ताज़ा समाचार (Fresh News)

Cong played religious politics on 26/11: Wikileaks

Post 26/11, a section of the Congress leadership was seen playing religious politics after one of its leaders, A R Antulay, implied that Hindutva forces may have been involved in the Mumbai terror attacks, according to a confidential memo by the then US ambassador to India, David Mulford, released by WikiLeaks.

"The Congress Party, after first distancing itself from the comments (of Antulay, the then minority affairs minister), two days later issued a contradictory statement which implicitly endorsed the conspiracy. During this time, Antulay's completely unsubstantiated claims gained support in ... Indian-Muslim community," Mulford wrote in his secret cable to the State Department on December 23, 2008.

"Hoping to foster that support for upcoming national elections, the Congress Party cynically pulled back from its original dismissal and lent credence to the conspiracy," Mulford wrote.

संसद से बाहर स्पेक्ट्रम मामले की जांच की घोषणा विशेषाधिकार हनन : भाजपा

सरकार की ओर से दूरसंचार नीति की जांच उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश से कराने की घोषणा पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा ने आज कहा कि संसद से बाहर ऐसे गंभीर विषय पर घोषणा करना विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘ जब संसद का सत्र चल रहा हो, उस समय इस सर्वोच्च संस्था से बाहर इस प्रकार की घोषणा :टेलीकाम मामले की जांच: करना गंभीर विषय है।’’ उन्होंने कहा कि अगर कोई घोषणा करनी थी तो संसद का सत्र चल रहा था, सरकार को सदन में इसकी घोषणा करनी चाहिए थी।

जोशी ने कहा, ‘‘ यह निश्चित तौर पर एक गंभीर विषय है और विशेषाधिकार हनन का मामला भी बनता है।’’ गौरतलब है कि सरकार ने वर्ष 2001 से 2009 के बीच की दूरसंचार नीति और स्पेक्ट्रम आवंटन में अनियमितता की जांच उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत न्यायधीश से कराने का फैसला किया है। संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने इसके लिए उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश न्यायमूर्ति शिवराज वी पाटिल की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति का गठन किये जाने की कल घोषणा की थी।

वरुण गांधी पर मायावती सरकार ने मुकदमा चलाने की इजाजत दी

यूपी सरकार ने बीजेपी के युवा नेता और सांसद वरुण गांधी के खिलाफ भड़काऊ भाषण मामले में केस चलाने की इजाजत दे दी है। यह जानकारी यूपी के होम सेकेट्ररी दीपक कुमार ने दी है।

गौरतलब है कि 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान वरुण गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र पीलीभीत में एक समुदाय विशेष के खिलाफ कथित रूप से भड़काऊ भाषण दिया था। इस भाषण के चलते वरुण के खिलाफ 30 नवंबर 2009 के पीलीभीत के कोतवाली पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज की गई थी। उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 153, 295, 505(2) के तहत केस दर्ज किया गया था। इस मामले में शुक्रवार को यूपी की मायावती की सरकार ने वरुण के खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाजत दे दी है।

गौरतलब है कि वरुण के उस भाषण पर संघ नेतृत्व ने उन्हें समर्थन दिया। उस भाषण में वरुण ने कथित तौर पर कहा था कि 'अगर हिंदुओं की तरफ कोई हाथ बढ़ा तो मैं उसे काट डालूंगा।'

इस विवादास्पद भाषण की वजह से वरुण की छवि कट्टर हिंदू नेता की बनी. उनके खिलाफ केस चलाने की इजाजत देने के यूपी सरकार के फैसले पर अभी बीजेपी नेताओं की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।

दलाई लामा ‘‘ समकालीन बुद्ध ’’ है - प्रेमकुमार धूमल

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने आज कहा कि तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ‘‘ समकालीन बुद्ध ’’ है।

उन्होंने कहा कि दलाई लामा महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के संदेश के प्रचारक है। तिब्बत के निर्वासित संसद द्वारा राज्य विधानसभा के विधायकों के लिये दिये गये नाश्ते के दौरान धूमल ने कहा ‘‘ दलाई लामा सबसे महान जीवित बौद्ध संन्यासी है वह समकालीन बुद्ध है और महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के संदेश के प्रचारक है।’’ भारत तिब्बत संबंधों की तारीफ करते हुये दलाई लामा ने कहा ‘‘ भारत और तिब्बत के बीच शिक्षक और शिष्य का संबंध रहा है।’

