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जारी है हिन्दुओं पर अत्याचार, बांग्लादेश में संख्या घट कर 10%


बांग्लादेश की राजधानी ढाका में चारों ओर जाली से ढके ऑटो, जिसे यहां सीएनजी कहने का प्रचलन है, बेतरतीब रिक्शा की कतारों, लोगों की धक्कम पेल के बीच एक शख्स भीड़ के सैलाब को तेजी से चीरता चला जा रहा है। उनके पीछे एक जोड़ा लगभग घसीटते हुए साथ चल रहा है। 

बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट के वकील, मानवाधिकार कार्यकर्ता और वहां अल्पसंख्यकों के लिए लड़ रहे 65 साल के रवींद्र घोष पुलिस स्टेशन की ओर कूच कर रहे हैं। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक यानी हिंदू समुदाय की मालोती देवी और उनके पति की जमीन पर कब्जे के बाद दबंगों ने उन पर अत्याचार किए, मालोती रानी के साथ बदसलूकी की और पुलिस रिपोर्ट नहीं लिख रही है।

बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट के वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता रवींद्र घोष सुप्रीम कोर्ट के उनके कमरे में रोज यही नजारा रहता है। मुवक्किलों के साथ उनके पास पीड़ितों का जमावड़ा लगा रहता है, ऐसे बहुत से हिंदू परिवार हैं, जिन पर अत्याचार हुए हो रहे हैं और पुलिस रिपोर्ट नहीं लिख रही है। रवींद्र घोष कहते हैं, ‘सभी खराब नहीं होते। यहां पर भी कुछ अच्छे लोग हैं जो हमारी मदद करते हैं। दुर्भाग्य से उनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है।’ 

रवींद्र घोष बगल में बैठे व्यक्ति की ओर हाथ से इशारा करते हुए कहते हैं, ‘मेरे सहकर्मी दोस्त गाजी को ही लीजिए। यह हर वक्त मेरे लिए खड़े रहते हैं। कई बार इन्होंने मेरी मदद की जिसका बयान भी मैं नहीं कर सकता।’ रवींद्र घोष बांग्लादेश में जाना पहचाना नाम है। हर दिन उनको अल्पसंख्यकों का पक्ष लेने की वजह से जान से मारने की धमकी मिला करती है, पर वह अपने काम में लगे हुए हैं, बिना किसी चिंता के।

सन 1971 में बांग्लादेश के अस्तित्व में आने के बाद हिंदुओं की संख्या इस इलाके में करीब 39 प्रतिशत थी जो अब घट कर मात्र 10 प्रतिशत रह गई है। ज्यादातर हिंदू परिवार बांग्लादेश छोड़ कर या तो अमेरिका-यूरोप बस गए हैं या भारत में पश्चिम बंगाल के कोलकाता को अपना स्थायी ठिकाना बना लिया है।

वहां रहने वाले हिंदू परिवार मानते हैं कि यहां दिन ब दिन रहना मुश्किल होता जा रहा है। अब तो आवाज उठाने भर से जान को खतरा हो जाता है। पिछले दिनों बांग्लादेश में कई ब्लॉगरों की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी गई क्योंकि वे अत्याचारियों के साथ-साथ सहिष्णुता और बराबरी के अधिकार के लिए लिख रहे थे। हाल ही में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में दो विदेशियों की भी हत्या कर दी गई।

मारे गए एक ब्लॉगर के परिवार से मिलने पर उन्होंने कुछ भी बोलने से पहले बस इतना अनुरोध किया कि उनके परिवार की पहचान छुपा दी जाए। उस युवा ब्लॉगर के पिता को लगातार धमकी मिल रही है क्योंकि उनकी बेटी अपने भाई के ब्लॉग को जीवित रखे हुए है।  

उस ब्लॉगर के पिता कहते हैं, ‘मीडिया बिलकुल सहयोग नहीं करता। यहां भारत की तरह नहीं है कि कोई भी घटना हो तो पूरा मीडिया फौरन दौड़ पड़े। यहां तो हिंदुओं के मामले में कोई ध्यान नहीं देता। न अखबार खबर छापते हैं न टीवी चैनल हो रहे अत्याचार पर एक भी नहीं शब्द बोलते हैं। 

मोदी सरकार ने बदले गोद लेने के नियम


महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 01 अगस्‍त, 2015 से प्रभावी ‘बच्‍चों को गोद लेने संबंधी दिशा-निर्देश 2015’ में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। करीब एक वर्ष तक हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद तैयार किये गये इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्‍य गोद लेने की प्रक्रिया में तेजी लाना और इसे व्‍यवस्थित करना है। संशोधित दिशा-निर्देशों में गोद लेने की पारदर्शी प्रक्रिया उपलब्‍ध कराने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी की नई गोद लेने की प्रणाली ‘केयरिंग्‍स’ शामिल की गई है, जिसके तहत देश के सभी बच्‍चों की देखभाल करने वाले संस्‍थानों को इस एकीकृत प्रणाली में लाया गया है। 

