ताज़ा समाचार (Fresh News)

बदली #MSME की परिभाषा, अब सिर्फ इन्हें ही कहा जाएगा लघु उद्योग


सरकार ने एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव किए हैं। इन बदलावों के बाद अब एमएसएमई को उनके निवेश के आधार पर नहीं बल्कि सालाना टर्नओवर के हिसाब से वर्गों में बाटा जाएगा। इससे कई कारोबारी एमएसएमई की सीमा से बाहर हो गए हैं। सरकार के इस कदम का असर एसी, केबल ऑपरेटर्स और ज्वेलर्स पर पड़ रहा है।

एमएसएमई  डेवलपमेंट एक्ट 2006 में बदलाव की वजह से छोटे, मझोले कारोबारियों को वर्गीकृत करने के मानदंड बदल गए हैं। पहले मशीनरी या इक्विपमेंट में किए निवेश के आधार पर कारोबार को एमएसएमई के वर्गों में बाटा जाता था। अब एमएसएमई की नई परिभाषा के मुताबिक 5 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर वाले कारोबार को माइक्रो एंटरप्राइज माना जाएगा। वहीं जिस कारोबार का सालाना टर्नओवर 5 करोड़ से 75 करोड़ रुपये होगा उसे छोटा एंटरप्राइज माना जाएगा। मध्यम उद्योग वो होंगे जिसका सालाना टर्नओवर 75 करोड़ से 250 करोड़ रुपये के बीच होगा।

इन बदलावों के बाद कई कारोबारी माइक्रो और छोटे कारोबार की सीमा से बाहर निकलकर मध्यम वर्ग के कारोबार में आ गए हैं। सरकार के इस कदम का असर एसी, केबल ऑपरेटर्स और ज्वेलर्स पर पड़ रहा है।

फेडरेशन ऑफ माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। हालांकि फेडरेशन का मानना है कि मीडियम एंटरप्राइजेज के लिए रेवेन्यू सीमा 250 करोड़ रुपये तक बढ़ाने से बड़े कारोबारी भी इस वर्ग में शामिल हो जाएंगे। इससे छोटे कारोबारियों को दिक्कत हो सकती है। सरकार का मानना है कि इस कदम से बिजनेस करने में आसानी होगी और एमएसएमई के कारोबार में पारदर्शिता आएगी।

सेना की शहादत को मजहबी रंग देने वाले ओवैसी को सेना का मुंहतोड़ जवाब


हुतात्माआें पर सियासत करनेवालों को सेना ने करारा जवाब दिया है । सेना ने साफ किया कि किसी भी हुतात्मा का कोई धर्म नहीं होता है । गौरतलब है कि सुंजवान आर्मी कैंप पर आतंकी हमले में हुतात्मा जवानों पर एआयएमआयएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने विवादित बयान दिया था । सेना के उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अनबू ने ओवैसी का नाम लिए बगैर कहा, ‘हम शहादत को सांप्रदायिक रंग नहीं देते !’ उन्होंने दो टूक कहा कि जो लोग सेना की कार्यशैली नहीं जानते, वे ही इस तरह का बयान देते हैं !

ओवैसी ने एक दिन पहले मंगलवार को कहा था कि सुंजवान में सात में से पांच लोग कश्मीरी मुसलमान थे, जो मारे गए हैं । ओवैसी ने कहा कि जो मुसलमानों को आज भी पाकिस्तानी समझते हैं, उन्हें इससे सबक लेना चाहिए । इस दौरान ओवैसी ने जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ पीडीपी-बीजेपी गठबंधन पर भी निशाना साधा था । ओवैसी ने कहा था कि दोनों मिलकर ड्रामा कर रहे हैं और बैठकर मलाई खा रहे हैं !

उधर, सुंजवान कैंप सहित हालिया आतंकी हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए लेफ्टिनेंट जनरल देवराज ने कहा, ‘दुश्मन हतोत्साहित हैं । जब वह सीमा पर फेल होते हैं तो कैंप्स पर हमला करते हैं !’ इस दौरान देवराज ने दो टूक कहा कि जो भी देश के विरोध में खडा होगा, वह आतंकी है और हम उससे सख्ती से निपटेंगे !

देवराज ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बादामी बाग कैंट के साथ उधमपुर में भी धर्म स्थल है । मेरे घर पर भी एक धर्म स्थल है, जिसमें सभी पंथ के प्रतीक हैं । जो लोग सेना की कार्यशैली को नहीं जानते हैं, वह इस तरह के बयान दे रहे हैं । लेफ्टिनेंट जनरल देवराज ने शोपियां फायरिंग केस पर कहा कि वह नॉर्दर्न कमांड को हेड कर रहे हैं । इस दौरान उन्होंने मेजर आदित्य केस पर कहा कि इससे जवानों का मनोबल गिरा नहीं है !

आतंक में शामिल हो रहे युवाओं पर चिंता जाहिर करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल देवराज ने कहा, ‘निश्चित रूप से यह यह चिंता का विषय है । हमें इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है !’ देवराज ने आतंकी घटनाओं और आतंक से जुड रहे युवाओं के लिए सोशल मीडिया को भी जिम्मेदार ठहराया । उन्होंने कहा, ‘बढ़ रही आतंकी घटनाओं के लिए सोशल मीडिया भी जिम्मेदार है । यहां बडे पैमाने पर युवाओं को आकर्षित किया जा रहा है ।

लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा कि आतंकी संघटन हिज्बुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद में कोई अंतर नहीं है । वे एक-दूसरे संघटन में आते-जाते रहते हैं । देवराज ने कहा कि कोई भी जो देश के खिलाफ हथियार उठाएगा, वह आतंकी है और सेना उससे बखूबी निपटेगी !

मुस्लिम लड़की ने अपनाया हिंदू धर्म, कारण जानकार हो जायेंगे दंग


एक मुस्लिम लड़की ने हिंदू धर्म अपना लिया। शपथपत्र देकर खुद का धर्म परिवर्तन कर हिंदू धर्म अपनाने की जानकारी लड़की ने दी। लेकिन इसके पीछे उसने जो वजह बताई है उसे जाने बिना आप नहीं रह पाएंगे।

हल्द्वानी के बनभूलपुरा निवासी एक मुस्लिम लड़की ने शुक्रवार को सिटी मजिस्ट्रेट को शपथपत्र देकर हिंदू धर्म अपनाने की जानकारी दी और परिजनों से सुरक्षा की गुहार लगाई। लड़की का कहना है कि मुस्लिम धर्म में महिलाओं के प्रति संकुचित सोच और वहां स्वतंत्रता से जीने का अधिकार न होने के कारण उसने हिंदू धर्म अपनाया है। लिहाजा भविष्य में उसे शहनवाज के बजाय सुनीता के नाम से जाना जाए। इधर, सिटी मजिस्ट्रेट ने मामले की जांच पुलिस को सौंप दी है।

