तो यह है मोदी सरकार की राष्‍ट्रीय दूरसंचार सुरक्षा नीति

संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद ने बताया है कि राष्‍ट्रीय दूरसंचार सुरक्षा नीति प्रारूप चरण में है। दूरसंचार आयोग द्वारा इसकी संवीक्षा करने तथा राष्‍ट्रीय सूचना बोर्ड द्वारा इस पर चर्चा करने के बाद यह प्रारूप नीति अंतरमंत्रालयी परामर्श के लिए परिचालित की गई है। दूरसंचार सुरक्षा नीति संबंधी प्रारूप की मुख्‍य विशेषताएं निम्‍नानुसार है:- 

1. यह नीति पणधारकों की भागीदारी संबंधी सिद्धांतों, अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग, उपर्युक्‍त विनियामक ढांचे, विनियामकों, की अपेक्षा तकनीकि समाधानों को प्रधानता देने और व्‍याव‍हारिक एवं प्रगतिशील दृष्टिकोण को अपनाने पर आधारित है। 

2. इस नीति दूरसंचार से जुड़े सुरक्षा के विभिन्‍न पहलुओं जैसे सुरक्षा अभिकरणों को सुंचार सहायता, संचार, सूचना एवं डाटा की सुरक्षा के तथा दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा का समाधान करती है। 

3. इस नीति में 'सेफ टू कनेक्‍ट' नीति की परिकल्‍पना की गई है जिसका तात्‍पर्य यह है कि प्रत्‍येक नेटवर्क एलीमेंट को नेटवर्क में शामिल करने पूर्व इसकी सुरक्षा जांच करवाई जाए तथा इसे प्रमाणित/ अधिकृत सुरक्षा जांच प्रयोगशालाओं से प्रमाणित करवाया जाए। 

4. दूरसंचार नेटवर्क की आवधिक सुरक्षा जांच। 

5. भारतीय दूरसंचार नेटवर्क के लिए इलेक्‍ट्रानिक दूरसंचार उपस्‍कर और सॉफटवेयर के विनिर्माण के लिए घरेलू/देशीय क्षमता का उत्तरोत्‍तर विकास करना। 

सरकार उपर्युक्‍त नीति को अंतिम रूप न दिए जाने के बाविजूद भी सुरक्षा संबंधी सरोकारों के प्रति अत्‍यंत सजग है और इनका समाधन सरकार द्वारा गृह मंत्रालय तथा दूरसंचार उद्योग के परामर्श से विभिन्‍न दूरसंचार लाइसेंसों (अर्थात् अभिगम सेवा, राष्‍ट्रीय लंबी दूरी तथा अंतर्राष्‍ट्रीय लंबी दूरी सेवा लाइसेंसों तथा इंटरनेट सेवा प्रदाताओं एवं वीएसएटी सेवा प्रदाताओं) में संशोधन करके व्‍यापक सुरक्षा अनुदेशों को जारी करने के माध्‍यम से किया गया है। बाद में, इन सुरक्षा अनुदेशों को एकीकृत लाइसेंस (यूएल) के अभिन्‍न भाग के रूप में शामिल कर लिया गया है। इन अनुदेशों की मुख्‍य विशेषताएं निम्‍नानुसार है: 

1. लाइसेंसधारकों की अपने-अपने नेटर्वकों की सुरक्षा और सुरक्षा प्रबंधन के संबंध में संगठनात्‍मक नीति होगी। नेटवर्क संबंधी अपराध, नेटवर्क दृढि़करण, नेटवर्क प्रसार परीक्षण, जोखिम मूल्‍यांकन, समस्‍या को निधार्रित करने के लिए कर्रवाई और ऐसी समस्‍याओं के बार-बार उत्‍पन्‍न होने से बचाव आदि करना, उनकी इस नीति का एक भाग होगा और उन्‍हें इन कार्रवाईयों के संबंध में सभी उपाय करने होंगे।

