डिजिटल पेमेन्ट प्रोत्साहन योजना से अब आप भी पा सकतें हैं पुरस्कार


पिछले ढाई वर्ष में भ्रष्टाचार एवं कालेधन के खिलाफ भारत सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। एक हजार और पाँच सौ रूपये के नोट को बंद करने संबंधित निर्णय भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1000 और 500 के नोट के ढेर ने देश के अंर्थतंत्र में अनेक बुराइयों को आश्रय दिया। भविष्य में भी देश फिर से एक बार भ्रष्टाचार एवं काले धन का शिकार न हो, इसलिए भविष्यलक्षी स्थाई योजनाओं को लागू करना बहुत ही आवश्यक है।

आज तकनीक (technology) के  माध्यम से ऑनलाइन पेमेंट, मोबाइल बैंकिंग , ई-वॉलेट, डेबिट कार्ड के ज़रिए डिजिटल बिज़नेस ट्रांसज़ेक्शन संभव है। ऐसे कई वैकल्पिक साधनों के ज़रिए डिजिटल से डिजी-धन (digi-dhan) की  दिशा में बढ़ने में मदद मिलेगी। अफ्रीका में केन्या  जैसे विकासशील देश न  ऐसा करके दिखाया है। भारत जैसा देश जिसकी 65% जनसंख्या 35 वर्ष की आयु से कम है, भारत जो पूरी दुनिया में आईटी कौशल के लिए जाना जाता है, भारत जिसके करोड़ों-करोड़ अनपढ़ और गरीब व्यक्ति ईवीएम से वोट देते हैं, ऐसी क्षमता वाले देश के नागरिक निश्चित ही मौजूदा अर्थव्यवस्था को डिजिटल अर्थव्यवस्था में बदलने में सक्षम हैं। जो अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। 

इस सपने को पूरा करने के लिए, ई-पेमेंट (e-payment) को बढ़ावा देना, ई-वॉलेट (e-wallet) और मोबाइल बैंकिग के प्रचलन को बढ़ाना, डिजिटल (digital ) से समाज को डिजी-धन (digi-dhan) की ओर ले जाना अपरिहार्य हो गया है। 1000 और 500 रू. के नोटों के विमुद्रीकरण के पश्चात डिजिटल पेमेन्ट्स में काफी वृद्धि हुई है। यह आवश्यक है कि इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का प्रचलन समाज के हर वर्ग में फैले। अतः नीति आयोग स्तर पर यह निर्णय लिया गया है कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) से अनुरोध किया जाए कि वह डिजीटल पेमेंट को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई योजना शीघ्र लागू करें। उल्लेखनीय है कि NPCI एक गैर-लाभकारी कम्पनी है जो भारत को कैशलेस समाज की ओर ले जाने के लिए प्रयासरत है।

प्रोत्साहन योजना के मुख्य बिन्दु:

वो उपभोक्ता (Consumers) और विक्रेता (Merchants) जो इलेक्टॉनिक पेमेंट (Electronic Payment) का उपयोग करते हैं, इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

इस योजना में दो तरह की प्रोत्साहन धनराशि की व्यवस्था है-
  • प्रत्येक सप्ताह भाग्यशाली विजेताओं को नकद पुरस्कार दिए जाने की रूपरेखा बनाई जाएगी।
  • हर तीन माह में उपभोक्ताओं में से कुछ को एक बड़ा पुरस्कार दिया जाएगा।
  • योजना में यह ध्यान रखा जाएगा कि गरीबों,निम्न-मध्यम वर्ग तथा छोटे व्यापारियों को प्राथमिकता मिले
  • इस योजना में निम्न प्रकार के डिजिटल पेमेंट्स (Digital Payments) अनुमन्य होगें- USSD, AEPS, UPI और RuPay Card
  • विक्रेताओं के लिए उनके द्वारा स्थापित POS मशीन पर किये गये  ट्रांज़ेक्शंस (Transactions) इस योजना हेतु मान्य होगीं।
  • योजना की रुपरेखा शीध्र ही देश के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी किन्तु यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसे जितने लोग डिजिटल पेमेन्ट प्रणाली का उपयोग कर रहे है वे इस योजना के लाभ उठाने के हक़दार होंगे
  • वर्तमान में दो प्रकार के सुझाव चल रहे हैं कि प्रोत्साहन योजना 6 महीने चलाई जाए अथवा एक वर्ष तक चलाई जाए।
  • राज्य सरकारों, उनके उपक्रमों, जिलों, महानगर निगमों एवं पंचायतों में भी जहां कैशलेस ट्रांज़ेक्शंस (Cashless Transactions को प्रोत्साहित करने हेतू उल्लेखनीय कार्य किया गया हो, उन्हें भी पुरस्कृत किया जाएगा।

