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प्रधानमंत्री ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की आधारशिला फलक का अनावरण किया


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नोएडा के सेक्टर 62 में दिल्ली - मेरठ एक्सप्रेसवे की आधारशिला फलक का अनावरण किया। 

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने ब्रितानी शासन से आजादी के लिए 1857 के आंदोलन में मेरठ की भूमिका का स्मरण किया और कहा कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे प्रदूषण से मुक्ति प्रदान करेगा। 

विकास के लिए लोगों की आकांक्षाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अच्छी सड़कें विकास की प्रथम पूर्व- शर्तों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विकास को बढ़ावा देगा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के जरिये देश को आपस में जोड़ने के विजन का स्मरण किया। 

प्रधानमंत्री ने किसानों के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना समेत अन्य विकास योजनाओं की चर्चा की। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रेणी - III एवं श्रेणी - IV वर्गों में सरकारी नौकरियों के लिए साक्षात्कार को खत्म करने के द्वारा सरकार 1 जनवरी, 2016 को देश के युवाओं को एक अनोखा उपहार दे रही है। 

प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से 2016 में एक संकल्प करने की अपील की कि वे संसद का कार्य चलने देंगे और गरीबों के लाभ के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत के नागरिकों ने अपने प्रतिनिधियों का निर्वाचन संसद में बहस करने, परिचर्चा करने एवं विचार-विमर्श करने के लिए किया है इसलिए यह उनका दायित्व है। 

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक, केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा एवं केंद्रीय राज्य मंत्री श्री पी राधाकृष्णन भी उपस्थित थे। 

रक्षा मंत्रालय ने 2015 में स्थापित किये नए कीर्तिमान,पढ़िए विशेष लेख


मौजूदा और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के माध्यम से परिचालन (ऑपरेशनल) तैयारियों के उच्चतम स्तर को सुनिश्चित किया जा रहा है। वर्ष 2015 में रक्षा मंत्रालय का ध्यान हथियारों एवं उपकरणों की कमी को पूरा करने के लिए मेक इन इंडिया पहल के जरिए आधारभूत ढांचे का विकास और अपेक्षित क्षमता विकसित करने पर ही केंद्रित रहा।

इस वर्ष पूर्व सैनिकों के कल्याण में प्रगति और प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया पहल को पूरा करने की दिशा में रक्षा क्षेत्र में तेजी से डिजिटलीकरण देखने को मिला। इस वर्ष रक्षा कूटनीति के एक हिस्से के तौर पर भारत ने अपने पड़ोसियों और सुदूर पूर्वी देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता, नौसैन्य पोतों के दौरे और द्विपक्षीय एवं त्रिपक्षीय युद्ध अभ्यास कर संपर्क स्थापित किया। हालांकि, अपने रक्षा ढांचे को मजबूत और ठोस बनाने के लिए मेक इन इंडिया की अवधारणा में स्पष्ट रूप से अधिग्रहण योजना का बोलबाला है। क्षमता निर्माण के साथ-साथ सशस्त्र बलों की आक्रामक क्षमताओं में तेजी लाने के लिए, अधिग्रहण के मामलों में रक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च संस्था रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने वर्ष 2015 के दौरान दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के विभिन्न महत्वपूर्ण और ऊंचे रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी।

एफडीआई सीमा में बढ़ोत्तरी:

तीव्र स्वदेशीकरण के लिए सरकार ने अगस्त 2014 में अनुमोदन के जरिए रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत कर दी। 49 प्रतिशत से अधिक के विदेशी निवेश के प्रस्ताव पर मामले के आधार पर विचार किया जा सकता है।
  • औद्योगिक लाइसेंसिंग के लिए रक्षा उत्पादों की सूची को छोटा और अधिसूचित किया गया है।
  • रक्षा वस्तुओं के निर्यात को तेजी से मंजूरी के लिए सरकार ने एक रक्षा निर्यात नीति को अधिसूचित किया है।
  • डीआरडीओ और रक्षा उत्पादन विभाग के जरिए उद्योग के साथ सहभागिता को सघन बनाया गया है।


भारतीय सेना

आधुनिकीकरण एवं उपकरण

  • सेना घातक, चुस्त, बहुमुखी और नेटवर्क युक्त बनने के लिए निरंतर उन्नत हो रही है ताकि वह संघर्ष के सभी क्षेत्रों में कार्य करने में सक्षम हो। इस कवायद का मकसद सेना को 21वीं सदी के युद्धों की जटिलताओं और अनिश्चित चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार और सक्षम बनाना है। हालांकि आधुनिकीकरण के साथ-साथ सेना के दृष्टिकोण में मार्गदर्शन के कारक बने हुए हैं - ‘सभी समकालीन और उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए क्षमता निर्माण और सेना की परिचालन प्रभावशीलता सुनिश्चित करना।’
  • क्षमता विकास की खोज में सेना इस तथ्य के प्रति सजग है कि कोई भी देश तब तक महत्वपूर्ण शक्ति बनने की अपनी आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकता जब तक कि वह अपनी सैन्य क्षमता की जरूरतों को स्वदेश में ही पूरा नहीं करने लायक नहीं हो जाता। तदनुसार, मेक इन इंडिया को देखते हुए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रमुख खरीद स्वदेशी स्रोतों से ही की जाएं।
  • तोपखाने के आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने सेना के 2,900 करोड़ रुपये मूल्य की 145 बीएई एम777 अल्ट्रा-लाइट-हॉवित्जर तोपों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह सौदा विदेशी सैन्य बिक्री के तहत हुआ है लेकिन इसमें पुर्जों, रखरखाव और गोला-बारूद भारतीय प्रणाली के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा।
  • आकाश हथियार प्रणाली को भारतीय सेना में 05 मई, 2015 को शामिल किया गया। यह भारत में ही विकसित कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली सुपरसोनिक प्रणाली है। यह विमान, हेलीकॉप्टर और यूएवी जैसे कई हवाई खतरों को 25 किलोमीटर की दूरी और 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर ही घेरने में सक्षम है। यह प्रणाली एक साथ कई लक्ष्य साधने में सक्षम है और जमीन पर सेना की भेद्य ठिकानों को कम दूरी का मिसाइल कवर उपलब्ध कराती है। देश की यह अत्याधुनिक हथियार प्रणाली प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया पहल की एक चमकदार अभिव्यक्ति है। 
  • भारतीय सेना के स्वदेशीकरण के प्रयासों के तहत सेना ने दस सार्वजनिक और निजी भारतीय कंपनियों को प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया पहल के तहत ‘भविष्य के इंफैंट्री कांबेट व्हीकल’ (एफआईसीवी) परियोजना के लिए ईओएल जारी किया है।
  • एक महत्वपूर्ण ‘मेक’ परियोजना सामरिक संचार प्रणाली (टीसीएस) है। इसका मकसद युद्ध के मैदान में डटी सेना को एक नेटवर्क केंद्रित वातावरण के जरिए सूचनाएं पहुंचाना है। इसके अलावा युद्धक्षेत्र प्रबंधन प्रणाली (बीएमएस) भी है। यह सैन्य कमांडरों को सामरिक तौर पर स्थित की अपडेट जानकारी, भू-स्थानिक डेटा और लड़ाई के दौरान फार्मेशन स्तर पर आंतरिक सूचनाएं पहुंचाती है।
  • मौजूदा ‘स्वदेशी खरीदो’ खरीद प्रस्ताव में अत्याधुनिक लाइट हेलीकाप्टर, मध्यम दूरी सी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, पिनाका मल्टी बैरल राकेट प्रणाली, इंफैंट्री कांबेट वाहन बीएमपी 2/2के, एमबीटी अर्जुन टैंक, मॉड्यूलर ब्रिज प्रणाली, बालिस्टिक हैलमैट एव बुलेट प्रूफ जैकेट शामिल है।
  • मौजूदा ‘खरीदो एवं स्वदेशी बनाओ’ खरीद प्रस्ताव में तोपखाने के लिए माउंटेड गन सिस्टम (एमजीएस), सेना की हवाई सुरक्षा में तैनात एल/70 और जेडयू-23 बंदूकों के बदले एयर डिफेंस गन, मैकेनाइज्ड बलों के लिए हल्के बख्तरबंद बहुउद्देशीय वाहन (एलएएम-वी) और टी-90 टैंकों के लिए माइन प्लग शामिल हैं।
  • सरकार ने 1947 में आजादी के बाद हुए युद्धों में शहादत देने वाले रक्षाकर्मियों के सम्मान में एक राष्ट्रीय युद्ध स्मारक बनाने का फैसला किया है। इंडिया गेट के पास बनने वाले इस स्मारक के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा एक युद्ध संग्रहालय भी बनाया जाएगा। सारी परियोजना पांच साल के भीतर पूरी होगी।
  • गुड़गांव के पास बिनोला में भारतीय राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी (आईएनडीयू) के निर्माण का काम तेज गति से चल रहा है। इसके 2018 से शुरू हो जाने की उम्मीद है।


सेना की आधुनिकीकरण की पहल:

  • प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया पहल के तहत सैन्य कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया और संचार नेटवर्क को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। आर्मी रिकॉर्ड ऑफिसर्स प्रॉसेस ऑटोमिशन (एआरपीएएन) 2.0 नाम की एक विशेष सॉफ्टवेयर प्रणाली हाल ही में लांच की गई है। इसके जरिए 12 लाख से ज्यादा जूनियर कमीशन अधिकारी (जेसीओ) और सैनिक अपने सर्विस रिकॉर्ड और रोजगार संबंधी जानकारी ऑनलाइन देख सकेंगे।
  • पहली जुलाई, 2015 से सेना में भर्ती को भी ऑनलाइन कर दिया गया है। अधिकारियों, जेसीओ और अन्य रैंकों के चयन के लिए भर्ती महानिदेशालय ने  www.joinindianarmy.nic.in  नाम से एक नई वेबासइट लांच की है। इसके जरिए भारत में कहीं से भी कोई भी अभ्यर्थी सेना में कैरियर से संबंधित सूचनाएं प्राप्त कर सकता है और अपनी पसंद के आधार पर ऑनलाइन आवेदन कर सकता है।
  • 16 अक्टूबर 2015 को रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना के निजी क्लाउड का भी उद्घाटन किया। यह भारतीय सेना के डेटा सेंटर की बुनियादी सुविधाओं की शुरुआत है। इसमें एक केंद्रीय डेटा सेंटर, दिल्ली के पास एक डेटा केंद्र और महत्वपूर्ण डेटा की नकल के लिए आपदा रिकवरी साइट भी है। इसके अलावा एक डिजी-लॉकर भी है, जो सेना की सभी इकाइयों के लिए एक सुरक्षित और एक्सक्लूसिव भंडारण स्थान (स्टोरेज स्पेस) प्रदान करता है। इस समर्पित डेटा नेटवर्क को वॉटरमार्किंग और डिजिटल हस्ताक्षर जैसी सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ शुरू किया गया है। यह साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है क्योंकि यह सीडी/डीवीडी और अलग से लगाए जा सकने वाले उपकरणों पर डेटा की सॉफ्ट कॉपी ले जाने के चलन पर नियंत्रण करता है।


सीमा पर स्थिति:

  • सेना की परिचालन तैयारियों में सुधार और तेजी से सीमा पर घुसपैठ की घटनाओं में कमी देखने को मिली है। वर्ष 2012 में नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की 264 वारदात हुईं। वर्ष 2014 में यह संख्या घटकर 221 हो गई। इस साल 30 सितंबर तक घुसपैठ के 92 प्रयास हुए हैं और सुरक्षा बलों ने 37 आतंकवादियों को मार गिराया है। अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर संघर्षविराम उल्लंघन पर भी भारतीय सेना ने नियंत्रण किया है। वर्ष 2014 के मुकाबले इसमें कमी देखने को मिली है। इसी तरह भारत और चीन के बीच लगातार हो रही सीमा वार्ताओं से उत्तरी सीमा पर घुसपैठ की घटनाओं में कमी आई है।


संयुक्त युद्ध अभ्यास

ऑपरेशन ‘हैंड इन हैंड’

  • 12 से 22 अक्टूबर, 2015 के बीच चीन के कनमिंग में भारतीय और चीनी सेना ने बटालियन स्तर का संयुक्त अभ्यास किया। ऑपरेशन ‘हैंड इन हैंड’ में आतंकवाद से मुकाबले और ‘आपदा राहत एवं मानवीय सहायता’ का अभ्यास किया गया। इसमें हिस्सा ले रहे दोनों ओर के सैनिकों को संयुक्त प्रशिक्षण दिया गया और उन्होंने मिश्रित समूहों में एक-दूसरे से व्यक्तिगत कौशल (बॉक्सिंग, शुरूआती पर्वतारोहण और शूटिंग), विस्तृत युद्ध कौशल (बाधा पार करना, सघन शारीरिक प्रशिक्षण, विध्वंस करना और प्रतिरोधक गोलीबारी) और विशेष तौर पर आतंकवाद से मुकाबले की स्थिति में ईकाई/उप ईकाई रणनीति सीखी। भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के उद्देश्य से 21-22 अक्टूबर को एक संयुक्त अभ्यास किया गया।

 अभ्यास इंद्र-2015

  • 08 से 18 नवंबर, 2015 के बीच महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत और रूस के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास इंद्र-2015 किया गया। इस अभ्यास के अंतिम चरण में दोनों देशों के संयुक्त समूहों ने संयुक्त राष्ट्र के तहत एक तीसरे देश की सरकार को उसके अर्ध-शहरी इलाके में सशस्त्र आतंकवादियों से लड़ने में सहयोग किया।


युद्ध अभ्यास-2015

  • अमेरिका के ज्वाइंट बेस लेविस मैकॉर्ड में 09 से 23 सितंबर, 2015 के बीच भारत और अमेरिका ने संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास-2015’ में हिस्सा लिया। इस युद्ध अभ्यास में एक इंफेंट्री सब-यूनिट को भारतीय सेना के मुख्यालय साथ लाया गया और संयुक्त प्रशिक्षण के दौरान ऐसी ही सहभागिता अमेरिकी सेना की भी रही। इस अभ्यास से संयुक्त राष्ट्र के अधीन दोनों देशों के सैनिकों को शहरी क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई के दौरान अपने अनुभवों को साझा करने का आदर्श अवसर मिला।


1965 भारत-पाक युद्ध स्वर्ण जयंती समारोह

  • सेना के संयुक्त प्रयास से 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की स्वर्ण जयंती के अवसर पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसका आयोजन राष्ट्र के सामूहिक संकल्प और सशस्त्र बलों की वीरता एवं बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से किया गया था। स्मृति कार्यक्रमों की शुरुआत 28 अगस्त 2015 से हुई। इन समारोहों का मुख्य आकर्षण इंडिया गेट लॉन में लगी प्रदर्शनी ‘शौर्यांजलि’ रही। इसे शुरुआत में 15 से 20 सितंबर तक प्रदर्शित करने की योजना थी लेकिन जनता द्वारा मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया को देखते हुए प्रदर्शनी को 27 सितंबर तक के लिए बढ़ा दिया गया। इस प्रदर्शनी में युद्ध के मुख्य दृश्यों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया गया साथ ही युद्ध के दौरान विभिन्न सेनाओं की भूमिका और सेवाओं को भी प्रदर्शित किया गया।
  • 20 सितंबर 2015 को इंडिया गेट के लॉन में 1965 के भारत-पाक युद्ध की स्वर्णिम जयंती के अवसर पर एक आनंदोत्सव (कार्निवाल) ‘इंद्रधनुष’ भी आयोजित किया गया। इसमें भारत की विजय का जश्न मनाया गया और सभी के साथ इस कामयाबी का आनंद लिया गया। कार्निवाल के दौरान सेना की विभिन्न रेजीमेंटों ने मार्शल आर्ट जैसी कला का प्रदर्शन किया।
  • प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 22 सितंबर को अमर जवान ज्योति पर जाकर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की और सेवानिवृत्त योद्धाओं (वॉर वेटरर्न्स) से बातचीत की। 1965 की भारत-पाक युद्ध से जुड़े समारोहों के तहत राष्ट्रपति ने भी इसी दिन राष्ट्रपति भवन में सेवानिवृत्त योद्धाओं से चाय पर मुलाकात की। जनता की मांग पर युद्ध प्रदर्शनी 27 सितंबर तक जारी रही।

प्रथम विश्व युद्ध का शताब्दी समारोह

  • भारतीय सेना ने प्रथम विश्व युद्ध में लड़ने वाले 15 लाख भारतीय सैनिकों की याद में नई दिल्ली में 10 मार्च से 14 मार्च के बीच प्रथम विश्व युद्ध का शताब्दी समारोह आयोजित किया। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत के 74000 से अधिक सैनिकों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। संयोग से 10 मार्च 1915 को ब्रिटेन ने फ्रांस के आर्तोइस क्षेत्र पर आक्रमण किया था। इस युद्ध को न्यूवे चैपल के युद्ध के नाम से जाना जाता है। इसमें भारतीय कॉर्प्स की गढ़वाल बिग्रेड और मेरठ डिवीजन ने हिस्सा लिया था। वर्ष 2014 से 2018 तक की अवधि को प्रथम विश्व युद्ध की सौवीं बरसी के रूप में मनाया जा रहा है।