2. लाइसेंसधारकों को अवरोधन और निगरानी मामलों का निपटान करने के लिए मुख्‍य तकनीकी अधिकारी/अधिकारियों, मुख्‍य सूचना सुरक्षा अधिकारी, नोडल कार्यपालकों तथा जीएमएससी, एमएससी, सॉफ्टस्विच, केन्‍द्रीय डाटा बेस के प्रभारी और पद्धति प्रधासक/प्रशासकों के रूप में केवल आवासी, प्रशिक्षित भारतीय नागरिकों को नियुक्‍त करना होगा। 

3. लाइसेंसधारक सुरखा की दृष्टि से वर्ष में एक बार अपने नेटवर्क की जांच करेगा अथवा किसी नेटवर्क जांच और प्रमाणन अभिकरण से नेटवर्क जांच करवाएगा। 

4. लाइसेंसधारक सभी प्रकार के अनाधिकृत प्रवेश, आक्रमणों और धोखाधडि़यों से निगरानी के संबंध में सुविधाएं सृजित करेगा और इसकी सूचना दूरसंचार विभाग एवं सीईआरटी-आईएन को देगा। 

5. लाइसेंसधारक अपने नेटवर्क में केवल उन्‍ही उपस्‍करों को शामिल करेगा जो किसी अधिकृत और प्रमाणित प्रयोगशालाओं से संगत समीचीन सुरक्षा मानकों के अनुसार जांचे गए होंगे। 

6. लाइसेंसधारक सभी कमांड लॉग्‍स की प्रायोगिक जांच का रिकार्ड रखेगा। 

7. सुरक्षा नियमों का अनुपालन न होने पर लाइसेंस समाप्‍त करने सहित अनेक दण्‍डकारी प्रावधान किए हैं। 

8. लाइसेंसधारक प्रचालन तथा रख-रखाव प्रक्रिया का एक मैनुअल के रूप में रिकार्ड रखेगा। 

9. हाडवेयर/सॉफटवेयर उत्‍पादों की आपूर्ति संबंधी शृंखला का रिकार्ड रखेगा।

यह महिला पढ़ ले यह खबर - घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 #PWDVA



पीडित व्‍यक्ति के द्वारा पूछे जा सकने वाले कुछ प्रमुख प्रश्न :
  • क्‍या नाबालिग इस कानून के अंतर्गत राहत का हकदार है?

हां, कानून के अंतर्गत बच्‍चे की परिभाषा के अनुसार नाबालिग भी 'घरेलू संबंध' की परिभाषा की परिधि में आते हैं। पीडब्‍ल्‍यूडीवीए की धारा 2 (बी) के अंतर्गत कोई भी व्‍यक्ति, जोकि 18 वर्ष से कम आयु का है, बच्‍चा परिभाषित होता है। इसमें कोई भी गोद लिया हुआ बच्‍चा, सौतेला बच्‍चा या पाला-पोषा हुआ बच्‍चा है।
  •  क्‍या एक नाबालिग लड़का इस कानून के अंतर्गत लाभ का आवेदन कर सकता है?

मां अपने नाबालिग बच्‍चे (चाहे लड़का हो या लड़की) की ओर से आवेदन कर सकती है। ऐसे मामलों में जहां मां न्‍यायालय से अपने लिए राहत मांगती है, पीडब्‍ल्‍यूडीवीए के अंतर्गत बच्‍चों को भी सह-आवेदक के रूप में शामिल किया जा सकता है। न्‍यायालय उचित समय पर अभिभावक या बच्‍चे का प्रतिनिधित्‍व करने के लिए किसी व्‍यक्ति को नियुक्‍त कर सकता है।
  •  'घरेलू संबंध (धारा-2एफ) की परिभाषा में इस्‍तेमाल अभिव्‍यक्ति' विवाह की तरह का संबंध का अर्थ क्‍या है?

