श्रीनगर में ईद की नमाज के बाद मीरवाइज उमर फारुख ने कराया हिंसक प्रदर्शन

जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में शनिवार कोईद-उल-फितर की नमाज के बाद जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।अलगाववादियों ने जहां लाल चौक तक जुलूस निकाला वहीं भीड़ ने पुलिस कीबैरक और राज्य बिजली बोर्ड की इमारत को आग लगा दी।

हुर्रियत कांफ्रेंस के उदारवादी गुट के प्रमुख मीरवाइज उमर फारुख ने ईदगाह मैदान में ईद की नमाज के बाद शहर के लाल चौक तक एक विशाल जुलूस कीअगुवाई की। इससे पहले यह कार्यक्रम था कि नमाज अदा करने के बाद सभी लोग शांतिपूर्वक वहां से चले जाएंगेऔर त्योहार की खुशियां मनाएंगे।

हजारों लोगों से सादगीपूर्वक ईद मनाने का अनुरोध करते हुए मीरवाइज ने कहा, आजादी हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और कश्मीर की युवा पीढ़ी ने तयकिया है कि वह इसे किसी भी कीमत पर हासिल करके रहेगी। मीरवाइज ने कहा कि भारत को स्वीकार करना ही होगा कि एक कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय विवादहै।

उसने कहा, ‘कश्मीर के मसले के अर्थपूर्ण समाधान के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के वास्ते विसैन्यीकरण, राजनीतिज्ञों और युवकों की रिहाई, कठोर कानून हटाने और आजादी चाहने वालों के खिलाफ मुकदमे वापस लिए जाने चाहिए।

मीरवाइज ने कहा कि कश्मीर में अलगाववादी आंदोलन के इतिहास के इस अहम मोड़ पर अलगाववादी नेताओं के बीच एकता महत्वपूर्ण है। उनके साथ जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के अध्यक्ष मोहम्मद यासीन मलिक भी था एक खुफिया अधिकारी ने बताया, ‘शहर के लाल चौक तक जुलूस निकालने का मीरवाइज का फैसला यकीनन राष्ट्रविरोधी भावनाएं भड़काने वाला है।

लाल चौक से लौट रही भारी भीड़ ने राज्य बिजली विभाग के एक कार्यालय की इमारत को आग लगा दी। लाल चौक में मोटर साइकिल पर सवार सैकड़ों युवकों ने आजादी की मांग के समर्थन में नारेबाजी की। लाल चौक के क्लॉक टॉवर पर नारेबाजी कर रहे युवकों ने हरे झंडे फहराए।

इससे पहले हजरतबल में ईद की नमाज के बाद बड़ी संख्या में जमा लोगों ने वहां तैनात स्थानीय पुलिसकर्मियों की बैरके फूंक डालीं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि लोगों को तितर-बितर करने के लिए हवा में गोलियां चलाईगईं। इस गोलीबारी में किसी के घायल होने का समाचार नहीं है।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कर्मी विभिन्न संवेदनशील इलाकों में तैनात हैं और भीड़ द्वारा उकसावे वाले नारे लगाए जाने के बावजूद श्रीनगर में कहीं भी सुरक्षाबलों ने बल प्रयोग नहीं किया।

अधिकारी ने बताया, ‘हालात तनावपूर्ण हैं और स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है।उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों को संयम बरतने के निर्देश दिए गए हैं ताकि असामाजिक तत्वों के हिंसा भड़काने के नापाक इरादे पूरे होनेपाएं।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर के गुपकार में अपने निवास के समीप एक मस्जिद में ईद की नमाज अदा की।लोगों को ईद की नमाज अदा करने और खुशियां मनाने का अवसर देने के लिए प्रशासन ने घाटी के किसी भी हिस्सेमें कर्फ्यू या प्रतिबंध नहीं लगाए।

घाटी के अन्य मुख्य शहरों से मिली जानकारी के अनुसार लोगों ने ईद की नमाज के बाद भारत विरोधी रैलियांनिकालीं और आजादी की मांग के समर्थन में नारेबाजी की।

मस्जिद बनाई जा सकती है ग्राउंड जीरो पर - बराक ओबामा

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने न्यूयॉर्क में ग्राउंड जीरो के नजदीक मस्जिद बनाने कीविवादास्पद योजना का यह कहकर समर्थन किया है कि यदि कोई हिन्दू मंदिर बना सकताहै तो मस्जिद क्यों नहीं बनाई जा सकती.

ग्राउंड जीरो वह स्थान है जहां आतंकवादियों ने 11 सितंबर 2001 को हमला किया था. ओबामा ने शुक्रवार शाम व्हाइट हाउस में कहा, ‘न्यूयॉर्क में मस्जिद के संदर्भ में मैं अपनीस्थिति को लेकर बहुत स्पष्ट रहा हूं.’ उनसे ग्राउंड जीरो के नजदीक मस्जिद बनाए जाने की योजना से उठे विवाद केबारे में पूछा गया था.

उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने नागरिकों को स्वतंत्रतापूर्वक उनके धर्म का पालन करने देने की अनुमति केअभिन्न अधिकार में विश्वास करता है.

लगभग तीन हजार लोगों की जान लेने वाले 11 सितंबर 2001 के हमलों की नौवीं बरसी की पूर्व संध्या पर ओबामाने कहा, ‘इस देश का सिद्धांत है कि सभी स्त्री..पुरुष समानता के साथ पैदा हुए हैं उनके कुछ अभिन्न अधिकार हैं उनअभिन्न अधिकारों में से एक है स्वतंत्रता के साथ धर्म का पालन करना.’

ओबामा ने कहा, ‘इसका मतलब है कि यदि आप स्थल पर गिरजाघर बना सकते हैं आप स्थल पर यहूदी उपासनागृह बना सकते हैं यदि आप एक हिन्दू मंदिर बना सकते हैं तो आपको स्थल पर मस्जिद बनाने में भी सक्षम होनाचाहिए.’