 भारतीय नौसेना

  • अपनी समुद्री क्षमता को बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना ने अपनी पनडुब्बी क्षमता को मजबूत करने का फैसला किया है। इसके लिए डीएसी ने प्रोजेक्ट 75 (आई) के तहत छह और पारंपरिक पनडुब्बियों के अधिग्रहण के अनुरोध प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की लागत 80,000 करोड़ रुपये के लगभग है। इस कार्यक्रम के तहत विदेशी सहयोग से भारत में छह पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण की योजना है।
  • नौसेना की आक्रामक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सरकार ने 12 माइन काउंटर मेशर्ज वेसल्स (एमसीएमवी) की खरीद का फैसला किया है। इसके लिए आवश्यकता की समझौता (एओएन) जारी कर दिया गया है और विदेश में टीओटी के साथ मामले की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए गोवा शिपयार्ड लिमिटेड को नामजद किया गया है।
  • सरकार ने नौसेना में 16 मल्टी-रोल हेलीकाप्टर (एमआरएच) शामिल करने का फैसला किया है। यह हवाई पनडुब्बी रोधी युद्ध (एयर एंटी-सबमरीन वारफेयर) क्षमता में बने अंतर को काफी हद तक पूरा करेगा। इस पहल के अलावा 28 कामोव हेलीकाप्टरों की बड़ी मरम्मत/मिड लाइफ अपग्रेडेशन (एमआर/एमएलयू)  को आगे बढ़ाया गया है।
  • 15बी गाइडेड मिसाइल विध्वंसक पोत परियोजना के पहले पोत आईएनएस विशाखापत्तनम का 20 अप्रैल 2015 को मझगांव डाक लिमिटेड, मुंबई में जलावतरण कर दिया गया।
  • नौ मई 2015 को समुद्री राज्य गुजरात की मुख्यमंत्री द्वारा पोरबंदर में भारतीय नौसेना के नवीनतम प्रतिष्ठान सरदार पटेल को कमीशन किया गया।
  • प्रोजेक्ट-28 के तहत पनडुब्बी रोधी जंगी पोतों की श्रृंखला के चौथे युद्धपोत आईएनएस कवरत्ती का 19 मई 2015 को रक्षा राज्य मंत्री ने जीआरएसई में जलावतरण किया। प्रोजेक्ट-28 के तहत निर्मित इन चार स्वदेशी पोतों को नई दिल्ली में नौसेना डिजाइन निदेशालय द्वारा डिजाइन किया गया है। यह नौसेना के डिजाइनरों की बहुप्रशंसित विरासत का गवाह है।
  • तटीय रक्षा क्षमता को विस्तार देते हुए नौसेना उपप्रमुख ने 30 जून 2015 को तीन फॉलो-ऑन वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट्स आईएनएस तारमुगली. आईएनएस तिलांचांग और आईएनएस तिहायु का गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड में एक समारोह में जलावतरण किया।
  • कारवार 'प्रोजेक्ट सागर बर्ड' के पहले चरण का काम समय पर प्रारंभ और पूरा हुआ। इस कार्यक्रम के तहत रक्षा मंत्री ने नौ सितंबर 2015 को आईएनएस वर्जकोश को कमीशन किया। यह कर्नाटक के कारवार में भारतीय नौसेना का नवीनतम प्रतिष्ठान है।
  • मेक इन इंडिया पहल ते तहत 29 सितंबर 2015 को तीन इंटरमीडिएट सपोर्ट वेसल (आईएसवी) टी-48, टी-49 और टी-50 को भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया। 14 आईएसवी मेसर्स एसएचएम शिपकेयर, ठाणे द्वारा स्वदेश में तैयार किए गए हैं। वहीं चार का निर्माण मेसर्स एडीएसबी और पांच का निर्माण मेसर्स रोडमैन पॉलीशिप ने किया है।
  • मुंबई के नेवी डॉकयार्ड में 30 सितंबर 2015 को रक्षा मंत्री ने स्वदेश में ही डिजाइन और निर्मित प्रोजेक्ट 15 ए (कोलकाता श्रेणी) के स्टील्थ गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रायर आईएनएस कोच्चि को नौसेना में कमीशन किया। इस पोत को ‘नेटवर्क ऑफ नेटवर्क्स’ बताया जा रहा है क्योंकि यह अत्याधुनिक डिजिटल नेटवर्क से लैस है।
  • एआईएसडीएन सूचना का प्रमुख मार्ग है जिस पर सभी सेंसरों और हथियारों का डेटा ले लाया जाता है। सीएमएस का प्रयोग स्वदेशी डेटा-लिंक प्रणाली का उपयोग करने वाले अन्य प्लेटफार्मों से जानकारी को एकीकृत करने और समुद्री क्षेत्र में चौकसी प्रदान करने के लिए किया जाता है। मिश्रित विद्युत आपूर्ति प्रबंधन को एपीएमएस और रिमोट कंट्रोल का प्रय़ोग करके पूरा किया जाता है और मशीनरी की निगरानी एसीएस के माध्यम से की जाती है।
  • स्कॉर्पियन क्लास पनडुब्बी आईएनएस, 'कालवरी' के पहले जहाज पंटून से अलग होने के साथ मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल) ने एक और मील का स्थापित किया और  28 नवंबर 2015 को नौसेना डॉकयार्ड से इसे रवाना किया गया। तत्पश्चात्  29 अक्टूबर 2015 को आईएनएस 'कालवारी' को वापस मझगांव डॉक लिमिटेड शिपबिल्डर्स में लाया गया।
  • तमिलनाडु के वायु स्टेशन राजाली अराकोणम में भारतीय नौसेना में लंबी दूरी के समुद्री टोही के आठ बोईंग पी-8I शामिल करने के साथ साथ पनडुब्बी रोधी युद्ध विमान शामिल किये गये। (पहला विमान मई 2013 और अंतिम 2015 के मध्य में शामिल हुआ) रक्षा मंत्री ने 13 नवंबर 2015 को औपचारिक रूप से स्क्वाड्रन राष्ट्र को समर्पित किया। पी-8I एयरक्राफ्ट बोइंग 737-800 (एनजी) एयरफ्रेम पर आधारित है जो अमेरिकी नौसेना के पी-8 ए पोजीडॉन का भारतीय नौसेना संस्करण है। समुद्री टोही, पनडुब्बी विरोधी कार्रवाइयों और इलेक्ट्रॉनिक खुफिया मिशन के लिए एयरक्राफ्ट विदेशी और स्वदेशी, दोनों सेंसरों से सुसज्जित है।
  • 2015 का कमांडरों का संयुक्त सम्मेलन एक परिचालन माहौल में आईएनएस विक्रमादित्य पर आयोजित किया गया। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दिशा-निर्देश पर किया गया था। सम्मेलन के दौरान लगभग 30 जहाजों, 05 पनडुब्बियों और 60 विमानों द्वारा शक्ति प्रदर्शन किया गया।


आगे का मार्ग:

20 जुलाई, 2015 को भारतीय नौसेना स्‍वदेशीकरण योजना (आईएनआईपी): 2015-30, की रिलीज के साथ भारतीय नौसेना ने अपने क्षेत्रीय मित्रों और भागीदारों की क्षमता को बढ़ाने तथा समुद्री पड़ोसियों के सुरक्षा प्रदाताओं के लिए एक बिल्‍डर की नौसेना के रूप में खुद को स्‍थापित करने हेतु अपनी संस्‍था का एक नोटिस दिया। इसके अलावा, यह सर्वविदित है कि भारतीय अनुसंधान और विकास तथा विनिर्माण में गंभीर खामियों हैं। जैसे आईएनआईपी के 5 संचालक (1) सैन्‍य विज्ञान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्‍वसनीय अनुसंधान और विकास की कमी, (2) अनुसंधान और विनिर्माण क्षेत्र के बीच अपर्याप्‍त एककीकरण, (3) उपयोगकर्ताओं डिजाइनरों और निर्माताओं के बीच एकीकृत दृष्‍टिकोण का अभाव, (4) अर्थव्‍यवस्‍थाओं में दृष्‍टिकोण कमी के कारण वाणिज्‍यिक अन-उपलब्‍धता और (5) प्रौद्योगिकी रहित व्‍यवस्‍थाओं का प्रभाव स्‍पष्‍ट रूप से नौसेना की रणनीति में दिखाई देता है।  


संयुक्त अभ्यास

भारत-फ्रांस नौसेना अभ्यास वरूण- 2015

  • भारत-फ्रांस नौसेना अभ्यास (वरूण) का 14वां संस्करण 23 अप्रैल से 02 मई 2015 तक अपतटीय गोवा में संचालित किया गया, जिसमें बंदरगाह और समुद्री चरण दोनों शामिल थे। फ्रांसीसी नौसेना का प्रतिनिधित्व विमान वाहक चार्ल्स डी गॉल, दो विध्वंसक शेवेलियार पॉल और जीन डे वाइन्ने, पुन: आपूर्ति टैंकर मीयूज और एक समद्री पेट्रोल विमान एटलांटिक 2 ने किया। विमान वाहक चार्ल्स डी गॉले के माध्यम से अपने युद्धक विमान रफाल एम, युद्धक विमान सुपर इटेनडार्ड, ई2सी हॉक एडब्ल्यूएसीएस और हेलिकॉप्टर्स डॉफिन और एलाउट्टे 3 को ले जाया गया। भारतीय पक्ष की ओर से विमान वाहक आईएनएस विराट, विध्वंसक आईएनएस मुंबई, स्ट्रेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तरकश, निर्देशित मिसाईल फ्रिगेट आईएनएस गोमती, पुन: आपूर्ति टैंकर आईएनएस टीपक, पनडुब्बी आईएनएस शंकुल और लंबी दूरी के समुद्री टोही पी-8 के साथ त्वरित गति से हमला करने की क्षमता में सक्षम कुछ विमान और सीकिंग 42 बी और चेतक हेलिकॉप्टरों ने भाग लिया।


सिमबैक्स- 2015

पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर, रीयर एडमिरल अजेंद्र बहादुर सिंह की कमान के अंतर्गत भारतीय नौसेना का पूर्वी दस्ता दक्षिणी हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर में तैनाती के लिए संचालन में था। इस तैनाती के एक अंग के तहत, स्वदेश में निर्मित निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट, आईएनएस सतपुड़ा और नवीनतम और स्वदेश में निर्मिति पनडुब्बी-रोधी युद्धक जलपोत 18 मई, 2015 को सिंगापुर पहुँचे। इन युद्धपोतों ने आईएमडीईएक्स-15 में भाग लिया और इसके पश्चात 23 से 26 मई, 2015 को सिंगापुर नौसेना के साथ द्विपक्षीय नौसेना अभ्यास सिमबैक्स-15 में में भागीदारी की।

ऑसिनडेक्स अभ्यास- 2015 

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच उद्घाटन द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास ऑसिनडेक्स-15 का संचालन 11 से 19 सितम्बर, 2015 के बीच भारत के पूर्वी अपतटीय समुद्री क्षेत्र में किया गया। इस अभ्यास का संयुक्त रूप से उद्घाटन विशाखापत्तनम में आईएनएस शिवालिक पर रॉयल ऑस्ट्रेलियन नौसेना (आरएएन) के नौसेना प्रमुख की क्षमता रीयर एडमिरल जोनाथन मीड और पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर, रीयर एडमिरल अजेंद्र बहादुर सिंह द्वारा किया गया। अभ्यास का शुभारंभ पेशेवर वार्तालापों के साथ व्यवहारिक प्रदर्शनों और बंदरगाह चरण के साथ हुआ। इसके बाद समुद्री अभ्यास के तहत बेड़े के युद्धाभ्यास, बंदूकों से निशानेबाजी के साथ-साथ समन्वित पनडुब्बी अभ्यासों के प्रदर्शन शामिल किये गये। तत्पश्चात अभ्यास में क्षेत्रीय, संयुक्त और सम्मिलित अभियान जैसे मानवीय सहायता और आपदा राहत को संचालित करने के संदर्भ में दोनों नौसेनाओं की क्षमता में वृद्धि की गई।

मालाबार अभ्यास- 2015

मालाबार अभ्यास के 19वें सत्र का संचालन बंगाल की खाड़ी में 14 से 19 अक्टूबर, 2015 को किया गया। भारतीय नौसेना और अमरीकी नौसेना के साथ इस अभ्यास में जापान मेरीटाईम सैल्फ डिफेन्स फोर्सेस (जेएमएसडीएफ) ने भी भाग लिया। मालबार- 15 के अंतर्गत व्यापक स्तर के पेशेवर वार्तालाप और समुद्री चरण के दौरान संचालनगत गतिविधियों की विविध श्रेणियों को शामिल किया गया। भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व एक स्वदेश में निर्मित युद्धकपोत आईएनएस शिवालिक, आईएनएस रणविजय, आईएनएस बेतवा और बेड़े को सहायता पहुँचाने वाला एक युद्धपोत आईएनएस शक्ति और एक पनडुब्बी आईएनएस सिंधुध्वज ने किया। इसके अलावा, एलआरएम पेट्रोल विमान पी81 और कुछ अभिन्न रोटरी विंग हेलिकॉप्टर्स ने भी इस त्रिपक्षीय अभ्यास में भाग लिया। अमरीकी नौसेना का प्रतिनिधित्व अमरीकी नौसेना के जापान के योकोसुका में तैनात 7वें बेड़े की कैरियर टास्क फोर्स (सीटीएफ) 70 के युद्धपोतों के द्वारा किया गया। निमित्ज़ श्रेणी के एक वायुयान वाहक यूएसएस थियोडोर रॉसवैल्ट, टाईकॉनडेरोगा श्रेणी के क्रूजर यूएसएस नॉरमेडी और फ्रीडम श्रेणी के लिट्टोरल युद्धक पोत यूएसएस फोर्ट वर्थ ने भी सीटीएफ में भाग लिया। परमाणु क्षमता से सम्पन्न पनडुब्बी यूएसएस सिटी ऑफ कॉरपस के अतिरिक्त, चिरिटी, एफ18 विमान और लंबी दूरी के समुद्री पेट्रोल विमान पी8ए ने भी इस अभ्यास में भाग लिया। जेएमएसडीएफ को अभिन्न हेलिकॉप्टर एसएच 60के साथ एक मिसाइल विध्वंसक जेएस फ्यूजुकी के द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस त्रिपक्षीय अभ्यास ने भारत-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण नौसेनाओं के बीच नौसेना सहयोग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आईएनडीआरए-नौसेना-2015

भारत-रूसी द्विपक्षीय अभ्यास आईएनडीआरए नौसेना 2015 का आंठवा संस्करण 7 से 12 दिसम्बर, 2015 के बीच बंगाल की खाड़ी में विशाखापत्तनम के अपतटीय समुद्री क्षेत्र में संचालित किया गया। इस अभ्यास के दायरे में बंदरगाह चरण के दौरान व्यापक स्तर की पेशेवर वार्ताएं और समुद्र में संचालन गतिविधियों के विविध आयाम शामिल थे। अभ्यास के दौरान, भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व स्वदेश में निर्मित एक युद्धकपोत- आईएनएस सहयाद्री, एक निर्देशित मिसाइल विध्वंसक-आईएनएस रणविजय और बेड़े की सहायता के लिए एक सहायक पोत-आईएनएस शक्ति के साथ-साथ एक पनडुब्बी आईएनएस सिंधुवीर, लंबी दूरी के समुद्री पेट्रोल वायुयान पी81, डॉर्नियर कम दूरी के पेट्रोल वायुयान, हॉक अत्याधुनिक जैट प्रशिक्षक और अन्य अभिन्न रोटेरी विंग हेलिकॉप्टरों के द्वारा किया गया।  द रशियन फैडरेशन नौसेना का प्रतिनिधित्व प्रशांत बेड़े के चार युद्धपोतों के द्वारा किया गया। इस अभ्यास से आपसी विश्वास और आपसी संचालन को भविष्य में और मज़बूत बनाने के साथ-साथ दोनों नौसेनाओं के बीच सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों को साझा करने में भी मदद मिली।

भारतीय वायुसेना

  • भारतीय नौसेना (आईएएफ) अपनी दीर्घकालीन अवधि की परिप्रेक्ष्य योजना के अनुसार अपनी कार्यप्रणालियों को आधुनिक बना रही है। वायुसेना का मुख्य ध्यान रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ स्वदेशी विनिर्माण और विकास को प्रोत्साहन देते हुए ‘’मेक इन इंडिया’’ पर है। आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में क्षमता संवर्द्धन के अंग के तहत मौजूदा हथियार प्लेटफॉर्मो और सहायक प्रणाली के उन्नयन के साथ-साथ नवीन प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।
  • वर्तमान में जारी आधुनिकीकरण योजनाओं के समूचे विस्तार में युद्धक विमान, परिवहन विमान, हेलिकॉप्टर, युद्धक सहायता परिसम्मपत्ति और वायु रक्षा नेटवर्क के साथ-साथ भारतीय वायु सेना की क्षमताओं में वृद्धि शामिल है। निर्बाध अभियानों के लिए समूचे युद्ध क्षेत्र की दृश्यता में वृद्धि को सुनिश्चित करते हुए नेट केन्द्रित, साइबर सुरक्षा इस क्षमता संवर्द्धन के अंग हैं। परिचालन क्षमता को अधिकतम करने के लिए, भारतीय वायुसेना अत्याधुनिक और कुशल संचालन एवं तकनीकी बुनियादी ढांचे का भी निर्माण कर रही है।


अभियान

  अधिग्रहण और उन्‍नयन

एलसीए –हल्‍के लड़ाकू विमान तेजस को वैमानिकी विकास एजेंसी बेंगलुरू द्वारा डिजाईन विकसित किया गया है। एलसीए की प्रारंभिक परिचालन मंजूरी (आईओसी) को 2013 में हासिल किया गया था। आईओसी विन्‍यास में विमानों के उत्‍पादन की पहली श्रृंखला जनवरी, 2015 में भारतीय वायु सेना को सौंपी गई थी।

मिराज-2000 में सुधार  

मिराज-2000 विमान में रडार, हवाई जहाज, इलैक्‍ट्रॉनिक शूट, हथियार, एक आधुनिक कोकपिट की अग्रिम मानकों के सुधार के लिए भारतीय वायु सेना को अनुबंधित किया गया। इस बहुयामी लड़ाकू विमान में आधुनिक संचालन प्रणालियों का विकास किया गया। एक मिराज-2000 को इसकी परिचालन क्षमता का परीक्षण, गति विशेषता की जांच के लिए यमुना एक्‍सप्रेसवे पर उतारा गया।

मिग-29 में सुधार

बेस मरम्‍मत डिपो में मिग-29 विमान की श्रृंखला में उन्‍नयन का कार्य वर्तमान में चल रहा है।