जानकारी के मुताबिक बनभूलपुरा निवासी मकबूल अहमद की पुत्री शहनवाज (22) शुक्रवार को कुछ लोगों के साथ सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंची। शहनवाज ने सिटी मजिस्ट्रेट को शपथपत्र देकर खुद के हिंदू धर्म अपनाने की जानकारी दी। सिटी मजिस्ट्रेट को दिए शपथ पत्र में शहनवाज ने कहा है कि मुस्लिम धर्म में महिलाओं के प्रति संकुचित सोच के चलते उसने अन्य धर्मों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उसे पता चला कि हिंदू धर्म में महिलाओं को स्वतंत्र होकर जीने का अधिकार है और वहां किसी तरह की कोई धार्मिक पाबंदी भी नहीं है।

शपथपत्र में शहनवाज ने कहा कि मुस्लिम परिवार में तमाम पाबंदियों के चलते उसने अपना नाम सुनीता रख लिया है। उसका कहना है कि इस संबंध में वह पहले ही जिलाधिकारी को शपथ पत्र भेज चुकी है। धर्म परिवर्तन किए जाने पर परिजनों द्वारा उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई है। शहनवाज ने सिटी मजिस्ट्रेट से सुरक्षा की गुहार लगाते हुए अभिलेखों में भी नाम व धर्म परिवर्तन कराने की मांग की है। 

इधर सिटी मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय ने बताया कि लड़की द्वारा धर्म परिवर्तन के संबंध में शपथ पत्र दिया गया है। उन्होंने इसे लड़की का व्यक्तिगत मामला बताते हुए कहा कि महिला द्वारा किन परिस्थितियों में धर्म परिवर्तन किया गया है अथवा कहीं किसी व्यक्ति अथवा संस्था द्वारा लड़की को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर तो नहीं किया गया है इस संबंध में जांच के लिए मामला पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है।


तोगड़िया की लंबी उम्र के लिए अब कांग्रेसी करेंगे महाआरती


विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. प्रवीण तोगड़िया की लंबी उम्र के लिए कांग्रेसी गुरुवार शाम 8 बजे भेरू चौक पर महाआरती करेंगे। पढ़कर अजीब लगा होगा। मगर यह सूचना प्रदेश कांग्रेस सदस्य बसंत मालपानी ने स्वयं की फेसबुक वॉल से पोस्ट की है। 

मालपानी ने भास्कर से चर्चा में बताया तोगड़िया स्वयं हिंदूवादी संगठन के पदाधिकारी हैं। वे ही अगर खुद की जान को खतरा बता रहे हैं तो देश के शीर्ष पटल की राजनीति के संदर्भ समझे जा सकते हैं। गौरतलब है इसी साल नवंबर में प्रदेश में विधानसभा चुनाव है। प्रदेश कांग्रेस समिति का यह बयान किस रणनीति के तहत आया है। फिलहाल तो भाजपा इसे ही सुलझाने में जुट गई है। 

मालपानी ने बताया लंबे समय से हिंदू हितों की पैरवी करने वाले डाॅ. तोगड़िया केंद्र और गुजरात में भाजपा सरकार होने के बाद भी स्वयं की जान असुरक्षित बता रहे हैं। ऐसा कैसे हो सकता है... कांग्रेस के शासनकाल में भी वो हिंदूवादी नेता के रूप में विद्रोही बयान देते आए हैं, लेकिन कभी उनकी जान को खतरा नहीं हुआ। ये हास्यास्पद है। ऐसा लगता है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनाने की कसमें खाने वाली भाजपा हिंदूवादी नेताओं से किनारा कर रही है। अन्यथा देश के शीर्षस्थ हिंदूवादी नेता डॉ. तोगड़िया मीडिया के सामने इतनी असहाय स्थिति में प्रस्तुत नहीं होते। लगता है भाजपा की केंद्र सरकार ने श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर अपने एजेंडे में बदलाव किया है। इसलिए तोगड़िया को लग रहा है कि उनकी जान को खतरा है। कांग्रेस उनकी लंबी उम्र की कामना करेगी। 

#NPPA ने 30 जरूरी दवाओं के दाम घटाए, देखिये पूरी सूची


मरीजों को राहत देते हुए नेशनल फॉर्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) ने बुधवार 17 जनवरी 2018 को 30 जरूरी दवाओं की कीमतें घटा दी हैं। वहीं, 3 जरूरी दवाओं की कीमतें फिर से रिवाइज की गई हैं। इनमें डायबिटीज, कैंसर और हाई बीपी में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। बता दें कि एनपीपीए समय-समय पर दवाओं का मैक्सिमम प्राइज तय करती है, जिससे मरीजों को महंगी दवाओं से छुटकारा मिल सके। 

एनपीपीए ने एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा, "ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) अमेंडमेंट ऑर्डर-2013 के तहत 30 दवाओं की कीमतें घटाई गई हैं। एनपीपीए ने नेशनल लिस्ट ऑफ इसेंन्शियल मेडिसिन 2015 के तहत अब तक 996 दवाओं के रेट घटाए हैं। दिसंबर तक 966 दवाओं के रेट एनपीपीए ने तय किए थे।

एनपीपीए ने कहा है, "मैन्युफैक्चरर्स तय कीमत से ज्यादा नहीं ले सकते हैं। अगर कंपनियां सीलिंग प्राइस और रूल्स का पालन नहीं करती हैं तो उन्हें वसूली गई एक्स्ट्रा कीमत ब्याज समेत जमा करानी पड़ेगी। कंपनियों को इन दवाओं की कीमतों में साल में 10% तक की ही बढ़ोतरी करने की इजाजत होगी।"

एनपीपीए ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर-2013 के तहत शेड्यूल-1 में आने वाली जरूरी दवाओं की कीमत तय करता है। सरकार जरूरत के हिसाब से जरूरी दवाओं की लिस्ट तैयार करती है, जिसमें समय-समय पर नई दवाओं को शामिल किया जाता है। लिस्ट को नेशनल लिस्ट ऑफ एसेन्शियल मेडिसिन (एनएलईएम) कहा जाता है। इन लिस्ट में शामिल दवाइयों को काफी किफायती कीमत पर दिलाने की जरूरत होती है,  इसलिए समय-समय पर कीमतें कम की जाती हैं। इसका मकसद सभी ब्रांड की एक ही दवा की कीमत बराबर रखना है, जिससे कस्टमर्स अपनी सुविधा के अनुसार चुनाव कर सकें।  

दवाओं की सूची देखने के लिए नीचे दी गई लिनक्स पर जा सकतें हैं :

आर्थिक रूप से कमजाेर अगड़ी जाति के लोगों भी मिले आरक्षण: मद्रास हाईकोर्ट


मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को यह सुझाव दिया कि आर्थिक रूप से कमजाेर अगड़ी जाति के लोगों को भी शिक्षा और रोजगार में आरक्षण दिए जाने की जरूरत है। हाई कोर्ट ने सरकार को इस संभावना को तलाशने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने 14 छात्रों की एक याचिका पर यह निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि गरीब, गरीब होता है। फिर चाहे वह अगड़ी जाति से हो या पिछड़ी जाति से। 

