हिन्दू देवी-देवताओं के किए गए अपमान को लेकर चक्का जाम


आज हिन्दू संगठनों ने स्थानीय प्रभाकर चौक मे एक निजी चैनल द्वारा हिन्दू देवी-देवताओं के किए गए अपमान को लेकर चक्का जाम कर शहर में रोष-प्रदर्शन किया तथा नारेबाजी की। प्रदर्शन के पश्चात सभी हिन्दू संगठनों द्वारा निजी चैनल को बंद किए जाने तथा आरोपी के विरुद्ध धार्मिक भावनाएं भड़काए जाने के कानून के अंतर्गत केस दर्ज किए जाने का मांग-पत्र सब-तहसील में दिया।

भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष डा. अजय कुमार छाबड़ा ने बताया कि पुणे से प्रसारित होने वाले एक चैनल में ब्रह्मा, विष्णु, महेश के अस्तित्व पर कीचड़ उछालना तथा उनके अस्तित्व को काल्पनिक बताया जाना हिन्दुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करना है। वक्ताओं ने कहा कि केन्द्र की कांग्रेस सरकार की शह पर ही कई संस्थाएं हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करती चली आई हैं।

इस अवसर पर शिवसेना (समाजवादी) जिला प्रधान गुरमीत सिंह जंगी, लोक भलाई संस्था के राजेश अरोड़ा, धर्म जागरण मंच के गुलशन सर्राफ, वाल्मीकि भाईचारे से बिशन दास, मंडल प्रधान गगनदीप सिंह, त्रिलोक चन्द, बिशन दास, नरिन्द्र कुमार शर्मा, नवदीप नोना, सोनू शर्मा, चांदी नाथ, प्रदीप कुमार, शिवसेना (बाल ठाकरे) अध्यक्ष मंडल श्री हरगोबिन्दपुर राकेश शर्मा, नन्दू, काला भाटिया, गोरा भाटिया, रणजीत, दलजीत सिंह, लवप्रीत, हरप्रीत, जसपाल, मंगलदेव भाटिया व लतीफ अहमद आदि उपस्थित थे।    

पटना में मोदी को बुलाने के लिए नारेबाजी


भाजपा के युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने आगामी हुंकार रैली में केंद्रीय और राज्य नेतृत्व पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को बिहार बुलाने के लिए दबाव बनाने की कवायद में आज पार्टी नेताओं के समक्ष जमकर नारेबाजी की.

नरेंद्र मोदी के समर्थन में पार्टी कार्यकर्ताओं की अबतक की सुगबुगाहट भाजपा युवा मोर्चा के कार्यक्रम में खुलकर प्रकट हुई जहां युवाओं ने केंद्रीय नेता और बिहार मामलों के प्रभारी अनंत कुमार और प्रदेश अध्यक्ष सीपी ठाकुर, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के समक्ष गुजरात के मुख्यमंत्री के समर्थन में करीब 15 मिनट तक नारेबाजी की.

नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारेबाजी का आलम यह था कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार सहित प्रदेश के जितने भी नेता आये उनके संबोधन के दौरान बार बार युवा कार्यकर्ता नारेबाजी करते रहे. नारेबाजी में युवक कभी नरेंद्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाने के समर्थन में तो कभी उन्हें पटना बुलाने की मांग कर रहे थे.

भाजपा ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 111वीं जयंती के अवसर पर प्रांतीय युवा सम्मेलन का आयोजन किया था जिसमें केंद्रीय नेतृत्व की ओर से अनंत कुमार पहुंचे थे. बार बार अनुरोध के बाद भी युवा कार्यकर्ता पूरे कार्यक्रम के दौरान शांत नहीं हुए.

अनंत कुमार ने भी अपने संबोधन के दौरान कहा कि कांग्रेस को 2013 या 2014 के लोकसभा चुनावों में दिल्ली की सत्ता से हटाने के लिए गुजरात और बिहार के नेतृत्व को साथ साथ काम करना होगा. कुमार संकेत में कुछ कहना चाहते थे जिसका खुलासा उन्होंने नहीं किया और केवल कहा , ‘‘इश्क और जंग में केवल इशारा ही काफी है.’’हालांकि बाद में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा और जदयू मिलकर बिहार में 40 लोकसभा सीटें जीतेंगे.

इससे पहले युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने सांसद राधा मोहन सिंह, राज्य के पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधायक नीतिन नवीन के संबोधन के दौरान बार बार नरेंद्र मोदी जिंदाबाद के नारे लगाकर अपना संदेश पार्टी नेतृत्व को दिया. पार्टी नेताओं ने जब पार्टी के समर्थन में नारेबाजी की अपील की तो कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे लगाते रहे.

