लश्कर-ए-तैयबा की फिदायीन थी इशरत जहां : डेविड हेडली


अहमदाबाद में पुलिस मुठभेड़ में मारी गयी इशरत जहां लश्कर-ए-तैयबा की फिदायीन थी। ये खुलासा मुंबई हमलों का आरोपी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने की। एनआईए टीम की शिकागो दौरे के समय हेडली ने ये खुलासा किया। इशरत की लश्कर-ए-तैयबा में खुंखार आतंकी मुजम्मिल ने की थी।

2004 में इशरत जहां के मुठभेड़ पर गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह और गुजरात पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा था। हेडली के इस खुलासे के बाद इस मुद्दे पर चल रही राजनीति पर विराम लग सकता है। इशरत जहां के साथ मुठभेड़ में दो और आतंकी मारे गए थे जो पाकिस्तानी मूल के थे।

26/11 आतंकी हमले की सुनवाई कर रही सत्र अदालत ने पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली को सरकारी गवाह बनने की इजाजत दे दी है। अदालत ने उसे कुछ शर्तो पर सजा से माफी दे दी है। मुंबई आतंकी हमले के अभियुक्त हेडली को अमेरिका से यहां की अदालत में गुरुवार शाम वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये पेश किया गया। इस दौरान हेडली ने सरकारी गवाह बनने के बदले सजा से माफी की मांग की। इस पर अभियोजन पक्ष ने कहा कि उसे कुछ शर्तो के साथ हेडली का प्रस्ताव मंजूर है।

हेडली को अब अगले साल आठ फरवरी को अभियोजन पक्ष के गवाह के तौर पर वीडियो लिंक के जरिये अदालत में पेश किया जाएगा। उसके बयान से हमले के पीछे पाकिस्तानी आतंकियों की भूमिका बेनकाब होने की उम्मीद है।

लश्कर आतंकी को मुंबई हमलों के सिलसिले में 11 मामलों में अभियुक्त बनाया गया है। उसने अपने खिलाफ आरोपों को स्वीकार कर लिया है। हेडली ने कहा कि मैं इन अपराधों में अपनी भूमिका स्वीकार करता हूं। मैं अदालत में गवाह के तौर पर हाजिर होने के लिए भी तैयार हूं।लश्कर आतंकी ने कहा कि अगर अदालत से मुझे माफी मिले तो मैं इस पूरी घटना के संबंध में सवालों का जबाव देने के लिए तैयार हूं। इस मामले में सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने भी अदालत को बताया कि हेडली माफी के बदले गवाह बनने के लिए तैयार है। इसके बाद निकम ने जांच अधिकारियों से सलाह-मशविरे के लिए कुछ वक्त मांगा। इस पर अदालत को आधे घंटे के लिए स्थगित कर दिया गया।

हेडली ने अदालत को बताया कि इसी तरह के आरोपों के तहत मुझे अमेरिकी अदालत में गुनहगार ठहराया गया था। उल्लेखनीय है कि अमेरिकी अदालत पहले ही मुंबई हमलों के लिए हेडली को 35 साल कैद की सजा सुना चुकी है। मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को हुए हमलों में लगभग 170 लोग मारे गए थे। हेडली अमेरिकी अदालत के सामने पहले ही स्वीकार कर चुका है कि उसने कई बार मुंबई का दौरा किया था और ये दौरे हमलों की योजना से जुड़े थे।

जरुर पढ़िए: वाशिंगटन DC ने जारी किया गया भारत-अमेरिका का संयुक्त बयान


रक्षा मंत्री श्री मनोहर परिकर की 7 दिसंबर से 10 दिसंबर, 2015 तक की अमेरिका यात्रा के दौरान भारतीय दूतावास, वाशिंगटन डीसी द्वारा जारी किया गया भारत-अमेरिका पूरा संयुक्त बयान

अमेरिका के रक्षा मंत्री श्री एश कार्टर के निमंत्रण पर भारत के रक्षा मंत्री श्री मनोहर परिकर ने 7 दिसंबर से लेकर 10 दिसंबर, 2015 तक अमेरिका की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने यूएस पेसिफिक कमांड (पीएसीओएम), पेंटागन समेत अमेरिका के कई प्रतिष्ठानों का दौरा कया। उन्होंने रक्षा मंत्री कार्टर के साथ एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस ड्वीट डी आइजनहावर (सीवीएन-69) का फ्लाइट ऑपरेशन भी देखा। 

