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घर वापसी कार्यक्रम रोका तो भुगतने होंगे गंभीर परिणाम-विहिप

अलीगढ़ में क्रिसमस पर प्रस्तावित 'घर वापसी' (धर्म परिवर्तन) के कार्यक्रम को संघ परिवार हर कीमत पर करने पर आमादा है। विश्व हिंदू परिषद ने को एलान कर दिया कि सरकार ने कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

विहिप के ब्रज प्रांत अध्यक्ष प्रमोद जाजू ने शुक्रवार को कासगंज में कहा कि इस कार्यक्रम को धर्मांतरण कहना गलत है, क्योंकि हम सिर्फ उन लोगों को वापस बुला रहे हैं, जो पूर्व में विभिन्न कारणों से हिंदू धर्म को छोड़ गए थे। लिहाजा, यह घर वापसी कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ का कार्यक्रम तय है, जिसमें कोई तब्दीली नहीं होगी।

संघ परिवार की गुरिल्ला नीति सबसे सफल रणनीति मानी जाती है। जब भी विवादित कार्यक्रम हुए, संघ परिवार ने इसी रणनीति का सहारा लिया। तैयारी यह है कि अगर सरकार कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाती है और हिंदू नेताओं की गिरफ्तारी होती है, तब भी कार्यक्रम में लोग पहुंचेंगे। इसके लिए दो-दो तीन-तीन टीमें तैयार की जा रही हैं। अगर प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी भी हो जाती है, तब भी कार्यक्रम में लोग पहुंचेंगे। चाहे भेष बदलकर जाना पड़े या अन्य किसी भी तरह, मगर कार्यक्रम जरूर होगा।

अलीगढ़ जैसा ही कार्यक्रम पिछले वर्ष क्रिसमस के दिन यहां कछला गंगा घाट पर हो चुका है। इस कार्यक्रम में प्रदेश के 11 जिलों से आए 5500 लोगों ने ईसाई धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपनाया था।

जबसे धर्मांतरण का मुद्दा सुर्खियों में आया है, सरकारी मशीनरी हरकत में है। गृह सचिव ने पिछले वर्षों में एटा-कासगंज में हुए धर्मांतरण कार्यक्रमों की रिपोर्ट मांगी है। यह जानकारी भी भेजने को कहा गया है कि धर्म जागरण समिति का नेटवर्क कैसा है। कौन-कौन लोग इससे जुड़े हैं। इस पर खुफिया तंत्र सभी जानकारी जुटा रहा है।

अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस घोषित होने की प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त करने के लिए शब्‍द नहीं - मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने संयुक्‍त राष्‍ट्र द्वारा 21 जून को 'अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस' घोषित करने का स्‍वागत किया है।

प्रधानमंत्री ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए ट्वीट किया कि संयुक्‍त राष्‍ट्र द्वारा 21 जून को 'अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस' घोषित करने के निर्णय पर अपनी प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त करने के लिए मेरे पास शब्‍द नहीं हैं। मैं इस निर्णय का स्‍वागत करता हूं।

श्री मोदी ने अपने एक अन्‍य ट्वीट में लिखा विश्‍वभर में असंख्‍य लोगों ने योग को अपने जीवन का एक हिस्‍से के रूप में अपनाया है। उन सभी को बधाई। इस निर्णय से अन्‍य लोगों को भी योग को अपनाने की प्रेरणा मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने लिखा कि योग में मानव मात्र को एक डोर से जोड़ने की शक्ति है। यह शानदार ढंग से ज्ञान (जानकारी), कर्म (कार्य) और भक्ति (समर्पण) का मिश्रण करता है।

श्री मोदी ने अपने ट्वीटर एकाउंट पर अपने एक भाषण का लिंक भी दिया है जिसमें उन्‍होंने योग के विभिन्‍न पहलुओ और इसकी अद्वितीयता के बारे में बताया है। प्रधानमंत्री के इस भाषण को इस लिंक पर देखा जा सकता है-



रूस के राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान नरेन्द्र मोदी का वक्तव्य

