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आयकर अधिनियम,1961 के अंतर्गत फंड मैनेजर के संबंध में नए नियम


आयकर अधिनियम 1961 के सेक्‍शन 9ए में भारत ने विदेशी फंडों के फंड मैनेजरों के लोकेशन में मदद के लिए 01-04-2016 से विशेष कर लगाने की व्‍यवस्‍था का प्रावधान है। इस व्‍यवस्‍था के तहत एक पात्र निवेश फंड द्वारा भारत में पात्र फंड मैनेजर के माध्‍यम से चलाए जा रहे काम से भारत में कारोबारी संबंध स्‍थापित नहीं होता और इससे भारत में फंड का अवसर साबित नहीं होता।  

15-03-2016 को जारी अधि‍सूचना संख्‍या SO 1101(E) के माध्‍यम से अधिनियम के सैक्‍शन 9ए के प्रावधानों को लागू करने के लिए नियम आयकर अधिनियम 1961 में जोड़ दिया गया है। इन नियमों में निम्‍न व्‍यवस्‍थाएं हैं।
  • एक पूर्व स्‍वीकृति व्‍यवस्‍था जिसके अंतर्गत एक फंड  अपने विकल्‍प पर सीबीडीटी से स्‍वीकृति की मांग सकता है और एक बार स्‍वीकृति मिल जाने पर सेक्‍शन 9ए के लाभ से तब तक वंचित नहीं किया जा सकता जब तक सीमित परिस्थितियों के अंतर्गत स्‍वीकृति वापस न ले ली गई हो।
  • यह देखकर कि फंड में निवेश एक संस्‍थागत कंपनी द्वारा प्रत्‍यक्ष रूप से की गई है तो सदस्‍यों की संख्‍या का निर्धारण तथा फंड में भागीदारी हितनिर्धारण।
  • फंड के 18वें महीने या इसके अंतिम क्‍लोजिंग, जो भी पहले हो, में निवेशक विविधिकरण शर्त से छूट। यह छूट फंड की चरण स्‍थापना तथा फंड के समाप्‍त होने में एक वर्ष की अवधि के लिए मान्‍य।
  • 90 दिनों तक निवेशक विविधिकरण शर्तों को अल्‍पकालीक रूप से पूरा न करने के मामले में फंड की पात्रता प्रभावित नहीं करेगी।
  • फंड की पात्रता पर काम का ब्‍यौरा देने में देरी से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, बशर्ते विलंब की अवधि 90 दिनों से अधिक न हो।
  • यदि फंड प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष रूप से 26 प्रतिशत वोटिंग अधिकार है तो किसी कंपनी द्वारा कारोबार चलाने में फंड का नियंत्रण और प्रबंधन समझा जाएगा।

अधि‍सूचना संख्‍या SO 1101(E) दिनांक 15-3-2016 आयकर विभाग की वेबसाइट  www.incometaxindia.gov.in. पर उपलब्‍ध है।

श्री अमरनाथ यात्रा 2 जुलाई से 18 मार्च 2016 तक,जानिये पूरी प्रक्रिया


श्री अमरनाथजी यात्रा 2016 के लिए तीर्थयात्रियों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। जम्मू कश्मीर के राज्यपाल की अध्यक्षता वाले श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड ने बैंक के माध्यम से यात्रियों के पंजीकरण की निम्नलिखित प्रक्रिया घोषित की है:

1.   पंजीकरण और यात्री परमिट (वाईपीएस) पहले आओ पहले पाओं के आधार पर जारी होगा।

2.   यात्रियों का पंजीकरण बैंकों की सभी शाखाओं से 29 फरवरी, 2016 से शुरू हो चुका है।

3.   एक यात्री परमिट केवल एक यात्री के पंजीकरण के लिए वैध होगा।

4.  प्रत्येक पंजीकरण शाखा के लिए यात्रियों के पंजीकरण हेतु प्रति दिन/प्रति मार्ग कोटा निर्धारित कर दिया गया है। पंजीकरण शाखा यह सुनिश्चित करेगी कि पंजीकृत यात्रियों की संख्‍या प्रतिदिन/प्रति मार्ग नियत कोटे की सीमा से अधिक न हो।

5.  13 साल की आयु से छोटे और 75 साल की आयु से बड़े तथा छह सप्‍ताह से अधिक की गर्भावस्‍था वाली महिलाओं का यात्रा के लिए पंजीकरण नहीं होगा।

6.     प्रत्येक यात्री, यात्रा के लिए यात्रा परमिट प्राप्‍त करने हेतु आवेदन पत्र  और अनिवार्य स्‍वास्‍थ्‍य प्रमाण पत्र (सीएचसी) जमा करवाएगा। आवेदन पत्र और अनिवार्य स्‍वास्‍थ्‍य प्रमाणपत्र के प्रारूप तथा चिकित्‍सकों/सीएचसी जारी करने के लिए अधिकृत चिकित्‍सा संस्‍थानों की सूची श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की वेबसाइट  www.shriamarnathjishrine.com पर उपलब्ध हैं।

