दरगाहों व कब्रों पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश न करे :अकाल तख्त

अकाल तख्त के पांच सिंह साहिबान ने फैसला लिया है कि जिस स्थान पर नशे का सेवन या फिर 'बार' (शराब पीने का स्थान) होगा वहां गुरु साहिब का प्रकाश कतई नहीं किया जा सकता। इसके अलावा कब्र, जठेरों (कुलदेव) व समाधियों पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पाठ करने पर रोक लगाई गई है। साथ ही, जिस घर में हलाल मीट बनता है वहां भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश न करने को कहा गया है।

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा कि पूर्व जत्थेदार ज्ञानी जोगिंदर सिंह वेदांती ने भी अपने कार्यकाल में इसी प्रकार के आदेश जारी किए थे। उन्होंने मजीठा में स्थित बाबा रोडे शाह की दरगाह में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश को लेकर पैदा हुए विवाद के बाद सिखों को आदेश दिया था कि वह दरगाहों व कब्रों पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश न करें।

ज्ञानी जोगिंदर सिंह वेदांती के इस आदेश के बाद बाबा रोडे शाह दरगाह कमेटी ने गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश हटा दिया था।

अकाल तख्त का फैसला न मानने पर सिखों के लिए सजा का भी प्रावधान है। किसी भी सिख ने चाहे कितनी भी भयंकर गलती की हो उसे सजा के तौर पर गुरुद्वारा साहिब में सेवा करना, बर्तन मांजना, कीर्तन सुनना, श्री जपुजी साहिब का पाठ करना व अरदास करवाने की ही धार्मिक सजा लगती है।

अकाल तख्त साहिब 'जति शरण आए तिस कंठ लगावे के आधार पर सजा देता है।' अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च सत्ता है। मीरी-पीरी के सिद्धांत में मीरी का ओहदा अकाल तख्त साहिब को ही साहिब को ही हासिल है।

जिहादियों ने किया हिंदूओं पर हमला, दुकान में भी तोडफोड

जिहादियों के एक गुट द्वारा नीरमार्ग में १५ सितेंबर को पांच हिंदूओं पर हमला किया गया ।
‘मेंगलोरियन डॉट काम’ से बात करते हुए जीवन नीरमार्ग ने कहा, १५ सितेंबर को, दोपहर ४.०० बजे जब वे मेंगलोर से मिठापडे की ओर राजलक्ष्मी बस से यात्रा कर रहे थे तब रेहमतउल्ला नामक व्यक्ति ने अपशब्द कहकर उन्हे धमकाया।  जीवन ने त्वरित यह बात कनकनाडे पुलिस थाने में पुलिस अधिकारी को बताई ।
जीवन ने अगे कहा की, शाम ७.०० बजे के आसपास हम अमीन बार के निकट खडे थे तब जिहादियों का एक समुह वहां शस्त्रों के साथ पहुंचा । उसी समय वहां कनकानडी पुलिस थाने के पुलिस पूछताछ के लिए पहूचे । पुलिस ने जब जीवन को रेहमततुल्ला को पहचानने को कहा,  तब जीवन द्वारा पहचाने जाने पर रेहमतउल्ला ने भागने की कोशिश की। पुलिस उसका पीछा करके उसे पकडकर पुलिस थाने लाई । जैसी ही रेहमततुल्ला को पकडा गया, और जिहादी वहां इकठ्ठा हुए तथा बार एवं बार में उपस्थित लोगों पर, जिनमें जीवन भी था, हमला किया । जीवन तथा ४ अन्य लोग बार में घायल हुए।
घायलों को सरकारी वेनलॉक अस्पताल में भरती कराया गया । कनकानडी पुलिस ने स्थिती काबु में लाई । आरोप पत्र कनकानडी पुलिस थाने में दर्ज कराया गया है। पुलिस उच्च अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे व उसके पश्चात कनकानडी पुलिस थाने भी गए ।

हिंदू देवी देवताओं व सवर्णो पर भड़काऊ भाषण से तनाव

पंट्टी कोतवाली क्षेत्र के रेड़ीगारापुर में मंगलवार को आयोजित समारोह में हिंदू देवी देवताओं व सवर्णो पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी से इलाके में तनाव है। इस मामले में प्राथमिक विद्यालय के हेड मास्टर समेत 34 लोगों पर भड़काऊ भाषण देकर जातीय उन्माद फैलाने के प्रयास के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है।

रेड़ीगारापुर गांव में मंगलवार को दिन में पेरियार रामास्वामी नागरकर जयंती समारोह आयोजित किया गया था। इस समारोह में डेढ़ हजार से अधिक लोग जुटे थे। पेरियार की उपलब्धियां गिनाने के दौरान वक्ता हिंदू देवी देवताओं और सवर्णो के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने लगे। समारोह में मौजूद धूई गांव के विनोद कुमार तिवारी समेत अन्य सवर्णो को देख कर यह कहने लगे कि उनका भाषण इसी तरह चलता रहेगा, जिसे सुनना हो सुने नहीं तो चला जाए।

इस टिप्पणी के बाद गांव समेत पूरे इलाके में तनाव व्याप्त हो गया। देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में इसकी चर्चा की जाने लगी। विनोद समेत कुछ लोगों ने विरोध किया तो टकराहट बढ़ने लगी। अपनी बिरादरी के लोगों की संख्या अधिक देख विरोध की परवाह न करते हुए वक्ताओं ने भड़काऊ भाषण जारी रखा।