पहले श्री परिकर ने पीएसीओएम में पर्ल हार्बर की याद में एक समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया। वह पीएसीओएम के कमांडर एडमिरल हैरी हैरिस से भी मिले और होनोलुलु हवाई के कई सैनिक प्रतिष्ठानों का भी दौरा किया। 

पेंटागन में श्री परिकर और अमेरिकी रक्षा मंत्री ने अपनी तीसरी बैठक की। उन्होंने भारत-अमेरिका के रक्षा संबंध और व्यापक अमेरिकी-भारत रणनीतिक गठबंधन पर भी बातचीत की। दोनों ने भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा और रक्षा मामलों में एक दूसरे से मिल कर काम करने की दिशा में आई रफ्तार को बरकरार रखने पर खासा ध्यान दिया। इसमें डिफेंस टेक्नोलॉजी एंड ट्रेड इनिशिएटिव (डीटीआईआई) को आगे बढ़ाने जैसा मुद्दा भी शामिल था। दोनों अब तक डीटीआईआई को आगे बढ़ाने की दिशा में हुई प्रगति से संतुष्ट थे। दोनों मंत्रियों ने डीटीआईआई के बदले हुई रूप की जरूरत के हिसाब से दोनों देशों के बीच सह-उत्पादन और सह-विकास के लिए नई परियोजनाओं को चिन्हित करने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की। श्री परिकर और श्री कार्टर ने विमानवाही टेक्नोलॉजी में सहयोग (जेडब्ल्यूजीएसीटीसी) खास कर एयरक्राफ्ट लांच एंड रिकवरी इक्वपमेंट (एएलआरई) के लिए संयुक्त कार्यकारी समूह में हुई सकारात्मक बातचीत की सराहना की उम्मीद जताई कि फरवरी 2016 में भारत में होने वाले जेडब्ल्यूजीएसीटीसी की दूसरी बैठक में इस दिशा में और प्रगति होगी। उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि इस सप्ताह बेंगलुरू में हुई जेट टेक्नोलॉजी से संबंधित संयुक्त कार्य दल यानी जेईटीजेडब्ल्यूजी ने अपनी बैठक टर्म ऑफ रेफरेंस को पूरा कर लिया और इस मामले में सहयोग और बढ़ाने के लिए बातचीत सकारात्मक रही। 

अमेरिकी रक्षा मंत्री श्री कार्टर ने श्री परिकर को यह बताया कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने के आलोक में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने भारत को गैस टरबाइन इंजन टेक्नोलॉजी देने के अपनी नीति को अद्य़तन बनाया है। यही वजह है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री ने यह उम्मीद जताई कि अमेरिका अब जेट इंजन के उपकरण के उत्पादन के दिशा में भारत के साथ सहयोग बढ़ा सकेगा। 

श्री परिकर ने श्री कार्टर को मेक इन इंडिया के तहत उठाए गए कदमों की जानकारी दी। इसके तहत भारतीय रक्षा क्षेत्र में कई सुधार किए गए हैं। श्री कार्टर ने इन कदमों का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि अब भारतीय रक्षा उत्पादन में अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी और बढ़ेगी। 

श्री कार्टर ने 2016 में होने वाले बहुस्तरीय नौसैन्य अभ्यास रिफ-ऑफ-दि-पेसिफिक यानी आरआईएमपीएसी में भारत की भागीदारी का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने अप्रैल-मई, 2016 में भारतीय वायुसेना द्वारा बहुस्तरीय रेड फ्लैग अभ्यास में भागीदारी का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे आगे जाकर दोनों देशों के वायुसेना के बीच आसमान में और ज्यादा सहयोग होगा। श्री परिकर ने भी भारतीय वायुसेना की ओर से फरवरी, 2016 में विशाखापट्टनम में आयोजित होने वाली इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में अमेरिकी की भागीदारी से जुड़ी घोषणा का स्वागत किया। 