अनियमित लेन-देन करने वाले बैंक अधिकारियों पर हुई कड़ी कार्रवाई


सरकार द्वारा 8 नवम्बर, 2016 की मध्यरात्रि से कुछ विशेष बैंक नोटों का चलन बंद करने के बाद आरबीआई के निर्देशों का उल्लंघन कर अनियमित लेन-देन करने में लिप्त पाए गए बैंक अधिकारियों के मामले में कार्रवाई की गई

8 नवम्बर, 2016 की मध्यरात्रि से कुछ विशेष बैंक नोटों का चलन बंद करने संबंधी सरकारी निर्णय के बाद बैंकों ने अपने यहां बैंकिंग लेन-देन के समुचित प्रबंधन के लिए लंबे समय तक अथक प्रयास कर सराहनीय कार्य किया है।

हालांकि, कुछ बैंक अधिकारियों द्वारा अनियमित लेन-देन करने और आरबीआई के निर्देशों का उल्लंघन किए जाने के कुछ मामले सामने आए हैं। इन सभी मामलों में कार्रवाई की गई है और सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों के 27 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है तथा 6 अधिकारियों को गैर संवेदनशील पदों पर स्थानांतरित कर दिया गया है।

चूंकि वास्तविक लेन-देन सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं, इसलिए अवैध लेन-देन को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अनियमित एवं अनधिकृत गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ समुचित कार्रवाई की जाएगी।

पेरिस में जी-20 संगोष्‍ठी में भारत सरकार की सराहना


दो दिवसीय जी-20 भ्रष्‍टाचार रोधी कार्य समूह (एसीडब्‍ल्‍यूजी) बैठक से पहले पेरिस में आर्थिक सहयोग एवं विकास (ओईसीडी) संगठन में भ्रष्‍टाचार एवं वै‍श्विक अर्थव्‍यवस्‍था पर एक जी-20 संगोष्‍ठी का आयोजन किया गया। भारत के शिष्‍टमंडल का नेतृत्‍व संयुक्‍त सचिव (अंतरराष्‍ट्रीय सहयोग), डीओपीटी श्री देवेश चतुर्वेदी कर रहे हैं। 

संगोष्‍ठी में भाग लेने वाले पैनेलिस्‍ट में ओईसीडी, आईएमएफ एवं विश्‍व बैंक के विशेषज्ञ तथा अग्रणी विश्‍वविद्यालयों के अर्थशास्‍त्री एवं अनुसंधानकर्ता शामिल हैं। कई पैनेलिस्‍टों ने जेएएम (जनधन, आधार एवं मोबाइल) के जरिये भारत में प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण (डीबीटी) को व्‍यावहारिक क्रियान्‍वयन उपकरण के एक उदाहरण के रूप में रेखांकित किया जिसका परिणाम भ्रष्‍टाचार स्‍तरों को कम करने के साथ-साथ राजस्‍व नुकसान एवं देरी में कमी के रूप में भी सामने आया। 

धान की मिलिंग में बाय-प्रोडक्‍ट से अनुचित लाभ कमाने को लेकर स्‍पष्‍टीकरण


धान की मिलिंग में बाय-प्रोडक्‍ट से मिलरों द्वारा अनुचित लाभ कमाए जाने के सम्‍बंध में स्‍पष्‍टीकरण जारी करते हुए खाद्य मंत्रालय ने कहा है कि ऐसे समाचार सरासर गलत व तथ्‍यों के विपरीत हैं, क्‍योंकि मंत्रालय टैरिफ कमीशन की सिफारिशों के आधार पर धान की मिलिंग के लिए जिन दरों पर भुगतान करता है, वे ऐसे बाय-प्रोडक्‍ट के मूल्‍य को मिलों की आय में शामिल करके तथा उसके विरूद्ध उनके खर्चों का समायोजन करने के उपरान्‍त ही तय की जाती हैं।

भारतीय खाद्य निगम खाद्यान्नों की खरीद के लिए केन्द्रीय नोडल एजेंसी है और यह राज्य सरकार की एजेंसियों (एसजीए) के सहयोग से गेहूं और धान/चावल के खरीद प्रचालन करता है। धान के मामले में यह अनिवार्य है कि राज्य सरकार की एजेंसियां किसानों से खरीदे गए धान को यथाशीघ्र चावल में परिवर्तित करके कस्टम मिल्ड चावल (सीएमआर) भारतीय खाद्य निगम को वितरण के लिए सौंपें। भारत सरकार, भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से सीएमआर की लागत का भुगतान धान को चावल में परिवर्तित करने की लागत सहित राज्य सरकार की एजेंसियों को करती है। धान की प्रोसेसिंग समयबद्ध तरीके से करना अपेक्षित है, क्योंकि धान की “शेल्फ लाईफ” सीमित होती है और इस प्रयोजनार्थ राज्य सरकार की एजेंसियां चावल मिलरों की नियुक्ति उनके साथ एक सुपरिभाषित करार के अंतर्गत करती हैं।

