मोदी सरकार का अगला एजेंडा POK को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना: जितेंद्र सिंह


नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद हमारा अगला एजेंडा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना है. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिनों की सबसे बड़ी उपलब्धि में जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करना है. उन्होंने देश विरोधी काम करने वाले लोगों और ताकतों को चेतावनी देते हुए कहा कि, 'यह मानसिकता है कि आप कुछ भी करके बच निकलेंगे. अब आप बच कर निकल नहीं पाएंगे, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए आपको कीमत चुकानी होगी.'

पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने पारित किया था संकल्प:

ऊधमपुर-कठुआ लोकसभा सीट से सांसद जितेंद्र सिंह ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के विषय पर कहा कि, ‘यह केवल मेरी या मेरी पार्टी की प्रतिबद्धता नहीं है बल्कि यह 1994 में पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा संसद से सर्वसम्मति से पारित कराया गया संकल्प है. यह एक स्वीकार्य रुख है.’

अनुच्छेद 370 हटाने पर भारत के अनुकूल है पूरी दुनिया का रुख

अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त करने पर पाकिस्तान की ओर से शुरू किये गए दुष्प्रचार अभियान पर सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया का रुख भारत के अनुकूल है. उन्होंने कहा, कुछ देश जो भारत के रुख से सहमत नहीं थे, अब वे हमारे रुख से सहमत हैं. सिंह ने कहा कि कश्मीर में आम आदमी भारत सरकार से मिलने वाले लाभों को लेकर खुश है.

कश्मीर में कर्फ्यू नहीं, केवल कुछ पाबंदियां लगी हुई हैं

केंद्रीय मंत्री ने अपनी बात के समर्थन में कहा कि, कश्मीर न तो बंद है और ना ही कर्फ्यू के साए में है, बल्कि वहां केवल कुछ पाबंदियां लगी हुई हैं. सिंह ने देश विरोधी लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अपनी उस मानसिकता को बदलना पड़ेगा कि वे कुछ भी करके आसानी से बच निकलेंगे. आतंकियों द्वारा आम लोगों की हत्या किए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें पाकिस्तान का हाथ है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “हमें, कश्मीर कर्फ्यू के साए में है और पूरी तरह से बंद है, जैसे बयानों की निंदा करने की जरूरत है. कश्मीर बंद नहीं है. वहां कर्फ्यू नहीं है. अगर कर्फ्यू होता तो लोगों को बाहर निकलने के लिए ‘कर्फ्यू पास’ की जरूरत होती.” उन्होंने कहा कि कश्मीर में धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं.

इंटरनेट पर रोक हटाने को इच्छुक है सरकार

इंटरनेट सेवा बंद रखने के बारे में मोदी के मंत्री ने कहा कि, 'हम इंटरनेट सेवा को जल्द से जल्द बहाल करना चाहते हैं. इसके लिए प्रयोग के तौर एक कोशिश की गई थी लेकिन सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो डाले गए, इसलिए फैसले की फिर से समीक्षा करनी पड़ी.' जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार इन पाबंदियों को खत्म करने और इंटरनेट पर रोक हटाने को इच्छुक है.

भाजपा नेता ने की कांशीराम जी की मृत्यु की सीबीआई जांच की मांग


बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम (Kanshi Ram) की मृत्यु के 13 साल बाद उत्तर प्रदेश के मंत्री गिरिराज सिंह धर्मेश (Giriraj Singh Dharmesh) ने बसपा नेता की मौत की वजह बनीं परिस्थितियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है।

मंत्री ने कहा कि कांशीराम की मृत्यु 9 अक्टूबर 2006 को रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलूंगा और सीबीआई जांच का औपचारिक अनुरोध करूंगा।’’

मंत्री ने कहा कि कांशीराम की बहन सुवर्णा द्वारा लगाए गए आरोप सीबीआई जांच के लिए पर्याप्त आधार थे।

पिछले 13 सालों से कांशीराम का परिवार बसपा अध्यक्ष मायावती पर यह आरोप लगा रहा है कि मायावती ने दिग्गज नेता को बंदी बनाकर रखा था, जिससे उनका निधन हुआ।

सुवर्णा ने कहा, ‘‘मायावती ने कांशीराम की बीमारी में उनसे परिवार को मिलने की इजाजत नहीं दी थी। मेरी मां की मृत्यु हो गई, क्योंकि वह अपने बेटे से मिलना चाहती थी, लेकिन उन्हें भी दूर रखा गया था।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘2003 में मायावती ने कहा था कि उनके पास कांशीराम के इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। मेरी मां ने मायावती को अपनी सोने की चूडिय़ां सौंपीं, लेकिन उन्होंने फिर भी हमें उनसे मिलने नहीं दिया।’’

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मायावती ने परिवार को दूर रखा, क्योंकि वह बसपा पर पूरा नियंत्रण चाहती थीं।

परिवार ने मायावती पर कांशीराम की विचारधारा को धोखा देने का भी आरोप लगाया है।

सुवर्णा ने कहा, ‘‘कांशीराम ने हमेशा अपने परिवार को राजनीति से दूर रखा और भाई-भतीजावाद का समर्थन नहीं किया, लेकिन मायावती ने अपने भाई और भतीजे को बसपा में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘कांशीराम के अनुयायी बसपा को चलाने के तरीके से नाराज हैं। यह पार्टी अब दलित और समाज के हाशिए पर रहने वाले तबके के लिए नहीं है।’’

सूत्रों का दावा है कि सीबीआई जांच के लिए मंत्री की मांग बिना कारण नहीं है। यह स्पष्ट है कि भाजपा मायावती को किनारे करना चाहती है और ऐसा करने के लिए उनके पास यह एक सही मुद्दा है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘अगर इस मामले में जांच शुरू की जाती है, तो मायावती को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।’’

जितने ब्राह्मण पवित्र उतने ही पवित्र हैं दलित भी, हिंदू हैं तो ही भारत हैः संघ


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा है कि अनुसूचित वर्ग का व्यक्ति उतना ही पवित्र है, जितना कि ब्राह्मण कुल में जन्म लेने वाला. उन्होंने अनुसूचित समाज के साथ अन्याय को ईश्वर और भारत के आध्यात्मिक दर्शन के साथ अन्याय बताया है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा है कि अनुसूचित वर्ग में पैदा हुआ व्यक्ति उतना ही पवित्र है जितना ब्राह्मण कुल में जन्म लेने वाला. उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार ईश्वर के साथ अत्याचार है, इस देश की मौलिक आध्यात्मिक दर्शन के साथ अन्याय है. नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में सोमवार की सायं आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में संघ के वरिष्ठ नेता ने कहा कि जिस वक्त इस समाज को अन्याय सहना पड़ा, वह देश का दक्षिणायन रहा. संघ नेता के दक्षिणायन कहने का यहां आशय देश के बुरे दौर से रहा.

डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि पाकिस्तान में आज भी वे पांच नदियां(पंचनदियां) बहतीं हैं, जहां पर वेदों की रचना हुई थी. मगर वहां से भारत नष्ट हो गया, क्योंकि वहां हिंदू नहीं हैं. हिंदू हैं तो ही राष्ट्र हैं और हिंदुओं के रहने से ही भारत है. जहां हिंदू हैं, वही भारत है.  डॉ. सूर्यकांत बाली लिखित 'भारत का दलित विमर्श' और 'भारत की राजनीति का उत्तरायण' नामक पुस्तकों का इस दौरान डॉ. कृष्ण गोपाल और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) मंत्री प्रह्लाद पटेल ने विमोचन किया.

दलितों के साथ अन्याय देश के दर्शन के खिलाफ

डॉ. कृष्ण गोपाल ने 'दलित विमर्श' पुस्तक पर चर्चा के दौरान दलित शब्द के इस्तेमाल पर असहमति जताई. उन्होंने कहा कि संवधान सभा ने भी दलित शब्द की जगह अनुसूचित जाति शब्द स्वीकार किया था. यह तो अंग्रेजों की चाल थी जो दलित कहकर हिंदू समाज को बांटने की साजिश की गई.

डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि देश में काफी समय तक उस समाज(अनुसूचित) के साथ अत्याचार हुए. दरअसल, अतीत में जब भारत पर बाहरियों ने हमले किए तब देश का दक्षिणायन शुरू हुआ.  इस्लाम के आक्रमण के समय आत्मरक्षार्थ हिंदू समाज के सिकुड़ने का दौर शुरू हुआ. दरअसल यह एक ऐसा आक्रमण था जिसके पीछे सिर्फ जीत की इच्छा नहीं बल्कि धर्मांतरण भी था. समाज के सिकुड़ने के दौरान सबसे बड़ी समस्या सामाजिकता की आती है. एकत्रीकरण खत्म होता है, संवाद खत्म होता है. भारत तब कुरीतियों का दास बनता गया. इस दौरान समाज की व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई. जिसका असर अनुसूचित समाज के लोगों पर भी पड़ा. कहने का मतलब अनुसूचित समाज को उस वक्त परिस्थितिजन्य अन्याय झेलना पड़ा. जबकि अतीत में अनुसूचित समाज के लोगों, शूद्रों को समाज में विशिष्ट स्थान हासिल था. अनेक धर्मग्रंथों की रचना करने वाले शूद्र रहे.



संघ नेता ने कहा कि पुरानी बातें छोड़िए, वर्ष 1980-81 में भी अनुसूचित वर्ग के साथ बुरे बर्ताव की घटना सामने आई. जब  मीनाक्षीपुरम गांव(तमिलनाडु) में भदभाव के चलते कई दलित परिवारों के धर्मांतरण कर लेने का मामला सामने आया था. पता चला था कि  एक अनुसूचित वर्ग के चिकित्सक की पत्नी के सार्वजनिक नल पर रखा मटका छू लेने से पर कुछ लोगों ने अपमानित कर दिया था. अपने खिलाफ इस भेदभाव से दलित समुदाय की भावनाएं आहत हुईं. उन्हें लगा कि यह कैसा समाज है जो हमें सम्मान नहीं देता. बाद में संघ नेताओं ने दौरा कर वहां अनूसूचित वर्ग से हो रहे भेदभाव को खत्म कराया गया. तब जाकर फिर से उन्होंने हिंदू धर्म अपनाया था.

अनुसूचित वर्ग के साथ उत्पीड़न की घटनाओं के बारे में डॉ. कृष्णगोपाल ने कहा कि एक वक्त ऐसा भी था, जब देश में कुछ जगहों पर  तालाब का पानी जानवर तो पी सकते थे मगर अनुसूचित समाज को इसकी आजादी नहीं थी. तब डॉ. अंबेडकर पांच हजार लोगों के साथ महाड स्थान(महाराष्ट्र) पर तालाब का पानी पीने के लिए सत्याग्रह करने निकल पड़े. तब दलित समाज के लोगों को सार्वजनिक स्थलों पर पानी पीने का अधिकार दिलाने के लिए डॉ. अंबेडकर यह सत्याग्रह करने पहुंचे थे.

लंबी दूरी तय कर अंबेडकर के साथ पहुचे लोगों ने जब भोजन बनाया तो स्थानीय लोगों ने उनके भोजन में मिट्टी डाल दिया. इस पर अंबेडकर के साथियों को बहुत क्रोध आया. तब अंबेडकर ने समझाते हुए कहा था कि बैर से बैर खत्म नहीं होता. बाद में सत्याग्रह कर भूखे-प्यासे अंबेडकर लौट आए थे. कृष्ण गोपाल ने कहा कि बहुत समय तक अनुसूचित जाति के लोगों ने कष्ट पाया है. उनमें इसका गुस्सा भी है, जो जायज है. मगर इस भेदभाव को दूर करने के प्रयास भी होते रहे हैं. अतीत में ज्योतिबा फुले, दयानंद से लेकर तमाम महापुरुष इसके लिए आगे आते रहे हैं.

संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा कि यहां तक कि अंबेडकर को नासिक के जिस कला राम मंदिर में घुसने नहीं दिया वहां के पुजारी ने हाल में दलितों को बुलाकर पूजा कराई. पुजारी ने कहा था कि हमारे पूर्वजों ने जो भूल की थी,  उसे हम सुधारना चाहते हैं. डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि आगे हिंदुओं को तोड़ने के प्रयत्न होंगे. क्योंकि हिंदू ताकतवर लोग हैं. हमें षडयंत्रों से सावधान रहना होगा. विमोचन कार्यक्रम में संघ विचारक अवनिजेश अवस्थी और प्रभात  प्रकशन के प्रभात मौजूद रहे.

लंबी दूरी तय कर अंबेडकर के साथ पहुचे लोगों ने जब भोजन बनाया तो स्थानीय लोगों ने उनके भोजन में मिट्टी डाल दिया. इस पर अंबेडकर के साथियों को बहुत क्रोध आया. तब अंबेडकर ने समझाते हुए कहा था कि बैर से बैर खत्म नहीं होता. बाद में सत्याग्रह कर भूखे-प्यासे अंबेडकर लौट आए थे. कृष्ण गोपाल ने कहा कि बहुत समय तक अनुसूचित जाति के लोगों ने कष्ट पाया है. उनमें इसका गुस्सा भी है, जो जायज है. मगर इस भेदभाव को दूर करने के प्रयास भी होते रहे हैं. अतीत में ज्योतिबा फुले, दयानंद से लेकर तमाम महापुरुष इसके लिए आगे आते रहे हैं.

संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा कि यहां तक कि अंबेडकर को नासिक के जिस कला राम मंदिर में घुसने नहीं दिया वहां के पुजारी ने हाल में दलितों को बुलाकर पूजा कराई. पुजारी ने कहा था कि हमारे पूर्वजों ने जो भूल की थी,  उसे हम सुधारना चाहते हैं. डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि आगे हिंदुओं को तोड़ने के प्रयत्न होंगे. क्योंकि हिंदू ताकतवर लोग हैं. हमें षडयंत्रों से सावधान रहना होगा.