कोर्ट ने कहा कि फॉरवर्ड कम्यूनिटीज के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए आरक्षण की बात करने को इस नजर से नहीं देखा जाना चाहिए कि यह आरक्षण का लाभ उठा रहे समुदायों की खिलाफत है। जज ने कहा,'कोर्ट इस बात से अवेयर है कि सभी समुदायों में गरीब लोग हैं और शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक नजरिए से उन्हें विकसित करने के लिए उनका प्रोत्साहन जरूरी है।' 

जस्टिस किरुबाकरन ने आगे कहा कि,'गरीब, गरीब होता है। फिर चाहे वह अगड़ी जाति से हो या फिर पिछड़ी जाति से। ऐसे गरीबों की मदद की सिर्फ आर्थिक रूप से ही मदद नहीं करनी चाहिए। इनको शिक्षा और रोजगार में आरक्षण दिया जाना चाहिए।' 

छात्रों ने याचिका में यह निर्देश देने की मांग की थी कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ओसी यानी ओपन कैटेगरी के लिए रखी गईं एमबीबीएस सीटें बीसी और एमबीसी कैटेगरी को ट्रांसफर करना अवैध, मनमानी और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करना है। छात्रों ने इन सीटों पर कोर्ट से डायरेक्ट्रेट आॅफ मेडिकल एजुकेशन को रिजर्वेशन पॉलिसी के हिसाब से ओपन कैटेगरी के लिए अलॉट सीटों पर दोबारा काउंसलिंग कराने का निर्देश देने की मांग भी की थी। 

जज ने सरकार के जवाबी शपथपत्र पर कहा कि,'22 सरकारी कॉलेजेज में 2,651 एमबीबीएस सीटें थीं। इनमें 31 पर्सेंट ओपन कैटेगरी, 26 पर्सेंट बीसी, 4 पर्सेंट बीसी(मुस्लिम), 20 पर्सेंट एमबीसी, 18 पर्सेंट एससी और 1 पर्सेंट सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। ओपन कैटेगरी की कुल 822 सीटों में सामान्य वर्ग के अतिरिक्त आरक्षित वर्ग के विद्यार्थी भी मेरिट लिस्ट के हिसाब से दावेदार होते हैं। ऐसे में सामान्य वर्ग के छात्रों को मिलने वाली संख्या 7.31 पर्सेंट घटकर 194 सीटों तक ही रह जाती है।' 

इन डीटेल्स से यह स्पष्ट हो जाता है कि जातियों का वर्गीकरण बीसी, एमबीसी, एससी और एसटी के तौर पर हुआ है। केवल कुछ वर्ग ही एफसी यानी फॉरवर्ड कास्ट के तौर पर दर्शाए गए हैं। अब जबकि अधिकांश जातियों को बीसी या एमबीसी में वर्गीकृत कर दिया जाएगा तो सामाजिक और आर्थिक स्तर के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए दिए जाने वाले आरक्षण का कोई मकसद नहीं रह जाता।

#Moody's ने भारत सरकार की विदेशी मुद्रा रेटिंग को 13 साल बाद बढाकर B2 किया


मूडी की निवेशक सेवा (मूडीज) ने भारत सरकार की स्थानीय और विदेशी मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग को उन्नत करते हुए बा3 से बा2 किया है और रेटिंग के आउटलुक को बदलते हुए सकारात्मक से स्थिर की श्रेणी में कर दिया है। भारत की क्रेडिट रेटिंग में 13 साल बाद यह सुधार हुआ है। भारत की स्वायत्त क्रेडिट रेटिंग में अंतिम सुधार जनवरी 2004 में बा3 (बा1 से) किया गया था।

भारत सरकार ने इस सुधार का स्वागत किया है और साथ ही विश्वास जताया है कि मूडीज के इस कदम से भारत सरकार द्वारा किए गए प्रमुख आर्थिक और संस्थागत सुधारों को मान्यता मिली है।इन सुधारों के अंतर्गत वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करना; एक सही मौद्रिक नीति का ढांचा तैयार करना; सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए उपाय और अर्थव्यवस्था में औपचारिकता और डिजिटलीकरण (जेएएम एजेंडा) लाने के लिए किए गए कई उपाय- विमुद्रीकरण, “आधार” प्रणाली पर आधारित बायोमेट्रिक खाता तथा लाभ का सीधा प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के जरिए संबंधित व्यक्ति के खाते में हस्तांतरण।

मूडीज ने स्थिरता के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी मान्यता दी है जिसमें मुद्रास्फीति में कमी, घाटे में गिरावट और विवेकपूर्ण बाह्य संतुलन तथा सरकार के राजकोषीय समेकन कार्यक्रम शामिल हैं, जिसके परिणामस्वरूप राजकोषीय घाटा वर्ष 2013-14 में सकल घरेलू उत्पाद का 4.5 प्रतिशत से कम होकर वर्ष 2016-17 में 3.5 प्रतिशत और सामान्य सरकार ऋण पर भी गंभीर प्रभाव हुए हैं। सरकार मध्यावधि में राजकोषीय समेकन जारी रखने का इरादा रखती है।

प्रधानमंत्री द्वारा 15वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में उद्धघाटन वक्तव्य


Your Excellency President दुतेर्ते, 

Excellencies, 

Mr. President, 

मुझे ASEAN (आसियान) की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर पहली बार मनीला आकर हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। इसके साथ ही हम ASEAN-India Dialogue Partnership के 25 वर्ष भी पूरे कर रहे हैं।

इस महत्वपूर्ण वर्ष के दौरान Philippines (फिलीपींस) द्वारा आसियान के कुशल नेतृत्व और शिखर सम्मलेन के शानदार आयोजन के लिए मैं राष्ट्रपति महोदय के प्रति आभार प्रकट करता हूं।

आसियान-भारत की साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने में Country Coordinator के रूप में वियतनाम के योगदान के लिए मैं वियतनाम के माननीय प्रधानमंत्री को भी धन्यवाद देता हूं।

Excellencies, 

आसियान की यह 50 वर्षों की महत्वपूर्ण यात्रा जितनी celebration के योग्य है, उतनी ही विचार करने योग्य भी है।

मुझे पूरा विश्वास है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर आसियान देश एक vision, एक पहचान और एक स्वतंत्र समुदाय के रूप में आगे भी मिल कर काम करते रहने का संकल्प लेंगे।

भारत की Act East Policy आसियान को ध्यान में रख कर ही बनाई गई है, और Indo-Pacific region के क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में इस संगठन का महत्व स्पष्ट है।

तीसरे ASEAN-India Plan of Action के अंतर्गत आपसी सहयोग के हमारे विस्तृत agenda की प्रगति अच्छी रही है, जिसमें politico-security, economic तथा cultural partnership के तीन महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं।

Excellencies, 

भारत एवं आसियान के बीच कायम सामुद्रिक संबंधों की वजह से हज़ारों वर्ष पहले हमारे व्यापारिक संबंध स्थापित हुए थे, तथा हमें साथ मिल कर इन्हें और मजबूत बनाना होगा।

