भाजपा की सरकार बनी तो लाहौर को भी भारत में मिलाया जाएगा - संगीत सोम

हाल में ही यूपी के मुजफ्फरनगर दंगों से चर्चा में आये सरधना विधायक संगीत सोम ने खरखौदा में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पड़ोसी देश 13 किलोमीटर अंदर तक घुस आया है और पाकिस्तान कश्मीर को अपना बता रहा है। मैं कहता हूं कि साल 2014 में भाजपा की सरकार बनी तो लाहौर को भी भारत में मिलाया जाएगा।

समाजवादी सरकार को आड़े हाथ लेते हुए सोम ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार हिंदू विरोधी है। हिंदुत्व की रक्षा के लिए वे 52 दिन तो क्या 52 साल तक जेल में रहने के लिए तैयार हैं। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद हुयी कार्यवाही को सोम ने एकपक्षीय करार दिया।

विधायक ने कहा प्रदेश सकार का कहना है कि भाजपा सांप्रदायिकता फैला रही है, जबकि सच्चाई है कि इसके लिए प्रदेश सरकार की तुष्टिकरण की नीति जिम्मेदार है। यदि कोई अपनी बहन-बेटियों की रक्षा की बात करता है तो उसे जेल में डाल दिया जाता है।

सोम ने कहा कि एक कैबिनेट मंत्री हत्यारोपियों को थाने से छुड़ा रहा है तो आरोपियों को हवाई जहाज से लखनऊ बुलाकर सम्मानित किया जा रहा है।

सपा सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-क्या हिंदू दंगों में पीड़ित नहीं हैं?

मुजफ्फरनगर दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूपी सरकार से पूछा कि सिर्फ मुसलमानों की बात क्यों हो रही है? क्या हिंदू दंगों में पीड़ित नहीं हैं? कोर्ट ने कहा कि दंगों में हिंदू-मुसलमान दोनों पक्ष के लोग पीड़ित हैं। सरकार को दोनों पक्षों से जुड़े पीड़ितों के पुनर्वास की बात करनी चाहिए। यूपी सरकार ने इस बारे में जारी पुराने नोटिफिकेशन को रद्द कर नया आदेश जारी करने का वादा किया।

दरअसल, कोर्ट ने यूपी सरकार की ओर से दिए गए दंगा पीड़ितों के पुनर्वास के ब्योरे पर नाराजगी जताई, इसमें केवल मुस्लिम पीड़ितों का जिक्र था। यह ब्योरा यूपी ने कोर्ट के नोटिस के जवाब में दिया था, जो दंगों की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने की याचिका पर जारी किया गया था।

जाट सभा की ओर से दाखिल इस याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार मुजफ्फरनगर दंगा मामले में भेदभाव कर रही है। एक समुदाय विशेष के लोगों के खेत जलाए जा रहे हैं और सरकार कोई ऐक्शन नहीं ले रही है। इस कारण मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।

कोर्ट की फटकार के बाद यूपी सरकार के वकील राजीव धवन ने माना कि इस तरह के नोटिफिकेशन पर विवाद होना तय था। साथ ही कहा कि मुस्लिम पीड़ितों का नाम केवल इसलिए शामिल किया गया, क्योंकि वे ही राहत शिविरों से वापस घर नहीं लौटना चाहते थे।

पुराना नोटिफिकेशन जिस तरह जारी हुआ, वह नहीं होना चाहिए था। हम 26 अक्टूबर को जारी इस नोटिफिकेशन को रद्द कर नया जारी करेंगे। किसी भी व्यक्ति को धर्म के आधार पर पुनर्वास से वंचित नहीं किया जाएगा।

यूपी सरकार ने कोर्ट से वादा किया कि नए नोटिफिकेशन में यह साफ तौर पर लिखा होगा कि संबंधित अधिकारी हर प्रभावित व्यक्ति का ध्यान रखेंगे और राहत के काम सभी तक एक समान तरीके से पहुंचेंगे।

पुलिस डाल रही दबाव : कोर्ट ने उन आरोपों को गंभीर बताया, जिनमें कहा गया है कि दो युवकों की मौत की जांच कर रहे पुलिस अफसर ने एक युवक के परिजनों पर शिकायत कमजोर करने का दबाव डाला था।

कोर्ट ने ऐसी ही एक अन्य याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि दंगों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन सेल का अफसर उससे मन मुताबिक हलफनामा लेने के लिए दबाव डाल रहा है, जबकि दंगों में उसके बेटे और भाई की हत्या कर दी गई थी।

राहुल गाँधी हिंदू कार्ड खेल रहे हैं : बुखारी

इंदौर में राहुल गांधी द्वारा दिए गए मुजफ्फरनगर दंगों पर भाषण को लेकर दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सय्यद अहमद बुखारी ने कहा, "एक तरफ गृह मंत्री जेल में ठूंसे गए मुस्लिम दंगा पीड़ितों को रिहा करने के लिए राज्यों को पत्र लिख रहे हैं और ऐसा करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "दूसरी तरफ पार्टी उपाध्यक्ष (राहुल गांधी) मुस्लिमों को लेकर संदेह जताते हुए आईबी अधिकारी की बात कर रहे हैं।

ऐसा लगता है जैसे वह हिंदू कार्ड खेल रहे हैं।" बुखारी ने कहा, "कांग्रेस को यह विश्वास हो गया है कि मुस्लिम अब किसी पर भरोसा नहीं करते, खास तौर से उत्तर प्रदेश में जहां उनके पास विकल्प मौजूद है, ऐसे में राहुल ने अब अपनी निगाह हिंदू वोट पर टिका दी है।" 

राहुल के बयान की आलोचना करते हुए ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के अगुवा इमाम उमैर इलियासी ने कहा, "यह साफ है कि उन्होंने यह बयान हिंदुओं को कांग्रेस की तरफ आकर्षित करने के लिए दिया है। ऐसी मजहबी सियासत अब काम नहीं आएगी, क्योंकि लोग समझदार हैं। विकास की राजनीति से काम बनेगा। जो उन्होंने कहा और जिस तरह कहा, वह केवल मुस्लिम नहीं, बल्कि देश भर के लिए शर्म और दुख की बात है।"