7.  पंजीकरण शाखा द्वारा आवेदन पत्र और सीएचसी आवेदक-यात्री को नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।

8.  यात्रा परमिट के आवेदन के लिए आवेदक-यात्री को पंजीकरण अधिकारी के पास निम्‍नलिखित दस्‍तावेज जमा कराने होंगे :

(क)  भरा हुआ निर्धारित आवेदन पत्र और

(ख)  10 फरवरी, 2016 को अथवा उसके बाद अधिकृत चिकित्‍सक/चिकित्‍सा संस्‍थान द्वारा जारी निर्धारित अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र (सीएचसी)

(ग)    पासपोर्ट साइज के चार फोटो (तीन यात्रा परमिट और एक आवेदन पत्र के लिए)

9.      पंजीकरण कार्यालय निम्नलिखित की जांच करेगा :

क  क्या  आवेदन पत्र सही से भरा गया है तथा क्‍या उस पर आवेदक यात्री ने हस्ताक्षर किये हैं।

ख  क्या सीएचसी किसी अधिकृत चिकित्‍सक/चिकित्‍सा संस्‍थान द्वारा जारी किया गया है।

ग क्‍या सीएचसी 10 फरवरी, 2016 को अथवा उसके बाद जारी किया गया है।

10 वह दिन विशेष जब यात्रा प्रांरभ की जानी है (यथा सोमवार, मंगलवार, बुधवार, बृहस्‍पतिवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार) वह यात्रा परमिट पर अंकित किया गया है। यात्रा परमिट पर अंकित दिन, वह दिन होगा, जब यात्री को बालताल और चंदनवाड़ी (पहलगाम) स्थित एक्‍सेस कंट्रोल गेट पार करने की अनुमति होगी।

11 बैंक की शाखा, यात्री परमिट जारी करने से पहले यह सुनिश्चित करेगी कि जिस तिथि को एक्‍सेस कंट्रोल गेट पार करने के लिए यात्रा परमिट जारी किया गया है, वह दिन (यथा सोमवार, मंगलवार, बुधवार, बृहस्‍पतिवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार) यात्रा परमिट पर अंकित दिन से मेल खाता हो।

12 यात्रा परमिट के फॉर्म में यात्रा वर्ष और यात्रा की तारीख नहीं छापी गई है। इसलिए यात्रा परमिट जारी करने वाली बैंक की शाखा के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह यात्रा वर्ष और यात्रा की तिथि की मोहर लगाए/अंकित करे और जहां यात्रा वर्ष और यात्रा की तिथि लिखी गई है/या उसकी मोहर लगाई गई है, उस जगह पर पारदर्शी टेप चिपकाए (यात्रा की तिथि और वर्ष में किसी तरह का फेरबदल न किया जा सके, इसके लिए पारदर्शी टेप चिपकाना महत्‍वपूर्ण है)। हालांकि यात्रा की तारीख, वर्ष और बैंक शाखा की मोहर यात्रा परमिट जारी करते समय ही लगाई जाएगी। किसी भी स्थिति में किसी भी यात्रा परिमट पर अग्रिम तौर पर ये मोहर नहीं लगाई जाएगी। इसका पालन नितांत रूप्‍से आवश्‍यक है।

13 यदि आवेदन पत्र और सीएचसी सही हैं, तो आवेदक द्वारा 50 रुपये (उपरोक्‍त में से 35 रुपये की राशि एसएएसबी के खाते में भेज दी जाएगी और शेष राशि बैंक द्वारा रखी जाएगी) प्रति यात्रा परमिट की दर पर भुगतान करने पर अनुच्‍छेद 15-17 में उल्लिखित कदमों का अनुसरण करने के बाद पंजीकरण अधिकारी उसे यात्रा परमिट जारी करेगा।

14  पंजीकरण अधिकारी आवेदन पत्र और सीएचसी में उल्लिखित विवरण के आधार पर मौके पर ही पासपोर्ट साइज के फोटो चिपकाएगा यात्रा परमिट फॉर्म भरेगा। यात्रा की तिथि भी सही प्रकार से भरी जाएगी।
15  पंजीकरण अधिकारी यात्रा परमिट पर हस्‍ताक्षर करेगा और यात्रा परमिट पर बैंक की मोहर इस प्रकार लगाएगा कि वह मोहर आधी आवेदक-यात्री की फोटो पर छपे और आधी यात्रा परमिट पर। हालांकि तिथि, वर्ष और बैंक की शाखा की मोहर यात्रा परमिट जारी करते समय ही लगाई जाएगी। किसी भी स्थिति में यात्रा प‍रमिट पर अग्रिम तौर पर मोहर नहीं लगाई जाएगी। इसका पालन नितांत रूप्‍से आवश्‍यक है।

