कनाडा में मंदिरों पर हमले और चोरी की घटनाओं में 3 गिरफ्तार


कनाडा में मंदिरों पर हमले और चोरी के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है वहीं एक की तलाश जारी है। इन दिनों कनाडा में धार्मिक स्थलों में लूट और हिंसा की घटनाएं बढ़ गई थीं। मुख्यतः मंदिरों में हमले हो रहे थे। ऐसे में हिंदू समुदाय आक्रोशित था। कनाडा की पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। 

एक बयान में बताया गया, 'नवंबर 2021 से मार्च 2022 के बीच कई मंदिरों में लूट की घटना हुई है। मंदिरों मे दान पात्र से धन की चोरी कई बार हो चुकी है। कई जगहों पर चोर पूरा दानपात्र लेकर ही फरार हो गए।' इंडो-कनाडियन शख्स को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है।

पील पुलिस ने बताया कि वहां ऐसी 13 घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें से 9 घटनाएं हिंदू मंदिरों मे हुईं। इसके अलावा जैन मंदिर और गुरुद्वारे में भी कुछ घटनाएं हो चुकी हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया, 'चौथे आरोपी की भी पहचान हो गई है लेकिन अभी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। उसे भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।  ये अपराध घृणा की वजह से किए गए हैं।' पुलिस ने कहा कि जांच प्रक्रिया सभी ऐंगल को ध्यान में रखते हुए चल रही है। 

पुलिस अधिकारी 16 फरवरी को भी धर्मगुरुओं से मिले थे। इसके अलावा ब्राम्प्टन के मेयर भी बैठक में मौजूद थे। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि ऐसी करीब 18 घटनाएं हो चुकी हैं। वहीं पुलिस के प्रवक्ता ने कहा कि मंदिरों की सुरक्षा बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री द्वारा 15वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में उद्धघाटन वक्तव्य


Your Excellency President दुतेर्ते, 

Excellencies, 

Mr. President, 

मुझे ASEAN (आसियान) की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर पहली बार मनीला आकर हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। इसके साथ ही हम ASEAN-India Dialogue Partnership के 25 वर्ष भी पूरे कर रहे हैं।

इस महत्वपूर्ण वर्ष के दौरान Philippines (फिलीपींस) द्वारा आसियान के कुशल नेतृत्व और शिखर सम्मलेन के शानदार आयोजन के लिए मैं राष्ट्रपति महोदय के प्रति आभार प्रकट करता हूं।

आसियान-भारत की साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने में Country Coordinator के रूप में वियतनाम के योगदान के लिए मैं वियतनाम के माननीय प्रधानमंत्री को भी धन्यवाद देता हूं।

Excellencies, 

आसियान की यह 50 वर्षों की महत्वपूर्ण यात्रा जितनी celebration के योग्य है, उतनी ही विचार करने योग्य भी है।

मुझे पूरा विश्वास है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर आसियान देश एक vision, एक पहचान और एक स्वतंत्र समुदाय के रूप में आगे भी मिल कर काम करते रहने का संकल्प लेंगे।

भारत की Act East Policy आसियान को ध्यान में रख कर ही बनाई गई है, और Indo-Pacific region के क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में इस संगठन का महत्व स्पष्ट है।

तीसरे ASEAN-India Plan of Action के अंतर्गत आपसी सहयोग के हमारे विस्तृत agenda की प्रगति अच्छी रही है, जिसमें politico-security, economic तथा cultural partnership के तीन महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं।

Excellencies, 

भारत एवं आसियान के बीच कायम सामुद्रिक संबंधों की वजह से हज़ारों वर्ष पहले हमारे व्यापारिक संबंध स्थापित हुए थे, तथा हमें साथ मिल कर इन्हें और मजबूत बनाना होगा।

इस क्षेत्र के हितों और शांतिपूर्ण विकास को ध्यान में रखते हुए, नियमों पर आधारित क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे की स्थापना के लिए भारत आसियान को अपना समर्थन जारी रखेगा।

हमने अपने-अपने देशों में आतंकवाद तथा उग्रवाद से कड़ा संघर्ष किया है। अब समय आ गया है, जब हम इस महत्वपूर्ण विषय पर आपसी सहयोग बढ़ा कर इस चुनौती का मिल-जुल कर समाधान निकालें।

Excellencies, 

भारत-आसियान Dialogue Partnership के पच्चीसवीं वर्षगांठ समारोह का theme "Shared Values, Common Destiny” बिल्कुल उपयुक्त है। इस अवसर पर हमने बहुत से कार्यक्रम मिल-जुल कर आयोजित किये हैं।

मुझे विश्वास है कि इस यादगार वर्ष का समापन भी शानदार रहेगा। 25 जनवरी 2018 को नई दिल्ली में India-ASEAN Special Commemorative Summit में आपका स्वागत करने के लिए भारत और मै व्यक्तिगत रूप से उत्सुक हैं।

भारत के 69वें गणतंत्र दिवस समारोह के हमारे मुख्य अतिथियों के रूप में आसियान देशों के नेताओं का स्वागत करने के लिए सवा सौ करोड़ भारतवासी इंतज़ार कर रहे हैं।

हम सभी के बेहतर भविष्य के लिए आपके साथ मिल कर काम करने के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। 

बहुत बहुत धन्यवाद।

बिना बुर्का अपनी फोटो ट्वीट करनेवाली मुस्लिम लड़की गिरफ्तार


सऊदी अरब की राजधानी रियाद में सोमवार को एक महिला को बुर्का पहने बिना फोटो ट्वीट करने के कारण बन्दी बनाया गया ।

पुलिस प्रवक्ता फवाज अल मैमन ने महिला का नाम घोषित नहीं किया परंतु कुछ वेबसाइट्स ने महिला का नाम मलक अल-शहरी बताया है। महिला ने बीते महीने बुर्के के बिना अपनी फोटो पोस्ट की थी जिसके बाद सोशल मीडिया पर उसकी काफी आलोचना हो रही थी।

मैमन ने एक बयान जारी कर बताया, ‘महिला ने रियाद के पॉप्युलर कैफे के बाहर खड़े होकर यह तस्वीर खिंचवाई है। तस्वीर में महिला ने सऊदी सोसायटी के नियमों के अनुसार इस्लामिक हेडस्कार्फ नहीं पहना है। महिला की उम्र २० से ३० के बीच बताई जा रही है। महिला के किसी गैर मर्द से संबंध भी बताए जा रहे हैं।’ महिला को फिलहाल जेल ले जाया गया है।

रियाद पुलिस ने बताया कि, महिला ने उन नियमों का उल्लंघन किया है जो सऊदी में लागू हैं। बता दें कि सऊदी में महिलाओं के ऊपर कई प्रतिबंध है। सऊदी अकेला ऐसा देश है जहां महिलाएं ड्राइविंग तक नहीं कर सकती। सऊदी में महिलाओं को घर से निकलने पर सर से पैर तक खुद को ढकना जरूरी है।

पेरिस में जी-20 संगोष्‍ठी में भारत सरकार की सराहना


दो दिवसीय जी-20 भ्रष्‍टाचार रोधी कार्य समूह (एसीडब्‍ल्‍यूजी) बैठक से पहले पेरिस में आर्थिक सहयोग एवं विकास (ओईसीडी) संगठन में भ्रष्‍टाचार एवं वै‍श्विक अर्थव्‍यवस्‍था पर एक जी-20 संगोष्‍ठी का आयोजन किया गया। भारत के शिष्‍टमंडल का नेतृत्‍व संयुक्‍त सचिव (अंतरराष्‍ट्रीय सहयोग), डीओपीटी श्री देवेश चतुर्वेदी कर रहे हैं। 

संगोष्‍ठी में भाग लेने वाले पैनेलिस्‍ट में ओईसीडी, आईएमएफ एवं विश्‍व बैंक के विशेषज्ञ तथा अग्रणी विश्‍वविद्यालयों के अर्थशास्‍त्री एवं अनुसंधानकर्ता शामिल हैं। कई पैनेलिस्‍टों ने जेएएम (जनधन, आधार एवं मोबाइल) के जरिये भारत में प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण (डीबीटी) को व्‍यावहारिक क्रियान्‍वयन उपकरण के एक उदाहरण के रूप में रेखांकित किया जिसका परिणाम भ्रष्‍टाचार स्‍तरों को कम करने के साथ-साथ राजस्‍व नुकसान एवं देरी में कमी के रूप में भी सामने आया। 

कौशल विकास के लिए कादुना (नाईजीरिया) में परिधान प्रशिक्षण केन्‍द्र स्‍थापित

नाईजीरिया के कादुना में एक परिधान परिधान प्रशिक्षण केन्‍द्र की स्‍थापना की गई है। इस केन्‍द्र की स्‍थापना अफ्रीका के लिए कपास प्रौद्योगिकी सहायता कार्यक्रम( कॉटन टीएपी) के तहत की गई है। इसका क्रियान्‍वयन भारत सरकार के वाणिज्‍य विभाग द्वारा द्वितीय भारत- अफ्रीका फोरम के शिखर सम्‍मेलन के अंतर्गत किया जा रहा है। यह नाईजीरिया सरकार के सहयोग से वहां स्‍थापित अपने तरह का पहला केन्‍द्र है। इस केन्‍द्र का उद्घाटन वाणिज्‍य विभाग के संयुक्‍त सचिव श्री एम के द्विवेदी ने 22 जून, 2016 को किया था। 

उन्‍होंने बताया कि इस केन्‍द्र की स्‍थापना का उद्देश्‍य नाईजीरिया सरकार द्वारा की जा रही पहलों को समर्थन देना है ताकि देश में कपास एवं वस्‍त्र मूल्‍य श्रृंखला बनाने के ध्‍येय को फिर से साकार दिया जा सके और साथ ही पश्चिम अफ्रीका में कुशल श्रमिकों और निर्यातोन्‍मुखी परिधान उद्योग की जरूरत को पूरा किया जा सके। 

पढ़िए अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन हिंदी में



श्रीमान स्पीकर,
श्रीमान उप राष्ट्रपति,
अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिष्ठित सदस्यगण,
देवियों एवं सज्जनों,


मैं अमेरिकी कांग्रेस की इस संयुक्त बैठक को संबोधित करने के लिए दिए गए निमंत्रण से काफी सम्मानित महसूस कर रहा हूं।

इस भव्य कैपीटोल के द्वार खोलने के लिए श्रीमान स्पीकर आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

लोकतंत्र के इस मंदिर ने विश्व भर में अन्य लोकतंत्रों को प्रोत्साहित किया है एवं सशक्त बनाया है।

यह इस महान देश की भावना को अभिव्यक्त करता है, जो अब्राहम लिंकन के शब्दों में स्वतंत्रता में परिकल्पित हुई थी और इस अवधारणा के प्रति समर्पित हुई थी कि सभी व्यक्ति समान हैं।

मुझे यह अवसर देकर, आपने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और इसके 1.25 अरब लोगों को सम्मानित किया है।

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रतिनिधि के रूप में, यह मेरा सौभाग्य है कि दुनिया के सबसे प्राचीन लोकतंत्र के नेताओं को मैं संबोधित कर रहा हूं।

स्पीकर महोदय,

दो दिन पहले मैंने अपनी यात्रा आरलिंगटन राष्ट्रीय सेमेटरी से शुरू की थी जहां इस महान भूमि के अनेक वीर जवानों की समाधि है।

मैं उनके साहस और आजादी एवं लोकतंत्र के आदर्शों के लिए उनके बलिदान का सम्‍मान करता हूं।

यह इस निर्णायक दिवस की 72वीं वर्षगांठ है।

उस दिन इस महान देश के हजारों जवानों ने स्वतंत्रता की लौ को जलाए रखने के लिए उस सुदूर भूमि के तटों पर जंग लड़ी थी जिसे वे जानते तक नहीं थे।

उन्होंने अपने जीवन का बलिदान किया, ताकि दुनिया आजादी की सांस लेती रहे।

आजादी की इस भूमि और वीर जवानों के इस देश के पुरुषों एवं महिलाओँ द्वारा मानवता की सेवा के लिए दिए गए महान बलिदान की मैं सराहना करता हूं, भारत सराहना करता है।

भारत यह जानता है कि इसका क्या मतलब है, क्योंकि हमारे सैनिकों ने भी इन्हीं आदर्शों के लिए सुदूर स्थित युद्ध भूमि पर अपने जीवन का बलिदान किया है।

यही कारण है कि स्वतंत्रता एवं आजादी के धागों से हमारे दो लोकतंत्र मजबूत बंधन में बंधे हुए हैं।

स्पीकर महोदय,

हमारे इन दोनों राष्ट्रों का इतिहास, संस्कृति एवं आस्थाएं भले ही अलग-अलग हों,

लेकिन लोकतंत्र में हमारी आस्था और हमारे देशवासियों की आजादी इन दोनों राष्ट्रों के लिए एकसमान हैं।

सभी नागरिक समान हैं, यह अनुपम विचार भले ही अमेरिकी संविधान का केन्द्रीय (मुख्य) आधार हो,

लेकिन हमारे संस्थापक भी इसी विश्वास को साझा करते थे और वे भारत के प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत आजादी चाहते थे।