राज्य सरकार की एजेंसियों को मिलिंग प्रभारों की प्रतिपूर्ति करने के लिए खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने टैरिफ आयोग की सिफ़ारिशों पर आधारित एक दर संरचना अपनाई है। चूंकि भारतीय खाद्य निगम अथवा राज्य सरकार की एजेंसियों के लिए धान की प्रोसेसिंग से प्राप्त सह-उत्पादों को लेना और उनका विपणन करना व्यावहारिक नहीं है, अतः मिलिंग प्रभारों हेतु टैरिफ आयोग के फार्मूले का आधारभूत सिद्धांत यही है कि चावल मिल मालिक सह-उत्पादों को अपने पास रखेंगे और मिल मालिकों को भुगतान किए जाने वाले नेट मिलिंग प्रभारों की गणना एवं सिफ़ारिश करते समय टैरिफ आयोग द्वारा इन सह-उत्पादों के मूल्य को भी संज्ञान में लिया जाएगा। टैरिफ आयोग के इसी फार्मूले का उपयोग करते हुए यह विभाग धान की प्रोसेसिंग से प्राप्त सह-उत्पादों के मूल्य को अलग से दर्शाए बिना ही राज्य सरकार की एजेंसियों को तय दरों पर मिलिंग प्रभारों का भुगतान करता रहा है।    

धान की मिलिंग के लिए मौजूदा दरों का निर्धारण टैरिफ आयोग द्वारा वर्ष 2005 में की गई सिफ़ारिशों के आधार पर किया गया था। टैरिफ आयोग ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया था कि सकल मिलिंग लागत और मिलिंग के दौरान सह-उत्पादों से प्राप्त राशि मिल-दर-मिल और राज्य-दर-राज्य अलग होती है। इसी प्रकार, ढुलाई और प्रेषण की लागत भी अलग-अलग होती है। अतः आयोग का यह अभिमत था कि क्षेत्र/ राज्य विशिष्ट मिलिंग लागत निर्दिष्ट करना व्यवहार्य नहीं है और उनकी अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर उन्होने कच्चे चावल के लिए मिलिंग प्रभार 15.32 रुपए/क्विंटल की दर से और सेला चावल के लिए 25.48 रुपए/ क्विंटल की दर से निर्धारित करने की सिफ़ारिश की थी, जिसमें 8 किमी तक धान की ढुलाई की लागत और एफसीआई/ राज्य सरकार की एजेंसियों को सुपुर्दगी के लिए इसी दूरी के लिए चावल की ढुलाई की लागत शामिल है।

टैरिफ आयोग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट की जांच खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग में की गई थी और मिलिंग प्रभारों की वर्तमान दर, वर्ष 2005 में कच्चे चावल के लिए 15 रुपए/क्विंटल और सेला चावल के लिए 25 रुपए/ क्विंटल निर्धारित की गई थी, जिसमें मंडी/भंडारण स्थान से मिल तक 8 किमी तक और मिलों से एफसीआई के भंडारण गोदामों तक 8 किमी तक ढुलाई प्रभार शामिल है। तथापि, यदि कोई राज्य सरकार धान/चावल की ढुलाई की व्यवस्था स्वयं करती है, तो उन्हें ढुलाई प्रभार का भुगतान अलग से किया जाता है और मिलिंग प्रभारों का भुगतान कच्चे चावल के लिए केवल 10 रुपए/ क्विंटल और सेला चावल के लिए 20 रुपए/क्विंटल की दर से किया जाता है। ये दरें आदेश सं. 192(12)/1997-एफसी लेखा दिनांक 04.06.2006 द्वारा खरीफ विपणन मौसम 2006-07 से लागू की गई थीं।

