शिरडी साईंबाबा समाधि के शताब्दी समारोह के अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन


शिरडी, महाराष्ट्र में श्री साईंबाबा समाधि के शताब्दी समारोह के अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ 




मंच पर विराजमान महाराष्‍ट्र के राज्‍यपाल श्रीमान विद्यासागर राव जी, महाराष्‍ट्र मुख्‍यमंत्री श्री देवेंद्र जी, विधानसभा के स्‍पीकर हरिबाबू जी, मंत्रिपरिषद के मेरे सहयोगी श्री सुभाष धामरे जी, साईबाबा संस्‍थान ट्रस्‍ट के चेयरमैन श्रीमान सुरेश हावरे जी, महाराष्‍ट्र के तमाम मंत्रीगण, सांसद के मेरे साथी, महाराष्‍ट्र के विधायकगण और यहां विशाल संख्‍या में पधारे हुए मेरे प्‍यारे भाईयो और बहनों आप सभी को पूरे महाराष्‍ट्र को, पूरे भारत वर्ष को, देश के जन-जन को दशहरे की विजयादशमी की बहुत-बहुत बधाई।

हम सभी का ये प्रयास रहता है। कि हर वर्ष पर्व को अपनों के साथ मनाएं। मेरी भी ये कोशिश रहती है कि हर त्‍यौहार देशवासियों के बीच जाकर के मनाऊं। इसी भावना के साथ आज आप सभी के बीच उपस्थित होने का मुझे सौभाग्‍य मिला है। जिस प्रकार आप सभी दशहरे के पावन अवसर पर भारी संख्‍या में यहां मुझे आशीर्वाद देने आए हैं। और मैं देख रहा हूं कहीं जगह ही नहीं बची, आधे लोग तो धूप में खड़े हैं। मैं आप सबका और आपका यही अपनत्‍व, यही मेरी सामर्थ्‍य है कि आपके इस प्‍यार के लिए, आपका ये प्‍यार निरंतर नई ऊर्जा का संचार करता है। मुझे शक्ति देता है।

साथियों, दशहरे के साथ-साथ हम आज शिरडी की इस पावन भूमि पर एक और पवित्र अवसर के साक्षी बन रहे हैं। साईंबाबा की समाधि के शताब्‍दी समारोह को भी आज संपन्‍न होने का, पूर्ण होने का, समापन का ये अवसर था। थोड़ी देर पहले ही मुझे साईंबाबा के दर्शन में, उनके आर्शीवाद प्राप्‍त करने का अवसर मिला। मैं जब भी पूज्‍य साईंबाबा का दर्शन करता हूं, उनका स्‍मरण करता हूं तो करोड़ों श्रद्धालुओं की तरह जैसे आप लोगों के दिल में भावना जगती है वैसी ही जनसेवा की भावना, और जनसेवा के लिए खुद को समर्पित करने का एक नया उत्‍साह इस भूमि पर से मिलता है।

भाईयो और बहनों शिरडी के कण-कण में साईं के मंत्र उनकी सीख है। जनसेवा, त्‍याग और तपस्‍या की जब बात आती है तो शिरडी का उदाहरण हर कोई प्रस्‍तुत करता है। ये हमारा शिरडी तात्‍या पाटिल जी की नगरी है, ये दादा कोते पाटिल जी की नगरी है। ये माधवराव देशपांडे, माल्‍सापति जैसे महापुरुष इसी धरती ने दिए हैं। काशीराम शिपि और अप्‍पा जागले साईंबाबा के अंतिम समय तक सेवा करते रहे। कोंडा जी, गवा जी और तुका राम को कौन भूल सकता है। इस पावन धरा के महान सपूतों को मैं नमन करता हूं।    

भाईयो और बहनों साईं का मंत्र है सबका मालिक एक है। सार्इं के चार शब्‍द जैसे समाज को एक करने का सूत्र वाक्‍य बन गए हैं। साईं समाज के थे और समाज साईं का था। साईं ने समाज की सेवा के कुछ रास्‍ते बताए थे और मुझे प्रसन्‍नता है कि साईंबाबा के दिखाए रास्‍ते पर श्री साईंबाबा संस्‍थान, ट्रस्‍ट निरंतर समाज की सेवा कर रहा है।

शिक्षा के माध्‍यम से समाज को सशक्‍त करना हो अध्‍यात्‍म के जरिए सोच में परिवर्तन करना हो। समाज में समरसता और सहभाव का संचार करना हो इसके लिए आपका प्रयास बहुत ही वंदनीय है।

आज भी इस धरती पर आस्‍था, अध्‍यात्‍म और विकास से जुड़े अनेक प्रोजेक्‍ट की शुरुआत हुई है। और मैं महाराष्‍ट्र सरकार को बधाई देता हूं। कि गरीबों के कल्‍याण की इतनी बड़ी योजना के लिए इससे बढ़कर के कोई जगह नहीं हो सकती। साईं के चरणों में बैठकर के गरीबों के लिए काम करना इससे बड़ी धन्‍यता क्‍या हो सकती है। और इसलिए महाराष्‍ट्र सरकार बधाई के पात्र हैं। दर्शनार्थियों के लिए बनने वाले नए परिसर के भूमिपूजन के मौके पर मौजूद होने पर मुझे प्रसन्‍नता हो रही है। आज ही के दिन साईंबाबा इंगलिश मीडियम स्‍कूल कन्‍या विद्यालय और कॉलेज की नींव रखी जा रही है। मुझे पूरा विश्‍वास है कि साईं के जीवन और दर्शन को लेकर शुरु होने वाले साईं नॉलेज पार्क से लोगों को साईं की सीख समझने में और आसानी होगी।

साथियों आज यहां दस मेगावॉट की एक सोलर यूनिट का भी काम शुरु हुआ है। इससे संस्‍थान के संसाधन बढ़ेंगे। और clean एनर्जी में संस्‍थान की बहुत भागीदारी होगी। एक प्रकार से साईं ट्रस्‍ट की तरफ से करोड़ो श्रद्धालुओं के लिए इस दशहरा को विजयादशमी का एक बहुत बड़ा तोहफा है।

साथियो, नवरात्र से लेकर दीपावली तक साल का ये वो समय होता है जब देशवासी घर, गाडी, गहनें जैसे अनेक सामान की खरीद करते हैं। जिसका जितना सामर्थ्‍य होता है वो उस हिसाब से पैसे बचाता है और अपने परिवार को उपहार देता है। मुझे खुशी है कि दशहरे के इस पावन अवसर पर मुझे महाराष्‍ट्र के ढाई लाख भाईयो और बहनों को अपना घर सौंपने का अवसर मिला है।

मेरे वो भाई-बहन जिनके लिए खुद का घर हमेशा ही सपना रहा है। अपने इस विशाल परिवार के सदस्‍यों को एक साथ गृह प्रवास कराने से इससे बड़ी अपने गरीब भाईयो और बहनों की सेवा मैं समझता हूं, दशहरे की पूजा भला मेरे लिए इस सेवा से बड़ी क्‍या हो सकती है। आप सभी जनों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने इस नये घरों की, आपके जीवन में आए इस शुभ अवसर की, आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। ये नए घर आपके अपने सपनों के प्रतीक तो है ही। आपकी आकांक्षाओं को नया आयाम देने वाले भी हैं। अब आपका जीवन, आपके बच्‍चों का जीवन सार्थक बदलाव के पथ पर आगे बढ़ चुका है। ये गरीबी पर जीत की तरफ का एक बहुत बड़ा पहला अहम कदम है।

साथियों, अपना घर जीवन को आसान बना देता है। और गरीबी से लड़ने का नया उत्‍साह पैदा करता है। एक सम्‍मान का भाव पैदा होता है। इसी को ध्‍यान में रखते हुए हमने सोचा है कि 2022, भारत की आजादी के 75 साल होंगे। देश के हर बेघर गरीब परिवार को उसका खुद का घर देने का लक्ष्‍य रखकर के हम काम कर रहे हैं।

मुझे खुशी है कि करीब-करीब आधा रास्‍ता हम इतने कम समय में पार कर चुके हैं। भाईयो और बहनों गरीब हो या मध्‍यम वर्ग का परिवार बीते चार वर्षों में उसे झुग्‍गी से, किराए के मकान से निकाल कर अपना घर देने की तरफ सरकार ने गंभीर प्रयास किए हैं। कोशिशें पहले भी हूईं है लेकिन दुर्भाग्‍य से उनका लक्ष्‍य गरीबों को घर देकर गरीबों को सशक्‍त करने की बजाय एक विशेष परिवार के नाम का प्रचार करना यही उनका मकसद था। वोट बैंक तैयार करना यही उनका मकसद था। घर अच्‍छा हो, उसमें शौचालय हो, बिजली हो, पानी हो, गैस का कनेक्‍शन हो। इस पर पहले कभी सोचा ही नहीं गया। जब किसी योजना के मूल में राजनीतिक स्‍वार्थ वो केंद्र में नहीं होता है। राजनीतिक स्‍वार्थ के बजाय सिर्फ और सिर्फ गरीब का कल्‍याण होता है तो उसके जीवन को आसान बनाने की प्रेरणा मिलती है। तब काम की गति कैसे बढ़ती है। ये आज देश के सामने जीता-जागता उदाहरण है।

साथियों, पहले जो सरकार थी, उस पिछली सरकार ने अपने आखिरी चार साल के वर्षों में पूरे देश में सिर्फ 25 लाख घर बनाए थे। चार साल में 25 लाख......, कितने ..... जरा बोलिए न क्‍या हुआ.....  चार साल में कितने घर बनाए थे? चार साल में कितने घर बनाए थे? 25 लाख, जबकि बीते चार वर्षों में हमारी सरकार बनने के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्‍व वाली सरकार के केंद्र में आने के बाद 1 करोड़ 25 लाख घर बनाए हैं। उनके चार साल के 25 लाख और हमारे चार साल के 1 करोड़़ 25 लाख।

अगर वही सरकार होती तो इतने घर बनाने के लिए 20 साल लग जाते...20 साल और आपको भी 20 साल तक इस घर के लिए इंतजार करना पड़ता। तेज गति से काम करने वाली सरकार गरीबों को तेज गति से कैसे काम देती है इसका ये उदाहरण है। और आप देखिए सब कुछ तो वही है। वहीं साधन, वही संसाधन, वही लोग लेकिन साफ नीयत से, गरीब की सेवा के भाव से जब काम होता है तो ऐसे ही तेज गति से नतीजे भी मिलते हैं।

भाईयो और बहनों पहले की सरकार ने एक मकान बनाने में करीब-करीब 18 महीने लगते थे, डेढ़ साल लगता था इस सरकार में एक साल के अंदर-अंदर 12 महीने से भी कम समय में घर तैयार हो जाता है। समय तो कम हुआ ही है हमनें घर का आकार भी बढ़ाया है। इसके साथ-साथ घर बनाने के लिए सरकारी मदद को भी 70 हजार रुपये से बढ़ाकर के 1 लाख 20 हजार रुपये कर दिया गया है। सबसे अहम बात ये कि पैसे सीधे बैंक खाते में जमा हो रहे हैं। और लाभार्थियों का चयन वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से हो रहा है। इतना ही नहीं ये घर टिकाऊ हो, उनमें शौचालय समेत सारी मूलभूत सुविधाएं हों। इसका भी विशेष ध्‍यान रखा जा रहा है।

मैं एक बार फिर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आज अपना घर प्राप्‍त करने वाले लोगों को ह्दय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। और मुझे जब आज कुछ परिवारों से अलग-अलग जिलों में बात करने का मौका मिला। उन बहनों का आत्‍मविश्‍वास इनके चेहरे की खुशी मुझे कितना आनंद देती थी आप कल्‍पना नहीं कर सकते। जब मेरा कोई गरीब परिवार उसके चेहरे पर खुशी दिखाई देती है तो जीवन काम करने का जैसे धन्‍य हो जाता है। नया काम करने की ऊर्जा मिल जाती है। आज इन सभी बहनों ने जो आर्शीवाद दिए मैं फिर एक बार उस संकल्‍प को दोहराता हूं कि आपकी सेवा के लिए हम पल-पल अपना जीवन आपके लिए खपाते रहेंगे।

भाईयो और बहनों देश के हर घर को शौचालय की सुविधा से जोड़ने का अभियान अब अंतिम पड़ाव पर है। महाराष्‍ट्र ने तो इस मामले में प्रशंसनीय कार्य किया है। आप सभी ने पूरे महाराष्‍ट्र ने खुद को खुले में शौच से मुक्‍त घोषित कर लिया है। इसके लिए राज्‍य के 11 करोड़ नागरिकों को भी मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इससे महाराष्‍ट्र के गांव और गलियां साफ-सुथरी तो रहेंगी ही साथ में डायरिया जैसी अनेक बीमारियों से गरीब किसान परिवारों के बच्‍चों का जीवन सुरक्षित रहेगा।

साथियों, जब गरीबों के जीवन और स्‍वास्‍थ्‍य की बात आती है। जो आजकल पूरी दुनियां में आयुषमान भारत यानी PMJAY प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना की बड़ी चर्चा हो रही है इसके तहत हर वर्ष देश के करीब 50 करोड़ नागरिकों को गंभीर बीमारी के स्थिति में मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया गया है।

महाराष्‍ट्र के भी लाखों परिवारों तक इस योजना का लाभ पहुंच रहा है। अभी तो इसको शुरु हुए महीना भी नहीं हुआ है। लेकिन देश भर के अस्‍पतालों में करीब-करीब 1 लाख मरीज इसका लाभ ले चुके हैं। इस योजना की वजह से किसी गरीब की पथरी का मुफ्त इलाज हुआ है। तो किसी गरीब के ट्यूमर को हटाया गया है। किसी का 50 हजार का मेडिकल का बिल भरा गया तो किसी का तीन लाख का।

