रेल मंत्री ने कीं दो और यात्री अनुकूल सेवाओं की घोषणा


रेल मंत्री ने दो और यात्री अनुकूल सेवाओं की घोषणा की जिनके नाम हैं

(1) IRCTC वेबसाइट एवं 139 के जरिए पीआरएस काउंटर टिकटों का निरस्‍तीकरण 
(2) IRCTC वेबसाइट के जरिए ई टिकटिंग की अदायगी के लिए इंटरनेशनल डेबिट एवं क्रेडिट कार्डों की स्‍वीकृति

यात्री सुविधाओं से लेकर ढांचागत विकास तक वित्‍त वर्ष 2016-17 की रेल बजट घोषणाओं को त्‍वरित गति से क्रियान्वित करने पर काम कर रहे रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने आज (29 अप्रैल 2016) रेल भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में दो बहुत महत्‍वपूर्ण बजट घोषणाओं – 
 
(1) IRCTC वेबसाइट एवं 139 ( IVRS एवं SMS) के जरिए पीआरएस काउंटर टिकटों का निरस्‍तीकरण 
(2) IRCTC वेबसाइट के जरिए ई टिकटिंग की अदायगी के लिए इंटरनेशनल डेबिट एवं क्रेडिट कार्डों की स्‍वीकृति – का उद्घाटन किया। इस अवसर पर रेल राज्‍य मंत्री श्री मनोज सिन्‍हा विशेष रूप से उपस्थित थे। इस अवसर पर रेल बोर्ड के चेयरमैन श्री ए के मित्‍तल रेलवे बोर्ड के मेंबर ट्रैफिक श्री मोहम्‍मद जमशेद एवं बोर्ड के अन्‍य सदस्‍य भी उपस्थित थे।

रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने इन सेवाओं के बारे में इस अवसर पर कहा कि भारतीय रेल विश्‍व का दूसरा सबसे बड़ा व्‍यवसायिक संगठन है जिसके सामने विश्‍व स्‍तरीय बनने के लिए कई सारी चुनौतियां हैं। उन्‍होंने कहा कि रेलवे एक बड़ा संगठन है और इसके कुछ क्षेत्रों में पूर्ण रूप से पुनरूत्‍थान किए जाने की आवश्‍यकता है और इस प्रकार सभी पहलुओं में बेहतरी लाने के लिए विविध रणनीतियों को अपनाने तथा क्रियान्वित किए जाने की आवश्‍यकता है। उन्‍होंने कहा कि रेलवे के आय सृजन एवं व्‍यय का लेखा परीक्षण ध्‍यानपूर्वक और बेहतर तरीके से किया जाना चाहिए जिससे कि सार्वजनिक धन का सर्वोत्‍तम उपयोग हो सके। 
 
उन्‍होंने कहा कि रेलवे के लिए राजस्‍व का प्रमुख स्रोत माल भाड़ा एवं यात्री भाड़ा है जो क्रमश: 2/3 एवं 1/3 है और इसलिए रेलवे का विकास सभी संदर्भों में पूर्ण रूप से इसकी इन दोनों सेवाओं की बेहतरी पर निर्भर करता है। उन्‍होंने कहा कि आईआरसीटीसी वेबसाइट एवं 139 (आईवीआरएस एवं एसएमएस) के जरिए पीआरएस काउंटर टिकटों का निरस्‍तीकरण (2) आईआरसीटीसी वेबसाइट के जरिए ई टिकटिंग की अदायगी के लिए इंटरनेशनल डेबिट एवं क्रेडिट कार्डों की स्‍वीकृति – की सेवाएं डिजिटल टेकनालोजी की दिशा में एक कदम है जो नकदी संचालन में कमी लाएगा। उन्‍होंने आने वाले समय और अधिक यात्री अनुकूल सेवाओं का भरोसा दिलाया।इस अवसर पर रेल राज्‍य मंत्री श्री मनोज सिन्‍हा ने कहा कि रेलवे का विकास एक व्‍यक्ति का कार्य नहीं है और इस प्रकार ठोस प्रयास किए जाने की आवश्‍यकता है जो रेल कर्मचारी लगातार कर रहे हैं। 2 महीनों के बेहद अल्‍प समय में ही रेल मंत्रालय द्वारा 8 बजट घोषणाओं को पूरी तरह क्रियान्वित किया जा चुका है जो यांत्रिक प्रणाली द्वारा संभव हो पाया है।प्रारंभ की गई योजनाओं की मुख्‍य विशेषताएं :–

