हिन्दू परिवारों ने दान दे दी मस्जिद को जाने वाले रास्ते की जमीन


संत कबीरनगर जिले के सिमरियावां ब्लॉक में आने वाले थवईपार गाँव के एक ही हिंदू परिवार के 4 लोगों ने मस्जिद तक जाने के लिए अपनी जमीन दान कर दी है।

इससे नमाजियों को और ग्रामीणों को आने जाने में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हो रही है। गांव के बीचो-बीच एक मस्जिद स्थित है और गांव के चारों तरफ मुस्लिम की आबादी भी है और इस मस्जिद तक जाने के लिए एक रास्ता पहले से मौजूद है लेकिन कुछ लोगों को मस्जिद तक जाने के लिए घूम कर जाना पड़ता था।

इसी परेशानी को देखते हुए गांव के ही हिंदू परिवार नकछेद सिंह सहित 4 लोगों ने अपनी जमीन दान कर दी। 

ग्राम प्रधान द्वारा उस जमीन पर खड़ंजा लगाकर रास्ता बना दिया गया, जिससे नमाजियों को मस्जिद तक जाना आसान हो गया। 

वही इस रास्ते के बन जाने से गांव के सभी ग्रामीण  काफी खुश हैं  और उनका मानना है कि  जिस तरह से हिंदू परिवार ने मस्जिद जाने के लिए अपनी जमीन को दान कर दी, वो पूरे देश में कौमी एकता की मिसाल बन गई है। वर्षों तक लोगों को सीख देती रहेगी। 

जमीन दान करने वाले ग्रामीण नकछेद सिंह कहते हैं कि हिंदू मुस्लिम किसी के माथे पर लिख कर नहीं आया है और वह सभी एक हैं और पूरे देश में सभी लोगों को मिल जुलकर रहना चाहिए। 

तिरुपति में इस्लामिक विश्वविद्यालय का हिन्दू संगठनों द्वारा कड़ा विरोध

हिंदू जनजागृति समिति की श्रीमती उमा रविचंद्रन ने यह भय व्यक्त किया है कि तिरुपति में निर्माण किए जाने वाले इस्लामिक विश्वविद्यालय के पीछे हिंदू संस्कृति, मंदिर तथा तीर्थक्षेत्र नष्ट करनेका षडयंत्र है । बाबर ने अयोध्या में रामजन्म भूमि पर मस्जिद निर्माण की, औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ तथा मथुरा के श्रीकृष्ण मंदिर के पास मस्जिद निर्माण की । 

यदि हम इस्लामिक विश्वविद्याल का विरोध नहीं करेंगे, तो तिरूपति के मंदिर भी एक दिन मस्जिद हो जायेगी । हिंदू जनजागृति समिति द्वारा २० अक्तूबर को अरणी में इस्लामिक विश्वविद्याल के विरोध में प्रदर्शन किया गया, उस समय श्रीमती उमा रविचंद्रन् ऐसा कह रही थीं । 

इस प्रदर्शनमें शिवसेना, हिंदू मुन्नानी (हिंदुओंके लिए अग्रेसर), भाजपा, रा.स्व. संघ, विहिंप इन संगठनोंके ७५ से अधिक कार्यकर्ता सम्मिलित हुए थे ।

श्री जनार्दन स्वामी के गाए श्री व्यंकटेश्वर के भक्ति गीत से इस प्रदशर्न का प्रारंभ हुआ । स्वामी उनके १० भक्तों के साथ प्रदर्शनमें सम्मिलित हुए थे ।


तामिलनाडु के सन न्यूज, तंती टीवी, कलाइंगर टीवी, जया टीवी, पॉलीमेर, मक्कल टीवी, जेमिनी न्यूज आदि समाचार प्रणाल द्वारा इस प्रदर्शन का समाचार संकलन किया गया । साथ ही दिनकरन्, दिनाथंसी, दिनामलर, तामिलमुरासू आदि समाचार पत्रों ने भी समाचार संकलन किया ।

हिंदू मुन्नानी संगठन के कार्यकर्ताओं ने समिति के कार्यकर्ताओं से इस्लामिक विश्वविद्यालय के छायाचित्र लिए । उन्होंने बताया कि तिरूवन्नामलाई में वे इसी प्रकार के प्रदर्शन का आयोजन करने वाले हैं ।

