विहिप ने सांता द्वारा स्‍कूल के बच्‍चों को चॉकलेट देने पर आपत्ति जताई

विश्‍व हिंदू परिषद् (विहिप) ने छत्‍तीसगढ़ के बस्‍तर जिले में धार्मिक उपयोग के लिए स्‍कूल बसों का प्रयोग करने पर और सांता द्वारा बच्‍चों को चॉकलेट देने पर आपत्ति जताई है। इस संबंध में विश्‍व हिंदू परिषद् के कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे चाहते हैं कि देवी सरस्‍वती की पूजा की जाए और इसकी व्‍यवस्‍था कैथोलिक स्‍कूलों में भी की जाए। किस व्‍यक्ति को किस धर्म का पालन करना है इसकी आजादी हमें संविधान के द्वारा प्रदान की गई है और अगर कोई इसे प्रभावित करता है तो यह स्‍वतंत्रता का उल्‍लंघन होगा।

मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब बस्‍तर जिले में ईसाइयों ने जगदलपुर सूबा बिशप मार जोसेफ कोलामपरम्बिल स्‍कूल में वार्षिक कार्यक्रम के दौरान इस बात की चर्चा की कि किस प्रकार से पोप फ्रांसिस ने केरल से ताल्लुक रखने वाले फादर कुरूयाकोसे एलियास चवारा और सिस्टर यूफरासिया को वेटिकन में संत घोषित किया। उन्‍होंने किस प्रकार से 19वीं शताब्‍दी में शिक्षा का विस्‍तार किया। उन्‍होंने कहा कि ऐसा इसलिए हो सका क्‍योंकि हर स्‍कूल के साथ एक चर्च को जोड़ दिया गया और ऐसा ही कुछ करने की आवश्‍यकता बस्‍तर जिले में है।

इसके बाद विश्‍व हिंदू परिषद् ने इसे सांप्रदायिकता और संक्रीणता से जुड़ा हुआ बताया। उन्‍होंने इस बारे में मुख्‍यमंत्री रमन सिंह को पत्र भी लिखा और उनसे इसे मामले में दखल की मांग की। उन्‍होंने कहा इस प्रकार से गैर ईसाई लोगों पर धर्म के लिए दवाब बनाया जा रहा है। वहीं जगदलपुर जिले के प्रवक्ता और पादरी जनरल अब्राहम कनमपाला का कहना है कि इस बारे में हम विश्‍व हिंदू परिषद् से बात करना चाहते थे और उनके संशय को खत्‍म करना चाहते थे।

इसके बाद 21-22 नवंबर को इस संबंध में बैठक हुई जिसमें 12 बीएचपी कार्यकर्ताओं ने कनमपाला से मुलाकात की और अपनी मांगें रखीं। इनमें से कुछ को मान लिया गया है लेकिन कुछ को मानने से कनमपाला ने इंकार कर दिया।

उन्‍होंने कहा कि हमारी सोच सबको साथ लेकर चलने की है और अगर कोई छात्र फादर की जगह प्रिंसिपल, प्राचार्य, उपप्राचार्य या सर कहकर बुलाना चाहता है तो हमें कोई ऐतराज नहीं है। इसके साथ ही हम देवी सरस्‍वती और महान नेताओं की तस्‍वीर स्‍कूल में लगाने के लिए तैयार हैं। माना जा रहा है कि फादर की पहल के बाद बीएचपी के सुरेश यादव और कनमपाला का संयुक्‍त रूप से कोई बयान आ सकता है।

प्रार्थना सभा की आड़ में चलता है धर्म परिवर्तन का खेल: विहिप

ईसाई मिशनरी लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाते हैं। उनका ज्यादा निशाना हिंदू परिवारों पर होता है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह बात मंगलवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के जिलाध्यक्ष पंडित सुरेश शर्मा, प्रांत संपर्क प्रमुख कमलजीत सेतिया व धर्म जागरण समन्वय विभाग के विभाग प्रमुख संजीव तलवाड़ ने संयुक्त रूप से कही।

तीनों नेताओं ने दावा किया प्रार्थना सभा की आड़ में ईसाई मिशनरी धर्म परिवर्तन की चाल चलती हैं। इनके झांसे में आए 2306 परिवारों की कुछ समय पहले घर वापसी करवाई गई है। ये परिवार लालच और बहकावे में आकर धर्म परिवर्तन कर बैठे थे। ज्यादा निशाना गुरदासपुर के सीमा के साथ सटे गांवों को बनाया जा रहा है। इन नेताओं ने दावा किया कि विदेशी ताकतों के हाथों में खेलते हुए धर्म परिवर्तन का हथकंडा अपनाकर हिंदू समाज को बांटने की नापाक कोशिश की जाती है। साथ ही सवाल किया की कि जो लोग खुद को आज ईसाई कहते फिर रहे हैं, वह ही बताएं कि उनका पिछोकड़ क्या था? उन्होंने आह्वान किया कि हिंदू समाज इनकी चालों में न आए। क्योंकि यह सब्जबाग दिखाकर परिवारों को बांट कर उन्हें लड़ाने की साजिश रचते हैं।

29 अक्टूबर को रोशन ग्राउंड में आयोजित की गई मसीही सत्संग को विफल बनाने का उन्होंने तमाम हिंदू संगठनों का तहेदिल से धन्यवाद किया। ईसाई प्रतिनिधि दावा कर रहे थे कि मसीही सत्संग में 25 हजार संगत पहुंचेगी, लेकिन पंडाल में उपस्थिति 1500 से भी कम थी। इस मौके पर नगेंद्र गुप्ता, बलजीत राजा, सौरव इत्यादि मौजूद थे।