आईआरसीटीसी वेबसाइट के जरिए ई टिकटिंग की अदायगी के लिए इंटरनेशनल डेबिट एवं क्रेडिट कार्डों की स्‍वीकृति

उद्देश्‍य :
  • वर्तमान में, केवल अमेरिकन एक्‍सप्रेस इंटरनेशनल क्रेडिट कार्डों को आईआरसीटीसी पोर्टल पर अमेरिकन एक्‍सप्रेस (एएमईएक्‍स) पेमेंट गेटवे के द्वारा स्‍वीकार किया जाता है। फिलहाल अन्‍य अंतर्राष्‍ट्रीय कार्डों को अदायगी के लिए स्‍वीकार नहीं किया जाता है।
  • आईआरसीटीसी अब आईआरसीटीसी वेबसाइट के जरिए ई टिकटों की बुकिंग के लिए भारत से बाहर भी जारी अन्‍य इंटरनेशनल क्रेडिट/डेबिट कार्डों की अनुमति देगा। इन इंटरनेशनल क्रेडिट/डेबिट कार्डों का उपयोग मेसर्स एटम टेक्नालॉजीज द्वारा मुहैया पेमेंट गेटवे के जरिए अदायगी के लिए किया जाएगा।
शर्तें :
  • इंटरनेशनल क्रेडिट/डेबिट कार्डों के जरिए किए गए प्रत्‍येक लेन देन के लिए लेनदेन के मूल्‍य (जहां तक व्‍यावहार्य हो, करों समेत) का चार प्रतिशत वसूला जाएगा।
  • अदायगी का यह विकल्‍प तभी उपलब्‍ध होगा जब टिकट की बुकिंग यात्रा की तारीख से कम से कम दो दिन पूर्व की जाएगी। 
  • अदायगी का यह विकल्‍प ‘तत्‍काल’ या ‘प्रीमियम तत्‍काल’ कोटा टिकटों की बुकिंग के लिए उपलब्‍ध नहीं होगा। 
  • अदायगी का यह विकल्‍प ‘प्रीमियम रेलगाडि़यों’ में टिकटों की बुकिंग के लिए उपलब्‍ध नहीं है।
प्रक्रिया :
  • पेमेंट पेज पर ‘पेमेंट गेटवे/क्रेडिट कार्ड’ वर्ग के तहत उपस्थित पेमेंट विकल्‍प ‘इंटरनेशनल कार्डस पावर्ड बाई एटम’ को सेलेक्‍ट करें।
  • गेटवे पेज पर अदायगी के लिए सभी अनिवार्य विवरण जैसे कार्ड नंबर, नाम, एक्‍सपाइरी, सीवीवी, बैंक का नाम, मोबाइल नंबर, ई मेल एवं पता – बताएं। 
  • सभी विवरण देने के बाद टिकट बुक हो जाएगा अगर बैंक/पेमेंट गेटवे से सफल पेमेंट रेसपांस प्राप्‍त होता है।
लाभ : 
  • सभी इंटरनेशनल क्रेडिट/डेबिट कार्डों की स्‍वीकृति विदेशी पर्यटकों की लंबे समय से चली आ रही मांग की पूर्ति हो जाएगी क्‍योंकि वे प्रत्‍यक्ष रूप से ई टिकटों को बुक करने में समर्थ हो जाएंगे और इस उद्देश्‍य से अब अन्‍य एजेंसियों पर निर्भर नहीं रहेंगे।
  • आईआरसीटीसी वेबसाइट एवं 139 (आईवीआरएस एवं एसएमएस) के जरिए पीआरएस काउंटर टिकटों का निरस्‍तीकरण
उद्देश्‍य :

कन्‍फर्म पीआरएस काउंटर टिकट रखने वाले यात्रियों को रिफंड नियम 2015 के तहत अनुशंसित समय सीमा के भीतर टिकटों को निरस्‍त करने की सुविधाएं देना। पीआरएस काउंटर टिकटों को निम्‍नलिखित के जरिए निरस्‍त किया जा सकता है :