विचार-विमर्श के दौरान बड़ी संख्‍या में संस्‍थानों/व्‍यक्तियों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं, जिन पर आधारित कर यह प्रणाली डिजाइन की गई है, जिसका उद्देश्‍य है बच्‍चों की देखभाल करने वाले संस्‍थानों के बच्‍चों को जल्‍द से जल्‍द घर मिलना चाहिए। किशोर न्‍याय अधिनियम 2000 की धारा 41 (2) में बच्‍चों की देखभाल करने वाले सभी संस्‍थानों पर यह वैधानिक जिम्‍मेदारी है कि वे केन्‍द्र सरकार द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश के अनुसार गोद लेने की प्रक्रिया अपनाए और इसे बढ़ावा दें। यदि बच्‍चों की देखभाल करने वाला कोई संस्‍थान दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य नहीं कर पाता है, तो उसके पास ऐसे दूसरे संस्‍थान में बच्‍चों को भेजने का विकल्‍प है, जो केन्‍द्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करता है। 

नये दिशा-निर्देश जारी करने और केयरिंग्‍स का शुभारंभ करने के साथ ही मंत्रालय ने नये दिशा-निर्देश समझाने और नये सूचना प्रौद्योगिकी वातावरण में कार्य करने के लिए बच्‍चों की देखभाल करने वाले संस्‍थानों के लिए देशव्‍यापी कार्यशालाएं भी शुरू की हैं। यह स्‍पष्‍ट किया गया है कि 2011 के दिशा-निर्देश में एकल अभिभावक द्वारा बच्‍चे को गोद लेने का जो प्रावधान था उसे 2015 के दिशा-निर्देशों में भी रखा गया है। 

मंत्रालय ने मिशनरिज ऑफ चैरिटी जैसे संस्‍थानों द्वारा किये गये कार्यों की सराहना की। हालांकि मंत्रालय ने दोबारा इस बात पर जोर दिया कि लम्‍बे विचार-विमर्श की प्रक्रिया के बाद तैयार किए गए नये दिशा-निर्देशों का पालन गोद लेने की प्रक्रिया में शामिल बच्‍चों की देखभाल करने वाले संस्‍थानों द्वारा किया जाना चाहिए। 

आखिर क्या है प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना ? #PMKKKY


भारत में कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार खनन क्षेत्र में उपलब्ध हैं। भारत के अधिकतर खनिज वन क्षेत्र में स्थित हैं, जहां जनजातीय, पिछड़ी और वंचित आबादी रहती है। यह तर्क दिया जा सकता है कि यदि इस क्षेत्र को महत्व दिया जाय तो बेरोजगारी की समस्या से बड़ी हद तक निपटा जा सकता है और समावेशी विकास का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। मौजूदा सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी और शानदार नेतृत्व में 2015 की शुरूआत में एमएमडीआर अधिनियम में संशोधन किया है। अन्य उल्लेखनीय सुधारों सहित खनन क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए नये अधिनियम में दो मुद्दों पर चर्चा की गयी है:

  • पारदर्शिता और अन्वेषण पर अधिक जोर देते हुए खनन उद्योग में नयी जान फूंकना
  • प्रभावित लोगों के लिए सकारात्मक खनन माहौल तैयार करने के संबंध में समृद्धि का लाभ उन तक पहुंचाना।

भारत के इतिहास में पहली बार इस संबंध में खनन गतिविधियों से प्रभावित लोगों औऱ स्थानों के सामाजिक तथा आर्थिक उन्नयन के लिए अलग से निधि का आवंटन किया गया है। एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2015 के तहत राज्य सरकारों को जनपद खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के गठन का अधिकार मिलता है। इसके तहत राज्य सरकारें जनपद खनिज फाउंडेशन के लिए नियम बना सकती हैं।

स्वतंत्रता दिवस 2015 को लालकिले के प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए सम्मानीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास तथा लोगों के कल्याण के लिए सरकार एक योजना शुरू करेगी।

योजना:

सितंबर 2015 में खान मंत्रालय ने डीएमएफ की निधियों के उपयोग के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस योजना को प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना कहा जाता है और यह सभी राज्य सरकारों पर लागू होती है। विकास, सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति और दीर्घकालिक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तीन लक्ष्य हैं-

1. खनन प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न विकासात्मक और कल्याणकारी परियोजनाओं/ कार्यक्रमों का कार्यान्व्यन जो राज्य एवं केंद्र सरकार के मौजूदा योजनाओं/ परियोजनाओं के अनुरूप हों।

2. पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं खनन मिलों में लोगों की सामाजिक, आर्थिक स्थिति पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को समाप्त करना।

3. खनन क्षेत्र के प्रभावित लोगों के लिए दीर्घकालीन टिकाऊ, आजीविका सुनिश्चित करना।

इन उद्देश्यों को स्पष्ट कर दिया गया है ताकि लक्ष्य निर्धारित हो और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

योजना के मुख्य बिंदु:

इस योजना से संबंधित मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं जिनसे संबंधित प्रकाशकों, विधायिकाओं और नागरिकों को मदद मिलेगी-

ü योजना 12 जनवरी, 2015 से प्रभावी है

ü 12 जनवरी, 2015 के पहले जो खनन पट्टे दिये जा चुके हैं उनके संबंध में निकायों को डीएमएफ में देय रॉयल्टी का 30 फीसदी हिस्सा देना होगा।

ü 12 जनवरी, 2015 के बाद नीलामी के जरिए जो खनन पट्टे दिये गये हैं, उनके संबंध में देय रॉयल्टी का 10 फीसदी हिस्सा देना होगा।

ü इस योजना के तहत संभावित निधि लगभग 6 हजार करोड़ रूपये सालाना होगी।

योजना की प्रणाली:

प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत खनन प्रभावित लोगों का जीवन स्तर के बढ़ाने के संबंध में सरकार ने फैसला किया है कि डीएमएफ की निधि को बेहतर तरीके से खर्च किया जाए। योजना का प्रारूप इस तरह तैयार किया गया कि वह स्वयं अपनी समर्थन प्रणाली विकसित करे औऱ केवल सरकार के सहारे न चले इसलिए यह जरूरी है कि इस योजना को लोक लुभावन योजना बनने से रोका जाए। इसलिए इस बात पर भी ध्यान दिया गया है कि महत्वपूर्ण कार्यों को आपात कार्यों के कारण ना रोका जाए।

योजना के तहत उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में 60 फीसदी और अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में 40 फीसदी निधि खर्च की जाएगी। इसका ब्यौरा इस प्रकार है:-

उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र
अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्र
पेयजल आपूर्ति
भौतिक संरक्षण
पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण उपाय
सिंचाई
स्वास्थ्य सेवा
ऊर्जा एवं आमूल विकास
शिक्षा
खनन जिलों में पर्यावरण के गुणवत्ता बढ़ाने के अन्य उपाय
महिला एवं बाल कल्याण

वृद्धजनों एवं निशक्तजनों का कल्याण

कौशल विकास

स्वच्छता



योजना के लक्षित लाभार्थी: 

सभी दुहरावों को समाप्त करते हुए पीएमकेकेकेवाई ने स्पष्ट रूप से इनकी परिभाषा वर्णित की है :

1. प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्र : जहां उत्खनन, खनन, विस्फोटन, लाभकारी एवं अपशिष्ट निपटान आदि जैसे प्रत्यक्ष खनन संबंधित संचालन स्थित हैं।

2. अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्र : जहां खनन संबंधित संचालनों के कारण आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरण दुष्परिणामों की वजह से स्थानीय जनसंख्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसकी वजह से जल, मृदा एवं वायु गुणवत्ता में ह्रास हो सकता है, झरनों के प्रवाह में कमी आ सकती है और भू-जल कम हो सकता है आदि।

3. प्रभावित लोग/समुदाय : भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनः स्थापन अधिनियम, 2013 में उचित क्षतिपूर्ति एवं पारदर्शिता के अधिकार के तहत ‘’प्रभावित परिवार’’ और ‘’विस्थापित परिवार’’ के रूप में चिन्हित परिवार और ग्रामसभा के मशविरे से चिन्हित अन्य परिवार।

इन परिभाषाओं के अनुरूप, यह डीएमएफ को इन वर्गों के तहत लोगों एवं स्थानों की एक सूची बनाने का निर्देश देता है जिन्हें पीएमकेकेकेवाई योजना के वास्तविक लाभार्थियों के रूप में समझा जाएगा।

अनुसूचित क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान :

पीएमकेकेकेवाई फंड के उपयोग की प्रक्रिया अनुसूचित क्षेत्रों एवं जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित संविधान की अनुसूची V एवं अनुसूची VI के साथ अधिनियम 244 में वर्णित प्रावधानों तथा पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों के विस्तार) पंचायत अधिनियम, 1996 और अनुसूचित जनजातीय और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के प्रावधानों द्वारा दिशा निर्देशित होगी। प्रभावित गांवों की ग्राम सभा की योजनाओं की मंजूरी और रिपोर्टों की जांच में अहम भूमिका होगी।

योजना की अन्य विशेषताएं :

