आतंकवादी बुरहान के नाम पर रख दिया सडक का नाम


अलगाववादियों ने दक्षिण कश्मीर में एक सड़क मार्ग का नाम हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान के नाम पर रखा है। सडक पर बुरहान का पोस्टर भी लगाया गया है। संबंधित सुरक्षा एजेंसियां और कश्मीर विशेषज्ञ इसे कश्मीर में सुधरते हालात को फिर बिगाडने और स्थानीय युवकों को आतंकवाद की तरफ ले जाने की नई साजिश बता रहे हैं।

बुरहान के नाम पर रखी गई सडक त्राल को नवादल के रास्ते अवंतीपोर से जोडती है। बुरहान त्राल का ही रहने वाला था। आप को बता दे की, सुरक्षाबलों ने आठ जुलाई को बुरहान वानी को एक मुठभेड़ में मार गिराया था। १९९० से लेकर २००५ तक त्राल को आतंकी गतिविधियों के चलते कश्मीर का कंधार भी कहा जाता रहा है।

कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों और अलगाववादियों के साथ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने बुरहान की मौत पर कश्मीर में अलगाववादी भावनाओं को खूब भडकाया। हालांकि बुरहान के नाम पर सडक का नामकरण किए जाने की यह पहली घटना है।

हुर्रियत नेता इम्तियाज अहमद रेशी ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सडक का नाम बदलने का फैसला स्थानीय लोगों ने बैठक में लिया था। एक समारोह में मैं खुद उसमें सम्मिलित था।

कलराज मिश्र ने श्रीनगर में खादी कताई एवं बुनाई केन्‍द्र का उद्घाटन किया

  केन्‍द्रीय सूक्ष्‍म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्री श्री कलराज मिश्र ने श्रीनगर में आयोजित एक समारोह में हरमुख खादी ग्रामोद्योग संस्‍थान का उद्घाटन किया, जो एक कताई एवं बुनाई केन्‍द्र तथा खादी वस्‍तुओं के लिए मार्केटिंग प्‍लाजा है।

मं‍त्री महोदय ने सौरा स्थित 90 फीट रोड पर श्रीनगर के खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा आयोजित इस समारोह के दौरान स्‍थानीय कारीगरों के बीच 25 नये प्रकार के चरखों का भी वितरण किया। इस अवसर पर श्री मिश्र ने कहा कि चरखा प्रतिरोध का एक प्रतीक है और यह आर्थिक स्‍वतंत्रता प्राप्‍त करने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों के अधिकतम संख्‍या में बेरोजगार युवकों एवं महिलाओं की सहायता कर सकता है।

मंत्री महोदय ने कहा कि केन्‍द्र सरकार क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए जम्‍मू एवं कश्‍मीर राज्‍य को सभी प्रकार की सहायता मुहैया कराने के लिए तैयार है और उन्‍होंने राज्‍य सरकार से आगे आने तथा नई दिल्‍ली से अधिकतम सहायता मांगने का आग्रह किया। उन्‍होंने कहा कि केन्‍द्र सरकार, खासकर, यहां की अराजक स्थिति को ध्‍यान में रखते हुए जम्‍मू एवं कश्‍मीर की प्रगति के लिए विशेष रूप से इच्‍छुक है।

जम्‍मू एवं कश्‍मीर के उद्योग एवं वाणिज्‍य मंत्री श्री चन्‍दर परकाश गंगा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। उपस्थित जन समूह को संबोधित करते हुए उन्‍होंने केन्‍द्रीय मंत्री को सहायतापूर्ण बर्ताव एवं जम्‍मू एवं कश्‍मीर के प्रति मदद के दृष्टिकोण के लिए धन्‍यवाद दिया। साथ ही, उन्‍होंने केन्‍द्रीय मंत्रालय से राज्‍य के लिए लक्ष्‍य में भी वृद्धि करने का आग्रह किया, जिससे कि स्‍थानीय कारीगरों को लाभ पहुंच सके।

केन्‍द्रीय मंत्री के साथ खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के अध्‍यक्ष श्री विनय कुमार सक्‍सेना एवं एमएसएमई मंत्रालय में सचिव श्री के. के. जालान भी थे।

आतंकवादी मसर्रत की गिरफ्तारी के बाद हिंसा, किया राष्‍ट्रीय ध्‍वज का अपमान

आतंकवादी मसर्रत आलम की गिरफ्तारी को लेकर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी समर्थक काफी बवाल मचा रहे हैं। श्रीनगर में जामिया मस्जिद इलाके में अराजक तत्वों ने जमकर तोड़फोड़ शुरू कर दी है। इसके साथ ही पथराव किया जा रहा है और कुछ लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज भी जला दिया। भारी मात्रा में पुलिस वहां तैनात है।

इससे पहले सरकार ने कहा है कि मसर्रत को विद्रोहात्मक गतिविधियों के चलते गिरफ्तार किया गया है और मामले की जांच जारी है। वीडियो फुटेज जांचने के बाद सामने आया कि मसर्रत पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाते हुए भीड़ का नेतृत्व कर रहा था। उस भीड़ ने भी पाकिस्तान के झंडे के साथ पड़ोसी मुल्क के समर्थन में नारे लगाए।

दरअसल, चौतरफा दबाव के बाद आखिरकार आज अलगाववादी मसर्रत आलम को गिरफ्तार कर लिया गया। जम्मू कश्मीर पुलिस ने मसर्रत को आज सुबह उसके घर से गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद उसे पुलिस स्टेशन ले जाया गया और अदालत में पेश किया जाना है।

इस अलगाववादी की गिरफ्तारी के बाद कश्मीर घाटी में भारी तनाव है। गिरफ्तारी से पहले मसर्रत ने एक चैनल से बातचीत में स्पष्ट कहा कि ''गिरफ्तारी उसके लिए कोई नई बात नहीं है। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा। हिरासत उसके इरादों को रोक नहीं सकती।''


मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा भी कड़ा रुख अपनाए हुए है। भाजपा महासचिव राम माधव मसर्रत के मुद्दे को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद और उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह से मुलाकात कर सकते हैं। पार्टी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि उनकी पार्टी की नीति स्पष्ट है। पार्टी के नेता नलिन कोहली ने कहा कि हम राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। वहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी कहा है कि जम्मू-कश्मीर, अलगाववाद और राष्ट्रवाद के विषय को लेकर न कोई समझौता हुआ है और न ही होगा।

विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर भाजपा को घेरा है। आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में बदतर व्यवस्था का जवाब भाजपा सरकार को देना चाहिए। वहीं, कांग्रेस ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को आश्वस्त करें कि घाटी में दोबारा से ऐसी हिमाकत नहीं होगी।

दरअसल, मसर्रत को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। तीन दिनों पहले श्रीनगर रैली के दौरान मसर्रत ने पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए थे और रैली में उसके समर्थकों ने पाकिस्तानी झंडे भी लहराए थे। इसके चलते दो दिनों पहले मसर्रत के खिलाफ राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में केस दर्ज किया गया था। हालांकि मसर्रत ने इन आरोपों को गलत बताया है।

इससे पहले कल मसर्रत सहित छह अलगाववादियों को अपने अपने घरों में नजरबंद कर दिया गया था। इनमें गिलानी और मीर वायज मौलवी फारूक शामिल है, लेकिन पूरे देश में इस बात को लेकर काफी नाराजगी थी कि खुलेआम सड़कों पर राष्ट्रविरोधी गतिविधि में शामिल होने के बावजूद उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा है। इस बात के लिए मुफ्ती सरकार पर भारी दबाव था। इन दबावों के आगे मुफ्ती सरकार को झुकना पड़ा और आज सुबह मसर्रत को गिरफ्तार कर लिया गया।

सरकार में शामिल भाजपा इन बातों के लेकर काफी नाराज थी। भाजपा के मंत्रियों ने चेतावनी दी थी कि अगर मसर्रत को गिरफ्तार नहीं किया गया तो वे मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल नहीं होंगे।

आतंकवादी मसर्रत आलम गिरफ्तार, गिलानी नजरबन्द

"मेरी जान पाकिस्तान" का नारा लगाने वाले जम्मू-कश्मीर के अलगाववादियों के खिलाफ राज्य की पीडीपी-भाजपा सरकार ने सख्त कदम उठाया है। मसरत आलम को शुक्रवार सुबह गिरफ्तार कर लिया गया। उसे श्रीनगर से बडग़ाम थाने ले जाया जाएगा। 

इससे पहले गुरुवार शाम को मसरत आलम और कट्टरपंथी हूर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी सहित पांच अलगाववादी नेताओं को नजरबंद किया गया था।

पुलिस ने इनके खिलाफ रणबीर आचार संहिता और गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। राज्य के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने कहा था कि कानून अपना काम करेगा और देश के खिलाफ किसी भी तरह की हरकत स्वीकार नहीं की जाएगी।

उधर, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुख्यमंत्री से इस संबंध में कठोर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अलगाववादी नेता मसरत आलम ने बुधवार को श्रीनगर में रैली की थी। इसमें कुछ युवक पाकिस्तान का झंडा लिए हुए थे।

अलगाववादियों ने बुधवार को श्रीनगर में रैली की। इस रैली का नेतृत्व हूर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी ने किया। इसमें अलगाववादी नेता मसरत आलम ने पाकिस्तानी झंडा लहराया और पाकिस्तान मेरी जान के नारे लगाए। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर या शिकायत दर्ज की थी। इस रैली के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री सईद से फोन पर बात की थी और कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। जिस पर सईद ने कार्रवाई का भरोसा दिया था।

हूर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े ने अपने अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने का विरोध किया था। हूर्रियत कॉन्फ्रेंस के मजलिस ए शूरा ने कहा  था कि वह इसकी कड़ी निंदा करते हैं।

राजनाथ की मुफ़्ती को दो टूक: मसर्रत आलम को गिरफ्तार करो

पांच साल के अंतराल के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने बुधवार को कट्टरपंथी नेता सैयद अली शाह गिलानी को श्रीनगर के बाहरी इलाके में एक जनसभा करने की इजाजत दी. इस जनसभा में पिछले महीने जेल से रिहा हुए मसर्रत आलम सहित गिलानी के समर्थकों ने पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाए और पाकिस्तानी झंडे लहराए.

सर्दी का मौसम दिल्ली में बिताने के बाद यहां लौटे गिलानी को आलम की अगुवाई में निकाले गए एक जुलूस में हवाई अड्डे से उनके आवास तक ले जाया गया. इस बीच, आलम के खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है.

मसर्रत के इस रवैया से केंद्र सरकार नाराज है और उसने इस मामले पर कार्रवाई को कहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने फोन कर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद से बात की है और उन्हें मसर्रत को तुरंत गिरफ्तार करने को कहा है.

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कल रात जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद से बात की और स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे से समझौता नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने सिंह को बताया कि रैली में क्या हुआ था और वहां क्या स्थिति थी.

उनके मुताबिक, सिंह ने सईद से कहा कि ‘‘ऐसे किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता जिसे राष्ट्रविरोधी करार दिया जा सकता है.’’ गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि जो लोग इसमें लिप्त थे उनके खिलाफ कडी से कडी कार्रवाई की जानी चाहिए. पांच साल के अंतराल के बाद, जम्मू कश्मीर सरकार ने कल गिलानी को रैली करने की अनुमति दी थी जहां जेल से पिछले माह रिहा हुए मसर्रत आलम सहित उनके समर्थकों ने पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए और अन्य ने पाकिस्तानी झंडे लहराए.

जम्मू-कश्मीर में पीडीपी की गठबंधन सहयोगी भाजपा ने इस घटना पर कडी प्रतिक्रिया जाहिर की. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि राज्य सरकार से कहा गया है कि कानून तोडने वालों पर वह कार्रवाई करे.      
भाजपा पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने कहा कि यदि इस घटना से वह इतनी ही चिंतित है तो उसे गठबंधन तोड देना चाहिए. पीडीपी-भाजपा के पिछले महीने राज्य की सत्ता में आने के तुरंत बाद रिहा हुए आलम ने श्रीनगर हवाई अड्डे से हैदरपुरा स्थित गिलानी के आवास तक मार्च की अगुवाई की.      

हुर्रियत कांफ्रेंस से अलग होने के बाद सभी पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी पार्टियों के साथ अपना संगठन बनाने वाले गिलानी ने आत्म-निर्णय के अधिकार की बात की और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद में उनके भाषण का सीधा प्रसारण किया गया.      

हुर्रियत कांफ्रेंस के प्रवक्ता अयाज अकबर ने कहा, ‘‘यह (गिलानी के भाषण का प्रसारण) पीओके में एक अर्ध-सरकारी संगठन के साथ की गई व्यवस्था से हुआ.’’ उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब पाकिस्तान और गिलानी के समर्थन के साथ-साथ 45 साल के मसर्रत आलम के समर्थन में भी नारे लगाए जाने लगे.  