जर्मन पुलिस ने दो खालिस्तान समर्थक गिरफ्तार किये

जर्मन पुलिस ने दो सिख कट्टरपंथियों को गिरफ्तार किया है। ये दोनों प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के परमार गुट से जुड़े बताए जा रहे हैं। दोनों पर हथियार खरीदने की कोशिश करने का आरोप है। मंगलवार को फ्रैंकफर्ट और पश्चिमी शहर डसेलडॉर्फ से गिरफ्तार किए गए सुखप्रीत सिंह (35) और जगतार सिंह (41) भारतीय नागरिक हैं।

अदालत ने दोनों को रिमांड पर हिरासत में भेज दिया। पुलिस का कहना है कि दोनों तस्करी के जरिये विस्फोटक , छोटे हथियार और जाली नकदी पंजाब ले जाने की फिराक में थे। उन पर पंजाब में आतंकवादियों गतिविधियों के लिए पैसे जुटाने का भी आरोप है।

भारत की राजदूत मीरा का अपमान पर भारत सख्त

अमेरिका में भारत की राजदूत मीरा शंकर के साथ अमेरिका के जैक्सन-एवर्स इंटरनेशनल एयर पोर्ट पर बदलसूकी की गई है। मिसीसिपी में ४ दिसंबर को हुई इस घटना में साड़ी पहने हुए मीरा शंकर को लाइन से बाहर कर उनकी चेकिंग की गई। साड़ी के चलते ही सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें लाइन से अलग कर उनकी जांच की जबकि मीरा शंकर ने सुरक्षा कर्मियों को यह बताया कि वे राजदूत हैं। राजदूतों को इस तरह की जांच से छूट मिली हुई है।

भारत के विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने कहा है कि मुझे आश्चर्य है कि भारत के राजनयिक के साथ इस तरह का व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है। कृष्णा के मुताबिक वह इस मुद्दे को अमेरिकी सरकार के सामने उठाएंगे। कृष्णा ने उम्मीद जाहिर की यह मामला सुलझ जाएगा। विदेश मंत्रालय ने अमेरिका में मौजूद भारतीय दूतावास से इस मामले की रिपोर्ट मांगी है।

मीरा मिसीसिपी स्टेट यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद बाल्टीमोर जाने के लिए फ्लाइट पकड़ने के लिए पंक्ति में खड़ी थीं। मीरा ने सुरक्षा कर्मियों को अपने राजनयिक होने से जुड़े काग़ज़ात दिखाए। इस दौरान मीरा शंकर के साथ मिसीसिपी विकास प्राधिकरण का प्रतिनिध और एयर पोर्ट का एक सुरक्षा अधिकारी भी था। लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा कर्मी उन्हें वीआईपी लाउंज की ओर ले गए जहां एक महिला सुरक्षा कर्मी ने मीरा शंकर की चेकिंग की। मौके पर मौजूद चश्मदीदों के मुताबिक सुरक्षा कर्मियों ने मीरा से कहा कि उन्हें इसलिए अलग करके जांच की जा रही है क्योंकि वह साड़ी पहने हुए हैं। जैक्सन एयर पोर्ट पर पूरे शरीर की जांच करने वाले स्क्रीनर नहीं हैं।

मीरा शंकर मिसीसिपी एयर पोर्ट पर मिसीसिपी स्टेट यूनिवर्सिटी की मेहमान के तौर पर पहुंची थीं। मिसीसिपी में मीरा शंकर लेफ्टिनेंट गवर्नर फिल ब्रायंट, मिसीसिपी विकास प्राधिकरण के प्रतिनिधि और जैक्सन में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों से मिली थीं। जैक्सन में मीरा शंकर ने करीब १०० लोगों को एक कार्यक्रम में संबोधित भी किया था। गवर्नर हेली बार्बर के प्रवक्ता डैन टर्नर ने कहा कि गवर्नर का कार्यालय इस मामले की जांच कर रहा है। टर्नर ने कहा कि हम इस समय पूरी घटना के बारे में जानना चाहते हैं।

मिसीसिपी स्टेट यूनिवर्सिटी से जुड़े राडवानी ने भी मीरा शंकर की जांच के समय वहां पर मौजूद थे। एयर पोर्ट सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि ३० लोगों के समूह में सिर्फ मीरा शंकर को ही जांच के लिए अलग किया गया। गौरतलब है कि अमेरिका में बने नए कानून के मुताबिक अगर कोई यात्री भारी भरकम कपड़े पहनता है तो उसकी अतिरिक्त जांच की जाएगी।

सुरक्षा एजेंसी के प्रवक्ता ने इस बारे में बयान जारी कर कहा है कि मीरा शंकर की जांच मौजूदा कानून के मुताबिक हुई है। इसके अलावा अगर किसी शख्स के गुजरने पर मेटल डिटेक्टर बजता है या कोई शख्स बॉडी स्कैनर के इस्तेमाल से मना कर देता है तो उसकी जांच सुरक्षा कर्मी अपने हाथों से करते हैं।

