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Sexual Harassment of Women: State/UT Wise Data

The National Crime Records Bureau (NCRB) does not maintain data exclusively on sexual harassment at workplaces. However, the State/UT wise data of complaints registered with National Commission for Women (NCW) for sexual harassment of women at work places during the last three years and the current year is as given below.

State2010201120122013  (as on 10/12/2013)Total
1Andaman and Nicobar Islands
0
1
0
0
1
2Andhra Pradesh
1
3
0
1
5
3Arunachal Pradesh
0
0
0
0
0
4Assam
0
2
0
0
2
5Bihar
4
3
3
5
15
6Chandigarh
0
0
0
4
4
7Chhattisgarh
1
0
1
1
3
8Dadra and Nagar Haveli
0
0
0
0
0
9Daman & Diu
0
0
0
0
0
10Delhi
25
23
15
36
99
11Goa
1
1
1
0
3
12Gujarat
4
1
0
8
13
13Haryana
5
3
2
13
23
14Himachal Pradesh
0
0
0
0
0
15Jammu & Kashmir
1
1
0
1
3
16Jharkhand
4
5
2
2
13
17Karnataka
2
3
1
3
9
18Kerala
0
0
1
1
2
19Lakshadweep
0
0
0
0
0
20Madhya Pradesh
10
10
9
9
38
21Maharashtra
7
4
4
7
22
22Manipur
0
0
0
0
0
23Meghalaya
0
0
0
0
0
24Mizoram
0
0
0
0
0
25Nagaland
0
0
0
0
0
26Orissa
2
1
4
4
11
27Pondicherry
0
0
1
0
1
28Punjab
6
2
1
6
15
29Rajasthan
5
14
13
10
42
30Sikkim
0
0
0
0
0
31Tamil Nadu
0
1
1
1
3
32Tripura
0
0
0
0
0
33Uttar Pradesh
23
20
41
34
118
34Uttarakhand
0
1
3
0
4
35West Bengal
3
1
0
4
8
 Total
104
100
103
150
457




जानिये क्यों जरुरी हो गया है अब भारत को हिन्दूराष्ट्र घोषित करना

१. सत्ता के ढोंगी और बहुरूपिए राजनेताओं के कारण क्या-क्या बिक रहा ?  

अ. वंश-वाद की राजनीति से १० जनपथ पर प्रधानमंत्री की कुर्सी का अस्तित्व ! 

आ. एक अर्थशास्त्री पंजाबी सिख का आत्मसम्मान !

इ. शासन से और राष्ट्रद्रोहियों से विज्ञापन प्राप्त करने के लोभ में भारत के प्रचारमाध्यम ! 

ई. सांसदों के क्रय-विक्रय के प्रति जनता का विश्‍वास !

उ. एक अभारतीय गोरी महिला के वर्चस्व की आड में भारतीयों का जीवन !

हिंदुराष्ट्र की स्थापना हेतु हिंदुओं की सिद्धता ! 

सत्ता के नाम पर ढोंग रचने वाले, बहरूपिए, राजनेताओं द्वारा कहां-कहां, क्या-क्या, कैसे-कैसे बिक रहा है, इसका भी मैं कुछ शब्दों में वर्णन करना चाहूंगा । वंश-वाद की राजनीति के कारण आज भी १० जनपथ पर प्रधानमंत्री की कुर्सी का अस्तित्व बिक रहा है । भारतीयों से घिरे हुए एक अर्थशास्त्री पंजाबी सिख का आत्मसम्मान बिक रहा है । सरकारी वर्ग राष्ट्र-द्रोहियों द्वारा विज्ञापन अर्जित करने की लालसा में भारत का प्रचार-प्रसार जगत बिक रहा है । सांसदों के क्रय-विक्रय से जनता का विश्‍वास बिक रहा है । एक अभारतीय गोरी महिला के वर्चस्व की आड में, भारतीयों का जीवन बिक रहा है ।

ऊ. मुस्लिम पर्सनल लॉ के प्रति प्रेम में, भारत का संविधान ! 

ए. भ्रामक धारा ३७० के कारण, भारत का स्वर्ग कहा जानेवाला कश्मीर ! 

ऐ. ध्वस्त बाबरी ढांचे की धूल में अडवानी के जीवन की प्रामाणिकता (ईमान) !

ओ. गजनी से आरंभ कर कसाब जैसे आतंकवादियों का सम्मान करने की लालसा में चौहान और वीर सावरकर जी जैसे राष्ट्रीय वीर पुरुषों की गाथारूपी मां भारती के आंखों की ज्योति ।

औ. मुसलमानों के मतों के लालच में भारत के तिरंगे का सम्मान !