अर्जुन मंडा को नक्सलियों का लाल सलाम

नक्सलियों ने कल सत्ता संभालने जा रही अर्जुन मुंडा की सरकार को आज ही लाल सलाम कह दिया। झारखंड दुमका के आदिवासी बहुल काठीकुंड के जंगलों में आज सुबह पुलिस नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई।

मुठभेड़ में एक थाना प्रभारी और जगुआर के दो जवान समेत कुल तीन लोग शहीद हुए। जबकि 6 जवान घायल हैं। पुलिस को सूचना मिली थी कि उपराजधानी दुमका से करीब चालीस किलोमीटर दूर काठीकुंड के जंगलों में नक्सलियों का एक बड़ा दस्ता किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए मीटिंग कर रहा है।

सूचना पाकर स्थानीय पुलिस और एसटीएफ के जवानों ने जंगल में अपना अभियान तेज कर दिया। जिसके बाद नकस्लियों और एसटीएफ के बीच हुई जबर्दस्त गोलीबारी मे तीन पुलिसकर्मी शहीद हो गए। जबकि 6 जवानों को गोली लगने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पादरी टेरी जोंस ने कुरान जलामे का कार्यक्रम स्थगित किया

दिन भर चले चले नाटकीय घटनाक्रम के बाद अमेरिकी पादरी ने शुक्रवार को घोषणा की कि वे पवित्र कुरान को जलाने के अपने पहले के फैसले पर आगे नहीं बढ़ेंगे, लेकिन उन्हें अब भी उम्मीद है कि फ्लोरिडा के इमाम के साथ समझौते के तहत ग्राउंड जीरो के समीप से प्रस्तावित मस्जिद हटा ली जाएगी।

पादरी ने एक टेलीविजन कार्यक्रम में कहा कि उन्होंने कुरान नहीं जलाने का निर्णय लिया। उससे पहले उन्होंने कहा था कि वह अपने प्रस्तावित कृत्य को स्थगित करने की पूर्व की योजना पर पुनर्विचार कर रहे हैं।

पादरी टेरी जोंस ने एबीसी के ‘गुड मॉर्निंग अमेरिका’ कार्यक्रम में कहा कि फिलहाल मेरी ऐसा (कुरान जलाने की) योजना नहीं है। उन्होंने फ्लोरिडा के इमाम के साथ हुए समझौते की तरफ इशारा करते हुए कहा कि हमें विश्वास है कि इमाम अपनी बात पर खड़ा उतरेंगे। हमें विश्वास है कि प्रस्ताव अब भी सही है।

जोंस ने कहा कि इस बात का समझौता हुआ है कि 11 सितंबर के हमले के स्थल के पास इस्लामिक सामुदायिक केंद्र बनाने की योजना छोड़ दी जाएगी और उसके बदले में कुरान जलाने की योजना रद्द कर दी जाएगी। हालाँकि इस्लामिक सोसायटी सेंट्रल फ्लोरिडा के अध्यक्ष इमाम मुहम्मद मुसरी ने कहा कि यह समझौता केवल जोंस के दिमाग में है।

लेकिन जोंस ने कहा कि उन्होंने (इमाम ने) हमें प्रस्ताव दिया है कि वे ग्राउंड जीरो से प्रस्तावित मस्जिद हटा लेंगे। दरअसल मुसलमान नहीं चाहते कि हम कुरान जलाएँ और अमेरिकी नहीं चाहते हैं कि ग्राउंड जीरो के समीप मस्जिद बने। जब हमने यह बात रेडियो पर कही तब वह मेरे पास उक्त प्रस्ताव लेकर आए। हालाँकि इमाम ने कहा है कि उनका न्यूयॉर्क में मस्जिद पर कोई नियंत्रण नहीं हैं। उनके बयान को तोड़मरोड़कर पेश किया गया।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर मैं उनकी न्यूयॉर्क के इमाम के साथ बैठक करवा सकता हूँ। उल्लेखनीय है कि टोंस की कुरान जलाने की योजना पर दुनिया भर में तीखी प्रतिक्रिया हुई और अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने भी उनसे इससे पीछे हटने का अनुरोध किया।

अफगानिस्तान में हिंसक प्रदर्शन :

कुरान जलाने की योजना के विरुद्ध अफगानिस्तान में शुक्रवार को हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान कम से कम 11 लोग घायल हो गए। बदख्शान प्रांत की पुलिस के अनुसार जुम्मे की नमाज के बाद हजारों लोग सड़क पर उतर आए और उन्होंने नाटो शिविर की ओर मार्च किया। उन्होंने अमेरिकी झंडा जला दिया और वे पुलिस पर पथराव करने लगे। पुलिस और प्रदर्शनकारी के बीच झडप में चार प्रदर्शनकारी और पाँच पुलिसकर्मी घायल हो गए।

बाढ़ मेरे कन्ट्रोल में है - शीला दीक्षित

दिल्ली में यमुना का जलस्तर शुक्रवार को भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है और उसमें लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने जनता को आश्वासन दिया है कि लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। बाढ़ की स्थिति नियंत्रण में है। हरियाणा से छह लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद वे स्वयं सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री राजकुमार चौहान के साथ स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। निचले इलाकों में रह रहे लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। बाढ़ प्रभावितों को खाद्य सामग्री भी मुहैया कराई जा रही है।

पूर्वी दिल्ली के उपायुक्त ने बताया कि दिल्ली के किसी भी इलाके में अभी बाढ़ का खतरा नहीं है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी ने बताया कि लगभग 74 नावों और 68 गोताखोरों को तैयार रखा गया है। इसके अलावा हालात से निपटने के लिए 85,850 खाली सीमेंट की बोरियां, 3,582 घन मीटर पत्थर, 11 ट्रकों और 422 लाइफ जैकेट्स की व्यवस्था की गई है। उल्लेखनीय है कि हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से बुधवार को 6 लाख क्यूसेक पानी छोडे़ जाने के बाद यमुना का जलस्तर चार से पांच सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।

योग गुरु स्वामी रामदेव ने भारत जागरण यात्रा का प्रारंभ किया

भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के संस्थापक एवं योग गुरु स्वामी रामदेव ने भारत के हर नागरिक को निरोगी व स्वस्थ्य बनाने, आयुर्वेद के प्रयोग, योग एवं प्राणायाम अपनाने के साथ गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई एवं भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं को दूर करने के लिये भारत जागरण यात्रा का प्रारंभ द्वारिका से कर दिया है।

वह 30 नवम्बर को शिकोहाबाद में पधारेंगे। भारत स्वाभिमान मंच के प्रत्येक गांव के आदमी से जुड़ने का लक्ष्य है।

ईद पर रिहा होंगे 31 पाक कैदी

भारतीय विदेशमंत्री एस.एम कृष्णा ने 9 सितंबर को पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरेशी को भेजे एक पत्र में कहा कि भारत ईद उल फ़ित्र के दौरान यानी 15 सितंबर को भारत में कैद 31 पाक नागरिकों को रिहा करेगा।

भारतीय विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने मीडिया से कहा कि विदेशमंत्री एस.एम कृष्णा ने उसी दिन पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरेशी को एक पत्र भेजा है। जिसमें हाल में 442 भारतीय मछुआरों को रिहा करने के पाकिस्तान के फैसले पर आभार जताया और यह आशा प्रकट की कि दोनों देश इस तरह के और ज्यादा अच्छे कदम उठाएंगे। इसलिए भारत ने ईद उल फ़ित्र के दौरान भारत में कैद 31 पाक नागरिकों को रिहा करने का फैसला किया। बाद में भारत अपने यहां कैद और अधिक पाकिस्तानी नागरिकों को रिहा करेगा। कृष्णा ने उम्मीद जताई कि भारत और पाकिस्तान जल्द ही एक दूसरे के यहां कैद सभी नागरीकों को रिहा करने के सवाल पर वार्ता करेंगे।

भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार रिहा किए गये 31 नागरिकों में 7 मछुआरे और 24 बंदी शामिल हैं।

इस्‍लाम भी हिन्‍दू-माता का ही पुत्र है - फिरदोसी बाबा

हिन्दू-धर्म ही संसार में सबसे प्राचीन धर्म है’- यह एक प्रसिद्ध और प्रत्यक्ष सच्चाई है। कोई भी इतिहासवेत्ता आज तक इससे अधिक प्राचीन किसी धर्म की खोज नहीं कर सके हैं। इससे यही सिद्ध होता है कि हिन्दू-धर्म ही सब धर्मों का मूल उद्गम-स्थान है। सब धर्मों ने किसी--किसी अंश में हिन्दू मां का ही दुग्धामृत पान किया है। जैसा कि गोस्वामी तुलसीदास जी का वचन है- बुध किसान सर बेद निज मते खेत सब सींच। अर्थात् वेद एक सरोवर है, जिसमें से (भिन्न-भिन्न मत-मतान्तरों के समर्थक) पण्डितरूपी किसान लोग अपने-अपने मत (सम्प्रदाय) रूपी खेत को सींचते रहते हैं।

उक्त सिद्धान्तानुसार इस्लाम को भी हिन्दू माता का ही पुत्र मानना पड़ता है। वैसे तो अनेकों इस प्रकार के ऐतिहासिक प्रमाण हैं, जिनके बलपर सिद्ध किया जा सकता है कि इस्लाम का आधार ही हिन्दू-धर्म है; परन्तु विस्तार से इस विषयको न उठाकर यहाँ केवल इतना ही बताना चाहता हूँ कि मूलत. हिन्दू-धर्म और इस्लाम में वस्तुत. कोई भेद नहीं है, दोनों एक ही हैं। इस्लाम के द्वारा अरबी सभ्यता का अनुकरण होने के कारण ही दोनों परस्पर भिन्न हो गये हैं।

धर्मानुकूल संस्कृति भारत में ही है

वास्तविक सिद्धान्त तो यही है कि किसी देश की सभ्यता और संस्कृति पूर्णरूप से धर्मानुकूल ही हो; परन्तु भारत के अतिरिक्त और किसी भी देश में इस सिद्धान्त का अनुसरण नहीं किया जाता। वरन् इसके विपरीत धर्म को ही अपने देश की प्रचलित सभ्यता के ढाँचे में ढालने का प्रयत्न किया जाता है। यदि किसी धर्म प्रवर्तक ने सभ्यता को धर्मानुकूल बनाने का प्रयत्न किया भी तो उसके जीवन का अन्त होते ही उसके अनुयायियों ने अपने देश की प्रचलित सभ्यता की अन्धी प्रीति के प्रभाव से धर्म को ही प्रचलित सभ्यता का दासानुदास बना दिया। श्री मुहम्मद जी के ज्योति-में जोत समाने के पश्चात् इस्लाम के साथ भी यही बर्ताव किया गया। केवल इसी कारण हिन्दू-धर्म और इस्लाम में भारी अन्तर जान पड़ता है।

प्राचीन अरबी सभ्यता में युद्ध वृत्ति को विशेष सम्मान प्राप्त है। इसी कारण जब अरब के जनसाधारण के चित्त और मस्तिष्क ने इस्लाम के नवीन सिद्धान्तों को सहन नहीं किया, तब वे उसे खड्ग और बाहुबल से दबाने पर उद्यत हो गये- जिसका परिणाम यह हुआ कि कई बार टाल जाने और लड़ने-भिड़ने से बचे रहने की इच्छा होते हुए भी इस्लाम में युद्ध का प्रवेश हो गया, परन्तु उसका नाम ‘जहाद फी सबीलउल्ला’ अर्थात् ‘ईश्वरी मार्ग के लिये प्रयत्न’ रखकर उसे राग-द्वेष की बुराइयों से शुद्ध कर दिया गया।

गंगा के दहाने में डूबा

श्रीमुहम्मद जी के स्वर्ग गमन के पश्चात् जब इस्लाम अरबी सभ्यता का अनुयायी हो गया, तब जेहाद ही मुसलमानों का विशेष कर्तव्य मान लिया गया। इसी अन्ध-श्रद्धा और विश्वास के प्रभाव में अरबों ने ईरान और अफगानिस्तान को अपनी धुन में मुस्लिम बना लेने के पश्चात् भारत पर भी धावा बोल दिया। यहाँ अरबों को शारीरिक विजय तो अवश्य प्राप्त हुई, परन्तु धार्मिक रूप में नवीन इस्लाम की प्राचीन इस्लाम से टक्कर हुई, जो अधिकपक्का और सहस्रों शताब्दियों से संस्कृत होने के कारण अधिक मजा हुआ था। अत. हिन्दू धर्म के युक्ति-युक्त सिद्धान्तों के सामने इस्लाम को पराजय प्राप्त हुई। इसी सत्य को श्रीयुत मौलाना अल्ताफ हुसैन हालीजी ने इन शब्दों में स्वीकार किया है-

वह दीने हिजाजीका बेबाक बेड़ा।

निशां जिसका अक्‍साए आलम में पहुंचा।।
मजाहम हुआ कोई खतरा न जिसका।
न अम्‍मांमें ठटका न कुल्‍जममें झिझका।।
किये पै सिपर जिसने सातों समुंदर।
वह डूबा दहाने में गंगा के आकर।।

अर्थात् अरब देश का वह निडर बेड़ा, जिसकी ध्वजा विश्वभर में फहरा चुकी थी, किसी प्रकार का भय जिसका मार्ग न रोक सका था, जो अरब और बलोचिस्तान के मध्य वाली अम्मानामी खाड़ी में भी नहीं रुका था और लालसागर में भी नहीं झिझका था, जिसने सातों समुद्र अपनी ढाल के नीचे कर लिये थे, वह श्रीगंगा जी के दहाने में आकर डूब गया। ‘मुसद्दए हाली’ नामक प्रसिद्ध काव्य, जिसमें उक्त पंक्तियाँ लिखी हैं, आज तक सर्वप्रशंसनीय माना जाता है। इन पंक्तियों पर किसी ने कभी भी आक्षेप नहीं किया। यह इस बात का प्रसिद्ध प्रमाण है कि इस सत्य को सभी मुस्लिम स्वीकार करते हैं, परन्तु मेरे विचार में वह बेड़ा डूबा नहीं, वरन् उसने स्नानार्थ डुबकी लगायी थी। तब अरबी सभ्यता का मल दूर करके भारतीय सभ्यता में रँग जाने के कारण वह पहचाना नहीं गया।

