मालेगांव विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा को 9 साल बाद मिली जमानत


बंबई उच्च न्यायालय ने 2008 मालेगांव बम विस्फोट की साजिश रचने में कथित तौर पर फँसाई गई साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को आज जमानत दे दी लेकिन सह आरोपी और पूर्व ले. कर्नल प्रसाद पुरोहित को कोई राहत देने से इनकार कर दिया।  

अदालत ने साध्वी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को अपना पासपोर्ट सौंपने और सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने का निर्देश दिया है। उसे यह भी निर्देश दिया गया है कि जब भी जरूरत हो वह एनआईए अदालत में रिपोर्ट करे।

न्यायमूर्ति रंजीत मोरे और न्यायमूर्ति शालिनी फनसाल्कर जोशी की खंड पीठ ने कहा, 'साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की अपील मंजूरी दी जाती है। याची (साध्वी) को पांच लाख रुपए की जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है। प्रसाद पुरोहित की ओर से दायर अपील को खारिज किया जाता है।'

न्यायमूर्ति मोरे ने कहा कि हमने अपने आदेश में कहा है कि पहली नजर में साध्वी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है।

गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक बाइक में बम लगाकर विस्फोट किया गया था जिसमें आठ लोगों की मौत हुई थी और तकरीबन 80 लोग जख्मी हो गए थे। साध्वी और पुरोहित को 2008 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वे जेल में हैं।     

महिला को अश्लील संदेश और चित्र भेजने के आरोप में अभिनेता एजाज खान गिरफ्तार


हमेशा से विवादों से जुड़े अभिनेता एजाज खान को मालवणी पुलिस ने देर रात उनके घर से गिरफ्तार किया है। एजाज खान पर एक महिला ने बदसलूकी और अश्लील फोटो भेजने का आरोप लगाया है।

मालवणी पुलिस ने एजाज खान पर १५ नंवबर को ही आईपीसी की धारा ३५४ के अलावा ६६ई आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया है। रविवार को एजाज खान को बोरीवली हॉलिडे न्यायालय में पेश किया जाएगा।

पहले भी एक मॉडल ने एजाज पर अश्लील संदेश और फोटो भेजने का मामला दर्ज कराया था। मॉडल ऐश्वर्या चौबे की शिकायत के आधार पर पुलिस ने बताया कि एजाज खान ने उसे आपत्तिजनक फोटो भेजी थी, जिसे बाद में उसने डिलीट कर दिया। यही नहीं, मॉडल ने यह भी दावा किया कि खान ने उसे अश्लील संदेश भी भेजे हैं।

सुरेश प्रभु ने मुंबई में 8 रेलवे स्टेशनों पर Wi-Fi का शुभारंभ किया


रेलवे स्टेशनों पर हाई स्पीड की वाई-फ़ाई सेवाएं प्रदान करने के अपने सतत प्रयासों के तहत रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने आज (22 अगस्त) महाराष्ट्र में 8 मुंबई उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर वाई-फ़ाई सेवाओं का शुभारंभ किया जिनमें चर्चगेट, बांद्रा, बांद्रा टर्मिनस, दादर पश्चिम रेलवे, दादर मध्य रेलवे, खार रोड, कल्याण और लोकमान्य तिलक शामिल हैं। मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क के इन 8 व्यस्त स्टेशनों के आगंतुकों और रेल यात्रियों के लिए हाई स्पीड वाली वाई-फाई की सुविधा गूगल के सहयोग से रेलवे के एक पीएसयू रेलटेल ने शुरू की है। 

वाई-फाई सुविधा में 1 जीबीपीएस की गति प्रदान की जा रही है। इन 8 स्टेशनों पर कुल 318 एक्सेस प्वाइंट, 120 एक्सेस स्विच और 30 फाइबर स्विच लगाये गए हैं ताकि बड़ी संख्या में यात्रियों को वाई-फाई सेवाएं प्रदान की जा सकें। 

आज 8 स्टेशनों पर वाई-फाई सेवा लॉन्च करने के अलावा, रेलवायर वाई-फाई को 8 और स्टेशनों (सियालदह, इलाहाबाद, पुणे, पुरी, ताम्बरम, चेन्नई एग्मोर, हजरत निजामुद्दीन और चंडीगढ़) में शुरू किया गया है और औपचारिक रूप से देश के अलग-अलग भागों में जल्द ही शुरू किया जाएगा।

शुभारंभ समारोह के दौरान रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने कहा कि रेलवे स्टेशन वह स्थान हैं जहां समाज के विभिन्न लोग आते हैं। यह पहल डिजिटल खाई को पाटेगी और सभी रेल उपयोगकर्ताओं को हाई स्पीड इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराएगी। एक बार लागू होने के बाद यह विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक वाई-फाई परियोजनाओं में से एक होगी।

लश्कर-ए-तैयबा की फिदायीन थी इशरत जहां : डेविड हेडली


अहमदाबाद में पुलिस मुठभेड़ में मारी गयी इशरत जहां लश्कर-ए-तैयबा की फिदायीन थी। ये खुलासा मुंबई हमलों का आरोपी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने की। एनआईए टीम की शिकागो दौरे के समय हेडली ने ये खुलासा किया। इशरत की लश्कर-ए-तैयबा में खुंखार आतंकी मुजम्मिल ने की थी।

2004 में इशरत जहां के मुठभेड़ पर गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह और गुजरात पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा था। हेडली के इस खुलासे के बाद इस मुद्दे पर चल रही राजनीति पर विराम लग सकता है। इशरत जहां के साथ मुठभेड़ में दो और आतंकी मारे गए थे जो पाकिस्तानी मूल के थे।

26/11 आतंकी हमले की सुनवाई कर रही सत्र अदालत ने पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली को सरकारी गवाह बनने की इजाजत दे दी है। अदालत ने उसे कुछ शर्तो पर सजा से माफी दे दी है। मुंबई आतंकी हमले के अभियुक्त हेडली को अमेरिका से यहां की अदालत में गुरुवार शाम वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये पेश किया गया। इस दौरान हेडली ने सरकारी गवाह बनने के बदले सजा से माफी की मांग की। इस पर अभियोजन पक्ष ने कहा कि उसे कुछ शर्तो के साथ हेडली का प्रस्ताव मंजूर है।

हेडली को अब अगले साल आठ फरवरी को अभियोजन पक्ष के गवाह के तौर पर वीडियो लिंक के जरिये अदालत में पेश किया जाएगा। उसके बयान से हमले के पीछे पाकिस्तानी आतंकियों की भूमिका बेनकाब होने की उम्मीद है।

