वंदे मातरम और तिरंगा सांप्रदायिक, अन्ना खाली बर्तन - अरुंधति

अरुंधति रॉय ने अन्ना हजारे के आंदोलन पर हमला बोलते हुए राष्ट्रगीत वंदे मातरम और राष्ट्रीय झंडे को सांप्रदायिक और बांटने वाला करार दिया है। रवींद्र नाथ टैगोर का हवाला देते हुए रॉय ने कहा, '1937 में टैगोर ने कहा था कि यह अनुचित राष्ट्रगीत है, यह बांटता है। 

अरुंधति के मुताबिक वंदे मातरम का लंबा सांप्रदायिक इतिहास रहा है। ऐसे में भीड़ जब यह नारा लगाती है तो इसका क्या मतलब है? जब आप उपनिवेश के खिलाफ नारे लगाते समय हाथ में राष्ट्रीय झंडा उठाते हैं तो इसका एक मतलब है लेकिन जब आप एक तरह से आज़ाद हैं, तो आप लोगों को बांटते हैं, जोड़ते नहीं हैं।'

एक टीवी चैनल से बातचीत में अन्ना पर निशाना साधते हुए राय ने कहा, 'अन्ना का आंदोलन इसलिए अहिंसक था क्योंकि पुलिस डरी हुई थी और उसने लाठियां नहीं उठाईं। इस आंदोलन के पहले दौर में मंच की पृष्ठभूमि में भारत माता की तस्वीर लगी थी लेकिन दूसरे चरण में इसकी जगह गांधी जी की फोटो ने ले ली। 

वहां पर इस तरह की कई चीजें थीं, जो बेहद खतरनाक हैं। इसके अलावा क्या आप यह सोच सकते हैं कि गांधी जी किसी अनशन के बाद एक निजी अस्पताल में इलाज करवाते? एक ऐसा निजी अस्पताल जो राज्य सत्ता द्वारा गरीबों के इलाज के हक को छीन लेने का प्रतीक है।'

अरुंधति ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की जमकर आलोचना की है। अरुंधति ने जनलोकपाल बिल को भी बेहद खतरनाक कानून करार दिया है जिसकी मांग अन्‍ना हजारे और उनकी टीम कर रही है। लेखिका ने अन्‍ना को ‘खाली बर्तन’ कहकर उनका मजाक भी उड़ाया।

रॉय ने कहा कि जनलोकपाल बिल में भी काफी कमियां है, लेकिन इसे जबरदस्ती थोपा नहीं जा सकता है, ऐसा नहीं है कि सरकारी लोकपाल बिल भी पूरी तरह से सही है, लेकिन इस मसले को आम राय से संसद में सुलझाना होगा न कि भीड़ इकट्ठा करने के बाद अनशन करके।

अरुंधति ने कहा, ‘जनलोकपाल पर संसद में सह‍मति बनने पर सभी खुश हैं और लोग इसे जीत करार दे रहे हैं। मैं भी इस पर खुश हूं क्‍योंकि मुझे लगता है कि जनलोकपाल बिल अपने मौजूदा स्‍वरुप में संसद से पास नहीं हो सकता। इसकी कई वजहें भी हैं। सबसे पहला तो यह कि यह कानून मेरे मुताबिक बेहद खतरनाक है।’ 

अरुंधति ने कहा, ‘मेरा मानना है कि अन्‍ना हजारे खाली बर्तन की तरह हैं जिसमें आप अपनी मर्जी के मुताबिक पानी भर सकते हैं। वह गांधी की तरह नहीं हैं जो सार्वजनिक जीवन में अपने आप में एक खासी शख्सियत थे। अन्‍ना हजारे अपने गांव के लिए खास हो सकते हैं लेकिन अभी हाल में जो कुछ हुआ उसमें उनका कोई योगदान नहीं था।'

अरुंधति ने कहा कि अन्‍ना कौन हैं, उनका किन लोगों से जुड़ाव रहा है और उन्‍होंने पहले क्‍या किया है, उसे लोग जानते हैं।’ 