इस बारे में जारी दिशा निर्देशों के मुताबिक यात्री के निवेदन पर उसकी जांच गोपनीय ढंग से की जाए तो उसकी जांच गोपनीय ढंग से होनी चाहिए। लेकिन चश्मदीदों के मुताबिक मीरा शंकर के बार-बार कहने के बावजूद उन्हें एक बॉक्स में ले जाकर चेकिंग की गई। यह बॉक्स पारदर्शी था। इस जांच से तिलमिलाई मीरा ने मौके पर मौजूद लोगों से कहा कि वे फिर कभी मिसीसिपी नहीं आएंगी।

सोनिया गांधी त्याग की मूर्ति हैं - करुणानिधि

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को उनके 65वें जन्मदिन पर बधाई दी है

करुणा ने इस मौके पर सोनिया को ‘त्याग की मूर्ति’ की संज्ञा देते हुए कहा कि तमिलनाडु के लोगों में गांधी-नेहरु परिवार के प्रति बहुत प्यार और सम्मान है ।

सोनिया को भेजे एक फैक्स संदेश में द्रमुक अध्यक्ष ने कहा कि सोनिया के मार्गदर्शन में कांग्रेस नीत संप्रग सरकार देश को सुशासन दे रही है ।

उन्होंने कहा है, ‘‘आपने देश के सामने साबित कर दिया है कि आप त्याग की मूर्ति हैं , देश का मार्गदर्शन कर रही हैं । तमिलनाडु के लोगों में गांधी-नेहरू परिवार के प्रति बहुत प्यार और सम्मान है ।’’ करुणा ने सोनिया की लंबी उम्र की कामना भी की ।

बनारस ब्‍लास्‍ट: पाकिस्‍तान से जुड़े तार, 'कराची प्रोजेक्‍ट' का हिस्‍सा!

बनारस में मंगलवार शाम हुए बम धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसियों की शक की सूई इंडियन मुजाहिदीन के अलावा पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों पर भी घूम रही है। जांच एजेंसियां इसके पीछे की साजिश का भंडाफोड़ करने में लगी हैं और इसमें अमेरिका ने भी मदद की पेशकश की है। बनारस के शीतला घाट पर गंगा आरती के दौरान हुए धमाके में एक बच्ची की मौत हो गई है जबकि विदेशी सैलानियों समेत करीब 37 लोग घायल हुए हैं। इस विस्फोट की जिम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन ने ली है।

पर इसका संबंध पाकिस्‍तानी आतंकियों के 'कराची प्रोजेक्‍ट' से भी जोड़ा जा रहा है। ऐसा इसलिए भी क्‍योंकि मुंबई हमले के मास्‍टरमाइंड डेविड हेडली ने बनारस के घाटों की रेकी की थी। पाकिस्‍तानी-अमेरिकी मूल के अमेरिकी नागरिक हेडली ने एफबीआई से पूछताछ के दौरान यह कबूल किया था कि उसने भारत दौरे के समय बनारस में गंगा घाटों की रेकी की थी।

खुफिया एजेंसियां बनारस धमाके को हेडली की रेकी के अलावा उसके कराची प्रोजेक्‍ट से भी जोड़कर देख रही हैं जिसके तहत भारत के जज्‍बे को एक हजार छोटे-छोटे ‘घाव’ देकर कमजोर करने की बात कही गई थी। हेडली ने एफबीआई के समक्ष कबूल किया था कि पाकिस्‍तान भारत की सैन्‍य और आर्थिक क्षमता को तहस नहस करने के इरादे से 1000 ‘छोटे घाव’ देने की तैयारी में है। बनारस धमाके के बारे में भी यही कहा जा रहा है कि यह पाकिस्‍तान के ‘कराची प्रोजेक्‍ट’ का हिस्‍सा हो सकता है। हेडली ने कहा था कि पाकिस्‍तान हजारों घाव देकर भारत का कतरा-कतरा खून बहते देखना चाहता है।

सूत्रों ने बताया कि हजारों घाव देने का मतलब है कि आतंकी 26 नंबवर जैसा बड़ा हमला करने के बजाय छोटी-छोटी वारदातों को अंजाम देने की फिराक में हैं। मुंबई हमले के बाद पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठनों पर विश्‍व बिरादरी का दबाव काफी बढ़ गया था जिसके बाद ये छोटे-छोटे हमले कर रहे हैं। इससे पहले सितम्‍बर में दिल्‍ली के जामा मस्जिद के पास हुए आतंकी हमले की जिम्‍मेदारी भी इंडियन मुजाहिदीन ने ली थी। इस घटना के बाद इंडियन मुजाहिदीन ने ईमेल भेजकर बाबरी मस्जिद विध्‍वंस की 18वीं बरसी का बदला लेने की बात कही है। हालांकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आतंकी ईमेल की सत्‍यता की जांच शुरू कर दी है। पी चिदम्‍बरम ने आज वाराणसी जाकर घटनास्‍थल का मुआयना किया। अमेरिका ने भी बनारस धमाका मामले की जांच में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है।

क्‍या है कराची प्रोजेक्‍ट ?