16 आवेदक-यात्री को यात्रा परमिट जारी करने से पहले पंजीकरण अधिकारी निम्‍नलिखित विवरण दर्ज करेगा :
क यात्रा परमिट जारी करने की तिथि
ख यात्रा परमिट की क्रम संख्‍या
ग आवेदक-यात्री यात्री का नाम, पता और टेलीफोन/मोबाइल नम्‍बर
घ आवेदक-यात्री के निकट संबंधी का नाम, किसी भी आपात स्थिति में जिससे संपर्क किया जा सकता है
ड तीर्थ यात्रा का मार्ग
च बालताल/पहलगाम से यात्रा शुरू करने की तिथि

17 पंजीकरण कार्यालय बालताल मार्ग के लिए बालताल और पहलगाम मार्ग के लिए पहलगाम वाला परमिट जारी करेगा।        

सरकार ने ट्रेडमार्क पंजीकरण के बदले नियम,जानिये क्या है नया


सरकार ने व्यापार चिन्हों (ट्रेड मार्क) के पंजीकरण के लिए नए नियम प्रस्तावित किए हैं। इस प्रस्ताव के मुताबिक व्यापार चिन्ह (संशोधन) नियम, 2015  व्यापार चिन्ह नियम, 2002 की जगह लेगा। प्रस्ताव के मुताबिक मुताबिक व्यापार चिन्ह (संशोधन) नियम, 2015 भारत सरकार के गजट प्रकाशित हो चुका है। यह औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग और कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट्स, डिजाइंस एंड ट्रेड मार्क्स की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। इसमें आम जनता और इससे संबंधित सभी पक्षों से सलाह और सुझाव मांगें गए हैं। प्रस्तावित व्यापार चिन्ह (संशोधन) नियम, 2015 के जरिये निम्नलिखित परिवर्तन होंगे-

  • व्यापार चिन्ह के फॉर्मों की संख्या में कमी होगी
  • व्यापार चिन्हों के नियमों से जुड़े पुराने और अप्रासंगिक नियमों को हटा दिया जाएगा
  • व्यापार चिन्हों आवेदनों और अन्य फॉर्मों की  ई-फाइलिंग को बढ़ावा देने के लिए, कागज पर भरे जाने वाले फॉर्मों में लगने वाले शुल्क की तुलना में इसका शुल्क कम रखा जाएगा।
  • आवेदक से लेकर रजिस्टरी तक और रजिस्टरी से आवेदक तक के दस्तावेजों के निपटारे के तरीकों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से पूरा करने का तरीका लाया जाएगा ताकि इस प्रक्रिया में तेजी आ सके।
  • व्यापार चिन्ह के पंजीकरण के लिए आवेदन को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को तेज करने से जुड़े प्रावधानों को लागू किया जाएगा और इसे बढ़ा कर पंजीकरण चरण तक पहुंचाया जाएगा। जो अभी तक परीक्षण चरण तक ही सीमित है।
  • जाने-माने व्यापार चिन्हों की सूची सुनिश्चित करने और उनके रखरखाव के लिए तरीके अपनाए जाएंगे
  • व्यापार चिन्ह के पंजीकृत उपयोगकर्ता के तौर पर पंजीकरण की प्रक्रिया सरल की जाएगी।
  • इस नियम में व्यापार चिन्ह आवेदन शुल्क बढ़ाने का फैसला किया गया है। यह भी फैसला किया गया है कि ट्रेड मार्क आवेदनों और अन्य फॉर्मों की ई-फाइलिंग को बढ़ावा देने के लिए, कागज पर भरे जाने वाले फॉर्मों में लगने वाले शुल्क की तुलना में इसका शुल्क कम रखा जाएगा। पंजीकरण शुल्क में प्रस्तावित संशोधन प्रस्तावित व्यापार चिन्ह (संशोधन) नियम, 2015 की पहली अनुसूची में प्रकाशित किय जा चुका है। अंतिम शुल्क आम जनता और इससे संबंधित सभी पक्षों से मिले सलाहों और सुझावों पर विचार करके तय किया जाएगा।


व्यापार चिन्ह कानून 1999 के तहत व्यापार चिन्ह रजिस्ट्रार के कर्तव्यों और अधिकारों की सूची दी गई है। इसमें समय समय पर जारी किए गए अन्य नियम भी शामिल हैं-

व्यापार चिन्ह के इस्तेमाल को सुविधाजनक बनाने के लिए सरकार ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं-