भारत को परमाणु हमले की धमकी देने वाले पाकिस्तान के रेल मंत्री की लंदन में पिटाई


जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में केंद्र सरकार की ओर से आर्टिकल 370 (Article 370) हटाए जाने के बाद भारत (India) को परमाणु हमले की धमकी देने वाले पाकिस्तान (Pakistan) के रेल मंत्री शेख रशीद (Sheikh Rashid) की लंदन (London) में जमकर पिटाई की गई है. लंदन में कुछ लोगों ने उन्हें घूंसे मारे और उनपर अंडे फेंके.

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, अवामी मुस्लिम लीग के प्रमुख व रेल मंत्री शेख रशीद पर लंदन में उस समय हमला किया गया जब वह एक होटल में पुरस्कार समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे. हमलावर शेख रशीद को पीटने के बाद वहां से भाग निकले. इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) से संबद्ध पीपुल्स यूथ ऑर्गनाइजेशन यूरोप के अध्यक्ष आसिफ अली खान और पार्टी की ग्रेटर लंदन महिला शाखा की अध्यक्ष समाह नाज ने ली है.

रेल मंत्री शेख रशीद ने कुछ दिन पहले ही पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी के खिलाफ अपशब्द कहे थे, जिसके बाद से पीपुल्स यूथ ऑर्गनाइजेशन यूरोप और ग्रेटर लंदन महिला शाखा के सदस्य उनसे नाराज चल रहे थे. हालांकि उन्होंने रशीद पर केवल अंडा फेंकने की बात कही है.

हमलावरों ने कहा- केवल अंडे फेंके गए

दोनों नेताओं ने कहा कि पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद को उनका अहसानमंद होना चाहिए कि उन्होंने उनके खिलाफ 'विरोध जताने के लिए ब्रिटेन में अंडा फेंकने के सभ्य तरीके का ही इस्तेमाल किया.' अवामी मुस्लिम लीग ने कहा कि उनके पास इस घटना का कोई वीडियो तो नहीं है लेकिन उन्होंने बताया कि उनके संगठन के सदस्यों ने शेख रशीद के ऊपर हमला किया था. इस मामले में जल्द मामला दर्ज कराया जा सकता है.

रविदास मंदिर तोड़ने को लेकर भड़की हिंसा, चंद्रशेखर आजाद रावण हिरासत में


दक्षिणी पूर्वी दिल्ली (South-East Delhi) के तुगलकाबाद और आसपास के इलाकों में बुधवार देर शाम हिंसा (Clashes) भड़क गई. बताया जा रहा है कि रविदास मंदिर को तोड़ने को लेकर यह हिंया भड़की. इस दौरान उपद्रवियों ने कई वाहनों में ताड़फोड़ और आगजनी की. हिंसा में कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गए. मामला गंभीर होता देख उपद्रवियों को काबू में करने के लिए पुलिस (Police) ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज भी किया. इस दौरान भीम आर्मी (Bheem Army) समेत कई अन्य गुटों के लोगों को पुलिस ने हिरासत (Detained) लिया है. इस दौरान पुलिस ने भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण को भी हिरासत में लिया है.

100 से ज्यादा गाड़ियों में तोड़फोड़

पुलिस ने बताया कि उपद्रवियों ने इस दौरान 100 से ज्यादा वाहनों में तोड़फोड़ की. इनमें ज्यादातर पुलिस वाहन शामिल थे. इसके साथ ही कुछ निजी वाहनों को भी उपद्रवियों ने निशाना बनाया. वहीं दो मोटरसाइकिलों को भी आग के हवाले कर दिया गया. मामला बिगड़ता देख पहले पुलिस ने लाठीचार्ज किया, बाद में भीड़ को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे गए.

70 लोगों को हिरासत में लिया

दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के डीसीपी चिन्मय बिस्वाल ने जानकारी दी की उपद्रवियों के साथ ही भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को भी गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने बताया कि भीम आर्मी के लोगों के साथ ही अन्य संगठनों के करीब 70 लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है. डीसीपी के अनुसार भीड़ ने पुलिस वाहनों पर भी हमला कर दिया जिसके चलते कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हो गए हैं, जिनको अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.

इमरान खान ने इस्लाम छोड़ अपनाया हिंदू धर्म, पूर्वजों थे सूर्यवंशी


नोएडा के इमरान खान ने अपना धर्म बदल लिया है। अब वे इस्लाम की बजाय हिंदू धर्म का पालन कर रहे हैं। उन्होंने अपना नाम भी बदलकर राम राघव रख लिया है। उनका दावा है कि उनके पूर्वज सूर्यवंशी ठाकुर थे, जिन्होंने पूर्व में किन्हीं परिस्थितियों में आकर इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। लेकिन अब वे अपनी जिंदगी एक हिंदू के रुप में गुजारना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने सनातन धर्म या हिंदू धर्म अपनाना स्वीकार कर लिया है। ग्रेटर नोएडा के भगवान विश्वनाथ मंदिर में अगले शनिवार (17 अगस्त) को उनके हिंदू धर्म में प्रवेश को धार्मिक प्रक्रिया के जरिये पूरा किया जाएगा। 


इमरान खान पुत्र जफरुद्दीन खान ने अमर उजाला को बताया कि वे पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं, और स्वयं का व्यवसाय करते हैं। उन्होंने धर्म बदलने का निर्णय पूरी तरह अपनी इच्छा से लिया है। उनके ऊपर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है और इसके बाबत एफीडेविट बनवाकर उन्होंने इसकी घोषणा भी की है। 

परिवार में हर धर्म समान
उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि उनका परिवार सूर्यवंशी ठाकुर था। राघव गोत्र के बड़गूजर के रुप में उनकी पहचान हुआ करती थी। लेकिन किन्हीं कारणों से उनके पूर्वजों ने धर्म परिवर्तन कर लिया था। लेकिन धर्म परिवर्तन के बाद भी उनके परिवार में हिंदुओं के त्योहार समान रुप से मनाए जाते थे। ईद और बकरीद के साथ-साथ वे हिंदू परिवारों के साथ मिलकर हमेशा दिवाली और होली मनाते आए हैं। ऐसे में उनके परिवार की खुली सोच ने उन्हें अपने अंदर और बाहर झांकने की अनुमति दी और अब उन्होंने स्वयं को पूर्णरुपेण हिंदू बनाने का निश्चय कर लिया। 

परिवार से कोई बाधा नहीं
इमरान खान उर्फ राम राघव ने कहा कि उनके परिवार की तरफ से किसी ने उनके फैसले का कोई विरोध नहीं किया है। उनके परिवार में दो भाई हैं और दोनों उच्च शिक्षित हैं। परिवार में उनकी पत्नी भी हैं। लेकिन किसी भी सदस्य ने उनके इस फैसले का विरोध नहीं किया है। इमरान को उम्मीद है कि हो सकता है कि उनके धर्म के परिवर्तन के बाद उनके भाई भी हिंदू धर्म में वापसी करें।  



राहुल और प्रियंका के तार NSEL के घोटालेबाज जिग्नेश शाह से जुड़े, देखिये सबूत


राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के तार 2013 में हुए एनएसईएल घोटाले के कर्ताधर्ता जिग्नेश शाह से जुड़े हैं। वो भी तब जब यूपीए सरकार के दौरान सीबीआई उसकी जांच कर रही थी।