कराची प्रोजेक्‍ट को पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और वहां स्थित आतंकी संगठनों जैसे लश्‍कर-ए-तैयबा और हूजी का एक मिला जुला रूप माना जाता है। इसमें शामिल आतंकियों की ट्रेनिंग पाकिस्‍तान में होती है इसके बाद भारत में वारदातों को अंजाम देते हैं।

इस प्रोजेक्‍ट का नाम पाकिस्‍तान में अरब सागर के तट पर बसे शहर कराची के नाम पर रखा गया है जो दाऊद इब्राहिम और टाइगर मेमन जैसे भगोड़े गैंगस्‍टरों की शरणगाह माना जाता है। 2003 के बाद अस्तित्‍व में आए कराची प्रोजेक्‍ट को पाकिस्‍तानी आतंकियों साजिद मीर और जकीउर रहमान लखवी की दिमाग की उपज माना जाता है।

भारतीय एजेंसियों को मिली सूचना के मुताबिक कराची प्रोजेक्‍ट अपराधियों के उस गठजोड़ का नूमना है जो बाद में जिसमें आंतकवाद भी शामिल होता है। इस प्रोजेक्‍ट के तहत ही दाऊद को स्‍थानीय सरकार का सरंक्षण मिला हुआ है। यह प्रोजेक्‍ट 2005 से अब तक 10 बम धमाकों में 517 भारतीयों की मौत के लिए सीधे तौर पर जिम्‍मेदार है। इंडियन मुजाहिदीन को भी इस प्रोजेक्‍ट का हिस्‍सा बताया जाता है। बनारस में हुआ धमाका भले ही ज्‍यादा नुकसान नहीं पहुंचा सका है लेकिन इससे आतंक की दहशत तो फैल ही गई है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने बाल ठाकरे मुलाकात की...

जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने आज शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे से मुलाकात कर उनसे देश को भ्रष्टाचार से मुक्त बनाने के लिये अपनी अग्रणी भूमिका निभाने का अनुराध किया

ठाकरे से मुलाकात के बाद स्वामी ने संवाददाताओं को बताया कि यहां भ्रष्टाचार के खिलाफ एक रैली का आयोजन किया जायेगा। इस अभियान में भाग लेने के लिये विभिन्न दलों के साथ ही उन पार्टियों को भी शामिल करने की कोशिशें की जा रही हैं जो संप्रग का हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाले की संयुक्त संसदीय दल से जांच कराने से महज प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का अपमान होगा, जिसके चलते वह इस्तीफा दे सकते हैं।

भाजपा की 24 दिसम्बर को जम्मू में विशाल रैली

भारतीय जनता पार्टी 24 दिसंबर को यहां विशाल रैली का आयोजन करेगी जिसमें पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी शिरकत करेगा।

भाजपा राज्य अध्यक्ष शमशेर सिंह मन्हास ने आज यहां कहा, ‘‘हम जम्मू में 24 दिसंबर को विशाल रैली का आयोजन कर रहे हैं जो ऐतिहासिक कार्यक्रम होगा और इसमें भाजपा का पूरा शीर्ष नेतृत्व शिरकत करके मंदिरों के इस शहर में लोगों को संबोधित करेगा।’’

उन्होंने कहा कि विशाल रैली आयोजित करके भाजपा लोगों को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा संविधान के असम्मान के बारे में जागरूक करेगी क्योंकि उमर ने राज्य विधानसभा में बयान दिया था कि जम्मू . कश्मीर भारत के साथ केवल शामिल हुआ था लेकिन उसका विलय नहीं हुआ था।

Sinister designs behind Muharram ban in Kashmir

Muharram, the month of epic action, has announced its arrival. Black banners symbolizing grief are fluttering all around. A pall of gloom has descended. Even 1500 years down the line, the lessons from Karbala continue to be the beacon of inspiration for all strugglers of truth and righteousness.

Muharram, contrary to the widespread perception, is not an event, episode or chapter in history. It is a philosophy, a concept, and a movement. As centuries roll by, the great uprising of Husain(as), the beloved grandson of Holy Prophet (saww), continues to drive believers to hurl defiance at the forces of evil. The final call Imam gave to humanity still lingers in the minds of millions of Muslims around the world. It teaches that notwithstanding the inadequacy of numbers, if you run down the gauntlet backed by the staunch faith in Almighty, triumph is always yours.


