और उधर अश्लील डांस पर तृणमूल कांग्रेस नेता पैसे लुटा रहा था...


पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय नेता ने पार्टी के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में संगीत की धुन पर छोटे-छोटे कपड़ों में थिरकती लड़कियों पर नोटों की बारिश करके विवाद पैदा कर दिया है।

मामले से शर्मिंदा हुई तृणमूल कांग्रेस ने दक्षिण 24 परगना जिले में मंगलवार रात समारोह आयोजित करने वाले पार्टी के एक जिला परिषद सदस्य और अन्य पार्टी पदाधिकारियों को आज निलंबित कर दिया।

भांगड़ पुलिस थाने के पास ही आयोजित किए गए कार्यक्रम के दौरान तृणमूल नेता और 24 परगना जिला परिषद के सदस्य मीर ताहिर अली मंच पर चढ़ गए और उन्होंने वहां नाच रही लड़कियों पर नोट बरसाने शुरू कर दिए। पुलिस ने आधी रात के बाद कार्यक्रम रुकवाया।

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि अनुशासन समिति की बैठक हुई है और कार्यक्रम में शामिल होने के मामले में पार्टी पदाधिकारियों को निंलबित कर दिया गया है।

उन्होंने उक्त नेताओं को पार्टी से निकाले जाने की संभावना को भी खारिज नहीं किया। ब्रायन ने कहा कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी से बात की है और इस मामले में वे रत्ती भर बर्दाश्त नहीं करने का रुख रखती हैं।

ब्रायन ने कहा कि कृपया इसे इस तरह पेश मत करिए जैसे इसे तृणमूल का समर्थन हासिल हो। तृणमूल कांग्रेस के लिए सांस्कृतिक और लैंगिक संवेदना सर्वोपरि है। कृपया इस बात को लेकर फिर से आश्वस्त हो जाएं कि तृणमूल कांग्रेस की ओर से इसे कोई समर्थन नहीं मिला है। हम देखेंगे कि इसमें कौन शामिल रहा है।

टीवी चैनलों पर इस घटना से जुड़ी खबरें लगातार दिखाए जाने के बाद राजनीतिक दलों और महिला आयोग सहित समाज के विभिन्न तबकों ने इसकी कड़ी निंदा की है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने कहा कि यह बड़े शर्म की बात है कि वे इस तरह के कार्यक्रम आयोजित कर जश्न मना रहे हैं। सभी राजनीतिक दलों की मानसिकता में बदलाव की जरूरत है। जानी-मानी शिक्षाविद सुनंदा सान्याल ने कहा कि यदि पश्चिम बंगाल में इसी तरह की राजनीतिक संस्कृति कायम रही तो नौजवान लड़के-लड़कियों का भविष्य बर्बाद हो जाएगा। 

कांग्रेस देश को बेचने पर उतारू - ममता बनर्जी


यूपीए सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में जंतर-मंतर पर सोमवार को आयोजित रैली में ममता बनर्जी ने खूब जहर उगला है।

उन्होंने कहा कि वह आम आदमी के लिए राजनीति कर रही है और यूपीए को आम आदमी विरोधी बतलाया। तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता ने केन्द्र सरकार द्वारा डीजल मूल्यों की गई वृद्धि, एलपीजी की राशनिंग और रिटेल क्षेत्र में एफडीआई के विरोध में कांग्रेस को आडे़ हाथो लिया और नीतियों को जन विरोधी बतलाया।

मालूम हो, टीएमसी सुप्रीमो औऱ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में एफडीआई, डीजल मूल्यों में वृद्धि, और एलपीजी राशनिंग के विरोध में यूपीए-2 सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था और केन्द्र से अपने सभी 6 मंत्रियों से इस्तीफा दिलवाया दिया था।

जंतर-मंतर पर लोगों को संबोधित करती हुईं ममता ने कहा कि वॉलमार्ट के लिए सरकार ने यह गलत कदम उठाया, जिसके विरोध की घोषणा उन्होंने अपने घोषणा पत्र में भी की थी।

बकौल ममता, यहां तक की अमेरिका ने भी वॉलमार्ट पर तमाम शर्तें लगा रखी हैं जबकि इसके उलट यूपीए सरकार ने वालमार्ट के लिए तमाम बंदिशें समाप्त कर दी हैं। केंद्र पर देश को बेचने का आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि अब देश में ऐसी सरकार की जरूरत नहीं है।  ममता ने कहा, हमने चुनाव से पहले अपने घोषणापत्र में ही कह दिया था, हम रिटेल में एफडीआई का समर्थन नहीं करेंगे।

