भाजपा नेता ने की कांशीराम जी की मृत्यु की सीबीआई जांच की मांग


बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम (Kanshi Ram) की मृत्यु के 13 साल बाद उत्तर प्रदेश के मंत्री गिरिराज सिंह धर्मेश (Giriraj Singh Dharmesh) ने बसपा नेता की मौत की वजह बनीं परिस्थितियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है।

मंत्री ने कहा कि कांशीराम की मृत्यु 9 अक्टूबर 2006 को रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलूंगा और सीबीआई जांच का औपचारिक अनुरोध करूंगा।’’

मंत्री ने कहा कि कांशीराम की बहन सुवर्णा द्वारा लगाए गए आरोप सीबीआई जांच के लिए पर्याप्त आधार थे।

पिछले 13 सालों से कांशीराम का परिवार बसपा अध्यक्ष मायावती पर यह आरोप लगा रहा है कि मायावती ने दिग्गज नेता को बंदी बनाकर रखा था, जिससे उनका निधन हुआ।

सुवर्णा ने कहा, ‘‘मायावती ने कांशीराम की बीमारी में उनसे परिवार को मिलने की इजाजत नहीं दी थी। मेरी मां की मृत्यु हो गई, क्योंकि वह अपने बेटे से मिलना चाहती थी, लेकिन उन्हें भी दूर रखा गया था।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘2003 में मायावती ने कहा था कि उनके पास कांशीराम के इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। मेरी मां ने मायावती को अपनी सोने की चूडिय़ां सौंपीं, लेकिन उन्होंने फिर भी हमें उनसे मिलने नहीं दिया।’’

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मायावती ने परिवार को दूर रखा, क्योंकि वह बसपा पर पूरा नियंत्रण चाहती थीं।

परिवार ने मायावती पर कांशीराम की विचारधारा को धोखा देने का भी आरोप लगाया है।

सुवर्णा ने कहा, ‘‘कांशीराम ने हमेशा अपने परिवार को राजनीति से दूर रखा और भाई-भतीजावाद का समर्थन नहीं किया, लेकिन मायावती ने अपने भाई और भतीजे को बसपा में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘कांशीराम के अनुयायी बसपा को चलाने के तरीके से नाराज हैं। यह पार्टी अब दलित और समाज के हाशिए पर रहने वाले तबके के लिए नहीं है।’’

सूत्रों का दावा है कि सीबीआई जांच के लिए मंत्री की मांग बिना कारण नहीं है। यह स्पष्ट है कि भाजपा मायावती को किनारे करना चाहती है और ऐसा करने के लिए उनके पास यह एक सही मुद्दा है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘अगर इस मामले में जांच शुरू की जाती है, तो मायावती को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।’’

बीएसपी विधायक याकूब कुरैशी ने की सिखों पर की अपमानक टिप्पणी

मेरठ सिटी से बीएसपी के विधायक हाजी याकूब कुरैशी को सिखों पर की गई अपमानजनक टिप्पणी के लिए पार्टी से निकाल दिया गया। पार्टी ने उन्हें पूर्व में दिए गए कई विवादित बयानों को भी आपत्तिजनक माना है। पार्टी के सभी नेताओं को निर्देश दे दिया गया है कि कुरैशी को पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में बुलाया जाए। सरकार की ओर से इस मामले में जिला प्रशासन को कुरैशी के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इससे पहले कुरैशी ने 2006 में मोहम्मद साहब का आपत्तिजनक कार्टून बनाने वाले डेनमार्क के एक कार्टूनिस्ट का सर कलम करने वाले शख्स को 51 करोड़ रुपये का नकद इनाम और उसके वजन के बराबर सोना देने का सनसनीखेज एलान किया था।


कुरैशी ने कहा था, ' लोग कहते हैं कमेले ( बूचड़खाना ) में रोजाना हजारों पशु काटे जा रहे हैं, लेकिन यदि सौ भैंस एक साथ खड़ी कर दी जाएं तो वह हजारों दिखाई देती हैं। यह ठीक उसी तरह है जैसे दो सौ सरदारों को एक साथ छोड़ दें तो लगेगा पूरा शहर सरदारों का है।'