संवाददाताओं से बातचीत में आलम ने इन बातों को नकारा कि वह गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल हो रहा है. पाकिस्तानी झंडे लहराने वाले नौजवानों के एक समूह की ओर इशारा करते हुए आलम ने कहा, ‘‘हम तो बस कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं को बढावा दे रहे हैं. उनके हौसले को देखिए.’’ साल 2010 में गर्मी के मौसम में श्रीनगर में हुए प्रदर्शन के बाद गिलानी की यह पहली जनसभा थी. साल 2010 के प्रदर्शन में 100 से ज्यादा नौजवान मारे गए थे. पूरे प्रदर्शन में आलम ने अहम भूमिका निभाई थी और हडतालों के लिए साप्ताहिक कार्यक्रम जारी किया करता था.      

हुर्रियत के झंडों के अलावा कुछ समर्थकों के हाथों में पाकिस्तानी झंडे भी देखे गए. उन्होंने पाकिस्तान समर्थक और आजादी समर्थक नारे भी लगाए. जनसभा को संबोधित करते हुए गिलानी ने कहा कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच कोई सीमा विवाद नहीं है बल्कि राज्य के एक करोड लोगों का मुद्दा है.      

गिलानी ने कहा, ‘‘हम यथास्थिति स्वीकार नहीं करेंगे और आत्म-निर्णय का अधिकार हासिल करने के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा. हम शिमला समझौता या लाहौर घोषणा-पत्र स्वीकार नहीं करेंगे.’’

चुनाव बाद बीजेपी के साथ आ सकती है पीडीपी

विधानसभा के लिए होने जा रहे चुनावों से पहले जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी पीडीपी ने संकेत दिए हैं कि वह चुनाव के बाद बीजेपी के साथ आ सकती है। पार्टी चीफ मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कहा कि वह पहले भी बीजेपी के नेताओं के साथ काम कर चुके हैं और आगे भी कर सकते हैं।

एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कहा कि मैं वाजपेयी और आडवाणी के साथ काम कर चुका हूं और हमें आगे भी दिल्ली सरकार के साथ मिलकर चलना होगा। उन्होंने कहा, 'जम हम आए थे(राज्य में सत्ता में) तो वाजपेयी जी हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री थे और आडवाणी होम मिनिस्टर। उनको भी हमने साथ चलाया। हम अकेले नहीं चला सकते हैं। कंधे से कंधा मिलाकर चलना है। उन लोगों के साथ भी जो दिल्ली में आज भी बैठे हैं।' 

पीडीपी चीफ ने यह भी कहा कि भारत को पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बातचीत शुरू करनी चाहिए, ताकि इलाके में शांति कायम रह सके। उन्होंने कहा, 'अगर आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंदुस्तान को एक महान देश बनाना चाहते हैं तो उन्हें अटल जी की मिसाल पर काम करना होगा। अटल जी ने कहा था- आप अपने दोस्त बदल सकते हैं, मगर पड़ोसी नहीं बदल सकते।' 

जम्मू-कश्मीर में 25 नवंबर से 20 दिसंबर तक पांच चरणों में चुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव के नतीजे 23 दिसंबर को आएंगे।

मोदी पाक और चीन के साथ सभी विवाद सुलझाने में समर्थ - जयराम रमेश

बेशक कांग्रेस को लगता हो कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से देश में सांप्रदायिक ताकतें हावी हो जाएंगी, लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ऐसा नहीं सोचते। वह कहते हैं कि मोदी में भारत का रिचर्ड निक्सन बनने की सारी खूबियां हैं। वह पाकिस्तान और चीन के साथ सभी विवाद सुलझाने में समर्थ हो सकते हैं।

कश्मीर के निजी दौरे पर आए जयराम रमेश ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि जिस तरह से निक्सन ने अमरीका को चीन के लिए खोलते हुए एक नए दौर की शुरुआत की, वैसा ही कुछ हम नरेंद्र मोदी से उम्मीद कर रहे हैं। वह एक मजबूत और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति वाले नेता हैं। उनके इरादे स्पष्ट लगते हैं। उनमें लचीलापन भी है, जिसकी कमी उनके पूर्ववर्तियों में कहीं न कहीं खलती थी। नमो ने जिस तरह से अपने शपथग्रहण समारोह के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मियां नवाज शरीफ को बुलाया। अगर हमने उन्हें बुलाया होता तो हम पर नवाज शरीफ को बिरयानी परोसने का आरोप लगाते हुए भाजपा चारों तरफ से हमले करती, लेकिन कांग्रेस मोदी पर हमले की स्थिति में नहीं है।

जयराम रमेश ने कहा कि जहां तक मेरा मानना है कि मोदी की नीतियों को लेकर जल्द ही उनके संगठन के भीतर भी परस्पर विरोध देखने को मिल सकता है। भाजपा का थिंक टैंक माना जाने वाला विवेकानंद फाउंडेशन पाकिस्तान को लेकर बहुत ही कट्टर सोच रखता है। ऐसे हालात में पत्र लिखना, साड़ी और शॉल भेंट करना क्या गुल खिलाएगा, कुछ कहना मुश्किल है। लेकिन देर-सवेर इस पर विवाद जरुर देखने को मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ बहुत ही संवेदनशील मुद्दों पर विवाद हैं। चीन तवांग पर अपना हक जताता है। लेकिन आबादी और क्षेत्र का आदान प्रदान नहीं किया जा सकता।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी में कई बदलाव आए हैं, उनके कामकाज का ढंग भी ध्यान देने योग्य हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केबिनेट पर अपनी प्रतिक्रिया जताते हुए उन्होंने कहा कि मोदी ने पहली बार संसद में पहुंची स्मृति ईरानी, पियूष गोयल और धर्मेंद्र प्रधान जैसे सांसदों को मंत्री बनाकर उन्हें स्वतंत्र प्रभार सौंपा है, इस बदलाव के लिए वह बधाई के पात्र हैं। कांग्रेस में ऐसा नहीं सोचा जा सकता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेसियों द्वारा चाय वाला व्यंग्य कसने पर उन्होंने कहा कि यह अफसोसजनक है। कांग्रेस को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी है।

जयराम के बयान से कांग्रेस ने किया किनारा

कांग्रेस को एक बार फिर अपने नेता के बयान से किनारा करना पड़ा। पार्टी ने जयराम रमेश के प्रधानमंत्री मोदी की तुलना रिचर्ड निक्सन से किए जाने से खुद को अलग कर लिया है। पार्टी प्रवक्ता राजबब्बर ने कहा कि 'जयराम रमेश एक बुद्धजीवी हैं, राजनीतिक बुद्धजीवी हैं यह केवल वह ही बता सकते हैं कि उन्होंने क्या कहा या लिखा।