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और मीडिया के सदस्यों, 

राष्ट्रपति पुतिन का भारत में स्वागत करते हुए सचमुच बहुत प्रसन्नता हो रही है। हम पहले दो बार विश्व की दो विपरीत अलग-अलग धुरियों-ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया में मिले थे। मुझे दिल्ली में वार्षिक शिखर बैठक के लिए उनकी मेजबानी करने का सम्मान मिला है। नई शताब्दी की शुरूआत से श्री पुतिन दोनों देशों के बीच भागीदारी के प्रमुख रचनाकार रहे हैं। 

राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 2000 में वार्षिक शिखर बैठकों की शुरूआत की थी। नवम्बर, 2001 में जब प्रधानमंत्री श्री वाजपेयी ने मास्को में पहले शिखर सम्मेलन में भाग लिया उस समय मैं गुजरात और अस्तराखान के बीच सहयोगी राज्य यानी सिस्टर स्टेट के समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए वहीं मास्को में था। 

राष्ट्रपति पुतिन एक ऐसे महान राष्ट्र के नेता हैं जिसके साथ हमारी अनूठे आपसी विश्वास और सदभाव की मैत्री है। हमारी सामरिक भागीदारी की विषय वस्तु की कहीं कोई समानता नहीं की जा सकती। रूस की जनता का भारत के प्रति समर्थन हमारे इतिहास में कठिन क्षणों में भी बना रहा है। यह भारत के विकास, सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की मजबूती का स्तम्भ भी रहा है। भारत अपनी चुनौतियों का सामना करते हुए भी रूस के साथ हमेशा खड़ा रहा। 

वैश्विक राजनीति और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के स्वरूप और चरित्र में परिवर्तन आ रहा है। इस संबंध का महत्व और भारत की विदेश नीति में इस के अद्वितीय स्थान में हालाकि परिवर्तन नहीं आएगा। दोनों देशों के लिए हमारे संबंधों का महत्व कई तरीकों से आने वाले वर्षों में और बढ़ेगा। 

रूस कई दशकों से भारत का प्रमुख रक्षा भागीदार रहा है। प्रधानमंत्री के रूप में दिल्ली से बाहर मैं पहली यात्रा पर वायुसेना के नये कैरियर जहाज आईएनएस विक्रमादित्य में गया। यह हमारे समुद्र में हमारे रक्षा सहयोग के महान प्रतीक के रूप में तैरता दिखाई देता है। आज हालांकि भारत के सामने विकल्प बढ़ गये हैं फिर भी रूस हमारा अत्यंत महत्वपूर्ण रक्षा भागीदार बना रहेगा। हमने पिछले छः महीनों में सेना के तीनों अंगों के संयुक्त अभ्यास किए हैं।

राष्ट्रपति पुतिन और मैंने रक्षा परियोजनाओं के व्यापक क्षेत्र पर परिचर्चा की है। हमने मेक इन इंडिया समेत भारत की प्राथमिकताओं के अनुरूप दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध बनाने के तौर तरीकों पर भी चर्चा की।

मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि रूस ने अपने अति उन्नत हेलिकॉप्टरों का पूरी तरह भारत में निर्माण करने की पेशकश की है। इसमें भारत से निर्यात की संभावना भी शामिल है। इसे सैन्य और असैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। हम इस पर तेजी से आगे कार्रवाही करेंगे।

मैंने प्रस्ताव किया कि रूस को अपने देश के रक्षा उपकरणों के हिस्से पुर्जों के निर्माण की सुविधाएं भारत में विकसित करनी चाहिएं। श्री पुतिन ने मेरे अनुरोध पर बहुत अनुकूल प्रतिक्रिया दी।

भारत के आर्थिक विकास और यहां के युवकों के लिए रोजगार विकसित करने के लिए ऊर्जा सुरक्षा महत्वपूर्ण है। रूस भी इस क्षेत्र में प्रमुख भागीदार है। 