साथियों, इस योजना के तहत अब तक जो क्‍लेम दिया गया है वो औसतन प्रति व्‍यक्ति लगभग 20 हजार रुपये दिया गया है। अब आप सोचिए। हजारों की ये राशि उस गरीब को अपनी जेब से खर्च करनी पड़ रही थी। वो कर भी नहीं पाता था। इसी वजह से वो अस्‍पताल जाने से बचता था। अब सरकार उस गरीब के साथ खड़ी है। कि पैसे कि चिंता मत करिए। पहले अपना इलाज करवाइए।

साथियों, आयुषमान भारत योजना की वजह से देश में आधुनिक मेडिकल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का नया ढांचा तैयार हो रहा है। विशेषकर tier II, tier III शहरों में हजारों नए अस्‍पताल खुलने की संभावना बनी है। ये अस्‍पताल देश के नौजवानों के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर भी लेकर कर आएंगे।

भाईयो और बहनों समाज का हर वर्ग, हर जन सुखी हों, सबका जीवन सरल और सुलभ हो इसी लक्ष्‍य के साथ सरकार काम कर रही हैं। मेरी जानकारी है कि राज्‍य के हिस्‍से हमारे महाराष्‍ट्र में वरुण देव की कृपा कुछ कम हुई है, बारिश कम हुई है। मैं आपको आशवस्‍त करता हूं कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत उसके माध्‍यम से आपको जल्‍द से जल्‍द राहत मिलेगी ही। इसके अतिरिक्‍त महाराष्‍ट्र सरकार जो कदम उठाएगी उसमें केंद्र भी कंधे से कंधा मिलाकर के पूरा सहयोग करेगी।   

भाईयो और बहनों पानी के इसी संकट से देश के किसानों को निकालने के लिए सरकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत बरसों से अटकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने का काम कर रही है। इसके तहत महाराष्‍ट्र में भी अनेक बड़े प्रोजेक्‍ट पर काम चल रहा है। महाराष्‍ट्र सरकार ने भी अपने जलयुक्‍त शिविर अभियान के माध्‍यम से जलसंकट से निपटने का एक अभुतपूर्व प्रयास किया है। ये बहुत संतोष की बात है कि इस अभियान की वजह से राज्‍य के 16 हजार गांव सूखा मुक्‍त हो चुके हैं और करीब 9 हजार गांव को सूखा मुक्‍त करने का काम तेजी से चल रहा है।

मैं महाराष्‍ट्र के लोगों की इस बात के लिए भी प्रशंसा करुंगा कि उन्‍होंने सिंचाई टैंकों की सफाई Desiltation के अभियान को बहुत सफलता पूर्वक चलाया है। Irrigation टैंकों से 9 करोड़ क्‍यूबिक मीटर की silt निकालने का काम आसान नहीं है। लेकिन आप लोगों ने जन-भागीदारी से एक अभुतपूर्व काम करके पूरे देश को रास्‍ता दिखाया है। मुझे बताया गया है कि यही काम अगर किसी contractor को दे देते तो छ: सौ करोड़ से भी ज्‍यादा खर्च होता। लेकिन यही काम आपने अपने परिश्रम से कर दिखाया है।

साथियों अगर फसल अधिक भी हो और उसका उचित दाम भी मिले इसके लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ये हमारी सरकार है जिसने एमएसपी को लेकर किसानों की बरसों पुरानी मांग को पूरा किया है। सरकार ने गन्‍ने समेत खरीफ और रबी की 21 फसलों को समर्थन मूल्‍य में लागत के ऊपर 50 प्रतिशत का लाभ तय किया है। इस ऐतिहासिक फैसले से इस साल देश के किसानों को हजारों करोड़ रुपयों के अतिरिक्‍त आय सुनिश्चित होगी।

साथियों, खेती के साथ-साथ सरकार टूरिज्‍म को भी बढ़ावा दे रही है। महाराष्‍ट्र में तो शिरडी जैसे आस्‍था से जुड़े बड़े स्‍थान भी, तो दूसरी तरफ अजंता एलोरा जैसे आर्कषक स्‍थान भी हैं। जहां दुनिया भर के टूरिस्‍ट खींचे चले आते हैं। आस्‍था, अध्‍यात्‍म और इतिहास को युवाओं के रोजगार से जोड़ने को एक बहुत बड़ा अभियान हमनें शुरु किया है।     

देश के टूरिस्‍ट सर्किट को आपस में जोड़ा जा रहा है। वहां सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है। यहां शिरडी में ही पिछली बार जब ये शताब्‍दी समारोह की शुरुआत करने हमारे मान्‍य राष्‍ट्रपति जी आए थे उन्‍होंने एयरपोर्ट का उपहार दिया था। मुझे कहा गया है कि यहां से अब जो फ्लाइट चल रही है उनमें आने वाले समय में और बढ़ोतरी की जाएगी। ताकि देश और दुनिया का हर साईं भक्‍त आसानी से यहां आकर के दर्शन कर सके।

भाईयो और बहनों महाराष्‍ट्र की धरती ने हमेशा सामाजिक समरसता का पाठ देश को पढ़ाया है। वीर शिवाजी हो, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर हो या फिर पूज्‍य  महात्‍मा ज्‍योतिबा फूले हो सबने उन मूल्‍यों की स्‍थापना की जो समता और एकता को सामाजिक शक्ति मानते हैं। आपने इन महान संत पुरुषों का सबक हमेशा याद रखना और स्‍वार्थ के लिए समाज में भेद करने वाली हर शक्ति, हर बुराई को हमनें पराजित करना है। तोड़ना आसान होता है जोड़ना बहुत मुश्किल होता है। हमें जोड़ने वाली शक्ति को सशक्‍त करना है तोड़ने वाली ताकतों को परास्‍त करना है। सबका साथ, स‍बका विकास और एक भारत श्रेष्‍ठ भारत का यही संकल्‍प इसी विजयदशमी को हमें लेना है। और इसलिए मैं आप सभी से आग्रह करुंगा कि हम सब इस संदेश को लेकर के आगे बढ़ें और इसी संदेश के रास्‍ते हमें आगे चलना है। साईंबाबा ने जो मार्ग दिखाया है उसी मार्ग पर हमें आगे चलना है। मुझे बहुत खुशी हूई।

साथियों, आज मैं इस पवित्र स्‍थान पर हूं शताब्‍दी समारोह का समापन कर रहा हूं। इस 31 अक्‍टूबर को राज्‍य में आप सभी की सरकार चार वर्ष पूरे करने वाली है। मैं देवेंद्र फडणवीस जी और उनकी पूरी टीम को अग्रिम बधाई देता हूं। आप यूं ही पूरी शक्ति से महाराष्‍ट्र वासियों की सेवा करते रहें। और आपको यहां के जन-जन का आशीर्वाद मिलता रहे। मेरी यही कामना है।

इसी विश्‍वास के साथ एक बार फिर उन सभी परिवारों को बहुत-बहुत बधाई जिनको आज दशहरे के दिन खुद का अपने मन का अपने सपनों का आज घर मिला है। ये नए घर आपके सपनों को पूरा करने का माध्‍यम बने, इन घरों में रहते हुए आप और आपका परिवार जीवन में और आगे बढ़़ें, तरक्‍की करे, आपके बच्‍चे सफलता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचें। इसी कामना के साथ मैं अपनी बात समाप्‍त करता हूं और आप सबको इस पावन अवसर पर यहां बुलाने के लिए, इस सेवा का अवसर देने के लिए मैं श्री साईं ट्रस्‍ट का भी आभार व्‍यक्‍त करता हूं। आने वाला हर त्‍यौहार आप सभी के जीवन में खुशियां लेकर के आए। इसी शुभकामना के साथ आप सभी का बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

आशा आंगनवाडी कार्यकर्ताओं की वेतन में हुई वृद्धि और मिला मुफ्त बीमा भी



प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के पारिश्रमिक में उल्‍लेखनीय वृद्धि करने की घोषणा की। यह घोषणा अगले महीने से प्रभावी होगी। आज वीडियो ब्रिज के जरिए लाखों आशा, आंगनवाड़ी और एएनएम कार्यकर्ताओं के साथ हुए संवाद के दौरान यह घोषणा की गई।

प्रधानमंत्री ने केन्‍द्र सरकार द्वारा आशा कार्यकर्ताओं को दिए जाने वाले सामान्‍य प्रोत्‍साहनों को दोगुना करने की घोषणा की। इसके अलावा, सभी आशा कार्यकर्ताओं और उनकी सहायिका को प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत मुफ्त बीमा कवर दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दिए जाने वाले मानदेय में भी उल्‍लेखनीय वृद्धि करने की घोषणा की। अब तक जिन लोगों को 3,000 रुपये दिए जाते थे उन्‍हें अब 4,500 रुपये मिलेंगे। इसी तरह अब तक 2,200 रुपये प्राप्‍त करने वाले लोगों को 3,500 रुपये मिलेंगे। आंगनवाड़ी सहायिका के लिए निर्धारित मानदेय को भी अब 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,250 रुपये कर दिया गया है।

प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि विभिन्‍न तकनीकों जैसे कि कॉमन एप्‍लीकेशन सॉफ्टवेयर (आईसीडीएस-सीएएस) का उपयोग करने वाले आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका को अतिरिक्‍त प्रोत्‍साहन प्राप्‍त होंगे। 250 रुपये से लेकर 500 रुपये तक के प्रोत्‍साहन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका के प्रदर्शन पर आधारित होंगे।

प्रधानमंत्री ने देश भर में फैले तीन ‘ए’ यथा आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और एएनएम (सहायिका नर्स मिडवाइफ) की टीमों के साथ संवाद किया। उन्‍होंने आपस में मिल-जुल कर काम करने, अभिनव साधनों एवं प्रौद्योगिकी का इस्‍तेमाल करने, स्‍वास्‍थ्‍य एवं पोषण सेवाएं बेहतर ढंग से सुलभ कराने और ‘पोषण’ अभियान के लक्ष्‍य की प्राप्ति अर्थात  देश भर में कुपोषण में कमी करने के उद्देश्‍य से अथक प्रयास करने के लिए इन कार्यकर्ताओं की सराहना की।

हिन्दुस्तान को बनाने में उद्योगपतियों की भी भूमिका: मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि हिन्दुस्तान को बनाने में उद्योगपतियों की भी भूमिका होती है और उन्हें चोर लुटेरा कहना या अपमानित करना पूर्णतया गलत है ।

विपक्षी दलों द्वारा अकसर देश के बडे़ उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के आरोपों का सामना कर रहे मोदी ने कहा, 'अगर हिन्दुस्तान को बनाने में एक किसान, एक कारीगर, एक बैंकर फाइनेंसर, सरकारी मुलाजिम, मजदूर की मेहनत काम करती है तो इसमे देश के उद्योगपतियों की भी भूमिका होती है ... हम उनको अपमानित करेंगे, चोर लुटेरा कहेंगे ... ये कौन सा तरीका है ।' 

उन्होंने यहां विभिन्न परियोजनाओं के शिलान्यास के मौके पर कहा, 'पहले पर्दे के पीछे बहुत कुछ होता था। देश में कोई भी ऐसा उद्योगपति नहीं होगा जो सरकार के सामने जाकर दंडवत ना होता हो ।' 

साथ ही हल्के फुल्के अंदाज में उन्होंने कहा, 'अमर सिंह बैठे हुए हैं । सारी हिस्ट्री निकाल देंगे ।' 

कार्यक्रम में पूर्व सपा नेता अमर सिंह भी मौजूद थे ।

प्रधानमंत्री ने कहा, 'लेकिन जब नीयत साफ हो, इरादे नेक हों तो किसी के साथ खडे होने से दाग नहीं लगते । महात्मा गांधी का जीवन जितना पवित्र था, उनको बिड़ला के परिवार में जाकर रहने में कभी संकोच नहीं हुआ क्योंकि उनकी नीयत साफ थी ।' 

उन्होंने कहा कि पहले ये नहीं होता था क्योंकि परदे के पीछे बहुत कुछ होता था ।

मोदी ने साथ ही चेताया, 'हां जो गलत करेगा, उसे जेल में जिन्दगी बितानी होगी ।' 

उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ने के लिए हर किसी के साथ सहयोग की आवश्यकता है ।

प्रधानमंत्री ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 60 हजार करोड रूपये की 81 परियोजनाओं का शिलान्यास किया । उन्होंने इतने बड़े निवेश की परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी टीम के साथ साथ अधिकारियों को बधाई दी ।

मोदी ने कहा कि प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना बहुत संकोच से कह रहे थे कि 60 हजार करोड़ रूपये का निवेश हुआ है । 'यह ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी नहीं रिकॉर्ड ब्रेकिंग सेरेमनी है ।' 

उन्होंने कहा कि इतने कम समय में प्रक्रिया को सरल कर इतना बड़ा निवेश बड़ी बात है । 'मैं भी बहुत लंबे अरसे तक मुख्यमंत्री रहा हूं । औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ा रहा हूं । यह निवेश कम नहीं है । यूपी इन्वेस्टर्स समिट के पांच महीने बाद ही इतना बड़ा निवेश होना बड़ा काम है । 60 हजार करोड रूपये को कम ना समझें । हम एक ऐसी व्यवस्था खड़ी करना चाहते हैं जहां किसी भेदभाव की गुंजाइश ना हो ।’’ 

