दिल्ली में हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी का घर सीज हुआ


हुर्रियत कॉन्‍फ्रेंस पर कानूनी शिकंजे के साथ अब इनकम टैक्‍स विभाग ने भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में आज इनकम टैक्‍स विभाग ने हुर्रियत के चेयरमैन और अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का दिल्‍ली स्थित आवास को सीज कर दिया है. गिलानी का यह आवास दिल्‍ली के मालवीय नगर स्थित खिड़की एक्‍सटेंशन में स्थित है. इस आवास में गिलानी के साथ ही उसके दामाद की भी हिस्‍सेदारी बताई जा रही है.

आयकर विभाग के अनुसार, अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी पर 1996-97 से लेकर 2001-2002 से लेकर 3.62 करोड़ से अधिक की देनदारी है. इससे पहले भी अलगाववादी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई थी. बता दें कि पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और जम्मू-कश्मीर के हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक की फोन पर बातचीत को लेकर उपजे विवाद के बाद पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत को उकसाने का काम किया था. अब शाह महमूद ने कश्मीर के कट्टर अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी से फोन पर बातचीत की थी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे से पहले पाकिस्तान ने पिछले 4 दिनों में कश्मीर के मामलों में दोबारा हस्तक्षेप किया था. सूत्रों के मुताबिक शाह कुरैशी ने गिलानी से कश्मीर की स्थिति और मानवाधिकार उल्लंघन के मुद्दों पर बातचीत की थी.

इससे पहले शाह ने कश्मीरी अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक से इन्हीं मुद्दों पर बातचीत की थी, जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान उच्चायुक्त को बुलाकर कड़ा विरोध जताया था और पाक को कश्मीर के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने को कहा था. बता दें कि कश्मीर घाटी में गिलानी एक प्रमुख अलगाववादी नेता हैं और कई दशकों से कश्मीर के अलग होने की आवाज उठाते रहे हैं. पिछले साल केंद्र सरकार की तरफ से भेजे गए वार्ताकार (विशेष प्रतिनिधि) से उन्होंने बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था.


गिलानी फिर भौंका - कश्मीरी पंडितों की कॉलोनियां नहीं बनने देंगे

कश्मीरी पंडितों को दिल से लगाकर रखने के जूठे दावे करने वाले कट्टरपंथी और बेहद ही कमीने नेता सैयद अली शाह गिलानी ने सोमवार को वादी में कश्मीरी विस्थापित पंडितों के लिए दी जा रही ट्रांजिट आवासीय सुविधा का विरोध किया है।

उसने कहा कि यह कश्मीर की मुस्लिम आबादी को अल्पसंख्यक बनाने की साजिश है। हम किसी भी सूरत में इन आवासीय कॉलोनियों को नहीं बनने देंगे।

वादी में वापस लौटने के इच्छुक कश्मीरी विस्थापित पंडितों के लिए राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री पुनर्वास योजना के तहत कई इलाकों में ट्रांजिट आवास का निर्माण किया है। कुत्ते गिलानी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि केंद्र सरकार सुनियोजित साजिश के तहत वादी में कुछ ऐसी कॉलोनियां बना रही है, जिनमें कश्मीरी पंडितों की आड़ में गैर-कश्मीरी और गैर-मुस्लिम लोगों को बसाया जाएगा।

इस साजिश में इजरायल की खुफिया एजेंसी भारत की मदद कर रही है। जिस तरह फलस्तीन में इजरायल ने यहूदियों की बस्तियां बनाई हैं, उसी तरह यहां गैर-मुस्लिम लोगों को बसाया जा रहा है। यह साजिश कामयाब हुई तो कश्मीर में गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा हो जाएंगे। 

दूसरे राज्य के झुग्गीवालों से धारा 370 का उल्लंघन - गिलानी

ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी गुट के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी ने जम्मू-कश्मीर सरकार को 20 अक्टूबर तक झुग्गी-झोपडि़यों में रहने वाले अन्य राज्यों के वाशिंदों को बाहर करने का अल्टीमेटम दिया है।