1. आईआरसीटीसी वेबसाइट (www.irctc.co.in) या

2. 139

अनुमति योग्‍य रिफंडेबिल राशि को केवल अनुशंसित समय सीमा के भीतर यात्रा प्रारंभ वाले स्‍टेशन या नजदीक के सैटेलाइट पीआरएस लोकेशन पर ही प्राप्‍त किया जा सकेगा।यह सुविधा केवल पूर्णरूप से कन्‍फर्म टिकटों पर ही प्राप्‍त होगी।किराये की राशि का रिफंड केवल अनुशंसित समय सीमा के भीतर यात्रा प्रारंभ वाले स्‍टेशन या नजदीक के सैटेलाइट पीआरएस लोकेशन पर ही प्राप्‍त किया जा सकेगा और यह अगले दिन पीआरएस काउंटरों के खुलने के पहले 2 घंटों के दौरान वैसे टिकटों के लिए होगा जिसका निर्धारित रवानगी समय 6 बजे शाम से सुबह 6 बजे होगा।

लाभ :

सभी पीआरएस काउंटरों पर निरस्‍तीकरण के अतिरिक्‍त कन्‍फर्म पीआरएस काउंटर टिकट रखने वाले यात्री अनुशंसित समय सीमा के भीतर इसे रिफंड नियम 2015 के तहत निम्‍नलिखित प्रकार से निरस्‍त कर सकते हैं :

1. आईआरसीटीसी वेबसाइट (www.irctc.co.in) के जरिए या

2. 139 के जरिए।

भारतीय रेल ने व्‍यस्‍त सीजन प्रभार को वापस लिया


भारतीय रेल ने दो महीनों के लिए कवर्ड स्‍टॉक में लादी गई सभी वस्‍तुओं पर व्‍यस्‍त सीजन प्रभार को वापस लेने का फैसला किया है। यह 1 मई, 2016 से 30 जून, 2016 तक लागू होगा। रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने एक कार्यक्रम में इसकी घोषणा की।

पृष्‍ठभूमि :

रेल बजट 2016-17 में घोषणा की गई थी कि अन्‍य तरीकों के मुकाबले एक प्रति स्‍पर्धी दर संरचना के निर्माण के लिए, मल्‍टी प्‍वाइंट लोडिंग/अनलोडिंग की अनुमति देने के लिए एवं वैकल्पिक रास्‍तों के उपयोग को बढ़ाने के लिए विभेदकारी टैरिफ को लागू करने के लिए टैरिफ नीति की समीक्षा की जाए।

इसके अतिरिक्‍त, टैरिफ संरचना को विवेकपूर्ण बनाने की बजट की घोषणा के अनुरूप, फैसला किया गया कि 15 प्रतिशत के व्‍यस्‍त सीजन प्रभार को वापस ले लिया जाए। उ़द्योग जगत, विभिन्‍न व्‍यापार संगठन एवं क्षेत्रीय अधिकारी इसका प्रतिनिधित्‍व करते रहे हैं कि डीजल के मूल्‍य में गिरावट के कारण पिछले कुछ वर्षों में सड़क दरों में तेज गिरावट जिसने ग्राहकों के लिए रेल भाड़े को काफी गैर प्रतिस्‍पर्धी बना दिया है। इसी को ध्‍यान में रखते हुए, समीक्षा के बाद 2 महीनों के लिए कवर्ड स्‍टॉक में लादी गई सभी वस्‍तुओं पर व्‍यस्‍त सीजन प्रभार को वापस लेने का फैसला लिया गया है।

विशेष लेख: योगी अरविंद की ‘हिन्दूराष्ट्र’ की संकल्पना


अंंतरराष्ट्रीयवाद निराधार नहीं है, अपितु वह सनातन धर्म से भारित है !

योगी अरविंद की संकल्पना में भारत में तथाकथित धर्मनिरपेक्षता, मतपेटी की राजनीति एवं भारतीय संस्कृति के परित्याग के लिए स्थान नहीं था । तात्त्विकदृष्टि से योगी अरविंद अंतरराष्ट्रीयवाद के समर्थक थे; परंतु उनकी दृष्टि से अंतरराष्ट्रीयवाद खोखले विश्वबंधुत्व का नहीं, अपितु सनातन धर्म के अनुसार था ।

सनातन धर्म ही राष्ट्रवाद है !