हाँ मेरे इशारे पर गिराया गया था बाबरी ढांचा - कल्याण सिंह


उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने यह कहकर सनसनी फैला दी है कि अयोध्या का विवादित ढांचा उन्हीं के इशारे पर गिराया गया था। उत्तर प्रदेश के एटा में उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद गिराए जाने की पूरी जिम्मेदारी उनकी है। उन्होंने कहा कि मैंने ही आदेश दिया था कि कारसेवकों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

करीब 20 साल बाद कल्याण सिंह ने बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने कहा, 'जहां तक 6 दिसंबर, 1992 को विवादित ढांचे को गिराए जाने का सवाल है, तो यह जिम्मेदारी मैं अपने ऊपर लेता हूं। मैंने ही आदेश दिया था कि कारसेवकों पर गोली नहीं चलेगी। इसीलिए प्रशासन ने गोली नहीं चलाई। मैंने यह आदेश भी दिया था कि अधिकारियों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाए।' कल्याण सिंह ने यह भी कहा कि उन्होंने मामले की जांच कर रहे लिब्रहान कमिशन के सामने भी यही बयान दिया था।

गौरतलब है कि जिस वक्त अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी, उस वक्त कल्याण सिंह यूपी के मुख्यमंत्री थे। इन दिनों कल्याण सिंह की बीजेपी में वापसी की अटकलें चल रही हैं। एटा में कल्याण सिंह ने कहा कि राष्ट्रवादी ताकतों को एकजुट करने के मकसद से वह अपने दल 'जन क्रांति पार्टी' का बीजेपी में विलय कर देंगे। बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी ऐसे संकेत दे चुके हैं कि कल्याण की पार्टी में वापसी हो सकती है।

यूपी की राजनीति के हाशिए पर पहुंच चुके कल्याण सिंह ने एक बार फिर से राम मंदिर मुद्दा उछालने की कोशिश की है। इस वक्त 20 साल पुराने मुद्दे पर बयान देकर वह खोया हुआ जनाधार वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं। भले ही 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के साथ ही कल्याण सिंह की सरकार भी गिर गई थी, लेकिन इसी मुद्दे को भुनाकर बीजेपी केंद्र में सरकार बनाने में कामयाब रही थी।

अयोध्या में रामलला गर्भगृह में ही मंदिर,मस्जिद दोनों का प्रस्ताव


विराजमान रामलला के स्थल अर्थात गर्भगृह में राममंदिर का निर्माण करने व अधिग्रहीत परिसर में युसुफ आरामशीन के पास मस्जिद निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। विवाद के समाधान के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति पलोक बसु के संरक्षकत्व में दो वर्षो से चल रही मुहिम में इस चरण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समाधान के इस प्रस्ताव में उच्च न्यायालय से मुस्लिम समुदाय को मिली जमीन को उद्यान के रूप में विकसित करने पर सहमति बनती दिख रही है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति पलोक बसु के संयोजन में तुलसी स्मारकभवन सभागार में हुई इस बैठक की समाधान की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई। रसिकपीठ जानकीघाट बड़ा स्थान के महंत जनमेजय शरण की अध्यक्षता में इस बैठक के सभी चार प्रस्तावों को बैठक में पारित होने के बाद अयोध्या -फैजाबाद के लोगों की सहमति के बाद मंडलायुक्त के माध्यम से राज्य सरकार के पास भेजने पर विचार हुआ। तय किया गया कि इन प्रस्तावों पर अधिग्रहीत परिसर के रिसीवर की सहमति के बाद राज्य सरकार के माध्यम सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचाया जाए।

इस अवसर समाधान समिति के प्रवक्ता ज्ञानप्रकाश श्रीवास्तव एडवोकेट ने कहा कि अयोध्या विवाद के निपटारे के लिए अयोध्या-फैजाबाद के लोगों की सहमति व इसमें बाहरी लोगों को प्रवेश न देने, विवादित स्थल का दक्षिणी हिस्सा उद्यान के रूप में विकसित करने, मस्जिद के निर्माण के लिए अधिग्रहीत परिसर स्थित युसूफ आरामशीन के पास जमीन देने, विराजमान रामलला के स्थान पर मंदिर निर्माण का प्रस्ताव कई बैठकों में मौजूद लोगों की राय के आधार पर तैयार किया गया है।

दिल्ली में मस्जिद निर्माण कार्य रुका, कांग्रेस करा सकती है दंगा

पुरानी दिल्ली स्थित सुभाष पार्क में एमसीडी और पुलिस के दखल के बाद मस्जिद का निर्माण रुक गया है, लेकिन वहां तनाव शुरू हो गया है। एमसीडी ने आदेश जारी किए हैं कि वहां पर धार्मिक गतिविधि की इजाजत नहीं दी जाएगी। 

