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परमाणु करार की धारा 17 (ब) के लिये भाजपा और वामदल के एक सुर

परमाणु दायित्व विधेयक की राह में भाजपा और वाम दलों ने रविवार को तब ताजा अवरोध पैदा कर दिए जब उन्होंने कहा कि वे आपूर्तिकर्ता के दायित्व को कम करने की किसी भी कोशिश का विरोध करेंगे।

भाजपा और वाम दलों ने विधेयक के मसौदे में किये गये एक संशोधन पर आशंकाएं जताते हुए कहा है कि इसके जरिए गंभीर लापरवाही या खराब आपूर्ति करने के नतीजतन परमाणु हादसा होने की स्थिति में विदेशी कंपनियों के अधिकारों की रक्षा की जा रही है।

भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा कि हम इस बारे में बेहद स्पष्ट हैं कि (आपूर्तिकर्ता के दायित्व से संबंधित) धारा 17 (ब) को कमजोर नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि हमारी बात सुनी जाने की जरूरत है। कैबिनेट की ओर से मंजूर इस संशोधन के जरिए अगर इसे कमजोर किया जाता है तो भाजपा इसका विरोध करेगी और इस पर आपत्ति जताएगी।

वाम दलों ने साफ तौर पर कहा है कि वे असैन्य परमाणु दायित्व के मसौदे में इस तरह के बदलाव को मंजूर नहीं करेंगे।

भाकपा नेता डी राजा ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि वाम दल इन नये बदलावों से सहमत हो सकते हैं कि अगर जानबूझकर या इरादतन दुर्घटना होती है तभी ऑपरेटर आपूर्तिकर्ता से (क्षतिपूर्ति की) मांग कर खुद की मदद कर सकता है। हम इसे निष्पक्ष और वैध तर्क नहीं मानते।

केंद्रीय कैबिनेट ने शनिवार को जिन 18 सिफारिशों को मंजूर किया, उनमें से एक सिफारिश कहती है कि अगर किसी ऑपरेटर को आपूर्तिकर्ता से क्षतिपूर्ति का दावा करना है तो परमाणु संयंत्र में दुर्घटना इरादतन किये गये कत्य के नतीजतन होनी चाहिये।

बदलाव के बाद धारा 17 कहती है कि परमाणु हादसे की क्षतिपूर्ति का धारा छह के अनुरूप भुगतान करने के बाद परमाणु प्रतिष्ठान के ऑपरेटर के पास खुद की मदद का अधिकार होगा।

यह धारा कहती है कि ऐसा अधिकार तब होगा जब...
(अ) - इस तरह का अधिकार अनुबंध में लिखित रूप से व्यक्त हो और
(ब) - परमाणु हादसा प्रकट या छिपी हुई खामी, खराब मानकों वाली सामग्री की आपूर्ति, खराब उपकरण या खराब सेवाओं के चलते अथवा साम्रगी, उपकरण या सेवाओं के आपूर्तिकर्ता की गंभीर लापरवाही के चलते हुआ हो और
(स) - परमाणु हादसा नाभिकीय क्षति पहुंचाने के इरादे के साथ किसी व्यक्ति के चूक या गड़बड़ी करने के नतीजतन हुआ हो।

भाजपा और वाम दल महसूस करते हैं कि उपबंध (ब) और (स) में परमाणु हादसे के संबंध में इरादा शब्द के जिक्र से आपूर्तिकर्ता को उसकी जिम्मेदार से बच निकलने का रास्ता मिल सकता है क्योंकि इस तरह की किसी दुर्घटना में इरादा साबित करना मुश्किल होगा।

परमाणु क्षति असैन्य दायित्व विधेयक 2010 को इस बदलाव सहित 17 अन्य सिफारिशों के साथ लोकसभा में 25 अगस्त को पेश किया जाना है।

चार वाम दलों माकपा, भाकपा, फॉरवर्ड ब्लॉक और आरएसपी ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि सरकार ने जो प्रस्तावित संशोधन किए हैं, उनमें परमाणु उपकरणों के विदेशी आपूर्तिकर्ताओं और घरेलू निजी कंपनियों के हितों की रक्षा के मकसद से मूल विधेयक के प्रावधानों को और भी कमजोर किया गया है।

ये बदलाव खराब या कम मानक वाले उपकरण अथवा सामग्री देने के लिये आपूर्तिकर्ता को तब उत्तरदाई बनाते हैं जब यह साबित हो जाये कि उसने इस तरह की आपूर्ति परमाणु क्षति पहुंचाने के इरादे से की और इसी के नतीजतन हादसा हुआ। वक्तव्य कहता है कि इस संशोधन के तहत आपूर्तिकर्ता का दायित्व तय करना असंभव हो गया है।

वाम दलों की दलील है कि हालांकि, संसद की स्थायी समिति ने तो साफ तौर पर सिफारिश की थी कि परमाणु प्रतिष्ठान में कोई निजी ऑपरेटर नहीं होगा, लेकिन सरकार ने जो संशोधन किए हैं उनके मुताबिक निजी कंपनियां, जब कभी उन्हें अनुमति मिले, व्यापक राज सहायता के साथ परमाणु उर्जा में ऑपरेटर बन सकेंगी।

वाम दलों का आरोप है कि यह साफ है कि यह सब विदेशी परमाणु आपूर्तिकर्ताओं और घरेलू निगमित खेमों के दबाव में किया गया है। कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने बीते चार से पांच महीने में खुले नजरिए का परिचय दिया है।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, यथासंभव व्यापक आम सहमति निर्मित करने की सरकार की कोशिश के तहत सभी राजनीतिक दलों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया गया है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि जिस मसौदे पर सहमति बनी थी उससे कुछ भटकाव हुआ है। अब जो भाषा प्रयोग की जा रही है उसमें आपूर्तिकर्ता के दायित्व को काफी कुछ कमजोर किया जा रहा है।

यह पूछने पर कि क्या भाजपा अपने पूर्व के रूख में बदलाव करेगी तो जेटली ने कहा कि सभी तथ्यों को देखने के बाद पार्टी निर्णय करेगी। पहले पार्टी ने विधेयक के समर्थन का रूख अपनाया था।

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस बदलाव के लिए सरकारी की ओर से किसी ने भी मुख्य विपक्षी पार्टी को जानकारी नहीं दी है। महत्वपूर्ण रूप से, न तो मूल विधेयक और न ही इस पर गौर करने वाली स्थाई संसदीय समिति की सिफारिश में ऐसे किसी प्रस्ताव का जिक्र था।

सिर्फ इसी सप्ताह की शुरुआत में सरकार ने ऐसा किया जब धारा 17 के उपबंध (अ) और (ब) के बीच और शब्द के इस्तेमाल को लेकर विवाद पैदा हुआ। असल में भाजपा और वाम दलों ने कहा था कि और शब्द के इस्तेमाल से परमाणु हादसा होने की स्थिति में आपूर्तिकर्ता का दायित्व कम हो जाता है। इसके बाद सरकार ने और शब्द को निकाल दिया लेकिन धारा 17 में शब्द इरादे (इन्टेन्ट) को शामिल कर दिया।

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