अं. एक नागिन का दुग्धपान करने वाले नागों की आड में विश्‍व की श्रेष्ठतम भारतीय सेना के रणवीरों का आत्मबल ! 

क. अविवेकी सोनिया (गांधी) और शीला (दीक्षित) की निष्क्रियता से देहली में महिलाओ का शील !

ख. स्विस बैंक समान अधिकोषों में प्रत्येक भारतीय के परिश्रम का पैसा भेंट चढ रहा है !

मुस्लिम पसर्नल लॉ की चाहत में भारत का संविधान बिक रहा है । धारा ३७० की भ्रमित आड में भारत का स्वर्ग कहा जाने वाला कश्मीर बिक रहा है । ध्वस्त बाबरी ढांचे की धूल के गुब्बारे में अडवानी के जीवन का ईमान बिक रहा है । गजनी से लेकर कसाब जैसे आतंकवादियों के सम्मान की चाह में चौहान और वीर सावरकर जी जैसे राष्ट्रीय वीर पुरुषों की गाथारूपी मां भारती की आंखों का नूर बिक रहा है । इस्लामी वोटों की लालसा में भारत के उदयमान तिरंगे का मान बिक रहा है । एक नागिन का दूध पिए हुए नागों की आड में वैभवशाली सेनाओं के रणवीरों का आत्मबल बिक रहा है । स्विस बैंक आदि दल-दल की कीचड में प्रत्येक भारतीय की मेहनत का रक्त भेंट चढ रहा है । अविवेकी सोनिया (गांधी) और शीला (दीक्षित) की निष्क्रियता पर दिल्ली में महिलाओं का सतीत्व बिक रहा है ।

ग. शासन सब कुछ करेगा, इस आशा में सच्चे भारतीयों का मनोबल ! 

घ. हज यात्रियों को प्रसन्न करने के लिए उपहार के रूपमें हिंदुआ के मंदिरों का राजस्व (अर्पित धन) !

च. आसुरी मुसलमानों की भूख शांत करने के लिए काम, धन और विधान (कानून) !

छ. बाबर और अकबर की नश्‍वर तथा कलुषित प्रतिमा नहीं, श्रीराम एवं श्रीकृष्ण का अद्वितीय गौरव ! मित्रो, इन निर्लज्जों ने क्या-क्या बेचा है, इस विषय में मैं हिंदु राष्ट्र को दो पंक्तियां समर्पित करता हूं ।

    अरे लज्जा बिक चुकी, सत्यनिष्ठा बिक चुकी 
    इन निर्लज्जोंका देशाभिमान बिक चुका ।  
    जनताकी लाचारी तो देखो,
    भारतकी गरिमाका स्वाभिमान भी बिक चुका ॥            

२. राष्ट्रद्रोहियों को क्यों पालें ? 

मित्रो, क्या हमारी विचार करनेकी शक्ति भी नष्ट हो चुकी है ? क्या एक अब्ज जनसंख्या वाले इस देश में, संसद में भेजने योग्य ५४४ देशभक्त भी आपको नहीं मिलते ? अपनी ही स्वार्थपूर्ति में मग्न, झूठे भ्रम पाले हुए इन विषैले नागों के सम्मान में आप हाथ में दूध का कटोरा लेकर क्यों खडे हैं ? 

३. भारतपर सभी दिशाआ से आक्रमण होने के कारण अब देशव्यापी क्रांति की मशाल प्रज्वलित करने का संकल्प लेना अत्यावश्यक !

आज सीमाओं पर चीन मगरमच्छ की भांति मुंह फैलाए बैठा है । पाकिस्तान और बांग्लादेश इस मगरमच्छ के दांत हैं । दुर्भाग्यवश हमने आज की राजनीतिक सत्ता भी इस मगरमच्छ की जीभ पर रख दी है, ऐसा प्रतीत हो रहा है; परंतु मित्रो, अब समय आ चुका है कि हम १८५७ जैसी देशव्यापी क्रांति की मशाल प्रज्वलित करने का संकल्प लें । प्रत्येक घर, मंदिर, पूजा और प्रत्येक दीपक की ज्योति में इस क्रांति की मशाल को प्रज्वलित करने हेतु; धर्म और राष्ट्रकी रक्षा हेतु, हमें निर्णायक युद्ध की ओर अग्रसर होना अति आवश्यक है । अन्यथा, हमारा देश लुटते-लुटते और बंटते-बंटते, एक दिन इसका मानचित्र इन नेताओं के लिए किसी का दाह संस्कार करने योग्य भी नहीं बचेगा ।