क्योंकि आचार-व्यवहार-अनुसार तो हिन्दू-धर्म और इस्लाम में कोई भेद ही नहीं था। अरबी सभ्यता यहाँ आकर उस पर भोंड़ी सी दीखने लगी; क्योंकि हिन्दू-धर्म और हिन्दू-सभ्यता एक दूसरे के अनुकूल हैं और यहाँ सैद्धान्तिक विचारों, विश्वासों और आचरण में अनुकूलता होने के आधार पर ही किसी व्यक्ति का सम्मान किया जाता है। ‍‍‍ अत: इस्लाम पर हिन्दुओं के धर्मांचरण का इतना प्रबल प्रभाव पड़ा कि सर्वसाधारण के आचार-व्यवहार में कोई भेदभावन रहा। यदि विशिष्ट मुस्लिमों के हृदय भी पक्षपात से अलग हो जाते तो अरबी और फारसी भाषाओं के स्थान पर हिन्दी और संस्कृत को इस्लामी विचार का साधन बना लिया जाता। अरबी संस्कृति को ही इस्लाम न मान लिया जाता तथा भारतीय इतिहास के माथे पर हिन्दू-मुस्लिम-दंगों का भोंड़ा कल. न लगा होता; क्योंकि वास्तव में दोनों एक ही तो हैं।

इस्लाम में उपनिषदों के सिद्धांत

मौलाना रूम की मसनवीको पढ़ देखो, गीता और उपनिषदों के सिद्धान्तों के कोष भरे हुए मिलेंगे, संतमत के सम्बन्ध में उनका कथन है-

मिल्‍लते इश्‍क अज हमां मिल्‍लत जुदास्‍त।
आशिकां रा मजहबों मिल्‍लत खुदास्‍त।

अर्थात् ‘भक्तिमार्ग सब सम्प्रदायों से भिन्न है। भक्तों का सम्प्रदाय और पन्थ तो भगवान् ही है।’ संतजन सत्य को देश, काल और बोली के बन्धनों से मुक्त मानते हैं। ‘समझेका मत एक है, का पंडित, का शेख॥’ वे सत्य को प्रकट करना चाहते हैं। इसी से जनसाधारण की बोली में ही वाणी कहते हैं। जैसे गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है-

का भाषा, का संस्‍कृत, प्रेम चाहिये सांच।
काम जु आवै कामरी का लै करै कमाच।।

इसी सिद्धान्त के अनुसार मुसलमान संतों ने भी कुरआनी शिक्षा को जनता की बोली अर्थात हिन्दी भाषा के दोहों और भजनों के रूप में वर्णन किया, तो उसे सबने अपनाया। क्योंकि उनके द्वारा ही दोनों धर्मों की एकता सिद्ध हो गयी थी। बाबा फरीद के दोहों को ‘श्रीगुरु ग्रन्थ साहब’- जैसी सर्व-पूज्य धार्मिक पुस्तक में स्थान प्राप्त हुआ। निजामुद्दीन औलिया ने स्पष्ट कहा है-

मीसाक के रोज अल्लाह का मुझसे हिन्दी जबान में हमकलाम हुआ था। अर्थात् ‘मुझे संसार में भेजने से पूर्व जिस दिन भगवान् ने मुझसे वचन लिया था, तो मुझसे हिन्दी बोली में ही वार्तालाप किया था।’ मलिक मुहम्मद जायसी, बुल्लेशाह इत्यादि अनेकों मुसलमान संतों ने हिन्दी में ही इस्लामी सत्य का प्रचार किया, जो आज भी वैसा ही लोकप्रिय है। अरबी भाषा के पक्षपातियों ने ईरान इत्यादि मुस्लिम देशों में भी संतों की वाणी के विरुद्ध आन्दोलन किया था।

मौलवियों की करतूतें

भारतीय मुसलमान संतों पर भी मौलवियों ने कुफ्रके फतवे (नास्तिक होने की व्यवस्थाएँ) लगाये। इसी खींचातानी का परिणाम यह हुआ कि वास्तविक इस्लाम न जाने कहाँ भाग गया।

इसका कारण यह था कि तअस्सुब (पक्षपात) ने मौलवी लोगों को अंधा कर दिया था। इसकी व्याख्या मौलाना हाली से सुनिये। वह कहते हैं -

हमें वाइजोंने यह तालीम दी है।
कि जो काम दीनी है या दुनयवी है।।
मुखालिफ की रीस उसमें करनी बुरी है।
निशां गैरते दीने हकका यही है।
न ठीक उसकी हरगिज कोई बात समझो।
वह दिनको कहे दिन तो तुम रात समझो।।

अर्थात् ‘हमें उपदेशकों ने यह शिक्षा दी है कि धार्मिक अथवा सांसारिक-कोई भी काम हो, उसमें विरोधियों का अनुकरण करना बहुत बुरा है। सत्य धर्म की लाजका यही चि. है कि विरोधी की किसी बात को भी सत्य न समझो। यदि वह दिन को दिन कहे तो तुम उसे रात समझो।’ इसके आगे कहा गया है-

गुनाहों से होते हो गोया मुबर्रा।
मुखालिफ पै करते हो जब तुम तबर्रा।।

‘जब तुम विरोधी को गाली देते हो (सताते हो) तो मानो अपने अपराधों से शुद्ध होते हो।‘

बस, मौलवियों के इन्हीं सिद्धान्तों और बर्तावों ने हिन्दू मुसलमानों को पराया बनाने का प्रयत्न किया, जिसका भयानक परिणाम आज विद्यमान है। ‍‍‍‍‍दूय दी णनहीं तो, हिन्-धर्म ने कट्टर मुसलमान बादशाहों के राज् में भीजनसाधारण पर ऐसा प्रभाव डाला था कि मुसलमान लेखक अपनी हिन्-रचनाओं में ‘श्रीगणेशाय नम:’, ‘श्रीरामजी सहाय’, ‘श्री सरस्वती जी,’ ‘श्री राधा जी’, ‘श्री कृष् जी सहाय’, आदि मंगलाचरण लिखने को कुफ्र (नास्तिकता) नहीं समझते थे। प्रमाण के लिये अहमद का ‘सामुद्रिक’, याकूबखाँ का ‘रसभूषण’ आदि किताबें देखी जा सकती है। अरबी के पक्षपातियों की दृष्टि में भले ही यह पाप हो, परन्तु ‘कुरआन’ की आज्ञा से इसमें विरोध नहीं है।

इस्लाम चमक उठा था

कुरआन की इन्हीं आज्ञाओं को मानकर ईरान के एक कवि ने म.लाचरण का यह पद पढ़ा है –

बनाम आंकिह कि ऊ नामे नदारद।
बहर नामे के रबानी सर बरारद।।

अर्थात् उसके नाम से आरम्‍भ करता हूं कि जिसका कोई नाम नहीं है, अत: जिस नाम से पुकारो-काम चल जाता है।