लश्कर आतंकी को मुंबई हमलों के सिलसिले में 11 मामलों में अभियुक्त बनाया गया है। उसने अपने खिलाफ आरोपों को स्वीकार कर लिया है। हेडली ने कहा कि मैं इन अपराधों में अपनी भूमिका स्वीकार करता हूं। मैं अदालत में गवाह के तौर पर हाजिर होने के लिए भी तैयार हूं।लश्कर आतंकी ने कहा कि अगर अदालत से मुझे माफी मिले तो मैं इस पूरी घटना के संबंध में सवालों का जबाव देने के लिए तैयार हूं। इस मामले में सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने भी अदालत को बताया कि हेडली माफी के बदले गवाह बनने के लिए तैयार है। इसके बाद निकम ने जांच अधिकारियों से सलाह-मशविरे के लिए कुछ वक्त मांगा। इस पर अदालत को आधे घंटे के लिए स्थगित कर दिया गया।

हेडली ने अदालत को बताया कि इसी तरह के आरोपों के तहत मुझे अमेरिकी अदालत में गुनहगार ठहराया गया था। उल्लेखनीय है कि अमेरिकी अदालत पहले ही मुंबई हमलों के लिए हेडली को 35 साल कैद की सजा सुना चुकी है। मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को हुए हमलों में लगभग 170 लोग मारे गए थे। हेडली अमेरिकी अदालत के सामने पहले ही स्वीकार कर चुका है कि उसने कई बार मुंबई का दौरा किया था और ये दौरे हमलों की योजना से जुड़े थे।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का राजदीप सरदेसाई को करारा थप्पड़

प्रिय राजदीप, 

आम तौर पर मैं वरिष्ठ पत्रकारों के सार्वजनिक पत्रों का जवाब नहीं देता, लेकिन आपका पत्र पढ़ने के बाद सोचा कि अगर जवाब नहीं दिया तो गोबल्स नीति सफल हो सकती है। आपका पत्र यानी सही जानकारी न लेकर सरकार को फटकारने की शानदार मिसाल है।
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आपने मुझे 2010 में देखा है ऐसा कहा है पर मैं तो आपको 2000 से देख और सुन रहा हूं। एक साहसी पत्रकार कालांतर में निजी एजेंडे और विशिष्ट वैचारिक निष्ठा से अभिभूत होकर किस तरह बेहद पक्षपाती हो सकता है यह देखना वेदनापूर्ण है!
राज्य सरकार के नाम पर कई अच्छे कामों की मुहर लगने के बावजूद आप अपनी मर्जी से तीन मुद्‌दे चुनकर सरकार के कामकाज का मूल्यांकन करना चाहते हैं। पर मैं आपसे कहना चाहता हूं कि पिछली सरकार के गलत व भ्रष्ट कामों के बारे में ठोस भूमिका अपनाने के संकल्प से मैं जरा भी विचलित नहीं हुआ हूं। इसका अनुभव आपको राज्य भ्रष्टाचार प्रतिबंधक ब्यूरो की ओर से की जा रही कई मामलों की जांच से आसानी से मिल सकता है।

मांसाहार पर पाबंदी लगाने के बारे में मेरी सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया। इस बारे में मेरे कार्यकाल से एक भी नया आदेश नहीं दिया गया। 2004 में कांग्रेस सरकार ने पर्यूषण पर्व के दौरान दो दिन कत्लखाने बंद रखने का फैसला किया था। मुंबई को लेकर ऐसे निर्णय पर 1994 से अमल किया जा रहा है। आश्चर्य है कि हमारे सत्ता में आने से पहले आप में से किसी ने आपत्ति नहीं जताई। यानी पहले की सरकार कितनी भी भ्रष्ट व अकार्यक्षम रही हो, उसकी ढोंगी एवं कथित धर्मनिरपेक्षता आपके विचारों से मेल खाती थी, इसलिए आपको आक्षेप नहीं था।

श्री राकेश मारिया के मामले में आप भ्रमित लगते हैं, इसीलिए दोनों तरह की बातें कह रहे हैं। पत्र के अंत में आपने लिखा, ‘चटपटी खबरों के पीछे पड़ा मीडिया भी उतना ही दोषी है। क्रूर हत्या के मामलों में उन्हें दिलचस्पी होती है, जबकी किसानों की मौत का जिक्र भी नहीं किया जाता।’ अब आप ही मुझे बताइए कि आप भी इसी कत्ल के मामले का संबंध पुलिस कमिश्नर के तबादले से कैसे लगा रहे हैं? पुलिस प्रमुख जांच अधिकारी नहीं होता। वह हमेशा नियंत्रक की भूमिका निभाता है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को उनकी तरक्की की तय तारीख से पहले उच्च पद पर नियुक्त करना नई बात नहीं है। सितंबर और अक्तूबर गणेश चतुर्दशी, बकरीद व नवरात्रि के होते हैं। त्योहार शुरू होने से पहले ही नया अधिकारी आए तो उसे सुरक्षा संबंधी योजनाएं बनाने के लिए समय मिलता है। योग्य फैसला करने का काम सरकार पर सौंप देना चाहिए।

आपकी राजद्रोह विषय पर लिखी टिप्पणी भी जानकारी के अभाव में तर्कहीन है। सरकार को आरोपी के पिंजरे में खड़ा करने की जिद में कोई व्यक्ति किस स्तर तक पक्षपाती बन सकता है, यह इसका उत्तम उदाहरण है। क्या माननीय हाईकोर्ट के किसी आदेश को पुलिस तक पहुंचाना गलत है? हमारी सरकार ने कोई भी फैसला नहीं किया। पिछली कांग्रेस सरकार ने मामले में माननीय हाईकोर्ट में एक हलफनामा पेश किया था। उस पर माननीय हाईकोर्ट ने विस्तार से फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया था कि राजद्रोह संबंधी आरोप कब और किस आधार पर लगाए जा सकते हैं। साथ ही कहा था कि ये निर्देश सभी पुलिस वालों को भेजे जाएं। फैसले का मराठी अनुवाद कर सभी पुलिस थानों के प्रमुखों को सर्कुलर के जरिये भेजा गया। अगर आपने सावधानी से उसे पढ़ा हो तो उसमें यह स्पष्ट तौर पर लिखा है कि सिर्फ अदालत के फैसलों पर निर्भर न रहें, राजद्रोह का आरोप लगाने से पहले स्वतंत्र रूप से कानूनी सलाह लें। और हां, यह बात जोर देकर कहना चाहूंगा कि राजद्रोह के बारे में कोई भी फैसला न तो हमारे मंत्रिमंडल ने लिया है न वह मान्यता के लिए राज्य सरकार के सामने लाया गया।