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रक्रियाओं में गति भी दिखे और संवेदनशीलता भी, ना अपना, ना पराया, ना छोटा, ना बड़ा, सबके साथ समान व्यवहार ... 'सबका साथ, सबका विकास'। 

उन्होंने कहा, 'मैंने उत्तर प्रदेश की 22 करोड़ जनता को वचन दिया था कि उनके प्यार को ब्याज़ समेत लौटाउंगा । यहां जो परियोजनाएं शुरु हो रही हैं वो उसी वचनबद्धता का हिस्सा हैं । ये परियोजनाएं उत्तर प्रदेश में आर्थिक और औद्योगिक असंतुलन को दूर करने में भी सहायक होंगी ।

कार्यक्रम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह तथा गौतम अडानी, कुमार मंगलम बिडला, सुभाष चंद्रा, संजय पुरी, यूसुफ अली, बी आर शेट्टी जैसे देश के बडे़ उद्योगपतियों ने भी संबोधित किया ।

टेक्सास के गवर्नर ग्रेग अबट ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की

अमरीका के टेक्सास प्रांत के गवर्नर ग्रेग अबट ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इन दिनों वे एक व्यापार मिशन के साथ भारत की यात्रा पर हैं।

बैठक के दौरान भारत-अमरीकी कार्यनीतिक भागीदारी में बढ़ोतरी की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यापार और वाणिज्य, ऊर्जा, उद्योग, शिक्षा और लोगों के बीच परस्पर सम्पर्कों के क्षेत्र में टेक्सास के साथ बढ़ते संबंधों के महत्व को रेखांकित किया। दोनों नेताओं ने परस्पर संबंध और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।

गवर्नर अबट ने अपने प्रांत टेक्सास और समूचे अमरीका में रह रहे भारतीय मूल के लोगों के योगदान की सराहना की।

विश्व क्षय दिवस पर प्रधानमंत्री का संदेश


विश्व क्षय दिवस पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने निम्नलिखित संदेश दिया है।

“इस वर्ष के विश्व क्षय दिवस की विषय-वस्तु - 'टीबी मुक्त विश्व के लिये नेतृत्वकर्ताओं की आवश्यकता' के अनुरूप मैं नागरिकों एवं संस्थाओं से अपील करता हूं कि वे टीबी को समाप्त करने के प्रयास के आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभायें। एक टीबी मुक्त विश्व मानवता की अद्भुत सेवा है।

भारत को क्षयरोग से मुक्त बनाने के लिये भारत सरकार मिशन मोड में काम कर रही है। विश्व ने 2030 तक टीबी से मुक्ति प्राप्ति का लक्ष्य रखा है लेकिन भारत में हम 2025 तक स्वयं को टीबी से मुक्त बनाना चाहते हैं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्‍ट्रपति चुनाव में जीत पर व्‍लादिमीर पुतिन को बधाई दी


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कल रूस में हुए राष्‍ट्रपति चुनाव में जीत पर रूसी संघ के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन को फोन करके बधाई दी। श्री पुतिन की सफलता पर बधाई देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने यह उम्‍मीद जताई कि श्री पुतिन के नेतृत्‍व में भारत और रूसी संघ के बीच ‘विशेष एवं विशेषाधिकृत रणनीतिक भागीदारी’ निरंतर सुदृढ़ होती रहेगी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वह इस वर्ष के उत्‍तरार्द्ध में होने वाले वार्षिक शिखर सम्‍मेलन के लिए भारत में राष्‍ट्रपति पुतिन का स्‍वागत करने के प्रति आशान्वित हैं।

राष्‍ट्रपति पुतिन ने फोन कॉल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी का धन्‍यवाद किया। उन्‍होंने सभी क्षेत्रों में भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्धता जताई और भारत तथा उसकी आम जनता की निरंतर प्रगति के लिए शुभकामनाएं दीं।   

"अनुसंधान एवं विकास" "राष्‍ट्र के विकास" के लिए ‘अनुसंधान’ है : मोदी


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने मणिपुर विश्‍विद्यालय में 105वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्धघाटन किया। उन्‍होंने अपने भाषण की शुरूआत तीन विशिष्‍ट महान भारतीय वैज्ञानिकों- पद्म विभूषण प्रो. यशपाल, पद्म विभूषण डॉ. यू. आर. राव तथा पद्मश्री डॉ. बलदेव राज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की,जिन्‍हें हमने हाल में खो दिया है। इन सभी वैज्ञा‍निकों ने भारतीय विज्ञान और शिक्षा में असाधारण योगदान किया।


प्रधानमंत्री ने कहा कि आइए हम सब अपने समय के महानतम भौतिक शास्‍त्री स्‍टीफन हॉकिंग के निधन से विश्‍व शोक में शामिल हों। वे आधुनिक अंतरिक्ष के सर्वाधिक प्रकाशवान सितारा थे। वह भारत के मित्र थे और उन्‍होंने हमारे देश की दो बार यात्रा की थी। आम व्‍यक्ति हॉकिंग का नाम जानता है इसलिए नहीं कि उन्‍होंने ब्‍लैक होल पर काम किया बल्कि इसलिए कि उन्‍होंने असामान्‍य रूप से उच्‍च संकल्‍प व्‍यक्‍त किया और सभी बाधाओं के बावजूद दृढ़ भावना के साथ काम किया। वे विश्‍व के सर्वकालिक महानतम प्रेरक के रूप में याद किए जाएंगे।

श्री मोदी ने कहा कि उन्‍हें आज भारतीय विज्ञान कांग्रेस के 105वें अधिवेशन के अवसर पर इम्‍फाल आकर हर्ष का अनुभव हो रहा है और वे वैज्ञानिकों के बीच आकर प्रफुल्लित है, जिनका काम बेहतर कल का मार्ग प्रशस्‍त करने का रहा है। विश्‍वविद्यालय पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में उच्‍च शिक्षा के महत्‍वपूर्ण केन्‍द्र के रूप में उभर रहा है। सदी में यह दूसरा अवसर है, जब भारतीय विज्ञान कांग्रेस का सम्‍मेलन पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में हो रहा है। यह पूर्वोत्‍तर क्षेत्र की आगे बढ़ती भावना का साक्ष्‍य है।

प्रधनमंत्री ने कहा कि यह भविष्‍य के लिए शुभ संकेत है। विज्ञान अनगिनत समय से प्रगति और समृद्धि का पर्याय रहा है। अपने देश के श्रेष्‍ठ वैज्ञानिक मस्तिष्‍क के रूप में यहां एकत्र आप सभी ज्ञान, नवाचार और उद्यम के भंडार हैं और इस परिवर्तन के वाहक के रूप में समुचित रूप से लैस हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि‘आरएंडडी’ को फिर से परिभाषित करने का उचित समय आ गया है। समय आ गया है कि  ‘अनुसंधान एवं विकास’ को राष्‍ट्र के ‘विकास’ के लिए ‘अनुसंधान’ के रूप में पुन: परिभाषित किया जाए। यही इसका वास्‍तविक अर्थ भी है। आखिरकार विज्ञान अधिक महान उद्देश्‍य को पूरा करने का साधन है-दूसरों की जिंदगी में बदलाव करना, मानव प्रगति और कल्‍याण को आगे बढ़ाना। शक्ति तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी की क्षमता के जरिए 125 करोड़ भारतीयों के जीवन को  सहज बनाने के लिए भी संकल्‍प व्‍यक्‍त करने का सही समय आ गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यहां वेमणिपुर की वीर भूमि पर हैं, जहां अप्रैल 1944 में नेताजी सुभाष चन्‍द्र बोस की आईएनए ने स्‍वतंत्रता का आह्वान किया था। जब आप मणिपुर से जाएंगे तो मुझे विश्‍वासहै कि आप अपने साथ देश के लिए कुछ करने की समर्पण भावना के साथ यहां से जाएंगे।

श्री मोदी ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी की बड़ी समस्‍याओं के कारगर समाधान के लिए भी विविध धाराओं के वैज्ञानिकों के बीच सहयोगऔर समन्‍वय की आवश्‍यकता होती है। केन्‍द्र सरकार ने विज्ञान के क्षेत्र में पूर्वोत्‍तर राज्‍यों के लिए अनेक नए कार्यक्रमों की शुरूआत की है। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के अंतर्गत कृषि मौसम सेवाएं दी जा रही हैं।हैं। इससे पांच लाख से अधिक किसान लाभान्वित हो रहे हैं। हम अब इस नेटवर्क को पूर्वोत्‍तर के सभी जिलों तक बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। अनेक केन्‍द्र पूर्वोत्‍तर के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी को प्रासंगिक बना रहे हैं। मणिपुर में एक ‘इथनो मेडिसनल रिसर्च सेंटर’ स्‍थापित किया गया है। यह केन्‍द्र पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में उपलब्‍ध उन जड़ी बूटियों पर शोध करेगा, जिनके औषधीय और सुगंध-चिकित्‍सकीय गुण अनूठे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय विज्ञान कांग्रेस की समृद्ध विरासत रही है। आचार्य जे.सी. बोस, सी.वी रमण, मेघनाथ साहातथा एस.एन. बोस जैसे भारत के दिग्‍गज वैज्ञानिकों द्वारा इसका नेतृत्‍व किया गया है। इन महान वैज्ञानिकों द्वारा तय किए गए उत्‍कृष्‍टता के मानकों से नए भारत को प्रेरणा लेनी चाहिए। विभिन्‍न अवसरों पर वैज्ञानिकों के साथ बातचीत में मैंने वैज्ञानिकों को अपनी सामाजिक, आर्थिक समस्‍याओं का समाधान ढूंढ़ने का आह्वान किया है।इस संदर्भ में इस वर्ष की भारतीय विज्ञान कांग्रेस का विषय ‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्‍यम से अगम्‍य तक पहुंचना’है। यह विषय मेरे हृदय के बहुत निकट है।

इसके पूर्व उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगीकी मंत्री डॉ हर्षवर्द्धन  ने कहा कि सरकार का लक्ष्‍य विज्ञान और प्रौद्योगीकी के लाभ समाज के अंतिम व्‍यक्ति तक पहुँचाना है। डॉं हर्षवर्द्धन ने कहा क‍ि वैज्ञानिक भावना प्राचीन भारतीय धरोहर का हस्सिा है और प्रत्‍येक उपलब्‍ध‍ि भारत की प्राचीन वैज्ञानिक उपलब्धियों का विकास है। उन्‍होंने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्वोगीकी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय आपस में मिलकर काम कर रहे हैं।

मणिपुर के मुख्यमंत्री श्री एन बिरेन सिंह ने विज्ञान कांग्रेस के आयोजकों को बधाई दी। मणिपुर की राज्‍यपाल डॉं. नजमा हेपतुल्‍ला, पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री डॉं जितेन्‍द्र सिंह मणिपुर विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. आद्या प्रसाद पांडेय उद्घाटन समारोह में मंच पर उपस्थित थे। 

आईएससीए के अध्‍यक्ष प्रो. अच्‍युता सामंत ने प्रमुख संबोधन दिया। इनके अलावा देश-विदेश के वैज्ञानिक तथा केंद्र  और राज्‍य के आला अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे। यह पांच दिवसीय आयोजन इस माह की 20 तारीख को पूरा होगा।

पढ़िए Rising India Summit में नरेंद्र मोदी जी के भाषण का पूरा भाषण


नेटवर्क 18 के ग्रुप एडिटर – इन - चीफ राहुल जोशी जी, देश-विदेश से आए अतिथिगण, यहां उपस्थित मीडिया के बंधु, देवियों और सज्जनों,

सबसे पहले आप सभी का बहुत-बहुत आभार कि आपने मुझे Rising India समिट में सम्मिलित होने का अवसर दिया।

साथियों, जब हम Rising कहते हैं तो पहला भाव अंधेरे से उजाले की ओर जाने का आता है। हम जहां थे, जिस स्थिति में थे, उससे आगे बढ़ने, बेहतर भविष्य की ओर जाने का भाव आता है।

ये Rise करना, उदय होना, जब हम देश के संदर्भ में बोलते हैं, तो उसका विस्तार बहुत व्यापक हो जाता है। सवाल ये कि फिर Rising India क्या है?सिर्फ अर्थव्यवस्था की मजबूती Rising India है,सेंसेक्स का रिकॉर्ड स्तर पर होना Rising India है, विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर होना Rising India है या फिर रिकॉर्ड विदेशी निवेश आना Rising India है?