योगी अरविंद ने अपने एक भाषण में ‘हिन्दूराष्ट्र’ एवं सनातन धर्म का दृढ संबंध स्पष्ट करते हुए कहा है कि ‘हिन्दूराष्ट्र’ सनातन धर्म के साथ ही स्थापित हुआ है एवं ‘हिन्दूराष्ट्र’ सनातन धर्म के मार्ग पर अग्रसर होकर ही उत्कर्ष प्राप्त करेगा । जब सनातन धर्म की अवनति होगी, तब ‘हिन्दू राष्ट्र’ की भी अवनति अटल है । यदि सनातन धर्म नष्ट होने की संभावना है, तो ‘हिन्दू राष्ट्र’ भी नष्ट होगा । सनातन धर्म ही राष्ट्रवाद है । नैतिक दृष्टि एवं परंपरा से भारतीय राष्ट्रवाद हिन्दू ही है; क्योंकि यह भूमि एवं उसमें रहनेवाली जनता भूमि की ऐतिहासिक श्रेष्ठता, संस्कृति एवं अभेद्य पौरुष पर ही टिकी है, तभी तो इस भूमि में इस्लाम धर्म, उसकी संस्कृति एवं परंपरा को समा लेने की क्षमता है ।

कांग्रेस समान मुसलमानों की चापलूसी कर हिन्दू-मुसलमान एकता होना असंभव !

हिन्दू-मुसलमान एकता के विषय में योगी अरविंद कहते हैं कि भारत में हुए इस्लाम के उदय के लिए मुंह टेढा करने में कोई अर्थ नहीं है । आरंभ में इस्लाम की पूरी शक्ति, ऊर्जा एवं कृत्य भारत में इस्लामी राष्ट्र स्थापित करने हेतु ही थी । तब भी यदि मुसलमान प्रामाणिकता से स्वदेशी को स्वीकार करेंगे, तो उनके साथ मित्रता रखना संभव है; परंतु यह इस पर निर्भर करता है कि राजनीतिक पटल पर मुसलमानों के साथ एकता बनाए रखने के प्रयास के समय वे भाईचारे के नाते आलिंगन देंगे अथवा शत्रुभाव से लडाई करेंगे । केवल राजनीतिक सुविधा के रूप में अथवा कांग्रेस समान चापलूसी कर हिन्दू-मुसलमान एकता होना असंभव है । मन से ही एकत्रित आने पर यदि उसमें कोई अडचनें आर्इं, तो मूल कारणों का संशोधन कर उस पर समाधान ढूंढना पडेगा । तभी हिन्दू-मुसलमान एकता संभव है । हिन्दू-मुसलमान एकता के लिए हिन्दुओं को अपनी दुर्बलता छिपाने, स्वार्थ हेतु भाई-भाई कहना अथवा उनकी मिथ्या प्रशंसा करना योगी अरविंद को स्वीकार नहीं है । योगी ने कहा कि इस दृष्टि से राष्ट्रवादियों को प्रयास करने चाहिए ।

वन्दे मातरम् धार्मिक नहीं, अपितु राष्ट्रीय गीत है !

जिस समय वन्दे मातरम् गीत को ‘राष्ट्रगीत’ का स्तर देने का विरोध हुआ, उस समय योगी अरविंद के कुछ शिष्यों ने उन्हें कहा कि समाज में कांग्रेस के कुछ लोग वन्दे मातरम् गीत में से देवी-देवताओं के संदर्भवाले कुछ भाग हटाने की मांग कर रहे हैं । क्योंकि ‘दुर्गा’ शब्द समान कुछ शब्द मुसलमानों को स्वीकार नहीं हैं । इस पर योगी अरविंद ने कहा कि वन्दे मातरम् कोई धार्मिक गीत नहीं, अपितु वह एक राष्ट्रीय गीत है एवं उसमें ‘दुर्गा’, यह भारतमाता का रूप है । यह मुसलमानों को अस्वीकार क्यों होना चाहिए ? इस गीत में काव्यस्वरूप दुर्गा की प्रतिमा का वर्णन किया गया है । भारतीयता की संकल्पना में हिन्दू देवी-देवताओं का उल्लेख होना अपरिहार्य है ।

अगस्‍ता घोटाले में पत्रकारों को भी मिले 45 करोड़,राजदीप बरखा खतरे में


हेलीकॉप्‍टर घोटाले में भारतीय पत्रकारों को मैनेज करने के लिए अगस्‍ता वेस्‍टलैंड ने खर्च किए 45 करोड़ रुपए, राजदीप-बरखा संदेह के घेरे में!