राजबब्बर ने कहा कि मुझे नहीं पता कि जयराम रमेश ने यह बातें किस संदर्भ में कहीं हैं। उन्होंने कहा कि निक्सन एक मात्र अमेरिकी राष्ट्रपति थे जिन्हें वाटरगेट जैसे कांड के चलते पद छोड़ना पड़ा था। गौरतलब है कि अमेरिका के लिए चीन से संबध कायम करने में निक्सन का बड़ा योगदान है। जयराम से पहले पार्टी के एक और प्रवक्ता शशि थरूर ने मोदी की तारीफ की थी जिसके बाद से पार्टी ने उनके मीडिया में जाने पर रोक लगा दी है।

कश्मीर यूनिवर्सिटी में हुआ तिरंगे का अपमान, सरकार मौन

डायरेक्टर-प्रड्यूसर विशाल भाराद्वाज की फिल्म 'हैदर' की श्रीनगर में शूटिंग के दौरान कश्मीर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने विरोध कर दिया और सेट पर तोड़फोड़ की। यूनिवर्सिटी कैंपस में रविवार को फिदायीन हमले की शूटिंग चल रही थी, इसी दौरान तिरंगा फहराने के साथ जय हिंद का नारा लगाने का सीन फिल्माया जाना था। यूनिवर्सिटी के छात्रों का एक समूह इसका विरोध करने लगा। ये लोग कश्मीर की आजादी और पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने लगे। विवाद बढ़ता देख यूनिट ने शूटिंग के बिना ही पैकअप कर लिया। मौके पर सुरक्षा के लिए मौजूद पुलिसकर्मियों ने मुश्किल से विशाल भारद्वाज और ऐक्टर इरफान खान सहित अन्य कलाकारों और यूनिट को सुरक्षित बाहर निकाला।

विशाल भारद्वाज अपनी इस फिल्म की शूटिंग करीब 20 दिनों से कश्मीर में कर रहे हैं। रविवार सुबह कश्मीर यूनिवर्सिटी के नसीम बाग में एक सीन फिल्माने के लिए सैन्य शिविर का सेट लगाया गया था। इसमें बंकर के ऊपर तिरंगा लगा हुआ था। छुट्टी का दिन होने के बावजूद दो हॉस्टलों से करीब 50 छात्र जमा हो गए और विरोध करने लगे। ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने इन छात्रों को किसी तरह समझाकर शांत कराया। इसके बाद छात्रों ने मांग की कि भारतीय झंडे को उतारा जाए और फिल्म में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं होना चाहिए। यूनिट के लोगों ने दबाव में तिरंगे को उतार लिया। इसी दौरान ऐक्टर इरफान खान के सिगरेट पीने और शूटिंग के दौरान जयहिंद का नारा लगाने पर छात्र उत्तेजित हो गए। छात्रों ने पाकिस्तान और कश्मीर की आजादी के समर्थन में नारे लगाते हुए सेट पर तोड़फोड़ शुरू कर दी।

हंगामा करने पर पुलिस ने दो छात्रों को हिरासत में ले लिया, जिस पर दूसरे छात्र भड़क उठे। उन्होंने फिल्म यूनिट को घेर लिया। इसके बाद आनन-फानन में शूटिंग रद्द कर दी गई। श्रीनगर के एसएसपी आशिक बुखारी ने कहा कि छात्रों के एक समूह ने राष्ट्रीय झंडे का विरोध किया था। उनके मुताबिक, फिल्म की यूनिट ने संघर्ष की स्थिति पैदा होने से पहले ही शूटिंग रद्द कर दी और पैकअप कर लिया। हिरासत में लिए गए छात्रों को यूनिवर्सिटी प्रशासन के आग्रह पर बाद में रिहा कर दिया गया। पुलिस ने पुष्टि की कि शूटिंग के दौरान छात्रों ने उत्तेजक नारेबाजी की और फिल्म यूनिट के साथ धक्कामुक्की कर सेट को नुकसान पहुंचाया।

कश्मीर यूनिवर्सिटी छात्र यूनियन के प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा है कि प्रदर्शनकारियों ने भारतीय झंडे को नीचे उतरवाया और इरफान खान को सिगरेट बुझाने के लिए मजबूर किया। इसमें यह भी कहा गया है कि दो छात्रों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में छोड़ दिया गया। प्रवक्ता ने कहा कि प्रॉक्टर नसीर इकबाल ने दोनों छात्रों को रिहा कराने के साथ वादा किया है कि सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

विशाल भारद्वाज शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक 'हैमलेट' पर आधारित फिल्म 'हैदर' बना रहे हैं। ऐक्टर शाहिद कपूर और श्रद्धा कपूर के लीड रोल वाली इस फिल्म की ज्यादातर शूटिंग कश्मीर में ही हो रही है। विशाल इसके पहले भी शेक्सपियर के नाटक 'मैकबेथ' पर मकबूल और उपन्यास 'ओथेलो' पर 'ओमकारा' जैसी फिल्में बना चुके हैं।

आसाराम बापू को फंसाने के लिए रचे गये षड्यंत्र का पर्दाफाश-सुरक्षा गार्ड पर केस दर्ज

जम्मू एवं कश्मीर पुलिस ने शुक्रवार को आध्यात्मिक गुरु प. पू. आसाराम बापू के खिलाफ षड्यंत्र रचने के आरोप में उनके आश्रम के एक सुरक्षा गार्ड के खिलाफ मामला दर्ज किया है। गार्ड ने यह दावा किया था कि कुछ बच्चों की हत्या के बाद शव प. पू. आसाराम बापू के आश्रम में ही दफना दिए गए थे। इससे पहले, जम्मू की अदालत में प. पू. आसाराम बापू के भगवती नगर आश्रम में तीन बच्चों की हत्या के बाद उन्हें दफनाए जाने का आपराधिक मामला दर्ज किया गया था और गार्ड भोलानाथ घटनास्थल की पहचान के लिए तैयार हो गया था। इसके बाद अदालत ने जम्मू पुलिस को मामला दर्ज करने और मामले की जांच करने के आदेश दिए थे।

इधर, शुक्रवार को इस मामले में तब नाटकीय मोड़ आया जब पुलिस ने प. पू. आसाराम बापू को झूठे आरोप में फंसाने के मामले में भोलानाथ के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया। एक पुलिसकर्मी ने बताया कि भोलानाथ ने एक स्थानीय युवक विक्रांत शर्मा को फोन पर आश्रम के नीचे मानव कंकाल दफन करने को कहा ताकि वह पुलिस के सामने इसके नीचे तीन बच्चों की हत्या के बाद उन्हें दफनाने का दावा कर सके।