विवाह की तरह के संबंध का तात्‍पर्य वैसे संबंधों से है जिसमें दो व्‍यक्तियों के बीच किसी कानून के अंतर्गत विवाह की पवित्रता भाव से विवाह नहीं हुआ हो, फिर भी दोनों पक्ष दुनिया की निगाह में एक दूसरे को दंपत्ति दिखाते हैं और उनके संबंध में स्थिरता और निरंतरता है। ऐसे संबंध को समान कानून विवाह के रूप में भी जाना जाता है।
  • ऐसे संबंध के साक्ष्‍य होंगे : एक समान नाम का उपयोग, समान राशन कार्ड, एक पता आदि।
  • दक्षिण अफ्रीका के इथेल रोबिन्‍स वुमेन्‍स लिगल सेंटर ट्रस्‍ट बनाम रिचर्ड गोर्डन वोल्‍कास आदि (केस नम्‍बर 7178/03, दक्षिण अफ्रीका उच्‍च न्‍यायालय, केप प्रांत) मामले को देखना लाभकारी होगा। इस मामले में यह तय करने के लिए विचार किया गया कि क्‍या कोई संबंध विवाह की तरह का संबंध है। निष्‍कर्ष पर पहुंचने के लिए निम्‍न तथ्‍यों पर गौर किया गया :
  • साझी गृहस्‍थी के प्रति पक्षों की प्रतिबद्धता
  • महत्‍वपूर्ण अवधि तक साथ-साथ रहना
  • पक्षों के बीच वित्‍तीय तथा अन्‍य निर्भरता का अस्तित्‍व। इसमें गृहस्‍थी के संदर्भ में महत्‍वपूर्ण पारस्‍परिक वित्‍तीय प्रबंध शामिल है।
  • संबंध से बच्‍चों का अस्तित्‍व
  • गृहस्‍थी तथा बच्‍चों की देख-भाल में दोनों पक्षों की भूमिका
  • विवाह की तरह संबंधों पर भारतीय मुकदमें-

बद्रीप्रसाद एआईआर 1978एससी1557 मामले में उच्‍चतम न्‍यायालय ने व्‍यवस्‍था दी कि पति-पत्‍नी की तरह लम्‍बी अवधि तक एक साथ रहने से विवाह के पक्ष में मजबूत धारणा बनती है।
  • सुमित्रा देवी (1985) 1 एससीसी 637 में उच्‍चतम न्‍यायालय ने कहा कि प्रासंगिक तथ्‍य जैसे- कितने समय से दोनों पक्ष साथ-साथ रह रहे हैं, क्‍या समाज उन्‍हें पति और पत्‍नी के रूप में मान्‍यता देता है आदि बातों पर यह तय करते समय विचार करना आवश्‍यक है कि संबंध विवाह की तरह का लगता है।
  • विवाह की तरह के संबंध में निम्‍न श्रेणी की महिलाएं आती हैं –
  • महिलाएं जिनका विवाह अवैध है या कानून के तहत अवैध हो सकता है के मामले में विवाह की कानूनी अवैधता के अतिरिक्‍त वह बाकी सभी मानकों को पूरा करती हैं।
  • वैसी महिलाएं जो विवाह किए बिना दाम्‍पत्‍य संबंध में साझी गृहस्‍थी में रह रही हैं।
  • समान कानून विवाह – जब दंपति वर्षों से साथ-साथ रह रहे हैं और बाहर की दुनिया को पति-पत्‍नी बता चुके हैं।
  •  क्‍या अभिव्‍यक्ति 'विवाह की तरह के संबंध' विवाह के बराबर है?

 कानून सभी महिलाओं, चाहे वह बहन हो, मां हो, पत्‍नी हो या साझी गृहस्‍थी में सहभागी के रूप में साथ-साथ रह रहे हों, की सुरक्षा का प्रावधान करता है। सुरक्षा प्रदान करने तक कानून विवाहित और अविवाहित का फर्क नहीं करता, लेकिन कानून कहीं भी यह नहीं कहता कि एक अवैध विवाह वैध है। कानून हिंसा से सुरक्षा देता है, साझी गृहस्‍थी में रहने का अधिकार प्रदान करता है और बच्‍चों की अल्‍पकालिक संरक्षा प्रदान करता है। लेकिन पुरूष की संपत्ति के उत्‍तराधिकार या बच्‍चे की वैधता के लिए देश के सामान्‍य कानून और पक्षों की वैयक्तिक कानूनों पर भरोसा करना होगा।

प्रतिवादी द्वारा पूछे जा सकने वाले कुछ प्रमुख प्रश्न :

  • महिला किसके विरूद्ध शिकायत कर सकती है?

