कांग्रेसियों ने अन्ना को काले झंडे दिखाए,गाड़ी पर किया पथराव
एनडीए के भारत बंद को अन्ना ने भी समर्थन दिया
पेट्रोल की कीमतों में साढ़े सात रुपये की ऐतिहासिक बढ़ोतरी के विरोध में एनडीए ने गुरुवार को भारत बंद का ऐलान किया है। बंद को कई राजनीतिक पार्टियों ने भी समर्थन दिया है। राजनीतिक पार्टियों के अलावा समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी इस बंद को अपना समर्थन दिया हैं। राजनीतिक पार्टियों के इस बंद और जनता का गुस्सा देखते हुए सभी राज्यों में सुरक्षा के इंतजाम चाक-चौबंद कर दिए गए हैं।संदेह के दायरे से दूर रहें प्रधानमंत्री - राजीव प्रताव रूडी
कोयला ब्लॉक आवंटन में आरोप साबित होने पर सार्वजनिक जीवन से संन्यास लेने संबंधी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान पर भाजपा ने कहा है कि शीर्ष पदों पर रहने वालों को संदेह के दायरे से दूर रहना चाहिए.आईपीएल विवादों पर कीर्ति आजाद का अनशन, रामदेव जी और अन्ना को भी न्योता
आईपीएल में एक के बाद एक हो रहे विवादों को लेकर भाजपा सांसद कीर्ति आजाद काफी खफा है। उन्होंने आईपीएल के खिलाफ अनशन पर बैठने का फैसला किया है। आजाद ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और योग गुरू बाबा रामदेव को भी अनशन में शामिल होने का न्योता दिया है। टीम अन्ना अब चलेगी संघ की राह पर

अन्ना दो कौड़ी का आदमी है - कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव हरिप्रसाद

अपने आंदोलन की कामयाबी न देख अन्ना को याद आये रामदेव
फिल्म नगरी मुंबई के बॉक्स ऑफिस पर अपने आंदोलन को पहले जैसी अपार कामयाबी न मिलते देख, अन्ना ने अपनी स्टार कास्ट में फेरबदल का फैसला किया है। लोकपाल आंदोलन के पार्ट-3 में अब उन्होंने पुराने सह-कलाकार बाबा रामदेव को भी न्योता भेजा है।इसी तरह पिछले कुछ समय के दौरान साथ छोड़ने वाले अन्य नेताओं और संगठित समूहों को जोड़ने की कोशिश भी शुरू हो गई है।भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का मिलकर आगाज करने वाले अन्ना और रामदेव के रिश्तों में पिछले नौ महीने के दौरान बहुत उतार-चढ़ाव आए हैं।
अब तक संसाधनों के बजाय लोगों के स्वत: स्फूर्त समर्थन पर चलते रहे आंदोलन को मुंबई में वैसी भीड़ नहीं खींच पाता देख अन्ना ने तुंरत अपने पुराने साथी को याद किया। लंबे समय बाद बाबा रामदेव से उनकी फोन पर बातचीत हुई। तरत-फुरत में एलान भी हो गया।
अन्ना ने कहा कि तीन दिन के उनके अनशन के बीच रामदेव भी आएंगे। हालांकि अब तक रामदेव की ओर से अपने कार्यक्रम का एलान नहीं हुआ है। इसी तरह टीम अन्ना अपने कुछ पुराने साथियों को भी टटोल रही है। इनमें से कुछ के लौटने से बड़ी संख्या में उनके समर्थक भी जुड़ सकते हैं।टीम अन्ना के लिए राहत की बात यह रही कि यहां फिल्मी दुनिया वालों ने उन्हें ज्यादा निराश नहीं किया।
संगीतकार विशाल से लेकर मशहूर कलाकार अनुपम खेर और निर्देशक प्रीतीश नंदी भी देर तक मंच पर जमे रहे। इसी तरह प्रतिज्ञा सीरियल में ठाकुर सज्जन सिंह की भूमिका निभाने वाले अनुपम श्याम ने भी यहां अन्ना को जनता का असली नायक बताया। अगले दो दिन के दौरान भी अन्ना को फिल्मी कलाकारों का सहयोग मिलने की उम्मीद है।