  • पीएमकेकेकेवाई की संग्रह राशि को वरीयतापूर्वक केन्द्र/राज्य द्वारा बनाई गयी वर्तमान में जारी कल्याण योजनाओं के अनुरूप होनी चाहिए।
  • फाउंडेशन की सालाना प्राप्ति के 5 प्रतिशत तक की राशि, जिसकी अधिकतम सीमा राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जाएगी, का उपयोग फाउंडेशन के प्रशासनिक, पर्यवेक्षण एवं अतिरिक्त खर्च के लिए किया जा सकता है।
  • पीएमकेकेकेवाई योजना के क्रियान्वयन के लिए कर्मचारी/श्रमबल को अनुबंधात्मक आधार पर लिया जाएगा ; स्थायी रोजगार की कोई संभावना नहीं।
  • ऐसे खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए, जो दो जिलों में पड़ते हैं, या ऐसी कल्याण योजना के लिए जो संचालन के जिले के बाहर के लोगों/स्थानों से संबंधित हैं, दिशा निर्देश में स्पष्ट नियम वर्णित किए गए हैं।
  • सभी कार्य/अनुबंध राज्य सरकारों द्वारा जारी नियमों के अनुरूप प्रदान किए जाएंगे।
  • एजेंसियों/लाभार्थियों को फंड का हस्तांतरण सीधा बैंक खातों में किया जाएगा।
  • प्रत्येक डीएमएफ एक वेबसाइट का संचालन करेगा और अपने, लाभार्थियों संग्रहित कोष, बैठकों के विवरण, कार्रवाई रिपोर्ट, वार्षिक योजानएं जारी परियोजनाओं की स्थिति आदि से संबंधित सभी विवरणों के आंकड़े सार्वजनिक करेगा।
  • डीएमएफ के खातों का प्रत्येक वर्ष अंकेक्षण किया जाएगा और इसकी वार्षिक रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
  • डीएमएफ वित्त वर्ष की समाप्ति के तीन महीनों के भीतर वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसे राज्य विधानसभा में प्रस्तुत किया जाना चाहिए तथा इसकी वेबसाइट पर जगह मिलनी चाहिए।

2014-15 में राजशुल्क (रॉयलिटी) का जिला-वार संग्रह:

खनिज अवयव के लिहाज से समृद्ध 10 राज्यों के लिए 2014-15 में राजशुल्क (रॉयलिटी) का जिला-वार संग्रह निम्नलिखित है। यह योजना निर्माताओं और लोगों को डीएमएफ संग्रह के बारे में एक उचित आकलन प्रस्तुत करती है जिसकी वे अपने जिले में उम्मीद कर सकते हैं। और यह केवल शुरूआत भर है क्योंकि संशोधित कानून के तहत नए खदानों की बोली लगाई जानी अभी शुरू नहीं हुई है।

कुछ दूरी तय की पर मंजिल दूर है अभी....

जैसा कि प्रधानमंत्री ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में वादा किया था, पीएमकेकेकेवाई की रूपरेखा खनन संबंधित क्षेत्रों के विकास के लिए एक समर्पित फंड के रूप में बनाई गयी है। एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2015 के अन्य प्रावधान खनन के वैज्ञानिक, जिम्मेदार, टिकाऊ एवं पारदर्शी विकास के लिए एक सुगमकारी और सक्षमकारी वार्तावरण मुहैया कराते हैं।

एक साथ मिलकर हम ऐसे राष्ट्र के निर्माण का प्रयास करते हैं जो अपनी ताकतों के बल पर फलता-फूलता है और जिसके केन्द्र बिन्दु में उसके लोग हैं।

(यह इनपुट इस्पात मंत्रालय द्वारा दिया गया)

लव जिहाद से बचने के लिए इस बार गुजरात में शेरी गरबा


नवरात्र शुरू होने के साथ ही गुजरात में गरबे की धूम भी शुरू हो चुकी है। यहां के गोधरा शहर में इस बार गरबा आयोजकों ने जो बैनर लगाए हैं, उनमें कुछ संदेश लिखे गए हैं। एक संदेश है, ‘मेरी बेटी मेरी आंखों के सामने।’ आयोजकों का कहना है कि ये बैनर बहन-बेटियों को मुस्लिम युवा और लव जिहाद से बचाने के लिए लगाए गए हैं। आरएसएस और भाजपा से जुड़े संगठनों ने गोधरा के लोगों से शेरी गरबा (मोहल्ला गरबा) आयोजित करने की अपील की है।

शेरी गरबा को मोहल्लों में किया जाने वाला गरबा भी कहा जा सकता है। इसमें कम लोग शिरकत करते हैं। गरबों को बड़े ब्रांड या कंपनियां स्पॉन्सर करती हैं। लेकिन ये गरबे छोटे स्तर पर मोहल्ले वाले या कोई संगठन ही ऑर्गनाइज करता है।

साल 2002 में गुजरात के दंगे गोधरा में ट्रेन की कुछ बोगियां जलाए जाने के बाद ही भड़के थे। हिंदू संगठनों द्वारा शेरी गरबा पर जोर दिए जाने का कारण है है कि, किसी दूसरे समुदाय के लोग इसमें नहीं आ सकें। चूंकि ये गरबा मोहल्लों में और मोहल्ले वालों द्वारा ही आयोजित किए जाते हैं, इसलिए इसमें आने वाले एक-दूसरे को बेहतर रूप से पहचानते होंगे। यहां दूसरे समुदाय के लोगों की पहचान आसानी से की जा सकेगी।