  1. प्रस्तावित नए नियमों को प्राथमिक तौर पर पंजीकरण की प्रक्रिया सरल बनाने और व्यापार चिन्हों से जुड़े पुराने और अप्रासंगिक नियमों को हटे के लिए लाया गया है।
  2. आवेदन को ऑनलाइन जमा करने  और अन्य व्यापार चिन्ह आवेदन मुहैया कराने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं।
  3. किसी वस्तु और सेवा के खास विवरण के आधार पर पहले के व्यापार चिन्ह को खोजने की व्यवस्था वेबसाइट पर मुफ्त में देने की सुविधा दी गई है।
  4. आधिकारिक वेबसाइट में व्यापार चिन्ह के लिए दर्ज किए गए आवेदन की मौजूदा स्थिति जानने की सुविधा निःशुल्क है।
  5.  व्यापार चिन्ह रजिस्ट्रार ने व्यापार चिन्ह से जुड़े सभी पक्षों को डाक के अलावा ई-मेल के जरिये भी जानकारी देने की प्रक्रिया शुरू की है।
  6.  वेबसाइट पर आम लोगों के लिए कई और अन्य सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध है।
  7. पेटेंट्स, डिजाइन और ट्रेड मार्क्स (सीजीपीडीटीएम) के कार्यालय के हर कार्यालय के अधीन लोक शिकायत अधिकारी और जनसंपर्क अधिकारी निर्धारित किए गए हैं।
  8. आधिकारिक वेबसाइट पर कई ऐसे टूल्स मौजूद हैं, जिनसे किसी भी खास समय पर विभाग के प्रदर्शन और लंबित काम का जायजा लिया जा सकता है।


यह जानकारी लोकसभा में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती निर्मला सीतारमण ने दी।

जरुरी खबर : पर्यावरण मंत्रालय ने उद्योगों का नया वर्गीकरण जारी किया


उद्योगों का नये सिरे से वर्गीकरण महत्वपूर्ण फैसला, श्वेत उद्योगों की नई श्रेणी में पर्यावरण संबंधी अनापत्ति लेने की आवश्यकता नहीं होगीः जावड़ेकर 

सरकार ने उद्योगों के प्रदूषण के बोझ के आधार पर आज उनका नया वर्गीकरण जारी किया। उनका नया वर्गीकरण जारी करते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज कहा, ‘’श्‍वेत उद्योगों की नयी श्रेणी, जो विशेष तौर पर प्रदूषण न करने वाले उद्योगों की है, उन्‍हें पर्यावरण संबंधी अनापत्ति और मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी और इससे उन्‍हें ऋण देने वाली संस्‍थाओं से धन लेने में मदद मिलेगी। उद्योगों का नए सिरे से वर्गीकरण करने का कार्य पिछले एक साल के दौरान किया गया। यह एक महत्‍वपूर्ण फैसला है, जो उद्योगों की स्‍पष्‍ट तस्‍वीर प्रस्तुत करेगा।‘’

श्री जावड़ेकर ने कहा, ‘’उद्योगों का उनके प्रदूषण के बोझ के आधार पर पुन:वर्गीकरण एक वैज्ञानिक कार्य है। वर्गीकरण की पुरानी पद्धति ने कई उद्योगों को समस्‍याएं हो रही थीं और उनसे उद्योगों के प्रदूषण की झलक नहीं मिल रही थी। नयी श्रेणियां इन कमियों को दूर करेंगी और सभी को स्‍पष्‍ट तस्‍वीर उपलब्‍ध करायेंगी। ज्‍यादा प्रदूषण नहीं फैलाने वाले 25 औद्योगिक क्षेत्रों को पहले लाल रंग की श्रेणी में रखा गया था। इससे सभी को उनके बारे में गलत अंदाजा लग रहा था।‘’

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने औद्योगिक क्षेत्रों का वर्गीकरण प्रदूषण सूचकांक के आधार पर करने का मापदंड विकसित किया है, जो उत्सर्जन (वायु प्रदूषक), प्रवाह (जल का प्रवाह), उत्पन्न होने वाला खतरनाक कचरा और संसाधनों की खपत का कार्य है। इस उद्देश्‍य के लिए जल (प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण) उपकर (संशोधन) अधिनियम 2003 से संदर्भ लिए गए हैं और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण (संरक्षण) कानून 1986 और दून घाटी अधिसूचना, 1989 के अंतर्गत विभिन्न प्रदूषकों के लिए मापदंड निर्धारित किए हैं। किसी भी औद्योगिक क्षेत्र के लिए प्रदूषण सूचकांक पीआई 0 से 100 है और पीआई का बढ़ता मूल्य औद्योगिक क्षेत्र से बढ़ने वाले प्रदूषण के भार की बढ़ती डिग्री की ओर इंगित करता है। सीपीसीबी, एसपीसीबी और एमओईएफसीसी के बीच कई दौर की मंत्रणा के आधार पर ‘प्रदूषण सूचकांक के दायरे’ के बारे में निम्नलिखित मापदंडों को अंतिम रूप दिया गया है, ताकि उद्योगों के वर्गीकरण को अंतिम रूप दिया जा सके।