‍‍‍दू‍यदि पक्षपाती और कट्टर मौलवी ऊधम न मचाते, संसार स्वर्ग बन जाता। क्योंकि हिन्-धर्म के पवित्र प्रभाव से, मंजकर इस्लाम चमक उठा था। सत्याग्रही और न्यायशील मुसलमानों ने तो मुसलमान शब्द को भी ‘हिन्दू’ शब्द का समर्थक ही जाना। इसी कारण से सर सय्यद अहमद खाँ ने कई बार अपने भाषणों में हिन्दुओं से प्रार्थना की कि उन्हें हिन्दू मान लिया जाय, जिस पर उन्हें अपने लिये काफिर की उपाधि ग्रहण करनी पड़ी।

यदि दोनों धर्मों में सैद्धान्तिक एकता सिद्ध न की जाय, तो निबन्ध अधूरा रह जायगा; परन्तु वास्तव में इसकी आवश्यकता ही नहीं, क्योंकि जैसे हिन्दू-धर्म किसी एक सम्प्रदाय का नाम नहीं है, वरन् मानवधर्म के अनुयायी सभी सम्प्रदाय हिन्दू कहलाते हैं-

कारण कि मानव-धर्मका ही एक नाम हिन्दू-धर्म भी है, और ईश्वर के अस्तित्व को न मानने वाले आर्य समाज जैसे सम्प्रदाय भी हिन्दू ही कहलाते हैं- उसी प्रकार इस्लाम में भी अनेकों सम्प्रदाय विद्यमान हैं। खुदाकी हस्ती (ईश्वर का अस्तित्व) न मानने वाला नेचरी फिरका भी मुसलमान ही कहलाता है।

इस्लाम और अद्वैत

पक्षपाती और कट्टर मुसलमानों को जिस तौहीद (अद्वैत) पर सबसे अधिक अभिमान है और जिसे इस्लाम की ही विशेषता माना जाता है, उसके विषय में जब हम कुरआन की यह आज्ञा देखते हैं-

‍‍‍‍ना‍ कुल आमन् बिल्लाहि माउंजिल अलेना व मा उंजिल अला इब्राहीम व इस्माईल व इस्हाक व यअकूब वालस्वातिव मा ऊती मूसा व ईसा वलबीय्यून मिंर्रबिहिम ला नुफर्रिकु बैन अहदिम्मिन्हुम व नह्न लहु मुस्लिमून।

अर्थात् (ऐ मेरे दूत! लोगों से ) कह दो कि हमने ईश्वर पर विश्वास कर लिया और जो (पुस्तक अथवा वाणी) हमपर उतरी है, उसपर और जो ग्रन्थ इब्राहीम, इस्माईल, इसहाक, याकूब और उसकी सन्तानों पर उतरी, उसपर भी तथा मूसा, ईसा और (इनके अतिरिक्त) अन्य नबियों (भगवान् से वार्तालाप करने वालों) पर उनके भगवान् की ओर से उतरी हुई उन सब पर (भी विश्वास रखते हैं) और उन (पुस्तकों तथा नबियों) में से किसी में भेद-भाव नहीं रखते और हम उसी एक (भगवान्) को मानते हैं। और इस आज्ञा के अनुसार तौहीद को समझने के लिये हिन्दू-सद्ग्रन्थों का अध्ययन करते हैं, तो जान पड़ता है कि मौलवी लोग तौहीद को जानते ही नहीं। यदि जानते होते हो स्वर्गीय स्वामी श्री श्रद्धानन्द, महाशय राजपाल इत्यादि व्यक्तियों की हत्या का फतवा (व्यवस्था) न देते और न पाकिस्तान ही बनता।

पंजाब और बंगाल का घृणित हत्याकाण्ड भी देखने में न आता। जहाँ तक मैंने खोज की है, मौलवियाना इस्लाम में यह तौहीद ‘दिया’ लेकर ढूँढ़ने से भी नहीं मिलती, हाँ, संतों के इस्लाम में इसी का नाम तौहीद है।

मिआजार कसे व हर चिन्‍ह खाही कुन।
कि दर तरीकते मन गैर अजीं गुनाहे नेस्‍त।।

अर्थात् ‘किसी को दु.ख देने के अतिरिक्त और तेरे जी में जो कुछ भी आये, कर; क्योंकि मेरे धर्म में इससे बढ़कर और कोई पाप ही नहीं।’

दिल बदस्‍तारद कि ह‍ज्जि अकबरस्‍त।
अज हजारां कआबा यक दिल बेहतरस्‍त।।

अर्थात्- दूसरों के दिल को अपने वश में कर लो, यही काबाकी परम यात्रा है; क्योंकि सहस्रों काबों से एक दिल ही उत्तम है। कुरआन में भगवान् ने बार-बार कहा है-

इनल्लाह ला यहुब्बुल्जालिमीन (अथवा मुफ्सिदीनइ त्यादि) अर्थात् भगवान् अत्याचारियों (अथवा फिसादियों) से प्रसन्न नहीं होता।

एक हदीस में भी आया है-

सब प्राणी भगवान् के कुटुम्बी हैं। अत. प्राणियों से भगवान् के लिये ही अच्छा बर्ताव करो- जैसा अच्छा कि अपने कुटुम्ब वालों से करते हो। इस इस्लाम और हिन्दू-धर्म में कोई भेद नहीं।

(साभार-कल्‍याण)

राहुल गांधी तस्‍वीर में खुद को शामिल करने पर 8 कांग्रेसियों को निकाला गया

उत्‍तर प्रदेश कांग्रेस ने पार्टी महासचिव राहुल गांधी की तस्‍वीर के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप में आठ पार्टी कार्यकर्ताओं को बाहर का रास्‍ता दिखा दिया है। आगरा के इन कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने राहुल की तस्‍वीर के साथ अपनी फोटो जोड़ी और यह दिखाना चाहा कि इन्‍होंने पार्टी महासचिव से दिल्‍ली में मुलाकात की है।

हालांकि बाद में इन्‍होंने अपने किए के लिए माफी भी मांग ली, लेकिन पार्टी ने इसे गंभीर मामला मानते हुए दोषी कार्यकर्ताओं को सालभर के लिए पार्टी से निकाल दिया है। इनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है और मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।

मंगलवार को उत्‍तर प्रदेश कांग्रेस कमे‍टी के सचिव राम लोटन निषाद को कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी और राहुल के खिलाफ टिप्‍पणी करने के आरोप में पार्टी से निकाल दिया गया था।

कश्मीर में गिलानी को फिर से गिरफ्तार करने का नाटक हुआ

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी नेता सैयद अली शाह गिलानी को शहर के बाहरी इलाके में स्थित उनके हैदरपुरा निवास से ऐहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया गिलानी को आरपीसी की धारा 107 (जिसमें किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तारी में रखा जा सकता है जो भीड़ को उकसाए जिससे कानून व्यवस्था के लिए समस्या पैदा हो सकती है) और धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया गया है क्योंकि ऐसी आशंकाएं हैं कि शांति और व्यवस्था के लिए खतरा बन सकते हैं।

साप्ताहिक रूप से आंदोलन संबंधी कैलेंडर जारी कर रहे गिलानी को हुमहामा पुलिस थाने ले जाया गया। उन्हें इससे पूर्व कश्मीर घाटी में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने के बाद 20 जून को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें चार अगस्त को रिहा कर दिया गया था।

Hanuman had a Bad Impact on the Minds of the Young Children - Pakistan Muslim League

The Punjab government in Pakistan has formed a committee to hold discussions and present a report on the broadcasting of Hindu mythology cartoons like "Amar Chitra Katha", and ways to get them banned.