राफेल विमान

भारत सरकार ने भारत और फ्रांसीसी सरकार के मध्‍य अंतर सरकारी समझौते के माध्‍यम से 36 राफेल विमान खरीदने का फैसला किया है। 

सी-17 ग्‍लोब मास्‍टर - ।।।

जून, 2011 में संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका के साथ 10 सी-17 विमानों की आपूर्ति के लिए एक अनुबंध पर हस्‍ताक्षर किए गए जिन्‍हें सितंबर, 2013 में भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया। इसी वर्ष के भीतर सभी विमान भारत के सुपुर्द कर दिए गए जो वायु सेना में परिचालन कर रहे हैं।

एएन-32 में सुधार

एएन-32 का बेड़ा 1984 से 1991 के बीच भारतीय सेना में शुरू किया गया। टोटल टैक्‍निकल लाईफ एक्‍सटेंशन (टीटीएलई)/री-एक्‍यूपमेंट परियोजना पर वर्तमान में कीव, यूक्रेन में काम चल रहा है। और सर्वोत्‍तम बेस रिपेयर डिपो (बीआरडी) कानपुर में है। यह परियोजना विमानों की अवधि में 15 साल का इजाफा करने के साथ इसके परिचालन क्षमता और सुरक्षा में भी विस्‍तार करेगी।

अटैक हेलिकॉप्‍टर

सितंबर, 2015 में 64 ई अपाचे हमलावर हेलिकॉप्‍टरों की खरीद के लिए एक अनुबंध पर हस्‍ताक्षर किए गए। इन हेलिकॉप्‍टरों की डिलीवरी जुलाई, 2019 से प्रारंभ हो जाएगी। लड़ाकू विमानों का प्रयोग एनटी टैंक गाइडेड मिशाईल, बगावत विरोधी अभियानों दुश्‍मन के हवाई हमलों, मानव रहित वाहन, निराकरण संचालन और बचाव अभियानों के लिए किया जाएगा। अटैक हेलिकॉप्‍टर सुरक्षात्‍मक अद्वितीय क्षमता प्रदान करते हैं, यह क्षमता उत्‍तरी सीमाओं की उंची चोटियों वाले पहाड़ियों के लिए जरूरी है।

हेवी लिफ्ट हेलिकॉप्‍टर (एचएलएच)

सितंबर, 2015 में चिनूक सीएच 47 एफ (आई) हेवी लिफ्ट हेलिकॉप्‍टर (एचएलएच) की खरीद के लिए एक अनुबंध पर हस्‍ताक्षर किए गए थे। हेलिकॉप्‍टरों की डिलीवरी चरणबद्ध तरीके से शुरू होगी। सशस्‍त्र बलों में आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता और आपदा राहत मिशन शुरू करने और सामरिक और रणनीतिक एयर लिफ्ट मिशन के लिए एचएलएच की आवश्‍यकता जरूरी है। पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचों के निर्माण के लिए एचएलएच बहुत ही आवश्‍यक है। इस हेलिकॉप्‍टर के माध्‍यम से भारी समान और निर्माण उपकरणों को पहुंचाया जा सकता है।   

पिलाटस इंडस्क्शनः भारत सरकार और स्विस कंपनी के बीच 24 मई, 2012 में हुए बीटीए खरीद समझौते के क्रम में एम/एस पिलाटस एयरक्राफ्ट लिमिटेड ने अक्टूबर 2015 में आईएएफ को सभी बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट (बीटीए)- पीसी-7  एमके 2 की डिलिवरी पूरी की। इन एयरक्राफ्ट को फिलहाल एबी-इनीशियो पायलट ट्रेनिंग में इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि आगे इन एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल स्टेज-2 फ्लाइंग ट्रेनिंग में भी किए जाने की योजना है। अपनी तरह के इस अनूठे एयरक्राफ्ट से नए नियुक्त पायलटों को युद्ध के दौरान उड़ान के वास्ते तैयार करने में मदद मिल रही है।

माइक्रोलाइटः माइक्रोलाइट्स की आपूर्ति के लिए अक्टूबर 2015 में पीपीस्ट्रेल, स्लोवेनिया के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इनकी डिलिवरी अक्टूबर 2016 से शुरू होगी और अक्टूबर 2020 तक पूरी हो जाएगी। इसे आईएएफ में उड़ान क्षेत्रों में बर्ड संबंधी गतिविधियों के निगरानी के माध्यम से सुरक्षा बढ़ाने और बर्ड्स पर नियंत्रण के उपायों को आगे बढ़ाने में इस्तेमाल किया जाएगा।

एयर डिफेंस नेटवर्क

एयर डिफेंस रडारः भारत आसमान में मौजूदा एयर डिफेंस रडार व्यवस्था को मजबूत देने, कई नए सेंसर्स को आईएएफ में शामिल किया जा रहा है। हाल में इस दिशा में की गईं पहल निम्नलिखित हैं:

एमपीआरः इजरायल से लिए गए मध्यम क्षमता के रडारों को शामिल किया गया है। इन रडारों ने 80 के दशक की तकनीक की जगह ली है।

एलएलटीआरः सीमा पर निचले स्तर के रडार की कमी को दूर करने के लिए नए लो लेवल ट्रांसपोर्टेबिल रडारों (एलएलटीआर) को आईएफ में शामिल किया जा रहा है, जिन्हें फ्रांस की एम/एस थेल्स से तकनीक के हस्तांतरण के साथ लिया गया है। एम/एस बीईएल अपनी तरह के इन अनूठे रडारों का सीमित संख्या में भारत में उत्पादन करेगी। ये रडार गतिशील हैं और जरूरत के मुताबिक इन्हें कहीं भी तैनात किया जा सकता है।

एलएलएलडब्ल्यूआरः लो लेवल लाइट वेट रडार्स (एलएलएलडब्ल्यूआर) को हमारी मोबाइल ऑब्जर्वेशन फ्लाइट्स (एमओएफ) को इलेक्ट्रॉनिक आई उपलब्ध कराने के वास्ते शामिल किया जा रहा है। ये रडार निचले स्तर की एरियल चुनौतियों को स्कैन करता है और पूर्व चेतावनी जारी करता है।

मिसाइल सिस्टम्स

आकाश मिसाइल सिस्टमः आईएएफ अपनी इनवेंट्री में आकाश मिसाइल सिस्टम (एएमएस) को शामिल करने की प्रक्रिया में है। इसके लिए 10 जुलाई 2015 को एयर फोर्स स्टेशन ग्वालियर में एक औपचारिक समारोह का आयोजन हुआ था।

हारपूनः हारपून एंटी-शिप ऑपरेशन मिसाइलों और उससे जुड़े उपकरणों की खरीद के लिए अगस्त 2010 में समझौता हुआ था। इन हथियारों की ढुलाई और डिलिवरी के लिए एयरक्रू को प्रशिक्षण देने का काम पूरा हो गया है। इन हथियारों के शामिल होने से समुद्र में बढ़ती चुनौतियों का सामना करने में आईएएफ को मदद मिलेगी और समुद्र में भारतीय नौसेना में उसके परिचालन को ज्यादा समर्थन दिया जा सकेगा।
एमआईसीए एयर टू एयर मिसाइलः अपग्रेड किए गए मिराज-2000 एयरक्राफ्ट के लिए हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल एमआईसीए की डिलिवरी शुरू हो गई है और इन मिसाइलों की डिलिवरी से मिराज-2000 की एक सक्षम प्लेटफॉर्म के रूप में क्षमताएं बढ़ेंगी।

एसपीआईसीई-2000 बमः आईएएफ ने फोर्टीफाइड (fortified) और भूमिगत कमांड सेंटर्स के खिलाफ इस्तेमाल के वास्ते ज्यादा सटीक और पहुंच वाले प्रिसीसन गाइडेड बम खरीदे हैं। इस हथियार का परीक्षण किया जा चुका है और इसकी क्षमताओंकी आईएफ की फायरिंग रेंज में भी पुष्टि हुई है।

इंडीजिनस पिचोरा कॉम्बैट सिमुलेटर (आईपीसीएस)

पिचोरा मिसाइल सिस्टम आईएएफ के एयर डिफेंस सेटअप के लिहाज से एक बेहद अहम तत्व है। इस सिस्टम को राष्ट्रीय महत्व की संपत्तियों की रक्षा के वास्ते 1974 से 1989 के दौरान रूस से खरीदा गया था। इसे मिसाइल कॉम्बैट क्रू को प्रशिक्षण देने के वास्ते सिमुलेटर के साथ उपलब्ध कराया गय है। पिचोरा सिस्टम, ओईएम द्वारा तय सीमा से ज्यादा अवधि तक अस्तित्व में है। हालांकि नए सिस्टम को शामिल किए जाने में देरी के चलते इस सिस्टम को अभी बरकरार रखा गया है। कम विश्वसनीय प्रदर्शन और ओईएम से प्रोडक्ट सपोर्ट में कमी के कारण पिचोरा सिस्टम को ज्यादा समय तक इस्तेमाल करना चुनौतीपूर्ण है।

  • ज्यादा अवधि तक इस्तेमाल के क्रम में आईएएफ ने कॉम्बैट क्रू के प्रशिक्षण के लिए पिचोरा कॉम्बैट सिमुलेटर का स्वदेशी क्लास रूम वर्जन तैयार किया गया है। सिमुलेटर को 2.3 लाख रुपए की लागत से स्वदेशी स्तर पर तैयार किया गया है, जबकि वेंडर ने इसके लिए 55 लाख रुपये की लागत क्वोट की थी। भारत के प्रधानमंत्री ने 8 अक्टूबर 2015 को सिमुलेटर के स्वदेशीकरण के वास्ते उत्कृष्टता प्रमाण पत्र दिया था।

मीटरोलॉजी

प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया ‘सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस’ पुरस्कारः मौसम की मौजूदा जानकारी का महत्व और इस्तेमाल उसकी मुद्रा और ऑपरेटर्स और नीति निर्धारकों को रियल टाइम आधार पर उसकी उपलब्धता में निहित होता है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए मौसम विभाग ने एक ऑनलाइन पोर्टल –मौसम ऑनलाइन (एमओएल) की योजना बनाई और उसे लागू किया। इसका एक मात्र उद्देश्य मौसम की सही भविष्यवाणी करना है, जिससे कमांडरों और ऑपरेटरों को हवाई परिचालन की योजना बनाने और उन्हें लागू करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने 8 अक्टूबर, 2015 को 83वें वायु सेना दिवस के मौके पर हुए एक समाहोर में मौसम विभाग के निदेशक को एक सर्टिफिकेट फॉर एक्सीलेंस इन इनोवेशन भी प्रदान किया था।

संयुक्त योजना और परिचालन

भारत-अमेरिका संयुक्त अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास’, भारत-ब्रिटेन संयुक्त अभ्यास ‘अजेय वैरियर’, भारत-चीन संयुक्त अभ्यास ‘हाथ में हाथ’, भारत-थाईलैंड संयुक्त प्रशिक्षण ‘अभ्यास मैत्री’, भारत-मालदीव संयुक्त प्रशिक्षण ‘अभ्यास एकुवेरियन’ संयुक्त अभ्यास रहे, जो भारतीय सेना अपनी वायुसेना संपत्तियों के साथ इस साल पहले ही मित्र देशों के साथ कर चुकी है।

  आईएएफ और सिविल अथॉरिटीज के बीच सहयोग
  मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) परिचालन

ओपी राहतः भारत सरकार को युद्ध के चलते यमन जैसे देशों से लगभग 4,000 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को निकालने की जरूरत महसूस हुई।  एमईए, आईएएफ, भारतीय नौसेना और वायुसेना के संयुक्त प्रयास से भारतीय नागरिकों को कई स्थानों से निकाला गया। जहां भारतीय नौसेना के जहाज यमन के बंदरगाह शहर डिजीबाउटी से नागरिकों को लेकर आए और वायु सेना नागरिकों को साना से डिजीबाउटी तक लेकर आई, वहीं आईएएफ ने भारतीय नागरिकों को डिजीबाउटी से कोच्चि और मुंबई लाने के लिए अपने तीन सी-17 एयरक्राफ्ट लगा दिए थे। आईएएफ के एयरक्राफ्टों ने नागरिकों को लाने के लिए कुल 11 ट्रिप कीं, जिनके माध्यम से 2,096 भारतीय नागरिकों को निकालने में कामयाबी मिली।

ओपी मैत्रीः 25 अप्रैल, 2015 को नेपाल में एक भूकंप आया। इसके बाद भारत ने विदेशी धरती पर सबसे बड़ा आपदा राहत परिचालन शुरू किया और भारत सरकार को सहयोग व राहत उपलब्ध कराई। कुल 1,636 सॉर्टीज (sorties), लगभग 836 घंटों की उड़ान के जरिये हवाई माध्यम से 780 हताहतों (126 विदेशी नागरिकों सहित) को निकाला गया और कई भूकंप प्रभावित क्षेत्रों से 5,188 कर्मचारी निकाले गए।

  • हेलिकॉप्टरः कुल 24 हेलिकॉप्टर उतार दिए गए, जिसमें 741 घंटों में 1,572 सॉर्टीज की गईं। इनके माध्यम के 5,188 पीड़ितों, 780 शवों को निकाला गया। राहत एवं पुनर्वास के कामों में 1,488 सैनिक लगाए गए और 733 टन वजन एयरलिफ्ट किया गया।
  • म्यामांर में बाढ़ राहत परिचालनः 6-7 अगस्त 2015 को एमओडी द्वारा लगाए गए आईएएफ के सी-17 और सी-130जे एयरक्राफ्ट ने दिल्ली से म्यामांर के कलय और मंडालय तक लगभग 104 टन राहत सामग्री एयरलिफ्ट की। सी-17 और सी-130 जे एयरक्राफ्ट मंडालय और कलय तक क्रमशः 48 टन और 10 टन वजन लेकर गए। इसके अलावा गुवाहाटी से 46 टन वजन ले जाने के लिए एक अन्य सी-17 एयरक्राफ्ट को इस्तेमाल किया गया था; जिसे बाद में तीन शटल्स में सी-130 जे एयरक्राफ्ट के माध्यम से कलय को ले जाया गया।

 अन्य देशों के साथ रक्षा सहयोग

अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग के तहत आईएएफ एयर स्टाफ वार्ताओं, पेशेवरों की यात्राओं, खेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से कई मित्र देशों के साथ जुड़ी रही है।

इंद्रधनुष-4: भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय सहयोग के तहत अभ्यास इंद्रधनुष-4 आरएएफ बेस, ब्रिज नॉर्टन और हनिंगटन में 21-30 जुलाई 2015 के बीच संपन्न हुआ। इस अभ्यास में आईएएफके 190 कर्मचारियों ने भाग लिया। इसमें आईएएफ के सुखोई-30एमकेआई, सी-130जे, सी-17, आईएल-78 एयरक्राफ्टों और गरुड़ ने हिस्सा लिया।

संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण (जेएमटी)-15

सिंगापुर एयर फोर्स के साथ एक संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण (जेएमटी-15) 2-22 नवंबर 2015 के बीच एएफ स्टेशन कलईकुंडा में हुआ था। आरएसएएफ ने इसमें अपने 6 एक्स एफ-16 सी/डी एयरक्राफ्ट उतार दिए। द्विपक्षीय अभ्यास दो सप्ताह के लिए 23 नवंबर 2015 तक सुखोई-30 एमकेआई के साथ संपन्न हुआ।

महिलाओं का सशक्तिकरण और कल्याण

बड़े नीतिगत फैसले

सरकार ने आईएएफ की सभी शाखाओं और इकाइयों के लिए योग्य बनाकर महिलाओं को शामिल किए जाने को मंजूरी दे दी। महिलाओं को पुरुषों के समान क्यूआर के रूप में चुना गया। इसके अलावा लिंगभेद को खत्म करते हुए परमानेंट कमीशन देने के वास्ते महिलाओं और पुरुषों दोनों शॉर्ट सर्विस कमीशन पर एक समान क्यूआर लागू कर दिया गया। 15 नवंबर 2015 तक आईएएफ में 348 महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन मिल गया था।