कांग्रेस पार्टी के चहेते पत्रकारों में से एक राजदीप सरदेसाई कल अपने टीवी चैनल ‘आजतक’ में बेहद बेचैन थे! बेचैनी में वह न केवल अपनी सीट छोड़ कर बार-बार इधर से उधर चक्‍कर काट रहे थे, बल्कि स्‍वयं में कुछ बड़बड़ा भी रहे थे! बार-बार एक के बाद एक फोन करने से लेकर घड़ी पर उनकी टकटकी से पता चल रहा था कि वह बेहद तनाव में है! ‘आजतक’ के पत्रकार समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर क्‍या वजह है कि राजदीप सरदेसाई इतने उद्विग्‍न नजर आ रहे हैं?

रात AajTak के ’10तक’ शो के लिए वरिष्‍ठ संपादक पुण्‍य प्रसून वाजपेयी उपलब्‍ध नहीं थे। वह बंगाल में चुनाव करवेज में लगे हुए हैं। राजदीप ने कहा कि वह आज ’10तक’ करेंगे। राजदीप ने डॉ सुब्रहमण्यिन स्‍वामी को फोन किया। डॉ स्‍वामी ने उसी दिन बुधवार को राज्‍यसभा में अगस्‍ता वेस्‍टलैंड पर कांग्रेस अध्‍यक्षा सोनिया गांधी का नाम लेकर तहलका मचा दिया था।

पिछले दो साल में हो या फिर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार हो- कांग्रेस के धुर विरोधी भाजपा की इन दोनों सरकारों में भी किसी सांसद या मंत्री ने संसद के अंदर कांग्रेस के गांधी परिवार पर कोई आरोप नहीं लगाया था! यह पहली बार था जब भाजपा के एक सांसद ने संसद के अंदर ‘पवित्र गांधी परिवार’ की मुखिया सोनिया गांधी का नाम अगस्‍ता वेस्‍टलैंड हेलीकॉप्‍टर घोटाले में लिया था। दशकों से चला आ रहा पार्टियों के बीच का अनकहा एथिक्‍स टूट चुका था!

परिणाम भी दिखा, पहली बार सोनिया गांधी और उनके राजनैतिक सलाहकार अहमद पटेल को सड़क पर उतर कर मीडिया के समक्ष अपनी निर्दोषिता की गुहार लगानी पड़ी। अन्‍यथा यूपीए के 10 साल में एक भी बड़ा पत्रकार इन दोनों में से किसी का साक्षात्‍कार नहीं ले सका था! टाइम बदल रहा है!

इसे राजदीप ने भी महसूस किया, जब डॉ. सुब्रहमनियन स्‍वामी ने उनसे कहा कि वह उनके टीवी शो में तभी आएंगे जब वह केवल वन-टू-वन सवाल करेंगे! वह कांग्रेसी प्रवक्‍ताओं के कुतर्कों का जवाब नहीं देंगे। राजदीप ने डॉ स्‍वामी को बुलाने के लिए हामी भर दी, लेकिन उनके शो में स्‍वामी के अपोजिट कांग्रेसी वकील अभिषेक मनुसिंघवी को ले आए। राजदीप ने अपनी बातें डॉ. स्‍वामी के मुंह में डालकर यह कहने की कोशिश की कि डॉ स्‍वामी के पास कोई सबूत नहीं है! सोनिया गांधी के खिलाफ और वह केवल सनसनी पैदा कर रहे हैं! राजदीप ने इस मामले में अभिषेक मनु सिंघवी को भी बीच में लाना चाहा, लेकिन स्‍वामी ने साफ कहा कि वह वन-टू-वन के करार को तोड़ रहे हैं! और यह भी कि वह बातों को घुमाने में माहिर हैं, लेकिन अपनी बात मेरे मुंह में डालकर कहलवाने की कोशिश न करें!