एक अधिकारी ने कहा कि विक्रांत को अदालत के सामने पेश किया गया। भोलानाथ के साथ उसकी हुई बातचीत की सीडी भी उसके पास थी। अधिकारी ने कहा कि बातचीत असली लग रही है और अदालत के आदेश पर हमने जयपुर निवासी भोलानाथ के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र की प्राथमिकी दर्ज की। हमें यह सूचना मिली है कि वह फिलहाल मुंबई में है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि भोलानाथ को गिरफ्तार करने और जम्मू लाकर जांच करने के लिए पुलिस की एक टीम भेज दी गई है।

इस घटना से यह फिर साबित हो गया है कि प. पू. आसाराम बापू जी के खिलाफ उन्हें फसाने के लिए षडयंत्र रचा जा रहा है । कुछ दिन पहले एक तथाकथित पीडिता के पिता ने कहा था कि शाहजहांपूर पीडिता का परिवार एवं जोधपूर पुलिस उन पर प. पू. आसाराम बापू के खिलाफ बयान देने के लिए दबाव डाल रहे थे । क्या मीडिया यह सब चीजे भी समाज के सामने लाएगा ? 

कश्मीर में हिंदू मंदिरों के संरक्षण संबंधी बिल को सरकार ने टाला

कश्मीर में हिंदू मंदिरों व धर्मस्थलों के संरक्षण संबंधी बिल फिर अगले सत्र के लिए टल गया है। बुधवार को हंगामे और शोर शराबे के बीच ही सदन ने इस बिल को अगले सत्र में पेश किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की।

स्पीकर मुबारक गुल द्वारा सदन के मौजूदा सत्र को अनिश्चतकाल के लिए स्थगित किए जाने से पूर्व विधानसभा ने चार प्रस्ताव मंजूर किए। राज्य विधानसभा में जिस समय पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल वीके सिहं के मुद्दे पर समूचा विपक्ष हंगामा कर रहा था, उस समय विधि एवं संसदीय मामलों के मंत्री मीर सैफुल्ला ने कश्मीरी हिंदू श्राइन एवं रिलिज्यस प्लेसिस (मैनेजमेंट एंड रेग्युलेशन) बिल, 2009 (एलए बिल संख्या: 11, वर्ष 2009) पर चयन समिति की रिपोर्ट को अगले सत्र के अंतिम दिन तक पेश किए जाने का प्रस्ताव पेश किया। 

विपक्ष नारेबाजी और हंगामे में व्यस्त रहा और सत्तापक्ष के विधायकों के ध्वनिमत में यह प्रस्ताव पारित हो गया। इसी तरह जम्मू-कश्मीर मेंकृषि योग्य भूमि के गैर कृषि कार्यों के लिए इस्तेमाल संबधी बिल पर संयुक्त चयन समिति की रिपोर्ट को पेश करने के लिए अगले सत्र के अंतिम दिन तक की अनुमति के लिए प्रस्ताव पेश किया। यह प्रस्ताव भी ध्वनिमत से पारित हो गया। 

जम्मू-कश्मीर निजी सुरक्षा एजेंसियों के संदर्भ में बिल पर गठित चयन समिति की रिपोर्ट को भी अगले सत्र के अंतिम दिन तक पेश किए जाने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हो गया। मध्य और उत्तरी कश्मीर में वेटलैंड पर हुए कब्जों और काचराई व कृषि भूमि के गैर कृषि कार्यों के इस्तेमाल पर गठित हाऊस कमेटी की रिपोर्ट को अगले सत्र के अंतिम दिन तक पेश किए जाने की इजाजत के लिए प्रस्ताव ध्वनिमत से स्वीकार कर लिया।

कश्मीर के शंकराचार्य हिल का नाम बदल कर `तख्त-ए-सुलेमान’ किया गया

भारतीय पुरातत्व विभाग ने हाल ही में कश्मीर के शंकराचार्य हिल का नामकरण `तख्त-ए-सुलेमान’ किया है । इतना ही नहीं, अपितु भारतीय पुरातत्व विभाग ने वहां के सूचना फलक पर शंकराचार्य हिलके विषयमें विपर्यस्त (उलटा-पलटा) जानकारी भी मुद्रित की है । इस विषयमें कश्मीर के हिदुओं ने संतप्त प्रतिक्रिया व्यक्त की है । अब हिंदुओ को भारतीय पुरातत्व विभाग को वैध मार्ग से फटकार लगानी चाहिए तथा वापस मूल नाम रखने के लिए विवश करना चाहिए.

कश्मीर के प्राचीन इतिहास तज्ञ प्रेधुमन के जोजेफ धर द्वारा बताया गया कि पहले के सूचना फलक में परिवतर्न कर ‘तख्त-ए-सुलेमान’ यह सूचना फलक प्रकाशित करनेक प्रकरण आपत्तिजनक है । इस निष्कर्षतक वे कैसे आए, इसका उत्तर उन्हें देना पडेगा । वर्तमानमें यूरोपके एक इतिहासकार ने इस स्थान का भ्रमण किया था । उस समय लोगों को बताई जानेवाली झूठी जानकारी के विषयमें उसने आश्चर्य व्यक्त किया । इस नामकरण का कोई भी ऐतिहासिक आधार नहीं । यह कृत्य राजनीतिक हेतु प्रेरित है । 

आश्चर्य की बात यह है कि सुलेमान तथा आदि शंकराचार्य का एक दूसरे के साथ कोई संबंध नहीं । भारत के प्रत्येक व्यक्ति को पता है कि आदि शंकराचार्य ने भारत के चारों दिशाओं का भ्रमण किया था तथा प्रत्येक दिशा में मठकी स्थापना की थी । साथ ही उन्होंने सर्वत्र छोटे-बडे मंदिरों की स्थापना की थी । उसमें तामिलनाडु का कांचीपुरम्, कर्नाटक का कोलूर तथा पाकव्याप्त कश्मीर का शारदा आदि मंदिर समाविष्ट हैं । पहले कश्मीर को शारदा देश अथवा शारदा पीठ कहकर संबोधित किया जाता था । उस समय यह शिक्षा का विश्वविख्यात केंद्र था । कश्मीर में सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक केंद्र निर्माण करने हेतु आदि शंकराचार्य का बहुत बडा योगदान था । यहां के शंकराचार्य हिल का `तख्त-ए-सुलेमान’, नामकरण कर पुरातत्व विभाग प्राचीन भारतीय परंपरा नष्ट करनेका प्रयास कर रहा है ।

मोदी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने हेतु अफज़ल की दी फांसी - राशिद


जम्मू-कश्मीर के निर्दलीय विधायक इंजीनियर राशिद ने कहा है कि अफजल गुरु का शव लौटाने की मांग प्रदेश के विधानसभा में भी गूंजेगी.राशिद ने कांग्रेस पर यह इल्जाम लगाया कि उसने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए अफजल गुरू को फांसी दे दी.