भाजपा के वरिष्ठ नेता की हत्या

प्रदेश बीजेपी के सीनियर नेता यशपाल चौहान व उनके भाई की जनपद के कस्बा कासिमपुर में दिनदहाड़े गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। हमले में यशपाल चौहान के दो भतीजे भी घायल हुए हैं, जिन्हें गंभीर हालत में जे. एन. मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर मौके से भाग निकलने में कामयाब रहे। घटना के मूल में ठेकेदारी में पैसे के लेनदेन का विवाद बताया जा रहा है। डीएम-एसएसपी ने हत्यारों को पकड़ने के लिए पुलिस टीम गठित कर दी है।

पुलिस के मुताबिक बीजेपी युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष यशपाल चौहान, उनके भाई अनिल चौहान व दो भतीजे कार में सवार थे। कासिमपुर स्थित पंजाब नैशनल बैंक की शाखा के सामने कई बाइक पर सवार लगभग आधा दर्जन हमलावरों ने घेरकर कार पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। अचानक हुए इस हमेल में यशपाल व अनिल की मौके पर ही मौत हो गई। घटना में एक अन्य व्यक्ति का भी घायल होना बताया जा रहा है, जो पैसे के लेनदेन के सिलसिले में बैंक शाखा आया था। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ठाकुर जयबीर सिंह के गृह एवं विधानसभा क्षेत्र में हुई इस घटना को लेकर सनसनी व चर्चा है। अलीगढ़ परिक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक ने बताया है कि यशपाल चौहान का कासिमपुर स्थित हरदुआगंज तापीय विद्युत परियोजना के स्क्रैप आदि की नीलामी के ठेके में कुछ लोगों से धन के लेनदेन का विवाद चल रहा था। घायलों व उनके परिजनों ने पुलिस को हमलावरों के रूप में कुछ लोगों के नाम बताये हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। इस गोलाबारी में करीब पचास राउंड फायरिंग होने की बात कही जा रही है।

प्यास लगी है तो पेशाब पी लो - जम्मू कश्मीर पुलिस

अलगाववादी नेता यासिन मलिक जब लाल चौक पर काले झंडे फहरा रहे थे तो जम्मू कश्मीर पुलिस चाय और सिगरेट से उनकी आवभगत में जुटी थी परंतु जब राष्ट्रवादी कार्यकर्ता 'एकता यात्रा' को लेकर तिरंगा लहराने पहुंचे तो उन्हें पानी तक नहीं दिया गया।
यही नहीं पुलिस ने उन्हें यह तक कह दिया कि प्यास लगी है तो पेशाब पी लो यह कहना है एकता यात्रा से लौटे भाजयुमो कार्यकर्ताओं का।

राजधानी में लौटे दर्जनों घायल कार्यकर्ताओं के चेहरे पर तिरंगा फहराने के लिए ऐसे व्यवहार की पीड़ा साफ देखी जा सकती थी। यह वे कार्यकर्ता थे जो युवा मोर्चा अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और अन्य नेताओं की गिरफ्तारी के बाद छोटे-छोटे गुटों में 26 जनवरी को लालचौक पहुंचे और उनके साथ जम्मूकश्मीर पुलिस द्वारा जानवरों जैसा व्यवहार किया गया।

इन्हीं में एक कार्यकर्ता गुडग़ांव के इंजीनियर के. के. उपाध्याय थे जिन्होंने सबसे पहले तिरंगा फहराने की कोशिश की परंतु पुलिस ने न सिर्फ उनके साथ मारपीट की बल्कि तिरंगा तक फाड दिया। दूसरे गुट की भी कमोबेश यहीं स्थिति हुई और इनमें से अधिकांश के हाथ-पैरों में फे्रेक्चर हो गए। गिरफ्तार भाजपा कार्यकर्ताओं का यह भी कहना था कि अलगाववादियों की तरह ही जम्मूकश्मीर पुलिस ने भी भारतीय कुत्तों वापस जाओ के पोस्टर थामे हुए थे।

भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने बताया कि कार्यकर्ताओं के प्रति जम्मूकश्मीर पुलिस का रवैया आतंकियों से भी बदतर था। कार्यकर्ताओं को थर्ड डिग्री की यातनाएं दी गई और जमा देने वाली ठंड में उनके कपड़े फाड दिए गए।

अदालत और संसद में प्रभावी ढंग से आवाज उठाएंगे - अनुराग ठाकुर

भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने आज कहा कि श्रीनगर के लालचौक पर राष्ट्र ध्वज फहराने से रोकने के केंद्र तथा राज्य सरकार के दमनात्मक कदम के खिलाफ पार्टी अदालत और संसद में प्रभावी ढंग से आवाज उठायेगी।