      है शपथ देशभक्तोंकी हमको, तबतक लेंगे विश्राम नहीं 
      जबतक इन अहिंदु तत्त्वोंको पहुंचा दें इनके धाम नहीं ।
      इन मक्कारोंसे लडनेको, हमको हथियार जुटाने हैं
      इन दुष्टोंके सिर काट-काट, मां कालीको हमें चढाने हैं ॥

४. हिंदु राष्ट्र के लिए संकल्प ! 

हमें हिंदु-राष्ट्रके प्रति अपनी वैधानिक विद्वता एवं सैद्धांतिक सिद्धताको प्रमाणित करना अति आवश्यक है । मित्रो, समय सब कुछ बदल देता है; किंतु हमें अपने कार्य से समय को ही परिवर्तित करना है । मैं एक संकल्प पढता हूं, आप उसे ध्यानसे सुनें और चिंतन भी करें ।

     है शपथ देशभक्तोंकी हमको, तबतक लेंगे विश्राम नहीं 
     जबतक इन अहिंदु तत्वोंको पहुंचा दें इनके धाम नहीं ।
     इन मक्कारोंसे लडनेको, हमको हथियार जुटाने हैं
     इन दुष्टोंके सिर काट-काट, मां कालीको हमें चढाने हैं ॥

वक्ता : श्री. दास कमल अग्रवाल जी, मुख्य संपादक, नियतकालिक भारत की सच्चाई, भाग्यनगर, आंध्रप्रदेश.

कभी भी गिर सकता है रामलला का अस्थाई मंदिर

अयोध्या में रामलला का अस्थाई मंदिर खतरे में है. मंदिर में लगाई गईं 12 बल्लियां सड़ गई हैं और बोझ उठाने के काबिल नहीं हैं.

मंदिर की तिरपाल की छत चार बड़ी व 28 पतली बल्लियों के सहारे टिकी है. सड़ चुकी बल्लियों को बदलने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति जरूरी है. विशेष परिस्थितियों में ही यहां किसी तरह का बदलाव या सुधार किया जा सकता है. इसकी प्रक्रिया शुरू भी की जा चुकी है, कोर्ट में यह अर्जी पेश भी की गई है. यहां की देखरेख अधिग्रहीत क्षेत्र के रिसीवर द्वारा की जाती है. कमिश्नर यहां के पदेन रिसीवर हैं.

इसके अलावा इलाहाबाद हाइकोर्ट के आदेश पर जिला जज स्तर के दो न्यायिक अधिकारी तथा रामजन्मभूमि स्वामित्व वाद के पक्षकार प्रत्येक सप्ताह में रविवार को यहां जायजा लेकर रिपोर्ट हाइकोर्ट को भेजते हैं.

बल्लियों के सड़ने के बारे में करीब चार माह पूर्व ही इस टीम ने भी रिपोर्ट दी है. बीते रविवार को दो न्यायिक अधिकारियों टीएम खान (जिला जज वाराणसी) और एसके सिंह (जिला जज उन्नाव) ने वाद के पक्षकारों व उनके वकीलों के साथ यहां का निरीक्षण किया था. बल्लियों के सड़ने से जो स्थिति है, उससे मुख्य ढांचे को सीधा खतरा तो नहीं माना जा रहा है, लेकिन तेज आंधी या तूफान आने पर ढांचा ढह सकता है.

मंदिर के लिए आदोंलन करने वाले हिन्दू संगठन कहाँ है ?

‘हिंदुत्व’ के नाम पर वोट मांगने को लेकर सुप्रीम कोर्ट फिर करेगा सुनवाई

 हिंदुत्व पर अपने फैसले को दोबारा खोलते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी फायदे के लिए धर्म के दुरुपयोग को ‘भ्रष्ट व्यवहार’ के रूप में श्रेणीबद्ध करने वाले चुनाव कानून पर प्रामाणिक फैसले के लिए सात न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सुनवाई तेज करने का फैसला किया है।

यह मुद्दा महत्वपूर्ण है क्योंकि शीर्ष अदालत के १९९५ के फैसले पर सवाल उठाए गए थे जिसमें कहा गया था कि ‘हिंदुत्व’ के नाम पर वोट मांगना किसी उम्मीदवार को हानिकारक रूप से प्रभावित नहीं करता और तब से उस विषय पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष तीन चुनाव याचिकाएं लंबित हैं।