साथियों, Rising India का मेरे लिए मतलब है देशके सवा सौ करोड़ लोगों के स्वाभिमान का Rise होना, देश के आत्मगौरव का Rise होना। जब इन्हीं सवा सौ करोड़ लोगों की इच्छाशक्ति एकजुट हो जाती है, उनके संकल्प एक हो जाते हैं, तो असाध्य भी साध्य हो जाता हो जाता है, असंभव भी संभव बन जाता है।

एकजुट हुई यही इच्छाशक्ति आज न्यू इंडिया के संकल्प को पूरा कर रही है।

भाइयों और बहनों, बहुत से देशों में ये अवधारणा रही है कि सरकार विकास को, परिवर्तन को Lead करे और नागरिक उसे follow करें। पिछले चार वर्षों में भारत में हमने ये स्थिति बदल दी है। अब देश का नागरिक Lead करता है और सरकार उसे follow करती है।

आपने खुद देखा है कि कैसे इतने कम समय में स्वच्छ भारत मिशन एक जनआंदोलन बन गया है। मीडिया ने भी इसमें एक पार्टनर की तरह भूमिका निभाई है।

कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में देश के नागरिकों ने digital payment को अपना एक मजबूत हथियार बना रखा है। भारत आज digital payment करने वाले fastest growing market में से एक है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की हर कार्रवाई को जिस तरह से लोगों का समर्थन मिलता है, वो भी इस बात का गवाह है कि देश को उसकी आंतरिक बुराइयों से मुक्ति दिलाने के लिए किस तरह लोगों ने कमर कस रखी है।

हमारे राजनीतिक विरोधी चाहे जो बोलें, लेकिन देश के लोगों की इसी प्रेरणा की वजह से सरकार बड़े फैसले ले सकी और उन्हें लागू करके दिखाया। जिन फैसलों की सिफारिश दशकों पहले की गई थी, लेकिन उन्हें फाइलों में दबाकर रखा गया, जो कानून दशकों पहले पास हुए लेकिन भ्रष्टतंत्र के दबाव में लागू नहीं किए गए, उन्हें भी इस सरकार ने लागू किया और अब इन्हीं कानूनों के आधार पर बड़े स्तर पर कार्रवाई हो रही है।

साथियों, भारत में जो transformational shift आ रहा है, वो अपने नागरिकों की वजह से आ रहा है, उनकी इच्छाशक्ति की वजह से आ रहा है। यही इच्छाशक्ति देश के लोगों में, देश के क्षेत्रों में असंतुलन का भाव कम कर रही है।

भाइयों और बहनों, चाहे देश का उदय हो या फिर किसी समाज और व्यक्ति का, अगर बराबरी का भाव नहीं होगा, तो न संकल्प सिद्ध होंगे और न ही समाज। इसलिए अगर एक विजन के तौर पर देखें तो हमारी सरकार राष्ट्रीय स्तर पर असंतुलन के इस भाव को खत्म करने का निरंतर प्रयास कर रही है। इसका परिणाम क्या आता है, ये मैं,नेटवर्क 18 के दर्शकों को एक वीडियो के माध्यम से अनुभव कराना चाहता हूं।

साथियों, उज्जवला सिर्फ रसोई ही नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की तस्वीर बदल रही है। ये हमारी सामाजिक व्यवस्था में एक बड़ा असंतुलन खत्म कर रही है।

साथियों,आपके यहां आने से पहले मैं आज दिन भर मणिपुर में था। साइंस कांग्रेस का उद्घाटन, फिर स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का शिलान्यास, उत्तर पूर्व के लिए महत्वपूर्व अनेक योजनाएं आज शुरू हुई हैं। प्रधानमंत्री के तौर पर ये मेरा उत्तर पूर्व का अठ्ठाइसवां या उन्तीसवां दौरा था।

आप सोचिए, आखिर ऐसा क्यों?क्यों हमारी सरकार का जोर पूर्वी भारत पर, उत्तर पूर्व पर इतना ज्यादा है। जो लोग सोचते हैं कि हम वोट के लिए ऐसा कर रहे हैं, वो देश की जमीन से ही नहीं, लोगों के दिलों से भी कट चुके हैं।

साथियों, पूर्वी भारत का Emotional Integration और Demographic Dividend को ध्यान पर रखा जाना बहुत जरूरी है।

इसलिए हमारी सरकार ‘Act East And Act Fast For India’s East’के मंत्र पर चल रही है। और जब मैं‘Act East’ कहता हूं तो उसका विस्तार सिर्फ उत्तर पूर्व के राज्यों तक सीमित नहीं है। बल्कि ये पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, भी शामिल हैं।

देश का ये वो हिस्सा रहा है, जो विकास की दौड़ में पीछे रह गया था। इसकी एक बड़ी वजह थी इस क्षेत्र के विकास को लेकर उदासीनता। इस क्षेत्र में सैकड़ों प्रोजेक्ट या तो शुरू ही नहीं हुए, या फिर दशकों से बीच में ही अटके रहे। हमारी सरकार ने इस असंतुलन को खत्म करने और अधूरी परियोजनाओं को, अटकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने का काम शुरू किया।
  • आप ये जानकर हैरान होंगे कि असम में महत्वपूर्ण Gas cracker project 31 सालों से लंबित था। हमने सरकार में आने के बाद इस परियोजना पर फिर काम शुरू किया।
  • आज बहुत तेजी के साथ उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, बिहार के बरौनी और झारखंड के सिंदरी में बरसों से बंद पड़े फर्टिलाइजर प्लांट्स को खोलने का काम किया जा रहा है।
  • इन Plants को गैस, जगदीशपुर से हल्दिया तक बिछाई जा रही गैस पाइपलाइन से मिलेगी। यही पाइपलाइन पूर्वी भारत के प्रमुख शहरों में गैस पाइपलाइन पर आधारित उद्योगों का पूरा इको-सिस्टम भी विकसित करेगी।
  • ये हमारी ही सरकार का प्रयास था कि ओड़िशा में Paradip Oil Refinery के काम में तेजी आई और अब Paradip विकास का द्वीप बनने की ओर अग्रसर है। ये भी हमारी ही सरकार का प्रयास था कि असम और अरुणाचल को जोड़ने वाले औऱ रणनीतिक तौर पर बहुत महत्वपूर्ण ढोला-सादिया पुल का काम तेज गति से पूरा हुआ।
  • चाहे वो Road sector हो या Rail sector हर तरफ से पूर्वी भारत में Infrastructure को निरंतर बल दिया जा रहा है। सरकार Waterways को बढ़ावा देने का काम कर रही है।वाराणसी और हल्दिया के बीच Waterway का विकास, यहां के ओद्योगिक ट्रांसपोर्ट को बदलने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
  • Connectivity को बढ़ावा देने के लिए उड़ान योजना के तहत पूर्वी भारत में 12 नए Airports का निर्माण किया जा रहा है। इसमें 6 Airport नॉर्थ ईस्ट में बन रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले आपने देखा होगा कि सिक्किम में पहली बार commercial flight land हुई है।
  • जब नए All India Institute of Medical Sciences की बात आई, जब नए Indian Agricultural Research Institute कि बात आई, तो हमारी सरकार ने पूर्वी भारत को प्राथमिकता दी।
  • महात्मा गांधी जी की कर्मभूमि पूर्वी चंपारण – मोतीहारी में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना भी इस सरकार ने की है।
साथियों, सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं से इन इलाकों में रोजगार के लाखों नए अवसर बन रहे हैं।

‘दिल्ली दूरअस्त’ की अवधारणा से अलग हमने दिल्ली, पूर्वी भारत के दरवाजे पर ले जाकर खड़ी कर दी है।हम सबका साथ-सबका विकास के मंत्र के साथ देश के हर भू-भाग को विकास की मुख्यधारा में शामिल कर रहे हैं।

साथियों, मैं आपको एक Map दिखाना चाहूंगा। ये Map इस बात का गवाह है कि पिछले चार वर्षों में किस तरह से पूरे देश में एक बड़ा असंतुलन खत्म हुआ है और पूर्वी भारत के गाव रोशन हुए हैं।
मैं अकसर जिक्र करता हूं कि स्वतंत्रता के बाद देश में 18 हजार गांव ऐसे थे, जहां तक बिजली नहीं पहुंची थी। आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि इनमें से लगभग 13 हजार गांव पूर्वी भारत के थे। इन 13 हजार गांवों में से भी 5 हजार गांव नॉर्थ ईस्ट के थे। इन गावों तक बिजली पहुंचाने का कार्य पूर्णता पर है।

बल्कि अब तो हर घर को बिजली कनेक्शन से जोड़ने के लिए हमारी सरकार ने सौभाग्य योजना भी शुरू की है। इस पर सरकार 16 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर रही है।

पूर्वी भारत के लोगों की जिंदगी में आई ये रोशनी, Isolation to Integrationका ये रास्ताही Rising India की चमक को और प्रखर करेगा।

साथियों, कॉरपोरेट जगत में एक कहावत प्रचलित है कि You can't Manage what You can't Measure.  हमने भी न सिर्फ इस मंत्र को अपनी कार्यपद्धति में अपनाया है, बल्कि इसे हम और भी आगे लेकर गए हैं – Measure to Manage and Manage to Create Mass Movement.
जब Mass Movement बनता है, जब व्यापक स्तर पर सरकार और जनता की भागीदारी होती है तो उसके results भी बेहतरीन होते हैं, दूरगामी होते हैं।मैं आपको देश के Health Sector का उदाहरण दूंगा।

हम Health Sector को Multi Sectoral तरीके से आगे बढ़ाते हुए इसमें चार Pillars पर ध्यान दे रहे हैं। 
  • Preventive Health,
  • Affordable Healthcare,
  • Supplyside interventions
  • Mission mode intervention
हमने इन चारों विषयों पर एक साथ Focus किया है।  देश में health care के लिए सिर्फ Health Ministry हो और वो अकेली ही काम करती रहे तो इससे सिर्फ silos बनते हैं, solutions नहीं निकलते। हमारा प्रयास रहा है – No Silos, Only Solutions. 

जनता-जनार्दन से जुड़े इस अभियान में Health Ministry के साथ-साथ इन विषयों से जुड़े अन्य मंत्रालयों को, स्वच्छता मंत्रालय, आयुष मंत्रालय, Ministry of Chemicals and Fertilizers, उपभोक्ता मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कोभी साथ-साथ रखा। इस तरह से हमने सबको साथ मिलाकर निर्धारित Goal की ओर आगे बढ़ने का प्रयास किया है।

अगर मैं पहले Pillar यानि Preventive Health की बात करूं तो ये सबसे सस्ता भी है और सबसे आसान भी।

हम सब जानते हैं कि स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छता सबसे पहली आवश्यकता है और इसी पर बल देते हुए हमने पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय को activate किया। इसका परिणाम देखिए कि 2014 तक पूरे भारत में 6.5 करोड़ घरों में शौचालय थे लेकिन अब 13 करोड़ घरों में शौचालय हैं यानि दोगुनी बढ़ोतरी।

आज देश में सैनिटेशन कवरेज 38 प्रतिशत से बढ़कर करीब 80 प्रतिशत हो चुकी है। यह बढ़ोतरी भी दोगुने से ज्यादा है। स्वच्छता अभियान के साथ ये संदेश भी घर-घर पहुंचा है कि कि गंदगी अपने साथ बीमारियां लेकर आती हैं, जबकि स्वच्छता रोगों को दूर भगाती है।

Preventive Health Care के रूप में योग ने नए सिरे से अपनी पहचान को स्थापित किया है। आयुष मंत्रालय के activate होने की वजह से योग आज दुनिया भर में एक Mass Movement बन रहा है।

इस बजट में हम Wellness Centre लेकर आए हैं। सरकार का प्रयास देश की हर बड़ी पंचायत में हेल्थ वेलनेस सेंटर बनाने का है।

इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम पर हमने विशेष जोर दिया है। हमारी सरकार आने से पहले देश में टीकाकरण की वृद्धि दर सिर्फ 1 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर 6.7 प्रतिशत हो चुकी है।

साथियों, Preventive Health Care के साथ ही Healthcare का Affordable होना भी जरूरी है।हेल्थ केयर Accessible हो और Affordable भी हो, जन सामान्य के लिए सस्ता और सुलभ हो, इसके लिए भी हमने कई कदम उठाए हैं।

हमनेMinistry of Chemicals and Fertilizersको activate कियाजोइस दिशा में काम कर रही है। देश भर में 3000 से अधिक जन-औषधि केंद्र खोले गए हैं जहां 800 से ज्यादा दवाइयां कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

हृदय रोगियों को स्टेंट कम कीमत पर मिले, इसके लिए हमने उपभोक्ता मंत्रालय को active किया और उसने इस पर विशेष पहल की जिसका परिणाम है कि आज हार्ट स्टेंट की कीमत 85 प्रतिशत तक कम हो गई है।इसके साथ ही Knee implantsकी कीमतों को भी नियंत्रित किया गया है, जिससे इसके दाम में 50 से 70 प्रतिशत तक की गिरावट आई है

इस बजट में हमने एक और बड़ी योजना का ऐलान किया है, और वो है आयुष्मान भारत। आयुष्मान भारत योजना से देश के गरीब से गरीब व्यक्ति को बहुत बड़ी मदद मिलने वाली है। लगभग 10 करोड़ परिवार यानी करीब 45 से 50 करोड़ नागरिक इलाज की चिंता से मुक्त हो जाएंगे। अगर उनके परिवार में कोई बीमार पड़ा तो एक साल में 5 लाख रुपये का खर्च भारत सरकार और इंश्योरेंस कंपनी मिलकर देगी।

साथियों, Health Sector का तीसरा बड़ा Piller है, Supplyside interventions. स्वास्थ्य के साथ जो आवश्यक सुविधाएं जुड़ी हैं, उसे भी सुनिश्चित करने के लिए हमारी सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

देश में और खासतौर पर गांवों में डॉक्टर्स की कमी महसूस की जाती है। इससे निपटने के लिए हमारी सरकार ने मेडिकल सीटें बढ़ाई हैं।

साथियों, 2014 में जब हमारी सरकार बनी थी तो मेडिकल में 52 हजार अंडरग्रेजुएट और 30 हजार पोस्ट ग्रेजुएट  सीटें थीं। अब देश में 85 हजार से ज्यादा अंडरग्रेजुएट और 46 हजार से ज्यादा पोस्ट ग्रेजुएट सीटें हैं।

इसके अलावा देशभर में नए एम्स और आयुर्वेद विज्ञान संस्थान की स्थापना की जा रही है। इसके अलावा हर तीन संसदीय सीटों के बीच में एक मेडिकल कॉलेज के निर्माण की भी योजना है।

इन प्रयासों का सीधा लाभ हमारे युवाओं के साथ ही देश की गरीब जनता को भी मिलेगा। नर्सिंग और पैरामेडिकल के क्षेत्र में भी Human Resource को बढ़ाने के लिए काम किया जा रहा है। मेडिकल प्रोफेशनल्स बढ़ेंगे तो affordability और access भी बढ़ेगा।

भाइयों और बहनों, Health Sector का चौथा और बहुत महत्वपूर्ण Pillar है- Mission mode intervention.