सपा के नेता शिवपाल के साथ घूमा दंगे का आरोपी मौलाना

मुजफ्फरनगर में भड़के सांप्रदायिक दंगे के नामजद आरोपियों पर एक तरफा कार्रवाई के आरोपों में कहीं न कहीं सच्चाई भी दिखाई देती है। खासकर सत्ता पक्ष से जुड़े आरोपियों की ओर से तो शायद पुलिस-प्रशासन ने आंख ही मूंद रखी है। जानसठ क्षेत्र में भड़की हिंसा में नामजद हुए आरोपियों में से एक मौलाना नजीर इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। उन पर दंगा और हिंसा भड़काने का मुकदमा दर्ज है, लेकिन सूबे की सरकार इसकी साफ अनदेखी कर रही है। अभी हाल ही में मौलाना नजीर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मिलने विशेष विमान से लखनऊ गए थे। अब शनिवार को जब उप्र सरकार के मंत्री शिवपाल यादव कवाल आए तो वहां भी मौलाना मंत्री के बगलगीर बने रहे। इतना ही नहीं, मंत्री की मौजूदगी में उन्होंने उत्तेजक बयान भी दे डाला।

कवाल में मौलाना नजीर ने शिवपाल के सामने कहा- 'जानसठ महाभारतकालीन इलाका है। यहां महादेव मंदिर पर हुई कौरव-पांडव की बैठक ने युद्ध टाल दिया था। जानसठ आने पर दोनों पक्षों को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। हमारी कौम शुरू से ही अमन पसंद रही है, लेकिन कोई हमारा गला काटने आएगा तो हम बख्शेंगे नहीं।'

मलिकपुरा की महिलाओं व पुरुषों ने शिवपाल से कहा, घटनाओं पर अंकुश लगाना है तो पहले अपनी पार्टी के नेताओं को काबू में करो।

आरोप लगाया कि २७ अगस्त से सात व आठ सितंबर की घटनाओं तक सपा के मंत्री आजम खां और कई क्षेत्रीय नेताओं ने अहम भूमिका निभाई थी। अगर समय रहते इन नेताओं पर काबू पा लिया होता तो दंगे की आग में न जलता। महिलाओं ने कहा कि सपा नेताओं पर लगाम नहीं लगी तो दंगे होते रहेंगे।

यह है अखिलेश यादव सरकार का दोगलापन । जिस अखिलेश सरकार ने भाजपा के हिंदू विधायकों पर दंगा भडकाने के नाम पर रासुका लगाकर उन्हें जेल भेज दिया है, उसी अखिलेश सरकार ने दंगा फैलाने वाले मौलाना को सरकारी मेहमान बनाकर शांति कायम रखने के लिए सहयोग मांगा है । अब सभी हिंदूओं को हिंदूद्रोही अखिलेश सरकार के खिलाफ वैध मार्ग से विरोध करना चाहिए । यह स्थिती बदलने के लिए सभी हिंदूओं को संगठित होकर शीघ्रातीशीघ्र ‘हिंदूराष्ट्र’ की स्थापना करनी चाहिए ।

धर्मनिरपेक्ष होना बहुत कठिन: अखिलेश यादव

मुजफ्फरनगर के दंगे में नामजद एक मौलाना से मुलाकात के आरोपों पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि सांप्रदायिक होना आसान और धर्मनिरपेक्ष होना कठिन है। फिर भी वह धर्मनिरपेक्षता की राह पर चलते रहेंगे। दंगों की जांच में निर्दोष के साथ अन्याय नहीं होगा, मगर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने ये बातें अबू तैय्यब मियां की जिंदगी पर आधारित पुस्तक के विमोचन के मौके पर कहीं।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के लिए उनकी पार्टी मुलायम सिंह यादव के रास्ते पर हमेशा चलती रहेगी। कहा कि मुजफ्फरनगर के दंगे रोकने के लिए हर संभव कदम उठाये गये। आप पर दंगे में आरोपित एक मौलाना से मुलाकात के आरोप हैं? इस सवाल को थोड़ा टालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषी बख्शे नहीं जाएंगे। चाहे कोई भी हों। आयोग और पुलिस की विशेष टीम जांच कर रही है। केंद्रीय गृहमंत्री ने निर्दोष मुसलमानों को हिरासत में नहीं लेने की मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखी है, यूपी सरकार का रुख? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार पहले से ही इस दिशा में चौकन्नी है। निर्दोष मुस्लिम युवकों को छोड़ने की वजह से ही उस पर कई आरोप लग रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, मुलायम सिंह ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में उर्दू अनुवादकों को सरकारी नौकरी दी। मौजूदा सरकार भी उर्दू को बढ़ावा देने और इसे रोजगार से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। हमारी बेटी उसका कल योजना चल रही है। अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में नए आइटीआइ, पॉलीटेक्निक और डिग्री कालेजों की स्थापना हो रही है।

इससे पहले उन्होंने मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली द्वारा मौलाना अबू तय्यब की जिंदगी पर लिखी किताब 'हजरत मौलाना अहमद मियां फरंगी महली कुछ यादें कुछ बातें' का विमोचन किया। कहा कि मौलाना ने पूरी जिंदगी हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए काम किया। सपा प्रमुख का फरंगी महल से रिश्ता पुराना है। इस मौके पर अपर महाधिवक्ता जफरयाब जिलानी, पूर्व महाधिवक्ता एसएमए काजमी, दारुल उलूम नदवा के प्राचार्य मौलाना सइदुर्रहमान आजमी नदवी, मौलाना सैयद फखरुद्दीन अशरफ ने भी विचार रखे। मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने अब तैयब की जिंदगी पर रोशनी डाली।

मुजफ्फरनगर में हिंदू अब भी न्याय की प्रतीक्षा में : साध्वी डा. प्राची

मुजफ्फरनगर (उत्तरप्रदेश) में समाजवादी पार्टी का प्रशासन मंत्री आजम खान के हाथ का खिलौना बन गया है। हिंदू लडकियों पर होने वाले अत्याचारों के परिवादों की लिखाई नहीं होती । भाजपा नेता द्वारा विरोध करने का प्रयास करने पर उन्हें भी प्रशासन द्वारा दुखद अनुभव आए । 