बाद में इस मामले में विनोद तिवारी ने पंट्टी कोतवाली पहुंच कर तहरीर दी। इस पर पुलिस ने रेड़ी गारापुर निवासी विजय बहादुर पाल, उनके भाई राम बहादुर पाल के साथ ही सत्य प्रकाश, राम अवध, लालमनि व कांधरपुर गांव के राजाराम पाल, राकेश मौर्य, बाल मुकुंद पाल, रामजश पाल और 20-25 अज्ञात लोगों के खिलाफ आइपीसी की धारा 153 (ए), 295 (ए), 298 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। विजय बहादुर प्राथमिक विद्यालय तिवारीपुर भानेपुर (पूरे किरोधर) में हेडमास्टर हैं।

डीएम विद्याभूषण और एसपी एलआर कुमार का कहना है कि मामला संज्ञान में है। सीडी देखने के बाद आरोप सही पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बीएसए जय सिंह का कहना है कि एसडीएम की रिपोर्ट आने पर हेडमास्टर को निलंबित कर दिया जाएगा।

मुजफ्फरनगर के दंगे से नहीं लिया सबक : 

मुजफ्फरनगर के दंगे से भी बेल्हा के अफसरों ने सबक नहीं लिया। सूबे में सांप्रदायिक तनाव के मद्देनजर सक्रिय रहने की चीफ सेकेट्री व डीजीपी की हिदायत के बाद भी रेड़ी गारापुर में आयोजित कार्यक्रम की भनक प्रशासनिक अमले को नहीं लग सकी। संयोग ही रहा कि दूसरे समूह के शांत रहने के कारण बड़ी घटना टल गई।

आए दिन यह देखा जा रहा है कि छोटी मोटी बातों को लेकर समुदायों और विभिन्न वर्गो के लोग आमने सामने हो जा रहे हैं। सूबे की तरह जिले में भी तनाव का माहौल है। अभी दस दिन पहले 6 सितंबर को कोतवाली में आयोजित पुलिस कर्मियों व लेखपालों की बैठक में डीएम व एसपी ने कहा था कि पुलिस वालों के साथ लेखपाल, ग्राम पंचायत अधिकारी, आशा बहू, आंगनबाड़ी कार्यकत्री सभी को आपसी तालमेल बिठाकर कानून व्यवस्था को बनाए रखने में जिम्मेदारी निभानी है, लेकिन इसका असर पुलिस वालों के साथ ही ग्रामीण स्तर के सरकारी कर्मचारियों पर नहीं दिखा।

यही वजह रही कि रेड़ीगारापुर में आयोजित पेरियार रामास्वामी नागरकर जयंती समारोह के बारे में न तो पुलिस को जानकारी हो सकी और न ही प्रशासन को। इसी चूक का नतीजा रहा कि समारोह में भड़काऊ भाषण दिए जाने के दौरान दोनों वर्गो में टकराहट की नौबत आ गई। अगर सवर्णो की संख्या भी खासी तादाद में होती तो स्थिति बिगड़ सकती थी। विनोद तिवारी जैसे अन्य लोगों ने माहौल को संभाला, नहीं तो खून खराबा हो सकता था।

भारत में गोमूत्र से विकसित कीटनाशक को अमेरिकी पेटेंट

भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा गोमूत्र से विकसित कीटनाशक अमेरिकी पेटेंट हासिल करने में सफल रहा है। कामधेनु कीटनियंत्रक नामक इस दवा से सभी तरह के फसलों को कीटों से बचाया जा सकेगा। नागपुर स्थित गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र [जीवीएके] ने इस नए कीटनाशक का ईजाद किया है।

अनुसंधान केंद्र के मुख्य समन्वयक सुनील मनसिंघका ने बताया कि इस नवविकसित दवा से फसलों के विकास में चार गुना तक की वृद्धि संभव है। यह विषाणु एवं फंफूद से फसलों की रक्षा करने के अलावा पौधों की प्रतिरोधक क्षमता और मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ाने में सहायक है। उनके मुताबिक कामधेनु कीटनियंत्रक का निर्माण गोमूत्र, नीम और लहसुन को मिलाकर किया गया है। इसके अलावा तीनों अवयवों को अलग-अलग या एक-दूसरे में मिलाकर भी कीटनाशक दवाओं का विकास किया गया है। सुनील का दावा है कि इस कीटनाशक के इस्तेमाल से रासायनिक दवाओं पर आने वाले खर्च को ५० हजार करोड़ रुपये मूल्य तक कम किया जा सकेगा।

१९९६ में स्थापित जीवीएके ने कामधेनु कीट नियंत्रक दवा का विकास राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान और सीएसआइआर [लखनऊ] के साथ मिलकर किया है। इससे पूर्व जीवीएके द्वारा विकसित कामधेनु अर्क को एंटीबायोटिक्स और कैंसर प्रतिरोधी दवा के रूप में अमेरिकी पेटेंट हासिल हो चुका है।

मोबाइल के लिए ‘सलमान एवं सुहेल’ ने की ‘करण’ हत्या

करन हत्याकांड में केस मजबूत बनाने के लिए पुलिस सभी साक्ष्य जुटाने की कोशिश में है। हत्यारोपी सलमान और सुहेल के खून से सने कपड़ों की बरामदगी के मद्देनजर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से दोनों आरोपियों का रिमांड मांगा गया है। पुलिस का तर्क है
कि सोनी से पूछताछ के बाद कई सवाल सामने आए हैं, जिनके जवाब सलमान और सुहेल ही दे सकते हैं।