लेकिन श्रीमान सरदेसाई, आपको गहराई में जाकर मुद्‌दे को समझने की इच्छा नहीं है, क्योंकि आपको अपना वामपंथी झुकाव वाला एजेंडा पुरजोर तरीके से आगे ले जाना है। राज्य को अकालमुक्त करने के लिए चलाई जा रही जलयुक्त शिवार योजना का जिक्र करते हुए आपको कितना कष्ट हुआ। यह योजना बेहद सफल रही है। राज्य की जनता ने बेहद उदारता से 300 करोड़ रुपए का योगदान इसमें दिया है। इससे 6 हजार गांवों में तकरीबन एक लाख काम हम छह महीनों में पूरे कर सके। अब थोड़ी-सी बारिश में भी गांवों में पानी का विकेंद्रित जलसंचय उपलब्ध है। साथ ही जलस्तर भी बढ़ गया है। भारत के जलपुरुष राजेंद्र सिंहजी ने स्टाकहोम की अंतरराष्ट्रीय जल परिषद में इसे ऐतिहासिक मोड़ देने वाला प्रयोग घोषित किया है।

बुरा लगता है कि अपनी थाली में दो दिन मांसाहारी पदार्थ नहीं होंगे, यह सोचकर ही आप जैसे लोग बेचैन हो जाते हैं। दूसरी तरफ हमारा अन्नदाता किसान कुदरती प्रकोपों के कारण जिंदा रहने के लिए तड़प रहा है। श्रीमान सरदेसाई, मुझे आपसे ज्यादा किसान की थाली की चिंता है, इसीलिए राज्य सरकार ने 60 लाख किसानों को दो रुपए किलो गेहूं और तीन रुपए किलो चावल वितरित करने वाली अन्न सुरक्षा योजना तैयार की है। पिछले 15 साल के कुशासन व किसान आत्महत्या की यह विरासत हमारे लिए वास्तव में चुनौती है। इस कारण हमें नींद भी नहीं आती, लेकिन हमारी सरकार की ओर से शुरू की गई कुछ योजनाएं निश्चित रूप से अच्छे परिणाम सामने लाएंगी इसका मुझे भरोसा है। आपको अगर इसमें रुचि हो तो आइए और देखिए।

एक बात तो सच है कि मांसाहार बंदी हो या न हो, सामान्य जनता को इतनी ही आशा होती है कि उसकी थाली में रोटी या चावल होना चाहिए। मुझे इसी बात की ज्यादा चिंता है। आप अपनी थाली में क्या खा रहे हैं यह देखने के लिए मेरे पास समय नहीं है और न मैं उस बारे में चिंतित हूं। एअरकंडीशन्ड कमरों में बैठने वालों के लिए किसानों की चिंता के अलावा बाकी एजेंडे हो सकते हैं। श्रीमान सरदेसाई, आपके पत्र का ब्योरा आपके व्यावसायिक काम का हिस्सा हो सकता है, पर यह जवाब मेरी ओर से शुरू किए गए अभियान का हिस्सा है और मैं उसे पूरा किए बिना चैन से नहीं बैठूंगा। करो या मरो, यही मेरे जीवन का मंत्र है और आने वाला समय ही मेरा भाग्य तय करेगा।
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किसी भी तरह की द्वेषभावना के बिना, आपका नम्र, 
देवेंद्र फडणवीस 

नाबालिगों का महीनों से बलात्कार करने वाला मौलाना गिरफ्तार

वडाला पुलिस ने दो नाबालिगों का यौन शोषण करने वाले एक मौलाना को अरेस्ट किया है। २८ साल का यह मौलाना बंगालीपुरा में एक मदरसा चलाता था और इसने एक नाबालिग का तो कई बार यौन शोषण किया था।

इस मदरसे में पीड़ित बच्चे स्कूल के बाद आते थे। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने यहां से १३ साल के एक लडके और उसकी ११ साल की बहन को एक ऑपरेशन के तहत सुरक्षित निकाला। यह मौलाना नाबालिग लड़के का पिछले पांच महीनों से रेप कर रहा था।

पुलिस के मुताबिक इस मदरसे में करीब ४० बच्चे स्कूल के बाद धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने के लिए जाते थे। यहां पर ये बच्चे दो से तीन घंटे तक रहते थे। पुलिस ने मौलाना को १३ साल के बच्चे के रेप और ११ साल की बच्ची के रेप की कोशिश के आरोप में अरेस्ट किया गया है। पुलिस ने बताया कि आरोपी भिवंडी का रहने वाला है, पर पिछले १० सालों से अपने भाई के साथ मदरसे में रह रहा था।

बच्चों के परिजनों का कहना है कि मौलाना का उनके परिवार के प्रति दोस्ताना व्यवहार रहा था। इसलिए जब उसके बेटे ने उनसे मौलाना के बुरे व्यवहार की शिकायत की तो उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। कुछ दिनों पहले उनकी बेटी मदरसे से रोते हुए घर आई और उसने कहा कि वह फिर से वहां नहीं जाएगी, क्योंकि मौलाना ने उसके साथ रेप करने की कोशिश की। इसके बाद घरवालों ने पुलिस से शिकायत की।

एफआईआर दर्ज होने के कुछ घंटों बाद ही मौलाना को अरेस्ट कर लिया गया। डेप्युटी पुलिस कमिश्नर किरन चव्हाण के मुताबिक आरोपी को स्थानीय अदालत में पेश किया गया था। यहां से उसे २१ सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। वडाला पुलिस घटनास्थल के आस-पास रहने वाले लोगों को ऐसी घटना के प्रति सचेत रहने का संदेश दे रही है।

महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा एक बार फिर एक साथ हुए

महाराष्ट्र चुनाव के दौरान सीट बंटवारे को लेकर अलग हुई शिवसेना और भाजपा एक बार फिर एक साथ हो गए हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि शिवसेना के 12 मंत्री शुक्रवार को शपथ लेंगे। जिसमें पांच कैबिनेट और सात राज्य मंत्री होंगे। पिछले कुछ दिनों से दोनों पार्टियों के साथ आने को लेकर बैठकों का दौर चल रहा था।

फडणवीस ने कहा, "हम 25 साल से साथ हैं और दोनों पार्टियां का गठबंधन विकास पर आधारित है। हमने लोकसभा चुनाव साथ में लड़े। विधानसभा चुनाव हमने अलग-अलग लड़े, लेकिन हमे कांग्रेस और एनसीपी दोनों ही पार्टियों से ज्यादा वोट मिले।" साथ ही फडणवीस ने कहा आगामी बीएमसी चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर एक नई कमेटी बनाई जाएगी। महाराष्ट्र में फडणवीस सरकार की केबिनेट का शुक्रवार को विस्तार होना है। इससे पहले 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले फडणवीस मंत्रिमंडल में 8 केबिनेट और दो राज्य मंत्री हैं।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनावों के दौरान सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों पार्टियों का गठबंधन टूट गया था। इसके बाद दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था, इसमें भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। चुनाव परिणाम के बाद भी दोनों पार्टियों में सुलह के प्रयास किए गए थे लेकिन बात नहीं बनी थी। इसके चलते भाजपा ने विधानसभा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की मदद से विश्वासमत हासिल किया था। हालांकि इस पर उसे विपक्ष की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था। 

मस्जिद की छत पर जूते पहनकर घूमने पर मुस्लिमो ने देवड़ा को घेरा

मुसलमानों के वोटों के लिए कांग्रेस के संसद सदस्य मिलिंद देवरा ने मस्जिद की पक्की छत पर ही भोजन करने का निर्णय लिया था । छत पर जूते पहनकर जाने का प्रयास करने वाले देवरा को मुसलमानों ने रोका एवं उन्हें मस्जिद में ही बंदी बना लिया ।

१. नागपाडा के मस्तान बांध क्षेत्र के संत्रान मस्जिद में शाम के समय लोग नमाज हेतु इकट्ठे होते थे; किंतु उसी समय संसद सदस्य देवरा ने भोजन का प्रबंध किया था । वैसे इन कांग्रेस के लोगो ने कभी हिंदुओ के लिए भी भोजन का प्रबंध किया होगा?