इस क्षेत्र के हितों और शांतिपूर्ण विकास को ध्यान में रखते हुए, नियमों पर आधारित क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे की स्थापना के लिए भारत आसियान को अपना समर्थन जारी रखेगा।

हमने अपने-अपने देशों में आतंकवाद तथा उग्रवाद से कड़ा संघर्ष किया है। अब समय आ गया है, जब हम इस महत्वपूर्ण विषय पर आपसी सहयोग बढ़ा कर इस चुनौती का मिल-जुल कर समाधान निकालें।

Excellencies, 

भारत-आसियान Dialogue Partnership के पच्चीसवीं वर्षगांठ समारोह का theme "Shared Values, Common Destiny” बिल्कुल उपयुक्त है। इस अवसर पर हमने बहुत से कार्यक्रम मिल-जुल कर आयोजित किये हैं।

मुझे विश्वास है कि इस यादगार वर्ष का समापन भी शानदार रहेगा। 25 जनवरी 2018 को नई दिल्ली में India-ASEAN Special Commemorative Summit में आपका स्वागत करने के लिए भारत और मै व्यक्तिगत रूप से उत्सुक हैं।

भारत के 69वें गणतंत्र दिवस समारोह के हमारे मुख्य अतिथियों के रूप में आसियान देशों के नेताओं का स्वागत करने के लिए सवा सौ करोड़ भारतवासी इंतज़ार कर रहे हैं।

हम सभी के बेहतर भविष्य के लिए आपके साथ मिल कर काम करने के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। 

बहुत बहुत धन्यवाद।

मैला ढोने वालों के रूप में रोजगार पर रोक और उनके पुनर्वास पर बैठक हुई


केन्‍द्रीय सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्री श्री थावरचन्‍द गहलोत ने ‘मैला ढोने वालों के रूप में रोजगार पर रोक और उनके पुनर्वास कानून-2013’ के कार्यान्‍वयन की समीक्षा के लिए केन्‍द्रीय निगरानी समिति की 5वीं बैठक की अध्‍यक्षता की। बैठक में सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता राज्‍य मंत्री श्री रामदास अठावले, मंत्रालय में सचिव श्रीमती लता कृष्‍ण राव और अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्‍यक्ष, राष्‍ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अध्‍यक्ष, सांसद, समिति में शामिल गैर-सरकारी सदस्‍य, केन्‍द्रीय मंत्रालयों/विभागों और राज्‍य सरकारों/संघ शासित प्रशासनों के प्रतिनिधि तथा मैला ढोने वालों/सफाई कर्मियों के कल्‍याण के लिए काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी हिस्‍सा लिया।

इस महत्‍वपूर्ण केन्‍द्रीय कानून को संसद ने सितम्‍बर 2013 में बनाया और यह दिसम्‍बर 2014 में अमल में आया। इसका उद्देश्‍य मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह समाप्‍त करना और पहचाने गए मैला ढोने वालों का विस्‍तृत पुनर्वास करना है। सरकार मैला ढोने की प्रथा को निर्धारित समय के आधार पर समाप्‍त करना चाहती है जिसके लिए राज्‍य सरकारों से आग्रह किया गया है कि वे मैला ढोने की प्रथा कानून 2013 के प्रावधानों को लागू करें। बैठक में सिफारिश की गई कि मैला ढोने वालों की तेजी से पहचान के लिए सर्वेक्षण दिशा-निर्देशों को सरल बनाया जाए।

समीक्षा बैठक में भारत में मैला ढोने की प्रथा और इससे जुड़े कानून-2013 के बारे में विचार-विमर्श किया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जो भी व्‍यक्ति मल-मूत्र उठा रहा है उसकी पहचान कर उसे मैला ढोने वालों की सूची में शामिल किया जाए। बैठक में इस बारे में भी चर्चा की गई कि पहचाने गए मैला ढोने वालों के पुनर्वास के लिए स्‍व–रोजगार योजना का कार्यान्‍वयन किया जाए जिसके अंतर्गत एक बार नकद सहायता प्रदान करना; कौशल विकास प्रशिक्षण और ऋण सब्सिडी देना शामिल है।

सदस्‍यों को जानकारी दी गई कि राष्‍ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त और विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) ने मैला ढोने वालों और उनके आश्रितों को कौशल विकास प्रशिक्षण देने के लिए प्रोत्‍साहित करने के लिए अनेक जागरूकता शिविर लगाए हैं ताकि उन्‍हें उचित रोजगार मिल सके अथवा वे स्‍व–रोजगार कार्य शुरू कर सकें।  

दूरसंचार विभाग ने मोबाइल नम्बर से आधार कार्ड जोड़ने को किया बहुत सरल


दूरसंचार विभाग ने मोबाइल नम्बर से आधार कार्ड को जोड़ने की प्रक्रिया को सरल किया 

 दो अन्य सुविधाजनक विकल्प के साथ उपभोक्ता की आसानी के लिए नए ओटीपी आधारित विकल्प की शुरूआत 

उद्योग द्वारा इस कदम का स्वागत और सरकार का समर्थन करने की अपील



दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा आधार कार्ड को मोबाइल नम्बर और मोबाइल उपभोक्ताओं की पुनः सत्यापन प्रक्रिया से जोड़ने संबंधी उच्चतम न्यायालय के 16 फरवरी के आदेश के अनुपालन में तेजी लाने के लिए दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने बुधवार को व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए।

नए नियमों के अनुसार दूरसंचार विभाग ने आधार कार्ड को पंजीकृत मोबाइल नम्बर से जोड़ने के तीन नए तरीके शुरू किए हैं। ये तरीके हैं - ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) आधारित, एप्प आधारित और आईवीआरएस सुविधा। इन नए तरीकों से उपभोक्ताओं को दूरसंचार कंपनियों के स्टोर्स पर जाए बगैर आधार कार्ड को अपने मोबाइल नम्बर से जोड़ने में मदद मिलेगी। दूरसंचार विभाग ने वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग जनों और गंभीर बिमारी से पीड़ितों की सुविधा के लिए ऐसे उपभोक्ताओं के घर जाकर पुनः सत्यापन करने की भी सिफारिश की है। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार दूरसंचार ऑपरेटरों को इन सेवाओं का अनुरोध करने वालों के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया उपलब्ध करवानी चाहिए और उपलब्धता के आधार पर पुनः सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उनके घर जाना चाहिए।

इस बारे में दूरसंचार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री मनोज सिन्हा ने कहा, ‘महत्वपूर्ण सरकारी सेवाओं और सूचनाओं तक देश के सभी नागरिकों की पहुंच बनाने के लिए आधार नम्बर प्रणाली तैयार की गई थी, जिसकी समय-समय पर उन्हें आवश्यकता हो सकती है। देश में मोबाइल का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है और उपभोक्ताओं को मोबाइल नम्बर के साथ आधार नम्बर को जोड़ने की सुविधा प्रदान की जानी चाहिए। सरकार प्रयास कर रही है कि कम समय में सुविधा जनक तथा ऊर्जा गंवाए बिना उपभोक्ताओं तक सरकारी सूचनाएं और सेवाएं पहुंचाई जाए जो उनका अधिकार भी है।’

