कांग्रेसी दिग्विजय सिंह ने कश्मीर को बताया ‘भारत के कब्जे वाला कश्मीर’


जिहादी आतंकवादी ओसामा बिन लादेनको ‘आेसामाजी’ कहनेवाले (मौलाना) दिग्विजय सिंह से आैर क्या अपेक्षा कर सकते है ? 

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए, जम्मू- कश्मीर को ‘भारत अधिकृत कश्मीर’ कह डाला।

मीडिया के प्रश्न किए जाने पर कांग्रेस नेता तुरंत अपने बयान में सुधार करते हुए सफाई देने लगा और फिर उसने कहा कि, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, पंतप्रधान मोदी को भारत में रह रहें कश्मीरियों की बजाय पाक अधिकृत कश्मीर और बलूचिस्तान की ज्यादा चिंता है।

उसने कहा, ‘कश्मीर में हिंसा के परिस्थिति के बाद भी सरकार कश्मीरियों से बात करने को तैयार नहीं है। यह मामला विश्वास कायम करके ही सुलझाया जा सकता है। फिर चाहे ‘पाक अधिकृत कश्मीर हो या भारत अधिकृत कश्मीर’ हमें बातचीत के माध्यम से विश्वास कायम कर इस समस्या को सुलझाना होगा।’

मीडिया के प्रश्नों पर सफाई देते हुए उसने कहा, ‘मेरा मतलब भारत प्रशासित से था। हमें वहां ( जम्मू-कश्मीर) की जनता का दिल जीतना चाहिए। उन्हें विश्वास में लेना चाहिए। पाकिस्तान कश्मीर में घुसपैठ करता है, वो वहां आतंकी भेजता है। इसलिए उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इस क्षेत्र में मेरा पूरा समर्थन अफ्स्पां के साथ है।’

गडकरी मानहानि मामले में दिग्गी के खिलाफ वारंट

दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ आज जमानती वारंट जारी किया है। भाजपा नेता नितिन गडकरी द्वारा दिग्विजय सिंह के खिलाफ दायर मानहानि मामले में कोर्ट में पेश न होने पर अदालत ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया है। मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट गोमती मनोचा ने नितिन गडकरी को भी अगली सुनवाई की तारीख 10 नवंबर को कोर्ट में पेश होने को कहा है। कोर्ट का कहना है कि अगर गडकरी उस दिन अदालत में पेश नहीं हुए तो उनकी याचिका खारिज कर दी जाएगी। गडकरी ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ यह याचिका 2012 में दर्ज कराई थी।

गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने नितिन गडकरी पर आरोप लगाया था कि उनके व्यापारिक संबंध अजय संचेती से हैं। सिंह के वकील ने आवेदन कर दिग्विजय सिंह को कोर्ट में सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने से छूट देने का अनुरोध किया था जिसका गडकरी के वकीलों ने विरोध किया।

उधर, गडकरी ने कोर्ट में दर्ज कराए अपने बयान में संचेती के साथ किसी तरह का व्यापारिक संबंध होने से इन्कार किया है साथ ही संचेती का कहना है कि दिग्विजय सिंह के आरोप बेबुनियाद व राजनिती से प्रेरित हैं। उधर, दिग्विजय सिंह ने कोर्ट के आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया में ट्वीट करते हुए कहा है कि वह अब भी अपने बयान पर कायम हैं। उनका अब भी कहना है कि गडकरी व्यापारी राजनितिज्ञ हैं।

गोवा यूथ कांग्रेस की पूर्व अध्यक्षा ने दिग्विजय पर लगाया प्रताड़ित करने का आरोप

गोवा यूथ कांग्रेस की निलंबित अध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चर्चिल अलेमाओ की बेटी वलांका अलेमाओ ने कांग्रेस आलाकमान पर संगीन आरोप लगाए हैं. उन्होंने पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह समेत कई आला नेताओं पर प्रताड़ित करने और पद छोड़ने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है. वलांका को अनुशासनहीनता के आरोप में शनिवार को पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया था.

वलांका ने आरोप लगाया है कि प्रदेश कांग्रेस प्रमुख जॉन फर्नांडिस ने उनके साथ गाली-गलौज की. वलांका का दावा है कि जब वह नई दिल्ली में एके एंटनी से मिलने गई थीं तो गोवा कांग्रेस के अध्यक्ष जॉन फर्नांडिस और दक्षिण गोवा से लोकसभा प्रत्याशी रह चुके एलेक्सिओ रेगीनाल्डो ने उनके साथ गाली-गलौज की थी.उन्होंने इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से ‘न्याय’ की मांग की है. उनका आरोप है कि उनके साथ हुआ बर्ताव महिलाओं को अधिकार देने के कांग्रेस के ढोंग का पर्दाफाश करता है.

हालांकि, कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने वलांका के दावों को खारिज करते हुए कहा कि वह सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए ऐसा कर रही हैं. प्रवक्ता ने मांग की कि वलांका अपनी टिप्पणियों के लिए दिग्विजय सिंह से माफी मांगें. दिग्विजय सिंह गोवा कांग्रेस के प्रभारी हैं.

