‘जल क्रांति’ को ‘जन क्रांति’ बनाने की जरूरत: उमा भारती


जल मंथन-3 का किया शुभारंभ, जल को समवर्ती सूची में लाने के मुददे पर राज्यों से चर्चा

केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने ‘जल क्रांति’ को ‘जन ‘क्रांति’ बनाने का आह्वान किया है। सुश्री भारती ने आज नई दिल्ली में ‘जल मंथन-3’ का उद्घाटन करने के बाद समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि पानी बचाने की जिम्मेदारी अकेले सरकारी तंत्र की नही हो सकती बल्कि इस कार्य के लिए जन भागीदारी बहुत जरूरी है। साथ ही गैर सरकारी संगठनों के सहयोग की भी जरूरत है।

जल को बचाने के लिए नवाचारों का जिक्र करते हुए सुश्री भारती ने कहा कि उनका मंत्रालय जल के प्रयोग एवं गंगा संरक्षण पर नया कानून लाने पर विचार कर रहा है। जल को समवर्ती सूची का विषय बनाये जाने पर उऩ्होंने कहा,-‘‘राज्यसभा और लोकसभा में जल को समवर्ती सूची में लाने की मांग उठी है। इस विषय पर राज्यों के साथ बातचीत कर रहे हैं। क्या संविधान की मर्यादाओं के अंतर्गत इस का कोई निदान निकाला जा सकता है? इस पर विचार चल रहा है।’’

केन - बेतवा परियोजना में आ रही बाधाओं एवं उनके समाधान का जिक्र करते हुए केद्रीय मंत्री ने कहा ‘‘केन- बेतवा परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। लेकिन एआईबीपी के तहत इसकी फंडिंग का अनुपात 60-40 निर्धारित हो गया है। हमारी जददोजहद है कि यह अनुपात या तो 100 प्रतिशत हो या 90-10 प्रतिशत हो।’’ उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस परियोजना पर 2017 के प्रारंभ में ही काम शुरू हो जायेगा एवं इसे सात साल के अंदर पूरा कर लिया जायेगा।

महानदी-गोदावरी नदी जोड़ो परियोजना पर हो रही राजनीति का जिक्र करते हुए सुश्री भारती ने कहा कि मानस-संकोष-तीस्ता-गंगा-महानदी-गोदावरी देश की नदी जोडो परियोजनाओं का ‘मदर लिंक’ है। उन्होंने कहा-‘‘इस पर जो विरोध है वह राजनीतिक है। तर्क और बुनियादी आधार के बजाय यह भावनाओं पर आधारित विरोध है। इस परियोजना से ओडिशा, बिहार एवं बंगाल की सुखाड़ तथा बाढ़ की समस्याओं का समाधान होगा।’’

केंद्रीय मंत्री ने ‘पार-तापी नर्मदा’ एवं ‘दमनगंगा पिंजल’ नदी जोड़ो परियेाजनाओं से होने वाले लाभों का जिक्र करते हुए कहा  कि ‘दमनगंगा पिंजल’ मुम्बई के लिए 2060 तक पीने के पानी की व्यवस्था करेगी और ‘पार-तापी नर्मदा’ महाराष्ट्र और गुजरात के उन आदिवासियों की प्यास बुझाएगी जो वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।

गंगा संरक्षण पर हुए कार्यों की चर्चा करते हुए सुश्री भारती ने कहा कि इस पर तेजी से कार्य चल रहा है और जो गंगा विश्व की दस सबसे प्रदूषित नदियों में शामिल होती थी वह आऩे वाले समय में निश्चित ही दुनिया की 10 स्वच्छ नदियों में शामिल होगी। जल संसाधन प्रबंधन के विभिन्न विषयों की चर्चा करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि ‘जल उपभोक्ता संगठन’ कई राज्यों में ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मंत्री श्री विजय गोयल ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण समय की मांग है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि जल के जो प्राकृतिक संसाधन हमें अतीत में मिले हैं वह भविष्य में भी उपलब्ध हों। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने दूषित जल प्रबंधन पर और अधिक ध्यान देने का आह्वान किया। उऩ्होंने कहा कि हमारे देश में बड़ी संख्या में जल का दुरूपयोग हो रहा है यदि इसका समुचित प्रबंधन कर लिया जाए तो इस बहुमूल्य प्राकृतिक संपदा को बचाया जा सकता है। मंत्रालय के सचिव डॉ. अमरजीत सिंह ने कहा कि हमें जल के प्रयोग की  जिम्मेदारी तय करनी होगी ताकि इसका दुरूपयोग रोका जा सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए जल संरक्षण के महत्व को समझने की संस्कृति विकसित करनी होगी।  

इस एक दिवसीय सम्‍मेलन में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, नदी घाटी प्रबंधन, नदी संरक्षण और पारिस्थितिकी, बाढ़ प्रबंधन जल प्रयोग कुशलता और सहभागिता सिंचाई प्रबंधन जैसे विषयों पर व्‍यापक विचार-विमर्श हुआ। सम्‍मेलन में मंत्रालय की नीतियों को लोगों के प्रति ज्‍यादा मित्रवत बनाने और राज्‍यों की आवश्‍यकताओं के प्रति ज्‍यादा उत्तरदायी बनाने पर ध्‍यान दिया गया। 

इस सम्‍मेलन में राज्यों एवं संघ शासित प्रदेशों के सिंचाई/जल संसाधन मंत्री, जल प्रबंधन क्षेत्र के प्रख्यात विशेषज्ञ, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि और केंद्र एवं राज्य सरकारों के सभी संबंधित विभागों के वरिष्‍ठ अधिकारियों समेत करीब 700 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

उल्‍लेखनीय है कि जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने जल संसाधन विकास और प्रबंधन में जुड़े विभिन्‍न पक्षों के बीच व्‍यापक विचार विमर्श की आवश्‍यकता पर समय-समय पर बल दिया है ताकि जल संसाधन विकास को पर्यावरण, वन्‍य जीवों और विभिन्‍न सामाजिक एवं सांस्‍कृतिक पद्धतियों के साथ बेहतर ढ़ंग से जोड़ा जा सके। जल मंथन कार्यक्रमों का आयोजन इसी उद्देश्‍य से किया जाता है।  नवंबर 2014 और फरवरी 2016 में आयोजित पहले दो जल मंथन कार्यक्रम बहुत सफल रहे हैं।