साल 2013 में एनएसईएल घोटाले का पता चला। जिसकी जांच मजबूरी में  सीबीआई को सौंपी गई। जिग्नेश शाह के खिलाफ 150 पन्नों  की चार्जशीट दायर की गई। इसके बाद जनवरी 2014 में मुंबई पुलिस ने 9 हजार पन्नों की सप्लिमेंट्री चार्जशीट दायर की। और फिर अप्रैल 2015 में ईडी ने जिग्नेश शाह के खिलाफ चार्जशीट दायर की। जिग्नेश शाह के खिलाफ जो मामला दायर हुआ उसमें धोखाधड़ी, आपराधिक षडयंत्र और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के उल्लंधन का आरोप था। 

दरअसल, दिल्ली के महरौली इलाके के इंदिरा गांधी फॉर्महाउस है। ये महरौली के सुल्तानपुर गांव में है। 4.6 एकड़ के इस फॉर्महास की चाहरदीवारी 1014 फीट लम्बी है। इसके मालिक राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा हैं। 

राहुल गांधी ने 2009 के चुनाव में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के सामने जो हलफनामा दायर किया था उसके मुताबिक 4.6 एकड़ के इस फॉर्महाउस की कीमत 9.86 लाख रुपये थी। जाहिर है इस बात को कोई भी आसानी से समझ जाएगा कि किस तरह करोड़ों की प्रॉपर्टी का दाम औना पौना दिखाया गोलमाल की गई है।

जिस वक्त एनएसईएल घोटाला हुआ था उस वक्त जिग्नेश शाह राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा को 60.30 लाख रुपये इस फॉर्महाउस का किराया दे रहे थे। किराए की इस रकम को वो 6 लाख सत्तर हजार रुपये की मासिक किस्त के तौर पर अदा कर रहे थे। रुपयों का भुगतान चेक के जरिए किया गया था। 

एक फरवरी 2013 को राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा ने 11 महीने के लिए ये करार किया। दिलचस्प ये कि जिस प्रॉपर्टी की कीमत राहुल गांधी ने 9.86 लाख रुपये अपने हलफनामे में लगाई थी उसे एक घोटालेबाज को देकर वो महीने का 6 लाख 70  हजार रुपये किराए में कमा रहे थे।

किराए का ये एग्रीमेंट राहुल ने जिग्नेश शाह के साथ तब किया जब एनएसईएल को कंज्यूमर अफेयर विभाग 2012 में एक नोटिस भेज चुका था।

उससे भी हैरान करने वाली बात ये कि जिग्नेश शाह ने राहुल और प्रियंका को प्रॉपर्टी की कीमत से 405 परसेंट ज्यादा रुपया डिपाजिट मनी के तौर पर दी थी। जिग्नेश शाह की कंपनी ने राहुल और प्रियंका को तीस लाख 14 हजार रुपये सेक्युरिटी मनी के तौर पर दी थी। 

जिग्नेश शाह देश के सबसे बड़े घोटालेबाजों में से एक है । जिग्नेश शाह ने एनएसईएल घोटाले के जरिए देश में तकरीबन 13 हजार निवेशकों से तकरीबन 56 हजार करोड़ रुपये की ठगी की थी।

सोर्स : रिपब्लिक भारत 

दिल्ली में हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी का घर सीज हुआ


हुर्रियत कॉन्‍फ्रेंस पर कानूनी शिकंजे के साथ अब इनकम टैक्‍स विभाग ने भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में आज इनकम टैक्‍स विभाग ने हुर्रियत के चेयरमैन और अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का दिल्‍ली स्थित आवास को सीज कर दिया है. गिलानी का यह आवास दिल्‍ली के मालवीय नगर स्थित खिड़की एक्‍सटेंशन में स्थित है. इस आवास में गिलानी के साथ ही उसके दामाद की भी हिस्‍सेदारी बताई जा रही है.

आयकर विभाग के अनुसार, अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी पर 1996-97 से लेकर 2001-2002 से लेकर 3.62 करोड़ से अधिक की देनदारी है. इससे पहले भी अलगाववादी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई थी. बता दें कि पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और जम्मू-कश्मीर के हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक की फोन पर बातचीत को लेकर उपजे विवाद के बाद पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत को उकसाने का काम किया था. अब शाह महमूद ने कश्मीर के कट्टर अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी से फोन पर बातचीत की थी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे से पहले पाकिस्तान ने पिछले 4 दिनों में कश्मीर के मामलों में दोबारा हस्तक्षेप किया था. सूत्रों के मुताबिक शाह कुरैशी ने गिलानी से कश्मीर की स्थिति और मानवाधिकार उल्लंघन के मुद्दों पर बातचीत की थी.

इससे पहले शाह ने कश्मीरी अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक से इन्हीं मुद्दों पर बातचीत की थी, जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान उच्चायुक्त को बुलाकर कड़ा विरोध जताया था और पाक को कश्मीर के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने को कहा था. बता दें कि कश्मीर घाटी में गिलानी एक प्रमुख अलगाववादी नेता हैं और कई दशकों से कश्मीर के अलग होने की आवाज उठाते रहे हैं. पिछले साल केंद्र सरकार की तरफ से भेजे गए वार्ताकार (विशेष प्रतिनिधि) से उन्होंने बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था.


Govt will Prosecute 'The Hindu' News Over 'Stolen' #Rafale Docs


India’s Attorney General KK Venugopal told the Supreme Court on Wednesday it may file a criminal case against The Hindu newspaper under India’s Official Secrets Act for publishing “stolen” government documents about a deal to buy 36 Rafale jets from France.

Venugopal argued that the documents published by The Hindu should not be examined by the court, which is considering petitioners’ requests to review how the deal was awarded, as he says they were stolen.

He added that the government was considering prosecuting The Hindu under the act that seeks to protect government secrets.

N. Ram, author of a series of articles that cited the documents and chairman of The Hindu Publishing Group, said they were published in the public interest.

“There is nothing to worry about. What we published is legitimate and we stand by it,” Ram told Rashtravaadi.com. 

India has ordered the planes costing a total $8.7 billion from France’s Dassault Aviation as part of a modernisation program of the air force which is phasing out its Soviet-era planes.

But the deal has been the centre of allegations from Congress that the government of Prime Minister Narendra Modi paid too much and that it forced Dassault to accept Anil Ambani’s Reliance Defence as its Indian partner even though the company had no such prior experience in defence contracting.

When asked for comment, a Dassault spokesman referred to comments its CEO Eric Trappier has made in the past on pricing and the choice of a partner. Trappier has previously defended the pricing, said there was no scandal, and stressed that it was not forced to pick Reliance as a partner.

Ambani has previously said that the Congress has been misled and misinformed by corporate rivals and vested interests. 

The Hindu, one of India’s oldest and most widely read English newspapers, wrote five reports over the past several weeks that cited internal government documents about the process of procurement and pricing.