A meeting of the committee, which is headed by the Punjab government spokesman Senator Pervaiz Rasheed and comprises Pakistan Muslim League (Nawaz) Cultural Wing President and MPA, Farah Deeba and other officials, was convened to discuss "cartoons which glorified mythology characters, such as Hanuman that had a bad impact on the minds of the young children," and ways to ban such cartoons.


Deeba said that "these cartoons were in contradiction with the teachings of Islam and young kids could not differentiate between what's true and what's not, so these should be banned."

But since this fell under federal subjects, Deeba said that the committee would "approach the Pakistan Electronic Media Regulatory Authority through the federal government to seek a ban on such cartoons."

However, eminent artist and former principal of Lahore's National College of Arts, Salima Hashmi, disagreed, saying that Muslims in India outnumbered the Muslims in Pakistan, so when Muslim children in India were not affected by mythological figures, why would Muslim kids in Pakistan be affected.

"Why doesn't the government make a committee to know the root cause of militancy and why doesn't it set up committees to find reasons of young children becoming suicide attackers?" she questioned.

Although Indian TV channels are not broadcasted in Pakistan, many cable operators telecast them, with Indian content being in heavy demand.

वोटिंग मशीन के घोटाले का पर्दाफाश करने वाला कंप्यूटर इंजिनियर गिरफ्तार

वोटिंग मशीन की तकीनीकी खामियों और हैकिंग की संभावना के पक्के सुबूत दुनिया के सामने रखने वाले कंप्यूटर वैज्ञानिक हरि प्रसाद को बिना कारण गिरफ्तार कर लिया गया है, और उनसे कड़ी पूछताछ जारी है. फ़िलहाल उनपर वैधानिक रूप से कोई मामला नहीं है, गिरफ़्तारी का आधार यही है की वे यह बताने तैयार नहीं है की मशीन उन्हें किसने दी.


उन्हें उनके हैदराबाद स्थित आवास से उठाकर, मुंबई ले जाया गया. विरोध जताने पर अधिकारीयों ने इतना ही कहा की 'हमारे हाथ बंधे हुए हैं, हमपर ऊपर से भारी दबाव हैं. '


हरीप्रसाद ने अगर कोर्ट में अर्जी दायर कर वोटिंग मशीन पाने की कोशिश की होती तो उन्हें दस से पंद्रह साल इंतजार करना पड़ता. न्याय व्यवस्था की उलटबन्सियों को देखते हुए हैरत नहीं होगी की इस मामले में कोर्ट हरिप्रसाद को ही चोरी, ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट और सायबर कानून के अंतर्गत अपराधी ठहरा दे, और दस साल के लिए जेल में सड़ने भेज दे.

आज के हालत में ऐसा लगता है अगर हरिप्रसाद को रिमांड में ही यातना देकर मार डाला जाए, तो कही कोई आवाज़ तक नहीं होगी. न कोई अख़बार इस उनके हिरासत से लापता हो जाने को उठाएगा न ही कोई चैनल इसका फालोअप लेगा. महीने भर में यह खबर भी दब जाएगी, और पूरी सम्भावना है की अगले चुनाव भी बिलकुल इन्ही (कु)व्यस्थाओं और सुरक्षा खामियों के साथ होंगे.

इस ईवीएम् के नाम पर चल रही धोखेबाज़ी के बारे में लोगों को २००४ से ही शक था. २००९ बीतते बीतते इसमें संदेह की गुंजाईश नहीं रही, भारत की न्याय व्यवस्था कितनी कार्यसक्षम और पारदर्शी है यह जानते हुए भी अडवाणी जी कहते रहे की हमने याचिका दायर की है, हमें कोर्ट के निर्णय का इंतजार है.

चुनाव आयोग सरकार की घर की खेती है, कोर्ट के निर्णय पर भी सरकार अड़ंगे लगा सकती है, लगाती ही रही है. जबकि ऐसे मामले को आन्दोलन के ज़रिये जनता में ले जाना सबसे प्रभावी तरीका था.


तस्लीमा नसरीन की हत्या पर इनाम क्यों ???

उत्तर प्रदेश में बरेली की एक अदालत ने बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन की हत्या करने वाले को इनाम देने की घोषणा करने वाले कट्टरपंथी इस्लामी संगठन के प्रमुख को समन भेजा है। अदालत जानना चाहती है कि उसने यह इनाम क्यों रखा?

बरेली के चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट योगेंद्र राम गुप्ता ने इत्तेहाद मिल्लत काउंसिल के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा को 24 सितंबर को कोर्ट में हाजिर होने के आदेश दिए हैं। तौकीर ने नसरीन के सिर पर 5 लाख रुपए का इनाम रखा था।

बाद में थाने में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इससे पहले मौलाना ने अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश का सिर काट कर लाने पर एक करोड़ रुपए का इनाम देने की भी घोषणा की थी।

Ahmedabad Court orders Police inquiry against Chidambaram

Metropolitan court of Ahmedabad on Monday ordered a police inquiry against Union Home Minister P Chidambaram in a defamation suit filed against him for his controversial ’saffron terrorism’ remarks.

Metropolitan Magistrate M G Dave ordered an officer of the ‘Superintendent of Police’ level under section 202 of CrPC to conduct an inquiry and submit a report within 90 days on the issue. Gujarat’s Hindu sadhu Swami Nijanand Tirth of Patan district had filed the defamation complaint against Union Home Minister P Chidambaram under section 499 and 500(defamation) of the Indian Penal Code in the metropolitan court, demanding action against Chidambaram for hurting the sentiments of crores of Hindu saints by using the phrase ’saffron terrorism’.

He said the colour saffron is the symbol of the Hindu religion and saints across the country wear attire of the same colour. Tirth also said that saffron was the symbol of peace and sacrifice and God and those trying to demean it needs to be punished. In his speech at a conference held in Delhi on August 25, Home Minister Chidambaram had used a phrase “phenomenon of saffron terrorism.”

सुप्रीम कोर्ट नीति निर्धारण के मामलों में दख़ल न दे - मनमोहन सिंह

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गोदामों में पड़े अनाज को ग़रीबों को मुफ़्त में बाँटने के संबंध में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि वो नीति निर्धारण के मामलों में दख़ल न दे और इस मामले में सरकार को ही फ़ैसले लेने दे.