मिलिंग की लागत में वृद्धि और धान के सह-उत्पादों से प्राप्‍त आय में संभावित वृद्धि के मद्देनजर मिलिंग प्रभारों में संशोधन के लिए कुछ राज्‍य सरकारों से प्राप्‍त अनुरोध को ध्‍यान में रखते हुए टैरिफ आयोग को वर्ष 2009 में एक और अध्‍ययन सौंपा गया था और उनकी रिपोर्ट वर्ष 2012 में प्राप्‍त हुई थी। तथापि, अपनी रिपोर्ट में, टैरिफ आयोग ने पर्याप्‍त आंकड़ों की अनुपलब्‍धता के कारण मिलिंग प्रभारों में संशोधन करके उन्‍हें बढ़ाने/ घटाने के संबंध में कोई विशेष सिफारिश नहीं की थी और यथास्‍थिति बनाए रखने की सिफारिश की थी जिसे इस विभाग द्वारा स्‍वीकार किया गया था एवं मौजूदा मिलिंग प्रभारों को जारी रखने का निर्णय लिया गया था।

चूंकि कई राज्‍य सरकारें मिलिंग प्रभारों में संशोधन कर उन्‍हें बढ़ाने का अनुरोध इस आधार पर कर रही थीं कि मौजूदा दरें वर्ष 2005 में निर्धारित की गई थी और मिलिंग की लागत में भी वृद्धि हुई है, सलाहकार (लागत), खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग को स्‍थिति की त्‍वरित समीक्षा करने के लिए कहा गया था। अपनी सिफारिशों में, सलाहकार (लागत) के नेतृत्‍व में गठित टीम ने टैरिफ आयोग की वर्ष 2005 एवं 2012 की दोनों रिपोर्टों का विश्‍लेषण किया और मिल-मालिकों/राज्‍य सरकारों आदि से प्राप्‍त सूचना का अध्‍ययन किया एवं यह सिफारिश की थी कि मौजूदा सुपरिभाषित एक-समान आउट टर्न अनुपात और उपज तथा सह-उत्‍पादों के मूल्‍य को देखते हुए रॉ चावल के मिलिंग प्रभारों में बढ़ोतरी करने की कोई गुंजाइश नहीं है। इस टीम ने मौजूदा प्रभारों को जारी रखने की सिफारिश की थी। समिति की रिपोर्ट को दिनांक 26.02.2013 को उपभोक्‍ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार)  के अनुमोदन से स्‍वीकार किया गया था। इससे यह स्‍पष्‍ट होता है कि राज्‍य सरकार की एजेंसियों को भुगतान किए जाने वाले मिलिंग प्रभारों की नार्मेटिव दरों की सिफारिश करते समय टैरिफ आयोग द्वारा सह-उत्‍पादों के मूल्‍यों पर सदैव विचार किया गया है।

संबंधित समाचार कतिपय स्रोतों द्वारा विभिन्‍न सरकारी/ गैर-सरकारी एजेंसियों को नियमित रूप से उपलब्‍ध कराई जा रही गलत सूचनाओं पर आधारित प्रतीत होते हैं। इन समाचारों में कहा गया है कि सह-उत्‍पादों के मूल्‍यों के कारण सरकार को प्रतिवर्ष 10000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है जिसका कोई साक्ष्‍य नहीं है। उनमें इस तथ्‍य को पूरी तरह छिपाया गया है कि टैरिफ कमीशन मिलिंग दरों की सिफारिश करते समय बाय-प्रोडक्‍ट के मूल्‍य को पूरी तरह से समायोजित करता है।  इसमें हाल के वर्षों में धान की प्रोसेसिंग के सह-उत्‍पादों के मूल्‍य में हुई वृद्धि का उल्‍लेख किया गया है, किन्‍तु इसमें चावल मिलों के खर्चों में हुई वृद्धि के संबंध में कुछ नहीं कहा गया है। चूंकि अधिकांश राज्‍यों ने यह उल्‍लेख करते हुए कि मिल मालिकों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा और वे राज्‍य सरकार की एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान की मिलिंग करने के इच्‍छुक नहीं है, समय-समय पर नार्मेटिव मिलिंग प्रभारों में संशोधन करके वृद्धि करने की मांग कर रहे हैं, अत: इसको ध्‍यान में रखते हुए इस विभाग ने नार्मेटिव मिलिंग प्रभारों की समीक्षा करने के लिए एक नया अध्‍ययन करने के लिए दिसम्‍बर, 2013 में ही टैरिफ आयोग से अनुरोध कर दिया था। टैरिफ आयोग द्वारा दिसम्‍बर, 2015 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्‍तुत किए जाने की संभावना है। 

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण द्वारा टैरिफ कमीशन से मिलिंग दरों व बाय-प्रोडक्‍ट के मूल्‍य आदि के संबंध में एक ताजा अध्‍ययन करने के लिए भी कहा गया है और उनकी यह रिपोर्ट दिसम्‍बर, 2015 के अंत तक प्राप्‍त होने की आशा है, जिसके आधार पर विभाग मिलिंग दरों को पुनरीक्षित करने के संबंध में शीघ्र ही नया निर्णय लेगा।