दूसरी ओर कांग्रेस के क्षेत्रीय विधायक ने घोषणा की है कि पार्क में जुमे की नमाज पढ़ी जाएगी जबकि इंद्रप्रस्थ वीएचपी ने भी घोषणा की है कि वह सुभाष पार्क में मस्जिद के खिलाफ गौरी शंकर मंदिर से विरोध मार्च निकालेगी और पार्क में हनुमान चालीसा का पाठ करेगी। मामले की नजाकत को देखते हुए पुलिस ने वहां व्यापक इंतजाम कर दिए हैं।

सुभाष पार्क में स्थानीय कांग्रेस विधायक शुएब इकबाल और उनके समर्थकों द्वारा किया गया मस्जिद का निर्माण फिलहाल रुक गया है। लेकिन वहां लोगों की आवाजाही खासी बढ़ गई है। विधायक का एक झूठा दावा है कि मेट्रो की खुदाई के दौरान वहां जो दीवार मिली है, वह मुगलकालीन अकबराबादी मस्जिद की है, जिसे अंग्रेजों ने ध्वस्त कर दिया था। 

उनका कहना है कि पार्क में मस्जिद का उतना ही निर्माण किया गया है, ताकि नमाज पढ़ने वालों को कोई परेशानी न हो। शुएब के अनुसार पार्क में शुक्रवार को बड़ी नमाज अदा की जाएगी। लेकिन एमसीडी ने पार्क में किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि न होने देने के आदेश जारी किए हैं।

नॉर्थ एमसीडी के अडिशनल कमिश्नर के अनुसार इस मसले को लेकर गुरुवार को एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें एमसीडी व पुलिस के आला अधिकारी मौजूद थे। बैठक में निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि पार्क में किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि की इजाजत नहीं दी जाएगी और ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी ओर इस मसले को लेकर वीएचपी ने गुरुवार को एक बैठक की। वीएचपी के प्रदेश महामंत्री सत्येंद्र मोहन के अनुसार बैठक में निर्णय लिया गया है कि पार्क में मस्जिद निर्माण के विरोध में धार्मिक संगठनों के संतों की अगुआई में चांदनी चौक स्थित गौरी शंकर मंदिर से एक विरोध मार्च निकाला जाएगा और सुभाष पार्क में हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा।

इलाके में बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस व एमसीडी के आला अफसरों ने दोपहर बाद सुभाष पार्क का दौरा किया। इस दौरे में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के अडिशनल पुलिस कमिश्नर देवेश चंद्र श्रीवास्तव, अडिशनल डीसीपी असलम खान, राजेश देव आदि मौजूद थे। अफसरों का कहना है कि इलाके में कानून व्यवस्था कायम करने और तनाव से बचने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। वैसे पार्क में गुरुवार को लगातार पुलिस और एमसीडी अफसरों की आवाजाही के कारण वहां तनाव बना रहा। पार्क में लोगों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है।

दिल्ली एमसीडी ने जामा मस्जिद को सजाने 145.3 करोड़ रुपए मन्जूर कियें

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद को फिर से सजाने संवारने के लिए 145.3 करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है।

निगम
की निर्माण समिति के अध्यक्ष जगदीश ममगई ने आज इसकी जानकारी देते हुए बताया कि इसके अलावा दीवाली से पहले दिल्ली के अन्य क्षेत्रों के पुनर्विकास और सौन्दर्यीकरण के लिए करीब 155 करोड़ रुपए की योजना को हरी झंडी दी गई है।उन्होंने बताया कि सदर, पहाडगंज जोन में ईदगाह रोड पर 10.77 करोड़ रुपए की लागत से नई जोनल इमारत बनाई जाएगी।

यमुनापार
के गीता कॉलोनी में 2.91 करोड़ रुपए की लागत से दीनदयाल उपाध्याय आयुर्वेदिक अस्पताल का निर्माण किया जाएगा।समिति ने टिकरी कलां, मुंडका, चंदू पार्क, रानीखोरा, गोपालपुर गांव, लाजवंती गार्डन, जनकपुरी, रघुबीर नगर, रोहिणी, पुरानी सीमापुरी, बक्करवाला, गांधी रिन्दहाला और तिलकर नगर में कुल 62.60 करोड़ रुपए की लागत से नए स्कूल भवनों का निर्माण किया जाएगा।