एक नव स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में हमने जब लोकतंत्र में अपनी आस्था व्यक्त की थी, तो ऐसे अनेक लोग थे जिन्होंने भारत को लेकर संशय व्यक्त किया था।

निश्चित रूप से, हमारी विफलता पर दांव लगाए गए थे

लेकिन भारत की जनता कतई नहीं डगमगाई।

हमारे संस्थापकों ने एक आधुनिक राष्ट्र का सृजन किया, जिसकी अंतरात्मा का सार आजादी, लोकतंत्र और समानता थी।

और ऐसा करते समय उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि हम अपनी युगों पुरानी विविधता का उत्सव निरंतर मनाते रहें।

आज

• अपनी समस्त सड़कों एवं संस्थानों
• अपने गांवों एवं शहरों
• सभी आस्थाओं के प्रति समान सम्मान, और
• अपनी सैकड़ों भाषाओं और बोलियों के माधुर्य

के लिहाज से भारत एक है, भारत एक ही देश के रूप में आगे बढ़ रहा है, भारत एक ही देश के रूप में उत्सव मना रहा है।

स्पीकर महोदय,

आधुनिक भारत अपने 70वें वर्ष में है।

मेरी सरकार के लिए, संविधान ही वास्‍तविक पवित्र ग्रंथ है।

और उस पवित्र ग्रंथ में किसी की चाहे जैसी भी पृष्‍ठभूमि रही हो, सभी नागरिकों के लिए समान रूप से विश्‍वास की आजादी, बोलने और मताधिकार, और समानता के अधिकार को मौलिक अधिकारों के रूप में प्रतिस्‍थापित किया गया है।

हमारे 800 मिलियन देशवासी हरेक पांच वर्षों पर अपने मताधिकार के अधिकार का प्रयोग कर सकते हैं।

लेकिन हमारे सभी 1.25 बिलियन नागरिकों को भय से स्‍वतंत्रता प्राप्‍त है जिसका उपयोग वे अपने जीवन के हर क्षण में करते हैं।

सम्‍मानित सदस्‍यों,

हमारे लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍थाओं के बीच भागीदारी उस प्रकार से दृष्टिगोचर होती रही है जिसमें हमारे चिंतकों ने एक-दूसरे को प्रभावित किया है और हमारे समाजों की धाराओं को आकार दिया है।

नागरिक असहयोग के थोरोस के विचार ने हमारे राजनीतिक विचारों को प्रभावित किया है।

और इसी प्रकार, भारत के महान संत स्‍वामी विवेकानंद द्वारा मानवता को अंगीकार करने का सर्वाधिक विख्‍यात आह्वान शिकागो में ही किया गया था

गांधीजी के अहिंसा के सिद्धांत ने मार्टिन लूथर के साहस को प्रेरित किया।

आज टाइडल बेसिन में स्थित मार्टिन लूथर किंग स्‍मारक स्‍थल मैसऐचूसैटस एवेन्‍यू में गांधी जी की प्रतिमा से केवल तीन मील की दूरी पर स्थित है।

वाशिंगटन में उनके स्‍मारक स्‍थलों के बीच की यह निकटता उन आदर्शों और मूल्‍यों की प्रगाढ़ता को प्रतिबिम्बित करता है जिनमें उन्‍हें विश्‍वास था।

डॉ. बी आर अम्‍बेडकर की प्रतिभा का परिपोषण एक सदी पहले उन वर्षों में ही किया गया था, जो उन्‍होंने कोलम्बिया यूनिवर्सिटी में व्‍यतीत किए थे।

उन पर अमेरिकी संविधान का प्रभाव, लगभग तीन दशक बाद, भारतीय संविधान के आलेखन में प्रतिबिम्बित हुआ। हमारी स्‍वतंत्रता भी उसी आदर्शवाद से प्रज्‍वलित हुई, जिसने स्‍वतंत्रता के लिए आपके संघर्ष को प्रोत्‍साहित किया।

इसमें कोई आश्‍चर्य की बात नहीं कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत और अमरीका को ‘स्‍वभाविक मित्र’ करार दिया था।

इसमें कोई संदेह नहीं कि आजादी के साझा आदर्शों और समान दर्शन ने ही हमारे रिश्‍तों को आकार दिया था।

इसमें कोई संदेह नहीं कि राष्‍ट्रपति ओबामा ने हमारे संबंधों को 21वीं शताब्‍दी की विशिष्‍ट साझेदारी करार दिया है।

स्पीकर महोदय,

15 वर्ष पहले भारत के तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी यहां खड़े हुए थे और उन्‍होंने अतीत के ‘हिचकिचाहट के साए’ से बाहर निकलने की अपील की थी।

तब से हमारी मित्रता के पृष्‍ठ एक उल्‍लेखनीय कहानी सुनाते हैं।

आज हमारे संबंध इतिहास की हिचकिचाहटों से उबर चुके हैं।

आराम, स्‍पष्‍टवादिता और अभिसरण हमारे संभाषणों को परिभाषित करते हैं।

चुनावों के चक्र और प्रशासनों के परिवर्तनकाल के जरिए हमारे संबंधों की प्रगाढ़ता और बढ़ी ही है।

और इस रोमांचक यात्रा में अमेरिकी कांग्रेस ने इसके कम्‍पास की तरह कार्य किया है।

आपने हमें बाधाओं को साझेदारी के सेतुओं के रूप में बदलने में सहायता की है।

2008 में, जब कांग्रेस ने भारत-अमेरिका नागरिक नाभिकीय सहयोग समझौते को पारित किया, इसने हमारे संबंधों के रंगों को ही परिवर्तित कर दिया।

हम आपको वहां उस वक्‍त खड़े रहने के लिए धन्‍यवाद देते हैं, जब साझेदारी को आपकी सबसे अधिक आवश्‍यकता थी।

आप दु:ख के क्षणों में भी हमेशा हमारे साथ खड़े रहे हैं।

भारत कभी भी अमेरिकी कांग्रेस द्वारा दिखाई गई एकजुटता को नहीं भूलेगा, जब हमारी सीमा के पार आतंकवादियों ने नवंबर, 2008 में मुम्‍बई पर हमला किया था।

स्पीकर महोदय,

जैसा कि मुझे बताया गया है, अमेरिकी कांग्रेस का काम करने का तरीका बेहद सद्भावपूर्ण है। मुझे ये भी बताया गया कि आप लोग अपने द्विदलिय व्यवस्था के लिए जाने जाते हैं।

इस तरह की व्यवस्था को मानने वाले आपलोग अकेले नहीं हैं।

पहले भी और आज भी मैंने देखा है कि हमारे भारतीय संसद में भी इसी तरह का उत्साह रहता है। सतौर से ऊपरी सदन में हमारी परंपराएं काफी मिलती-जुलती हैं।



स्पीकर महोदय, 

जैसा कि ये देश अच्छी तरह जानता है, हर यात्रा का एक पथप्रदर्शक होता है।

पुराने नेताओं ने काफी कम समय में विकास की एक साझेदारी तैयार की, वो भी तब जबकि हमारे बीच इतनी मुलाकातें नहीं होती थी।

नॉर्मन बोरलॉग जैसे प्रतिभावान व्यक्ति भारत में हरित क्रांति और खाद्य क्रांति ले आए। अमेरिकी विश्वविद्यालयों की उत्क्रृष्ठता ने भारतीय तकनीकी और प्रबंधन संस्थाओं को काफी विकसित किया है।

हम अपनी सहभागिता की इस गति को आज और तेज कर सकते हैं। हमारी साझेदारी की स्वीकार्यता पूरी तरह से हमारे लोगों की कोशिशों की वजह से संभव हुई है। हमारी साझेदारी समुद्र की गहराई से लेकर आसमान की ऊंचाई तक नजर आती है।

हमारा विज्ञान और तकनीकी सहयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य और कृषि के क्षेत्र की पुरानी समस्याओं को खत्म करने में लगातार सहयोग कर रहा है।

वाणिज्य और निवेष के क्षेत्र में हमारी साझेदारी लगातार बढ़ रही है। हमारा अमेरिका के साथ व्यापार किसी भी दूसरे देश के मुकाबले ज्यादा है।

हमारे बीच सामान, सेवाओं और पैसों का लेनदेन बढ़ने से दोनों तरफ नौकरियों के मौके बढ़ रहे हैं।

जैसा व्यापार में है, वैसा ही रक्षा क्षेत्र में भी है।

भारत का अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग किसी भी दूसरे देश की अपेक्षा ज्यादा है। एक दशक से भी कम अवधि में हमारे रक्षा सामानों की खरीदारी करीब 0 से 10 अरब डॉलर तक पहुंच गई है।

हमारे आपसी सहयोग से हमारे शहरों और वहां के नागरिकों की आतंकवादियों से रक्षा और आधारभूत संरचनाओं को साइबर खतरों से बचाव सुनिश्चित होता है।

जैसा कि मैंने कल राष्ट्रपति ओबामा को बताया था, हमारे बीच असैन्य परमाणु सहयोग एक वास्तविकता है।

स्पीकर महोदय, दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध बेहद मजबूत हैं। दोनों देशों के लोगों के बीच बेहद करीबी सांस्कृतिक संबंध रहे हैं।

सीरी ने बताया, भारत की प्राचीन धरोहर योगा का अमेरिका में 30 मिलियन लोग अभ्यास कर रहे हैं। अनुमान के मुताबिक अमेरिका में योगा के लिए झुकने वालों की संख्या कर्व बॉल के लिए झुकने वालों से भी ज्यादा है।

और स्पीकर महोदय, हमने योगा पर कोई प्रज्ञात्मक संपत्ति अधिकार भी नहीं लगाया है।

हमारे 30 लाख भारतीय अमेरिकी दोनों देशों को जोड़ने के लिए एक अद्वितिय और सक्रिय सेतु का काम करते हैं।

आज वो अमेरिका के बेहतरीन सीईओ, शिक्षाविद, अंतरिक्षयात्री, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री, चिकित्सक और यहां तक की अंग्रेजी वर्तनी की प्रतियोगिता के चैंपियन भी हैं।

ये लोग आपकी ताकत हैं। ये लोग भारत की शान भी हैं। ये लोग हमारे दोनों समाजों के प्रतिनिधि की तरह हैं।



स्पीकर महोदय,

आपके इस महान देश के बारे में मेरी समझ सार्वजनिक जीवन में आने से काफी पहले ही विकसित हो गई थी।

पदभार ग्रहण करने से बहुत पहले ही मैं, तट से तट होते हुए 25 से अधिक अमेरिकी राज्य घूम चूका हूँ।

तब मुझे अहसास हुआ की अमेरिका की असली ताकत इसके लोगों के सपनो में और उनकी आकांक्षाओं में है।

स्पीकर महोदय,

आज वही ज़ज्बा भारत में भी उध्वित हो रहा है।

800 मिलियन युवा जो कि खास कर बेसब्र हैं।

भारत में एक बहुत बड़ा सामाजिक-आर्थिक बदलाब आ रहा है।

करोड़ों भारतीय पहले से ही राजनीतिक तौर पर समर्थ हैं। मेरा सपना उन्हें सामाजिक-आर्थिक बदलाव द्वारा आर्थिक रूप से सक्षम करने का है।

2022 में भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ है।

मेरी कार्यसूची लंबी और महत्वाकांक्षी है, जिसे आप समझ सकते हैं। इसमें शामिल है..

- एक विस्तृत ग्रामीण अर्थव्यवस्था जिसमें सुदृढ़ कृषि क्षेत्र शामिल है।
- सभी नागरिकों के लिए एक घर और बिजली की व्यस्था
- हमारे लाखों युवाओं को कौशल प्रदान करना
- 100 स्मार्ट शहरों का निर्माण
-एक अरब लोगों को इंटरनेट मुहैया कराना और गांवों को डिजिटल दुनिया से जोड़ना
-21वीं सदी के मुताबिक रेल, सड़क और पोत की आधारभूत संरचना तैयार करना

ये महज हमारी मह्त्वाकांक्षा नहीं हैं बल्कि इन्हें एक तय समय में पूरा करना हमारा लक्ष्य है।

इन सभी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक सुनियोजित योजना बनाई गई है जिसमें नवीकरण पर हमारा खास ध्यान है।

स्पीकर महोदय, भारत के आगे बढ़ने की इन सभी योजनाओं में मैं अमेरिका को एक अनिवार्य सहयोगी की तरह देखता हूं।

आप सब में से भी ज्यादातर लोग ये मानते हैं कि मजबूत और संपन्न भारत का होना अमेरिका के सामरिक हितों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

आइए साथ मिलकर एक दूसरे के आदर्शों को साझा कर व्यावहारिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़े।

इस बात में कोई संदेह नहीं कि इस रिश्ते की मजबूती से दोनों देशों को कई स्तरों पर फायदा पहुंचेगा।

अमेरिकी व्यापार जगत को उत्पादन और निर्माण के लिए आर्थिक विकास के नए क्षेत्रों, वस्तुओं के लिए नए बाजार, कुशल कामगार और वैश्विक जगहों की तलाश है। भारत उसका आदर्श सहयोगी हो सकता है.

भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था और 7.6 प्रतिशत प्रतिवर्ष की विकास दर हमारे आपसी समृद्धि के नए अवसर प्रदान कर रही है।

भारत में परिवर्तनकारी अमेरिकी प्रौद्योगिकियों और भारतीय कंपनियों की ओर से संयुक्त राज्य अमेरिका में बढ़ रहा निवेश दोनों का ही हमारे नागरिकों के जीवन पर सकारात्मक असर पड़ रहा है।

आज, अपने वैश्विक अनुसंधान और विकास केन्द्रों के लिए भारत ही अमेरिकी कंपनियों का पसंदीदा गंतव्य है।

भारत से पूर्व की ओर देखने पर, प्रशांत के पार, हमारे दोनों देशों की नवाचार क्षमता कैलिफोर्निया में आकर एक साथ मिलती है।

यहां अमेरिका की अभिनव प्रतिभा और भारत की बौद्धिक रचनात्मकता भविष्य के नए उद्योगों को आकार देने का काम कर रही हैं।

स्पीकर महोदय,

21वीं सदी अपने साथ महान अवसर लेकर आई है।

हालांकि, यह अपने साथ खुद से जुड़ी अनेकानेक चुनौतियां भी लेकर आई है।

परस्पर निर्भरता बढ़ रही है।

लेकिन जहां एक ओर दुनिया के कुछ हिस्से बढ़ती आर्थिक समृद्धि के द्वीप हैं, वहीं दूसरी ओर अन्य हिस्से संघर्षों से घि‍र गए हैं।

एशिया में, किसी आपसी सहमति वाली सुरक्षा संरचना का अभाव अनिश्चितता पैदा करता है।

आतंक के खतरे बढ़ते जा रहे हैं और नई चुनौतियां साइबर एवं बाहरी अंतरिक्ष में उभर रही हैं।

और 20वीं सदी में परिकल्पि‍त वैश्विक संस्थान नई चुनौतियों से निपटने या नई जिम्मेदारियां लेने में असमर्थ नजर आ रहे हैं।

अनेकानेक बदलावों एवं आर्थिक अवसरों; बढ़ती अनिश्चितताओं और राजनीतिक जटिलताओं; मौजूदा खतरों और नई चुनौतियों की इस दुनिया में हमारी वचनबद्धता निम्नलिखि‍त को बढ़ावा देकर अहम फर्क ला सकती हैं:

• सहयोग, प्रभुत्व नहीं;
• कनेक्टिविटी, अलगाव नहीं;
• वैश्विक आम जनता के लिए आदर;
• समावेशी व्यवस्था, वंचित रखने वाली नहीं; और सबसे ज्यादा अहम
• अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानकों का पालन।

भारत हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित रखने संबंधी अपनी जिम्मेदारियां पहले से ही संभाल रहा है।

एक मजबूत भारत-अमेरिकी साझेदारी एशिया से लेकर अफ्रीका तक और हिंद महासागर से लेकर प्रशांत क्षेत्र तक में शांति, समृद्धि और स्थिरता ला सकती है।

यह वाणिज्य के समुद्री मार्गों की सुरक्षा और समुद्र पर नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में भी मदद कर सकती है।

लेकिन, हमारे सहयोग की प्रभावशीलता में वृद्धि तभी होगी जब 20वीं सदी की मानसिकता के साथ तैयार अंतरराष्ट्रीय संस्थान आज की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करेंगे।

स्पीकर महोदय,

वाशिंगटन डीसी आने से पहले मैं पश्चिमी अफगानिस्तान स्थित हेरात गया था, जहां मैंने अफगान-इंडिया फ्रेंडशिप डैम (अफगान-भारत मित्रता बांध) का शुभारंभ किया। यह पनबिजली परियोजना 42 मेगावाट क्षमता की है, जिसे भारत के सहयोग से बनाया गया है।

मैं बीते साल क्रिसमस पर भी वहां गया था और वहां की संसद को राष्ट्र को समर्पित किया गया। यह हमारे लोकतांत्रिक संबंधों का प्रमाण है।

अफगानिस्तान ने स्वाभाविक तौर पर अमेरिका के बलिदान को मान्यता दी है, जिससे उनके जीवन को बेहतर बनाने में मदद मिली है। हालांकि क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए किए गए आपके अंशदान को इससे आगे तक सराहा गया है।

भारत ने भी अफगान लोगों के साथ अपनी मित्रता को समर्थन देने के लिए खासा योगदान और बलिदान किया है। एक शांतिपूर्ण और स्थिर व संपन्न अफगानिस्तान का निर्माण करना हमारा साझा उद्देश्य है।

सम्मानित सदस्यों, अभी तक न सिर्फ अफगानिस्तान के लिए, बल्कि दक्षिण एशिया में कहीं भी और वैश्विक स्तर पर भी आतंकवाद बड़ा खतरा बना हुआ है।

पश्चिमी भारत से अफ्रीका की सीमा तक के क्षेत्र में इसके लश्कर-ए-तैय्यबा, तालिबान, आईएसआईएस (ISIS) तक इसके विभिन्न नाम हो सकते हैं। लेकिन इनके लक्ष्य समान हैं-घृणा, हत्या और हिंसा।

भले ही इसकी छाया पूरी दुनिया में है, लेकिन यह भारत के पड़ोस में पनप रहा है।

मैं अमेरिकी कांग्रेस की इस बात के लिए प्रशंसा करता हूं कि वह राजनीतिक लाभ के लिए धर्म और आतंकवाद का इस्तेमाल करने वालों को कड़ा संदेश दे रही है।

उनको पुरस्कृत करने से मना करना, उनके कार्यों के लिए उन्हें जिम्मेवार ठहराने की दिशा में पहला कदम है।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई कई स्तरों पर लड़ी जानी है। और सेना, गुप्तचर सेवा या सिर्फ कूटनीति के दम पर यह लड़ाई जीतना संभव नहीं होगा।

स्पीकर महोदय,

हमने इसके खिलाफ लड़ाई में अपने नागरिक और सैनिकों का बलिदान किया है।

हमारे सुरक्षा सहयोग को मजबूत बनाना वक्त की जरूरत है।

और ऐसी नीति बनाई जाए, जो-

-ऐसे लोगों को अलग-थलग करती हो जो आतंकवाद को शरण, सहयोग और प्रायोजित करते रहे हैं।

-अच्छे और बुरे आतंकवाद के बीच फर्क नहीं करती हो।

-जो धर्म और आतंकवाद को अलग रखे।

और हमें इस में सफल बनाये कि जो मानवता में विश्वास करते हैं, वो सब इस से लड़ने के लिए एकसाथ आएं और इस बुराई के खिलाफ एक सुर में बोलें। आतंकवाद को गैरवैधानिक बनाया जाना चाहिए।

स्पीकर महोदय,

हमारी साझेदारी के फायदे अन्य देशों और क्षेत्रों के को होने के साथ-साथ, हमनें अपनी और हमारी क्षमताओं को मिलाकर एक साथ मिलकर आपदाओं के समय जब मानवीय राहत की जरूरत होती है अन्य वैश्विक चुनौतियों का समाना किया है।

हमारे देश से मीलों दूर हमने यमन से हजारों भारतीयों, अमेरिकियों और अन्य देशों के लोगो को बाहर निकाला था

हमारे पड़ोस में नेपाल में भूकंप मालदीव में जल संकट और हाल ही में श्रीलंका में भू-स्खलन के समय राहत पहुंचाने वाले भारत पहला देश था

भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना कार्यक्रम में सैनिकों को भेजने वाले देशों में से सबसे बड़ा देश भी है।

अकसर भारत और अमेरिका विश्व के विभिन्न हिस्सों में भुखमरी, गरीबी बीमारियों और निरक्षरता से लड़ने के लिए विज्ञानप्रौद्योगिकी और इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी शक्तियों को साझा करते हैं।

हमारी साझेदारी की सफलता एशिया से लेकर अफ्रीका तक शिक्षा, सुरक्षा और विकास के लिए नए अवसरों को खोल रही है।

और, पर्यावरण संरक्षण और धरती की देखभाल एक यथार्थ विश्व के निर्माण हेतु हमारे साझा विज़न में मुख्य विषय है

भारत में, हमारे लिए धरती माँ के साथ सौहार्दपूर्वक रहना हमारी प्राचीन मान्यता है।

और, प्रकृति से केवल जरूरत की चीजों को ग्रहण करना हमारी सभ्यता का नैतिक मूल्य है।

इसलिए हमारी साझेदारी का लक्ष्य क्षमताओं के साथ जिम्मेदारियों को संतुलित करना है।

और, यह नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता और उसके प्रयोग को बढाने की दिशा में भी केन्द्रित है

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन को बनाने की हमारी पहल को अमेरिका का पुरजोर समर्थन इस प्रकार का एक प्रयास है।

हम न सिर्फ हमारे बेहतर भविष्य के लिए एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं बल्कि हम पूरे विश्व के बेहतर भविष्य के लिए काम कर रहे हैं।

जी-20, पूर्वी एशिया सम्मेलन और जलवायु परिवर्तन सम्मेलनों में यह हमारे प्रयासों का लक्ष्य रहा है।

अध्यक्ष महोदय और माननीय सदस्यों,

जैसे-जैसे हमारी साझेदारी घनिष्ठ बनेगी उस दौरान ऐसा भी समय आएगा जब हमारे विचार अलग-अलग होंगे।

लेकिन, हमारे हित और चिंताएं एक समान होने के कारण, निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्वायत्ता और हमारे दृष्टिकोणों में विविधता हमारी साझेदारी के लिए उपयोगी साबित होगी।

हम एक नई यात्रा की शुरूआत करने जा रहे हैं, और नए लक्ष्य बना रहे हैं, इसलिए, हमारा ध्यान न सिर्फ रोजमर्रा के मामलों पर होना चाहिए बल्कि रूपांतरकारी विचारों पर भी होना चाहिए,

जिन विचारों पर ध्य़ान दिया जा सकता है वे हैं:

• हमारे समाजों के लिए सिर्फ धन-दौलत और संपदा न बनाकर नैतिक मूल्यों का भी निर्माण किया जा सकता है.
• हमें सिर्फ तात्कालिक लाभ के लिए कार्य नहीं करना बल्कि दीर्घकालिक फायदों के लिए भी विचार करना चाहिए,
• हमें न सिर्फ अच्छी कार्य प्रणाली के लिए काम करना है बल्कि साझेदारी को बढ़ाने पर भी विचार करना चाहिए।
• हमें न सिर्फ हमारे लोगों के अच्छे भविष्य़ के लिए सोचना चाहिए बल्कि हमें अधिक संयुक्त, एकजुट मानवीय और समृद्ध विश्व के सेतु के रूप में कार्य करना चाहिए,

और हमारी नई साझेदारी की सफलता के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि हम इसे एक नए दृष्टिकोण और संवेदना से देखें,

ऐसा करने से हम इस असाधारण रिश्ते के वादों को महसूस कर सकेंगें।



स्पीकर महोदय,

मेरे अंतिम शब्द और विचार इस बात को पुन: याद दिलाते हैं कि हमारे संबंधों का मुख्य उदेश्य शानदार और प्रभावशाली भविष्य का निर्माण करना है,

पिछले समय की बाधाएं पीछे छुट चुकी हैं और नए भविष्य की दृढ़ स्थापना हो चुकी है,

वाल्ट व्हीटमैन के शब्दो में,

“वादक समूह (The Orchestra) ने अपने यंत्रों को अच्छे से सजा लिया है और छड़ी ने अपना संदेश दे दिया है” (The Orchestra have sufficiently tuned their instruments, the baton has given the signal)

और इसमें मैं जोड़ना चाहूंगा कि अब इस सरगम में एक नयी जुगलबंदी (symphony) बनी है.