मुझे खुशी है कि कुडंनकुलम परमाणु विद्युत संयंत्र की पहली इकाई में उत्पादन हो रहा है। इससे भारत की मौजूदा परमाणु विद्युत क्षमता में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हम कम से कम एक-एक हजार मेगावाट क्षमता की तीन और इकाइयां संस्थापित करने की स्थिति में हैं। हमने आज कम से कम दस और रियेक्टरों के साथ परमाणु ऊर्जा के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई है। इसमें सुरक्षा के ऐसे मानक होंगे जो विश्व में सबसे सुरक्षित माने जाएंगे। इसमें भारत में ही उपकरणों और हिस्सों पुर्जों का निर्माण किया जाएगा। इससे हमारी मेक इन इंडिया नीति को बल मिलेगा। 

रूस विश्व में पेट्रोलियम संसाधनों का शीर्ष स्रोत है और भारत विश्व में इनका सबसे बड़ा आयातक है। हमारी घनिष्ठ मैत्री के बावजूद इस क्षेत्र में हमारा सहयोग निराशाजनक रहा है। हमने आज कुछ महत्वपूर्ण समझौतों के साथ नई शुरूआत की है। इतना ही नहीं हम तेल और प्राकृतिक गैस में भागीदारी का महत्वाकांक्षी एजेंडा बनाएंगे।

हमने आज कई फैसले लिए हैं और कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनसे आज के विश्व में हमारे साझे विश्वास की झलक मिलती है और हमारे जीवंत आर्थिक संबंधों से सशक्त सामरिक भागीदारी की बुनियाद बनती है। इसी तरह शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की जनता के बीच घनिष्ठ संपर्क भी महत्वपूर्ण है। 

मैं यूराएशियन आर्थिक संघ के साथ भारत के घनिष्ठ संबंधों के लिए समर्थन देने पर राष्ट्रपति पुतिन का धन्यवाद करता हूं। अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा हमें यानी दोनों देशों को बेहतर तरीके से जोड़ेगा और आज हम दोनों मिलकर विश्व हीरा सम्मेलन-वर्ल्ड डायमंड कांफ्रेस में उपस्थित रहेंगे। इससे आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने के लिए हमारा नया दृष्टिकोण उजागर होता है।

राष्ट्रपति पुतिन और मैं इस बात पर सहमत हैं कि विश्व में यह एक चुनौतीपूर्ण क्षण है। हमारी भागीदारी और एक दूसरे के हितों के लिए सदैव रही सशक्त संवेदनशीलता दोनों देशों की मजबूती का स्रोत बनेगी।

मैं चेचेन्या में आतंकी हमलों में मारे गये लोगों के प्रति अपनी ओर से गहरा शोक व्यक्त करता हूं। इससे हमारी कई साझी चुनौतियों का भी पता चलता है। सहयोग के लिए हमारे प्राथमिकता के क्षेत्र में आतंकवाद और उग्रवाद को काबू पाना; अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना; स्थिर, संतुलित, शांतिपूर्ण और समृद्ध एशिया प्रशांत के लिए काम करना; और अन्य देशों में विकास के लिए सहयोग देना शामिल है। 

ब्रिक्स, पूर्व एशिया शिखर बैठक और जी-20 जैसे संगठनों ने हमारे सहयोग का दायरा भी विस्तृत बना दिया है। यह राष्ट्रपति पुतिन की 11वीं वार्षिक शिखर बैठक और मेरी पहली ऐसी बैठक है। इस शिखर बैठक से इस भागीदारी के असाधारण महत्व और मूल्य तथा शक्ति में मेरी प्रतिबद्धता मजबूत हुयी है। मुझे विश्वास है कि हमारे द्विपक्षीय सहयोग और हमारी अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी में आने वाले वर्षों में नई ऊर्जा आयेगी और यह नयी बुलंदियों को छूएगी।

हिमाचल को हिन्दू राज्य घोषित करेगा विहिप

विश्व हिन्दू परिषद मार्च व अप्रैल में होने वाले सम्मेलनों में हिमाचल को हिन्दू राज्य घोषित करेगा। इसकी तैयारी परिषद ने कर ली है। चार मई, 2015 को विश्व हिन्दू परिषद 40 हजार जनसंख्या एकत्र कर शिमला में इसकी संकल्पना दोहराएगी। 