राष्ट्रीय एकता यात्रा की समाप्ति पर ‘भाषा’ से विशेष बातचीत में अनुराग ने अपने कार्यक्रम को सफल बताने का दावा करते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ता हाथों में तिरंगा लिये लाल चौक पर गए और राष्ट्रगान गाया। इस दौरान 26 कार्यकर्ताओं को लाल चौक पर गिरफ्तार किया गया। यह तथ्य सामने इसलिए नहीं आया क्योंकि मीडिया को वहां जाने की इजाजत नहीं थी।

यह पूछे जाने पर कि राजनीतिक विरोधी समेत भाजपा गठबंधन के घटक दल तक राष्ट्रीय एकता यात्रा के औचित्य पर प्रश्न खड़ा कर रहे हैं, उन्होंने कहा, ‘‘ राजनीतिक और गठबंधन धर्म का अपना महत्व है लेकिन राष्ट्र धर्म सर्वोपरि है। हमने राष्ट्र धर्म का पालन किया है और हमें नहीं लगता कि यात्रा का समय गलत था।’’

पिछले कुछ समय में जम्मू कश्मीर में उत्पन्न विषम परिस्थितियों और शांति स्थापना के प्रयासों के मद्देनजर इन प्रयासों के मार्ग में बाधक नहीं बनने के प्रधानमंत्री समेत कई लोगों के आग्रह के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘ वास्तव में प्रधानमंत्री ने जम्मू कश्मीर के संदर्भ में कोई सार्थक पहल नहीं की और इस राज्य के बारे में उनकी कोई स्पष्ट नीति भी नहीं है।

प्रधानमंत्री महत्वपूर्ण विषयों पर चुप रहते हैं और उनकी छवि एक ‘अर्थशास्त्री’ से ‘व्यर्थशास्त्री’ प्रधानमंत्री के रूप में बदल रही है।’’ उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के अलगाववादी दिल्ली में आकर राष्ट्र विरोधी बयान देते हैं, राज्य में पाकिस्तान का झंडा फहराने की खबरें मिलती है, पड़ोसी देश के पैसे से सेना के जवानों पर पत्थर फेंकने की घटना सामने आती है लेकिन सरकार कोई कदम नहीं उठाती है, उल्टे हमें तिरंगा फहराने पर जेल में डाल दिया जाता है।

राष्ट्र ध्वज फहराकर क्या राजनीति की जा सकती है - नितिन गडकरी

जम्मू में वरिष्ठ भाजपा नेताओं को हिरासत में लेने की कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए भाजपा ने बुधवार को उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि पार्टी श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने पर राजनीति कर रही है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि लाल चौक पर तिरंगा फहराने के पीछे राजनीति है। मैं नहीं समझता कि राष्ट्र ध्वज फहराकर क्या राजनीति की जा सकती है। यह राजनीति नहीं बल्कि हमारा कर्तव्य है।

भाजपा मुख्यालय में राष्ट्र ध्वज फहराने के बाद गडकरी ने संवाददाताओं से यह बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और जम्मू-कश्मीर की उमर अब्दुल्ला सरकार अलगाववादियों के दबाव के आगे झुक गई है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली, सुषमा स्वराज और अनंत कुमार को हिरासत में लिए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए गडकरी ने उम्मीद जतायी कि उनके कुछ पार्टी नेता लाल चौक पर तिरंगा फहराने में सफल होंगे।

गौरतलब है कि बुधवार को दो भाजपा कार्यकर्ताओं को लाल चौक में घुसने का प्रयास करते हुए गिरफ्तार किया गया। बहरहाल, भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने बुधवार सुबह अपनी भूख हड़ताल तोड़ दी, जब गडकरी ने उनसे ऐसा करने का आग्रह किया था।

गडकरी ने कहा कि मैंने उनसे आग्रह किया कि राष्ट्रीय त्योहार के दिन भूख हड़ताल पर नहीं रहे। भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा कि पार्टी का हिरासत में लिए गए वरिष्ठ नेताओं के साथ सम्पर्क नहीं है।

इससे पहले जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अरुण जेटली समेत बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल को गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का न्योता दिया। इसके साथ ही उमर ने गिरफ्तार किए गए बीजेपी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को छोड़ देने के आदेश दिए।

उमर अब्दुल्ला ने बीजेपी नेताओं को राज्य में होने वाले जम्मू या श्रीनगर में होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में से किसी में भी शामिल होने का न्योता दिया। उमर ने यह कदम बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं के गिरफ्तार होने के कुछ ही घंटे बाद उठाया। उमर अब्दुल्ला ने गणतंत्र दिवस की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक भी बुलाई। उमर ने लोगों से गणतंत्र दिवस के मौके पर अलगाववादियों के मंसूबों को कामयाब न होने देने की अपील भी की।