इस सम्मान के लिए अध्यक्ष महोदय और माननीय सदस्यों का हार्दिक धन्यवाद बहुत-बहुत धन्यवाद,

प्रधानमंत्री ने रियाद में L&T कार्मिकों के आवासीय परिसर का दौरा किया


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने रियाद में एल एंड टी कार्मिकों के आवासीय परिसर का दौरा किया। एल एंड टी रियाद में मेट्रो के एक खंड का निर्माण कर रही है।

इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस परियोजना में काम कर रहे कार्मिकों के द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आपका कठिन परिश्रम ही मुझे यहां लाया है।

उन्‍होंने कहा कि विदेश में भारतीय श्रमिकों के द्वारा किए जा रहे कार्य से न सिर्फ धन अर्जित होता है, बल्कि भारत की महत्‍ता भी बढ़ती है। उन्‍होंने कहा कि विश्‍व के बहुत से हिस्‍सों में भारतीय श्रमिकों को याद किया जाता है जहां उन्‍होंने बहुत सी प्रतिष्ठित परियोजनाओं को पूर्ण किया है। उन्‍होंने कहा कि भविष्‍य में रियाद मेट्रो के लिए भी भारतीय कार्मिकों के इसके निर्माण हुए योगदान को इसी प्रकार से याद किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विदेश में काम कर रहे भारतीयों को उनके परिजनों से प्राप्‍त होने वाले पत्रों से अकसर जानकारी मिलती है। उन्‍होंने कहा कि वह इन पत्रों के माध्‍यम से अपने सुख-दुख दोनों ही बांटते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्‍हें अहसास होता है कि वे उनके परिवार का ही एक हिस्‍सा हैं।

प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार की ई-प्रवास पहल का उल्‍लेख किया जिसके माध्‍यम से विदेश में कार्य करने की इच्‍छा रखने वाले लोगों को सुविधा उपलब्‍ध कराई जाएगी। उन्‍होंने कहा कि और अधिक ‘श्रमिक संसाधन केंद्र’ खोले जाएंगे और मदद पोर्टल के माध्‍यम से केंद्र सरकार तक शीघ्रता से संपर्क किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में क्षमता है कि वह आवश्‍यकता के अनुरूप मानव श्रम को दुनिया को प्रदान कर सके।

प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान, आयोजन स्‍थल पर उपस्थित हजारों श्रमिकों ने बहुत बार उत्‍साह के साथ उनका अभिनंदन किया। अपने संबोधन के पश्‍चात प्रधानमंत्री ने श्रमिकों से मुलाकात करते हुए उनके साथ जलपान भी किया।

मलेशिया में भारतीय समुदाय को प्रधानमंत्री का संबोधन


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मलेशिया में भारतीय समुदाय को संबोधित किया। उनके भाषण के मूलपाठ का हिन्दी रूपातंरण नीचे दिया जा रहा है :

वणक्कम

मेरे प्यारे मित्रो, भाइयो और बहनो

अनगलिल पालार तमिलनट्टी सरनथावरगल

आपमें से कई लोग तमिलनाडु के हैं।

अनगल अनैवरुक्कुम वणक्कम। सभी को वणक्कम।

इंडियाविन वलारचियिल तमिलनट्टिन पांगु मुक्‍कइम

भारत के विकास में तमिलनाडु की अहम भूमिका है।


नमस्‍कार,

मुझे मलेशिया आकर बहुत खुशी हो रही है। आपके बीच इस विशाल पंडाल में उपस्‍थित होने में मुझे अत्‍यंत हर्ष हो रहा है।

मेरे लिए भारत सिर्फ सरहदों का नाम नहीं है। भारत विश्‍व के हर भाग में मौजूद हर भारतीय के मन में है। भारत आपमें वास करता है।

आज आपके बीच आकर मुझे महान तमिल संत थिरूवल्‍लुवर की पंक्‍तियां याद आती हैं:

‘मित्रता केवल चेहरे पर मुस्‍कान नहीं होती। मित्रता मुस्‍कुराते हुए हृदय की गहराइयों में महसूस की जाती है।’

महात्‍मा गांधी ने एक बार कहा था कि वे थिरूवल्‍लुवर की कृति थिरूकुर्रल को मूल रूप में पढ़ने के लिए तमिल सीखना चाहते हैं, क्‍योंकि ज्ञान का जो खजाना उनके पास है, वह कोई और नहीं दे सकता।

मैं जब भी मलेशिया आया हूं मुझे मित्रता के बारे में संत की कही बात महसूस होती है।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं यहां भारत के प्रधानमंत्री की हैसियत से आऊं या बिना इस पद के।

मैंने हमेशा यही मित्रता और स्‍वागत प्राप्‍त किया है। मलय-भारतियों का प्रेम और मित्रता मेरे हृदय में विशेष स्‍थान रखते हैं।

पीढ़ियों पहले आपके कई पूर्वज एक अनजाने देश में आए थे।

आप में से कई लोग अभी हाल में यहां आए हैं।

जब भी आप यहां आए, जिन परिस्‍थितियों में भी यहां आए, समय या दूरी ने आपके मन में भारत के प्रति प्रेम कम नहीं होने दिया।

मैं इसे उत्‍सवों के रंगों और प्रकाश में देखता हूं। वे हमेशा की तरह चमकदार हैं।

मैं इसे संगीत, नर्तकों की भाव-भंगिमाओं, मंदिर की घंटियों और प्रार्थना के उच्‍चारण में पाता हूं।

और, भारत में वार्षिक प्रवासी भारतीय दिवस में मलय-भारतियों की तादाद सबसे अधिक होती है।

और, मलय-भारतीय ‘वाईब्रैंट गुजरात’ को और शानदार बनाते हैं।

भारत और मलेशिया पहले एक ही उपनिवेशी शक्‍ति के अधीन थे। हम दोनों एक दशक के अंतराल में ही आजाद हुए।

और, आजाद भारत मलय-भारतियों के प्रति कृतज्ञ है। भारत के स्‍वतंत्रता संग्राम का गौरव मलय-भारतियों के संघर्षों और बलिदानों से लिखा गया है।

आपके हजारों पूर्वज नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ थे और इंडियन नेशनल आर्मी में शामिल हुए थे। असंख्‍य महिलाएं घर की सुख-सुविधाएं छोड़कर नेताजी सुभाष बोस के साथ कदम मिलाकर चली थीं।

आज मैं कैप्‍टन लक्ष्‍मी सहगल की सहयोगी पुअन श्री कैप्‍टन जानकी अथी नाहप्‍पन को विशेष श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। वे भारतीय स्‍वतंत्रता संघर्ष की एक अन्‍य महान विभूति रानी झांसी के नाम पर रखी गई ब्रिगेड की सदस्‍य थीं।

मैं हर भारतीय की तरफ से उन सभी गुमनाम मलय-भारतियों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं जिन्‍होंने आत्‍मबलिदान किया ताकि आजाद भारत का उदय हो सके। उनके बच्‍चों और पौत्रों-नातियों को हृदय से धन्‍यवाद देता हूं।

और, आज यहां कुआलालंपूर में हम अपने भारतीय सांस्‍कृतिक केंद्र का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर रख रहे हैं।

70 वर्ष पूर्व त्रासद और घातक विश्‍व युद्ध समाप्‍त हुआ था।

मैं असंख्‍य भारतीय फौजियों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्‍होंने मलेशिया के जंगी मैदानों में अपना बलिदान दिया।

शहीद होने वाले फौजियों में सबसे अधिक संख्‍या सिखों की थी।

उनका खून हमेशा के लिए मलेशिया की मिट्टी में शामिल हो गया है। दोनों देशों के लिए युद्ध ने अहम भूमिका अदा की है। और, मलेशिया की धरती पर गिरे उनके रक्‍त ने दोनों देशों को एक अमिट बंधन में बांध दिया है।

उनकी बहादुरी और कर्तव्‍यपरायणता आज भारत में पंजाब रेजीमेंट, जाट रेजीमेंट और डोगरा रेजीमेंट की सर्वोच्‍च भावना में विद्यमान है।

हम मलेशिया की सरकार के साथ मिलकर यह विचार कर रहे हैं कि पेराक में कंपार युद्धभूमि में शहीद फौजियों की स्‍मृति में एक युद्ध स्मारक का निर्माण करें।

भाईयो और बहनो,

मलय-भारतीय एक तरफ नेताजी के आह्वान पर बहादुरी और जुनून के साथ आगे बढ़ रहे थे और उसी दौरान वे महात्‍मा गांधी के जीवन और मिशन से भी प्रेरित हो रहे थे।

मैं महात्‍मा गांधी की शहादत के कुछ वर्षों के अंदर ही ‘गांधी मेमोरियल हॉल’ बनाने के लिए सुनगई पेटानी के भारतीय समुदाय को सलाम करता हूं।

आप उनसे कभी नहीं मिले थे। महात्‍मा गांधी कभी मलेशिया नहीं आए। लेकिन, उन्‍होंने आपके हृदय को छुआ।

और, एक समुदाय के रूप में आपने मिलजुल कर अपने प्रयासों से यह स्‍मारक बनाया। उनकी स्‍मृति के सम्मान में, उनके सिद्धांतों के सम्‍मान में, उन्‍होंने भारत की मातृभूमि और मानवता के लिए जो कुछ भी किया, उसके सम्‍मान में आपने उनकी स्‍मृति में स्‍मारक का निर्माण किया।

ऐसे कुछ कार्य हैं जो बहुत हृदयस्‍पर्शी हैं : मौन श्रद्धांजलि को आप लोगों ने कार्य रूप में परिवर्तित किया और एक जीवंत स्‍मारक निर्मित किया।

और, मुझे यह घोषणा करते हुए गौरव का अनुभव हो रहा है कि हम ‘गांधी मेमोरियल हॉल’ में गांधी जी की मूर्ति स्‍थापित करेंगे।

आपका सेवा भाव भी बहुत दृढ़ है। और, 2001 में जब मेरे राज्‍य गुजरात में भूकंप आया था, तब मलय-भारतियों ने आगे बढ़कर पीड़ितों की मदद करने के लिए अपने दम पर राहत राशि एकत्र की थी।

स्‍वतंत्रता संग्राम में अपने महान योगदान से लेकर अपनी संस्‍कृति को समृद्ध बनाने तक भारत हमेशा आपके दिलों में विराजमान रहा है।

हमारे मन में आपका एक विशेष स्‍थान है।

मेरे प्‍यारे भाईयो और बहनो,

भारत की भावना आपके कार्यों में परिलक्षित होती है।

आप भारत की विविधता, भाषाओं, धर्मों और संस्‍कृतियों का प्रतिनिधित्‍व करते हैं। और, आप समरसता की भावना के साथ मिलजुल कर रहते हैं, न केवल अन्‍य मलय-भारतियों के साथ बल्‍कि सभी मलेशिया वासियों के साथ।

आपकी उपलब्‍धियों पर हमें गर्व होता है। आपने बहुत परिश्रम किया है।  आपने सम्‍मान और शान के साथ अपने जीवन को संवारा है।

और, पीढ़ी दर पीढ़ी आपने राजनीति, सार्वजनिक जीवन, सरकारी और प्रोफेशनल सेवाओं में बहुत उपलब्‍धियां अर्जित की हैं।

आपने व्‍यापार में समृद्धि हासिल की है और खेत-बागान का विकास किया है।

आपने मलेशिया को एक उत्‍कृष्‍ट आधुनिक राष्‍ट्र और आर्थिक रूप से संपन्‍न बनाने में योगदान किया है।

और, आप भारत और मलेशिया संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

मलेशिया के केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. सुब्रमण्‍यम के योगदान से यह स्‍पष्‍ट होता है। मलय-भारतीय चिकित्‍सक भी हैं, और इस तरह आज एक मलय-भारतीय इस पद पर सुशोभित है।

और, मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि एक प्रतिष्‍ठित मलय-भारतीय दातू सामी वेल्‍लु भारत और दक्षिण एशिया के सम्बंध में संरचना सहयोग के लिए विशेष दूत हैं।

मेरे प्‍यारे भाईयो और बहनो,

आप दोनों देशों के बीच मित्रता के जीते-जागते सेतु हैं।

आप भारत और मलेशिया जैसे प्राचीन देशों के बीच संपर्क के परिचायक हैं।

कोरोमंडल और कलिंग के तटों से समुद्री मार्ग के जरिए मलेशिया के साथ व्‍यापार और संस्‍कृति का आदान-प्रदान होता रहा है।

जब व्‍यापार की बात हो, तब गुजराती पीछे नहीं रह सकता है। इसलिए गुजराती भी कारोबार में शामिल हो गए हैं।

केदाह राज्‍य की बुजंग घाटी के अवशेषों में हमें तमिलनाडु के महान पल्‍लव और चोल राजवंशों का गौरव नजर आता है।

मसाला-मार्ग के जरिए हम दोनों एक-दूसरे से जुड़े थे, वहीं से हमारे भोजन में भी वही स्‍वाद आया है।

भिक्षुओं के पद चिन्‍हों में हमारे संबंध देखे जा सकते हैं, जिन्‍होंने बुद्ध की भूमि से शांति का संदेश दक्षिण-पूर्व एशिया पहुंचाया था।

यह हमारी विरासत की समृद्धि है। यही हमारे आधुनिक संपर्क की प्राचीन बुनियाद है।

आज मुझे रामकृष्‍ण मिशन जाने का और वहां स्‍वामी विवेकानंद की मूर्ति का अनावरण करने का सम्‍मान प्राप्‍त हुआ।

यह व्‍यक्‍तिगत रूप से मेरे लिए एक गहरा आध्‍यात्‍मिक क्षण था।  मुझे यह भी स्‍मरण हुआ कि एक सदी से अधिक समय पहले इसी रास्‍ते से होकर स्‍वामी विवेकानंद अमेरिका की अपनी महान यात्रा पर निकले थे।

वहां उन्‍होंने भारत की प्राचीन दृष्‍टि का उल्‍लेख करते हुए विश्‍व एकता का मर्मस्‍पर्शी संदेश दिया था। उन्‍होंने एशियाई संवेदनाओं का उल्‍लेख किया था, जो हमारे एशियाई शताब्‍दी के सपने को पूरा करने के लिए बहुत आवश्‍यक है।

आज जब विश्‍व में बड़ी चुनौतियां सामने हैं, तब मलेशिया की धरती पर उनकी मूर्ति पूरी दुनिया को वे मूल्‍य याद कराती है, जो हमारे समाजों को विभाजित करने वाली खामियों को दूर करने के लिए जरूरी हैं।

और, कल प्रधानमंत्री नजीब और मैं एक साथ ब्रिकफील्‍ड्स में लिटिल इंडिया में तोराना गेट का उद्घाटन करेंगे।

यह भारत की तरफ से मलेशिया को उपहार है और भारत के प्रसिद्ध सांची स्‍तूप की तरह बना है, जो 2000 साल पहले निर्मित किया गया था। यह विश्‍व में सर्वाधिक सम्‍मानित बौद्ध स्‍थलों में से एक है।