विहिप नेता कमलजीत सेतिया ने कहा कि ईसाई समागमों में योजनाबद्ध ढंग से लोगों को बहकाया जाता है। योजना के तहत समागम में इनके ही व्यक्ति उठते हैं और दावा करते हैं कि ईसाई बनने पर उन्हें सुख शांति मिली है। प्रार्थना से उनकी बीमारी ठीक हो गई। जबकि असलियत में यह सब धर्म परिवर्तन करवाने के लिए लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि रोशन ग्राउंड में आयोजित मसीही सत्संग की वीडियोग्राफी प्रशासन से हासिल करके देखी जाएगी, अगर कहीं पर कुछ गलत पाए जाने पर शिकायत भी होगी।

चंगाई सभा के पोस्टर बांटने को लेकर भाजपा और ईसाई समुदाय में विवाद

जालंधर की बस्ती दानिशमंदां में आज दोपहर उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब चंगाई सभा के पोस्टर लगाने आए युवकों को भाजपा नेता शीतल अंगुराल ने विरोध करते हुए रोक दिया. उन्होंने बतया की  क्षेत्र में कुछ ईसाई समुदाय के युवक चंगाई सभा के पोस्टर लगा रहे हैं. जिसके बाद वह मौके पर पहुंचे तो देखा कि वे युवक बस्ती दानिशमंदां अड्डे के निकट एक कालेज के बाहर खड़े होकर पम्फलैट बांट रहे थे.यह देखकर शीतल अंगुराल तथा अन्यों ने थाना नंण् 5 की पुलिस को सूचित किया तथा पम्फलैट बांट रहे युवकों को वहीं बैठा लिया इस दौरान उक्त युवकों ने फोन कर अपने साथियों को सूचित कर दिया जिसके बाद उनके करीब 50 से अधिक साथी मौके पर पहुंचे तथा बस्ती दानिशमंदां के बाबू जगजीवन राम चौक के निकट इकट्ठा हो गए.

गुस्साए लोगों ने पुलिस की मौजूदगी में पथराव करते हुए चौराहे पर कब्जा करते हुए बिजली का खंभा तोड़ डाला तथा शराब के ठेके पर भी तोड़फोड़ की. हालांकि बाद में पुलिस दल की संख्या बढ़ते देखकर ईसाई समुदाय के लोगों ने नारे लगाते हुए भाजपा नेता शीतल अंगुराल तथा साथियों पर मामला दर्ज करने की मांग की.

वहीं पुलिस अधिकारियों एण्डीण्सीण्पीण् सिटी.1 नरेश डोगराए परमिंदर सिंह भंडालए एण्सीण्पीण् सोमनाथए र¨वदरपाल सिंह संधूए जसबीर सिंह रायए थाना नंण् 5 के प्रभारी राजिंदर कुमारए थाना भार्गव कैंप के बरजिंदर सिंह तथा बस्ती बावा खेल के प्रभारी गुरप्रीत सिंह ने बातचीत करने के बाद उन्हें यकीन दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी तथा जो भी तथ्य सामने आएंगे उन्हीं के आधार पर कार्रवाई की जाएगी.शीतल अंगुराल व साथियों पर हो मामला दर्ज रू वहीं पास्टर यूनिसए पास्टर तुलसीए सहरीजाए सूरज मसीह पूर्व सरपंच खांबरा आदि ने आरोप लगाया कि शीतल अंगुराल तथा उसके साथी उनके धर्म का विरोध करते आ रहे हैं. इतना ही नहीं कई बार वे उनके धाद्दमक कार्यक्रमों में खलल भी डाल चुके हैं. आज भी उनके लोगों को बंधक बनाया गया था जिसके बाद उनके लोग गुस्सा हो गए थे. उन्होंने मांग की कि उनकी धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले लोगों पर मामला दर्ज किया जाए.

11 ईसाईयों ने पुन: हिन्दू धर्म अपनाया

वर्षो पहले हिन्दु धर्म को छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने वाले छह परिवार के 11 सदस्य वापस हिन्दु धर्म को अपना लिया है। उनके स्वधर्म वापसी को लेकर बजरंग दल की ओर से यहां विश्वशांति धर्मरक्षा यज्ञ का आयोजन किया गया और उनके हिन्दु धर्म में वापसी का स्वागत किया गया।

रविवार के दिन, विश्वशांति यज्ञ से पूर्व भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। महानदी के मारवाड़ी घाट से निकली यह शोभायात्रा नगर परिक्रमा करते हुए गंगाधर मंडप पहुंची, जहां यज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर, बिहार के लखीसराय से आए विश्व हिन्दु परिषद के संत भरत दास रामायणी महाराज ने हिन्दु धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसके महत्व के बारे में बताया और वापस हिन्दु धर्म में लौटने वाले परिवारों को संस्कृति दीक्षा दी। 

क्षेत्रीय धर्म प्रचार प्रमुख अच्युतानंद कर ने हिन्दु धर्म को धर्मातरीकरण से बचाए जाने पर जोर दिया। इस कार्यक्रम का संचालन बजरंग दल के प्रांतीय प्रमुख सुधीर रंजन बहिदार ने और यक्ष कार्य का संचालन चंद्रकांत पाणिग्राही ने किया। इस अवसर पर, विश्व हिन्दु परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष प्रदीप बहिदार, संगठन सचिव शरत प्रधान, आनंद प्रधान, विपिन गड़नायक, बुलू महापात्र, मुन्ना मुंडा, संतोष राउत, हेमंत मेहेर, विश्वनाथ पंडा एवं अन्य उपस्थित रहे।

नगमा और जॉनी लिवर कर रहे ईसाइत का प्रचार विहिप छेड़ेगा आन्दोलन


विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने बॉलीवुड अभिनेत्री नगमा और जॉनी लिवर के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की धमकी दी है। दोनों दलों का आरोप है कि ये दोनों ईसाइत का प्रचार कर रहे हैं तथा हिंदुओं का धर्मातरण कर रहे हैं।

