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अटल योजनाओं को 6 राज्‍यों के 13 नगरों में 495 करोड़ रुपए मंजूर


अटल मिशन योजनाओं को 6 राज्‍यों के 13 नगरों में 495 करोड़ रुपए के परिव्‍यय के साथ 2015-16 के लिए मंजूरी मिली 

केंद्र सरकार 425 करोड़ रुपए की सहायता मुहैया कराएगी 

असम मूलभूत बुनियादी ढांचे में 186 करोड़ रुपए ; जम्‍मू-कश्‍मीर 171 करोड़ रुपए, गोवा 59 करोड़ रुपए, त्रिपुरा 37 करोड़ रुपए, मेघालय 23 करोड़ रुपए, पुदुचेरी 18.97 करोड़ रुपए निवेश करेगा 

अभी तक 483 नगरों के लिए मूलभूत बुनियादी ढांचे में 20,491 करोड़ रुपए के निवेश को मंजूरी मिली 

त्रिपुरा ने शहरी क्षेत्रों में स्‍वच्‍छ भारत अभियान को क्रियान्‍वित करने पर सहमति जताई 

असम को शौचालयों के निर्माण में तेजी लाने को कहा गया 

शहरी विकास मंत्रालय ने आज 2015-16 के लिए अटल कायाकल्‍प एवं शहरी रूपांतरण कार्य योजना मिशन (अमृत) के तहत 6 राज्‍यों के 13 नगरों में जलापूर्ति, सीवरेज नेटवर्क एवं सेप्टेज प्रबंधन, तूफान जल निकासी, शहरी परिवहन एवं हरित स्थलों के प्रावधान के लिए 495.11 करोड़ रुपए के निवेश को मंजूरी दे दी। शहरी विकास सचिव श्री मधुसूदन प्रसाद की अध्‍यक्षता में एक अंत: मंत्रीस्तरीय शीर्ष कमेटी में गुवाहाटी, जम्‍मू, श्रीनगर, पणजी, शिलौंग, अगरतल्‍ला और पुदुचेरी समेत 13 नगरों की निवेश योजनाओं को मंजूरी दे दी है। 

495.11 करोड़ रुपए की कुल परियोजना लागत में से केंद्र सरकार 425 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान करेगी। 

राज्‍यवार मंजूरी प्राप्‍त निवेश इस प्रकार हैं: असम 186.27 करोड़ रुपए, जम्‍मू-कश्‍मीर 171 करोड़ रुपए, गोवा 59.44 करोड़ रुपए, त्रिपुरा 36.62 करोड़ रुपए, मेघालय 22.81 करोड़ रुपए और पुदुचेरी 18.97 करोड़ रुपए। 

केंद्र सरकार पूर्वोत्‍तर राज्‍यों एवं जम्मू-कश्‍मीर के संदर्भ में योजना लागतों का 90 प्रतिशत, पुदुचेरी के लिए 100 प्रतिशत एवं गोवा के लिए लागत का 50 प्रतिशत वहन करेगी। 

इसी के अनुरूप 2015-16 के लिए असम को 169.34 करोड़ रुपए, त्रिपुरा 32.96 करोड़ रुपए, मेघालय 20.53 करोड़ रुपए, जम्‍मू-कश्‍मीर 153.90 करोड़ रुपए, गोवा 29.72 करोड़ रुपए और पुदुचेरी 18.97 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता प्रदान की जाएगी। 

अटल मिशन का लक्ष्‍य जलापूर्ति और सीवर कनेक्‍शनों, जलापूर्ति बढ़ाने, सीवरेज नेटवर्क सेवाओं तथा हरित स्‍थलों को बढ़ावा देने के अतिरिक्‍त तूफान जल निकासी के साथ 500 मिशन नगरों के सभी शहरी परिवारों में ये सुविधाएं सुनिश्‍चित करना है। 

मंजूरी प्राप्‍त कुल निवेशों में से 201.86 करोड़ रुपए जलापूर्ति बढ़ाने पर, 116.10 करोड़ रुपए सीवरेज नेटवर्क को विस्‍तारित करने एवं सेप्‍टेज प्रबंधन पर, 85 करोड़ रुपए गैर-मोटर परिवहन के साथ शहरी परिवहन को बढ़ाने पर, 77.37 करोड़ रुपए तूफान जल निकासी परियोजनाओं पर एवं 14.69 करोड़ रुपए हरेक स्‍थल मुहैया कराने पर खर्च किए जाएंगे। 

जम्‍मू एवं कश्‍मीर में जम्‍मू में 22.50 करोड़ रुपए, अनंतनाग 15.00 करोड़ रुपए एवं श्रीनगर में 13 करोड़ रुपए समेत सीवरेज एवं सेप्‍टेज प्रबंधन पर 50.50 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। श्रीनगर में 50 करोड़ रुपए, जम्‍मू में 22 करोड़ रुपए एवं अनंतनाग में 5.00 करोड़ रुपए समेत जल निकासी सुविधाएं प्रदान करने पर 77 करोड़ रुपए का व्‍यय किया जाएगा। श्रीनगर में 15 करोड़ रुपए, जम्‍मू में 13 करोड़ रुपए एवं लेह में 5 करोड़ रुपए के साथ शहरी परिवहन को बेहतर बनाया जाएगा। श्रीनगर, जम्‍मू, अनंतनाग एवं लेह में 5.50 करोड़ रुपए की लागत से हरित स्‍थलों के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।

असम में नागोन में 51.79 करोड़ रुपए की लागत से, डिब्रूगढ में 46.51 करोड़ रुपए एवं सिलचर में 43.20 करोड़ रुपए की लागत से जलापूर्ति को बढ़ाया जाएगा। पहले निकासी परियोजनाओं पर राज्‍य सरकार द्वारा अन्‍य 40 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का प्रस्‍ताव था, इसे अब गुवाहाटी समेत चार मिशन नगरों में जलापूर्ति बढ़ाने एवं सीवरेज नेटवर्क पर खर्च किया जाएगा। इन तीन नगरों एवं गुवाहाटी में 4.73 करोड़ रुपए की लागत से हरित स्‍थलों का विकास किया जाएगा। 

मेघालय के शिलौंग में 22.22 करोड़ रुपए की लागत से सीवरेज एवं सेप्‍टेज परियोजना शुरू की जाएगी एवं 59 लाख की लागत से हरित स्‍थलों का विकास किया जाएगा। 

त्रिपुरा के अगरतल्‍ला में जलापूर्ति को बेहतर बनाने पर 32.50 करोड़ रुपए, शहरी परिवहन पर 2.12 करोड़ रुपए एवं हरित स्‍थलों को बेहतर बनाने पर 2.00 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। 

गोवा के पणजी में पेडेस्‍ट्रानाइजेशन ऑफ सिटी स्‍क्‍वायर, फुटपाथों, साइडवॉक्‍स एवं वॉकवेज जैसी शहरी परिवहन परियोजनाओं को 49.97 करोड़ रुपए एवं 7.38 करोड़ रुपए की लागत से सीवरेज एवं सेप्‍टेज प्रबंधन कार्य, 36 लाख रुपए प्रत्‍येक की लागत से जल निकासी एवं जलापूर्ति परियोजनाओं एवं हरित स्‍थलों के विकास पर 1.40 करोड रुपए खर्च किये जाएंगे। 