सीओएआई के प्रतिनिधि ने कहा, ‘दूरसंचार विभाग का नवीनतम स्पष्टीकरण उद्योग और उपभोक्ताओं के अनुरूप है जिसकी इस समय जरूरत है। हालांकि इन दिशा-निर्देशों को लागू करने में कुछ समय लगेगा लेकिन उपभोक्ताओं के मोबाइल नम्बर को ई-केवाईसी आधारित आधार से जोड़ना उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक बनाने में हम सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। हम सभी आवश्यक प्रक्रिया लागू कर रहे हैं ताकि ओटीपी, एप्प आधारित और आईवीआरएस सुविधा सहित दिए गए अतिरिक्त तरीकों का इस्तेमाल किया जा सके। हमें आशा है कि तेजी और आसानी से मोबाइल उपभोक्ता अपने आधार पंजीकृत मोबाइल नम्बर (एआरएमएन) का उपयोग कर ई-केवाईसी नियम को पूरा करेंगे।’  

अगस्त महीने के एक परिपत्र में दूरसंचार विभाग ने दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को आंख की पुतली (आईरिस) और अंगुलियों के निशान आधारित आधार का  सत्यापन कराने का निर्देश दिया था। नए नियमों में यह स्पष्ट निर्दिष्ट किया गया है कि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को इसके लिए उचित भौगोलिक क्षेत्र में आईरिस रीडर तैनात करना चाहिए।

निजता के नियमों को ध्यान में रखते हुए दूरसंचार विभाग ने यह अनिवार्य किया है कि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के एजेंट की पहुंच उपभोक्ताओं के ई-केवाईसी डाटा तक पहुंच न हो और ग्राहकों के नाम तथा पते ही नजर आने चाहिएं। ग्राहक देश के किसी भी स्थान से अपने मोबाइल नम्बरों का सत्यापन या पुनः सत्यापन कर सकते हैं फिर चाहे उनका मोबाइल कनेक्शन किसी भी सेवा क्षेत्र का क्यों न हो।    

#NCH - 14 राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन काउन्टर, 14 से 60 तक बढ़ाए गए


आगामी अक्टूबर से शुरू की जाने वाली 6 जोनल हेल्पलाइन्सः राम विलास पासवान 

14 राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन काउन्टर, 14 से 60 तक बढ़ाए गए

18 राज्यों को मार्च 2018 से राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन से जोड़ा जाएगा 

केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री रामविलास पासवान ने नेशनल कन्जूमर हेल्पलाइन (एनसीएच) के बारे में बताने के लिए नई दिल्ली में पत्रकार सम्मेलन किया। मीडिया से बातचीत करते हुए श्री पासवान ने कहा कि आगामी अक्टूबर से 6 जोनल हेल्पलाइन्स शुरू की जाएगी। प्रत्येक जोनल हेल्पलाइन में 10 उपभोक्ता डेस्क होंगे। इस तरीके से 60 उपभोक्ता डेस्क, देश में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के अलावा अतिरिक्त कार्य करेंगे। 

श्री पासवान ने जानकारी दी कि पहले 14 एनसीएच काउन्टर्स, उपभोक्ताओं की जन-शिकायतों के समाधान का कार्य कर रहे थे, इसे अब 60 तक बढ़ा दिया गया है। उन्होने कहा कि पहले प्रतिक्रिया का औसत समय 7 मिनट के लगभग लिया जाता था, जो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन में अब लगभग तुरन्त मिल जाता है।

श्री पासवान ने आगे बताया कि राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करने वालों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन में 2014 में उपभोक्ताओं से 1.30 लाख शिकायते प्राप्त की जो 2017 में बढ़ कर 3 लाख हुई।

मंत्री महोदय ने कहा कि मार्च 2018 से 18 राज्यों को राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन से जोड़ा जाएगा। 

#NFSM के तहत दालों के लिए 835 करोड़ रूपये राज्यों को दिए गए


वित्‍त वर्ष 2017-18 के लिए राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अभियान (एनएफएसएम) के लिए 1720.00 करोड़ रूपये (भारत सरकार का हिस्‍सा) निर्धारित किए गए हैं। इसमें से अब तक देश में दालों का उत्‍पादन बढ़ाने के लिए एनएफएसएम दालों के लिए 834.71 करोड़ रूपये राज्‍यों को आं‍बटित किए जा चुके हैं तथा 169.28 करोड़ रूपये दाल कार्यक्रम लागू करने के लिए राज्‍यों को जारी किए जा चुके हैं। दालों की खेती के संदर्भ में किसानों में जागरूकता पैदा करने के लिए भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं। जैसे राज्‍य सरकार और कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के माध्‍यम से नवीनतम फसल उत्‍पादन प्रणाली आधारित सबूत प्रदर्शित करना तथा फसल उत्‍पादन प्रणाली आधारित प्रशिक्षण प्रदान करना आदि। इसके अतिरिक्‍त आईसीएआर संस्‍थाओं/कृषि विज्ञान केन्‍द्रों (केवीके)/राज्‍य कृषि विश्‍व विद्यालयों (एसएयू) द्वारा बीज केन्‍द्रों के माध्‍यम से दालों का बीज उत्‍पादन भी किया जा रहा है।

यह सूचना लोकसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में कृषि और किसान कल्‍याण राज्‍य मंत्री श्री एस.एस.आहलूवालिया द्वारा प्रदान की गई।

रेल क्लाउड परियोजना की शुरुआत हुई, पढ़िए क्या होंगे लाभ



रेल क्लाउड परियोजना:

निवारण-शिकायत पोर्टल (रेल क्लाउड के बारे में पहला आईटी एप्लीकेशन)
रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए आपात स्थिति में कैशलैस इलाज योजना (सीटीएसई), पहला सीटीएसई कार्ड सौंपा


विभिन्न रेलवे पहलों की शुरूआत के मौके पर रेल राज्य मंत्री श्री राजेन गोहेन, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष श्री ए.के. मित्तल, रेलवे बोर्ड के अन्य सदस्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। रेल मंत्रालय ने अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के सहयोग से रेल क्लाउड परियोजना शुरू की है।

इस अवसर पर रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने कहा कि समूची रेल प्रणाली को समन्वित डिजिटल मंच पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। रेलवे के डिजिटलीकरण की दिशा में रेल क्लाउड एक अन्य कदम है। रेल क्लाउड लोकप्रिय क्लाउड कम्प्यूटिंग प्रणाली पर कार्य करता है। अधिकतर महत्वपूर्ण कार्य क्लाउड कम्प्यूटिंग के जरिए किए जाते हैं। इससे लागत कम होगी और सर्वर पर सुरक्षित आंकड़े सुनिश्चित हो सकेंगे। इसके साथ ही एक अन्य महत्वपूर्ण कदम आपात स्थिति में कैशलेस इलाज योजना है। लोगों का अनुमानित जीवन काल बढ़ने के कारण स्वास्थ्य संबंधित अनेक समस्याएं पैदा होती है इस योजना से रेलवे कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।