वीएचपी नेता उमेश राणे ने आरोप लगाया कि बेस्ट की बसों व मुंबई रेलवे स्टेशन पर बड़े-बड़े होर्डिग लगे हैं। इनमें जॉली लिवर व नगमा के फोटो लगे हैं जिनमें वे ईसाइत का प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर वे जल्दी ही यह विज्ञापन नहीं रूकवाते हैं तो इन दोनों के घरों के बाहर हवन व आरती की जाएगी। एक न्यूज चैनल ने राणे के हवाले से कहा कि नगमा व जॉनी ख्रिश्चन मिशनरीज के साथ मिलकर काम कर रहे हैं तथा हिंदुओं का धर्मातरण करवा रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि १८ कहानियों वाली एक किताब में दोनों एक्टर्स को यह कहते हुए दिखाया गया है कि ईसाई बनने के बाद से उनका जीवन ही बदल गया। अगर वे इसे नहीं रोकते हैं तो हम उन्हें पाठ पढ़ाएंगे।

हिंदू के लिए पूजा करना जरूरी नहीं: मद्रास हाई कोर्ट

मद्रास हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि किसी मंदिर में प्रार्थना नहीं करने के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि कोई व्यक्ति हिंदू नहीं है.

जस्टिस एन पॉल वसंतकुमार और के रविचंद्रबाबू की खंडपीठ ने एक दलित पंचायत अध्यक्ष को सामुदायिक प्रमाण पत्र को रद्द किए जाने संबंधी आदेश को खत्म करते हुए यह टिप्पणी की.

यह मामला पंचायत अध्यक्ष वासीकरण से जुड़ा था जिन्होंने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था. वासीकरण पर आरोप लगा था कि वह हिंदू नहीं थे क्योंकि उनके घर मंदिर तो था, लेकिन प्रार्थना नहीं होती थी.

पेरू निवासी युवक दाह संस्कार की रस्म से प्रभावित होकर हिन्दू बना

सात समंदर पार दक्षिण अमेरिका के पेरू निवासी एक ड्रम प्लेयर ने दाह संस्कार की रस्म से प्रभावित होकर हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया है।

काशी आकर उसने तीर्थ पुरोहित की मदद से बृहस्पतिवार सुबह गंगा तट पर अपने पिता और चाचा की अस्थियां विसर्जित की। साथ ही सविधि कर्मकांड भी किया। उसकी मानें तो मोक्ष के लिए जल्द ही उसके वतन के और लोग भी इस संस्कृति से जुड़ सकते हैं। इससे पहले वह ईसाई था।

पेरू के लिमा शहर निवासी सेरजियो विल्लाविसेन्सियो के हिंदू संस्कृति से प्रभावित होने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। वह 2010 में वाराणसी घूमने आया तो जीवन में पहली बार मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट पर शवों को चिताओं पर रखकर जलाते देख कौतूहल से भर गया था।

इसके बाद सेरजियो ने अंतिम संस्कार की इस भारतीय परंपरा को समझने के लिए हिंदू आचार्यों की भी मदद ली।

वतन जाने के बाद जब उसके पिता हिपोलिटो विल्लाविसेन्सियो का निधन हुआ, तब मां लूरदेच और अन्य रिश्तेदारों, पड़ोसियों की तमाम जिद के बाद भी सेरजियो ने अपने पिता के शव को दफनाने नहीं दिया।

उसकी पत्नी निकोल जो अमेरिकन कहानीकार है, वह भी अपने श्वसुर को दफनाने के ही पक्ष में थी। फिर भी सेरजियो ने पेरू में हिंदू प्राइस्ट (पुजारी) की तलाश की और हिंदू रीति के अनुसार अपने पिता के शव को चिता पर जलाया। मुंह में सोना, तुलसी डालने की भी रस्म पूरी की गई थी।

चिता पर शव रखने से पहले स्नान कराने के बाद घी का लेप भी कराया गया था। इसके बाद उसके चाचा अलजेंद्रो ओरे का निधन हुआ तब उनका भी उसने दाह संस्कार किया लेकिन इतना विधि-विधान नहीं हो सका था। पिता और चाचा की अस्थियां चुनकर घर में रख ली थी।

बृहस्पतिवार को सेरजियो ने अपने पिता और चाचा की अस्थियां गंगा में विसर्जित की। तुलसी घाट से लगे भदैनी पंप घाट पर उसने अस्थियों के विसर्जन के बाद श्राद्ध और पिंडदान कर अपने पुरखों के मोक्ष की रस्म भी पूरी कर ली।

सेरजियो ने अमर उजाला को बताया कि पूर्वजों को दफनाने की ही परंपरा थी लेकिन जब वह अपने पिता के शव को चिता पर मुखाग्नि दे रहा था तब वह दृश्य देखने के लिए न सिर्फ तमाम लोग पहुंचे बल्कि इस प्रक्रिया के बारे में जानकारी भी ली।

उसे उम्मीद है कि अंतिम संस्कार की इस परंपरा का और लोग भी वहां जल्द ही अनुकरण कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के 19 परिवारों के 109 लोग ईसाई से पुनः हिंदू बने

छत्तीसगढ़ में ग्राम पंचायत जामजुनवानी के गांव नवराटिकरा के जनजातीय परिवारों ने युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से भटकते देख फिर से अपने पुरखों का धर्म अपना लिया। गांव के 19 परिवारों के 109 लोग ईसाई से हिंदू बन गए। स्थानीय लोग बताते हैं कि यहां के वनवासियों को प्रलोभन देकर वर्षों पहले उनका धर्मांतरण कराया गया था। इस कारण आदिवासियों की प्राचीन संस्कृति विलुप्त होने के कगार पर है और युवा पीढ़ी पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है।