करन हत्याकांड में पुलिस चूक से बचने के लिए साक्ष्य जुटा रही है, ताकि हत्यारोपियों के खिलाफ केस कमजोर न हो। विवेचक इंस्पेक्टर अजय कुमार अग्रवाल ने वारदात के समय पहने सलमान व सुहेल के खून से सने कपड़ों की बरामदगी के लिए बुधवार को रिमांड की कवायद शुरू कर दी। पुलिस उपाधीक्षक की स्वीकृति मिलने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी डाल दी गई है। हालांकि पुलिस ने दोनों हत्यारोपियों को रिमांड पर लेने के लिए अदालत में कई और तर्क भी दिए हैं। दोनों का २४ घंटे का रिमांड मांगा गया है।

इंस्पेक्टर का कहना है कि करन हत्याकांड की तफ्तीश परिजनों को विश्वास में लेकर पारदर्शिता से की जा रही है। पड़ताल में उक्त तीनों हत्यारोपियों के अलावा चौथा नाम सामने नहीं आया है।

गौरतलब है कि एक सप्ताह पूर्व सिविल लाइंस थानांतर्गत सुभाष नगर निवासी राकेश कौशिक के बेटे करन की हत्या कर शव शाह विलायत कब्रिस्तान में दफना दिया गया था। पुलिस ने करन के दोस्तों पूर्वा शेखलाल निवासी सलमान, सुहेल व सोनी को गिरफ्तार कर हत्याकांड का खुलासा किया था। मामला दो संप्रदाय से जुड़ा होने के कारण शहर में तनाव हो गया था।

अब तक की कारवाई:

- १८ सितंबर को सलमान और सुहेल का रिमांड लेने के लिए अदालत में डाली गई अर्जी।

- १७ सितंबर को कब्रिस्तान से खून से सनी मिट्टी सील कर प्रयोगशाला भेजी गई।

- १६ सितंबर को बुलंदशहर में छापामारी के दौरान सोनी को गिरफ्तार किया गया।

-१५ सितंबर को फरार तीसरे हत्यारोपी सोनी की तलाश में ताबड़तोड़ छापामारी।

-१४ सितंबर को सुभाष नगर में पथराव करने वाले 150 पर मुकदमा, तीन लोग गिरफ्तार।

-१३ सितंबर को करन के शव का अंतिम संस्कार, पुलिस पर पथराव में छह हिरासत में।

-१२ सितंबर को हत्यारोपी सलमान और सुहेल गिरफ्तार, शव बरामद। जमकर बवाल।

-११ सितंबर को करन कौशिक घर के पास वीडियो गेम शॉप से हुआ था लापता।

मुजफ्फरनगर में अभी माहौल शांत भी नहीं हुआ कि मेरठ शहर में भी एक घटना को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया । सिविल लाइन एरिया में एक छात्र को संप्रदाय विशेष के युवकों ने गर्दन काटकर कब्रिस्तान में दफन कर दिया ।
इस कत्ल के बाद माहौल गर्म हो गया और दोनों संप्रदाय के लोग आमने-सामने आ गए । एक दूसरे पर पत्थर भी फेंके, फोर्स ने तुरंत पहुंचकर मामले को शांत कर किया । वहीं शहर को अफवाहों के चलते छावनी में तब्दील कर दिया गया ।
यह था मामला
सिविल लाइन थाना एरिया के सुभाषनगर गली नंबर एक में राकेश कौशिक  का परिवार रहता है । राकेश कौशिक मथुरा वृंदावन में बांके बिहारी धार्मिक संस्था में मैनेजर हैं । राकेश का सोलह साल का बेटा करण कौशिक मेरठ में अपने चाचा अशोक कौशिक के पास रहकर पढ़ रहा था, जिसने दसवीं क्लास यहीं से पास की थी ।
तीन दिन बाद जाना था
राकेश कौशिक ने अपने बेटे करण का एडमिशन वृंदावन में ही ग्यारहवीं क्लास में करा दिया था । करन को इसी पंद्रह तारीख को वृंदावन जाना था । करण बुधवार की शाम करीब पांच बजकर दस मिनट पर साइबर कैफे पर जाने के लिए कहकर बाहर गया था । बताया गया कि करण इसके बाद घर वापस नहीं लौटा । परिजनों उसकी खोजबीन की मगर उसका कुछ सुराग नहीं लगा ।
ऐसे मिला सुराग
परिजनों ने जब पुलिस को बताया कि करन पूर्वा शेखलाल के सलमान की साइबर कैफे की दुकान पर वीडियोगेम खेलने गया था । साथ ही बताया था कि करन का मोबाइल खराब हो गया था जिसके चलते उसने साइबर कैफे मालिक सलमान से उसका पुराना मोबाइल ६०० रुपये मे खरीद रहा था । करण ने मोबाइल के ४०० रुपये सलमान और अल्तमाश को दे भी दिए थे । इसके बाद भी आरोपी सलमान और अल्तमश मोबाइल नहीं दे रहे थे ।
कब्रिस्तान से मिला शव
इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की । पहले तो वे इनकार करते रहे मगर जब कड़ाई से पूछताछ हुई तो ये दोनों टूट गए । दोनों ने कबूल किया कि उन्होंने करण की हत्या कर दी । जिसकी बॉडी को पास में ही मौजूद शाह-ए-विलात कब्रिस्तान में दफन कर दिया था । इधर पुलिस ने जैसे ही इनकी निशानदेही पर कब्रिस्तान पहुंचकर बॉडी निकाली मोहल्ले के लोग इकट्ठा हो गए । कुछ ही देर में मामला दोनों संप्रदाय का होने पर पुलिस फोर्स पहुंच गई ।
गर्दन काटने के बाद दफनाया
बताया गया कि करण बुधवार को अपने दोस्त विक्रांत के घर पर अपनी साइकिल खड़ी करके यह कहकर गया था कि वह दस मिनट में आकर साइकिल ले जाएगा । सलमान और अल्तमश उसको बाइक पर लेकर गए और कब्रिस्तान में जाकर उसकी गर्दन पर फावड़ा मारकर हत्या कर दी । इसके साथ ही उसकी बॉडी को कब्रिस्तान में कब्र खोदने वाले साथी डब्बू के बेटे अल्मो के साथ मिलकर दफन कर दिया । पुलिस ने बॉडी को कब्र से निकालकर मोर्चरी भेज दिया ।