गिलानी
ने झुग्गियों में रहने वालों को संपत्ति का अधिकार देने के फैसले को बदलने के लिए भी कहा है।कट्टरपंथी नेता ने कहा कि अगर सरकार से झुग्गियों में रहने वालों को संपत्ति का अधिकार देने का फैसला नहीं बदला तो राज्य में उसके खिलाफ उग्र आंदोलन चलाया जाएगा।

गौरतलब
है कि राज्य सरकार ने बीते दिनों झुग्गियों में रहने वाले राज्य के स्थायी नागरिकों को इंदिरा आवास योजना के तहत संपत्ति का अधिकार देने का फैसला किया है।

गिलानी
ने हुर्रियत की मजलिस-ए-शूरा की बैठक में इस फैसले को पूरी तरह कश्मीरियों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि इससे धारा 370 का उल्लंघन होगा और मुस्लिमों के अल्पसंख्यक होने का खतरा पैदा हो जाएगा।

लड़के-लड़कियों को एक साथ नहीं पढाया जाना चाहिए - गिलानी

स्कूलों और कॉलेजों में सह शिक्षा की आलोचना करते हुए हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता और भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने वाले सैयद अली शाह गिलानी ने गुरुवार को कहा कि लड़के-लड़कियों को एक साथ पढ़ाकर जम्मू कश्मीर सरकारअनैतिक गतिविधियोंको बढ़ावा दे रही है.

गिलानी
में अपने आवास पर कहा कि सह शिक्षा प्रणाली में युवा लड़के और लड़कियां साथ रहते हैं. आप आग और सूखी घास को एक साथ रख रहे हैं तब घास को जलने से कोई नहीं बचा सकता.उसने कहा कि स्कूलों में युवा लड़के-लड़कियों को नैतिक और धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा रही, इस तरह सरकार ‘अनैतिक गतिविधियों’ को बढ़ावा दे रही है.

गिलानी
ने कहा कि मात-पिता और बड़े लोगों को युवा लड़के-लड़कियों पर नजर रखनी चाहिए.

अरुंधती राय व गिलानी के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज

राजधानी में एक सेमिनार के दौरान राष्ट्रविरोधी बयानबाजी के आरोप में अरुंधती राय हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने देशद्रोह का मामला दर्ज कर लिया है।

दिल्ली पुलिस ने यह कार्रवाई बीते शनिवार को अदालत से मिले आदेश के बाद अंजाम दी है। दिल्ली पुलिस के एक आलाधिकारी ने बताया कि अरुंधती राय व गिलानी पर दर्ज की गई प्राथमिकी गत 21 अक्तूबर को राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देशविरोधी बयानबाजी के कारण दर्ज किया गया है।

दोनों ही आरोपियों पर आईपीसी की धारा 124-ए (देशद्रोह), 153-ए (वर्गो के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना), 153-बी (राष्ट्रीय एकता के लिए प्रतिकूल कथन), 504 (शांति भंग करने और लोगांे को भड़काने का प्रयास) और 505 (झूठे बयान, सार्वजनिक शांति के खिलाफ बगावत का अपराध) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ये सभी धाराएं गैरकानूनी गतिविधियां निरोधक कानून 1967 की धारा 13 के साथ जोड़कर दर्ज की गई है। अब जब मामला दर्ज कर लिया गया है तो दोनों ही आरोपियों को गिरफ्तारी का सामना करना होगा।

गौरतलब है कि जिन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है वे पूरी तरह गैरजमानती हैं। इतना ही नहीं, अगर आरोप सही साबित होते हैं तो इन धाराओं के तहत उम्र कैद तक की सजा हो सकती है।

दिल्ली पुलिस अरुंधती पर मेहरबान कहा, कोई मामला ही नहीं बनता

कोर्ट के आदेशों के बावजूद दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर वामपंथी लेखिका अरुंधती राय को राहत दे दी है। दिल्ली पुलिस ने शनिवार को कहा कि अरुंधती के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता।

दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर करते हुए कहा कि अरुंधती के खिलाफ एफआईआर का कोई मामला नहीं बनता है। अदालत ने दिल्ली पुलिस से पूछा था कि लेखिका अरुंधती राय और अलगाववादी कश्मीरी नेता सैयद अली शाह गिलानी के खिलाफ देशद्रोहपूर्ण भाषण की जो शिकायत आई थी उस मामले में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

इसके जवाब में दिल्ली पुलिस ने माना कि अरुंधती राय और गिलानी के खिलाफ शिकायत तो आई थी, मगर उसके आधार पर एफआईआर लायक मामला नहीं बनता है। अब इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट को यह फैसला करना है कि अरुंधती और गिलानी के खिलाफ देशद्रोह का मामला चलना चाहिए या नहीं।

हाई कोर्ट का दिल्ली सरकार को अरुंधती और गिलानी के बयानों पर नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि भारत के खिलाफ भाषण देने के लिए क्यों कट्टरपंथी हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी, लेखिका अरुंधती राय और दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रफेसर एस. . आर गिलानी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

न्यायमूर्ति हीमा कोहली ने एक याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब देने को कहा है। इस याचिका में अरुंधती और बाकी के खिलाफ देशद्रोह और कई अपराधों के आरोप में आपराधिक मुकदमा चलाए जाने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता के वकील सुग्रीव दुबे ने कहा कि सरकार को भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।

सुग्रीव ने 25 अक्टूबर को अरुंधती और बाकी के भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि स्वतंत्रता में कभी भी राष्ट्र हित के खिलाफ विचारों के प्रसार की आजादी शामिल नहीं रही और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निर्दोष लोगों को भड़काने के उद्देश्य से भाषण की इजाजत नहीं दी जाए। वकील के मुताबिक राय ने अपने भाषण में कहा था कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा नहीं है और उन्होंने राज्य के युवकों से कश्मीर के लिए बलिदान करने का आह्वान किया था।

सुग्रीव की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 27 जनवरी तय की और दिल्ली सरकार से 27 जनवरी तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा।

भारत विरोधी भाषण देने के लिए हुर्रियत नेता और अरुंधती के खिलाफ निचली अदालत में पहले से ही दो शिकायतें दर्ज हैं।

गिलानी को मुंहतोड़ जबाब - घाटी में हड़ताल में भी खुली दुकाने

हुर्रियत पार्टी के कट्टरपंथी धड़े के नेता अली शाह गिलानी की तरफ से रविवार को आहूत नागरिक कर्फ्यू का कश्मीर के दुकानदारों ने बहिष्कार किया। कर्फ्यू के आह्वान के बाद भी दुकानदारों ने पूरे सामान के साथ अपनी दुकानें खोली। गौरतलब है कि ओबामा की भारत यात्रा को देखते हुए गिलानी ने तीन दिवसीय नागरिक कर्फ्यू का आह्वान किया था लेकिन सड़क के किनारे स्थित दुकानदारों ने इस कर्फ्यू का बहिष्कार करने का निर्णय लिया था।

एक विक्रेता खालिद ने बताया कि पिछले चार महीनों में हम बहुत ज्यादा कर्फ्यू और बंद देख चुके हैं। अब हम अपने परिवार वालों का पेट भरना चाहते हैं। हम अब इस तरह के कामों में हमेशा व्यस्त नहीं रह सकते। विक्रेताओं के द्वारा बहिष्कार की यह घटना तब हो रही है जब कुछ हफ्तों पहले एक अज्ञात समूह जम्मू एंड कश्मीर इत्तेहादी इस्लामी ने हुर्रियत पार्टी से मांग की थी कि वह कर्फ्यू और बंद के अपने कैलेंडर में सुधार लाए क्योंकि इससे घाटी में सिर्फ आर्थिक नुकसान ही हो रहा है।

दूसरी तरफ हड़ताल के कारण घाटी में रविवार को भी आम जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। ज्यादातर दुकानें, निजी दफ्तर और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहें। पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि घाटी में स्थिति शांतिपूर्ण है और कहीं भी कर्फ्यू या किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