पुद्दुचेरी में जलापूर्ति को 5.76 करोड रुपये की लागत से एवं ओलगरेट 6.7 करोड रुपये की लागत से बेहतर बनाया जाएगा। ये दोनों शहरी स्थानीय निकाय सीवरेज परियोजनाओं पर 3 – 3 करोड रुपये खर्च करेंगे। इन शहरी क्षेत्रों में हरित स्थल मुहैया कराने पर 47 लाख रुपये की राशि खर्च की जाएगी। 

त्रिपुरा सरकार ने आखिरकार राज्य में शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान को क्रियान्वित करने पर सहमति जता दी है। यह सूचना राज्य सरकार के प्रमुख सचिव श्री संजय राकेश ने शहरी विकास मंत्रालय को प्रेषित कर दी है। राज्य सरकार का मानना था कि केंद्र सरकार द्वारा प्रति शौचालय 4 हजार रुपये की मुहैया करायी जा रही केंद्रीय सहायता पर्याप्त नहीं है। श्री राकेश ने आज जानकारी दी कि राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों में एकल परिवार शौचालयों के निर्माण के लिए 12 हजार रुपये प्रत्येक की सहायता देने का फैसला किया है। 

शीर्ष समिति ने आज असम में शौचालयों के निर्माण में धीमी प्रगति पर चिंता जताई और राज्य सरकार से इसमें तेजी लाने का आग्रह किया। 

इन मंजूरियों के साथ, शहरी विकास मंत्रालय ने अभी तक 20,491 करोड़ रुपए के निवेश से 26 राज्‍यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 483 मिशन नगरों में पानी के नल के प्रावधान समेत जलापूर्ति बढ़ाने, एकल परिवारों में सीवर कनेक्शन के प्रावधान समेत सीवरेज नेटवर्क सेवाओं को विस्तारित करने, तूफान जल निकासी, शहरी परिवहन एवं हरित स्थलों के विकास के लिए 2015-16 के लिए अटल मिशन कार्य योजनाओं को मंजूरी दे दी है।

'उदय’ योजना से जुड़ा बिहार, 9,000 करोड़ रुपये का होगा फायदा


भारत सरकार, बिहार राज्य और बिहार की डिस्कॉम कंपनियों (नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रब्यूशन कंपनी लिमिटेड और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रब्यूशन कंपनी लिमिटेड) ने डिस्कॉम्स के परिचालन और वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए आज यहां उदय-‘उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना’ के अंतर्गत समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल की गरिमामयी मौजूदगी में हुआ। 

देश की वितरण कंपनियां कर्ज के भारी बोझ से जूझ रही हैं। 30 सितंबर, 2015 तक देश की डिस्कॉम्स पर कुल 4.3 लाख करोड़ रुपए का कर्ज था। इन कंपनियों को कर्ज के बोझ से राहत देने और इनके प्रदर्शन में सुधार करने के लिए भारत सरकार ने 20 नवंबर, 2015 को उदय योजना शुरू की थी। इससे पहले इससे संबंधित पक्षों मुख्य रूप से राज्य सरकारों, डिस्कॉम्स, ऋणदाताओं आदि के बीच लंबा विचार-विमर्श हुआ था। उदय का उद्देश्य टिकाऊ विकास के लिए वित्तीय स्थायित्व और परिचालन क्षमताओं में सुधार के द्वारा कर्ज में डूबी वितरण कंपनियों के लिए एक स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है। 

इस प्रकार बिहार राज्य के बिजली क्षेत्र के हालात में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उदय योजना को स्वीकार करने वाला छठा राज्य बन गया है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड पहले ही डिस्कॉम्स के परिचालन और वित्तीय सुधार के लिए उदय के अंतर्गत एमओयू पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। समझौता ज्ञापन पर बिहार के हस्ताक्षर करने के साथ ही डिस्कॉम्स के लगभग 33 फीसदी कर्ज का पुनर्गठन कर दिया जाएगा, जो लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपए है। गुजरात ने भी राज्य की डिस्कॉम्स की वित्तीय स्थिति पर विचार करते हुए परिचालन में सुधार के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर कर दिए। 

बिहार सरकार ने उदय के अंतर्गत एमओयू पर हस्ताक्षर करके डिस्कॉम्स की वित्‍तीय सेहत में सुधार लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है और डिस्कॉम्स के कर्ज को अपने ऊपर लेने पर सहमति जाहिर की है। जैसा कि योजना में उल्‍लेख है बिहार सरकार डिस्कॉम के 2,332 करोड़ रुपए के कर्ज को अपने ऊपर लेगी, जो डिस्कॉम के 30.03.2015 तक के कुल 3,110 करोड़ रुपये के बकाया कर्ज का 75 फीसदी है। योजना में बाकी 778 करोड़ रुपए के कर्ज का पुनर्मूल्यांकन (री-प्राइस) या राज्य गारंटेड डिस्कॉम बॉन्ड के रूप में जारी करने की व्यवस्था है। ऐसा मौजूदा औसत ब्याज दर की तुलना में 3 फीसदी कम कूपन दर पर होगा। 

उदय में न सिर्फ डिस्कॉम की वित्तीय सेहत में सुधार पर जोर दिया गया है, बल्कि उनकी परिचालन क्षमताओं में सुधार पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। डिस्कॉम्स के टिकाऊ विकास के क्रम में बिहार राज्य और डिस्कॉम्स अनिवार्य फीडर और डिस्कॉम ट्रांसफार्मर मीटरिंग, उपभोक्ता इंडेक्सिंग और नुकसान की जीआईएस मैपिंग, ट्रांसफार्मर अपग्रेड करना या बदलाव, मीटर आदि बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटरिंग के माध्यम से परिचालन क्षमता में सुधार करेंगे। इससे बिजली की आपूर्ति की लागत और वास्तविक कीमत के अंतर को खत्म किया जाएगा, साथ ही पारेषण हानि और एटीएंडसी हानियों में भी कमी लाई जाएगी। एटीएंडसी हानियों और पारेषण हानियों में कमी से क्रमशः 15 प्रतिशत और 4 प्रतिशत अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है, जो लगभग 6,650 करोड़ रुपये के बराबर होगा। 

वित्तीय और परिचालन क्षमताओं में सुधार के साथ डिस्कॉम्स की रेटिंग में सुधार होगा, जिससे भविष्य की निवेश की जरूरतों को पूरा करने के लिए सस्ता फंड जुटाने में मदद मिलेगी। इससे डिस्कॉम्स की ब्याज लागत के रूप में लगभग 80 करोड़ रुपए की बचत होने का अनुमान है। 