तिहाड़
गांव में 2.85 करोड़ रुपए की लागत से नया सामुदायिक भवन बनाया जाएगा। नरेला पूंठ खुर्द में खेल क्लब और वरिष्ठ नागरिक केन्द्र के निर्माण पर सवा तीन करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। न्यू रोहतक रोड को जखीरा फ्लाईओवर से रिंगरोड को 14.29 करोड़ रुपए से बेहतर बनाया जाएगा।

Kalbe Jawad has staked a claim on Temple in Lucknow

Shia leader Maulana Kalbe Jawad has staked a claim on Masonic Temple in Hazratganj area of Lucknow, saying the land where it stands belonged to the wakf in 1857 and was taken over by the British government. He has threatened to launch an agitation if the land wasn’t given to the UP Shia Central Wakf Board.

On September 13, he had tried to enter the Masonic Temple, which is also known as Lodge Independence 33, to conduct an inspection, saying it had tombs of two Imams, but was prevented by the police. He said the land belonged to a Wakf named Karbala Moitmuddaula Agha Mirul Maaruf registered under the UP Shia Central Wakf Board.

The district administration has refuted the Shia cleric’s claim. District Magistrate Anil Kumar Sagar said Maulana Kalbe Jawad or UP Shia Central Wakf board has not provided any documentary proof about the land belonging to the wakf board.

“Lodge Independence is established there for a long time and the district administration will not interfere in the matter as it is a private property, unless the wakf board provides any documentary proof,” he said.

Kalbe Jawad said he had received a letter sent by district administration.

“After legal consultation, I will announce the method and time of protest,” he said. Mahesh Chandra, secretary of Lodge Independence, said the structure was established in 1879. “It was leased by the British to Lodge Independence in 1879 for 50 years and it has been there for a century. How can anyone come and ask us to vacate?”

he asked. Mahesh Chandra, who has been associated with the temple since 1974, said, “I have never seen any tombs in there. If they have any documentary proof, they should take a legal course.” However, Kalbe Jawad claims that according to a Supreme Court ruling, any property which was wakf in the past 200 years is legally a wakf property.

“When the property is legally a wakf, why would we take legal course to take possession of it?” he argued. Asked why he was raking up the issue now, Kalbe Jawad said he has started a campaign to vacate encroachments on wakf properties. “This land was taken over after the first freedom fight of 1857 by the British and then given to Lodge Independence,’’ he said.

Other Shia leaders don’t agree with Kalbe Jawad. Spokesperson of All India Shia Personal Law Board, Maulana Yasoob Abbas said that vacating encroachment from wakf properties was a noble task but the way Kalbe Jawad is doing it is wrong.

भारत की सबसे बड़ी मस्जिद केरल में

भारत की सबसे बड़ी मस्जिद केरल में कोझीकोड के पास एकइस्लामिक सेंटर ऑफ लर्निंगकेनॉलेज सिटीपरिसर में बनाई जाएगी, जिसमें एक साथ 25,000 लोग एकत्र हो सकेंगे।

यह 12 एकड़ क्षेत्र में बनाई जाएगी।

यह स्थान कोझीकोड से करीब 10 किलोमीटर दूर कारंतुर में स्थित है।

शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संगठन जामिया मार्काजु ससाकुफाती ससुन्नीया के सूत्रों ने बताया कि 40 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह मस्जिद भारत का अहम इस्लामी केंद्र होगा।

उन्होंने बताया कि पांच महीनों में इसका निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा और इसे दो साल से भी कम वक्त में पूरा कर लिया जाएगा।

सूत्रों ने बताया है कि मस्जिद के डिजाइनर एवं त्रिसूर के वास्तुकार रियाज मुहम्मद के मुताबिक यह मुगल वास्तुकला शैली पर आधारित होगी।

उन्होंने बताया, ‘‘इसमें हरित इमारत की अवधारणा का पूरी तरह से पालन किया जाएगा ताकि निर्मित इलाके के चारों ओर हरियाली छाई हो।’’ सूत्रों ने बताया, ‘‘यह इमारत आठ एकड़ के क्षेत्र में फैली होगी और यह चार एकड़ के हरित क्षेत्र और सुंदर बगीचों से घिरी होगी। एक बहुत बड़े नमाज गृह के अलावा परिसर में सेमिनार के लिये एक सभागार और एक बड़ा पुस्तकालय भी होगा।