महिला हिंसा का अपराध (धारा-2(क्‍यू) किसी भी वयस्‍क पुरूष के विरूद्ध शिकायत दर्ज करा सकती है। ऐसे मामलों में जब महिला विवाहित है और विवाह की तरह संबंध में रह रही है, तो वह हिंसा, अपराध करने वाले पति/पुरूष के पुरूष या महिला संबंधियों के विरूद्ध भी शिकायत दर्ज करा सकती है। पीडब्‍ल्‍यूडीवीए में भारतीय दंड संहिता की धारा-498ए के अंतर्गत धारा-2(क्‍यू) शामिल किया गया। इससे क्रूरता के लिए पति के संबंधियों, चाहे वह पुरूष या महिला हो, के खिलाफ मुकदमा चलाना संभव है। ऐसे उदाहरणों में सास, ससुर, ननद आदि आते हैं।
  •  धारा 2 (क्‍यू) के तहत संबंधियों की परिभाषा में कौन आते हैं?

पीडब्‍ल्‍यूडीवीए में संबंधी शब्‍द परिभाषित नहीं किया गया है। इसलिए इसका सामान्‍य अर्थ निकालना होगा। संबंधियों के उदाहरण पिता, माता, बहन, चाचा, ताऊ और प्रतिवादी का भाई अनुच्‍छेद 2(क्‍यू) में संबंधी के रूप में शामिल किये जा सकते हैं। अनुच्‍छेद 498ए संबंधी शब्‍द का इस्‍तेमाल करता है, जोकि परिभाषित नहीं है। इस तरह संबंधी शब्‍द का सामान्‍य अर्थ में महिला संबंधी भी शामिल होंगी।
  •  क्‍या एक पत्‍नी अपने पति के महिला संबंधियों जैसे सास, ननद के विरूद्ध शिकायत दर्ज करा सकती है?

हां, पति के महिला संबंधियों के विरूद्ध आदेश जारी किये जा सकते हैं। लेकिन अनुच्‍छेद 19(1) के प्रावधान के अनुसार महिला संबंधी के विरूद्ध बेदखली की छूट नहीं दी जा सकती। अनुच्‍छेद 19(1) की राय में अनुच्‍छेद 19 (1 बी) के तहत प्रतिवादी (महिला) को साझी गृहस्‍थी से हटाने का आदेश पारित करने का निर्देश नहीं देता।
पीडि़त महिला अपने पति के पुरूष संबंधियों या अन्‍य पुरूष साथियों के विरूद्ध सुरक्षा प्राप्‍त कर सकती है। भरण-पोषण भत्‍ता (मौद्रिक सहायता के लिए आदेशों के तहत) वही व्‍यक्ति प्राप्‍त कर सकते हैं, जो अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के दायरे में आते हैं।
  •  क्‍या एक सास अपनी बहू के विरूद्ध राहत के लिए आवेदन कर सकती है?

नहीं, सांस बहू के विरूद्ध आवेदन नहीं कर सकती (अनुच्‍छेद 2 (क्‍यू), लेकिन पुत्र और बहू के हाथों हिंसा झेल रही सास अपने बेटे और बहू के विरूद्ध, बेटे द्वारा किये गये हिंसा अपराध में बढ़ावा देने के लिए, आवेदन दायर कर सकती है। लेकिन सास साझी गृहस्‍थी से बहू की बेदखली की मांग नहीं कर सकती।

घरेलू दुर्घटना रिपोर्ट

  • घरेलू दुर्घटना रिपोर्ट (डीआईआर) क्‍या है?