Those found guilty of violating the colonial-era Official Secrets Act, which remained on the books after India’s independence from Britain in 1947, can face imprisonment of up to 14 years. The law has been used to jail journalists in the past, and is opposed by rights groups as they say it violates free speech.

Venugopal said the Supreme Court should exercise restraint and stay away from politics, adding that a defence deal should not be equated to a public interest petition about a road or a dam.


मोदी कैबिनेट ने अध्यादेश लाकर खारिज किया 13 प्‍वाइंट रोस्‍टर


मोदी कैबिनेट ने यूनिवर्सिटी नियुक्ति में 200 पॉइंट रोस्टर की वापसी लाने से संबंधित ऑर्डिनेंस को मंजूरी दे दी. इसके बाद अब यूनिवर्सिटी की नौकरियों में पहले जैसा आरक्षण मिलेगा. बता दें कि ओबीसी संगठन इसका विरोध कर थे. 5 मार्च को इसी मुद्दे पर भारत बंद भी बुलाई गई थी.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पुराने 200 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम लागू करने को लेकर मानव संसाधन मंत्रालय और UGC द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटीशन को 22 जनवरी को ही खारिज कर दिया था. बाद में सरकार ने पुनर्विचार याचिका भी दायर की थी जिसे कोर्ट ने 28 फरवरी को खारिज कर दिया था. हालांकि मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर लगातार कह रहे थे कि ज़रूरत पड़ी तो सरकार अध्यादेश लाकर 13 पॉइंट रोस्टर सिस्टम को रद्द कर देगी. अब मोदी सरकार की आखिरी कैबिनेट बैठक में इस पर अध्यादेश लाया गया है.

पहले यूनिवर्सिटी को एक इकाई माना जाता था और इसी आधार पर आरक्षण लागू होता था. लेकिन बाद में यूजीसी ने नए नियम के मुताबिक आरक्षण को विभाग वार लागू किया जाएगा. पहले वेकैंसी 200 प्वाइंट रोस्टर के हिसाब से निकलती थी लेकिन अब 13 प्वाइंट रोस्टर बना दिया गया है. यूजीसी के इस नियम पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुहर लगाई. इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. सुप्रीम कोर्ट ने भी 13 प्वाइंट रोस्टर को सही करार दिया. अब पुराने नियम के पक्षधर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अध्यादेश लाए जाने की मांग कर रहे हैं.

यूजीसी के मुताबिक, 14 से कम पद जहां होंगे वहां 13 प्वाइंट रोस्टर लागू होगा और उससे अधिक सीटें होंगी तो 200 प्वाइंट रोस्टर लागू किया जाएगा. 13 प्वाइंट रोस्टर में बताया गया है कि कौन से वर्ग के लिए कौन सा क्रम होगा.

इसके मुताबकि, पहला, दूसरा और तीसरा पद अनारक्षित होगा. जबकि चौथा पद ओबीसी कैटेगरी के लिए. फिर पांचवां और छठां पद अनारक्षित. इसके बाद 7वां पद अनुसूचित जाति के लिए, 8वां पद ओबीसी और फिर 9वां, 10वां, 11वां पद अनारक्षित के लिए. 12वां पद ओबीसी के लिए, 13वां फिर अनारक्षित के लिए और 14वां पद अनुसूचित जनजाति के लिए होगा.

यानि अब किसी यूनिवर्सिटी में चार पदों के लिए वेकैंसी निकलती है तब जाकर ओबीसी को, सात पदों की निकलती है तो अनुसूचित जाति को और 14 पदों की निकलती है तो अनुसूचित जनजाति को मौका मिलेगा.

आमतौर पर यूनिवर्सिटी के किसी एक विभाग में चार पांच से अधिक सीटें नहीं होती है. 13 प्वाइंट रोस्टर का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि इसी बहाने सरकार आरक्षण पूरी तरह से खत्म करना चाहती है.

200 प्वाइंट रोस्टर में एक से लेकर 200 नंबर तक आरक्षण कैसे लागू होगा इसका ब्योरा होता था. इसके तहत 49.5 प्रतिशत आरक्षण लागू होता था और बांकी की सीट अनारक्षित होती थी. विपक्षी पार्टियां और दलित कार्यकर्ता 200 प्वाइंट वाले पुराने रोस्टर की मांग कर रहे हैं.


जम्‍मू और कश्‍मीर में सरकारी सेवाओं में आरक्षण लागू हुआ



मंत्रिमंडल ने संविधान (जम्‍मू और कश्‍मीर में लागू होने के लिए) संशोधन आदेश,2019 को स्‍वीकृति दी 

जम्‍मू और कश्‍मीर में सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए पदोन्‍नति लाभ जम्‍मू और कश्‍मीर में शिक्षा संस्‍थानों तथा सार्वजनिक रोजगार में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संविधान (जम्‍मू और कश्‍मीर में लागू होने के लिए) संशोधन आदेश, 2019 के माध्‍यम से संविधान (जम्‍मू और कश्‍मीर में लागू होने के लिए) आदेश,1954 में संशोधन के संबंध में जम्‍मू और कश्‍मीर सरकार के प्रस्‍ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। इससे राष्‍ट्रपति द्वारा अनुच्‍छेद 370 की धारा (1) के अंतर्गत जारी संविधान (जम्‍मू और कश्‍मीर में लागू होने के लिए) संशोधन आदेश,2019 द्वारा संविधान (77वां संशोधन) अधिनियम,1955 तथा संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम,2019 से संशोधित भारत के संविधान के प्रासंगिक प्रावधान लागू होंगे।

प्रभाव:

अधिसूचित होने पर यह आदेश सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों को पदोनत्ति लाभ का मार्ग प्रशस्‍त करेगा और जम्‍मू और कश्‍मीर में सरकारी रोजगार में वर्तमान आरक्षण के अतिरिक्‍त आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत तक आरक्षण का लाभ प्रदान करेगा।

पृष्‍ठभूमि: समानता और समावेश:

संविधान (77वां संशोधन) अधिनियम 1955 को भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 16 की धारा 4 के बाद धारा (4ए) जोड़कर लागू किया गया। धारा (4ए) में सेवा में अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों को पदोन्‍नति लाभ देने का प्रावधान है। संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम 2019 देश में जम्‍मू और कश्‍मीर को छोड़कर लागू किया गया है और जम्‍मू और कश्‍मीर तक अधिनियम के विस्‍तार से राज्‍य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण का लाभ प्राप्‍त होगा। 



और इस बीच राष्ट्रपति महोदय ने इन चार अध्यादेशों को मंजूरी दे दी


राष्‍ट्रपति  महोदय ने चार अध्‍यादेश को मंजूरी दी 

राष्‍ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्‍द ने 21 फरवरी, 2019 को निम्‍नलिखित चार अध्‍यादेशों को मंजूरी दे दी :-

1. मुस्लिम महिला (मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्ष) दूसरा अध्‍यादेश ,2019
2. भारतीय चिकित्‍सा परिषद (संशोधन) दूसरा अध्‍यादेश, 2019
3. कंपनी (संशोधन) दूसरा अध्‍यादेश, 2019  
4. अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध से संबंधित अध्‍यादेश, 2019