वलांका ने पत्रकारों से कहा, ‘दिग्विजय सिंह मेरे गुरु थे और उन्होंने मुझसे कहा था कि वह चाहते हैं कि मेरे जैसे लोग आगे आएं. अब वह खुद मुझसे कह रहे हैं कि अगर आप इस्तीफा देती हैं, तो यह आपके भविष्य के लिए बेहतर है या फिर आपको नतीजा भुगतने के लिए तैयार रहना पड़ेगा. मुझे पता नहीं चल पा रहा है कि मैं क्या कहूं.’

कौन हैं वलांका अलेमाओ
वलांका राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चर्चिल अलेमाओ की बेटी हैं और उन्हें पिछले साल अगस्त में गोवा इकाई का यूथ कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था. हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनावों में पिता-पुत्री के रोल पर सवाल उठने लगे थे. चर्चिल अलेमाओ ने पार्टी छोड़कर बागी उम्मीदवार के तौर पर साउथ गोवा से चुनाव लड़ा था. वलांका अलेमाओ पर साउथ गोवा से कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार न करने के आरोप भी लगे थे.

दिग्विजय ने भारत के मोस्‍ट वांटेड आतंकी को `हाफिज सईद साहब` कहा


कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह एक बार फिर अपने विवादास्‍पद बयान के चलते सुर्खियों में हैं। दिग्विजय सिंह ने सोमवार को लश्‍कर-ए-तोएबा के संस्‍थापक और भारत के मोस्‍ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद को `हाफिज सईद साहब` कहकर संबोधित किया। आरएसएस के प्रवक्‍ता राम माधव के बयानों पर जवाब देते हुए कांग्रेस महासचिव ने ऐसा कहा। 

आरएसएस के धुर विरोधी दिग्विजय सिंह ने आज कहा कि उन्‍हें इस बात को जानकार उस समय खुशी हुई जब केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने का इस बात का खुलासा किया कि आरएसएस और बीजेपी देश में हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। 

गौर हो कि हाफिज सईद मुंबई हमले का मुख्‍य साजिशकर्ता है और इस देश के लिए मोस्‍ट वांटेड आतंकियों की सूची में शीर्ष पर शामिल है।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि जो बात वह पिछले कुछ साल से कह रहे थे, वह बात अब सही साबित हुई। आतंकी गतिविधियों में आरएसएस की भूमिका को लेकर गृह मंत्री के सहमत होने के बाद मेरा कथन पूरी तरह सही साबित हुआ। दिग्विजय ने कहा, `मैं खुश हूं, हर किसी ने कहा था कि मैं पागल हूं लेकिन अब मैं सही साबित हुआ`। 

शिंदे के समर्थन में दिग्विजय का यह बयान उस समय सामने आया आरएसएस ने गृह मंत्री पर जवाबी हमला बोला। आरएसएस ने कहा कि गृह मंत्री वास्‍तविक आतंकियों के चहेते बन गए हैं। जमात-उत-दावा और लश्‍कर-ए-तोएबा जैसे आतंकी संगठन उन्‍हें इस प्रतिक्रिया पर बधाई दे रहे हैं। 

आरएसएस के प्रवक्‍ता राम माधव ने कहा कि आज जमात-उत-दावा आदि ने शिंदे को बधाई दी। अब वह वास्‍तविक आतंकियों के चहेते बन गए हैं। यह शिंदे ही हैं, जो देश के दुश्‍मनों को इस तरह का बयान देकर मदद कर रहे हैं। जैसा कि मुझे बताया गया, अब लश्‍कर-ए-तोएबा ने भी उनके (शिंदे) बयान का स्‍वागत किया है। 

गौर हो कि राजस्थान की राजधानी जयपुर में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर देश में हिन्दू आतंकवाद फैलाने के लिए आतंकी प्रशिक्षण शिविर चलाने का आरोप मढ़ा था। बीजेपी ने भी शिंदे के इस बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कांग्रेस से माफी मांगने को कहा था।

शिंदे ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में कहा कि जांच के दौरान खबरें आई कि भाजपा और संघ ने आतंकवाद फैलाने के लिए आतंकी प्रशिक्षण शिविर चलाए। समझौता एक्सप्रेस और मक्का मस्जिद में बम लगाए गए। मालेगांव में विस्फोट किया गया। हमें इस बारे में गंभीरता से सोचना होगा और सतर्क रहना होगा। 

आरएसएस और तालिबान के बीच कोई अंतर नहीं - दिग्गी


दिग्विजय ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उसकी  नजर में आरएसएस और तालिबान के बीच कोई खास अंतर नहीं है, क्योंकि दोनों कट्टरवादी संगठन हैं।

राघोगढ़ नगर पालिका चुनाव की सभा को संबोधित करने के बाद कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘वह ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि दोनों कट्टरवादी हैं और दोनों हमको वापस 18वीं सदी में धकेलना चाहते हैं।’ सिंह ने कहा, ‘केवल कट्टरपंथी ही महिलाओं के लिए ड्रेस कोड की बात करते हैं, ताकि इसकी आड़ में वे अपने दुर्व्यवहार को छिपा सकें।’

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब संघ महिलाओं के लिए जीन्स, कंप्यूटर और मोबाइल के इस्तेमाल पर प्रतिबंध की मांग करे।

उन्होंने कहा,‘अगर संघ को भारतीय संस्कृति से इतना ही प्यार है तो उसके स्वयंसेवक पश्चिमी सभ्यता की पैंट क्यों पहनते हैं।’ 

सिंह ने कहा, ‘बेहतर होगा कि संघ के स्वयंसेवक भारतीय संस्कृति की धोती को पहनना शुरू करें।’

