजार है, जब कश्‍मीर उनका होगा। मैं उनको, और उनके पीछे असली पावर रखने वालों को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि उनके लिए यह इंतजार अनन्‍त होगा। कश्‍मीर हमारा था, हमारा है और हमारा रहेगा। पाकिस्‍तान तो क्‍या, दुनिया की कोई भी ताकत कश्‍मीर को भारत से अलग नहीं कर सकती है। 

माननीय सभापति महोदय, पाकिस्‍तान द्वारा बार-बार कहा जाता है कि भारत और पाकिस्‍तान के बीच कश्‍मीर एक Issue है। मैं जिम्‍मेदारी से वही बात कहना चाहूंगा, जो कि 22 फरवरी, 1994 को इस संसद ने एक आवाज़ से कहा था- कश्‍मीर का मुद्दा सिर्फ एक है, और वह है PoK की वापसी। उस वापसी तक हम चैन से नहीं बैठेंगे। इस संसद के 1994 Resolution की पूर्ति करके ही रहेंगे। 

जम्‍मू-कश्‍मीर की स्थिति पर प्रस्‍ताव राज्‍य सभा में पारित


यह सदन कश्मीर घाटी में लम्बे समय से चली आ रही अशांति, हिंसा और कर्फ्यू की स्थिति के प्रति अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करता है। यह सदन बिगड़ती हुई स्थिति के कारण होने वाली मौतों तथा घायल लोगों के प्रति गहरी संवेदना और चिंता व्यक्त करता है। इस सदन का दृढ़ और सुविचारित मत है कि जहां एक ओर राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता, वहीं दूसरी ओर यह भी अनिवार्य है कि सामान्य स्थिति और शांति बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं, ताकि लोगों की वेदनाएं दूर की जा सकें। 

यह सदन जम्मू-कश्मीर में समाज के सभी वर्गों से पुरज़ोर अपील करता है कि वे तत्काल सामान्य स्थिति की बहाली और सौहार्द कायम करने के लिए कार्य करें। यह सदन, सर्वसम्मति से लोगों, विशेषकर युवाओं में विश्वास पैदा करने का संकल्प लेता है।

रेलमंत्री ने बनिहाल-बारामूला (डेमू) व बडगाम-बारामूला (डेमू) ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई


रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग राज्यमंत्री श्री जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में 74619/74620 बनिहाल-बारामूला फास्ट पैसेंजर (डेमू) और 74617/74618 बडगाम-बारामूला डेमू का आज रेल भवन, नई दिल्ली और अनंतनाग रेलवे स्टेशन के बीच वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरी झंडी दिखाई। जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री सुश्री महबूबा मुफ्ती ने अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ अनंतनाग रेलवे स्टेशन पर कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह की शोभा बढ़ाई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, बोर्ड के अन्य सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति रेल भवन में उपस्थित थे। बारामूला-बडगाम-बनिहाल खंड वर्तमान में 13 जोड़े रेल सेवाओं का  परिचालन कर रहा है जिसका अर्थ है कि वर्तमान में 26 एकल सेवाएं परिचालित हैं।

इस अवसर पर रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों के बीच निर्बाध रेल संपर्क हमेशा इस सुंदर घाटी की दीर्घकालीन मांग रहा है। नई रेल सेवाएं जम्मू-कश्मीर के लोगों को बड़ी राहत प्रदान करने वाली साबित होंगी। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण सड़क परिवहन में बारामूला-बनिहाल के बीच लगभग 6 घंटे लगते हैं, लेकिन अब नई डेमू ट्रेन का उपयोग करके यह दूरी 2 घंटे 20 मिनट में तय की जा सकती है और वह भी  केवल 30 रूपये के किराए में। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर राज्य पर्यटन के हिसाब से बहुत महत्वपूर्ण है जहां पूरे वर्ष राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आते रहते हैं।  इस तरह इस जुड़ाव से राज्य में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि रेलवे ने आईआरसीटीसी की मदद जम्मू-कश्मीर को पर्यटन के नक्शे पर लाने के लिए भी कार्य कर रहा है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि हस्तकला उद्योग और राज्य के स्वादिष्ट व्यंजनों को भी बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर राज्य के विकास पर ध्यान केंद्रित किया है।