मुस्लिम महिला (मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण) दूसरा अध्‍यादेश, 2019 के जरिये मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अध्‍यादेश, 2019 के प्रावधानों को बनाये रखने के लिए लाया गया है।

इस अध्‍यादेश के जरिये तीन तलाक को अमान्‍य और गैर-कानूनी करार दिया गया है। इसे एक दंडनीय अपराध माना गया है, जिसके तहत तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

यह अध्यादेश विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा करेगा एवं उन्हें उनके पतियों द्वारा तत्कालिक एवं अपरिवर्तनीय ‘तलाक-ए-बिद्दत‘ के प्रचलन के द्वारा तलाक दिए जाने को रोकेगा। यह तीन तलाक यानी ‘तलाक-ए-बिद्दत‘ की प्रथा को निरुत्साहित करेगा। प्रस्तावित अध्यादेश का प्रख्यापन आजीविका भत्ता, तीन तलाक यानी ‘तलाक-ए-बिद्दत‘ के पीड़ितों के नाबालिग बच्चों का संरक्षण का अधिकार प्रदान करेगा।

भारतीय चिकित्‍सा परिषद (संशोधन) दूसरा अध्‍यादेश, 2019 पूर्व में जारी अध्‍यादेश के प्रावधानों के अनुरूप संचालक मंडल बीओजी द्वारा शुरू किये गये कार्यों को आगे भ्‍ज्ञी जारी रखने के लिए लागू किया गया है। यह अध्‍यादेश यह सुनिश्चित करेगा कि पूर्व अध्यादेश के प्रावधानों के तहत किये गये कार्य को मान्यता प्राप्त है तथा यह आगे भी जारी रहेगी। भारतीय चिकित्‍सा परिषद के निवर्तन के बाद गठित संचालक मंडल को दो वर्षों तक या परिषद के दोबार गठन तक जो भी पहले हो, तक उसके सभी अधिकारों का इस्‍तेमाल करने का अधिकार देता है। इसका उद्देश्‍य देश में चिकित्‍सा शिक्षा को ज्‍यादा पारदर्शी, गुणवत्‍ता युक्‍त और जवाबदेह बनाना है।

देश में कानून का पालन करने वाली कंपनियों को कारोबारी सुगमता का माहौल प्रदान करने के साथ ही कंपनी कानून, 2013 की कॉरपोरेट गवर्नेंस और नियमों के अनुपालन की व्‍यवस्‍था को और सख्‍त बनाने के इरादे से कंपनी (संशोधन) दूसरा अध्‍यादेश 2019 लागू किया गया है। यह कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत अपराधों की समीक्षा करने वाली समिति की अनुशंसाओं पर आधारित है ताकि कंपनी अधिनियम 2013 में वर्णित कॉरपोरेट प्रशासन तथा अनुपालन रूपरेखा के महत्‍वपूर्ण अंतरों/कमियों को समाप्‍त किया जा सके और कानून का पालन करने वाले उद्यमों को व्‍यापार में आसानी की सुविधा प्रदान की जा सके। इससे कानून का पालन करने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा उल्‍लंघन करने वालों को गंभीर सजा भुगतनी होगी। इसके माध्‍यम से केन्‍द्र सरकार को यह अधिकार दिया जा रहा है कि वह वित्‍तीय कारोबार से जुड़ी कुछ कंपनियों को ट्राइब्‍यूनल द्वारा तय किए गए वित्‍त वर्ष  की बजाए विभिन्‍न वित्‍त वर्ष चुनने की अनुमति प्रदान कर सके।

इसमें  तकनीकी तथा प्रक्रिया संबंधी छोटी गलतियों के लिए सिविल सजा का प्रावधान है। इससे कॉरपोरेट प्रशासन तथा अनुपालन रूपरेखा के अंतर्गत बहुत सारे मामलों की कमियों को दूर किया जाएगा जैसे :-

16 छोटे अपराधों की पुनर्सूची बनाना और इसे पूरी तरह सिविल अपराध की श्रेणी में रखना। इससे विशेष न्‍यायालयों के मामलों की संख्‍या में कमी आएगी।

एनसीएलटी के कुछ रोजमर्रा कार्याकलापों को केन्‍द्र सरकार को स्‍थानांतरित करना जैसे वित्त वर्ष में बदलाव के लिए आवेदन और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को निजी कंपनी में बदलना।

पंजीकृत कार्यालय को संचालित नहीं कर पाने और व्‍यापार की रिपोर्टिंग नहीं कर पाने जैसी स्थितियों में उनके नाम कंपनी रजिस्‍टर से हटा दिए जाएंगे।

आर्थिक दण्‍ड लगाने तथा इसे संशोधित करने के लिए कड़े प्रावधानों के साथ निश्चित अवधि को संक्षिप्‍त करना।
निदेशक की अधिकतम सीमा के उल्‍लंघन को अयोग्‍यता का आधार बनाना।

इससे  कॉरपोरेट जगत को कानूनों के अनुपालन में आसानी होगी, विशेष न्‍यायालयों में मामलों की संख्‍या में कमी आएगी, एनसीएलटी पर कार्य का बोझ कम होगा और इसका उचित क्रियान्‍वयन होगा। वर्तमान में कुल 40,000 लंबित मामलों का 60 प्रतिशत प्रक्रि‍यागत त्रुटियों पर आधारित हैं। इन्‍हें विभाग के आंतरिक व्‍यवस्‍था में स्‍थानांतरित किया जाएगा और उद्यमों को कानून अनुपालन के लिए प्रोत्‍साहित किया जाएगा। इन संशोधनों के माध्‍यम से एनसीएलटी के समक्ष लंबित मामलों की संख्‍या में कमी आएगी। विशेष न्‍यायालयों से मामलों को वापस ले लिया जाएगा। इसके लिए आम माफी की योजना लाई जाएगी। प्रक्रिया से जुड़े अपराधों को आपराधिक मुकदमे के स्‍थान पर सिविल दायित्‍व की श्रेणी में रखा जाएगा।

अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अध्‍यादेश 2019 को देश में अवैध रूप से धनराशि जमा कराने वाली योजनाओं पर नकेल कसने के लिए केन्‍द्र की ओर से सख्‍त काननू लाने के इरादे से लागू किया गया है।अभी तक गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनियों को आम जनता से विभिन जमा योजनाओ के तहत पैसा जुटाने की सारी गति‍विधियां केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों की ओर से बनाए गए विभिन्‍न कानूनों के तहत करने की अनुमति मिली हुयी है  जिनमें कोई एकरूपता नहीं है । जिसका लाभ फरेबी पोंजी कंपनियों लोगों को उनके जमा पर ज्‍यादा ब्‍याज देने का लालच देकर ठग रही हैं। ऐसे में नए अध्‍यादेश के जरिए ऐसी कंपनियों पर प्रतिबंध की  प्रभावी व्‍यवस्‍था की गयी है।  इसके जरिए ऐसी योजना पर तुरंत रोक लगाने और इसके लिए आपराधिक दंड का प्रावधान किया गया है। इसमें जमाकर्ताओं के लिए फरेबी कंपनियों की परिसंपत्तियां कुड़की कर जमाकर्ताओं को उनका पैसा तुरंत  वापस दिलाने की  व्‍यवस्‍था भी है।