मैर्य ने कहा कि किसी जाति विशेष पर ऐसी टिप्पणी करना पार्टी संविधान का उल्लंघन है। इस टिप्पणी से सिख और पंजाबी समाज की भावना को ठेस पहुंची। ऐसी गैर-मर्यादित टिप्पणी करने के आरोप में हाजी याकूब को पार्टी से निष्कासित किया गया है। इसके अलावा ऐसे कई और मामलों की जांच हो रही है। इनमें भी उनके विरुद्ध कार्रवाई हो सकती हैं।

उमा भारती ने मायावती के खिलाफ मोर्चा खोला

बीजेपी नेता उमा भारती आज लखनऊ में मायावती सरकार के ख़िलाफ़ एक दिन के धरने पर बैठी हैं, उमा भारती का कहना है कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं के ख़िलाफ़ जुल्म की इंतहा हो चुकी है और महिला मुख्यमंत्री इससे बेअसर और बपरवाह होकर काम कर रही हैं।

इसका
विरोध करने के लिए उन्हें धरना देना पड़ रहा है। उमा भारती ने उन परिवारों को भी इस धरने में शामिल होने के लिए बुलाया है, जिनके परिवार की किसी महिला को हत्या, बलात्कार या अन्य अपराध का शिकार होना पड़ा है। उमा दीनदयाल स्मृतिका में बीजेपी की महिला कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवारों के साथ विरोध प्रदर्शन भी करेंगी।

मायावती सरकार के 100 घोटालों पर भाजपा ने "मायाजाल" फिल्म रिलीज की

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार के 100 घोटालों पर आधारित सीडी "मायाजाल" जारी की। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव किरीट सोमैया ने संवाददाताओं से कहा कि इस सीडी में बसपा सरकार के कुछ घोटालों को दर्शाया गया है और यह भ्रष्टाचार के खिलाफ ल़डाई को जनता तक ले जाने का अपनी तरह का पहला प्रयास है।

पार्टी
की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही ने कहा कि भाजपा का प्रतिनिधिमंडल आगामी एक जून को राज्यपाल बीएल जोशी से मुलाकात कर उन्हें यह सीडी और दस्तावेज सौंपेगा तथा उनसे मायावती सरकार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।

सोमैया ने कहा कि गत अप्रैल में भाजपा ने बसपा सरकार के 100 घोटालों की सूची जारी की थी और वह अब प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर इन घपलों को प्रदर्शनियों के जरिये जनता के सामने ला रही है। उन्होंने कहा कि आज जारी हुई सीडी प्रदेश पर छाए "मायाजाल" पर आधारित है और इसमें दिखाया गया है कि सरकार के भ्रष्टाचार और घोटालों से आम आदमी को किस कदर दिक्कतों का सामना करना प़ड रहा है।

इस
सीडी के जारी होने के साथ ही बसपा सरकार को बेनकाब करने की भाजपा की कवायद अपने दूसरे दौर में पहुंच गई है।

सोमैया ने आरोप लगाया कि नोएडा में औद्योगिक विकास के नाम पर किसानों की जमीन लेकर उन्हें फार्म हाउस के लिये आवंटित किया जा रहा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शाही ने पेट्रोल की कीमतों में हाल में हुई बढ़ोत्तरी के खिलाफ बसपा के राज्यव्यापी प्रदर्शन को छलावा करार देते हुए कहा कि बसपा के केन्द्र सरकार को बगैर शर्त समर्थन देने से जाहिर होता है कि वह और सपा दोनों ही पेट्रोल के दामों में वृद्धि के बराबर के भागीदार हैं।

मायावती ने डीएसपी से कराई जूतियां साफ

आपने मुहावरा सुना होगा मियां की जूती मियां के सिर. लेकिन जब चापलूसी अपनी हदें पार कर जाती है तब इस मुहावरे में बदलाव आता है और इंसान किसी की भी जूती अपने सिर-माथे करने को तैयार हो जाता है.