इसके साथ ही राज्य सरकार और डिस्कॉम्स द्वारा डिस्कॉम्स की परिचालन क्षमताओं में सुधार के लिए प्रयास किए जाएंगे, और बिजली की आपूर्ति की लागत में कमी आएगी, केंद्र सरकार भी राज्य में बिजली से संबंधित बुनियादी ढांचे में सुधार और बिजली की लागत में कमी लाने के लिए डिस्कॉम्स और राज्य सरकार को रियायतें देगी। डीडीयूजीजेवाई, आईपीडीएस, पावर सेक्टर डेवलपमेंट फंड या एमओपी और एमएनआरई की अन्य योजनाओं, जैसी केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से पहले ही राज्य में बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए कोष उपलब्ध कराया जा रहा है और अगर राज्य/डिस्कॉम्स योजना के लक्ष्यों को हासिल करने में कामयाब रहते हैं तो आगे इन योजनाओं के अंतर्गत अतिरिक्त धनराशि या प्राथमिकता वाला वित्‍तपोषण भी दिया जाएगा। राज्य को अधिसूचित कीमतों पर अतिरिक्त कोयला देकर और ज्यादा क्षमता के इस्तेमाल, एनटीपीसी और अन्य सीपीएसयू से सस्ती बिजली के माध्यम से समर्थन दिया जाएगा। कोयले की अदला-बदली (स्वैपिंग), कोयले के सही इस्तेमाल, कोयला ग्रेड स्लिपेज में सुधार, धुले कोयले की 100 फीसदी उपलब्धता से बिजली की लागत में और कमी लाने में मदद मिलेगी। राज्य को कोयला सुधारों से लगभग 1,086 करोड़ रुपये का फायदा होगा। 

उदय में पीएटी (परफॉर्म, अचीव, ट्रेड) के माध्यम कम बिजली की खपत वाले एलईडी बल्बों, कृषि पंपों, पंखों और एयर कंडीशनरों और कुशल औद्योगिक उपकरणों की मांग बढ़ाई जाएगी, जिससे पीक लोड, फ्लैटन लोड कर्व घटाने में सहायता मिलने से बिहार में बिजली की खपत में कमी लाने में मदद मिलेगी। इससे लगभग 720 करोड़ रुपये का फायदा होने का अनुमान है। एमओयू पर हस्ताक्षर से आखिरकार बिहार की जनता को फायदा होगा। डिस्कॉम्स से बिजली की ज्यादा मांग का मतलब उत्पादन इकाइयों का ज्यादा पीएलएफ होगा और इस प्रकार प्रति यूनिट बिजली की लागत कम होगी, जिसका फायदा उपभोक्ताओं को होगा। डिस्कॉम्स एटीएंडसी हानियों में कमी के साथ क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति बढ़ा सकेंगी। इस योजना से बिहार के लगभग 1,152 गांवों और 160.60 लाख परिवारों को बिजली उपलब्ध कराना आसान हो जाएगा, जो अभी तक बिजली से वंचित हैं। बिजली से वंचित गांवों या घरों को 24*7 बिजली की उपब्धता होने से अर्थव्यवस्था व उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार की संभावनाएं पैदा होंगी और बिहार भारत के अग्रणी औद्योगिक राज्य के तौर पर विकसित होगा। 

इस प्रकार उदय योजना में भागीदारी से राज्य को ब्याज लागत, एटीएंडसी और पारेषण हानियों में कमी, ऊर्जा कुशलता, कोयला सुधारों आदि से लगभग 9,000 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ होगा। 

उदय डिस्कॉम्स की वित्तीय आत्‍मनिर्भरता और परिचालन सेहत में सुधार की दिशा में किया जा रहा प्रयास है, जिससे ये शत-प्रतिशत ग्रामीण बिजलीकरण और सभी को 24X7 बिजली उपलब्ध कराने के माध्‍यम से किफायती दरों पर पर्याप्‍त बिजली की आपूर्ति करने में सक्षम होगीं। 

स्वच्छ पर्यटन मोबाइल एप्प लॉन्च किया गया


केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति(स्वतंत्र प्रभार) तथा नागर विमानन राज्य मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने स्वच्छ पर्यटन मोबाइल एप्प लॉन्च किया । यह परियोजना भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा डीईजीएस तथा एनआईसी के माध्यम से लागू की जा रही है। यह मोबाइल एप्प स्वच्छ पर्यटन के रूप में गूगल सर्च इंजन पर उपलब्ध है । शुरु में यह एनड्रॉयड फोन पर उपलब्ध है और शीघ्र ही यह ऐप्पल तथा माइक्रोसाफ्ट पर भी उपलब्ध होगा । इस एप्प की मॉनिटरिंग पर्यटन मंत्रालय में स्वच्छ भारत मिशन की परियोजना निगरानी इकाई द्वारा की जाएगी ।

इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि वैसे स्मारकों को स्वच्छ बनाए रखने में साधारण जन और पर्यटकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है लेकिन पर्यटन मंत्रालय ने जन साधारण को मदद देने का निर्णय़ लिया ताकि लोग पर्यटन क्षेत्रों के आस –पास के क्षेत्रों में गंदगी की शिकायत कर सकें । इसीलिए पर्यटन मंत्रालय यह मोबाइल एप्प लांच कर रहा है । उन्होंने कहा कि जब तक स्वच्छता के काम में सभी हितधारक योगदान नहीं करते तब तक ऐसी परियोजना सफल नहीं होगी ।

पर्यटन और संस्कृति मंत्री ने बताया कि हाल में लॉन्च किए गए टूरिस्ट इंफोलाइन पर रोजाना 18000 जवाब मिल रहे हैं । उन्होंने कहा कि घरेलू पर्यटन की सभावनाएं अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन की तरह अपार हैं।इसीलिए लोगों से जनसाधरण और पर्यटकों से सुझाव मांगे जा रहे हैं ।

पर्यटन सचिव श्री विनोद जुत्सी ने कहा कि 2016 की शुरुआत पर्यटन क्षेत्र में अच्छी खबर के साथ हुई है । इस वर्ष जुलाई-अगस्त में मेगा पर्यटन सम्मेलन आयोजित किए जाने की आशा है । उन्होंने कहा कि पर्यटन तथा संस्कृति मंत्रालय इस मोबाइल एप्प को सफल बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे ।

इस मोबाइल एप्प पर नागरिक गंदे स्थानों के फोटो लेकर अपनी टिप्पणियों के साथ अपलोड कर सकते हैं । इसके बाद यह एप्पीलिकेशन एएसआई के नोडल अधिकारी को एक एसएमएस भेजता है और बताए गए स्थान से गंदगी हटाई जाती है ।

क्रम संख्या
स्वच्छ पर्यटन मोबाइल एप्प में कवर कए जाने वाले 25 स्मारकों की सूची
1.
लेह पैलेस, लेह, जम्मू-कश्मीर
14.
जागेश्वर मंदिर, उत्तराखंड
2.
हुमायूं का मकबरा, नई दिल्ली

15.
श्रावास्ति, उत्तर प्रदेश
3.
कुतुब मिनार परिसर , नई दिल्ली
16.
सारनाथ, उत्तर प्रदेश

4.
लाल किला, दिल्ली

17.
वैशाली-कोल्हुआ, बिहार
5.
हजारद्वारी पैलेस, मुर्शीदाबाद, पश्चिम बंगाल
18.
खजुराहो पश्चिमी समूह परिसर, मध्य प्रदेश

6.
शोर मंदिर, महाबलिपुरम, तमिलनाडु
19.
जहाज महल परिसर, मांडू, मध्य प्रदेश

7.
एलीफैन्टा गुफा, मुंबई, महाराष्ट्र
20.
मार्तण्ड मंदिर , कश्मीर
8.
ताज महल, आगरा, उत्तर प्रदेश
21.
तंजावूर-बृहदेश्वर मंदिर, तमिलनाडु
9.
कुंभलगढ़ किला, राजस्थान
22.
मंदिर समूह पट्टाडकल, कर्नाटक
10.
रानी की वाव, गुजरात
23.
मसरुर शिला मंदिर, हिमाचल प्रदेश
11.   
फतेहपुर सिकरी, आगरा, उत्तर प्रदेश

24.
रंग घर, सिबसागर, असम
12.
हम्पी, कर्नाटक

25.
कोणार्क मंदिर, ओडिशा
13.
दौलताबाद किला, महाराष्ट्र




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पढ़िए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मोदी जी का ऐतिहासिक भाषण


सभी विद्यार्थी दोस्‍तों और उनके अभिभावकों, यहां के सभी faculty के members, उपस्थित सभी महानुभाव! 