अब मिलेगी ईपीएफ खातें में जमा राशि पर 8.65% ब्याज दर #EPFO


ईपीएफ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड ने वर्ष 2018-19 के लिए ईपीएफ सदस्य के खातें में जमा राशि पर 8.65 प्रतिशत ब्याज दर जमा करने की सिफारिश की है 

केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संतोष कुमार गंगवार की अध्यक्षता में आज ईपीएफ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड की 224 वीं बैठक का आयोजन किया गया। केंद्रीय बोर्ड ने वर्ष 2018-19 के लिए ईपीएफ सदस्य के खातें में जमा राशि पर 8.65 प्रतिशत ब्याज दर जमा करने की सिफारिश की है।

केंद्रीय बोर्ड ने 12 फरवरी, 2019 को आयोजित वित्तीय निवेश और लेखा परीक्षा समिति की 141 वीं बैठक में अनुमोदित अनुसार ईपीएफ योजना 1952 में संशोधन की पुष्टि की है ताकि एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) (इक्विटी और संबंधित निवेश) में निवेश के लेखा जोखा को संक्षम बनाया जा सके।

केंद्रीय बोर्ड ने सीबीटी ईपीएफ के चेयरमैन के कम्प्यूट्रीकरण परियोजना के दूसरे चरण को पूरा करने के लिए एक सलाहकार के रूप में सी-डेक को जारी रखने के अनुमोदन की पुष्टि की है। बोर्ड ने 31 मार्च, 2019 तक की अवधि के लिए अनुबंध की मौजूदा शर्तों पर ईपीएफओ प्रतिभूतियों के संरक्षक के रूप में मैसर्स स्टेंडर्ड चार्टर्ड बैंक को सेवा विस्तार दिया है।

केंद्रीय बोर्ड ने वर्ष 2018-19 के संशोधित अनुमानों और वर्ष 2019-20 के बजट अनुमानों के लिए मंजूरी देते हुए केंद्र सरकार को अनुमोदन करने की सिफारिश की है। केंद्रीय बोर्ड ने ईपीएफ एंड एमपी एक्ट 1952 की धारा 17(2) के साथ पठित ईपीएफ योजना 1952 के पैरा 27ए के तहत उचित शासन द्वारा 6 प्रतिष्ठानों को छूट देने की सिफारिश के प्रस्ताव पर भी विचार किया है। बोर्ड ने  ईपीएफ एंड एमपी एक्ट 1952 की धारा 17(2) के साथ पठित ईपीएफ योजना 1952 के पैरा 27ए के तहत उचित शासन द्वारा मैसर्स सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया को छूट देने की सिफारिश के प्रस्ताव पर भी विचार किया है।

बड़ा फैसला : जम्मू से श्रीनगर सभी जवानों को अब हवाई रास्ते से भेजा जाएगा


पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद सतर्क केंद्र सरकार ने गुरुवार को बड़ा फैसला लिया है. अब जम्मू-कश्मीर में तैनात सभी सुरक्षाबल के जवान जम्मू से श्रीनगर सड़क से यात्रा नहीं करेंगे. सभी जवानों को अब हवाई रास्ते से भेजा जाएगा. इस आदेश को गुरुवार से ही लागू कर दिया गया है. इस आदेश के बारे में बुधवार देर शाम ही सुरक्षाबलों के प्रमुखों को अवगत करा दिया गया है.  

ये आदेश असम रायफल्स, बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और एनएसजी समेत सभी जवानों पर लागू होगा. यानी जो भी जवान अपनी ड्यूटी से लौट रहा हो, उसका ट्रांसफर हुआ हो या फिर घर से लौट रहा हो, उन सभी जवानों को जम्मू बेस कैंप या नई दिल्ली से श्रीनगर हवाई रास्ते से ही भेजा जाएगा. इतना ही नहीं अगर कोई जवान श्रीनगर से लौट रहा है तो भी उसे हवाई सुविधा मिलेगी.

पहले ये सुविधा सीनियर रैंक के अधिकारियों को मिलती थी, लेकिन अब सभी जवानों पर ये नियम लागू होगा. गुरुवार को गृह मंत्रालय की ओर से ट्वीट कर इस फैसले की जानकारी दी गई.


- दिल्ली से श्रीनगर, श्रीनगर से दिल्ली, जम्मू से श्रीनगर, श्रीनगर से दिल्ली रूट पर सभी जवानों को फायदा

- करीब 7 लाख 80 हजार जवानों को इस फैसले का सीधा लाभ मिलेगा

- इनमें कॉन्स्टेबल, हेड कॉन्स्टेबल, अस्सिटेंट सब इन्सपेक्टर को भी मिलेगा लाभ

14 फरवरी को जो पुलवामा में आतंकी हमला हुआ था, तब सुरक्षाबलों का एक बड़ा काफिला सड़क के रास्ते जम्मू से श्रीनगर जा रहा था. इसी का फायदा उठाते हुए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ने सीआरपीएफ के जवानों को निशाना बनाया था.

तब 78 वाहनों में करीब 2500 जवान जम्मू से श्रीनगर जा रहे थे, उसी दौरान जब काफिला पुलवामा में पहुंचा. तो जैश के लोकल आतंकी आदिल अहमद डार ने अपनी विस्फोटक से भरी गाड़ी को जवानों के काफिले में घुसा दिया था, जिसकी वजह से धमाका हुआ और 40 जवान शहीद हो गए थे.

गौरतलब है कि इससे पहले भी हमले के तुरंत बाद गृह मंत्रालय ने बड़ा फैसला करते हुए ऐलान किया था कि जब सेना का काफिला किसी रास्ते से गुजर रहा होगा, तो वहां आम लोगों को अपना वाहन लाने की इजाजत नहीं होगी.

सरकार इसके अलावा भी कई बड़े फैसले ले चुकी है. जिसमें जम्मू-कश्मीर में रह रहे अलगाववादी नेताओं को मिली सुरक्षा वापस ले ली गई थी. वहीं सेना के जवानों के काफिले के रूट और नियमों में भी कई तरह के बदलाव किए गए हैं.