इससे पहले एक अखबार में लिखे लेख में रॉय ने लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जुट करने के लिए अन्ना के तरीके और अभियान को गलत बताया था।

उसने अन्ना पर सवाल उठाते हुए कहा कि हजारे अपने गृहराज्य महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या पर मौन क्यों हैं? रॉय ने लिखा कि अन्‍ना के तरीके भले ही गांधीवादी हों, लेकिन मांगें सही नहीं हैं। उनके अनशन का मकसद सिर्फ नया लोकपाल बिल पारित करवाना है।

वही फिल्मकार
अशोक पंडित का कहना है कि  ‘अरुंधति रॉय कहती हैं कि फोर्ड फाउंडेशन ने अन्‍ना हजारे को आर्थिक मदद की। मैं यह जानना चाहता हूं कि लोगों की हत्‍या करने के लिए गिलानी को कौन पैसे देता है जिसकी वो समर्थक हैं।’    -

दिल्ली पुलिस के कहने पर अरुंधती और गिलानी के खिलाफ याचिका वापिस

देश विरोधी भाषण देने के आरोप में हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी, अरुंधति राय और चार अन्य लोगों के खिलाफ सुनवाई किए जाने का अनुरोध गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से वापस ले लिया गया। इसके पहले पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि इस संबंध में प्राथमिकी पहले ही दर्ज की जा चुकी है।

दिल्ली पुलिस ने अदालत से कहा कि मामले में प्राथमिकी पहले ही दर्ज की जा चुकी है और जांच जारी है। इसके बाद न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने कहा कि अब याचिका अनुपयोगी हो गई है। अदालत के आदेश के बाद सलेक चंद जैन ने याचिका वापस ले ली।

उन्होंने यह याचिका वकील सुग्रीव दुबे के जरिए दायर की थी। अदालत ने याचिका पर पहले दिल्ली पुलिस और केंद्र को नोटिस जारी करते हुए उनके रुख के बारे में पूछा था। सुशील पंडित की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए एक निचली अदालत ने दिल्ली पुलिस को गिलानी, राय तथा चार अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।

अरुंधती राय व गिलानी के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज

राजधानी में एक सेमिनार के दौरान राष्ट्रविरोधी बयानबाजी के आरोप में अरुंधती राय हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने देशद्रोह का मामला दर्ज कर लिया है।

दिल्ली पुलिस ने यह कार्रवाई बीते शनिवार को अदालत से मिले आदेश के बाद अंजाम दी है। दिल्ली पुलिस के एक आलाधिकारी ने बताया कि अरुंधती राय व गिलानी पर दर्ज की गई प्राथमिकी गत 21 अक्तूबर को राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देशविरोधी बयानबाजी के कारण दर्ज किया गया है।

दोनों ही आरोपियों पर आईपीसी की धारा 124-ए (देशद्रोह), 153-ए (वर्गो के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना), 153-बी (राष्ट्रीय एकता के लिए प्रतिकूल कथन), 504 (शांति भंग करने और लोगांे को भड़काने का प्रयास) और 505 (झूठे बयान, सार्वजनिक शांति के खिलाफ बगावत का अपराध) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ये सभी धाराएं गैरकानूनी गतिविधियां निरोधक कानून 1967 की धारा 13 के साथ जोड़कर दर्ज की गई है। अब जब मामला दर्ज कर लिया गया है तो दोनों ही आरोपियों को गिरफ्तारी का सामना करना होगा।

गौरतलब है कि जिन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है वे पूरी तरह गैरजमानती हैं। इतना ही नहीं, अगर आरोप सही साबित होते हैं तो इन धाराओं के तहत उम्र कैद तक की सजा हो सकती है।

