लंदन के कृष्ण मंदिर में गैस रिसाव से धमाका, सभी श्रद्धालु सुरक्षित

ब्रिटेन के लीसेस्टर में हरे कृष्ण मंदिर में शुक्रवार को कथित तौर पर हुए रसोई गैस के सिलेंडरों में धमाके से अफरातफरी मच गई। धमाके के कारण मंदिर के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए। धमाके में कोई हताहत नहीं हुआ है।


मंदिर में मौजूद सभी लोग सुरक्षित है। हालांकि कुछ लोगों के हाथ और मुंह पर मामूली चोटें आई है। लीसेस्टर लंदन से करीब 160 किलोमीटर उत्तर में स्थित है और यहां बडी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते है।
अग्निशमन सेवा के प्रवक्ता ने बताया कि आग इतनी ज्यादा थी कि अंदर जा पाना काफी मुश्किल हो रहा था। बचाव के लिए विशेषज्ञ दलों के साथ ही विशेष उपकरण, खोजी कुत्ते, थर्मल इमेजिंग कैमरा आदि का मौके पर मौजूद अधिकारियों की ओर से इस्तेमाल किया गया।

एक प्रत्यक्षदर्शी फातिमा खत्री ने कहा, हम सभी काम कर रहे थे और अचानक हमने एक जोरदार धमाका सुना। एक क्षण के लिए लगा कि यह बम हो सकता है इसलिए हम सब बाहर की ओर दौडे।

Muslim Youth Embraces Hinduism

A Muslim youth of Turkey adopted Hindu religion as per Hindu rituals here today.

Unsal Ozenen (25), a national of Turkey adopted Hindu religion in the presence of Hindu leaders including the Vishwa Hindu Parishad, the Bajrang Dal and the Arya Samaj. He changed his name to Shankar Natrajan Arya.

In his affidavit he said that, “I am Muslim by faith and I am changing my religion with my consent without any pressure, undue influence or threat. I adopt this religion after inspiring from holy books of Hindus as well as reading from the Internet regarding qualities and basics of Hindu religion.” He had read ‘Dancing with Shiva’ written by Subramanyam Swami, ‘Bhagwat Gita’ and ‘Chandi Path’ written by Satyanand Saraswati besides ‘Loving Ganesha’, ‘Devi Gita’.

Mr Unsal said his family members did not object.

Answering queries he said the fundamentalists had distorted the face of Islamd which affected this (Islam) religion. He said terrorism had no place in Islam.

जागो हिन्दू वीर शत्रु ने ललकारा है...

जागो हिन्दु आज समय ने फिर ललकारा है
सन्कट मे है पडा आज यह विश्व हमारा है ॥धृ॥
हम तो शान्ती मार्ग पर चलते जग मे सब को बन्धु समझते
दुर्बल को पर कभी न देता जगत सहारा है ॥१॥
धन जन बल मे कभी न कम थे जग मे सब से बढ कर हम थे
युग युग से सन्तप्त मनुज ने यही निहारा है ॥२॥
जब जब शत्रु ईधर चढ आया तब तब हम ने मार भगाया
आदि काल से जग मे परिचित शौर्य हमारा है ॥३॥
हिन्दु युवको कमर बान्ध लो शत्रु विनाशक शस्त्र साध लो
वीर प्रस्विनी हिन्दु जाति ने आज पुकारा है ॥४॥
नस नस मे है रक्त राम का गीता का उपदेश श्याम का
राम कृष्ण का देश प्राण से बढ कर प्यारा है ॥५॥
ईस पर आँच न आने पाये चाहे प्राण भले ही जाये
तन मन दे कर इसे बचाना धर्म हमारा है ॥६॥
सन्घ मन्त्र गून्जे घर घर मे ग्राम ग्राम मे नगर नगर मे
इसी मार्ग से सुख पा सकता जगत हमारा है ॥७॥

हिंदुराष्ट्र हे अखंड अमुचे (मराठी गीत)

हिन्दुराष्ट्र हे अखंड अमुचे अखंड जीवन धार
भिन्न प्रांत आचार भिन्न जरि एकचि परि संस्कार ॥ध्रु॥

हिंदुभूमी ही पुण्य पुरातन कणकण येथिल मंगल पावन
हिंदुहृदयीचे चिर संवेदन होय स्वयंसाकार ॥१॥

