गुलाम नबी आजाद के भतीजे मुबाशिर आजाद भाजपा में शामिल हुए


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के भतीजे मुबाशिर आजाद रविवार, २७ फ़रवरी, २०२२ को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जमीनी स्तर पर किए गए विकास कार्यों से प्रभावित हैं। गुलाम नबी आजाद के सबसे छोटे भाई लियाकत अली के बेटे मुबाशिर आजाद ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने उनके चाचा का ''अपमान'' किया, जिससे उन्हें दुख हुआ और उन्होंने कांग्रेस से नाता तोड़ लिया।

हालांकि, मुबाशिर ने यह भी कहा कि उन्होंने भाजपा में शामिल होने की योजना को लेकर अपने चाचा के साथ चर्चा नहीं की।

मुबाशिर आजाद और उनके समर्थकों का भाजपा की जम्मू कश्मीर इकाई के अध्यक्ष रविंदर रैना और पूर्व विधायक दलीप सिंह परिहार सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी में स्वागत किया। रैना ने इन लोगों के भाजपा में शामिल होने को एक ''निर्णायक मोड़'' बताया, जो चिनाब घाटी क्षेत्र के डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिलों के युवा कार्यकर्ताओं के लिए पार्टी में शामिल होने का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा, 'भाजपा विपक्षी दलों के राजनीतिक नेताओं, हिंदू, मुस्लिम, गुर्जर, बकरवाल और पहाड़ी सभी समुदायों के सामाजिक कार्यकर्ताओं को अपने साथ लाकर तेजी से आगे बढ़ रही है।'

अप्रैल २००९ में आजाद के भाई गुलाम अली भी भाजपा में शामिल हुए थे। मुबाशिर आजाद ने कहा, '(कांग्रेस) पार्टी अंदरूनी कलह में उलझी हुई है... जबकि मोदी के नेतृत्व में जमीन पर लोगों के कल्याण का काम हो रहा है।' उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पार्टी के करिश्माई नेताओं में शुमार पूर्व मुख्यमंत्री (गुलाम नबी) आजाद के साथ जिस तरह का व्यवहार किया, उससे आम जनता की भावनाओं को ठेस पहुंची है।

मुबाशिर ने कहा, 'प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के प्रति उनकी सेवा के लिए उनकी प्रशंसा की, लेकिन पार्टी ने उन्हें दरकिनार कर दिया।' गुलाम नबी आजाद कांग्रेस के उन असंतुष्ट नेताओं के समूह में शामिल थे, जिसने अगस्त २०२० में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर संगठनात्मक सुधारों की मांग की थी।

मोदी सरकार का अगला एजेंडा POK को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना: जितेंद्र सिंह


नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद हमारा अगला एजेंडा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना है. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिनों की सबसे बड़ी उपलब्धि में जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करना है. उन्होंने देश विरोधी काम करने वाले लोगों और ताकतों को चेतावनी देते हुए कहा कि, 'यह मानसिकता है कि आप कुछ भी करके बच निकलेंगे. अब आप बच कर निकल नहीं पाएंगे, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए आपको कीमत चुकानी होगी.'

पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने पारित किया था संकल्प:

ऊधमपुर-कठुआ लोकसभा सीट से सांसद जितेंद्र सिंह ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के विषय पर कहा कि, ‘यह केवल मेरी या मेरी पार्टी की प्रतिबद्धता नहीं है बल्कि यह 1994 में पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा संसद से सर्वसम्मति से पारित कराया गया संकल्प है. यह एक स्वीकार्य रुख है.’

अनुच्छेद 370 हटाने पर भारत के अनुकूल है पूरी दुनिया का रुख

अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त करने पर पाकिस्तान की ओर से शुरू किये गए दुष्प्रचार अभियान पर सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया का रुख भारत के अनुकूल है. उन्होंने कहा, कुछ देश जो भारत के रुख से सहमत नहीं थे, अब वे हमारे रुख से सहमत हैं. सिंह ने कहा कि कश्मीर में आम आदमी भारत सरकार से मिलने वाले लाभों को लेकर खुश है.

कश्मीर में कर्फ्यू नहीं, केवल कुछ पाबंदियां लगी हुई हैं

केंद्रीय मंत्री ने अपनी बात के समर्थन में कहा कि, कश्मीर न तो बंद है और ना ही कर्फ्यू के साए में है, बल्कि वहां केवल कुछ पाबंदियां लगी हुई हैं. सिंह ने देश विरोधी लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अपनी उस मानसिकता को बदलना पड़ेगा कि वे कुछ भी करके आसानी से बच निकलेंगे. आतंकियों द्वारा आम लोगों की हत्या किए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें पाकिस्तान का हाथ है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “हमें, कश्मीर कर्फ्यू के साए में है और पूरी तरह से बंद है, जैसे बयानों की निंदा करने की जरूरत है. कश्मीर बंद नहीं है. वहां कर्फ्यू नहीं है. अगर कर्फ्यू होता तो लोगों को बाहर निकलने के लिए ‘कर्फ्यू पास’ की जरूरत होती.” उन्होंने कहा कि कश्मीर में धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं.

इंटरनेट पर रोक हटाने को इच्छुक है सरकार

इंटरनेट सेवा बंद रखने के बारे में मोदी के मंत्री ने कहा कि, 'हम इंटरनेट सेवा को जल्द से जल्द बहाल करना चाहते हैं. इसके लिए प्रयोग के तौर एक कोशिश की गई थी लेकिन सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो डाले गए, इसलिए फैसले की फिर से समीक्षा करनी पड़ी.' जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार इन पाबंदियों को खत्म करने और इंटरनेट पर रोक हटाने को इच्छुक है.