खबर औरैया की है, जहां उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती हेलीकॉप्टर से उतरीं तो उनकी जूती पर धूल की परत चढ़ गई. फिर क्या था उनकी सुरक्षा में तैनात अधिकारी ने जेब से रुमाल निकाला और मैडम की जूतियों की सफाई कर दी.मैडम को भी कोई फर्क नहीं पड़ा.

वे अपनी जूतियां साफ कराती रहीं. पदम सिंह डीएसपी हैं और 1994 से मायावती सी सुरक्षा में तैनात हैं. खास बात ये कि पदम सिंह को उत्कृष्ट सेवा मेडल भी मिला हुआ है. ये अलग बात है कि उस सेवा मेडल से इस सेवा-भाव का कोई ताल-मेल नहीं दिखाई पड़ता.

वरुण गांधी पर मायावती सरकार ने मुकदमा चलाने की इजाजत दी

यूपी सरकार ने बीजेपी के युवा नेता और सांसद वरुण गांधी के खिलाफ भड़काऊ भाषण मामले में केस चलाने की इजाजत दे दी है। यह जानकारी यूपी के होम सेकेट्ररी दीपक कुमार ने दी है।

गौरतलब है कि 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान वरुण गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र पीलीभीत में एक समुदाय विशेष के खिलाफ कथित रूप से भड़काऊ भाषण दिया था। इस भाषण के चलते वरुण के खिलाफ 30 नवंबर 2009 के पीलीभीत के कोतवाली पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज की गई थी। उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 153, 295, 505(2) के तहत केस दर्ज किया गया था। इस मामले में शुक्रवार को यूपी की मायावती की सरकार ने वरुण के खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाजत दे दी है।

गौरतलब है कि वरुण के उस भाषण पर संघ नेतृत्व ने उन्हें समर्थन दिया। उस भाषण में वरुण ने कथित तौर पर कहा था कि 'अगर हिंदुओं की तरफ कोई हाथ बढ़ा तो मैं उसे काट डालूंगा।'

इस विवादास्पद भाषण की वजह से वरुण की छवि कट्टर हिंदू नेता की बनी. उनके खिलाफ केस चलाने की इजाजत देने के यूपी सरकार के फैसले पर अभी बीजेपी नेताओं की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।

मायावती ने बेच दिए अस्पताल भी...

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर माफियाओं का एकछत्र राज कायम है। स्वास्थ्य सेवाओं से संबध्द सरकारी संस्थाओं और निजी कंपनियों का गठजोड़ इतना सघन हो गया है कि राजधानी लखनऊ में डेंगू से ताबड़तोड़ हुईं कई मौतों के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ को बीमारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को अदालत में तलब करना पड़ा।

चाहे नकली दवाओं का मामला हो या खाद्य पदार्थों में मिलावट का या फिर मलेरिया उन्मूलन हेतु आने वाले करोड़ों के बजट को चट करने का, उत्तार प्रदेश की अव्वलता को कोई चुनौती नहीं दे सकता। जिसने भी चुनौती देने की कोशिश की, उसे रास्ते से हटना पड़ा। कोई पद से गया, कोई कद से गया तो कोई दुनिया से ही चला गया।

प्रदेश में 45 सौ करोड़ रुपये के विभागीय सालाना बजट में जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के बजाय अहम पदों पर बैठे लोगों द्वारा कमीशन हड़पने का खेल खुलेआम चलता है। इस खेल में अगर कोई आदमी दीवार बनता है तो उसे निपटा दिया जाता है, कभी तबादले से तो कभी दूसरे तरीकों से। एक वक्त ऐसा था, जब डीजी हेल्थ के आगे प्रमुख सचिव तक घुटने टेकने को मजबूर हो जाते थे। पल्स पोलियो, शिशु मातृ सुरक्षा, कुष्ठ निवारण, टीकाकरण, जननी सुरक्षा, क्षय रोग उपचार एवं अंधता निवारण जैसी योजनाएं सरकारी बजट की बंदरबांट का जरिया बनी हुई हैं।