अत: जो भी लिटिल इंडिया आएगा उसे शांति का संदेश मिलेगा। उसे मनुष्‍यों और प्रकृति के बीच समरसता का संदेश मिलेगा तथा हमारे दो महान देशों के लोगों के बीच संबंधों का संदेश मिलेगा।

इसके अलावा मूर्ति और गेट मलेशिया की विविधता और समरसता के प्रति सम्‍मान हैं।

मेरे प्‍यारे भाईयो और बहनो,

मलेशिया की उपलब्‍धियां महान हैं। मलेशिया ने छह दशकों पहले आजादी प्राप्‍त की थी और इस देश के तीन करोड़ लोगों के पास आज गर्व करने के लिए बहुत कुछ है।

उसने गरीबी को लगभग समाप्‍त कर दिया। आज बुनियादी सुविधाएं पूरी आबादी को प्राप्‍त हैं। उसने शत प्रतिशत साक्षरता प्राप्‍त कर लिया है। और, सबको आवश्‍यकतानुसार रोजगार उपलब्‍ध है।

उसका पर्यटन क्षेत्र फल-फूल रहा है। और, उसने प्रकृति के सुंदर उपहारों को संभालकर रखा है।

उसका बुनियादी ढांचा विश्‍व स्‍तरीय है। वह ‘आसान व्‍यापार’ की श्रेणी में बहुत ऊपर है। और, पांच दशकों के दौरान उसने औसत विकास दर 6 प्रतिशत वार्षिक कायम कर रखी है।

और, बेशक यह किसी भी देश के लिए शानदार उपलब्‍धि है।

मलेशिया का एक प्रसिद्ध पर्यटन सूत्र-वाक्‍य है : ‘मलेशिया, वास्‍तविक एशिया’

मलेशिया इस कसौटी पर खरा उतरता है, वहां अनेकता में एकता मौजूद है, वहां परंपरा और आधुनिकता का शानदार मेल है, वहां नवाचार और मेहनत है तथा वहां क्षेत्र में शांति के लिए कार्य किया जाता है।

मित्रो,

आपके वतन भारत ने आजादी के बाद उल्‍लेखनीय उपलब्‍धियां हासिल की हैं।

भारत राष्‍ट्र को उपनिवेश ने कमजोर किया, आजादी के समय देश ने विभाजन सहा।

यह देश अद्वितीय विविधता और विशाल सामाजिक तथा राजनैतिक चुनौतियों का देश है।

सवाल किया जाता था कि क्‍या यह नवजात राष्‍ट्र विकसित भी हो पाएगा ?  कुछ लोग उसका विकास नहीं चाहते थे।

आज भारत न सिर्फ एक है बल्‍कि अपनी विविधता से मजबूती भी हासिल करता है।

ऐसे कई देश हैं, जहां शुरुआत में लोकतंत्र की बड़ी उम्‍मीदें थी, लेकिन वे सारी उम्‍मीदें धरी की धरी रह गईं।

भारत एक गौरवशाली लोकतांत्रिक राष्‍ट्र है। यहां 1.25 अरब लोगों को मताधिकार प्राप्‍त है।

यह एक युवा देश है, जहां 80 करोड़ युवा 35 वर्ष से कम आयु के हैं।

यह ऐसा राष्‍ट्र है जहां सभी नागरिकों को संविधान के तहत समान अधिकार प्राप्‍त हैं, जिनकी अदालतें और सरकार सुरक्षा करती हैं।

हमने कई उपलब्‍धियां प्राप्‍त की हैं। हम खाद्यान, फल, सब्‍जी और दूध के अग्रणी उत्‍पादक हैं।

हमारे वैज्ञानिक लगातार प्रयास कर रहे हैं कि लोगों की जीवन शैली में सुधार हो। इसके लिए वे अंतरिक्ष अनुसंधान भी कर रहे हैं।

हमने ऊर्जा और चिकित्‍सा के लिए परमाणु शक्‍ति की महारत हासिल कर ली है।

हम टीकों और दवाओं को विकसित कर रहे हैं ताकि स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं गरीब से गरीब लोगों तक पहुंच सकें।

हमारे यहां विश्‍व में सर्वश्रेष्‍ठ सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ तैयार होते हैं।

हमारे यहां दुनिया में सेवाएं देने के लिए डॉक्‍टर और इंजीनियर तैयार होते हैं।

और, हम ऐसे उत्‍पाद बना रहे हैं जो विश्‍व बाजार में पहुंच रहे हैं।

हमारे विदेशी संबंध विश्‍व में शांति स्‍थापित कर रहे हैं।

भारतीय सशस्‍त्र बल क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता में योगदान करते हैं। वे बिना राष्‍ट्रीयता पूछे सभी मानवीय आपदाओं में सहायता करते हैं।

और, हमारे सशस्‍त्र बल पूरी दुनिया में शांति मिशनों में हिस्‍सा लेते हैं।

हमें यहां तक लाने के लिए हम अपने नेताओं की पिछली पीढ़ियों को धन्‍यवाद देते हैं।

लेकिन, हमें पता है कि हमें अभी बहुत दूर जाना है। हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और जिन लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने का प्रयास कर रहे हैं, उन्‍हें गांवों और शहरों में देखा जा सकता है।

मेरी सरकार को परिवर्तन के लिए जनादेश मिला है:

हम अपने लोगों को आधुनिक अर्थव्‍यवस्‍था के लाभ पहुंचा रहे हैं, बैंक और बीमा तक उनकी पहुंच बना रहे हैं और इस तरह गरीबी का उन्‍मूलन कर रहे हैं। हम लोगों को केवल अंतहीन कार्यक्रमों से बांध नहीं रहे हैं।

दुनिया में किस जगह चंद महीनों में ही एक करोड़ 90 लाख बैंक खाते खुले हैं ?

हम लोगों को कौशल और शिक्षा के जरिए सशक्‍त बना रहे हैं।

हम ऐसा माहौल बना रहे हैं, जहां उद्योग फले-फूलें और लोगों को अपनी आय बढ़ाने के अवसर मिलें।

हम ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार कर रहे हैं जहां लोगों को छत, पानी, स्‍वच्‍छता, बिजली, स्‍कूल और चिकित्‍सा जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलें और इन सुविधाओं तक सबकी पहुंच हो।

हम व्‍यापार बढ़ा रहे हैं। और, हम एक राष्‍ट्रीय डिजीटल संरचना तैयार कर रहे हैं ताकि विचारों, सूचनाओं और संपर्क, व्‍यापार, नवाचार का साईबर स्‍पेस में मुक्‍त प्रवाह संभव हो सके।                             