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति यह सिखाती है कि उसी घर में खुशी रहती है जहां पर महिलाओं का सम्मान होता है और जहां उनकी इज्जत नही होती वहां खुशी नही होती। 

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि इसके विपरीत आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने यह कहा है कि विवाह एक समाजिक समझौता है, जिसके तहत आदमी को काम करना चाहिए और महिला को घर के अंदर रहना चाहिए। 

सिंह ने मध्यप्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के महिलाओं को ‘लक्ष्मण रेखा’ के भीतर रहने संबंधी बयान की निंदा की उन्होंने कहा कि अपने बयान से विजयवर्गीय ने केवल नारी जाति का ही नही बल्कि भगवान राम और सीता का भी अपमान किया है।

रमन सिंह ने पिछले दोनों चुनाव नक्सलियों के पैसों से जीते - दिग्गी


कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्होंने पिछले दो चुनाव नक्सलियों के पैसों की वजह से जीते थे। सिंह ने कल शाम यहां विमानतल पर कुछ संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि छत्तीसगढ़ में जहां नक्सलियों का प्रभाव है, वहां भाजपा ज्यादा वोटों से जीती है। यहां से वह अपने गृह नगर राघोगढ़ के लिए रवाना हो गए। 

बुंदेलखण्ड पैकेज के बारे में पूछने पर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके अमल में प्रदेश में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा की राज्य सरकार में आरएसएस की दादागिरी है। वह शीघ्र ही उन बिल्डरों के नाम का खुलासा करेंगे, जिनसे भाजपा चंदा वसूलती है। 

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि रतन टाटा जैसे वरिष्ठ उद्योगपतियों को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए। टाटा ने कहा था कि सरकार उद्योगपतियों को आगे नहीं बढ़ने देती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि शायद टाटा ने चीन के बारे में ऐसी बात कही होगी।

दिग्विजय सिंह पर सीबीआई का शिकंजा कसा


वक्त बेवक्त अपने उलजलूल बयानों को लेकर विवादों मे रहने वाले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह इस बार बड़ी मुश्किल में घिरते दिख रहे हैं। इंदौर के आइलैंड मॉल के निर्माण में अनियमितता के आरोप की जांच अब CBI करेगी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने इस मामले में पहले की क्लीन चिट को मानने से इनकार कर दिया।

विपक्ष पर भ्रष्टाचार के आरोपों की झड़ी लागाने वाले दिग्विजय सिंह को अब आइलैंड मॉल निर्माण मामले में CBI जांच से गुजरना होगा। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह समेत 6 लोगों को मिली क्लीन चिट को मानने से इनकार कर दिया है साथ ही कोर्ट ने सीबीआई को इंदौर के आइलैंड मॉल मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

याचिकाकर्ता का आरोप था कि दिग्विजय ने शॉपिंग मॉल संचालकों को करोड़ों रुपए का अवैध फायदा पहुंचाया। इस मामले में 12 फरवरी 2009 को मामला दर्ज किया गया था। हालांकि मध्य प्रदेश के आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच में दिग्विजय सिंह समेत सभी आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी।

आपको बता दें कि इंदौर का आइलैंड मॉल प्रदेश का पहला मॉल था जिसके निर्माण को लेकर सवाल उठे थे।

राहुल गांधी से बेहतर तो दिग्विजय है - गोविंदाचार्य

राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संस्थापक के एन गोविंदाचार्य का मानना है कि राहुल गांधी की तुलना में कांगे्रस में दिग्विजय सिंह बेहतर पीएम सिद्ध होंगे। 

पटना में गोविंदाचार्य ने कहा कि दिग्विजय केंद्र में मंत्री और मप्र के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं तथा उन्हें कांग्रेस के अन्य लोगों की तुलना में प्रशासन का अनुभव ज्यादा है। 

अब पीएम पद के लिए राहुल को प्रस्तुत किया जा रहा है, इस पर गोविंदाचार्य ने कहा, फिलहाल यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है और हमारे यहां पिता से वंश को माना जाता है.   

दिग्विजय को आई अक्ल : जल्द लेंगे राजनीती से संन्यास

अपने बिना सर पैर के बयानो को लेकर हमेशा में विवादों में रहने वाले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने फिर एक चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि मेरी उम्र के राजनेताओं को अब राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए।दिग्विजय सिंह ने यह बात गुना, मध्यप्रदेश में बुधवार को एक समारोह में कही।

65 साल के दिग्विजय सिंह ने कहा कि अब वक्त आ गया है जब मेरी उम्र के नेताओं को राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए ताकि युवा नेतृत्व सामने आए और अपनी जिम्मेदारी संभाल ली।

मौका दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन की दूसरी यात्रा के संपन्न होने का था। इस मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि नई पीढ़ी से सबको काफी उम्मीदें हैं। यह उम्मीद पूरी करने का मौका इस पीढ़ी को मिलना चाहिए। 

हालांकि दिग्विजय सिंह ने इसके साथ ही यह भी कहा कि अगर पार्टी चाहेगी तो वह 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने इतना और साफ कर दिया कि उनके विधानसभा चुनाव लड़ने का कोई सवाल नहीं उठता। अगर पार्टी से टिकट मिला तो उनके बेटे जयवर्धन जरूर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