Muharram has been often derided by some brain-dead hate-mongers as a harmful grief-centric ritual, a political war, and a ritual that lacks a contemporary significance. In contrast, these commemorations are held to help the followers of justice and truth re-organize their life around the pristine principles exemplified by Hussain(as). His supreme sacrifice promotes the enjoining of good for there is no better victory than defeating a tyrant.

You must have heard how a child dies every five minutes in Darfur. You must be knowing about the cold-blooded attacks on religious congregations in Pakistan. You must be knowing about the skrieks of wailing mothers in remote zones of Kashmir. You must also have come across the gut-wrenching tales of prisoners lodged in various jails across the globe. You must have heard lot more than what I could encapsulate here. These examples exemplify the contemporary struggles against the injustice and tyranny unleashed on the weak and vulnerable world-over. The threat of injustice will always have a contemporary significance. This explains why Muslims annually commemorate the principles of Hussain as it helps strengthen the ability to stand up against injustice.

For the next few weeks, mourning processions will be carried out and grand congregations will be held in every part of the world, to pay tribute to the Master of Challengers and his fellow martyrs. Situation in Pakistan remains tense, with shoot-at-sight orders being given for Muharram owing to “serious security reasons” in and around Khyber Pakhtunkhwa. But elsewhere, preparations are afoot. Biggest of processions are taken out in London, New York, Toronto, Trinidad et al. It goes to the credit of powers-that-be in these places for not only allowing the processions to ply on busy roads, but ensuring their safety and protection too. But back in Kashmir, it is the same old atrocious story, which is being repeated since 1989. Peaceful Muharram processions would be attacked; processionists would be brutally cane-charged, manhandled and whisked away in police gypsies. The religious leaders would be house-arrested and streets would be manned by the kalashnikov -yielding monsters-in-khakhi.

The peaceful processions on 8 and 10 Muharram have been banned in Kashmir since the outbreak of insurgency in 1989. Only small mourning rallies and processions are allowed in select areas with sizeable Shia population. The authorities say the “emotional religious rituals” could be used by separatists to stoke the anti-India sentiments. Absolutely preposterous. It is like saying we won’t allow Guru Purab or Baisakhi in Punjab as Khalistanis might stoke the anti-India feelings. Just because few of the senior Shia clerics happen to be heavyweight separatist leaders, government cannot murder the people’s right to observe their religious rituals, in a rather peaceful manner.

Another equally ridiculous version is, these processions provoke Sunnis, who get all riled up and attack Shias, so the government decided to ban it altogether and avert riots. This is hilarious. I wonder why Ripley’s Believe It Or Not missed it. There is no secret how these processions have become inclusive over the years, with massive participation of Sunnis, or for that matter even Sikhs and Pandits. The majority Sunnis have been extremely accommodating towards minority Shias, and both communities have co-existed in harmony and amity for centuries. In turn, both Shias and Sunnis go out of their way in extending their support to rallies and processions taken out by non-Muslims. In the context of Kashmir, communal riots are out of question. That is sheer exaggeration.

The vitriolic truth is that State is hell-bent on creating fissures among Kashmiri Muslims on sectarian lines. By provoking Shias against Sunnis, and giving this Muharram ban a sectarian and separatist colour, they want to achieve their sinister targets. The disintegration of Muslims in Kashmir will be a final blow to the movement (Tehreek), and that is what these scheming rulers gun for.

The assault on the processionsists is totally barbaric. Take this: “Eyewitnesses alleged that as they marched ahead, a CRPF man on guard outside the house of Deputy Chief Minister Muzaffar Hussain Beig took aim at the crowd with his rifle. Other policemen, however, put him at ease,” (Indian Express Feb 08 2006). Need I say more.

Some Shia groups had challenged the ban in court of law, but as they say, “mera qatil hi mera munsif nikla” (my killer was my judge). Shias of Kashmir contest the draconian ban alleging blatant double standards. They say if Amarnath Yatra, Dushhera or Baisakhi processions don’t pose any “security threat”, why should Muharram processions, carried out in equally peaceful manner, be subject to such brutality and barbarism.

But it won’t be exaggeration to say that we have not helped our cause either. Just recently representatives of all Shia organisations attended a high-level meeting chaired by District Development Commission in Srinagar to “finalize arrangements for Muharram”. I wonder why didn’t these “representatives” raise the issue of ban during the meeting. Why didn’t they boycott the meeting in the first place.