कांग्रेस भ्रष्टाचार की जननी है : स्वामी रामदेव


भ्रष्टाचार व कालाधन विरोधी अपनी मुहिम के तहत गुजरात पहुंचे योगगुरु बाबा रामदेव ने काग्रेस को भ्रष्टाचार की जननी बताया है। उन्होंने कहा कि काग्रेस का बोफोर्स घोटाले से शुरू हुआ सफर जीजाजी के घोटाले तक पहुंच गया है।

महगाई, बेरोजगारी व गरीबी काग्रेस की देन है, जिसके कारण दुनिया के सामने भारत की छवि धूमिल हुई है। रामदेव ने अपने इस अभियान के जरिये मुख्यमंत्री मोदी का प्रचार करने के आरोपों पर कहा कि उन्होंने किसी को चिट्ठी लिखकर नहीं दी है कि वह मोदी या भाजपा के लिए प्रचार कर रहे है। मीडिया में खुद के संस्थान की ओबी वैन नमो चैनल को देने संबंधी खबरों पर रामदेव ने तिलमिलाते हुए कहा कि यह सब झूठ है। उनके तथा पतंजली योगपीठ के संबंध में खबरे छापने से पहले उनका भी पक्ष लिया जाए।

भारत स्वाभिमान आदोलन के तहत दस दिवसीय गुजरात यात्रा पर आए योगगुरु ने एलान किया है कि देश को गर्त में ले जाने वाली काग्रेस का सफाया जरूरी है। बाबा ने गुजरात के लोगों से भी आह्वान किया कि काग्रेस को छोड़कर अन्य किसी भी दल के साफ सुथरी छवि के लोगों को वोट दें। उन्होंने कहा कि काग्रेस की नीतिया ठीक होती व भ्रष्टाचार नहीं होता तो आज देश तरक्की की राह पर होता। विदेशी मीडिया भी आज प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की काबिलियत पर सवाल उठा रहा है, जिसके कारण देश की छवि को धक्का लगा है।

बाबा हालाकि भाजपा अथवा मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खुलकर नहीं आए तथा भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के सवालों को टालते हुए कहा कि वह उनके एजेंट नहीं है। बाबा ने कहा गडकरी पर लग रहे आरोप तकनीकी गड़बड़ियों के हैं लेकिन काग्रेस नेताओं ने सीधे-सीधे देश का धन लूटा है। उन्होंने कहा कि काग्रेस को उसके पाच एम मनमोहन सिंह, मायावती, मुलायम, ममता और एम करुणानिधि ही डुबा देंगे।

कांग्रेस के नेता अब सिर्फ भ्रष्टाचार के लिए जेल जाते हैं - आर आर पाटिल


केंद्र में सत्ताधारी कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के मामले पर अब तक विपक्ष ही टीका टिप्पणी करता था, लेकिन अब कांग्रेस के सहयोगी दल एनसीपी ने भी उसपर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हमला किया है.

महाराष्ट्र में एनसीपी नेता और राज्य के गृह मंत्री आर आर पाटिल ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा है कि एक जमाने मे कांग्रेस के नेता देश के लिए जेल जाते थे, अब भ्रष्टाचार के मामले में सलाख़ों बंद हो रहे हैं.

महाराष्ट्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए आर आर पाटिल ने कहा, "काँग्रेस पार्टी हमारा सहयोगी दल है. दिल्ली और मुंबई में हम साथ साथ हैं, इस वजह से उनपर  टिप्पणी करना मुश्किल होता है. कई बार यह बात सीधे तरीके से कह नही सकते."

उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, "एक जमाना था जब इतिहास में कांग्रेस के नेता  बंदूक वाले अंग्रेज़ों का विरोध करते थे, देश के लिए जेल में जाते थे. लेकिन अब इस पार्टी के नेता देश के लिए नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के लिए जेल जाते हैं."

ग़ौरतलब है कि एनसीपी केंद्र और महाराष्ट्र में कांग्रेस का सहयोगी दल है, लेकिन राज्य के नगर निगम और नगर परिषद के चुनावों में ये दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ती हैं.

भ्रष्टाचार पर केंद्र की नीति निहायत ही घिनौनी - आडवाणी

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी खुलकर पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के बचाव में आ गए हैं. उन्होंने कहा है कि नितिन गडकरी पर जो आरोप हैं, वे कारोबार के मानदंडों को लेकर हैं ना कि सत्ता के दुरुपयोग या भ्रष्टाचार के.