शिवराज सिंह चौहान का परिवार अवैध खनन में संलिप्त - दिग्विजय सिंह

मध्य प्रदेश में खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई के कारण एक पुलिस अधिकारी की हत्या के बाद कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि राज्य में अवैध खनन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अन्य नेता भी संलिप्त हैं।

भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी नरेंद्र कुमार (32) की मौत पर शोक जताते हुए दिग्विजय ने उनके परिजनों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने कहा, "मैं युवा आईपीएस अधिकारी की हत्या पर उनके परिजनों तथा उनकी पत्नी के प्रति संवेदना जाहिर करता हूं, जो गर्भवती हैं। वे मेरे जिले में सर्किल ऑफिसर थीं, जहां से मैं सांसद रहा हूं। भाजपा विधायक की नाराजगी के कारण राजगढ़ जिले से उनका स्थानांतरण कर दिया गया।"

गौरतलब है कि राज्य के मुरैना जिले में गुरुवार को एक ट्रैक्टर-ट्रॉली ने नरेंद्र कुमार को कुचल दिया था, जब वह उसे रोकने की कोशिश कर रहे थे। समझा जाता है कि उसमें अवैध खनन के पत्थर भरे थे। वे बामोर जिले में सब-डिविजनल पुलिस अधिकारी के रूप में कार्यरत थे।

संवादाताओं से बाचतीत में दिग्विजय ने कहा, "मुरैना बालू तथा पत्थर खदानों के लिए जाना जाता है। इसकी नीलामी क्यों नहीं हुई.. इसकी जांच कराए जाने की जरूरत है। मैंने मुख्यमंत्री से मेरे और उनके कार्यकाल में पट्टे पर दी गई खनन की अनुमति की न्यायिक जांच कराने का अनुरोध किया है।"

उन्होंने कहा, "इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि मुख्यमंत्री का परिवार अवैध खनन में संलिप्त है। हमें इसके साक्ष्य भी मिले हैं कि भाजपा के विधायक, सांसद तथा प्रभावशाली लोग भाजपा नेतृत्व की मिलीभगत से इसमें संलिप्त हैं।"

दिग्विजय सिंह के अलावा भाजपा की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड ने भी शिवराज सरकार की निंदा की है।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी आईपीएस अफसर के परिवार के प्रति पूरी सहानुभूति है जिसने एक होनहार बेटा खोया है। अफसर की आईएएस पत्नी की पोस्टिंग में भी भाजपा के विधायक ने दिक्कतें पैदा की थीं। यह हादसा नहीं सोची-समझी साजिश है। मप्र में अवैध खनन का काम धड़ल्ले से चल रहा है। सरकार को पिछले दस सालों में किन-किन लोगों को ठेके दिए गई इसकी जांच करानी चाहिए।

दिग्विजय ने कहा कि हम इस मुद्दे पर लोकायुक्त से शिकायत नहीं करेंगे, क्योंकि उनकी नियुक्ति तक की गई जब वे खुद आरोपों से घिरे हुए थे। हम अपने स्तर पर जांच कराएंगे।नता दल (यूनाइटेड) के नेता शरद यादव ने भी नरेंद्र कुमार की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, "मैंने राज्य में अवैध खनन का मुद्दा पहले भी उठाया है। भाजपा और कांग्रेस के नेता राज्य में प्राकृतिक संसाधनों की लूट कर रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार को उनके खिलाफ तुरंत व कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।"

उन्होंने कहा कि अगर शिवराज सरकार जाग रही होती तो ऐसा नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि जिसका भी यह ठेका है उस पर हत्या का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

दिग्विजय सिंह ने फिर बटला हाउस मुठभेड़ को फर्जी बताया

बटला हाउस मुठभेड़ मुद्दे को दिग्विजय ने फिर से उछालते हुए कहा कि यह घटना 'फर्जी' थी.बटला हाउस मुठभेड़ पर राहुल गांधी को जहां विरोध का सामना करना पड़ा वहीं कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बुधवार को एक बार फिर से इस घटना को उठाते हुए इसे ‘फर्जी’ बताया.


उन्होंने कहा कि वह हमेशा से बटला हाउस मुठभेड़ को फर्जी मानते रहे हैं और सरकार और गृह मंत्रालय से इस मामले की जांच कराने की कोशिश की लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल पायी. सिंह ने आजमगढ में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री और गृह मंत्रालय की राय थी कि मुठभेड़ वास्तविक थी.

इसलिए मैंने इस पर बाद में दबाव नहीं बनाया.’’दिल्ली बम विस्फोट सहित आतंकी घटनाओं में कई युवा आजमगढ़ के रहे हैं. उलेमा कौंसिल के कार्यकर्ताओं ने सिबली कॉलेज में गेट के सामने धरना दिया जहां कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ठहरे हुए थे.