श्री कार्टर और श्री परिकर ने दोनों देशों के नौसेनाओं के बीच समुद्र में सहयोग के स्तर पर संतोष जताया और आगे भी इसे और बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि व्हाइट शिपिंग से जुड़ी सूचनाएं साझा करने के मामले में दोनों नौसेनाओं को बीच जल्द ही एक समझौता करने का इरादा है। 

श्री परिकर और श्री कार्टर ने रक्षा नीति समूह (डिफेंस पॉलिसी ग्रुप) में सेना सहयोग समूह के तहत मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचए/डीआर) पर कार्यकारी दल के पुनर्स्‍थापन समेत हुई प्रगति की सराहना की। साथ ही रक्षा क्षेत्र में क्षमता विकास पर बातचीत की। 

दोनों ने आईएसआईएल, अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, डी कंपनी, हक्कानी नेटवर्क और अन्य क्षेत्रीय आतंकी संगठनों के खतरों समेत क्षेत्रीय सुरक्षा के मुददों पर भी विचार-विमर्श किया। दोनों ने एशिया-प्रशांत और हिंद महासागर में श्री नरेन्द्र मोदी और श्री बराक ओबामा की संयुक्त सामरिक दृष्टि लागू करने पर विचार-विमर्श किया। 

श्री परिकर की इस राजकीय यात्रा ने भारत और अमेरिका के रक्षा संबंध के सामरिक महत्व के साथ दोनों मंत्रियों का इसे निजी प्राथमिकता में रखने को भी रेखांकित करती है। श्री परिकर ने अपनी इस यात्रा के दौरान अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकारियों और संसद सदस्यों से मुलाकात की।

106 अंतर्देशीय जलमार्ग अब होंगे राष्ट्रीय जलमार्ग, आयेगा विधेयक


केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 106 अतिरिक्त अंतर्देशीय जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित करने के लिए केन्द्रीय विधेयक को अनुमति दे दी है ..

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने “राष्ट्रीय जलमार्ग विधेयक-2015” में आधिकारिक संशोधन करने को मंजूरी प्रदान की है। यह संसोधन परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों और राज्य सरकारों की समीक्षा पर आधारित है। इसके अंतर्गत 106 अतिरिक्त अंतर्देशीय जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित करने के लिए केन्द्रीय विधेयक लाया जाएगा। वर्तमान में पांच राष्ट्रीय जलमार्गों में 106 अतिरिक्त अंतर्देशीय जलमार्गों को सम्मिलित करने के बाद इनकी संख्या बढ़कर 111 हो जाएगी। 

राष्ट्रीय जलमार्ग विधेयक-2015 की मूल सूची में निम्नलिखित संशोधनों को सम्मिलित किया गया है- केरल के 10 जलमार्गों को हटाना, 17 जलमार्गों को वर्तमान जलमार्गों के साथ मिलाना और 18 जलमार्गों (कर्नाटक में 5, मेघालय में 5, महाराष्ट्र में 3, केरल में 3 और तमिलनाडु और राजस्थान में 1-1 जलमार्ग) को जोड़ा गया है, जिससे 106 जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग के रूप में घोषित करने को अंतिम रूप दिया गया है। यह वर्तमान में 5 जलमार्गों के अतिरिक्त होंगे। राष्ट्रीय जलमार्ग विधेयक-2015 में इन आधिकारिक संशोधनों को करने के लिए संसद के वर्तमान सत्र में लोकसभा में विधेयक को पेश किया गया है। 

106 जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग के रूप में घोषित करने से फिलहाल तुरंत कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। हालांकि प्रत्येक जलमार्ग के लिए भारतीय अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा तकनीकी-आर्थिक अध्ययन करने के बाद प्रत्येक जलमार्ग के लिए सक्षम प्राधिकरण से इसके लिए वित्तीय अऩुमति ली जाएगी। भारतीय अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) वित्तीय संसाधनों को एकत्र कर राष्ट्रीय जलमार्गों के विभिन्न खंडों को शिपिंग और नौवहन के लिए विकसित करेगा। 