कुछ challenges ऐसे होते हैं जिनके लिए मिशन मोड में काम करने की जरूरत होती है और तभी उन challenges से निपटने में मदद मिलती है और उनके परिणाम देखने को मिलते हैं।

देश में माताओं और बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर हो, वे बीमारियों से मुक्त रहें, स्वस्थ और सशक्त रहें इसके लिए हमने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को activate किया। इसके तहत आज कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियानऔर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत मां और शिशु का उचित पोषण सुनिश्चित किया जा रहा है।

पिछले हफ्ते अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राष्ट्रीय पोषण अभियान की शुरुआत भी की गई है। देश को स्वस्थ बनाने की दिशा में ये सबसे नया और बड़ा कदम है। जब बच्चों और माताओं को सही पोषण मिलेगा तो उनका बेहतर स्वास्थ्य भी सुनिश्चित होगा।

मैं मानता हूं- One size does not fit for all. इसलिए हमारी सरकार ये सुनिश्चित कर रही है कि हर क्षेत्र, हर सेक्टर का Unique Development Model विकसित हो।
साथियों, मैं आपको एक वीडियो के माध्यम से, देशभर की खुशियों में भागीदार बनाना चाहता हूं।

आपने जो लोगों के चेहरे पर खुशी देखी है, वो मेरे लिए Rising India है।
आखिर ये बदलाव कैसे आया?

आपको याद होगा 6 साल पहले जुलाई में ग्रिड फेल होने से देश अंधेरे में डूब गया था। जो हुआ वो एक system का, शासनतंत्र का breakdown था।

Silos की ये स्थिति थी कि एक समय ऊर्जा मंत्रालय को नहीं पता होता था कि कोयला मंत्रालय का रोडमैप क्या है। New and Renewable Energy मंत्रालय का Power Ministry के साथ कोई समन्वय नहीं था।

Silos तोड़कर Solution निकालने का ये कार्य देश के Power Sector में भी बहुत व्यापक तरीके से हो रहा है।

आज भारत की ऊर्जा सुरक्षा के best solutions के लिए Power Ministry, Renewable EnergyMinistry और Coal Ministry एक unit के रूप में काम कर रहे हैं।

कोयले से हमें energy security मिलती है, तो renewableenergy हमारी आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए हमें sustainable energy दे सकती है। यही कारण है कि हम Power Shortage से Power Surplus की तरफ, Network Failure से Net Exporter की तरफ बढ़ रहे हैं। सरकार के प्रयासों से One Nation-One Grid का सपना भी साकार हुआ है।

साथियों, हार-हताशा-निराशा का वातावरण कभी किसी देश को आगे नहीं ले जा सकता। आपने भी देखा है कि पिछले चार वर्षों में देश के लोगों में, देश को चलाने वाली व्यवस्थाओं में किस तरह एक हौसला पैदा हुआ है, एक भरोसा आया है। जो परिवर्तन लोग अपने सामने देख रहे हैं, अपने जीवन में देख रहे हैं, उससे हर भारतीय में ये विश्वास आया है कि 21वीं सदी का भारत अपनी कमजोरियों को छोड़कर, अपने बंधनों को तोड़कर आगे बढ़ सकता है, एक भारत-श्रेष्ठ भारत के सपने को सच कर सकता है। लोगों का ये प्रबल विश्वास ही Rising India का आधार है।

भाइयों और बहनों, यही वजह है कि आज पूरा विश्व, भारत के इस उदय को, Rising India को मान दे रहा है, सम्मान दे रहा है। पहले की सरकार के दस वर्षों में जितने राष्ट्राध्यक्ष और राष्ट्रप्रमुख भारत आए, और जितने पिछले चार वर्षों में भारत आए, उसकी तुलना ही अपने आप में काफी कुछ कह जाती है। पहले की सरकार में औसतन एक साल में विश्व के जितने बड़े नेता आते थे, अब उसके तकरीबन दोगुने राष्ट्राध्यक्ष और राष्ट्रप्रमुख प्रतिवर्ष भारत आ रहे हैं।

ये Rising India की एक ऐसी तस्वीर है, जिस पर आप सभी को गर्व होगा।

साथियों, भारत ने सिर्फ अपने ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के विकास को एक नई दिशा दी है। भारत आज पूरे विश्व में सोलर क्रांति का नेतृत्व कर रहा है। आपने देखा है कि किस तरह पाँच दिन पहले International Solar Alliance का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।इस सम्मेलन में लॉन्च किए गए Delhi Solar Agenda को लागू करने के लिए 60 से ज्यादा देशों ने अपनी सहमति जताई है। Climate Chage जैसे विषय में भारत का ये प्रयास 21वीं सदी में संपूर्ण मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है।

साथियों, बीते चार वर्षों में जिस तरह अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत का प्रभाव बढ़ा है, उसके लिए एक समझी-बूझी रणनीति के तहत निरंतर कार्य किया गया है। भारत ने दुनिया को संदेश दिया है शांति का, विकास का, sustainable development का।

भारत ने बड़े-बड़े समूहों चाहे संयुक्त राष्ट्र हो या G-20, ऐसे विषय उठाए हैं जो पूरे विश्व को प्रभावित करते हैं। आतंकवाद सिर्फ एक देश या एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि दुनिया के हर देश के लिए एक चुनौती है, इस बात को भारत ने ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थापित किया है।

अलग-अलग देशों में कालेधन का प्रवाह और भ्रष्टाचार किस तरह विश्व के विकास में बाधक है, Effective Financial Governance के लिए चुनौती बना हुआ है, ये विषय भी भारत ने ही सबसे पुरजोर तरीके से उठाया है।

साथियों, ये भारत का ही आत्मविश्वास है कि जहां पूरा विश्व 2030 तक TB को खत्म करने के लिए कार्य कर रहा है, हमने उससे भी 5 वर्ष पहले, यानि 2025 तक इस बीमारी से मुक्ति पाने की ठान ली है। मुझे पूरा विश्वास है कि भारत 2025 में पूरी दुनिया को ये लक्ष्य हासिल करके दिखा देगा।

भाइयों और बहनों, दुनिया के लिए आज India Rising सिर्फ दो शब्द नहीं हैं। ये दो शब्द सवा सौ करोड़ भारतीयों की उस ताकत का प्रतीक हैं, जिसे आज पूरी दुनिया नमन कर रही है। यही वजह है कि जिन संस्थाओं की सदस्यता के लिए भारत बरसों से प्रयास कर रहा था, वो उसे अब हासिल होने लगी है।

Missile Technology Control Regime में शामिल होने के बाद भारत ‘वासेनार अरेंजमेंट’ और ‘ऑस्ट्रेलिया ग्रुप’ में भी शामिल हो चुका है। International Tribunal for the Law of the Sea के चुनाव में, International Maritime Organization के चुनाव में, United Nations Economic and Social Council के चुनाव में भारत को विजय प्राप्त हुई है। International Court of Justice में जिस तरह भारत को जीत मिली, उसकी तो दुनिया भर में चर्चा हुई है।

साथियों, ये भारत के बढ़ते प्रभाव का ही असर है कि जब यमन में संकट आता है, भारत अपने नागरिकों को वहां से सुरक्षित निकाल रहा होता है, तो अन्य देश भी भारत से मदद के लिए अपील करते हैं। आपको गर्व होगा सुनकर कि उस संकट के दौरान भारत ने 48 देशों के लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला था।

डिप्लोमेसी में मानवीय मूल्यों को सबसे ज्यादा महत्व देने वाली हमारी नीति ने दुनिया को ये ऐहसास कराया है कि भारत सिर्फ अपने हित के लिए ही नहीं बल्कि वैश्विक हित के लिए काम कर रहा है। सबका साथ-सबका विकास का हमारा मंत्र देश की सीमाओं के दायरे में बंधा हुआ नहीं है।
आज हम आयुष्मान भारत के लिए ही नहीं, बल्कि आयुष्मान विश्व के लिए भी कार्य कर रहे हैं। योग और आयुर्वेद को लेकर दुनिया भर में जो जागरूकता आ रही है, वो भी Rising India का ही एक प्रतिबिंब है।

साथियों, अगर अर्थव्यवस्था की बात करूं तो पिछले तीन-चार वर्षों में भारत ने अपने साथ ही पूरी दुनिया की economic growth को मजबूती दी है। जो देश World GDP का केवल 3 प्रतिशत हिस्सा है, वो आज World economy की ग्रोथ में 7 गुना ज्यादा कंट्रीब्यूट कर रहा है।

जितने भी Macro-Economic पैरामीटर हैं- Inflation, CurrentAccount Deficit, Fiscal Deficit,GDP Growth,Interest rate,FDI Inflow, भारत सभी मेंअच्छा Perform कर रहा है।

आज विश्व में भारत के संदर्भ में जो बातें होती हैं, वो आशा और विश्वास के साथ होती हैं, पूरे भरोसे के साथ होती हैं। यही वजह है कि तमाम रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग में सुधार कर रही हैं।
  • आज दुनिया की Top three prospective host economies में भी भारत का नाम लिया जाता है।
  • FDI Confidence Index में भारत को Top two emerging market performers में से एकबताया जाता है।
  • अंकटाडकी World Investment Report में भी भारत को दुनिया के favourite FDI destinations में से एक बताया गया है।
  • World Bank की Ease of Doing Business की रैंकिंग में भी हमने सिर्फ तीन साल में 42 अंकों का सुधार किया है।
  • वर्ष 2017-18 के तीसरे क्वार्टर में भारत ने 7.2 प्रतिशत की विकासदर हासिल की है। अर्थव्यवस्था के जानकार कह रहे हैं कि ये रफ्तार अभी और बढ़ेगी।
साथियों, 2014 के पहले देश के Tax System की पहचान थी, inverstors के लिए Unfriendly, Unpredictable और Non-Transparent. अब इस स्थिति में परिवर्तन आ रहा है।GST ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े economic Markets में से एक के तौर पर स्थापित किया है।
साथियों, सरकार गरीब, निम्न मध्यम वर्ग, मध्यम वर्ग की Aspirations को समझते हुए holistic approach के साथ काम कररही है।
  • इस बजट में हमने Revitalising Infrastructure and Systems in Education यानि RISE नाम से एक नई योजना शुरू करने की घोषणा की है । इसके तहत हमारी सरकार अगले चार साल में देश के Education System को सुधारने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है।
  • सरकार देश में वर्ल्ड क्लास 20 Institute Of Eminence बनाने पर भी काम कर रही है। Higher Education से जुड़े प्राइवेट और पब्लिक Institutes के साथ हम मिलकर काम कर रहे हैं। इस मिशन के तहत Public Sector के चुने हुए 10 संस्थानों को 10 हजार करोड़ रुपए की आर्थिक मदद भी दी जाएगी।
  • इसी तरह देश के नौजवानों में Self Employment औऱ विशेषकर MSME सेक्टर में काम कर रहे उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए हम स्टैंड अप इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, स्किल इंडिया मिशन जैसे कार्यक्रम चला रहे हैं।
  • विशेषकर प्रधानमंत्री मुद्रा योजना नौजवानों और महिलाओं के सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम बन रही है। जब से ये योजना शुरू हुई है, तब से लेकर अब तक 11 करोड़ से ज्यादा लोन हमारी सरकार ने स्वीकृत किए हैं। लोगों को बिना गारंटी 5 लाख करोड़ रुपए का कर्ज दिया गया है। इस वर्ष के बजट में भी हमने 3 लाख करोड़ रुपए का मुद्रा लोन देना तय किया है।
अगर इन सारे प्रयासों को एक बुके के तौर पर देखें, तो ये कार्य Middle Class और Urban Youth की Aspirations को पूरा करने वाले और रोजगार के नए अवसर बनाने वाले साबित हो रहे हैं।

मुझे उम्मीद है कि विकास की मुख्यधारा में पीछे छूट गया चाहे कोई व्यक्ति हो या क्षेत्र, जब वो तेज गति से आगे बढ़ेगा, उसकी शक्तियों, उसके संसाधनो के साथ न्याय होगा, तो Rising India की Story भी और सशक्त होगी।

आखिर में, मैं आपके मीडिया समूह को 2022 और संकल्प से सिद्धि की यात्रा के बारे में फिर याद दिलाना चाहता हूं। क्या आपके ग्रुप ने कोई संकल्प लिया? क्या कोई रोडमैप तैयार किया? क्या इस बारे में सोचा कि हम ऐसा क्या करें जो 2022 में न्यू इंडिया के सपने को पूरा करने में मदद करेगा?
मुझे बहुत खुशी होगी अगर आपका ग्रुप कोई चैलेन्ज स्वीकारे, अपने संकल्प को अपने चैनलों पर प्रमोट करे, उसका follow-up भी दिखाए।

साथियों, सवा सौ करोड़ देशवासी, ईश्वर का ही रूप हैं। और देश की प्रत्येक संस्था को, प्रत्येक इकाई को राष्ट्र कल्याण के लिए, राष्ट्र निर्माण के लिए, विकास की यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए संकल्प बद्ध होकर काम करने की आवश्यकता है।

आपके जो भी संकल्प हों, उसके लिए मेरी अनेक-अनेक शुभकामनाएं हैं।

एक बार फिर आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद !!!