तुष्टीकरण की नीति अपनाकर हिंदुओं पर कुठाराघात कर रही सपा सरकार : वेदांती

बुधवार को परशुरामपुर क्षेत्र के मखौड़ा धाम में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा श्रीराम जानकी मंदिर पर पूजन अर्चन के बाद विशाल भंडारा का आयोजन किया गया। जिसमें पूर्व सांसद डा. रामविलास वेदांती सहित लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया तथा देश में राम राज्य की स्थापना करने का संकल्प लिया।

भंडारा यज्ञ में प्रतिभाग करने आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए वेदांती ने कहा कि प्रदेश सरकार एक विशेष वर्ग तथा आजम खां को खुश करने के लिए तुष्टीकरण की नीति अपनाकर हिंदुओं की आस्था व श्रद्धा पर कुठाराघात कर रही है। मुजफ्फरनगर दंगा, चौरासी कोसी परिक्रमा पर रोक तथा राम लला के दर्शन करने में बाधा डालना सरकार की कुत्सित मानसिकता का परिचायक है। श्रावस्ती व पैकोलिया में गो वंशियों की हुई हत्या के आरोपियों पर नकेल न कसा जाना निंदनीय है।

बुधवार को इस स्थान पर पूर्व सांसद व रामजन्म भूमि न्यास के सदस्य पूर्व सांसद डा. रामविलास वेदांती, आचार्य अखिलेश दास, भगवती दास शरण, शिव किशोरी शरण, महंथ रामदास, वरूण दास, राघवेन्द्र दास बृजराज शुक्ला, अनंत कृष्ण पांडे, गिरीश, संतोष शुक्ल पूर्व सांसद श्रीराम चौहान, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रेमसागर तिवारी, यशकांत सिंह, अजय सिंह, पुष्कर मिश्र, चेयरमैन अशोक गुप्ता, अखंड प्रताप, महेश शुक्ला, अखिलेश पांडे बाबा, विनयशंकर मिश्र, दिनेश मिश्र, विनोद गुप्ता, पप्पू जायसवाल, सीताराम मौर्य आदि ने भाग लिया।

वरिष्ठ भाजपा नेता वीरेंद्र गुर्जर पर रासुका लगाने से हिन्दू संगठन नाराज

राष्ट्रवादी सभा के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता वीरेंद्र गुर्जर पर रासुका लगाए जाने से एक बार फिर हिंदू संगठनों एवं भाजपा में उबाल आ गया है। भाजपा ने 24 सितंबर तक रासुका नहीं हटाए जाने पर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

भाजपा नेता वीरेंद्र गुर्जर को 7 सितंबर की हिंदू धर्म संसद से पहले साथियों सहित गिरफ्तार कर लिया गया था। इन पर मुस्लिम संप्रदाय के विरुद्ध आपत्तिजनक भाषण देकर हिंदू संप्रदाय को उद्वेलित करने जैसे आरोप लगाए गए थे। जिला प्रशासन द्वारा शासन को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया था कि उनके भाषणों के कारण ही सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत आदि जनपदों में सांप्रदायिक दंगे भड़के और कई लोगों की जान गई। इस रिपोर्ट पर ही शासन ने वीरेंद्र गुर्जर पर रासुका लगाने की हरी झंडी दी है। जानकारी होते ही भाजपा व हिंदू संगठनों में उबाल आ गया और उन्होंने शासन प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई के आरोप लगाए।

भाजपा नेताओं ने जिलाध्यक्ष मानवीर सिंह पुंडीर एवं पूर्व प्रदेश सचिव जसवंत सैनी के नेतृत्व में एसएसपी से वीरेंद्र पर रासुका लगाने पर रोष जताया। कहा कि यह एकतरफा और सरासर गलत कार्रवाई है। वीरेंद्र गुर्जर का अपराध इतना है कि वह पुलिस की एकतरफा कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं और पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने की बात कर रहे हैं। जिलाध्यक्ष ने कहा कि यदि 24 तक रासुका नहीं हटी तो भाजपा व हिंदू संगठन सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। माहौल को शांत करने के बजाय प्रशासन भाजपा व हिंदू संगठनों को फर्जी तरीके से गिरफ्तार कर रहा है। उन्होंने कहा कि रासुका जैसी कार्रवाई एके-47 लूटने वालों के खिलाफ होनी चाहिए। मगर लखनऊ के इशारे पर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। कहा कि झिंझोली में जिन लोगों ने सुमन की हत्या की थी वे आज भी बाहर घूम रहे हैं। पूर्व चेयरमैन हरीश मलिक व वरिष्ठ भाजपा नेता ठा. जसवंत सिंह ने कहा कि जगजाहिर हो चुका है कि दंगे किसने कराए हैं। मगर मिलीभगत के कारण केंद्र सरकार प्रदेश सरकार को बर्खास्त नहीं कर रही है।

शिवसेना जिला प्रमुख योगेंद्र सिरोही ने भी राष्ट्रवादी सभा के अध्यक्ष वीरेंद्र गुर्जर पर रासुका लगाने की निंदा करते हुए कहा कि प्रशासन के ऐसे ही रवैये के कारण मुजफ्फरनगर में दंगे के हालात पैदा हुए थे। हिंदूओं के उत्पीड़न की आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है। इसलिए वीरेंद्र गुर्जर पर लगी रासुका को तुरंत हटाया जाए।

मुजफ्फरनगर पर सबसे बड़ा खुलासा, जानें क्यों और कैसे भड़का दंगा !