इन राष्ट्रीय जलमार्गों को घोषणा से आईडब्ल्यूएआई को इन खंडों के लिए शिपिंग और नौवहन के लिए प्रयोग करने में सहायता मिलेगी। इस संबंध में जल के प्रयोग, नदी के किनारों और संबंधित भूमि के अधिकार राज्य सरकारों के पास ही रहेंगे। इसके अतिरिक्त राज्यों को कम दुर्घटनाओं, सड़कों पर कम भीड़भाड़, यात्रियों को ढोने के लिए सस्ता माध्यम, माल भाड़े की आवाजाही में कम लागत और आसपास के क्षेत्रों के विकास जैसे लाभ प्राप्त होंगे। 

राष्ट्रीय जलमार्गों की त्वरित घोषणा और इसके बाद इनका विकास इन जलमार्गों के किनारे औद्योगिक विकास और पर्यटन क्षेत्र की संभावना बढ़ाएगा। इसके अतिरिक्त देश भर में सस्ते और पर्यावरण के अऩुकूल परिवहन माध्यम का विकास करेगा। 

पृष्ठभूमि : 

अंतर्देशीय जल परिवहन ईंधन गुणवत्ता के बिंदु से परिवहन का सबसे सस्ता माध्यम माना जाता है। एक हॉर्सपावर से जहां सड़क क्षेत्र से सिर्फ 150 किलो और रेलमार्ग से 500 किलो भार ढोया जा सकता है वहीं जल क्षेत्र में चार हजार किलो भार ढोया जा सकता है। विश्व बैंक द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार जहां जलमार्ग में एक लीटर ईंधन द्वारा 105 टन-किलो मीटर ले जाया जा सकता है, वहीं रेल द्वारा 85 टन-किलो मीटर और सड़क मार्ग द्वारा सिर्फ 24 टन-किलो मीटर माल ढोया जा सकता है। अध्ययनों से पता चला है कि जलमार्गों द्वारा माल ढोये जाने के दौरान जहाजों से प्रति टन-किलो मीटर 32 से 36 ग्राम कार्बन डाइआक्साइड का उत्सर्जन होता है, वहीं सड़क परिवहन (भारी वाहन) में इसकी मात्रा बढ़कर 51 से 91 ग्राम कार्बन डाइआक्साइड प्रति टन-किलो मीटर हो जाती है। 

अल्‍पसंख्‍यकों की ‘नई मंजिल योजना’ को 5 वर्षों के लिए 650 करोड़ मिले


अल्‍पसंख्‍यक युवाओं के शिक्षा और कौशल लाभ के लिए केन्‍द्रीय योजना ‘नई मंजिल’ को 650 करोड़ रुपये 

अल्‍पसंख्‍यक मामले मंत्रालय की केन्‍द्रीय क्षेत्र की योजना ‘नई मंजिल’ के लिए पांच वर्ष की अवधि हेतु 650 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल गई है। इसमें 325 करोड़ रुपये की विश्‍व बैंक की 50 प्रतिशत सहायता राशि शामिल है। वित्‍त मंत्री ने पिछले सप्‍ताहांत को इस योजना को मंजूरी दी। परियोजना की कुल लागत का 50 प्रतिशत देते समय विश्‍व बैंक के प्रतिनिधि ने इस प्रकार की योजना तैयार करने के लिए मंत्रालय की सराहना की। 

‘नई मंजिल’ योजना अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के लिए व्‍यापक शिक्षा और जीवन यापन हेतु एक पहल है। इस योजना का उद्देश्‍य उन अल्‍पसंख्‍यक युवाओं को फायदा पहुंचाना है, जिन्‍होंने स्‍कूल बीच में छोड़ दिया या मदरसा जैसे सामुदायिक शिक्षा संस्‍थानों से शिक्षित हैं। इसके तहत उन्‍हें प्रमाण पत्र सहित कौशल प्रशिक्षण और औपचारिक शिक्षा (कक्षा 8 या 10 तक) प्रदान की जाएगी। इससे उन्‍हें संगठित क्षेत्र में बेहतर रोजगार पाने में मदद मिलेगी और उनके जीवन स्‍तर में सुधार आएगा। यह योजना पूरे देश के लिए है। 