अन्ना संघ के कार्यक्रम में आकर स्वयंसेवकों को ट्रेनिंग दे चुके हैं - भागवत
एक तरफ़ अन्ना हजारे संघ से रिश्तों को नकारते हैं, तो दूसरी तरफ़ संघ अन्ना से ग़हरे संबंध की बात करता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आज कोलकाता में एक बार फिर दावा किया है कि न केवल संघ से अन्ना के पुराने संबंध हैं, बल्कि वे संघ के कार्यक्रम में आकर स्वयंसेवकों को ट्रेनिंग भी दे चुके हैं।भागवत ने कहा कि संघ के कहने पर ही अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू किया है। यह बात और है कि संघ ने इस आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग नहीं लिया और न ही अन्ना ने इसके लिए औपचारिक समर्थन मांगा है।
भागवत ने कहा कि इसके बावजूद संघ अप्रत्यक्ष तौर पर अन्ना के आंदोलन का समर्थन कर रहा है। भागवत ने यह भी कहा कि अन्ना हजारे से उनकी मुलाक़ात जून महीने में ही होनी थी, लेकिन दोनों ही कहीं और व्यस्त हो गए और यह मुलाक़ात नहीं हो पाई।
हमारे आंदोलन को क्रूरता और अन्ना को धूर्तता से दबाया गया
बाबा रामदेव ने कांग्रेस को खलनायक करार देते हुए उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके आंदोलन के बाद अन्ना सामने आए। लेकिन उनके आंदोलन को क्रूरता और अन्ना को धूर्तता से दबाया गया।योग शिविर पर जाने से पहले चलते चलते पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस पर परोक्ष हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जनता का धन लूटने और देश भक्तों की हत्या कराने वाले गुनाहगारों की पार्टी को वोट न दें। जो लोग अच्छे हों उन्हें आगे बढ़ाएं।
उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने से परिवर्तन नहीं होता वह वैचारिक जागरण के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं।अभी और पंगे मत कराओउत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव में वोट देने के मामले पर बाबा ने कहा कि एक से पंगा ले रखा है अभी और पंगे मत कराओ।
संघ परिवार से नजदीकियों पर बोले जो सच्चाई का साथ दे रहे हैं वे हमारे साथ हैं। अन्ना के आंदोलन को उत्तर भारत में मिली सफलता पर उन्होंने कहा कि हमने डंडे खाये तब अन्ना आये।बंद हो बड़े नोट की छपाईबड़े नोट पर रोक के सवाल पर उन्होंने कहा कि विकसित देशों में कुल मुद्रा का दो प्रतिशत ही बड़ा नोट छापा जाता है।
जबकि भारत में पहले से ही 20 प्रतिशत बडे़ नोट छप रहे हैं। इन बड़े नोटों के कारण ही भ्रष्टाचार फैल रहा है।अनुशासनहीनता पर कार्रवाईहरिद्वार स्थित समिति कार्यालय से 51 लोगों को निकाले जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता करेंगे। नियम तोड़ेंगे तो क्या उन्हें अपने साथ रखा जायेगा।
उन्होंने कहा कि 51 लोगों की चर्चा देश भर में है लेकिन बाबा ने पांच हजार से अधिक लोगों को रोजगार दिया है। यह किसी को नहीं दिखता।
वंदे मातरम और तिरंगा सांप्रदायिक, अन्ना खाली बर्तन - अरुंधति