दिल्ली पुलिस अरुंधती पर मेहरबान कहा, कोई मामला ही नहीं बनता

कोर्ट के आदेशों के बावजूद दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर वामपंथी लेखिका अरुंधती राय को राहत दे दी है। दिल्ली पुलिस ने शनिवार को कहा कि अरुंधती के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता।

दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर करते हुए कहा कि अरुंधती के खिलाफ एफआईआर का कोई मामला नहीं बनता है। अदालत ने दिल्ली पुलिस से पूछा था कि लेखिका अरुंधती राय और अलगाववादी कश्मीरी नेता सैयद अली शाह गिलानी के खिलाफ देशद्रोहपूर्ण भाषण की जो शिकायत आई थी उस मामले में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

इसके जवाब में दिल्ली पुलिस ने माना कि अरुंधती राय और गिलानी के खिलाफ शिकायत तो आई थी, मगर उसके आधार पर एफआईआर लायक मामला नहीं बनता है। अब इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट को यह फैसला करना है कि अरुंधती और गिलानी के खिलाफ देशद्रोह का मामला चलना चाहिए या नहीं।

अब अरुंधती ने माओवादियों को देशभक्त बताया

अरुंधती रॉय ने माओवादियों का यह कहकर महिमामंडन किया है कि माओवादी 'एक तरह के देशभक्त' हैं। उन्होंने पीएम मनमोहन सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री चिदंबरम पर आरोप लगाया कि वे कॉर्पोरेट कंपनियों को आदिवासियों की जमीन के इस्तेमाल की अनुमति देकर संविधान और पेसा (पंचायत एक्सटेंशन ऑफ शेडयूल एरिया) का उल्लंघन कर रहे हैं।

अरुंधती ने कहा- वे (माओवादी) एक तरह के देशभक्त हैं, लेकिन उनकी देशभक्ति बेहद उलझी हुई है। इसीलिए वे फिलहाल इस देश को टूटने से बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एक और सवाल के जवाब में उन्होंने हालांकि कहा कि मैं नहीं समझती कि समस्याओं का हल करने के लिए माओवादी क्रांति एकमात्र हल है।

उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में रविवार को बुकर अवॉर्ड विनर अरुंधती रॉय को एक बैठक में शामिल होने से रोक रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के 11 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि मानवाधिकार समूहों और जनजातीय संगठनों के बुलावे पर रॉय भुवनेश्वर आई हैं। पुलिस उपायुक्त एच. के. लाल ने कि हमने एबीवीपी के 11 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के संबंध में रॉय की टिप्पणी को लेकर एबीवीपी कार्यकर्ता उनका विरोध कर रहे थे। बाद में वह कार्यक्रम में शामिल हुईं।

हाई कोर्ट का दिल्ली सरकार को अरुंधती और गिलानी के बयानों पर नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि भारत के खिलाफ भाषण देने के लिए क्यों कट्टरपंथी हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी, लेखिका अरुंधती राय और दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रफेसर एस. . आर गिलानी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

न्यायमूर्ति हीमा कोहली ने एक याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब देने को कहा है। इस याचिका में अरुंधती और बाकी के खिलाफ देशद्रोह और कई अपराधों के आरोप में आपराधिक मुकदमा चलाए जाने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता के वकील सुग्रीव दुबे ने कहा कि सरकार को भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।

सुग्रीव ने 25 अक्टूबर को अरुंधती और बाकी के भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि स्वतंत्रता में कभी भी राष्ट्र हित के खिलाफ विचारों के प्रसार की आजादी शामिल नहीं रही और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निर्दोष लोगों को भड़काने के उद्देश्य से भाषण की इजाजत नहीं दी जाए। वकील के मुताबिक राय ने अपने भाषण में कहा था कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा नहीं है और उन्होंने राज्य के युवकों से कश्मीर के लिए बलिदान करने का आह्वान किया था।

सुग्रीव की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 27 जनवरी तय की और दिल्ली सरकार से 27 जनवरी तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा।