डॉ. स्‍वामी ने कहा कि उनके पास सोनिया गांधी द्वारा घूस लेने का पूरा सबूत है और वह इसे समय आने पर जांच एजेंसी को देंगे। उन्‍होंने यह भी कहा कि ED की अब तक के जांच से वह संतुष्‍ट हैं। राजदीप ने जब कहा कि आप सबूत दिखाइए तो डॉ स्‍वामी ने कहा, आपको क्‍यों दिखाऊं? मैं यह संबंधित एजेंसी को दूंगा। और आज तक आप लोग हमेशा यही कहते रहे हो कि स्‍वामी के पास सबूत नहीं है, लेकिन हर केस में अदालत में मेरे द्वारा प्रस्‍तुत सबूत से आपलोग चुप हो जाते हो! स्‍वामी ने कहा कि चूंकि आपने वन-टू-वन के करार को तोड़ा है, इसलिए मैं जा रहा हूं और वह चले गए।

शो खत्‍म करने के तुरंत बाद राजदीप टीवी टुडे के स्‍टूडियो से बाहर भागे और डॉ स्‍वामी को फोन किया। उस वक्‍त भी उनके चेहरे का डर साफ देखा जा रहा था! अगले दिन यानी आज गुरुवार को राज्‍यसभा में डॉ. स्‍वामी ने जब अगस्‍ता वेस्‍टलैंड घोटाले में भारतीय पत्रकारों की संलिप्‍तता से जुड़े मुद्दे को उठाना चाहा तो कांग्रेस भड़क गई और उन्‍हें मुद्दे को उठाने नहीं दिया! इससे पहले डॉ. स्‍वामी ने एक न्‍यूज लिंक ट्वीट किया था। उस लिंक को पढ़ने और राज्‍यसभा में उनके उठाए जाने वाले सवाल की कड़ी को जोड़कर देखने पर राजदीप सरदेसाई के उस डर का पता चल गया, जो अगस्‍ता वेस्‍टलैंड मामले के सामने आने के बाद से उनके और उनके पूर्व सहयोगी और एनडीटीवी की पत्रकार व 2जी घोटाले में मशहूर पावर ब्रोकर के रूप में सामने आ चुकी बरखा दत्‍त के चेहरे पर लगातार देखा जा रहा है!

राजदीप सरदेसाई व बरखा के चेहरे के भय को लेकर मैं कोई मनगढ़ंत बातें नहीं लिख रहा हूं, बल्कि जो भी लिखा है, वह आजतक एवं एनडीटीवी के अंदर मौजूद पत्रकार साथियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर ही लिखा गया है!

हां तो डॉ. स्‍वामी के उस ट्वीट पर सबूतों के साथ भेजे एक उस pgurus.com के लिंक का मैं थोड़ा हिंदी अनुवाद कर देता हूं और मूल लिंक नीचे पाठकों के लिए दे देता हूं ताकि वह पूरा सबूत देख सकें और अंग्रेजी में पूरी रिपोर्ट पढ़ सकें।

भारतीय पत्रकारों को मैनेज करने पर अगस्‍ता ने खर्च किए 45 करोड़ रुपए!

वीवीआईपी हेलीकॉप्‍टर घोटाले में दुबई में बैठे जिस बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल का नाम बार-बार आ रहा है, उसे AgustaWestland की मूल कंपनी Finmeccanica ने भारतीय पत्रकारों को मैनेज करने के लिए साल 2010 से 2012 के बीच करीब 6 मिलियन यूरो (करीब 45 करोड़) रुपए दिए! दस्‍तावेजों से यह जाहिर होता है कि Finmeccanica ने मिशेल की दुबई स्थित कंपनी Global Services FZE के साथ करार किया। आपको ज्ञात होना चाहिए कि अगस्‍ता वेस्‍टलैंड का डील वर्ष 2009 में फाइनल हुआ था और डील के फाइनल होते ही इसमें ली गई घूस आदि की खबर को दबाए रखने के अर्थात मीडिया मैनेजमेंट के लिए सन् 2010 में Finmeccanica ने मिशेल की कंपनी Global Services FZE से करार किया।