It reminds me of how Muslims in Lucknow valiantly confronted the government to protest the ban on Muharram processions in city in Muharram 1997. Women had stormed District Magistrate office and protested there. Shia youth did matam (eulogy) at the Vidhan Sabha (Legislative Assembly). It led to the arrest of Lucknow-based prominent Shia cleric Maulana Kalbe Jawad under National Security Act (NSA) on June 28, 1997. He was sent to Lalitpur Jail while his family was incarcerated with the prisoners of TADA. Word spread like wildfire and soon protests and agitations were reported from the different parts of the country and even from New York, Syria, Pakistan, Iran and other countries. The situation went out of control and the then Mayawati government was left with no other option but to release the cleric and lift the ban on processions.

In Kashmir, we don’t lack the enthusiasm, but we certainly pay for not having a solid united front. Need of hour is to rise above all the petty differences and join hands for the greater good of community. Is that asking for too much?

वाराणसी में विस्फोट की वजह प्रदेश सरकार की सुरक्षा में चूक - चिदंबरम

वाराणसी के शीतला घाट पर कल गंगा आरती के दौरान हुए विस्फोट के बाद के हालात का जायजा लेने यहां आए गृह मंत्री पी चिदंबरम ने आज यहां स्वीकार किया कि यह हादसा सुरक्षा में चूक की वजह से हुआ तथा उत्तर प्रदेश सरकार को इस साल तीन बार सुरक्षा उपाय चाक चौबंद करने का परामर्श दिया गया था।

घटनास्थल का दौरा करने के बाद बातचीत करते हुए गृह मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार को इस वर्ष तीन बार एडवाइजरी भेजकर सुरक्षा उपायों में मुस्तैदी बरतने की हिदायत दी गई थी ।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष 25 फरवरी को पुणे विस्फोट के बाद, 26 नवंबर के मुंबई हमलों की बरसी के मौके पर और छह दिसंबर को बाबरी विध्वंस की बरसी पर खास तौर से राज्य सरकार से चौकस रहने को कहा गया था । उन्होंने विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि गंगा घाटों पर जहां रोज आरती होती है, को खास तौर से संवेदनशील बताकर विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया था, लेकिन सुरक्षा खामियों के चलते यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई ।

उन्होंने बताया कि हादसे में दो वर्ष की बच्ची स्वस्तिका की मौत हुई है और कुल 40 लोगों को घायलावस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें से 9 को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है और जो बाकी घायल अस्पताल में हैं उनमें भी कोई गंभीर रूप से घायल नहीं है । उन्होंने बताया कि घायलों में छह विदेशी थे, जिनमें से दो को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई ।

अयोध्या में मस्जिद का निर्माण किसी भी कीमत पर नहीं - तोगडि़या

विहिप ने मंगलवार को चंडीगढ़ में कहा कि अयोध्या में विवादित भूमि पर मस्जिद का निर्माण किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा चाहे इसके लिए कितना भी त्याग क्यों करना पड़े।

विहिप के महासचिव प्रवीण तोगडि़या ने यहां संवाददाताओं से कहा कि हम नई मस्जिद का निर्माण नहीं होने देंगे, इसके लिए 40 लाख कुर्बानियां भी देनी पड़ी तो देंगे। हम संसद से अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने उस स्थल पर राम जन्म की बात स्वीकार करके विहिप का समर्थन किया है।

तोगड़िया ने कहा कि रामलला की जमीन का एक इंच भी मस्जिद निर्माण के लिए नहीं दिया जाएगा। हिंदू संगठन जल्द ही सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। तोगड़िया ने कहा कि पूरे 67 एकड़ की जमीन पर राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए विहिप ने देशव्यापी अभियान शुरु किया है।

उन्होंने जम्मू कश्मीर की स्थिति को लेकर सवाल उठाने वाले हुर्रियत के नेता सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारुख की आलोचना करते हुए कहा कि उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

जेपीसी से जांच कराने की मांग को पूरी तरह से बेमतलब और अनुचित - सिंघवी

टूजी स्पेक्ट्रम मामले की जेपीसी से जांच कराने की विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए कांग्रेस ने आज इस मांग को पूरी तरह से बेमतलब और अनुचित करार दिया

पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि विपक्ष की जेपीसी की मांग न तो नीतिगत है, न ही तर्क संगत और न ही उचित । यह पूरी तरह से जनहित में नहीं है । यह राजनीतिक हित की मांग है । उन्होंने कहा कि इसके पीछे इरादा किसी को दंडित करने का या सुधार करने का नहीं बल्कि सिर्फ राजनीतिक है।

उन्होंने कहा कि जो काम और कार्यवाही सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय या आयकर विभाग कर सकता है, वह जेपीसी नहीं कर सकती । इसके अलावा उच्चतम न्यायालय से ज्यादा तहकीकात और क्या हो सकती है । क्या जेपीसी वह सब कर सकती है ।