गांव नरवाटिकरा में 'जात भीतर' कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें पूर्व अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री गणेश राम भगत भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि वनवासियों का धर्मांतरण रोकने के लिए सभी को अपनी भागीदारी निभाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वनवासियों का धर्मांतरण होने के बाद इस वर्ग के युवक जघन्य अपराधों की ओर प्रेरित होने लगे हैं। विकास की राह से भटकने वाले इन युवकों को अच्छे रास्ते पर ले जाने के लिए जात भीतर कार्यक्रम आदिवासियों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

भगत ने ग्राम नरवाटिकरा में 19 परिवार के 109 लोगों को उनके मूल धर्म हिंदू में वापसी कराई। यहां के सरना स्थल में एकत्रित ग्रामवासियों ने अपने धर्मांतरण को लेकर पश्चाताप किया। इस कार्यक्रम में हिंदू धर्म में वापसी करने वाला परिवार कोरोंजो एक्का, कपील एक्का, संजय लकड़ा व बीरबल मिंज का कहना था कि उनके पुरखों ने धर्मांतरण कर लिया था, दूसरे धर्म में रहकर वे घुटन और अकेलापन महसूस कर रहे थे

जुलू राम का कहना था कि हिंदू धर्म से भटकने के बाद उनकी युवा पीढ़ी अपराध की दुनिया में भटक गई थी। अपने प्राचीन त्योहार और समाज के रीति रिवाजों से दूर चले जाने का उन्हें बेहद अफसोस है, इसलिए उन्होंने हिंदू धर्म में लौटने का फैसला किया है। जात भीतर कार्यक्रम होने से पूरे गांव में उत्साह का माहौल है। पुराने हिंदू परिवार के लोगों ने इन्हें एक दिन पहले सरना स्थल पर बैठाकर उन्हें हिंदू धर्म अपनाने का संकल्प दिलाया था। इसके बाद गांव में जनसभा का भी आयोजन किया गया।

पूर्व मंत्री भगत ने जनसभा में कहा कि जब भी मनुष्य अपनी भूल को समझ लेता है, उसी दिन से उसका नया सबेरा शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा कि नरवाटिकरा के लोगों ने पाश्चात्य संस्कृति को छोड़ने का जो साहस दिखाया है, इससे अन्य सैकड़ों लोगों को भी विकास की मुख्य धारा से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।

भगत ने कहा, 'हम लोग अपने दिवंगत नेता दिलीप सिंह जूदेव के दिखाए मार्ग पर चलकर उनके सपनों को साकार करने का प्रयास कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि जूदेव ने भी 'आपरेशन घर वापसी' कार्यक्रम चलाकर हजारों वनवासियों को नया रास्ता दिखाया था। जनसभा में जशपुर के प्रमुख हिंदू नेता रामप्रकाश पांडेय, सत्यप्रकाश तिवारी, डॉ.आजाद, रम्मू शर्मा, बिशु शर्मा, रोशन साय पैंकरा, बलदेव जोशी सहित वनवासी कल्याण आश्रम के कई प्रमुख लोग उपस्थित थे।

धर्म परिवर्तन कर बने ईसाई, फिर मुसीबत आने पर भागे शनिदेव की शरण में

डॉ. यासीन अतीत में हिंदू परिवार से रहे हैं और उसका वास्ता अमृतसर से है। बंटवारे के बाद परिवार इधर-उधर हो गए। इनके बुजुर्गों ने बाद में ईसाई धर्म अपना लिया, बावजूद इसके ये लोग इस्लाम के साथ हिंदू और सिख सभी धर्मों का आदर करते हैं।

डॉ. यासीन ने बताया कि वह अस्पताल चला कर लोगों की सेवा करते हैं। विगत में पाकिस्तान सरकार ने उनकी एनजीओ 'चाइना मेडिकेयर वेल्फेयर हेल्थ सेंटर' को अस्पताल, वृद्ध आश्रम और अनाथ आश्रम खोलने के लिए 34 कनाल जगह भी उपलब्ध कराई है। 

दूसरी बार भारत आए यासीन ने बताया कि वह काफी दिन से परेशान थे, परिवार में कलह के अलावा मियां-बीवी में भी अक्सर तकरार होती रहती है। वहां पर एक पंडित के पास गए तो उसने शनि की नाराजगी की बात बताई, और कहा कि आप जो कुछ करते अथवा करना चाहते हैं उसका उलट होता है। बात-बात पर गुस्सा आता है। मियां-बीवी में न चाहते हुए भी अक्सर झगड़ा हो जाता है। यह सब शनि की उग्र दृष्टि के कारण हो रहा है, इसकी पूजा करवाएं सब ठीक हो जाएगा'  मगर वहां पर इसकी पूजा की कोई व्यवस्था नहीं है।और फिर डॉ. यासीन जिया और उनकी बीवी डॉ. रोजी जिया सरहद पार आ गए शनि की पूजा करवाने। 

यहां आकर वह दरबार साहिब, दुग्र्याणा तीर्थ और चर्च भी गए। इसके बाद दरबार साहिब के पास स्थित बड़े शनि मंदिर में भी माथा टेका। इस दौरान वह लोग अपने यहां खोले जाने वाले आश्रमों की जानकारी लेने के लिए पिंगलवाड़ा और यतीम खाना भी गए। 

इसके बाद ननकाना साहिब सिख यात्री जत्था के प्रधान स्वर्ण सिंह गिल के नेतृत्व में छेहर्टा स्थित इंडस्ट्रियल एरिया स्थित शिव मंदिर में इस दंपती ने शनि देव की पूजा की। यहां पं. राम परवेश मिश्रा ने पूरे विधि विधान के साथ पूजा करवाई और सिरोपा डाल कर सम्मानित भी किया। डॉ. रोजी ने बताया कि वापसी पर वह यहां से शनि देव की प्रतिमा भी ले जाएंगे और वहां पर दोनों मुल्कों और परिवार की बेहतरी के लिए पूजा किया करेंगे। 