विश्व हिन्दू परिषद के हिमाचल संगठन मंत्री मनोज कुमार ने धर्मशाला में एक कार्यक्रम के दौरान इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल के हिन्दू राज्य घोषित होने के बाद किसी भी मुस्लिम या इसाई को प्रदेश में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। देश भर में विश्व हिन्दू परिषद के 800 जिले हैं, इनमें से हिमाचल में 24 जिले शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना का 50वां स्वर्णिम वर्ष चल रहा है और ऐसे में हिन्दू शक्ति का विजय योद्धा तैयार करने का निर्णय लिया गया है। देश में एक लाख परिवार के पांच लाख लोगों को परिषद से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जल्द ही सोशल मीडिया पर साइट के माध्यम से भी विश्व हिन्दू परिषद कार्य करना शुरू कर देगा। उन्होंने कहा कि 'लविंग जेहाद' के नाम पर मुस्लिम हिन्दू लड़कियों को भगाकर ले जा रहे हैं और हिन्दू लड़कियों को विदेशों में बेचा जा रहा है। अभी तक हिमाचल से ही 16 लड़कियों को भगाया जा चुका है।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद की 2015 तक भव्य राम मंदिर बनाने की भी योजना है।

भाजपा ने ब्रिटिश राज के कॉलेज का नाम बदलकर पृथ्वीराज चौहान के नाम पर किया

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कैबिनेट की बैठक में अजमेर के राजकीय महाविद्यालय (जीसीए) का नाम बदलकर सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय करने का प्रस्ताव पारित कर दिया। करीब 178 साल पुराना यह महाविद्यालय अब इसी नाम से जाना जाएगा। महाविद्यालय का नाम बदले जाने पर भारतीय जनता पार्टी आैर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सीएम का आभार जताया है।

भाजपा के शहर अध्यक्ष अरविंद यादव ने बताया कि राज्य की केबिनेट बैठक में जीसीए का नाम बदलकर सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय किए जाने का निर्णय लिया गया। भाजपा, कांग्रेस शासन काल से ही कॉलेज का नाम बदलने की मांग करते आ रही है। प्रदेश में भाजपा की सत्ता आने के बाद मुख्यमंत्री से मिलकर तत्काल कॉलेज का नाम बदलकर यशस्वी हिंदू सम्राट पृथ्वीराज के नाम पर किए जाने का आग्रह किया गया था। भाजपा नेताओं ने केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री सांवरलाल जाट, वरिष्ठ भाजपा नेता आेंकार सिंह लखावत, उच्च शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ, शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिता भदेल का भी आभार जताया है। वहीं एबीवीपी महानगर मंत्री हंसराज चौधरी ने राज्य सरकार के इस फैसले का स्वागत कर सीएम को धन्यवाद ज्ञापित किया है। चौधरी ने बताया कि एबीवीपी लंबे समय से जीसीए का नाम हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के नाम पर करवाने के लिए प्रयासरत थी। कांग्रेस शासनकाल में इसके लिए आंदोलन किया गया था।

ब्रिटिश शासन काल में ब्ल्यू कैसल के नाम से पहचाने जाने वाले जीसीए में 178 वर्ष पूर्व सन् 1836 में ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशक ने अंग्रेजी स्कूल की  स्थापना की थी। 1868 में यहां इंटर मीडिएट कक्षाएं प्रारंभ हुई। 17 फरवरी सन 1868 में राजपूताना के गर्वनर जनरल के एजेंट जनरल कीपिंग ने जीसीए की नींव रखी थी। नब्बे के दशक में अजमेर के लोगों द्वारा एकत्रित 44 हजार रुपए के चंदे की राशि से यहां डिग्री कॉलेज शुरू किया गया। विज्ञान संकाय यहां 1913 में प्रारंभ हुआ। जीसीए 1946 में पीजी कॉलेज बना। 1949 में यहां वाणिज्य आैर 1951 में विधि कक्षाएं प्रारंभ की गई। पूर्व में इस कॉलेज का एफीलिएशन कलकत्ता यूनिवर्सिटी से था, फिर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से हुआ। 1886 के बाद आगरा यूनिवर्सिटी से एफीलिएटेड हुआ। वर्ष 1956 में राजस्थान के एकीकरण के दौरान इस कॉलेज का एफीलिएशन राजस्थान यूनिवर्सिटी से हुआ। जीसीए वर्ष 1987 में अजमेर की महर्षि दयानंद  यूनिवर्सिटी (एमडीएसयू) से एफीलिएट हुआ।