इस अवसर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग राज्यमंत्री श्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि घाटी में नई रेल सेवाओं से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और रेलों के अच्छे जुड़ाव से राज्य में पर्यटन, आर्थिक, सामाजिक और अन्य सभी क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि नई रेल सेवा से घाटी के लोगों की यात्रा के समय में कटौती होगी। और यह यात्रा सस्ती भी होगी क्योंकि रेलों के किराए सड़क परिवहन की तुलना में काफी कम हैं।

नई ट्रेनों की मुख्य विशेषताएं -

बनिहाल-बडगाम-बारामूला खंड पर:

बारामूला-बडगाम-बनिहाल खंड पर वर्तमान में रेल सेवा के रेलों के 13 जोड़े परिचालित हैं। विवरण निम्नानुसार हैं: -


 
बारामूला-बनिहाल
बारामूला-बडगाम
बडगाम-बनिहाल
डेमू गाड़ियों के 04 जोड़े
डेमू गाड़ियों के 07 जोड़े
डेमू ट्रेन के 10 जोड़े


समय सारणी अनुबंध- '' दी गई है।


बनिहाल-बारामूला खंड पर 05/05/2016 से 02 जोड़े का अतिरिक्त डेमू गाड़ियों 74619/74620 अर्थात बनिहाल-बारामूला फास्ट पैसेंजर और बडगाम-बारामूला डेमू 74617/74618 की शुरुआत की गई है। इन ट्रेनों के समय और रुकने के स्थानों का विवरण इस प्रकार हैं: -


 
74619 बनिहाल-बारामूला फास्ट पैसेंजर (डेमू)
74617 बडगाम-बारामूला डेमू

(↓) स्टेशन (↑)

74620 बारामूला-बनिहाल फास्ट पैसेंजर (डेमू)
74618 बारामूला-बडगाम डेमू

शनिवार को  छोड़कर

शुक्रवार को  छोड़कर

शुक्रवार को  छोड़कर

शनिवार को  छोड़कर

आगमन
प्रस्थान
आगमन
प्रस्थान
आगमन
प्रस्थान
आगमन
प्रस्थान

07:40


बनिहाल
18:55
--


07:55
07:57


काजीगुंड
18:31
18:32


08:11
08:14


अनंतनाग
18:12
18:17


08:58
09:03


श्रीनगर
17:30
17:32


09:20
09:30
--
15:15
बडगाम
17:16
17:18
11:30
--
09:42
09:43
15:27
15:28
मजहोम
17:02
17:04
11:12
11:13
10:00
10:01
15:59
16:00
सोपोर
16:43
16:44
10:38
10:38
10:20
--
16:20
--
बारामूला
--
16:35
--
10:30

·         गठन : - बनिहाल-बारामूला फास्ट पैसेंजर और बडगाम-बारामूला डेमू - पावर कोच -2, ट्रेलर कोच -6 यानि कुल 8 कोच।

·         दूरी :
·         बारामूला और बनिहाल के बीच की दूरी 137 किमी है।
·         बारामूला और बड़गाम के बीच की दूरी 45 किमी है।
·         बडगाम और बनिहाल के बीच की दूरी 92 किमी है।

·         यात्रा की अवधि :
02 घंटे 40 मिनट         74619 बनिहाल-बारामूला फास्ट पैसेंजर (डेमू)
02 घंटे 20 मिनट         74620 बारामूला-बनिहाल फास्ट पैसेंजर (डेमू)
01 घंटा 05 मिनट         74617 बडगाम-बारामूला डेमू