शुरू की गई पहल की विशेषताएं-

रेल क्लाउड:

भारतीय रेलवे ने रणनीतिक आईटी पहल की है, जिसका उद्देश्य ग्राहक की संतुष्टि में सुधार करना, राजस्व बढ़ाना और प्रभावी, कुशल और सुरक्षित संचालन करना है। रेलवे के लिए एकल डिजिटल मंच के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुछ मौलिक परियोजनाओं को लागू करना जरूरी था और रेल क्लाउड की स्थापना इस तरह की परियोजना है। क्लाउड कम्प्यूटिंग तेजी से और मांग पर सर्वर संसाधनों को स्थापित करने के लिए उभरती हुई प्रौद्योगिकी है जिसके परिणामस्वरूप लागत कम होती है। तदनुसार रेल क्लाउड चरण-1 को 53.55 करोड़ रुपये की लागत पर मंजूरी दी गई। रेल क्लाउड लागू होने के बाद रेलवे को होने वाले संभावित लाभ इस प्रकार हैः-

एप्लीकेशन का तेजी से और मांग पर फैलाव- रेल क्लाउड एप्लीकेशन के तेजी से फैलाव (परम्परागत समय, सप्ताहों और महीनों की तुलना में 24 घंटे के भीतर) का मार्ग प्रशस्त करेगा, साथ ही क्लाउड हार्डवेयर और परिवेश नए एप्लीकेशन के परीक्षण के लिए उपलब्ध होगा।

सर्वर और स्टोरेज का अधिकतम इस्तेमाल- इस प्रौद्योगिकी से उपलब्ध सर्वर और स्टोरेज का अधिकतम इस्तेमाल हो सकेगा, जिसके परिणामस्वरूप उसी सर्वर की जगह पर अधिक आंकड़े और अधिक एप्लीकेशन समा सकेंगे।

क्लाउड के हिस्से के रूप में वर्तमान बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल- रेलवे के पास उपलब्ध वर्तमान संसाधनों को रेल क्लाउड में मिला दिया जाएगा, ताकि नए संसाधन प्राप्त करने में होने वाले खर्च को कम किया जा सके।

त्वरित मापनीयता और लचीलापन- सर्वर और स्टोरेज की जगह मांग के अनुसार ऊपर-नीचे होगी, इससे सिस्टम अधिक मांग वाले घंटों में कम खर्च के साथ मांग को पूरा कर सकेगा।

आईटी सुरक्षा बढ़ाना और मानकीकरण- यह क्लाउड सरकार के नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार सुरक्षा विशेषताओं से लैस होगा। सुरक्षा विशेषताओं को क्लाउड में मौजूद सभी एप्लीकेशनों के लिए अद्यतन किया जा सकता है इसके परिणामस्वरूप अधिक सुरक्षा और स्थिरता कम खर्च में मिल सकेगी।

लागत में कमी- सर्वर और स्टोरेज बुनियादी ढांचा जरूरत के अनुसार लगाया जाएगा, जिससे रेलवे की बचत होगी और जरूरत पड़ने पर मंहगे सर्वर की खरीद पर धनराशि खर्च करने की बजाए इसका इस्‍तेमाल किया जा सकेगा।

बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव- क्लाउड में सर्वर के संसाधन उपयोगकर्ताओं की संख्या के अनुसार ऊपर-नीचे होते है इससे ग्राहकों को बेहतर अनुभव मिलेगा।

निकट भविष्य में प्रबंधित नेटवर्क और वर्चुअल डेस्कटॉप इंटरफेस (वीडीआई) सेवाओं की योजना बनाई गई है ताकि प्रत्येक रेल कर्मचारी को तेजी से और अधिक प्रभावी कार्य का माहौल दिया जा सके।

निवारण- शिकायत पोर्टल रेल क्लाउड पर पहला आईटी एप्लीकेशन:

निवारण- शिकायत पोर्टल रेल क्लाउड पर पहला आईटी एप्लीकेशन है। यह वर्तमान और पूर्व रेलवे कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान के लिए मंच है। वर्तमान एप्लीकेशन को परम्परागत सर्वर में डाला गया है। इससे राजस्व की बचत होगी और साथ ही उपयोगकर्ता को बेहतर अनुभव मिलेगा।

आपात स्थिति में कैशलैस इलाज योजना (सीटीएसई):

रेलवे स्वास्थ्य संस्थानों, रेफरल और मान्यता प्राप्त अस्पतालों के जरिए अपने कर्मचारियों को विस्तृत स्वास्थ्य सेवा सुविधा प्रदान करती है। लाभ लेने वालों में उसके सेवानिवृत्त कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य होते है। बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त लाभार्थी विभिन्न शहरों के नव-विकसित उप-नगरों में रहते है। शहर के यह हिस्से अक्सर रेलवे स्वास्थ्य संस्थानों से दूर होते है आपात स्थिति में ऐसे लाभार्थियों के स्वर्णिम घंटे यात्रा में बर्बाद हो जाते है।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों को स्वर्णिम घंटे में तत्काल चिकित्सा प्रदान करने के लिए रेलवे बोर्ड ने अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए सूची में सम्मिलित अस्पतालों में आपात स्थिति में कैशलैस इलाज की योजना शुरू की है। निजी अस्पतालों और रेलवे अधिकारियों के बीच एक वेब आधारित संचार प्रणाली विकसित की गई है जिसमें लाभार्थी की पहचान आधार सर्वर में दर्ज बायोमीट्रिक का इस्तेमाल करते हुए स्थापित की जाएगी, पात्रता रेलवे डेटाबेस का इस्तेमाल करते हुए पता लगाई जाएगी तथा आपात स्थिति की पुष्टि निजी अस्पताल की क्लिनिकल रिपोर्ट के आधार पर रेलवे चिकित्सा अधिकारी द्वारा की जाएगी। पूरी प्रणाली ऑनलाइन है और बिल भी ऑनलाइन तैयार होगा। इस योजना से जरूरत के समय सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों को मदद मिलेगी।

इस योजना से लाल फीताशाही को खत्म करने के लिए आईटी उपकरणों का इस्तेमाल और कैशलैस लेन-देन को बढ़ावा देने के सरकार के स्वीकृत उद्देश्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

वर्तमान में यह योजना चार महानगरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में शुरू की गई है। इस शहरों के अनुभव के आधार पर इस योजना को पूरे देश में लागू किया जा सकता है।

राजभाषा विभाग द्वारा ऑनलाइन अनुवाद-प्रशिक्षण प्‍लेटफार्म का लोकार्पण हुआ

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र द्वारा राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन केंद्रीय अनुवाद ब्‍यूरो द्वारा विकसित ऑनलाइन अनुवाद-प्रशिक्षण प्लेटफार्म का आज यहां लोकार्पण किया गया। इस मौके पर राजभाषा विभाग के सचिव श्री प्रभास कुमार झा, संयुक्‍त सचिव डॉ. बिपिन बिहारी सहित केंद्र सरकार के विभिन्‍न मंत्रालयों/उपक्रमों आदि के अधिकारी उपस्थित थे।