भारत विरोधी भाषण देने के लिए हुर्रियत नेता और अरुंधती के खिलाफ निचली अदालत में पहले से ही दो शिकायतें दर्ज हैं।

अरुंधति राय के पचमढ़ी के जंगलों में अवैध मकान पर होगी कारवाही

देशद्रोही गतिविधियों में लिप्त अरुंधति राय का पचमढ़ी में बना खूबसूरत आशियाना उनके लिए मुश्किल का सबब बन सकता है। प्रदेश के इस एकमात्र हिल स्टेशन पर करीब 17 साल पहले राय के पति प्रदीप किशन ने घर बनाया था।

घर को लेकर विवाद इस बात पर शुरू हुआ कि इसका निर्माण कार्य संरक्षित वन भूमि पर हुआ है। अब इसी मामले में राज्य सरकार कार्रवाई करने जा रही है। पिछले करीब पांच साल से यह मामला उच्च न्यायालय में लंबित था। हाल ही में न्यायालय ने इस प्रकरण में निर्देश दिए हैं कि प्रदीप किशन के मामले सहित इसी प्रकृति के दो दर्जन अन्य मामलों में संबंधित एसडीएम निर्णय करने के लिए स्वतंत्र हैं। यानी अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है और वह एक्शन ले सकती है।

अरुंधति के फिल्म निर्माता पति प्रदीप किशन ने पचमढ़ी से सात किमी दूर बरीआम गांव में एक खूबसूरत घर बनवाया है। रॉय का घर पचमढ़ी फॉल्स के लिए जाने वाले रास्ते में पड़ता है और पचमढ़ी स्पेशल एरिया डेव्लेपमेंट अथॉरिटी (साडा) की सीमा में आता है।

यह क्षेत्र पचमढ़ी वन्यजीव अभयारण्य का भी हिस्सा है और केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इसे पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत इको-संवेदी क्षेत्र घोषित कर रखा है। प्रदीप किशन ने यहां 1992 में जमीन खरीदी थी और 1993 में यह घर बनकर तैयार हो गया था। इस मामले में साडा ने घर के निर्माण को स्टेट टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट-1973 का उल्लंघन मानते हुए निर्माण रोकने का आदेश दिया था।

साडा का कहना है कि प्रदीप किशन ने इस जमीन का लैण्ड यूज (भू-उपयोग) गलत तरीके से बदलवाया था। इस बीच वन विभाग ने भी घर को अभयारण्य क्षेत्र में होने के कारण अवैध करार दे दिया। इस संबंध में जारी हुए तमाम नोटिसों के जवाब में राय और उनके पति का तर्क यही रहा कि बरीआम गांव किसी संरक्षित वन क्षेत्र में नहीं आता और और उनका घर राजस्व भूमि पर ही बना है।

सरकार मुझ पर राजद्रोह का आरोप नहीं लगाएगी - अरुंधती राय

अरुंधति ने कहा है कि सरकार ने ये संकेत दिए हैं कि वो उनके और अन्य लोगों के ख़िलाफ़ एक सम्मेलन में कश्मीर की आज़ादी पर दिए गए वक्तव्य पर राजद्रोह का आरोप नहीं लगाएगी, वहीं कुछ संगठन घोषणा कर रहे हैं कि वे उन्हें नहीं छोड़ेंगे.

अरुंधति रॉय ने अपने घर के बाहर हुई घटना को लेकर मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाए हैं.उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने उनके घर के बाहर आंधे घंटे तक नारेबाज़ी और तोड़फोड़ की थी. अरुंधति रॉय का आरोप है कि मीडिया इन घटनाओं पर मूक दर्शक बनी रही.

अपने एक बयान में अरुंधति रॉय ने कहा है- 31 अक्तूबर की सुबह 11 बजे क़रीब 100 लोग मेरे घर आए. इन लोगों ने मेरे घर का गेट तोड़ दिया और अंदर घुसकर तोड़-फोड़ की.अरुंधति ने कहा कि इन लोगों ने कश्मीर पर दिए उनके बयान के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की और सबक सिखाने की धमकी दी.