01 घंटा                   74618 बारामूला-बडगाम डेमू



·         74619/74620 बनिहाल-बारामूला फास्ट पैसेंजर (डेमू) औसत गति क्रमशः 51.37 किमी प्रति घंटे / 58.71 किमी प्रति घंटा है। जबकि 74617/74618 बडगाम-बारामूला डेमू की औसत गति में क्रमश: 41.55 किलोमीटर / 45 किलोमीटर प्रति घंटे है।

श्री अमरनाथ यात्रा 2 जुलाई से 18 मार्च 2016 तक,जानिये पूरी प्रक्रिया


श्री अमरनाथजी यात्रा 2016 के लिए तीर्थयात्रियों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। जम्मू कश्मीर के राज्यपाल की अध्यक्षता वाले श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड ने बैंक के माध्यम से यात्रियों के पंजीकरण की निम्नलिखित प्रक्रिया घोषित की है:

1.   पंजीकरण और यात्री परमिट (वाईपीएस) पहले आओ पहले पाओं के आधार पर जारी होगा।

2.   यात्रियों का पंजीकरण बैंकों की सभी शाखाओं से 29 फरवरी, 2016 से शुरू हो चुका है।

3.   एक यात्री परमिट केवल एक यात्री के पंजीकरण के लिए वैध होगा।

4.  प्रत्येक पंजीकरण शाखा के लिए यात्रियों के पंजीकरण हेतु प्रति दिन/प्रति मार्ग कोटा निर्धारित कर दिया गया है। पंजीकरण शाखा यह सुनिश्चित करेगी कि पंजीकृत यात्रियों की संख्‍या प्रतिदिन/प्रति मार्ग नियत कोटे की सीमा से अधिक न हो।

5.  13 साल की आयु से छोटे और 75 साल की आयु से बड़े तथा छह सप्‍ताह से अधिक की गर्भावस्‍था वाली महिलाओं का यात्रा के लिए पंजीकरण नहीं होगा।

6.     प्रत्येक यात्री, यात्रा के लिए यात्रा परमिट प्राप्‍त करने हेतु आवेदन पत्र  और अनिवार्य स्‍वास्‍थ्‍य प्रमाण पत्र (सीएचसी) जमा करवाएगा। आवेदन पत्र और अनिवार्य स्‍वास्‍थ्‍य प्रमाणपत्र के प्रारूप तथा चिकित्‍सकों/सीएचसी जारी करने के लिए अधिकृत चिकित्‍सा संस्‍थानों की सूची श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की वेबसाइट  www.shriamarnathjishrine.com पर उपलब्ध हैं।

7.  पंजीकरण शाखा द्वारा आवेदन पत्र और सीएचसी आवेदक-यात्री को नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।

8.  यात्रा परमिट के आवेदन के लिए आवेदक-यात्री को पंजीकरण अधिकारी के पास निम्‍नलिखित दस्‍तावेज जमा कराने होंगे :

(क)  भरा हुआ निर्धारित आवेदन पत्र और

(ख)  10 फरवरी, 2016 को अथवा उसके बाद अधिकृत चिकित्‍सक/चिकित्‍सा संस्‍थान द्वारा जारी निर्धारित अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र (सीएचसी)

(ग)    पासपोर्ट साइज के चार फोटो (तीन यात्रा परमिट और एक आवेदन पत्र के लिए)

9.      पंजीकरण कार्यालय निम्नलिखित की जांच करेगा :

क  क्या  आवेदन पत्र सही से भरा गया है तथा क्‍या उस पर आवेदक यात्री ने हस्ताक्षर किये हैं।

ख  क्या सीएचसी किसी अधिकृत चिकित्‍सक/चिकित्‍सा संस्‍थान द्वारा जारी किया गया है।

ग क्‍या सीएचसी 10 फरवरी, 2016 को अथवा उसके बाद जारी किया गया है।

10 वह दिन विशेष जब यात्रा प्रांरभ की जानी है (यथा सोमवार, मंगलवार, बुधवार, बृहस्‍पतिवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार) वह यात्रा परमिट पर अंकित किया गया है। यात्रा परमिट पर अंकित दिन, वह दिन होगा, जब यात्री को बालताल और चंदनवाड़ी (पहलगाम) स्थित एक्‍सेस कंट्रोल गेट पार करने की अनुमति होगी।