अरुंधति रॉय ने अन्ना हजारे के आंदोलन पर हमला बोलते हुए राष्ट्रगीत वंदे मातरम और राष्ट्रीय झंडे को सांप्रदायिक और बांटने वाला करार दिया है। रवींद्र नाथ टैगोर का हवाला देते हुए रॉय ने कहा, '1937 में टैगोर ने कहा था कि यह अनुचित राष्ट्रगीत है, यह बांटता है। एक टीवी चैनल से बातचीत में अन्ना पर निशाना साधते हुए राय ने कहा, 'अन्ना का आंदोलन इसलिए अहिंसक था क्योंकि पुलिस डरी हुई थी और उसने लाठियां नहीं उठाईं। इस आंदोलन के पहले दौर में मंच की पृष्ठभूमि में भारत माता की तस्वीर लगी थी लेकिन दूसरे चरण में इसकी जगह गांधी जी की फोटो ने ले ली।
अरुंधति ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की जमकर आलोचना की है। अरुंधति ने जनलोकपाल बिल को भी बेहद खतरनाक कानून करार दिया है जिसकी मांग अन्ना हजारे और उनकी टीम कर रही है। लेखिका ने अन्ना को ‘खाली बर्तन’ कहकर उनका मजाक भी उड़ाया।
रॉय ने कहा कि जनलोकपाल बिल में भी काफी कमियां है, लेकिन इसे जबरदस्ती थोपा नहीं जा सकता है, ऐसा नहीं है कि सरकारी लोकपाल बिल भी पूरी तरह से सही है, लेकिन इस मसले को आम राय से संसद में सुलझाना होगा न कि भीड़ इकट्ठा करने के बाद अनशन करके।
अरुंधति ने कहा, ‘जनलोकपाल पर संसद में सहमति बनने पर सभी खुश हैं और लोग इसे जीत करार दे रहे हैं। मैं भी इस पर खुश हूं क्योंकि मुझे लगता है कि जनलोकपाल बिल अपने मौजूदा स्वरुप में संसद से पास नहीं हो सकता। इसकी कई वजहें भी हैं। सबसे पहला तो यह कि यह कानून मेरे मुताबिक बेहद खतरनाक है।’
अरुंधति ने कहा, ‘मेरा मानना है कि अन्ना हजारे खाली बर्तन की तरह हैं जिसमें आप अपनी मर्जी के मुताबिक पानी भर सकते हैं। वह गांधी की तरह नहीं हैं जो सार्वजनिक जीवन में अपने आप में एक खासी शख्सियत थे। अन्ना हजारे अपने गांव के लिए खास हो सकते हैं लेकिन अभी हाल में जो कुछ हुआ उसमें उनका कोई योगदान नहीं था।'
अरुंधति ने कहा कि अन्ना कौन हैं, उनका किन लोगों से जुड़ाव रहा है और उन्होंने पहले क्या किया है, उसे लोग जानते हैं।’
इससे पहले एक अखबार में लिखे लेख में रॉय ने लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जुट करने के लिए अन्ना के तरीके और अभियान को गलत बताया था।
उसने अन्ना पर सवाल उठाते हुए कहा कि हजारे अपने गृहराज्य महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या पर मौन क्यों हैं? रॉय ने लिखा कि अन्ना के तरीके भले ही गांधीवादी हों, लेकिन मांगें सही नहीं हैं। उनके अनशन का मकसद सिर्फ नया लोकपाल बिल पारित करवाना है।
वही फिल्मकार अशोक पंडित का कहना है कि ‘अरुंधति रॉय कहती हैं कि फोर्ड फाउंडेशन ने अन्ना हजारे को आर्थिक मदद की। मैं यह जानना चाहता हूं कि लोगों की हत्या करने के लिए गिलानी को कौन पैसे देता है जिसकी वो समर्थक हैं।’ -
अग्निवेश को 19 सितंबर तक गिरफ्तार करने के आदेश
स्वामी अग्निवेश के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। हिसार में उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी अश्वनी कुमार मेहता की कोर्ट ने डीएसपी अमरीक सिंह को निर्देश दिए हैं कि वह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले में नामजद स्वामी अग्निवेश को 19 सितंबर तक गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करें।