अत: इससे सारे हिंदुओं में असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो गई है तथा प्रशासन उनकी समस्याओं की ओर दुर्लक्ष कर रहा है, विश्व हिंदू परिषद की साध्वी डा. प्राची ने प्रसिद्धि हेतु दिए पत्रक में ऐसे खेद व्यक्त किए हैं तथा मुजफ्फरनगर में हाल ही में हुए दंगे में हिंदुओं की बडी मात्रा में हानि हुई है । उस कारण सहस्रों लोग बेघर हो गए, किंतु प्रशासन के कुछ भी न करने से हिंदू न्याय की प्रतीक्षा में हैं । उन पीडित हिंदुओंके साथ न्याय किया जाए, साध्वी डा.प्राचीने ऐसी मांग भी की है ।

साध्वी डा. प्राची आगे कहती हैं, एक हिंदू लडकी को छेडे जानेपर उसके विरुद्ध प्रशासन ने कोई भी कार्यवाही नहीं की । अत: कुछ शांत जिलों में भी दंगे हुए । शामली नाम के गांवमें ४ धर्मांधों ने एक हिंदू लडकी के साथ बलात्कार किया; किंतु उसके विरुद्ध अपराध प्रविष्ट नहीं किया गया । परिणामस्वरूप हिंदुओं में क्रोध उत्पन्न हुआ तथा उस लडकी को न्याय प्राप्त कराने हेतु भाजपा के एक नेता आगे आए; किंतु प्रशासन ने उनके विरोध में अनुचित वर्तन किया ।

इन सारी घटनाओं की पार्श्वभूमि पर शामली गांव में शांतिपूर्ण वातावरणमें महापंचायत आयोजित की गई । वहां पीडित लडकी को न्याय दिलाने की मांग की गर्ई; किंतु प्रशासन ने उधर दुर्लक्ष ही किया । मुजफ्फरनगर में हिंदुओें ने न्याय प्राप्त होने की मांग की तथा प्रशासन के सामने अपना दुख व्यक्त किया । इसके पश्चात जब हिंदू घर लौट रहे थे, तब धर्मांधों ने हिंदुओं पर आक्रमण किया तथा हिंदुओं की हत्या की । इतना सब होने पर भी प्रशासन ने मौन धारण कर रखा है । हिंदू न्याय की प्रतीक्षा में हैं ।

मोबाइल के लिए ‘सलमान एवं सुहेल’ ने की ‘करण’ हत्या

करन हत्याकांड में केस मजबूत बनाने के लिए पुलिस सभी साक्ष्य जुटाने की कोशिश में है। हत्यारोपी सलमान और सुहेल के खून से सने कपड़ों की बरामदगी के मद्देनजर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से दोनों आरोपियों का रिमांड मांगा गया है। पुलिस का तर्क है
कि सोनी से पूछताछ के बाद कई सवाल सामने आए हैं, जिनके जवाब सलमान और सुहेल ही दे सकते हैं।

करन हत्याकांड में पुलिस चूक से बचने के लिए साक्ष्य जुटा रही है, ताकि हत्यारोपियों के खिलाफ केस कमजोर न हो। विवेचक इंस्पेक्टर अजय कुमार अग्रवाल ने वारदात के समय पहने सलमान व सुहेल के खून से सने कपड़ों की बरामदगी के लिए बुधवार को रिमांड की कवायद शुरू कर दी। पुलिस उपाधीक्षक की स्वीकृति मिलने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी डाल दी गई है। हालांकि पुलिस ने दोनों हत्यारोपियों को रिमांड पर लेने के लिए अदालत में कई और तर्क भी दिए हैं। दोनों का २४ घंटे का रिमांड मांगा गया है।

इंस्पेक्टर का कहना है कि करन हत्याकांड की तफ्तीश परिजनों को विश्वास में लेकर पारदर्शिता से की जा रही है। पड़ताल में उक्त तीनों हत्यारोपियों के अलावा चौथा नाम सामने नहीं आया है।

गौरतलब है कि एक सप्ताह पूर्व सिविल लाइंस थानांतर्गत सुभाष नगर निवासी राकेश कौशिक के बेटे करन की हत्या कर शव शाह विलायत कब्रिस्तान में दफना दिया गया था। पुलिस ने करन के दोस्तों पूर्वा शेखलाल निवासी सलमान, सुहेल व सोनी को गिरफ्तार कर हत्याकांड का खुलासा किया था। मामला दो संप्रदाय से जुड़ा होने के कारण शहर में तनाव हो गया था।

अब तक की कारवाई:

- १८ सितंबर को सलमान और सुहेल का रिमांड लेने के लिए अदालत में डाली गई अर्जी।

- १७ सितंबर को कब्रिस्तान से खून से सनी मिट्टी सील कर प्रयोगशाला भेजी गई।

- १६ सितंबर को बुलंदशहर में छापामारी के दौरान सोनी को गिरफ्तार किया गया।

-१५ सितंबर को फरार तीसरे हत्यारोपी सोनी की तलाश में ताबड़तोड़ छापामारी।

-१४ सितंबर को सुभाष नगर में पथराव करने वाले 150 पर मुकदमा, तीन लोग गिरफ्तार।

-१३ सितंबर को करन के शव का अंतिम संस्कार, पुलिस पर पथराव में छह हिरासत में।

-१२ सितंबर को हत्यारोपी सलमान और सुहेल गिरफ्तार, शव बरामद। जमकर बवाल।

-११ सितंबर को करन कौशिक घर के पास वीडियो गेम शॉप से हुआ था लापता।

मुजफ्फरनगर में अभी माहौल शांत भी नहीं हुआ कि मेरठ शहर में भी एक घटना को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया । सिविल लाइन एरिया में एक छात्र को संप्रदाय विशेष के युवकों ने गर्दन काटकर कब्रिस्तान में दफन कर दिया ।
इस कत्ल के बाद माहौल गर्म हो गया और दोनों संप्रदाय के लोग आमने-सामने आ गए । एक दूसरे पर पत्थर भी फेंके, फोर्स ने तुरंत पहुंचकर मामले को शांत कर किया । वहीं शहर को अफवाहों के चलते छावनी में तब्दील कर दिया गया ।
यह था मामला
सिविल लाइन थाना एरिया के सुभाषनगर गली नंबर एक में राकेश कौशिक  का परिवार रहता है । राकेश कौशिक मथुरा वृंदावन में बांके बिहारी धार्मिक संस्था में मैनेजर हैं । राकेश का सोलह साल का बेटा करण कौशिक मेरठ में अपने चाचा अशोक कौशिक के पास रहकर पढ़ रहा था, जिसने दसवीं क्लास यहीं से पास की थी ।
तीन दिन बाद जाना था
राकेश कौशिक ने अपने बेटे करण का एडमिशन वृंदावन में ही ग्यारहवीं क्लास में करा दिया था । करन को इसी पंद्रह तारीख को वृंदावन जाना था । करण बुधवार की शाम करीब पांच बजकर दस मिनट पर साइबर कैफे पर जाने के लिए कहकर बाहर गया था । बताया गया कि करण इसके बाद घर वापस नहीं लौटा । परिजनों उसकी खोजबीन की मगर उसका कुछ सुराग नहीं लगा ।
ऐसे मिला सुराग
परिजनों ने जब पुलिस को बताया कि करन पूर्वा शेखलाल के सलमान की साइबर कैफे की दुकान पर वीडियोगेम खेलने गया था । साथ ही बताया था कि करन का मोबाइल खराब हो गया था जिसके चलते उसने साइबर कैफे मालिक सलमान से उसका पुराना मोबाइल ६०० रुपये मे खरीद रहा था । करण ने मोबाइल के ४०० रुपये सलमान और अल्तमाश को दे भी दिए थे । इसके बाद भी आरोपी सलमान और अल्तमश मोबाइल नहीं दे रहे थे ।
कब्रिस्तान से मिला शव
इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की । पहले तो वे इनकार करते रहे मगर जब कड़ाई से पूछताछ हुई तो ये दोनों टूट गए । दोनों ने कबूल किया कि उन्होंने करण की हत्या कर दी । जिसकी बॉडी को पास में ही मौजूद शाह-ए-विलात कब्रिस्तान में दफन कर दिया था । इधर पुलिस ने जैसे ही इनकी निशानदेही पर कब्रिस्तान पहुंचकर बॉडी निकाली मोहल्ले के लोग इकट्ठा हो गए । कुछ ही देर में मामला दोनों संप्रदाय का होने पर पुलिस फोर्स पहुंच गई ।
गर्दन काटने के बाद दफनाया
बताया गया कि करण बुधवार को अपने दोस्त विक्रांत के घर पर अपनी साइकिल खड़ी करके यह कहकर गया था कि वह दस मिनट में आकर साइकिल ले जाएगा । सलमान और अल्तमश उसको बाइक पर लेकर गए और कब्रिस्तान में जाकर उसकी गर्दन पर फावड़ा मारकर हत्या कर दी । इसके साथ ही उसकी बॉडी को कब्रिस्तान में कब्र खोदने वाले साथी डब्बू के बेटे अल्मो के साथ मिलकर दफन कर दिया । पुलिस ने बॉडी को कब्र से निकालकर मोर्चरी भेज दिया ।

मुजफ्फरनगर पर सबसे बड़ा खुलासा, जानें क्यों और कैसे भड़का दंगा !