दंगों पर आज तक का सबसे बड़ा खुलासा | सबसे बड़ा स्टिंग ऑपरेशन | सुलगते मुजफ्फरनगर का सबसे बड़ा और सबसे गहरा राज | आज तक पर दंगों की हर परत की पोल मुलायम सिंह और अखिलेश के अफसरों ने खोली |
सियासत के स्याह होते रंगों में एक जलता हुआ शहर, जिसकी आंच १५ दिन बाद लखनऊ पहुंची तो अखिलेश मुजफ्फरनगर पहुंचे और १७ दिन बाद आंच दिल्ली दरबार पहुंची तो प्रधानमंत्री इस शहर पहुंचे | शहर की फिजा बता रही है कि दंगे की आंच में अब राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही हैं |
इस दंगे में अब तक चालीस से ज्यादा मौतें हुई और चालीस हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गये | पहली बार यहां लोग अपने ही गांव और अपने ही कस्बों में रिफ्यूजी हो गये | कई सवाल हैं जिनके जवाब आज तक ने खोजने की कोशिश की | क्या इन दंगों को सरकार रोक सकती थी? क्या बेगुनाहों को मरने से बचाया जा सकता था? क्या पुलिस के हाथ बंधे थे? क्या दंगाइयों पर गोली चालने से डर गई थी पुलिस?
जानसठ तहसील का खुलासा
मुजफ्फरनगर का कवाल गांव, जानसठ तहसील में आता है | यही वो गांव है जहां से २७ अगस्त को दंगे दो समुदाए के बीच नफरत की चिंगारी भड़की और फिर उसे नेता हवा देते चले गए | ये वही कवाल गांव है जहां पिछले ६६ साल से हिंदू और मुसलमान भाई-चारे और मुहब्बत के साथ रहते चले आ रहे थे | लेकिन अब वहां की धरती नफरत के लहू से लाल हो गई है | आज तक ने जानसठ तहसील के सर्किट हाउस में स्टिंग ऑपरेशन किया, फिर जो खुलासा हुआ, जानकर आप भी दंग रह जाएंगे |
मुजफ्फरनगर की जानसठ तहसील के कवाल गांव में २७ अगस्त को एक लड़की से छेड़छाड़ को लेकर दोनों समुदाय ऐसे भिड़े कि घंटेभर में मोहल्ले में तीन लाशें गिर गईं और अमन चैन तार-तार हो गया |
इलाके के एसडीएम आर सी त्रिपाठी और सर्किल अफसर जे |आर जोशी दोनों कर्फ्यू में डूबे शहर का गश्त करके लौटे थे | २७ अगस्त को जे |आर जोशी ने दंगा करने वाले 8 लोगों को मौके से हिरासत में लिया था और थाने लाए थे | जोशी का कहना है ये दंगाई दोहरी हत्याओं के मुख्य संदिग्ध थे, लेकिन उस रात ऊपर से दबाव आया और दंगाइयों को थाने से छोड़ना पड़ा |
आज तक - एसडीएम साहब क्या (दंगाइयों के घरों की) तलाशी हुई थी, या तलाशी अवॉइड की गई?
सीओ - नहीं ... नहीं .. बिल्कुल पूरी तलाशी हुई ...
एसडीएम - तलाशी हुई, पकड़े गए.... अभियुक्त पकड़े गए ....
सीओ - ऑफ द रिकॉर्ड पूरी बात हम बताएं, उस दिन जैसे ही घटना (हत्याएं) हुईं उसके बाद तलाशी हुई, उस दिन हमने १२ आदमी जितने वहां आस-पास के जो भी थे, एक-एक आदमी को पकड़ा .... कोई अवैध असलाह नहीं मिला ये अलग बात है ....
आज तक - एक्टचुअल मुलज़िम (पकड़े थे आपने) ....
सीओ- बिल्कुल उन्हीं में थे .... और उसके बावजूद उनको ना ले जाकर उनकी एफआईआर इस ढंग से करा दी .... जिसकी वजह से सब (छूट गए) .... इसके बाद SSP, DM का ट्रांसफर हो गया .... उन्होंने अपनी मौजूदगी में सर्च कराया था |
इन दोनों अधिकारियों का कहना था, मुलज़िम पकड़े जाने के राजनीतिक दबाव में फर्जी एफआईआर कराई गई और असली मुलज़िम छोड़ दिए गए |
आज तक - अच्छा ....पकड़ लिया था (असली मुलज़िमों को)
सीओ - पकड़ लिया था .... एफआईआर में नाम देखा तो मात्र एक आदमी का नाम देखा | हमारे सामने मजबूरी थी....
एसडीएम - Tainted एफआईआर हुई थी ....
आज तक- फिर छोड़ दिया ....
सीओ - उन्होंने कह दिया ठीक है कि (इनके नाम) नहीं है एफआईआर में, उनको बैठाने की डिटेन करने की जरूरत क्या है |
आज तक - तो जो ७ - ८ आदमी पकड़े गए थे ....यानी लाए गए थे थाने वहां से ....
सीओ - नहीं ....थाने लाए थे ....बातचीत की उसने....उसमें उन्होंने कहा कि हम वहां नहीं थे ....हम फलानी जगह थे ....लेकिन थे सब वहीं (घटना स्थल पर)
आज तक- बाद में सबको छोड़ दिया
३ - ३ लाशें गांव में बिछा दी गईं और मौके से संदिग्ध पकड़े गए, लेकिन दबाव में छोड़ दिया गया, सच तो ये है कि कुछ घरों की तलाशी लेने पर एसएसपी मंजीत सैनी और डीएम सुरेंद्र सिंह का तबादला कर दिया | बाद में नए डीएम ने आकर जांच की दिशा, कहीं और मोड़ दी |
आज तक - ये घटना (हत्याओं की) कब हुई थी, संदिग्धों को कितने बजे गिरफ्तार किया गया
सीओ - घटना २ बजे की थी ...
आज तक - नहीं ...गिरफ्तारी कितने बजे की थी
सीओ - चार ...साढ़े चार बजे के आसपास...जैसे ही Deadbody वहां से उठाई गईं थीं |
आज तक - और उन संदिग्धों को छोड़ा कैसे गया ....
सीओ - लेट नाइट छोड़ दिया गया था | (ऊपर से) आदेश आ गए थे .....
आज तक - डीएम के ट्रांसफर के बाद ....
कवाल में कानून का मज़ाक उड़ाया गया | तलाशी लेने पर डीएम का ट्रांसफर किया गया, फर्जी एफआईआर लिखी गई, पकड़े गए आरोपी छोड़े गए, और बाद मे दंगा भड़क गया | अब आगे की दास्तान-
आज तक - जितने Accused को आपने पकड़ा था, क्या वो वास्तव में (सदिंग्ध) थे
सीओ - देखो .... ऐसा है कि .... कैसे कह दें.... देखने वाले जब eyewitness कह रहे हैं कि मौके पर थे .....
एसडीएम - they were prime suspects (वो मुख्य संदिग्ध थे)
आज तक - prime suspects ....वही major mistake हुई और वो मैजेस दूसरी community में चला गया |
एसडीएम- ये तो मतलब दुर्भाग्य है पूरे देश का, इस सिस्टम का, जैसे की कोई घटना होती है, ये ***** नेता तुरंत आकर बैठ जाते हैं ....