विहिंप के पूर्व सदस्य और अब पंचमहल जिले में भाजपा मेंबर आशीष भट्ट के अनुसार, “नवरात्र के दौरान पवित्रता बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया है। पिछले साल हमने बड़े गरबा महोत्सव से मुस्लिमों को दूर रखने की कोशिश की थी, ताकि लव जिहाद जैसे मामले न हों। लेकिन बड़े गरबा कार्यक्रमों में स्पॉन्सर्स और दूसरे लोग जुड़े होते हैं, इसलिए कई बार गलत लोग टिकट लेकर अंदर आ जाते हैं।” आशीष आगे बताते हैं, “अपनी मां, बहन और बेटियों को सुरक्षित रखने के लिए हमने इस बार परंपरागत गरबे की योजना बनार्इ है । कुल 39 शेरी गरबे किए जाएंगे।”

शिपिंग मंत्रालय 78 प्रकाशस्‍तंभों को पर्यटन केन्‍द्रों के रूप में विकसित करेगा



शिपिंग मंत्रालय और प्रकाशस्‍तंभ एवं प्रकाशपोत महानिदेशालय (डीजीएलएल) ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत पहले चरण में देश में 78 प्रकाशस्‍तंभों (लाइटहाउस) को पर्यटन केन्‍द्रों के रूप में विकसित करने के लिए एक महत्‍वाकांक्षी कार्यक्रम तैयार किया है। चिन्हित प्रकाशस्‍तंभ गुजरात, महाराष्‍ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप, तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अंडमान व निकोबार द्वीप और पश्चिम बंगाल में हैं।

पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इन प्रकाशस्‍तंभों के आसपास स्थित जमीन पर होटल, रिजॉर्ट्स, दीर्घा, समुद्री संग्रहालय और विरासत संग्रहालय, साहसिक खेल सुविधाएं, विषयगत रेस्तरां, यादगार वस्तुओं की दुकानें, लेजर शो, स्पा और कायाकल्प केन्द्र, रंगभूमि और संबंधित पर्यटन सुविधाएं हो सकती हैं। हालांकि, इन सुविधाओं की स्‍थापना से पहले उनकी लाभप्रदता को ध्‍यान में रखना होगा और इसके साथ ही आवश्‍यक मंजूरियां भी लेनी पड़ेंगी। अगुआडा (गोवा), चंद्रभागा (ओडिशा), महाबलीपुरम, कन्याकुमारी और मुत्तोम (तमिलनाडु), कडालुर प्वाइंट (तिक्कोडि, केरल), कन्होजी आंग्रे और संक रॉक (महाराष्ट्र) और मिनीकॉय (लक्षद्वीप) में आठ प्रकाशस्‍तंभ बनाने के लिए डीजीएलएल ने भावी एवं संभावित डेवलपरों से योग्‍यता संबं‍धी अनुरोध (आरएफक्‍यू) आंमत्रित किये हैं। डीजीएलएल की ओर से 70 और प्रकाशस्‍तंभ बनाने के लिए अभिरुचि प्रपत्र (ईओआई) भी जारी किये गये हैं। 

सार्वजनिक एवं निजी खिलाडि़यों की दिलचस्‍पी बढ़ाने के लिए शिपिंग मंत्रालय 14, 17 और 19 अक्‍टूबर, 2015 को क्रमश: कोच्चि, विजाग और चेन्‍नई में रोड शो भी आयोजित कर रहा है। इसके अलावा शिपिंग मंत्रालय 29 अक्‍टूबर, 2015 को मुम्‍बई में निवेशक शिखर सम्‍मेलन आयोजित कर रहा है, जिसमें आतिथ्‍य क्षेत्र के खिलाडि़यों एवं डेवलपरों (निजी क्षेत्र) से सक्रिय भागीदारी के लिए अनुरोध किया जायेगा। इसी तरह राज्‍य सरकार की एजेंसियों से भी सहायता देने का अनुरोध इस सम्‍मेलन में किया जायेगा।

परंपरागत रूप से, प्रकाशस्तंभों का उपयोग सदियों से जहाज चलाने वालों के लिए आवागमन के संकेत-दीपों के रूप में रहा है, लेकिन 21वीं शताब्‍दी में व्‍यापक बदलाव के तौर पर प्रकाशस्‍तंभों का विकास पर्यटन केन्‍द्रों के रूप में हो रहा है। पूरी दुनिया में प्रकाशस्‍तंभ अपने आसपास स्थित सुंदर एवं शांत वातावरण और समृद्ध समुद्री विरासत की बदौलत पर्यटकों को आकर्षित करने में कामयाब हो रहे हैं। 

भारत में प्रकाशस्‍तंभों को पर्यटन केन्‍द्रों के रूप में विकसित किये जाने की अपार संभावनाओं को ध्‍यान में रखते हुए शिपिंग मंत्रालय ने डीजीएलएल के जरिये इन स्‍थलों पर पर्यटन को बढ़ावा देने के अवसरों का दोहन करने का निर्णय लिया है। शिपिंग मंत्रालय और डीजीएलएल ने देश भर में फैले प्रकाशस्‍तंभों को पर्यटन केन्‍द्रों के रूप में बढ़ावा देने का इरादा व्‍यक्‍त किया है। 