टैक्स चोर भी है देशद्रोही सैयद अली शाह गिलानी

भारत सरकार को पानी पी-पीकर कोसने वाले अलगाववादी कश्मीरी नेता सैयद अली शाह गिलानी टैक्स डिफॉल्टर भी हैं। राष्ट्रद्रोह मामले में सरकार भले ही उनपर केस दर्ज करने से हिचकिचा रही है, लेकिन इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने उन्हें करीब पौने दो करोड़ बकाया टैक्स चुकाने का फरमान सुना दिया है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की टीम ने गिलानी और उनके रिश्तेदारों के घरों पर सन् 2002 में छापा मारा था। इसमें पाकिस्तान सरकार की ओर से तोहफे में दी गई हीरे की घड़ी समेत कई कीमती चीजें बरामद हुई थीं। डिपार्टमेंट ने इन सामानों पर गिलानी को डेढ़ करोड़ रुपये का टैक्स भरने के लिए कहा था। इस पर गिलानी ने इनकम टैक्स कमिश्नर से अपील की थी कि जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से मिलने वाले पेंशन और खेती की जमीन से कमाई छोड़कर उनके पास आमदनी का कोई जरिया नहीं है, लिहाज टैक्स माफ कर दिया जाए।

यह केस करीब साढ़े तीन चला और बाद में उनकी अपील खारिज हो गई। इसके बाद अब गिलानी को इस साल के अंत तक बकाया 1.73 करोड़ रुपये टैक्स भरने के लिए कहा गया है। हालांकि, गिलानी के पास अभी भी इनकम टैक्स ट्राइब्यूनल के पास जाने का विकल्प बचा हुआ है।

9 जून, 2010 को गिलानी के यहां मारे गए छापे में 10.2 लाख रुपये और 10 हजार अमेरिकी डॉलर के साथ-साथ महंगी जूलरी खरीदने के सबूत के तौर पर कई रसीदें मिली थीं। इसके अलावा जमीन और गाड़ियां खरीदने के कागजात भी बरामद हुए थे। आमदनी के तौर पर गिलानी ने पूर्व विधायक के रूप में मिलने वाले पेंशन के अलावा खेती से सालाना 10 हजार रुपये की कमाई दिखाई थी। आईटी अधिकारियों के गले यह बात नहीं उतरी कि इतनी कम आमदनी में इतने महंगे सामान और गाड़ियां आदि खरीदी जा सकती हैं।

आईटी अधिकारियों ने तब आकलन किया था गिलानी के घर में हर महीने एक से डेढ़ लाख रुपये खर्च किया जा रहा है। उनके घर में 15 नौकर थे और उनकी पत्नी ने खुद कहा था कि रसोई में ही 25 हजार रुपये महीने खर्च हो जाते हैं।

भाजपा के दवाब पर झुकी सरकार, गिलानी पर दर्ज होगा मुकदमा

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अलगावादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी और कई अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए दिल्ली पुलिस को हरी झंडी दे दी है। गिलानी ने इस सप्ताह की शुरुआत में एक सेमिनार में कथित तौर पर 'नफरत फैलाने वाला भाषण' दिया था।

मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि विधि विभाग से मिले परामर्श में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया गिलानी और अन्य के खिलाफ ऐसे वक्तव्य देने का मामला दर्ज किया जा सकता है, जो लोगों के बीच फूट डालने की कोशिश की तरह हो। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस से कहा गया है कि वह गिलानी के खिलाफ मामला दर्ज करे और पुलिस संभवत: जल्दी ही मामला दर्ज कर ले। वहीं जम्मू-कश्मीर के तीनों वार्ताकारों का बहिष्कार करने की अपील करने वाले गिलानी रविवार को कश्मीर लौट गए। नई दिल्ली में गिलानी के भाषण के बाद भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई थी।

भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा था कि ऐसा भाषण अस्वीकार्य है। क्योंकि किसी को भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ऐसा अधिकार नहीं है, जो देश को तोड़ने वाली हो। उन्होंने कहा था कि यह देश के खिलाफ एक अपराध है। वहीं भाजपा नेता के आरोपों पर गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा था कि गिलानी ने जो भाषण दिया है, दिल्ली पुलिस उसमें कानून के मुताबिक कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा था कि अगर ऐसा पता चलता है कि कानून का उल्लंघन हुआ है, तो दिल्ली पुलिस कानूनन कार्रवाई करेगी।

कश्मीर में आजादी की मांग देशद्रोह नहीं ???