इससे पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मंगलवार को बीजेपी की राष्ट्रीय एकता यात्रा कठुआ में रोक दी थी और बीजेपी के शीर्ष नेताओं को पांच सौ कार्यकर्ताओं के साथ जम्मू में घुसने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार कर लिया था। गौरतलब है कि कोलकाता से 13 जनवरी को शुरू हुई पार्टी की यह यात्रा श्रीनगर के लाल चौक पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर संपन्न होनी थी।

कठुआ के लखनपुर क्षेत्र में गिरफ्तार किए गए ये नेता गणतंत्र दिवस के अवसर पर श्रीनगर के लाल चौक में झंडा फहराने के लिए सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ पठानकोट से रावी नदी का पुल पार कर जम्मू के लखनपुर इलाके में घुसे थे। इन्हें श्रीनगर जाने से रोकने के लिए प्रशासन ने राज्य में धारा 144 लागू की थी।

गिरफ्तार नेताओं में संसद के दोनों सदनों में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, पार्टी के उपाध्यक्ष शांता कुमार, महासचिव अनंत कुमार, बीजेपी युवा मोर्चा के प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर भी शामिल थे। इन नेताओं को उसी जगह से गिरफ्तार किया गया जहां से 1953 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को गिरफ्तार किया गया था।

झंडे के नाम पर दंगे करवाना चाहती है भाजपा - लालू यादव

भारतीय जनता युवा मोर्चा की राष्ट्रीय एकता यात्रा की निंदा करते हुए राजद सुप्रीमो और पूर्व केंद्रीय मंत्री लालू प्रसाद ने आरोप लगाया कि कश्मीर के लाल चौक पर झंडा फहराने के नाम पर भाजपा देश में दंगा कराना चाहती है.

कर्पूरी ठाकुर की 87वीं जयंती पर पटना में राजद द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में लालू ने यह बात कही.लालू ने कहा कि हाल में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा को उम्मीद से अधिक सीट हासिल होने से उनकी पार्टी और आरएसएस का मन बढ़ गया है और अब उनकी नजर केंद्र की सत्ता पर है.

अगले संसदीय चुनाव को ध्यान में रखकर वह इस तरह के कार्यक्रम के जरिए देश का सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ रहे हैं.राजद सुप्रीमो ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर वहां की सरकार और वहां की जनता तिरंगा फहराती आ रही है तो ऐसे में भाजपा को झंडा फहराने की आवश्यकता क्यों आ पड़ी.

लालू प्रसाद ने भाजपा पर इस यात्रा के जरिए खतरनाक साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कहा कि स्वयं को धर्मनिरपेक्ष बताने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रदेश से उक्त यात्रा में शामिल होने के लिए जाने वालों को रोकना और पकड़ना चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस इस मामले में चुप बैठी हुर्ह है.

हमारी माओं ने कायर नहीं जने,हम झंडा फहरा कर रहेंगे -सुषमा स्वराज

...हमें कहा जा रहा है 'देखते हैं कौन झंडा फहराता है और किसका झंडा फहराता हैं..अरे हमारी माओं ने कायर जने हैं क्या? ...

.... हम जम्मू पहुंच चुके हैं... ऐसा लगता है कि टर्मिनल के गेट बंद कर दिए गए हैं... किसी को जाने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने हम पर crpc की धारा 144 लगाई है...वे चाहते हैं कि हम वापस चले जाएं...

अब हम बाहर आ गए हैं...हम धरने पर बैठ गए हैं...वह हमसे प्लेन में बैठकर वापस जाने को कह रहे हैं..हमने मना कर दिया है..

उन्हें हमें गिरफ्तार करने की पावर है...वे हमें वापस कैसे भेज सकते हैं...हम लाल चौक पर झंडा फहराना चाहते हैं...सरकार हमें अपने रिस्क पर वहां जाने दे।

(बीजेपी लीडर सुषमा स्वराज ने से ट्वीट जम्मू एयरपोर्ट से किए। तिरंगा यात्रा पर निगले बीजेपी नेताओं को एयरपोर्ट पर ही रोक लिया गया था।)

भाजपा के डर से रणभूमि बनाया गया कश्मीर का प्रवेशद्वार

जम्मू एवं कश्मीर के श्रीनगर के लालचौक पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 26 जनवरी को तिरंगा फहराने की योजना से पहले पंजाब की सीमा से सटे राज्य का प्रवेश द्वार समझे जाने वाले लखनपुर में पुलिस बलों की टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं। बख्तरबंद वाहनों की आवाजाही हो रही है तथा यहां आने वाली हरेक बस की तलाशी ली जा रही है।

सरकार ने भाजपा की प्रस्तावित योजना को रोकने का संकल्प लिया है। पंजाब से सटे इस क्षेत्र में पुलिसबल तैनात कर दिए गए हैं। पुलिस लाठियों, आंसू गैस के गोलों से लैस है और वह रावी नदी के पुल पर पैनी नजर रखे हुए है। इस पुल के मध्य को पंजाब और जम्मू एवं कश्मीर की विभाजक रेखा माना जाता है।