दो सत्रों में आयोजित इस कार्यक्रम के प्रथम सत्र में ऑनलाइन अनुवाद-प्रशिक्षण प्लेटफार्म का लोकार्पण किया गया तथा केंद्रीय अनुवाद ब्‍यूरो के निदेशक डॉ. एस एन सिंह द्वारा इस प्‍लेटफार्म से होने वाले लाभ की विस्‍तृत जानकारी दी गई। द्वितीय सत्र में प्रसिद्ध साहित्यकार पद्मश्री डॉ. नरेंद्र कोहली, भाषाविद् और तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. ओम विकास, भाषा-विज्ञानी और हंगेरियन तथा हिंदी के प्रसिद्ध अनुवादशास्त्री डॉ. विमलेश कांति वर्मा द्वारा अनुवाद जैसे महत्‍वपूर्ण विषय पर वक्‍तव्‍य दिये गये।

ऑनलाइन अनुवाद-प्रशिक्षण प्‍लेटफार्म के लोकार्पण समारोह को सम्‍बोधित करते हुए प्रो. गिरीश्वर मिश्र ने कहा कि यह एक महत्‍वपूर्ण प्रयास है एवं एक नई पहल है। उन्‍होने कहा कि यह प्‍लेटफार्म सभी को उपलब्‍ध होगा। उन्‍होने कहा कि भारत जैसा देश जहां इतनी भाषाऐं बोली जाती हैं तथा विश्‍व में भी बहुत सी भाषाऐं उपलब्‍ध हैं, अनुवाद ही ऐसा माध्‍यम है जिससे हम विचार सांझा कर सकते हैं। प्रो. गिरीश्वर मिश्र ने कहा कि सरकार की विभिन्‍न योजनाओं की जानकारी भी जनता की भाषा में तथा सरल भाषा में उपलब्‍ध होनी चाहिए। उन्‍होने कहा की अनुवाद के माध्‍यम से इतिहास तथा विभिन्‍न संस्‍कृतियों का ज्ञान संभव है।

इस अवसर पर सम्‍बोधित करते हुए श्री प्रभास कुमार झा ने बताया कि राजभाषा शब्‍दावली का कार्य प्रारम्‍भ हो गया है। उन्‍होने कहा कि यह शब्‍दावली ऑनलाईन और पुस्‍तक के रूप में उपलब्‍ध होगी तथा इस शब्‍दावली में नये-नये शब्‍द भी शामिल किये जायेगें। उन्‍होने कहा कि राजभाषा शब्‍दावली लाखो शब्‍दों का शब्‍दकोष होगा।

इस प्‍लेटफार्म से होने वाले लाभ की विस्‍तृत जानकारी देते हुए डॉ. एस एन सिंह ने कहा कि इस प्‍लेटफोर्म में सरल और सुगम पाठ तैयार किये गए हैं जिससे सभी को लाभ होगा।

इस अवसर पर राजभाषा भारती के 150 वे अंक का विमोचन भी किया गया।

केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो वर्ष 1971 से सरकारी दस्तावेजों का अनुवाद तथा वर्ष 1973 से राजभाषा के कार्यान्वयन से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को पारंपरिक रूप से अनुवाद का प्रशिक्षण देने का कार्य करता आ रहा है।

भारत सरकार की “सुशासन: चुनौतियां और अवसर” कार्य योजना के अंतर्गत सरकारी तंत्र में विभिन्न क्षेत्रों के कौशल विकास पर बल दिया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए राजभाषा विभाग (गृह मंत्रालय) ने केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो को “अनुवाद कौशल के विकास” के लिए ‘ऑनलाइन अनुवाद प्रशिक्षण’ के “ई-लर्निंग प्लेटफार्म” तैयार करने का कार्य सौंपा है।

इस प्लेटफार्म का उद्देश्य केंद्र सरकार के कार्यालयों में राजभाषा कार्यान्वयन और अनुवाद कार्य से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों के अनुवाद कौशल को विकसित करने के लिए अनुवाद का ऑनलाइन प्रशिक्षण देना है। इसके ज़रिए अनुवाद प्रशिक्षण की पहुँच व्यापक और सर्वसुलभ हो सकेगी और सरकारी कामकाज में प्रयुक्त प्रशासनिक शब्दावली और अभिव्यक्तियों के प्रयोग में एकरूपता सुनिश्चित हो सकेगी।

इस कार्य योजना के अंतर्गत, ब्यूरो में एक अनुसंधान एकक की स्थापना की गई है। इस एकक ने अनुवाद प्रशिक्षण के पहले चरण में, प्रशासनिक विषयों से संबंधित दस्तावेजों के अनुवाद के बारे में सरल और सुगम ढंग से पाठ तैयार किए हैं और उन्हें अनुवाद प्रशिक्षण के इच्छुक व्यक्तियों तक ऑनलाइन पहुंचाने का प्रयास किया है। 

इन पाठों में प्रशासन से जुड़े पत्राचार और उनके अनुवाद से संबंधित विषय शामिल हैं। छोटे-छोटे वीडियो के माध्यम से आसान भाषा में प्रशासनिक अनुवाद को समझाया गया है। इसके साथ ही, कुछ पाठों को प्रश्नोत्तरी के रूप में भी तैयार किया गया है। इन पाठों के माध्यम से इच्छुक प्रशिक्षार्थी प्रशासनिक विषयों के अनुवाद की बारीकियों को जानकर, इस क्षेत्र में अपने कौशल को निखार सकेंगे।

इस शृंखला के अंतर्गत भारत सरकार के मंत्रालयों/विभागों और कार्यालयों में प्रयुक्त होने वाली प्रशासनिक भाषा और उसके अनुवाद से संबंधित 21 पाठ तैयार किए गए हैं :-

अनुवाद प्रशिक्षण : परिचय, अनुवाद क्या है? अनुवाद कैसे करें? अनुवाद के सिद्धांत - पारंपरिक और आधुनिक दृष्टिकोण, अनुवाद क्या करें? अनुवाद में सहायक उपकरण, प्रशासनिक भाषा और शब्दावली, प्रशासनिक भाषा और अनुवाद, वैज्ञानिक और तकनीकी अनुवाद की समस्याएं, प्रशासनिक पत्र व्यवहार के प्रकार और उनका अनुवाद, प्रशासनिक अनुवाद में प्रयुक्त शब्दों के सूक्ष्म भेद, अर्द्ध-सरकारी पत्र और अंतर्विभागीय टिप्पणियां, जनसंपर्क के लिए प्रयुक्त दस्तावेजों, और फॉर्मों का अनुवाद, आदेश और कार्यालय आदेश का अनुवाद, टिप्पणी लेखन और अनुवाद, मुहावरों और लोकोक्तियों का अनुवाद, अनुवाद-पुनरीक्षण, मूल्यांकन और समीक्षा, व्यतिरेकी विश्लेषण और अनुवाद, हिंदी – अंग्रेजी वाक्य संरचना और अनुवाद, अनुवाद में सृजनशीलता, प्रयुक्ति की संकल्पना और अनुवाद।


#CRPF जवानों की हत्या पर मानवाधिकार कार्यकर्ता खामोश क्यों ? : वेंकैया नायडू

Image result for वेंकैया नायडू

सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री वेंकैया नायडू का बयान – सुकमा में सीआरपीएफ जवानों की कायरतापूर्ण हत्या पर मानवाधिकार कार्यकर्ता खामोश क्यों ?