दीक्षांत समारोह में जाने का अवसर पहले भी मिला है। कई स्‍थानों पर जाने का अवसर मिला है लेकिन एक विश्‍वविद्यालय की शताब्‍दी के समय दीक्षांत समारोह में जाने का सौभाग्‍य कुछ और ही होता है। मैं भारत रत्‍न महामना जी के चरणों में वंदन करता हूं कि 100 वर्ष पूर्व जिस बीज उन्‍होंने बोया था वो आज इतना बड़ा विराट, ज्ञान का, विज्ञान का, प्रेरणा का एक वृक्ष बन गया।

दीर्घदृष्‍टा महापुरुष कौन होते हैं, कैसे होते हैं? हमारे कालखंड में हम समकक्ष व्‍यक्ति को कभी कहें कि यह बड़े दीर्घदृष्‍टा है, बड़े visionary है तो ज्‍यादा समझ में नहीं आता है कि यह दीर्घदृष्‍टा क्‍या होता है visionary क्‍या होता है। लेकिन 100 साल पहले महामना जी के इस कार्य को देखें तो पता चलता है कि दीर्घदृष्‍टा किसे कहते हैं, visionary किसे कहते हैं। गुलामी के उस कालखंड में राष्‍ट्र के भावी सपनों को हृदयस्‍थ करना और सिर्फ यह देश कैसा हो, आजाद हिंदुस्‍तान का रूप-रंग क्‍या हो, यह सिर्फ सपने नहीं है लेकिन उन सपनों को पूरा करने के लिए सबसे प्राथमिक आवश्‍यकता क्‍या हो सकती है? और वो है उन सपनों को साकार करे, ऐसे जैसे मानव समुदाय को तैयार करना है। ऐसे सामर्थ्‍यवान, ऐसे समर्पित मानवों की श्रृंखला, शिक्षा और संस्कार के माध्‍यम से ही हो सकती है और उस बात की पूर्ति को करने के लिए महामना जी ने यह विश्‍वविद्यालय का सपना देखा। 
अंग्रेज यहां शासन करते थे, वे भी यूनिवर्सिटियों का निर्माण कर रहे थे। लेकिन ज्‍यादातर presidencies में, चाहे कोलकाता है, मुंबई हो, ऐसे स्‍थान पर ही वो प्रयास करते हैं। अब उस प्रकार से मनुष्‍यों का निर्माण करना चाहते थे, कि जिससे उनका कारोबार लंबे समय तक चलता रहे। महामना जी उन महापुरुषों को तैयार करना चाहते थे कि वे भारत की महान परंपराओं को संजोए हुए, राष्‍ट्र के निर्माण में भारत की आजादी के लिए योग्‍य, सामर्थ्‍य के साथ खड़े रहे और ज्ञान के अधिष्‍ठान पर खड़े रहें। संस्‍कारों की सरिता को लेकर के आगे बढ़े, यह सपना महामना जी ने देखा था। 

जो काम महामना जी ने किया, उसके करीब 15-16 साल के बाद यह काम महात्‍मा गांधी ने गुजरात विद्यापीठ के रूप में किया था। करीब-करीब दोनों देश के लिए कुछ करने वाले नौजवान तैयार करना चाहते थे। लेकिन आज हम देख रहे हैं कि महामना जी ने जिस बीज को बोया था, उसको पूरी शताब्‍दी तक कितने श्रेष्‍ठ महानुभावों ने, कितने समर्पित शिक्षाविदों ने अपना ज्ञान, अपना पुरूषार्थ, अपना पसीना इस धरती पर खपा दिया था। एक प्रकार से जीवन के जीवन खपा दिये, पीढ़ियां खप गई। इन अनगिनत महापुरूषों के पुरूषार्थ का परिणाम है कि आज हम इस विशाल वट-वृक्ष की छाया में ज्ञान अर्जित करने के सौभाग्‍य बने हैं। और इसलिए महामना जी के प्रति आदर के साथ-साथ इस पूरी शताब्‍दी के दरमियान इस महान कार्य को आगे बढ़ाने में जिन-जिन का योगदान है, जिस-जिस प्रकार का योगदान है जिस-जिस समय का योगदान है, उन सभी महानुभवों को मैं आज नमन करता हूं। 

एक शताब्‍दी में लाखों युवक यहां से निकले हैं। इन युवक-युवतियों ने करीब-करीब गत 100 वर्ष में दरमियान जीवन के किसी न किसी क्षेत्र में जा करके अपना योगदान दिया है। कोई डॉक्‍टर बने हुए होंगे, कोई इंजीनियर बने होंगे, कोई टीचर बने होंगे, कोई प्रोफेसर बने होंगे, कोई सिविल सर्विस में गये होंगे, कोई उद्योगकार बने हुए होंगे और भारत में शायद एक कालखंड ऐसा था कि कोई व्‍यक्ति कहीं पर भी पहुंचे, जीवन के किसी भी ऊंचाई पर पहुंचे जिस काम को करता है, उस काम के कारण कितनी ही प्रतिष्‍ठा प्राप्‍त क्‍यों न हो, लेकिन जब वो अपना परिचय करवाता था, तो सीना तानकर के कहता था कि मैं BHU का Student हूं। 

मेरे नौजवान साथियों एक शताब्‍दी तक जिस धरती पर से लाखों नौजवान तैयार हुए हो और वे जहां गये वहां BHU से अपना नाता कभी टूटने नहीं दिया हो, इतना ही नहीं अपने काम की सफलता को भी उन्‍होंने BHU को समर्पित करने में कभी संकोच नहीं किया। यह बहुत कम होता है क्‍योंकि वो जीवन में जब ऊंचाइयां प्राप्‍त करता है तो उसको लगता है कि मैंने पाया है, मेरे पुरुषार्थ से हुआ, मेरी इस खोज के कारण हुआ, मेरे इस Innovation के कारण हुआ। लेकिन ये BHU है कि जिससे 100 साल तक निकले हुए विद्यार्थियों ने एक स्‍वर से कहा है जहां गये वहां कहा है कि यह सब BHU के बदौलत हो रहा है। 

एक संस्‍था की ताकत क्‍या होती है। एक शिक्षाधाम व्‍यक्ति के जीवन को कहां से कहां पहुंचा सकता है और सारी सिद्धियों के बावजूद भी जीवन में BHU हो सके alumni होने का गर्व करता हो, मैं समझता हूं यह बहुत बड़ी बात है, बहुत बड़ी बात है। लेकिन कभी-कभी सवाल होता है कि BHU का विद्यार्थी तो BHU के गौरव प्रदान करता है लेकिन क्‍या भारत के कोने-कोने में, सवा सौ करोड़ देशवासियों के दिल में यह BHU के प्रति वो श्रद्धा भाव पैदा हुआ है क्‍या? वो कौन-सी कार्यशैलियां आई, वो कौन से विचार प्रवाह आये, वो कौन-सी दुविधा आई जिसने इतनी महान परंपरा, महान संस्‍था को हिंदुस्‍तान के जन-जन तक पहुंचाने में कहीं न कहीं संकोच किया है।