उन्होंने कहा कि जहां तक लोक लेखा समिति :पीएसी: की बात है तो यह भी एक संयुक्त संसदीय समिति ही है जिसमें दोनों सदनों के सदस्य बैठते हैं । साथ ही इसके अध्यक्ष विपक्षी दल के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी है । उन्होंने मुख्य विपक्षी दल से सवाल किया कि क्या उसे अपने वरिष्ठ नेता पर भरोसा नहीं है ।

सिंघवी ने कहा कि यह सही है कि जेपीसी किसी को भी सम्मन कर सकती है । क्या विपक्ष का एक ही उद्देश्य जेपीसी द्वारा प्रधानमंत्री को सम्मन कराने का है ।

उन्होंने कहा कि सभी मांग सनसनी फैलाने के लिए है .. राजनीतिक हित के लिए है और बिना किसी मायने के है ।

हज का पैसा आतंकवाद के लिए इस्तेमाल हुआ - विकीलीक्स

कई आतंकियों ने हज यात्रियों से धन इकट्ठा करने के लिए बार-बार सालाना हज यात्रा का इस्तेमाल किया और इस तरीके से इकट्ठा हुए धन का इस्तेमाल मुम्बई हमले में किया गया। यह जानकारी विकिलीक्स द्वारा प्रकाशित अमेरिका के एक गोपनीय संदेश में सामने आई है।

' स्काई न्यूज' की एक रिपोर्ट में 'न्यू यार्क टाइम्स' द्वारा प्रकाशित उन सम्भावित तरीकों की एक लम्बी सूची का जिक्र किया गया है, जिनके इस्तेमाल के जरिए आतंकी अपनी गतिविधियों के लिए पैसा जुटाते हैं। एक संदेश में कहा गया है कि आतंकियों ने हज यात्रियों से धन जुटाने के लिए सालाना हज यात्रा का बार-बार इस्तेमाल किया और उस धन का इस्तेमाल मुम्बई हमले में किया।

बाकी दस्तावेजों में कहा गया है कि अमेरिका मानता है कि सऊदी अरब के जकात दाता, ''दुनिया भर में सुन्नी आतंकी संगठनों के वित्त पोषण के अति महत्वपूर्ण स्रोत हैं।'' अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन द्वारा दिसम्बर 2009 में भेजे गए एक संदेश में सऊदी अरब को अलकायदा के लिए ''एटीएम मशीन'' बताया गया है।

लीक संदेशों में कहा गया है कि संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद रणनीतिक कमजोरी का आतंकी दुरुपयोग करते हैं। कतर को आतंक विरोध के मामले में सबसे बुरा बताया गया है।

कुछ गोपनीय संदेशों में दुनिया में कुछ ढांचागत सुविधाओं को आतंकी हमले की स्थिति में अमेरिकी सुरक्षा के लिए गम्भीर बताया गया है।

दस्तावेज में दुनियाभर में सैकड़ों पाईपलाइनों, तारों और औद्योगिक स्थलों का विवरण दिया गया है, जिन्हें अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानता है। उन जगहों पर होने वाले खतरे का अमेरिकी सुरक्षा पर गम्भीर असर हो सकता है।

संदेश के मुताबिक अमेरिकी दूतावासों को सम्बंधित देशों में स्थित उन प्रमुख जगहों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया था, जिनके ध्वस्त होने पर अमेरिका के सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय व घरेलू सुरक्षा पर असर पड़ सकता था।

बुद्धदेव भट्टाचार्य के बयान पर भड़की ममता

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने आज पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के बयान के जवाब में राज्य के लोगों से विकास और माकपा में से किसी एक को चुनने के लिये कहा।

दरअसल वाम दलों की कोलकाता में 30 नवंबर को हुई जनसभा में मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने राज्य के लोगों से ‘वाम दल या मौत’ में से किसी को चुनने के लिए कहा था।

ममता ने उत्सव मैदान में यहां अयोजित जनसभा में कहा, ‘‘यह किस तरह के मुख्यमंत्री हैं जो लोगों से वामदल और मौत में से किसी एक को चुनने के लिये कहते हैं । क्या उन्हें लोकतंत्र का जरा भी सम्मान है? हम कहते हैं कि चुनाव विकास या माकपा के बीच होना है ।’’ उन्होंने कहा कि पुलिस और हथियारों के बिना मदद के जंग होने दीजिये, फिर पता चलेगा कि माकपा के गुंडों और समर्पित तृणमूल कार्यकर्ताओं में कौन मजबूत है ।

मध्यप्रदेश प्रत्येक गांव का मास्टर प्लान तैयार करने वाला देश का पहला राज्य

मध्यप्रदेश प्रत्येक गांव का मास्टर प्लान तैयार करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है