दंगों पर आज तक का सबसे बड़ा खुलासा | सबसे बड़ा स्टिंग ऑपरेशन | सुलगते मुजफ्फरनगर का सबसे बड़ा और सबसे गहरा राज | आज तक पर दंगों की हर परत की पोल मुलायम सिंह और अखिलेश के अफसरों ने खोली |
सियासत के स्याह होते रंगों में एक जलता हुआ शहर, जिसकी आंच १५ दिन बाद लखनऊ पहुंची तो अखिलेश मुजफ्फरनगर पहुंचे और १७ दिन बाद आंच दिल्ली दरबार पहुंची तो प्रधानमंत्री इस शहर पहुंचे | शहर की फिजा बता रही है कि दंगे की आंच में अब राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही हैं |
इस दंगे में अब तक चालीस से ज्यादा मौतें हुई और चालीस हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गये | पहली बार यहां लोग अपने ही गांव और अपने ही कस्बों में रिफ्यूजी हो गये | कई सवाल हैं जिनके जवाब आज तक ने खोजने की कोशिश की | क्या इन दंगों को सरकार रोक सकती थी? क्या बेगुनाहों को मरने से बचाया जा सकता था? क्या पुलिस के हाथ बंधे थे? क्या दंगाइयों पर गोली चालने से डर गई थी पुलिस?
जानसठ तहसील का खुलासा
मुजफ्फरनगर का कवाल गांव, जानसठ तहसील में आता है | यही वो गांव है जहां से २७ अगस्त को दंगे दो समुदाए के बीच नफरत की चिंगारी भड़की और फिर उसे नेता हवा देते चले गए | ये वही कवाल गांव है जहां पिछले ६६ साल से हिंदू और मुसलमान भाई-चारे और मुहब्बत के साथ रहते चले आ रहे थे | लेकिन अब वहां की धरती नफरत के लहू से लाल हो गई है | आज तक ने जानसठ तहसील के सर्किट हाउस में स्टिंग ऑपरेशन किया, फिर जो खुलासा हुआ, जानकर आप भी दंग रह जाएंगे |
मुजफ्फरनगर की जानसठ तहसील के कवाल गांव में २७ अगस्त को एक लड़की से छेड़छाड़ को लेकर दोनों समुदाय ऐसे भिड़े कि घंटेभर में मोहल्ले में तीन लाशें गिर गईं और अमन चैन तार-तार हो गया |
इलाके के एसडीएम आर सी त्रिपाठी और सर्किल अफसर जे |आर जोशी दोनों कर्फ्यू में डूबे शहर का गश्त करके लौटे थे | २७ अगस्त को जे |आर जोशी ने दंगा करने वाले 8 लोगों को मौके से हिरासत में लिया था और थाने लाए थे | जोशी का कहना है ये दंगाई दोहरी हत्याओं के मुख्य संदिग्ध थे, लेकिन उस रात ऊपर से दबाव आया और दंगाइयों को थाने से छोड़ना पड़ा |
आज तक - एसडीएम साहब क्या (दंगाइयों के घरों की) तलाशी हुई थी, या तलाशी अवॉइड की गई?
सीओ - नहीं ... नहीं .. बिल्कुल पूरी तलाशी हुई ...
एसडीएम - तलाशी हुई, पकड़े गए.... अभियुक्त पकड़े गए ....
सीओ - ऑफ द रिकॉर्ड पूरी बात हम बताएं, उस दिन जैसे ही घटना (हत्याएं) हुईं उसके बाद तलाशी हुई, उस दिन हमने १२ आदमी जितने वहां आस-पास के जो भी थे, एक-एक आदमी को पकड़ा .... कोई अवैध असलाह नहीं मिला ये अलग बात है ....
आज तक - एक्टचुअल मुलज़िम (पकड़े थे आपने) ....
सीओ- बिल्कुल उन्हीं में थे .... और उसके बावजूद उनको ना ले जाकर उनकी एफआईआर इस ढंग से करा दी .... जिसकी वजह से सब (छूट गए) .... इसके बाद SSP, DM का ट्रांसफर हो गया .... उन्होंने अपनी मौजूदगी में सर्च कराया था |
इन दोनों अधिकारियों का कहना था, मुलज़िम पकड़े जाने के राजनीतिक दबाव में फर्जी एफआईआर कराई गई और असली मुलज़िम छोड़ दिए गए |
आज तक - अच्छा ....पकड़ लिया था (असली मुलज़िमों को)
सीओ - पकड़ लिया था .... एफआईआर में नाम देखा तो मात्र एक आदमी का नाम देखा | हमारे सामने मजबूरी थी....
एसडीएम - Tainted एफआईआर हुई थी ....
आज तक- फिर छोड़ दिया ....
सीओ - उन्होंने कह दिया ठीक है कि (इनके नाम) नहीं है एफआईआर में, उनको बैठाने की डिटेन करने की जरूरत क्या है |
आज तक - तो जो ७ - ८ आदमी पकड़े गए थे ....यानी लाए गए थे थाने वहां से ....
सीओ - नहीं ....थाने लाए थे ....बातचीत की उसने....उसमें उन्होंने कहा कि हम वहां नहीं थे ....हम फलानी जगह थे ....लेकिन थे सब वहीं (घटना स्थल पर)
आज तक- बाद में सबको छोड़ दिया
३ - ३ लाशें गांव में बिछा दी गईं और मौके से संदिग्ध पकड़े गए, लेकिन दबाव में छोड़ दिया गया, सच तो ये है कि कुछ घरों की तलाशी लेने पर एसएसपी मंजीत सैनी और डीएम सुरेंद्र सिंह का तबादला कर दिया | बाद में नए डीएम ने आकर जांच की दिशा, कहीं और मोड़ दी |
आज तक - ये घटना (हत्याओं की) कब हुई थी, संदिग्धों को कितने बजे गिरफ्तार किया गया
सीओ - घटना २ बजे की थी ...
आज तक - नहीं ...गिरफ्तारी कितने बजे की थी
सीओ - चार ...साढ़े चार बजे के आसपास...जैसे ही Deadbody वहां से उठाई गईं थीं |
आज तक - और उन संदिग्धों को छोड़ा कैसे गया ....
सीओ - लेट नाइट छोड़ दिया गया था | (ऊपर से) आदेश आ गए थे .....
आज तक - डीएम के ट्रांसफर के बाद ....