11 बैंक की शाखा, यात्री परमिट जारी करने से पहले यह सुनिश्चित करेगी कि जिस तिथि को एक्‍सेस कंट्रोल गेट पार करने के लिए यात्रा परमिट जारी किया गया है, वह दिन (यथा सोमवार, मंगलवार, बुधवार, बृहस्‍पतिवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार) यात्रा परमिट पर अंकित दिन से मेल खाता हो।

12 यात्रा परमिट के फॉर्म में यात्रा वर्ष और यात्रा की तारीख नहीं छापी गई है। इसलिए यात्रा परमिट जारी करने वाली बैंक की शाखा के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह यात्रा वर्ष और यात्रा की तिथि की मोहर लगाए/अंकित करे और जहां यात्रा वर्ष और यात्रा की तिथि लिखी गई है/या उसकी मोहर लगाई गई है, उस जगह पर पारदर्शी टेप चिपकाए (यात्रा की तिथि और वर्ष में किसी तरह का फेरबदल न किया जा सके, इसके लिए पारदर्शी टेप चिपकाना महत्‍वपूर्ण है)। हालांकि यात्रा की तारीख, वर्ष और बैंक शाखा की मोहर यात्रा परमिट जारी करते समय ही लगाई जाएगी। किसी भी स्थिति में किसी भी यात्रा परिमट पर अग्रिम तौर पर ये मोहर नहीं लगाई जाएगी। इसका पालन नितांत रूप्‍से आवश्‍यक है।

13 यदि आवेदन पत्र और सीएचसी सही हैं, तो आवेदक द्वारा 50 रुपये (उपरोक्‍त में से 35 रुपये की राशि एसएएसबी के खाते में भेज दी जाएगी और शेष राशि बैंक द्वारा रखी जाएगी) प्रति यात्रा परमिट की दर पर भुगतान करने पर अनुच्‍छेद 15-17 में उल्लिखित कदमों का अनुसरण करने के बाद पंजीकरण अधिकारी उसे यात्रा परमिट जारी करेगा।

14  पंजीकरण अधिकारी आवेदन पत्र और सीएचसी में उल्लिखित विवरण के आधार पर मौके पर ही पासपोर्ट साइज के फोटो चिपकाएगा यात्रा परमिट फॉर्म भरेगा। यात्रा की तिथि भी सही प्रकार से भरी जाएगी।
15  पंजीकरण अधिकारी यात्रा परमिट पर हस्‍ताक्षर करेगा और यात्रा परमिट पर बैंक की मोहर इस प्रकार लगाएगा कि वह मोहर आधी आवेदक-यात्री की फोटो पर छपे और आधी यात्रा परमिट पर। हालांकि तिथि, वर्ष और बैंक की शाखा की मोहर यात्रा परमिट जारी करते समय ही लगाई जाएगी। किसी भी स्थिति में यात्रा प‍रमिट पर अग्रिम तौर पर मोहर नहीं लगाई जाएगी। इसका पालन नितांत रूप्‍से आवश्‍यक है।

16 आवेदक-यात्री को यात्रा परमिट जारी करने से पहले पंजीकरण अधिकारी निम्‍नलिखित विवरण दर्ज करेगा :
क यात्रा परमिट जारी करने की तिथि
ख यात्रा परमिट की क्रम संख्‍या
ग आवेदक-यात्री यात्री का नाम, पता और टेलीफोन/मोबाइल नम्‍बर
घ आवेदक-यात्री के निकट संबंधी का नाम, किसी भी आपात स्थिति में जिससे संपर्क किया जा सकता है
ड तीर्थ यात्रा का मार्ग
च बालताल/पहलगाम से यात्रा शुरू करने की तिथि