आज समय की मांग है कि न सिर्फ हिंदुस्‍तान, दुनिया देखें कि भारत की धरती पर कभी सदियों पहले हम जिस नालंदा, तक्षशिला बल्लभी उसका गर्व करते थे, आने वाले दिनों में हम BHU का भी हिंदुस्‍तानी के नाते गर्व करते हैं। यह भारत की विरासत है, भारत की अमानत है, शताब्दियों के पुरुषार्थ से निकली हुई अमानत है। लक्षाविद लोगों की तपस्‍या का परिणाम है कि आज BHU यहां खड़ा है और इसलिए यह भाव अपनत्‍व, अपनी बातों का, अपनी परंपरा का गौरव करना और हिम्‍मत के साथ करना और दुनिया को सत्‍य समझाने के लिए सामर्थ्‍य के साथ करना, यही तो भारत से दुनिया की अपेक्षा है। 

मैं कभी-कभी सोचता हूं योग। योग, यह कोई नई चीज नहीं है। भारत में सदियों से योग की परंपरा चली आ रही है। सामान्‍य मानविकी व्‍यक्तिगत रूप से योग के आकर्षित भी हुआ है। दुनिया के अलग-अलग कोने में, योग को अलग-अलग रूप में जिज्ञासा से देखा भी गया है। लेकिन हम उस मानसिकता में जीते थे कि कभी हमें लगता नहीं था कि हमारे योग में वह सामर्थ्‍य हैं जो दुनिया को अपना कर सकता है। पिछले साल जब United nation ने योग को अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस के रूप में स्‍वीकार किया। दुनिया के 192 Country उसके साथ जुड़ गये और विश्‍व ने गौरव ज्ञान किया, विश्‍व ने उसके साथ जुड़ने का आनंद लिया। अगर अपने पास जो है उसके प्रति हम गौरव करेंगे तो दुनिया हमारे साथ चलने के लिए तैयार होती हैं। यह विश्‍वास, ज्ञान के अधिष्‍ठान पर जब खड़ा रहता है, हर विचार की कसौटी पर कसा गया होता है, तब उसकी स्‍वीकृति और अधिक बन जाती है। BHU के द्वारा यह निरंतर प्रयास चला आ रहा है। 

आज जिन छात्रों का हमें सम्‍मान करने का अवसर मिला, मैं उनको, उनके परिवार जनों को हृदय से बधाई देता हूं। जिन छात्रों को आज अपनी शिक्षा की पूर्ति के बाद दीक्षांत समारोह में डिग्रियां प्राप्‍त हुई हैं, उन सभी छात्रों का भी मैं हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। यह दीक्षांत समारोह है, हम यह कभी भी मन में न लाएं कि यह शिक्षांत समारोह है। कभी-कभी तो मुझे लगता है दीक्षांत समारोह सही अर्थ में शिक्षा के आरंभ का समारोह होना चाहिए। यह शिक्षा के अंत का समारोह नहीं है और यही दीक्षांत समारोह का सबसे बड़ा संदेश होता है कि हमें अगर जिन्‍दगी में सफलता पानी है, हमें अगर जिन्‍दगी में बदलते युग के साथ अपने आप को समकक्ष बनाए रखना है तो उसकी पहली शर्त होती है – हमारे भीतर का जो विद्यार्थी है वो कभी मुरझा नहीं जाना चाहिए, वो कभी मरना नहीं चाहिए। दुनिया में वो ही इस विशाल जगत को, इस विशाल व्‍यवस्‍था को अनगिनत आयामों को पा सकता है, कुछ मात्रा में पा सकता है जो जीवन के अंत काल तक विद्यार्थी रहने की कोशिश करता है, उसके भीतर का विद्यार्थी जिन्‍दा रहता है। 

आज जब हम दीक्षांत समारोह से निकल रहे हैं तब, हमारे सामने एक विशाल विश्‍व है। पहले तो हम यह कुछ square किलोमीटर के विश्‍व में गुजारा करते थे। परिचितों से मिलते थे। परिचित विषय से संबंधित रहते थे, लेकिन अब अचानक उस सारी दुनिया से निकलकर के एक विशाल विश्‍व के अंदर अपना कदम रखने जा रहे हैं। ये पहल सामान्‍य नहीं होते हैं। एक तरफ खुशी होती है कि चलिए मैंने इतनी मेहनत की, तीन साल - चार साल - पांच साल इस कैंपस में रहा। जितना मुझसे हो सकता था मैं ले लिया, पा लिया। लेकिन अब निकलते ही, दुनिया का मेरी तरफ नजरिया देखने का बदल जाता है। 

जब तक मैं विद्यार्थी था, परिवार, समाज, साथी, मित्र मेरी पीठ थपथपाते रहते थे, नहीं-नहीं बेटा अच्‍छा करो, बहुत अच्‍छा करो, आगे बढ़ो, बहुत पढ़ो। लेकिन जैसे ही सर्टिफिकेट लेकर के पहुंचता हूं तो सवाल उठता है बताओ भई, अब आगे क्‍या करोगे? अचानक, exam देने गया तब तक तो सारे लोग मुझे push कर रहे थे, मेरी मदद कर रहे थे, प्रोत्‍साहित कर रहे थे। लेकिन सर्टिफिकेट लेकर घर लौटा तो सब पूछ रहे थे, बेटा अब बताओ क्‍या? अब हमारा दायित्‍व पूरा हो गया, अब बताओ तुम क्‍या दायित्‍व उठाओगे और यही पर जिन्‍दगी की कसौटी का आरंभ होता है और इसलिए जैसे science में दो हिस्‍से होते हैं – एक होता है science और दूसरा होता है applied science. अब जिन्‍दगी में जो ज्ञान पाया है वो applied period आपका शुरू होता है और उसमें आप कैसे टिकते है, उसमें आप कैसे अपने आप को योग्‍य बनाते हैं। कभी-कभार कैंपस की चारदीवारी के बीच में, क्‍लासरूम की चारदीवारी के बीच में शिक्षक के सानिध्‍य में, आचार्य के सानिध्‍य में चीजें बड़ी सरल लगती है। लेकिन जब अकेले करना पड़ता है, तब लगता है यार अच्‍छा होता उस समय मैंने ध्‍यान दिया होता। यार, उस समय तो मैं अपने साथियों के साथ मास्‍टर जी का मजाक उड़ा रहा था। यार ये छूट गए। फिर लगता है यार, अच्‍छा होता मैंने देखा होता। ऐसी बहुत बातें याद आएगी। आपको जीवन भर यूनिवर्सिटी की वो बातें याद आएगी, जो रह गया वो क्‍या था और न रह गया होता तो मैं आज कहा था? ये बातें हर पल याद आती हैं। 