दिग्विजय में लादेन की अत्मा का वास - नकवी

बीजेपी नेता मुख़्तार अब्बास नक़वी ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए कहा है कि दिग्विजय सिंह और कांग्रेस दोनो को ही आरएसएस फ़ोबिया हो गया है।

इतना ही नहीं, मुख़्तार अब्बास नक़वी ने दिग्गी राजा को झाड़-फूंक कराने की सलाह देते हुए कहा है कि उनके शरीर में ओसामा बिन लादेन की अत्मा का वास हो चुका है।

यही वजह है कि उन्हें राष्ट्रवाद का मतलब तक समझ में नहीं आ रहा।

अपने गिरेबां में झांकें दिग्विजय सिंह

चर्चा सत्र बल्देव भाई शर्मा अपने गिरेबां में झांकें दिग्विजय सिंह! दस जनपथ के कारिंदे और सोनिया कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह का प्रलाप 5 राज्यों, विशेषकर उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव नजदीक आने पर और ज्यादा बढ़ गया है। उन्होंने दस जनपथ के इशारे पर मुस्लिम तुष्टीकरण की कांग्रेसी मुहिम को परवान चढ़ाने के लिए संघ किंवा हिन्दुत्वविरोधी "वही राग बेढंगा" अब ज्यादा तेज कर दिया है।

कांग्रेस का यह चरित्र रहा है कि जब-जब उसके कुशासन व भ्रष्ट सत्ता के विरुद्ध जनता ने हुंकार भरी और उसे अपना सिंहासन डोलता नजर आया, तब-तब वह संघ पर ज्यादा हमलावर हो जाती है और उसे अपनी अनैतिक व अलोकतांत्रिक सत्ता के विरुद्ध खड़ा हर व्यक्ति "संघ का एजेंट" नजर आने लगता है।

पूर्व में वह इस "खिताब" से बाबू जयप्रकाश नारायण, चंद्रशेखर व विश्वनाथ प्रताप सिंह तक को नवाज चुकी है और अब जब बाबा रामदेव व अण्णा हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार व कालेधन को लेकर कांग्रेसनीत मनमोहन सरकार के खिलाफ पूरे देश में जबर्दस्त जनांदोलन चल रहा है तो इस जनाक्रोश को बेअसर करने के लिए वह इन दोनों को "संघ का एजेंट" बता रही है।

इस मुहिम की कमान सोनिया गांधी ने अपने चहेते दिग्विजय सिंह को सौंप रखी है जो ढूंढ-ढूंढकर ऐसे नुक्ते तलाश रहे हैं जिससे बाबा रामदेव व अण्णा हजारे की संघ से निकटता दिखाकर उन्हें "कटघरे" में खड़ा कर सकें ताकि उनका आंदोलन विवादास्पद बनाया जा सके। लेकिन हो इसके विपरीत रहा है।

देश में भष्टाचार व कालेधन के विरुद्ध चल रहे आंदोलन को और ज्यादा गति व ऊर्जा मिल रही है तथा भ्रष्ट संप्रग सरकार के कुशासन को लेकर देशभर में कांग्रेस की थू-थू हो रही है। कांग्रेस अपनी सत्ता के विरुद्ध पनप रहे इस व्यापक जनाक्रोश का सामना करने से तो कतरा ही रही है, उसके इशारे पर जनता का ध्यान भ्रष्टाचार व कालेधन के विरुद्ध चल रही मुहिम से हटाने के लिए दिग्विजय सिंह नए-नए शिगूफे छोड़ रहे हैं।

नया शिगूफा दिग्विजय सिंह ने अब प्रख्यात समाजसेवी नानाजी देशमुख के साथ अण्णा हजारे का फोटो दिखाकर एक नया शिगूफा उछाला है कि अण्णा हजारे व नानाजी देशमुख की निकटता दर्शाती है कि अण्णा के संघ से संबंध रहे हैं। वह भूल जाते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज सेवा, देशभक्ति व चरित्र निर्माण का एक सांस्कृतिक अधिष्ठान है जहां राष्ट्रवादी संस्कार भावनाओं का सम्मिलन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।

राष्ट्र के नवनिर्माण में जुटे अनेक लोग, जिनका संघ से प्रत्यक्ष कभी कोई संबंध नहीं रहा, समय-समय पर संघ के निकट आकर उसके कार्य को देखते व सराहते रहे हैं, इनमें नेताजी सुभाषचंद्र बोस व महात्मा गांधी तक शामिल हैं। दिग्विजय सिंह व सोनिया कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को शायद यह भी याद नहीं कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान संघ के स्वयंसेवकों द्वारा जान की बाजी लगाकर युद्ध के मोर्चे पर सेना का सहयोग किए जाने से उनके पूर्वज दिग्गज कांग्रेसी नेता व भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने 26 जनवरी, 1963 को राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड में संघ स्वयंसेवकों के पूर्ण गणवेश में सम्मिलित होने की इच्छा व्यक्त की और स्वयंसेवक उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए उस गौरवपूर्ण इतिहास का हिस्सा बन गए।

यह वही नेहरू थे जिन्होंने गांधी हत्या के झूठे आरोप में संघ को कुचल देने का संकल्प जताया था। संघ के स्वयंसेवकों की त्याग-तपस्या और देशभक्ति से अभिभूत होकर संघ के प्रति उनकी धारणा बदली और उन्होंने संघ को इतना सम्मान दिया, तो क्या दिग्विजय सिंह नेहरू को "संघ का एजेंट" कहने की हिम्मत करेंगे? सरदार बल्लभ भाई पटेल और लालबहादुर शास्त्री जैसे मूर्धन्य कांग्रेसी नेताओं ने भी संघ के प्रति जो उदात्त भाव प्रकट किए, शायद दिग्विजय सिंह उसके बारे में नहीं जानते, अथवा उन्हें भी "संघ का एजेंट" बताने से नहीं चूकते। राष्ट्र के मोर्चे पर सन्नद्ध रा.स्व.संघ बिहार के अकाल में स्वयंसेवकों की सेवाभावना व ईमानदारी देखकर कभी घोर संघ विरोधी रहे बाबू जयप्रकाश नारायण इतने अभिभूत हो गए कि कालांतर में उनके संपूर्ण क्रांति आंदोलन की जिम्मेदारी संघ संस्कार से प्रेरित युवाओं-छात्रों और समाजशक्ति ने ही संभाली।