बीजेपी का कहना है कि देश का संविधान अधिकारियों को अलगाववादी भाषणों पर रोक लगाने का अधिकार देता है पर सिविल सोसाइटी के कई लोग इस राय से इत्तफाक नहीं रखते।

पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त और कश्मीर कैडर के आईएएस वजाहत हबीबुल्लाह ने साफ कहा, ' हमें आजादी लफ्ज से डरना नहीं चाहिए। खासकर अगर कोई भारत की सीमा और संविधान के दायरे में ज्यादा आजादी की मांग कर रहा हो। 'लेकिन उनके मुताबिक अगर कोई भारत से आजाद होने की बात करता है तब भी हमें कठोर कानूनी कार्रवाई के बदले उनके साथ बहस शुरू करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ' कानून की बातें अपनी जगह हैं, मुझे लगता है कि सैयद अली शाह गिलानी और अरुंधती रॉय के भाषणों के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का असर उल्टा होगा। इससे डर जाहिर होगा, यह संदेश जाएगा कि देश की अटूट एकता में हमारा भरोसा कमजोर है। '

नागरिक अधिकारों की वकालत के लिए जाने जाने वाले एडवोकेट प्रशांत भूषण कहते हैं कि रॉय और गिलानी के भाषणों के लिए उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का सवाल ही नहीं उठता। वह बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ 1962 में केदारनाथ बनाम पंजाब सरकार केस में साफ कर चुकी है कि जब तक सशस्त्र विद्रोह या हिंसा के इस्तेमाल की अपील न हो तब तक कुछ भी राजद्रोह नहीं है।

स्वतंत्रता के नाम पर देशद्रोह का प्रसार करने की छूट नहीं दी जा सकती : भाजपा

कश्मीर कीआज़ादीके विषय पर कल राष्ट्रीय राजधानी में हुई विचार गोष्ठी की कड़ी आलोचना करते हुए भाजपा ने आज कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसी हरकतें अस्वीकार्य हैं और केन्द्र आंख मूंदने की बजाय दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करे।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने कहा, ‘‘सरकार की नाक के नीचे दिल्ली में कल अलगाववादी समूहों का एकत्र होकर देशद्रोह का प्रसार करने से राष्ट्र सकते में है। लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश से अलग होने के अधिकार को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।’’ उन्होंने कहा संविधान में दिए भाषण की स्वतंत्रता के अधिकार को देश के खिलाफ प्रयोग नहीं किया जा सकता है।

ऐसा करने वालो के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए संप्रग सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह देशद्रोह का प्रसार करने वालों के विरूद्ध कार्रवाई करके उन्हें दंडित करे।

यहां कल ‘‘आज़ादी--एकमात्र रास्ता’’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में अलगाववादी हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी सहित कई अलगाववादियों के अलावा नक्सलवाद और खालिस्तान के समर्थक मौजूद थे।

देशद्रोही सैयद अली शाह गिलानी पर दिल्ली में जूता पड़ा

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी गुट के नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौजूदगी से दिल्ली में एक कार्यक्रम में अच्छा-खासा बवाल हो गया। कुछ कश्मीरी पंडितों ने वहां जमा होकर नारेबाजी करते हुए गिलानी को वहां से बाहर निकालने की मांग की। भीड़ में से किसी ने गिलानी की तरफ जूता भी उछाला।

दिल्ली के एलटीजी ऑडिटोरियम में 'आजादी- एक मात्र रास्ता ' पर सेमिनार का आयोजन किया गया था। इसमें कई कट्टरपंथी और कश्मीर को भारत से अलग करने के विचार का समर्थन करने वाले कई जाने-माने लोग भाग ले रहे थे। जैसे ही गिलानी बोलने के लिए खड़े हुए करीब 70-75 कश्मीरी पंडित वहां जमा होकर 'भारत माता की जय ' और ' वंदे मातरम् ' के नारे लगाने लगे। वे लोग गिलानी को वहां से हटाने की मांग कर रहे थे।

इस समूह में फेसबुक पर सक्रिय कुछ राष्ट्रवादी देशभक्तों, लोवी भरद्वाज , अमित आर्य , देवेंदर शर्मा , अग्रवाल जी आदि भी थे, जिन्हें इस हंगामे के कारण गिरफ्तार भी कर लिया गया था और देश शाम उनकी रिहाई हुई.