  • 60 और उससे अधिक प्रदूषण सूचकांक के आंकड़ों वाले औद्योगिक क्षेत्र – लाल रंग की श्रेणी
  • 41 से 59 के बीच प्रदूषण सूचकांक के आंकड़ों वाले औद्योगिक क्षेत्र – नारंगी रंग की श्रेणी
  • 21 से 40 के बीच प्रदूषण सूचकांक के आंकड़ों वाले औद्योगिक क्षेत्र – हरी रंग की श्रेणी
  • 20 तक प्रदूषण सूचकांक के आंकड़ों वाले औद्योगिक क्षेत्र – सफेद रंग की श्रेणी


 उद्योगों का नये सिरे से वर्गीकरण के कार्यों की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैः

वैज्ञानिक कसौटी के आधार पर औद्योगिक क्षेत्रों की प्रदूषण फैलाने की क्षमता से संबंधित महत्व दिया गया है। इसके अलावा जहां भी संभव हो सका है, कच्चे माल का उपयोग, अपनाई गई विनिर्माण प्रक्रिया और उससे उत्पन्न होने वाले प्रदूषकों के आधार पर औद्योगिक क्षेत्रों के विभाजन पर भी विचार किया गया है।

  • लाल रंग की श्रेणी वाले औद्योगिक क्षेत्र 60 होंगे
  • नारंगी रंग की श्रेणी वाले औद्योगिक क्षेत्र 83 होंगे
  • हरे रंग की श्रेणी वाले औद्योगिक क्षेत्र 63 होंगे
  • हाल ही में शुरू की गई श्वेत रंग की श्रेणी में 36 औद्योगिक क्षेत्र आएंगे, जो व्यवहारिक रूप से किसी तरह का प्रदूषण नहीं फैलाते
  • श्वेत श्रेणी के अंतर्गत आने वाले उद्योगों को अपने कामकाज के लिए मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित एसपीसीबी/पीसीसी को सूचना देना पर्याप्त रहेगा
  • लाल रंग की श्रेणी वाले उद्योगों को सामान्यतः नाजुक पारिस्थिकी वाले क्षेत्र/ संरक्षित क्षेत्र में अनुमति नहीं मिलेगी

लाल, नारंगी, हरी और श्वेत श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले उद्योगों का उल्लेख नीचे दी गई तालिकाओं – 1, 2, 3 और 4 में प्रदान किया गया है।

हाल ही में शुरू की गई उद्योगों की श्वेत रंग की श्रेणी में वे उद्योग आते हैं, जो व्‍यवहारिक रूप से प्रदूषण न फैलाने वाले जैसे बिस्‍कुट ट्रेज़ आदि जैसे औद्योगिक क्षेत्र आते हैं। उद्योगों के वर्गीकरण का उद्देश्‍य यह सुनिश्चित करना है कि उद्योग की स्‍थापना इस प्रकार की जाए कि वह पर्यावरण के उद्देश्‍यों के अनुरूप हो । नए मापदंड उद्योगों को स्‍वच्‍छ प्रौद्योगिकियां अपनाने के लिए प्रोत्‍साहित होंगे और इसके परिणामस्‍वरूप कम प्रदूषक उत्पन्न होंगे। नये वर्गीकरण का एक लाभ यह भी होगा कि उद्योग अपना स्‍वत: आकलन कर सकेंगे, क्‍योंकि पूर्व के आकलन की व्‍यक्तिपरकता समाप्‍त कर दी गयी है। उद्योगों का नए सिरे से वर्गीकरण देश में कामकाज का स्‍वच्‍छ एवं पारदर्शी वातावरण तैयार करने और कारोबार में सुगमता लाने के वर्तमान सरकार के प्रयासों, नीतियों और उद्देश्‍यों का अंग है।

इसी से मिलते-जुलते अन्‍य प्रयासों में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों में उत्सर्जन/ प्रवाह की निरंतर ऑनलाइन निगरानी प्रणाली, प्रदूषक औद्योगिक समूहों के आकलन के लिए सीईपीआई (समग्र पर्यावरण प्रदूषण सूचकांक) की अवधारण पर पुनर्विचार करना, वर्तमान औद्योगिक उत्सर्जन/ प्रवाह के मानकों में संशोधन, गंगा नदी थाले में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान का प्रारंभ किया जाना शामिल है और इसके अलावा आने वाले दिनों में बहुत से अन्य कदम उठाए जाएंगे।