राष्ट्र की सुरक्षा का प्रश्न हो या देश के किसी भी कोने में आई भीषण प्राकृतिक आपदा, संघ की देशभक्ति और सेवा भावना से अनुप्राणित स्वयंसेवक सबसे पहले वहां पहुंचकर जुट जाते हैं। अनेक बार प्रशासन और मीडिया ने न केवल इसकी तस्दीक की है, बल्कि उसे सराहा भी है। देश में वंचितों, पिछड़े वर्गों व जनजातियों के उत्कर्ष के लिए संघ की प्रेरणा से डेढ़ लाख से ज्यादा सेवा कार्य संचालित हैं जिनमें लाखों कार्यकर्ता अहर्निश जुटे हैं। हिन्दुत्व किंवा राष्ट्रवाद के जागरण व समाज सेवा में निरंतर सन्नद्ध संघ के अनेक प्रमुख कार्यकर्ताओं द्वारा संचालित लोकजागरण व सेवा के प्रकल्पों में संघ की विचारधारा से मतैक्य न रखने वाले भी कई लोग सहर्ष उपस्थित होते हैं, इसके क्या वे "संघ के एजेंट" हो गए? यह बेहद संकीर्ण और कलुषित सोच है।

पूर्व राष्ट्रपति डा. अब्दुल कलाम, प्रमुख कांग्रेसी नेता बलराम जाखड़, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह सदृश अनेक लोग नानाजी देशमुख के ग्राम विकास प्रकल्प के अद्भुत प्रयोगों से हजारों गांवों की खुशहाली व आत्मनिर्भरता से प्रभावित होकर समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रमों में मंच पर नानाजी के साथ बैठे तो क्या वे "संघ के एजेंट" हो गए? देश में सात्विक व राष्ट्रभक्त शक्ति के उदय से घबराई क्षुद्र स्वार्थों में संलग्न कांग्रेसी सत्ता की यह बौखलाहट है, जिसकी दुष्प्रेरणा से सोनिया गांधी के एक और सिपहसालार व उनकी अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद, जो समानांतर सत्ता-केन्द्र है, के प्रमुख स्तंभ हर्षमंदर को भारतमाता का चित्र भी इसलिए त्याज्य लगता है क्योंकि उसकी छवि संघ द्वारा स्थापित भारत माता की छवि जैसी है।

भारत माता तो प्रत्येक देशवासी की आराध्य होनी चाहिए, लेकिन उसे भी संघ से जोड़कर देखना उनकी मातृभूमि के प्रति भक्ति पर ही सवाल खड़े करता है। संघ से जुड़ा होने के कारण क्या कोई राष्ट्रीय प्रतीक या अभियान त्याज्य हो जाएगा? ऐसे दुष्प्रचार के द्वारा हर्षमंदर और दिग्विजय जैसे लोग देश की जनता को भ्रमित करके कांग्रेस के घृणित सत्ता-स्वार्थों को साधने के हस्तक मात्र बनकर रह गए हैं।

राष्ट्रभक्ति, समाजसेवा और सामाजिक समरसता का अलख जगाते हुए राष्ट्र निर्माण में जुटा संघ तो भारतवासियों के लिए गौरव का विषय है, उससे दूरी तो सिर्फ वही लोग बनाएंगे जो इस देश के राष्ट्रीय व सामाजिक सरोकारों से कटे रहकर सिर्फ सत्ता स्वार्थों के लिए जी रहे हैं। इन्हें देशभक्त नहीं, आतंकवादी प्रिय दिग्विजय सिंह खुद अपने गिरेबां में झांककर देखें कि वह जब जिहादी आतंकवादियों के परिजनों की चौखट पर संजरपुर में जाकर माथा रगड़ते हैं और शोक संवेदना जताते हैं, उन्हें न्याय दिलाने की दिलासा देते हैं, तब क्या वह "जिहादी आतंकवादियों के एजेंट" होने जैसा व्यवहार नहीं करते? उलटे वह इन राष्ट्रद्रोहियों से लोहा लेते हुए शहीद होने वाले मोहनचंद शर्मा जैसे देशभक्त जांबाजों पर उंगली उठाते हैं।

पूरे विश्व को जिहादी आतंकवाद की आग में झोंकने वाले अलकायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन के मारे जाने पर उसे "ओसामा जी" कहकर महिमामंडित करने वाले दिग्विजय सिंह यह क्यों भूल जाते हैं कि नानाजी देशमुख के साथ तो एक अवसर पर उनका भी फोटो है और संघ को पानी पी-पी कर कोसने वाले दिग्विजय सिंह म.प्र. के मुख्यमंत्री रहते हुए 21 अक्तूबर 1997 को हरिद्वार में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन में उपस्थित होकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह उपाख्य रज्जू भैया व विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक सिंहल के साथ मंच साझा कर चुके हैं तो क्या वह स्वयं भी "संघ के एजेंट" हो गए? यह केवल मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति का कांग्रेसी एजेंडा है जिसे उ.प्र. में सत्ता के लिए छटपटाती कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव आते-आते और तेज कर दिया है।