प्रधानमंत्री #IARI में 'कृषि उन्नति मेले' में किसानों को संबोधित करेंगे


प्रधानमंत्री जैविक खेती पोर्टल का उद्घाटन करेंगे और साथ ही 25 कृषि विज्ञान केन्द्रों की भी आधारशिला रखेंगे 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी कृषि कर्मन पुरस्कार और पंडित दीन दयाल उपाध्याय कृषि विज्ञान प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्रदान करेंगे 

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 17 मार्च को नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, आईएआरआई पूसा परिसर में वार्षिक 'कृषि उन्नति मेला' को संबोधित करेंगे। वे किसानों को संबोधित करेंगे, जैविक कृषि पर पोर्टल की शुरूआत करेंगे और 25 कृषि विज्ञान केन्द्रों की आधारशिला भी रखेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री “कृषि कर्मन” और “पंडित दीन दयाल उपाध्याय कृषि विज्ञान प्रोत्साहन” पुरस्कार भी प्रदान करेंगे।

इस मेले का थीम-2020 तक किसानों की आय दुगुना करना है। 'कृषि उन्नति मेला' का उद्देश्य किसानों के बीच कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में नवीनतम तकनीकी विकास के बारे में जागरूकता पैदा करना है।

किसानों की आय दोगुनी करने पर थीम पवेलियन, सूक्ष्म सिंचाई पर लाइव प्रदर्शन, अपशिष्ट जल उपयोग, पशुपालन और मत्स्य पालन मेले के प्रमुख आकर्षणों में से हैं। मेले में बीज, उर्वरकों और कीटनाशकों पर भी पवेलियन (मंडप) स्थापित किए जाएंगे।

प्रधानमंत्री द्वारा 15वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में उद्धघाटन वक्तव्य


Your Excellency President दुतेर्ते, 

Excellencies, 

Mr. President, 

मुझे ASEAN (आसियान) की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर पहली बार मनीला आकर हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। इसके साथ ही हम ASEAN-India Dialogue Partnership के 25 वर्ष भी पूरे कर रहे हैं।

इस महत्वपूर्ण वर्ष के दौरान Philippines (फिलीपींस) द्वारा आसियान के कुशल नेतृत्व और शिखर सम्मलेन के शानदार आयोजन के लिए मैं राष्ट्रपति महोदय के प्रति आभार प्रकट करता हूं।

आसियान-भारत की साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने में Country Coordinator के रूप में वियतनाम के योगदान के लिए मैं वियतनाम के माननीय प्रधानमंत्री को भी धन्यवाद देता हूं।

Excellencies, 

आसियान की यह 50 वर्षों की महत्वपूर्ण यात्रा जितनी celebration के योग्य है, उतनी ही विचार करने योग्य भी है।

मुझे पूरा विश्वास है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर आसियान देश एक vision, एक पहचान और एक स्वतंत्र समुदाय के रूप में आगे भी मिल कर काम करते रहने का संकल्प लेंगे।

भारत की Act East Policy आसियान को ध्यान में रख कर ही बनाई गई है, और Indo-Pacific region के क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में इस संगठन का महत्व स्पष्ट है।

तीसरे ASEAN-India Plan of Action के अंतर्गत आपसी सहयोग के हमारे विस्तृत agenda की प्रगति अच्छी रही है, जिसमें politico-security, economic तथा cultural partnership के तीन महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं।

Excellencies, 

भारत एवं आसियान के बीच कायम सामुद्रिक संबंधों की वजह से हज़ारों वर्ष पहले हमारे व्यापारिक संबंध स्थापित हुए थे, तथा हमें साथ मिल कर इन्हें और मजबूत बनाना होगा।

इस क्षेत्र के हितों और शांतिपूर्ण विकास को ध्यान में रखते हुए, नियमों पर आधारित क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे की स्थापना के लिए भारत आसियान को अपना समर्थन जारी रखेगा।

हमने अपने-अपने देशों में आतंकवाद तथा उग्रवाद से कड़ा संघर्ष किया है। अब समय आ गया है, जब हम इस महत्वपूर्ण विषय पर आपसी सहयोग बढ़ा कर इस चुनौती का मिल-जुल कर समाधान निकालें।

Excellencies, 

भारत-आसियान Dialogue Partnership के पच्चीसवीं वर्षगांठ समारोह का theme "Shared Values, Common Destiny” बिल्कुल उपयुक्त है। इस अवसर पर हमने बहुत से कार्यक्रम मिल-जुल कर आयोजित किये हैं।

मुझे विश्वास है कि इस यादगार वर्ष का समापन भी शानदार रहेगा। 25 जनवरी 2018 को नई दिल्ली में India-ASEAN Special Commemorative Summit में आपका स्वागत करने के लिए भारत और मै व्यक्तिगत रूप से उत्सुक हैं।

भारत के 69वें गणतंत्र दिवस समारोह के हमारे मुख्य अतिथियों के रूप में आसियान देशों के नेताओं का स्वागत करने के लिए सवा सौ करोड़ भारतवासी इंतज़ार कर रहे हैं।

हम सभी के बेहतर भविष्य के लिए आपके साथ मिल कर काम करने के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। 

बहुत बहुत धन्यवाद।

अमूल की नई इकाईयों के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री का गजब का भाषण


मंच पर विराजमान सभी महुनुभाव और बनासकांठा के मेरे प्यारे भाईयों और बहनों, 

आपको लगता होगा आपना नरेन्‍द्र भई हिन्‍दी में केम बोले छ, 

अरे देश को भी तो पता चलना चाहिए कि बनासकांठा का किसान कैसा काम करता है। मरूभूमि में भी जान भरने की ताकत अगर है, तो बनासकांठा के किसान में है, उत्‍तर गुजरात के किसान में है। जो अपना पसीना बहा करके जमीन में जान भर देता है। और इसलिए देश को पता चले कि इस बनासकांठा जिला, पाकिस्‍तान की सीमा पर, बिना पानी; बिना बरसात; रेगिस्‍तान जैसी जिंदगी गुजारता हुआ इंसान अपने पराक्रम से, पुरुषार्थ से अपने भाग्‍य को कैसे बदल सकता है, इसका ये जीता जागता उदाहरण ये जिले के नागरिक हैं; उनका पुरुषार्थ है, और उनकी सफलताएँ हैं। 

भाइयो, बहनों! मुझे बताया गया 25-27 साल के बाद कोई प्रधानमंत्री का बनासकांठा जिले में आने का हुआ है। भाइयो, बहनों में आपके बीच में प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, इस धरती की संतान के रूप में आया हूं। इस मिट्टी ने मुझे बड़ा किया है। और मैं आज विशेष रूप से आया हूं, श्रद्धेय गलबाभाई को; उनकी तपस्‍या को नमन करने के लिए आया हूं। लाखों पशुओं की तरफ से, लाखों परिवारों की तरफ से, बनासकांठा की बंजर भूमि की तरफ से मैं आज गलबाभाई की शताब्‍दी के समारोह की शुरुआत उनको शत् शत् नमन करता हूँ; इन सबकी तरफ से नमन करता हूं। 

आप कल्‍पना कीजिए, आज से 50 साल पहले जब गलबाभाई की उम्र 50 साल की थी, आठ छोटी छोटी दूध मंडली; उससे शुरू किया और आज किसानों के सहयोग से, पुरुषार्थ से, परिश्रम से, और उसमें भी बनासकांठा की, उत्‍तर गुजरात की मेरी माताओं, बहनों के पुरुषार्थ के कारण; जिन्‍होंने पशुपालन को परिवार की सेवा का हिस्‍सा बना दिया; उन्‍होंने श्‍वेत क्रांति ला दी। आज बनास डेयरी की भी स्‍वर्णिम जयंती का अवसर है। ऐसा सुयोग है कि एक तरफ इस महान आंदोलन के जनक, श्‍वेत क्रांति के जनक गलबा भाई की शताब्‍दी, और दूसरी तरफ उन्‍हीं के हाथों से बोया गया पौधा, आठ मंडली से शुरू हुआ पौधा, आज बनास डेयरी के रूप में वटवृक्ष बन गया है; उसकी स्‍वर्णिम जयंती का ये अवसर है। और इसलिए इस 50 वर्ष में जिन-जिन महानुभावों ने इस बनास डेयरी को चलाया, आगे बढ़ाया, इस ऊंचाई पर ले गए, अनेक चेयरमैन आए होंगे, अनेक व्‍यवस्‍थापक आए होंगे, अनेक कर्मचारी रहे होंगे, मैं आज इस 50 साल की यात्रा में जिन-जिन लोगों ने योगदान दिया है, उन सबका दृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, उनका साधुवाद करता हूं। 

भाइयो, बहनों! आप मुम्‍बई जाएँ, सूरत जाएँ, किसी और इलाके में जाएं तो कठिनाइयों में ही जिंदगी गुजारने के लिए गुजरात से कौन आया है, तो ज्‍यादातर पता चलता था कच्‍छ और बनासकांठा के लोग अपना गांव, अपना इलाका छोड़ करके रोजी-रोटी कमाने के लिए कहीं बाहर जाते थे, क्‍योंकि यहां कोई प्राकृतिक संसाधन नहीं थे। और भाइयो, बहनों हम पहले से कह रहे थे एक बार मां नर्मदा हमारी इस बनास की धरती को आ करके छू लेगी, मेरा किसान मिट्टी को सोना बना करके रख देगा। आज उसने बनास की इस सूखी धरती को, इस रेगिस्‍तान वाली धरती को सोने में तब्‍दील कर दिया है। 

मुझे बराबर याद है, मैं नया-नया मुख्‍यमंत्री बना था। कई सारे सवालिया निशान मेरे लिए लगाए जाते थे। ये मोदी! मुख्‍यमंत्री! क्‍या करेगा! ये तो कभी! गावं का सरपंच नहीं रहा! कभी चुनाव नहीं लड़ा! इसको क्‍या आएगा! बड़ी मजाक उड़ती थी। उस समय मेरा सबसे पहला सार्वजनिक कार्यक्रम डीसा में हुआ था, इसी धरती पर हुआ था; इसी मैदान में हुआ था। और वो था लोक कल्‍याण मेला। और उस दिन मैंने जो नजारा देखा था आज उससे अनेक गुना नजारा बड़ा मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं। 

भाइयो, बहनों! मुझे बराबर याद है बनासकांठा के किसान मुझपे बहुत नाराज रहते थे, गुस्‍सा करते थे। कभी-कभी मेरे पुतले जलाते थे। और फिर मैं हिम्‍मत करके उनके बीच जाता था। और मैं उनको कहता था कि अगर बनासकांठा का भाग्‍य बदलना है तो हमें पानी बचाना पड़ेगा, बिजली के तार छोड़ने पड़ेंगे। किसान को बिजली नहीं पानी चाहिए; ये बात मैं उस समय बताता था; नाराजी मोलता था, लेकिन ये मेरा सौभाग्‍य है कि वो ही बनासकांठा, वही मेरे बनासकांठा के किसान, उन्‍होंने मेरी बात को सर आंखो पर चढ़ाया, और आज Drip Irrigation में टपर सिंचाई में (Sprinkler में), पूरे गुजरात में नम्‍बर एक पर ला करके खड़ा कर दिया। मैं उन सभी किसानों को, मैं आज उन सभी किसानों को सर झुका करके नमन करता हूं। उन्‍होंने न अपना भाग्‍य बदला ऐसा नहीं है, उन्‍होंने आने वाली अनेक अनेक पीढि़यों का भी भाग्‍य बदल दिया है। 

मुझे याद है, 2007 या 08 का वर्ष होगा, ऐसा ही एक किसानों के लिए कार्यक्रम मेरा था, तो मैं बनासकांठा में आया था। तो हमारे एक मित्र हैं, दिव्‍यांग हैं श्री गेना जी। गेना जी हमारे लाखनी तहसील से हैं। तो गेना जी चल तो पाते नहीं हैं, दिव्‍यांग हैं, लेकिन बड़े प्रगतिशील किसान हैं। वो इतना बड़ा दाड़म ले करके; अनार ले करके मुझे भेंट करने आए, नारियल से भी बड़ा था। मैं हैरान था, मैंने उनसे पूछा भाई ये कमाल कैसे किया है आपने? बोले साहब आज तो मेरे खेत में पूरे जिले के लोग देखने के लिए आते हैं, और आप देखना धीरे-धीरे दाड़म की खेती में बनासकांठा आगे निकल जाएगा। एक गांव के मेरे गेना जी सरकारी गोरिया के हैं ना गेनाजी! आए होंगे कहीं शायद बैठे होंगे। हमारे गेना जी कहीं बैठे होंगे। क्‍या कमाल करके रख दिया, भाइयो, बहनों बनासकांठा के किसान ने, प्रगतिशील किसान के रूप में अपनी छवि छोड़ी है और एक-दो किसान नहीं, एक आंदोलन खड़ा हुआ है। आज भी बनासकांठा ने प्रति हेक्‍टेयर आलू की पैदावार का जो रिकॉर्ड किया है उसका रिकॉर्ड को कोई तोड़ नहीं पाया। ये काम बनासकांठा ने कर दिखाया है। आज बनासकांठा Potatoes के लिए भी जाने लगा है। 