आडवाणी ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष पर जो आरोप लगे हैं, उनमें वो पाक साफ साबित हो चुके हैं. आडवाणी ने सरकार पर आरोप लगाया कि इस तरह के आरोप सत्तारुढ यूपीए पर लगे अभूतपूर्व आरोपों को बेअसर करने के लिए लगाए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि भाजपा को दूसरी पार्टियों से अलग होना चाहिए और आरोपों कैसे भी हों, उन्हें कोई छूट का दावा नहीं करना चाहिए."  उन्होंने कहा, मैं समझता हूं कि सरकार इस जांच को निष्पक्षता और बिना द्वेष से कराएगी."

आडवाणी ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों को बेअसर करने के लिए जो नीति अपना रही है वो निहायत ही घिनौनी है. उन्होंने कहा कि सरकार हर राजनीतिक वर्ग को एक ही रंग में रंगने की कोशिश कर रही है.

गडकरी के बचाव में उन्होंने कहा कि भूमि को लेकर अनियमितताएं बरतने संबंधी भाजपा अध्यक्ष पर लगे आरोप खुद मीडिया की रिपोर्ट से ही गलत साबित हो चुके हैं.

उन्होंने कहा कि अपने कारोबार में निवेश के संबंध में सवालों पर भी गडकरी ने कंपनी मामलों के विभाग से जांच कराने की बात कह कर अपने को पाक साफ साबित कर दिया है.

आडवाणी ने गडकरी को इस बात के लिए बधाई भी दी कि उन्होंने स्वेच्छा से आरोपों की जांच के लिए मदद की.

भ्रष्टाचारी वीरभद्र सिंह की कुर्सी छिनी

भ्रष्टाचार के आरोपों में यूपीए के एक और मंत्री की कुर्सी छिन गई है. लघु और कुटीर उद्योग मंत्री और हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

सोमवार को शिमला की एक अदालत ने उनपर भ्रष्टाचार के एक केस में आरोप तय किए थे.

वीरभद्र सिंह ने मंगलवार को प्रधानमंत्री निवास जाकर अपना इस्तीफा मनमोहन सिंह को सौंपा, जिसे मंजूर कर लिया गया. इससे पहले अदालती फेर में फंसने के बाद वीरभद्र सिंह ने सोमवार को सोनिया गांधी से मुलाकात की थी.

सोमवार को शिमला की एक अदालत ने केंद्रीय मंत्री और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किए.

शिमला के स्पेशल विजिलेंस जज बीएल सोनी ने वीरभ्रद सिंह पर जिस मामले में आरोप तय किए गए हैं वह केस 24 साल पुराना है. वीरभ्द्र पर साल 1989 में मुख्यमंत्री रहते हुए कारोबारियों से घूस लेने का आरोप है.

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में वीरभद्र सिंह की हैसियत उन चंद नेताओं में है जिनकी राज्य में तूती बोलती है. वह हिमाचल प्रदेश के पांच बार मुख्यमंत्री रहे और पांच बार लोकसभा के लिए भी चुने गए.

अभियोजन पक्ष ने वीरभ्रद सिंह और उनकी पत्नि के खिलाफ साल 2010 में चार्जशीट दाखिल किया था.

पुलिस के मुताबिक दंपत्ति पर तीन अगस्त, 2009 में एक सीडी के आधार पर केस दर्ज किया गया था. यह सीडी वीरभद्र सिंह के राजनीतिक सलाहकार विजय सिंह मनकोटिया ने साल 2007 में जारी की थी.

पूर्व मुख्यमंत्री पर 1989 में अपनी आधिकारिक स्थिति का फायदा उठाने और आपराधिक दुर्व्यवहार के आरोप हैं. बीजेपी ने अदालत के जरिए आरोप तय किए जाने के बाद उनके इस्तीफा की मांग की.

बाबा रामदेव ने गंगाजल लेकर आंदोलन जारी रखने की शपथ ली

योग गुरु रामदेव ने हरकी पौड़ी में हाथ में गंगाजल लेकर शपथ ली कि जब तक विदेशों में जमा काला धन वापस नहीं आएगा और भारत से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा, तब तक वह आंदोलन जारी रखेंगे.

भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के बैनर तले बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की अगुवाई में देश भर से आए बाबा के हजारों समर्थकों ने लगभग दस किलोमीटर पैदल सफर करते हुए भ्रष्टाचार और सत्ता के विरूद्ध प्रदर्शन किया.