जम्‍मू और कश्‍मीर में सरकारी सेवाओं में आरक्षण लागू हुआ



मंत्रिमंडल ने संविधान (जम्‍मू और कश्‍मीर में लागू होने के लिए) संशोधन आदेश,2019 को स्‍वीकृति दी 

जम्‍मू और कश्‍मीर में सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए पदोन्‍नति लाभ जम्‍मू और कश्‍मीर में शिक्षा संस्‍थानों तथा सार्वजनिक रोजगार में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संविधान (जम्‍मू और कश्‍मीर में लागू होने के लिए) संशोधन आदेश, 2019 के माध्‍यम से संविधान (जम्‍मू और कश्‍मीर में लागू होने के लिए) आदेश,1954 में संशोधन के संबंध में जम्‍मू और कश्‍मीर सरकार के प्रस्‍ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। इससे राष्‍ट्रपति द्वारा अनुच्‍छेद 370 की धारा (1) के अंतर्गत जारी संविधान (जम्‍मू और कश्‍मीर में लागू होने के लिए) संशोधन आदेश,2019 द्वारा संविधान (77वां संशोधन) अधिनियम,1955 तथा संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम,2019 से संशोधित भारत के संविधान के प्रासंगिक प्रावधान लागू होंगे।

प्रभाव:

अधिसूचित होने पर यह आदेश सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों को पदोनत्ति लाभ का मार्ग प्रशस्‍त करेगा और जम्‍मू और कश्‍मीर में सरकारी रोजगार में वर्तमान आरक्षण के अतिरिक्‍त आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत तक आरक्षण का लाभ प्रदान करेगा।

पृष्‍ठभूमि: समानता और समावेश:

संविधान (77वां संशोधन) अधिनियम 1955 को भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 16 की धारा 4 के बाद धारा (4ए) जोड़कर लागू किया गया। धारा (4ए) में सेवा में अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों को पदोन्‍नति लाभ देने का प्रावधान है। संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम 2019 देश में जम्‍मू और कश्‍मीर को छोड़कर लागू किया गया है और जम्‍मू और कश्‍मीर तक अधिनियम के विस्‍तार से राज्‍य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण का लाभ प्राप्‍त होगा। 



जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त 10,000 विशेष पुलिस अधिकारी तैनात


केन्द्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने जम्मू-कश्मीर के पुलिस विभाग में अतिरिक्त 10,000 विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) की तैनाती को मंजूरी दी है।

इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और यह अतिरिक्त संख्या एसपीओ के मौजूदा बल के अलावा है। अतिरिक्त एसपीओ का उपयोग विशेषकर सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में किया जाएगा। 10,000 एसपीओ के संदर्भ में केन्द्र द्वारा राज्य सरकार को व्यय की प्रतिपूर्ति वर्तमान स्वीकृत सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही की जाएगी।

कर्मचारी अब किसी भी एयरलायन्स से LTC पर जम्मू-कश्मीर में बिता सकेंगे छुट्टियां



जम्मू एवं कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने किसी भी एयरलायन्स से एलटीसी पर जम्मू एवं कश्मीर का दौरा करने की सुविधा देने का फैसला किया है

जम्मू एवं कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने केन्द्र सरकार के कर्मचारियों को 25 सितंबर 2016 से दो वर्ष की अवधि के लिए के लिए विशेष छूट योजना के तहत किसी भी एयरलायन्स से एलटीसी पर जम्मू एवं कश्मीर का दौरा करने की सुविधा देने का फैसला किया है।

पढ़िए जम्‍मू-कश्‍मीर पर राजनाथ सिंह का राज्‍यसभा में पूरा वक्‍तव्‍य



माननीय सभापति महोदय, 

कश्‍मीर घाटी में उत्‍पन्‍न स्‍थिति के संबंध में मैंने दिनांक 18 जुलाई को इस सदन को अवगत कराया था। 

तत्‍पश्‍चात् 23 एवं 24 जुलाई को मैंने श्रीनगर और अनंतनाग का दौरा किया। लगभग 30 विभिन्‍न प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत की, जिनमें सब्‍जी-फल उत्‍पादक, नौका चालक, विभिन्‍न समुदाय के संगठन, विकास मंचों के प्रतिनिधि, युवा उद्यमी वर्ग के लोग, Chamber of Commerce,कार्यरत एवं सेवानिवृत्‍त सरकारी कर्मी एवं पर्यटन व्‍यवसायी शामिल हैं। 

माननीय मुख्‍यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल तथा सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों से मिलकर मैंने स्‍थिति का जायजा लिया। 

राजनीतिक आकलन हेतु मैं करीब-करीब सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी मिला। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने मुझसे मिलने से इंकार किया, जिससे दुर्भाग्‍यवश उनके प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिल सका। 

दिनांक 8 अगस्‍त को जम्‍मू-कश्‍मीर की माननीय मुख्‍यमंत्री से दिल्‍ली में पुन: चर्चा भी हुई। 

कश्‍मीर घाटी में उत्‍पन्‍न स्‍थिति के बारे में जो आशंकाएं व्‍यक्‍त की गई हैं और कदाचित वे आशंकाएं माननीय सदस्‍यों को भी होंगी, उन पर मैं कुछ कहना चाहूंगा। दिनांक 9 जुलाई से लगातार चल रहे कर्फ्यू से आम जनता को राशन आदि नहीं मिल रहा है, यह एक आशंका है। मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍यों को बताना चाहूंगा कि कश्‍मीर घाटी में कोई Blanket कर्फ्यू नहीं है। विभिन्‍न जिलों में, कतिपय स्‍थानों पर आवश्‍यकतानुसार कर्फ्यू लगाया गया है, और स्‍थिति में सुधार होने पर उसको हटाने अथवा उसमें ढील की कार्रवाई की गई है। हां, हो सकता है कि स्‍थिति अगर पुन: खराब हुई तो कर्फ्यू पुन: लगाया गया हो। 