पीडब्‍ल्‍यूडीवीए के फार्म 1 में डीआईआर का प्रारूप दिया गया है। पीडित महिला इसका इस्‍तेमाल संरक्षा अधिकारी और सेवा प्रदाता के समक्ष घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराने के लिए कर सकती है। यह इस तथ्‍य का रिकॉर्ड होता है कि हिंसा की घटना की रिपोर्ट की गई है, यह एनसीआर (गैर दंडनीय अपराध रिपोर्ट) की तरह है। इसे संरक्षा अधिकारी या पंजीकृत सेवा प्रदाता द्वारा करना पड़ता है और हस्‍ताक्षर करना पड़ता है। यह सार्वजनिक दस्‍तावेज है।
  •  डीआईआर कैसे रिकॉर्ड किया जाता है ?

डीआईआर को महिला के सच्‍चे बयान को विश्‍वास रूप में रिकॉर्ड किया जाता है। इसका अर्थ यह है कि सभी तरह की शिकायतें पीडब्‍ल्‍यूडीवीए के दायरे में पक्षपात रहित रूप में दर्ज की जानी चाहिए।
अगर कोई महिला अपनी पीड़ा नहीं बता पाती, तब संरक्षा अधिकारी उसे बाद में डीआईआर भरने के लिए बुला सकते हैं। संरक्षा अधिकारी महिला के आगमन संबंधी ब्‍योरों का दैनिक डायरी रखेंगे।
  •  डीआईआर रिकॉर्ड होने के बाद क्‍या किया जाता है?

संरक्षा अधिकारी डीआईआर को मजिस्‍ट्रेट को अग्रसारित करते हैं। डीआईआर की एक प्रति क्षेत्राधिकार में आने वाले थाने के प्रभारी को अग्रसारित की जाएगी।

यदि महिला चाहे तो सेवा प्रदाता डीआईआर को संरक्षा अधिकारी तथा मजिस्‍ट्रेट को भेज सकता है। ऐसे मामलों में न्‍यायालय में दाखिल आवेदन के साथ डीआईआर संलग्‍न होना चाहिए।
  •  डीआईआर प्राप्ति पर मजिस्‍ट्रेट को क्‍या करना चाहिए ?

मजिस्‍ट्रेट रिकॉर्ड रखने के लिए डीआईआर सुरक्षित रखेंगे। पीडित महिला द्वारा दाखिल किसी मामले में इसको भेजा जा सकता है। इसका इस्‍तेमाल वैसे मामलों में भी हो सकता है, जो मामला संरक्षा अधिकारी की सहायता से दायर हो और डीआईआर बाद में दिया जाए।
  •  क्‍या पीडित महिला या उसके वकील द्वारा डीआईआर भरा जा सकता है?

नहीं, संरक्षा अधिकारी या पंजीकृत सेवा प्रदाता फार्म-1 में डीआईआर भरेंगे और इस पर दोनों में से एक का हस्‍ताक्षर होगा। चूंकि डीआईआर सार्वजनिक दस्‍तावेज है, इसलिए इसे कोई सरकारी अधिकारी ही भरेगा। अनुच्‍छेद 30 पीडब्‍ल्‍यूडीवीए के अंतर्गत अपने कार्यों के संपादन में सभी संरक्षा अधिकारियों और सेवा प्रदाताओं को लोक सेवक मानता है।
  •  क्‍या पीडित महिला डीआईआर के बिना आवेदन भर सकती है?

हां, पीडित महिला राहत के लिए डीआईआर भरे बिना आवेदन दे सकती है।
  •  जहां महिला राहत के लिए आवेदन करती है, वहां मजिस्‍ट्रेट को केस दर्ज हो जाने के बाद डीआईआर की मांग करनी चाहिए?

न्‍यायालय में आवेदन देते समय डीआईआर की कोई आवश्‍यकता नहीं है, क्‍योंकि डीआईआर का चरण और उद्देश्‍य (हिंसा, घटना की रिकार्डिंग) अस्तित्‍व में नहीं रहता। एक बार न्‍यायालय में आवेदन दाखिल किये जाने के बाद मजिस्‍ट्रेट संरक्षा अधिकारी को घर का दौरा करने का आदेश दे सकता है या नियम 10 (1) के अंतर्गत परिस्थिति के अनुसार रिपोर्ट का आदेश दे सकता है।
  •  क्‍या संरक्षा अधिकारी डीआईआर रिपोर्ट दर्ज करने के लिए घर जा सकता है?