उन्होंने कहा कि उस समय कई मीडिया समूहों के पत्रकार वहाँ मौजूद थे.पिछले दिनों अरुंधति ने कहा था कि कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न अंग नहीं रहा है.अरुंधति के मुताबिक़ इस घटना के बाद पुलिस ने उन्हें सलाह दी कि भविष्य में उन्हें अपने घर के आस-पास ओबी वैन खड़े दिखे, तो वे उन्हें बताएँ.पुलिस का कहना था कि उन्हें इससे ये संकेत मिलते हैं कि यहां कोई ग्रुप आने वाला है.

भाजपा महिला मोर्चा का देशद्रोही अरुंधती के घर के बाहर हंगामा



सौजन्य : सहारा समय

भाजपा महिला मोर्चा ने अरूंधती के घर पर प्रदर्शन किया,पुलिस कर रही जांच

भाजपा महिला कार्यकर्ताओं के एक समूह ने आज यहां चाणक्यपुरी स्थित अरूंधती राय के निवास स्थान के बाहर कश्मीर के संबंध में की गयी उनकी टिप्पणी और सरकार द्वारा उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने के विरोध में प्रदर्शन किया

पुलिस एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भाजपा की दिल्ली महिला इकाई की प्रमुख शिखा राय के नेतृत्व में पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं ने अरूंधती के निवास के बाहर प्रदर्शन किया और उनके कश्मीर संबंधी विवादित बयान के विरूद्ध नारे लगाये ।

उन्होंने बताया कि प्रदर्शन संबंधी सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस राय के निवास पर पहुंची लेकिन वहां पर कोई भी प्रदर्शनकारी नहीं मिला ।

उन्होंने कहा कि हम टेलिविजन फूटेज देखेंगे और इस बात का पता लगायेंगे कि इस प्रदर्शन के पीछे किसका हाथ है । फिलहाल किसी का भी नाम नहीं ले सकते है ।

भाजपा की वरिष्ठ नेता स्मृति इरानी ने टेलीफोन पर बताया कि पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं ने राय की कश्मीर के संबंध में की गयी टिप्पणी और सरकार द्वारा उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने के विरोध में प्रदर्शन किया ।

उन्होंने कहा कि राय ने उस देश के खिलाफ बयान दिया है जहां पर वह रहती हैं । विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रा का दुरूपयोग नहीं किया जाना चाहिए । हम चाहते है कि सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई करे ।

इस महीने के शुरू में दिल्ली में कश्मीर के संबंध में आयोजित एक संगोष्ठी ‘ आजादी.द ओनली वे का आयोजन हुआ था जिसमें राय ने कहा ‘‘ कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न अंग नहीं रहा है । यह एक ऐतिहासिक तथ्य है ।यहां तक कि केंद्र सरकार भी इस बात को स्वीकार कर चुकी है । ’’

अरुंधति राय को राष्ट्रद्रोह व देशनिकाला की सजा मिलना चाहिए - प्रभात झा

मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य प्रभात झा ने अरुंधति राय द्वारा कश्मीर पर दिए गए कथित विवादास्पद बयान पर चिंता जाहिर करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम से उनके खिलाफराष्ट्रद्रोहका मुकदमा चलाने, उनकीनागरिकता समाप्तकरने तथादेशनिकालाजैसी कार्रवाई की मांग की है।

झा ने आज चिदंबरम को भेजे एक पत्र में कहा है कि इसके साथ ही अरुंधति को दिए गए सभी सम्मान एवं उपाधियां तत्काल वापस लेना चाहिए। उनके समर्थन में जो लोग ‘प्रोपेगंडा’ के लिए काम कर रहे हैं, उन पर भी राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाया जाए।