इसी शोर-शराबे में किसी ने मंच पर बैठे गिलानी की तरफ जूता उछाल दिया लेकिन जूता उन्हें नहीं लगा। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और आयोजकों ने मंच पर बैठे नेताओं की हिफाजत के लिए मंच को घेर लिया। पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बाहर निकाला।

विरोध प्रदर्शन के वक्त इस मुद्दे पर एसएआर गिलानी बोल रहे थे जिन्हें पहले संसद पर हमले का आरोपी बनाया गया था और बाद में छोड़ दिया गया था

अलगाववादी नेता मसरत आलम गिरफ़्तार, घाटी में फिर कर्फ़्यू

कश्मीर में पुलिस ने एक अलगाववादी नेता मसरत आलम को गिरफ़्तार कर लिया है.उनकी गिरफ़्तारी के बाद मंगलवार को कश्मीर घाटी के अधिकांश इलाक़ों में कर्फ़्यू लगा दिया गया है.मसरत आलम को सोमवार रात को श्रीनगर के बाहरी इलाक़े तलबल से गिरफ़्तार किया गया.

पुलिस महानिदेशक एसएम सहाय ने कहा,''जी हाँ, हमने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया है.''

आलम जून में भारत सरकार के ख़िलाफ़ 'कश्मीर छोड़ो' आंदोलन छेड़े जाने के बाद से भूमिगत था. हालांकि सैयद अली शाह गीलानी ने अगस्त में अपनी रिहाई के बाद इस आंदोलन की कमान संभाल ली थी. आलम को पृथकतावादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का क़रीबी और उन्हें कश्मीर घाटी के प्रदर्शनों के लिए ज़िम्मेदार माना जा रहा है.

उल्लेखनीय है कि कश्मीर छोड़ो आंदोलन के बाद कश्मीर घाटी में बंद और प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया था.इस आंदोलन के कारण पिछले चार महीनों में जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त हो गया है.इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फ़ायरिंग में सौ से अधिक लोग मारे गए हैं

कश्मीर में खुले 100 दिन बाद स्कूल, हुर्रियत ने किया विरोध

कश्मीर घाटी में स्कूल अशांति के कारण करीब 100 दिन तक बंद रहने के बाद, आज फिर खुल गए और कई इलाकों में कर्फ्यू तथा निषेधाज्ञा के बावजूद सुरक्षा बलों ने विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को रोके बिना जाने दिया।

बहरहाल, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने अभिभावकों से बच्चों को स्कूल, कॉलेज न भेजने का आह्वान किया है जिसकी वजह से स्कूलों में उपस्थिति क्षीण रही।

घाटी में जारी अशांति के कारण शिक्षा प्रणाली को नुकसान हुआ है। यहाँ 11 जून को पुलिस द्वारा आँसू गैस के गोले छोड़ने के कारण 17 वर्षीय एक छात्र के मारे जाने के बाद हिंसा शुरू हुई थी।

छात्रों और स्कूलों के कर्मचारियों को जाने आने में सुविधा मिले और शिक्षण संस्थाओं का कामकाज निर्बाध हो सके, यह सुनिश्चित करने के लिए उमर अब्दुल्ला की सरकार ने राज्य परिवहन निगम की 170 से अधिक बसें शहर के 11 मार्गों पर चलाई हैं।

स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति करीब 20 फीसदी ही रही लेकिन प्रशासन को उम्मीद है कि कल से स्कूल जाने वाले छात्रों की संख्या बढ़ेगी।