शिक्षा का स्तर सुधारा जाए, नाम बदलने से क्या होगा :  इधर, एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष लोकेश कोठारी का कहना है कि 178 सालों बाद ही क्यों भाजपा को जीसीए का नाम बदलने की आवश्यकता महसूस हुई। जबकि प्रदेश में कई बार भाजपा की सरकार रही है। तब ऐसा क्यों नहीं हुआ। नाम बदलने से कॉलेज का स्तर नहीं बदल सकता। इसके लिए कॉलेज में पर्याप्त संसाधन जुटाने की जरूरत है।

जबरन धर्मांतरण न होता तो आज इस्लाम अस्तित्व में नहीं होता - तसलीमा

धर्मांतरण विवाद में जानी-मानी लेखिका तसलीमा नसरीन ने भी दखल देते हुए दो टूक शब्दों से सच्चाई स्वीकार करते हुए कहा है कि अगर गरीब मुस्लिम पैसे और भोजन के लिए हिंदू धर्म ग्रहण करना चाहते हैं तो उन्हें ऐसा करने दिया जाए। गरीब हिंदू भी इसी कारण इस्लाम और ईसाइयत को अपनाते हैं। दरअसल मजहब बिकता है।

अपने बेबाक लेखन के कारण कट्टरपंथियों के निशाने पर रहने वालीं तसलीमा ने ट्वीट के जरिये यह भी कहा है कि इस्लाम में जबरन धर्मांतरण की मनाही है। बाद में ऐसा होने लगा। जबरन धर्मांतरण न होता तो आज इस्लाम अस्तित्व में नहीं होता। तसलीमा ने जबरन धर्मांतरण का विरोध करते हुए कहा है कि वह हिंदुओं के धर्मांतरण के लिए मुस्लिम और ईसाइयों को दोषी ठहराती रही हैं और यही कारण है कि जब हिंदू भी ऐसा करते हैं तो उन्हें बुरा लगता है।

उनके मुताबिक उपासना पद्धति के चयन की स्वतंत्रता होनी चाहिए। लोगों को हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, यहूदी या फिर नास्तिक बनने की छूट मिलनी चाहिए। तसलीमा ने अपने पूर्वजों को मूर्तिपूजक बताते हुए कहा कि वे हिंदू से मुसलमान बने।

दिल्ली में रैन बसैरों को बनाने के लिए खरीदी जा रही है जमीन

आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय में राज्यमंत्री श्री बाबुल सुप्रियो ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी कि जून, 2014 के दिल्ली सरकार द्वारा किये गए एक सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 1366 महिलाओं और 1648 बच्चों समेत कुल 16,760 लोग बेघर पाए गए थे।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के अनुसार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं कि सर्दियों में सभी बेघर लोगों को रैन बसैरों में जगह मिले। दिल्ली शहर आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) दिल्ली विकास प्रधिकरण के साथ दिल्ली के विभिन्न भागों में पांच और भू-खंडों को खरीदने के लिए मामले को उठा रहा है, जिसका ब्यौरा इस प्रकार हैः

(i) सेक्टर 26, सेवा केन्द्र, द्वारका
(ii) सेक्टर 26, फेस-II (एचएएफ, पॉकेट-II), द्वारका
(iii) सेक्टर 18, पॉकेट एफ, रोहिणी
(iv) नरेला, मंडी के पास, और
(v) नरेला, ट्रक टर्मिनल के पास

इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय शहरी आजिविका मिशन (एनयूएलएम) के अंतर्गत 'शहरी बेघर लोगों के आश्रय हेतु स्कीम' के दिशा-निर्देशों के अनुसार इस संबंध में पता लगाए गए सात स्थानों पर स्थाई रैन बसेरों के निर्माण के लिए कार्रवाई की जा रही है, जिनका ब्यौरा इस प्रकार हैः-

i.                   आईएफसी, गाजीपुर
ii.                   सेवा केन्द्र, सेक्टर-9, द्वारका
iii.                   पीएसपी क्षेत्र, सेक्टर-22, द्वारका
iv.                   ककरोला, सेक्टर-16-बी, द्वारका
v.                   ओसीएफ पॉकेट, आईएफसी, नरेला
vi.                   सेक्टर-5, रोहिणी
vii.                   नांगलोई, फेस-II

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में रैन बसेरों का जिलावार ब्यौरा इस प्रकार हैः-

राजस्व जिला
कुल
केन्द्रीय
75
पूर्वी
12
नई दिल्ली
13
उत्तरी
16
उत्तरी पूर्वी
09
उत्तरी पश्चिम
07
शहादरा
08
दक्षिण
02
दक्षिण पूर्व
16
दक्षिण पश्चिम
06
पश्चिम
20
पश्चिम
184

सीमा के खुले भागों से आतंकियों की घुसपैठ होगी नाकाम

बांग्‍लादेश में स्थित और वहां से संचालित हो रहे भारतीय उपद्रवी समूह (आईआईजी) दोनों देशों के बीच खुली सीमा का फायदा उठाते हुए भारत में घुसपैठ करने की कोशिश करते हैं। राज्‍यसभा में एक प्रश्‍न का लिखित उत्‍तर देते हुए गृह राज्‍यमंत्री श्री किरेण रिजिजु ने बताया कि केवल भारत-बांग्‍लादेश, भारत-पाकिस्‍तान की सीमा के साथ और भारत-म्‍यांमा के छोटे से भाग पर बाड़ लगाई गई है। भारत-बांगलादेश और भारत-पाकिस्‍तान सीमाओं पर बाड़ रहित यानी खुले भागों की सीमा सुरक्षा बल ने पहचान कर ली है। भारत-बांगलादेश सीमा पर ऐसे 783 और भारत-पाकिस्‍तान सीमा पर 149 स्‍थान है। 

सरकार ने खुले सीमा भागों को मजबूत बनाने के लिए बहुधारीय दृष्टिकोण अपनाया है इस दिशा में उठाए गए कदमों में निम्‍नलिखित शामिल हैं : 

सीमा पर गश्‍त नाकाओं द्वारा 24 घंटे निगरानी और देश की अंतर्राष्‍ट्रीय सीमा पर निगरानी चौकियों की मौजूदगी के जरिए सीमा पर निगरानी तंत्र का प्रभुत्‍व बनाया गया। देश की अंतर्राष्‍ट्रीय सीमाओं पर नदी क्षेत्र पर सीमा सुरक्षाबल की स्‍पीड बोट, पानी के वाहनों, तैरती सीमांत चौकियों की मदद से गश्‍त की जा रही हैं और निगरानी तंत्र का प्रभुत्‍व बनाया गया। 

बलों की संख्‍या में कई गुना बढ़ोतरी करना और अति तकनीकी निगरानी उपकरणों की तैनाती। सीमा पर निगरानी तंत्र के प्रभुत्‍व को और मजबूत करने के लिए दिन और रात में समुचित प्रकाश में काम करने वाले नवीनतम निगरानी उपकरण प्राप्‍त करने की लगातार कोशिशें की जा रही हैं। 

सीमा पर आउट पोस्‍ट के उन कमजोर इलाकों जो सीमा पर अवैध घुसपैठ और सीमापर अपराधों की दृष्टि से संवेदनशील हैं उनका मानचित्रीकरण किया गया। इन चयनित चौकियों को बलों की अतिरिक्‍त तैनाती, विशेष निगरानी उपकरणों, वाहनों, अन्‍य आधारभूत सहायक उपकरणों से मजबूत बनाया गया। 

खुफिया नेटवर्क और सहयोगी एजेंसियों के साथ तालमेल को उन्‍नत बनाया गया और सीमाओं पर विशेष अभियान चलाए गए। 