मेरे नौजवान साथियों, यहां पर आपको अनुशासन के विषय में कुलाधिपति जी ने एक परंपरागत रूप से संदेश सुनाया। आप सब को पता होगा कि हमारे देश में शिक्षा के बाद दीक्षा, यह परंपरा हजारों साल पुरानी है और सबसे पहले तैतृक उपनिषद में इसका उल्‍लेख है, जिसमें दीक्षांत का पहला अवसर रेखांकित किया गया है। तब से भारत में यह दीक्षांत की परंपरा चल रही है और आज भी यह दीक्षांत समारोह एक नई प्रेरणा का अवसर बन जाता है। जीवन में आप बहुत कुछ कर पाएंगे, बहुत कुछ करेंगे, लेकिन जैसा मैंने कहा, आपके भीतर का विद्यार्थी कभी मरना नहीं चाहिए, मुरझाना नहीं चाहिए। जिज्ञासा, वो विकास की जड़ों को मजबूत करती है। अगर जिज्ञासा खत्‍म हो जाती है तो जीवन में ठहराव आ जाता है। उम्र कितनी ही क्‍यों न हो, बुढ़ापा निश्‍चित लिख लीजिए वो हो जाता है और इसलिए हर पल, नित्‍य, नूतन जीवन कैसा हो, हर पल भीतर नई चेतना कैसे प्रकट हो, हर पल नया करने का उमंग वैसा ही हो जैसा 20 साल पहले कोई नई चीज करने के समय हुआ था। तब जाकर के देखिए जिन्‍दगी जीने का मजा कुछ और होता है। जीवन कभी मुरझाना नहीं चाहिए और कभी-कभी तो मुझे लगता है मुरझाने के बजाए अच्‍छा होता मरना पसंद करना। जीवन खिला हुआ रहना चाहिए। संकटों के सामने भी उसको झेलने का सामर्थ्‍य आना चाहिए और जो इसे पचा लेता है न, वो अपने जीवन में कभी विफल नहीं जाता है। लेकिन तत्‍कालिक चीजों से जो हिल जाता है, अंधेरा छा जाता है। उस समय यह ज्ञान का प्रकाश ही हमें रास्‍ता दिखाता है और इसलिए ये BHU की धरती से जो ज्ञान प्राप्‍त किया है वो जीवन के हर संकट के समय हमें राह दिखाने का, प्रकाश-पथ दिखाने का एक अवसर देता है।

देश और दुनिया के सामने बहुत सारी चुनौतियां हैं। क्‍या उन चुनौतियों में भारत अपनी कोई भूमिका अदा कर सकता है क्‍या? क्‍यों न हमारे ये संस्‍थान, हमारे विद्यार्थी आने वाले युगों के लिए मानव जाति को, विश्‍व को, कुछ देने के सपने क्‍यों न देखे? और मैं चाहूंगा कि BHU से निकल रहे छात्रों के दिल-दिमाग में, यह भाव सदा रहना चाहिए कि मुझे जो है, उससे अच्‍छा करू वो तो है, लेकिन मैं कुछ ऐसा करके जाऊं जो आने वाले युगों तक का काम करे। 

समाज जीवन की ताकत का एक आधार होता है – Innovation. नए-नए अनुसंधान सिर्फ पीएचडी डिग्री प्राप्‍त करने के लिए, cut-paste वाली दुनिया से नहीं। मैं तो सोच रहा था कि शायद यह बात BHU वालों को तो पता ही नहीं होगी, लेकिन आपको भली-भांति पता है। लेकिन मुझे विश्‍वास है कि आप उसका उपयोग नहीं करते होंगे। हमारे लिए आवश्‍यक है Innovation. और वो भी कभी-कभार हमारी अपनी निकट की स्‍थितियों के लिए भी मेरे मन में एक बात कई दिनों से पीड़ा देती है। मैं दुनिया के कई noble laureate से मिलने गया जिन्‍होंने medical science में कुछ काम किया है और मैं उनके सामने एक विषय रखता था। मैंने कहा, मेरे देश में जो आदिवासी भाई-बहन है, वो जिस इलाके में रहते हैं। उस belt में परंपरागत रूप से एक ‘sickle-cell’ की बीमारी है। मेरे आदिवासी परिवारों को तबाह कर रही है। कैंसर से भी भयंकर होती है और व्‍यापक होती है। मेरे मन में दर्द रहता है कि आज का विज्ञान, आज की यह सब खोज, कैंसर के मरीज के लिए नित्‍य नई-नई चीजें आ रही हैं। क्‍या मेरे इस sickle-cell से पीड़ित, मेरे आदिवासी भाइयो-बहनों के लिए शास्‍त्र कुछ लेकर के आ सकता है, मेरे नौजवान कुछ innovation लेकर के आ सकते हैं क्‍या? वे अपने आप को खपा दे, खोज करे, कुछ दे और शायद दुनिया के किसी और देश में खोज करने वाला जो दे पाएगा, उससे ज्‍यादा यहां वाला दे पाएगा क्‍योंकि वो यहां की रुचि, प्रकृति, प्रवृत्‍ति से परिचित है और तब जाकर के मुझे BHU के विद्यार्थियों से अपेक्षा रहती है कि हमारे देश की समस्‍याएं हैं। उन समस्‍याओं के समाधान में हम आने वाले युग को देखते हुए कुछ दे सकते हैं क्‍या? 

आज विश्‍व Global warming, Climate change बड़ा परेशान है। दुनिया के सारे देश अभी पेरिस में मिले थे। CoP-21 में पूरे विश्‍व का 2030 तक 2 डिग्री temperature कम करना है। सारा विश्‍व मशक्‍कत कर रहा है, कैसे करे? और अगर यह नहीं हो पाया तो पता नहीं कितने Island डूब जाएंगे, कितने समुद्री तट के शहर डूब जाएंगे। ये Global warming के कारण पता नहीं क्‍या से क्‍या हो जाएगा, पूरा विश्‍व चिंतित है। हम वो लोग है जो प्रकृति को प्रेम करना, हमारी रगों में है। हम वो लोग है जिन्‍होंने पूरे ब्रह्मांड को अपना एक पूरा परिवार माना हुआ है। हमारे भीतर, हमारे ज़हन में वो तत्‍व ज्ञान तो भरा पड़ा है और तभी तो बालक छोटा होता है तो मां उसे शिक्षा देती है कि देखो बेटे, यह जो सूरज है न यह तेरा दादा है और यह चांद है यह तेरा मामा है। पौधे में परमात्‍मा देखता है, नदी में मां देखता है। ये जहां पर संस्‍कार है, जहां प्रकृति का शोषण गुनाह माना जाता है। Exploitation of the nature is a crime. Milking of the nature यही हमें अधिकार है। यह जिस धरती पर कहा जाता है, क्‍या दुनिया को Global warming के संकट से बचाने के लिए कोई नए आधुनिक innovation के साथ मेरे भारत के वैज्ञानिक बाहर आ सकते हैं क्‍या, मेरी भारत की संस्‍थाएं बाहर आ सकती हैं क्‍या? हम दुनिया को समस्‍याओं से मुक्‍ति दिलाने का एक ठोस रास्‍ता दिखा सकते हैं क्‍या? भारत ने बीड़ा उठाया है, 2030 तक दुनिया ने जितने संकल्‍प किए, उससे ज्‍यादा हम करना चाहते हैं। क्‍योंकि हम यह मानते हैं, हम सदियों से यह मानते हुए आए हैं कि प्रकृति के साथ संवाद होना चाहिए, प्रकृति के साथ संघर्ष नहीं होना चाहिए। 