ईसाई धर्म प्रचारक ने हिन्दू धर्म अपनाया

धर्म परिवर्तन को लेकर सुर्खियों में आए हरियाणा के अलेवा गांव में रविवार को फिर से ग्रामीणों की बैठक हुई। बैठक में आर्य समाज के प्रदेश उप प्रधान ओपी सिंह व आचार्य राजेंद्र सिंह ने शिरकत की। बैठक में धर्म परिवर्तन किए गए लोगों के लिए यज्ञ का आयोजन किया गया। इस दौरान फिर से हिदू धर्म में शामिल होने वाले लोगों ने ग्रामीणों को विश्वास दिलाया कि वे हिन्दू ही रहेगे। इस दौरान ईसाई धर्म प्रचारक सत्यवान ने दोबारा से हिंदू धर्म अपनाया।

गत दिनों गाव अलेवा उस समय सुर्खियों में आ गया था, जब तीन दर्जन से अधिक परिवारों ने गाव अलेवा निवासी सत्यवान के घर पर होने वाले ईसाई सत्संग में धर्म परिवर्तन कर लिया था, लेकिन एक दिन बाद ही धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों ने फिर से हिदू धर्म कबूल कर लिया। लोगों ने आरोप लगाया कि वह संदिग्ध लोगों के बहकावे में आ गए थे और उन्हीं के कहे पर धर्म परिवर्तन कर लिया था।

रविवार को आर्य समाज के प्रतिनिधियों व गण्यमान्य लोगों की मौजूदगी में गाव की वाल्मीकि चौपाल प्रांगण में यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ के दौरान फिर से हिदू धर्म में शामिल हुए लोगों ने आहुति डाली व भगवान महर्षि वाल्मीकि के चित्र के सामने खड़ा होकर ईसाई धर्म कबूल करने के लिए क्षमा याचना की। ईसाई धर्म प्रचारक अलेवा निवासी सत्यवान ने कहा कि वह सदा से हिदू थे और हिदू ही रहेंगे। 

पंचायत के दौरान वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने अज्ञानतावश जो हिंदू धर्म से ईसाई धर्म के प्रचार में हिस्सा लिया था, अब वे दोबारा से बिरादरी के लोगों के बीच हिंदू धर्म को अपनाकर स्वयं महर्षि वाल्मीकि के चित्र के समक्ष क्षमा याचना की। इस मौके पर सरपंच बलबीर चहल, युवा इनेलो नेता सुरजीत अलेवा, लाला घनश्याम आदि उपस्थित रहे।

ईसाई बने हिन्दुओं के पुनः हिन्दू धर्म में वापसी का विरोध कर रहा चर्च


ईसाई बने वाल्मीकि समुदाय के लोगों के दोबारा हिंदू धर्म में वापसी को लेकर हिंदू व ईसाई संगठनों में ठन गई है। हिंदू संगठन जहां चंगाई सभा का विरोध करते थे, वहीं अब ईसाई घर वापसी समारोहों का विरोध कर रहे हैं। गांव शाहपुर में हुए समारोह को लेकर ईसाई समुदाय के लोग ज्यादा विरोध में हैं। इसी विरोध के चलते ईसाई समुदाय के लोगों ने विभिन्न जिलों की तरफ मंगलवार को गुरदासपुर के जिलाधीश डा. अभिनव त्रिखा को ज्ञापन सौंपा।

गौरतलब है कि धर्मातरण को लेकर ईसाई व हिंदू संगठनों में काफी समय से जद्दोजहद चल रही है। राज्य में वाल्मीकि समुदाय के लोगों की काफी संख्या है जिन्होंने आजादी से पहले से बाद तक ईसाई समुदाय को अपनाया। हिंदू संगठन वाल्मीकि समुदाय सहित सिख समुदाय के उन लोगों को दोबारा उनके धर्म में लाने की कोशिश कर रहा है। इस काम में गत दिनों हिंदू संगठनों को भारी सफलता मिली है। धर्मातरण को लेकर ईसाई व हिंदू संगठनों में रस्साकशी-सा मुकाबला है।

गांव शाहपुर (दसूहा) में गत दिनों हुए वाल्मीकि समागम ने तो दोनों गुटों में तकरार बढ़ा दी है। ईसाई समुदाय के लोग मुख्यमंत्री व अल्पसंख्यक आयोग को पत्र लिख कर हिंदू संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

ईसाई संगठन मायनोरिटी मोर्चा के जिला प्रधान स्टीफन मसीह, उपप्रधान मजीद मसीह व आल इंडिया मसीह दल के अल्बर्ट गिल ने कहा कि शाहपुर समारोह में ईसाई समुदाय व मिशनरियों के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। ईसाई बन चुके वाल्मीकि समुदाय के लोगों को एससी सर्टीफिकेट बनाने सहित कई सुविधाओं का लालच देकर हिंदू बनाया जा रहा है। इस समारोह में सरकारी तंत्र ने हिंदू संगठनों का पूरा सहयोग किया। पंजाब में हिंदू संगठनों की कार्रवाई के कारण अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय सहमा हुआ है। ईसाई धर्म के खिलाफ गहरी साजिश रची जा रही है जिसके संबंध में सरकार को बनती कार्रवाई करनी चाहिए।