   हम अपनी रेल को देश में एक नई आर्थिक क्रांति का वाहक बना रहे हैं। और, हम अपने बंदरगाहों एवं हवाई अडडों को समृद्धि के मार्ग में रूपांतरित कर रहे हैं।
और, हमने अपने नगरों को स्‍वच्‍छ एवं स्‍वस्‍थ बनाने, अपनी नदियों का पुनर्निमाण करने और हमारे गांवों को रख-रखाव करने का संकल्‍प किया है।
और, हम प्रकृति के खजानों को पर्यटकों के लिए आनंद उठाने तथा भविष्‍य की पीढियों को दिखाने के लिए संरक्षित रखेंगे।
और, यह सारा कुछ आसान नहीं है। आखिर हम 1.25 अरब लोगों, 500 से अधिक बडे नगरों और छह लाख गांवों की बात कर रहे हैं।
लेकिन, हमें भारतीयों की प्रतिभा एवं उद्यम में विश्‍वास है। हमें अपने लोगों के संयुक्‍त हाथों की ताकत में भरोसा है।
इसलिए, ऐसा हो रहा है। परिवर्तन के चक्र ने घूमना प्रारंभ कर दिया है। और अब उसमें गति आ रही है।
और, यह आंकडों में प्रदर्शित होना शुरू हो गया है।
भारत आज विश्‍व में सबसे तेज गति से बढने वाली अहम अर्थव्‍यवस्‍था है। मैं जानता हूं कि आपको इस पर गर्व महसूस होता है।
हमारी आर्थिक विकास दर 7.5 फीसदी की है पर आगे आने वर्षों में इसमें और तेजी आएगी।
विश्‍व के प्रत्‍येक प्रमुख संस्‍थान ने भारत की तेज विकास दर पर अपना दांव लगा रखा है। ऐसा उस समय है जब इस क्षेत्र के कुछ हिस्‍सों समेत दुनिया के शेष देश मंदी से जूझ रहे हैं।
नगरों में एक परिवर्तन है। गांवों में गति दिख रही है। और, हमारे नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं में आत्‍म विश्‍वास दिख रहा है।
और जिस प्रकार से सरकार काम कर रही है, उसमें भी बदलाव दिख रहा है।
हम सरकार को पारदर्शी और जबावदेह बना रहे हैं। हम सभी स्‍तरों से भ्रष्‍टाचार को समाप्‍त कर रहे हैं। हम सरकार को नीतियों और प्रणालियों से चला रहे हैं, व्‍यक्ति विशेषों के निर्णयों से नहीं।
हम सरकार और नागरिकों के एक दूसरे से संपर्क करने के तरीके में बदलाव ला रहे हैं। और केंद्र तथा राज्‍य सरकारें एक दूसरे के साथ मिल कर काम कर रही हैं।
राज्‍य अब एक दूसरे के साथ प्रतिस्‍पर्धा कर रहे हैं। यह स्‍वस्‍थ प्रवृत्ति है।
मेरे प्‍यारे भाईयों,
हम एक अंत:निर्भर विश्‍व में रहते हैं। दूर के किसी देश में क्‍या होता है, उसका प्रभाव अन्‍य स्‍थान पर श्रमिकों की आजीविका पर पड सकता है।
संयुक्‍त राष्‍ट्र या विश्‍व व्‍यापार संगठन के सम्‍मेलन कक्ष में लिए जाने वाले फैसले भारत के किसी गांव में एक किसान के जीवन को प्रभावित कर सकते हैं।
दुनिया के एक हिस्‍से की जीवन शैली विश्‍व के दूसरे हिस्‍से में जलवायु एवं कृषि को प्रभावित करती है।
हमें एक दूसरे के बाजारों एवं संसाधनों की आवश्‍यकता है।
इसलिए, हमारी राष्‍ट्रीय प्रगति हमारे अंतरराष्‍ट्रीय साझीदारों की ताकत एवं सफलता पर निर्भर करेगी।
हमें मित्रों एवं साझीदारों को ढूंढने  के लिए दूर जाने की आवश्‍यकता नहीं है।
दक्षिण पूर्व एशिया जमीन एवं समुद्र में हमारा पडोसी है। यह दुनिया के सबसे गतिशील एवं शांतिपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। यह संस्‍कृति, प्रतिभा, उद्यम एवं कडी मेहनत का क्षेत्र है।
भारत के सभी दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ शानदार संबंध हैं।
हमारी आसियान के साथ एक मजबूत साझीदारी है। मैं अभी तुरंत भारत-आसियान सम्‍मेलन में भाग लेकर आया हूं।
यही वह क्षेत्र है जहां हमारे सभी आर्थिक संबंध तेजी से बढ रहे हैं। और यह सर्वाधिक संख्‍या में भारतीय पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
मित्रों,
मुझे यह कह कर प्रसन्‍नता हो रही है कि मलेशिया हमारे सबसे मजबूत साझीदारों एवं क्षेत्र के हमारे सबसे घनिष्‍ठ मित्रों में से एक है।
बुनियादी ढांचा क्षेत्र में मलेशिया की कंपनियां शानदार हैं। मलेशिया के बाहर उनकी सबसे अधिक उपस्थिति भारत में है।
मलेशिया के निवेशक विश्‍व के दूसरे सबसे बडे दूरसंचार बाजार – भारत में उपस्थित हैं।
भारतीय कंपनी इरकॉन मलेशिया के रेल बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में मदद कर रही है।
मलेशिया में भारत की 150 से अधिक कंपनियां हैं। यहां भारत की आईटी क्षेत्र की 50 से अधिक कंपनियां हैं।
मलेशिया आसियान में हमारे सबसे बडे व्‍यापारिक साझीदारों में से एक है, लेकिन हमें इसे और अधिक बढाने की आवश्‍यकता है।
भारत मलेशिया में पर्यटकों के सबसे बडे स्‍त्रोतों में से एक है। प्रत्‍येक सप्‍ताह भारत और मलेशिया को 170 हवाई उडानें जोडती हैं।
आयुर्वेद एवं यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्‍सा पद्धति में हमारी सबसे अच्‍छी साझीदारियों में से एक मलेशिया के साथ है।
हम अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए भी घनिष्‍ठतापूर्वक साथ मिल कर काम करते हैं।
हमारे मजबूत प्रतिरक्षा संबंध हैं। भारतीय वायु सेना ने दो वर्षों तक मलेशिया की वायु सेना में अपने साझीदारों को प्रशिक्षित किया है।
हम वायु एवं जमीन तथा समुद्र में जो कि हमारा नभ है, एक साथ मिल कर अभ्‍यास करते हैं।
हमारी सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद के खिलाफ साथ मिल कर काम करती हैं। मैं मलेशिया सरकार को हमारे मजबूत सुरक्षा सहयोग के लिए धन्‍यवाद देना चाहता हूं।
आतंकवाद आज विश्‍व में सबसे बडा संकट है। इसकी कोई सीमा नहीं है। यह लोगों को अपने ध्‍येय के लिए उकसाने में धर्म के नाम का इस्‍तेमाल करता है। लेकिन यह गलत है।
और, यह सभी धर्मों के लोगों को मारता है। हमें धर्म को आतंक से अलग करना होगा।
अंतर केवल ऐसे लोगों के बीच है जो मानवता में विश्‍वास करते हैं और जो नहीं करते हैं।
मैंने पहले भी यह कहा है और अब भी यहां यह कहूंगा। विश्‍व को निश्चित रूप से हमारे समय की इस सबसे बडी चुनौती का सामना एक साथ मिल कर करना होगा।
हम खुफिया सहयोग को मजबूत बना सकते हैं। हम सैन्‍य बल का उपयोग कर सकते हैं। हम मजबूत सहयोग के लिए अंतरराष्‍ट्रीय कानूनी प्रणाली का निर्माण कर सकते हैं।
लेकिन जब मैं कहता हूं कि विश्‍व को अनिवार्य रूप से एक साथ मिल कर काम करना चाहिए, तो यह केवल सुरक्षा सहयोग के लिए नहीं है।
इसका अर्थ यह सुनिश्चित करना भी है कि कोई भी देश आतंकवाद का इस्‍तेमाल न करे या उसे बढावा न दे। कोई शरण स्‍थली न हो। कोई वित्‍त पोषण न हो। कोई हथियार न हो।
लेकिन हमें अपने समाजों के भीतर काम करना होगा तथा युवाओं के साथ मिलकर काम करना होगा। हमें अभिभावकों, समुदायों एवं धार्मिक विद्वानों के समर्थन की जरूरत है। और हमें यह सुनिश्चित करना है कि इंटरनेट भर्ती का आधार न बन सके।
हमें अपने क्षेत्र में शांतिपूर्ण संबंधों, आपसी समझदारी एवं परस्‍पर सहयोग को बढावा देना है। शांति ही एक समृद्ध भविष्‍य का एकमात्र आधार है।
हमारे कई समान हित एवं साझा चुनौ‍तियां हैं। इसलिए, क्षेत्र के सभी देश, चाहे वे बडे हों या छोटे, को यह सुनिश्चित करने के लिए एक साथ मिल कर काम करना चाहिए कि हमारे राष्‍ट्र सुरक्षित रहें, हमारे समुद्र सुरक्षित एवं व्‍यापार के लिए मुक्‍त रहें और हमारी अर्थव्‍यवस्‍थाएं प्रगति करें।
मित्रों,
मैं हमारे संबंधों को और आगे ले जाने के लिए कल महामहिम प्रधानमंत्री नजीब के साथ मुलाकात करूंगा।
भारत और मलेशिया को घनिष्‍ठ संबंधों से काफी लाभ प्राप्‍त होगा।
हम जो कुछ करना पसंद करेंगे, आप इसका हिस्‍सा होंगे।
आप भारत और मलेशिया के बीच के संबंधों में और अधिक प्राण और ताकत का संचार करेंगे।
हम प्रगति की ओर भारत की यात्रा और इस विशेष संबंध को और आगे ले जाने में हमेशा आपके सहयोग की कामना करेंगे।
लेकिन हम उस प्रेम एवं स्‍नेह को और अधिक महत्‍व देते हैं जो हमें एक साथ बांधे रखता है। क्‍योंकि यह अमूल्‍य है और मूल्‍य के किसी भी माप के बाहर है।
आपने दूरी एवं विनियमनों की कठिनाइयों के बावजूद हमसे संपर्क बनाए रखा। आप हमारी धरोहर की खिडकी हैं और हमारी प्रगति के प्रतिबिंब हैं।
आप भारत और आपके देश के बीच के सेतु हैं।
आप भारत में परिवारों एवं समुदायों का समर्थन करते हैं। आप में से कई लोग एक बच्‍ची को उसके स्‍कूल का रास्‍ता ढूंढने और एक मां को स्‍वास्‍थ्‍य की सुविधा प्रदान करने में मदद करते हैं।
आप ऐसा किसी पुरस्‍कार को पाने या सुर्खियां बटोरने की लालसा के बगैर करते हैं। इसलिए हमें अवश्‍य ही वह करना चाहिए जो हम आपके लिए कर सकते हैं।
हमने ओसीआई एवं पीआईओ कार्डों का विलय कर दिया है और वीजा को जीवन पर्यंत बना दिया है। इसके अतिरिक्‍त, भारतीय मूल का चौथी पीढी तक का युवा अब ओसीआई के लिए योग्‍य है। यह खासकर, मलय भारतीयों जैसे लोगों के लिए मददगार है जिनके पूर्वज यहां कई पीढी पहले आए थे।
अब अवयस्‍क बच्‍चे, जो विदेशी नागरिक हैं तथा विदेशी पति या पत्‍नी भी ओसीआई दर्जा प्राप्‍त कर सकते हैं।
हमने ई-वीसा लागू किया है जिसने यात्रा को और सरल बना दिया है।
यहां, मलेशिया में हमने नौ वीसा संग्रह केंद्रों की स्‍थापना की है। श्रमिकों के लिए कुछ खास देशों में जाने को सुरक्षित एवं सरल बनाने के लिए एक ई-माइग्रेट पेार्टल बनाया गया है। यह अधिकारियों को विदेशी नियोक्‍ताओं के बारे में भी सावधान करता है जिनके खिलाफ मामले लंबित हैं।
विदेशों में मुसीबतग्रस्‍त भारतीय महिलाओं की मदद करने के लिए एक भारतीय समुदाय कल्‍याण कोष तथा निधि भी है।
कई बार भारत से आने वाले श्रमिकों को यहां कठिनाइयों का सामना करना पडता है। उनकी सुरक्षा एवं उनका कल्‍याण हमारी मुख्‍य चिंताओं में से है।
पिछले वर्ष, हमने 8,000 से अधिक भारतीय श्रमिकों को सुरक्षित देश लौटने में मदद की।
मलेशिया में, 1954 में ऐसे मलेशियाई-भारतीय छात्रों को वित्‍तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक भारत-छात्र ट्रस्‍ट फंड की स्‍थापना की गई थी जिनके पास पढने के लिए कोई साधन नहीं था।
इस फंड की जरूरत मलेशिया में भारतीय समुदाय के एक वर्ग को अभी भी है। हमें ट्रस्‍ट फंड की राशि के अतिरिक्‍त, लगभग 10 लाख डॉलर की मंजूरी की घोषणा करने में खुशी हो रही है।
आपके हजारों बच्‍चे डॉक्‍टर बनने के लिए भारत जाते हैं। हालांकि डॉक्‍टर हमारे समाजों के लिए एक अहम आवश्‍यकता हैं, मैं उम्‍मीद करता हूं कि आपको अन्‍य क्षेत्रों में भी शिक्षा पाने का अवसर प्राप्‍त होगा।
भारत एवं मलेशिया को हमारे दोनों देशों द्वारा प्रदत्‍त डिग्रियों को तत्‍काल मान्‍यता देनी चाहिए। प्रधानमंत्री नजीब के साथ मुलाकात के दौरान मैं इस मुद्दे को उठाने की भी उम्‍मीद करता हूं।
निष्‍कर्ष के रूप में, मुझे कहने दीजिए कि आपके मूल्‍यों, समाज में आपके रहने के तरीके एवं आपकी उपलब्धियों को लेकर हम कितना गौरवान्वित महसूस करते हैं। चुनौतियां हमेशा बनी रहती हैं लेकिन वहां सपने भी रहते हैं।
और आगे आने वाली हरेक पीढी का निर्धारण उनकी सफलताओं से होता है न कि उनकी चुनौतियों से।
इसलिए, मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप अपने लिए, मलेशिया के लिए और हमारे दोनों देशों के लिए अपने सपनों को पालें।

मैं मानवता के एक बडे प्रतीक, भारत के एक महान पुत्र के शब्‍दों के साथ आपसे विदा लेना चाहता हूं जो तमिलनाडू के तट से आया था।
आधुनिक भारत के जनकों में से एक, पूर्व राष्‍ट्रपति स्‍वर्गीय एपीजे अब्‍दुल कलाम यहां 2008 में आए थे।
वह यहां बार बार आना चाहते थे, लेकिन ईश्‍वर की इच्‍छा कुछ और थी। पर उनका जीवन, उनके संदेश और उनके सपने हमेशा ही प्रेरणा के स्‍त्रोत बने रहेंगे।

उन्‍होंने कहा, ‘ विशेष रूप से युवा पीढी को मेरा संदेश यह है कि वे अलग हट कर सोचने की हिम्‍मत करें,
अन्‍वेषण करने, जिस राह पर कोई नहीं गया, वहां जाने की हिम्‍मत करें,

असंभव की खोज करने की हिम्‍मत करें, और समस्‍याओं को जीतने की हिम्‍मत करें तथा सफलता पाएं।
इसलिए, अपनी सफलता में याद रखें कि आपके लिए प्रसन्‍न और गौरवान्वित होने वाले केवल मलेशिया के लोग नहीं हैं बल्कि 1.25 अरब भारतीय भी हैं।

भगवान आप पर कृपा करे। धन्‍यवाद
वनक्‍कम, नमस्‍ते। 

पढ़िए डबलिन में प्रधानमंत्री मोदी का बेहद आत्मीय भाषण


आयरलैंड में बसे सभी भारतीयों को नमस्‍कार, 

मुझे सबसे पहले तो आप सबकी क्षमा मांगनी है, क्षमा इसलिए मांगनी है कि मुझे आपको ज्‍यादा time देना चाहिए था। बहुत लोगों की शिकायत है कि हमें आने के लिए admission नहीं मिला, प्रवेश नहीं मिला। अच्‍छा होता मैं जरा ज्‍यादा समय लेकर आया होता, तो यहां बसे हुए भारतीयों को बहुत बड़ी संख्‍या में मिल पाता। लेकिन मैं इतना कहूंगा कि यह शुभ शुरूआत है। आप में से बहुत लोग ऐसे होंगे, शायद बहुत कम ऐसे होंगे, जिनको यह याद होगा कि कभी भारत के प्रधानमंत्री यहां आएं थे। क्‍योंकि मुझे बताया गया कि करीब 60 साल के बाद भारत के कोई प्रधानमंत्री यहां आए हैं। वैसे दिल्‍ली से न्‍यूयॉर्क तो हर बार जाना पड़ता है और आकाश में तो यहीं से गुजरते हैं। तो आप लोगों के प्‍यार ने मुझे खींच लिया, तो ऊपर से मैं नीचे आ गया। 

आज मेरी यहां के प्रधानमंत्री के साथ बड़ी विस्‍तार से बातें हुई है। अब बहुत समय कम था, लेकिन meeting बहुत बढि़या रही, इतने विषयों पर चर्चा हुई है। कितनी बातों पर सहमति का माहौल है। मैं समझता हूं कि आयरलैंड के साथ भारत के संबंध और अधिक गहरे होने चाहिए। अनेक विषयों के साथ जुड़े हुए होने चाहिए। और 2016 में आयरलैंड अपनी आजादी की शताब्‍दी मना रहा है, आजादी के संघर्ष की शताब्‍दी मना रहा है। भारत भी उसी समय आजादी का संघर्ष कर रहा था और एक प्रकार से भारत भी आजादी की लड़ाई लड़ता था, आयरलैंड भी आजादी की लड़ाई लड़ता था और सच में यह हमारी सांझी विरासत है। हम सोच रहे है कि यह 2016 का, आयरलैंड का आजादी का जो संग्राम है, इस शताब्‍दी में भारत भी भागीदार बने, भारत भी आयरलैंड हो। 

आयरलैंड और भारत की जो विशेषताएं हैं कुछ मूल्‍य बहुत किसी न किसी कारण से, एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जैसे भारत में सत्‍य के लिए जीना-मरना। यह सदियों से हम सुनते आए हैं। एक आदर्श के लिए, विचार के लिए बलि चढ़ जाना। खुद को कष्‍ट देते हुए जीवन को समाप्‍त कर देना। यह हम सदियों से सुनते आए हैं, लेकिन कहते हैं 1920 में आयरलैंड में Hunger Strike हुआ और यहां के नागरिक ने अपना जीवन समर्पित कर दिया था। यानि values हमारे कितने मिलते-जुलते होंगे, इसका अंदाजा लगा सकते हो आप। मानवता से जुड़ी हुई इन बातों में अपनी एक ताकत है। और हमारी कोशिश यही है उन्‍हीं चीजों को हम बल दे। 

अब Irish बच्‍चे संस्‍कृत में मंत्रोच्‍चार कर रहे हैं, स्‍वागत गान गा रहे हैं। और वे रटे-रटाए शब्‍द बोल रहे थे, ऐसा मुझे नहीं लगा। किस शब्‍द में उनका क्‍या भाव था, वो भी अभिव्‍यक्‍त हो रहा था, मतलब उन्होंने इस बात को internalise कर लिया था। उनके जो भी शिक्षक इस काम को करते होंगे, मैं उनको बधाई देता हूं। लेकिन ये खुशी की बात है आयरलैंड में तो हम ये कर सकते हैं, लेकिन हिंदुस्तान में कुछ ऐसा करते तो पता नहीं, secularism पर सवालिया निशान खड़ा हो जाता। 