शीला दीक्षित ने गिराई गई अवैध मस्जिद को दुबारा बनवाने का आदेश दिया

साउथ दिल्ली के जंगपुरा में ढहाई गई मस्जिद को लेकर तनाव कम करने के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने शुक्रवार को जामा मस्जिद के शाही इमाम सैय्यद अहमद बुखारी से मुलाकात की। बुखारी के मुताबिक एक घंटे तक चली बातचीत के दौरान शीला दीक्षित ने आश्वासन दिया है कि उसी इलाके में फिर से मस्जिद बनाई जाएगी। इससे पहले मुख्यमंत्री ने कहा था कि जंगपुरा के इस ढांचे के स्थान पर लोगों को नमाज की इजाजत दी जाएगी।

बुखारी ने जामा मस्जिद में जमा 10 हजार से ज्यादा की भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, 'मुख्यमंत्री यहां केंद्रीय गृहमंत्री और शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी का संदेश देने आई थीं कि वहां पर मस्जिद फिर से बनाई जाएगी। लेकिन जब तक मस्जिद बन नहीं जाती हमारा संघर्ष जारी रहेगा।'

परंपरा को तोड़ते हुए जामा मस्जिद के इमाम ने जुमे की नमाज ऐतिहासिक जामा मस्जिद में अदा नहीं की। वह अन्य मौलवियों और समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह व चांदनी चौक से आरजेडी के एमएलए शोएब इकबाल के साथ ढहाए गए ढांचे की जगह पर गए और वहीं नमाज अदा की।

कोर्ट के एक आदेश पर कार्रवाई करते हुए डीडीए ने उसकी भूमि पर अवैध रूप से बनाई गई मस्जिद को 12 जनवरी को ढहा दिया था। इसके बाद इस इलाके में तनाव है। प्रदर्शनकारी यहां नमाज पढ़ना चाहते थे, जिन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था।

रामजन्मभूमि की 67 एकड़ भूमि न मिली तो फिर होगा आन्दोलन - सिंघल

विश्व हिन्दू परिषद ने आज कहा कि रामजन्मभूमि की 67 एकड़ भूमि राममंदिर के निर्माण के लिए नहीं आवंटित की गयी तो वह नए सिरे से आंदोलन शुरू करेगी।

परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल ने संवाददाताओं से यहां कहा, ‘‘ भगवान राम के जन्मस्थान पर भव्य मंदिर के लिए हमें पूरी भूमि की जरूरत है। ’’ उन्होंने कहा कि प्रस्तावित मंदिर के लिए पत्थर तराशने का काम एक महीने में शुरू हो जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘ राममंदिर के निर्माण के लिए कोई नया आंदोलन नहीं होगा और विहिप इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले की प्रतीक्षा करेगा। ’’ सिंघल ने लेकिन कहा कि अगर केंद्र सरकार द्वारा अधिग्रहीत 67 एकड़ भूमि मंदिर के लिए नहीं दी गयी तो संगठन व्यापक आंदोलन करेगा।

उन्होंने कहा कि वास्तुविदों के अनुमान के अनुसार निर्माण कार्य शुरू होने पर डेढ़ साल में मूर्तियां स्थापित की जा सकेंगी। ‘‘ लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने में ज्यादा समय लगेगा। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘ हमने रामभक्तों से दान देने के लिए अपील की है और कार्य जल्दी ही शुरू होगा। ’’

अयोध्या में मस्जिद का निर्माण किसी भी कीमत पर नहीं - तोगडि़या

विहिप ने मंगलवार को चंडीगढ़ में कहा कि अयोध्या में विवादित भूमि पर मस्जिद का निर्माण किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा चाहे इसके लिए कितना भी त्याग क्यों करना पड़े।

विहिप के महासचिव प्रवीण तोगडि़या ने यहां संवाददाताओं से कहा कि हम नई मस्जिद का निर्माण नहीं होने देंगे, इसके लिए 40 लाख कुर्बानियां भी देनी पड़ी तो देंगे। हम संसद से अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने उस स्थल पर राम जन्म की बात स्वीकार करके विहिप का समर्थन किया है।

तोगड़िया ने कहा कि रामलला की जमीन का एक इंच भी मस्जिद निर्माण के लिए नहीं दिया जाएगा। हिंदू संगठन जल्द ही सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। तोगड़िया ने कहा कि पूरे 67 एकड़ की जमीन पर राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए विहिप ने देशव्यापी अभियान शुरु किया है।

उन्होंने जम्मू कश्मीर की स्थिति को लेकर सवाल उठाने वाले हुर्रियत के नेता सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारुख की आलोचना करते हुए कहा कि उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

मुस्लिम वोटों की चाहत लोजपा को भी, कांग्रेस को भी...