15 हजार मुसलमानों की घर वापसी की घोषणा

उत्‍तर प्रदेश के आगरा में धर्म परिवर्तन के मामले में नया मोड़ आ गया है। मुसलमान से हिंदू बनने के एक दिन बाद ही दो शख्‍स ने बजरंग दल के लोगों पर जबरदस्‍ती धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। बुधवार को यह मामला संसद में भी उठा। इस पर चर्चा की मांग करते हुए विपक्ष ने हंगामा किया। लेकिन आरएसएस से जुड़े धर्म जागरण मंच के उत्‍तर प्रदेश प्रमुख ने एलान किया है कि 25 दिसंबर को 15 हजार लोगों का धर्म परिवर्तन करा कर उन्‍हें हिंदू बनाया जाएगा। वहीं, इस पूरे मामले पर बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि अगर इस तरह की घटनाओं को नहीं रोका गया तो इससे पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो जाएगा।

मायावती ने कहा, ‘‘आगरा में धर्म परिवर्तन का मुद्दा गंभीर है। इस तरह की खबरें हैं कि आगरा के बाद अलीगढ़ में भी यही दोहराया जाने वाला है। केंद्र और यूपी सरकार को इस मामले को गंभीरता से देखना चाहिए। चूंकि, कानून व्यवस्था राज्य का विषय है इसलिए सपा सरकार को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। धर्म परिवर्तन के लिए लालच दिया गया है और इसके पीछे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानी आरएसएस के सहयोगी संगठन बजरंग दल का हाथ है।’’

सोमवार को मुस्लिम परिवारों के ३८७ सदस्यों की हिंदू धर्म में वापसी कराई गई थी। इन लोगों ने धर्म परिवर्तन की रस्‍म के बाद पूजा की और काली माता की आरती उतारी। लेकिन मंगलवार को इन्‍हीं लोगों ने नमाज पढ़ी और कहा कि वे मुस्लिम हैं। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि धर्म जागरण प्रकल्प और बजरंग दल के लोगों ने उन्हें बीपीएल कार्ड और प्लॉट का लालच देकर फोटो खिंचाने के लिए कहा था। उन्हें ये नहीं मालूम था कि उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। लेकिन इस बारे में मुकदमा दर्ज कराने वाले इस्‍माइल ने सोमवार को अपना नाम राजकुमार बताया था। वो प्रसाद भी बांट रहे थे।

धर्म जागरण प्रकल्प का कहना है कि सभी मुस्लिमों को उनकी मर्जी से हिंदू बनाया गया था। सोमवार को देवरी रोड स्थित वेद नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के धर्म जागरण प्रकल्प और बजरंग दल ने धर्मांतरण कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसमें वेद नगर के रहने वाले करीब ६० परिवारों के ३८७ सदस्यों को हवन कराकर हिंदू बनाया गया। धर्म जागरण प्रकल्प ने कहा था कि इन परिवारों के पूर्वज कभी हिंदू थे। अब इन लोगों की फिर से घर वापसी हुई है।

मंगलवार को अखबारों में यह खबर छपी तो मुसलमानों ने इसे धोखा बताया। उन्‍होंने काली माता की मूर्ति को वहीं रहने वाले एक क्षत्रिय के कमरे में रख दिया और नमाज अता की। उन्होंने बताया कि उनसे कहा गया था कि संगठन के किसी बड़े पदाधिकारी के सामने एक आयोजन में फोटो भर खिंचाना है। इसके बाद उन्हें बीपीएल राशन कार्ड और प्लॉट दिलवाए जाएंगे। उन्हें धर्म परिवर्तन के बारे में कुछ नहीं बताया गया था।

इस्‍माइल की पत्‍नी मोनिरा बेगम का कहना है कि धर्म जागरण ईसाई परियोजना के ब्रज प्रांत प्रमुख नंद किशोर पंद्रह दिन से धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश कर रहे थे। उनके मुताबिक, इस्‍माइल को बस्‍ती में मंदिर बनवाने के एवज में सभी के बीपीएल कार्ड बनवाने का वादा किया गया।

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