इस योजना की क्षमता से प्रभावित होकर विश्‍व बैंक ने कहा कि वह इसी प्रकार के विकास की चुनौतियों का मुकाबला करने वाले अफ्रीका के देशों के लिए भी इस परियोजना की सिफारिश करेगा। अब मंत्रालय इस योजना के कार्यान्‍वयन के लिए कार्य कर रहा है, जिसमें निगरानी में सुधार, मूल्‍यांकन और इसी प्रकार की उद्देश्‍यों वाली मौजूदा योजनाओं का लाभ उठाना शामिल है। इस योजना के लिए मंत्रालय लगातार कोशिश कर रहा था। 

मंत्रिमंडल ने रियल एस्‍टेट (नियामक और विकास) विधेयक 2015 मंजूर किया


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने राज्‍यसभा की चयन समिति द्वारा रिपोर्ट किये गये रियल स्‍टेट (नियामक और विकास) विधेयक-2015 को मंजूरी दे दी है। यह विधेयक अब संसद में विचार-विमर्श और पारित करने के लिए लाया जाएगा। 

रियल एस्‍टेट (नियामक और विकास) विधेयक- उपभोक्‍ताओं के हितों की रक्षा करने, रियल एस्‍टेट लेन-देन में निष्‍पक्षता लाने और समय पर परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन में मार्ग प्रशस्‍त करने वाला कदम है। 

इस विधेयक से वाद-विवाद के त्‍वरित निपटान और रियल एस्‍टेट क्षेत्र की तरीकेबद्ध वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए समान नियामक वातावरण उपलब्‍ध होगा। इससे रियल एस्‍टेट क्षेत्र में घरेलू और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और निजी प्रतिभागिता बढ़ाकर ‘सब के लिए आवास’ प्रदान करने के भारत सरकार के उद्देश्‍य को हासिल करने में मदद मिलेगी। 

यह विधेयक रियल एस्‍टेट नियामक प्राधिकरण के साथ रियल एस्‍टेट परियोजनाओं और रियल एस्‍टेट एजेंटों के पंजीकरण के जरिए उपभोक्‍ताओं के लिए प्रमोटर्स द्वारा आवश्‍यक खुलासा करना सुनिश्चित करता है। इस विधेयक का उद्देश्‍य रियल एस्‍टेट में संस्‍थागत पारदर्शिता और जिम्‍मेदारी द्वारा रियल एस्‍टेट क्षेत्र में उपभोक्‍ताओं का विश्‍वास बहाल करना तथा आवासीय लेन-देन, जिससे पूंजी और वित्‍तीय बाजार में इस क्षेत्र की पहुंच और बढ़े। इस विधेयक से परियोजना के प्रभावी कार्यान्‍वयन, पेशेवर तरीके और मानकीकरण के जरिए व्‍यवस्थित तरीके के इस क्षेत्र की वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। 

विधेयक की प्रमुख विशेषताएं निम्‍नलिखित हैं –

  1. व्‍यावसायिक और आवासीय रियल एस्‍टेट परियोजनाओं पर लागू। 
  2. रियल एस्‍टेट लेन-देन को नियमित करने के लिए राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों में ‘रियल एस्‍टेट नियामक प्राधिकरण’ की स्‍थापना। 
  3. रियल एस्‍टेट परियोजनाओं और रियल एस्‍टेट एजेंटों का प्राधिकरण के साथ पंजीकरण। 
  4. सभी पंजीकृत परियोजनाओं के बारे में खुलासा अनिवार्य, जिसमें प्रमोटर, परियोजना, ले आउट, योजना, भूमि की स्थिति, मंजूरियां, समझौते, रियल एस्‍टेट एजेंटों, ठेकेदारों, वास्‍तुकारों और इंजीनियरों आदि के बारे में विस्‍तृत जानकारी शामिल है।
  5. परियोजना को समय पर पूरा करने में इसकी निर्माण लागत के लिए एक अलग बैंक खाते में विशेष राशि जमा करना। 
  6. न्‍यायिक अधिकारियों और अपीलीय ट्राइब्‍यूनल के जरिए वाद-विवाद सुलझाने के लिए त्‍वरित विवाद निपटान प्रणाली की स्‍थापना। 
  7. न्‍यायालयों में विधेयक में परिभाषित मुद्दों को उठाने पर प्रतिबंध, हालांकि उपभोक्‍ता अदालतों में रियल एस्‍टेट के मामलों पर सुनवाई हो सकती है। 
  8. प्रमोटर, उपभोक्‍ता की सहमति के बिना योजना और डिजाइन में बदलाव नहीं कर सकते। 9. विधेयक में दिए गए विशेष मामलों के लिए नियम बनाने हेतु उचित सरकारी प्रावधान और नियामक प्राधिकरण आवश्‍यक नियम बना सकता है। 