अयोध्या फैसले पर कांग्रेस पर ‘‘चुप्पी’’ साधने का आरोप लगाते हुए लोक जनशक्ति पार्टी ने आज कहा कि सत्ताधारी पार्टी द्वारा बाबरी मस्जिद के विध्वंस की निंदा सिर्फ ‘‘मुस्लिम वोटों कों गंवाने ’’ की क्षतिपूर्ति करने का प्रयास भर था

इसने कहा, ‘‘लोजपा को आश्चर्य है कि अयोध्या मुद्दे पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर कांग्रेस ने चुप्पी साध रखी है.. सिर्फ मस्जिद विध्वंस को शर्मनाक करार देने से काम नहीं चलेगा । इससे कांग्रेस का पर्दाफाश हो गया है ।’’

उधर अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सत्र को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मस्जिद विध्वंस की निंदा करते हुए कहा कि यह शर्मनाक एवं आपराधिक कृत्य था और इसके जिम्मेदार लोगों पर अवश्य कार्रवाई होनी चाहिए ।

तो दोनों दल अपने अपने हिसाब से मुस्लिम वोट बैंक को रिझाने में लगे हुयें हैं ..

बाबरी ढांचे विध्वंस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की सुनवाई कर रही है सीबीआई की विशेष अदालत ने अगली सुनवाई के लिए मंगलवार को 18 नवंबर की तारीख तय की है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार निजी कारणों से आज होने वाली सुनवाई स्थगित करने के बचाव पक्ष के अधिवक्ता हरिदत्त शर्मा की अर्जी पर सीबीआई अदालत के न्यायाधीश अपर मुख्य दंडाधिकारी [चतुर्थ] विश्व मोहन अग्रवाल ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख तय की।

इस समय सीबीआई विशेष अदालत में छह दिसंबर 1992 को मस्जिद ढहाए जाने के दिन भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की सुरक्षा और एस्कार्ट ड्यूटी पर तैनात रहीं आईपीएस अधिकारी तथा सीबीआई की प्रमुख गवाह अंजू गुप्ता के बयान पर जिरह चल रही है जो कि आज अदालत में उपस्थित हुई थीं।

बाबरी मस्जिद ढहाए जाने वालों को सजा मिलनी चाहिए - सोनिया गाँधी

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का मानना है कि अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ का फैसला छह दिसम्बर, 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के कदम को माफ नहीं करता। उनका कहना है कि यह घटना एक शर्मनाक एवं आपराधिक हरकत थी और इसे अंजाम देनेवालों को अवश्य ही सजा मिलनी चाहिए।

कांग्रेस के मुखपत्र कांग्रेस संदेश के ताजा अंक के संपादकीय में सोनिया ने लिखा है, "अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ का फैसला छह दिसम्बर, 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के कदम को माफ नहीं करता; क्योंकि वह एक शर्मनाक एवं आपराधिक हरकत थी, जिसके लिए इस हरकत को अंजाम देनेवालों को अवश्य ही सजा मिलनी चाहिए।"

सोनिया ने लिखा है, "कांग्रेस पार्टी राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद हकदारी मामले में न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम का स्वागत करती है। फिर भी हमें अपील दायर होने पर सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम फैसले की प्रतीक्षा करनी चाहिए। पार्टी विवाद से सम्बंधित पक्षों द्वारा सौहार्दपूर्ण एवं शांतिपूर्ण समझौते की कोशिशों का स्वागत करती है।"

पलटे हाशिम, कहा - विवादित स्थल पर ही मस्जिद बने तभी होगा मंजूर समझौता

अयोध्या मामले में बाबरी मस्जिद की पैरवी कर रहे हाशिम अंसारी ने अचानक अपना रूख बदल लिया है. कल तक सुलह की बात करने वाले हाशिम ने अब कहा है कि विवादित स्थल पर ही मस्जिद बने तभी समझौता मंजूर होगा.

उन्होने यह बात रविवार को कही, परंतु उससे दो दिन पहले ही उन्होने कहा था कि विवादित स्थल पर मंदिर और मस्जिद दोनों बनाए जाने चाहिए और इसके लिए 60 दिनों में फार्मुला तय कर लेना चाहिए.

परंतु अब उन्होने कहा है कि विवादित स्थल पर मस्जिद बनाने की बात होगी तभी बातचीत आगे बढ़ सकेगी.