भाइयो, बहनों! किसान के लिए कुछ चीजें कैसी वरदान होती हैं। गलबाभाई ने जब डेयरी का काम शुरू किया, जहां पानी न हो रेगिस्‍तान हो, 10 साल में 7 साल अकाल रहता हो; जहां किसान ईश्‍वर की इच्‍छा पर ही जिंदगी गुजारता हो; उसके लिए तो आत्‍महत्‍या एक ही रास्‍ता बच जाता था। लेकिन इस जिले ने किसानों को पशुपालन की ओर मोड़ दिया, दुग्‍धपालन की ओर मोड़ दिया और पशुओं की सेवा करते-करते, दुग्‍ध क्रांति करते-करते अपने परिवार को चलाया, बच्‍चों को भी पढ़ाया और जीवन को आगे ले गए। 

भाइयो, बहनों! यही बनासकांठा, यही गुजरात, जिसने श्‍वेत क्रांति का नेतृत्‍व किया था; आज मुझे खुशी हुई कि बनास डेयरी ने श्‍वेत क्रांति के साथ-साथ Sweet क्रांति का भी बिगुल बताया है। जहां श्‍वेत क्रांति हुई वहां अब Sweet क्रांति भी होने वाली है। मधु क्रांति! शहद! बनास ने डेयरी के दूध की जैसी व्‍यवस्‍था की है किसानों को शहद के लिए मधुमक्‍खी पालन के लिए। ट्रेनिंग देना शुरू किया। आज उस Honey में से पहला packaging बना करके उन्‍होंने market में रखा हे। मेरा पूरा विश्‍वास है गुजरात में जो डेयरी का network है, और करीब-करीब सभी जिलों में डेयरी का network है, किसानों की समितियां बनी हुई हैं। दूध के साथ-साथ खेतों में अगर मधुमक्‍खी पालन भी किसान पकड़ लें तो जैसे दूध भरने जाते हैं, वैसे मधु भरने जाएंगे, मद भरने जाएंगे, शहद, honey ले जाएंगे, और डेयरी की गाडि़यों में दूध भी जाएगा, शहद भी जाएगा। Extra Profit, Extra Benefit, अतिरिक्‍त कमाई का एक नया रास्‍ता, गुजरात के भी डेयरी, सभी किसान, इस रास्‍ते पर चल करके एक श्‍वेत क्रांति के साथ-साथ Sweet क्रांति को भी ला सकते हैं ऐसा मेरा विश्‍वास है। दुनिया में शहद की मांग है, बहुत बड़ा market है। अगर हम शहद में भी आगे निकल जाएं, और जब नर्मदा का पानी आया है। नर्मदा के नजदीकी इलाकों में तो बहुत बड़ी मात्रा में इसका लाभ मिलता है। Fertilizer उपयोग करने के तरीके बदलने पड़ते हैं, लेकिन लाभ इतना बड़ा होता है और जैसा बनाकांठा के किसान का मन बदला है, ये भी बदल के रहेगा ऐसा मुझे विश्‍वास है। 

आज बनास डेयरी ने Amul Brand के साथ Cheese का Production का भी एक प्‍लांट शुरू किया। गुजरात में जितनी भी डेयरियां वो Cheese के काम से चली हुई हैं, आप हैरान होंगे दुनिया के कई देश हैं, वे Amul के Brand की Cheese मांगते हैं। जितनी पैदावार होती है तुरंत उठ जाती है, लोग, ग्राहक मिल जाते हैं। आज उसमें एक इजाफा बनास डेयरी के द्वारा हो रहा है, मैं उनको बधाई देता हूं। एक बहुत बड़ा initiative आज डेयरी ने लिया है, KanKrej की गायद्, इस नस्ल का मूल्‍य हम जानते हैं, वैज्ञानिक तरीकों ने भी गिर की गाय, KanKrej (कांक्रेच) की गाय, इसका महात्‍मय स्‍वीकार किया है। अब A2 Milk, जिस KanKrej की गाय के दूध की एक विशेषताएं हैं, विशेष तत्‍व हैं, उसको आज उन्‍होंने मार्केट में रखा है। जो Health Conscious लोग हैं, जहां बच्‍चों को कुपोषण की समस्‍या है, ऐसे बच्‍चों के लिए A2 Milk, KanKrej गाय का A2 Milk उनके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए उपकारक होने वाला है, ऐसा एक भगीरथ काम भी आज यहां शुरू हुआ है। यहां KanKrej की नस्‍ल को बढ़ावा देना, उसमें सुधार करना, उसकी क्षमता में सुधार करना, उसकी per capita milk production बढ़ाना, उसके लिए भी वैज्ञानिक तरीके चल रहे हैं। 

मैं बनास में जब आया हूं तब मैं बनास डेयरी से चाहूंगा कि वो एक काम और भी करे, और कर सकते हैं। बनास हो, सांभर डेयरी हो, दुग्‍ध सागर डेयरी हो; ये तीनों मिल करके भी कर सकते हैं। दो चीजें हम ऐसी पैदा करते हैं, हमारे किसान; लेकिन हम सस्‍ते में बेच देते हैं। और जो हम castor की खेती करते हैं, दिवेला; एरेंडा। 80 percent खेती हमारे यहां होती है, उसका उत्‍पादन। उस पर इतनी value addition होती है, इतनी process होती है। सारी दुनिया के महत्‍वपूर्ण technology में space shuttle की technology में ये Castor के Oil से बनी हुई चीजें सबसे सफल रहती हैं। लेकिन हम जो हैं, अभी भी हमारा दिवेला, एरेंडा जो कहें; ऐसे का ऐसा बेच देते हैं। ये बनास, दुग्‍धसागर, सांभर एक research Centre बनाएं और हम, हमारे किसान जो यहां पर castor पैदा करते हैं, एरंडा पैदा करते हैं, दिवेला पैदा करते हैं, उसमें value addition कैसे करें और हमारा ये कीमती संपत्ति पानी के मोल से बाहर चली जाती है, उसे हम बचाएं। 

दूसरा है ईसबगोल। इसबगोल की ताकत बहुत बड़ी ताकत है। उसमें बहुत value addition हो सकता है। जब कुरियन जिंदा थे, तो श्रीमान कुरियन जी को मैंने कहा था कि आप ईसबगोल पर value addition पर काम कीजिए। उन्‍होंने प्रारंभ किया था, आइसक्रम बनाई थी ईसबगोल का। और आइसक्रीम का नाम दिया था ईसबकूल। आनंद में शुरूआत की थी उन्‍होंने उस समय। इतना बड़ा Global Market है ईसबगोल का। उसके संबंध में भी अगर वैज्ञानिक तरीके से हम काम करें तो बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं, और हमें लाना चाहिए। 

भाइयो, बहनों इन दिनों पूरे देश में इस बात की चर्चा चल रही है नोटों का क्‍या होगा? आप मुझे बताइए, आठ तारीख के पहले 100 की नोट की कोई कीमत थी क्‍या? 50 के नोट की कोई कीमत थी क्‍या? 20 की नोट की कोई कीमत थी क्‍या? छोटे को कोई पूछता था क्‍या? हर कोई बड़ों को ही पूछता था। हजार, पांच सौ; हजार, पांच सौ; हजार, पांच सौ। आठ तारीख के बाद देश देखिए 100 का मूल्‍य कैसा बढ़ गया, कैसी ताकत बढ़ गई उसकी, जान आ गई जैसे। 

भाइयो, बहनों! जैसे आठ तारीख के पहले बड़ों-बड़ों की पूछ होती थी, हजार और पांच सौ की ही गिनती गिनी जाती थी, 20, 50, 100 को कोई पूछता नहीं था, छोटे की तरफ कोई देखता नहीं था। आठ तारीख के बाद बड़ों की ओर कोई देखने को तैयार नहीं है, सब छोटे के लिए तैयार हो गए हैं भाइयो। ये फर्क आया है और जैसे बड़ी नोट नहीं छोटी नोट की ताकत बढ़ी है; बड़े लोग नहीं, छोटे लोगों की ताकत बढ़ाने के लिए ये बहुत बड़ा फैसला मैंने किया है। देश का गरीब, देश का सामान्‍य मानवी, जैसे 100 रुपये की ताकत बढ़ गई, वैसे गरीब की ताकत बढ़ाने के लिए ये मैंने काम किया है। आप कल्‍पना कर सकते हैं भाइयो, आपने देखा होगा कुछ भी खरीद करने जाओ, कच्‍चा बिल कि पक्‍का बिल? बिल मांगोगे तो छोटा व्‍यापारी भी कहता है नहीं, नहीं बिल-विल लेना है तो दूसरी दुकान पर जाओ। कैश देना है तो ले आओ; ऐसा ही चला। मकान चाहिए, मकान वाला कहता है चैक में इतना, रोकड़े में इतना। अब वो गरीब आदमी रोकड़ा लायेगा कहां से? 

भाइयो, बहनों! इस प्रकार से नोटें छापते गए, छापते गए, छापते गए और देश, उसका अर्थतंत्र, ये नोटों के ढेर के नीचे ही दबने लग गया। भाइयो, बहनों मेरी लड़ाई है आतंकवाद के खिलाफ, आतं‍कवादियों को ताकत मिलती है जाली नोट से। और हम तो सीमा पार क्‍या हो रहा है, सब जानते हैं पड़ौस में ही रहते हैं। कैसी मुसीबतें हमें झेलनी पड़ी हैं, ये बनासकांठा पाटन जिले के लोग ज्‍यादा जानते हैं। 

भाइयो, बहनों! जाली नोट के कारोबारी, हिन्‍दुस्‍तान में जितना हो-हल्‍ला है ना उससे ज्‍यादा बाहर है, जाली नोटों के कारोबारियों में बाहर है। नक्‍सलवाद, सारे नौजवान surrender होकर वापस आने लगे हैं। हर किसी को लगता है अब मुख्‍य धारा में वापस आना चाहिए। आतंकवादियों को जहां से ताकत मिलती थी उन रास्‍तों को रोकने में सफल हुए हैं। ये जाली नोट का कारोबार, उसका मृत्‍युघंट, एक निर्णय से किया है भाइयो, बहनों। भ्रष्‍टाचार, कालाधन, ये भ्रष्‍टाचार और काले धन में पीड़ा किसको होती थी? किसी बेईमान को न भ्रष्‍टाचार से परेशानी थी, न काले धन से परेशानी थी। अरे एक भ्रष्‍टाचारी को दूसरे भ्रष्‍टाचारी को कुछ देना भी पड़ता था तो भी देने वाला भ्रष्‍टाचारी दुखी नहीं था। अगर दुखी कोई था तो इस देश का ईमानदार नागरिक दुखी था। परेशान था तो इस देश का ईमानदार नागरिक परेशान था। 70 साल तक इन ईमानदार लोगों को; 70 साल तक इन ईमानदार लोगों को आपने लूटा, आपने परेशान किया, उसको जीना मुश्किल कर दिया। आज मैं जब इमानदारों के साथ खड़ा हूं, तब ईमानदारों को भड़काया जा रहा है, और मुझे खुशी है मेरे देश के ईमानदार नागरिकों ने लाखों भड़काने के बावजूद भी सरकार के इस निर्णय का साथ दिया है। मैं सवा सौ करोड़ देशवासियों को शत् शत् नमन करता हूं कि इतने बड़े काम में उन्‍होंने मेरी मदद की। 

भाइयो, बहनों! आजकल बड़े बुद्धिमान लोग भाषण सुनाते हैं कि मोदीजी आपने इतना बड़ा निर्णय किया, लेकिन हमारे जीते जी तो कोई लाभ नहीं मिलेगा; मरने के बाद मिलेगा। भाइयो, बहनों हमारे देश में एक चारबाग ऋषि हो गए, ये चारबाग ऋषि कहते थे:- ’’ऋणम कृत्‍वा, घृत्‍तम पीवेत’’ वो कहते थे अरे! मृत्‍यु के बाद क्‍या होने वाला है? कौन जानता है, जो मौज करनी है अभी कर लो; जो खाना है खा लो, घी पीना है पी लो; आनंद से जी लो। इस चारबाग की Philosophy को कभी भी हिन्‍दुस्‍तान ने स्‍वीकार नहीं किया। हमारा तो देश ऐसा है, बूढ़ा गरीब मां बाप; पैसे बहुत कम हों तो बूढ़ा और बूढ़ी मां बात करते हैं कि ऐसा करो शाम को सब्‍जी बनाना बंद कर दो, थोड़े पैसे बच जाएंगे तो मरने के बाद बच्‍चों के काम आ जाएंगे। मेरा देश मरने के‍ बाद मेरा क्‍या होगा, ये कभी चिन्‍ता नहीं करता है; मेरा देश, मेरे बाद की पीढि़यों का भला क्‍या हो, ये सोचने वाला देश है। मेरा देश स्‍वार्थी लोगों का देश नहीं है। मेरे देश का चिन्‍तन सुख के लिए, खुद के सुख के‍ लिए जीने वाला नहीं है। मेरे देश का चिन्‍तन भावी पीढि़यों के सुख के‍ लिए चलने वाला है। ये नए चारबाग लोग जो पैदा हुए हैं ‘’ऋणम कृत्‍वा, घृत्‍तम पीवेत’’ ये जो बातें करने वाले लोग हैं, उनको पचास बार सोचना पड़ेगा। 