वास्‍तव में, अगर आम जनता को असुविधा हुई है, तो वह पाकिस्‍तान से प्रेरित अलगाववादी नेताओं द्वारा दिनांक 9 जुलाई से निरंतर, बिना किसी Break के, हड़ताल का आह्वान है। इससे, जिन शहरों, या जिन स्‍थानों में, कर्फ्यू नहीं भी होता है, वहां भय से बाजार नहीं खुल पाते हैं। अत: वास्‍तव में, अपनी स्‍वार्थ पूर्ति के लिए, अपने आपको Relevant रखने की दृष्‍टि से, आम जनता को असुविधा पहुंचाने का प्रयास अलगाववादी नेताओं ने किया है। और मैं निश्‍चितता के साथ कह सकता हूं कि यह पाकिस्‍तान से प्रेरित है। हड़ताल का कार्यक्रम रावलपिंडी में तय होता है, श्रीनगर में नहीं। 

अलगाववादियों की इस अमानवीय Strategy के बावजूद, यह कहना होगा कि राज्‍य सरकार ने आम जनता की सुविधा हेतु जो कार्य किया है, वह सराहनीय है। 

उदाहरणार्थ, इस अवधि में राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा स्‍कीम के तहत लगभग 95 प्रतिशत अनाज का वितरण हुआ है। औसतन बांटे जाने वाली करीब 48 हजार क्विंटल चीनी की तुलना में लगभग 34 हजार क्‍विंटल का वितरण हो चुका है। इस अवधि में लगभग 3 लाख 10 हजार LPG Cylinders का विक्रय भी हो चुका है। 

माननीय सभापति महोदय, घाटी में सभी आवश्‍यक वस्‍तुओं का स्‍टॉक भी उपलब्‍ध है। उदाहरणार्थ, श्रीनगर में करीब 23 सौ क्‍विंटल चीनी उपलब्‍ध है। विभिन्‍न Petroleum Companies के पास 18 दिन का एलपीजी स्‍टॉक तथा 19 दिनों के लिए पेट्रोल और 32 दिनों के लिए मिट्टी का तेल भी उपलब्‍ध है। 

इसी प्रकार, घाटी में आम तौर पर उपलब्‍ध फल-सब्‍जी का भी क्रय-विक्रय राज्‍य सरकार समय-समय पर कर्फ्यू में ढील देकर सुनिश्‍चित कर चुकी है। इसी प्रकार तड़के दूध का वितरण भी कराया गया है। दिनांक 14 जुलाई से लेकर 8 अगस्त तक की अवधि के दौरान आवश्‍यक वस्‍तुओं, फल-सब्‍जी आदि लेकर 5,600 ट्रक घाटी में पहुंच चुके हैं। 

मैं यह नहीं कह सकता कि घाटी की जनता बिल्‍कुल आम जीवन बसर कर रही है। हड़ताल से आर्थिक और वाणिज्यिक गतिविधियां बंद हैं, जिससे कई वर्गों की आमदनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। लेकिन जो स्‍थिति घाटी में कुछ Vested interest और Misguided elements ने पैदा की है, उस स्‍थिति में जो भी आम जनता की सुविधा के लिए किया जा सकता है, वह राज्‍य सरकार ने किया है, और कर रही है। 

दूसरी आशंका यह व्‍यक्‍त की जाती है कि पर्याप्‍त चिकित्‍सा सुविधा उपलब्‍ध नहीं है। कश्‍मीर में हो रही हिंसा में 2656 मरीज विभिन्‍न अस्‍पताल पहुंचे, जिनमें से 2564 को इलाज के बाद Discharge किया जा चुका है। अब करीब 100 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 51 ऐसे हैं जिनकी आंखों में चोटें आई हैं। दुर्भाग्‍यवश Stone pelting से करीब 100 Ambulances क्षतिग्रस्‍त होने के बावजूद, इस अवधि में 400 से अधिक Ambulances कार्यशील रहीं।

इस अवधि में करीब 5 लाख सामान्‍य मरीजों का भी OPD में इलाज किया गया, जिनमें से करीब 33 हजार Indoor Patients थे। लगभग 8 हजार छोटी-बड़ी Surgeries इस अवधि में की गई हैं और जहां आवश्‍यक हुआ है, मरीजों को दिल्‍ली में भी इलाज हेतु लाया गया है। दिल्‍ली के AIIMS तथा मुम्‍बई के आदित्‍य ज्‍योति अस्‍पताल के Eye-Surgery करने वाले दल श्रीनगर होकर आए, और उन्‍होंने वहां चल रहे इलाज पर अपनी संतुष्‍टि व्‍यक्‍त की है। 

माननीय सभापति महोदय, पेलेट गन्‍स की चर्चा पिछली बार इस सदन में हो चुकी है। जैसा कि मैंने पहले बताया, इस Weapon को 2010 में Non-lethal मानकर Introduce किया गया था। जैसा कि मैंने लोकसभा में आश्‍वस्‍त किया था, अन्‍य Viable Non-lethal Technologies की संभावनाओं पर गौर करने हेतु मैंने वरिष्‍ठ अधिकारियों की एक Committee गठित कर दी है। 

माननीय सभापति महोदय, दिनांक 18 जुलाई को, जब इस सम्‍माननीय सदन में इस मुद्दे पर पहले चर्चा हुई थी, तब वर्तमान Agitation में 567 घटनाएं हो चुकी थीं। इन घटनाओं में 33 Civilians की एवं 01 सुरक्षाकर्मी की मृत्‍यु हुई थी। 1948 Civilians तथा 1739 सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे। तत्‍पश्‍चात्, दिनांक 08 अगस्‍त तक, 451 घटनाएं और हो चुकी हैं। इनमें 10 Civilians और 01 सुरक्षाकर्मी की मृत्‍यु हुई है। 1408 Civilians और 2776 सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। 