कवाल में कानून का मज़ाक उड़ाया गया | तलाशी लेने पर डीएम का ट्रांसफर किया गया, फर्जी एफआईआर लिखी गई, पकड़े गए आरोपी छोड़े गए, और बाद मे दंगा भड़क गया | अब आगे की दास्तान-
आज तक - जितने Accused को आपने पकड़ा था, क्या वो वास्तव में (सदिंग्ध) थे
सीओ - देखो .... ऐसा है कि .... कैसे कह दें.... देखने वाले जब eyewitness कह रहे हैं कि मौके पर थे .....
एसडीएम - they were prime suspects (वो मुख्य संदिग्ध थे)
आज तक - prime suspects ....वही major mistake हुई और वो मैजेस दूसरी community में चला गया |
एसडीएम- ये तो मतलब दुर्भाग्य है पूरे देश का, इस सिस्टम का, जैसे की कोई घटना होती है, ये ***** नेता तुरंत आकर बैठ जाते हैं ....

 
इन अधिकारियों का मानना था कि दोहरी हत्याओं के मामले में कुछ घरों की तलाशी ली गई जिसपर कुछ रसूखदार नेता डीएम और एसएसपी से नाराज़ हो गए और दोनों का तबादला कर दिया गया | इस कार्रवाई से, इलाके में सांप्रदायिक तनाव भड़का | अगर डीएम और एसएसपी का उस रात तबादला ना होता तो अपराध की घटना सांप्रदायिक दंगे में ना तब्दील होती | लेकिन इससे बड़ा खुलासा किया फुगाना थाने के सैकेंड अफसर ने, जिनके सामने अल्पसंख्यकों के गांव के गांव राख कर दिए गए |
७ सितंबर की शाम महापंचायत में शामिल कुछ किसानों पर हमले के बाद अगली सुबह शाहपुर और बुढ़ाना तहसीलों में दंगे ने एक नया रंग लिया था | ७ सितंबर की प्रतिक्रिया में यहां गांव-गांव में हिंसा का ऐसा नंगा नाच हुआ जो इन कस्बों में १९४७ के दंगों में भी देखने को नहीं मिला | ८ सिंतबर की हिंसा का सबसे ज़्यादा कहर फुगाना इलाके में मचा |
आज तक - आपके यहां कितनी casuality हैं |
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- १६ हैं करीब .....नहीं आपके क्षेत्र में कितनी casuality हैं ...हमारे क्षेत्र में १६ हैं ......
आज तक - तो क्या ......पुलिस फोर्स एकदम नहीं पहुंच पायी मौके पर ......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- पुलिस मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन पुलिस थोड़ी सी थी
आज तक - कम थी पुलिस ......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- हां ......
आज तक - जब दंगा शुरु हुआ (उस वक्त वहां पर आपके कितने लोग थे)
आर एस भगौरसैकेंड अफसर- उस समय जनपथ की क्या स्थिति थी, हम नहीं जानते, जब हमारे थाना क्षेत्र में काम शुरू हुआ तो दूसरे थाना क्षेत्र में भी काम शुरू हो गया | अब हमें ये नहीं पता कि दूसरे थाना क्षेत्र में या जनपद में क्या हो रहा है | जब अधिकारियों को इस बात का पता चला, तो अधिकारियों अपनी योजना, अपनी व्यवस्था करने में लगे | हमारा उनसे संपर्कि नहीं हो पाया | अब संपर्क करने के लिए कारण है, कि एक हाथ से गोली चला रहे हैं और दूसरे हाथ से मोबाइल (फोन) कर रहे है, तो मुसीबत की स्थिति है ......
आज तक - बिल्कुल ......
आर एस भगौरसैकेंड अफसर -  देखो practical है सब practical है ......
आज तक- कितनी देर तक (आपका अधिकारियों) से संपर्क नहीं हुआ होगा......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- अरे भई हम घंटे भर पर जूझते रहे ......फंसे रहे ......हमारी जान लगी रही | मोबाइल निकालते ......ok करते और फिर जेब में रखते ......ऐसी स्थिति थी हमारी |
आज तक - जब आप लोग (मौके पर) लगे हुए थे, तो असलाह की कमी थी
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- देखो असलाह ......तो मैं बता रहा हूं, असलाह तो कुछ है नहीं ...... असलाह जो हमारे पास है, असलाह जो हमारे हैं ही नहीं ......और जो हैं वो चलता ही नहीं ...... भाई जो चल गया तो बढ़िया हमारी जान ऊपर वाले की कृपा है | तो चल भाई वो भी मन हो ......नहीं चला तो नहीं ......मैं आपको वो facts बता रहा हूं जो कोई नहीं बताएगा |
आज तक - मेन रोल मेरे ख्याल से आज़म xxxxx का है, कि उन्होंने pressurise किया |
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- बिल्कुल ठीक है ......बिल्कुल ठीक है ......
आज तक - आप कुछ नहीं करेंगे ......जो हो रहा है होने दो ......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर - हां ......यहीं हुआ ......
आज तक - political है ये ......रोटियां सेंक रहे हैं......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर - सब रोटियां सेंक रहे हैं ......
ज़ाहिर तौर पर सैकेंड अफसर जानते हैं कि दंगो में किसका क्या किरदार रहा है, लेकिन इस अफसर से भी बड़ा खुलासा पुलिस और प्रशासन के कुछ और अधिकारियों ने किया | जिस पर आप दंग रह जाएंगे |