प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ। अरविंद कुमार जैन बताते हैं कि जब वह मंत्री थे तो उन्होंने एक बार स्वास्थ्य भवन में छापा मारने की गलती कर दी, जहां से वह बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाकर वापस आ पाए। यही हाल पूर्व मंत्री डॉ। जौहरी का रहा, उन्हें बीच में ही मंत्री पद से रुखसत होना पड़ा। परिवार कल्याण मंत्री देवेंद्र सिंह भोले भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए थे। माफियाओं के गठजोड़ के तार इतने मजबूत हैं कि उनके आगे मंत्री तक खुद को बौना महसूस करते रहे हैं। प्रदेश की चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं की झलक देखने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत किए गए एक ऑपरेशन की बानगी ही काफी है। मिशन के तहत कानपुर देहात में एक पुरुष की बच्चेदानी निकालने के नाम पर भुगतान ले लिया गया। अधिकारियों ने इस भुगतान को खुशी-खुशी पास भी कर दिया। ऐसे अनेक उदाहरण मौजूद हैं, लेकिन कार्यवाही करे भी तो कौन? जब आका ही पूरे खेल में शामिल हों तो फिर शिकायत किससे की जाए?

हाल में सीबीआई ने दवा के नाम पर जहर देने वाले लोगों का भंडाफोड़ करके राज्य सरकार से दवा आपूर्ति करने वाली संबंधित फर्म के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की अनुमति मांगी है। सीबीआई सूत्रों के अनुसार, इस फर्म के राजनीतिक रिश्तों के भी पुख्ता सबूत मिल चुके हैं। यह फर्म काफी समय से सरकारी अस्पतालों में घटिया दवाओं की आपूर्ति कर लोगों के जीवन से खिलवाड़ करती रही है। इनमें जीवनरक्षक दवाएं भी शामिल हैं। सीबीआई द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए एक पत्र मंि इस मामले में मुकदमा दर्ज कराने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है। गृह एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिवों को भी इस पत्र की प्रतिलिपि भेजी गई है, ताकि वे जान सकें कि राज्य में किस तरह खुलेआम जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, मुख्य सचिव को भेजे गए इस पत्र में सीबीआई ने राज्य में हो रहे दवा घोटाले का पूरा जिक्र किया है। केंद्र सरकार को भी पश्चिमी उत्तार प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में घटिया दवाएं दिए जाने की शिकायतें मिली थीं। इस आधार पर मेरठ, गाजियाबाद, अलीगढ़, सहारनपुर, रामपुर, बरेली एवं शाहजहांपुर आदि जिलों के सरकारी अस्पतालों में छापे मारे गए। वहां दी जा रही दवाओं के नमूने लिए गए, जिनकी जांच कोलकाता स्थित सरकारी लैब में कराई गई। जांच में पाया गया कि एक फर्म विशेष द्वारा सरकारी अस्पतालों में आपूर्ति की गई दवाएं मानक के अनुरूप नहीं हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद सीबीआई ने मेरठ स्थित उस फर्म विशेष पर अपनी नजरें गड़ाईं। पता चला कि वह राज्य के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति करने वाली प्रमुख फर्मों में शामिल है।

इस फर्म के साथ विभिन्न राजनीतिक हस्तियों, विभागीय अधिकारियों एवं डॉक्टरों के गठजोड़ के भी तमाम सबूत सीबीआई के हाथ लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, शासन में उक्त फर्म के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है।

यहां यह जान लेना जरूरी है कि प्रदेश में 45 सौ करोड़ रुपये के विभागीय सालाना बजट में जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के बजाय अहम पदों पर बैठे लोगों द्वारा कमीशन हड़पने का खेल खुलेआम चलता है। इस खेल में अगर कोई आदमी दीवार बनता है तो उसे निपटा दिया जाता है, कभी तबादले से तो कभी वक्त ऐसा था, जब डीजी हेल्थ के आगे प्रमुख सचिव तक घुटने टेकने को मजबूर हो जाते थे।