शिपिंग मंत्रालय और डीजीएलएल ने निम्‍नलिखित महत्‍वपूर्ण उद्देश्‍यों को ध्‍यान में रखते हुए प्रकाशस्‍तंभ पर्यटन को बढ़ावा देने का इरादा जताया है: 

  • वर्तमान प्रकाशस्‍तंभों और उनके आसपास स्थित क्षेत्रों को अनोखे पर्यटन केन्‍द्रों एवं समुद्री स्‍थल चिन्‍हों के रूप में विकसित करना।

  • प्रकाशस्‍तंभों के परिसरों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन से जुड़े संभावित बुनियादी ढांचे की पहचान करने के बाद उन्‍हें वि‍कसित करना। 

  • परियोजना को लाभप्रद बनाने के लिए उपर्युक्‍त स्‍थलों पर वाणिज्यिक दृष्टि से लाभप्रद सुविधाओं को एकीकृत करके पीपीपी के तहत इन परियोजनाओं को विकसित करने की संभावनाएं तलाशना।

  • भारत में 7517 किलोमीटर लम्‍बी विशाल तटीय रेखा पर 189 प्रकाशस्‍तंभ हैं। बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान एवं निकोबार द्वीप और अरब सागर में स्थित लक्षद्वीप भी इनमें शामिल हैं। समृद्ध समु्द्री विरासत से युक्‍त हर प्रकाशस्‍तंभ की अपनी विशिष्‍ट गाथा जहाज चलाने वालों के लिए है। इन प्रकाशस्‍तंभों में पर्यटन की भी अपार संभावनाएं हैं, जिनका दोहन किया जाना अभी बाकी है। 

  • डीजीएलएल ने तमिलनाडु में मद्रास एवं महाबलीपुरम प्रकाशस्‍तंभों और केरल में अलेप्‍पी एवं कन्‍नानूर प्रकाशस्‍तंभों को पर्यटन केन्‍द्रों के रूप में सफलतापूर्वक वि‍कसित किया है। ये चारों प्रकाशस्‍तंभ दर्शनीय पर्यटन केन्‍द्रों के रूप में विकसित होने के बाद बड़ी संख्‍या में पर्यटकों को आकर्षित करने में कामयाब साबित हो रहे हैं। 

ओवैसी पर वाजपेयी :गीदड़ की मौत आती है तो वह शहर की ओर भागता है

यूपी बीजेपी के प्रदेश अध्‍यक्ष डॉ. लक्ष्‍मीकांत बाजपेयी रवि‍वार देर रात गोरखपुर पहुंचे। इस दौरान मीडिय़ा से बातचीत करते हुए बाजपेयी ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्‍यक्ष असदुद्दीन ओवैसी पर जोरदार हमला किया । उन्होंने कहा, ‘‘गीदड़ की मौत आती है तो वह शहर की ओर भागता है।’’ उन्‍होंने यह बात फेसबुक पर गोरखपुर सांसद और महंत योगी आदि‍त्‍यनाथ पर ओवैसी की ओर से आपत्‍ति‍जनक पोस्‍ट कि‍ए जाने के सवाल पर मीडि़‍या से बातचीत के दौरान कही।

आपको बता दें कि फेसबुक पर गोरखपुर के बीजेपी सांसद महंत योगी आदित्यनाथ की आपत्तिजनक फोटो शेयर करने पर हिंदू युवा वाहि‍नी के पदाधि‍कारि‍यों ने बीते गुरुवार को असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ गोरखपुर एसएसपी से मुलाकात कर एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि‍ सोशल साइट पर हिंदू धर्म की आस्था के केंद्र महंत योगी आदित्यनाथ के फोटो पर आपत्तिजनक कमेंट करने से धार्मिक भावना को भड़काने का प्रयास किया गया है। ऐसे में मामले में संबंधित लोगों की गिरफ्तारी की जाए।

लक्ष्‍मीकांत बाजपेयी ने मीडि‍या से बातचीत करते हुए दादरी कांड पर कहा कि कानून को अपना काम निष्पक्ष रहकर करना चाहिए और जांच करनी चाहिए। जांच भी राजनीतिक और साम्प्रदायिकता के चश्मे से नहीं करना चाहिए। यदि‍ जांच पर जनता का विश्वास नहीं हुआ तो बेमानी होगी। उन्‍होंने दादरी कांड को एक दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया। 

लॉन्च हुई भारतीय रेलवे की अत्याधुनिक सेवायें #CoTVM


श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने इन सेवाओं की शुरुआत नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा की 

रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा इन आईटी सक्षम यात्री सेवाओं की शुरुआत की।

1.  मध्य रेलवे के सभी उपनगरीय स्टेशनों पर मोबाइल फोन के जरिए पेपरलेस अनारक्षित टिकटों की बुकिंग।