इथेच वेदांचे अमृतरव मर्यादापुरुषोत्तम राघव
श्रीकृष्णाचे गीतावैभव गांडिव करि टंकार ॥२॥

मानबिंदुचे करण्या रक्षण अंतरिच्या त्या स्फुल्लिंगातुन
संघशक्तिचे घडवू दर्शन छेदुन घन अंधार ॥३॥

याच व्रतास्तव जीवन अमुचे दिव्य कार्य अविरत करण्याचे
मूर्त रूप हे नवराष्ट्राचे घडविल साक्षात्कार ॥४॥

झंडा हिन्दु राष्ट्र का झंडा भारत वर्ष का

भारत हिन्दुस्थान है
हिन्दुओंकी शान है
भगवानका वरदान है
झंडा हिन्दु राष्ट्र का झंडा भारत वर्ष का ॥

हिन्दु ऐसे वीर है
कई करोडो तीर है
लढने मे रणवीर है
झंडा हिन्दुराष्ट्र का झंडा भारत वर्ष का ॥

सप्तसिंधू मे स्नान करेंगे
रक्तबिन्दु का दान करेंगे
फिर भी कभी नही झुकने देंगे
झंडा हिन्दुराष्ट्र का झंडा भारत वर्ष का ॥

दुश्मन की पुकार है
कमर मे जब तलवार है
रणमे लोहा लाल है
झंडा हिन्दुराष्ट्र का झंडा भारत वर्ष का ॥

अयोध्या में रामलला की पूजा में धन का अभाव

विवादित रामजन्म भूमि में प्रतिष्ठापित रामलला की पूजा अर्चना पर भी महंगाई की मार का असर देखा जा रहा है। प्रधान पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास ने विवादित परिसर के पदेन प्रभारी और फैजाबाद के मंडलायुक्त से इसके लिए पैसा बढ़ाने की गुहार लगायी है।

रामजन्म भूमि के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास ने अपने पत्न में कहा है कि पूजा-अर्चना के लिए स्वीकृत पैसा कम है। इस पैसे से पूजा आरती करने में कठिनाई हो रही है इसलिए इसे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने पुजारियों के वेतन को भी बढ़ाने की मांग की है।

श्री दास ने कहा है कि पूजा आदि के लिए 43 हजार 600 रपये प्रति माह स्वीकृत है। इतने कम पैसे में विधिवत पूजा अर्चना चलाना कठिन हो रहा है क्योंकि देसी घी और फूल आदि काफी महंगे हो गये हैं।

छह दिसम्बर 1992 को ध्वस्त हुए विवादित ढांचे के बाद बने अस्थायी मंदिर (मेकशिफ्ट स्ट्रक्चर) में रामलला की नियमित पूजा अर्चना और भोग आरती चल रही है। इसके लिये 43 हजार 600 रपये महीने स्वीकृत है। इसी पैसे में एक प्रधान पुजारी और चार सहायक पुजारियों को वेतन भी दिया जाता है।

प्रधान पुजारी को पांच हजार रपये मासिक मिलता है जबकि अन्य पुजारियों और कर्मचारियों को दो से तीन हजार रपये तक दिये जाते हैं। एक अनुमान के तहत 23 हजार रपये प्रतिमाह इन लोगों के वेतन पर ही खर्च हो जाते है।

रामलला की प्रतिदिन पांच बार आरती होती है। भोग में पेड़ा जैसी महंगी मिठाइयां चढ़ती हैं। प्रत्येक आरती देसी घी से ही की जाती है। श्री दास का कहना है कि घी काफी महंगी हो गयी है। इसलिए पूजा अर्चना के लिए पैसा और बढ़ाना चाहिए।

दिलचस्प बात यह है कि मेकशिफ्ट स्ट्रक्चर के पास रखे दानपात्नों में करीब डेढ़ लाख रपये प्रतिमाह एकत्न होता है। यह पैसा सरकारी खजाने में जमा होता है। यह पहला मौका नहीं है जब प्रधान पुजारी ने वेतन और पूजा अर्चना के पैसे बढ़ाने की मांग की है। श्री दास ने बताया कि समय समय पर उनके वेतन में वृद्धि की गयी है।

उन्होंने स्वीकार किया कि दो साल पहले उन लोगों का वेतन बढ़ाया गया था। उनका कहना है कि दानपात्नों से मिलने वाले पैसे से ही रामलला की पूजा-अर्चना और उन लोगों के वेतन आदि का खर्च निकल सकता है।