हाईकोर्ट का फैसला स्वीकार करें मुस्लिम - मौलाना महमूद मदनी

मुस्लिम समाज के प्रतिष्ठित नेता और जमात उलेमा ए हिंद के धर्मगुरु मौलाना महमूद मदनी ने मुस्लिमों से इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला स्वीकार करने को कहा है। सुन्नी मुस्लिम समाज के सबसे बड़े संगठन के प्रमुख मौलाना मदनी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय इस पर शांति से विचार करे और फैसले को स्वीकार करे। हालांकि मदनी ने कहा कि ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं। वे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य भी हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर विचार विमर्श के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी की 16 अक्टूबर को लखनऊ में बैठक हो रही है। बोर्ड पहले ही मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने की वकालत कर चुका है। लेकिन बोर्ड की लीगल सेल आज मिल रही है, जिसमें फैसले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

जाने माने देवबंदी सुन्नी मुस्लिम नेता और जमात उलेमा ए हिंद के नेता मौलाना महमूद मदनी ने मुस्लिम समाज से कहा है कि देश के लिए यह बेहतर होगा कि दोनों समाज अपने अपने धर्म स्थल वहां बनाएं। उन्होंने कहा कि जमात उलेमा ए हिंद की अयोध्या विवाद पर चर्चा के लिए 19 अक्टूबर को बैठक होगी।

उधर, अयोध्या में हाशिम अंसारी के सुलह समझौते के प्रयासों से नाराज कुछ लोगों ने शुक्रवार को मस्जिदों में प्रस्ताव पास करने की कोशिश की। सूत्रों का कहना है कि मस्जिदों में नमाज के बाद एक पर्चा पढ़ा गया, जिसमें अंसारी की सुलह समझौते की खिलाफत की गई थी। पर्चे के जवाब में नमाजियों ने कहा कि अभी तक हाशिम ने कोई फामरूला पेश नहीं किया है। ऐसे में विरोध करना गैरवाजिब होगा।

उधर, फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मौलाना एम मुकर्रम अहमद ने दिल्ली में जारी बयान में कहा है कि अयोध्या विवाद में बातचीत के लिए अब मौका नहीं है और मामले का कोर्ट से समाधान होना चाहिए। अखिल भारत हिंदू महासभा ने भी सभी हिंदू संगठनों से अपील की है कि वे रामजन्मभूमि पर किसी तरह के समझौते के लिए मुस्लिम संगठनों से बातचीत न करें। हम सुप्रीम कोर्ट में जाने का फैसला कर चुके हैं।

जामा मस्जिद गोलीबारी काण्ड में आरोपियों पर 10 लाख का इनाम

दिल्ली पुलिस ने गुरूवार को घोषणा की कि जामा मस्जिद के निकट पिछले महीने हुई गोलीबारी में शामिल दो बाइक सवारों के बारे में जानकारी देने वाले को 10 लाख रूपये का इनाम दिया जाएगा।

इनाम की घोषणा शहर के पुलिस आयुक्त वाई.एस. डडवाल ने की। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, ""हमने इस मामले में अब तक लगभग 50 लोगों से पूछताछ की है। हमलावरों का सुराग लगाने के लिए कई टीमें उत्तर प्रदेश और मुम्बई भेजी गई हैं।""

उल्लेखनीय है कि जामा मस्जिद के गेट नंबर तीन के बाहर हुई इस घटना में दो ताइवानी नागरिक घायल हो गए थे।

Shia leaders not agreed with VHP’s Ayodhya Proposal

Prominent representatives of the Shia sect of Muslims here Wednesday rejected Vishwa Hindu Parishad (VHP) chief Ashok Singhal’s offer to hold talks on the Ayodhya issue.

In a statement issued earlier during the day in Mumbai, Singhal had said that since the high court had dismissed the Sunni Waqf Board’s suit staking a claim to the disputed Ramjanmabhoomi-Babri Masjid land in Ayodhya, the VHP would now hold talks with Shia organizations.

The VHP supremo said: “Mughal emperor Babar’s army commander Mir Baqi, who built the Babri Masjid was a Shia, therefore we have decided to hold talks with representatives of the community.”

Reacting sharply to Singhal’s statement, widely acclaimed Shia scholar and cleric Maulana Kalbe Sadiq, who was also senior vice president of All India Muslim Personal Law Board, said: “We are not interested in any move initiated by Singhal, who only believed in playing the politics of hatred.”

He said: “It is quite apparent that after failing to forge a divide between Hindus and Muslims, the VHP was now trying to incite a confrontation between Shias and Sunnis; but we will not play into their hands.”