2. उत्तरी, पश्चिमी और मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल, दादर सेंट्रल, पंवेल, ठाणे और लोकमान्य तिलक टर्मिनल, अंधेरी, मुंबई सेंट्रल, बोरीवली, दादर पश्चिमी, दादर मध्य, वासाई रोड, बांद्रा, नई दिल्ली और निजामुद्दीन स्टेशन पर पेपरलेस प्लेटफॉर्म टिकट की शुरुआत।

3. पश्चिमी रेलवे, मध्य रेलवे और उत्तरी रेलवे के नई दिल्ली- पलवल सेक्शन के उपनगरीय क्षेत्रों पर पेपरलेस सीजन टिकट की शुरुआत।

4.  मध्य रेलवे और पश्चिमी रेलवे के विभिन्न उपनगरीय स्टेशनों पर कैश/स्मार्ट कार्ड टिकट वेंडिंग मशीन की शुरुआत।

5.  iOS प्लेटफॉर्म के लिए ट्रेन पूछ-ताछ मोबाइल एप्लीकेशन की शुरुआत।

इस मौके पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष श्री एके मित्तल और अन्य बोर्ड सदस्य, एडिशनल मेंबर (सीएंडआईएस) श्री मोहम्मद जमशेद, सीआरईएस की एमडी श्रीमती वंदना नंदा समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने कहा कि डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ते हुए मुझे खुशी है कि हमने आज मोबाइल के जरिए पेपरलेस अनारक्षित टिकट, पेपरलेस सीजन टिकट और पेपरलेस प्लेटफॉर्म टिकटों की सुविधा की शुरुआत की। विभिन्न स्टेशनों पर करीब 50 कैश/स्मार्ट कार्ड वेंडिंग मशीन कार्य करने लगे हैं। इन सभी सुविधाओं का वादा मैंने अपने रेल बजट में किया था।

उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं के साथ ही हमने एप्पल प्लेटफॉर्म के लिए ट्रेन पूछताछ मोबाइल एप्लीकेशन की शुरुआत कर दी है। यह एप्लीकेशन एंड्राइड और विंडोज प्लेटफॉर्म पर बेहतर प्रदर्शन कर रहा था। अब इसे एप्पल फोन उपयोगकर्ताओं के लिए भी शुरू कर दिया गया है।

पेपरलेस अनारक्षित टिकट सिस्टम की शुरुआत उपनगरीय स्टेशनों पर टिकट के लिए लगने वाली भीड़ को कम करने के लिए किया गया है। इससे हम ‘मिशन 5 मिनट’ को हकीकत में बदल लेंगे।

पेपरलेस टिकट सर्विस मुंबई पश्चिम रेलवे और दिल्ली में पहले से शुरु है। अब यह सुविधा मुंबई के सभी उपनगरीय स्टेशनों (सेंट्रल और पश्चिम रेलवे दोनों) पर मिलेगी। यह सिस्टम रेलवे वैलेट के फीचर UTS on Mobile एप्लीकेशन पर मिलेगी। इस सिस्टम द्वारा टिकट बुक कराने पर कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा। पहला यह टिकट किसी दूसरे मोबाइल पर नहीं भेजा जा सकेगा। दूसरा यात्रा शुरू होने के बाद आप टिकट नहीं खरीद सकेंगे।

इसके साथ ही पेपरलेस सीजन टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट की भी सुविधा की शुरुआत की गई है। इसके अलावा कैश/स्मार्ट कार्ड टिकट वेंडिंग मशीन की भी शुरुआत की गई है।

पेपरलेस अनारक्षित टिकट, सीजन टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट की बुकिंग

 सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर या विंडोज स्टोर से मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करें

1. मोबाइल नंबर, नाम, शहर, ट्रेन, श्रेणी, टिकट, यात्रियों की संख्या और यात्रा करने वाले रूट को रजिस्टर करें।

2. आर-वैलेट के जरिए टिकट का भुगतान होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद आर-वैलेट जीरो बैलेंस पर खुल जाएगा।

3. आर-वैलेट में टॉप-अप के लिए चिन्हित काउंटर या वेबसाइट utsonmobile.indianrail.gov.in का प्रयोग करें।

4.यात्री एप्लीकेशन के जरिए ऑप्शन का उपयोग करते हुए एकल यात्रा टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट या सीजन टिकट की बुकिंग की जा सकती है।

5.एकल यात्रा टिकय और प्लेटफॉर्म टिकट की बुकिंग के लिए मोबाइल में जीपीएस सिस्टम का होना अनिवार्य है।

कैश/स्मार्ट कार्ड टिकट वेंडिंग मशीन (CoTVM):

