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#CRPF जवानों की हत्या पर मानवाधिकार कार्यकर्ता खामोश क्यों ? : वेंकैया नायडू

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सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री वेंकैया नायडू का बयान – सुकमा में सीआरपीएफ जवानों की कायरतापूर्ण हत्या पर मानवाधिकार कार्यकर्ता खामोश क्यों ?

24 अप्रैल, 2017 को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में विकास कार्यों के लिए सड़कों को सुरक्षित बनाने के काम में लगे सीआरपीएफ जवानों की कायरतापूर्ण हत्या से राष्ट्र सदमे में है। अन्य कई घायल हुए हैं। भूमिगत उग्रवादी तत्वों द्वारा की जाने वाली इस तरह की कायरतापूर्ण कार्रवाई अत्यंत निंदनीय है।

सीआरपीएफ के जो जवान मारे गए और घायल हुए हैं वे देश की जनता की सेवा कर रहे थे और उन्होंने अपने जीवन को न्यौछावर कर दिया। राष्ट्र के लिए यह सर्वोच्च बलिदान है। वर्दी पहने हुए जो समर्पित जवान मारे गए और घालय हुए हैं उनके परिवारों के प्रति केंद्र और राज्य सरकार पूरी तरह से समर्पित हैं। केंद्र और राज्य सरकार पूरी दृढ़ता के साथ काम करती रहेंगी और इस तरह की हिंसात्मक कार्रवाइयों को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

पूरा राष्ट्र इस हत्या और हिंसा से सदमे में है, लेकिन कल से ही मानवाधिकार के तथाकथित हितैषी और आवाज उठाने वाले लोग चुप्पी साधे हुए हैं। अगर पुलिस द्वारा किसी आंतकवादी या उग्रवादी को मारा जाता तो ये कार्यकर्ता आवाज उठाते और हिंसात्मक प्रतिक्रिया करते। लेकिन, बड़ी संख्या में जवानों और निर्दोष लोगों को जब ऐसे लोग मारते हैं तब मानवाधिकार के कार्यकर्ता चुप्पी ओढ़ लेते हैं।

क्या मानवाधिकार केवल उन लोगों के लिए है जो अपनी अप्रासंगिक विचार धाराओं को आगे बढ़ाने के लिए हिंसा का सहारा लेते हैं? क्या मानवाधिकार सुरक्षाकर्मियों और साधारण लोगों के लिए नहीं है?

जब गैर कानूनी तत्व इस तरह की अमानवीय हरकत करते हैं, तो मानवाधिकार कार्यकर्ता क्यों खामोश हो जाते हैं?

मैं यह कहना चाहता हूं कि इस तरह की हिंसात्मक गतिविधियों को मानवाधिकार की वकालत करने वाले तथाकथित कार्यकर्ताओं का मौन समर्थन प्राप्त है। ऐसी कार्रवाई हताशा में की जाती है ताकि केंद्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों का सकारात्मक प्रभाव रोका जा सके और तेज आर्थिक विकास का लाभ गरीबों तक न पहुंच पाए।

इस बात की अत्यंत आवश्यकता है कि प्रतिबंधित तत्वों और तथाकथित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की हिंसात्मक गतिविधियों के विरूद्ध मजबूत जनभावना बनायी जाए। ऐसे तत्व दोहरे मानदंड वाले हैं और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का शिकार होने वाले सुरक्षाकर्मियों, उनके परिजनों और निर्दोष व्यक्तियों के लिए यह मानवाधिकार की बात नहीं करते। 

पलटवार : भारतीय हैकर्स ने पाकिस्तान की 500 से ज्यादा वेबसाइट हैक कीं

भारतीय हैकर्स ने पाकिस्तान की 500 से ज्यादा वेबसाइट हैक कीं

कथित भारतीय हैकर्स ने पाकिस्तान की 500 से ज्यादा वेबसाइट हैक कीं. भारतीय हैकर्स ने रैंजमवेयर के जरिए पाकिस्तान की वेबसाइट हैक कीं. हैकर्स ने पाकिस्तान की 'पाकिस्तान पीपल्स पार्टी' की वेबसाइट भी हैक करने का दावा किया है. इससे कुछ घंटे पहले ही पाकिस्तानी हैकर्स ने भारत की टॉप यूनिवर्सिटी के अकाउंट हैक किए थे.

भारत के कथित हैकर ग्रुप ने पाकिस्तान की 500 से ज्यादा वेबसाइट्स हैक करने का दावा किया है. इनमें वो वेबसाइट्स भी शामिल हैं जो HTTPS से सिक्योर हैं.

हैक की गईं वेबसाइट्स में से ज्यादातर वेबसाइट पाकिस्तान सरकार के अधीन आती हैं. दावा किया गया है कि टीम इंडियन ब्लैक हैट नाम के एक ग्रुप ने हैकिंग को अंजाम दिया. हालांकि हैक्ड वेबसाइट के होम पेज पर टीम केरला साइबर वॉरियर्स लिखा हुआ है.