सरकार ने दालों का उत्पादन बढ़ाने और सुरक्षित भंडार बनाने के निर्णय लागू किये


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति( सीसीईए) ने देश में दालों का सुरक्षित भंडार बनाने को अनुमति प्रदान की है। ये सुरक्षित भंडार वर्तमान वित्तीय वर्ष में ही बनाया जाएगा। इसके लिए 2015-16 की खरीफ फसल से पचास हजार टन और 2015-16 में आने वाली रबी की फसल से एक लाख टन दालों की सरकारी खरीद की जाएगी। दालों की ये खरीद बाजार मूल्यों पर भारतीय खाद्य निगम( एफसीआई) भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित (नेफेड) लघु कृषक कृषि व्यापार संघ( एसएफएसी) और निर्धारित की गई किसी अन्य एंजेसी के द्वारा किया जाएगा। लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी) खरीदारी कृषक उत्पादक संगठनों के द्वारा करेगा। खरीफ और रबी 2015-16 के लिए सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्( एमएसपी) से उपर बाजार मूल्य पर मूल्य स्थायीकरण निधि से की जाएगी। 

आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति( सीसीईए) ने आवश्यकता होने पर दालों का आयात वाणिज्य मंत्रालय के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम द्वारा करने का निर्णय भी लिया। एमएसपी से मूल्यों के कम होने पर सुरक्षित भंडार के लिए दाल कृषि,सहकारिता एवं कृषि कल्याण विभाग द्वारा एमएसपी पर मूल्य समर्थन योजना द्वारा खरीदी जाएगी। 

दालों का सुरक्षित भंडार बनाने का निर्णय दालों के मूल्यों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण रखने के साथ-साथ खाद्य मंहगाई को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों को दालों का उत्पादन बड़े पैमाने पर करने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आगामी कुछ वर्षों में देश को दालों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में सहायता मिलेगी। दालों का उत्पादन मुख्य रूप से वर्षा बहुत क्षेत्रों में होने के कारण इस पर निर्भर है। वर्षा की स्थिति के चलते दालों के मूल्य में बहुत अधिक उतार-चढाव देखने को मिलता है। इससे अधिक उत्पादन के समय किसानों को लाभकारी मूल्य देने में भी सहायता मिलेगी। कृषि मंत्रालय ने दालों का उत्पादन बढाने की वर्तमान नीति में कमी की पहचान की है और दालों का उत्पादन बढाने में बीजों की नई किस्मों की कमी एक महत्वपूर्ण रूकावट है। इसके अतिरिक्त एकीकृत पोषक प्रबंधन, एकीकृत कीट प्रबंधन एवं कृषि यंत्रीकरण पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। वर्ष 2016-17 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन( एनएफएसएम) का विस्तार किए जाने का प्रयास किए जाएगें ताकि दालों का उत्पादन बढ़ाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाएं जा सकें। 

पृष्ठभूमि 

भारत में दुनिया में दालों का सबसे बडा उत्पादन होने के बाद भी घरेलू मांग, घरेलू उत्पादन से अधिक होती है। जिसकी पूर्ति आयात द्वारा की जाती है। दालों की मांग को पूरी करने के लिए दीर्धकालिक उपाय देश में दालों का उत्पादन बढ़ाना है। सरकार दालों की खेती को बढाने के लिए 27 राज्यों के 622 जिलों में मुख्य रूप से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन( एनएफएसएफ) द्वारा इसका प्रसार करती है। एनएफएसएफ द्वारा विभिन्न कदम जैसे उन्नन प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन, नई किस्मों के लिए उन्नत बीजों का वितरण,एकीकृत कीट नियंत्रण, जल बचाव उपकरण और किसानों के लिए क्षमता निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। 