इस संबंध में धर्म जागरण मंच के पंजाब प्रमुख राम गोपाल का कहना है कि किसी धर्मातरित व्यक्ति को उसके मूल धर्म में वापस आने को बाधित नहीं किया गया। वाल्मीकि लोगों ने खुद इच्छा जताई कि वे हिंदू धर्म में वापसी चाहते हैं। उन्होंने इस बात को सार्वजनिक किया कि ईसाई मिशनरियों के बहकावे में वह क्रिश्चियन बने थे। वाल्मीकि लोगों की मूल धर्म में वापसी को लेकर ईसाई बौखलाए हुए हैं। एक गांव में 43 वाल्मीकि परिवारों में से 38 ने मूल हिंदू धर्म में वापसी की। लोग स्वेच्छा से मूल धर्म में वापसी कर रहे हैं। ईसाई मिशनरियों का मायाजाल खत्म हो रहा है जिस कारण वे हिंदू संगठनों के खिलाफ गलत ब्यानबाजी कर रहे हैं और अल्पसंख्यक होने की दुहाई दे रहे हैं।

क्रिसमस पर संघ ने हिन्दू से ईसाई बने 2000 हिन्दूओं की धर्मवापसी कराई


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आगरा में हिन्दू से ईसाई बने 2000 हिन्दू परिवारों की वापसी हिन्दू धर्म में कराई। इस संबंध में आर.एस.एस. ने ईसाई मिशनरी के धर्म परिवर्तन अभियान को एक खास रणनीति के तहत जवाब दिया और आर.एस.एस. ने इस कार्यक्रम के लिए क्रिसमस का दिन ही चुना जिसकी ईसाई समुदाय को भनक तक नहीं लगी।

 इस सम्बन्ध में आगरा के कोठी मीना बाजार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तरफ  से एक वृहद स्तर के कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें आगरा ही नहीं बल्कि आस-पास के जिलों के तकरीबन 2000 से ज्यादा हिन्दू से ईसाई बने परिवारों के लोगों ने दुबारा हिन्दू धर्म में वापसी की।

गौरतलब है कि इस सम्बन्ध में धर्म रक्षा समिति काफी समय से हिन्दू से ईसाई बने परिवारों की घर वापसी के प्रयास में जुटी हुई थी। आर.एस.एस. सूत्रों का कहना था कि हिन्दू से ईसाई बने लोग आवल खेडा, अलीगढ़, हाथरस व एटा जिले के हैं, जहां पर धर्मांतरण की गतिविधियां तेजी से चल रही थीं। इस दौरान आयोजकों ने बताया कि हिन्दू धर्म में वापसी करने वाले लोगों की पहचान गोपनीय रखी गई हैं। इस मौके पर एक वाल्मीकि सम्मलेन का भी आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता आगरा के महापौर इन्द्रजीत वाल्मीकि ने की।

Another Expose of the true color of the Church


Here is yet another expose of the true color of the church. It is one of the innocent church followers who became the victim of this financial fraud of gigantic proportions exposed by this shocking story.

An old lady from Erumeli is the victim in this episode. After finding no support from any quarters, she chose to give advertisements through the print media to tell the world about her experiences. She wants to warn other potential victims who could fall in to similar traps.

In her notifications she says that her land property worth Rs 25 crores was taken away from her. Her husband is bedridden and is unable to speak. And also the couple doesn't have kids. She says that, years ago when she was unwell, she had some visions of Christ and Mother mary. Some priests approached her to make testimonies to this effect in front of a crowd. As she was declaring her testimony, before even she could complete her words, one of the priests declared in front of the frenzied crowd that she has agreed to donate all her wealth for the prayer group. At this moment of mass hysteria and hypnotic atmosphere on the stage, she could not oppose this declaration which was made without her consent.

Later the priests made her believe that, if they, an issue-less couple donates their land to the prayer group, her husband will get back his speech. Thus they could trap this old lady and confiscate her land worth Rs 25 crores. She says that she is planning for a hunger strike in front of the homes of senior church leaders like Cardinals. She compares her experience to that of victims who gets robbed when they are drunk. She says, "My wealth was looted by priests from the prayer center while I was in a drunken state caused by my devotion"

In her advertisements she calls upon the readers to spread the news to make other potential victims aware. You can read the full story in Malayalam in the following link

http://almayasabdam.blogspot.in/2012/11/blog-post_21.html

65 yr old Pastor from Church arrested for Rape & Molestation of Minors


A 65-year-old clergyman in Meghalaya, who was accused of rape, molestation,  exploitation against minors, was remanded to five days police custody and 14 days judicial  custody by a local court.

Sang Kunga Miller of the New Life Church was presented before First Class Judicial Magistrate  K.M. Lyngdoh Nongbri at the end of his ten days police custody.

“The court of the first class judicial magistrate has remanded Miller to five days police  custody and 14 days judicial custody and also rejected his bail applications,” Public  Prosecutor I.C. Jha told journalists.

He said the police custody was in relation to the molestation charge while the judicial  custody was related to the rape charge. 

Both the custodies will run concurrently, Jha added. On Sept 28, Meghalaya police arrested the Clergy man on charges of rape, molestation,  exploitation against minors in the hostel run by him known as the New Life Home based on the  complaints lodged by Agnes Kharshiing, the president of Civil Society Women’s Organisation.

एकता कपूर ने फिल्म में प्रीस्ट को दो कुत्तों की शादी करते दिखाया, मामला दर्ज


हमेशा विवादों में घिरी रहने वाली टीवी डेली सोप क्वीन एकता कपूर से ईसाई धर्म के लोग काफी नाराज हैं और बडे प्रदर्शन के बाद उन्होंने एकता के खिलाफ मामला भी दर्ज करा दिया है। यह विवाद एकता की हाल ही रिलीज हुई फिल्म क्या सुपर कूल हैं हम के एक सीन को लेकर है जिसमें एक प्रीस्ट को दो कुत्तों की शादी करते हुए दिखाया गया है। 