लेकिन इन दिनों बदलाव आ रहा है। आप देखिए योग, दुनिया उसको योगा कहती है। सारी दुनिया नाक पकड़ने लग गई है। विश्व के सभी देशों ने अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस मनाया। भारत के ये हजारों साल पुराना विज्ञान, आज holistic health care के लिए, preventive health care के लिए, एक बहुत बड़ी स्वीकार्य, स्वीकृत पद्धति के रूप में पूरे विश्व में फैल चुका है। और पहले हमारे यहां कल्पना क्या थी, अगर illness नहीं है, तो आप स्वस्थ हैं, अब ये विचार भारतीय चिंतन का नहीं है। illness नहीं, मतलब स्‍वस्‍थ! ये हमारी सोच नहीं है। हम उससे दो कदम आगे wellness की चर्चा करते हैं। हमारी कल्‍पना wellness थी और यही योगा उस wellness से जुड़ा हुआ है। सिर्फ रोग से मुक्‍त है, इसलिए आप स्‍वस्‍थ है ऐसा नहीं है। तो भारत की मूल बातें विश्‍व स्‍वीकार करने लगा है, लेकिन दुनिया तब स्‍वीकारती है जब भारत में दम हो। अगर भारत में दम नहीं हो, तो दुनिया क्‍यों पूछेगी भाई। 

आज पूरे विश्‍व में भारत के विकास की चर्चा हो रही है। 21वीं सदी ‘एशिया की सदी’, यह सारी दुनिया ने मान लिया है। लेकिन 21वीं सदी ‘एशिया की सदी’, फिर धीरे-धीरे देखते हैं, तो उनको लगता है यार हो सकता है हिंदुस्‍तान की हो जाए। यह दुनिया मानने लगी। 

एक BRICS concept आया 1980s में Brazil, Russia, India, South Africa, China, BRICS शब्‍द popular होगा। लेकिन कुछ वर्ष पहले कि B, R,C, S इनकी तो गाड़ी पटरी पर है। आई (I) जो है वो लुढ़क गया है। ऐसी चर्चा थी और लोग यहां तक कहते थे, शायद I (आई) इंडिया की जगह, I (आई) इंडोनेशिया ले लेगा। यह चर्चा थी। आज World Bank हो IMF हो Credit Rating Agencies हों, सब कह रहे हैं कि BRICS में अगर कोई ताकत वाला है, तो I (आई) है। सारी दुनिया की rating agencies कह रही है कि भारत दुनिया के बड़े देशों की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली economy है, सबसे तेज, पूरी दुनिया में। 

अगर यह सिलसिला और आगे बढ़ा और ज्‍यादा नहीं 30 साल, 30 साल अगर हम इस ऊँचाई पर चलते रहे, तो हिंदुस्‍तान में गरीबी का नामो-निशान नहीं रहेगा। नौजवान को रोजगार मिलेगा, लेकिन 30 साल तक इस गति को बनाए रखना यह बहुत बड़ी चुनौती है। लेकिन यह चुनौती हम पार कर पाएंगे, क्‍योंकि हम एक ऐसी ताकत के कालखंड में हैं, जिसकी हमने कभी कल्‍पना तक नहीं की है। और वो है 65 प्रतिशत जनसंख्‍या हिंदुस्‍तान की, 35 साल से कम उम्र की है। भारत नौजवान है, भारत नौजवानों का है और भारत नौजवानों की ताकत पर बनने वाला है। यह जो सामर्थ्य मिला है, यह next 30 years का सपना पूरा कर सकता है। 

देश विकास की नई ऊंचाईयों को पार कर रहा है। सभी क्षेत्रों में देश को आगे बढ़ाने के लिए सफल बनाने के प्रयास हो रहे हैं। और विश्‍वभर में फैले हुए भारतीय जन भी आज सीना तान करके, आँख में आँख मिला करके दुनिया के साथ भारत की बात करने लगे हैं। इससे बड़ा गर्व क्या हो सकता है। अब किसी भारतीय को सर झुकाने के दिन नहीं हैं, सीना तानकर के खड़े रहने का दिन है। और यही बड़ी ताकत होती है, यही बड़ी ताकत होती है। 

मैं आप सबको मुझे मिलने का मुझे अवसर मिला, मैं आपका बहुत ही, और इस समय में भी क्योंकि मेरा कार्यक्रम बहुत कम समय में बना। इतनी बड़ी संख्या में आप लोग आए और मुझे आपके Ambassador कह रहे थे कि, इतनी मारामारी चल रही है कि हम किस को रोके, किसको लाएं, ज्यादा समय मिला होता तो अच्छा होता, लेकिन फिर भी मैंने पहले कहा है ऐसे कि ये एक शुभ शुरुआत है, ये रिश्ता और...और नाता जुड़ता रहेगा और भारत के प्रधानमंत्री को यहां आने में अब 60 साल नहीं लगेंगे, ये मैं विश्वास दिलाता हूं आपको। 

बहुत-बहुत धन्यवाद। 

नजरबायेव यूनीवर्सिटी, अस्टाना, कजाख्स्तान में प्रधानमंत्री का पूरा संबोधन

प्रधानमंत्री करीम मोसीमोव,

यूनीवर्सिटी के प्रेसिडेंट श्री शिजो कात्सू,

छात्रो और गणमान्य अतिथियो,

मैं आपके बीच यहां आकर प्रसन्नता महसूस करता हूं।

माननीय प्रधानमंत्रीजी, मैं आज यहां आपकी उपस्थिति से काफी सम्मानित महसूस कर रहा हूं। आप एक विद्वान और कई प्रकार की प्रतिभाओं वाले व्यक्ति हैं। आज मुझे पता चला है कि हिन्दी और योगा में आपके कौशल भी उनमें शामिल हैं।

मध्य एशिया के सभी पांच देशों की यात्रा पर होना एक बड़ी बात है। ऐसा हो सकता है कि यह पहली बार हुआ हो।

मैं सचमुच ऐसे महान देश और महान क्षेत्र की यात्रा के लिए उत्सुक हूं जिसे मानव इतिहास का इंजन कहा गया है।

यह सौन्दर्य और सांस्कतिक विरासत के साथ-साथ विशिष्ट उपलब्धियों और महान वीरता की धरती है।

यह एक ऐसा क्षेत्र भी है जो मानव सभ्यता की शुरुआत से लेकर भारत के साथ निरंतर जुड़ा रहा है।

इसलिए मैं एक पड़ोसी के रूप में इतिहास और सद्भावना के आकर्षण के साथ एक प्राचीन संबंध में एक नया अध्याय लिखने के लिए यहां आया हूं।    

जैसा कि मैंने मध्य एशिया के लोगों से कहा है, आज रात मैंने नजरबायेब यूनीवर्सिटी से बेहतर स्थान चुनना जरूरी नहीं समझा है।

एक छोटे समय में यह एक विशिष्ट शिक्षा केन्द्र के रूप में उभरा है। और, इस वर्ष यहां से उत्तीर्ण होने वाले सबसे बैच को मैं बधाई देता हूं।

यह यूनीवर्सिटी राष्ट्रपति नजरबायेब के दृष्टिकोण को दर्शाता है कि शिक्षा राष्ट्र की प्रगति और नेतृत्व की आधारशिला है।

यह कजाख्स्तान के महान लेखक अबाई कुनानबायेव की याद दिलाता है, जिन्होंने कजाख्स्तान के लोगों के लिए शिक्षा को एक ढाल और स्तम्भ माना था।

आज कजाख्स्तान को एक वैश्विक दर्जे के राष्ट्र के रूप में सम्मान मिलता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रकृति माता ने आपको प्रत्येक तरह के संसाधनों से उदारतापूर्वक परिपूर्ण किया है।

शिक्षा, मानवीय संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में आपके निवेश के फलस्वरूप ऐसा संभव हुआ है। इससे पिछले दस वर्षों में अर्थव्यवस्था को चार गुणा बढ़ाने में मदद मिली है।

शांति के लिए आपकी अगुवाई और महान यूरेशियाई क्षेत्र में सहयोग के बल पर यह संभव हुआ है।

आपके दृष्टिकोण से हमें एशिया में वार्ता के लिए सम्मेलन और विश्वास कायम करने की प्रेरणा मिली है।

कजाख्स्तान संयुक्त राष्ट्र सहित अंतर्राष्ट्रीय मंचों में उत्तरदायित्व और परिपक्वता की एक आवाज है।  

वर्ष 2011-12 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता के लिए भारत के प्रयासों में कजाख्स्तान की उदारता को कोई भारतीय नहीं भूल सकता है। वर्ष 2017-18 में हम आपके प्रयासों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़े हैं।

कजाख्स्तान की तरह ही मध्य एशिया का शेष हिस्सा भी उन्नति कर रहा है। इन देशों ने मात्र दो दशक से थोड़े अधिक समय पहले स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद अपनी पहचान बनाई है।

मध्य एशिया के देशों को मानवीय और प्राकृतिक संसाधन प्रचुरता से मिले हैं।

मैं यहां ताशकंद से होते हुए आ रहा हूं। उज्बेकिस्तान में आर्थिक विकास और प्रगति की गति तेज है। तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गीस्तान अपने संसाधनों के बल पर भविष्य में बेहतर समृद्धि की ओर अग्रसर हैं।

आपने एक ऐसे समय में एक आधुनिक, समावेशी और बहुलवादी राष्ट्रों का निर्माण किये हैं, जब बहुत से क्षेत्र विवाद और उथल-पुथल में उलझे हैं।

क्षेत्र के लिए आपकी सफलता का उतना ही महत्व है जितना की विश्व के लिए।

मध्य एशिया यूरेशिया के चौराहे पर खड़ा है। यह इतिहास की धारा में फंसा है तथा इसने इसका आकार भी तय किया है।

इसने साम्राज्यों का उथान और पतन देखा है। इसने व्यापार को फूलते-फलते और गिरते हुए भी देखा है।

साधु-संतों, व्यापारियों और सम्राटों के लिए यह एक गंतव्य और मार्ग दोनों रहा है।

यह पूरे एशिया की संस्कृति और मतों का एक मध्यस्थ रहा है।

आपने मानव सभ्यता को काफी उपहार दिये हैं। मानवीय प्रगति पर आपकी अमिट छाप है।

और, पिछले दो हजार वर्षों से भी अधिक समय में भारत और मध्य एशिया ने एक-दूसरे को काफी प्रभावित किया है।

शदियों से विश्व के इस हिस्से में बौद्ध धर्म फूला-फला है और इसने भारत में बौद्ध कला को भी प्रभावित किया है। यहां से शुरू होकर यह पूरब की ओर फैला है।

इस मई में मैंने मंगोलिया स्थित गेंडन मोनास्ट्री की यात्रा की थी जो मुझे पूरे एशिया को जोड़ने वाली यात्रा लगी।

भारतीय और इस्लामिक सभ्यताओं का मिलन मध्य एशिया में हुआ। हमने ने केवल अपने अध्यात्मिक विचारों से उन्हें समृद्ध बनाया बल्कि औषधि, विज्ञान, गणित और खगोल विज्ञान से भी।

भारत और मध्य एशिया दोनों की इस्लामी विरासत इस्लाम के सर्वश्रेष्ठ आदर्शों-ज्ञान, दया, अनुकम्पा और कल्याण द्वारा परिभाषित है। यह एक ऐसी विरासत है जो प्रेम और निष्ठा के सिद्धांत पर आधारित है। और, इसने हमेशा उपद्रवी तत्वों को खारिज किया है।

आज, यह एक ऐसी महत्वपूर्ण शक्ति का स्रोत है जो भारत और मध्य एशिया को एक साथ जोड़ता है।

हमारे संबंधों की मजबूती, हमारे नगरों की आकृतियों और हमारे दैनिक जीवन के विभिन्न रूपों में अंकित है। हम इसे वास्तुकला और कला के साथ-साथ हस्तशिल्प और वस्त्रों तथा अधिकांश लोकप्रिय व्यंजनों में देखते हैं।

दिल्ली की दरगाहों में सूफी संगीत की ध्वनि सभी मतों के लोगों को अपनी ओर खींचती है।

पूरी दुनिया में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए एक साथ आने से काफी पहले मध्य एशिया के नगर योगा और हिन्दी के केन्द्र बन गये थे।

उज्बेकिस्तान ने हाल में हिन्दी में आकाशवाणी के प्रसारण के 50 वर्ष पूरे किये हैं। रामायण और महाभारत जैसे हमारे महाकाव्य उज्बेक टेलीविजन पर उतने लोकप्रिय हैं, जितना कि भारत में।

आपमें से बहुत से लोग नवीनतम बॉलीवुड फिल्म के रिलीज होने की उतनी ही उत्सुकता से प्रतीक्षा करते हैं, जितना कि भारत के लोग।

यह हमारे दोनों देशों के लोगों के बीच सद्भावना का स्रोत है। यह दिलों और भावनाओं के संबंधों की आधारशिला है। और, इसे केवल व्यापार अथवा राज्यों की मांगों द्वारा मापा नहीं जा सकता।