रबी वर्ष 2015-16 और ग्रीष्म सत्र 2016-17 में दालों का उत्पादन बढ़ाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं : 

1. रबी और ग्रीष्म दालों के लिए अतिरिक्त 440 करोड़ रूपए का आवंटन 

2. पूर्वी भारत के राज्यों आसाम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिसा, पूर्वी उत्तरप्रदेश और पं. बंगाल में दालों का उत्पादन बढ़ाने के लिए बीजीआरईआई( पूर्वी भारत में हरित क्रांति) योजना के तहत वर्ष 2015-16 में रबी सत्र से दाल की खेती के लिए चावल उत्पादन क्षेत्र को सम्मिलित करना 

3. रबी 2015-16 से दालों के बीजों की नई किस्मों और नई किस्मों को प्रोत्साहित के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) द्वारा दालों की नई किस्मों के प्रदर्शन के लिए विशेष कार्यक्रम 

4. रबी विपणन सत्र 2016-17 के लिए चने के न्यूनतम समर्थन मूल्य( एमएसपी) को 3175 रूपए से बढाकर 3425 रूपए और मसूर के लिए 3075 रूपए से बढ़ाकर 3325 रूपए किया गया। 

देश में सौ और बाढ़ पूर्वानुमान केंद्र होंगे स्थापित


जल संसाधननदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के अधीन केंद्रीय जल आयोग 
(सीडब्ल्यूसी) मौजूदा पंचवर्षीय योजना के दौरान अरुणाचल प्रदेश (3), हिमाचल प्रदेश 
(1)केरल (2)राजस्थान (12), सिक्किम (8) और तमिलनाडु (14) में पहली बार 
बाढ़ पूर्वानुमान केंद्र स्थापित करेगा। इसके अतिरिक्त 60 और बाढ़ पूर्वानुमान केंद्र 
उन राज्यों में स्थापित किए जाएंगे, जहां पहले से ही ऐसे केंद्र हैं। ताकि उनके दायरे 
से बाहर के क्षेत्रों को इसकी सीमा में लाया जा सके।
           
सीडब्ल्यूसी को अन्य कामों के साथ-साथ भारत में बाढ़ पूर्वानुमान गतिविधियों का 
कार्य भी सौंपा गया है। इस उद्देश्य के लिए प्रमुख नदियों और उनकी सहायक नदियों 
पर 878 स्टेशनों का एक नेटवर्क स्थापित किया गया है। इस समय, अपने नेटवर्क से 
प्राप्त हाइड्रोलॉजिकल डेटा और भारत के मौसम विभाग (आईएमडी) के बाढ़ मौसम विज्ञान 
संगठन (एफएमओ) से प्राप्त मात्रात्मक वर्षा पूर्वानुमान (क्यूपीएफ) का इस्तेमाल कर 
176 स्टेशनों के लिए (148 स्तर पूर्वानुमान और 28 अंतर्वाह यानी इनफ्लो पूर्वानुमान) 
बाढ़ का पूर्वानुमान जारी किया जाता है। सीडब्ल्यूसी के मौजूदा बाढ़ पूर्वानुमान नेटवर्क 
में 19 राज्य/संघ शासित क्षेत्र/राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र10 प्रमुख नदी घाटियों (बेसिन) 
और 72 उप-घाटियों (सब-बेसिन) को शामिल किया गया है।

अब तक 445 स्टेशनों का स्वत: डेटा संग्रह और ट्रांसमिशन सिस्टम के लिए 
आधुनिकीकरण किया गया है। झेलमअलकनंदाभागीरथीगंगाब्रह्मपुत्रयमुनाचंबलबैतरणीवमसाधारासुवर्णरेखा,
महानदीतापीगोदावरी और कृष्णा नदियों पर गणितीय मॉडल विकसित किया गया है। 
इन पूर्वानुमानों को ईमेलएसएमएस और वेबसाइट सुविधाओं का उपयोग कर फैलाया जाता है।

इस नेटवर्क के आधुनिकीकरण में स्वतः सेंसर आधारित डेटा संग्रह और सेटेलाइट आधारित 
डेटा ट्रांसमिशन प्रणाली की स्थापना करना शामिल है। ताकि समय रहते बाढ़ पूर्वानुमान और 
प्रभावी बाढ़ पूर्वानुमान के लिए एक आयामी गणितीय मॉडलिंग उपकरण का उपयोग कर 
72 घंटे के चेतावनी समय के साथ मध्यम दूरी के हाइड्रोलॉजिकल और हाइड्रोलिक मॉडल 
का विकसित किया जा सके।