विडियो / Video - The Third Jihad

शाम पांच बजे 'रोजा' के समय तक ही निपटा लें जन्माष्टमी बंगलादेशी हिन्दू - सहारा खातून

बांग्लादेश की गृह मंत्री सहारा खातून द्वारा अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय के प्रसिद्ध त्योहार 'श्रीकृष्ण जन्माष्टमी' पर की गई टिप्पणी को लेकर उन्हें देश की मीडिया की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। खातून ने कहा था कि हिन्दू समुदाय के लोग बुधवार को जन्माष्टमी 'शांतिपूर्वक' मनाएं और शाम पांच बजे 'रोजा' के समय तक अपना काम निपटा लें।

एक स्थानीय समाचार पत्र ने अपने संपादकीय में कहा है कि मंत्री 'खुलकर भेदभावपूर्ण' रवैया अपना रही हैं। संपादकीय में कहा गया है, "यदि इस मुद्दे को गलत मानसिकता के साथ उठाया गया तो धर्मनिरपेक्ष ताकतें पलटवार कर सकती हैं।"

जन्माष्टमी को दखते हुए हिन्दू समुदाय के लोग प्राचीन द्वारकाधीश मंदिर के अलावा राजधानी के विभिन्न भागों में पूजा-अर्चना करने की योजना बना रहे थे। "हिन्दू समुदाय पर इस तरह का 'प्रतिबंध' पहली बार लगाया गया है। जबकि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि जन्माष्टमी और रमजान जैसे पवित्र त्योहार एक ही महीने में पड़ रहे हों।"

"गृह मंत्री के आग्रह या आदेश का मतलब कुछ भी हो सकता है। हो सकता है यह आदेश बहुसंख्यक वर्ग का बर्चस्व कायम करने के लिए दिया गया हो। संभावित हिंसा को लेकर खुफिया विभाग से कोई जानकारी नहीं मिली है। उनका आग्रह 'खुलकर भेदभावपूर्ण' करने वाला है।" यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश (एएनबी) के मुताबिक नेशनल पूजा उद्जापन समिति के नेताओं की बैठक में सोमवार को जन्माष्टमी के दौरान सुरक्षा प्रबंध को लेकर चर्चा हो रही थी। बैठक में खातून ने हिन्दू समुदाय से 'रोजा इफ्तार' के दौरान लाउड्स्पीकर का प्रयोग नहीं करने का आग्रह किया था।

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की सगी बेटी पर करोड़ों की जमीन हड़पने का इल्जाम

भारत की अब तक की सबसे विवादास्पद नेता राष्ट्रपति बनने के पहले रही प्रतिभा पाटिल के परिवार की कारगुजारियां लगातार सामने आ रही है। अब तक उनके पति, बेटे और देवर के खिलाफ दर्ज मामले सामने आए थे मगर अब तो उनकी सगी बेटी पर करोड़ों की जमीन हड़पने का इल्जाम लगा है। राष्ट्रपति पद पर बैठ कर प्रतिभा पाटिल अपना बचाव नहीं कर सकती मगर बिटिया ने सारे अभियुक्तों की तरह अपने आपको निर्दोष ठहराया है।

आश्चर्य की बात यह है कि जमीन हड़पने का आरोप जिन देवी जी पर लगा है उनका नाम ज्योति राठौर है और वे प्रतिभा पाटिल के अलावा भूतपूर्व विधायक देवी सिंह शेखावत की भी बेटी है जो संयोग से श्रीमति पाटिल के पति है।

वे भी अब तक अपनी बेटी के बचाव में कुछ नहीं बोले जबकि एक लोकल मोहल्ला छाप नेता होने के कारण उन पर बचाव करने या बयान देने के मामले में कोई पाबंदी नहीं है। खुद उन पर बैंक और चीनी मिलों में घपले, घोटाले करने के आरोप हैं। उनके भाई पर एक किसान को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला चल रहा है और यह तो आपको पता ही है कि महामहिम प्रतिभा देवी सिंह पाटिल इस देश में न्याय की आखिरी सीढ़ी है।

फूलों की खेती के लिए मशहूर पुणे के जांबे गांव में 37 एकड़ जमीन कौड़ियों के मोल हड़प ली गई। लेकिन इस जमीन घोटाले का आरोप जिन पर लग रहा है उनके नाम सुनकर आप चौंक जाएंगे। पहली हैं राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की बेटी ज्योति राठौर और दूसरे महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास मंत्री जयंत पाटिल।

महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल का परिवार एक बार फिर आरोपों के घेरे में है। राष्ट्रपति की बेटी ज्योति राठौर और महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास मंत्री जयंत पाटिल पर पुणे के जांबे गांव की जमीन हड़पने का आरोप है। किसानों का आरोप है कि ट्र्स्ट के नाम पर 37 एकड़ जमीन कौड़ियों के मोल हथिया ली गई। जबकि इस जमीन पर फूलों की खेती कर किसान अपना परिवार चलाते हैं। मुंबई-पुणे हाइवे पर बसे इस गांव की पहचान ही फूलों की खेती से है।

जांबे के किसानों ने बड़े भरोसे के साथ एनसीपी नेता को अपना ग्राम प्रधान चुना था। मगर उसी प्रधान ने उनके साथ दगा किया। आरोप है कि ग्राम प्रधान की मिली भगत से 17 एकड़ जमीन राष्ट्रपति की पुत्री ज्योति राठौर के ट्रस्ट के नाम और 10-10 एकड़ के दो प्लॉट महाराष्ट्र सरकार में ग्रामीण विकास के मंत्री जयंत पाटिल के एजुकेशन ट्रस्ट के नाम कर दिए गए।

ये खुलासा तब हुआ जब एक सूचना के अधिकार के तहत एक सामाजिक कार्यकर्ता ने जानकारी निकाली। डेटलाइन इंडिया के हाथ लगे दस्तावेजों पर गौर करें तो जमीन के आवंटन में जमकर हेराफेरी की गई। इस हेराफेरी में नेताओं ने अपनी हैसियत का इस्तेमाल करते हुए तमाम नियम कानून ताक पर रख दिए।

जमीन की मौजूदा कीमत 10 लाख रुपये प्रति एकड़ है। वहीं इन लोगों को ये जमीन 1 लाख प्रति एकड़ के दाम पर दी गई। इतना ही नहीं जमीन की लीज 99 साल तक के लिए इनके नाम कर दी गई। कोई इस जमीन की बिक्री पर सवाल न उठाए सो बिना किसानों को बताए आनन-फानन में ये जमीन इन लोगों के नाम कर दी गई। जमीन जयंत पाटिल और ज्योति राठौर के ट्रस्ट के नाम पर आवंटित है। जबकि नियम के उलट दोनों के ट्रस्ट उनके घर के पते पर रजिस्टर हैं।

पहले भी राष्ट्रपति के परिवार और करीबियों पर घोटाले और हेराफेरी के आरोप लगे हैं। इस बार तो सीधे उनकी बेटी ही सवालों के घेरे में है। जाहिर है किसानों के गुस्से ने तूल पकड़ा तो राजनीति गर्माएगी और आंच राष्ट्रपति भवन तक जाएगी।

सभी दलों की सहमति से जाति आधारित जनगणना को मिल जाएगी मंजूरी

जाति आधारित जनगणना की अनेक राजनीतिक दलों की मांग के बीच सरकार ने कहा कि जनगणना में जाति की जानकारी को शामिल करने का फैसला किया गया है और इस संबंध में कैबिनेट की अगली बैठक में औपचारिकता पूर्ण होने की संभावना है.

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आज लोकसभा में कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने जाति आधारित जनगणना का समर्थन किया है और इस मुद्दे पर अब किसी तरह की शंका की जरूरत नहीं है.

लोकसभा में भाजपा, जद(यू), सपा और बसपा के नेताओं ने यह मुद्दा उठाते हुए जानना चाहा कि जनगणना में जाति आधारित जानकारी शामिल करने के सरकार के वादे का क्या हुआ. संसद के मानसून सत्र का अंतिम दिन होने का हवाला देते हुए सपा के मुलायम सिंह यादव, जदयू के शरद यादव, भाजपा के गोपीनाथ मुंडे और बसपा के दारासिंह चौहान ने यह बात उठाई.

इस पर सदन के नेता प्रणव मुखर्जी ने कहा कि इस मुद्दे का अध्ययन करने वाले मंत्रीसमूह ने फैसला किया है कि घर-घर जाकर की जा रही जनगणना में जाति आधारित गणना को शामिल किया जाए.

मुखर्जी ने कहा कि यह जाति संबंधी जानकारी एकत्रित करने तक ही सीमित होगा और बायोमेट्रिक प्रणाली साथ-साथ चलेगी.