डीआरडीओ

  • 2015 में टैक्टिकल वीपन सिस्टम के क्षेत्र में डीआरडीओ ने मल्टी टारगे, मल्टी डायरेक्शनल क्षमता वाले मीडियम रेंज के एयर डिफेंस सिस्टम आकाश मिसाइल का उत्पादन शुरू किया और उसे शामिल किया।
  • हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल अस्त्र सु-30 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के साथ टारगेट पर मार करने में सक्षम है। मिग-29, सु-30 और भारत के अपने तेजस एयरक्राफ्ट में लगाने के लिए डिजाइन की गई अस्त्र कई सफल परीक्षणों से गुजर चुकी है।
  • सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को जमीन, हवा, समुद्र और उप-समुद्री प्लेटफॉर्म से लॉन्च करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो एक अहम वीपन सिस्टम है। नौसेना के 10 जहाजों में इस अचूक हथियार ब्रह्मोस को तैनात किया गया है और सेना की दो रेजीमेंट के पास यह मिसाइल है। पानी के भीतर से लॉन्च किए जाने वाले वर्जन का सफल परीक्षण हो चुका है। हाल में ब्रह्मोस का भारतीय नौसेना के नए नवेले डिस्ट्रॉयर आईएनएस कोच्चि से सफल परीक्षण किया गया था।
  • हेलिना, एक टैंक रोधी गाइडेड मिसाइल को डायरेक्ट और टॉप अटैक मोड के साथ हल्के उन्नत हेलिकॉप्टर एएलएच में लगाने के लिए डिजाइन किया गया है। भविष्य के हथियारों को पराजित करने के लिए डिजाइन की गई यह मिसाइल अभी परीक्षण के दौर से गुजर रही है।
  • भारत का पहला हल्का मल्टी-रोड सुपरसोनिक कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस चौथी पीढ़ी का फाइटर एयरक्राफ्ट है और यह एयरक्राफ्ट 2,500 से ज्यादा टेकऑफ और लैंडिंग कर चुका है। भारतीय वायुसेना के एक फायर पावर डिमॉन्सट्रेशन ‘आयरन फर्स्ट’ में भी इसका प्रदर्शन किया गया था।
  • एलसीए तेजस को 29 दिसंबर 2013 को शुरुआती परिचालनगत मंजूरी मिली थी और यह अंतिम मंजूरी की ओर बढ़ रहा है। एलसीए तेजस को शुरुआती परिचालनगत मंजूरी मिलने से उत्साहित एलसीए नेवी ने अप्रैल 2012 की अपनी पहली उड़ान के बाद अपनी उड़ानों का परीक्षण शुरू कर दिया है।
  • डीआरडीओ की तकनीक क्षमता स्वदेशी वीपन लोकेटिंग रडार (डब्ल्यूएलआर) के विकास, उत्पादन और उसके स्वीकार के जाने के बाद खासी बढ़ गई है।
  • स्वातिः स्वाति एक उच्च स्तर का गतिशील रडार सिस्टम है, जो एक फेंस डिटेक्शन मोड के साथ परिचालन करती है और शेल्स, मोर्टार और रॉकेटों का तेजी से डिटेक्शन सुनिश्चित करता है।
  • एक विश्वसनीय इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम्स (आईईडब्ल्यूएस) को स्थापित करने के क्रम में डीआरडीओ ने हिमशक्ति के विकास में एक बड़ी सफलता हासिल की। शामिल करने से पहले किसी भी ईडब्ल्यू सिस्टम के लिए फील्ड इवैल्युएशन एंड ट्रायल्स को पहली बार वास्तविक तैनाती क्षेत्र में कराया गया।
  • फायर पावर बढ़ाने के लिए लंबी रेंज वाले पिनाका एमके-2 का विकास किया गया और फिलहाल इसका परीक्षण चल रहा है।
  • एनएसटीएल, विशाखापट्टनम में हाइड्रोडायनामिक परीक्षण इकाई सी कीपिंग एंड मैनोवरिंग बेसिन की स्थापना की गई है और रक्षा मंत्री ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया। इस इकाई को नए डिजाइन किए गए जहाजों के प्रदर्शन के अनुमान के लिए मॉडल परीक्षण करने में इस्तेमाल किया जाएगा, साथ ही यहां पर विभिन्न परिस्थितियों में उनके प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा।
  • मरीचः यह एक स्वदेशी तौर पर विकसित टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम है, जो किसी टॉरपीडो हमले से किसी नेवल प्लेटफॉर्म को बचाने के लिए भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है।
  • टॉरपीडो लॉन्च करने और रिकवरी के वास्ते डीआरडीओ द्वारा विकसित किए गए आईएनएस अस्त्रआधारिणी भारतीय नौसेना ने तैनात कर दिया है। जहाज को एक यूनीक टैकामारन हुल फॉर्म में डिजाइन किया गया है, जिससे उसकी बिजली जरूरत में खासी कमी आ जाती है। यह कई तरह के टॉरपीडो को लॉन्च कर सकता है और उनका पता लगा सकता है।
  • ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को बढ़ावा देने के क्रम में डीआरडीओ ने स्वदेशी उत्पादन में लगे निजी और सरकारी उद्योगों के लिए तकनीक हस्तांतरण (टीओटी) और रक्षा तकनीक को समाज के वास्ते इस्तेमाल के व्यवसायीकरण के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं। डीआरडीओ ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत 57 उद्योगों को 75 लाइसेंसिंग एग्रीमेंट्स फॉर ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (एलएटीओटी) जारी किए हैं।

  भारतीय तटरक्षक बल

  • वर्ष के दौरान भारतीय तटरक्षक बल के जहाजों और क्राफ्ट्स ने 618.370    करोड़ रुपए का  तस्करी का सामना जब्त किया
  • 15 दिसंबर 2015 तक दो तस्करी के जहाज और 15 नौका जब्त की गईं और भारतीय जल क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश करने पर 156 नाविकों को गिरफ्तार किया गया।
  • वर्ष के दौरान 179 सर्च एंड रिसक्यू (एसएआर) मिशन चलाए गए और समुद्री इलाकों में फंसे 3,756 लोगों की जान बचाई गई।

नया आगमन (इंडक्शन)/तैनाती

  • छह स्वदेश निर्मित ऑफशोर पेट्रोल वीजल्स (ओपीवी) की कड़ी में पहला आईसीजीएस ‘समर्थ’ को रक्षा मंत्री ने गोवा में 10 नवंबर, 2015 को तैनाती दी। सबसे ज्यादा उन्नत तकनीक, नैविगेशन और संचार उपकरण, सेंसरों और मशीनरी से युक्त यह ओपीवी 105 मीटर लंबा है और उसे गोवा शिपयार्ड ने बनाया है। गोवा में बेस्ड आईसीजीएस समर्थ को मुख्य रूप से इकोनॉमिक जोन की निगरानी के लिए तैनात किया गया है और उसकी अन्य जिम्मेदारियों में वेस्टर्न सीबोर्ड से भारतके सामुद्रिक हितों की रक्षा करना है।
  • इस साल 8 फास्ट पेट्रोल वीसल्स (एफपीवी) की भी तैनाती हुई, जिनके नाम आईसीजीएस अमेया, अमोघ, अनघ, अंकित, अनमोल, अपूर्वा, अरिंजय और रानी दुर्गावती था।
  • इसके अलावा वर्ष 2015 के दौरान तटरक्षक बलों में 12 इंटरसेप्टर बोट्स और एक पॉल्युशन कंट्रोल वीसल (पीसीवी) आईसीजीएस ‘समुद्र पावक’ को भी शामिल किया गया।


  पूर्व सैनिक कल्याण

  • सरकार ने सैन्य बलों के लिए बहुप्रतीक्षित ‘वन रैंक वन पेंशन’ योजना की घोषणा 7 नवंबर 2015 को की। ओआरओपी समान रैंक वाले और समान वर्षों की सेवाएं देने वाले रक्षा सेवा के कर्मचारियों की पेंशन की असमानता खत्म होने की उम्मीद है, जिससे सरकार पर सालाना 8,000 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा। 14 दिसंबर 2015 को सरकार ने ओआरओपी योजना के कार्यान्वयन पर गौर करने के लिए जस्टिस नरसिम्हा रेड्डी की अगुआई में एक न्यायिक समिति को नियुक्त किया था।
  • 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों की घोषणा से कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में भारी बढ़ोत्तरी होगी। पहली बार आयोग ने ज्यादा जोखिम वाले कार्यो में लगे नौसेना और वायु सेना के सभी कर्मचारियों की मिलिट्री सर्विस पे (एमएसपी) और विशेष भत्तों में भारी बढ़त्तरी दी है।
  • इमप्लॉईज कॉन्ट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) को और विस्तार देते हुए इसे देश के विभिन्न हिस्सों के पॉलीक्लीनिक्स और रेफरल अस्पतालों तक कर दिया गया है।


 नेपाल भूकंप के पीड़ितों तक संपर्क कायम करना

नेपाल के लिए राष्ट्र के राहत प्रयासों के तहत भारतीय सेना ने 25 अप्रैल 2015 से ऑपरेशन ‘मैत्री’ लॉन्च किया था। इंजीनियर टास्क फोर्सेज ने बारपाक, बसंतपुर/भक्तपुर और जोरबाती से बचाव और पुनर्वास कार्यों की शुरुआत की थी। भारतीय सेना के पायलटों ने मुश्किलों में फंसे लोगों को निकाला, राहत सामग्री पहुंचाई और नेपाल की सेना को राहत कार्य के लिए दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचने में मदद की। सेना और वायु सेना हेलिकॉप्टरों ने प्रभावित क्षेत्रों में 1,650 सॉर्टीज कीं, 994 लोगों को बचाया, 1,726 सैनिक लगाए और 747 टन सामग्री की आपूर्ति की।

भारतीय सेना के फील्ड हॉस्पिटल्स ने नेपाल में 4,690 लोगों को उपचार और दवाएं मुहैया कराईं, जिनमें 300 से ज्यादा सर्जरी भी शामिल हैं।

चेन्नई बाढ़

चेन्नई में भारी बारिश के चलते आई भयानक बाढ़ की स्थिति में राज्य सरकार की मदद के लिए भारतीय सेना 1 दिसंबर, 2015 की दोपहर को आगे आई। चेन्नई गैरिसन इनफैंट्री बटालियन और सेना की इंजीनियर एलीमेंट्स के सैनिकों ने मिलकर दो बचाव और राहत दल बनाए और तामबरम, मुदीचुर, मनीपक्कम, गुदुवांचेरो और उरापक्कम क्षेत्रो में 1 दिसंबर 2015 की शाम से ऑपरेशन शुरू कर दिया। इस दौरान मुश्किल हालात में फंसे 20,000 से ज्यादा लोगों को निकाला गया। सेना ने राज्य सरकार और कुछ एनजीओ द्वारा उपलब्ध कराए गए 1.25 लाख से ज्यादा राहत पैकेज बांटे।

इस संयुक्त ऑपरेशन ‘मदद’ में भारतीय वायुसेना और नौसेना ने भी खासा योगदान किया और मुश्किल में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में मदद की। साथ ही लोगों के बीच राहत सामग्री बांटने में भी मदद की।

पढ़िए 27 दिसंबर 2015 को प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ का पूरा संवाद


मेरे प्यारे देशवासियो, आप सबको नमस्कार। 2015 - एक प्रकार से मेरी इस वर्ष की आख़िरी ‘मन की बात’। अगले ‘मन की बात’ 2016 में होगी। अभी-अभी हम लोगों ने क्रिसमस का पर्व मनाया और अब नये वर्ष के स्वागत की तैयारियाँ चल रही हैं। भारत विविधताओं से भरा हुआ है। त्योहारों की भी भरमार लगी रहती है। एक त्योहार गया नहीं कि दूसरा आया नहीं। एक प्रकार से हर त्योहार दूसरे त्योहार की प्रतीक्षा को छोड़कर चला जाता है। कभी-कभी तो लगता है कि भारत एक ऐसा देश है, जहाँ पर ‘त्योहार Driven Economy’ भी है। समाज के ग़रीब तबक़े के लोगों की आर्थिक गतिविधि का वो कारण बन जाता है। मेरी तरफ़ से सभी देशवासियों को क्रिसमस की भी बहुत-बहुत शुभकामनायें और 2016 के नववर्ष की भी बहुत-बहुत शुभकामनायें। 2016 का वर्ष आप सभी के लिए ढेरों खुशियाँ ले करके आये। नया उमंग, नया उत्साह, नया संकल्प आपको नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाए। दुनिया भी संकटों से मुक्त हो, चाहे आतंकवाद हो, चाहे ग्लोबल वार्मिंग हो, चाहे प्राकृतिक आपदायें हों, चाहे मानव सृजित संकट हो। मानव जाति सुखचैन की ज़िंदगी पाये, इससे बढ़कर के खुशी क्या हो सकती है| 

आप तो जानते ही हैं कि मैं Technology का भरपूर प्रयोग करता रहता हूँ उससे मुझे बहुत सारी जानकारियाँ भी मिलती हैं। ‘MyGov.’ मेरे इस portal पर मैं काफी नज़र रखता हूँ। 

पुणे से श्रीमान गणेश वी. सावलेशवारकर, उन्होंने मुझे लिखा है कि ये season, Tourist की season होती है। बहुत बड़ी मात्रा में देश-विदेश के टूरिस्ट आते हैं। लोग भी क्रिसमस की छुट्टियाँ मनाने जाते हैं। Tourism के क्षेत्र में बाकी सब सुविधाओं की तरफ़ तो ध्यान दिया जाता है, लेकिन उन्होंने कहा है कि जहाँ-जहाँ Tourist Destination है, Tourist place है, यात्रा धाम है, प्रवास धाम है, वहाँ पर स्वच्छता के संबंध में विशेष आग्रह रखना चाहिये। हमारे पर्यटन स्थल जितने साफ़-सुथरे होंगे, दुनिया में भारत की छवि अच्छी बनेगी। मैं गणेश जी के विचारों का स्वागत करता हूँ और मैं गणेश जी की बात को देशवासियों को पहुंचा रहा हूँ और वैसे भी हम ‘अतिथि देवो भव’ कहते हैं, तो हमारे यहाँ तो जब अतिथि आने वाला होता है तो घर में हम कितनी साज-सज्जा और सफाई करते हैं। तो हमारे पर्यटन स्थल पर, Tourist Destination पर, हमारे यात्रा धामों पर, ये सचमुच में एक विशेष बल देने वाला काम तो है ही है। और मुझे ये भी खुशी है कि देश में स्वच्छता के संबंध में लगातार ख़बरें आती रहती हैं। मैं Day one से इस विषय में मीडिया के मित्रों का तो धन्यवाद करता ही रहता हूँ, क्योंकि ऐसी छोटी-छोटी, अच्छी-अच्छी चीजें खोज-खोज करके वो लोगों के सामने रखते हैं। अभी मैंने एक अखबार में एक चीज़ पढ़ी थी। मैं चाहूँगा कि देशवासियों को मैं बताऊँ। 

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भोजपुरा गाँव में एक बुज़ुर्ग कारीगर दिलीप सिंह मालविया। अब वो सामान्य कारीगर हैं जो meson का काम करते हैं, मज़दूरी करते हैं। उन्होंने एक ऐसा अनूठा काम किया कि अखबार ने उनकी एक कथा छापी। और मेरे ध्यान में आई तो मुझे भी लगा कि मैं इस बात को आप तक पहुचाऊँ। छोटे से गाँव के दिलीप सिंह मालविया, उन्होंने तय किया कि गाँव में अगर कोई material provide करता है तो शौचालय बनाने की जो मज़दूरी लगेगी, वो नहीं लेंगे और वो मुफ़्त में meson के नाते काम करते हुए शौचालय बना देंगे। भोजपुरा गाँव में उन्होंने अपने परिश्रम से, मज़दूरी लिये बिना, ये काम एक पवित्र काम है इसे मान करके अब तक उन्होंने 100 शौचालयों का निर्माण कर दिया है। मैं दिलीप सिंह मालविया को ह्रदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूँ, अभिनन्दन देता हूँ। देश के संबंध में निराशा की बातें कभी-कभी सुनते हैं। लेकिन ऐसे कोटि-कोटि दिलीप सिंह हैं इस देश में जो अपने तरीक़े से कुछ-न-कुछ अच्छा कर रहे हैं। यही तो देश की ताकत है। यही तो देश की आशा है और यही तो बातें हैं जो देश को आगे बढ़ाती हैं और तब ‘मन की बात’ में दिलीप सिंह का गर्व करना, उनका गौरव करना बहुत स्वाभाविक लगता है। 

अनेक लोगों के अथक प्रयास का परिणाम है कि देश बहुत तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है। क़दम से क़दम मिला करके सवा सौ करोड़ देशवासी एक-एक क़दम ख़ुद भी आगे बढ़ रहे हैं, देश को भी आगे बढ़ा रहे हैं। बेहतर शिक्षा, उत्तम कौशल एवं रोज़गार के नित्य नए अवसर। चाहे नागरिकों को बीमा सुरक्षा कवर से लेकर बैंकिंग सुविधायें पहुँचाने की बात हो। वैश्विक फ़लक पर ‘Ease of Doing Business’ में सुधार, व्यापार और नये व्यवसाय करने के लिए सुविधाजनक व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराना। सामान्य परिवार के लोग जो कभी बैंक के दरवाज़े तक नहीं पहुँच पाते थे, ‘मुद्रा योजना’ के तहत आसान ऋण उपलब्ध करवाना। 

हर भारतीय को जब ये पता चलता है कि पूरा विश्व योग के प्रति आकर्षित हुआ है और दुनिया ने जब ‘अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस’ मनाया और पूरा विश्व जुड़ गया तब हमें विश्वास पैदा हो गया कि वाह, ये तो है न हिन्दुस्तान। ये भाव जब पैदा होता है न, ये तब होता है जब हम विराट रूप के दर्शन करते हैं। यशोदा माता और कृष्ण की वो घटना कौन भूलेगा, जब श्री बालकृष्ण ने अपना मुँह खोला और पूरे ब्रह्माण्ड का माता यशोदा को दर्शन करा दिये, तब उनको ताक़त का अहसास हुआ। योग की घटना ने भारत को वो अहसास दिलाया है। 

स्वच्छता की बात एक प्रकार से घर-घर में गूंज रही है। नागरिकों का सहभाग भी बढ़ता चला जा रहा है। आज़ादी के इतने सालों के बाद जिस गाँव में बिजली का खम्भा पहुँचता होगा, शायद हम शहर में रहने वाले लोगों को, या जो बिजली का उपभोग करते हैं उनको कभी अंदाज़ नहीं होगा कि अँधेरा छंटता है तो उत्साह और उमंग की सीमा क्या होती है। भारत सरकार का और राज्य सरकारों का ऊर्जा विभाग काम तो पहले भी करता था लेकिन जब से गांवों में बिजली पहुँचाने का 1000 दिन का जो संकल्प किया है और हर दिन जब ख़बर आती है कि आज उस गाँव में बिजली पहुँची, आज उस गाँव में बिजली पहुँची, तो साथ-साथ उस गाँव के उमंग और उत्साह की ख़बरें भी आती हैं। अभी तक व्यापक रूप से मीडिया में इसकी चर्चा नहीं पहुँची है लेकिन मुझे विश्वास है कि मीडिया ऐसे गांवों में ज़रूर पहुंचेगा और वहाँ का उत्साह-उमंग कैसा है उससे देश को परिचित करवाएगा और उसके कारण सबसे बड़ा तो लाभ ये होगा कि सरकार के जो मुलाज़िम इस काम को कर रहे हैं, उनको एक इतना satisfaction मिलेगा, इतना आनंद मिलेगा कि उन्होंने कुछ ऐसा किया है जो किसी गाँव की, किसी की ज़िंदगी में बदलाव लाने वाला है। किसान हो, ग़रीब हो, युवा हो, महिला हो, क्या इन सबको ये सारी बातें पहुंचनी चाहिये कि नहीं पहुंचनी चाहिये? पहुंचनी इसलिये नहीं चाहिये कि किस सरकार ने क्या काम किया और किस सरकार ने काम क्या नहीं किया! पहुंचनी इसलिये चाहिए कि वो अगर इस बात का हक़दार है तो हक़ जाने न दे। उसके हक़ को पाने के लिए भी तो उसको जानकारी मिलनी चाहिये न! हम सबको कोशिश करनी चाहिये कि सही बातें, अच्छी बातें, सामान्य मानव के काम की बातें जितने ज़्यादा लोगों को पहुँचती हैं, पहुंचानी चाहिए। यह भी एक सेवा का ही काम है। मैंने अपने तरीक़े से भी इस काम को करने का एक छोटा सा प्रयास किया है। मैं अकेला तो सब कुछ नहीं कर सकता हूँ। लेकिन जो मैं कह रहा हूँ तो कुछ मुझे भी करना चाहिये न। एक सामान्य नागरिक भी अपने मोबाइल फ़ोन पर ‘Narendra Modi App’ को download करके मुझसे जुड़ सकता है। और ऐसी छोटी-छोटी-छोटी बातें मैं उस पर शेयर करता रहता हूँ। और मेरे लिए खुशी की बात है कि लोग भी मुझे बहुत सारी बातें बताते हैं। आप भी अपने तरीक़े से ज़रूर इस प्रयास में जुड़िये, सवा सौ करोड़ देशवासियों तक पहुंचना है। आपकी मदद के बिना मैं कैसे पहुंचूंगा। आइये, हम सब मिलकर के सामान्य मानव की हितों की बातें, सामान्य मानव की भाषा में पहुंचाएं और उनको प्रेरित करें, उनके हक़ की चीजों को पाने के लिए। 