इसीलिए मुस्लिमों को खुश करने के लिए दस जनपथ की शह पर चिदम्बरम के "हिन्दू आतंकवाद" से आगे जाकर दिग्विजय सिंह "संघी आतंकवाद" का जुमला गढ़ते हैं और सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के हर्षमंदर जैसे सिपहसालार "साम्प्रदायिक व लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक" जैसा देश विभाजनकारी षड्यंत्र रचते हैं।

इसी की आगे की कड़ी है मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गयी अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में मुस्लिम आरक्षण की सेंध। सत्ता के लिए ऐसे कुत्सित प्रयत्न बेहद शर्मनाक हैं, देश की जनता इसका संज्ञान ले रही है और इसकी सजा भी देगी।

स्रोत: Panchjanya

सीएजी पर सवाल उठाने पर दिग्गी को जोशी का करारा तमाचा

सीएजी और सरकार के बीच चल रही जंग के बीच बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने बतौर पीएसी अध्यक्ष सीएजी पर दबाव डालने के आरोपों को गलत करार दिया है।

उन्होंने
वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी की भी तारीफ की है कि वे सीएजी के साथ खड़े हैं। जोशी का ये बयान कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के उन आरोपों के जवाब में आया है कि सीएजी और पीएसी के बीच सांठ-गांठ है

दरअसल
टेलीकॉम घोटाले में सीएजी की रिपोर्ट पर राजनीति जारी है। इसकी गूंज बुधवार को सीएजी के 150 वें स्थापना समारोह में भी सुनाई दी। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की मौजूदगी में पीएसी चेयरमैन मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि टेलिकॉम घोटाले की रिपोर्ट सरकार के खिलाफ आई है इसलिए सरकार के कुछ मंत्री सीएजी पर सवाल उठा रहे हैं।

बाद
में अपने घर पर सीएजी पर दबाव डालने के कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज किया।इसी के साथ जोशी ने वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी की तारीफ की है कि जब कांग्रेस के कई नेता हमला कर रहे हैं तो वे सीएजी के साथ खड़े हैं।

उन्होंने
इस सिलसिले में प्रणब मुखर्जी को एक चिट्ठी भी लिखी है। उधर, सीएजी विनोद राय ने भी साफ कहा है कि संस्था किसी दबाव में काम नहीं करती।दरअसल सीएजी अधिकारी आर बी सिन्हा के 13 जुलाई 2010 के एक पत्र का हवाला देते हुए कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने पीएसी चेयरमैन मुरली मनोहर जोशी पर सीएजी पर दबाव डालने का आरोप लगाया था।

कांग्रेस
ने सवाल किया था कि क्या जोशी की शह पर टेलीकॉम घोटाले में नुकसान के आंकड़ों को बढा-चढ़ा कर पेश किया गया। हालांकि सीएजी के ताजा रुख पर कांग्रेस अब अपने बयानों में नरमी बरत रही है।

दिग्गी का नया शिफुगा -सीएजी प्रमुख और जोशी में सांठगांठ

कांग्रेस के अनियंत्रियतित बैड दिग्गी ने सीएजी के प्रमुख विनोद राय और पीएसी के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया है। सिंह ने कहा कि जोशी ने सीएजी की रिपोर्ट संसद में रखने से पहले विनोद राय से मुलाकात की थी। दिग्गी ने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट आने से पहले ही जोशी बोलने लग गए थे।

सिंह ने टि्वट किया है कि जोशी और राय की मुलाकात का सीएजी ने खण्डन किया था लेकिन अब दस्तावेजों से यह साफ हो गया है। नए तथ्य सामने आने के बाद नए सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या राजस्व नुकसान का आंकड़ा बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया? क्या आंकड़े जल्दबादी में दिए गए? क्या यह पीएसी के अध्यक्ष के कहने पर किया गया? सिंह ने कैग की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

दिग्विजय सबसे बड़े हिंदू आतंकवादी हैं - इंद्रेश कुमार

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह पर करारा हमला बोला है और उन्हें सबसे बड़ा हिंदू आतंकवादी करार दिया है। आरएसएस पर लगातार निशाना साधने वाले दिग्विजय सिंह पर यह संघ का अब तक का सबसे बड़ा जवाबी हमला है।

इंद्रेश जी ने कहा कि दिग्विजय हमेशा हिंदू और भगवा आतंकवाद की बात करते हैं। अगर हिंदू आतंकवादी हैं तो दिग्विजय सबसे बड़े हिंदू आतंकवादी हैं, क्योंकि वे भी तो हिंदू हैं।

आतंकी घटनाओं से उनके संबंध के सवाल पर इंद्रेश ने कहा, ऎसे तो कह सकते हैं कि सोनिया इटली की एजेंट, दिग्विजय आईएसआई एजेंट और चिदंबरम देशद्रोही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्होंने देश को डुबो दिया।

इंद्रेश ने कांग्रेस को खुले मंच पर बहस की चुनौती देते हुए कहा कि कांग्रेस तीन साल से एनआईए का दुरूपयोग कर उन पर, असीमानंद और प्रज्ञा पर निशाना साधती आ रही है, लेकिन सबूत पेश नहीं कर रही।

दिग्विजय सिंह की बयानबाजी से त्रस्त मप्र कांग्रेस सचिव ने इस्तीफा दिया

दिग्विजय सिंह की बयानबाजी से नाराज मप्र कांग्रेस के सचिव हरीश अरोरा ने पद से इस्तीफा दे दिया है.कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव तथा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की बयानबाजी से नाराज कांग्रेस की प्रदेश इकाई के सचिव हरीश अरोरा ने पद से इस्तीफा दे दिया है.