'पाकिस्तान पीपल्स पार्टी' की वेबसाइट भी हैक:

हैकर्स ने पाकिस्तान की 'पाकिस्तान पीपल्स पार्टी' की वेबसाइट भी हैक करने का दावा किया है. इन वेबसाइट में वहां के सरकारी शिक्षण वेबसाइट्स भी शामिल हैं. इसके अलावा ट्रेड वेबसाइट्स और रुरल डेवेलपमेंट वेबसाइट्स भी शामिल हैं.

हमने हैकर ग्रुप से बात की तो उन्होंने बताया है कि ये सिर्फ एक ग्रुप ने नहीं किया है बल्कि कई ग्रु ने मिलकर किया है. इसमें Luzsecind, team black hats और United Indian hackers जैसे ग्रुप्स शामिल हैं. इनका कहना है कि आने वाले समय में वहां कि और भी वेबसाइट्स को हैक किया जाएगा.

ये कोई आम हैकिंग नहीं है. बल्कि इन्होंने रैंजमवेयर का इस्तेमाल किया है. रैंजमवेयर का मतलब वेबसाइट को हैकर के कब्जे से छुड़ाने के लिए पैसे देने होते हैं. इसके लिए वेबसाइट पर हैकर्स के फेसबुक पेज की डीटेल्स हैं जहां से वो पैसे के लेन देन की बात करेंगे.

हैक की गई वेबसाइट को देखकर लगता है कि केरल साइबर वॉरियर ने किया है. यहां एक बॉक्स है जिसमें Key डालने को कहा जा रहा है. आम तौर पर हैकर रैंजम मनी लेने के बाद एक Key देते हैं जिससे वेबसाइट को वापस लिया जा सकता है.

10 भारतीय यूनिवर्सिटी की वेबसाइट की थीं हैक:

मंगलवार को दिन के वक्त पाकिस्तानी हैकर्स ने भारत की 10 यूनिवर्सिटीज की वेबसाइट हैक की थीं. हैक की गई वेबसाइट्स में आईआईटी दिल्ली, आईआईटी भुवनेश्वर, दिल्ली यूनिवर्सिटी, नेशनल एयरोस्पेस लैबोरैट्रीज और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की वेबसाइट शामिल हैं. हैकर्स ने इन वेबसाइट्स को हैक करके उन पर पाकिस्तान जिंदाबाद लिखा था. इसके अलावा कश्मीर के बारे में भी लिखा गया था. हैक की गई वेबसाइट्स में ज्यादातर आर्मी और डिफेंस से जुड़ी शिक्षण संस्थान शामिल हैं. इन वेबसाइट्स की हैकिंग का दावा पाकिस्तान के PHC ग्रुप ने किया है.

मालेगांव विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा को 9 साल बाद मिली जमानत


बंबई उच्च न्यायालय ने 2008 मालेगांव बम विस्फोट की साजिश रचने में कथित तौर पर फँसाई गई साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को आज जमानत दे दी लेकिन सह आरोपी और पूर्व ले. कर्नल प्रसाद पुरोहित को कोई राहत देने से इनकार कर दिया।  

अदालत ने साध्वी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को अपना पासपोर्ट सौंपने और सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने का निर्देश दिया है। उसे यह भी निर्देश दिया गया है कि जब भी जरूरत हो वह एनआईए अदालत में रिपोर्ट करे।

न्यायमूर्ति रंजीत मोरे और न्यायमूर्ति शालिनी फनसाल्कर जोशी की खंड पीठ ने कहा, 'साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की अपील मंजूरी दी जाती है। याची (साध्वी) को पांच लाख रुपए की जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है। प्रसाद पुरोहित की ओर से दायर अपील को खारिज किया जाता है।'

न्यायमूर्ति मोरे ने कहा कि हमने अपने आदेश में कहा है कि पहली नजर में साध्वी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है।

गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक बाइक में बम लगाकर विस्फोट किया गया था जिसमें आठ लोगों की मौत हुई थी और तकरीबन 80 लोग जख्मी हो गए थे। साध्वी और पुरोहित को 2008 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वे जेल में हैं।     

राष्ट्रपति और मंत्रियों का हिंदी में भाषण देना अनिवार्य नहीं : वेंकैया नायडू


सूचना और प्रसारण मंत्री श्री वेंकैया नायडू का वक्तव्य – हिंदी थोपने के आरोप निराधार 

‘मुझे कुछ समाचार पत्रों में छपी कुछ रिपोर्टों को पढ़कर दुख हुआ है। इन खबरों में डीएमके नेता श्री एन. के. स्टालिन का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार हिंदी थोप रही है।