मेरे प्यारे नौजवान साथियो, 15 अगस्त को लाल किले से मैंने ‘Start-up India, Stand-up India’ उसके संबंध में एक प्राथमिक चर्चा की थी। उसके बाद सरकार के सभी विभागों में ये बात चल पड़ी। क्या भारत ‘Start-up Capital’ बन सकता है? क्या हमारे राज्यों के बीच नौजवानों के लिए एक उत्तम अवसर के रूप में नये–नये Start-ups, अनेक with Start-ups, नये-नये Innovations! चाहे manufacturing में हो, चाहे Service Sector में हो, चाहे Agriculture में हो। हर चीज़ में नयापन, नया तरीका, नयी सोच, दुनिया Innovation के बिना आगे बढ़ती नहीं है। ‘Start-up India, Stand-up India’ युवा पीढ़ी के लिए एक बहुत बड़ा अवसर लेकर आयी है। मेरे नौजवान साथियो, 16 जनवरी को भारत सरकार ‘Start-up India, Stand-up India’ उसका पूरा action-plan launch करने वाली है। कैसे होगा? क्या होगा? क्यों होगा? एक ख़ाका आपके सामने प्रस्तुत किया जाएगा। और इस कार्यक्रम में देशभर की IITs, IIMs, Central Universities, NITs, जहाँ-जहाँ युवा पीढ़ी है, उन सबको live-connectivity के द्वारा इस कार्यक्रम में जोड़ा जाएगा। 

Start-up के संबंध में हमारे यहाँ एक सोच बंधी-बंधाई बन गयी है। जैसे digital world हो या IT profession हो ये start-up उन्हीं के लिए है! जी नहीं, हमें तो उसको भारत की आवश्यकताओं के अनुसार बदलाव लाना है। ग़रीब व्यक्ति कहीं मजदूरी करता है, उसको शारीरिक श्रम पड़ता है, लेकिन कोई नौजवान Innovation के द्वारा एक ऐसी चीज़ बना दे कि ग़रीब को मज़दूरी में थोड़ी सुविधा हो जाये। मैं इसको भी Start-up मानता हूँ। मैं बैंक को कहूँगा कि ऐसे नौजवान को मदद करो, मैं उसको भी कहूँगा कि हिम्मत से आगे बढ़ो। Market मिल जायेगा। उसी प्रकार से क्या हमारे युवा पीढ़ी की बुद्धि-संपदा कुछ ही शहरों में सीमित है क्या? ये सोच गलत है। हिन्दुस्तान के हर कोने में नौजवानों के पास प्रतिभा है, उन्हें अवसर चाहिये। ये ‘Start-up India, Stand-up India’ कुछ शहरों में सीमित नहीं रहना चाहिये, हिन्दुस्तान के हर कोने में फैलना चाहिये। और इसे मैं राज्य सरकारों से भी आग्रह कर रहा हूँ कि इस बात को हम आगे बढाएं। 16 जनवरी को मैं ज़रूर आप सबसे रूबरू हो करके विस्तार से इस विषय में बातचीत करूंगा और हमेशा आपके सुझावों का स्वागत रहेगा। 

प्यारे नौजवान साथियो, 12 जनवरी स्वामी विवेकानंद जी की जन्म-जयंती है। मेरे जैसे इस देश के कोटि-कोटि लोग हैं जिनको स्वामी विवेकानंद जी से प्रेरणा मिलती रही है। 1995 से 12 जनवरी स्वामी विवेकानंद जयंती को एक National Youth Festival के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष ये 12 जनवरी से 16 जनवरी तक छत्तीसगढ़ के रायपुर में होने वाला है। और मुझे जानकारी मिली कि इस बार की उनकी जो theme है, क्योंकि उनका ये event them based होता है, theme बहुत बढ़िया है ‘Indian Youth on development skill and harmony’. मुझे बताया गया कि सभी राज्यों से, हिंदुस्तान के कोने-कोने से, 10 हज़ार से ज़्यादा युवा इकट्ठे होने वाले हैं। एक लघु भारत का दृश्य वहाँ पैदा होने वाला है। युवा भारत का दृश्य पैदा होने वाला है। एक प्रकार से सपनों की बाढ़ नज़र आने वाली है। संकल्प का एहसास होने वाला है। इस Youth Festival के संबंध में क्या आप मुझे अपने सुझाव दे सकते हैं? मैं ख़ास कर के युवा दोस्तों से आग्रह करता हूँ कि मेरी जो ‘Narendra Modi App’ है उस पर आप directly मुझे अपने विचार भेजिए। मैं आपके मन को जानना-समझना चाहता हूँ और जो ये National Youth Festival में reflect हो, मैं सरकार में उसके लिए उचित सुझाव भी दूँगा, सूचनाएँ भी दूँगा। तो मैं इंतज़ार करूँगा दोस्तो, ‘Narendra Modi App’ पर Youth Festival के संबंध में आपके विचार जानने के लिए। 

अहमदाबाद, गुजरात के दिलीप चौहान, जो एक visually challenged teacher हैं, उन्होंने अपने स्कूल में ‘Accessible India Day’ उसको मनाया। उन्होंने मुझे फ़ोन कर के अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं: - 

“Sir, we celebrated Accessible India Campaign in my school. I am a visually challenged teacher and I addressed 2000 children on the issue of disability and how we can spread awareness and help differently abled people. And the students’ response was fantastic, we enjoyed in the school and the students were inspired and motivated to help the disabled people in the society. I think it was a great initiative by you.” 

दिलीप जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। और आप तो स्वयं इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। आप भली-भाँति इन बातों को समझते हैं और आपने तो बहुत सारी कठिनाइयाँ भी झेली होंगी। कभी-कभी समाज में इस प्रकार के किसी व्यक्ति से मिलने का अवसर आता है, तो हमारे मन में ढेर सारे विचार आते हैं। हमारी सोच के अनुसार हम उसे देखने का अपना नज़रिया भी व्यक्त करते हैं। कई लोग होते हैं जो हादसे के शिकार होने के कारण अपना कोई अंग गवाँ देते हैं। कुछ लोग होते हैं कि जन्मजात ही कोई क्षति रह जाती है। और ऐसे लोगों के लिए दुनिया में अनेक-अनेक शब्द प्रयोग हुए हैं, लेकिन हमेशा इन शब्दों के प्रति भी चिंतन चलता रहा है। हर समय लोगों को लगा कि नहीं-नहीं-नहीं, ये उनके लिए ये शब्द की पहचान अच्छी नहीं लगती है, सम्मानजनक नहीं लगती है। और आपने देखा होगा कि कितने शब्द आ चुके हैं। कभी Handicapped शब्द सुनते थे, तो कभी Disable शब्द सुनते थे, तो कभी Specially Abled Persons - अनेक शब्द आते रहते हैं। ये बात सही है कि शब्दों का भी अपना एक महत्व होता हैI इस वर्ष जब भारत सरकार ने सुगम्य भारत अभियान का प्रारंभ किया, उस कार्यक्रम में मैं जाने वाला था, लेकिन तमिलनाडु के कुछ ज़िलों में और ख़ास कर के चेन्नई में भयंकर बाढ़ के कारण मेरा वहाँ जाने का कार्यक्रम बना, उस दिन मैं उस कार्यक्रम में रह नहीं पाया था। लेकिन उस कार्यक्रम में जाना था तो मेरे मन में कुछ-न-कुछ विचार चलते रहते थे। तो उस समय मेरे मन में विचार आया था कि परमात्मा ने जिसको शरीर में कोई कमी दी है, कोई क्षति दी है, एकाध अंग ठीक से काम नहीं कर रहा है - हम उसे विकलांग कहते हैं और विकलांग के रूप में जानते हैं। लेकिन कभी-कभी उनके परिचय में आते हैं तो पता चलता है कि हमें आँखों से उसकी एक कमी दिखती है, लेकिन ईश्वर ने उसको कोई extra power दिया होता है। एक अलग शक्ति का उसके अन्दर परमात्मा ने निरूपण किया होता है। जो अपनी आँखों से हम नहीं देख पाते हैं, लेकिन जब उसे देखते हैं काम करते हुए, उसे अपने काबिलियत की ओर तो ध्यान जाता है। अरे वाह! ये कैसे करता है? तो फिर मेरे मन में विचार आया कि आँख से तो हमें लगता है कि शायद वो विकलांग है, लेकिन अनुभव से लगता है कि उसके पास कोई extra power, अतिरिक्त शक्ति है। और तब जाकर के मेरे मन में विचार आया, क्यों न हम हमारे देश में विकलांग की जगह पर “दिव्यांग” शब्द का उपयोग करें। ये वो लोग हैं जिनके पास वो ऐसा एक अंग है या एक से अधिक ऐसे अंग हैं, जिसमें दिव्यता है, दिव्य शक्ति का संचार है, जो हम सामान्य शरीर वालों के पास नहीं है। मुझे ये शब्द बहुत अच्छा लग रहा है। क्या मेरे देशवासी हम आदतन विकलांग की जगह पर “दिव्यांग” शब्द को प्रचलित कर सकते हैं क्या? मैं आशा करता हूँ कि इस बात को आप आगे बढ़ाएंगे। 

उस दिन हमने ‘सुगम्य भारत’ अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत हम physical और virtual - दोनों तरह के Infrastructure में सुधार कर उन्हें “दिव्यांग” लोगों के लिए सुगम्य बनायेंगे। स्कूल हो, अस्पताल हो, सरकारी दफ़्तर हो, बस अड्डे हों, रेलवे स्टेशन में ramps हो, accessible parking, accessible lifts, ब्रेल लिपि; कितनी बातें हैं। इन सब में उसे सुगम्य बनाने के लिए Innovation चाहिए, technology चाहिए, व्यवस्था चाहिए, संवेदनशीलता चाहिएI इस काम का बीड़ा उठाया हैI जन-भागीदारी भी मिल रहीं है। लोगों को अच्छा लगा है। आप भी अपने तरीके से ज़रूर इसमें जुड़ सकते हैं। 

मेरे प्यारे देशवासियो, सरकार की योजनायें तो निरंतर आती रहती हैं, चलती रहती हैं, लेकिन ये बहुत आवश्यक होता है कि योजनायें हमेशा प्राणवान रहनी चाहियें। योजनायें आखरी व्यक्ति तक जीवंत होनी चाहियें। वो फाइलों में मृतप्राय नहीं होनी चाहियें। आखिर योजना बनती है सामान्य व्यक्ति के लिए, ग़रीब व्यक्ति के लिए। पिछले दिनों भारत सरकार ने एक प्रयास किया कि योजना के जो हक़दार हैं उनके पास सरलता से लाभ कैसे पहुँचे। हमारे देश में गैस सिलेंडर में सब्सिडी दी जाती है। करोड़ों रुपये उसमें जाते हैं लेकिन ये हिसाब-किताब नहीं था कि जो लाभार्थी है उसी के पास पहुँच रहे हैं कि नहीं पहुँच रहे हैं। सही समय पर पहुँच रहे हैं कि नहीं पहुँच रहे हैं। सरकार ने इसमें थोड़ा बदलाव किया। जन-धन एकाउंट हो, आधार कार्ड हो, इन सब की मदद से विश्व की सबसे बड़ी, largest ‘Direct Benefit Transfer Scheme’ के द्वारा सीधा लाभार्थियों के बैंक खाते में सब्सिडी पहुँचना। देशवासियों को ये बताते हुए मुझे गर्व हो रहा है कि अभी-अभी ‘गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में इसे स्थान मिल गया कि दुनिया की सबसे बड़ी ‘Direct Benefit Transfer Scheme’ है, जो सफलतापूर्वक लागू कर दी गई है। ‘पहल’ नाम से ये योजना प्रचलित है और प्रयोग बहुत सफल रहा है। नवम्बर अंत तक करीब-करीब 15 करोड़ LPG उपभोक्ता ‘पहल’ योजना के लाभार्थी बन चुके हैं, 15 करोड़ लोगों के खाते में बैंक एकाउंट में सरकारी पैसे सीधे जाने लगे हैं। न कोई बिचौलिया, न कोई सिफ़ारिश की ज़रूरत, न कोई भ्रष्टाचार की सम्भावना। एक तरफ़ आधार कार्ड का अभियान, दूसरी तरफ़ जन-धन एकाउंट खोलना, तीसरी तरफ़ राज्य सरकार और भारत सरकार मिल कर के लाभार्थियों की सूची तैयार करना। उनको आधार से और एकाउंट से जोड़ना। ये सिलसिला चल रहा है। इन दिनों तो मनरेगा जो कि गाँव में रोजगार का अवसर देता है, वो मनरेगा के पैसे, बहुत शिकायत आती थी। कई स्थानों पर अब वो सीधा पैसा उस मजदूरी करने वाले व्यक्ति के खाते में जमा होने लगे हैं। Students को Scholarship में भी कई कठिनाइयाँ होती थीं, शिकायतें भी आती थीं, उनमें भी अब प्रारंभ कर दिया है, धीरे-धीरे आगे बढ़ाएंगे। अब तक करीब-करीब 40 हज़ार करोड़ रूपये सीधे ही लाभार्थी के खाते में जाने लगे हैं अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से। एक मोटा-मोटा मेरा अंदाज़ है, करीब-करीब 35 से 40 योजनायें अब सीधी-सीधी ‘Direct Benefit Transfer’ के अंदर समाहित की जा रही हैं। 

मेरे प्यारे देशवासियो, 26 जनवरी - भारतीय गणतंत्र दिवस का एक सुनहरा पल। ये भी सुखद संयोग है कि इस बार डॉ. बाबा साहब अम्बेडकर, हमारे संविधान के निर्माता, उनकी 125वी जयंती है। संसद में भी दो दिन संविधान पर विशेष चर्चा रखी गई थी और बहुत अच्छा अनुभव रहा। सभी दलों ने, सभी सांसदों ने संविधान की पवित्रता, संविधान का महत्व, संविधान को सही स्वरुप में समझना - बहुत ही उत्तम चर्चा की। इस बात को हमें आगे बढ़ाना चाहिए। गणतंत्र दिवस सही अर्थ में जन-जन को तंत्र के साथ जोड़ सकता है क्या और तंत्र को जन-जन के साथ जोड़ सकता है क्या? हमारा संविधान हमें बहुत अधिकार देता है और अधिकारों की चर्चा सहज रूप से होती है और होनी भी चाहिए। उसका भी उतना ही महत्व है। लेकिन संविधान कर्तव्य पर भी बल देता है। लेकिन देखा ये गया है कि कर्तव्य की चर्चा बहुत कम होती है। ज्यादा से ज्यादा जब चुनाव होते हैं तो चारों तरफ़ advertisement होते हैं, दीवारों पर लिखा जाता है, hoardings लगाये जाते हैं कि मतदान करना हमारा पवित्र कर्तव्य है। मतदान के समय तो कर्तव्य की बात बहुत होती है लेकिन क्यों न सहज जीवन में भी कर्तव्य की बातें हों। जब इस वर्ष हम बाबा साहेब अम्बेडकर की 125वी जयंती मना रहे हैं तो क्या हम 26 जनवरी को निमित्त बना करके स्कूलों में, colleges में, अपने गांवों में, अपने शहर में, भिन्न-भिन्न societies में, संगठनों में - ‘कर्तव्य’ इसी विषय पर निबंध स्पर्द्धा, काव्य स्पर्द्धा, वक्तृत्व स्पर्द्धा ये कर सकते हैं क्या? अगर सवा सौ करोड़ देशवासी कर्तव्य भाव से एक के बाद एक कदम उठाते चले जाएँ तो कितना बड़ा इतिहास बन सकता है। लेकिन चर्चा से शुरू तो करें। मेरे मन में एक विचार आता है, अगर आप मुझे 26 जनवरी के पहले ड्यूटी, कर्तव्य - अपनी भाषा में, अपनी भाषा के उपरांत अगर आपको हिंदी में लिखना है तो हिंदी में, अंग्रेज़ी में लिखना है तो अंग्रेज़ी में कर्तव्य पर काव्य रचनाएँ हो, कर्तव्य पर एसे राइटिंग हो, निबंध लिखें आप। मुझे भेज सकते हैं क्या? मैं आपके विचारों को जानना चाहता हूँ। ‘My Gov.’ मेरे इस पोर्टल पर भेजिए। मैं ज़रूर चाहूँगा कि मेरे देश की युवा पीढ़ी कर्तव्य के संबंध में क्या सोचती है। 