ममता ने आह्वान किया कि आगामी 19 नवंबर को उनकी पार्टी दिल्ली में फिर रैली करेंगे जबकि नंवबर महीने में ही एफडीआई समेत भी जन विरोधी नीतियो के खिलाफ लखनऊ, पटना और हरियाणा में भी रैली करेंगी और जनता को यूपीए सरकार के खिलाफ आगाह करेंगी।

ममता बनर्जी के मुताबिक दिल्ली में प्रदर्शन करने का मकसद साफ है कि कोई यह न समझे कि दिल्ली में हमें समर्थन नहीं है। यहां सिर्फ दिल्ली की जनता का समर्थन हासिल किया है।

केंद्र सरकार को ललकारते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि यदि यूपीए आर्थिक सुधार के प्रति वाकई ईमानदार है, तो काले धन को देश में वापस लाने के लिए जतन क्यों नहीं कर रही। ममता ने कहा, अगर यूपीए सरकार देश को बेचेंगे, तो जनता सरकार को बाहर निकाल फेंक देगी, यही लोकतंत्र की खूबसूरती है। ममता ने कहा कि मुझे सरकार की ज़रूरत नहीं, मुझे देश की जनता को अपने साथ रखना है।

ममता बनर्जी ने कहा कि एफडीआई से नौकरियां खत्म होंगी, हमारे छोटे उद्योग प्रभावित होंगे और किसी सरकार को यह अधिकार नहीं है कि वह आम आदमी के जीवनयापन के साधन छीन ले। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस लोकतंत्र में विश्वास करती है, लेकिन केंद्र सरकार उसका दुरुपयोग कर रही है।

ममता का कहना है कि उन्होंने सरकार के साथ काम करने की कोशिश की, लेकिन वह सरकार की जनविरोधी नीतियों का समर्थन नहीं कर सकती थीं, क्योंकि मैंने राजनीति में प्रवेश देश सेवा के लिए लिया था, कुछ हासिल करने के लिए नहीं। सिलेंडरों पर केंद्र की राशनिंग की बात पर ममता ने कहा कि लगता है कि इन नेताओं के घर में खाना नहीं बनता है। सब बाहर से आता है। उनका कहना है कि सालभर में छह सिलेंडर से एक परिवार का काम नहीं चलता।

प्रणब मुखर्जी ने गठबंधन दलों से धोका किया - ममता बनर्जी


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने दावा किया कि केंद्र सरकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश [एफडीआइ]  मुद्दे पर अपने पुराने रुख से हट गई है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सात दिसंबर, 2011 को लोकसभा में कहा था कि खुदरा क्षेत्र में एफडीआइ का फैसला राजनीतिक सर्वसम्मति के बाद ही लिया जाएगा।

ममता ने फेसबुक पर लिखा कि हमें बताइए कि केंद्र सरकार के इस बयान से कौन अलग हट गया?

इसके साथ ही ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर उनका फोन टेप कराने की तरफ इशारा किया है। ममता एवं केंद्र सरकार के रिश्ते आर्थिक सुधारों के मुद्दे पर पहले से ही तल्ख है।

ममता ने गुरुवार को कहा कि यदि केंद्र सरकार का नियंत्रण आपके हाथ में है तो आप फोन टेप कर सकते है। यह मेरे साथ पहले हो चुका है। मेरे पास तीन नंबर है। जब मैं नंदीग्राम या मिदनापुर जाती हू तो मैं अपने फोन का प्रयोग नहीं कर पाती क्योंकि इनका प्रयोग कोलकाता में होता है।

ममता ने कहा कि मैं केंद्र सरकार में रह चुकी हूं और मुझे ये सारे तौर तरीके मालूम हैं। मेरा मुंह खुलवाने की कोई जरूरत नहीं है।

भाजपा पश्चिम बंगाल में करेगी नवजागरण रथयात्रा - चंदन मित्रा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की राज्य मेंरथयात्राशुरू होगी। 30 जनवरी से शुरू होने वाली इस रथयात्रा के दौरान पार्टी कानून व्यवस्था और विकास के मोर्चे पर वाम मोर्चा सरकार की विफलता को उजागर करने के साथ-साथ भ्रष्टाचार और महँगाई के मुद्दों पर कांग्रेस और तृणमूल को निशाना बनाएगी।

भाजपा के पश्चिम बंगाल के प्रभारी चंदन मित्रा ने बताया कि नवजागरण रथयात्रा 30 जनवरी को कूच बिहार से शुरू होकर 15 फरवरी को कोलकाता में एक रैली के साथ संपन्न होगी। इसमें महँगाई और भ्रष्टाचार के अलावा स्थानीय मुद्दों पर सरकार की विफलता को जनता के बीच उजागर किया जाएगा।