हरीश का आरोप है कि दिग्विजय लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं जो जन भावनाओं के खिलाफ है और इससे पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है.पहले वह आतंकवादी ओसामा बिन लादेन के लिए सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं, फिर मुम्बई में शहीद हुए पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे की शहादत पर सवाल खड़े करते हैं. इतना ही नहीं उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे पर भी गैर जिम्मेदाराना टिप्पणी की है.

हरीश ने आरोप लगाया, “दिग्विजय ने प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए पूरे राज्य को बर्बाद किया है. इसका खमियाजा कांग्रेस आज तक भुगत रही है.इसके अलावा भी कई अन्य कारण है जिनके चलते पद से मैं इस्तीफा दे रहा हूं, जिनका बाद में खुलासा करुंगा.”

हरीश ने कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी की प्रदेश इकाई को फैक्स के जरिए भेज दिया है और कार्यालय पहुंचकर वह अपना इस्तीफा सौंप देंगे.कांग्रेस के मीडिया प्रभारी प्रमोद गुगालिया ने बताया कि पार्टी को उनका इस्तीफा नहीं मिला है.

ज्ञात हो कि लम्बी जद्दोजहद के बाद कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी का गठन हुआ था.कई वरिष्ठ नेताओं को कार्यकारिणी में स्थान न मिलने से असंतोष की आवाज उठ रही थी. हरीश का इस्तीफा पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी का ही नतीजा माना जा रहा है.

सुब्रह्मण्यम ब्लैक मेलरों का उस्ताद - दिग्गी

दिग्विजय सिंह ने जनता पार्टी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी पर निशाना साधते हुए उन्हें ब्लैक मेलरों का उस्ताद कहा है। दिग्विजय ने कहा कि स्वामी सिर्फ लच्छेदार बाते करना जानते हैं। उन्होंने चिदंबरम पर सुब्रह्मण्यम स्वामी और बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा के आरोपों की निंदा करते हुए कहा कि चिदंबरम एक योग्य और ईमानदार शक्स हैं।

उन
पर किसी तरह के आरोप का सवाल ही नहीं उठता। इससे पहले कल सुब्रह्मण्यम स्वामी ने 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले का जिक्र करते हुए कहा था कि इस घोटाले में सोनिया गांधी समेत यूपीए के कई बड़े नेता शामिल हैं।

उन्होंने ए राजा को सिर्फ एक मोहरा बताते हुए कहा कि राजा से बड़े दोषी चिदंबरम हैं। स्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पूरे मामले पर अपनी आंखें बंद कर रखी हैं।

जबरन आम रास्ता रोकने के आरोप में दिग्विजय सिंह पर मामला दर्ज

मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में खराब सड़कों को लेकर किये गये हालिया धरना.प्रदर्शन के दौरान जबरन आम रास्ता रोकने के आरोप में पुलिस ने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह समेत पार्टी के आठ नेताओं पर मामला दर्ज किया है.

इस कार्रवाई से भड़की कांग्रेस का आरोप है कि पार्टी नेताओं के खिलाफ ‘प्रदेश सरकार के इशारे पर’ मामला दर्ज किया गया, जो खराब सड़कों को लेकर प्रमुख विपक्षी दल के राज्यस्तरीय प्रदर्शन से ‘घबराई हुई’ है.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि खुडै़ल थाना क्षेत्र में उन्नीस सितंबर को हुए धरना.प्रदर्शन के दौरान एक रहवासी की शिकायत पर जिन आठ लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया गया, उनमें दिग्विजय के अलावा इंदौर जिले के दो कांग्रेस विधायक.तुलसी सिलावट और सत्यनारायण पटेल शामिल हैं.

सूत्रों ने शिकायत के आधार पर कहा कि कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन के दौरान इंदौर-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग और इंदौर-कम्पेल मार्ग पर ‘चक्काजाम’ की स्थिति बन गयी है.सूत्रों के मुताबिक यह मामला भादंवि की धारा 341 और धारा 143 के तहत दर्ज किया गया है.

मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट से राहुल गाँधी के आरोप झूठे साबित हुए

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश के भट्टा पारसौल में महिलाओं से बलात्कार की घटनाओं से इनकार किया है। मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में किसी महिला से बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि रिपोर्ट में पुलिस पर ज्यादती का आरोप लगाया गया है। गौरतलब है कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि भट्टा पारसौल में कई महिलाओं से रेप हुआ है।

मानवाधिकार आयोग ने 800 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है। सोमवार को सौंपी गई रिपोर्ट में दिग्विजय सिंह के उस दावे को भी खारिज किया गया है कि भट्टा पारसौल में पुलिस कार्रवाई के दौरान कई किसानों की जान गई है। वहीं एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि लखीमपुर खीरी में जिस नाबालिग लड़की से बलात्कार की बात कही जा रही थी वह सही नहीं है। मानवाधिकार अगले सप्ताह तक अंतिम रिपोर्ट तैयार कर लेगा। इसके बाद रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी जाएगी।

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