पल्स पोलियो, शिशु मातृ सुरक्षा, कुष्ठ निवारण, टीकाकरण, जननी सुरक्षा, क्षय रोग उपचार एवं अंधता निवारण जैसी योजनाएं सरकारी बजट की बंदरबांट का जरिया बनी हुई हैं। वर्ष 2000 में परिवार कल्याण विभाग के पूर्व महानिदेशक डॉ। बच्ची लाल की हत्या का कारण उनका इस पद पर पहुंचना ही था। वह भविष्य में डीजी हेल्थ बनने वाले थे। इस हत्या में एक वर्तमान माफिया सांसद का नाम पुलिस र्फ उद्योगपति और ठेकेदार ही भूमिका अदा करते थे, लेकिन माफियाओं के खूनी खेल ने स्वास्थ्य विभाग के रंग और ढंग ही बदल दिए।

निर्माण कार्यों की निविदाएं तय करने और ठेका पाने की जोड़तोड़ राजधानी लखनऊ में होने लगी। निर्माण कार्यों हेतु मिलने वाले अरबों के बजट के लालच में माफियाओं ने इस विभाग में अपना डेरा डाल दिया। परिणामस्वरूप अनेक चिकित्सालयों का निर्माण मानक के विपरीत हुआ। कई जगह आईसीयू सहित अनेक मशीनें बेवजह खरीद ली गईं अथवा आईसीयू बना दिया गया, लेकिन डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं की गई। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचमए) के तहत मिले तीन हजार करोड़ रुपये पर सबकी निगाहें हैं। परिवार कल्याण के नाम पर जिलेवार करीब 15 से 30 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसके लिए शासन की नई व्यवस्था से माफियावाद को बढ़ावा मिलेगा।

सीएमओ-परिवार कल्याण को सीधे चेक से भुगतान, आपूर्ति एवं निर्माण के ठेके देने और संविदा चिकित्सकों, नर्सों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति आदि का अधिकार देना विभागीय चिकित्सकों भी हजम नहीं हो रहा है। सीएमओ के समानांतर सृजित सीएमओ- परिवार कल्याण पद के खिलाफ प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ अदालत चला गया है। संघ के अध्यक्ष डॉ। यू एन राय का कहना है कि वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए भुगतान चेक पर दो अधिकारियों के हस्ताक्षर अवश्य होने चाहिए। उधर सीएमओ-परिवार कल्याण डॉ। विनोद कुमार आर्या के हत्यारों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने विभाग के कई अहम दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं।

उन कर्मचारियों का भी लेखा-जोखा हासिल किया जा रहा है, जो सीएमओ के करीब रहते थे। पता चला है कि अंधता निवारण योजना के तहत 53 लाख के टेंडर के अलावा किसी भी ठेके का मामला मौजूदा समय में नहीं था। यही टेंडर पाने के लिए ठेकेदारों में जोर आजमाइश चल रही थी। डॉ। आर्या की नियुक्ति चार महीने पहले ही बतौर जिला परियोजना अधिकारी, परिवार कल्याण (डीपीओ) हुई थी। एक माह पहले ही डीपीओ का पद सीएमओ-परिवार कल्याण में तब्दील हुआ था। तबसे राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य उनके पास थे। मूल रूप से शाहजहांपुर निवासी डॉ। आर्या के करियर पीएमएस से 1987 में शुरू हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, उनके कामों से जुड़ा लगभग तीस करोड़ रुपये का बजट हाल में जारी हुआ था।
बीते दस वर्षों के दौरान सरकारी ठेके हथियाने को लेकर एक दर्जन से ज्यादा हत्याएं हुईं। राजधानी लखनऊ में डॉ। आर्या की हत्या के तुरंत बाद बहराइच में ठेकेदारी को लेकर एक अवर अभियंता पर जानलेवा हमला हो गया। सरकारी ठेकों के चक्कर में अब तक कई अधिकारी अपनी जान गवां चुके हैं।एस के मिश्रा जल निगम सीतापुर में मुख्य अभियंता थे। 2001 में लखनऊ में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। 6 जुलाई 2003 को मुरादाबाद में लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता अनवर मेंहदी रिजवी की हत्या हो गई। सोनभद्र में इसी विभाग के एक और सहायक अभियंता एस आर चौधरी 28 दिसंबर 2004 को अपनी जान गवां बैठे। इसी प्रकार 23-24 दिसंबर 2008 की रात अधिशासी अभियंता औरैया मनोज कुमार गुप्ता की हत्या कर दी गई। 2 अगस्त 2009 को गोरखपुर में सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता मनोज कुमार सिंह की हत्या हो गई। 2009 में ही सरयू नहर खंड-3 बलरामपुर के सहायक अभियंता रूप चंद्र भास्कर की हत्या हुई। इसी तरह अधिशासी अभियंता जी एस यादव भी मौत के घाट उतार दिए गए।