श्री स्टालिन का हवाला देते इन खबरों में कहा गया कि संसदीय समिति (राजभाषा) ने हिंदी जानने वाले संसद सदस्यों और केंद्रीय मंत्रियों के लिए भाषणों और लेखों में हिंदी के उपयोग को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव किया। खबरों में आगे आरोप लगाया गया है कि इस संबंध में अध्यादेश जारी किया गया है यानी सरकार हिंदी थोप रही है।

मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि पूर्व गृह मंत्री श्री पी. चिदम्बरम के नेतृत्व में राजभाषा पर संसदीय समिति ने निम्नलिखित सिफारिश की और सिफारिश को 2 जून, 2011 को माननीय राष्ट्रपति को भेजा गया : - 

‘यह समिति हिंदी बोलने और पढ़ने वाले उच्च राजनीतिक पदों पर आसीन व्यक्तियों से अपने भाषण/ वक्तव्य हिंदी में देने का अनुरोध करती है। इस श्रेणी में माननीय राष्ट्रपति और सभी मंत्री आते हैं।

वर्तमान सरकार ने 31 मार्च, 2017 को इस सिफारिश को अधिसूचित किया।

यह दिखाता है कि राजभाषा पर संसदीय समिति के सुझाव का स्वभाव सिफारिशी है और अनिवार्य नहीं है। इस संबंध में अध्यादेश जारी करने का आरोप पूरी तरह निराधार और शरारतपूर्ण है।

याद रहे कि 2011 में डीएमके पार्टी भारत सरकार की सदस्य थी। उसी समय यह सिफारिश की गई और माननीय राष्ट्रपति को संसदीय समिति द्वारा सिफारिश भेजी गयी।

भारत सरकार का किसी भी व्यक्ति पर कोई भाषा थोपने की मंशा नहीं है’

सरकार का स्पष्टीकरण : ताजमहल में धार्मिक चिन्ह ले जाने पर कोई रोक नहीं

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ताजमहल देखने आने वालों की पोशाक अथवा दुपट्टे, गमछे जैसे कपड़ों पर रंग अथवा कुछ धार्मिक नाम-प्रतीक लिखे होने पर उनके प्रवेश पर किसी प्रकार का प्रतिबन्ध नहीं 

समाचार पत्रों और दृश्य मीडिया के माध्यम से यह समाचार प्रकाशित और प्रसारित हो रहा है कि १९ अप्रैल २०१७ को ताज महल देखने आयी महिला पर्यटकों को राम नाम लिखे भगवा दुपट्टे उतरवा कर ही अन्दर जाने दिया गया था। 

प्रश्नगत विषय में सी.आई.एस.एफ के सुरक्षा कर्मियों तथा अधीक्षण पुरातत्त्वविद, भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण, आगरा से प्रतिवेदन प्राप्त किए गए हैं। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार उपर्युक्त कार्यवाही सी.आई.एस.एफ के किसी सुरक्षा कर्मी अथवा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के किसी कर्मी द्वारा नहीं की गयी है। इस विषय में समाचार में उद्धृत नियमावली में ऐसा करने का कोई प्रावधान नहीं है और न ही इस आशय का कोई परिपत्र भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण द्वारा परिचालित किया गया है, अथवा लागू है। कमांडेंट, सी.आई.एस.एफ ने यह भी अवगत कराया है कि सुरक्षा की दृष्टि से सिगरेट, लाइटर, च्युइंगम, चॉकलेट इत्यादि सरकारी लॉकर में जमा कराए गए थे लेकिन स्कार्फ/ दुपट्टा नहीं उतरवाया गया था। इससे सम्बंधित सी.सी. टी. वी. फूटेज उनकी अभिरक्षा में है। सी.सी. टी. वी. फूटेज में यह स्पष्ट है कि रामनाम लिखे भगवा दुपट्टे पहने महिला पर्यटक को ताज महल परिसर में प्रविष्टि मिली है। 

अधीक्षण पुरातत्त्वविद, भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण, आगरा ने पुष्टि की है कि टी. वी. चैनलों पर दिखाए जा रहे विचाराधीन घटना से सम्बंधित वीडियो में दिख रहे दुपट्टे उतरवाने वाले व्यक्ति ना तो भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के कर्मी हैं और ना सी.आई.एस.एफ के। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि ये व्यक्ति उक्त पर्यटकों के साथ के ही कोई व्यक्ति (गाइड अथवा उनका कोई सहयोगी) हो सकते हैं। इस बारे में अलग से जांच भी की जा रही है। स्थानीय पुलिस को भी इस सम्बन्ध में जांच करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। 

ताजमहल देखने आने वालों की पोशाक अथवा दुपट्टे, गमछे जैसे कपड़ों पर रंग अथवा कुछ धार्मिक नाम-प्रतीक लिखे होने पर उनके प्रवेश पर भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण द्वारा किसी प्रकार का प्रतिबन्ध नहीं लगाया गया है। 

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