२. इस भोजन के लिए अल्पसंख्यक विकास मंत्री नसीम खान, अमीन पटेल तथा मधु चव्हाण कांग्रेस के नेता भी उपस्थित थे । मस्जिद के मौलवी भी इस भोजन के लिए उपस्थित थे । 

३. ये सर्व नेता जूते पहनकर मस्जिद की पक्की छत पर घूम रहे थे । यह सूचना प्राप्त होते ही मुसलमान क्रोधित हुए । (अगर यह किसी मंदिर की छत पर हो रहा होता तो कितने हिन्दुओं को क्रोध आता ?) और वे  छत पर पहुंचे । वहां भोजन की व्यवस्था देखकर मुसलमान और भी अधिक क्रोधित हुए । 

४. मुसलमानों ने नेताओं को फटकारना प्रारंभ किया । हमारे प्रार्थनास्थल पर आपने जूते पहनकर प्रवेश किया ही कैसे ? मस्जिद में भोजन का प्रबंध कैसे किया ?, इस प्रकार के प्रश्न पूछते ही नेता मंडली संभ्रमित हो गई । 
५. मौखिक विवाद का रूपांतर धक्कामुक्की में भी शुरू हो गया । कुछ समय में ही मस्जिद के बाहर मुसलमान और अधिक संख्या में इकट्ठे होने शुरू हो गए ।

६. इस बात का पता चला है कि इस झुंड ने मिलिंद देवरा को फटकार के साथ धक्कामुक्की भी की । नसीम खान एवं अमीन पटेल को भी झुंड के इस क्रोध का सामना करना पडा । 

७. अंत में पुलिस के बीच में आने के कारण झुंड के चंगुल से मुक्त हो कर ये नेता वहां से भाग गए ।

कांग्रेस के राजनेताओं ने अब मुसलमानों की चापलूसी बंद नहीं की, तो आज उन्हें भाग दौड कराने वाले ये मुसलमान कल क्या करेंगे, इसका विचार कर उन्हें अभी ही सावधान हो जाना चाहिए ! 

हिंदुओं के तिरुपति मंदिर में ईसाई नेता जगनमोहन रेड्डी जूते पहनकर, तो शीला दीक्षित केरल के मंदिर में मोजा पहनकर जाती हैं तो उस समय निष्क्रिय हिंदु केवल देखते ही रहते हैं !

नगमा और जॉनी लिवर कर रहे ईसाइत का प्रचार विहिप छेड़ेगा आन्दोलन


विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने बॉलीवुड अभिनेत्री नगमा और जॉनी लिवर के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की धमकी दी है। दोनों दलों का आरोप है कि ये दोनों ईसाइत का प्रचार कर रहे हैं तथा हिंदुओं का धर्मातरण कर रहे हैं।

वीएचपी नेता उमेश राणे ने आरोप लगाया कि बेस्ट की बसों व मुंबई रेलवे स्टेशन पर बड़े-बड़े होर्डिग लगे हैं। इनमें जॉली लिवर व नगमा के फोटो लगे हैं जिनमें वे ईसाइत का प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर वे जल्दी ही यह विज्ञापन नहीं रूकवाते हैं तो इन दोनों के घरों के बाहर हवन व आरती की जाएगी। एक न्यूज चैनल ने राणे के हवाले से कहा कि नगमा व जॉनी ख्रिश्चन मिशनरीज के साथ मिलकर काम कर रहे हैं तथा हिंदुओं का धर्मातरण करवा रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि १८ कहानियों वाली एक किताब में दोनों एक्टर्स को यह कहते हुए दिखाया गया है कि ईसाई बनने के बाद से उनका जीवन ही बदल गया। अगर वे इसे नहीं रोकते हैं तो हम उन्हें पाठ पढ़ाएंगे।

ब्राम्हण को फेंकेंगे, पूजा और मंदिर जाना बंद करेंगे तब संघ समाप्त होगा: ज्ञानेश महाराव, संपादक चित्रलेखा

चित्रलेखा’के संपादक एवं धर्मद्रोही ज्ञानेश महाराव ने ३१ अक्तूबर को हिंदुओं पर अश्लाघ्य आलोचना करते हुए कहा कि समाज को अपनी अयोग्यता छिपाने हेतु पत्थर के भगवान की आवश्यकता है । वे किसी की प्रेतयात्रा में नहीं जाते हैं; परंतु भगवान गणपति के (गणेश चतुर्थी को) एक मिट्टी के गोले को पहुंचाने हेतु भारी संख्या में जाते हैं, इस बात की उन्हें लज्जा आनी चाहिए । जिस दिन आप ब्राम्हण को फेंकेंगे, पूजन-अर्चन तथा मंदिर में जाना बंद करेंगे, उस दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाप्त होगा ।

हिंदुओ, आप धर्मशिक्षा लेकर संगठित न होनेके कारण ही हिंदूद्रोही स्पष्ट रूपसे आपके धर्म के विषयमें इतने निम्न स्तर पर जाकर आलोचना करने का साहस कर रहे हैं । क्या उनके लिए मुसलमान अथवा ईसाईयों के विरुद्ध इस प्रकार भाष्य करने का साहस दिखाना कभी संभव था ? इससे शिक्षा लेकर अब तो धर्मरक्षा के लिए संगठित होकर वैधानिक मार्ग से धर्मद्रोहियों को फटकारें ...

अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समितिके प्रवक्ता एवं पत्रकार पुरुषोत्तम आवारे-पाटिल लिखित 'रोखठोक' दीपावली अंक के प्रकाशन के कार्यक्रम में महाराव बोल रहे थे । इस अवसर पर 'रोखठोक' दीपावली अंक में प्रकाशित 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – किसका शत्रु ? किसका त्राता ?' प्रमुख विषय पर चर्चासत्र आयोजित किया गया था । इस अवसर पर महाराव के साथ भाजपा के महाराष्ट्र प्रवक्ता श्री. माधव भंडारी, रा.स्व. संघके कोकणप्रांत प्रचार प्रमुख श्री. प्रमोद बापट, लेखक संजय सोनावनी, कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं लेखक चंद्रकांत वामनखेडे, एस.एन.डीटी महाविद्यालय की प्रा. नम्रता गन्नेरी, पत्रकार प्रमोद चुंचूवार एवं आवारे-पाटिल चर्चासत्र में सम्मिलित हुए थे । इस अवसरपर साप्ताहिक 'कलमनामा' के संपादक युवराज मोहिते भी उपस्थित थे । इस अवसरपर जैसे तैसे ५० नागरिक उपस्थित थे । अधिकांश सभागृह रिक्त ही था ।

निम्न स्तर पर जाकर वक्तव्य देने वाले ज्ञानेश महाराव की कुछ और टिप्पणियां :

१.'सनातन वैदिक धर्म के प्रमुख शंकराचार्य ही होते हैं । वह परस्त्रीगामी, गंजेडी, हत्यारा हो, तो भी शंकराचार्य ही प्रमुख होता है; क्योंकि वह ब्राह्मण होता है । (शंकराचार्य के विषयमें इस प्रकार निम्न स्तर के विशेषण प्रयुक्त कर महारावने अपनी खोखली / निम्नस्तरीय नैतिकता का ही परिचय दिया है । इस व्यक्ति को सुधारक  कहते हैं ! परंतु महाराव ने जो विशेषण बताए हैं, उन विशेषणों से पूरी तरह संपन्न लोग दोनों कांग्रेस में विद्यमान हैं । महारावने उनके विरुद्ध कभी ऐसा वक्तव्य दिया है अथवा अपने नियतकालिकमें कभी लिखा है, ऐसा नहीं दिखाई दिया है । ) वहां दलित अथवा महिला शंकराचार्य नहीं चलता । 

एक बार ब्राह्मण महामंडलेश्वर महिलाने कहा, ‘मैं  शंकराचार्य बनूंगी’ । उस समय कभी एकत्रित न आने वाले चारों शंकराचार्यों ने एकत्रित आकर कहा कि महिला शंकराचार्य नहीं बन सकती । आदिमाता, भूमाता, गोमाता कहनेवाले शंकराचार्यों को महिला क्यों नहीं चलती ? (हिंदुओं के शंकराचार्यों की ऐसी निंदा करने वाले कभी ईसाईयों के पोप अथवा मुसलमानों के धर्मगुरुके संदर्भ में वहां महिला अथवा दलित चाहिए ऐसी मांग क्यों नहीं करते ? उसी प्रकार अंनिस एवं वामपंथी लोग इस बात का उत्तर दें कि वे स्वयं निवृत्त होकर अपने पदों पर प्रथम महिलाओं की नियुक्ति क्यों नहीं करते ? । 'लोगोंको बताएं ब्रह्मज्ञान, परंतु स्वयं कोरे पाषाण' इस कहावत के अनुसार आचरण करनेवाले विश्वासघाती लोगों का षडयंत्र विफल करें ! )  क्या ये लोग पिता की कोख से बाहर आए हैं । मां क्यों नहीं चलती ? ये सब लोग झूठे हैं । संघ भी वैसा ही है । उनमें सर्वत्र बाह्मण लोग ही प्रमुख हैं । तावडे-मुंडे आदि मराठे-बहुजन केवल नचवाने के लिए ही हैं । (हिंदुओ, यह ध्यान रखें कि यह आपके धर्म के विषय में बुद्धिभेद कर आपमें अंतर करने हेतु किया गया सुनियोजित षडयंत्र है !)

२. संघ क्यों बढ रहा है, तो समाज की अयोग्यता के कारण । संघ के अनेक लोग भगवान को नहीं मानते; परंतु भगवान को मानने हेतु अन्य लोगों को विवश करने का कार्य करते हैं । संघ का सेवाकार्य एवं अन्य कार्य प्रचुर मात्रा में है; तो भी इन लोगोंने ८८ वर्षोंमें विविध प्रकार से अत्यधिक संपत्ति जुटाई है । वह देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि और ५०० वर्षों तक संघ समाप्त नहीं होगा । (क्या संघ इस विषय में कुछ भाष्य करेगा ? )

३. हिंदू नाम की कोई बात शेष नहीं है । हिंदुओं की वैचारिक सुंथा हुई है तथा हिंदुओं का सांस्कृतिक बाप्तिस्मा हुआ है । संघवाले केवल लोगों को फंसाने हेतु हिंदू हिंदू कहते हैं । (रा.स्व. संघके कार्यसे भारतमें कुछ तो हिंदू संस्कृति जीवित है । रा.स्व. संघका द्वेष करनेवाली कांग्रेस एवं साम्यवादियोंने विदेशी कुप्रथाओंको प्रोत्साहित कर भारतके हिंदुओंको अपनी संस्कृतिसे दूर किया है । )

संघ के विषय में अपप्रचार करने हेतु वामपंथियों द्वारा सुनियोजित अंतर्राराष्ट्रीय षडयंत्र रचा गया है ! - श्री. माधव भंडारी, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा

१. दीपावली अंक पढने पर ध्यान में आया कि लेखक ने संघ के विषय में क्या फैलाना है, क्या उत्तर देना है, यह पूर्व से ही निश्चित किया एवं उसके  पश्चात उस पर प्रश्न निकाले हैं ।

२. संघ ने ठाणे जनपद के अनेक आदिवासी क्षेत्रों में अच्छा कार्य किया है । अतः वहां अब तक नक्सलवाद को पांव रखना संभव नहीं हुआ । इसी प्रकार जहां कहीं भी संघ ने कार्य किया है, वहां नक्सलवाद बढना संभव नहीं हुआ । यह बात जिसको पसंद नहीं आई, वे संघ की निंदा करने हेतु ऐसी पुस्तकें प्रकाशित कर रहे हैं ।

३. इस पुस्तक के ११९ पृष्ठपर संगणकीय फेरफार कर दंगा करते समय का झूठा छायाचित्र रेखांकित कर जानबूझकर संघ का अनादर किया गया है । संपादकीय नीतिमत्ताको अलग रखकर एक षडयंत्र द्वारा चित्र सिद्ध किया गया है । ऐसा होते हुए भी बौद्धिक चर्चाका प्रयास क्यों किया जाता है ?