वित्त एवं योजना मंत्री राघवजी ने यहां विकेन्द्रीकृत जिला नियोजन विषय पर आयोजित सममेलन को संबोधित करते हुए कहा कि विकेन्द्रीकृत जिला नियोजन अवधारणा पर निरंतर काम करते हुए इसे अंतिम रुप दिये जाने का काम आज से शुरु हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के पांच जिलों में विकेन्द्रीकृत जिला योजना की व्यवस्था लागू की गई थी। अब इसे सभी जिलों मे लागू किया जा रहा है। आज से हर रोज पांच जिलों की योजना पर विस्तृत चर्चा कर इसे अंतिम रुप दिया जायेगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि योजना विभाग की यह एक ऐसी महान उपलब्धि है जो अपेक्षाओं से कहीं अधिक है।

उन्होंने कहा कि उनके द्वारा पिछले साल पांच जिलों में इस व्यवस्था का शुभारंभ किया गया था तब उन्हें इसकी सफलता को लेकर कुछ आशंका थी और लगता था कि प्रदेश के सभी जिलों में यह कार्य प्रभावी रुप से नहीं हो पयेगा। लेकिन आज यह आशंका पूरी तरह निर्मूल साबित हो गयी है। इसके लिए उन्होंने योजना विभाग तथा योजना आयोग को बधाई दी।

लश्कर-ए-तैयबा के निशाने पर थे मोदी - विकीलीक्स

दुनियाभर में अपने खुलासों से तहलका मचाने वाली वेबसाइट विकीलीक्स ने दावा किया है कि लश्कर-ए-तैयबा ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जान से मारने की साजिश रची थी। विकीलीक्स के मुताबिक इस साल जून में पाकिस्तान में बैठे लश्कर के आतंकियों ने भरत में मौजूद सदस्यों से नरेंद्र मोदी को उड़ाने संबंधी चर्चा की थी।

लश्कर-ए-तैयबा मुंबई हमलों के मात्र 6 महीने बाद ही भारत में तीन और बड़ी वारदातें करने की साजिश रच रहा था। इनमें नरेंद्र मोदी की हत्या, दक्षिण में आतंकी कैंपों का गठन करना और एक कार धमाका करना शामिल था। हालांकि कार संबंधी साजिश का पूरा खुलासा नहीं हो सका। विकीलीक्स ने यह खुलासा अमेरिकी इंटेलीजेंस के लीक हुए केबल संदेशों के जरिए किया है।

केबल संदेशों के मुताबिक लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य शफीख खाफा यह तीनों साजिश रच रहा था। भारत में हुसैन नाम के एक लश्कर आतंकी ने जून में साजिश को अमली जामा पहनाने के लिए काम करना शुरु कर दिया था। हुसैन को मोदी को मारना था तथा दक्षिण में कैंप स्थापित करना था। तीसरा काम किसी कार के संबंध में था लेकिन उसका पूरा खुलासा नहीं हो सका। लीक हुए केबल संदेश के मुताबिक हुसैन की मदद कोई समीर नाम का व्यक्ति कर रहा था। समीर भी भारत का ही रहने वाला है।

जेपीसी गठित करने की मांग से कोई समझौता नहीं होगा - भाजपा

सरकार की अपील खारिज करते हुए भाजपा ने आज इस बात से इनकार किया कि वह 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाले की जांच के लिये संयुक्त संसदीय समिति :जेपीसी: का गठन करने की अपनी मांग से पीछे हट जायेगी और आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है।

मुख्य विपक्षी दल ने संसद निर्बाध रूप से चलाने की जिम्मेदारी सरकार पर डालते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही कल से बिना किसी अवरोध चल सकती है, बशर्ते जेपीसी गठित करने की मांग को मान लिया जाये।

भाजपा प्रवक्ता सैयद शहनवाज हुसैन ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘कांग्रेस जेपीसी से घबरा क्यों रही है? क्या कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार को इस बात की आशंका है कि इस तरह की जांच करने से उसके राज सामने आ जायेंगे। ..जेपीसी गठित करने की मांग से कोई समझौता नहीं होगा।’’ स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए हुसैन ने कहा कि उनकी सरकार एक व्यक्ति के भ्रष्टाचार से अपनी जिम्मेदारी को अलग नहीं कर सकती। भ्रष्टाचारी को बचाना भ्रष्टाचार करने जितना ही गंभीर अपराध है।

सरकार ने इस संभावना से इनकार किया कि वह जेपीसी गठित करेगी। सरकार ने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा करने का प्रस्ताव रखा है।

नौ दिसम्बर को छोड़कर संसद के शीतकालीन सत्र के अब तक के सभी दिन हंगामेदार ही रहे हैं। सरकार ने अहम वित्तीय विधेयक हंगामे के बीच ही बिना किसी चर्चा के दोनों सदनों में पारित कराये हैं।

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