रथयात्रा को पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथसिंह हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे, जबकि 15 फरवरी को कोलकाता में लालकृष्ण आडवाणी और पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी रैली को संबोधित करेंगें । मित्रा ने कहा कि पश्चिम बंगाल एक गरीब राज्य है और इसके लिए तृणमूल और कांग्रेस दोनों ही जिम्मेदार हैं। पिछले 34 साल में वाम शासन ने भी राज्य पर असर डाला है। इसी तरह भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा है। बंगाल की वाम सरकार ने मुस्लिमों को नौकरी में आरक्षण दिया। हमने धार्मिक आधार पर आरक्षण का विरोध किया है और हम वोट बैंक की इस राजनीति का खुलासा करेंगे।

भाजपा का पश्चिम बंगाल में वस्तुत: कुछ दाँव पर नहीं लगा है, लेकिन मित्रा का कहना है कि पार्टी शांति और विकास के मोर्चे पर खुद को एक विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश करेगी।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने बंगाल में अपने कैडरों के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया और तृणमूल कांग्रेस जैसे तत्कालीन सहयोगी दल पर अधिक निर्भरता दिखाने की गलती की। मित्रा ने कहा कि पार्टी पश्चिम बंगाल की सभी 294 सीटों पर चुनाव लडेगी और स्थानीय पार्टियों के साथ गठजोड़ की संभावना भी तलाशेगी।

बुद्धदेव भट्टाचार्य के बयान पर भड़की ममता

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने आज पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के बयान के जवाब में राज्य के लोगों से विकास और माकपा में से किसी एक को चुनने के लिये कहा।

दरअसल वाम दलों की कोलकाता में 30 नवंबर को हुई जनसभा में मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने राज्य के लोगों से ‘वाम दल या मौत’ में से किसी को चुनने के लिए कहा था।

ममता ने उत्सव मैदान में यहां अयोजित जनसभा में कहा, ‘‘यह किस तरह के मुख्यमंत्री हैं जो लोगों से वामदल और मौत में से किसी एक को चुनने के लिये कहते हैं । क्या उन्हें लोकतंत्र का जरा भी सम्मान है? हम कहते हैं कि चुनाव विकास या माकपा के बीच होना है ।’’ उन्होंने कहा कि पुलिस और हथियारों के बिना मदद के जंग होने दीजिये, फिर पता चलेगा कि माकपा के गुंडों और समर्पित तृणमूल कार्यकर्ताओं में कौन मजबूत है ।

सिख विरोधी दंगों के लिए कांग्रेस जिम्मेदार : सुखबीर सिंह बादल

पंजाब में सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए आगामी एसजीपीसी चुनाव और 2012 में प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी तथा उसके सहयोगियों को सबक सिखाने का आह्वान किया है।

शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख और पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से मतभेद भूलते हुए मिलकर काम करने का आह्वान किया ताकि कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों की हार सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के 26 साल बीत जाने के बाद भी अब तक कांग्रेस के किसी आरोपी नेता को जेल नहीं भेजा गया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के सांसदों ने जब संसद में जोरदार तरीके से मामला उठाया तो सज्जन कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

उन्होंने केंद्र की कांग्रेस नीत संप्रग सरकार पर आरोप लगाया कि वह केंद्रीय करों में पंजाब को उचित हिस्सेदारी नहीं दे रही है। संवाददाताओं से बातचीत में बादल ने आरोप लगाया कि केंद्र ने पंजाब से एकत्र करों में सिर्फ 1.29 प्रतिशत राशि ही राज्य को दिया है।

राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा का पलडा भारी


जयपुर। राजस्थान में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के "क़डी से क़डी मिलाने" वाले नारे को झुठलाते हुए 126 शहरी निकाय सीटों में से 57 पर जीत दर्ज कर सत्तारूढ़ कांग्रेस को पछ़ाड दिया है।
भाजपा ने अपने अंदरूनी झग़डों और गुटबाजी के बावजूद ब़डी जीत हासिल की है। पार्टी को 126 में से 57 निकायों में कामयाबी मिली है, जबकि सत्तारूढ़ दल कांग्रेस को 49 निकायों में ही जीत मिली है, हालांकि अजमेर नगर निगम पर कब्जा कर कांग्रेस अपना दबदबा कायम करने में सफल हुई है। इसके अलावा दो सीटों पर बसपा, एक पर राकांपा और 17 पर निर्दलीय की जीत हुई है। इसी तरह वार्ड सदस्यों के चुनावों में भी भाजपा को 3096 में से देर शाम तक 1088 और कांग्रेस को 1040 वार्डो में कामयाबी मिली है। राज्य निर्वाचन आयोग के आंक़डों के अनुसार पिछले चुनावों के मुकाबले हालांकि भाजपा को 23 सीटों का घाटा हुआ है, लेकिन विपक्ष में रहने के कारण नतीजों को उसके पक्ष में माना जा रहा है। भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव वसुंधरा राजे और प्रदेश अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी के बीच टिकट बंटवारे को लेकर मतभेद उत्पन्न हुआ था, उसके बावजूद पार्टी को उम्मीद से ज्यादा सफलता मिली है। जानकारों के अनुसार पार्टी में जिस तरह की अंदरूनी कलह मची हुई थी, उसे देखते हुए भाजपा को 50 से ज्यादा सीटों की उम्मीद नहीं थी। कांग्रेस ने हालांकि पिछली बार की तुलना में 16 सीटें ज्यादा ली हैं, फिर भी सत्ता में होने के कारण कांग्रेस के लिए ये चुनावी नतीजे निराशाजनक माना जा रहा है, क्योंकि शहरी निकाय चुनावों में परंपरागत रूप से सत्तारूढ़ दल को हमेशा से बढ़त मिलती रही है।

इससे पहले वर्ष 2000 के चुनावों में कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए 59 निकायों में जीत हासिल की थी। कांग्रेस के लिए राहत की बात यह है कि उसे नवगठित अजमेर नगर निगम के चुनावों में शानदार कामयाबी मिली है। यहां उसके प्रत्याशी ने भाजपा प्रत्याशी से यह सीट छीनी है। अजमेर नगर निगम को छो़डकर राज्य के सभी पांच नगर निगमों पर अब भाजपा का कब्जा हो गया है, जबकि चार नगर निगमों पर कांग्रेस का कब्जा बरकरार है। कांग्रेस के लिए सबसे निराशाजनक बात यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रभाव वाले मारव़ाड संभाग में भी कांग्रेस को मुंह की खानी प़डी है। संभाग के जोधपुर, नागौर एवं जैसलमेर जिले की 11 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पद पर छह जगह भाजपा प्रत्याशी कामयाब रहे हैं, जबकि अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस के तीन प्रत्याशी ही कामयाब हुए। पीप़ाड और परबतसर में निर्दलीय प्रत्याशी ने बाजी मारी है।

लालगढ़ के बयान पर संसद में भी घिरीं ममता

लालगढ़ में माओवादियों के समर्थन में दिए बयान को लेकर रेल मंत्री ममता बनर्जी को सड़क से लेकर संसद तक विपक्ष के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है. संसद में विपक्षी दलों ने ममता के मंत्री होने तक पर सवाल उठा दिया.

गुरूवार को संसद की कार्यवाही शुरू होते ही राज्यसभा में बनर्जी को समूचे विपक्ष ने जमकर घेरा. वामदलों ने तो इसे कैबिनेट मंत्री के तौर पर ममता को मिले अधिकारों के हनन का मामला तक बता दिया. पिछले सोमवार को ममता ने अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल के नक्सली हिंसा से प्रभावित लालगढ़ में तृणमूल कांग्रेस की रैली में माओवादियों की तरफदारी में भाषण दिया था.

उन्होंने हाल ही में पुलिस मुठभेड़ का शिकार बने शीर्ष माओवादी नेता आजाद की मौत को हत्या बताया था. ममता ने कहा, "जिस तरह आजाद को मारा गया, वह सही नहीं था और इसकी जांच होनी चाहिए." बुधवार को ममता ने अपने बयान से पीछे नहीं हटने की भी बात कह डाली. गौरतलब है कि माओवादियों का प्रवक्ता आजाद 2 जुलाई को आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद जिले में सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया था.

ममता के बयान का विरोध करते हुए सीपीएम नेता और राज्यसभा सदस्य सीताराम येचुरी ने उन पर माओवादियों का पक्ष लेने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार का एक मंत्री कैसे खुलकर उन माओवादियों का साथ दे सकता है जिन्हें खुद प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है.


येचुरी ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रेल मंत्री ने सरकारी एजेंसियों को हत्यारा बताया है. उन्होंने कहा कि ममता ने अपने भाषण में माओवादियों के साथ जुड़ने पर गर्व होने की बात भी कही थी जो कि निहायत शर्मनाक है.

बीजेपी के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने भी सदन में ममता की निंदा की. उन्होंने कहा कि एक केन्द्रीय मंत्री का सरकार के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर बयान देना गंभीर बात है.

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