Expressing similar views, another well-known Shia cleric Maulana Kalbe Jawad said: “There was absolutely no logic in Singhal’s explanations, which were clearly aimed at bringing Shias at loggerheads with Sunnis.”

“A mosque is a place of worship which cannot be restricted to a particular sect of Muslims,” he said.

Maulana Mohammad Athar, who heads the All India Shia Muslim Personal Law Board, also flayed Singhal for his remarks.

मुलायम और बुखारी अयोध्या में फिर से बाबरी मस्जिद बनवाने के फ़िराक में

अयोध्या विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट मुसलमानों को लामबंद करने के लिए अल्पसंख्यक राजनीति को गरमाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने बृहस्पितवार को जामा मस्जिद में देश भर के उलेमाओं और मुस्लिम बुद्धिजीवियों की बैठक बुलाई है।

इधर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष व उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने बुखारी से बुधवार को जामा मस्जिद में तकरीबन डेढ़ घंटे तक गुफ्तगू की। उलेमाओं की बैठक से ठीक एक दिन पहले मुलायम-बुखारी की इस मुलाकात को बाबरी मस्जिद के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बुखारी से बातचीत के बाद मुलायम ने कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि वह इसे संसद के आगामी सत्र में जोरशोर से उठाएंगे।

उन्होंने कांग्रेस और भाजपा दोनों को ही अयोध्या विवाद का बराबर का जिम्मेदार ठहराया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के जामा मस्जिद में आहूत उलेमाओं और बुद्धिजीवियों की बैठक कल 10 बजे से शुरू होगी। माना जा रहा है कि मुलायम सिंह यादव की आज शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी से हुई तकरीबन डेढ घंटे की मुलाकात और बातचीत के केंद्र में कल की बैठक और आगे की रणनीति ही रही । नि:संदेह अयोध्या विवाद पर आए हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुलायम और शाही इमाम की प्रतिक्रिया बिल्कुल एक जैसी ही है, इसलिए यह माना जा रहा है कि इस मामले को लेकर आगे बढ़ने का काम दोनों ही लोगों के विचार-विमर्श से ही तय होगा।

मुलायम ने शाही इमाम से बातचीत के बाद कहा कि जब वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब भी बाबरी मस्जिद पर कब्जे की कई बार कोशिशें की गई थीं, लेकिन उन्होंने नाकाम कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस दिन विवादित स्थल पर मूर्तियां रखी गईं थी उसी दिन से गत 30 सितम्बर 2010 तक कांग्रेस ने बाबरी मस्जिद को लेकर राजनीति की।

उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का अहसास है कि इस देश में गरीबों, बेरोजगारों में सबसे बड़ी संख्या मुसलमानों की है। उन्होंने दावा किया कि अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में उन्होंने मुसलमानों को रोजगार दिलाने, कौमी एकता तथा साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए मुसलमानों की भर्ती पुलिस में कराई ताकि किसी दंगा फसाद में मुसलमानों के साथ कोई ज्यादती नहीं कर सके।

अयोध्या की जमीन का तीन हिस्सों में बँटवारा हिन्दू महासभा को मान्य नहीं

अयोध्या में विवादित स्थल को लेकर आए फैसले के एक पक्षकार हिन्दू महासभा ने बातचीत से इसके हल के प्रयास का विरोध करने का निर्णय लिया है जबकि फोरम फार पीस एंड यूनिटी का मानना है कि इसका एकमात्र हल बातचीत ही है।

हिन्दू महासभा का कहना है कि अयोध्या की जमीन का तीन हिस्सों में बँटवारा उसे मान्य नहीं है और संगठन इसके लिए उच्चतम न्यायालय में जाएगा। महासभा के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष कमलेश तिवारी ने आज यहाँ कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पिछले 30 सितम्बर को अपने फैसले में जमीन को रामलला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के बीच बराबर-बराबर बाँटने का आदेश दिया है जो मान्य नहीं है।

महासभा इसके लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने कहा कि पूरी जमीन रामलला की है जिस पर उनका भव्य मंदिर बनेगा। बातचीत से इसका हल नहीं निकाला जा सकता।

अयोध्या मसले के हल के लिए मालिकाना हक के मुकदमें में एक पक्षकार हाशिम अंसारी ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास से अयोध्या में मुलाकात की थी और दोनों के बीच बंद कमरे में एक घंटे तक बातचीत हुई थी।

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