संस्‍कृति मंत्रालय एक वर्ष के लिए मना रहा है नानाजी देशमुख की जन्म शताब्दी


संस्कृति मंत्रालय 11 अक्‍तूबर, 2016 से 11 अक्‍तूबर 2017 तक "नानाजी देशमुख की जन्म शताब्दी का आयोजन कर रहा है। इस अवधि के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों को आयोजित किया जाएगा। इस स्मरणोत्सव के तहत गतिविधियों के एक हिस्‍से के रूप में आज नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय, नई दिल्ली में उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी ने मुख्य अतिथि के रूप में इस समारोह की अध्यक्षता की। इस कार्यक्रम में केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती, संस्कृति और पर्यटन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) डॉ महेश शर्मा, संस्कृति मंत्रालय में सचिव श्री एन. के. सिन्हा और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी और अन्य मेहमानों ने नानाजी देशमुख पर आयोजित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया और उसके बाद दीप प्रज्जवलित करके महान नेता नानाजी देशमुख को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी और विशेष अतिथि सुश्री उमा भारती ने नानाजी देशमुख के जीवन से संबंधित विभिन्न पहलुओं के बारे में प्रकाश डाला। उन्‍होंने नानाजी देशमुख के साथ अपनी-अपनी यादों और अच्‍छे संबंधों के बारे में जानकारी साझा की।

सभा को संबोधित करते हुए संस्कृति मंत्री, डॉ महेश शर्मा ने कहा कि नानाजी देशमुख एक महान व्यक्ति थे, जिन्‍होंने यह साबित कर दिया है कि अगर किसी भी कार्य को राष्ट्रवाद की भावना के साथ किया जाता है तो उसकी सफलता निश्चित रहती है। वे चाहते थे कि समाज के गरीब से गरीब व्यक्ति तक सभी सुविधाओं का लाभ पहुँचना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार ने चित्रकूट के पर्यटन के विकास के लिए 43 करोड़ की राशि स्‍वीकृत की है। संस्कृति मंत्रालय आईजीएनसीए, जनपथ, नई दिल्ली के परिसर में 15 से 23 अक्टूबर 2016 तक ग्रामीण भारत पर आधारित राष्‍ट्रीय संस्कृति महोत्‍सव-2016 का आयोजन कर रहा है। इस महोत्‍सव में भारतीय कला और परंपराओं के प्रदर्शन के अलावा संस्कृति मंत्रालय के अधीन सभी सातों क्षेत्रीय सांस्‍कृतिक केन्‍द्र, कला और संस्‍कृति के शो आयोजित करेंगे और विभिन्‍न स्‍टालों के माध्‍यम से खाद्य संस्‍कृति का भी प्रदर्शन किया जाएगा।

नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित दीनदयाल उपाध्याय अनुसंधान संस्थान के महासचिव श्री अतुल जैन ने सभा को संबोधित किया और नानाजी देशमुख के जीवन पर प्रकाश डाला। संस्‍कृति सचिव श्री एन. के. सिन्हा ने इस अवसर पर धन्यवाद ज्ञापन दिया।

उमा भारती के बयान "गंगा की डॉल्फिन प्रदूषण से अंधी हो गई हैं" पर स्‍पष्‍टीकरण


जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती द्वारा लोक सभा में दिए गए बयान का हवाला देते हुए मीडिया के कुछ हिस्‍सों में यह खबर आई है कि बयान के अनुसार गंगा की डॉल्फिन मछलियां प्रदूषण के कारण अंधी हो गई हैं, लेकिन उनके मंत्रालय के पास इस दावे के समर्थन में कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। रिपोर्ट में जल संसाधन मंत्रालय से प्राप्‍त एक आरटीआई जवाब का हवाला भी दिया गया है। 

इस संदर्भ में यह स्‍पष्‍ट किया जा रहा है कि मंत्री महोदया नियमित आधार पर गंगा से संबंधित विभिन्‍न गतिविधियों की समीक्षा करती रहती हैं। इसी तरह की एक समीक्षा के तहत गंगा के जल-जीवन का भी जायजा लिया गया था। इस समीक्षा में एक विशेषज्ञ ने जल-जीवन के बारे में एक प्रस्‍तुतिकरण दिया था, जिसमें मंत्री महोदया को जानकारी दी गई थी कि गंगा की डॉल्फिन मछलियां नदी के प्रदूषण के कारण अंधी हो रही हैं। इस तरह मंत्री महोदया द्वारा दिया गया बयान तथ्‍यात्‍मक रूप से सही है। 

राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन ने जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरटीआई का जवाब देते समय इस तथ्‍यात्‍मक सूचना का उल्‍लेख क्‍यों नहीं किया गया। 

उमा भारती ने 560 करोड़ रुपए की नमामि‍ गंगे परि‍योजनाओं का शि‍लान्‍यास कि‍या


केंद्रीय जल संसाधन, नदी वि‍कास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने कानपुर में गंगा बैराज पर नमामि‍ गंगे कार्यक्रम के तहत वि‍भि‍न्‍न परि‍योजनाओं का शि‍लान्‍यास कि‍या। इनमें 63 करोड़ रुपए की लागत से सीसामऊ नाले की अवरोधन और दि‍शा परि‍वर्तन योजना, नेटवर्किंग के लि‍ए 397 करोड़ रुपए की नेटवर्किंग योजना, बि‍ठूर में नदी तट के वि‍कास के लि‍ए 100 करोड़ रुपए की योजनाएं और वहां 14 घाटों और 5 शवदाह गृहों का निर्माण शामि‍ल है। इस अवसर पर उन्‍होंने कहा कि‍ उनका मंत्रालय  हाइब्रिड एन्यूटी आधारित पी पी पी मॉडल के माध्यम से शोधित जल के पुनः इस्तेमाल के लिए बाज़ार विकसित करेगा जिससे एसटीपी और ईटीपी से निकलने वाला जल वापस नदी में न जाये। मंत्री महोदया ने कहा कि‍ इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों के साथ समझौता ज्ञापन भी किये जा रहे हैं| उन्‍होंने कहा,‍ ‘’हम गंगा जी के संरक्षण के लि‍ए निर्धारि‍त प्रक्रि‍या से गुजरेंगे। कि‍सी भी जल्‍दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेंगे जि‍ससे कि‍ आबंटि‍त धनराशि‍ व्‍यर्थ न जाए।‘’


कार्यक्रम में अपने अध्यक्षीय संबोधन में कानपुर से लोकसभा सदस्‍य डॉ मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि गंगा की आज जो दुर्दशा हो रही है उसके लिए हम सभी जिम्मेदार हैं। हमें गंगा के प्रति अपने स्वभाव में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है| उन्होंने सुझाव दि‍या कि‍ गंगा का इतिहास बताने वाले एक दृश्‍य और श्रव्‍य कार्यक्रम के माध्यम से लोगों में इस अभि‍यान के प्रति‍ जागरूकता फैलाई जा सकती है|  