तालिका 1 लाल रंग की श्रेणी में आने वाले उद्योग

क्रम संख्या
औद्योगिक क्षेत्र
1
खतरनाक रसायनों का अलग भंडारण
2
आटोमोबाइल विनिर्माण (समेकित)
3
खतरनाक कचरे का पुनर्चक्रण (इस्तेमाल में लाए गए विशुद्ध धातु के उत्प्रेरक)
4
लूब्रकेटिंग ऑयल और ग्रीस निर्माण
5
डीजी सेट (5 एमवीए)
6
कार्बन ब्लैक और एलाइड
7
लेड एसिड बैटरी
8
फास्फेट रॉक प्रोसेसिंग
9
बिजली घर
10
खतरनाक कचरे का पुनर्चक्रण (इस्तेमाल में लाए गए उत्प्रेरक)
11
क्लोरनेटेड हाइड्रोकार्बन्स
12
चीनी
13
फाइबर ग्लास उत्पादन
14
पटाखे
15
ई-कचरा रीसाइकलर्स
15
दूध और डेयरी उत्पाद
17
फास्फोरस
18
लुगदी और कागज 
19
कोयला बनाना
20
विस्फोटक डेटोनेटर
21
पेंट, वारनिश और पिगमेंट
22
ऑर्गेनिक कैमिकल
23
हवाई अड्डे और व्यवसायिक हवाई पट्टियां
24
25
बेसिक कैमिकल
26
सीमेंट
27
क्लोरेट, पर-क्लोरेट एवं पराक्साइड
28
क्लोरीन, फ्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन
29
डाइयां और डाइ-इन्टर्मीडीएट
30
स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठान
31
होटल (विशाल) 
32
लेड एसिड बैटरी – रीसाइकलर्स
33
वेस्ट इलैक्ट्रिकल और इलैक्ट्रोनिक्स के रीसाइकलर्स
34
ग्लू और जिलेटिन
35
माइनिंग एंड ओर बेनिफिकेशन
36
परमाणु बिजली घर
37
कीटनाशक
38
फोटोग्राफिक फिल्म रसायन
39
धागा वस्त्र प्रसंस्करण
40
क्लोर छार
41
शिप ब्रेकिंग
42
तेल और गैस उत्खनन
43
मेटल सरफेस ट्रीटमेंट
44
चमड़ा बनाने का कारखाना
45
बंदरगाह /गोदी /घाट
46
संश्लेषित रेशम
47
ताप बिजली घर
48
बूचड़खाना
49
एल्युमिनियम स्मेल्टर
50
कॉपर स्मेल्टर
51
उर्वरक (बेसिक)
52
अविभाज्य लोहा एवं इस्पात
53
लुगदी और कागज  (ब्लीचिंग)
54
जिंक स्मेल्टर
55
तेल रिफाइनरी
56
पेट्रोकेमिकल्स
57
फार्मास्यूटिकल्स
58
लुगदी और कागज  ( बड़े कृषि + लकड़ी),
59
आसवनी
60
रेल ईंजन वर्कशॉप /  सर्विस सेंटर्स