जल संसाधननदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय ने 2014 के बाढ़ के मौसम के दौरान 
नई बाढ़ पूर्वानुमान वेबसाइट ई-सरफेस जल सूचना प्रणाली (ई-स्विसशुरू की थी, जिसने 
ईमेल/एसएमएस के जरिए समय पर पूर्वानुमान के प्रसार में मदद की है। नेटवर्क में शामिल 
पूर्वानुमान स्टेशनों पर पिछले 72 घंटों के दौरान नदी के जल के स्तर के रुझान भी 
वेब पोर्ट्ल (http://india-water.gov.in//ffs) पर आम जनता के लिए उपलब्ध हैं। 
इसके अलावा चेतावनी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए गूगल के आम चेतावनी प्रोटोकाल 
यानी कॉमन एलर्टिंग प्रोटोकाल (सीएपी) का उपयोग कर बाढ़ चेतावनी संदेश प्रचारित किए 
जा रहे हैं।

 सीडब्‍ल्‍यूसी के मौजूदा और प्रस्‍तावित बाढ़ पूर्वोनुमान केंद्रों के वितरण का राज्‍यवार ब्‍यौरा 
क्रम सं.
राज्‍य/केंद्रशासित प्रदेश का नाम
मौजूदा बाढ़ पूर्वानुमान केंद्र 
12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान प्रस्‍तावित बाढ़ पूर्वानुमान केंद्र
स्‍तर
अंतर्वाह इंफ्लो)
कुल
स्‍तर
अंतर्वाह (इंफ्लो)
कुल
1
आंध्र प्रदेश
5
3
8
4
5
9
2
अरूणाचल प्रदेश
0
0
0
2
1
3
3
असम
24
0
24
5
0
5
4
बिहार
32
0
32
2
0
2
5
छत्‍तीसगढ़
1
0
1
0
0
0
6
गुजरात
6
5
11
0
1
1
7
हरियाणा
0
1
1
1
0
1
8
हिमाचल प्रदेश
0
0
0
1
0
1
9
जम्‍मू एवं कश्‍मीर
1
0
1
5
0
5
10
झारखंड
1
4
5
1
14
15
11
कर्नाटक
1
3
4
0
4
4
12
केरल
0
0
0
0
2
2
13
मध्य प्रदेश
2
1
3
0
1
1
14
महाराष्‍ट्र
7
2
9
0
1
1
15
ओडिशा
11
1
12
0
2
2
16
राजस्‍थान
0
0
0
2
10
12
17
सिक्किम
0
0
0
3
5
8
18
तमिलनाडु
0
0
0
5
9
14
19
तेलंगाना
4
4
8
2
3
5
20
त्रिपुरा
2
0
2
0
0
0
21
उत्‍तर प्रदेश
34
1
35
4
1
5
22
उत्‍तराखंड
3
0
3
1
3
4
23
पश्चिमी बंगाल
11
3
14
0
0
0
24
राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली
2
0
2
0
0
0
25
दादर एवं नागर हवेली
1
0
1
0
0
0

कुल
148
28
176
38
62
100
घाटी (बेसिन) वार आधारित मौजूदा बाढ़ पूर्वानुमान केंद्र
क्रम सं.
नदी तंत्र का नाम
बाढ़ पूर्वानुमान केंद्रों की संख्‍या
स्‍तर
अंतर्वाह (इंफ्लो)
कुल
1
गंगा और उसकी सहायक नदियां
77
10
87
2
ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां
27
-
27
3
बराक-सिस्‍टम              
05
-
05
4
पूर्वोत्‍तर की नदियां
08
01
9
5
महानदी
03
01
04
6
गोदावरी
14
04
18
7
कृष्‍णा
03
06
09
8
पश्चिम की ओर बहने वाली नदियां
09
06
15
9
पेन्‍नार
01
-
01
10
सिंघु (झेलम)
01
-
01
कुल
148
28
176



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