बाबा रामदेव से घबराई मायावती, नहीं दी सभा की अनुमति

योग शिविर के माध्यम से भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम में निकले योग गुरु बाबा रामदेव की सभाएं अब उत्तरप्रदेश की मायावती सरकार को भी खलने लगी हैं। उनकी सोमवार को महाराजगंज में प्रस्तावित सभा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। महाराजगंज जिला प्रशासन ने उनके योग शिविर की वीडियोग्राफी कराने के भी आदेश दिए हैं। उधर, खुद बाबा रामदेव ने शनिवार को बस्ती में कहा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर देश की जनता उनके साथ है। महराजगंज के जिलाधिकारी विनय श्रीवास्तव ने बताया कि निषेधाज्ञा लगी होने के कारण बाबा रामदेव की सभा को अनुमति नहीं दी गई है।

योग गुरु को सोमवार को महाराजगंज के जवाहरलाल नेहरू पीजी कॉलेज के योग शिविर में रहना है। इसके बाद सिसवा बाजार के महात्मा गांधी इंटर कॉलेज में सभा होनी थी। जिलाधिकारी ने योग शिविर की वीडियोग्राफी का कोई ठोस कारण नहीं बताया है। बसपा प्रमुख और उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने भी 17 मार्च को पार्टी के 25 साल पूरे होने पर लखनऊ की एक आमसभा में बाबा रामदेव का नाम लिए बिना उनकी आलोना की थी। उन्होंने कहा था, ‘एक बाबा है जो लोगों को कसरत सिखाता है तथा राजनीति में भी आना चाहता है।’

एक अरब जनता हमारे साथ

उत्तरप्रदेश के बस्ती जिले में बाबा रामदेव ने शनिवार को कहा कि देश की एक अरब से ज्यादा जनता इस मुहिम में उनके साथ है। जल्द ही विदेशी बैंकों में जमा करोड़ों लाख रुपए का काला धन देश में वापस लाने का अभियान शुरू किया जाएगा। वे सुबह किसान डिग्री कॉलेज में दो घंटे तक योग और प्राणायाम की शिक्षा देने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे।

उत्तरप्रदेश सरकार कर रही मर रहे शख्स के साथ मजाक - इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार की उस नीति को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें खेती के लिए कर्ज लेकर चुकाने में नाकाम रहे किसानों से 10 फीसदी भुगतान शुल्क वसूलने का प्रावधान था

न्यायालय ने इस नीति को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह सामाजिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है और एक ‘मर रहे शख्स के साथ मजाक’ सरीखा है ।

आदेश पारित करते हुए न्यायमूर्ति एस यू खान ने कहा कि ऐसी नीति, यदि यह कानून के मुताबिक ही क्यों न हों, सामाजिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है और ऐसे उपायों से बचने के लिए सरकार को एक कल्याणकारी राज्य का मुखौटा उतारना होगा।

मूल्य वृद्धि के लिये सोनिया गाँधी जिम्मेदार - मायावती

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने महंगाई रोकने के लिये राज्य सरकारों को केन्द्र के बराबर जिम्मेदार बताने सम्बन्धी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बयान पर आज यहां कहा कि प्रदेश सरकार तो केन्द्र द्वारा तैयार की गई राष्ट्रीय नीति पर ही अमल कर रही है।