कोर्ट ने शुक्रवार को ही मामले की सुनवाई के दौरान अग्निवेश को पेश करने के लिए कहा था। सोमवार को कोर्ट में मामले के इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर दलबीर ने कहा कि वह दो बार अग्निवेश के जंतर-मंतर (दिल्ली) स्थित कार्यालय पर जाने के बावजूद वह वहां नहीं मिले। इस पर कोर्ट ने कहा कि डीएसपी खुद अग्निवेश को गिरफ्तार कर 19 सितंबर तक कोर्ट में पेश करें।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीन तायल ने 23 मई, 2011 को कोर्ट में इस्तगासा दायर कर स्वामी अग्निवेश के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला दर्ज करने की अपील की थी। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर सिटी पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
पुलिस ने कई बार अग्निवेश को नोटिस भेजा लेकिन वह न तो पुलिस तफ्तीश में शामिल हुए और न ही कोर्ट में पेश हुए। अग्निवेश की तरफ से उनके वकील ने जरूर पुलिस को बयान दिया था कि वह अन्ना हजारे के साथ हैं इसलिए जांच में शामिल नहीं हो सकते। इस बयान को काफी नहीं माना गया। इसके बाद कोर्ट ने अग्निवेश के वारंट जारी किए लेकिन वह शुक्रवार को भी पेशी पर नहीं पहुंचे।
उधर, कपिल सिब्बल से टीम अन्ना के खिलाफ बातें करते अग्निवेश का वीडियो सामने आने के बाद जनता भी उनसे नाराज हो गई है। सोमवार को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद सहित देश के कई शहरों में अग्निवेश के पुतले फूंके गए और उनके विरोध में नारे लगाए गए।
इस बीच, टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने सार्वजनिक रूप से यह साफ कर दिया है कि अग्निवेश अब टीम के सदस्य नहीं रह गए हैं। वह टीम अन्ना की कोर कमेटी में शामिल थे, लेकिन वीडियो के जरिए उनकी 'दगाबाजी' सामने आने के बाद केजरीवाल ने उनके टीम का सदस्य नहीं रहने की बात सार्वजनिक रूप से बता दी है।
कांग्रेसी सांसद अन्ना हजारे को गद्दार और देशद्रोही बताया
मध्यप्रदेश में देवास-शाजापुर के सांसद सज्जन सिंह ने अन्ना हजारे को गद्दार और देशद्रोही बताया है.आज देश ही नहीं विदेश में भी अन्ना हजारे के अनशन और आंदोलन को भ्रष्टाचार को ख़त्म करने की दिशा में क्रांतिकारी पहल के तौर पर माना जा रहा है.
अन्ना को मिसाल बताया जा रहा है लेकिन मध्य प्रदेश के देवास-शाजापुर के कांग्रेसी सांसद सज्जन सिंह वर्मा की नज़रों में अन्ना हजारे का आंदोलन देश के साथ गद्दारी है.सज्जन सिंह वर्मा का कहना है, “हमारे देश को अभी चीन जैसी शक्तियों से खतरा है. उसने पाकिस्तान में बेस बना लिया है. ऐसे में देश की अस्मिता की रक्षा करना हमारे लिए ज़्यादा अहम है. इस समय कोई व्यक्ति अगर भड़काऊ काम करता है तो मैं उन्हें गद्दार कहूंगा, देशद्रोही कहूंगा.”
सज्जन सिंह ने अन्ना को सलाह दी कि आंदोलन करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन वे सही तरीका इस्तेमाल करें.