इससे ईसाई धर्म के लोगों की भावनाओं को काफी ठेस पहुंची जिसके चलते कम्युनिटी के लोगों ने एकता के खिलाफ माहिम पुलिस स्टेशन (मुंबई) में मामला दर्ज करा दिया है। कम्युनिटी के लोग केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी से भी मिले और उन्हें पूरा मामला बताया कि किस तरह फिल्म के कुछ दृश्यों से ईसाई धर्म के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। अंबिका ने उन्हें आश्वासन दिया कि इसकी जांच कराई जाएगी तथा कार्रवाई की जाएगी। कम्युनिटी के लोगों ने पुलिस में सात अगस्त को किसी धर्म या जाति के लोगों के विचार का मजाक उडाने को लेकर रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। 

कैथोलिक सेक्युलर फोरम हेड जोजफ डायस ने बताया कि कम्युनिटी के लोगों ने इससे पहले गोवा विधानसभा में इस मुद्दे को रखा था। यह ऎसा मुद्दा है जिसे हम सेंसर बोर्ड में भी पेश करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हम इस बात से हैरान हैं कि एकता कपूर खुद एक धार्मिक व्यक्ति हैं तो वे इस तरह से किसी धर्म का मजाक कैसे उडा सकती हैं। गौरतलब है इससे पहले भी ईसाई धर्म के लोग साउथ फिल्म फादर सन एंड होली स्पिरिट का भी विरोध कर चुके हैं। यह फिल्म समलैंगिक रिश्तों पर आधारित थी। बहरहाल अब देखना यह है कि एकता इस मामले को कैसे सुलझाएंगी या वे जेल की सलाखों के पीछे जाएंगी।

एक नन की आत्मकथा : चर्च में आध्यात्मिकता के बजाय वासना

केरल के कैथोलिक चर्च की एक पूर्व नन ने पादरियों और ननों के व्यभिचार का जिक्र अपनी आत्मकथा में किया है। इसके अलावा गर्भ में ही बच्चों को मार देने की बढ़ती प्रवृत्ति का भी उल्लेख है। इससे हंगामा खड़ा हो गया है। 

चर्च में होने वाले अनैतिक कृत्यों से परेशान सिस्टर मैरी चांडी ने 12 साल पहले कान्वेंट छोड़ दिया था। उनकी आत्मकथा 'ननमा निरंजवले स्वस्ति' औपचारिक रिलीज से पहले ही विवादित हो चुकी है। 

उन्होंने इसमें चर्च और उनके शिक्षण संस्थानों में व्याप्त 'अंधेरे' को उजागर करने की कोशिश की है। सिस्टर मैरी ने कहा, 'मैंने वायनाड गिरिजाघर में हासिल अनुभवों को सहेजने की कोशिश की है। चर्च के भीतर की जिंदगी आध्यात्मिकता के बजाय वासना से भरी थी। 

एक पादरी ने मेरे साथ बलात्कार की कोशिश की थी। मैंने उस पर स्टूल चलाकर इज्जत बचाई थी।' 

केरल के कैथोलिक समुदाय को झकझोर कर रखने वाली यह पहली किताब नहीं है। कुछ समय पहले चर्च की ही एक अन्य नन सिस्टर जेस्मी की पुस्तक 'आमेन: द आटोबायोग्राफी आफ ए नन' ने भी कॉन्वेंट में ढाए जा रहे जुल्मों को सामने लाने का काम किया था

उत्तरप्रदेश में क्रिसमस के दिन 600 आदिवासियों का धर्मपरिवर्तन हुआ

क्रिसमस के दिन फरेंदा विकास खंड के ग्राम जंगल जोगिया बारी और मथुरानगर में अनुसूचित जाति [कंजड़] बस्ती के 600 लोगों के ईसाई धर्म स्वीकार करने के मामला प्रकाश में आया है।सोमवार को इस बस्ती में गहमागहमी रही। एलआईयू ने पादरी दंपती से पूछताछ की।

हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोगों ने कंजड़ बस्ती व विवादित चर्च का दौरा किया। इस बीच कंजड़ों को पुन: हिंदू धर्म में शामिल करने का दबाव बढ़ा है।सोमवार को पूरे दिन कंजड़ बस्ती में हिंदूवादी संगठनों का तांता लगा रहा।

आरएसएस के धर्म जागरण समन्वय विभाग के प्रमुख शिवमूर्ति, हिंदू जागरण मंच के प्रमुख संजीव और धर्म जागरण समन्वय विभाग के प्रांतीय संयोजक प्रभाकर पटेल सहित कई पदाधिकारियों ने कंजड़ों के घर जा कर उन्हें समझाने-मनाने का प्रयास किया।

उन्होंने कंजड़ बस्ती के समीप बन रहे चर्च का भी निरीक्षण किया।तहसीलदार व जांच अधिकारी अभय कुमार पांडेय का कहना है कि कंजड़ों को यह नहीं मालूम था कि वह क्रिसमस का पर्व मना रहे हैं। शीघ्र ही जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी जाएगी।

Christian anti-trafficking NGO separates 'sex worker' mother from baby

A family of devadasis that is trying to lead a life of dignity making quilts and papad; an overzealous, Christian anti-trafficking NGO desperate to justify its funding with some ‘results’; and a bunch of local cops in awe of white skin.

Put them all together and you have the absurd tragedy of a two-year-old baby brutally torn away from her mother and kept in a children’s remand home for nine days, probably traumatising the infant for life, and leaving the mother in shock.

On November 4, 2011, in the Gokulnagar neighbourhood of Sangli town, about 350km south of Mumbai, a group of policemen accompanied by an identified ‘gora’ barged into the home of Kasturi Talagedi, 59, and took away her two-year-old granddaughter, Gaurauva, and her 21-year-old speech-impaired niece, Savitri.

They had already made up their minds that Savitri was a sex worker and that Gaurauva was her illegitimate daughter. This was their idea of an anti-trafficking operation. By the time Gaurauva’s mother and Kasturi’s daughter, Geeta, 26, came to know what was going on, it was too late — her baby was gone.