उल्लेखनीय है कि अरुंधति ने गत रविवार श्रीनगर में एक कार्यक्रम में कहा था, ‘‘कश्मीर कभी भारत का अभिन्न अंग नहीं रहा है। यह ऐतिहासिक तथ्य है। यहां तक कि भारत सरकार ने भी इसे स्वीकार किया है’’।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने लिखा है कि वह यह पत्र ‘भाजपा कार्यकर्ता’ के नाते नहीं, ‘भारतीय’ होने के नाते भेज रहे हैं। उन्होने कहा कि जिस अरुंधति ने इस देश की धरती पर जन्म लिया और जिस देश के नागरिकों एवं संविधान ने इतना सम्मान दिया, उसी ने हमारे देश से दगा किया। आश्चर्य इसका है कि उनके जैसे सक्षम गृह मंत्री भी ‘राष्ट्रद्रोह’ एवं ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ में अंतर नहीं कर पा रहे हैं।

उन्होने कहा कि भारत का ही कोई व्यक्ति उसका ही नमक खाकर, देश में ही रहकर उसका अपमान करे, यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कांग्रेस के आशीर्वाद के चलते अरूंधति राय पर कोई मुकदमा नहीं

अरूंधति राय की विवादास्पद टिप्पणी (कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं) के मामले में उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर विवाद हो गया है। एक ओर जहां इस मामले में केन्द्र का रवैया ठंडा नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर भाजपा कार्रवाई को लेकर अड़ गई है।

इस मामले से कांग्रेस बुधवार को साफ बच निकली। पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, मैं तिलक मार्ग थाने का थानेदार नहीं हूं। मैं कैसे कह सकता हूं कि राय के खिलाफ किस तरह का मामला बनाया जा सकता है। फिलहाल तमाम विवादों के बाद भी राय पर देशद्रोह का मुकदमा नहीं चलेगा क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा के कारण सरकार कश्मीर मसले पर कोई बवाल खड़ा नहीं करना चाहती है।

राय के खिलाफ तीन जगह मामले दर्ज कराए जा चुके हैं। रांची में आशीष कुमार सिंह ने, नैनीताल में पुष्करसिंह धामी ने तो वाराणसी में अशोक पाण्डेय ने मामला दर्ज कराया है। इस बीच, प्रतिबंघित संगठन लिट्टे का समर्थन करने वाली विडुदलै चीरतै कच्ची पार्टी राय के बचाव में आगे आई है।

भाजपा नेता ने नैनीताल में अरुंधती के खिलाफ लिखित शिकायत की

उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने प्रसिद्ध लेखिका अरूधंति राय द्वारा कश्मीर के बारे में की गई टिप्पणी के खिलाफ थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है ।

पुलिस सूत्रों ने आज यहां बताया कि राज्य नगर विकास अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष पुष्करसिंह धामी ने मल्लीताल थाने में कल लिखित शिकायत की है ।

थाना प्रभारी बी एस धोनी ने बताया कि पुलिस इस मामले में कानूनी सलाह ले रही है ।

मैं तो न्याय की बात कर रही हूँ - अरुंधति रॉय

अरुंधति रॉय ने मंगलवार को श्रीनगर से जारी बयान में कहा है,'' मैंने आज सुबह के अख़बारों को देखा जिसमें लिखा हुआ था कि श्रीनगर की सार्वजनिक सभाओं में मैंने जो कहा है, उसके लिए मुझे देशद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किया जा सकता है.''
अरुंधति कहना था,'' मैंने जो कहा है वो लाखों लोग हर दिन कहते हैं. मैंने जो कहा है जो टीकाकार वर्षों से लिखते और कहते आए हैं. यदि कोई मेरे भाषणों को गौर से देखे तो उनसे पता चलेगा, उनमें मूलरूप से न्याय की बात है.''