'साधु-संतों का अपमान नहीं सहेगा हिन्दुस्तान' तथा 'सत्ता बदली बार-बार व्यवस्था बदलेंगे इस बार' जैसे नारे लिखी हजारों पट्टिकाओं और तिरंगे के साथ यह जुलूस हरिद्वार की सड़कों से होता हुआ हरकी पैड़ी पहुंचा.

जुलूस में सबसे आगे बाबा रामदेव के 20-25 अनुयायी हाथों में तलवार लिए हुए प्रदर्शन करते चल रहे थे. 'वंदे मारतम्' और 'भष्टाचार मिटाना है' जैसे नारे लगाने में महिलाएं और युवतियां भी बड़ी संख्या में सम्मिलित हुईं.

बाबा रामदेव ने हरकी पौड़ी से गंगाजल हाथ में लेकर शपथ लिया कि कालेधन को वापस लाने और भ्रष्टाचार को खत्म करने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.

हरकी पैड़ी पर सभा को संबोधित करते हुए रामदेव ने कहा अब भारत जाग उठा है, देश का युवा भ्रष्टाचार के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि देश में ब्रिटिश प्रणाली की जगह न्यायपूर्ण स्वदेशी व्यवस्था लागू होनी चाहिए.

मंहगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर जनता के सामने खड़े होने से घबराई कांग्रेस

मंहगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर जनता के सामने खड़े होने से घबराई कांग्रेस पार्टी ने अब अपने प्रदेशाध्यक्ष की सभा को कार्यकर्ताओं तक ही सीमित कर दिया है। पहले नए प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान की सभा राज्य स्तरीय भव्य होने जा रही थी, लेकिन हाल ही में डीजल रसोई गैस की कीमत में हुई बढ़ोतरी ने पार्टी को बैकफुट पर ला दिया है।

पार्टी
सूत्रों के अनुसार, स्थिति को देखते हुए फिलहाल राज्य सरकार के मंत्री, कांग्रेसी विधायक, हारे हुए प्रत्याशी और राजनीतिक नियुक्ति पाने के लिए कतार में लगे नेताओं को अपने-अपने क्षेत्र से कार्यकर्ताओं को लाने के निर्देश दिए गए हैं।

यहीं
नहीं इसके अलावा आम जनता और अन्य लोगों को फिलहाल रैली से दूर रखा गया है। कुछ हजार में सिमटे : नए प्रदेशाध्यक्ष की पहली सभा के लिए सभी कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता अपनी-अपनी ओर से भीड़ जुटाने में जुट गए थे। यहां तक की जिलाध्यक्ष स्तर के नेता भी लोगों को आमंत्रण देने में लगे थे।

अब
प्रदेशाध्यक्ष के निर्देशों के चलते इन लोगों ने भी भीड़ जुटाने का काम रोक दिया है। माना जा रहा है कि अब प्रदेशाध्यक्ष की सभा कुछ हजार कार्यकर्ताओं पर ही सिमट गई है।

लोकपाल बिलः पहली बैठक के बाद ही सदस्‍य बैकफुट पर

भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए बनी संयुक्‍त ड्राफ्ट समिति की पहली बैठक में ही सरकार ने अन्‍ना हजारे की मांग को अनसुना कर दिया। सरकार ने तय किया है कि समिति की बैठक की वीडियोग्राफी नहीं होगी। इसका ऑडियो रिकार्ड होगा और ब्‍यौरा समय समय पर देश के लोगों को बताया जाएगा। अन्‍ना ने अनशन तोड़ने के बाद कहा था कि बैठक की वीडियोग्राफी हो और पूरे देश की जनता को दिखाया जाए।

समिति की पहली बैठक में सिविल सोसायटी के कुछ प्रस्ताव हटा दिए गए हैं। इसके अलावा सरकार ने सिविल सोसायटी की ओर से तैयार जन लोकपाल बिल के प्रारूप को भी मसौदे का आधार मानने से इनकार कर दिया। जन लोकपाल बिल में जज और मंत्री को निलंबित करने का प्रस्ताव था, लेकिन सरकारी सूत्रों के मुताबिक इन दोनों प्रस्तावों को संयुक्त मसौदे से हटा दिया गया है।

सिविल सोसायटी के सदस्‍य प्रशांत भूषण ने कहा, ' फिलहाल वीडियो रिकॉर्डिंग पर सहमति नहीं बन सकी है। लेकिन बैठक में सभी ने यह माना कि ठोस, कारगर और स्‍वतंत्र लोकपाल बिल आज के समय की जरूरत है।' उन्‍होंने कहा, '2 मई को होने वाली बैठक में जन लोकपाल बिल के मूलभूत सिद्धांतों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा हर हफ्ते कम से कम एक बैठक जरूरी होगी।'