उल्‍लेखनीय है कि‍ जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा सात राज्यों - उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और हरियाणा में नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाली गतिविधियों का क्रियान्वयन प्राथमिकता के तौर पर किया जा रहा है। इसी के तहत 7 जुलाई 2016 को सातों राज्यों में 231 परियोजनाओं का एक ही समय पर अलग-अलग स्थानों पर एक साथ शुभारंभ किया गया । इसमें विभिन्न घाटों के नवीनीकरण, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का पुनर्वास एवं विकास, वृक्षारोपण व जैव विविधता संरक्षण की परियोजनाएं शामि‍ल हैं। कानपुर में प्रवेश स्तर की गतिविधियों के अंतर्गत 11 घाटों और 2 शवदाह गृहों के निर्माण का काम शुरु कि‍या गया।  

इस अवसर पर प्रख्यात नृत्यांगना आरुषी और उनकी टीम द्वारा गंगा जी पर एक नृत्य नाटिका भी प्रस्‍तुत की गई।  

दुनिया में भारतीय सैनिकों की आत्‍मशक्ति की बराबरी नहीं: उमा भारती


केन्‍द्रीय जल संसाधन एवं नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने कहा है कि देश के पूर्वोत्‍तर तथा कश्‍मीर में अशांति और आंतरिक सुरक्षा का सामना करते हुए हमारे पुलिस बल, अर्द्धसैनिक बल के जवान और सैन्‍यकर्मी सुविधा उपलब्‍ध न होने के बावजूद हमेशा देश की सुरक्षा के प्रति समर्पित रहे हैं। ‘ उनकी आत्‍मशक्ति का दुनिया में कोई बराबरी नहीं है।’ वे आज नागपुर में सीआरपीएफ कर्मियों द्वारा हिंगना रोड स्थित केन्‍द्रीय सुरक्षित पुलिस बल(सीआरपीएफ) समूह केन्‍द्र में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम में बोल रही थीं।

सुश्री भारती रक्षा बंधन के अवसर पर सीआरपीएफ जवानों, अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्‍यों का स्‍वागत किया और जवानों तथा अधिकारियों के माथे पर तिलक लगाकर रक्षाबंधन समारोह में भाग लिया।

उन्‍होंने कहा ‘राष्‍ट्र की सुरक्षा या तो दुश्‍मनों को मार कर सुनिश्चित की जा सकती है या फिर अपनी बलिदानी देकर। हमारे अर्द्धसैनक बलों और अन्‍य सुरक्षा बलों के जवान पूर्ण देशभक्ति से प्रेरित और पूर्ण समर्पण के साथ लगातार काम कर रहे हैं। वे हमेशा तैयार रहते हैं। सुरक्षा कर्मियों के लिए महिला सम्‍मान सबसे अहम है।’ उन्‍होंने कहा कि हिमालय में सीमा पर शहादत प्राप्‍त करने वाले सैनिक और योगी दोनों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंत्री महोदया ने कहा कि पुलिस व सेना की वर्दी धारण करने वाली महिलाएं इसके साथ अच्‍छी पत्‍नी, माता और बहन की उत्‍तरदायित्‍व का भी निर्वाह करती हैं। इस अवसर पर सुश्री भारती ने सीआरपीएफ परिसर में पौधारोपण भी किया। 

केन्‍द्रीय सुरक्षित पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिरीक्षक श्री सुनील सिंह और उपनिरीक्षक श्री अखिलेश प्रताप सिंह तथा सीआरपीएफ अधिकारियों एवं जवानों के परिवारों के सदस्‍यों ने भारी संख्‍या में इस कार्यक्रम में भाग लिया। 

नमामि गंगे योजना के तहत देशभर में 231 परियोजनाओं की शुरूआत

नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत देशभर में विभिन्‍न स्‍थानों पर 231 परियोजनाओं की शुरूआत हुई। नई दिल्‍ली में यह जानकारी देते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने बताया कि ये परियोजनाएं उत्‍तराखंड, उत्‍तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और दिल्‍ली में शुरू की जा रही हैं। सुश्री भारती ने बताया कि इन परियोजनाओं में घाटों का नवीनीकरण, सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्रों का पुनर्वास- विकास, वृक्षारोपण एवं जैव विवि‍धता संरक्षण शामिल है। 

मंत्री महोदया ने बताया कि उत्‍तराखंड के देहरादून, गढ़वाल, टीहरी गढ़वाल, रूद्र प्रयाग, हरिद्वार और चमोली जिलों में 47 परियोजनाएं शुरू की जाएगी। मुख्‍य कार्यक्रम हरिद्वार में आयोजित होगा जिसमें मंत्री महोदया के साथ उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री श्री हरीश रावत और केंद्रीय मंत्री श्री नि‍तिन गडकरी, चौधरी बीरेन्‍दर सिंह और श्री महेश शर्मा मौजूद रहेंगे। 

नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 20 परियोजनाएं पश्चिम बंगाल के उत्‍तरी 24 परगना, नदिया, दक्षिण 24 परगना और हावड़ा जिलों में शुरू की जाएंगी। मुख्‍य कार्यक्रम बजबज में आयोजित होगा। बिहार के बक्‍सर, वैशाली, सारण, पटना और भागलपुर जिलों में 26 परियोजनाएं शुरू की जाएगी। मुख्‍य कार्यक्रम पटना में आयोजित होगा। उत्‍तर प्रदेश के अमरोहा, बिजनौर, हापुड़, मुजफ्फरनगर, मेरठ, मथुरा, इलाहाबाद, वाराणासी, फरूखाबाद और कानपुर जिलों में 112 परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। नरोरा, मथुरा, वाराणसी और कानपुर में मुख्‍य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 

गंगा ग्राम योजना का उल्‍लेख करते हुए सुश्री भारती ने कहा कि इस योजना के पहले चरण में गंगा के तट पर बसे 400 गांवों का विकास किया जाएगा। उन्‍होंने बताया कि देश के 13 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थानों ने ऐसे 5-5 गांवों का विकास करने की जिम्‍मेदारी ली हैं। सुश्री भारती ने कहा कि इन गांवों के 328 सरपंचों को अब तक पंजाब के सींचेवाल गांव ले जाया गया है जहां उन्‍होंने सींचेवाल के विकास की जानकारी ली। मंत्री महोदया ने बताया कि गंगा के किनारे आठ जैव विविधता संरक्षण केंद्रों का विकास किया जाएगा। ये केंद्र ऋषिकेश, देहरादून, नरोरा, इलाहाबाद, वाराणासी, भागलपुर, साहिबगंज और बैरकपुर में स्‍थापित किए जा रहे हैं। 

राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन घाटी आधारित समग्र दृष्टिकोण अपनाते हुए राष्‍ट्रीय गंगा नदी प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले पांच राज्‍यों में प्रदूषण नियंत्रण, जलीय संसाधन संरक्षण और संस्‍थागत विकास परियोजनाओं को लागू करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। इन्‍हीं प्रयासों के अंतर्गत ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित करने हेतु गंगा के किनारे बसे शहरों एवं 1657 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों के साथ जन जागरूकता बढ़ाने के लिए राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन द्वारा नियमित संवाद किया जा रहा है तथा उन्‍हें नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत क्रियान्वित की जा रही विभिन्‍न गति‍विधियों से अवगत कराया जा रहा है। 

जल संसाधन तथा गंगा संरक्षण मंत्रालय के बजट में 168% की बढ़ोतरी


जल संसाधन मंत्रालय का कुल संसाधन आबंटन 2015-16 के 7,431 करोड़ रुपये की तुलना में 2016-17 के बजट में बढ़ाकर 12, 517 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह बजटीय समर्थन और बाजार उधार से हुआ है । यह 168 प्रतिशत से अधिक वृद्धि है ।

यह जानकारी आज नई दल्ली में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने दी। उन्होंने बताया कि भू-जल के आवंटन में 85 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और सतत भू-जल संसाधन के लिए 6,000 करोड़ रुपये के प्रमुख कार्यक्रम को स्वीकृति मिली है ।

सुश्री उमा भारती ने शीघ्र सिचांई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी) की चर्चा करते हुए बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब तक कुल 297 परियोजनाएं शुरू की गई हैं और जिनमें से अब तक 143 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं। 149 चल रही परियोजनाओं में से 89 परियोजनाओं को सक्रिय पाया गया है और उनमें से 46 परियोजनाएं उच्‍च प्राथमिकता श्रेणी के तहत रखी गई हैं। ये परियोजनाएं संभवत: विभिन्‍न स्‍तरों में 2020 के अंत तक पूरी हो जाएंगी। इसके अतिरिक्‍त इन 46 परियोजनाओं में से आगे 23 परियोजनाओं को चुना गया है और इन्‍हें मार्च, 2017 तक पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं पर कार्य मिशन मोड में किया जा रहा है ताकि परियोजनाएं निर्धारित समय तक पूरी हो जाएं और इन परियोजनाओं से कृषकों को पूर्ण लाभ प्राप्‍त हो सके। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं के लिए निधि की व्‍यवस्‍था करने के लिए एक नवाचारी निधियन प्रणाली तैयार की गई है। केन्‍द्र और राज्‍यों के वार्षिक बजट से 10-20 वर्षों के बीच पुनर्भुगतान अनुसूची सहित बाजार ऋण से निधि‍की व्‍यवस्‍था की जाएगी। प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को पूरा करने के लिए केन्‍द्र और राज्‍य दोनों मिलकर मिशन मोड में कार्य करेंगे। इस कार्य में और तेजी लाने के लिए तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और महाराष्‍ट्र के सिंचाई मंत्रियों सहित कुछ अन्‍य राज्‍यों के प्रधान सचिवों की एक समिति गठित की गई है। 

सुश्री भारती ने कहा कि भारत में भूमि जल संसाधनों के अतिदोहन, अस्‍थायी सिंचाई और जल गुणवत्‍ता गिरने से भूमि जल आपूर्ति की विश्‍वसनीयता को खतरा हो रहा है। भारत विश्‍व भर में भूमि जल का सबसे बड़ा प्रयोक्‍ता है। कुल उपलब्‍ध 433 क्‍यूबिक किलोमीटर पुनर्भरणीय स्रोतों में से प्रति वर्ष 245 क्‍यूबिक किलोमीटर भूमि जल दोहन का अनुमान है जो कि विश्‍व के कुल जल का एक चौथाई से अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में 60 प्रतिशत से अधिक सिंचित कृषि और 85 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति भूमि जल पर आधारित है। राष्‍ट्रीय भूमि जल प्रबंधन सुधार परियोजना में स्‍थायी भूमि जल संसाधन प्रबंधन और सुधारों के लिए एक वातावरण तैयार करने के लिए सहायता का प्रस्‍ताव है ।

उन्होंने बताया कि कुल वित्‍तीय परिव्‍यय 6000 करोड़ रूपये है जिसमें से 3000 करोड़ रूपये आईबीआरडी ऋण के रूप में मिलेंगे । परियोजना की अवधि 6 वर्ष है। परियोजना के चार प्रमुख घटक हैं- भूमि जल प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता तंत्र, स्‍थायी भूमि जल प्रबंधन के लिए क्षेत्र विशिष्‍ट ढ़ांचा, भूमि जल पुनर्भरण को बढ़ाना और जल उपयोग दक्षता में सुधार, समुदाय आधारित प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए संस्‍थाओं का सुदृढ़ीकरण। परियोजना जल की कमी वाले पता लगाये गये 5 राज्‍यों (हरियाणा, राजस्‍थान, गुजरात, महाराष्‍ट्र और कर्नाटक) में कार्यान्वित की जानी है।

सुश्री भारती ने कहा कि सीजीडब्‍ल्‍यूबी ने विश्‍व भर में जलभृत्‍तों के मानचित्रण के संबंध में सबसे अधिक प्रयास किया है जिसके तहत देश में मानचित्र तैयार करने योग्‍य कुल क्षेत्र लगभग 23.25 लाख वर्ग किलोमीटर और कछारी क्षेत्र में इसका वर्टीकल विस्‍तार 300 मीटर और कठोर चट्टानी क्षेत्र में 200 मीटर है । जलभृत्‍त का विस्‍तार, उनकी क्षमता, संसाधन उपलब्‍धता, रासायनिक गुणवत्‍ता, उसके स्‍थायी प्रबंधन विकल्‍पों का पता लगाया जाएगा । उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से किसानों के लाभ के लिए दीर्घकालीन स्‍थायित्‍व उपलब्‍ध कराने के हेतु भूजल के सहभागिता आधारित प्रबंधन में सहायता मिलेगी ।