एक छोटा सा सुझाव देने का मन करता है। 26 जनवरी जब हम गणतंत्र दिवस मनाते हैं, क्या हम नागरिकों के द्वारा, स्कूल-कॉलेज के बालकों के द्वारा हमारे शहर में जितनी भी महापुरुषों की प्रतिमायें हैं, statue लगे हैं, उसकी सफाई, उस परिसर की सफाई, उत्तम से उत्तम स्वच्छता, उत्तम से उत्तम सुशोभन 26 जनवरी निमित्त कर सकते हैं क्या? और ये मैं सरकारी राह पर नहीं कह रहा हूँ। नागरिकों के द्वारा, जिन महापुरुषों का statue लगाने के लिए हम इतने emotional होते हैं, लेकिन बाद में उसको संभालने में हम उतने ही उदासीन होते हैं| समाज के नाते, देश के नाते, क्या ये हम अपना सहज़ स्वभाव बना सकते हैं क्या, इस 26 जनवरी को हम सब मिल के प्रयास करें कि ऐसे महापुरुषों की प्रतिमाओं का सम्मान, वहाँ सफाई, परिसर की सफाई और ये सब जनता-जनार्दन द्वारा, नागरिकों द्वारा सहज रूप से हो। 

प्यारे देशवासियो, फिर एक बार नव वर्ष की, 2016 की ढेर सारी शुभकामनायें। बहुत-बहुत धन्यवाद। 

किसानों हेतु क्रॉप इंश्योरेंस व एग्रीमार्केट मोबाइल एप लांच, डाउनलोड करें


केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने किसानों के लिए दो मोबाइल एप लांच किया। मोबाइल एप “क्रॉप इंश्योरेंस” से किसानों को न केवल उनके क्षेत्र में उपलब्ध बीमा कवर के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी बल्कि ऋण लेने वाले किसानों को अधिसूचित फसल के लिए इंश्योरेंस प्रीमियम, कवरेज राशि तथा ऋण राशि की गणना में भी मदद मिलेगी। मोबाइल एप “एग्रीमार्केट मोबाइल” का 50 किलोमीटर के दायरे इस्तेमाल करते हुए किसान 50 किलोमीटर के दायरे की मंडियों में फसलों का मूल्य तथा देश की अन्य मंडियों में मूल्य के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है।

श्री राधामोहन सिंह ने दोनों मोबाइल एप जारी करते हुए कहा कि कृषि तथा किसान कल्याण मंत्रालय श्री अटल बिहारी वाजपेयी तथा चौधरी चरण सिंह की जयंती मनाने के लिए 25 दिसंबर से किसान जय विज्ञान सप्ताह आयोजित कर रहा है। मोबाइल एप की लांचिंग सप्ताहभर के समारोह का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि कृषि तथा किसान कल्याण मंत्रालय का प्रयास किसानों तथा अन्य हितधारकों को सभी आवश्यक सूचनाएं समय पर उपलब्ध कराना है ताकि कृषि उत्पादकता और विश्वस्तरीय आय के लिए उचित वातावरण बनाया जा सके। इस दिशा में कृषि क्षेत्र में राष्ट्रीय ई-गर्वंनेंस योजना लांच की गई है। सभी राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों में ब्लॉक स्तरों तक हार्डवेयर देने के अतिरिक्त परियोजना में 12 क्लस्टर सेवाओं (65 से अधिक सचेत वेबसाइटों/एप्लीकेशनों के साथ) का विकास शामिल है।

कृषि और किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि इनमें से 36 एप्लीकेशन तथा वेबपोर्टल चालू कर दिए गए हैं और इनका उपयोग विभिन्न विभाग तथा केन्द्र और राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों के हितधारकों द्वारा किया जा रहा है। इनमें से कुछ हैं एम किसान, किसान पोर्टल, इंश्योरेंस पोर्टल, नाउकास्ट, प्लांट क्वारेंटाइन इंफॉरमेशन सिस्टम, एगमार्कनेट तथा किसान नॉलेज प्रबंधन सिस्टम। परियोजना में टच स्क्रीन कियोस्क, एसएमएस, यूएसएसडी तथा मोबाइल के जरिए वेब आधारित चैनलों से सेवाएं उपलब्ध कराना शामिल है। ग्रामीण भारत में इंटरनेट की पहुंच अभी काफी कम है लेकिन किसानों तथा दूरदराजों के लोगों में मोबाइलों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कृषि तथा किसान कल्याण मंत्रालय ने मोबाइल प्लेटफॉर्मों से अपनी सभी वर्तमान और भविष्य की सेवाओं को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। मंत्रालय के एम किसान पोर्टल को भारी सफलता मिली है। आज एसएमएस से सलाह प्राप्त करने के लिए पंजीकृत किसानों की संख्या लगभग दो करोड़ है। यह सलाह अधिकारियों तथा सभी राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों के विज्ञानिकों, आईसीएआर, आईएमडी और कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा दी जाती है।

श्री राधामोहन सिंह ने कहा कि सरकार अगले महीने नई फसल बीमा योजना लांच करेगी। इसका उद्देश्य कम प्रीमियम के साथ दावों का तेजी से निपटारा होगा।

लांच किए गए मोबाइल एप की विशेषताएः

क्रॉप इंश्योरेंस मोबाइल एप:

भारत सरकार किसानों को फसल बीमा प्रदान करने के लिए बड़ी राशि खर्च करती है ताकि किसानों को अप्रत्याशित परिस्थितियों में राहत दी जा सके। सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियां फसल बीमा प्रदान करती हैं। जिलों/ब्लॉकों में विभिन्न फसलों के लिए बीमा कवच प्रदान करने के लिए बीमा कंपनियों को राज्य/केन्द्रशासित प्रदेश नामित करते है। एक विशेष अवधि के तहत किसान इस सुविधा का लाभ उठाते है। प्राशसनिक तथा तकनीकी कारणों से सूचना किसानों तक समय पर नहीं पहुंच पाती ताकि वे लाभ उठा सके। “क्रॉप इंश्योरेंस मोबाइल एप” से किसानों को न केवल उनके क्षेत्र में उपलब्ध बीमा कवर के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी बल्कि ऋण लेने वाले किसानों को अधिसूचित फसल के लिए इंश्योरेंस प्रीमियम, कवरेज राशि तथा ऋण राशि की गणना में भी मदद मिलेगी। इसका इस्तेमाल सामान्य बीमा राशि, विस्तारित बीमा राशि, प्रीमियम ब्यौरा तथा अधिसूचित क्षेत्र में किसी अधिसूचित फसल की सब्सिडी सूचना के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

एग्रीमार्केट मोबाइल एप:

सही बाजार सूचना के अभाव में किसानों को बिक्री में नुकसान उठाना पड़ता है। इस मोबाइल एप से किसान बाजार भावों के बारे में सूचना एकत्र कर अपना निर्णय ले सकते हैं और यह समझ सकते हैं कि बिक्री के लिए उन्हें आस-पास की किस मंडी में उत्पाद ले जाना चाहिए। यह एप किसानों को आस-पास के फसल मूल्यों से अवगत कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। एग्रीमार्केट मोबाइल एप के इस्तेमाल से 50 किलोमीटर के दायरे की मंडियों में फसलों का बाजार मूल्य प्राप्त किया जा सकता है। यह एप स्वतः मोबाइल जीपीएस इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के स्थान की पहचान करता है और 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले बाजारों में फसलों की कीमतों को उपलब्ध कराता है। यदि कोई व्यक्ति जीपीएस लोकेशन का उपयोग करना नहीं चाहता तो उसके लिए भी किसी अन्य बाजार या फसल का मूल्य प्राप्त करने का विकल्प है। मूल्य एगमार्कनेट पोर्टल से लिए जाते है|

यह दोनों मोबाइल एप कृषि सहकारिता तथा किसान कल्याण विभाग के आईटी प्रभाग द्वारा विकसति किए गए हैं और इन्हें गूगल स्टोर या एम किसान पोर्टल http://mkisan.gov.in/Default.aspx से डाउनलोड किया जा सकता है। 

यदि कोई राज्य इन मोबाइल एप्लीकेशनों को अपनी भाषा में बदलना चाहता है तो ऐसा अपनी भाषा में कुछ महत्वपूर्ण शब्दों के नाम उपलब्ध कराकर कर सकते है। यह एप्लीकेशन उस भाषा में तैयार हो जाएगा।

अच्छे दिन: लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण को मंजूरी मिली



प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण (1-ए) को मंजूरी दे दी है। 22.878 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में 22 स्‍टेशन होंगे। 

इस परियोजना की लागत 6,928 करोड़ रूपये होगी। इसमें भारत सरकार इक्विटी और ऋण के रूप में 1,300 करोड़ रूपये की मदद करेगी। यह परियोजना लखनऊ मेट्रो रेल कार्पोरेशन (एलएमआरसी) द्वारा कार्यान्वित की जायेगी, जिसका पुनर्गठन केंद्र सरकार और उत्‍तर प्रदेश सरकार के बीच 50:50 की संयुक्‍त स्‍वामित्‍व वाली कंपनी के तौर पर होगा। 

कुल 22.878 किलोमीटर लंबे मार्ग में से 19.438 किलोमीटर मार्ग एलिवेटिड (जमीन से ऊपर) होगा, जबकि 3.440 किलोमीटर मार्ग भूमिगत होगा। इस पूरे मार्ग पर 19 एलिवेटिड और तीन भूमिगत मेट्रो स्‍टेशन होंगे। मेट्रो ट्रेन चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट से मुंशी पुलिया के बीच चलेगी। 

यह परियोजना समय-समय पर संशोधित मेट्रो रेलवे (निर्माण यानि कंस्‍ट्रशन ऑफ वर्क) अधिनियम 1978, मेट्रो रेल (संचालन एवं रखरखाव) अधिनियम 2002 और रेलवे अधिनियम 1979 के कानूनी ढांचे के दायरे में आयेगी। 

पृष्‍ठभूमि :

लखनऊ के परिवहन ढांचे पर निरंतर दबाव बढ़ता जा रहा है। पिछले दो दशकों में लखनऊ जबरदस्‍त विकास का गवाह रहा है। भारत की वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार लखनऊ की शहरी आबादी का जमाव 29 लाख है। लखनऊ मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की आबादी 50 लाख से ज्‍यादा है। 

शहर में 14.24 लाख वाहन हैं जिसमें 80 प्रतिशत दुपहिया और 14 प्रतिशत कारे हैं। 

कौशल विकास मंत्रालय की 2015 में उपलब्‍धियां और सफलता की गाथाएं


कौशल भारत क्‍यों?

कौशल भारत का उद्देश्‍य सभी भारतीयों को स्‍वयं और अपने परिवारों के लिए बेहतर भविष्‍य प्राप्‍त करने और इच्‍छाओं को पूर्ण करने के लिए अवसर प्रदान करना है। जनसांख्यिकीय, आर्थिक और सामाजिक कारकों का संयोजन कौशल विकास के लिए भारत में एक तत्‍काल नीति की प्राथमिकता के अंतर्गत आता है।

चुनौती व्‍यापक है। भारत की जनसंख्‍या का 54 प्रतिशत 25 वर्ष की आयु से कम है और जनसंख्‍या का 62 प्रतिशत से ज्‍यादा कामकाजी आयु समूह है। इसके बावजूद भी, भारत की जनसंख्‍या मात्र 4.69 प्रतिशत ही औपचारिक कौशल शिक्षा के अंतर्गत आता है। वर्ष 2025 तक दुनिया की कामकाजी आयु जनसंख्‍या (18.3 प्रतिशत) के 5 व्‍यक्तियों में से एक भारतीय होगा। हाल की कौशल अंतर रिपोर्ट सुझाव देती हैं कि वर्ष 2022 तक 24 प्रमुख क्षेत्रों में अकेले भारत में ही 109 मिलियन से ज्‍यादा वृद्धिशील मानव संसाधनों की आवश्‍यकता होगी। असंगठित क्षेत्र में 93 प्रतिशत भारतीय श्रमिक कार्य करते हैं और वे अनौपचारिक चैनलों और औपचारिक प्रमाणीकरण  की कमी के साथ कौशल प्राप्‍त करते हैं। इन विविध चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की कौशल प्रशिक्षण प्रारिस्थितिकी तंत्र को कैसे सुसज्जित किया जा सकता है।

उपर्युक्‍त चुनौतियों के समाधान के लिए विशेष रूप से इन पर ध्‍यान केंद्रित करते हुए युवा मामले और खेल मंत्रालय के अंतर्गत जुलाई, 2014 में भारत के प्रथम कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग की स्‍थापना की गई। श्री राजीव प्रताप रुड़ी को मंत्रिपरिषद में शामिल करने के बाद नवंबर, 2014 में यह विभाग एक पूर्ण कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) बन गया। एमएसडीई का प्राथमिक ध्‍यान भारत में त्‍वरित गति और बड़े पैमाने पर गुणवत्‍ता उत्‍पादनों को सुनिश्चित करते हुए कौशल विकास प्रयासों में वृद्धि करने के लिए मजबूत नीतिगत ढांचे और कार्ययोजना को विकसित करने पर है। एमएसडीई के द्वारा विगत 9 महीनों में की गई प्रमुख पहलों के क्रम में देश में कौशल विकास और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र के लिए मजबूत आधार बनाने का विवरण इस प्रकार है-

1.      एक स्पष्‍ट नीतिगत ढांचे की स्‍थापना: नीति, अभियान, समान मानदंड:

एमएसडीई ने अपने अस्तित्‍व के कुछ महीनों के दौरान ही तीन प्रमुख नीतिगत पहल की हैं।
  • राष्‍ट्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता नीति-2015, जुलाई, 2015 में शुभारंभ: इस नी‍ति में उच्‍च गुणवत्‍ता वाले परिणामों को सुनिश्चित करते हुए त्‍वरित और व्‍यापक स्‍तर पर कौशल के लिए एक रूप-रेखा को आकार देना है। नीति कार्यान्‍वयन इकाई (पीआईयू) का गठन और नीति के प्रमुख घटकों की तिमाही निगरानी के लिए एक प्रणाली स्‍थापित की गई है।
  • जुलाई-2015 में राष्‍ट्रीय कौशल विकास अभियान को स्‍वीकृति: ये अभियान अखिल भारतीय स्‍तर पर कौशल गतिविधियों की निगरानी और अभियान के अभिमुखीकरण, समन्‍वय और कार्यान्‍वयन की दिशा में निरंतर प्रगति पर है।
  • समस्‍त केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों में सभी कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए समान मानदंडों को अधिसूचित किया जा चुका है। समान मानकों को अपनाने के लिए बैठकों और विचार-विमर्शों का आयोजन किया गया है। इनका पूर्ण रूप से संरेखण 1.4.2016 तक किया जाना है।
  • भारत में अब संपूर्ण देश में कौशल विकास पहलों की बड़े पैमाने पर वृद्धि के लिए एक मजबूत नीतिगत ढांचा है। नीतिगत ढांचा तैयार करने के बाद, एमएसडीर्इ एक सुसंगत कार्ययोजना को बनाने पर भी कार्य कर चुका है।

2.      एक कार्ययोजना का विकास: प्रमुख उपलब्धियां
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई): एमएसडीई की कौशल प्रशिक्षण आधारित इस प्रमुख योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा 15 जुलाई, 2015 को किया गया था। इस योजना के एक प्रारंभिक चरण की पहल 25 मई, 2015 को की गई थी। पीएमकेवीवाई का उद्देश्‍य एक संबद्ध प्रशिक्षण प्रदाता के साथ एक स्‍वीकृत कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले प्रत्‍येक युवा व्‍यक्ति को मौद्रिक पुरस्‍कार प्रदान करते हुए कौशल विकास पहलों में युवा लोगों को शामिल होने के लिए प्रोत्‍साहन देना है। पीएमकेवीवाई भारत सरकार के द्वारा वित्‍त पोषित है और इसे राष्‍ट्रीय कौशल विकास निगम के द्वारा कार्यान्वित किया गया है। अगले एक वर्ष में पीएमकेईवाई के अंतर्गत संपूर्ण भारत वर्ष में 24 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जायेगा, जिनमें से 14 लाख नवांतुक प्रशिक्षु होंगे। पीएमकेवीवाई के अंतर्गत 50 हजार नि:शक्‍त व्‍यक्तियों को भी प्रशिक्षण दिया जायेगा। इसके अलावा ऐसे युवा जिनके पास औपचारिक प्रमाणीकरण नहीं है उनका मूल्‍यांकन किया जायेगा और पीएमकेवीवाई में प्राथमिक शिक्षण की मान्‍यता (आरपीएल) के रूप में जाने जाने वाली पहल के माध्‍यम से प्रमाणित किया जायेगा। आरपीएल पहल के अंतर्गत, अगले 1 वर्ष में 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जायेगा। यह असंगठित क्षेत्र में कार्यरत अथवा अनौपचारिक चैनलों के माध्‍यम से कौशल प्राप्‍त करने वाले युवा भारतीयों के विशाल बहुमत के लिए नये रोजगार अवसरों को खोलने और कौशलों को मान्‍यता देने के लिए एक महत्‍वपूर्ण प्रयास होगा।
  • पीएमकेवीवाई के अंतर्गत उपलब्धियां: नवीन प्रशिक्षण में 5.17 लाख दाखिले हुये और संतुलन लक्ष्‍य आवंटित किया गया; आरपीएल में प्रारिम्‍भक लक्ष्‍य पूर्ण किया गया और 5 लाख का लक्ष्‍य आवंटित किया गया। मार्च, 2016 तक 14 लाख नवीन प्रशिक्षण और 10 लाख आरपीएल का लक्ष्‍य प्राप्‍त किया जायेगा।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थाएं (आईटीआई), संस्‍थाएं जो पहले श्रम और रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत थे उन्‍हें इस वर्ष अप्रैल में एमएसडीई को स्‍थानांतरित कर दिया गया। इन संगठनों के पुनरुद्धार के लिए अनेक पहलें की जा रही है। उदाहरण के तौर पर इनमें उनके पाठ्यक्रम का उन्‍नयन (उद्योग विशेषज्ञों के सहयोग से), औद्योगिक संपर्कों को मजबूत बनाना, प्रशिक्षुता में वृद्धि, आईटीआई के साथ सुविधाएं और उपकरणों को आधुनिक बनाना आदि शामिल हैं। इसके अलावा इन क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार अवसरों के सृजन के लिए 34 वाम चरम पंथ प्रभावित जिलों में 34 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान और 68 कौशल विकास केन्‍द्रों की स्‍थापित की जा रही है। इन पहलों का उद्देश्‍य इन संस्‍थानों में प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार लाना और यह सुनिश्चित करना है कि आईटीआई पाठ्यक्रमों को पूर्ण करने वाले छात्रों के लिए यह रोजगार योग्‍य हों।