 
इन अधिकारियों का मानना था कि दोहरी हत्याओं के मामले में कुछ घरों की तलाशी ली गई जिसपर कुछ रसूखदार नेता डीएम और एसएसपी से नाराज़ हो गए और दोनों का तबादला कर दिया गया | इस कार्रवाई से, इलाके में सांप्रदायिक तनाव भड़का | अगर डीएम और एसएसपी का उस रात तबादला ना होता तो अपराध की घटना सांप्रदायिक दंगे में ना तब्दील होती | लेकिन इससे बड़ा खुलासा किया फुगाना थाने के सैकेंड अफसर ने, जिनके सामने अल्पसंख्यकों के गांव के गांव राख कर दिए गए |
७ सितंबर की शाम महापंचायत में शामिल कुछ किसानों पर हमले के बाद अगली सुबह शाहपुर और बुढ़ाना तहसीलों में दंगे ने एक नया रंग लिया था | ७ सितंबर की प्रतिक्रिया में यहां गांव-गांव में हिंसा का ऐसा नंगा नाच हुआ जो इन कस्बों में १९४७ के दंगों में भी देखने को नहीं मिला | ८ सिंतबर की हिंसा का सबसे ज़्यादा कहर फुगाना इलाके में मचा |
आज तक - आपके यहां कितनी casuality हैं |
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- १६ हैं करीब .....नहीं आपके क्षेत्र में कितनी casuality हैं ...हमारे क्षेत्र में १६ हैं ......
आज तक - तो क्या ......पुलिस फोर्स एकदम नहीं पहुंच पायी मौके पर ......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- पुलिस मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन पुलिस थोड़ी सी थी
आज तक - कम थी पुलिस ......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- हां ......
आज तक - जब दंगा शुरु हुआ (उस वक्त वहां पर आपके कितने लोग थे)
आर एस भगौरसैकेंड अफसर- उस समय जनपथ की क्या स्थिति थी, हम नहीं जानते, जब हमारे थाना क्षेत्र में काम शुरू हुआ तो दूसरे थाना क्षेत्र में भी काम शुरू हो गया | अब हमें ये नहीं पता कि दूसरे थाना क्षेत्र में या जनपद में क्या हो रहा है | जब अधिकारियों को इस बात का पता चला, तो अधिकारियों अपनी योजना, अपनी व्यवस्था करने में लगे | हमारा उनसे संपर्कि नहीं हो पाया | अब संपर्क करने के लिए कारण है, कि एक हाथ से गोली चला रहे हैं और दूसरे हाथ से मोबाइल (फोन) कर रहे है, तो मुसीबत की स्थिति है ......
आज तक - बिल्कुल ......
आर एस भगौरसैकेंड अफसर -  देखो practical है सब practical है ......
आज तक- कितनी देर तक (आपका अधिकारियों) से संपर्क नहीं हुआ होगा......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- अरे भई हम घंटे भर पर जूझते रहे ......फंसे रहे ......हमारी जान लगी रही | मोबाइल निकालते ......ok करते और फिर जेब में रखते ......ऐसी स्थिति थी हमारी |
आज तक - जब आप लोग (मौके पर) लगे हुए थे, तो असलाह की कमी थी
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- देखो असलाह ......तो मैं बता रहा हूं, असलाह तो कुछ है नहीं ...... असलाह जो हमारे पास है, असलाह जो हमारे हैं ही नहीं ......और जो हैं वो चलता ही नहीं ...... भाई जो चल गया तो बढ़िया हमारी जान ऊपर वाले की कृपा है | तो चल भाई वो भी मन हो ......नहीं चला तो नहीं ......मैं आपको वो facts बता रहा हूं जो कोई नहीं बताएगा |
आज तक - मेन रोल मेरे ख्याल से आज़म xxxxx का है, कि उन्होंने pressurise किया |
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- बिल्कुल ठीक है ......बिल्कुल ठीक है ......
आज तक - आप कुछ नहीं करेंगे ......जो हो रहा है होने दो ......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर - हां ......यहीं हुआ ......
आज तक - political है ये ......रोटियां सेंक रहे हैं......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर - सब रोटियां सेंक रहे हैं ......
ज़ाहिर तौर पर सैकेंड अफसर जानते हैं कि दंगो में किसका क्या किरदार रहा है, लेकिन इस अफसर से भी बड़ा खुलासा पुलिस और प्रशासन के कुछ और अधिकारियों ने किया | जिस पर आप दंग रह जाएंगे |