उन्होंने यह आरोप लगाया कि यह सिर्फ इसलिए किया गया, ताकि नरेंद मोदी को प्रधानमंत्री बनने से रोका जाये. उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा ही लोकतंत्र का गला घोंटती आयी है. कांग्रेस की इन्हीं नीतियों के कारण कश्मीर ज्यादा दिनों तक भारत का अभिन्न अंग बनकर नहीं रहेगा.

उन्होंने प्रदेश की मुख्यधारा की सभी पार्टियों को मीटिंग के लिए बुलाया है. उन्होंने यह आग्रह किया है कि वे सभी अफजल गुरु का शव लौटाने की मांग में उनका साथ दें. संवाददाताओं के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि विधानसभा के सत्र में वे दो मांग उठाने वाले हैं. एक तो अफजल गुरु का शव वापस देने की और दूसरा मौत की सजा को समाप्त करने की.

इधर खबर है कि सरकार ने अफजल गुरु का शव उसके परिजनों को वापल नहीं लौटाने का निर्णय किया है. गौरतलब है कि अफजल की पत्नी के नाम से एक पत्र सरकार के पास आया है, जिसमें उन्होंने अफजल का शव वापस देने की गुजारिश की है. लेकिन गृह मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि इस संबंध में अभी निर्णय नहीं हुआ है और जो भी निर्णय होगा उससे जम्मू-कश्मीर की प्रदेश सरकार को अवगत करा दिया जायेगा.

कश्मीरी पंडितों को सात दिन के अंदर वादी छोड़ने का फरमान

उमर अब्दुल्ला सरकार पंडितों की वापसी लायक माहौल बनने के लाख दावे करे, लेकिन आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने कश्मीरी पंडितों को सात दिन के अंदर वादी छोड़ने का फरमान सुनाया है।

इस धमकी के बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर संदिग्ध तत्वों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है। इस बीच, आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के दोनों गुटों ने कश्मीरी विस्थापितों को सुरक्षा का यकीन दिलाते हुए कहा कि वह इस धमकी को गंभीरता से न लें। 

यह किसी सुरक्षा एजेंसी की कश्मीरी पंडितों और कश्मीरी मुस्लिमों के बीच मतभेद पैदा करने की साजिश है। विभिन्न आतंकी संगठनों के साझा मंच यूनाइटेड जेहाद काउंसिल और हिजबुल मुजाहिदीन के सुप्रीमो सल्लाहुदीन ने भी कश्मीरी पंडितों को मिली इस धमकी की निंदा करते हुए इसे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की साजिश करार दिया है।

आतंकी संगठन ने यह धमकी पोस्टर लगाकर नहीं बल्कि डाक के जरिये एक खत भेजकर दी है। यह खत बडगाम जिले के शेखपोरा इलाके में कश्मीरी पंडितों के लिए बनाई गई आवासीय कॉलोनी के अध्यक्ष के नाम भेजा गया है। जैश कमांडर जुबैर ने इस खत में कश्मीरी पंडितों को सात दिन के अंदर कश्मीर छोड़ने का फरमान सुनाया है। 

खत में कश्मीर में गैर इस्लामिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर जेहाद को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। इस धमकी के बाद न सिर्फ शेखपोरा में बल्कि वादी के अन्य हिस्सों में रह रहे कश्मीरी पंडितों में भी भय पैदा हो गया है।

गिलानी फिर भौंका - कश्मीरी पंडितों की कॉलोनियां नहीं बनने देंगे

कश्मीरी पंडितों को दिल से लगाकर रखने के जूठे दावे करने वाले कट्टरपंथी और बेहद ही कमीने नेता सैयद अली शाह गिलानी ने सोमवार को वादी में कश्मीरी विस्थापित पंडितों के लिए दी जा रही ट्रांजिट आवासीय सुविधा का विरोध किया है।

उसने कहा कि यह कश्मीर की मुस्लिम आबादी को अल्पसंख्यक बनाने की साजिश है। हम किसी भी सूरत में इन आवासीय कॉलोनियों को नहीं बनने देंगे।

वादी में वापस लौटने के इच्छुक कश्मीरी विस्थापित पंडितों के लिए राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री पुनर्वास योजना के तहत कई इलाकों में ट्रांजिट आवास का निर्माण किया है। कुत्ते गिलानी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि केंद्र सरकार सुनियोजित साजिश के तहत वादी में कुछ ऐसी कॉलोनियां बना रही है, जिनमें कश्मीरी पंडितों की आड़ में गैर-कश्मीरी और गैर-मुस्लिम लोगों को बसाया जाएगा।

इस साजिश में इजरायल की खुफिया एजेंसी भारत की मदद कर रही है। जिस तरह फलस्तीन में इजरायल ने यहूदियों की बस्तियां बनाई हैं, उसी तरह यहां गैर-मुस्लिम लोगों को बसाया जा रहा है। यह साजिश कामयाब हुई तो कश्मीर में गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा हो जाएंगे। 

गंगा रक्षा आंदोलन के स्वामी सानंद गुपचुप तरीके से श्रीनगर पहुचें

पुलिस और खुफिया एजेंसियों को धता बताते हुए गंगा पर बन रहें बांधों का विरोध करने वाले स्वामी सानंद गुपचुप तरीके से श्रीनगर पहुंच गए। फिलहाल वह लक्ष्यमोली में हैं। वह सोमवार से ही दिल्ली के एम्स अस्पताल से गायब हो गए थे। उनके गायब होने की सूचना के बाद उन्हें तलाशने में पुलिस और प्रशासन के पसीने छूट गए थे।

गंगा रक्षा आंदोलन को आगे बढ़ाने वाले स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद सोमवार से ही दिल्ली के एम्स अस्पताल से लापता थे। उन्हें पुलिस ने जोशीमठ जाते समय गिरफ्तार कर दिल्ली भेजा था। बताया जा रहा है कि दिल्ली एम्स से वे रात दो बजे निकले थे, तबसे उनका उनका कोई पता नहीं चल पा रहा था। उनके परिजनों व करीबियों को भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि वे कहां हैं। दिल्ली पुलिस ने भी इस संबंध में किसी जानकारी से इन्कार किया है।