मिशेल की कंपनी को Finmeccanica ने मीडिया मैनेजमेंट के लिए 2 लाख 75 हजार यूरो प्रति महीने के हिसाब से अगले 22 महीने तक पेड किया। क्रिश्चियन मिशेल दिल्‍ली के The Claridges होटल से अपनी गतिविधियों को संचालित करता था और वहीं रहता था। उसका काम पत्रकारों व नौकरशाहों को पैसे खिलाकर मैनेज करना था ताकि हो चुके इस डील में आगे किसी भी तरह का अवरोध उत्‍पन्‍न न हो।

भारत की पूरी पत्रकारिता के गंदा चेहरे का सबसे बड़ा सबूत यही है कि 2010 से 2012 के बीच अगस्‍ता वेस्‍टलैंड को लेकर हुए डील पर न एक भी लाइन किसी अखबार में लिखा गया और न ही एक भी खबर न्‍यूज चैनलों में ही कोई खबर चला! अगस्‍ता पर पहली खबर का प्रकाशन व प्रसारण 2013 में उस वक्‍त शुरू हुआ जब इटली की जांच एजेंसी ने Finmeccanica के प्रमुख ओरसी को घूस देने के मामले में गिरफ्तार किया। अर्थात जब भारतीय मीडिया के लिए यह मजबूरी हो गई तभी इस मामले में खबर का प्रकाशन व प्रसारण हुआ! अन्‍यथा उससे पहले मिशेल के 6 मिलियन यूरे के कमाल से भारतीय पत्रकारों का कलम और कैमरा दोनों बंद रहा!

मशहूर वामपंथी अखबार ‘द हिंदू’ ने 26 अप्रैल 2016 को क्रिश्चियन मिशेल जेम्‍स द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व कांग्रेस नेताओं को लिखे पत्र का प्रकाशन किया, जिसमें केवल जेम्‍स नाम से हस्‍ताक्षर किया गया है। उल्‍लेखनीय है कि ‘द हिंदू’ ही वह अखबार है, जिसने मिशेल के पत्र को आधार बनाकर यह झूठ भी प्रकाशिता किया कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली के प्रधानमंत्री के बीच यह करार हुआ है कि भारतीय मछुवारों के हत्‍यारे इटली के मरीन को भारत छोड़ देता, जिसके बदले में इटली गांधी परिवार व कांग्रेस नेताओं को फंसाने के लिए सबूत देगा!

गुलामनबी आजाद ने बुधवार को इसी अखबार को कोट करते हुए यह झूठ बोला, लेकिन सदन के नेता अरुण जेटली ने साफ कहा कि भारतीय व इटली के प्रधानमंत्री के बीच कहीं कोई बैठक या बातचीत ही नहीं हुई और यह केवल मनगढंत कहानी है!

सदन के नेता के स्‍पष्‍टीकरण के बाद गुलामनबी या फिर ‘द हिंदू’ को सबूत पेश करना चाहिए था, लेकिन चूंकि झूठ बोलकर में सोनिया गांधी के प्रति सहानुभूति पैदा करने की कोशिश की गई थी, इसलिए न कांग्रेस और न ही ‘द हिंदू’ ही जेटली द्वारा संसद में किए गए दावे को झुठला सकी!

हां, तो ‘द हिंदू’ ने मिशेल जेम्‍स को कोट करते हुए यह खबर प्रकाशित किया कि उसकी कंपनी और अगस्‍ता वेस्‍टलैंड के बीच किसी तरह का समझौता नहीं हुआ और इस बारे में जो भी बातें कहीं गई है, उसका कोई आधार नहीं है। यहां दिए गए मूल खबर के लिंक को ओपन कर मिशेल व अगस्‍ता की मूल कंपनी के बीच हुए करार की कॉपी पाठक देख सकते हैं।

खबर कहती है कि ‘द हिंदू’ सहित बरखा दत्‍ता व राजदीप सरदेसाई बिचौलिए मिशेल द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को लिखे जिस पत्र का बार-बार जिक्र कर रहे हैं, वह पत्र आखिर उन्‍हें कहां से मिला? प्रधानमंत्री कार्यालय ने तो यह उपलब्‍ध कराया नहीं होगा तो क्‍या बिचौलिए मिशेल से इन पत्रकारों को यह पत्र मिला? और यदि हां तो यह साबित करता है कि मिशेल ने मीडिया मैनेजमेंट के लिए जो 45 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, उसमें ‘द हिंदू’ राजदीप सरदेसाई, बरखा दत्‍ता आदि साझीदार हैं!