ऍसा लग रहा है कि बिल पर पहली बैठक के बाद ही सिविल सोसायटी के सदस्‍य बैकफुट पर आ गए हैं।

मनमोहन सिंह आज तक की सबसे भ्रष्ट सरकार के सबसे ईमानदार प्रधानमंत्री

योग गुरु बाबा रामदेव ने सरकार से भ्रष्टाचार रोकने और ब्लैक मनी वापस लाने के लिए कदम उठाने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया वह इसको लेकर जनता के बीच जाएंगे।

पंतजलि योग समिति और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट की ओर से आयोजित रैली में बाबा रामदेव ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री से मैंने समय मांगा था लेकिन उन्होंने दिया नहीं। प्रधानमंत्री ने अगर समय नहीं दिया तो उनका भी समय पूरा हो जाएगा।' रामदेव ने कहा, ' वह बेईमानों से घिरे ईमानदार व्यक्ति हैं। वह आज तक की सबसे भ्रष्ट सरकार के सबसे ईमानदार प्रधानमंत्री हैं। सरकार ने यदि संवैधानिक दायित्व नहीं निभाया तो हम उन्हें सिखाएंगे।'

उन्होंने कहा कि कालेधन और भ्रष्टाचार के पांच मूल स्रोत हैं। पहला बडे़ नोट और अधिक नोट, दूसरा अवैध-खनन, तीसरा विकास योजनाओं के धन की चोरी, चौथा रिश्वतखोरी और पांचवां टैक्स चोरी। बाबा रामदेव ने ब्लैक मनी और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए पांच मुख्य उपाय बताए।

पहला कठोर कानून बनाना और बड़े नोटों को प्रचलन से वापस लिया जाना, दूसरा सन् 2006 से लंबित भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की संधि का अनुमोदन करना, मॉरिशस के रास्ते ब्लैक मनी को जायज बनाना बंद करना, ब्लैक मनी जमा करने वाले विदेशी बैंकों पर बैन लगाना और पांचवा विदेशी खाता नीति की तुरंत घोषणा करना।

पहले बाबा रामदेव अपनी संपत्ति का हिसाब दे फिर कांग्रेस पर आरोप लगाये - दिग्गी

अरुणाचल प्रदेश के सांसद के बाद अब कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह, जो लगता है की मानसिक रूप से लाचार हो चुके हैं, ने भी योग गुरु बाबा रामदेव पर निशाना साधा है।

दिग्विजय ने रविवार को गुना मध्यप्रदेश में संवाददाताओं से चर्चा में कहा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कुछ भी कहने से पहले ‘बाबा’ को अपनी संपत्ति की घोषणा करना चाहिए। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव की मुहिम के बारे में किए गए सवाल के जवाब में यह बात कही।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि रामदेवजी राजनीति से जुड़ना चाहते हैं तो उन्हें खुलकर इसके लिए सामने आना चाहिए।

ए राजा के बचाव में सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार

यूँ लगता है कि भ्रष्टाचार का कोई आरोप हमारी केंद्र सरकार पर असर नहीं डालता. शायद इसीलिए दूरसंचार मंत्री ए राजा के बचाव के लिए केंद्र सरकार ने सारी हदें पार कर दीं हैं. राजा का बचाव करते हुए सरकार ने 2008 में 2G स्पेक्ट्रम आवंटन में अनियमितता पर कैग की रिपोर्ट के जबाब में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है. दूरसंचार मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा है कि इस प्रकार के फैसले सरकारी नीति के अनुरूप लिए गए और नीतिगत मामलों में कैग को बोलने का कोई हक़ नहीं है.

क्या यही भ्रष्टाचार हमारा राष्ट्रीय स्वभाव बन चुका है? हमारा लालच हमें संवेदना से रिक्त कर चुका है और हमें अब किसी बात पर शर्म नहीं आती. ऐसे कठिन समय में हम उम्मीद से खाली हैं क्योकि इस लालच से मुक्ति की सम्भावना कहीं नज़र ही नहीं आती, राष्ट्रमंडल खेलों में भी हमने अपनी आखों से इस बेशर्मी के तमाम उदहारण देखे, पर बात लीपापोती पर जाकर समाप्त हो गई.

अब हमें इन सवालों के जबाब खोजने ही होगे और इनका जबाब सरकार से मांगना ही होगा कि शहीदों के खून से खिलवाड़ करने वाले मुख्यमंत्री को पद से हटा देने भर से क्या यह मुद्दा खत्म हो जाता है ?

देश की जनता सरकार के इस भ्रष्टाचार के नंगे नाच को चुपचाप देख रही है, न जाने कब तक ???

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