४. आयोजकों पर अप्रत्यक्ष आलोचना करते समय भंडारी ने कहा कि भारत में स्वयं को निरपेक्षतावादी (निधर्मी ) कहलाने वाला एक विलक्षण एवं अंतिम  विचारांध वर्ग है । धर्मांध समान वह अत्यधिक कटू नहीं है, तो भी ‘कोई अस्पृश्यता का पालन न करे’ ऐसा कहते हुए यह वर्ग वैचारिक, बौद्धिक एवं सामाजिक अस्पृश्यता का पालन करने का कार्र्य अत्यंत कटुता के साथ कर रहा है । यह वर्ग जानबूझ कर इतिहास तथा वस्तुस्थिति का विकृतीकरण, कल-परसों घटित घटनाओंके भी विकृतीकरण का कार्य कर रहा है । उसी प्रकार मैं जो कहता हूं, उसे सत्य में साकार करता हूं । वह आप की सुनता नहीं, क्योंकि आप निरपेक्षतावादी नहीं हो । इस प्रकार का वैचारिक प्रदूषण पैâलाने का कार्य करता है ।

५. ब्रिटेन की गुप्तचर संस्था में रूस की केजीबी गुप्तचर संस्था के दलाल मिलनेके पश्चात उसके लिए एक आयोग स्थापित किया गया । इस आयोग ने अपने ब्यौरे में कहा कि यदि ब्रिटेन में साम्यवादियों को चुनाव में मतपेटी के माध्यम से सत्ता नहीं मिली, तो वे शिक्षा, प्रसार माध्यम एवं कामगार अभियानमें प्रवेश कर देशका वातावरण परिवर्तित करने के लिए आरंभ करेंगे । आज भारत में यही स्थिति है । विदेशके लेखक मित्र किनाई की पुस्तकमें कहा है कि केजीबी ने १९७७ में भारत के कांग्रेस एवं मित्र पक्ष के २२ उम्मीदवारों पर व्यय किया था । उसी प्रकार रूस की महिला पत्रकार बोरीस वेलसिन ने, स्टेट विदिन स्टेट पुस्तक में शासकीय जानकारी के आधार पर केजीबी ने, भारत के राजघरानों को कितने  धन की आपूर्ति की, इस बात की जानकारी दी है । ये तीन उदाहरण इसलिए दिए कि संघों के विरोध में जो प्रचार चल रहा है, वह इस प्रकार सुनियोजित पद्धति से किया गया दुष्प्रचार है । यह दीपावली अंक उसका ही एक उदाहरण है । यह जानबूझकर चूक चित्र निर्माण किया गया है ।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने साध्वी प्रज्ञा की जमानत का विरोध किया


वर्ष 2008 में हुए मालेगांव बम धमाके की तहकीकात कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बंबई उच्च न्यायालय को बताया कि वह हमले की मुख्य आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की जमानत याचिका का विरोध कर रही है। प्रज्ञा ठाकुर ने चिकित्सीय आधार पर जमानत की अपील की है। 

साध्वी पिछले साल कैंसर से ग्रस्त हैं। उसने अपना इलाज कराने के लिए चिकित्सीय आधार पर जमानत मांगी है। उच्च न्यायालय ने इससे पहले एनआईए और साध्वी से साथ मिलकर मसले का हल निकालने के लिए कहा था। 

एनआईए ने साध्वी को मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराने की पेशकश की थी लेकिन साध्वी ने पुलिस की हिरासत में इलाज कराने से इंकार कर दिया और कहा कि वह पहले जमानत पर रिहा होना चाहती है। एनआईए की वकील रोहिणी सैलियन ने आज अदालत को बताया कि एजेंसी चिकित्सीय आधार पर और मामले में दम ना होने की वजह से साध्वी की जमानत याचिका का विरोध कर रही है। 

न्यायमूर्ति आरसी चव्हाण ने अंतिम सुनवाई के लिए 13 फरवरी का दिन निर्धारित किया है। 29 सितंबर, 2008 को मालेगांव में हुए बम विस्फोट के मामले में साध्वी मुख्यध आरोपियों में शामिल हैं। इस हमले में छह लोग मारे गए थे और 100 अन्य घायल हुए थे।

बाल ठाकरे के लिए अब सिर्फ दुआ से उम्मीद, मुंबई में हाई अलर्ट


शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे की बुधवार देर रात एक बार फिर हालत बेहद खराब हो गई। उन्हें मातोश्री में ही डाक्टरों की निगरानी में रखा गया है। बुधवार उनकी बिगड़ती हालत की खबर सुनकर हजारों की संख्या में शिवसैनिक मातोश्री के बाहर जमा हो गए। देर रात तक करीब डेढ़ हजार से ज्यादा शिवसैनिक बांद्रा इलाके में स्थित शिवसेना प्रमुख के घर मातोश्री के बाहर मौजूद थे। इस बीच बॉलीवुड और राजनीति जगत की कई बड़ी हस्तियां भी शिवसेना प्रमुख का हाल जानने मातोश्री पहुंची।

बुधवार देर रात मुंबई के बांद्रा स्थित मातोश्री पर अचानक शिवसैनिकों का जमावड़ा शुरू होने लगा। वजह थी शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे की हालत का खराब होना। यह खबर आग की तरह शिवसैनिकों तक पहुंची और धीरे धीरे बाला साहेब ठाकरे के घर के आगे शिवसैनिकों का जमावड़ा बढ़ने लगा। हालत यह हो गई कि पश्चिम हाईवे पर जाम लगने की नौबत आ गई। 

हर कोई शिवसेना प्रमुख की हालत जानने के लिए बेताब दिखाई दिया। करीब ग्यारह बजे शिवसेना के एक वरिष्ठ नेता ने बाला साहेब ठाकरे की बिगड़ती हालत की जानकारी शिवसैनिकों को दी। इसके बाद वहां पर मानो शिवसैनिकों का हुजूम उमड़ गया हो। रात करीब ढ़ाई बजे शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मातोश्री के बाहर आकर घोषणा की कि बाला साहेब ठाकरे की हालत में कुछ सुधार है लेकिन वह अभी डाक्टरों की गहन निगरानी में हैं। 

उद्धव ने कहा कि उन्होंने अभी कोई उम्मीद नहीं छोड़ी है, उन्हें पूरी उम्मीद है कि बाला साहेब ठाकरे एक बार पूरी मजबूती के साथ बीमारी को मात देकर उठ खड़े होंगे और हमारे बीच होंगे। उन्होंने शिवसैनिकों से शांति बनाए रखने की भी अपील की।

शिवसैनिकों के बढ़ते जमावड़े को देखते हुए और बाला साहेब ठाकरे की खराब हालत को देखते हुए मुंबई में पुलिस के व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। शहर में सुरक्षा पुख्ता रखने के लिए पुलिस विभाग में सभी की छुट्टियां रद कर सभी को अपने थाने में ड्यूटी ज्वाइन करने का आदेश दिया गया है। देर रात शिवसैनिकों ने कुछ गाड़ियों में तोड़फोड़ भी की है।

मातोश्री के बाहर शिवसेना प्रमुख की हालत की लगातार खबर देने के लिए लाउडस्पीकर लगाए गए हैं। इस बीच करीब बुधवार देर रात अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन, महेश मंजरेकर, संजय दत्त भी बाला साहेब का हाल जानने मातोश्री पहुंचे। इसके अलावा कभी शिवसेना में रहे और अब एनसीपी में रहने वाले छगन भुजबल भी मातोश्री उनका हालचाल जानने पहुंचे। अमिताभ बच्चन ने ट्वीट कर कहा है कि बाला साहेब ठाकरे को दुआ की जरूरत है। बाला साहेब की बिगड़ती हालत के बीच शिवसैनिकों की धड़कनें भी बढ़ने लगी हैं।

कांग्रेस के नेता अब सिर्फ भ्रष्टाचार के लिए जेल जाते हैं - आर आर पाटिल


केंद्र में सत्ताधारी कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के मामले पर अब तक विपक्ष ही टीका टिप्पणी करता था, लेकिन अब कांग्रेस के सहयोगी दल एनसीपी ने भी उसपर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हमला किया है.