माननीय सभापति, कश्‍मीर भारत का ताज है। हमने आजादी धर्मनिरपेक्षता और Equality for all के आधार पर जीती है और इन्‍हीं को हमारे संविधान का केंद्र बिंदु बनाया है। हमारे नापाक पड़ोसी से भिन्‍न, हमारा समाज एकता और समानता की आधारशिला पर खड़ा है। कश्‍मीरियों के लिए हमारा दिल उतना ही धड़कता है, जितना कि उड़ीसा या असम के लिए, तमिलनाडु या केरल के लिए, गुजरात या राजस्‍थान के लिए। हमारे मन में न कोई भेद है, न भाव। मानवता हमारी भारतीयता की पहचान है। हमारे घर के किसी भी सदस्‍य को कोई शिकायत हो, तो हम उसको मिल-बैठकर सुलझा सकते हैं, और सुलझाना चाहते हैं। बातचीत हेतु हमारे दरवाजे भारत के हर नागरिक के लिए हमेशा खुले हैं। जैसा कि प्रधानमंत्री जी ने कल कहा, अन्‍य बच्‍चों के माफिक कश्‍मीरी बच्‍चों के हाथ में पत्‍थर नहीं, किताबें होनी चाहिए, कलम होनी चाहिए, Bat-ball होना चाहिए। ऐसा हम अपनी ईमानदारी से, अपने Good Intent से, अपनी मेहनत से और आपसी बातचीत से सुनिश्‍चित करेंगे। 

कुछ हफ्ता-दो हफ्ता पूर्व पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा था कि उनको उस दिन का इंतजार है, जब कश्‍मीर उनका होगा। मैं उनको, और उनके पीछे असली पावर रखने वालों को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि उनके लिए यह इंतजार अनन्‍त होगा। कश्‍मीर हमारा था, हमारा है और हमारा रहेगा। पाकिस्‍तान तो क्‍या, दुनिया की कोई भी ताकत कश्‍मीर को भारत से अलग नहीं कर सकती है। 

माननीय सभापति महोदय, पाकिस्‍तान द्वारा बार-बार कहा जाता है कि भारत और पाकिस्‍तान के बीच कश्‍मीर एक Issue है। मैं जिम्‍मेदारी से वही बात कहना चाहूंगा, जो कि 22 फरवरी, 1994 को इस संसद ने एक आवाज़ से कहा था- कश्‍मीर का मुद्दा सिर्फ एक है, और वह है PoK की वापसी। उस वापसी तक हम चैन से नहीं बैठेंगे। इस संसद के 1994 Resolution की पूर्ति करके ही रहेंगे। 

जम्‍मू-कश्‍मीर की स्थिति पर प्रस्‍ताव राज्‍य सभा में पारित


यह सदन कश्मीर घाटी में लम्बे समय से चली आ रही अशांति, हिंसा और कर्फ्यू की स्थिति के प्रति अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करता है। यह सदन बिगड़ती हुई स्थिति के कारण होने वाली मौतों तथा घायल लोगों के प्रति गहरी संवेदना और चिंता व्यक्त करता है। इस सदन का दृढ़ और सुविचारित मत है कि जहां एक ओर राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता, वहीं दूसरी ओर यह भी अनिवार्य है कि सामान्य स्थिति और शांति बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं, ताकि लोगों की वेदनाएं दूर की जा सकें। 

यह सदन जम्मू-कश्मीर में समाज के सभी वर्गों से पुरज़ोर अपील करता है कि वे तत्काल सामान्य स्थिति की बहाली और सौहार्द कायम करने के लिए कार्य करें। यह सदन, सर्वसम्मति से लोगों, विशेषकर युवाओं में विश्वास पैदा करने का संकल्प लेता है।

रेलमंत्री ने बनिहाल-बारामूला (डेमू) व बडगाम-बारामूला (डेमू) ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई


रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग राज्यमंत्री श्री जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में 74619/74620 बनिहाल-बारामूला फास्ट पैसेंजर (डेमू) और 74617/74618 बडगाम-बारामूला डेमू का आज रेल भवन, नई दिल्ली और अनंतनाग रेलवे स्टेशन के बीच वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरी झंडी दिखाई। जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री सुश्री महबूबा मुफ्ती ने अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ अनंतनाग रेलवे स्टेशन पर कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह की शोभा बढ़ाई। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, बोर्ड के अन्य सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति रेल भवन में उपस्थित थे। बारामूला-बडगाम-बनिहाल खंड वर्तमान में 13 जोड़े रेल सेवाओं का  परिचालन कर रहा है जिसका अर्थ है कि वर्तमान में 26 एकल सेवाएं परिचालित हैं।

इस अवसर पर रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों के बीच निर्बाध रेल संपर्क हमेशा इस सुंदर घाटी की दीर्घकालीन मांग रहा है। नई रेल सेवाएं जम्मू-कश्मीर के लोगों को बड़ी राहत प्रदान करने वाली साबित होंगी। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण सड़क परिवहन में बारामूला-बनिहाल के बीच लगभग 6 घंटे लगते हैं, लेकिन अब नई डेमू ट्रेन का उपयोग करके यह दूरी 2 घंटे 20 मिनट में तय की जा सकती है और वह भी  केवल 30 रूपये के किराए में। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर राज्य पर्यटन के हिसाब से बहुत महत्वपूर्ण है जहां पूरे वर्ष राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आते रहते हैं।  इस तरह इस जुड़ाव से राज्य में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि रेलवे ने आईआरसीटीसी की मदद जम्मू-कश्मीर को पर्यटन के नक्शे पर लाने के लिए भी कार्य कर रहा है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि हस्तकला उद्योग और राज्य के स्वादिष्ट व्यंजनों को भी बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर राज्य के विकास पर ध्यान केंद्रित किया है।

इस अवसर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग राज्यमंत्री श्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि घाटी में नई रेल सेवाओं से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और रेलों के अच्छे जुड़ाव से राज्य में पर्यटन, आर्थिक, सामाजिक और अन्य सभी क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि नई रेल सेवा से घाटी के लोगों की यात्रा के समय में कटौती होगी। और यह यात्रा सस्ती भी होगी क्योंकि रेलों के किराए सड़क परिवहन की तुलना में काफी कम हैं।

नई ट्रेनों की मुख्य विशेषताएं -

बनिहाल-बडगाम-बारामूला खंड पर:

बारामूला-बडगाम-बनिहाल खंड पर वर्तमान में रेल सेवा के रेलों के 13 जोड़े परिचालित हैं। विवरण निम्नानुसार हैं: -


 
बारामूला-बनिहाल
बारामूला-बडगाम
बडगाम-बनिहाल
डेमू गाड़ियों के 04 जोड़े
डेमू गाड़ियों के 07 जोड़े
डेमू ट्रेन के 10 जोड़े


समय सारणी अनुबंध- 'ए' दी गई है।


बनिहाल-बारामूला खंड पर 05/05/2016 से 02 जोड़े का अतिरिक्त डेमू गाड़ियों 74619/74620 अर्थात बनिहाल-बारामूला फास्ट पैसेंजर और बडगाम-बारामूला डेमू 74617/74618 की शुरुआत की गई है। इन ट्रेनों के समय और रुकने के स्थानों का विवरण इस प्रकार हैं: -


 
74619 बनिहाल-बारामूला फास्ट पैसेंजर (डेमू)
74617 बडगाम-बारामूला डेमू

(↓) स्टेशन (↑)

74620 बारामूला-बनिहाल फास्ट पैसेंजर (डेमू)
74618 बारामूला-बडगाम डेमू

शनिवार को  छोड़कर

शुक्रवार को  छोड़कर

शुक्रवार को  छोड़कर

शनिवार को  छोड़कर

आगमन
प्रस्थान
आगमन
प्रस्थान
आगमन
प्रस्थान
आगमन
प्रस्थान

07:40


बनिहाल
18:55
--


07:55
07:57


काजीगुंड
18:31
18:32


08:11
08:14


अनंतनाग
18:12
18:17


08:58
09:03


श्रीनगर
17:30
17:32


09:20
09:30
--
15:15
बडगाम
17:16
17:18
11:30
--
09:42
09:43
15:27
15:28
मजहोम
17:02
17:04
11:12
11:13
10:00
10:01
15:59
16:00
सोपोर
16:43
16:44
10:38
10:38
10:20
--
16:20
--
बारामूला
--
16:35
--
10:30

·         गठन : - बनिहाल-बारामूला फास्ट पैसेंजर और बडगाम-बारामूला डेमू - पावर कोच -2, ट्रेलर कोच -6 यानि कुल 8 कोच।

·         दूरी :
·         बारामूला और बनिहाल के बीच की दूरी 137 किमी है।
·         बारामूला और बड़गाम के बीच की दूरी 45 किमी है।
·         बडगाम और बनिहाल के बीच की दूरी 92 किमी है।

·         यात्रा की अवधि :
02 घंटे 40 मिनट         74619 बनिहाल-बारामूला फास्ट पैसेंजर (डेमू)
02 घंटे 20 मिनट         74620 बारामूला-बनिहाल फास्ट पैसेंजर (डेमू)
01 घंटा 05 मिनट         74617 बडगाम-बारामूला डेमू

01 घंटा                   74618 बारामूला-बडगाम डेमू



·         74619/74620 बनिहाल-बारामूला फास्ट पैसेंजर (डेमू) औसत गति क्रमशः 51.37 किमी प्रति घंटे / 58.71 किमी प्रति घंटा है। जबकि 74617/74618 बडगाम-बारामूला डेमू की औसत गति में क्रमश: 41.55 किलोमीटर / 45 किलोमीटर प्रति घंटे है।

श्री अमरनाथ यात्रा 2 जुलाई से 18 मार्च 2016 तक,जानिये पूरी प्रक्रिया


श्री अमरनाथजी यात्रा 2016 के लिए तीर्थयात्रियों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। जम्मू कश्मीर के राज्यपाल की अध्यक्षता वाले श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड ने बैंक के माध्यम से यात्रियों के पंजीकरण की निम्नलिखित प्रक्रिया घोषित की है:

1.   पंजीकरण और यात्री परमिट (वाईपीएस) पहले आओ पहले पाओं के आधार पर जारी होगा।

2.   यात्रियों का पंजीकरण बैंकों की सभी शाखाओं से 29 फरवरी, 2016 से शुरू हो चुका है।

3.   एक यात्री परमिट केवल एक यात्री के पंजीकरण के लिए वैध होगा।

4.  प्रत्येक पंजीकरण शाखा के लिए यात्रियों के पंजीकरण हेतु प्रति दिन/प्रति मार्ग कोटा निर्धारित कर दिया गया है। पंजीकरण शाखा यह सुनिश्चित करेगी कि पंजीकृत यात्रियों की संख्‍या प्रतिदिन/प्रति मार्ग नियत कोटे की सीमा से अधिक न हो।

5.  13 साल की आयु से छोटे और 75 साल की आयु से बड़े तथा छह सप्‍ताह से अधिक की गर्भावस्‍था वाली महिलाओं का यात्रा के लिए पंजीकरण नहीं होगा।

6.     प्रत्येक यात्री, यात्रा के लिए यात्रा परमिट प्राप्‍त करने हेतु आवेदन पत्र  और अनिवार्य स्‍वास्‍थ्‍य प्रमाण पत्र (सीएचसी) जमा करवाएगा। आवेदन पत्र और अनिवार्य स्‍वास्‍थ्‍य प्रमाणपत्र के प्रारूप तथा चिकित्‍सकों/सीएचसी जारी करने के लिए अधिकृत चिकित्‍सा संस्‍थानों की सूची श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की वेबसाइट  www.shriamarnathjishrine.com पर उपलब्ध हैं।

7.  पंजीकरण शाखा द्वारा आवेदन पत्र और सीएचसी आवेदक-यात्री को नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।

8.  यात्रा परमिट के आवेदन के लिए आवेदक-यात्री को पंजीकरण अधिकारी के पास निम्‍नलिखित दस्‍तावेज जमा कराने होंगे :

(क)  भरा हुआ निर्धारित आवेदन पत्र और

(ख)  10 फरवरी, 2016 को अथवा उसके बाद अधिकृत चिकित्‍सक/चिकित्‍सा संस्‍थान द्वारा जारी निर्धारित अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र (सीएचसी)