 
मुजफ्फरनगर का मीरापुर थाना क्षेत्र, सच्चाई आपको डरा देगी, सहमा देगी, इस थाने के हल्के में दंगाइयों ने मौत का जो खेल खेला, वो वाकई ख़ौफनाक भी है और दर्दनाक भी |
२७ अगस्त से शुरू हुए दंगे ८ सितंबर तक मुजफ्फरनगर को दहलाते रहे, लेकिन प्रशासन से लेकर सरकार तक, दंगाइयों पर काबू पाने में नाकाम रही | जाहिर तौर पर दंगों की आड़ में नेता अपना अपना फायदा देख रहे थे | मीरापुर थाने के एसएचओ अनिरुद्ध कुमार गौतम के हल्के में भी दंगाइयों ने सड़कों पर मासूमों के मौत के घाट उतारा | और हैरतअंगेज़ बात ये है कि दंगाइयों पर कार्रवाई करने से पुलिस कतराती रही | गौतम मानते हैं कि डीएम एसपी को एक साथ हटाने की वजह से जिला प्रशासन नेतृत्वविहीन हो गया था | गौतम का कहना है कि समाजवादी पार्टी के कुछ नेता डीएम एसपी को कई दिनों से एसपी को हटाने का दबाव बना रहे थे, और उन्हें आखिरकार मौका मिल गया |
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- पहले वाले डीएम और एसएसपी हमारे थे, दोनों मिलकर (घटना) को मैनेज कर सकते थे ......आपने (सरकार) रात में चंद घंटों के अंदर घटना के चंद घंटों के अंदर ......उन्हें हटाया |
आज तक - उसकी इंस्पेक्टर साहब क्या वजह थी, उनकी क्या dealing सही नहीं थी .....डीएम की......
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- डीएम की dealing बहुत बढ़िया था, दो साल कैसे निकाल जाते यहां डेढ़ साल ......दो साल .....कैसे निकल गया यहां ....अगर dealing बढ़िया ना होती  भाई इसी शासन नेउसे पोस्ट किया था डीएम | अगर इसकी dealing से लोग संतुष्ट ना होते तो डेढ़ पौने दो साल कैसे कट जाते |
आज तक - उस रात क्या वजह रही ......
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ - सब political stunt ......
आज तक - मतलब उनको हटाना ग़लत फैसला था ...
अनिरुद्ध कुमार गौतमएसएचओ - भाई ये लोग उनको (DM/SSP) हटाने के लिए एक महीने से प्रयासरत थे ......जब कांवड़ चल रही थी तबसे ......political लोग समाजवादी पार्टी के, दोनों अधिकारियों को हटवाने के लिए लगे हुए थे ......
आज तक - क्यों ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ - भाई उनको लग रहा होगा ......कि हमारे काम नहीं कर रहे है ......right or wrong ...... यही कारण है और क्या है ......
दरअसल २७ अगस्त को कवाल गांव की घटना छेड़छाड़ से शुरू हुई और दो गुटों के बीच झगड़े में तब्दील हो गई | ये सच है कि इस घटना में हत्या हुई, लेकिन ये भी सच है कि हत्या होने के बावजूद घटना ने कोई सांप्रदायिक रंग नहीं लिया | दिक्कत तब शुरु हुई जब डीएम और एसएसपी ने घर घर तलाशी लेनी शुरू की |
आज तक - सुनने में ये आया है कि डीएम साहब ने जो जो दंगाई थे ....बवाली जो बवाल मचा रहे थे पकड़ लिए थे....गांव घेर लिया था पूरा ..
समरपाल सिंहइंस्पेक्टर, भोपा - पूरा गांव घेरके ....पुलिस सर्च कराई थी एसएसपी और डीएम ने ....पकड़ लिए थे रात में ....
आज तक - ये तो अच्छा काम था ....
समरपाल सिंहइंस्पेक्टर, भोपा - और उसमें क्या कर सकते हैं ये हमारे से ऊपर की बात है ....
आज तक - वोट बैंक की राजनीति है, बहुत बुरी है ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा- हां ....
आज तक - दो दिन ....चार दिन रुक करके हटाते तो शांत हो जाता मामला ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा - हां ....ये नौबत नहीं आती ....
लेकिन दंगों की आड़ में ट्रांसफर, पोस्टिंग और सस्पेंशन का ही खेल नहीं हो रहा है, असली खेल तो वोट का था, और इसपर भी खुलासा किया उन लोगों ने जो मौका-ए-वारदात पर मौजूद थे |
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- पहले वाले डीएम और एसएसपी हमारे थे, दोनों मिलकर (घटना) को मैनेज कर सकते थे ....आपने (सरकार) रात में चंद घंटों के अंदर ....घटना के चंद घंटों के अंदर ....उन्हें हटाया |
आज तक - उसकी इंस्पेक्टर साहब क्या वजह थी, उनकी क्या dealing सही नहीं थी ...डीएम की....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- डीएम की dealing बहुत बढ़िया था, दो साल कैसे निकाल जाते यहां | डेढ़ साल ....दो साल ....कैसे निकल गया यहां ....अगर dealing बढ़िया ना होती | भाई इसी शासन नेउसे पोस्ट किया था डीएम | अगर इसकी dealing से लोग संतुष्ट ना होते तो डेढ़ पौने दो साल कैसे कट जाते |
आज तक - उस रात क्या वजह रही ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- सब political stunt ....
आज तक - मतलब उनको हटाना ग़लत फैसला था ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- भाई ये लोग उनको (DM/SSP) हटाने के लिए एक महीने से प्रयासरत थे ....जब कांवड़ चल रही थी तबसे .... political लोग समाजवादी पार्टी के, दोनों अधिकारियों को हटवाने के लिए लगे हुए थे ....
आज तक- क्यों ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ - भाई उनको लग रहा होगा ....कि हमारे काम नहीं कर रहे है ....right or wrong.यही कारण है और क्या है ....
आज तक - सुनने में ये आया है कि डीएम साहब ने जो जो दंगाई थे ....बवाली जो बवाल मचा रहे थे पकड़ लिए थे गांव घेर लिया था पूरा ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा - पूरा गांव घेरके ...पुलिस सर्च कराई थी एसएसपी और डीएम ने ....पकड़ लिए थे रात में ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा - और उसमें क्या कर सकते हैं ये हमारे से ऊपर की बात है ....
आज तक - वोट बैंक की राजनीति है, बहुत बुरी है....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा- हां ....
आज तक - दो दिन ....चार दिन रुक करके हटाते तो शांत हो जाता मामला ....
समरपाल सिंहइंस्पेक्टर, भोपा - हां ....ये नौबत नहीं आती ....
आज तक का खुफिया कैमरा जहां-जहां पहुंचा, अखिलेश के अफसरों ने हमें भी चौंका दिया | और वही सच्चाई अब हम देश के सामने रख रहे हैं | बात मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना कोतवाली की | यहां के इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह ने दंगों का सच बताया तो एसपी क्राइम कल्पना सक्सेना ने भी दंगों पर सियासी खोल को उघाड़ डाला |
ये हैं मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कोतवाली के इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह | दंगे के सभी दिनों में ये इलाके में रात और दिन गश्त करते रहे | ज़ाहिर तौर पर इनपर भी हर तरह का राजनीतिक दबाव रहा |
किसको पकड़ना है, और किसको छोड़ना है, शायद ये फैसला यूपी में कोतवाल नहीं करते | इंस्पेक्टर ऋषिपाल का मानना है कि पहली बार शहर की जगह दंगे देहात में ज़्यादा फैले | अगर पर्याप्त संख्या में पुलिस फोर्स देहात के थानों में मुहैया कराई गई होती, जो कमज़ोर तबके के इतने लोग मारे ना गए होते | देर से पुलिस बल भेजे जाने के कारण गांव में हिंसा बिना रोक टोक चलती रही |
आज तक - (८ सितंबर को दंगा) सुबह ७ बजे से शुरु हो गया था
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- सुबह ७ बजे से कई गांव में ....
आज तक - अच्छा....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- वही तो मैंने बताया ....
आज तक - फोर्स पहुंची नहीं थी ....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना - ३ - ४ जगह ....एक गांव में पहुंचकर control करा ....
आज तक - अच्छा ....सुबह सुबह फोर्स होगी नहीं थाने में....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- न हीं ....थाने में ....
आज तक - देर तक गश्त में थे ....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- नहीं थाने में मेरे पास २० सिपाही है, ३ - ४ दारोगा हैं, तो मैं कोशिश करूंगा कि पहले एक गांव में हिंसा हो गई तो मैं 4 सिपाही से हिंसा नहीं रुकवाउंगा |
मैं सोचता हूं कि पूरी फोर्स को लेकर हिंसा रोक दूं ....लेकिन जबतक यहां हिंसा रोकता, तबतक दूसरी जगह हिंसा शुरु हो गई | दूसरी जगह पहुंते ...तीसरी जगह हो गई |
आज तक - 
फोर्स कम थी ...
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना - फोर्स इतनी नहीं थी कि हर गांव में लगा दी जाती....
मुजफ्फरनगर की पुलिस अधीक्षक यानी एसपी क्राइम कल्पना सक्सेना के हाथों में दंगाग्रस्त कई थानों की कमान थी | कल्पना सक्सेना का मानना है कि दंगों पर कहीं ना कहीं सियासी रंग चढ़ा है |
कल्पना सक्सेना, एसपी क्राइम- देखिए कई तरीके की बातें हुईं, बहुत सी बाते हैं ....इस समय हम लोग बहुत प्रेशर में हैं ....वर्क बहुत सारा है करने को ....फुर्सत से बात करेंगे किसी दिन....
आज तक - लेकिन मैडम उसका जवाब दीजिए हमें आप | मतलब मर्डर को ऐसा सांप्रदायिक रंग क्यों दे दिया गया |
कल्पना सक्सेना, एसपी क्राइम - देखिए मैं क्या कहूं....बहुत गहराई से बताऊं ....इसमें बहुत कुछ political है, और यहां ऐसा चल रहा है कि मुस्लिम को कुछ लग रहा है | हिंदुओं को लग रहा है कि मुस्लिम appeasement (तुष्टीकरण) बहुत हो रहा है ....
आज तक के ऑपरेशन दंगा में वो सच सामने आया, जिससे मुजफ्फरनगर सुलग उठा था | हिंसा भले ही सुनियोजित ना हो, लेकिन हिंसा भड़काने में साज़िश और सियासत का घालमेल ज़रूर था |