तालिका 2 नारंगी रंग की श्रेणी में आने वाले उद्योग

क्रम संख्या
औद्योगिक क्षेत्र
1
अलमारीग्रिल विनिर्माण
2
स्क्रैप एल्युमीनियम और कॉपर निकालना
3
ऑटोमोबाइल सर्विसिंगमरम्मत
4
आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सा
5
ईट के भट्ठा
6
भवन और निर्माण 20,000 वर्ग मीटर
7
काजू प्रसंस्करण
8
चीनी मिट्टी की चीज़ें और रेफ्रेक्ट्रीज
9
चनाचूर और लड्डू भूसी से जलाए जाने वाले ओवन
10
कोल वाशरीज
11
कोटेड इलेक्ट्रोड
12
कॉफी बीज प्रसंस्करण
13
कॉम्पैक्ट डिस्क कंप्यूटर फ्लॉपी
14
कॉपर अपशिष्ट रीसाइकलर्स
15
डेयरी और डेयरी उत्पाद (छोटे पैमाने पर)
16
डीजी सेट (>1 एमवीए लेकिन <5 एमवीए)
17
रोलिंग स्टॉक का विखंडन
18
ड्राइ सेल बैटरी
19
सूखी कोयला / खनिज प्रसंस्करण
20
फर्मेन्टेशन (एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल)
21
लौह और अलौह धातु निष्कर्षण
22
उर्वरक (दानेदार / निर्माण / सम्मिश्रण
23
मछलियों का खानापोल्ट्री फीड और पशुचारा
24
मछली प्रसंस्करण और पैकिंग
25
फ्लैक्स फ्रॉम रिजेक्टेड पैट बोतल
26
फोम विनिर्माण
27
खाद्य एवं खाद्य प्रसंस्करण
28
लौह और अलौह की ढलाई
29
कपूर की गोलियों आदि का संरूपण /पिलेटाइजेशन
30
ग्लास सेरेमिक्समिट्टी के बर्तन और टाइल
31
फ्लेक्सवी पर नक्काशी, मुद्रणडिजिटल मुद्रण
32
हीट ट्रीटमंट यूजिंग ऑयल फायर्ड फर्नेंस
33
हॉट मिक्स प्लांट्स
34
आइसक्रीम
35
ढलाई के कार्यों से संबंधित उद्योग अथवा प्रक्रियाएं
36
अशोधित / कच्चे नमक से आयोडीन युक्त नमक
37
रंगाई बिना जूट प्रसंस्करण
38
बड़ी बेकरी और कन्फेक्शनरी
39
ट्रांसफार्मर मरम्मत / विनिर्माण
40
टायर और ट्यूब  वल्केनाइजेशन / पुराने टायरों में रबर चढ़ाना।
41
वनस्पति तेल विनिर्माण
42
वायर ड्राइंग एंड वायर नेटिंग
43
बड़े कपास कताई और बुनाई
44
चूने का विनिर्माण (चूना भट्ठा का उपयोग)
45
लिक्विड फ्लोर क्लीनर ब्लैक फिनाइल
46
कांच का विनिर्माण
47
शीट ग्लास से आईने के विनिर्माण
48
मच्छर भगाने वाली कॉयल का विनिर्माण
49
स्टार्च / साबूदाना का विनिर्माण
50
ऑयल फायर्ड बॉयलर का इस्तेमाल करते हुए मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री
51
मध्यम स्तर के होटल
52
लकड़ी के मॉड्यूलर फर्नीचर
53
नई राजमार्ग निर्माण परियोजना
54
गैर अल्कोहल पेय (शीतल पेय)
55
पेंट ब्लैंडिंग और मिश्रण (बॉल मिल)
56
पेंट और वार्निश (मिश्रण और सम्मिश्रण)
57
पार्बॉइल राइस मिल्स
58
औषधि निर्माण
59
प्लाई बोर्ड विनिर्माण
60
पोटेबल अल्कोहल (आईएमएफएल) सम्मिश्रण द्वारा
61
मुद्रण स्याही विनिर्माण
62
मुद्रण या ग्लास शीट की नक़्क़ाशी
63
छापाखाना
64
प्रोड्यूसर गैस प्लांट
65
रीसाइकलर्स यूजड ऑयल्स
66
रीसाइकलर्स वेस्ट ऑयल्स
67
रीसाइकलिंग पेंट एंड इंक स्लज
68
वेस्ट प्लास्टिक / पीवीसी का पुनर्प्रसंस्करण
69
रोलिंग मिल (ऑयल या कोल फायर्ड)
70
सिलिका जेल
71
सिल्क / साड़ी स्क्रीन प्रिंटिंग
72
स्प्रे पेंटिंग
73
भट्टियों के साथ इस्पात और इस्पात उत्पाद
74
स्टोन क्रशर
75
शल्य चिकित्सा और चिकित्सा उत्पाद (लेटेक्स)
76
सिंथेटिक डिटर्जेंट और साबुन
77
सिंथेटिक रेजिन
78
सिंथेटिक रबर एक्सक्लुडिंग मोल्डिंग
79
टेफलॉन आधारित उत्पाद
80
थर्मोकोल विनिर्माण (बॉयलर सहित)
81
थर्मामीटर
82
सिगरेट सहित तंबाकू उत्पाद
83
टूथ पाउडरटूथपेस्टटैल्कम पाउडर