राफेल डील: कैग रिपोर्ट के बाद बोले जेटली, गुमराह करनेवालों को जनता सजा देगी

राफेल डील पर जारी सियासी घमासान के बीच आज नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट राज्यसभा में पेश की गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक यूपीए के मुकाबले NDA के शासनकाल में 2.86% सस्ती डील फाइनल की गई है। CAG रिपोर्ट के मुताबिक 126 विमानों की तुलना में भारत ने 36 राफेल कॉन्ट्रैक्ट में 17.08% पैसे बचाए हैं। आपको बता दें कि मोदी सरकार के समय में 2016 में 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का सौदा हुआ। इससे पहले UPA के समय में 126 राफेल का सौदा हुआ था पर कई शर्तों पर आम राय नहीं बन सकी थी।

रिपोर्ट में 2007 और 2015 की मूल्य बोलियों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। इसमें लिखा है, 'आईएनटी द्वारा गणना किए गए संरेखित मूल्य 'यू 1' मिलियन यूरो था जबकि लेखापरीक्षा द्वारा आंकलित की गई संरेखित कीमत 'सीवी' मिलियन यूरो थी जो आईएनटी संरेखित लागत से लगभग 1.23 प्रतिशत कम थी। यह वह मूल्या था जिस पर 2015 में अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने चाहिए थे यदि 2007 और 2015 की कीमतों को बराबर माना जाता। लेकिन इसके जगह 2016 में 'यू' मिलियन यूरो के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे जो लेखापरीक्षा के संरेखित कीमत से 2.86 प्रतिशत कम थी।' 


हालांकि कांग्रेस ने CAG रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े किए हैं। 141 पेज की यह रिपोर्ट रखे जाने के बाद राज्यसभा में हंगामा शुरू हो गया जिसके कारण सभापति को सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं, लोकसभा में भी TDP और TMC सदस्यों के हंगामे के कारण सुबह कामकाज नहीं हो सका और कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

राफेल डील को लेकर कांग्रेस के सांसदों ने राहुल गांधी के नेतृत्व में संसद परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान सांसदों ने 'चौकीदार चोर है' के नारे लगाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान सोनिया गांधी और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह भी मौजूद थे। 

सीएजी रिपोर्ट राज्यसभा में पेश किए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट कर लिखा, 'सत्यमेव जयते-सत्य की जीत हमेशा होती है। राफेल पर CAG रिपोर्ट से यह कथन एक बार फिर सच साबित हुआ है।' एक अन्य ट्वीट में जेटली ने कहा, 'CAG रिपोर्ट से महाझूठबंधन के झूठ उजागर हो गए हैं।' 

जेटली ने कहा कि रिपोर्ट ने कांग्रेस पार्टी द्वारा फैलाए जा रहे बड़े झूठों का भंडाफोड़ दिया। जिसे कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी बार-बार फैला रहे थे। उन्होंने कहा कि अब डील से सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट है, सीएजी भी संतुष्ट है, जिससे सरकार की नीयत पर सवाल नहीं उठना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, 'मामले को यहीं खत्म नहीं होना चाहिए, लोगों को उन्हें जरूर सजा देनी चाहिए जिन्होंने उन्हें गुमराह किया।' 

जेटली ने दशकों पुराने सेंट कीट्स के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस दोबारा वैसा ही करना चाहती है। उन्होंने कहा, '1989 में राजीव गांधी की सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त थी। इसको छिपाने के लिए उन्होंने वी पी सिंह के खिलाफ सेंट कीट्स का मामला उछाला। अब जब मोदी सरकार की इमेज साफ है तो वह फिर ऐसी ही कोशिश कर रहे हैं।' 

रक्षा मंत्रालय के 3 अफसरों के जिस डिसेंट नोट पर विवाद हुआ था उसका जिक्र करते हुए जेटली ने कहा, 'संवैधानिक प्रोसेस में सभी को अपने विचार बताने का अधिकार है। लेकिन आखिरी फैसला सरकार को ही लेना होता है।' जेटली ने आगे कहा, 'अधिकारी ने पहले नोट पर साइन करके वह चीजें बताई जिसपर वह राजी नहीं थे। इसके बाद नई डील की टर्म्स पर उन्होंने ही साइन किए हैं। इसका मतलब साफ है कि नोट लिखनेवाले ने डील का समर्थन किया है।' 

राफेल डील पर मीडिया के सामने बोलने से पहले जेटली ने ट्वीट करके कांग्रेस पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि कैग रिपोर्ट ने सत्यमेव जयते के कथन को सच साबित किया है। उन्होंने आगे लिखा कि ऐसा नहीं हो सकता कि सुप्रीम कोर्ट गलत हो, कैग गलत हो और सिर्फ 'राजवंश' ही सही हो। इसके बाद उन्होंने लिखा, 'लोकतंत्र में लगातार झूठ बोलनेवालों कैसे सजा दी जाती है? महागठबंधन के झूठ कैग रिपोर्ट से उजागर आ गए हैं।' 

इससे पहले एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से राहुल गांधी ने राफेल मुद्दे को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने 'द हिंदू' अखबार की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पीएम का बेटर प्राइसिंग और जेट की जल्द डिलिवरी का दावा खारिज हो गया है। आपको बता दें कि बुधवार को अंग्रेजी अखबार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि NDA सरकार के समय में हुई राफेल डील UPA के समय के ऑफर से बेहतर नहीं है। 

वहीं, बुधवार सुबह में कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान के मूल्यों, सिद्धांतों और प्रावधानों पर मोदी सरकार की ओर से लगातार हमले किए जा रहे हैं। 

कुंभ में साधु-संतों ने की भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग


प्रयागराज. कुंभ में साधु-संतों और हिन्दू संगठनों ने एकत्र होकर गो, गंगा और देवालय की रक्षा के लिए काली मार्ग -संगम लोअर मार्ग के चौराहे पर राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन के तहत सभा का आयोजन किया। सभा के दौरान राष्ट्रीय गोरक्षा आयोग का गठन हो, गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना को निरस्त किया जाए व भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाए जैसी कई अन्य दूसरी मांग उठाई गई।

संतों ने कहा कि संपूर्ण भारत में गोवंश की रक्षा के लिए राष्ट्रीय गोरक्षा आयोग बनाया जाना जरूरी हो गया है। गंगा नदी की रक्षा के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तावित 600 किमी लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे योजना निरस्त हो और हिन्दुओं के मंदिरों के शासकीय अधिग्रहण के लिए बनाया गया ‘दी हिन्दू रिलीजियस चैरिटेबल एंडोमेंट एक्ट 1951 को हटाया जाए। इस दौरान संतों की ओर से ‘जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम’ का नारा देते हुए भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग भी की गई।

हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से आयोजित राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन में साधु-संत, श्रद्धालु, धार्मिक व हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता सम्मिलित हुए। इनमें प्रमुख रूप से गोंदिया के महंत रामग्यानीदास, अयोध्या तपस्वी छावनी के महंत परमहंसदास, हिन्दू तख्त पंजाब के स्वामी चैतन्यगिरी, वारकरी संप्रदाय महाराष्ट्र के श्याम, जूना अखाड़ा के अवधेश गिरी, नाथ संप्रदाय के रामस्वरूपनाथ, महानिर्वाणी अखाड़ा के दिव्येश्वर चैतन्य, जम्मू-कश्मीर के महंत राजेंद्र गिरी, शिवसेना के प्रयागराज शहर प्रमुख शिव विशाल गुप्ता, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगले, सनातन संस्था के पू. नीलेश सिंगबा और सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता चेतन राजहंस शामिल रहे। आंदोलन के बाद हिन्दू संगठन के पदाधिकारियों व संतो ने प्रयागराज में कुंभ मेला प्राधिकारण के अतिरिक्त जिलाधिकारी दयानंद प्रसाद को ज्ञापन सौंपा।

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