नहीं, संरक्षा अधिकारी न्‍यायालय के आदेश के बिना घर का दौरा नहीं कर सकता।

 साभार : लायर्स क्‍लेक्टिव वुमेन्‍स राइट्स इनिशिएटिव

जरूर पढ़िए भूकंपग्रस्‍त क्षेत्रों की सम्पूर्ण और सही जानकारी

भूकंप ग्रस्‍त क्षेत्रों से प्रभावित नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार भारत में भूकंप से अब तक 72 लोगों की मौत हुई है। इसमें बिहार में 57 जिसमें सीतामढ़ी में 7, मोतीहारी- 11, दरभंगा-8, सारण-2, शिवहर-3, मधुबनी-2, बेतिया-1,अररिया-6, कटिहार-1, सीवान-3, लक्‍खीसराय-3, सहरसा-2, सुपौल-2, गया-1, नालंदा-1, मुंगेर-1, मुजफ्फरपुर-1,समस्‍तीपुर-1 और पटना में एक व्‍यक्ति की मौत शामिल है। 6 लोगों की मृत्‍यु के संबंध में अभी जिला स्‍तर पर रिपोर्ट प्राप्‍त नहीं हुई है। उत्‍तर प्रदेश में भूकंप से 12 लोगों की मृत्‍यु हुई है जिसमें बाराबंकी में 2, श्रावस्‍ती-1,कानपुर देहात-1, संत कबीर नगर-1, गोरखपुर-3, बदांयू-1, कुशीनगर-1, बलरामपुर-1 और देवरिया में एक व्‍यक्ति की मौत शामिल है। उधर पश्चिम बंगाल में भूकंप से दो लोगों (दाजिर्लिंग-1,जलपाईगुड़ी-1) और राजस्‍थान में (भरतपुर-1)एक व्‍यक्ति की मौत हुई है। इसके साथ ही सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार के विभिन्‍न क्षेत्रों में आधारभूत ढांचों और भवनों को भी नुकसान पहुंचा है। इस संबंध में राज्‍यवार ब्‍यौरा निम्‍नलिखित है-


राज्‍य
मरने वालों की संख्‍या
घायलों की संख्‍या
बिहार
57
175
उत्‍तर प्रदेश
12
70
पश्चिम बंगाल
02
35
राजस्‍थान
01
07
सिक्किम
-
09
कुल
72
296

भवनों को नुकसान का विवरण

राज्‍यों के नाम
स्‍कूल
भवन
अन्‍य भवन
कुल
पूर्ण
आंशिक
सिक्किम

05
269

274
उत्‍तर प्रदेश

06
132

138
असम


8

8
बिहार

10
77

87
कुल योग

21
484

507








भारत में राहत कार्य
विभिन्‍न राज्‍य सरकारें अपने स्‍तर पर आपदा प्रबंधन कर रही हैं। अभी तक किसी भी राज्‍य ने केन्‍द्र से मदद का आग्रह नहीं किया है।

नेपाल के लिए राहत कार्य
तिहाड़ जेल प्रशासन नेपाल के लिए 1500 किलो बिस्‍कुट और 500 किलो नमकीन भेज रहा है। वर्तमान में खाद्य पैकेट पालम एयरपोर्ट पहुंच रहे हैं।