मनमोहन सिंह ने ये बातें देश के वरिष्ठ संपादकों के साथ हुई बैठक में कहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अनाज गोदामों में प़डा सड़ रहा है और इसलिए सरकार को चाहिए कि वह इसे ग़रीबों में मुफ़्त में बाँट दे.

मनमोहन सिंह का कहना था कि तेंदुलकर समिति के मुताबिक़ देश में ग़रीबों की संख्या कुल आबादी के 37 प्रतिशत है. ऐसे में सब को मुफ़्त अनाज देना संभव नहीं है. पिछले दिनों मीडिया लगातार ख़बर दिखाता रहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में गोदामों में रखा अनाज सड़ रहा है.

बैठक में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन के अनुसार प्रधानमंत्री का कहना था कि नक्सलवाद लंबे अरसे से चली आ रही पेचीदा समस्या है और इसका हल आसानी से होने वाला नहीं है. उनका कहना था कि अलग अलग राज्यों में इसका स्वरूप अलग अलग है.

मनमोहन सिंह का कहना था कि अपनी दोनों टाँगों पर चलते हुए ही सरकार को इससे निपटने की कोशिश करनी होगी. उनका कहना था कि एक टाँग है विकास और दूसरी टाँग, क़ानून व्यवस्था. प्रधानमंत्री का कहना था कि पाकिस्तान में सत्ता चाहे किसी की भी हो, भारत के पास बातचीत के सिवाय कोई विकल्प नहीं है.

सिद्धार्थ वरदराजन के अनुसार प्रधानमंत्री का कहना था कि अगर जंग नहीं लड़ना चाहते हैं तो बातचीत ही एक विकल्प है. संपादकों के साथ अपनी बैठक में प्रधानमंत्री ने ये भी संकेत दिए कि सात नवंबर से शुरू होने वाले संसद सत्र से पहले वो अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल करेंगे.

प्रचंड ने सांसदों को खरीदने के लिए चीन की सरकार से 50 करोड़ रुपये मांगे

बीजेपी प्रवक्ता तरुण विजय का कहना है, "ऐसी खबरें हैं कि माओवादी नेता प्रचंड के दोस्तों ने सांसदों को खरीदने के लिए चीन की सरकार से 50 करोड़ रुपये मांगे हैं."

तरुण विजय ने कहा, "अगर ये खबर सही है तो बीजेपी उसकी निंदा करती है. हम सरकार से मांग करते हैं कि वो परिस्थितियों पर निगाह रखे और किसी हाल में चीन को नेपाल के घरेलू मामलों में दखलंदाजी से रोके."

बीजेपी का मानना है कि नेपाल कठिन समय से गुजर रहा है और ऐसे हालात में चीन का नेपाल के मामलों में दखल देना भविष्य के साथ साथ भारत की सुरक्षा के लिए भी खतरा है. बीजेपी प्रवक्ता का कहना है कि नेपाली जनता की लोकतांत्रिक इच्छाओं का सम्मान हर हाल में होना चाहिए.

बीजेपी की चिंता का जिक्र करते हुए तरुण विजय ने गिलगित के मामले का भी हवाला दिया. उन्होने कहा, "चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत के हिस्से पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे को पहले पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया और फिर वेबसाइट से ये पेज हटा दिया गया. इन सब बातों से भारत की सुरक्षा चिंता बढ़ी है." बीजेपी का कहना है कि नेपाल में अगर चीन किसी को सत्ता हथियाने में मदद करता है तो इससे भारत की सुरक्षा पर खतरा बढ़ेगा.

नेपाली मीडिया में एक राजनीतिक पार्टी के नेता की चीन के अधिकारियों से की गई बातचीत लीक हो गई है जिसमें वह चीन से 50 करोड़ रुपये की मांग कर रहा है. राजनीतिक व्यक्ति ने ये पैसे कथित रूप से सांसदों को खरीदने के लिए मांगे हैं. नेपाल में प्रधानमंत्री पद के चुनाव के लिए पांच दौर का मतदान होने के बाद भी किसी को चुना नहीं जा सका है. देश में लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता है.

वीएचपी को पूरे देश में कहीं भी बाबरी मस्जिद मंजूर नहीं

दिल्ली में वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने कहा कि वीएचपी को पूरे देश में कहीं भी बाबरी मस्जिद मंजूर नहीं है। साथ ही उन्होंने इस मसले पर भारतीय संसद से अपील की है कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर कानून बनाकर किया जाए।


रामजन्मभूमि-बाबरी ढांचा विवाद पर उन्होंने कहा कि अब यह कोई विवाद है ही नहीं, हम अयोध्या में राम जन्म के सभी सुबूत पेश कर चुके हैं, जिन्हें झुठलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि जवाहर लाल नेहरू के लिए देश 15 अगस्त 1947 में आजाद हुआ होगा, पर आम जन मानस को असली आजादी का अनुभव 6 दिसंबर को ही हुआ था।

संघ के मुखपत्र पांचजन्य के संपादक बलदेव शर्मा का इस मुद्दे पर कहना है कि राम मंदिर निर्माण इसलिए आवश्यक है कि क्योंकि भगवान राम पूरी दुनिया में भारत की पहचान है। उन्होंने कहा कि भगवान राम भारत के राष्ट्रपुरुष है और इसी के चलते महात्मा गाधी ने भी रामराज्य की ही परिकल्पना की थी।

Please Re-open Schools in Kashmir on Teacher's Day


As India observes Teachers Day this weekend, it is time to spare a thought for the Kashmiri students who are not in school.

Children in Srinagar, the winter capital of the restive state of Jammu and Kashmir, have been sitting at home for the past two-and-a-half months, unable to attend classes due to a cycle of shutdown calls given by the separatists and curfew orders imposed by the administration.

The young children are witnessing rage on the streets and frustration at home.Some are joining the protests, egged on by peers and adults who urge them to be part of the struggle for 'azadi' (freedom), telling them that education can wait for now.

Others resist the pull and pressure and stay safe at home, but with nothing to do and nowhere to go.

Teachers have told them to study at home, as the exams will be held on schedule at the end of the semester, regardless of whether classes are held or not.

Some schools have uploaded tutorials on the web and the students are trying to study the material on their own. But, not everybody has access to the Internet in the nine districts of Kashmir.

The Delhi Public School of Srinagar has flown over a hundred children to one of their Delhi branches to complete their summer semester. The school is tightlipped about the identity of the children in order to protect them. Off the record, we learn that their parents in the valley might face harassment from separatists for having evacuated their children.

Mohammad Irfan of Srinagar University says that the first term exams are to be held in a month's time and not a single day of classes have been held.