अभी तक कांग्रेस या विपक्ष के किसी नेता ने सज्जन सिंह के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
टीम अन्ना को जन लोकपाल बिल पारित होने पर अब भी संदेह
टीम अन्ना को जन लोकपाल बिल पारित होने पर अब भी संदेह है। टीम के सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार और राजनीतिक दलों पर अभी भी भरोसा नहीं किया जा सकता। इन पर कड़ी नजर रखनी होगी, ताकि संसद में पारित प्रस्ताव के अनुकूल जन लोकपाल बिल पारित हो सके। उन्होंने मांग की कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुला कर एक महीने के भीतर बिल पारित कराए।
टीम अन्ना को डर इस बात का है कि मामला स्थायी संसदीय समिति में लटक सकता है। उसे लगता है कि 27 अगस्त को संसद में पारित प्रस्ताव का हश्र संसदीय समिति में जाने के बाद वही हो सकता है जो बाकी प्रस्तावों का होता है।
जिस तरह इस बिल के साथ जनभावना जुड़ी हुई है, उसे देखते हुए सरकार के लिए इसे लटकाना आसान नहीं होगा। राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव मानते हैं कि अगर सरकार यह बिल लाने में देरी करती है या कमजोर विधेयक लाती है तो भ्रष्टाचार से निपटने के मामले में उसकी विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी। यह जोखिम सरकार को कदम पीछे खींचने से रोकेगा।
वरुण गाँधी के भाषण में दिखी राहुल गाँधी से ज्यादा देशभक्ति
पढ़िए वरुण का पूरा भाषण... इस आंदोलन ने देश के युवाओं को संगठित कर दिया है। उनकी आवाज को एक कर दिया और यह सुनिश्चित कर दिया है कि जब युवा खड़े होंगे तो देश में बदलाव आएगा। यह भारत के लिए एक नया अनुभव है।
पिछले दो तीन हफ्तों से मैं भी इस बहस को सुन-देख रहा हूं। मुझे लगता है कि संसद और देश के लोगों के बीच एक खाई पैदा की जा रही है। यदि ऐसा है तो फिर यह देश के भविष्य के लिए खतरा है।
जब आप इतिहास को पढ़ते हैं तो यह एहसास होता है कि गुलामी के वक्त सरकार सर्वोपरि थी लेकिन आजादी के बाद देश की जनता सर्वोपरी हो गई। आज बीजेपी और कई अन्य पार्रटियों ने संसद में देश की जनता के प्रति विश्वास जाहिर किया है। यह लोगों की आस्था का सम्मान है। हम यह कह सकते हैं कि यह एक शांत क्रांति थी। लेकिन यह भी सच है कि यह शांत नहीं रही है। इस क्रांति ने देश को जगा दिया है।
आज देश हमारी ओर उम्मीद से देख रहा है। देश को हम पर विश्वास है। पिछले दो हफ्तों में हमने देखा है कि लोग इस बात पर बहस कर रहे हैं कि संसद की गरिमा को बचाया जाना चाहिए। लेकिन यहां सवाल यह है कि सांसदों की गरिमा की हम ख्याल रखते हैं तो फिर लोगों की गरिमा का ख्याल कौन रखेगा।
हमे यह स्वीकार करना पड़ेगा की लोग ही सर्वोपरि है। हमारे लोकतंत्र में एक बार चुने जाने के बाद नकारे जाने का प्रवाधान नहीं है। लोग ही हमारी ताकत हैं। हमें जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतरा चाहिए। आज हम भ्रष्टाचार पर बहस कर रहे हैं। इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या संसद का यह बहस सत्र बुलाया जाना सही है या नहीं। मैं इस बात पर बहस नहीं करना चाहूंगा।
मैं उत्तर प्रदेश से आता हूं। उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में बाढ़ आ गई है। लोगों को ज्यादा से ज्यादा हजार रुपए की राहत मिलती हैं। लेकिन जब हम कॉमनवेल्थ या २जी घोटाले पर नजर डालते हैं तो यह लाखों करोड़ में होता है। यह इतनी रकम होती है जिससे कई हजार गांवों का विकास किया जा सकता है। कई हजार कॉलेज खोले जा सकते हैं।
लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। आप मेरी आवाज को बंद नहीं कर सकते। मैं सवाल करता हूं कि क्या हमारे देश में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त नहीं हो गई है? तथ्य अभी भी वही है।
हमारे सभी व्यवस्थाएं टूट गई हैं। कारण हमारे पास धन नहीं है। कितनी योजनाए हैं जो सही उद्देश्य के साथ शुरु की जाती हैं लेकिन पैसे की कमी के कारण पूरी नहीं हो पाती। क्यों? हम भ्रष्टाचार की बात कर रहे हैं। लेकिन क्या हमारे पास भ्रष्टाचार से लड़ने का कोई सिस्टम है? क्या हम न्यायव्यवस्था, सतर्कता विभाग, सीबीआई पर सवाल नहीं उठा सकते?