 
मुजफ्फरनगर का मीरापुर थाना क्षेत्र, सच्चाई आपको डरा देगी, सहमा देगी, इस थाने के हल्के में दंगाइयों ने मौत का जो खेल खेला, वो वाकई ख़ौफनाक भी है और दर्दनाक भी |
२७ अगस्त से शुरू हुए दंगे ८ सितंबर तक मुजफ्फरनगर को दहलाते रहे, लेकिन प्रशासन से लेकर सरकार तक, दंगाइयों पर काबू पाने में नाकाम रही | जाहिर तौर पर दंगों की आड़ में नेता अपना अपना फायदा देख रहे थे | मीरापुर थाने के एसएचओ अनिरुद्ध कुमार गौतम के हल्के में भी दंगाइयों ने सड़कों पर मासूमों के मौत के घाट उतारा | और हैरतअंगेज़ बात ये है कि दंगाइयों पर कार्रवाई करने से पुलिस कतराती रही | गौतम मानते हैं कि डीएम एसपी को एक साथ हटाने की वजह से जिला प्रशासन नेतृत्वविहीन हो गया था | गौतम का कहना है कि समाजवादी पार्टी के कुछ नेता डीएम एसपी को कई दिनों से एसपी को हटाने का दबाव बना रहे थे, और उन्हें आखिरकार मौका मिल गया |
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- पहले वाले डीएम और एसएसपी हमारे थे, दोनों मिलकर (घटना) को मैनेज कर सकते थे ......आपने (सरकार) रात में चंद घंटों के अंदर घटना के चंद घंटों के अंदर ......उन्हें हटाया |
आज तक - उसकी इंस्पेक्टर साहब क्या वजह थी, उनकी क्या dealing सही नहीं थी .....डीएम की......
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- डीएम की dealing बहुत बढ़िया था, दो साल कैसे निकाल जाते यहां डेढ़ साल ......दो साल .....कैसे निकल गया यहां ....अगर dealing बढ़िया ना होती  भाई इसी शासन नेउसे पोस्ट किया था डीएम | अगर इसकी dealing से लोग संतुष्ट ना होते तो डेढ़ पौने दो साल कैसे कट जाते |
आज तक - उस रात क्या वजह रही ......
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ - सब political stunt ......
आज तक - मतलब उनको हटाना ग़लत फैसला था ...
अनिरुद्ध कुमार गौतमएसएचओ - भाई ये लोग उनको (DM/SSP) हटाने के लिए एक महीने से प्रयासरत थे ......जब कांवड़ चल रही थी तबसे ......political लोग समाजवादी पार्टी के, दोनों अधिकारियों को हटवाने के लिए लगे हुए थे ......
आज तक - क्यों ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ - भाई उनको लग रहा होगा ......कि हमारे काम नहीं कर रहे है ......right or wrong ...... यही कारण है और क्या है ......
दरअसल २७ अगस्त को कवाल गांव की घटना छेड़छाड़ से शुरू हुई और दो गुटों के बीच झगड़े में तब्दील हो गई | ये सच है कि इस घटना में हत्या हुई, लेकिन ये भी सच है कि हत्या होने के बावजूद घटना ने कोई सांप्रदायिक रंग नहीं लिया | दिक्कत तब शुरु हुई जब डीएम और एसएसपी ने घर घर तलाशी लेनी शुरू की |
आज तक - सुनने में ये आया है कि डीएम साहब ने जो जो दंगाई थे ....बवाली जो बवाल मचा रहे थे पकड़ लिए थे....गांव घेर लिया था पूरा ..
समरपाल सिंहइंस्पेक्टर, भोपा - पूरा गांव घेरके ....पुलिस सर्च कराई थी एसएसपी और डीएम ने ....पकड़ लिए थे रात में ....
आज तक - ये तो अच्छा काम था ....
समरपाल सिंहइंस्पेक्टर, भोपा - और उसमें क्या कर सकते हैं ये हमारे से ऊपर की बात है ....
आज तक - वोट बैंक की राजनीति है, बहुत बुरी है ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा- हां ....
आज तक - दो दिन ....चार दिन रुक करके हटाते तो शांत हो जाता मामला ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा - हां ....ये नौबत नहीं आती ....
लेकिन दंगों की आड़ में ट्रांसफर, पोस्टिंग और सस्पेंशन का ही खेल नहीं हो रहा है, असली खेल तो वोट का था, और इसपर भी खुलासा किया उन लोगों ने जो मौका-ए-वारदात पर मौजूद थे |
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- पहले वाले डीएम और एसएसपी हमारे थे, दोनों मिलकर (घटना) को मैनेज कर सकते थे ....आपने (सरकार) रात में चंद घंटों के अंदर ....घटना के चंद घंटों के अंदर ....उन्हें हटाया |
आज तक - उसकी इंस्पेक्टर साहब क्या वजह थी, उनकी क्या dealing सही नहीं थी ...डीएम की....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- डीएम की dealing बहुत बढ़िया था, दो साल कैसे निकाल जाते यहां | डेढ़ साल ....दो साल ....कैसे निकल गया यहां ....अगर dealing बढ़िया ना होती | भाई इसी शासन नेउसे पोस्ट किया था डीएम | अगर इसकी dealing से लोग संतुष्ट ना होते तो डेढ़ पौने दो साल कैसे कट जाते |
आज तक - उस रात क्या वजह रही ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- सब political stunt ....