महाराष्ट्र में एनसीपी नेता और राज्य के गृह मंत्री आर आर पाटिल ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा है कि एक जमाने मे कांग्रेस के नेता देश के लिए जेल जाते थे, अब भ्रष्टाचार के मामले में सलाख़ों बंद हो रहे हैं.

महाराष्ट्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए आर आर पाटिल ने कहा, "काँग्रेस पार्टी हमारा सहयोगी दल है. दिल्ली और मुंबई में हम साथ साथ हैं, इस वजह से उनपर  टिप्पणी करना मुश्किल होता है. कई बार यह बात सीधे तरीके से कह नही सकते."

उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, "एक जमाना था जब इतिहास में कांग्रेस के नेता  बंदूक वाले अंग्रेज़ों का विरोध करते थे, देश के लिए जेल में जाते थे. लेकिन अब इस पार्टी के नेता देश के लिए नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के लिए जेल जाते हैं."

ग़ौरतलब है कि एनसीपी केंद्र और महाराष्ट्र में कांग्रेस का सहयोगी दल है, लेकिन राज्य के नगर निगम और नगर परिषद के चुनावों में ये दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ती हैं.

FIR's against Zakir Naik for attempt to create communal riots


A complaint has been lodged by office bearers of Shiv Sena, BJP, Ganesha Festival Mandals and Hindu Janajagruti Samiti (HJS) with various Police Stations all over the State demanding that ‘when Ganesha Festival is being celebrated in peaceful atmosphere, Dr. Zakir Naik is trying to disturb Hindu-Muslim harmony by giving such challenge; therefore, case should be immediately filed against him’.

Mean while, following widespread protest by Hindus , especially through social networks - Zakir Naik removed the controversial post from his facebook page.

मनमोहन सिंह की हालत आशिकबाज बूढ़े जैसी - ठाकरे

अमेरिकी मैगजीन ‘टाइम’ में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर टिप्‍पणी के बाद अब शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे ने मुखपत्र सामना में प्रधानमंत्री पर निशाना साधा है। टाइम में छपे लेख की आड़ में ठाकरे ने कठपुतली बताते हुए कहा कि उनमें देश को आगे ले जाने का जज्‍बा नहीं है। इतना ही नहीं बाल ठाकरे ने सामने में लिखे अपने लेख में प्रधानमंत्री को और भी खरी खोटी सुनाया है। उन्‍होंने सोनिया गांधी पर भी निशाना साधा है और लोगों से अपील की है कि आगामी चुनाव में वह यूपीए सरकार को उखाड़ फेंके।

सूत्रों की मानें तो सामना में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने लिखा है कि ‘हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अब वैश्विक स्‍तर पर एक हास्‍यपद प्राणी बन गये हैं’। ठाकरे ने लोगों से सवाल पूछते हुए खुद ही उसका जवाब दिया है और लिखा है कि हिंदूस्‍तान का गूंगा और बहरा प्राणी कौन? मनमोहन सिंह। ठाकरे ने लिखा है कि अब मनमोहन सिंह को लेकर इस तरह के चुटकुले भी बनने लगे हैं और खासा प्रसिद्ध भी हुए हैं।

ठाकरे ने लिखा है कि इस गूंगे और बहरे प्राणी पर अब जाकर टाइम पत्रिका की नजर पड़ी है। ठाकरे ने कहा कि टाइम में लिखा गया है कि मनमोहन सिंह अंडरएचीवर है। ठाकरी भाषा में कहा जाये जो देश का प्रधानमंत्री राजनीतिक रूप से नपुंसक हैं। ठाकरे ने लिखा है कि मनमोहन सिंह की हालत आशिकबाज बूढ़े जैसी हो गई है और इस अवस्‍था में जितना भी संभव है, उस आनंद का उपभोग करने का कार्य मनमोहन सिंह कर रहे हैं।

ठाकरे ने आगे लिखा है कि कल तक सिर्फ देशी अखबारवाले ही मनमोहन को टपली मार रहे थे मगर अब विदेशी लात भी पड़ रही है। अब उन्हें सच का पता चल जाएगा क्योंकि विदेशी व्यक्ति का आदेश सुनकर जी हुजूरी करने की उनकी आदत जो है। ऐसी सरकार अधिक समय तक दिल्ली में रही, तो देश भी ‘अंडरअचीवर’ अर्थात नपुंसक बन जाएगा।

विलासराव देशमुख ने किया था आदर्श घोटाला - सुशील कुमार शिंदे

आदर्श घोटाले से हाथ पीछे खींचने के प्रयास के तहत केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सोमवार को एक न्यायिक पैनल से कहा कि विलासराव देशमुख के मुख्यमंत्रित्व काल में सरकारी भूमि के आवंटन और हाउसिंग सोसायटी को अतिरिक्त एफएसआई की मंजूरी दी गई थी।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर विवादास्पद सोसायटी से संबंधित फाइलों को शिंदे और देशमुख दोनों से संचालित किया था। शिंदे ने कहा, ‘‘मेरे मुख्यमंत्री बनने से पहले उक्त जमीन को आदर्श सोसायटी को आवंटित करने का फैसला हो चुका था। आदर्श के पक्ष में आशय पत्र 18 जनवरी 2003 की सुबह को जारी किया गया था और उस वक्त विलासराव देशमुख मुख्यमंत्री थे। यह मेरे निर्देश से जारी नहीं हुआ था और इसे कभी भी मेरे संज्ञान में नहीं लाया गया।’’

71 वर्षीय केंद्रीय मंत्री दो सदस्यीय जांच आयोग के समक्ष गवाही दे रहे थे जिसे राज्य सरकार ने आदर्श घोटाले की जांच के लिए गठित किया था। आयोग पहले ही निष्कर्ष पर पहुंच चुका है कि भूमि राज्य सरकार की थी न कि रक्षा मंत्रालय की। वह इस बात पर गौर कर रहा है कि सोसायटी को दिए गए विभिन्न मंजूरी के दौरान क्या किसी नियम का उल्लंघन हुआ। देशमुख पर जिम्मेदारी डालते हुए शिंदे ने कहा, ‘‘बेस्ट से सटे आदर्श में अतिरिक्त तल की जगह मेरे समय में मंजूर नहीं हुआ था। इसे मेरे कार्यकाल के बाद मंजूरी दी गई थी।’’