देश की सड़कों से आ रही आवाजों से साफ होता है कि हमारे देश में अब कोई व्यवस्था नहीं रह गई है। हम ये क्यों सोच लेते हैं कि एक बार चुने जाने के बाद हम ही सबकुछ हैं। हमें यह समझना होगा कि युवा सड़क पर क्यों हैं।
वो सड़क पर इसलिए हैं कि हमारे देश को भ्रष्टाचार ने ध्वस्त कर दिया है। रिश्वत देकर नौकरी पाने वाले उम्र भर के लिए अपना आत्मसम्मान खो देते हैं। युवा सड़क पर इसलिए हैं क्योंकि वो सम्मान से जीना चाहते हैं। रिश्वत और भ्रष्टाचार सिर्फ एक खास वर्ग को ही प्रभावित नहीं करता है। इससे हमारा पूरा समाज प्रभावित होता है।
इस बात को बार बार कहा जा रहा है कि अन्ना हजारे के आंदोलन के पीछे बीजेपी है। लेकिन तथ्य यही है कि यह आंदोलन लोगों का है। ये वो ज्वालामुखी है जो लंबे वक्त से शांत था। लेकिन आज अन्ना हजारे और लोगों के पीछे खड़े होकर बीजेपी सम्मानित महसूस कर रही है। और अब हम सामने आकर इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।
मेरे जीवन का सबसे अच्छा अनुभव वह था जब मैं रामलीला मैदान में युवाओं के बीच जाकर बैठा। वहां एक व्यक्ति ने मुझसे कहा कि अन्ना हजारे एक व्यक्ति नहीं है एक सोच है। वो हमारे देश को फिर से महान बनाने के लिए इस सोच की जीत आवश्यक है। मैं सिर्फ यह कह रहा हूं कि हम सब लोग, चाहे कांग्रेस हो, हम हो या वामपंथी हो उन्हें हमारे देश के नवनिर्माण के लिए इस सोच को जिताना चाहिए।
अन्ना को एक बार फिर धोका दे रही कांग्रेस
प्रशांत भूषण ने कहा कि कल उन्हें यह भरोसा दिया गया था कि आज संसद में वोटिंग होगी लेकिन संसद में वोटिंग नहीं हो रही। प्रशांत भूषण ने कहा कि हमें अभी यह बताया गया है कि इस पर वोटिंग नहीं होगी। बहस नियम १९३ के तहत हो रही है इसलिए इस बहस के आधार पर प्रस्ताव पास नहीं होगा।
हमारा कहना यह है कि कल जब नियम १८४ के तहत नोटिस दिया गया था तो फिर उसके तहत बहस क्यों नहीं हुई। पूरे देश की जनता को यह जानने का हक है कि कौन सी पार्टी और कौन से सांसद किस तरफ खड़े हैं। आज सदन में वोटिंग न कराना अन्ना हजारे की मांग की अनादर है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार धोखा कर रही है। चार दिन में तीन बार ऐसा हो गया है कि सरकार एक बार बात मानती है, फिर मुकर जाती है। सरकार कह रही है कि भाजपा आपके खिलाफ वोट करना चाहती है। पर यह सदन को तय करने दिया जाना चाहिए। कल रात को वोटिंग का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब कहा जा रहा है कि वोटिंग में भाजपा आपके विरोध होगी।
टीम अन्ना की ओर से सरकार का यह रुख सामने आने के कुछ ही मिनट पहले रामलीला मैदान के मंच से टीम अन्ना की सदस्य किरण बेदी ने कह दिया कि देश को जीत मुबारक हो। बेदी ने बताया कि टीम अन्ना सरकार से मिलने गई है। संसद में ज्यादातर पार्टियों ने अन्ना की मांगों का समर्थन किया है। कांग्रेस ने भी कुछ शर्तों के साथ प्रस्ताव का समर्थन कर दिया है।