अरुंधति का कहना है,'' मैंने कश्मीरी लोगों के लिए न्याय की माँग की है जो दुनिया के सबसे नृशंस सैन्य शासन में रहते हैं... भारतीय ग़रीब इस सबकी कीमत अदा कर रहा है.'' '' ये दुखद है कि देश उन लेखकों को चुप करा देना चाहता है जो अपनी बात कहना चाहते हैं. ये दुखद है कि जो न्याय चाहते हैं, उन्हें ये देश जेल भेज देना चाहता है जबकि सांप्रदायिक दंगे करवाने वाले, नरसंहार करने वाले, कॉरपोरेट घोटाले करने वाले, लुटेरे, बलात्कारी और ग़रीबों पर जुल्म ढहाने वाले खुले घूम रहे हैं.''

ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों अरुंधति रॉय ने श्रीनगर में एक सेमिनार के दौरान कहा था, " कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न अंग नहीं रहा है. यह ऐतिहासिक तथ्य है. भारत सरकार ने भी इसे स्वीकार किया है."

उन्होंने आरोप लगाया था कि ब्रितानी शासन से आज़ादी के बाद भारत ख़ुद औपनिवेशिक शक्ति बन गया है.

अरुंधती राय जैसे लोग ही देश का बेडा गर्क कर देंगे - फारुक अब्दुल्ला

केंद्रीय मंत्री फारक अब्दुल्ला ने कश्मीर के बारे में लेखिका अरंधती राय की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा है कि देश के लोग ही देश का बेडा गर्क कर देंगे.

डा. अब्दुल्ला ने आज यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि हमारे यहां इतनी आजादी है कि हिंदुस्तान के लोग ही हिंदुस्तान का बेडा गर्क कर देंगे. वह सुश्री राय की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे कि कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न अंग नहीं रहा.

सुश्री राय की टिप्पणी से क्षुब्ध डा. अब्दुल्ला ने कहा कि लोग आजादी का फायदा उठा रहे हैं. जिसमें वह कुछ नहीं कर सकते. यह पूछे जाने पर कि क्या यह अभिव्यक्ति की आजादी का दुरुपयोग नहीं है. जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की बातें करने वाले लोगों को स्वयं ही सोचना चाहिये कि वे जो कह रहे हैं. उन्हें वह कहना चाहिये या नहीं.

आखिर कांग्रेस के एक सदस्य ने भी कर ही दिया अरुंधती के बयान का विरोध

कांग्रेस के एक नेता ने आज प्रसिद्ध लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति राय से कश्मीर पर दिया गया उनका बयान वापस लेने को कहा। पार्टी ने कहा कि उनका बयानऐतिहासिक तथ्यों के विपरीतहै और यह देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह कर सकता है।

कश्मीर में एक संगोष्ठी में अरुंधति द्वारा कल दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस सदस्य सत्य प्रकाश मालवीय ने कहा, ‘‘देश के सर्वश्रेष्ठ ज्ञात लेखकों में से एक का इस तरह का गैर जिम्मेदाराना बयान देना वाकई बेहद आश्चर्यजनक है।’’ मालवीय ने कहा, ‘‘उन्हें निश्चित तौर पर अपना बयान वापस लेना चाहिए जो ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है और यह देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह कर सकता है।’’

राय ने कल कहा था, ‘‘कश्मीर भारत का कभी अभिन्न हिस्सा नहीं रहा है। यह ऐतिहासिक तथ्य है। यहां तक कि भारत सरकार ने भी इसे स्वीकार किया है।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अरुंधति को अपनी इतिहास की जानकारी दुरुस्त करनी चाहिए और इस बात को जानना चाहिए कि जम्मू कश्मीर को तब भारत में सम्मिलित कर लिया गया था जब वहां के तत्कालीन महाराजा हरि सिंह ने भारत में शामिल होने के कागजात पर 26 अक्तूबर 1947 को हस्ताक्षर किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘उसके बाद अन्य सभी रजवाड़ों की तरह जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा बन गया है।’’

कश्मीर में आजादी की मांग देशद्रोह नहीं ???