शीर्ष अदालत की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने १९९५ में कहा था, ‘उपमहाद्वीप में हिंदुत्व लोगों की जीवन शैली है और ‘यह एक मन:स्थिति है।’ यह फैसला मनोहर जोशी बनाम एनबी पाटिल मामले में सुनाया गया था। यह फैसला न्यायमूर्ति जेएस वर्मा ने लिखा था। उन्होंने जोशी के बयान को धर्म के आधार पर अपील नहीं माना था। जोशी ने कहा था कि महाराष्ट्र में पहले हिंदू राज्य की स्थापना की जाएगी।

यह टिप्पणी जन प्रतिनिधित्व अधिनियम १९५१ की धारा १२३ की उपधारा (३) में उल्लिखित ‘भ्रष्ट व्यवहार’ के अभिप्राय के संबंध में सवाल से निपटने के दौरान की थी। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा १२३ की उप धारा (३) की व्याख्या का मुद्दा ३० जनवरी (शुक्रवार) को एक बार फिर न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। पीठ ने पड़ताल के लिए इसे सात न्यायाधीशों वाली वृहत पीठ के पास भेज दिया। उसका गठन प्रधान न्यायाधीश पी. सदाशिवम करेंगे। पीठ में न्यायमूर्ति ए के पटनायक, न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय, न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति एफ आई एम कलीफुल्ला भी शामिल थे। पीठ भाजपा नेता अभिराम सिंह की ओर से १९९२ में दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। सिंह के १९९० में महाराष्ट्र विधानसभा में निर्वाचन को बंबई उच्च न्यायालय ने १९९१ में निरस्त कर दिया था।

तीन न्यायाधीशों की पीठ ने १६ अप्रैल १९९२ को सिंह की अपील को रेफर किया था जिसमें अधिनियम की धारा १२३ की उपधारा (३) के उसी सवाल और व्याख्या को पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के पास उठाया गया था। पांच न्यायाधीशों वाली पीठ इस मामले पर ३० जनवरी को जब सुनवाई कर रही थी तब उसे सूचित किया गया कि यही मुद्दा नारायण सिंह द्वारा भाजपा नेता सुंदर लाल पटवा के खिलाफ दायर चुनाव याचिका में उठाया गया था और शीर्ष अदालत की पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने इसे सात न्यायाधीशों वाली बड़ी पीठ के पास भेज दिया था।

इसके बाद, न्यायमूर्ति लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सिंह के मामले को प्रधान न्यायाधीश के पास भेज दिया ताकि वह इसे सात न्यायाधीशों वाली पीठ को सौंपें। पीठ ने ३० जनवरी के अपने आदेश में कहा, ‘चूंकि मौजूदा अपील के सवालों में से एक पहले ही सात न्यायाधीशों की वृहत पीठ को सौंपा जा चुका है इसलिए हम १९५१ के अधिनियम की धारा १२३ की उपधारा (३) की सीमित हद तक व्याख्या के लिए इस अपील को सात न्यायाधीशों की वृहत पीठ को सौंपना उचित मानते हैं।’ आदेश में कहा गया है, ‘रजिस्ट्री सात न्यायाधीशों की पीठ के गठन के लिए मामले को प्रधान न्यायाधीश के समक्ष रखेगी। मामले को प्रधान न्यायाधीश के आदेश के मद्देनजर सूचीबद्ध किया जा सकता है।’

अजीमुल हक की गिरफ्तारी को लेकर हिन्दू महासभा के उपाध्यक्ष की आत्मदाह की चेतावनी

अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियांशु जोशी ने 8 फरवरी को सीएम आवास पर आत्मदाह की चेतावनी दी है। यह चेतावनी उन्होंने टांडा के विधायक अजीमुल हक की गिरफ्तारी न होने के विरोध में दी है। यह निर्णय सोमवार को हुई बैठक में लिया गया।

कहा, टांडा के हिंदू नेता राम बाबू गुप्ता और उनके भतीजे राममोहन गुप्ता की हत्या के मामले में विधायक पर मुकदमा दर्ज है। बावजूद पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। हाल ही में रामबाबू गुप्ता के बेटे शुभम पर लखनऊ में हुआ जानलेवा हमला तो इसकी हद है। 