लेकिन माना जा रहा है कि बेदी ने जोश में आकर तथ्यों की जांच किए बिना जीत का ऐलान कर दिया, क्योंकि कुछ ही देर बाद उन्होंने भूल सुधार करते हुए कहा कि अभी प्रार्थना की जरूरत है। अन्ना जैसा प्रस्ताव चाहते हैं, वैसा कुछ होता नहीं दिख रहा। इसलिए प्रार्थना करें कि उन्हें सदबुद्धि आए।
राहुल गांधी के बयान की चौतरफा आलोचना
लोकपाल को अलग संवैधानिक संस्था बनाने के राहुल गांधी के बयान पर टीम अन्ना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.अन्ना की सहयोगी किरन बेदी ने बिना राहुल का नाम लिए कहा कि एक लोकपाल से भ्रष्टाचार दूर नहीं होगा तो कम से कम एक लोकपाल तो बनाना चाहिए.
किरन ने आगे कहा कि एवरेस्ट पर चढ़ने से पहले एक पहाड़ी पर तो चढ़ना होगा, कम से कम एक कदम तो आगे बढ़ाना चाहिए.
अन्ना के सहयोगी जस्टिस संतोष हेगड़े ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले वो जनलोकपाल बिल पास करवाएं क्योंकि लोकपाल को संवैधानिक संस्था बनाने में सरकार को 20-30 साल लगेंगे औऱ हम इसका इंतजार नहीं कर सकते.
गौरतलब है कि राहुल ने संसद में कहा था कि सिर्फ लोकपाल से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा, लोकपाल भी भ्रष्ट हो सकता है. राहुल गांधी ने पूरी बहस को एक नई दिशा देते हुए कहा कि चुनाव आयोग की तरह ही लोकपाल एक अलग संवैधानिक संस्था हो.
बीजेपी अन्ना हजारे के प्रयासों को प्रोत्साहित कर रही है - किरण बेदी
सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि सरकार भी अन्ना हजारे से यह लिखित आश्वासन चाहती है कि वह लोकपाल विधेयक पर प्रस्ताव पारित होने के बाद अपना अनशन तोड़ देंगे। कहा जा रहा है कि सरकार विपक्ष की सहमति के बाद प्रस्ताव पेश करेगी।
संसदीय कार्य राज्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि प्रस्ताव में सभी की भावनाओं का समावेश होगा।
इस बीच, टीम अन्ना के एक सदस्य ने कहा कि एक बार संसद लोकपाल विधेयक पर प्रस्ताव पारित कर दे तो हजारे अपना अनशन वापस ले लेंगे।
हजारे ने अपना अनशन समाप्त करने के लिए तीन शर्तें निर्धारित की हैं। इन शर्तों में सभी सरकारी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने, सभी सरकारी ऑफिसों में एक सिटीजन चार्टर बनाने और सभी प्रदेशों में लोकायुक्त की नियुक्ति पर संसद में चर्चा शामिल है।
74 वर्षीय हजारे ने कहा है कि अगर संसद जन लोकपाल विधेयक पर विचार-विमर्श करती है और सदन में इन तीन शर्तों पर कोई समझौता होता है, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
हजारे पक्ष की सदस्य किरण बेदी ने कहा, ' हमारी गरुवार रात बीजेपी नेतृत्व के साथ एक सार्थक
बातचीत हुई। हमें लगा कि वे हजारे के प्रयासों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। पेश किए गए प्रस्ताव पर गेंद अब सरकार के पाले में है। '
उन्होंने कहा, ' जैसा कल रात की बैठक में दिखा, अगर बीजेपी अहम मुद्दों का समर्थन करती है, तो आगे की जिम्मेदारी सरकार की बनती है। हजारे केवल तभी अपना अनशन तोड़ेंगे, जब संसद इन तीन मुद्दों पर प्रस्ताव पारित करेगी। '