कैश/स्मार्ट कार्ड टिकट वेंडिंग मशीन (CoTVM) एक स्वत: संचालित बूथ है। इसका इस्तेमाल यात्री अनारक्षित टिकटों को पैसे, सिक्कों या स्मार्ट कार्ड के जरिए खरीदने अथवा स्मार्ट कार्ड के रिचार्ज के लिए करेंगे। इस बूथ (CoTVM) में टिकटों की खरीद के लिए चित्रमय (ग्राफिक्स) इंटरफेस का इस्तेमाल किया गया है। इससे यात्री आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। यह बूथ हर तरह के रुपयों या सिक्कों को स्वीकार करेंगे, जिनपर महात्मा गांधी की तस्वीर लगी होगी। इससे टिकट खिड़कियों पर लगने वाली लाइन कम की जा सकेगी।

कैश/स्मार्ट कार्ड टिकट वेंडिंग मशीन (CoTVM) के कार्य

1. इससे गैर-उपनगरीय क्षेत्रों के लिए गैर-रियायती द्वितीय श्रेणी यात्रा टिकट और उपनगरीय क्षेत्रों के लिए द्वितीय/प्रथम श्रेणी यात्रा टिकट/ वापसी टिकट मिलेंगे।

2. प्लेटफॉर्म टिकट प्राप्त करने के लिए।

3. गैर-रियायती टिकटों के नवीकरण।


स्मार्ट कार्ड रिचार्ज मूल्यवर्ग- 20 रुपए, 50 रुपए, 100 रुपए और 500 रुपए

कैश/स्मार्ट कार्ड टिकट वेंडिंग मशीन (CoTVM) की बनावट

1.       दूसरे कंप्यूटर पर निर्भर रहने वाला कंप्यूटर प्रोग्राम

2.       थर्मल प्रिंटर

3.       टच स्क्रीन

4.       आरएफआईडी रीडर

5.       15 नोटों के साथ नकद वेलिडेटर एस्क्रो

6.       10 सिक्कों के साथ नकद वेलिडेटर एस्क्रो

7.       25 हजार रुपए नकद और 3 हजार सिक्कों की कैश बाक्स क्षमता

कैश/स्मार्ट कार्ड टिकट वेंडिंग मशीन (CoTVM) और आटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (ATVM) में अंतर यह है कि ATVM के जरिए स्मार्ट कार्ड के इस्तेमाल पर ही यात्रियों को टिकट मिल पाता है। लेकिन CoTVM से कैश या सिक्कों या स्मार्ट कार्ड के जरिए यात्री टिकट पा सकेंगे।

कैश/स्मार्ट कार्ड टिकट वेंडिंग मशीन (CoTVM) की सुरक्षा:

मशीन में दो दरवाजे होंगे, जो कि सामने की तरफ होंगे। यह दोनों दरवाजे मेक्निकल और इलेक्ट्रानिक लॉक होंगे। इसमें से एक दरवाजे का उपयोग सर्विस इंजीनियर मरम्मत के लिए करेगा। दूसरे दरवाजे में कैश बाक्स होगा, जिसमें अलार्म सिस्टम लगाया गया है। किसी गैर-आधिकारिक व्यक्ति द्वारा इस दरवाजे के खोले जाने पर अलार्म बजने लगेगा। मशीन के नीचले हिस्से में इलेक्ट्रो मेक्निकल लॉक के साथ कैश बाक्स होगा। अगर कोई आधिकारिक व्यक्ति मशीन को खोलना चाहेगा तो उसे अपना स्मार्ट कार्ड और पासवर्ड डालना होगा। पासवर्ड डालने पर मशीन रोजाना ट्रेन कैश- सारांश किताब (DTC) की प्रतिलिपि देगा।

कैश/स्मार्ट कार्ड टिकट वेंडिंग मशीन (CoTVM) की शुरुआत:

तारीख 01.09.2015 को उत्तरी रेलवे के नई दिल्ली पर 6 CoTVM और पूर्वी रेलवे के सियालदाह और हावड़ा स्टेशन पर 8 CoTVM लगाए गए हैं। अभी तक पूर्वी और उत्तरी रेलवे के विभिन्न स्टेशनों पर 48 कैश/स्मार्ट कार्ड टिकट वेंडिंग मशीन लगाए जा चुके हैं।

iOS प्लेटफॉर्म के लिए ट्रेन पूछ-ताछ मोबाइल एप्लीकेशन:

रेलवे सूचना सिस्टम के सेंटर (सीआरआईएस) भारतीय रेलवे का आईटी विभाग है, जिसने मोबाइल एप्लीकेशन के लिए ट्रेन पूछ-ताछ सिस्टम को विकसित किया है। अभी तक यह सिस्टम एंड्राइड और विंडोज मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए ही विकसित किया गया था। लेकिन अब एक और कदम बढ़ाते हुए इसे एप्पल उपयोगकर्ताओं के लिए भी विकसित कर लिया गया है। इसके जरिए अब iOS उपयोगकर्ता भी ट्रेन के आने और जाने जैसी सूचनाएं मोबाइल पर पा सकेंगे। इस एप्लीकेशन की सबसे अच्छी सुविधा ‘spot your train’ है, इससे आप अपनी ट्रेन की पोजिशन, गंतव्य स्थान तक पहुंचने का समय पता लगा सकते हैं।

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