सोमवार को वे गंगा और अन्य नदियों के पानी के वैज्ञानिक परीक्षण कि लिए जोशीमठ रवाना हुए थे। लेकिन उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर दिल्ली के एम्स भेजा था। मंगलवार को पूरे दिन पुलिस उनकी लोकेशन तलाशने में जुटी रही, लेकिन उनका पता नहीं चला।

उनके सहयोगी अर्जुन यादव और साथ यात्रा पर जा रहे पवित्र सिंह, दोनों के फोन भी बंद मिले। पुलिस को सुबह 11 बजे के करीब उनकी आखिरी लोकेशन दिल्ली में मिली थी। जोशीमठ जाने की जिद ठाने स्वामी सानंद के इस तरह गायब होने से उत्तराखंड पुलिस के लिए मुसीबत पैदा हो गई है।

एम्स प्रवक्ता डॉक्टर वाईके गुप्ता का कहना है कि हमें जानकारी मिली है कि वे सोमवार रात लगभग ढाई बजे मेडिकल एडवाइस के बिना ही अस्पताल से चले गए। इस बारे में स्वामी सानंद के गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी स्वामी सानंद को लेकर चिंता व्यक्त की थी। दिल्ली पुलिस के एडिशनल डीसीपी पीएस कुशवाहा का कहना है कि पुलिस को स्वामी सांनद के एम्स में भर्ती होने की आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी।

उत्तराखंड पुलिस का कहना है कि स्वामी सांनद के जोशीमठ जाने पर वहां की शांति व्यवस्था के साथ-साथ उनकी जान को भी खतरा है। पुलिस को अब इस बात की चिंता है कि अगर स्वामी सानंद जोशीमठ या अलकनंदा घाटी पहुंच गए तो क्या होगा? क्योंकि स्वामी सानंद श्रीनगर परियोजना का काम न रोके जाने पर अलकनंदा नदी में कूद कर जान देने की बात कह चुके हैं। इन बातों के मद्देनजर स्वामी सानंद की खोज में गुप्तचर एजेंसियों सहित पुलिस की कई टीमें लगा दी गई हैं।

जेहादियों के जुल्म का शिकार मंदिर 22 साल बाद फिर बनाया गया

डाउन-टाउन के रैनावारी स्थित 400 साल पुराने वैताल भैरव मंदिर में घंटियों की ध्वनि मंगलवार को फिर से गूंज उठी। 22 सालों से वीरान खंडहर में तब्दील हो चुके मंदिर में मरम्मत से पूर्व सनातन परंपराओं के मुताबिक पूजा-अर्चना हुई।

कश्मीर में जब आतंकवाद चरम पर था तो जेहादियों ने इस मंदिर को तोड़ दिया था। मंदिर में प्रतिष्ठित मूर्तियों को खंडित कर दिया गया था। मंदिर प्रांगण में स्थित शिवलिंग को भी धमाके से तोड़ा गया था। उसी मंदिर के पुन: जीर्णोद्धार के लिए बीते रोज कश्मीरियत जिंदा हो उठी। 

हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के सहयोग से मंदिर में फिर से पूजा शुरू की गई। हालांकि कुछ महीने पहले भू-माफिया ने मंदिर पर कब्जा करना चाहा। स्थानीय हाजी अब्दुल हमीद ने कहा कि जब पता चला कि इस पर भूमाफिया कब्जा कर रहा है तो हम सभी ने मिलकर विरोध जताया और यहां धरना दिया, क्योंकि यह हमारे कश्मीरी भाइयों की अमानत है। मरम्मत कार्य की निगरानी कर रहे राजन नखासी ने बताया कि ऑल पार्टी माइग्रेट कोऑर्डिेनेशन कमेटी और अन्य कश्मीरी पंडित संगठनों ने मंदिर को बचाने के लिए हर जगह दरवाजा खटखटाया।

कमेटी के अध्यक्ष विनोद पंडित ने कहा कि मंदिर की मरम्मत का काम चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। इस बीच श्रद्धालु मंदिर में आकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं। मरम्मत के बाद मूर्तियों को प्रतिष्ठित किया जाएगा।


दूसरे राज्य के झुग्गीवालों से धारा 370 का उल्लंघन - गिलानी

ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी गुट के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी ने जम्मू-कश्मीर सरकार को 20 अक्टूबर तक झुग्गी-झोपडि़यों में रहने वाले अन्य राज्यों के वाशिंदों को बाहर करने का अल्टीमेटम दिया है।

गिलानी
ने झुग्गियों में रहने वालों को संपत्ति का अधिकार देने के फैसले को बदलने के लिए भी कहा है।कट्टरपंथी नेता ने कहा कि अगर सरकार से झुग्गियों में रहने वालों को संपत्ति का अधिकार देने का फैसला नहीं बदला तो राज्य में उसके खिलाफ उग्र आंदोलन चलाया जाएगा।

गौरतलब
है कि राज्य सरकार ने बीते दिनों झुग्गियों में रहने वाले राज्य के स्थायी नागरिकों को इंदिरा आवास योजना के तहत संपत्ति का अधिकार देने का फैसला किया है।

गिलानी
ने हुर्रियत की मजलिस-ए-शूरा की बैठक में इस फैसले को पूरी तरह कश्मीरियों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि इससे धारा 370 का उल्लंघन होगा और मुस्लिमों के अल्पसंख्यक होने का खतरा पैदा हो जाएगा।

अमरनाथ यात्रा, धर्म के नाम पर धोखा - मुल्ला अग्निवेश

मुल्ला अग्निवेश ने अमरनाथ यात्रा को धर्म के नाम पर धोखा करार दिया है। उनके अनुसार आजादी की मांग करने वाले कश्मीरियों की आवाज को नई दिल्ली दबा रहा है। मुल्ला अग्निवेश ने हुर्रियत कान्फ्रेंस के प्रमुख सैयद अली शाह गिलानी से मुलाकात के दौरान यह बात कही।

बुधवार को दोनों के बीच चली एक घंटे की मुलाकात के दौरान कश्मीर की स्थिति को लेकर चर्चा हुई। 'पीस कान्फ्रेंस' में भाग लेने घाटी पहुंचे मुल्ला अग्निवेश गिलानी से मिलने उनके हैदर पोरा स्थित घर पहुंचे थे। मुल्ला अग्निवेश ने अलगाववादियों के सुर से सुर मिलाते हुए अमरनाथ यात्रा को ‘धार्मिक पाखंड’ करार दिया है।