17 पंजीकरण कार्यालय बालताल मार्ग के लिए बालताल और पहलगाम मार्ग के लिए पहलगाम वाला परमिट जारी करेगा।        

धारा 370 हटाने का भाजपा का वादा हर हाल में पूरा होगा: कवेंद्र गुप्ता

जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष कवेंद्र गुप्ता ने कहा है कि राज्य से धारा ३७० हटाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के घोषणा पत्र में किए गए वादे को हर हाल में पूरा किया जाएगा।

गुप्ता ने अग्रोहा धाम में शरद पूर्णिमा के मौके पर आयोजित वार्षिकी मेले में पत्रकारों से यह बात कही। उन्होंने कहा कि धारा ३७० का मुद्दा ठंडे बस्ते में नहीं गया है जब भी मौका मिला तो इसे हटा दिया जाएगा क्योंकि धारा ३७० की बहुत सी बातें खत्म हो चुकी हैं और कुछेक परिवारों को ही इसका फायदा मिल रहा है। आम जनता को नहीं। 

उच्च न्यायालय की धारा ३७० नहीं हटाने की व्यवस्था को लेकर गुप्ता ने कहा कि यदि विधानसभा में दो तिहाई बहुमत हो तो इस संबंध में प्रस्ताव को विधानसभा और विधान परिषद से पारित करा कर धारा ३७० को समाप्त किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कश्मीर में अलगाववाद को पिछली सरकारों ने बढ़ावा दिया लेकिन अब माहौल बदल रहा है। ६८ सालों में पहली बार राज्य का कोई मुख्यमंत्री दशहरा देखने गया है। 

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी जब कश्मीर के दौरे पर गए थे तो उन्होंने भी इस बात पर चर्चा किए जाने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि राज्य में गठबंधन सरकार के दोनों घटकों की सोच अलग है लेकिन वहां विकास और राष्ट्रवाद को लेकर सरकार बनाई गई है। 

hindoorashtra.com

आतंकवादी मसर्रत की गिरफ्तारी के बाद हिंसा, किया राष्‍ट्रीय ध्‍वज का अपमान

आतंकवादी मसर्रत आलम की गिरफ्तारी को लेकर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी समर्थक काफी बवाल मचा रहे हैं। श्रीनगर में जामिया मस्जिद इलाके में अराजक तत्वों ने जमकर तोड़फोड़ शुरू कर दी है। इसके साथ ही पथराव किया जा रहा है और कुछ लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज भी जला दिया। भारी मात्रा में पुलिस वहां तैनात है।

इससे पहले सरकार ने कहा है कि मसर्रत को विद्रोहात्मक गतिविधियों के चलते गिरफ्तार किया गया है और मामले की जांच जारी है। वीडियो फुटेज जांचने के बाद सामने आया कि मसर्रत पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाते हुए भीड़ का नेतृत्व कर रहा था। उस भीड़ ने भी पाकिस्तान के झंडे के साथ पड़ोसी मुल्क के समर्थन में नारे लगाए।

दरअसल, चौतरफा दबाव के बाद आखिरकार आज अलगाववादी मसर्रत आलम को गिरफ्तार कर लिया गया। जम्मू कश्मीर पुलिस ने मसर्रत को आज सुबह उसके घर से गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद उसे पुलिस स्टेशन ले जाया गया और अदालत में पेश किया जाना है।

इस अलगाववादी की गिरफ्तारी के बाद कश्मीर घाटी में भारी तनाव है। गिरफ्तारी से पहले मसर्रत ने एक चैनल से बातचीत में स्पष्ट कहा कि ''गिरफ्तारी उसके लिए कोई नई बात नहीं है। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा। हिरासत उसके इरादों को रोक नहीं सकती।''


मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा भी कड़ा रुख अपनाए हुए है। भाजपा महासचिव राम माधव मसर्रत के मुद्दे को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद और उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह से मुलाकात कर सकते हैं। पार्टी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि उनकी पार्टी की नीति स्पष्ट है। पार्टी के नेता नलिन कोहली ने कहा कि हम राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। वहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी कहा है कि जम्मू-कश्मीर, अलगाववाद और राष्ट्रवाद के विषय को लेकर न कोई समझौता हुआ है और न ही होगा।

विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर भाजपा को घेरा है। आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में बदतर व्यवस्था का जवाब भाजपा सरकार को देना चाहिए। वहीं, कांग्रेस ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को आश्वस्त करें कि घाटी में दोबारा से ऐसी हिमाकत नहीं होगी।

दरअसल, मसर्रत को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। तीन दिनों पहले श्रीनगर रैली के दौरान मसर्रत ने पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए थे और रैली में उसके समर्थकों ने पाकिस्तानी झंडे भी लहराए थे। इसके चलते दो दिनों पहले मसर्रत के खिलाफ राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में केस दर्ज किया गया था। हालांकि मसर्रत ने इन आरोपों को गलत बताया है।

इससे पहले कल मसर्रत सहित छह अलगाववादियों को अपने अपने घरों में नजरबंद कर दिया गया था। इनमें गिलानी और मीर वायज मौलवी फारूक शामिल है, लेकिन पूरे देश में इस बात को लेकर काफी नाराजगी थी कि खुलेआम सड़कों पर राष्ट्रविरोधी गतिविधि में शामिल होने के बावजूद उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा है। इस बात के लिए मुफ्ती सरकार पर भारी दबाव था। इन दबावों के आगे मुफ्ती सरकार को झुकना पड़ा और आज सुबह मसर्रत को गिरफ्तार कर लिया गया।

सरकार में शामिल भाजपा इन बातों के लेकर काफी नाराज थी। भाजपा के मंत्रियों ने चेतावनी दी थी कि अगर मसर्रत को गिरफ्तार नहीं किया गया तो वे मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल नहीं होंगे।

आतंकवादी मसर्रत आलम गिरफ्तार, गिलानी नजरबन्द

"मेरी जान पाकिस्तान" का नारा लगाने वाले जम्मू-कश्मीर के अलगाववादियों के खिलाफ राज्य की पीडीपी-भाजपा सरकार ने सख्त कदम उठाया है। मसरत आलम को शुक्रवार सुबह गिरफ्तार कर लिया गया। उसे श्रीनगर से बडग़ाम थाने ले जाया जाएगा। 

इससे पहले गुरुवार शाम को मसरत आलम और कट्टरपंथी हूर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी सहित पांच अलगाववादी नेताओं को नजरबंद किया गया था।

पुलिस ने इनके खिलाफ रणबीर आचार संहिता और गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। राज्य के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने कहा था कि कानून अपना काम करेगा और देश के खिलाफ किसी भी तरह की हरकत स्वीकार नहीं की जाएगी।

उधर, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुख्यमंत्री से इस संबंध में कठोर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अलगाववादी नेता मसरत आलम ने बुधवार को श्रीनगर में रैली की थी। इसमें कुछ युवक पाकिस्तान का झंडा लिए हुए थे।

अलगाववादियों ने बुधवार को श्रीनगर में रैली की। इस रैली का नेतृत्व हूर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी ने किया। इसमें अलगाववादी नेता मसरत आलम ने पाकिस्तानी झंडा लहराया और पाकिस्तान मेरी जान के नारे लगाए। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर या शिकायत दर्ज की थी। इस रैली के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री सईद से फोन पर बात की थी और कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। जिस पर सईद ने कार्रवाई का भरोसा दिया था।

हूर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े ने अपने अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने का विरोध किया था। हूर्रियत कॉन्फ्रेंस के मजलिस ए शूरा ने कहा  था कि वह इसकी कड़ी निंदा करते हैं।

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