सुश्री भारती ने बताया कि इस समय भूमि जल की कमी वाले 8 राज्‍यों पर ध्‍यान केन्द्रित किया गया है। इसमें हरियाणा, पंजाब, राजस्‍थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और बुंदेलखंड का 5.25 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र शामिल हैं। 1.16 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का मानचित्रण पूरा हो गया है। शेष का मानचित्रण मार्च, 2017 तक पूरा किया जाना है। संपूर्ण देश में यह कार्य 2022 तक पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 87 जिलों को शामिल करते हुए 10 राज्‍यों के 331 ब्‍लॉकों के अलग-थलग क्षेत्रों में आर्सेनिक संदूषण का पता लगा है। जलभृत मानचित्रण से गंगा के मैदानी क्षेत्रों में आर्सेनिक मुक्त गहरे जलभृतों का पता लगाने में सहायता मिली है। सीजीडब्ल्यूबी ने पिछले वर्ष के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में 274 कुओं का निर्माण किया है जो स्वच्छ जल की आपूर्ति के लिए राज्य सरकार को निःशुल्क सौंप दिए गए थे। इससे लगभग 30 लाख लोग लाभान्वित हुए हैं। इस वर्ष सीजीडब्ल्यूबी ने पेयजल के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए कुओं का निर्माण करके उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के चयनित क्षेत्रों में जोर देते हुए आर्सेनिक नियंत्रण कार्य शुरू किया है जिससे लगभग 8 लाख लोगों को लाभ होगा। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बैरिया ब्लॉक और गाजीपुर जिले के करंडा ब्लॉक के आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्र में गहरे जलभृतों से जल का प्रयोग करते हुए 62 कुओं का निर्माण किया जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार, ब्रह्मपुर ब्लॉक, बक्सर जिले (बिहार), साहिबगंज, राजमहल एवं उध्वा ब्लॉक, साहिबगंज जिले (झारखंड) और पंडुआ ब्लॉक, हुगली जिले (पश्चिम बंगाल) में 147 कुओं का निर्माण किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में सीजीडब्ल्यूबी ने बीएआरसी और एनईईआरआई के साथ मिलकर जारी राष्ट्रीय जलभृत प्रबंधन परियोजना (एनएक्यूयूआईएम) के अंतर्गत हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश राज्यों के कुछ भागों में पालियो चैनलों के संबंध में स्थल विशिष्ट अध्ययन शुरू किए हैं। प्रो. वाल्डिया, पद्म भूषण की अध्यक्षता में पालियो चैनल/सरस्वती नदी के संबंध में उपलब्ध सूचना की समीक्षा करने के लिए प्रतिष्ठित शोधकर्ताओं को शामिल करते हुए राष्ट्र स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित की जा रही है

हिंदू ही सबसे ज्यादा नदियों को गंदा करतें हैं : उमा भारती

केंद्रीय जल संसाधन तथा गंगा पुनरुद्धान मंत्री उमा भारती ने कहा है कि हिंदू समाज के लोग ही सबसे ज्यादा नदियों को गंदा बनाते हैं, इसलिए सरकार के साथ उनका दायित्व बनता है कि नदियों को निर्मल बनाने की दिशा में काम करें।  उन्‍होंने कहा कि देश के हिंदुओं का नैतिक दायित्व है कि वह गंगा, यमुना सहित अन्य नदियों के जल को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखें।

टीकमगढ़ में उमा भारती ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि वर्तमान मे गंगा नदी में 144 गंदे नाले उसकी निर्मलता को गंदा कर रहे हैं। उसको रोकने के लिए व्यवहारिक और कानूनी प्रक्रिया जारी है। आगामी दो वर्षों में गंगा-यमुना के प्रथम चरण के काम की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी जाएगी। उसके बाद वही फार्मूला देश की अन्य नदियों पर प्रभावी बनाया जाएगा।

गंगा संरक्षण कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया

केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने सचि‍वों के एक समूह की सि‍फारिशों को ध्‍यान में रखते हुए गंगा संरक्षण कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जिसमें तीन समूह, सात उद्देश्‍य और 21 बिन्‍दु शामिल होंगे। 

गंगा के अवि‍रल प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए गठित मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारियों और सात आईआईटी के संकायों की एक समिति इस महीने के अंत तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सौपेगी। मंत्री ने केन्‍द्रीय जल आयोग (सीडब्‍ल्‍यूडी) को गैर मानसून सीजन के दौरान गंगा, यमुना और उसकी सहायक नदियों के पास जलाश्‍यों का निर्माण करने के लिए योजना तैयार करने के निर्देश दिए। 

गंगा और यमुना की सफाई सुनिश्चित करने के लिए सीडब्‍ल्‍यूसी विशेषज्ञों की 41 टीमों ने इन नदियों में खुले नालों के गिरने के प्रभाव और सीवेज प्रशोधन संयंत्रों (एसटीपी) की स्थिति का जायजा लेने के लिए कई स्‍थानों का दौरा किया। नए एसटीपी स्‍थापित करने और मौजूदा एसटीपी के आधुनिकीकरण के लिए उपायों के बारे में सलाह देने के लिए तीन विशेषज्ञ टीम गठित की गई हैं। ये समितियां अब तक 18 प्रमुख सुझावों की जांच पड़ताल कर चुकी हैं। नदी के आगे के भाग के विकास और घाटों के सौन्‍दर्यीकरण के लिए डीपीआर ने दिल्‍ली और हरिद्वार में इस तरह के दो घाट तैयार किए हैं। मथुरा, वृंदावन और अन्‍य स्‍थानों पर पीपीपी प्रणाली में घाटों के विकास के लिए जल्‍द ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। 

गंगा संरक्षण कार्यक्रम का समुचित कार्यान्‍वयन सुनिश्चित करने के लिए गंगा कार्यबल गठित करने का निर्णय लिया गया है। रक्षा मंत्रालय इसके लिए श्रम‍शक्ति उपलब्‍ध कराएगा। 

गंगा की सफाई सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कार्यक्रम की घोषणा शीघ्र – उमा भारती

केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने कहा है कि गंगा संरक्षण के बारे में उन्होंने प्रधानमंत्री को 21 बिंदु विचारार्थ भेजे हैं। विश्व वन्यजीव कोष द्वारा आयोजित भारत नदी सप्ताह, 2014 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय यह सुनिश्चित करेगा कि गंगा में शोधित या अशोधित, किसी भी प्रकार का जल न जाए। सुश्री भारती ने उद्योगों से कहा कि वे नदी से जल लेने के बजाय अपने शोधित जल का ही इस्तेमाल करें। 

उन्होंने कहा कि गंगा की अविरलता व निर्मलता सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कार्यक्रम की घोषणा शीघ्र की जाएगी। मंत्री महोदया ने यह भी कहा कि नदियों में साल भर जल का प्रवाह बना रहे, यह भी मौसम के हिसाब से सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम किसी भी हालत में नदियों को नष्ट नहीं होने देंगे। नदियां हजारों वर्ष में स्वाभाविक रूप से अपने स्वरूप का निर्माण करती हैं, उनकी तुलना में बांधों का जीवन कुछ भी नहीं होता। उन्होंने कहा कि आगे बनाए जाने वाले बांधों मे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मूल नदी की एक अविरल धारा कायम रहे। मौजूदा बांधों से भी मूल नदी की एक अविरल धारा के बारे में अध्ययन किया जा रहा है।’’