(ग)    पासपोर्ट साइज के चार फोटो (तीन यात्रा परमिट और एक आवेदन पत्र के लिए)

9.      पंजीकरण कार्यालय निम्नलिखित की जांच करेगा :

क  क्या  आवेदन पत्र सही से भरा गया है तथा क्‍या उस पर आवेदक यात्री ने हस्ताक्षर किये हैं।

ख  क्या सीएचसी किसी अधिकृत चिकित्‍सक/चिकित्‍सा संस्‍थान द्वारा जारी किया गया है।

ग क्‍या सीएचसी 10 फरवरी, 2016 को अथवा उसके बाद जारी किया गया है।

10 वह दिन विशेष जब यात्रा प्रांरभ की जानी है (यथा सोमवार, मंगलवार, बुधवार, बृहस्‍पतिवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार) वह यात्रा परमिट पर अंकित किया गया है। यात्रा परमिट पर अंकित दिन, वह दिन होगा, जब यात्री को बालताल और चंदनवाड़ी (पहलगाम) स्थित एक्‍सेस कंट्रोल गेट पार करने की अनुमति होगी।

11 बैंक की शाखा, यात्री परमिट जारी करने से पहले यह सुनिश्चित करेगी कि जिस तिथि को एक्‍सेस कंट्रोल गेट पार करने के लिए यात्रा परमिट जारी किया गया है, वह दिन (यथा सोमवार, मंगलवार, बुधवार, बृहस्‍पतिवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार) यात्रा परमिट पर अंकित दिन से मेल खाता हो।

12 यात्रा परमिट के फॉर्म में यात्रा वर्ष और यात्रा की तारीख नहीं छापी गई है। इसलिए यात्रा परमिट जारी करने वाली बैंक की शाखा के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह यात्रा वर्ष और यात्रा की तिथि की मोहर लगाए/अंकित करे और जहां यात्रा वर्ष और यात्रा की तिथि लिखी गई है/या उसकी मोहर लगाई गई है, उस जगह पर पारदर्शी टेप चिपकाए (यात्रा की तिथि और वर्ष में किसी तरह का फेरबदल न किया जा सके, इसके लिए पारदर्शी टेप चिपकाना महत्‍वपूर्ण है)। हालांकि यात्रा की तारीख, वर्ष और बैंक शाखा की मोहर यात्रा परमिट जारी करते समय ही लगाई जाएगी। किसी भी स्थिति में किसी भी यात्रा परिमट पर अग्रिम तौर पर ये मोहर नहीं लगाई जाएगी। इसका पालन नितांत रूप्‍से आवश्‍यक है।

13 यदि आवेदन पत्र और सीएचसी सही हैं, तो आवेदक द्वारा 50 रुपये (उपरोक्‍त में से 35 रुपये की राशि एसएएसबी के खाते में भेज दी जाएगी और शेष राशि बैंक द्वारा रखी जाएगी) प्रति यात्रा परमिट की दर पर भुगतान करने पर अनुच्‍छेद 15-17 में उल्लिखित कदमों का अनुसरण करने के बाद पंजीकरण अधिकारी उसे यात्रा परमिट जारी करेगा।

14  पंजीकरण अधिकारी आवेदन पत्र और सीएचसी में उल्लिखित विवरण के आधार पर मौके पर ही पासपोर्ट साइज के फोटो चिपकाएगा यात्रा परमिट फॉर्म भरेगा। यात्रा की तिथि भी सही प्रकार से भरी जाएगी।
15  पंजीकरण अधिकारी यात्रा परमिट पर हस्‍ताक्षर करेगा और यात्रा परमिट पर बैंक की मोहर इस प्रकार लगाएगा कि वह मोहर आधी आवेदक-यात्री की फोटो पर छपे और आधी यात्रा परमिट पर। हालांकि तिथि, वर्ष और बैंक की शाखा की मोहर यात्रा परमिट जारी करते समय ही लगाई जाएगी। किसी भी स्थिति में यात्रा प‍रमिट पर अग्रिम तौर पर मोहर नहीं लगाई जाएगी। इसका पालन नितांत रूप्‍से आवश्‍यक है।

16 आवेदक-यात्री को यात्रा परमिट जारी करने से पहले पंजीकरण अधिकारी निम्‍नलिखित विवरण दर्ज करेगा :
क यात्रा परमिट जारी करने की तिथि
ख यात्रा परमिट की क्रम संख्‍या
ग आवेदक-यात्री यात्री का नाम, पता और टेलीफोन/मोबाइल नम्‍बर
घ आवेदक-यात्री के निकट संबंधी का नाम, किसी भी आपात स्थिति में जिससे संपर्क किया जा सकता है
ड तीर्थ यात्रा का मार्ग
च बालताल/पहलगाम से यात्रा शुरू करने की तिथि

17 पंजीकरण कार्यालय बालताल मार्ग के लिए बालताल और पहलगाम मार्ग के लिए पहलगाम वाला परमिट जारी करेगा।        

धारा 370 हटाने का भाजपा का वादा हर हाल में पूरा होगा: कवेंद्र गुप्ता

जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष कवेंद्र गुप्ता ने कहा है कि राज्य से धारा ३७० हटाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के घोषणा पत्र में किए गए वादे को हर हाल में पूरा किया जाएगा।

गुप्ता ने अग्रोहा धाम में शरद पूर्णिमा के मौके पर आयोजित वार्षिकी मेले में पत्रकारों से यह बात कही। उन्होंने कहा कि धारा ३७० का मुद्दा ठंडे बस्ते में नहीं गया है जब भी मौका मिला तो इसे हटा दिया जाएगा क्योंकि धारा ३७० की बहुत सी बातें खत्म हो चुकी हैं और कुछेक परिवारों को ही इसका फायदा मिल रहा है। आम जनता को नहीं। 