तालिका 3 हरी रंग की श्रेणी में आने वाले उद्योग

क्रम संख्या
औद्योगिक क्षेत्र
1
एल्यूमिनियम के बर्तन
2
 आयुर्वेदिक दवाएं
3
छोटी बेकरी / हलवाई की दुकान
4
पीपी फिल्म
5
बायोमास ब्रिकेट 
6
मेलामाइन रेजिन
7
पीतल और कांस्य धातु के बर्तन
8
कैंडी
9
गत्ता / नालीदार बॉक्स
10
बढ़ईगीरी और लकड़ी का फर्नीचर
11
सीमेंट उत्पाद
12
मिश्रण से सिरेमिक रंग
13
चिलिंग प्लांट और बर्फ बनाना
14
कोक ब्रिकेटिंग
15
छोटे कपास की कताई और बुनाई
16
दाल के मिल
17
चीनी मिट्टी के कप की सजावट
18
पीवीसी कपड़ों पर डिजिटल प्रिंटिंग
19
खाद्यान्नों को संभालना और भंडारण करना
20
आटा चक्की
21
इलैक्ट्रिकल ग्लासचीनी मिट्टी, मिट्टी के बर्तन
22
स्टार्च से गोंद
23
गोल्ड एंड सिल्वर स्मिथी
24
गैर प्रदूषणकारी ऊष्मा उपचार
25
इन्सुलेशन / कोटेड पेपर
26
चमड़े के जूते / उत्पाद
27
लूब्रिकैटिंग ऑयल, ग्रीस का मिश्रण
28
चिपकाई गई परत
29
तेल मिल घानी
30
पैकिंग सामग्री
31
फिनायल / टॉयलट क्लीनर
32
पॉलिथीन और प्लास्टिक उत्पाद
33
पोल्ट्रीहैचरी और पिग्गरी
34
पावरलूम (डाई और ब्लीचिंग रहित)
35
मुरमुरे (गैस या इलेक्ट्रिकल हीटिंग)
36
रैडी मिक्स सीमेंट कंसन्ट्रेट
37
अपशिष्ट कपास के पुनर्प्रसंस्करण
38
चावल की मिल (चावल की भूसी केवल)
39
 रोलिंग मिल (गैस फायर्ड) एंड कोल्ड रोलिंग मिल
40
रबड़ की वस्तुएं (गैस से संचालित बेबी बॉयलर)
41
आरा मशीन
42
साबुन निर्माण
43
मसालों का सम्मिश्रण
44
मसालों की पिसाई
45
स्टील फर्नीचर
46
अनाज प्रसंस्करण
47
टायर / ट्यूब रीट्रीटिंग
48
चिलिंग / आइस प्लांट
49
सीओ 2 रिक्वरी
50
आसुत जल
51
छोटे होटल
52
ऑप्टिकल लेंस
53
मिनरल वॉटर
54
इमली पाउडर
55
संगमरमर पत्थर
56
एमरी पाउडर
57
फ्लाई ऐश
58
मिनरल स्टैक यार्ड
59
तेल एंड गैस ट्रांसपोटेशन पाइप लाइन
60
सीजनिंग ऑफ वुड
61
सिंथेटिक डिटर्जेंट
62
चाय प्रसंस्करण
63
बांस की पिसाई

तालिका 4 श्वेत रंग की श्रेणी में आने वाले उद्योग

क्रम संख्या
औद्योगिक क्षेत्र
1.        
एयर कूलर / कंडीशनर
2.        
साइकिलेंबेबी कैरेज
3.        
बेलिंग ऑफ वेस्ट पेपर
4.        
जैव उर्वरक / जैव कीटनाशक
5.        
बिस्कुट ट्रे
6.        
चाय का सम्मिश्रण / पैकिंग
7.        
मुद्रण के लिए ब्लॉक बनाना
8.        
चाक बनाना
9.        
कम्प्रेस्ड ऑक्सीजन गैस
10.     
सूती और ऊनी होजरी
11.     
डीजल पंप की मरम्मत
12.     
इलैक्ट्रिक लैम्प (बल्ब) और सीएफएल
13.     
इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक आइटम
14.     
इंजीनियरिंग और निर्माण इकाइयों
15.     
फ्लेवर्ड सुपारी
16.     
फ्लाई ऐश ब्रिक्स/ ब्लॉक
17.     
फाउनटेन पेन
18.     
कांच की शीशियां
19.     
ग्लास पुट्टी एंड सीलेंट
20.     
मूंगफली छीलना
21.     
हथकरघा / कालीन बुनाई
22.     
चमड़े की कटाई और सिलाई
23.     
नारियल भूसी से बने कॉयर उत्पाद
24.     
मैटल कैप्स कंटेनर आदि
25.     
शू ब्रश और वायर ब्रश
26.     
मेडिकल ऑक्सीजन
27.     
ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक पोषक तत्वों
28.     
जैविक खाद
29.     
पाउडर दूध की पैकिंग
30.     
पेपर पिंस और यू क्लिप
31.     
बिजली की मोटरों / जनरेटर की मरम्मत
32.     
रस्सी (प्लास्टिक और सूती)
33.     
वैज्ञानिक और गणितीय उपकरण
34.     
सौर मॉड्यूल गैर-परंपरागत ऊर्जा उपकरण
35.     
सौर फोटोवोल्टिक सेलपवन ऊर्जा और मिनी जल विद्युत (कम से कम 25 मेगावाट)के माध्यम से सौर बिजली उत्पादन
36.    
शल्य चिकित्सा और चिकित्सा उत्पादों को जोड़ना



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