मंत्री महोदया ने कहा कि विकास व आस्था के बीच बेहतर तालमेल के अभाव में नदियों के सामने विकराल संकट खड़ा हो गया है। नदियों मे बढ़ते हुए आर्सोनिक की समस्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसका मूल कारण पर्यावरण की अनदेखी करते हुए किया गया अंधाधुंध विकास है। इसलिए जरूरी है कि नदियों के स्वरूप के अनुसार उनके तटों पर वृक्ष व वनस्पतियां लगाइ जाएं। 

नदी जोड़ो कार्यक्रम की आलोचनाओं का उल्लेख करते हुए सुश्री भारती ने कहा कि इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन में हम पर्यावरणविदों की सलाह लेकर ही आगे बढ़ेगें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा देश में भुखमरी व गरीबी मिटाने के लिए यह कार्यक्रम बहुत ही लाभकारी सिद्द होगा। 

केन्‍द्र सरकार हर जिलें में एक जल ग्राम योजना शुरू करेगी-उमा भारती

केन्‍द्र सरकार अगले वर्ष जल ग्राम योजना शुरू करेगी। नई दिल्‍ली में जल संसाधनों के इष्‍टतम उपयोग पर आयो‍जित तीन दिवसीय राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन ‘जल मंथन’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केन्‍द्रीय जल संसाधन नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने कहा कि शुरू में यह योजना पायलट प्रोजेक्‍ट के रूप में शुरू की जाएगी। हर जिलें में जिस गांव में पानी की सबसे ज्‍यादा कमी होगी उसी गांव को जल ग्राम के रूप में अपनाया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि इस काम में केन्‍द्र सरकार के अन्‍य मंत्रालयों और स्‍वयंसेवी संगठनों की भी मदद ली जाएगी। बाद में इस योजना को देश के अन्‍य जिलों में भी लागू किया जाएगा। सुश्री भारती ने कहा कि अगला वर्ष जल संरक्षण वर्ष के रूप में मनाया जाएगा जिसमें उनका मंत्रालय देश के हर जिलें में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए विभिन्‍न कार्यक्रम आयोजित करेगा। 

मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे गंगा संरक्षण कार्यक्रम का उल्‍लेख करते हुए मंत्री महोदया ने कहा कि पूर्व में गंगा की सफाई पर जल्‍द बाजी में बहुत धन खर्च किया गया जिसका समुचित परिणाम नहीं निकला। उन्‍होंने कहा ‘’हम इस पर ठोस काम करेंगे जिसका दीर्घकालिन परिणाम होगा’’। 

मंत्री महोदया ने आश्‍वासन दिया कि उनका मंत्रालय जल मंथन विमर्श में उठाए गए विभिन्‍न विषयों और उससे संबंधित सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगा। सुश्री भारती ने कहा ‘’दो वर्ष बाद मैं आप सभी को यहां अमंत्रित करूगी और आपकों बताउगी कि मेरें मंत्रालय ने आपके सुझावों पर क्‍या-क्‍या अमल किया’’। 

सुश्री उमा भारती ने इस अवसर पर गंगा मंथन पर आयोजित राष्‍ट्रीय विमर्श से संबंधित एक पुस्‍तिका का भी विमोचन किया। इस विमर्श का अयो‍जन इसी वर्ष 7 जुलाई को नई दिल्‍ली में आयोजित किया गया था। पुस्‍तिका में विमर्श के निष्‍कर्षों का उल्‍लेख है। 

देश में नदियों को जोड़ने की परियोजना तीव्र गति में : उमा भारती

केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने देश में नदियों को जोड़ने की परियोजना को तीव्र गति से अमल में लाने का आह्वान किया है। अपने मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री महोदया ने कहा कि नदियों को जोड़ने से संबंधित राष्‍ट्रीय परिप्रेक्ष्‍य योजना के अनुसार इससे 35 मिलियन हेक्‍टेयर अतिरिक्‍त भूमि को सिंचाई की सुविधा उपलब्‍ध होगी, जिससे देश में सिंचाई सुविधा प्राप्‍त भूमि का क्षेत्रफल 140 मिलियन हेक्‍टेयर से बढ़कर 175 मिलियन हेक्‍टेयर हो जाएगा। उन्‍होंने कहा कि इससे बाढ़ नियंत्रण, नौवहन, जलापूर्ति, मत्‍स्‍य पालन, लवणता एंव प्रदूषण नियंत्रण आदि लाभों के अलावा 34 हजार मेगावाट अतिरिक्‍त बिजली का भी उत्‍पादन हो सकेगा। सुश्री भारती ने कहा कि ‘‘नदियों को जोड़ने की परियोजना राष्‍ट्रीय महत्‍व की है और इसका उद्देश्‍य देश में जल के समान वितरण को सुनिश्चित करना है, जिससे बाढ़ और सूखे से प्रभावित क्षेत्रों को विशेष लाभ होगा। मैं इस राष्‍ट्रीय महत्‍व के कार्य में सभी राज्‍यों के सहयोग की अपील करती हूं।’’ उन्‍होंने कहा कि इससे देश का खाद्य उत्‍पादन बढ़ेगा और रोजगार के नये अवसर भी पैदा होंगे, जिससे देश में समृद्धि आएगी।

सुश्री भारती ने सदस्‍यों को बताया कि राष्‍ट्रीय जल विकास एजेंसी ने अब तक देश में नदियों को जोड़ने के 30 संपर्कों की पहचान की है, जिनमें से 16 संपर्क प्रायद्वीपीय क्षेत्र के हैं और 14 अन्‍य हिमालयी क्षेत्र के। उन्‍होंने कहा कि इनमें से प्रायद्वीपीय क्षेत्र के 14 संपर्कों और हिमालयी क्षेत्र के 2 संपर्कों (भारतीय भाग) की साध्‍यता रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। 7 अन्‍य संपर्कों का सर्वेक्षण एवं अन्‍वेषण कार्य पूरा किया जा चुका है और इनकी साध्‍यता रिपोर्ट का मसौदा तैयार हो गया है। 