Kasturi, who lives next door to Geeta. recounts the nightmare. “My granddaughter Gaurauva was playing with my niece Savitri when the police came with a gora. He pointed at my niece, and without asking me anything, the police dragged her out of the house. They said she was a minor and I’d forced her into prostitution.” Kasturi’s pleas that her niece was 21 fell on deaf ears. “They took the baby too, insisting she was Savitri’s daughter.”

While a speech-impaired Savitri could only whimper, Geeta, who heard the commotion, rushed out of her house begging for her baby. “Seeing a crowd gather, they let me into the police vehicle, but I was pushed out midway and they sped off,” says Geeta.

Kasturi and and Geeta then approached Sangram, an NGO which works with vulnerable women in the area of HIV/AIDS prevention/treatment. Sangram’s Meena Seshu speaks bitterly about the insensitivity of the police.

“They got a sign language expert from Miraj town, who insisted that Gaurauva was Savitri’s daughter. The police kept parroting this, though a medical examination established that Savitri had never ever conceived,” she says.

Only when they took the matter to the local court did the police relent, nine days later. “Because of all this, the baby was deprived of mother’s milk. I could feel her ribs when they released her,” says Geeta.

When contacted by DNA, Sangli Additional Superintendent of Police Digambar Pradhan, who conducted the raid, admitted that an American working with an international anti-trafficking group had accompanied the police team, but refused to divulge the name of either the American or his organisation. “It is our duty to respond to any complaint of trafficking in minors and take action,” he said.

But how can the police just take away any random woman’s baby based on some NGO’s complaint, without any evidence of trafficking?

Admitting to the goof-up, Pradhan says, “We were very vigilant because we didn’t want the child to be with the wrong person.”

Seshu points out that many faith-based American organisations that are flush with donations obtained in the name of anti-trafficking work are sending workers to interior towns like Sangli. “These NGOs and their volunteers suffer from ‘targetitis’ and get ultra-aggressive in their approach,” she says.

According to Seshu, the number of such foreigners in Sangli (Maharashtra home minister RR Patil’s home district) has risen sharply in the last five years. “I’d like to know why they’re here. Will I be allowed to do anything similar in the US when I’m there on a tourist visa?” she asks. “Instead of asking these questions, our police only seem too keen to hobnob with the goras.”


Source: DNA


मिशनरीज का मायाजाल:यीशू से क्षमायाचना करने वाले ही बचेंगे

21 मई कयामत का दिन..प्रभु यीशू से क्षमायाचना करने वाले ही बचेंगे और 20 अक्टूबर को पूरी दुनिया खत्म हो जाएगी। कुछ ऐसे ही पोस्टर (होर्डिंग) आजकल जयपुर की सड़कों पर लोगों में खौफ भर रहे हैं।

होर्डिंग्स
के नीचे फैमिली रेडियो डॉट कॉम का वेब एड्रेस भी है जहां आप प्रार्थना कर नरक में जाने से बच सकते हैं। ईसाई मिशनरी के बड़े स्तर पर चलाए जा रहे अभियान से जहां जयपुर की जनता में जनाक्रोश भड़क रहा है वहीं प्रशासन ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है । पूरे शहर में इन दहशत भरे होर्डिंग्स के बाद हिंदू संगठनों ने भी इस पूरे षड्यंत्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

बजरंग दल के विभाग संयोजक अशोक सिंह ने जल्द शहर भर में इन होर्डिंग्स को हटवाने और इससे संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जन आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं ईसाई मिशनरियों द्वारा दावा किया जा रहा है कि अमरीका के ज्योतिष ने 70 वर्षों के शोध के बाद 21 मई की तारीख निकाली है।

इसके
अनुसार इस दिन के पश्चात 20 अक्टूबर तक दुनिया के खत्म होने का सिलसिला शुरू हो जाएगा और यीशू की शरण में आने वाले ही स्वर्ग में जाएंगे। पूरे शहर में यह होर्डिंग्स किसने और किसकी इजाजत से लगाए इसका जवाब किसी के पास नहीं है। इससे पहले भी पोप ने रुपए लेकर स्वर्ग के टिकट बांटे थे।

संघ के नर्मदा नदी पर सामाजिक कुंभ में कांग्रेस को धर्मातरण की आशंका

मध्य प्रदेश के मंडला जिले में नर्मदा नदी के तट पर गुरुवार से शुरू हुए तीन दिवसीय नर्मदा सामाजिक कुंभ पर कांग्रेस और ईसाई समुदाय को आपत्ति हो गई है । आयोजक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तक इसे सामाजिक समरसता का प्रतीक करार दिया है, वहीं कांग्रेस व ईसाई संगठन ने इस आयोजन के जरिए धर्मातरण की आशंका जताई है।

नर्मदा जयंती पर शुरू हुए इस सामाजिक कुंभ के मंच पर संघ के पदाधिकारियों से लेकर भाजपा के नेताओं और साधु-संत का जमावड़ा था। धार्मिक उपदेश के बीच तमाम वक्ताओं ने देशभक्ति की परिभाषा बताई और धर्म का पाठ पढ़ाया।

इस मौके पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस कुंभ से जो अमृत निकलेगा, वह सामाजिक समरसता को और प्रगाढ़ करेगा। नर्मदा नदी दुनिया की एक मात्र ऐसी नदी है जिसकी लोग परिक्रमा करते हैं, क्योंकि यह लोगों की आस्था का केंद्र है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने मंडला के सामाजिक कुंभ को धर्म स्वतंत्रता कानून के खिलाफ बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम और राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर को पत्र भी लिखा है। उन्होंने कहा कि इस कुंभ के जरिए अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।

ईसाई समाज के प्रवक्ता आनंद मुटुंग ने इस आयोजन के जरिए धर्मातरण की आशंका जताई है। उनका कहना है कि इसके लिए कुछ लोगों पर दबाव भी डाला जा रहा है।

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