गिलानी ने घाटी की स्थिति पर बात करते हुए कहा कि पत्थरबाजों को गिरफ्तार करना गलत निर्णय था। वहीं कान्फ्रेंस में मुल्ला अग्निवेश ने अमरनाथ यात्रा करने वालों को धर्म पर विश्वास नहीं रखने वाला कहा।

अग्निवेश ने कहा, 'अमरनाथ में बनने वाला शिवलिंग एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे धर्म से जोड़ा जाना सही नहीं है।' उन्‍होंने कहा, ‘मेरी समझ से बाहर है कि लोग अमरनाथ यात्रा के लिए क्‍यों जाते हैं। यह धर्म के नाम पर धोखा है। मैं इस तरह के धर्म पर यकीन नहीं करता। धर्म वह है जो गरीबों व वंचितों को न्‍याय दिलाए।’

मुल्ला ने अमरनाथ श्राइन बोर्ड के पूर्व चेयरमैन राज्यपाल एसके सिन्हा को निशाना बनाते हुए कहा कि ग्लोबल वार्मिंग से शिवलिंग पिघलने के बाद नकली शिवलिंग तैयार करवाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

अग्निवेश ने पिछले साल घाटी में हुए पत्थरबाजी की घटना के आरोपियों (पत्थरबाजों) की रिहाई के साथ राज्य से सशस्त्र बलों के स्पेशल पावर एक्ट को हटाने की भी मांग की। उन्होंने घाटी में प्रदर्शनों के दौरान मारे गए 118 लोगोंकी मौत की सीबीआई जांच कराने की भी मांग की।

मुल्ला ने इससे पहले नक्‍सलियों और सरकार के बीच मध्‍यस्‍थ की भूमिका निभाई थी। अमरनाथ यात्रा को लेकर स्‍वामी अग्निवेश के बयान को लेकर हिंदूवादी संगठनों में गुस्‍सा है। विहिप, बजरंग दल, भाजपा, क्रांति दल, शिव सेना आदि संगठनों ने अग्निवेश से माफी मांगने को कहा है।

कश्मीर पंचायत चुनाव : एक कश्मीरी पंडित महिला ने एक मुस्लिम को हराया

आशा जी पहली कश्मीरी पंडित महिला हैं जो मुस्लिम बहुल और उग्रवाद प्रभावित कश्मीर घाटी में पंच चुनी गई हैं। उन्होंने मुस्लिम महिला प्रतिद्वंद्वी सर्वा बेगम को हराकर यह चुनाव जीता।

गौरतलब है कि कश्मीर में अल्पसंख्यक माने जाने वाले पंडित समुदाय के लोग 1989-90 में उभरी भारत विरोधी हिंसा के दौरान भारी संख्या में कश्मीर छोड़ने को मजबूर हो गए थे। लेकिन आशा का परिवार गांव के उन चार परिवारों में है जो अपनी पुरखों की जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हुए।

श्रीनगर-गुलमर्ग रोड पर स्थित कुंजेर ब्लॉक के वुसन गांव में आशा जी का मुकाबला सरवा बेगम से था। इस सीधे मुकाबले में आशा जी को 55 वोट मिले जबकि सरवा बेगम को 42 वोट।

वुसन गांव में अपने पति राधाकृष्ण और दो बच्चों के साथ रह रहीं आशा बताती हैं कि ' मेरी इस जीत से देश के अलग-अलग हिस्सों में विस्थापित जीवन बिता रहे कश्मीरी पंडितों को यह संदेश जाएगा कि कश्मीर में अब पंडितों को कोई खतरा नहीं है। वे यहां अच्छी तरह रह सकते हैं। ' उन्होंने कहा कि ' गांव के मुस्लिम निवासियों ने मुझे वोट दिया है और मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करूंगी बशर्ते कि सरकार संविधान के 74वें संशोधन के मुताबिक अधिकार पंचायतों को सौंपे। '

आशा का बड़ा सुरेश कुमार बेटा जम्मू कश्मीर पुलिस में कॉन्स्टेबल है जबकि छोटा बेटा गांव में पिता राधाकृष्ण की दुकान पर उनकी मदद करता है। आशा जी बताती हैं कि उन्हें चुनाव लड़ने के लिए गांव के नंबरदार अब्दुल हामिद वनी ने प्रोत्साहित किया, ' मुझे वनी साहब ने ही कहा कि मैं चुनाव लड़ूं।

उन्होंने
मेरा उत्साह बढ़ाया और कहा कि पंचायत चुनाव जीत कर मुझे अपने ब्लॉक का विकास करना चाहिए। ' आशा जी का मायका जम्मू के डोडा जिले में है और वह गर्व से बताती हैं कि वह गुलाम नबी आजाद (केंद्रीय मंत्री) के गांव की हैं।

खास बात यह कि वुसन गांव में सुरक्षा बलों का कोई कैंप तो नहीं ही है, कोई पुलिस पोस्ट भी नहीं है। हालांकि अलगाववादियों ने चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया था और आतंकवादियों ने चुनाव में बाधा पहुंचाने की भी कोशिश की।

गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में पंचायत चुनाव एक दशक बाद हुए हैं। पिछले पंचायत चुनाव 2001 में हुए थे।

बीजेपी मुसलमानों को हथियारों की ओर ढकेल रही है - यासीन मलिक

जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट ( जेकेएलएफ ) के मुखिया यासीन मलिक ने अपनी अजमेर यात्रा के दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं के विरोध पर मुखर होते हुए कहा कि दक्षिणपंथी पार्टी मुसलमानों को हथियार उठाने के लिए मजबूर कर रही है।

मलिक ने देश में मुस्लिम दरगाहों और मस्जिदों में विस्फोटों के बारे में जानकारी देते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी मुसलमानों को हथियारों की ओर ढकेल रही है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी नेतृत्व और लोगों को राज्य के बाहर परेशान करके बीजेपी राज्य के युवाओं को हथियार उठाने को मजबूर कर रही है। उन्होंने बीजेपी की आलोचना करते हुए कहा कि वह पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को आग में चाहती है।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह यासीन मलिक की अजमेर यात्रा के दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनके होटेल के बाहर मलिक का पुतला फूंकने के साथ ही उन्हें काले झंडे भी दिखाए। जब मलिक होटल की बालकनी में आए तो उनकी ओर एक चप्पल भी उछाली गई। हालांकि, वह उन्हें लगी नहीं थी।

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