बीजेपी का कहना है कि देश का संविधान अधिकारियों को अलगाववादी भाषणों पर रोक लगाने का अधिकार देता है पर सिविल सोसाइटी के कई लोग इस राय से इत्तफाक नहीं रखते।

पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त और कश्मीर कैडर के आईएएस वजाहत हबीबुल्लाह ने साफ कहा, ' हमें आजादी लफ्ज से डरना नहीं चाहिए। खासकर अगर कोई भारत की सीमा और संविधान के दायरे में ज्यादा आजादी की मांग कर रहा हो। 'लेकिन उनके मुताबिक अगर कोई भारत से आजाद होने की बात करता है तब भी हमें कठोर कानूनी कार्रवाई के बदले उनके साथ बहस शुरू करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ' कानून की बातें अपनी जगह हैं, मुझे लगता है कि सैयद अली शाह गिलानी और अरुंधती रॉय के भाषणों के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का असर उल्टा होगा। इससे डर जाहिर होगा, यह संदेश जाएगा कि देश की अटूट एकता में हमारा भरोसा कमजोर है। '

नागरिक अधिकारों की वकालत के लिए जाने जाने वाले एडवोकेट प्रशांत भूषण कहते हैं कि रॉय और गिलानी के भाषणों के लिए उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का सवाल ही नहीं उठता। वह बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ 1962 में केदारनाथ बनाम पंजाब सरकार केस में साफ कर चुकी है कि जब तक सशस्त्र विद्रोह या हिंसा के इस्तेमाल की अपील न हो तब तक कुछ भी राजद्रोह नहीं है।

PM’s Daughter Supports Arundhati Roy ( प्रधानमंत्री की बेटी अरुंधती के समर्थन में )

Prime Minister Manmohan Singh’s daughter Daman Singh feels that the essays of writer-activist Arundhati Roy who has been attacking the Government’s Maoist and other policies are an ‘eye-opener’.

“I follow all her writings in popular magazines. She is a powerful writer and her writings are an eye-opener. She has a unique and powerful way of presenting things,” Daman Singh told newsmen on the sidelines of the Kovalam literary festival here.

When asked whether she agreed with Roy’s views on Maoism and her fierce attack on the government, Daman said, “I agree with some of them and disagree with others.”

Author of the novel “Nine by Nine”, 46-year-old Daman Singh was in the capital to present her second work “ Sacred Grove”. She said her next work would be a “personal biography” of her parents in which she will present various aspects of their life. Of course, she can’t be critical of them either.

Daman said she had full faith in what her father was doing and was confident that he was leading the country in the right direction. She admitted that the PM’s job put a huge physical and mental strain on him. “We are all concerned about his health. But I am sure that he will step down when he feels he can no longer do well,” she said.

Daman Singh engaged Chinese writer Lijia Zhang in a conversation on the latter’s book “Socialism is Great’’ at the festival on Saturday. Among those attending the two-day festival are South African writer Zubeida Jaffer, Pakistani writer Mohammed Haneef, Basharat Peer, Deborah Baker Ghosh, Mridula Koshy, Sarnath Banerjee and Manu Joseph.

कश्मीर पर दिए बयान पर अरुंधती राय पर मुकदमा

"कश्मीर भारत का अभिन्न अंग कभी नहीं था " यह कहने पर रांची की अदालत में अरुंधती राय पर मुकदमा दर्ज किया गया है, यह मुकदमा आईपीसी की धारा 124 -A के तहत दर्ज किया गया है.

आशीष कुमार सिंह नामक एक व्यक्ति ने अरुंधती राय पर मुकदमा दर्ज करते हुए उसके कश्मीर पर दिए गए बयान पर अपना विरोध दर्ज किया और कहा की अरुंधती का यह बयान भारत के कानून और सविंधान के विरुद्ध है.

अरुंधती ने यह बयान 25 -26 सितम्बर को ऑपरेशन ग्रीन हंट के लिए रांची में सुनवाई के बाद पत्रकारों को दिया था.

आशीष ने अरुंधती राय को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है.

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