अभी हमने दो Initiative लिए हैं, एक अमेरिका, फ्रांस, भारत और बिल गेट्स का NGO, हम मिलकर के Innovation पर काम कर रहे हैं। Renewal energy को affordable कैसे बनाए, Solar energy को affordable कैसे बनाए, sustainable कैसे बनाए, इस पर काम कर रहे हैं। दूसरा, दुनिया में वो देश जहां 300 दिवस से ज्‍यादा सूर्य की गर्मी का प्रभाव रहता है, ऐसे देशों का संगठन किया है। पहली बार दुनिया के 122 देश जहां सूर्य का आशीर्वाद रहता है, उनका एक संगठन हुआ है और उसका world capital हिन्‍दुस्‍तान में बनाया गया है। उसका secretariat, अभी फ्रांस के राष्‍ट्रपति आए थे, उस दिन उद्घाटन किया गया। लेकिन इरादा यह है कि यह समाज, देश, दुनिया जब संकट झेल रही है, हम क्‍या करेंगे? 

हमारा उत्‍तर प्रदेश, गन्‍ना किसान परेशान रहता है लेकिन गन्‍ने के रास्‍ते इथनॉल बनाए, petroleum product के अंदर उसको जोड़ दे तो environment को फायदा होता है, मेरे गन्‍ना किसान को भी फायदा हो सकता है। मेरे BHU में यह खोज हो सकती है कि हम maximum इथनॉल का उपयोग कैसे करे, हम किस प्रकार से करे ताकि मेरे उत्‍तर प्रदेश के गन्‍ने किसान का भी भला हो, मेरे देश के पर्यावरण और मानवता के कल्‍याण का काम हो और मेरा जो vehicle चलाने वाला व्‍यक्‍ति हो, उसको भी कुछ महंगाई में सस्‍ताई मिल जाए। यह चीजें हैं जिसके innovation की जरूरत है।

हम Solar energy पर अब काम कर रहे हैं। भारत ने 175 गीगावॉट Solar energy का सपना रखा है, renewal energy का सपना रखा है। उसमें 100 गीगावॉट Solar energy है, लेकिन आज जो Solar energy के equipment हैं, उसकी कुछ सीमाएं हैं। क्‍या हम नए आविष्‍कार के द्वारा उसमें और अधिक फल मिले, और अधिक ऊर्जा मिले ऐसे नए आविष्‍कार कर सकते हैं क्‍या? मैं नौजवान साथियों को आज ये चुनौतियां देने आया हूं और मैं इस BHU की धरती से हिन्‍दुस्‍तान के और विश्‍व के युवकों को आह्वान करता हूं। आइए, आने वाली शताब्‍दी में मानव जाति जिन संकटों से जूझने वाली है, उसके समाधान के रास्‍ते खोजने का, innovation के लिए आज हम खप जाए। दोस्‍तों, सपने बहुत बड़े देखने चाहिए। अपने लिए तो बहुत जीते हैं, सपनों के लिए मरने वाले बहुत कम होते हैं और जो अपने लिए नहीं, सपनों के लिए जीते हैं वही तो दुनिया में कुछ कर दिखाते हैं।

आपको एक बात का आश्‍चर्य हुआ होगा कि यहां पर आज मेरे अपने personal कुछ मेहमान मौजूद है, इस कार्यकम में। और आपको भी उनको देखकर के हैरानी हुई होगी, ये मेरे जो personal मेहमान है, जिनको मैंने विशेष रूप से आग्रह किया है, यूनिवर्सिटी को कि मेरे इस convocation का कार्यक्रम हो, ये सारे नौजवान आते हो तो उस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए उनको बुलाइए। Government schools सामान्‍य है, उस स्‍कूल के कुछ बच्‍चे यहां बैठे हैं, ये मेरे खास मेहमान है। मैंने उनको इसलिए बुलाया है और मैं जहां-जहां भी अब यूनिवर्सिटी में convocation होते हैं। मेरा आग्रह रहता है कि उस स्‍थान के गरीब बच्‍चे जिन स्‍कूलों में पढ़ते हैं ऐसे 50-100 बच्‍चों को आकर के बैठाइए। वो देखे कि convocation क्‍या होता है, ये दीक्षांत समारोह क्‍या होता है? ये इस प्रकार की वेशभूषा पहनकर के क्‍यों आते हैं, ये हाथ में उनको क्‍या दिया जाता है, गले में क्‍या डाला जाता है? ये बच्‍चों के सपनों को संजोने का एक छोटा-सा काम आज यहां हो रहा है। आश्‍चर्य होगा, सारी व्‍यवस्‍था में एक छोटी-सी घटना है, लेकिन इस छोटी-सी घटना में भी एक बहुत बड़ा सपना पड़ा हुआ है। मेरे देश के गरीब से गरीब बच्‍चे जिनको ऐसी चीजें देखने का अवसर नहीं मिलता है। मेरा आग्रह रहता है कि आए देखे और मैं विश्‍वास से कहता हूं जो बच्‍चे आज ये देखते है न, वो अपने मन में बैठे-बैठे देखते होंगे कि कभी मैं भी यहां जाऊंगा, मुझे भी वहां जाने का मौका मिलेगा। कभी मेरे सिर पर भी पगड़ी होगी, कभी मेरे गले में भी पांच-सात गोल्‍ड मेडल होंगे। ये सपने आज ये बच्‍चे देख रहे हैं। 

मैं विश्‍वास करूंगा कि जिन बच्‍चों को आज गोल्‍ड मेडल मिला है, वो जरूर इन स्‍कूली बच्‍चों को मिले, उनसे बातें करे, उनमें एक नया विश्‍वास पैदा करे। यही तो है दीक्षांत समारोह, यही से आपका काम शुरू हो जाता है। मैं आज जो लोग जा रहे हैं, जो नौजवान आज समाज जीवन की अपनी जिम्‍मेवारियों के कदम रखते हैं। बहुत बड़ी जिम्‍मेवारियों की ओर जा रहे हैं। दीवारों से छूटकर के पूरे आसमान के नीचे, पूरे विश्‍व के पास जब पहुंच रहे है तब, यहां से जो मिला है, जो अच्‍छाइयां है, जो आपके अंदर सामर्थ्‍य जगाती है, उसको हमेशा चेतन मन रखते हुए, जिन्‍दगी के हर कदम पर आप सफलता प्राप्‍त करे, यही मेरी आप सब को शुभकामनाएं हैं, बहुत-बहुत धन्‍यवाद। 

#NHAI ने टोल प्लाजा संचालकों के लिए ‘आचार संहिता’ जारी की


टोल प्‍लाजा के परिचालन में एकरूपता के अभाव और वहां कार्यरत लोगों के दुर्व्‍यवहार के बारे में मिली शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए भारतीय राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने टोल प्‍लाजा संचालकों के लिए ‘आचार संहिता’ जारी की है। एनएचएआई के ठेकेदारों/रियायतग्राहियों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे नीतिगत निर्देशों के साथ-साथ एनएचएआई द्वारा तय किये गये मानकों का पालन करें। समान वर्दी संहिता भी जारी की गई है, जिस पर देशभर में टोल प्‍लाजा पर कार्यरत लोगों को अमल करना होगा। एनएचएआई ने बिल बोर्ड पर टोल दरों/रियायतों/छूटों को दर्शाने के लिए एक मानक प्रपत्र भी वितरित किया है, जिसे सड़क इस्‍तेमालकर्ताओं के हित में रियायतग्राहियों/ठेकेदारों द्वारा अनिवार्य रूप से लगाना होगा। 