अपने राष्ट्रों की स्वतंत्रता के शीघ्र बाद राष्ट्रपति नजरबायेव और मध्य एशियाई गणराज्यों के अन्य नेताओं के भारत आने से भी यह प्रमाणित होता है।

तब से लेकर हमारे राजनीतिक संबंध मजबूत हुए हैं। रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में हमारा सहयोग बढ़ रहा है।

हमारा व्यापार बढ़ रहा है, किंतु अभी भी कम है। ऊर्जा क्षेत्र में हमारा सहयोग शुरू हो गया है। बाद में आज हम भारत के निवेश से उज़्बेकिस्तान में पहले तेल कुएं की खुदाई शुरू करेंगे।

मध्य एशिया में भारतीय निवेशों का प्रवाह शुरू हो गया है। साथ ही, भारतीय पर्यटकों का आगमन भी बढ़ रहा है। मध्य एशिया की पांच राजधानियों को प्रति सप्ताह 50 से भी अधिक उड़ानें भारत के साथ जोड़ती हैं। और, इसमें उतना ही समय लगता है जितना दिल्ली से चेन्नई तक की उड़ानों में।

मानव संसाधन के विकास के क्षेत्र में हमारी काफी प्रगति हुई है। मध्य एशिया के हजारों व्यवसायिकों और छात्रों ने भारत में प्रशिक्षण प्राप्त किये हैं। भारत से बहुत से लोग इस क्षेत्र में स्थित विश्वविद्यालयों में आए।

हमने क्षेत्र में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के विशिष्ट केन्द्र स्थापित किये हैं। और, हमें इस बात से भी प्रसन्नता है कि इस क्षेत्र में तीन भारतीय सांस्कृतिक केन्द्र हैं।

इसके बावजूद भी हम सबसे पहले यह कहते हैं कि भारत और मध्य एशिया के बीच संबंध इसकी आवश्यकताओं और संभावनाओं की तुलना में कम हैं।

हमारे दिलों में एक-दूसरे के प्रति खास जगह है। किन्तु, हमने एक-दूसरे की ओर उतना ध्यान नहीं दिया है जितना देना चाहिए।

यह स्थिति बदलेगी।

यही कारण है कि मैं अपनी सरकार के शुरुआती चरणों में ही क्षेत्र के सभी पांच देशों की यात्रा कर रहा हूं।

भारत और मध्य एशिया दोनों ही एक-दूसरे के बिना अपनी संभावना का लाभ नहीं प्राप्त कर सकते। न ही हमारे सहयोग के बिना। हमारी जनता सुरक्षित नहीं होगी और न ही हमारा क्षेत्र अधिक संतुलित हो सकेगा।

भारत कुल जनसंख्या का छठा हिस्सा है। यह 80 करोड़ युवाओं का देश है जो भारत और विश्व में प्रगति और बदलाव का एक वृहद बल है।

हमारी अर्थव्यवस्था प्रति वर्ष 7.5 प्रतिशत बढ़ रही है। हम भविष्य में और भी अधिक ऊंची विकास दर तक पहुंच सकते हैं।

भारत विश्व के लिए अवसरों का नया गंतव्य है।

मध्य एशिया व्यापक संसाधनों, प्रतिभावान लोगों, तीव्र विकास और सटीक अवस्थिति का एक बड़ा क्षेत्र है।

इसलिए, मध्य एशिया के साथ अपने संबंधों के एक नये युग की शुरुआत के लिए मैं यहां आया हूं।

भारत समृद्धि की एक नयी साझेदारी में और भी अधिक निवेश करने के लिए तैयार है।

हम न केवल खनिज और ऊर्जा के क्षेत्र में, बल्कि औषधि, वस्त्र, अभियंत्रण और लघु तथा मध्य उद्यमों जैसे उद्योगों में भी साथ मिलकर काम करेंगे। हम यहां तेलशोधकों, पेट्रोरसायनों और उर्वरक संयंत्रों में निवेश कर सकते हैं।

हम अपने युवाओं के लिए धन और अवसरों को तैयार करने के उद्देश्य से सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की मजबूती का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। आज, मैं भारत के एक सुपर कम्प्यूटर के साथ अस्टाना में एक विशिष्टता केन्द्र का उद्घाटन करूंगा।

हम विकास और संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में निकट साझेदारी के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की पहुंच का इस्तेमाल कर सकते हैं।

हम कृषि और दूध उत्पादन जैसे क्षेत्रों में व्यापक अवसरों की संभावना देखते हैं। हम पारंपरिक औषधियों के क्षेत्र में अपने पुराने संबंधों में नवीनता ला सकते हैं।

मध्य एशिया भारतीय पर्यटकों के लिए एक प्राकृतिक गंतव्य है।

हम संस्‍कृति, शिक्षा और अनुसंधान में अपने आदान-प्रदान को बढ़ा रहे हैं और हम अपने युवाओं को और जोड़ेंगे।

इस अशांत दुनिया में, हमें अपने मूल्‍यों, अपने राष्‍ट्रों की सुरक्षा और अपने क्षेत्र की शांति की रक्षा के लिए अपने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भी मजबूत बनाना चाहिए। हम अस्थिरता के मुहाने पर रहते हैं। हम उग्रवाद और आतंकवाद की धार के काफी करीब रहते हैं।

हम राष्‍ट्रों और समूहों के द्वारा रचित आतंकवाद को देखते हैं। आज, हम यह भी देखते हैं कि अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए नये सदस्‍यों को आतंकी गतिविधियों में शामिल करने हेतू साइबर सुविधाएं सीमा रहित मंच बन चुके हैं।

संघर्षो के युद्ध क्षेत्रों से लेकर के दूर के शहरों के शांत पड़ोसियों के लिए, आतंकवाद एक ऐसी वैश्विक चुनौती बन गया है जो पहले कभी नहीं थी।

यह एक ऐसी ताकत है जो अपने बदले हुए नामों, स्थानों और लक्ष्य की तुलना में अधिक व्‍यापक और स्‍थायी है।

इसलिए, हम अपने आप से पूछना चाहिए: क्‍या हम युवाओं की एक पीढ़ी को बंदूकों और नफरत के साये में जाने देंगे,  वे अपने खोए हुए भविष्य के लिए हमें उत्‍तरदायी मानेंगे?

इसलिए, इस यात्रा के दौरान, हम क्षेत्र में अपने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करेंगे। लेकिन,  हमें अपने मूल्यों की शक्ति और मानवतावाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के द्वारा आतंकवाद का मुकाबला भी करना होगा।

यह एक उत्‍तरदायित्‍व है कि भारत और मध्‍य एशियाई देशों को अपनी साझा विरासत और अपने क्षेत्र के भविष्‍य को सँवारना होगा। हमारे सम्मिलित मूल्‍य और आकांक्षाएं संयुक्‍त राष्‍ट्र सहित करीबी अंतर्राष्‍ट्रीय साझेदारी की भी आधारशिला हैं।

लेकिन, एक परिवर्तित दुनिया में, हम संयुक्‍त राष्‍ट्र के बढ़ते संस्‍थागत अपक्षरण को देखते हैं। राष्ट्रों के रूप में जो अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं, हमें इसे अपने समय अनुसार प्रासंगिक बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। जैसे ही संयुक्त राष्ट्र के 70 वर्ष पूर्ण होते हैं, तो हमें संयुक्त राष्ट्र, विशेष रूप से इसकी सुरक्षा परिषद, के सुधारों के लिए दबाव बनाना चाहिए।

शंघाई सहयोग संगठन में भारत की सदस्यता हमारी क्षेत्रीय साझेदारी को और गहरा बनाएगी।

और हम इस क्षेत्र के साथ मजबूत एकीकरण के लिए यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर एक अध्ययन शुरू कर चुके हैं।

यह एक युग है जिसमें अंतरिक्ष और साइबर सड़कों और रेलों को कम प्रासंगिक बना रहे हैं।

लेकिन, हम व्यापार, पारगमन और ऊर्जा कि लिए अपने भौतिक संपर्को का भी फिर से निर्माण करेंगे।

अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर भारत के लिए यूरेशिया हेतू एक प्रतिस्पर्धी और त्वरित मार्ग खोलता है। और, मुझे आशा है कि सारा मध्य एशिया इसमें शामिल हो जाएगा।

हमें व्यापार और पारगमन पर अश्गाबात समझौते में शामिल होने की उम्मीद है।

ईरान के चाहबहार बंदरगाह में भारत का निवेश हमें मध्य एशिया के करीब लाएगा।

मुझे यह भी उम्मीद है कि हम पाकिस्तान और अफगानिस्तान के माध्यम से मध्य एशिया के लिए परंपरागत मार्ग को फिर से प्रारंभ कर सकते हैं।

गैस पाइपलाइन पर तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के बीच समझौते से हम आत्मविश्वास को बना सकते हैं।

यदि हम जुड़ जाते हैं तो यह क्षेत्र सबसे समृद्ध बन जाएगा।

नि:संदेह, एशियाई शताब्‍दी की हमारी आशाएं सच हो जाएगीं, जब हम एशिया को दक्षिण, पश्चिम, पूर्व या मध्य के रूप में न देखकर एक देखेंगे। जब हम सब एक साथ समृद्ध होंगे।

इसके लिए, हमें एशिया के विभिन्न भागों जोड़ना होगा।

भारत एशिया की भूमि और समुद्री मार्गों के चौराहे पर है। हम अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। और, हम भूमि और समुद्र के द्वारा पूर्व और पश्चिम से स्‍वयं को जोड़ने के लिए प्राथमिकता की भावना के साथ काम कर रहे हैं।

एशिया में स्‍वयं और अपने से परे दूसरों को फिर से जोड़ने में वृद्धि हुई है।

2002 में, हमारे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने यहां एक नये रेशम मार्ग की पहल का आहवान किया था। ।

आज संपूर्ण एशिया गौरवशाली प्राचीन सिल्क रोड के पुनरुद्धार की दिशा में प्रयासरत है।

लेकिन,  हमें इतिहास के सबक को भी याद रखना चाहिए।

रेशम मार्ग के विकास से मध्य एशिया के भाग्य समृद्धि आएं।

रेशम मार्ग के अंत सिर्फ नवीन यूरोपीय शक्तियों के समुद्र आधारित व्यापार की वृद्धि से ही नही हुआ। यह इसलिए भी हुआ क्‍योंकि मध्‍य एशिया में क्षेत्रों के बीच एक दीर्घकालिक सेतू नहीं था, और पूर्व, पश्चिम एवं दक्षिण के महान शासकों के बीच सामजस्‍य का ना होना भी था।

जब यह एक व्‍यापारिक केन्‍द्र नहीं था, बल्कि उच्‍च शक्तिशाली दीवारों की छाया से घिरी एक भूमि थी। मध्‍य एशियाई देशों ने इंकार कर दिया और व्‍यापार समाप्‍त हो गया।

इसके लिए, मध्‍य एशिया के महान राष्‍ट्रों को यूरेशिया में अपनी केन्‍द्रीय भूमिका को बढ़ाना चाहिए।

यूरोप से एशिया तक, इस क्षेत्र में सभी देशों को प्रतिस्‍पर्धा और बहिष्‍कार नहीं अपि‍तु सहयोग और समन्‍वय  के एक वातावरण को बढ़ावा चाहिए।

इस क्षेत्र को संघर्ष और आतंकवाद की हिंसा से मुक्‍त एक स्थिर और शांतिपूर्ण क्षेत्र होना चाहिए।

और जैसे मध्य एशिया से पूर्व और पश्चिम जुड़ता है उसी प्रकार इसे दक्षिण से भी जोड़ना होगा।

वैश्वीकरण के इस दौर में, एशिया खंडित नहीं रह सकता। और, मध्य एशिया भारत से दूर और अलग नहीं रह सकता।

मुझे विश्‍वास है हम ऐसा कर सकते हैं। हमारे पूर्वजों ने अध्यात्मवाद, ज्ञान, और बाजारों के लिए शक्तिशाली हिमालय, काराकोरम, हिंदू कुश और पामीर को पार किया।

हम सभी 21 वीं सदी के रेशम मार्ग के निर्माण के लिए मिलकर कार्य करेंगे। हम अंतरिक्ष और साइबर के साथ-साथ भूमि और समुद्र के माध्‍यम से भी एक दूसरे को जोड़ेगे।

मैं इस क्षेत्र के एक कवि  अबदूराहिम ओटकुर की कुछ पंक्तियों के साथ अपनी बात समाप्‍त करता हूँ। उन्होंने कहा:

 "हमारे मार्ग रहते हैं, हमारे सपने रहते हैं,  सब कुछ रहता है, फिर भी,  बहुत दूर तक रहता है,

यहां तक कि यदि वायु बहती है, या रेत बिखरता है, वे कभी भी हमारे मार्गो को ढक नहीं पाते,

हालांकि हमारे अश्‍व बहुत कमजोर होते हैं तथापि हमारा कारवां नही रूकता,

चलते हुए अथवा अन्‍य किसी रूप में, एक दिन ये मार्ग हमारे पोत्रों के द्वारा अथवा हमारे महान पोत्रों के द्वारा ढूंढ लिए जाएगें"



मैं आपसे यह कहता हूँ: भारत और मध्य एशिया अपने उस वायदे को पूरा करेंगे।

धन्यवाद।

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