उच्च न्यायालय की धारा ३७० नहीं हटाने की व्यवस्था को लेकर गुप्ता ने कहा कि यदि विधानसभा में दो तिहाई बहुमत हो तो इस संबंध में प्रस्ताव को विधानसभा और विधान परिषद से पारित करा कर धारा ३७० को समाप्त किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कश्मीर में अलगाववाद को पिछली सरकारों ने बढ़ावा दिया लेकिन अब माहौल बदल रहा है। ६८ सालों में पहली बार राज्य का कोई मुख्यमंत्री दशहरा देखने गया है। 

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी जब कश्मीर के दौरे पर गए थे तो उन्होंने भी इस बात पर चर्चा किए जाने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि राज्य में गठबंधन सरकार के दोनों घटकों की सोच अलग है लेकिन वहां विकास और राष्ट्रवाद को लेकर सरकार बनाई गई है। 

hindoorashtra.com

जम्मू-कश्मीर में किसी हिंदू का मुख्यमंत्री बनना नामुमकिन : पीडीपी

जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के एक और नेता विवादित बयान देकर विवादों में घिर गए हैं। पीडीपी नेता पीर मंसूर ने अपने एक बयान में कहा है कि जम्मू-कश्मीर में किसी भी हिंदू का मुख्यमंत्री बनना नामुमकिन है। 

उन्होंने कहा कि राज्य में कोई भी हिंदू मुख्यमंत्री इसलिए नहीं बन सकता क्योंकि कश्मीर मुस्लिम-बहुल इलाका है। मुस्लिम बहुल राज्य में भला हिंदू मुख्यमंत्री कैसे हो सकता है। उनके इस बयान की सियासी हलकों में आलोचना हो रही है।

यह पहली बार नहीं है जब कोई पीडीपी नेता विवादों में घिरा हैं। इससे पहले भी पीडीपी विधायक जावेद मुस्‍तफा मीर विवादों में घिरे क्योंकि उनपर चुनाव प्रचार के दौरान एके-47 बंदूक लेकर चलने का आरोप है। 

यह तस्वीर बाकायदा फेसबुक पर पोस्ट की गई थी जिसमें वह बड़े शान से बंदूक लेकर चलते हुए दिख रहे हैं। कई लोगों ने उनके इस तरह के व्यवहार पर आपत्ति जताई । जबकि विधायक ने कहा कि वह अपनी सुरक्षा के लिए बंदूक रखते हैं।

कर्ण सिंह के बेटे अजातशत्रु हुए भाजपा में शामिल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह के बेटे अजातशत्रु सिंह रविवार को भाजपा में शामिल हो गये और कहा कि वह जम्मू-कश्मीर के आगामी विधानसभा चुनावों में बहुमत हासिल करने के पार्टी के ‘मिशन’ के लिए काम करेंगे।

जम्मू-कश्मीर के राजा रहे हरि सिंह के पोते अजातशत्रु पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्रियों- धर्मेंद्र प्रधान और जीतेंद्र सिंह और पार्टी महासचिव राम माधव की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हुए।

जम्मू-कश्मीर मामलों के प्रभारी अविनाश राय खन्ना भी इस मौके पर मौजूद थे।

सिंह का स्वागत करते हुए शाह ने कहा, ‘भ्रष्टाचार मुक्त एवं वंशवाद मुक्त सरकार चाहने वाले राज्य के लोगों की इच्छा है कि राज्य राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल हो। मैं उन सभी से भाजपा में शामिल होने की अपील करता हूं।’ शाह ने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर के आगामी विधानसभा चुनावों में न केवल पार्टी मजबूत होगी बल्कि एक तरह से यह उस रूझान का प्रमाण है कि राज्य के लोग किस दिशा में बढ़ रहे हैं।’ शाह ने कहा कि सिंह को पार्टी में शामिल किए जाने के बाद भाजपा की संभावनाएं और इसके कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा ।

भाजपा में शामिल होने से पहले शाह के साथ हुई हालिया बातचीत का हवाला देते हुए सिंह ने कहा कि उन्होंने बता दिया था कि उनका पूरा परिवार, जिसमें समूचा राज्य शामिल है, मिशन 44 को पूरा करने के लिए पूरे मन से काम करेगा।

चुनाव बाद बीजेपी के साथ आ सकती है पीडीपी

विधानसभा के लिए होने जा रहे चुनावों से पहले जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी पीडीपी ने संकेत दिए हैं कि वह चुनाव के बाद बीजेपी के साथ आ सकती है। पार्टी चीफ मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कहा कि वह पहले भी बीजेपी के नेताओं के साथ काम कर चुके हैं और आगे भी कर सकते हैं।

एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कहा कि मैं वाजपेयी और आडवाणी के साथ काम कर चुका हूं और हमें आगे भी दिल्ली सरकार के साथ मिलकर चलना होगा। उन्होंने कहा, 'जम हम आए थे(राज्य में सत्ता में) तो वाजपेयी जी हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री थे और आडवाणी होम मिनिस्टर। उनको भी हमने साथ चलाया। हम अकेले नहीं चला सकते हैं। कंधे से कंधा मिलाकर चलना है। उन लोगों के साथ भी जो दिल्ली में आज भी बैठे हैं।' 

पीडीपी चीफ ने यह भी कहा कि भारत को पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बातचीत शुरू करनी चाहिए, ताकि इलाके में शांति कायम रह सके। उन्होंने कहा, 'अगर आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंदुस्तान को एक महान देश बनाना चाहते हैं तो उन्हें अटल जी की मिसाल पर काम करना होगा। अटल जी ने कहा था- आप अपने दोस्त बदल सकते हैं, मगर पड़ोसी नहीं बदल सकते।' 

जम्मू-कश्मीर में 25 नवंबर से 20 दिसंबर तक पांच चरणों में चुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव के नतीजे 23 दिसंबर को आएंगे।

जम्मू में नमो गर्जना, धारा 370 का किया विरोध

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने कल जम्मू के मौलाना आजाद स्टेडियम में ललकार रैली के दौरान धारा 370 के बहाने केंद्र सरकार पर फिर हमला किया. उन्होंने कहा, जम्मू-कश्मीर में धारा 370 से यहां के सामान्य लोगों का भला हुआ है? अब धारा 370  कवच के रूप में इस्तेमाल हो रही है. उसे साम्प्रदायिकता से जोड़ा जा रहा है. सरकार सिर्फ सेक्युलरिज्म के नाम पर जिम्मेदारी से बचती रही है. मोदी ने कहा, मैं हिन्दू मुस्लिम की बात नहीं करता, मैं सवा सौ करोड़ लोगों की बात करता हूं.