राज्य के शिक्षा मंत्री पीरजादा मोहम्मद सईद ने कल घाटी में अध्ययन प्रक्रिया फिर से शुरू करने और सालाना परीक्षाएँ आयोजित करने की व्यायक योजना का ऐलान किया था।

अलगाववादियों से मिलना उचित नहीं था - सुषमा स्वराज

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्यों की कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से मुलाकात पर अपनी आपत्ति जताते हुए भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने आज कहा कि अलगाववादियों से मुलाकात दल के कार्यक्रम में शामिल नहीं थी और ही यह सामूहिक फैसला था।

सुषमा ने कहा ‘‘यह उनका स्वयं का फैसला था, पूरे प्रतिनिधिमंडल का नहीं। अगर कोई जाना चाहता था, तो हम उन्हें कैसे रोक सकते थे? वे लोग गए, पर हमारा फैसला वहां नहीं जाने का था, इसलिए हम नहीं गए।’’ सुषमा से संवाददाताओं ने पूछा था कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्यों ने अलगाववादी नेताओं से बातचीत की और कुछ नेता कल उनके घर जाकर उनसे मिले, इस बारे में उनकी क्या प्रतिक्रिया है।

प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्यों ने हुर्रियत के कट्टरपंथी और उदारवादी धड़े के प्रमुखों सय्यद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारुक से उनके घरों पर और जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक से उनके कार्यालय में मुलाकात की थी।

सुषमा ने कहा कि अलगाववादियों से मिलने के मुद्दे पर प्रतिनिधिमंडल में विभाजन का कोई प्रश्न नहीं था।

पासवान ने गिलानी से उनके घर पर मुलाकात की

लोक जनशक्ति पार्टी के नेता राम विलास पासवान ने आज हुर्रियत के कट्टरपंथी नेता सय्यद अली शाह गिलानी से उनके घर पर मुलाकात की। पासवान ने इस दौरान घाटी में रह रहे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जाहिर की।

हुर्रियत सूत्रों ने बताया कि पासवान ने इस दौरान घाटी में रह रहे पंडितों और सिखों समेत अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की।

उन्होंने बताया कि गिलानी ने पासवान को आश्वासन दिया कि अल्पसंख्यक भी कश्मीरी समाज का भाग हैं और वे यहां सुरक्षित हैं।

गिलानी ने इस बात पर भी जोर दिया कि जहां-जहां मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, वहां अल्पसंख्यकों की रक्षा करना मुस्लिमों का कत्र्तव्य है।

हुर्रियत अध्यक्ष ने कहा कि इस्लाम की छवि को अनावश्यक तौर पर धूमिल किया जा रहा है, जबकि इस्लाम जीवन, सम्मान और अल्पसंख्यकों की स्वतंत्रता का अधिकार देता है।

इस बैठक के दौरान गिलानी ने कश्मीर में नागरिकों की हत्या का मुद्दा भी उठाया।

पासवान ने गिलानी को आश्वासन दिया कि वह कश्मीर के लोगों की परेशानियों का मुद्दा संसद में उठाएंगे।

इसके पहले कल माकपा नेता सीताराम येचुरी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय एक दल हुर्रियत नेता गिलानी से उनके घर में मिला था।

कश्मीर में गिलानी को फिर से गिरफ्तार करने का नाटक हुआ

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी नेता सैयद अली शाह गिलानी को शहर के बाहरी इलाके में स्थित उनके हैदरपुरा निवास से ऐहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया गिलानी को आरपीसी की धारा 107 (जिसमें किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तारी में रखा जा सकता है जो भीड़ को उकसाए जिससे कानून व्यवस्था के लिए समस्या पैदा हो सकती है) और धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया गया है क्योंकि ऐसी आशंकाएं हैं कि शांति और व्यवस्था के लिए खतरा बन सकते हैं।

साप्ताहिक रूप से आंदोलन संबंधी कैलेंडर जारी कर रहे गिलानी को हुमहामा पुलिस थाने ले जाया गया। उन्हें इससे पूर्व कश्मीर घाटी में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने के बाद 20 जून को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें चार अगस्त को रिहा कर दिया गया था।

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