स्त्रोत : आज तक 

कस्टम अधिकारी लड़ रहा पाक से आये हिंदूओ की हक़ की लड़ाई


उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर जिले के कस्बा बुढाना निवासी एक कस्टम अधिकारी पाकिस्तान से भारत आए 150 लोगों को भारत की नागरिकता दिलाने की लड़ाई लड़ रहा है और इसके लिए लगातार पंचायत हो रही है।

अत्याचारों से दुखी होकर पाकिस्तान से भारत में आए हिन्दू परिवारों ने भारत में डेरा डाल दिया है उनकी मांग है कि उनको भारत की नागरिकता दी जाए क्योंकि पाकिस्तान में हिन्दू परिवारों को धर्म के अनुसार कोई भी काम करने की इजाजत नहीं है।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आई जमना का कहना है  कि पाकिस्तान में हिन्दुओं की बहुत ज्यादा बेकद्री है. न तो हिन्दू लडकियों को बाहर निकलने दिया जाता है और न ही मंदिरों में पूजा की जा सकती।

घर में रहकर ही सब काम करने पड़ते हैं। इतना  ही नहीं हिन्दू लडकियों को पकड़कर कलमा भी पढ़ाया जाता है। जमना का कहना है कि हमें अपने देश में मरना मंजूर है।

पाकिस्तान से आए रामचंदर ने कहा कि पहले गाजियाबाद में रुके तो पुलिस ने भगा दिया। दिल्ली के मजनूं का टीला पर भी रहने नहीं दिया गया।

अब सीमा शुल्क अधिकारी नाहर सिंह ने उन्हें अपने घर में  शरण दी है। इस मामले में बुढाना कसबे में सर्व खाप पंचायत हुई।

विरोध के बावजूद वस्तानवी ने फिर गुजरात के विकास की तारीफ़ की

गुजरात पर अपनी टिप्पणी को लेकर पैदा हुए विवाद के बीच मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तानवी ने कहा है कि राज्य के लोगों को महसूस हो रहा है कि वहां विकास हो रहा है वह इस्लामिक संस्था दारूल उलूम देवबंद से इस्तीफा देने के निर्णय की घोषणा कर चुके हैं

उन्होंने कहा, ‘‘गुजरात के लोग इस तथ्य से सहमत हैं कि राज्य में विकास हो रहा है और चाहे हिंदू हो या मुस्लिम हर कोई इसका हिस्सा है ।’’ बहरहाल उन्होंने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को क्लीनचिट नहीं दिया जाना चाहिए ।

इस बीच संस्था के उपकुलपति मौलाना अब्दुल खालिक मदरसी ने प्रेट्र से कहा कि इस्तीफे के मुद्दे पर 23 फरवरी को संस्था की प्रबंध समिति निर्णय करेगी ।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाता है तो समिति पद के लिए नये नाम पर विचार करेगी ।’’ उत्तरप्रदेश समाजवादी पार्टी के सचिव मावीया अली ने मांग की है कि प्रबंध समिति को वस्तानवी का इस्तीफा स्वीकार नहीं करना चाहिए ।

उन्होंने कहा, ‘‘यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि वस्तानवी को संस्थान में काम नहीं करने दिया गया जो उनके अनुभव का लाभ उठा सकता था ।’’

कुंवारी लड़कियों के मोबाइल उपयोग पर पंचायत की पाबंदी

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सगोत्र विवाह के लिए संवेदनशील माने जाने वाले मुजफ्फरनगर जिले में एक पंचायत ने कुंवारी लड़कियों के मोबाइल फोन के उपयोग पर पाबंदी लगा दी है।

मुजफ्फरनगर जिले के लांक गांव में हुई सर्वजातीय पंचायत में यह फरमान सुनाया गया। इसमें गांव की मोघा, भितरवाल, सुधान, सालान और लांधड़ा पट्टी के प्रमुख लोग उपस्थित रहे। पंचायत ढाई घंटे चली और इसमें व्यापक विचार-विमर्श किया गया। पंचायत के बाद संचालक राजेंद्र मलिक आर्य ने बताया कि लड़कियों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल को जायज नहीं माना। तर्क दिए कि मोबाइल इस्तेमाल करने से लड़कियों के गलत रास्ते पर जा सकती हैं। कुछ वक्ताओं का कहना था कि इस तरह के मामले विभिन्न जगहों पर सामने भी आ चुके हैं।

जिला मुख्यालय से मिली सूचना के मुताबिक सोमवार को इस सर्वजातीय पंचायत का आयोजन किया गया और मोबाइल के चलते लड़कियों पर पड़ रहे बुरे प्रभाव को देखते हुए इनके द्वारा मोबाइल फोन के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी गई।

इसके अलावा पंचाचत ने रागिनी प्रतियोगिता में महिला डांसर के ठुमके लगाने पर भी रोक लगा दी।

पंचायत ने गांवों की चौपाल पर होने वाली रागिनी प्रतियोगिता में महिला डांसर के ठुमकों को भी सामाजिक पतन का कारण बताते हुए उस पर रोक लगा दी।

बसपा विधायक मोहम्मद आलीम के गिरफ्तारी वारंट की कॉपी विधानसभा अध्यक्ष को भी

जिले की स्थानीय अदालत ने आज पुलिस को निर्देश दिया कि वह बसपा विधायक मोहम्मद आलीम के खिलाफ बलात्कार के एक मामले में चल रही सुनवाई में उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करे।

बसपा विधायक मोहम्मद आलीम के खिलाफ बलात्कार का मामला चल रहा है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विकास गोयल ने पुलिस को विधायक के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट को 21 अक्तूबर से पहले तामील करने का निर्देश दिया।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विकास गोयल ने मेरठ जोन के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वह गिरफ्तारी वारंट की एक प्रति विधानसभा अध्यक्ष को भी भेजे।

सरकारी वकील के अनुसार पुलिस ने पांच जून 2003 को 48 नेपाली लड़कियों को एक सर्कस से मुक्त कराया था। उन लड़कियों ने मोहम्मद आलीम पर यौन उत्पीड़न और अवैध रुप से उन्हें बंदी बना कर रखने का आरोप लगाया था।

पुलिस ने जब इनमें से दो लड़कियों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया तो उनसे बलात्कार की पुष्टि हुयी थी। मों. आलीम बुलंदशहर से बसपा के निर्वाचित विधायक है।

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