मुखर्जी ने कहा, ‘सरकार ने करीब करीब इसे शामिल करने का (जनगणना में जाति आधारित जानकारी को) फैसला कर लिया है.’ उन्होंने कहा कि मंत्रीसमूह अधिकारप्राप्त समूह नहीं है इसलिए कैबिनेट द्वारा इस फैसले को मंजूरी जरूरी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि कैबिनेट की अगली बैठक में इसे मंजूरी मिलने की संभावना है.

मुखर्जी ने कहा, ‘अब यह केवल औपचारिकता का मुद्दा है.’ उन्होंने कहा कि जाति आधारित जनगणना के लिए उन्होंने राजनीतिक दलों से लिखित में सुझाव मांगे थे और सभी ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी.

इससे पहले जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार ने राजनीतिक दलों के सुझाव मांगे थे जिन्होंने लिखित में जवाब दिया.

उन्होंने कहा कि लेकिन मुखर्जी के आश्वासन के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई.

सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव, भाजपा के गोपीनाथ मुंडे और बसपा के दारा सिंह चौहान ने शरद यादव की बात का समर्थन किया.

मुलायम सिंह ने कहा कि कोई भी दल ऐसा नहीं है जिसने जाति आधारित जनगणना का समर्थन नहीं किया हो.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रणव मुखर्जी ने इसे जल्द से जल्द लागू करने का वादा किया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ.

मुलायम ने कहा, ‘इसकी क्या वजह है. क्या होना चाहिए. हमें कहां जाना चाहिए. हम चाहते हैं कि सदन की कार्यवाही चले लेकिन सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं होती.’

साध्वी प्रज्ञा मामले में सुप्रीम कोर्ट का महाराष्ट्र सरकार को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने आज महाराष्ट्र सरकार को नोटिस भेजकर साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की जमानत के मामले में जवाब मांगा है।

गौरतलब है कि मालेगांव ब्लास्ट की मुख्य आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह इस समय नासिक जेल में बंद हैं। साध्वी प्रज्ञा सिंह ने जमानत की अर्जी दी थी जिसे नामंजूर कर दिया गया था।

अब सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस भेजकर सरकार से चार हफ्तों में जवाब मांगा है कि साध्वी प्रज्ञा सिंह को जमानत क्यों नहीं दी जाए।

गौरतलब है कि शुक्रवार को ही एक विशेष मकोका अदालत ने नासिक जेल प्रशासन को नोटिस भेजकर कहा था कि साध्वी को नासिक आयुर्वेदिक अस्पताल से मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती कराया जाए।

साध्वी प्रज्ञा सिंह का नासिक आयुर्वेदिक अस्पताल में पिछले साल जुलाई से ट्यूमर का इलाज चल रहा है। इस मामले में अन्य आरोपियों को मुंबई की तलोजा जेल में बंद किया गया है। गौरतलब है कि बम्बई हाईकोर्ट ने साध्वी और अन्य आरोपियों पर सो मकोका हटाने से इंकार कर दिया था। हालांकि साध्वी ने नासिक जेल में रहने की इजाजत ले ली थी।

एक मुस्लिम संगठन ने की रामजन्म भूमि विवाद को अदालत के बाहर निपटाने की अपील

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में विवादास्पद राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की ओर से फैसला सुनाये जाने के पहले ही एक जाने माने मुस्लिम संगठन ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मामले को अदालत से बाहर निपटाने की संभावनाएं तलाशने की अपील की है।

अखिल भारतीय बाबरी मस्जिद कार्य समिति (एआईबीएमएसी) के अध्यक्ष जावेद हबीब ने कहा कि केंद्र सरकार के किसी नुमाइंदे की ओर से कोशिश होनी चाहिए कि वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी और अन्य राष्ट्रीय नेता साथ आएं और अदालत का फैसला आने से पहले बाहर ही मामले का हल का निकालने के तरीके खोजें।

प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में हबीब ने कहा कि 1994 में उच्चतम न्यायालय के जो आकलन थे, उसके मद्देनजर इस मामले का हल अदालत के बाहर निकालने की कोशिशें होनी चाहिए। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि बेहतर होगा कि इस मामले का हल बातचीत के जरिए निकाला जाए।

इससे पहले कुछ हिंदू संगठन भी इस मामले का हल अदालत से अलग करने को कह चुके हैं।

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