संसद से सड़क तक बीजेपी अन्ना हजारे के साथ - गडकरी
बीजेपी ने अन्ना हजारे के जन लोकपाल विधेयक को संसद के बाहर और भीतर समर्थन का ऐलान किया है। पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने अन्ना को पत्र लिखकर संसद से सड़क तक उनके आंदोलन का समर्थन किया है। उन्होंने जनलोकपाल बिल को आधार बनाकर संसद में चर्चा कराने की भी मांग की।
उधर, देर रात बीजेपी के लालकृष्ण आडवाणी समेत दूसरे सीनियर नेताओं और टीम अन्ना के मेंबर्स की मीटिंग के बाद दोनों पक्षों ने इसे पॉजिटिव बताया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्ना के सहयोगी केजरीवाल ने कहा, 'बीजेपी हमारे बिल के ज्यादातर मुद्दों पर सहमत है। अब हम सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।'
सरकार और टीम अन्ना के बीच चल रहे टकराव के बीच अपनी भूमिका साफ न करने के लिए बीजेपी पार्टी के भीतर व बाहर हो रही आलोचनाओं से उबर आई है। गडकरी ने सरकार से अन्ना को लिखित आश्वासन देने व इस मामले में संसद को प्रक्रियाओं में न बांधने की भी मांग की ताकि अन्ना का अनशन जल्द से जल्द खत्म हो सके।
गडकरी का पत्र लेकर महासचिव जेपी नड्डा व विनय सहस्त्रबुद्धे अन्ना से मिले और जन लोकपाल विधेयक पर उनका समर्थन किया। इसके बाद गडकरी ने खुद इस मुद्दे पर पार्टी का रुख स्पष्ट किया। इसके बाद पार्टी में हलचल भी हुई और शाम को सर्वदलीय बैठक में पार्टी ने सरकारी लोकपाल को खारिज करते हुए अन्ना के जन लोकपाल विधेयक को दृष्टि में रखते हुए संसद में नया विधेयक लाने की मांग भी की।
सूत्रों के अनुसार, देर रात टीम अन्ना के साथ हुई चर्चा में बीजेपी नेताओं ने साफ किया कि वे प्रधानमंत्री को इसके दायरे में लाने पर सहमत हैं, साथ ही पार्टी न्यायपालिका के लिए अलग से न्यायिक आयोग के पक्ष में भी है। सासंदों के सदन से बाहर के आचरण को इसके दायरे में लाने व लोकपाल चयन समिति में सरकार के बाहर का बहुमत रखने के भी हक में है।
पार्टी लोकपाल को हटाने के मामले में भी पार्टी सरकार को अधिकार देने के बजाए महाभियोग की प्रक्रिया अपनाने के पक्ष में है। बीजेपी शुक्रवार को सदन में होने वाली बहस में अपने इन मुद्दों को पूरी ताकत से रखेगी।
मुहम्मद हनीफ ने मनीष तिवारी पर मानहानि करने का मुकदमा किया
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी के खिलाफ यहां की अदालत में याचिका दर्ज की गई है। तिवारी पर अन्ना हजारे को भ्रष्ट कहने और उनके समर्थक गांधीवादियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है।
याचिकाकर्ता मुहम्मद हनीफ चिश्ती ने मंगलवार को मजिस्ट्रेट कोर्ट में अपील की कि तिवारी के खिलाफ अन्ना की मानहानि करने का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
इस मामले पर 28 अगस्त को सुनवाई होगी।उल्लेखनीय है कि 14 अगस्त को कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे पर 'सिर से पांव तक भ्रष्टाचार में डूबे' होने का आरोप लगाया था।