मंत्री महोदया ने सदस्‍यों को बताया कि विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का कार्य शुरू करने के लिए पांच प्राद्वीपीय संपर्कों नामत: 1- केन-बेतवा, 2- पार्वती-कालीसिंध-चंबल 3- दमनगंगा-पिंजाल, 4- पार-तापी-नर्मदा और 5- गोदावरी (पोलावरम)-कृष्‍णा (विजयवाड़ा) को प्राथमिकता संपर्कों के रूप में चिन्हित किया गया है। केन-बेतवा संपर्क पर काम भी शुरू हो गया है। उन्‍होंने कहा कि दमनगंगा-पिंजाल संपर्क की डीपीआर पूरी हो चुकी है और यह आगे की कार्रवाई हेतु अप्रैल, 2014 में महाराष्‍ट्र और गुजरात सरकार को प्रस्‍तुत कर दी गई है। पार-तापी-नर्मदा संपर्क की डीपीआर तैयार की जा रही है और यह मार्च, 2015 तक पूरी कर ली जाएगी। 

सुश्री भारती ने कहा कि राष्‍ट्रीय जल विकास एजेंसी को अंत:राज्‍यीय संपर्कों के बारे में 46 प्रस्‍ताव मिले हैं। इनमें से 33 अंत:राज्‍यीय संपर्कों की पीएफआर पूरी हो चुकी हैं और वे संबंधित राज्‍य सरकारों को भेजी जा चुकी हैं। बिहार सरकार के अनुरोध पर एजेंसी ने क्रमश: दिसंबर, 2013 और मार्च, 2013 में बूढ़ी गण्‍डक-नून-बया-गंगा अंत:राज्‍यीय संपर्क परियोजना और कोसी-मेची संपर्क परियोजना की डीपीआर तैयार करके उसे आगे की कार्रवाई के लिए राज्‍य सरकार को भेज दिया है। महाराष्‍ट्र, तमिनाडु और झारखंड के लिए एक-एक अंत:राज्‍यीय संपर्क की डीपीआर तैयार की जा रही है।

बैठक में भाग लेने वाले सांसदों ने एक स्‍वर में नदियों को जोड़ने की परियोजना पर अपना समर्थन जताया। उनका कहना था कि सरकार को इस कार्यक्रम को एक मिशन के तौर पर लेना चाहिए और इसे एक निश्चित समय सीमा में पूरा करना चाहिए। एक सदस्‍य का कहना था कि कुछ क्षेत्रों में इस कार्यक्रम को लेकर व्‍यक्‍त की गई शंकाओं के कारण इसे लेकर पर्याप्‍त गंभीरता का वातावरण नहीं बन पा रहा है। एक अन्‍य सदस्‍य का कहना था कि इस परियोजना को लागू करते समय हमें इसके पर्यावरणीय, पारिस्थितिकीय और सामाजिक पहलुओं को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। एक अन्‍य सदस्‍य का सुझाव था कि सरकार को नदियों के राष्‍ट्रीयकरण पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। सदस्‍यों ने कृष्‍णा-गोदावरी संपर्क, गंगा-गोमती संपर्क, शारदा-यमुना संपर्क, पिंडारी-कोसी संपर्क, नदियों को जोड़ते समय रबड़ बांधों का निर्माण और बिहार की फल्‍गु न‍दी को जोड़ने जैसे कुछ अन्‍य सुझाव भी दिए।

सदस्‍यों को उनके सुझावों के लिए धन्‍यवाद देते हुए सुश्री उमा भारती ने उनसे अनुरोध किया कि वे संसद के दोनों सदनों में नदियों को जोड़ने की परियोजना से संबंधित मुद्दे और प्रश्‍न उठाएं ताकि देश का ध्‍यान इस ओर आकर्षित हो। 

निम्‍नलिखित सदस्‍यों ने बैठक में भाग लिया – 

श्री ए टी नाना पाटिल, श्री अधिर रंजन चौधरी, श्री अजय टमटा, श्रीमती अंजु बाला, श्री बहादुर सिंह कोली, श्री धर्मबीर भालेराम, श्री गजेन्‍द्र सिंह शेखावत, श्री हेमंत तुकाराम गोडसे, डॉ. कृष्‍ण प्रताप सिंह, श्री कृस्‍तपा निम्‍मला, श्रीमती रक्षा निखिल खडसे, श्री सुनील कुमार मंडल, श्री अश्विनी कुमार चौबे (सभी लोकसभा से) और श्री राम नारायण दुड़ी (राज्‍यसभा)। 

केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्‍य मंत्री प्रो. सांवरलाल जाट, मंत्रालय के सचिव श्री अनुज कुमार बिश्‍नोई और मंत्रालय के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया। 

उमा भारती को फोन पर मिली जान से मारने की धमकी

भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता उमा भारती को मोबाइल फोन पर जान से मारने की धमकी देने के सिलसिले में आज यहां उनके सुरक्षा अधिकारी की ओर से प्राथमिकी श्यामला हिल्स थाने में दर्ज करायी गयी।

पुलिस सूत्रों के अनुसार सुरक्षा अधिकारी प्रदीप तोमर ने पिछले तीन दिनों के दौरान लगभग आधा दर्जन बार मोबाइल फोन पर धमकी देने के सिलसिले में प्राथमिकी दर्ज करायी। बताया गया है कि अज्ञात व्यक्ति मोबाइल फोन क्रमांक 09229798167 से 26 जून की रात्रि से सुश्री भारती के मोबाइल फोन पर उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहा है।

सूत्रों ने कहा कि पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर पडताल शुरू कर दी है। पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री भारती के मोबाइल फोन पर उस समय कॉल आया जब वह 26 जून की रात्रि में भोपाल एक्सप्रेस ट्रेन से यहां से दिल्ली के लिए रवाना हुयी थीं। तब उनके सुरक्षा अधिकारी ने फोन उठाया था।

सूत्रों ने कहा कि इसके अगले दिन फिर दो बार मोबाइल फोन पर धमकी दी गयी। यही नहीं इसी मोबाइल फोन से आज फिर दो बार सुश्री भारती को धमकी दी गयी। आखिरकार सुरक्षा अधिकारी ने इसकी प्राथमिकी थाने में दर्ज करायी।

हिंदुओं को ही निशाना पर क्यों रखा जाता है? - उमा भारती


भाजपा नेता उमा भारती ने निर्मल बाबा पर लगाए गए आरोपों के बाद अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि हमेशा ही धार्मिक गतिविधियों से जुड़े मामलों में हिंदुओं को ही निशाना पर क्यों रखा जाता है।
उमा का मानना है कि धार्मिक गतिविधियों के मामले में आजा कल हिंदुओं को निशाना बनाने का चलन चल गया है। हालंकि उन्होंने निर्मल बाबा के बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया।