इसलिए यह जांच का विषय है कि आखिर बिचौलिए मिशेल द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र की कापी इन पत्रकारों के पास कहां से पहुंची? और जब मिशेल और अगस्‍ता के बीच करार का दस्‍तावेज मौजूद है तो मिशेल के उस झूठे पत्र का ये पत्रकार बार-बार नाम क्‍यों ले रहे हैं? बड़ा सवाल यही है कि एक बिचौलिए के झूठे पत्र और बयान को यह पत्रकार बार-बार क्‍यों उछाल रहे हैं? इन्‍हें हथियारों की दलाली करने वाले एक व्‍यक्ति पर इतना भरोसा क्‍यों है? यह यह 6 मिलियन यूरो की खाई हुई दलाली का असर है?

ऐसा नहीं है कि यह केवल कयासबाजी है। मूल खबर के अनुसार, पत्रकार Raju Santhanam से Enforcement Directorate(ED) ने मोदी सरकार आने के बाद 2015 में पूछताछ की है, जिसमें उसने यह स्‍वीकार किया है कि उसने मिशेल जेम्‍स से लाभ प्राप्‍त किया है। ईडी राजू को गवाह के तौर पर पेश करने की तैयारी कर रही है। कहीं यही कारण तो नहीं है कि राजदीप सरदेसाई और बरखा दत्‍त जैसे पत्रकारों के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही हैं?

जांच में यह भी पता चला है हथियार डीलर अभिषेक वर्मा ने मिशेल जेम्‍स के लिए पत्रकारों को मैनेज किया था। अभिषेक वर्मा वर्तमान में जेल में है। अभिषेक वर्मा मशहूर साहित्‍यकार व पत्रकार श्रीकांत वर्मा का बेटा है। श्रीकांत वर्मा दो बार कांग्रेस से राज्‍यसभा के सदस्‍य रह चुके हैं। यही नहीं, हिंदी के साहित्‍यकार श्रीकांत वर्मा 70 के दशक में राजीव गांधी व सोनिया गांधी को हिंदी सिखाने वाले शिक्षक रह चुके हैं और गांधी परिवार के बेहद करीब रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन की दिशा में ठोस कदम: 10 करोड़ #LED बल्‍ब बाँटे

भारत सरकार ने सभी के लिए सस्‍ते एलईडी के द्वारा उन्‍नत ज्‍योति (उजाला) योजना के अंतर्गत देश भर में 10 करोड़ से ज्‍यादा एलईडी बल्‍बों का वितरण किया है। इस योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के द्वारा जनवरी 2015 में किया गया था।

इस अवसर पर, केन्‍द्रीय विद्युत, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल ने कहा कि 10 करोड़ एलईडी बल्‍बों का वितरण न सिर्फ हमारी बल्कि उपभोक्‍ताओं की भी उपलब्धि है। उन्‍होंने कहा कि भारत का एक स्‍पष्‍ट लक्ष्‍य 30-35 प्रतिशत तक कार्बन उत्‍सर्जनों को कम करना है और इसके लिए ऊर्जा कुशलता निर्णायक है। श्री गोयल ने कहा कि उजाला योजना के माध्‍यम से हमने देश और विश्‍व के लिए अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है। श्री गोलय ने ट्वीट किया, ‘‘10 करोड़ से ज्‍यादा एलईडी बल्‍व वितरित किये, बिजली बिलों को कम किया और पर्यावरण पर प्रभाव को कम किया# एलईडी के माध्‍यम से’’।








एलईडी वितरण प्रक्रिया की वर्तमान में जारी प्रगति को http://www.delp.in/ से देखा जा सकता है।

उजाला योजना के तहत राष्‍ट्रीय बचत:

अनुमानित वार्षिक ऊर्जा बचत 1,298 करोड़ किलोवॉट प्रतिवर्ष

अनुमानित पीकलोड में कमी 2,600 मेगावॉट

उपभोक्‍ताओं के बिलों में अनुमानित 5,195 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष

वार्षिक लागत में कमी

ग्रीन हाऊस गैस उत्‍सर्जन में वार्षिक कमी सीओ2 का 1 करोड़ टन वार्षिक

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