He says: "How are we supposed to cope with this? Young children are sitting at home and their future is at stake. I appeal to the leaders and the government, please spare a thought to the children of poor and middle class families who cannot afford to leave this city and study elsewhere."

Adds Mohammad Aslam: "The poor have nowhere to go. Week after week we live in hope that violence will end and normalcy will resume. Even during the Ramadan month there has been no respite. How long can the children stay away from schools? What future do I have, just waiting?"

Some believe separatist leaders like Dukhtaran-e-Millat chief Asiya Andrabi and Hurriyat leaders like Syed Ali Shah Geelani and Masrat Alam, who tell them that they are the promised generation, who will deliver to the Kashmiris, freedom from Indian rule; a promise that had been made twenty years ago, which has also led nowhere.

Masrat Alam, who is a separatist living in hiding, said in a statement to the local KNS: "To get education is everybody's wish. But what is the importance of the education in a place where there is a dark future, and, where, students like Tufail Matto are being killed."

He added "even from 1990 to 1995, when the Kashmir agitation was at its peak, still a large number of youth became doctors and engineers....that is why, we have full faith in students and they will get more marks than what they used to during normal times. We are not living in palaces, but among common people, that is why, we say that the masses are not tired and that they are connected with the ongoing movement from the grassroots level."

At the alter of his personal ambition of succeeding Syed Ali Shah Geelani of the Hurriyat, Alam will lay to rest many young futures without any sense of guilt. Why guilt, there is euphoria in the speeches that are made in darkened rooms and uploaded onto you tube.

And then, there Asiya Andrabi, chairman of the hardline 'Dukhtarane Millat', who had to face embarrassment when news broke that her son, Mohammad bin Qasim, has applied to study in Malaysia, while she was advocating that children should boycott education and join street protests.

According to her, it is the security forces that target children. She refuses to accept that protesters carrying children on their shoulders while surrounding police stations to torch them, are endangering the lives of children.

She will not budge from her stand that pre-teens carrying placards that call for violence against state, is not the right thing to do.

Children who barely understand what 'azadi' means are being yanked out of homes and brought into the forefront of demonstrations.

But Asiya says, "The unabated killings of Kashmiris was part of a larger conspiracy to quell the ongoing movement. We will not retreat till we achieve freedom. People should be ready for a longer agitation for attaining their basic rights."

She also said, "the biggest tribute to the martyrs would be to carry forward the ongoing movement to its logical conclusion," by which she means secession from India.

Castigating those who criticize the strikes on the ground that education of children has suffered, Asiya says "When our teenagers and youth are being martyred with impunity by troops and cops, how can we carry on our business activities?

Draksha Andrabi, a mother and resident of Srinagar city, says "I would like to appreciate Asiya Andrabi 's decision (of wanting to send her son overseas to study). She has a right to educate her ward wherever she pleases. However, she should also look upon the agony of Kashmiri students. Since last June, schools and colleges of Kashmir have been closed.Who will send them to Malaysia or other parts of Kashmir for better education?"

Hurriyat leader Syed Ali Shah Geelani's family members are employed in government offices or are studying outside Srinagar. Mia Qayoom, also a Hurriyat leader, has children studying in a medical school in Bihar and in a Jammu school.

The separatist leaders' children will receive their education outside of Srinagar and will most likely join politics.

Dynastic politics is commonplace in Kashmir. While some come into power through the electoral process like Omar Abdullah, a third generation politician and current Chief Minister and Mehbooba Mufti, a second generation politician and currently a Member of Parliament, there are others who are waiting in the wings to join their relatives who are separatists leaders in the current violent agitation.

Mirza Mahboob Beg, a Member of Parliament from Anantnag in Kashmir, says "the rich can send their children to Pune and elsewhere. They will get quality education. But what of the poor? How can we look away and forsake the future of hundreds of thousands of children."

In the Kashmir region, there are almost a million students in primary, secondary and high schools now sitting at home. And, add to that about 30,000, who are enrolled in universities and technical institutes.

Besides being deprived of education, they are living under high stress conditions. They have to battle with pressure to join the violent agitation or be ridiculed. They watch funerals and women wailing over lost kith and kin almost on a daily basis.

Sounds of gunfire and getting caught in tear gas protests are commonplace. Being roughed up by policemen, asked to show identity papers and subjected to rude and intrusive questioning, is something all Kashmiri youth have faced.

They also face stigma, discrimination and abandonment. Nobody has the time or the resources to give them counseling that they so badly need. They long for the day when they can get on with their lives, go back to school.

Chief Minister Omar Abdullah told this correspondent in Leh "If only the separatist leaders could spare schools and colleges and medical institutes from their agitations, things could start improving. Parents should take the blame for letting their children out into the streets and putting them in harm's way."

Blame. Everybody blames everybody else. It's the children who don't want to blame anybody. They just want to be with their buddies in their classrooms.

WHY HINDU RASHTRA ?

Hindu Rashtra - Eternal and Perennial

And Hindu Rashtra is the finest blossoming of this spiritual consciousness. We see it shining in its pristine glory on the, very fire page of history as a fully developed nation. The great secularist of recent times, Pandit Jawaharlal Nehru, had noted with great pride that "One feels curious and wonder-struck on seeing the vast and unbroken stream of Indian civilization and culture from the dawn of our history to modern times." While in the Vedic period the feeling of intense intimacy towards the motherland is expressed in the words "Mata bhoomih putroham prithivyah" -"Aye, we are children of this mother earth,"in the Pauranic period it takes the form of :

Uttaram yat samudrasya, Himadreschaiva dakshinam !
Varsham tad Bharatam nama Bharati yatra santatih !!

(Bharat is the name of country situated to the north of the sea
and south of the Himalayas and its progeny is known as Bharati.)

The same sentiment was expressed in the middle ages in the following sloka of Barhaspatya shastra :

Himalayam samarabhya yavadindu sarovaram !
tam devanirmitam desham Hindusthanam prachakshate !!

This land created by the gods and extending from the Himalayas to Indu Sarovar [i.e., the Indian Ocean], is known as Hindusthan.)

It is to be noted that this sloka also points to the possible formation of the word Hindu, as a beautiful synthesis of Hi of the Himalayas and Indu of the Indusarovar. There is also the belief that it is a variation of Sindhuoriginally used to denote the people living in the region around the river Sindhu (Indus) but later came to be applied for the people of the entire country. There is no doubt that in both the cases, the word Hindu has been used for the offspring of this land. The following Vedic sloka has sublimated this tradition of intense attachment to the motherland by depicting it (motherland) as the Rashtradevata, the divine manifestation of nationhood itself

Bhadramicchanta rishayah swarvidah tapodeekshamudaseduragre
Tato rashtram balamojascha jatam tadasmai deva upasannamantu.

(The sages carried out austere penances for the welfare of mankind; and out of that (penance) was born the nation endowed with strength and prowess. Therefore let us worship this Rashtradevata. (Atharva-Veda)

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