अनुशासन की कीमत पर कुछ भी नहीं - उमा भारती

भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाया।सोमवार को संगठन के लोगों के साथ चर्चा में उन्होंने साफ-साफ कहा कि अनुशासन की कीमत पर कुछ भी नहीं। टिकट की दावेदारी का हर किसी को हक है लेकिन इसकी भी एक सीमा है।

हर
कार्यकर्ता और पदाधिकारी टिकट की दौड़ में शामिल रहेगा तो पार्टी प्रत्याशियों को चुनाव कौन लड़ाएगा।उन्होंने कार्यकर्ताओं से जन सवालों पर आंदोलन तेज करने को कहा। इसके पहले सुबह संगम के रास्ते में आनंद भवन के पास हाथियों का झुंड आता देख अपनी गाड़ी रुकवा दी।

पास
के ठेले से केले खरीदकर हाथियों को खिलाया।संगम में स्नान करने के बाद अक्षयवट दर्शन व बड़े हनुमान जी का पूजन किया। दोपहर में विंध्याचल के लिए रवाना हो गई। उनके साथ भगवती, योगेश शुक्ल आदि थे।

उमा भारती औरिया में गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिला के गुरसहायगंज क्षेत्र में ट्रक की चपेट में आने से चार युवकों की मौत पर उपजे विवाद के बाद भाजपा नेत्री उमा भारती को हिरासत में ले लिया गया.

घटना के विरोध में मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को गुरसहायगंज जाते समय औरिया जिला में हिरासत में ले लिया गया.

कन्नौज के सासंद अखिलेश यादव ने घटना के लिये प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है.

उमा भारती ने मायावती के खिलाफ मोर्चा खोला

बीजेपी नेता उमा भारती आज लखनऊ में मायावती सरकार के ख़िलाफ़ एक दिन के धरने पर बैठी हैं, उमा भारती का कहना है कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं के ख़िलाफ़ जुल्म की इंतहा हो चुकी है और महिला मुख्यमंत्री इससे बेअसर और बपरवाह होकर काम कर रही हैं।

इसका
विरोध करने के लिए उन्हें धरना देना पड़ रहा है। उमा भारती ने उन परिवारों को भी इस धरने में शामिल होने के लिए बुलाया है, जिनके परिवार की किसी महिला को हत्या, बलात्कार या अन्य अपराध का शिकार होना पड़ा है। उमा दीनदयाल स्मृतिका में बीजेपी की महिला कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवारों के साथ विरोध प्रदर्शन भी करेंगी।

दिग्विजय सिंह सिर्फ राहुल गाँधी की स्टेपनी - उमा भारती

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के वर्तमान महासचिव दिग्विजय सिंह को 2003 में सत्ता से उखाड़ फेंकने वाली बीजेपी उत्तर प्रदेश इकाई की प्रभारी उमा भारती ने दिग्विजय सिंह को राहुल गांधी का स्टेपनी कहा।

इन
दिनों उमा भारती यूपी मिशन पर हैं और यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उन्हें सूबे में प्रचार-प्रसार का काम पार्टी ने सौंपा है।उमा ने आज माया सरकार को खरी खोटी तो सुनाई ही। साथ ही कांग्रेस को भी नहीं बख्शा। लखनऊ में उमा ने कहा कि दिग्विजय के बयान से कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं।

उत्तर
प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की संभावनाओं को सिरे से नकारते हुये भारती ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस प्रभारी के रूप में सिंह की भूमिका महज कांग्रेस के युवराज माने जाने वाले राहुल गांधी के स्टेपनी के रूप में है।

बीजेपी
में वापसी के बाद उमा भारती पहली बार आगामी शनिवार को लखीमपुर खीरी में उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार के खिलाफ धरना देकर मोर्चा खोलेंगी।

उमा भारती की भाजपा मे वापसी, मिली यूपी की जिम्मेदारी

करीब 6 साल के वनवास के बाद मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में वापसी हो गई है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। गौरतलब है कि उमा भारती को बीजेपी के सीनियर नेताओं पर आरोप लगाने के कारण 2004 में पार्टी से निकाल दिया गया था।

इस मौके पर गडकरी ने कहा कि उमा भारती यूपी की जिम्मेदारी निभाएंगी। दूसरी ओर, उमा भारती ने कहा बीजेपी ही मेरा किनारा है और बीजेपी ही मेरी मंजिल। उन्होंने कहा कि पुरानी बातें भूलकर मैं उत्तर प्रदेश में राम राज्य स्थापित करूंगी।

गडकरी ने कहा कि पार्टी में उमा की वापसी आम सहमति से हुई।

मैं करुँगी भाजपा को उत्तर प्रदेश में मजबूत - उमा भारती

उत्तरप्रदेश में लस्तपस्त पड़ी भाजपा में नयी जान फूंकने के पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के सुझाव कोफायर ब्रांडनेता उमा भारती स्वीकार करेंगी।

आडवाणी की ओर से ब्लाग में दिये गए सुझाव के 24 घंटे के भीतर उमा भारती ने कहा, ‘‘आडवाणी जी के ब्लाग में उत्तप्रदेश का जिक्र आया है, वह वाकई एक बहुत बड़ी चुनौती है। इस चुनौती का मुकाबला करने की सामथ्र्य यदि आडवाणी जी मुझमें देखते हैं तो मैं इस बारे में कोई राह जरूर निकालूंगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ अभी मैं सिर्फ 50 वर्ष की हूं, इसलिए मेरे पास कोई भी जिम्मेदारी निभाने का समय और सामथ्र्य दोनों है।’’ गौरतलब है कि आडवाणी ने अपने ब्लाग में लोकसभा चुनाव में पार्टी की पराजय के लिए अति आत्मविश्वास और आत्ममुग्धता को जिम्मेदार ठहराते हुए उत्तरप्रदेश में पार्टी के कमजोर होने और उमा भारती को प्रदेश की जिम्मेदारी संभालने का सुझाव दिया था।

आडवाणी ने लिखा था ‘‘ नितिन गडकरी ने स्वयं उमा भारती से बात की। इसके बाद उमा ने मुझसे बात की । मेरी सलाह पर वह उत्तरप्रदेश में पार्टी इकाई को मजबूत बनाने पर राज़ी हो गई हैं।’’ बहरहाल, उमा भारती ने कहा, ‘‘ करीब 11 महीने पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने मुझे भाजपा में शामिल होने और पदाधिकारी बनने का प्रस्ताव किया था ।

उससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान मैंने आडवाणी जी का समर्थन किया था और प्रचार भी किया था।’’ उन्होंने कहा कि पिछले करीब एक वर्ष में कुछ दुखद व्यक्तिगत कारणों से वह राजनीति से विलग रही लेकिन वह राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी और लालकृष्ण आडवाणी की सलाह मानेंगी।

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