8 फरवरी को सीएम आवास पर आत्मदाह के अलावा 10 को अंबेडकर नगर, 14 को गोरखपुर, 18 को गोंडा और 20 को इलाहाबाद में भी कार्यकर्ता आत्मदाह के लिए तैयार हैं। बैठक में नवनीत श्रीवास्तव, गणेश पांडेय, डा. एसके श्रीवास्तव, वीरेंद्र सिंह, अखिलेश मिश्र और दीपक भारती आदि मौजूद थे।

"ऑपरेशन ब्लू स्टार" में खुलासे से पूरा देश सकते में

1984 में भारत के अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को निकालने के लिए चलाए गए "ऑपरेशन ब्लू स्टार" में ब्रिटेन की भूमिका की खुद ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग द्वारा किए जाने के बाद न केवल पंजाब बल्कि देश के लोग सकते में हैं।

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि स्वर्ण मंदिर परिसर से आतंकवादियों को बाहर निकालने की कार्रवाई में कांग्रेसी सरकार के ब्रिटेन की सरकार से सलाह लिया जाना देशद्रोह से कम नहीं। बादल ने चंडीगढ़ में जारी बयान में कहा कि मुझे विश्वास ही नहीं हो रहाकि किसी संप्रभु देश की प्रधानमंत्री अपने ही लोगों को इस तरह अपमानित करेंगी। अपने ही लोगों के खिलाफ सैन्य विकल्प का इस्तेमाल करेंगी।

यह सिखों, पंजाबियों और देश के लोगों के खिलाफ किया गया एक घोर पाप था। शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने भी इस संबंध में किए गए ब्रिटिश सरकार के खुलासे के बाद कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में किया गया आपरेशन ब्लू स्टार पंजाबियों के खिलाफ जघन्य कृत्य था। 

शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कहा किदेश में अंदरूनी मामले में विदेशी सलाह लेकर पूर्व प्रधानमंत्री ने आंतरिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया और लोगों को धोखा दिया। ऎसा करके इंदिरा गांधी ने स्पष्ट रूप से देश की संप्रभुता के साथ समझौते का एक उदाहरण पेश किया। 

मालूम हो कि ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने मंगलवार को ब्रिटिश संसद में कहा कि 1984 में भारत के अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को निकालने के लिए चलाए गए "ऑपरेशन ब्लू स्टार" में ब्रिटेन की भूमिका "विशुद्ध रूप से सलाहकारी और सीमित थी" और उसका सीमित प्रभाव ही था। 

भारत ने इस ऑपरेशन में ब्रिटेन की सलाह के अनुरूप कोई कार्रवाई भी की हो, इसका कोई साक्ष्य नहीं है। ब्रिटिश विदेश मंत्री ने यह दावा 200 फाइलों और 23,000 दस्तावेजों की पड़ताल के बाद किया है। इसके साथ ही तत्कालीन संबंधित मंत्रियों और अधिकारियों से साक्षात्कार भी किया गया। हालांकि इनका नाम नहीं बताया गया।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने गोपनीय दस्तावेजों को "30 साल बाद सार्वजनिक किए जाने के नियम" के तहत इस घटना से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद जांच के आदेश दिए थे। इस दस्तावेज में कहा गया है कि एलिट स्पेशल एयर सर्विस के एक अधिकारी ने दिल्ली की यात्रा की थी और फरवरी 1984 में आतंकवादियों को निकालने की योजना तैयार करने में भारत सरकार को सलाह दी थी। 

लंदन के राष्ट्रीय अभिलेखागार से दो पत्र सार्वजनिक किए गए हैं, दोनों अति गोपनीय और निजी दस्तावेज की श्रेणी में रखे गए थे। एसएएस द्वारा भारतीय अधिकारियों को दी गई सलाह के ब्योरे का इससे खुलासा हुआ है। इसमें से एक दस्तावेज वह पत्र है, जिसे तत्कालीन विदेश मंत्री जीयोफ्री होव के निजी सचिव ने "होम ऑफिस" में अपने समकक्ष पदाधिकारी को लिखा था। इसमें चेतावनी दी गई थी कि ऑपरेशन से ब्रिटेन में रह रहे भारतीय समुदाय में तनाव फैल सकता है, खासतौर पर उस वक्त, जब एसएएस की संलिप्तता सार्वजनिक हो जाएगी।

यह स्पष्ट नहीं है कि इन दस्तावेजों में जिक्र की गई योजना का इस्तेमाल भारत सरकार ने किया या नहीं। ऑपरेशन ब्लू स्टार के कुछ महीने बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने संभवत: बदले की भावना से हमला कर हत्या कर दी थी। 

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