उपलब्धियां: 

पिछले एक वर्ष में 1141 आईटीआई के साथ 1.73 लाख सीटे बढ़ाई गई। 126 ट्रेडों में अब कुल 18.7 लाख सीटों के साथ 13,105 आईटीआई;

  • प्रशिक्षुता: अधिक प्रशिक्षुओं को शामिल करने के लिए नियोक्‍ताओं को प्रोत्‍साहन देने हेतु वर्ष 2014 में प्रशिक्षुता अधिनियम में सुधार किया गया। प्रशिक्षुओं में चार गुना वृद्धि को सक्षम बनाने के लिए 18 जून, 2015 को नवीन प्रशिक्षु नियम अधिसूचित किये गये। उद्योगों के बीच समर्थन अभियान चलाये गये और ऑन लाइन पोर्टल का शुभारम्‍भ किया गया। इस वर्ष नामांकन में वृद्धि भी दर्ज की गई, जिसका उल्‍लेख पहले भी किया गया है।
  • सामरिक साझेदारियां: विशेष क्षेत्रों में कौशल विकास गतिविधियों में वृद्धि के लिए केन्‍द्र सरकार के विभिन्‍न मंत्रालयों/विभागों और एमएसडीई के बीच रणनीतिक साझेदारियां प्रारम्‍भ की गई। एमएसडीई अब सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय (नि:शक्‍त जन सशक्तिकरण विभाग) इनमें स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण, इस्‍पात, खान, रेलवे, रक्षा और (रसायन एवं उर्वरक (रसायन और पेट्रो रसायन विभाग), उर्वरक विभाग, औषध विभाग) (अनुलग्‍नक) मंत्रालयों/विभागों के साथ रणनीतिक साझेदारी रखता है। इन क्षेत्रों से जुड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों और संबंधित अनुबंधकर्ता इन रणनीतिक साझेदारियों के माध्‍यम से डीजीटी अथवा एनएसडीसी के सहयोग के साथ उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्रों की स्‍थापना और कौशल प्रशिक्षण उद्देश्‍यों के लिए सीएसआर कोषों के उपयोग के लिए एनएसक्‍यूएफ के साथ रोजगार भूमिकाओं में प्रमाणीकृत श्रमिकों को कार्य के लिए ले सकेंगे। ये साझेदारियां प्रत्‍येक क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण वृद्धि में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि कौशल प्रशिक्षण उच्‍च गुणवत्ता के स्‍तर पर हो।
  • प्रवासी रोजगार: प्रवासी रोजगार अवसरों पर अध्‍ययन रिपोर्ट प्राप्‍त हुई हैं और कार्य योजना तैयार की जा रही है। प्रवासियों के प्रस्‍थान-पूर्व सह उन्‍मुखीकरण कार्यक्रम के लिए प्रवासी कौशल विकास योजना का शुभारम्‍भ करने के लिए प्रवासी भारतीय मामलें मंत्रालय (एमओआईए) के साथ एक समझौते पत्र को अंतिम रूप दिया गया है।
  • राष्‍ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी): कौशल विकास के क्षेत्र में शामिल निजी क्षेत्र की भागीदारी को उत्‍प्रेरित करने के लिए वर्ष 2010 में राष्‍ट्रीय कौशल विकास निगम की स्‍थापना की गई थी। पिछले एक वर्ष के दौरान एनएसडीसी के साझेदारों ने 24.93 लाख लोगों को दक्ष किया है और अपने पारिस्थितिकी तंत्र के माध्‍यम से करीब 12 लाख लोगों को नियुक्‍त किया है। 31 अक्‍टूबर, 2015 को एनएसडीसी ने कुल 59.3 लाख छात्रों को प्रशिक्षित किया है। 24.5 लाख छात्रों कार्य प्रदान किया गया। एनएसडीसी से वित्त पोषण साझेदारों के लिए रोजगार प्रतिशत करीब 64 प्रतिशत है (सभी विशेष योजनाओं के अंतर्गत प्रशिक्षण के अलावा)।     यह सुनिश्चित करने के लिए की किसी मान्‍यता प्राप्‍त प्रशिक्षण नियोक्‍ता के द्वारा कार्यान्वित किये जा रहे प्रशिक्षण उद्योगों के अनुकूल हैं, एनएसडीसी क्षेत्र कौशल परिषदों के नेतृत्‍व में उद्योगों को वित्त पोषित कर रहा है जिससे राष्‍ट्रीय व्‍यवसाय मानकों (एनओएस) का निर्माण होता है। अद्यतन, एनएसडीसी बोर्ड ने 39 क्षेत्रीय कौशल परिषदों को स्‍वीकृति दे दी है, जिनमें से 28 को वित्त पोषित किया जा चुका है और 31 संचालन में है। 

       नवम्‍बर, 2014 के बाद निम्‍नलिखित आठ नवीन एसएससी को स्‍वीकृति दी जा चुकी है:

1.  रसायन और पेट्रोकैमिकल एसएससी
2.  पेंट्स और कोटिंग्स एसएसी (आईपीए)
3.  प्रबंधन एसएससी
4.  हरित रोजगार एसएससी
5.  सामरिक विनिर्माण एसएससी
6.  फर्नीचर और फिटिंग एसएससी
7.  पी डब्‍ल्‍यू डी एसएससी
8.  इस्‍ट्रूमेंटेशन एसएससी

  • राष्‍ट्रीय व्‍यावसायिक मानकों (एनओएस) को विकसित करने वाले एसएससी की संख्‍या नवम्‍बर, 2014 के 22 से बढ़कर अक्‍टूबर 2015 के अंत तक 31 पहुंच गई। इस एक वर्ष के दौरान एसएससी ने 614 रोजगार भूमिकाओं के लिए क्‍यूपी (योग्‍यता पैक) विकसित किये, 8302 एनओएस के साथ अद्यतन कुल 1507 क्‍यूपी हैं जिनमें से 3523 विशिष्‍ट एनओएस हैं। एसएससी के द्वारा तैयार 1016 क्‍यूपी को राष्‍ट्रीय मानकों के तहत दर्ज किया जा चुका है।
  • कौशल अंतराल अध्‍ययन: 26 (24+2) क्षेत्रों के लिए पूर्ण किया गया, सभी राज्‍यों के लिए जिला वार अध्‍ययन पूर्ण किये गये, संबंधित मंत्रालयों/एसएससी के संयुक्‍त समूहों के द्वारा प्रारम्‍भ की गई पर्यावरणीय जांच की देख-रेख की जायेगी।
  • उड़ान: जम्‍मू-कश्‍मीर के युवाओं (स्‍तानकों) के लिए विशेष उद्योग पहल के अंतर्गत एनएसडीसी द्वारा कार्यान्वित ग्रह मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित इस विशेष पहले के तहत पांच वर्षों में 40,000 युवाओं को शामिल किया जायेगा।
  • राष्‍ट्रीय कौशल विकास एजेंसी (एनएसडीए): एनएसडीए मंत्रालय की पहल का एक अंग है और मानक निकाय के तौर पर एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है इसका केन्‍द्रबिंदु यह सुनिश्चित करना हैं कि कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्‍ट्रीय कौशल योग्‍यता प्रारूप (एनएसक्‍यूएफ) के अनुरूप हो और गुणवत्ता आश्‍वासन तंत्र परिचालित हो। अद्यतन एनएसडीए 1461 योग्‍यताओं (एसएससी से 1345 और एनसीवीटी से 116) को एनएसक्‍यूएफ के समानुरूप बना चुका है। एनएसडीए, एनएसक्‍यूएफ को संचालित करने के लिए 10 अन्‍य केन्‍द्रीय मंत्रालयों को राज्‍य सरकारों के साथ कार्यशालाएं आयोजित कर चुका है।
  • उद्यमशीलता: एनआईईएसडीयूडी पहले से ही सीडी आधारित उद्ययमशीलता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) के अंतर्गत 1,98000 प्रशिक्षुओं को शामिल कर चुका है। यह संस्‍थान 31 मार्च, 2015 तक 2,00,000 और प्रशिक्षुओं को शामिल करेगा।
  • अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग: एमएसडीई ने उद्यमशीलता, समर्थन, प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम विकास में वृद्धि और देश भर में कौशल प्रशिक्षण में उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्रों के निर्माण और मानकों को सुनिश्चित करने के लिए जर्मनी, ब्रिटेन, चीन और ऑस्‍ट्रेलिया के साथ समझौते पत्र पर हस्‍ताक्षर किये गये हैं।       

सफलता की गाथाएं:

  • विश्‍व कौशल: एनएसडीसी वर्ष 2010 से विश्‍व कौशल प्रतिस्‍पर्धाओं में भारत की भागीदारी में वृद्धि कर रहा है। भारत ने देश भर से चयनित 29 प्रतिस्‍पर्धाओं के 27 कौशलों में भाग लिया। डब्‍ल्‍यूएससी 2015 के लिए, मॉडलिंग, वायुमान रख-रखाव, ईंट बिछाने, दीवार और फर्श पर टाईल लगाने और दृश्‍य बिक्री नामक पांच नये कौशलों की पहचान की गई। भारत ने सुन्‍दरता चिकित्‍सा, वैल्डिंग, ग्राफिक डिजाइन, प्रौद्योगिकी, विविध प्रकार की मॉडलिंग, जेवरात डिजाइन, प्‍लास्टिक डाई, अभियांत्रिकी,  हेयर ड्रेसिंग और ब्रिकलेइंग में उत्‍कृष्‍टता के आठ पदक जीते। 14 कौशलों में उम्‍मीदवारों और प्रशिक्षितों की तैयारी के लिए न्‍यूजीलैंड में ओशिनिया प्रतिस्‍पर्धा में उन्‍हें अंतर्राष्‍ट्रीय पहचान दी गई। भारत के अलावा 6 अन्‍य देशों (चीन, ऑस्‍ट्रेलिया, मलेशिया, न्‍यूजीलैंड, कनाडा और कोरिया ने इस प्रतिस्‍पर्धा में भाग लिया। भारतीय दस्‍ते में 14 कौशलों में 34 सदस्‍य शामिल थे और वे सुन्‍दरता चिकित्‍सा में स्‍वर्ण पदक, जेवरात निर्माण और पेस्‍ट्री और कनफैक्‍शनरी में रजत पदक, ब्रिक लेइंग, ऑटो बॉडी मरम्‍मत और दीवार एवं फर्श टाइलिंग में कास्‍य पदक के साथ छह पदक लेकर स्‍वदेश लौटे। 44वीं डब्‍ल्‍यूएससी प्रतिस्‍पर्धाओं का आयोजन संयुक्‍त अरब अमीरात के आबूधाबी में 14 से 19 अक्‍टूबर, 2017 को होगा।      

        अनुलग्‍नक

कौशल विकास के लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ केन्‍द्रीय मंत्रालयों/विभागों के समझौते पत्रों पर हस्‍ताक्षर

1)      नि:शक्‍त जन सशक्तिकरण विभाग
2)      रक्षा मंत्रालय
3)      रेल मंत्रालय
4)      स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय
5)      उर्वरक विभाग
6)      रसायन और पेट्रोकैमिकल विभाग
7)      औषध विभाग
8)      इस्‍पात मंत्रालय
9)      खान मंत्रालय
10)   कोल इंडिया (कोयला मंत्रालय)
11)   राष्‍ट्रीय तापीय ऊर्जा निगम, विद्युत ग्रिड (विद्युत मंत्रालय)
12)   भारी उद्योग विभाग
13)   प्रवासी भारतीय मामले मंत्रालय (समझौते पत्र को अंतिम रूप दिया गया)
14)   भारतीय विमान प्राधिकरण (समझौते पत्र को अंतिम रूप दिया गया)
                  
समझौते पत्रों के समग्र प्रमुख घटक:
  • कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे का उन्‍नयन
  • कौशल को सहायता देने के लिए सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रमों के सीएसआर कोषों की व्‍यवस्‍था
  • आईटीआई और एनएसडीसी/एसएससी से संबद्ध प्रशिक्षण प्रदाताओं के साधनों का उन्‍नयन
  • डीजीटी के साथ सहयोग से सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों में प्रशिक्षु प्रशिक्षण में वृद्धि और प्रोत्‍साहन
  • एनएसक्‍यूएफ मान्‍यता प्राप्‍त कार्मिकों को कार्य हेतु लेने के लिए प्रोत्‍साहित करना तकनीकी और संसाधन समर्थन के प्रावधान सहित सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों के द्वारा आईटीआई के अधिग्रहण के लिए प्रोत्‍साहन
  • मंत्रालयों/सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों द्वारा संचालित विद्यालयों में पेशेवर पाठ्यक्रमों को लाना
  • उच्‍च गुणवत्ता प्राप्‍त कौशल प्रशिक्षण के लिए ‘उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्र’ को स्‍थापित करना
  • प्राथमिक शिक्षण की मान्‍यता (आरपीएल) के कार्य स्‍थल और एनएसक्‍यूएफ के अनुकूल प्रशिक्षण कार्यक्रमों का समायोजन 

भारतीय रेल: दृढ़ता, गति, प्रगति: सुरेश प्रभु की ई-बुक डाउनलोड करें


Dear Rail user,

Our respected Prime Minister, Shri Narendra Modi Ji has a vision for this great nation and in this vision Indian Railways has an important place to be the "backbone of India's economic development".

During my tenure I have tried to bring about a change and to usher in new practices and new work culture. All Budget Announcements have been broken up into actionable points and are being monitored on a regular basis. I am happy to inform that 103 Budget Announcements already stand implemented.

In the past one year a number of milestones have been achieved. However, I am aware that the journey for transforming the Indian Railways will be long and winding. There are many more challenges to be overcome and expectations to be fulfilled. But I have been fortunate to always have your unstinting support and cooperation.

It is, therefore, important to communicate with you about the work being done in Indian Railways. Please Download Booklet containing the recent initiatives taken by the Railways. I look forward to your suggestions and I am confident that together we will make the Indian Railways much better.

With regards,
Yours sincerely,
(Suresh Prabhu)

जरुर पढ़िए: कैसे देश के कोयला क्षेत्र के इतिहास को मोदी सरकार ने स्वर्णाक्षरों में लिख दिया


कोयला खदान (विशेष प्रावधान) विधेयक 2015 पारित; कोयला खदान नीलामी के लिए सुदृढ़ और पारदर्शी प्रणाली स्थापित 

केंद्र ने 31 कोयला खदानों की नीलामी की; अन्य 42 कोयला खदान राज्य कंपनियों को आबंटित

कोयला उत्‍पादक राज्‍यों के लिए खान के जीवनकाल के दौरान अनुमानित 3.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संभावित राजस्‍व

वित्त वर्ष 16 के पहले 8 महीनों में सीआईएल का कोयला उत्पादन और उठाव क्रमशः 8.8 प्रतिशत तथा 9.8 प्रतिशत बढ़ा; 2020 तक एक बिलियन टन उत्पादन की तैयारी

कोयला धारक राज्यों को 1395 करोड़ रुपये से अधिक अंतरित

डब्ल्यूसीएल ने 10 खदान खोले, अगले 26 महीनों में 26 खदान खोले जाएंगे

वर्ष 2015 कोयला खदानों की कुशल और पारदर्शी नीलामी किए जाने के कारण देश के कोयला क्षेत्र के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।  नई सरकार द्वारा कोयला खदानों की सफल नीलामी ने यह साबित किया है कि सरकार के निष्पक्ष और पारदर्शी नीलामी कराने के निर्णय से बड़े पैमाने पर देश को लाभ हुआ है क्योंकि नीलामी से भारत ने वास्तव में स्वर्ण खदान पर प्रहार किया है।

उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद सुदृढ़ और पारदर्शी प्रणाली बनाने के लिए एक अध्यादेश जारी किया गया ताकि अदालत द्वारा निरस्त किए गए 204 कोयला खदानों को फिर से आबंटित करने का कानूनी अधिकार सरकार को मिले और यह सुनिश्चित हो कि नीलामी और सरकारी कंपनियों को आबंटन के जरिए चुने गए नए आबंटियों को भूमि तथा अन्य संबद्ध खदान अवसंरचनाओं के साथ स्वाधिकार प्राप्त हो। संसद ने 20 मार्च, 2015 को कोयला खदान (विशेष प्रावधान) विधेयक 2015 पारित किया। इस विधेयक ने अध्यादेश का स्थान लिया। कोयला खदान (विशेष प्रावधान) विधेयक 2015  के अंतर्गत  केंद्र सरकार ने अब तक तीन भागों में 31 कोयला खदानों की सफलतापूर्वक नीलामी की और 42 खदानों/ब्लाकों का आबंटन केंद्र या राज्य सरकार की कंपनियों को किया। नीलामी की सफलता की हर तरफ प्रशंसा हुई है, इससे न केवल यह सुनिश्चित हुआ है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के आलोक में अर्थव्यवस्था में कोई व्यवधान नहीं आया है बल्कि इससे कुशलता और पारदर्शिता के नए मानक तय हुए हैं। अनुमान है कि राज्यों को नीलामी के केवल तीन दौर से ही 30 साल के स्तर का 3.44 लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। चौथे दौर में अनियंत्रित क्षेत्र के लिए 8 कोयला खदानों(अनुसूची III) की नीलामी की घोषणा भी कर दी गई है।