मायावती ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में पूछे गए एक सवाल पर कहा ‘‘जब राष्ट्रीय स्तर पर खाद्यान्न या अन्य चीजों की कीमतों से सम्बन्धित नीति बनाई जाती है तो उसमें राज्यों की कोई भूमिका नहीं होती है।’’ उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रीय स्तर पर कोई नीति बनाई जाती है तो राज्यों को उस पर अमल करना ही होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मूल्य वृद्धि के लिये केन्द्र सरकार ही पूरी तरह जिम्मेदार होती है।’’ उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को महंगाई पर नियंत्रण के लिये कोई नीति बनानी चाहिये।

उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार की आर्थिक नीतियां बेरोजगारों और गरीबों के हित में नहीं हैं। उसकी नीतियां पूंजीपतियों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं जिससे महंगाई बढ़ती है ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबी की रेखा से नीचे :बीपीएल: जीवन-यापन करने वाले लोगों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने अपने सीमित संसाधनों से उनके कल्याण के लिये योजना शुरू की है।

ममता के बाद माया भैनजी भी नक्सलियों के समर्थन में

बसपा सुप्रीमो और उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है कि जिन्हें रोज़गार नहीं मिला वे लोग आज नक्सली बन गए हैं। आज़ादी के बाद अब तक केंद्र और राज्य सत्ता में जो भी पार्टियां रहीं उन्होंने निचले तबके के लोगों के लिए कुछ भी नहीं किया। इस कारण आज भी बिहार के गांव में गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी है।

मायावती आज मुजफ्फरपुर जिले के मडवन विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी सभा को संबोधित कर रही थीं। मायावती ने कहा कि आज देश में बहुजन समाज की सामाजिक और आर्थिक हालत काफी ख़राब है। इनकी चिंता किसी को नहीं। इनकी हालत में कोई सुधर भी नहीं हो रहा। जो थोडा बहुत आरक्षण बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के प्रयासों से मिला है, उसे भी आज लोग ख़त्म करने पर तुले हुए हैं।

मायावती ने कहा कि आज तक किसी पार्टी ने बहुजन के हित में काम नहीं किया इसलिए बिहार के लोगों को एक बार बीएसपी को वोट देना चाहिए। ताकि उनकी हालत में सुधार आ सके। मायावती ने कहा कि बसपा आज बिहार में लगभग सभी सीटों पर अकेले लड़ रही है। इस कारण लोगों को सहयोग पार्टी चाह रही है।

मायावती ने कहा कि आज बिहार में किसान और कारोबारी काफी दुखी हैं। अगर बसपा की सरकार बनी तो सबके चेहरे पर खुशियां होंगी। इसके बाद मायावती ने पूर्णिया जिले के धमदाहा में भी एक चुनावी सभा को संबोधित किया।

नहीं रुकेगा मायावती का हाथी

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती को राहत देते हुए चुनाव आयोग ने उनकी पार्टी के चुनाव चिन्हहाथीपर रोक लगाने और उन्हें चुनाव लड़ने से आयोग्य ठहराये जाने की मांग को खारिज कर दिया

आयोग ने इस बारे में की गई मांग को ठुकराते हुए अपने फैसले में कहा कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त कदम उठायेगा और उपाय करेगा कि मायावती की मूर्तियों और उनकी पार्टी बसपा का चुनाव चिन्ह ‘हाथी’ चुनावों के दौरान किसी भी तरह से बराबरी का अवसर मुहैया कराने में अवरोध पैदा न करने पाये ।

आयोग ने बसपा के चुनाव चिन्ह हाथी को जब्त करने की मांग संबंधी याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया है । आयोग का यह फैसला पिछले साल जुलाई में दाखिल की गई याचिकाओं पर आया है जिसमें अधिवक्ताओं रविकांत और सुकुमार ने कहा था कि लखनउ और नोएडा में हाथी और मायावती की मूर्तियां सरकारी पैसा खर्च करके लगाई गयी है ।

याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि पार्टी के चुनाव चिन्ह पर रोक लगाकर उसके स्थान पर उसे दूसरा चुनाव चिन्ह आवंटित किया जाये और साथ ही मायावती को चुनाव लड़ने से आयोग्य ठहराया जाये क्योंकि उनकी अनेक मूर्तियां चुनाव के दौरान उनके विरोधियों के लिए असमान अवसर पैदा करेगी ।

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