करीब 100 मीटर के पुल पर तैनात पुलिस अधिकारियों में से एक ने बताया, "हमें हिदायत दी गई है कि भाजपा कार्यकर्ताओं को यहां से हरगिज राज्य में दाखिल होने की इजाजत न दी जाए।"

जम्मू एवं कश्मीर सीमा पर 2,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं तथा बहुत से अन्य को तैयार रखा गया है। पुलिस अधिकारियों को मोबाइल फोन या वायरलैस सेट्स के माध्यम से हिदायते दी जा रही हैं और उनके शीर्ष अधिकारी ताजा हालात का जानकारी ले रहे हैं।

ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है कि भाजपा कार्यकर्ता वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं के वेश में देश के अन्य हिस्सों से राज्य में दाखिल हो सकते हैं और गड़बड़ी फैला सकते हैं।

पंजाब से आने वाली सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग 1-ए के नाम से जाना जाता है और यही इकलौता सड़क मार्ग जम्मू एवं कश्मीर को शेष भारत से जोड़ता है। लखनपुर के बहुत से प्रवेश द्वार हैं।

कठुआ की उपायुक्त जाहिदा खान ने कई बार शहर का दौरा किया और हिदायतें दीं लेकिन उन्होंने संवाददाताओं के प्रश्नों का जवाब देने से इंकार कर दिया। यह क्षेत्र खान के ही अधिकारक्षेत्र में आता है।

एक शीर्ष अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "भाजपा कार्यकर्ताओं को जम्मू एवं कश्मीर में दाखिल होने से रोकने के लिए सभी जरूरी उपाय कर लिए गए हैं।" उन्होंने बताया कि पुलिस को हिदायत दी गई है कि आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग किया जाए।

सामान की आपूर्ति करने वाले ट्रकों तक की तलाशी ली जा रही है। जम्मू एवं कश्मीर को सभी प्रकार की आपूर्ति इसी सड़क मार्ग से की जाती है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस क्षेत्र में ऐसी सख्ती पहले कभी नहीं की गई। इतना ही नहीं 19 साल पहले के भाजपा मार्च के दौरान भी इतनी सख्ती नहीं की गई थी।

सरकार अलगाववादियों के आगे समर्पण कर चुकी है - आडवाणी

श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने और 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर जेपीसी मांग को लेकर अड़ी भाजपा ने केंद्र की संप्रग सरकार को आड़े हाथों लिया है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने तिरंगा फहराने के भारतीय जनता युवा मोर्चा [भाजयुमो] के कार्यक्रम के बारे में प्रधानमंत्री की अपील को खारिज करते हुए सरकार पर अलगाववादियों के आगे समर्पण का आरोप लगाया है।

तिरंगा फहराने को राजनीतिक लाभ की राजनीति करार देने के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आडवाणी ने अपने ब्लॉग में इसे अलगाववादियों के खिलाफ चुनौती बताया है। भाजयुमो नेताओं को रोकने के लिए जम्मू-कश्मीर की सीमाएं सील किए जाने का विरोध करते हुए आडवाणी ने राज्य सरकार पर अलगाववादियों के आगे घुटने टेकने का आरोप लगाया।

अरुण जेटली ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि तिरंगा यात्रा को रोकने के लिए राज्य की सीमाओं को सील करना अलोकतांत्रिक है और इसे कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।इसके साथ ही विपक्ष को माओवादियों से हाथ मिलाने की सलाह देने वाले प्रणब मुखर्जी के बयान को लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने स्तब्धकारी करार दिया है।

उनके अनुसार, यह बयान बताता है कि सरकार का संसदीय संस्थाओं पर विश्वास नहीं है। बयान पर हैरानी जताते हुए उन्होंने सवाल किया कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जेपीसी से जांच की मांग करना संसदीय लोकतंत्र या संविधान में आस्था नहीं होने का द्योतक कैसे हो सकता है।

गौरतलब है कि वित्त मंत्री मुखर्जी ने शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष के संसद के बहिष्कार पर टिप्पणी करते हुए पिछले शनिवार को कहा था कि विपक्ष की संसदीय लोकतंत्र में कोई आस्था नहीं है और उन्हें माओवादियों के साथ हाथ मिला लेना चाहिए।

सरकार ने अपने ही देश में तिरंगा फहराने पर रोक के आदेश दिए

जम्मू-कश्मीर सरकार ने गणतंत्र दिवस पर श्रीनगर के लाल चौक में तिरंगा फहराने के भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रम को नाकाम बनाने की पूरी तैयारी कर ली है। सरकार ने पुलिस प्रशासन को आदेश दिये हैं कि राज्य की शांति के लिए खतरा बनने वाली इस यात्रा को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।