भाइयो, बहनों! आपने देखा होगा Parliament चल नहीं रही है, चलने दी नहीं जा रही है। हमारे देश के राष्‍ट्रपति, सार्वजनिक जीवन में इतना लम्‍बा अनुभव है; शासन चलाने वाले श्रेष्‍ठत्‍तम लोगों में से हमारे राष्‍ट्रपति जी रहे हैं। वो अलग राजनीतिक धारा में पले-बढ़े हैं। लेकिन देश की संसद में जो कुछ भी हो रहा था उससे इतने पीडि़त हो गए, इतने दुखी हो गए कि दो दिन पहले उनको सांसदों को सार्वजनिक रूप से टोकना पड़ा। विरोध पक्ष को नाम दे करके टोकना पड़ा। और मैं हैरान हूं, सरकार कहती है हम चर्चा चाहते हैं, सरकार कहती है कि प्रधानमंत्री बोलने के लिए तैयार हैं, सरकार कहती है प्रधानमंत्री आ करके कहने को तैयार हैं, लेकिन उनको मालूम है उनका झूठ टिक नहीं पाता है और इसलिए वो चर्चा से भागते रहे हैं, और इसलिए लोकसभा में मुझे नहीं बोलने दिया जाता; मैंने जनसभा में बोलने का रास्‍ता चु‍न लिया है भाइयो। और जिस दिन मौका मिलेगा लोकसभा में भी सवा सौ करोड़ देशवासियों की आवाज मैं जरूर पहुंचाने का प्रयास करूंगा मेरे भाइयो, बहनों। 

भाइयो, बहनों! मैं विरोधी दल के मित्रों से, आज महात्‍मा गांधी की इस धरती से, सरदार वल्‍लभभाई पटेल की इस धरती से सार्वजनिक रूप से आग्रह करना चाहता हूं। जब चुनाव होते हैं, जब चुनाव होते हैं हम सभी दल एक-दूसरे के खिलाफ बोलते हैं; आरोप प्रत्‍यारोपण करते हैं, अच्‍छी और बुरी नीतियों की चर्चा करते हैं, हर प्रकार से अपने विरोधियों पर जैसा मार कर सकते हैं करने की कोशिश करते हैं; सभी दल करते हैं। भारतीय जनता पार्टी भी करेगी, कांग्रेस भी करेगी, बाकी सब छोटे-मोटे दल भी; सब करते हैं। लेकिन सभी पार्टियां एक काम जरूर करती हैं, क्‍या? मतदाता सूची को ठीक करना, अधिकत्‍तम लोग मतदान करने आएं इसकी चिन्‍ता करना; मतदाताओं को कैसे बटन दबाना; वो सिखाना, सभी दल करते हैं। एक तरफ तो नीतियों का विरोध करते हैं, दूसरे को पराजित करने की ताकत लगाते हैं, लेकिन दूसरी तरफ सब मतदाता सूची पर ध्‍यान देते हैं, Electronic Voting Machine पर ध्‍यान देते हैं, अधिक लोग मतदान करने आएं इस पर ध्‍यान देते हैं, क्‍यो? क्‍योंकि लोकशाही हम सबकी जिम्‍मेवारी है। 

मैं विरोध पक्ष के मित्रों से कहना चाहता हूं, आप ये तो नहीं कहने की हिम्‍मत कर रहे हो कि मोदी हजार और पांच सौ वाला नोट वापिस ले लो क्‍योंकि आपको पता है कि जनता का मिजाज बदला हुआ है। हां! कुछ लोगों ने कहा, अच्‍छा मोदी जी ये तो ठीक है लेकिन ऐसा करो एक हफ्ते के लिए रोक लो। क्‍यों भाई! ये हफ्ते में कौन सा जादू होने वाला था? ये एक हफ्ता रोकने का इरादा क्‍या था? लेकिन कोई दल ये नहीं कहता है कि निर्णय को Roll Back करो। सब दल कहते हैं, ठीक से लागू करो। मैं सभी दलों से कहना चाहता हूं कि जैसे चुनाव में हम एक-दूसरे का घोर विरोध करते हैं, लेकिन मतदान बढ़ाने के लिए मेहनत करते हैं, मतदाता सूची के लिए मेहनत करते हैं, Electronic Machine की training के लिए मेहनत करते हैं, आज समय की मांग है कि आप खुल करके मेरा विरोध करिए, मेरी आलोचना करिए, लेकिन लोगों को Banking सिखाने के लिए काम कीजिए, Electronic पद्धति से पैसे कैसे लिए जाते, दिए जाते ये सिखाइए। हम सब मिल करके देश को भाग्‍य बदलने का एक ऐसा उत्‍तम अवसर आया है, हम सब उसको काम करें। और आप भी फायदा उठाइए। 

मुझे खुशी होगी मेरे विरोधी दल के लोग जन-जन को इस काम में लगा करके अगर राजनीतिक फायदा उठाते हैं तो देश का भला हुआ इसका मुझे आनंद होगा भाइयो। अरे! राजनीति से ऊपर राष्‍ट्रनीति होती है, दल से बड़ा देश होता है; भाइयों बहनों गरीबों पर बातें करना अलग होती हैं; गरीबों के लिए नीतियां बना करके कठोरता से लागू करने के लिए समर्पण का भाव लगता है, और समर्पित भाव से आज ये सरकार आपकी सेवा में लगी है। 

भाइयो, बहनों! मैंने पहले दिन से कहा है, ये निर्णय मामूली नहीं है मेरे भाइयो, बहनों! बहुत मुश्किल भरा निर्णय है, कठिन निर्णय है। और मैंने कहा था बहुत तकलीफ पड़ेगी; मैंने कहा था मुसीबत आएगी, और 50 दिन ये तकलीफ होगी ही होगी। और तकलीफ रोजमर्रा थोड़ी बढ़ती भी जाएगी, लेकिन 50 दिन के बाद मैंने हिसाब-किताब लगाया है, वो एकदम से धीरे-धीरे, धीरे-धीरे करके पहले जैसी स्थिति की तरफ आगे बढ़ेगा। 50 दिन तक ये कठिनाइयां रहने वाली हैं। 50 दिन के बाद आप ही देखेंगे कि धीरे-धीरे-धीरे आपकी आंखों के सामने परिस्थितियां सुधरती नजर आ जाएंगी। 

भाइयो, बहनों! देश भ्रष्‍टाचार से मुक्‍त करने का एक महत्‍वपूर्ण कदम है, और कुछ लोग आपने देखा होगा; इन दिनों सरकार बराबर पीछे लग गई है, बैंक वाले जेल में जा रहे हैं; बड़े-बड़े गठ्ठे ले करके भागे हुए लोग जेल जा रहे हैं; चारों तरफ! उनको लगा था कि ठीक है मोदी जी 1000, 500 के बंद कर देता है, हम पिछले दरवाजे से कुछ कर लेंगे, लेकिन उनको मालूम नहीं था, मोदी ने पिछले दरवाजे पर भी कैमरे लगाए हुए हैं। ये सब के सब पकड़े जाने वाले हैं, कोई बचने वाला नहीं यहां। दो महीना, तीन महीना, छह महीना, जिन्‍होंने भी आठ तारीख के बाद नए पाप किए हैं, वो तो‍ किसी हालत में बचने वाले नहीं हैं भाइयो, बहनों। उनको सजा भुगतनी पड़ेगी। सवा सौ करोड़ देशवासियों के सपनों को चूर-चूर करने का पाप जिन्‍होंने किया है वो बचने वाले नहीं हैं, ये मैं देशवासियों को विश्‍वास दिलाना चाहता हूं। 

भाइयो, बहनों! आपने मुसीबत झेली है, तकलीफ झेली है, अभी भी झेलनी है। आपका आशीर्वाद देश के लिए और जो लोग कहते हैं न ईमानदार लोग लाइन में खड़े हैं, ईमानदार अपने लिए नहीं खड़ा रहता है, वो देश के‍ लिए खड़ा रहता है भाइयो, बहनों; वो देश के लिए खड़ा रहता है। 

और इसलिए, दूसरा! आज जमाना बदल चुका है भाई। एक जमाना था हमारे दादा-दादी, उनसे सुनेंगे तो बताते थे कि हमारे जमाने में तो ‘’चांदी का गाढ़ाना पेड़ा जोड़ो रुपयो होतो एमके आपण ने’’ कि बैलगाड़ी के पहिए जितना बड़ा रुपया चांदी का हम देखते थे, उपयोग करते थे। भाइयो, बहनों! ये चांदी के रुपये से बदलते, बदलते, बदलते कितनी mettle बदल गई, तांबा आया, और आया, न जाने क्‍या क्‍या आया। और धीरे धीरे करके हम कागज में चले गए कि नहीं चले गए? अब याद आता है कि चांदी का रुपया होगा तभी रुपया माना जाएगा याद आता है क्‍या? अब वो रुपया कागज का भी हमारी जिंदगी का हिस्‍सा बन गया। कभी चांदी का रुपया हुआ करता था, धीरे-धीरे कागज का रुपया आ गया। 

भाइयो, बहनों! अब वक्‍त बदल चुका है, अब तो आपके मोबाइल फोन में ही आपका बैंक आ गया है। आपक बटुआ भी आपके मोबाइल फोन में है। आप चाय पीने जाएं, बटन दबाएं, चाय वाले को पैसा पहुंच जाएगा, receipt मिल जाएगी। बीच में लोग cheque देते थे, cheque फाड़ते थे, दो महीने के बाद पता चलता था कि cheque वापिस आया, बाद में केस कोर्ट में है; जो सबसे ज्‍यादा केस चलते हैं, वो cheque वापिस आने के चलते हैं। आप नौजवानों का धन्‍यवाद आपने बहुत बड़ा काम उठाया है, मैं आपको बधाई देता हूं और बनासकंठा जिले को आप ई, ई-बटुआ से जोड़ दीजिए भाइयो। लोगों को E-Mobile Banking से जोड़ने में सफल होंगे मुझे विश्‍वास है। 

भाइयो, बहनों! हम जानते हैं, कि आप वो कागज के नोटों का भी जमाना पूरा होने जा रहा है। अब तो आपके मोबाइल फोन में आपकी बैंक है। एक बार बैंक में जमा हो गया, आपको बैंक में कतार में खड़े रहने की जरूरत नहीं है, आपको एटीएम के बाहर लाइन लगाने की जरूरत नहीं है, आपको टाइम बरबाद करने की जरूरत नहीं है। अखबार में advertisement आता है, TV पर advertisement आता है। आप अपने मोबाइल फोन से, अगर आपके पैसे बैंक में पड़े हैं; तो आप अपने पैसों का जो खरीदना, खरीद सकते हैं। cheque तो bounce होता था, इसमें तो जैसे ही पैसे दोगे, तो सामने receipt आज जाता है, पैसा मिल गया या पैसा पहुंच गया। कोई बाउंस-वाउंस होता ही नहीं, वहीं पर पता चल जाता है कि रुपया गया कि नहीं गया। 

भाइयो, बहनों! हिन्‍दुस्‍तान दुनिया में तेज गति से आगे जाना चाहता है। ये नोटों के बंडलों के ढेर, ये नोटों के पहाड़, हमारे अर्थतंत्र को दबोच रहे हैं। काले धन और भ्रष्‍टाचारियों को वो काम आ रहे हैं। गरीब की ताकत कम हो रही है, जैसे हजार के नोट की कीमत थी, सौ की नहीं थी; अमीर की थी, गरीब की नहीं थी; आज गरीब की भी ताकत बढ़ गई है, सौ के नोट की भी ताकत बढ़ गई है। और अगर आपने ई-बटुआ पढ़ लिया, बैंकों की कतारें खत्‍म करके बैंक को ही अपने मोबाइल में ले गए, आपको बैंक की कतार में जाने की जरूरत नहीं; बैंक आपके मोबाइल की कतार में खड़ी हो जाएगी। मैं आपसे आग्रह करता हूं, मैं देशवासियों से आग्रह करता हूं, मैं मीडिया के मित्रों से विशेष प्रार्थना करता चाहता हूं; मोदी की आलोचना करना आपका हक है, आज जरूर कीजिए। कतार में जो खड़े रहे हैं उनको तकलीफ हो रही है, वो आप दिखाते हैं; मुझे कोई शिकायत नहीं है, लेकिन साथ-साथ आप ये भी सिखाइए कि अब कतार में खड़े रहने की जरूरत नहीं है, बैंक आपके मोबाइल फोन की कतार में खड़ा हो जाएगा। बैंक वाला आएगा कि मुझे आपके यहां रख लो, वो दिन आ सकते हैं, Technology उपलब्‍ध है, व्‍यवस्‍था उपलब्‍ध है, 

भाइयो, बहनों! अब देश भ्रष्‍टाचार सहन नहीं करेगा। अब देश जाली नोट सहन नहीं करेगा। अब देश काला धन सहन नहीं करेगा। गरीबों को लूटने का खेल, मध्‍यम वर्ग को शोषण करने का खेल अब नहीं चलेगा और इसलिए मुझे आपके आशीर्वाद चाहिए। खड़े रह करके दोनों हाथ से तालियां बजा करके मुझे आशीर्वाद दीजिए, मेरे गुजरात के भाइयो, बहनों। मेरे डीसा के भाइयो, बहनों आशीर्वाद दीजिए। पूरे ताकत से आशीर्वाद दीजिए। 

भारत माता की, जय 
भारत माता की, जय 
भारत माता की, जय 

ये लड़ाई, ये लड़ाई भारत का भाग्‍य बदलने की है, ये लड़ाई भ्रष्‍टाचार को खत्‍म करने की है, ये लड़ाई काले धन का खात्‍मा बुलाने के लिए है, ये लड़ाई जाली नोटों से देश को मुक्‍त कराने की है, और उसमें इस बनास की धरती ने मुझे आशीर्वाद दिए, मैं आप सबका बहुत-बहुत आभारी हूं। आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। फिर से बोलिए भारत माता की, जय, पूरी ताकत से बोलिए, पूरा देश सुन रहा है 

भारत माता की, जय 
भारत माता की, जय 

बहुत, बहुत धन्‍यवाद। 

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