24 अप्रैल, 2017 को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में विकास कार्यों के लिए सड़कों को सुरक्षित बनाने के काम में लगे सीआरपीएफ जवानों की कायरतापूर्ण हत्या से राष्ट्र सदमे में है। अन्य कई घायल हुए हैं। भूमिगत उग्रवादी तत्वों द्वारा की जाने वाली इस तरह की कायरतापूर्ण कार्रवाई अत्यंत निंदनीय है।

सीआरपीएफ के जो जवान मारे गए और घायल हुए हैं वे देश की जनता की सेवा कर रहे थे और उन्होंने अपने जीवन को न्यौछावर कर दिया। राष्ट्र के लिए यह सर्वोच्च बलिदान है। वर्दी पहने हुए जो समर्पित जवान मारे गए और घालय हुए हैं उनके परिवारों के प्रति केंद्र और राज्य सरकार पूरी तरह से समर्पित हैं। केंद्र और राज्य सरकार पूरी दृढ़ता के साथ काम करती रहेंगी और इस तरह की हिंसात्मक कार्रवाइयों को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

पूरा राष्ट्र इस हत्या और हिंसा से सदमे में है, लेकिन कल से ही मानवाधिकार के तथाकथित हितैषी और आवाज उठाने वाले लोग चुप्पी साधे हुए हैं। अगर पुलिस द्वारा किसी आंतकवादी या उग्रवादी को मारा जाता तो ये कार्यकर्ता आवाज उठाते और हिंसात्मक प्रतिक्रिया करते। लेकिन, बड़ी संख्या में जवानों और निर्दोष लोगों को जब ऐसे लोग मारते हैं तब मानवाधिकार के कार्यकर्ता चुप्पी ओढ़ लेते हैं।

क्या मानवाधिकार केवल उन लोगों के लिए है जो अपनी अप्रासंगिक विचार धाराओं को आगे बढ़ाने के लिए हिंसा का सहारा लेते हैं? क्या मानवाधिकार सुरक्षाकर्मियों और साधारण लोगों के लिए नहीं है?

जब गैर कानूनी तत्व इस तरह की अमानवीय हरकत करते हैं, तो मानवाधिकार कार्यकर्ता क्यों खामोश हो जाते हैं?

मैं यह कहना चाहता हूं कि इस तरह की हिंसात्मक गतिविधियों को मानवाधिकार की वकालत करने वाले तथाकथित कार्यकर्ताओं का मौन समर्थन प्राप्त है। ऐसी कार्रवाई हताशा में की जाती है ताकि केंद्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों का सकारात्मक प्रभाव रोका जा सके और तेज आर्थिक विकास का लाभ गरीबों तक न पहुंच पाए।

इस बात की अत्यंत आवश्यकता है कि प्रतिबंधित तत्वों और तथाकथित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की हिंसात्मक गतिविधियों के विरूद्ध मजबूत जनभावना बनायी जाए। ऐसे तत्व दोहरे मानदंड वाले हैं और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का शिकार होने वाले सुरक्षाकर्मियों, उनके परिजनों और निर्दोष व्यक्तियों के लिए यह मानवाधिकार की बात नहीं करते। 

Join our WhatsApp Group

Join our WhatsApp Group
Join our WhatsApp Group

फेसबुक समूह:

फेसबुक पेज:

शीर्षक

भाजपा कांग्रेस मुस्लिम नरेन्द्र मोदी हिन्दू कश्मीर अन्तराष्ट्रीय खबरें पाकिस्तान मंदिर सोनिया गाँधी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राहुल गाँधी मोदी सरकार अयोध्या विश्व हिन्दू परिषद् लखनऊ उत्तर प्रदेश मुंबई गुजरात जम्मू दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश श्रीनगर स्वामी रामदेव मनमोहन सिंह अन्ना हजारे लेख बिहार विधानसभा चुनाव बिहार लालकृष्ण आडवाणी स्पेक्ट्रम घोटाला मस्जिद अहमदाबाद अमेरिका नितिन गडकरी पटना भोपाल सुप्रीम कोर्ट चुनाव कर्नाटक सपा आतंकवाद सीबीआई आतंकवादी पी चिदंबरम ईसाई बांग्लादेश हिमाचल प्रदेश उमा भारती बेंगलुरु अरुंधती राय केरल जयपुर उमर अब्दुल्ला डा़ प्रवीण भाई तोगड़िया पंजाब महाराष्ट्र हिन्दुराष्ट्र इस्लामाबाद धर्म परिवर्तन मोहन भागवत राष्ट्रमंडल खेल वाशिंगटन शिवसेना सैयद अली शाह गिलानी अरुण जेटली इंदौर गंगा हिंदू गोधरा कांड बलात्कार भाजपायूमो मंहगाई यूपीए सुब्रमण्यम स्वामी चीन दवा उद्योग बी. एस. येदियुरप्पा भ्रष्टाचार साध्वी प्रज्ञा हैदराबाद कश्मीरी पंडित काला धन गौ-हत्या चेन्नई तमिलनाडु नीतीश कुमार शिवराज सिंह चौहान शीला दीक्षित सुषमा स्वराज हरियाणा हिंदुत्व अशोक सिंघल इलाहाबाद कोलकाता चंडीगढ़ जन लोकपाल विधेयक नई दिल्ली नागपुर मुजफ्फरनगर मुलायम सिंह रविशंकर प्रसाद स्वामी अग्निवेश अखिल भारतीय हिन्दू महासभा आजम खां उत्तराखंड फिल्म जगत ममता बनर्जी मायावती लालू यादव अजमेर प्रणव मुखर्जी बंगाल विकीलीक्स आशाराम बापू ओसामा बिन लादेन नक्सली मालेगांव विस्फोट अटल बिहारी वाजपेयी अरविंद केजरीवाल एबीवीपी कपिल सिब्बल क्रिकेट तरुण विजय तृणमूल कांग्रेस बजरंग दल बाल ठाकरे राजिस्थान वरुण गांधी वीडियो हरिद्वार गोवा बसपा मनीष तिवारी शिमला सिख विरोधी दंगे सिमी सोहराबुद्दीन केस असम इसराइल एनडीए कल्याण सिंह पेट्रोल प्रेम कुमार धूमल सैयद अहमद बुखारी अनुच्छेद 370 जदयू भारत स्वाभिमान मंच हिंदू जनजागृति समिति आम आदमी पार्टी विडियो-Video हिंदू युवा वाहिनी कोयला घोटाला मुस्लिम लीग छत्तीसगढ़ हिंदू जागरण मंच सीवान

लोकप्रिय ख़बरें

ख़बरें और भी ...

राष्ट्रवादी समाचार. Powered by Blogger.

नियमित पाठक

Google+ Followers