यह फैसला गुरुवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। सनद रहे कि इस मामले में बुधवार को ही उमर नई दिल्ली में गृह मंत्री पी चिदंबरम और संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर लौटे हैं।

वहीं लाल चौक में तिरंगा फहराने को लेकर भाजपा के तेवर भी कड़े हो गए हैं। प्रदेश अध्यक्ष शमशेर सिंह का कहना है कि तिरंगा फहराने के लिए भाजपा को सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष मुनीश शर्मा ने दावा किया कि तिरंगा यात्रा में एक लाख कार्यकर्ता व युवा जुटेंगे।

गौरतलब है कि भारतीय जनता युवा मोर्चा की राष्ट्रीय एकता यात्रा में हिस्सा लेने के लिए हजारों कार्यकर्ता 24 जनवरी को राज्य में प्रवेश करेंगे। जम्मू में 25 जनवरी को रैली करने के बाद उनकी लाल चौक में तिरंगा फहराने की योजना है।

देश के किसी भी हिस्से में तिरंगा फहरा सकते है हम - अनुराग ठाकुर

26 जनवरी को कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने के मामले में बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने कहा है कि देश के किसी भी हिस्से में तिरंगा फहराने का उन्हें अधिकार है। उन्होंने कहा है कि अब्दुल्ला सरकार उन्हें इससे रोक रही है।

युवा मोर्चा के अध्यक्ष और सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि उन्हें देश के किसी भी हिस्से में तिरंगा फहराने का अधिकार है। उन्होंने कहा जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अलगाववादियों की भाषा बोल रहे हैं।

इस मामले में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को केन्द्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम से मुलाकात की और उन्हें स्थिति से अवगत कराया। चिदंबरम से मुलाकात के बाद उमर ने बताया कि उन्होंने बीजेपी की घोषणा और राज्य सरकार की चिंता की जानकारी चिदंबरम को दे दी। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने अपने स्तर पर भी स्थिति की समीक्षा की है।

राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में उठाए जाने वाले कदमों के बारे में पूछे जाने पर उमर ने कहा कि 26 जनवरी से पहले तय करेंगे कि हालात से निपटने के लिए क्या कदम उठाने हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गृह मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में रहेगी। गृह मंत्रालय और राज्य सरकार दोनों मिलकर तय करेंगे कि क्या कार्रवाई करनी है।

हरियाणा की राजनीति को एक नया मोड़ देगी भाजपा की रैली - गुर्जर

रोहतक में 6 फरवरी को होने वाली हरियाणा भाजपा की महासंग्राम रैली हरियाणा की राजनीति को एक नया मोड़ देगी।

भाजपा हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण पाल गुर्जर ने आज यहां भाजयूमो के वरिष्ठ नेता असीम गोयल के निवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यह रैली कांग्रेस के घोटालों को तो उजागर करेगी ही साथ ही साथ कांग्रेस द्वारा बढ़ाई गई महंगाई व उसकी जनविरोधी नीतियों से भी आम आदमी को अवगत करवाएगी।

उन्होंने कहा कि अब लोग कांग्रेस से छुटकारा पाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने गरीबों की हिमायती बनकर आम आदमी के वोट बटोर कर सत्ता हो हासिल कर ली, लेकिन उसकी सारी नीतियां पूंजीपतियों और बड़े लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए हैं।

उन्होंने कहा कि पूरा देश आकाश को छू रही महंगाई से पहले ही परेशान था और अब सरकार ने पैट्रोल के दामों में बढ़ोतरी करके आम आदमी की कमर तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि आज हालत यह है कि आम आदमी दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि मन मोहन सिंह एक असफल प्रधानमंत्री साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को प्रधानमंत्री से जो उम्मीदें थीं, वे सारी नाकाम साबित हुई हैं। उन्होंने कहा कि देश के लोग आने वाले चुनावों में कांग्रेस को सबक सिखाने का मन बना चुके हैं।

श्री गुर्जर ने कहा कि हरियाणा के हालात भी काफी खराब हैं। राज्य सरकार ने दोपहिया व चौपहिया वाहनों की रजिस्ट्रेशन फीस में कईं गुना बढ़ोतरी करके आम आदमी की परेशानी को बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि केवल यही नहीं राजमार्गों पर कईं जगह नए टोल टैक्स केन्द्र खोले जाने की तैयारी भी की जा रही है जिससे वाहन चालकों का सड़कों पर चलना भी दुर्भर हो जाएगा।

इस अवसर पर भाजपा के पूर्व सांसद रतन लाल कटारिया, पार्टी के जिलाध्यक्ष नीता खेड़ा, प्रदेश उपाध्यक्ष बंतो कटारिया, पूर्व विधायक फकीर चंद अग्रवाल व पार्टी के मानवाधिकार प्रकोष्ट के प्रदेश संयोजक संदीप सचदेवा मौजूद थे।

जहां देशभक्ति अपराध है...