आज तक - मतलब उनको हटाना ग़लत फैसला था ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- भाई ये लोग उनको (DM/SSP) हटाने के लिए एक महीने से प्रयासरत थे ....जब कांवड़ चल रही थी तबसे .... political लोग समाजवादी पार्टी के, दोनों अधिकारियों को हटवाने के लिए लगे हुए थे ....
आज तक- क्यों ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ - भाई उनको लग रहा होगा ....कि हमारे काम नहीं कर रहे है ....right or wrong.यही कारण है और क्या है ....
आज तक - सुनने में ये आया है कि डीएम साहब ने जो जो दंगाई थे ....बवाली जो बवाल मचा रहे थे पकड़ लिए थे गांव घेर लिया था पूरा ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा - पूरा गांव घेरके ...पुलिस सर्च कराई थी एसएसपी और डीएम ने ....पकड़ लिए थे रात में ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा - और उसमें क्या कर सकते हैं ये हमारे से ऊपर की बात है ....
आज तक - वोट बैंक की राजनीति है, बहुत बुरी है....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा- हां ....
आज तक - दो दिन ....चार दिन रुक करके हटाते तो शांत हो जाता मामला ....
समरपाल सिंहइंस्पेक्टर, भोपा - हां ....ये नौबत नहीं आती ....
आज तक का खुफिया कैमरा जहां-जहां पहुंचा, अखिलेश के अफसरों ने हमें भी चौंका दिया | और वही सच्चाई अब हम देश के सामने रख रहे हैं | बात मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना कोतवाली की | यहां के इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह ने दंगों का सच बताया तो एसपी क्राइम कल्पना सक्सेना ने भी दंगों पर सियासी खोल को उघाड़ डाला |
ये हैं मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कोतवाली के इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह | दंगे के सभी दिनों में ये इलाके में रात और दिन गश्त करते रहे | ज़ाहिर तौर पर इनपर भी हर तरह का राजनीतिक दबाव रहा |
किसको पकड़ना है, और किसको छोड़ना है, शायद ये फैसला यूपी में कोतवाल नहीं करते | इंस्पेक्टर ऋषिपाल का मानना है कि पहली बार शहर की जगह दंगे देहात में ज़्यादा फैले | अगर पर्याप्त संख्या में पुलिस फोर्स देहात के थानों में मुहैया कराई गई होती, जो कमज़ोर तबके के इतने लोग मारे ना गए होते | देर से पुलिस बल भेजे जाने के कारण गांव में हिंसा बिना रोक टोक चलती रही |
आज तक - (८ सितंबर को दंगा) सुबह ७ बजे से शुरु हो गया था
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- सुबह ७ बजे से कई गांव में ....
आज तक - अच्छा....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- वही तो मैंने बताया ....
आज तक - फोर्स पहुंची नहीं थी ....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना - ३ - ४ जगह ....एक गांव में पहुंचकर control करा ....
आज तक - अच्छा ....सुबह सुबह फोर्स होगी नहीं थाने में....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- न हीं ....थाने में ....
आज तक - देर तक गश्त में थे ....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- नहीं थाने में मेरे पास २० सिपाही है, ३ - ४ दारोगा हैं, तो मैं कोशिश करूंगा कि पहले एक गांव में हिंसा हो गई तो मैं 4 सिपाही से हिंसा नहीं रुकवाउंगा |
मैं सोचता हूं कि पूरी फोर्स को लेकर हिंसा रोक दूं ....लेकिन जबतक यहां हिंसा रोकता, तबतक दूसरी जगह हिंसा शुरु हो गई | दूसरी जगह पहुंते ...तीसरी जगह हो गई |
आज तक - 
फोर्स कम थी ...
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना - फोर्स इतनी नहीं थी कि हर गांव में लगा दी जाती....
मुजफ्फरनगर की पुलिस अधीक्षक यानी एसपी क्राइम कल्पना सक्सेना के हाथों में दंगाग्रस्त कई थानों की कमान थी | कल्पना सक्सेना का मानना है कि दंगों पर कहीं ना कहीं सियासी रंग चढ़ा है |
कल्पना सक्सेना, एसपी क्राइम- देखिए कई तरीके की बातें हुईं, बहुत सी बाते हैं ....इस समय हम लोग बहुत प्रेशर में हैं ....वर्क बहुत सारा है करने को ....फुर्सत से बात करेंगे किसी दिन....
आज तक - लेकिन मैडम उसका जवाब दीजिए हमें आप | मतलब मर्डर को ऐसा सांप्रदायिक रंग क्यों दे दिया गया |
कल्पना सक्सेना, एसपी क्राइम - देखिए मैं क्या कहूं....बहुत गहराई से बताऊं ....इसमें बहुत कुछ political है, और यहां ऐसा चल रहा है कि मुस्लिम को कुछ लग रहा है | हिंदुओं को लग रहा है कि मुस्लिम appeasement (तुष्टीकरण) बहुत हो रहा है ....
आज तक के ऑपरेशन दंगा में वो सच सामने आया, जिससे मुजफ्फरनगर सुलग उठा था | हिंसा भले ही सुनियोजित ना हो, लेकिन हिंसा भड़काने में साज़िश और सियासत का घालमेल ज़रूर था |

स्त्रोत : आज तक 

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