1.      उत्‍तर प्रदेश सरकार द्वारा राहत कार्य
उत्‍तर प्रदेश सरकार ने पेयजल के 10 क्रेट, 10 क्रेट बिस्‍कुट, 1 क्रेट दवाइयां और एक मेडिकल टीम जिसमें 22 डॉक्‍टर शामिल हैं, रविवार को नेपाल भेजी हैं। यह राहत सामग्री और मेडिकल दल सोमवार सुबह नेपाल पहुंच गया और इसे नेपाल प्रशासन द्वारा प्रयोग किया जाएगा। उत्‍तर प्रदेश सरकार द्वारा भेजी गई 59 बसें काठमांडू के निकट नारायण घाट क्षेत्र पहुंच गई हैं। भूस्‍खलन के कारण यह बसें वहां फंसी हैं। सड़क मार्ग के साफ होते ही ये सभी काठमांडू जाएंगी। उत्‍तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को 41 बसें नेपाल के लिए भेजी। प्रदेश सरकार नेपाल में राहत कार्यों के लिए 100 बसें प्रदान कर रही है।

2.      बिहार सरकार द्वारा राहत कार्य
बिहार सरकार द्वारा भेजी गई 10 बसें पोखरा पहुंच गई हैं और राहत कार्य में तैनात हैं। नेपाल में खराब मौसम के कारण 5 बसें पोखरा जाने वाले रास्‍ते पर फंसी हैं। बिहार नियंत्रण कक्ष में डीएम द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अब तक 300 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है।

3.      उत्‍तराखंड सरकार द्वारा राहत कार्य
उत्‍तराखंड सरकार द्वारा दी गईं 25 बसें सोमवार सुबह साढ़े 11 बजे नेपाल पहुंच गई थी और ये फंसे हुए लोगों को निकालने में मदद प्रदान कर रही है।

भारतीय सेना और एनडीआरएफ की तैनाती
भारत में :

दलों की संख्‍या
तैनाती
एनडीआरएफ पटना से एक-एक दल
बिहार (सुपौलमोतिहारीदरभंगागोपालगंज)
उत्‍तर प्रदेश ( गोरखपुर)

एनडीआरएफ की अन्‍य बटालियनों के दलों को अलर्ट पर रखा गया है। एनडीआरएफ ने दरभंगा से 180 लोगों को सुरक्षित बचाया है।          

नेपाल में:

दलों की संख्‍या
तैनाती
10 दल
 भक्‍तपुर-03, ललितपुर-02, काठमांडू-02 और सीतापैलाकाठमांडू-03

एनडीआरएफ के दलों ने 10 व्‍यक्तियों को जीवित बचाया है और 60 मृत व्‍यक्ति का पता लगाया है। एनडीआरएफ की 5वीं बटालियन द्वारा एक यूएवी (नेत्र) को नेपाल भेजा जा रहा है। यह यूएवी पुणे से दिल्‍ली पहुंच चुका है और इसे जल्‍द ही नेपाल भेजा जाएगा।

खाद्य सामग्री और अन्‍य सामान

भारत ने अब तक 22 टन खाने के पैकेट और सूखा राशन, 50 टन पेयजल, दो टन दवाईयां, 40 टैंट और 1400 कम्‍बल नेपाल भेजे हैं।

स्‍वास्‍थ्‍य दल

भारतीय वायुसेना द्वारा रैपिड ऐरो मेडिकल टीम जिसमें तीन मेडिकल अधिकारी, 24 मेडिकल सहायक और 25 बिस्‍तरों वाला अस्‍पताल, स्‍वास्‍थ्‍य उपकरणों के साथ ओपीडी और डिस्‍पेंसरी मॉड्यूल नेपाल भेजे गए हैं। भारतीय सेना द्वारा सेना फील्‍ड अस्‍पताल (तेजपुर और सुकना) से फॉरवर्ड सजिर्कल सेंटर जिसमें अर्थो, मेडिकल स्‍पेशल,मेडिकल ऑफिसर और अन्‍य विशेषज्ञ शामिल हैं, नेपाल भेजे गए हैं। यह सभी प्रति दिन 12 शल्‍य चिकित्‍सा ऑपरेशन कर सकते हैं। इसके साथ ही विभिन्‍न मात्राओं के ऑक्‍सीजन सिलेंडर (1246 लीटर के 40, 623 लीटर के 40 और 200 लीटर के 40) और 4 ऑक्‍सीजन कंसन्‍ट्रेटर भी नेपाल भेजे गए हैं।