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर फारूख का कहना है कि गणतंत्र दिवस पर भाजपा श्रीनगर के लालचौक पर तिरंगा फहराए क्योंकि इससे हिंसा भडक़ सकती है। आखिर एक मुख्यमंत्री के मुंह से क्या ऐसे बयान शोभा देते हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर लालचौक में तिरंगा फहराने से किसे दर्द होता है।

उमर की चेतावनी है कि इस घटना से कश्मीर के हालात बिगड़ते हैं तो इसके लिए भाजपा ही जिम्मेदार होगी। निश्चित ही एक कमजोर शासक ही ऐसे बयान दे सकता है। हालांकि अपने विवादित बयानों को लेकर उमर की काफी आलोचना हो चुकी है किंतु लगता है कि इससे उन्होंने कोई सबक नहीं सीखा है। वे लगातार जो कह और कर रहे हैं उससे साफ लगता है कि न तो उनमें राजनीतिक समझ है न ही प्रशासनिक काबलियत। कश्मीर के शासक को कितना जिम्मेदार होना चाहिए इसका अंदाजा भी उन्हें नहीं है।

आखिर मुख्यमंत्री ही अगर ऐसे भडक़ाउ बयान देगा तो आगे क्या बचता है। सही मायने में उमर अब अलगाववादियों की ही भाषा बोलने लगे हैं। एक आजाद देश में कोई भी नागरिक या समूह अगर तिरंगा फहराना चाहता है तो उसे रोका नहीं जाना चाहिए। देश के भीतर अगर इस तरह की प्रतिक्रियाएं एक संवैधानिक पद पर बैठे लोग कर रहे है तो हालात को समझा जा सकता है। इसके पूर्व भी उमर, भारत में कश्मीर के विलय को लेकर एक आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुके हैं ऐसे व्यक्ति से क्या उम्मीद की जा सकती है।

पाकिस्तान के झंडे और "गो इंडियंस" का बैनर लेकर प्रर्दशन करने वालों को खुश करने के लिए हमारी सरकार सेनाध्यक्षों के विरोध के बावजूद आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर्स एक्ट में बदलाव करने का विचार करने लगती है। सेनाध्यक्षों के विरोध के बावजूद आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर्स एक्ट में बदलाव की गंदी राजनीति से हमारे सुरक्षाबलों के हाथ बंध जाएंगें। हमारी सरकार इस माध्यम से जो करने जा रही है वह देश की एकता-अखंडता को छिन्न-भिन्न करने की एक गहरी साजिश है।

जिस देश की राजनीति के हाथ अफजल गुरू की फांसी की फाइलों को छूते हाथ कांपते हों वह न जाने किस दबाव में देश की सुरक्षा से समझौता करने जा रही है। यह बदलाव होगा हमारे जवानों की लाशों पर। इस बदलाव के तहत सीमा पर अथवा अन्य अशांत क्षेत्रों में डटी फौजें किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकेंगीं। दंगों के हालात में उन पर गोली नहीं चला सकेंगीं। जी हां, फौजियों को जनता मारेगी, जैसा कि सोपोर में हम सबने देखा। घाटी में पाकिस्तानी मुद्रा चलाने की कोशिशें भी इसी देशतोडक़ राजनीति का हिस्सा है।

यह गंदा खेल,अपमान और आतंकवाद को इतना खुला संरक्षण देख कर कोई अगर चुप रह सकता है तो वह भारत की महान सरकार ही हो सकती है। आप कश्मीरी हिंदुओं को लौटाने की बात न करें, हां सेना को वापस बुला लें।क्या हम एक ऐसे देश में रह रहे हैं जिसकी घटिया राजनीति ने हम भारत के लोगों को इतना लाचार और बेचारा बना दिया है कि हम वोट की राजनीति से आगे की न सोच पाएं? क्या हमारी सरकारों और वोट के लालची राजनीतिक दलों ने यह तय कर लिया है कि देश और उसकी जनता का कितना भी अपमान होता रहे, हमारे सुरक्षा बल रोज आतंकवादियों-नक्सलवादियों का गोलियां का शिकार होकर तिरंगें में लपेटे जाते रहें और हम उनकी लाशों को सलामी देते रहें-पर इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ेगा।

किंतु अफसोस इस बात का है कि गणतंत्र को चलाने और राजधर्म को निभाने की जिम्मेदारी जिन लोगों पर है वे वोट बैंक से आगे की सोच नहीं पाते। वे देशद्रोह को भी जायज मानते हैं और उनके लिए अभिव्यक्ति के नाम पर कोई भी कुछ भी कहने और बकने को हर देशद्रोही आजाद है। दुनिया का कौन सा देश होगा जहां उसके देश के खिलाफ ऐसी बकवास करने की आजादी होगी। भारत ही है जहां आप भारत मां को डायन और राष्ट्रपिता को शैतान की औलाद कहने के बाद भी भारतीय राजनीति में झंडे गाड़ सकते हैं।