यह पूछने पर कि क्या 19 जुलाई 2004 को आशय पत्र जारी करने से पहले मालिकाना हक, जमीन का मूल्य और सदस्यों की योग्यता के बारे में पुष्टि की गई तो शिंदे ने कहा, ‘‘आदर्श फाइल को मैंने मंजूरी नहीं दी थी। आशय पत्र जारी करने से पहले 51 सदस्यों की योग्यता की पुष्टि के लिए मैंने कलेक्टर के पास भेजा और पुष्टि करने के बाद मेरे पास फाइल भेजने को कहा।’’ बहरहाल उन्होंने दावा किया कि आशय पत्र जारी करते हुए संबंधित विभाग उनके संज्ञान में यह बात नहीं लाया कि उक्त भूमि का मालिक कौन है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री के लिए यह असंभव है कि वह हर फाइल को देखे। मुख्यमंत्री के सहयोग के लिए सचिव होते हैं जो सभी फाइलों को देखते हैं।’’ उन्होंने कहा कि सचिव जब जांच कर लेते हैं तो मुख्यमंत्री के दस्तखत के लिए सचिव का लिखा ‘‘ऑफ द रिकार्ड’’ नोट के साथ फाइल आता है।

शिंदे ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री जब हस्ताक्षर कर देता है तो सचिव, प्रधान सचिव और उप सचिव बाद के सभी प्रशासनिक आदेश जारी करते हैं। यहां तक कि आशय पत्र एवं एलओए के नियम एवं शर्तों पर भी विभागीय स्तर पर निर्णय किया जाता है। अगर कोई विशेष बात होती है तभी इसे मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया जाता है।’’

हिंदू विचारधारा वाला व्यक्ति ही देश का प्रधानमंत्री बने -बाल ठाकरे

संघ प्रमुख मोहन भागवत के बाद शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी अगले लोकसभा चुनाव में हिंदुत्वादी प्रधानमंत्री का समर्थन किया है। उनका यह समर्थन राजग के सहयोगी जदयू को नागवार गुजर सकता है। संप्रग की ओर से राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी प्रणब मुखर्जी का समर्थन करने वाले ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखा है कि हिंदू विचारधारा को मानने वाला व्यक्ति ही देश का प्रधानमंत्री बनना चाहिए।

हाल ही में जदयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2014 के आम चुनाव में राजग की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति की वकालत की थी। उनके इस बयान को नरेंद्र मोदी के विरोध के तौर पर लिया गया था। इसके बाद नीतीश को संघ और भाजपा की कड़ी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ी थी। शिवसेना प्रमुख ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष शब्द गाली बन चुका है।


पटौदी खानदान को हिंदू बहू स्वीकार पर हिंदू दामाद नहीं

पटौदी खानदान ने एक हिंदू लड़की करीना कपूर को अपने परिवार का हिस्सा मान लिया है पर सोहा अली खान के ब्वायफ्रेंड से मंगेतर बने एक हिंदू लड़के  कुणाल खेमू आज भी परिवार के लिए अजनबी ही बने हुए हैं। 

हाल में ही लंदन में आयोजित एक समारोह के दौरान यह बेगानापन खुलकर सामने आया। लंदन में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने स्वर्गीय नवाब मंसूर अली पटौदी के सम्मान में एक भोज का आयोजन किया था। 

खास बात यह थी लंदन में होने के बावजूद कुणाल समारोह में नजर नहीं आए। इस बारे में पूछे जाने पर कुणाल ने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि मुझे समारोह में शामिल नहीं किया गया ।

फिल्म जगत को लोगो में इस तरह का व्यवहार कम ही देखने में आता है पर इस पटौदी खानदान को हिंदू बहू तो स्वीकार है पर हिंदू दामाद नहीं ..

स्वंय शर्मिला टैगौर एक हिंदू परिवार से आतीं हैं परन्तु मंसूर अली से शादी के बाद उनके हिंदुओं के प्रति व्यवहार में आश्चर्यजनक रूप से बेगानापन देखा गया है.

कांग्रेसियों ने अन्ना को काले झंडे दिखाए,गाड़ी पर किया पथराव

कांग्रेस अब खुलकर अन्ना हजारे के विरोध पर उतर आई है। मजबूत लोकायुक्त कानून की मांग को लेकर महाराष्ट्र दौरे पर निकले अन्ना को बुधवार को मुंबई के उपनगर वाशी में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने काले झंडे दिखाए और नारेबाजी की। 

उन्होंने अन्ना की कार को रोकने का भी प्रयास किया। पुलिस ने बीच बचाव करने की कोशिश की तो वे उनसे भी भिड़ गए। बाद में पुलिस ने अपनी सुरक्षा में अन्ना को वाशी के विष्णुदास भावे सभागार तक पहुंचाया। 

अन्ना के करीबी सुरेश पठारे ने घटना की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से प्रदर्शनकारी युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को पार्टी से निकालने की मांग की है। 

गौरतलब है कि 16 मई को अन्ना जब नागपुर में एक कार्यक्रम शामिल होने पहुंचे थे,तब भी युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनका विरोध किया था और उनकी स्कॉर्पियो गाड़ी पर पथराव किया था। 

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सोनिया ने बिना किसी का नाम लिए सिविल सोसायटी को आड़े हाथों लिया था। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि कांग्रेस और सरकार के खिलाफ अफवाहें फैलाने वालों से सख्ती से निपटने की जरूरत है, तो क्या यह इसी का असर है ?

एनडीए के भारत बंद को अन्ना ने भी समर्थन दिया

पेट्रोल की कीमतों में साढ़े सात रुपये की ऐतिहासिक बढ़ोतरी के विरोध में एनडीए ने गुरुवार को भारत बंद का ऐलान किया है। बंद को कई राजनीतिक पार्टियों ने भी समर्थन दिया है। राजनीतिक पार्टियों के अलावा समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी इस बंद को अपना समर्थन दिया हैं। राजनीतिक पार्टियों के इस बंद और जनता का गुस्सा देखते हुए सभी राज्यों में सुरक्षा के इंतजाम चाक-चौबंद कर दिए गए हैं।

मुंबई और महाराष्ट्र में शिवसेना ने बंद का समर्थन किया है। शिवसेना नेता पहले ही साफ कर चुके है कि जनता भड़क चुकी है और आंदोलन तीव्र हो सकता है। लिहाजा महाराष्ट्र सरकार ने इस बंद को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। अगर आंदोलन हिंसा पर उतर आए तो उसपर तुरंत कार्रवाई करने के लिए राज्य पुलिस ने रैपिड एक्शन फोर्स (आरपीएफ) और एसआरपी की कंपनियों को अलर्ट पर रखा है।

महंगाई की मार झेल रही जनता पेट्रोल के बढ़े दामों से भड़की हुई है, लेकिन ट्रेड यूनियनों ने इसमें शामिल न होने का फैसला लिया है। मुंबई में रोजमर्रा के काम पर जाने वाले लोगों को परेशानी न हो इसलिए रिक्शा और टैक्सी यूनियनों ने बंद को समर्थन न करने का फैसला किया है।

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