नीलाम/आबंटित किए गए 34 कोयला खदानों में से 9 खदानों में उत्पादन शुरु हो गया है और 5 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ है। शेष खदानों में 2/3 महीनों में उत्पदान शुरु हो जाएगा।

अप्रैल-नवंबर में कोल इंडिया लिमिटेड(सीआईएल)  का उत्पादन 8.8 प्रतिशत बढ़ कर 321.38 मीट्रिक टन हुआ और उठाव में 9.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई

सीआईएल ने उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने, कोयले की गुणवत्ता में सुधार करने, कुशलता बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा के लिए 1 अप्रैल, 2016 से उपभोक्ताओं को दलन किया हुआ कोयले की सप्लाई करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सीआईएल ने अक्टूबर 2017 से कोयला ग्रेड 10 और इससे ऊपर के ग्रेड का स्वच्छ कोयला सप्लाई करने के लिए 15 कोयला धुलाई मशीनें स्थापित करने की प्रक्रिया शुरु कर दी है।

अभी तक 19 ताप कोयला संयंत्रों के लिए लिंकेज को विवेकसंगत बनाया है और इससे ढुलाई लागत में 1423 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

कोयला मंत्रालय के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और उपलब्धियों का विवरण

कोयला खदान नीलीमी और आबंटनः

कोयला खदान (विशेष प्रावधान) विधेयक 2015 के प्रावधानों के अंतर्गत केंद्र सरकार ने अब तक सफलतापूर्वक 31 कोयला खदानों की नीलामी की है और 42 कोयला खदानों /ब्लाकों का आबंटन केंद्र या राज्य सरकार की कंपनियों को किया है। 73 कोयला खदानों ( नीलामी के जरिए 31 कोयला ब्लाकों तथा आबंटन के जरिए 42 कोयला ब्लाकों) की नीलामी से 3.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि मिली है जो पूरी तरह कोयला उत्पादक राज्यों को दिए जाएंगे।

कोयला उत्पादक राज्यों को प्राप्त होने वाले राजस्व में टेंडर दस्तावेज में दिया गया अग्रिम भुगतान, नीलामी से प्राप्तियां और कोयला उत्पादन के प्रति टन पर रॉयल्टी शामिल है। कोयला उत्पादक राज्यों को 31 कोयला खदानों की नीलामी की तिथि से खदान जीवन /लीज के दौरान प्राप्त होने वाला अनुमानित राजस्व 1,96,698 करोड़ रुपये का होगा। इसके अतिरिक्त केंद्र और राज्य सरकार की कंपनियों को 42 कोयला ब्लाकों के आबंटन से कोयला उत्पादक राज्यों को 1,48,275 करोड़ रुपये मिलेंगे। उपभोक्ताओं के लिए बिजली शुल्क में होने वाली कमी लगभग 69,310.97 करोड़ रुपये की होगी।  

 बजट सत्र के पहले भाग में संसद के दोनों सदनों ने कोयला खदान(विशेष प्रावधान) विधेयक 2015 पारित किया और इस तरह अध्यादेश ने विधेयक का स्थान लिया।

कोयला खदान (विशेष प्रावधान) विधेयक 2015 के प्रमुख आकर्षण:

  • नए अधिनियम में पारदर्शी बोली प्रक्रिया यानी ई-नीलामी  के माध्यम से कोयला खदानों के आबंटन का प्रावधान है।
  • कोयला खदानों की ई-नीलामी से कोयला खदान संचालनों में निरंतरता सुनिश्चित होगी और कोयला संसाधनों के अधिकतम उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • नए अधिनियम में निजी कंपनियों के सीमित उपयोग के लिए कोयला ब्लाकों की ई-नीलामी का तथा राज्य तथा केंद्र के सावर्जनिक प्रतिष्ठानों को सीधे तौर पर खदान आबंटित करने का प्रावधान है ।
  • इसमें विस्थापित लोगों के लिए पुनर्वास और मुआवजे का प्रावधान है।
  • यह छोटे, मझोले तथा काटेज उद्योंगों के लिए विशेष रूप से कोयला बेचने में सहायक है ताकि इस क्षेत्र में रोजगार और आय बढ़े ।

      
कोयला क्षेत्र में भारतीय कंपनियां और विदेशी कंपनियों की भारतीय सहायक कंपनियां  वाणिज्यिक खदान की पात्र होंगी। इस प्रावधान से वैश्विक खदान कंपनियां आकर्षित होंगी और यह क्षेत्र स्पर्धी और लागत कुशल होगा।

    

*one coal mine is regionally explored and accordingly no estimates have been made.

स्पर्धी बोली नियम, 2012 के अंतर्गत 10 क्षेत्रीय स्तर पर खोजे गए कोयला ब्लाक केंद्र/राज्य सरकार की कंपनियों को दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय रूप में खोजे गए 10 लिग्नाइट ब्लाकों को गुजरात सरकार की कंपनियों को आबंटित किया गया है।

कोयला प्रदान करने वाले संबंधित राज्‍यों को (31 अक्‍टूबर, 2015 तक) पहले ही और मासिक भुगतान के तहत 1395,69,77046.25 करोड़ रुपये प्राप्‍त हो चुके हैं।   



अनुसूची II के 34 नीलाम किए गए( 17 नीलाम और 17 आबंटित ) खदानों में से 09 खदानों में उत्पादन शुरु हो गया है।  इन 09 खदानों में सितंबर, 2015 तक 4.823 मिलियन टन (अस्थाई) उत्पादन हुआ। शेष खदान मंजूरी के विभिन्न चरणों में हैं।



  
 चौथे चरण की नीलामी  जनवरी 2016 में शुरु होगी और इसमें अनियंत्रित क्षेत्र यानी लौह एवं इस्पात, सीमेंट, कैप्टीव पावर प्लांट आदि के लिए अनुसूची II के नौ खदान नीलाम होंगे।

 कोयला उत्पादनः
 वर्ष 205-16 की पहली छमाही(अप्रैल-सितंबर) के दौरान कच्चे कोयले का उत्पादन 275.29 एमटी हुआ। पिछले वर्ष इसी अवधि में 264.54 एमटी कच्चे कोयले का उत्पादन हुआ था। इस तरह अप्रैल-सितंबर, 2015 के दौरान कोयला उत्पादन में 4.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

 सीआईएल ने ( अप्रैल-नवंबर 2015 में ) कोयला उत्पादन और उठाव में रिकार्ड वृद्धि दर्ज की
 कोल इंडिया लिमिटेड(सीआईएल) ने अप्रैल-नवंबर 2015 के दौरान कोयला उत्पादन और उठाव में क्रमशः 8.8 प्रतिशत और 9.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।  सीआईएल ने अप्रैल-नवंबर 2015 के दौरान 26 मिलियन टन अधिक कोयला उत्पादन किया । उठाव पर भी जोर दिया गया और इस तरह इस अवधि में उठाव 30.44 मिलियन टन अधिक हुआ।

सीआईएल ने अप्रैल-नवंबर 2015 में कुल 321.38 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया। पिछले वर्ष इसी अवधि में 295.40 मिलियन टन का उत्पादन किया था। इस तरह कोयला उत्पादन में सीआईएल ने 8.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।  सीआईएलकी लगभग सभी सहायक कोयला उत्पादक कंपनियों ने उत्पादन में सकारात्मकता दिखाई। कोयले का उठाव अप्रैल- नवंबर 2005 में 341.13 मिलियन टन कोयले का उठाव किया गया जबकि यह उठाव पिछले साल की इसी अवधि में 310.70 मिलियन टन था। इस प्रकार उठाव में 9.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
   


अप्रैल-नवंबर 2015 में कोयले का उठाव पिछले वर्ष की इसी अवधि के उठाव की तुलना में ढाई गुना अधिक है।

कोयला आयात में कमीः

कोयले का अधिक उत्पादन का परिणाम यह हुआ है कि कोयले के आयात में कमी आई है। पिछले वर्ष से कोयले के आयात में 4.56 प्रतिशत की कमी आई है।


  
टीटीपीएस में कोयले का स्टॉकः

कोयले से चलने वाले विद्युत उत्पादन संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त स्टॉक है। नवंबर 2015 के अंत तक  कोई भी विद्युत उत्पादन संयंत्र सुपर क्रिटिकल नहीं है। केवल एक संयंत्र संकट की स्थिति यानी क्रिटिकल है । ताप विद्युत संयंत्रों में 27 मिलियन टन कोयला है जो 21 दिनों का स्टॉक है।  नवंबर 2014 की इसी अवधि में विद्युत संयंत्रों में कोयले का स्टॉक 10.85 मिलियन टन था जो केवल 7 दिनों का स्टॉक था। 50 बिजली संयंत्र क्रिटिकल थे जिसमें से 30 सुपर क्रिटिकल थे।

कोयला गुणवत्ताः

गुणवत्ता संपन्न कोयला उत्पादन के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं।  कोयला कंपनियों और बिजली संयंत्रों के बीच के विवाद को सुलझाने तथा कोयले की गुणव्ता सुधारने के लिए थर्ड पार्टी सैंपलिंग के लिए नए नियम जारी किए गए हैं। नई नियमों के अनुसार  बिजली संयंत्र और कोयला कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि संयुक्त रूप से सीआईएमएफआर द्वारा नियुक्त थर्ड पार्टी एजेंसी के बीआईएस मानकों के अनुसार एकत्रित नमूनों को देखेंगे। नमूना एकत्रित करने के 18 कार्य दिवसों के अंदर  एजेंसी विश्लेषण रिपोर्ट देगी।  सरकार ने निर्णय लिया है कि 1 जनवरी 2016 से कोयला आवश्यक स्तर तक दलन के बाद भेजा जाएगा।

 कोयला सफाईः

सरकार ने निर्णय लिया है कि 1 अक्टूबर, 2017 से  साफ-सफाई के बाद ही जी10 स्तर का कोयला भेजा जाएगा।  यह निर्णय कोयले की गुणवत्ता की समस्या को सुझाने के लिए लिया गया है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सीआईएल कुल 112.6 एमटीवाई क्षमता की 15 नई सफाई मशीनें  स्थापित कर रही है।  इनमें से 6 कोकिंग कोल सफाई की मशीनें हैं जिनकी कुल क्षमता 18.6 एमटीवाई है। 9 गैर-कुकिंग कोयले की सफाई मशीनों की कुल क्षमता 94.0 एमटीवाई है। इन सफाई मशीनों के अतिरिक्त 11.6 एमटीवाई की 3 मशीनें निर्माणाधीन हैं।

कोल लिंकेज को विवेकसंगत बनानाः

लिंकेजेज को विवेकसंगत बनाने के लिए जून 2014 में अंतर मंत्रालय कार्य बल(आईएमटीएफ) गठित किया गया । आईएमटीएफ की सिफारिशों के आधार पर पहले चरण के अंतर्गत 15 बिजली संयंत्रों के लिए  कोयला स्रोत को विवेकसंगत बना लिया गया है। 19 एमटी कोयले की आवाजाही को विवेकसंगत बनाए जाने से परिवहन लागत में 877 करोड़ रुपये की वार्षिक पुनरावर्ती बचत हुई है। चरण 2 के प्रस्तावों के अंतर्गत 4 ताप विद्युत संयंत्रों के लिए 2.4 एमटी कोयले की ढुलाई को विवेकसंगत बनाया गया है। इससे  प्रति वर्ष 563 करोड़ रुपये की पुनरावर्ती बचत होगी।

सीआईएल द्वारा ईंधन सप्लाई ठेकेः  

चयन प्रक्रिया के रूप में स्पर्धी बोली के माध्यम से कोल लिंकेजेज / एलओए की नीलामी सहित विभिन्न माडलों पर विचार करने तथा सभी हितधारकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिकतम संरचना की सिफारिश करने के लिए जनवरी 2015 में एक अंतर-मंत्रालय समिति(आईएमसी) बनाई गई है।

विद्युत और गैर-विद्युत  क्षेत्रों के लिए पृथक ई-नीलामी खिड़कीः

दीर्घ और मध्यम अवधि के पीपीए धारकों के लिए 5एमटी की ई-नीलामी खिड़की खोली गई है। इसका आधार मूल्य सीआईएल का अधिसूचित मूल्य प्लस 20 प्रतिशत प्रीमियम है। लघु अवधि के पीपीए या ‘नो पीपीए ‘ धारकों के लिए 5 एमटी की एक ई-नीलामी खिड़की खोली गई है जिसका आधार मूल्य सीआईएल का अधिसूचित मूल्य प्लस 40 प्रतिशत प्रीमियम है।

 इसी प्रकार,  सीआईएल द्वारा गैर-विद्युत क्षेत्र के लिए 4 एमटी की अलग ई-नीलामी खिड़की खोली जा रही है जिसमें वर्तमान एमओयू गैर-विद्युत उपभोक्ता अन्य गैर-विद्युत उपभोक्ताओं के साथ शामिल हो सकते हैं। यह खिड़की केवल गैर-विद्युत क्षेत्र के एंड यूजरों के लिए उपलब्ध होगी और इसमें व्यवसायी शामिल नहीं हो सकते।

एक बिलियन टन कोयला उत्पादन लक्ष्य के लिए सीआईएल की तैयारीः

 कोल इंडिया लिमिटेड(सीआईएल) ने 2019-20 तक 1 बिलियन टन कोयला उत्पादन लक्ष्य प्राप्त करने के लिए रोड मैप बनाया है जिसमें अपनाई जाने वाली रणनीतियां हैं।  2019-20 तक देश में 7 प्रतिशत वृद्धि की दर से कोयले की अनुमानित मांग 1,200 मिलियन टन होगी। सीआईएल  का उत्पादन लक्ष्य 1 बिलियन टन का है ,जिसमें से 908 मिलियन टन का उत्पादन चिन्हित परियोजनाओं से होगा।  शेष मात्रा को साझा करने, 1 बिलियन टन का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए परियोजनाओं को चिन्हित करने की प्रक्रिया जारी है।  सीआईएल की दो सहायक कंपनियां – संबलपुर की महानदी कोल फील्ड्स लिमिटेड और बिलासपुर की साउथ ईस्टर्न  कोल फील्ड्स लिमिटेड- क्रमशः 250एमटी और 240 एमटी के योगदान के साथ सीआईएल की लक्ष्य प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगी। खनिक की निर्भरता महत्वपूर्ण रेल लाइनों के समय पर पूरा होने , समय से भूमि अधिग्रहण और हरित मंजूरी पर है।

 सीआईएल ने 2014-15 के 494.80एमटी कोला उत्पादन स्तर को बढ़ाकर 908.1एमटी करने के लिए अगले पांच वर्षों  में 57,000 करोड़ रुपये निवेश करने का निश्चय किया है। यह 2019-20 तक 1 बिलियन टन कोयला उत्पादन लक्ष्य के लिए रोड मैप का हिस्सा है।

डब्ल्यूसीएल 36 महीनों में 36 खदान खोलेगी;2020 तक 100एमटी उत्पादन लक्ष्यः

2020 तक सीआईएल के 1 बिलियन टन कोयला उत्पादन लक्ष्य में मदद देने के लिए वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) अपने उत्पादन में 150 प्रतिशत की वृद्धि करने की योजना बना रही है।  कंपनी ने पिछले 10 महीनों में 10 खदान खोले हैं और अगले 26 महीनों में 26 खदान खोलेगी। इस नियोजित विस्तार के कारण वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड ने 2020 तक अपना उत्पादन 150 प्रतिशत बढ़ा कर 60एमटी से 100एमटी करने का निश्चय किया है।

एनसीएल प्रगति की राह परः

नेवेली लिग्नाइट कारपोरेशन(एनसीएल) ने अपनी लिग्नाइट खनन क्षमता 31.10.2015 को 30.60एमटीपीए कर ली। कंपनी ने अपनी विद्युत् उत्पादन क्षमता 2740 मेगावाट(मार्च 2015 में) से बढ़ा कर 4263.50 मेगावाट कर ली है। इसमें 10 मेगा वाट सौर तथा 13.5 मेगा वाट पवन विद्युत है। एनसीएल ने 2025 तक अपने लिग्नाइट तथा कोयला खदानों से प्राप्त ईंधन सुरक्षा के साथ 19,000 मेगावाट की विद्युत कंपनी बनने का निश्चय किया है।

रेलवे तथा राज्य सरकारों के साथ सहमति ज्ञापनः

 कोयला उत्पादन की नियोजित वृद्धि तथा खोज को बनाए रखने के उद्देश्य से संयुक्त उद्य बनाकर रेल अवसंरचना विकसित करने के लिए रेल मंत्रालय , ओडिशा , झारखंड और छत्तीसगढ़ सरकार के साथ सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

कोयला परियोजना मॉनिटरिंग पोर्टल(ई-सीपीएमपी):

मंत्रालय में परियोजनाओं की शीघ्र मंजूरी तथा राज्य सरकार और केंद्र सरकार की कोयला परियोजनाओं जुड़े लंबित मामले निपटाने के लिए मंत्रालय ने परियोजना मॉनिटरिंग पोर्टल (ई-सीपीएमपी) स्थापित किया है।

स्वच्छ भारत अभियान में योगदानः

कोयला मंत्रालय  विद्युत तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ मिलकर एक वर्ष के अंदर सरकारी स्कूलों में कुल एक लाख शौचालय बनाने के लिए संकल्पबद्ध है। सावर्जनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान एनटीपीसी, आरईस, पीजीसीआईएल, पीएफसी, एनएचपीसी, एसजेवीएनएल, टीएचडीसी, एनईईपीसीओ, सीआईएल,एनएलसी तथा आआरईडीए स्वच्छ भारत अभियान में शामिल हुए। तीन मंत्रालयों ने सामूहिक रूप से एक वर्ष की छोटी अवधि में सरकारी स्कूलों में 1.28 लाख शौचालयों  का निर्माण किया जो 1 लाख शौचालय के संकल्प से अधिक है।  इनमें से 55,286 शौचालय सीआईएल तथा उसकी सहायक कंपनियों की ओर से बनाए गए। 

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