राजनीति में आज लोकप्रिय हुए तमाम चेहरे अपने गंदे और धटिया बयानों के आधार पर ही आगे बढ़े हैं। अभिव्यक्ति की आजादी का ऐसा दुरूपयोग निश्चय ही दुखद है। कश्मीर का संकट दरअसल उसी देशतोडक़ द्विराष्ट्रवाद की मानसिकता से उपजा है जिसके चलते भारत का विभाजन हुआ। पाकिस्तान और द्विराष्ट्रवाद की समर्थक ताकतें यह कैसे सह सकती हैं कि कोई भी मुस्लिम बहुल इलाका हिंदुस्तान के साथ रहे। किंतु भारत को यह मानना होगा कि कश्मीर में उसकी पराजय आखिरी पराजय नहीं होगी।

इससे हिदुस्तान में रहने वाले हिंदु-मुस्लिम रिश्तों की नींव हिल जाएगी और सामाजिक एकता का ताना-बाना खंड- खंड हो जाएगा। इसलिए भारत को किसी भी तरह यह लड़ाई जीतनी है। उन लोगों को जो देश के संविधान को नहीं मानते, देश के कानून को नहीं मानते उनके खिलाफ हमें किसी भी सीमा तक जाना पड़े तो जाना चाहिए।

यासिन मलिक की चुनौती की बावजूद, कश्‍मीर में तिरंगा फहराने पर अड़ी भाजपा

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) से पहले जम्मू-कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अलगाववादी जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख मोहम्मद यासिन मलिक ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा है कि उसे श्रीनगर के लाल चौक पर झंडा नहीं फहराने दिया जाएगा। भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने पिछले दिनों जम्मू में हुई रैली के दौरान 26 जनवरी को श्रीनगर के लाल चौक में तिरंगा फहराने का ऐलान किया था।

मलिक की चुनौती के बाद पार्टी झंडा फहराने पर अड़ गई है, लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने चेतावनी दी है कि बीजेपी के इस कदम के परिणाम की जिम्‍मेदार भी वह खुद होगी। उन्होंने कहा कि यदि बीजेपी झंडा फहराती है तो घाटी में एक बार फिर आग लग जाएगी। लंबी अशांति के बाद फिलहाल घाटी शांत है। उन्होंने कहा कि यदि बीजेपी के लाल चौक पर झंडा फहराने के बाद घाटी में अशांति फैलती है तो इसके लिए वे ही जिम्मेदार होंगे।

उन्होंने कहा कि श्रीनगर में सरकारी कार्यक्रम में झंडा फहराया जाएगा फिर अलग से तिरंगा फहराने की क्या जरुरत है। उन्होंने कहा कि सभी जिलों, सेना और पुलिस के दफ्तरों पर ध्वजारोहण होगा, फिर बीजेपी अलग से क्यों कार्यक्रम करना चाहती है। क्या वे हमसे ज्यादा देशभक्त हैं?

भाजपा के इसी ऐलान को यासिन मलिक ने चुनौती दी है। मलिक ने कहा कि मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि यहां आकर झंडा फहराकर दिखाएं। नहीं तो हम बताएंगे कि झंडा कैसे फहराया जाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा को लाल चौक में झंडा फहराने की बजाए कश्मीर मसले का हल ढूंढने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यासिन मलिक हुर्रियत कांफ्रेंस की 61वीं वर्षगांठ पर आयोजित एक सेमिनार में बोल रहे थे।

सेमिनार में उपद्रव के दौरान हुई मौत की एफआईआर दर्ज करने को लेकर अलगाववादी नेताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की बात पर भी जोर दिया।
संयुक्त राष्ट्र से अपेक्षा बेकार : मीरवाइज

संयुक्त राष्ट्र को असफल करार देते हुए हुर्रियत नेता मीरवाइज ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र कश्मीर में अपने ही नियम लागू नहीं कर पाया है। अत: संयुक्त राष्ट्र से ज्यादा अपेक्षा रखना व्यर्थ है। मीरवाइज ने इस बात पर जोर दिया की कश्मीर के हल हेतु भारत-पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में कश्मीरियों से बात करनी चाहिए। इसी बीच अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह कराने का आग्रह किया है।

1990 में हुई तिरंगा फहराने की शुरुआत

१९८९ में कश्मीर में आतंकवाद शुरू होने के बाद लालचौक में तिरंगा फहराने की शुरूआत २६ जनवरी १९९क् को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने की थी। उसके बाद २६ जनवरी १९९२ को भाजपा अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने लालचौक पर तिरंगा फहराया था

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