स्‍वास्‍थ्‍य व परिवार कल्‍याण मंत्रालय का एक मेडिकल दल जिसमें 34 कर्मी, 100 स्‍ट्रेचर और तीन टन मेडिकल सामग्री शामिल है, नेपाल रवाना की गई है। उत्‍तराखंड से दो डॉक्‍टर और एक फार्मासिस्‍ट भी नेपाल गए हैं।

वायु सेना द्वारा बचाव और राहत उड़ानें

वायु सेना द्वारा कुल 43 बचाव और राहत उड़ानें संचालित की गई जिसमें परिवहन विमानों द्वारा 16 और हे‍लीकॉप्टर द्वारा 27 उड़ानें शामिल हैं। राहत और बचाव कार्यों में चार सी-17, तीन सी-130, तीन आईएल-76, दो एएन-32, छह एमएलएच और एआरसी का एक आईएल-76 विमान शामिल हैं।

दूरसंचार

नेपाल सेना के काठमांडू स्थित मुख्‍यालय में इनमारसेट की स्‍थापना की गई है और दो और सेट की स्‍थापना की जा रही है। इसके साथ ही समन्‍वय निदेशालय, पुलिस बेतार का 7 कर्मियों का दल जिसके पास एचपी बैरेट सेट 100 डब्‍ल्‍यू (15), वीएचएफ स्‍टैटिक 20 डब्‍ल्‍यू (50) और वीएचएफ हैंडहेल्‍ड 4 डब्‍ल्‍यू (200) के साथ राहत और बचाव कार्यों में तैनात है।

बचाए गए व्‍यक्तियों की संख्‍या- (कुल बचाए गए लोग- 10,210)

वायु मार्ग द्वारा
सड़क मार्ग द्वारा/जमीनी मार्ग द्वारा
एयरलाइन
वायु सेना
कुल
उत्‍तरप्रदेश
बिहार
उत्‍तराखंड
कुल


2277
423
7500
10
7933

सभी प्रवासी बांग्लादेशी हिंदुओं को मिलेगी भारतीय नागरिकता - अमित शाह

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि प्रदेश में अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो सरकार बांग्लादेश के हिंदू शरणार्थियों को भारत की नागरिकरता प्रदान करेगी। असम में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। शाह यहां रविवार को एक रैली  को संबोधित कर रहे थे।

जिसमें उन्होंने कहा कि, 'धार्मिक अशांति के चलते कुछ हिंदू बांग्लादेश से यहां आए हैं। बीजेपी की  सरकार उन सभी हिंदू शरणार्थियों को भारत की नागरिकता प्रदान करेगी जिन्हें धार्मिक उत्पीडऩ के कारण बांग्लादेश छोडऩा पड़ा था।शाह ने कहा कि उनकी पार्टी न सिर्फ असम में बल्कि देश भर में सभी प्रवासी बांग्लादेशी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता देने पर काम करेगी। 
 
असम की दो दिनों की यात्रा पर आए शाह ने कहा, असम चुनाव राज्य को अवैध बांग्लादेशी नागरिकों से मुक्त करने के लिए लड़ा जाएगा। शाह ने आगे कहा कि असम चुनाव असम और पूर्वोत्तर के विकास के लिए भी होगा।' शाह ने अपने भाषण के दौरान कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार पर बांग्लादेश की ओर से हो रही घुसपैठ को रोकने अथवा घुसपैठियों को वापस भेजने में नाकाम रही है।
 
शाह ने कहा, 'हमने एनआरसी (नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन) को आधुनिक करने के लिए धन दिया लेकिन राज्य सरकार यह नहीं करना चाहती क्योंकि उन्हें उनका वोट मिला है। यह लंबे समय तक नहीं चलेगा। बीजेपी उन्हें असम की सरजमीं से अवश्य निकालेगी।'शाह ने कहा कि असम को कांग्रेस के 15 साल के भ्रष्टाचार के शासन से मुक्त करने और राज्य के चौतरफा विकास के लिए इसकी डोर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सौंपने की अपील की।

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