मोदी ने जम्मू-कश्मीर की मौजूदा हालत के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि 60 सालों के इतिहास से पता चलता है कि जम्मू कश्मीर को लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की सोच सही थी. पंडित नेहरू ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की बात को नजरंदाज किया.

उन्होंने कहा, आतंकवाद से लड़ते हुए हमारे कई देशभक्त सिपाही शहीद हो गए. जान हथेली पर लेकर देश की रक्षा करने वाले सभी सैनिकों का आदर करता हूं. लेकिन आतंकवाद से निपटने के मुद्दे पर दिल्ली की सरकार सोई हुई है. पाकिस्तान की जेलों हिंदुस्तान के दो जवान सरबजीत और चमेल सिंह को मारा गया. मैं पण्डित प्रेमनाथ डोगरा को भी याद करना चाहता हूं. जैसा उनके साथ हुआ वैसा ही सरबजीत सिंह और चमेल सिंह के साथ हुआ. अगर भारत ने अपनी आवाज बुलंद की होती तो शायद सरबजीत सिंह की मौत नहीं होती. पर सरकार सोती रही.

मोदी ने कहा कि जम्मू कश्मीर के साथ मेरा करीबी रिश्ता रहा है. किसी ने मुझे 25 साल पुराना फोटो दिया. इस फोटो को देखर मेरी पुरानी यादें ताजा हो गई. मैंने यहां बहुत काम किया है. मैं आज महाराजा हरि सिंह को याद करना चाहता हूं. अगर उन्हें 1974 के बाद फैसले लेने की मुख्य धारा में शामिल किया जाता तो आज स्थितियां अलग होती. हरि सिंह ने समाज के लिए काम किया था. उन्होंने लड़कियों की शिक्षा के लिए खूब काम किया. उन्होंने छुआछूत के खिलाफ भी आवाज बुलंद की थी.

मोदी ने कहा कि जम्मू कश्मीर को अलग स्टेट की बजाय सुपर स्टेट बनाना चाहिए. मोदी ने कहा कि दिल्ली की सरकार इतनी गहरी नींद में सोई हुई है कि उसे लोगों का गुस्सा भी जगा नहीं सकता. उन्होंने कहा कि क्या ऐसी कोई सरकार है जो उस वक्त भी सोती रहती है जब लोगों को मारा जा रहा हो.

मोदी ने केंद्र के साथ राज्य की उमर सरकार पर भी निशाना साधा. मोदी ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को जो अधिकार हासिल हैं, वह उनकी बहन सारा को हासिल नहीं हैं. मोदी ने कहा, सारा ने कश्मीर के बाहर शादी की और उसके सारे अधिकार छीन लिए गए. जो अधिकार उमर को मिलते हैं, वह उनकी बहन सारा को भी मिलने चाहिए.

मोदी ने केंद्र सरकार पर धारा 370 पर चर्चा न करने का आरोप लगाया. उन्होंने जवाहर लाल नेहरू का जिक्र करते हुए कहा था उन्होंने भी कहा था यह एक दिन खत्म हो जाएगी, लेकिन केंद्र सरकार इस पर चर्चा करने को तैयार नहीं है. उन्होंने कहा, जम्मू में धारा 370 का भी इस्तेमाल हो रहा है. समय की मांग है कि जनता की भलाई को देखते हुए इस पर चर्चा हो. पंडित नेहरू ने कहा था यह धारा समय रहते घिसते घिसते घिस जाएगी. लेकिन सरकार इस पर चर्चा तक को तैयार नहीं है. धारा 370 का उपयोग कवच के तौर पर हो रहा है. इसे सांप्रदायिकता के गहने पहना दिए गए हैं.

मोदी ने अपने भाषण में पाकिस्तानी जेल में मारे गए चमेल सिंह का भी जिक्र किया और इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा,पाकिस्तान में दो घटनाएं घटीं. एक की तरफ मीडिया का ध्यान गया, लेकिन दूसरी घटना को भुला दिया गया. पाकिस्तान की जेलों में हिंदुस्तान के दो बेगुनाह नौजवान बंद थे. एक पंजाब के थे सरबजीत और दूसरे हमारे जम्मू के चमेल सिंह. जिस जेल के अंदर सरबजीत को मारा गया, जिस तरीके से मारा गया, वैसे ही उस जेल में एक हफ्ते पहले चमेल सिंह को मारा गया था. सरकार एक हफ्ते पहले जाग जाती तो सरबजीत आज जिंदा होते.

मोदी की रैली के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे, जिसके चलते शरदकालीन राजधानी में सिविल कर्फ्यू जैसी स्थिति हो गई है। सूत्रों के अनुसार वाहनों का आवागमन व व्यापारिक प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहा. वहीं लोगों को रैली स्थल तक पहुंचाने के लिए पैदल ही तीन से पांच किलोमीटर का सफर तय करना पड़ा. सुबह से ही हज़ारों की संख्या में मोदी के समर्थक जम्मू के मौलाना आज़ाद स्टेडियम में एकत्रित हो गए थे! इसके पहले सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद कर दिया गया. चप्पे चप्पे पर सुरक्षा कर्मी तैनात थे और हर आने जाने वाले की तलाशी ली जा रही थी. पटना में मोदी रैली के हादसे को मद्देनज़र रखते हुए सुरक्षा विभाग कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था.

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