अब से सुरक्षा एवं आसान पहचान के लिए टोल प्‍लाजा के स्‍टाफ के हर सदस्‍य को पर्याप्‍त चिन्‍हों वाली गहरे नीले रंग की वर्दी पहननी होगी। रियायतग्राहियों/ठेकेदारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि टोल प्‍लाजा पर कार्यरत लोगों को सात दिनों का न्‍यूनतम प्रशिक्षण अवश्‍य दिया जाए, ताकि वे एनएचएआई के इन निर्देशों से अवगत हो सकें कि क्‍या करना है और क्‍या नहीं करना है। यह प्रशिक्षण इसलिए भी जरूरी है, ताकि टोल प्‍लाजा पर कार्यरत लोग किसी आपातकालीन स्थिति में सड़क इस्‍तेमालकर्ताओं के साथ सही तरीके से पेश आयें और उनकी मदद करें। 

#GulFood2016 : हरसिमरत कौर ने दुबई में किया भारतीय पेवेलियन का उद्घाटन


केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने आज दुबई में आयोजित गलफूड, 2016 में भारतीय पेवेलियन का उद्घाटन किया। श्रीमती बादल ने इस मौके पर मेले का दौरा किया और वहां प्रदर्शनी लगाने वाले भारतीयों से बातचीत की। उन्होंने उन्हें गलफूड, 2014 के मंच का इस्तेमाल विदेशी निवेशकों से गठबंधन के लिए करने को कहा और इस बात की अपील की कि वे भारत से पश्चिमी बाजारों में खाद्य उत्पाद के निर्यात में तेजी लाएं। उनके साथ उद्यमियों का एक दल भी था। इनमें मेगा फूड पार्क, कोल्ड चेन्स, ऑल इंडिया फूड प्रोसेसर्स एसोसिएशन, चैंबर ऑफ कॉमर्स से जुड़े उद्यमी और राज्य सरकार के प्रतिनिधि शामिल थे। 

बाद में गलफूड, 2016 के खाद्य और पेय कारोबार फोरम में मुख्य भाषण देते हुए श्रीमती बादल ने इस प्रदर्शनी के आयोजकों और भारतीय खाद्य उद्योग की प्रशंसा की। श्रीमती बादल ने खाद्य और पेय सेक्टर में नए रुझानों और नवाचारों को प्रदर्शित करने के लिए आयोजकों को धन्यवाद दिया। 

श्रीमती बादल ने कहा कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच ऐतिहासिक रूप से आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात भारतीय निर्यात के लिए दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। संयुक्त अरब अमीरात भारत का तीसरा बड़ा कारोबारी साझीदार है। दोनों के बीच सालाना कारोबार 60 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। 

उन्होंने बताया कि भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एक उभरता हुआ क्षेत्र है और इसमें प्रगति की अपार संभावना है। इस उद्योग में मूल्य संवर्धन की अनंत संभावनाएं हैं इसलिए यह तेज तरक्की वाले सेक्टर के तौर पर उभरा है। इसमें महंगाई को नियंत्रित करने की क्षमता है और यह किसानों को अच्छी कीमत दिलाने की क्षमता रखता है। 

श्रीमती बादल ने उद्यमियों के दल को बताया कि भारत एक बेहद संभावनाशील बाजार है और इसकी 1.2 अरब की आबादी इसे एक विशाल बाजार में तब्दील कर देती है। भारत में लोगों की क्रयशक्ति बढ़ रही है। यहां कच्चे माल की कमी नहीं है। यहां युवा और कुशल श्रम शक्ति सहज रूप से उपलब्ध है। भारत सरकार इस सेक्टर में निवेश बढ़ाने के लिए तरह-तरह की सहूलियत और प्रोत्साहन दे रही है। भारत सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रम मेक इन इंडिया के तहत कारोबार सुगम बनाने के लिए नए कदम उठाए जा रहे हैं। माननीय प्रधानमंत्री अपने मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत को वैश्विक विनिर्माण का केंद्र बनाना चाहते हैं। 

श्रीमती बादल ने कहा कि भारत की ओर संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात की जाने वाली चीजों में खाद्य आइटम प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि भारत खाद्यान्न, फल, सब्जी और दूध के उत्पादन में काफी आगे है लेकिन इसके बाद बुनियादी ढांचे की कमी है वहीं संयुक्त अरब अमीरात के पास सरप्लस फंड और टेक्नोलॉजी है। संयुक्त अरब अमीरात खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए बुनियादी ढांचा खड़ा कर सकता है लेकिन उसके पास कच्चे माल की कमी है। यह दोनों के लिए फायदे की बात है। 

भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में अपार संभावनाएं हैं, जिनका संयुक्त अरब अमीरात के निवेशक लाभ उठा सकते हैं। दोनों देशों के बीच खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में सहयोग की अपार संभावनाए हैं। संयुक्त अरब अमीरात के निवेशक भारत आ सकते हैं और यहां भारत में खाद्य उत्पादों का उत्पादन कर सकते हैं। यह उनकी जरूरत और निर्यात दोनों के लिए अच्छा रहेगा। 

माननीय मंत्री महोदया ने कहा कि भारत में खाद्य नियामक व्यवस्था अब लाइसेंस से रजिस्ट्रेशन व्यवस्था की ओर बढ़ रही है ताकि देश में कारोबार करना आसान हो। भारत सरकार देश में निवेश के लिए सुविधा प्रदान करने और इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर में निवेश को बढ़ावा दे रही है और ताकि भारत में कारोबार शुरू करने वाले व्यवसायियों और उद्यमियों को इस दिशा में आसान और पारदर्शी माहौल मिल सके। इससे निवेशकों को भारत में निवेश करने में आसानी हो सकेगी। 

श्रीमती बादल ने इस दिशा में भारतीय बाजार की खूबियों का जिक्र किया और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों की जानकारी दी। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात समेत दुनिया भर के निवेशकों से भारत के खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर में निवेश करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत के मेगा फूड पार्कों, कोल्ड चेनों और दूसरे खाद्य प्रसंस्करण और संवर्धन इकाइयों और श्रृंखलाओँ में निवेश कर सकते हैं। इन इलाकों में यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। वे इसमें निवेश कर भारत के महत्वाकांक्षी मेक इन इंडिया कार्यक्रम का लाभ ले सकते हैं।

उज्जैन में 2018 तक एलिम्को की नई यूनिट, दिव्‍यांगों को उपकरण वितरित

श्री थावरचंद गहलोत ने आगामी दो वर्षों के अंदर उज्‍जैन में एलिम्को की नई यूनिट स्‍थापित करने की घोषणा की। केंद्र सरकार द्वारा वित्‍त पोषित 15 करोड़ रुपये की इस योजना के लिए राज्‍य सरकार ने आवश्‍यक भूमि को पहले ही उपलब्‍ध करा दिया है। उन्‍होंने कहा कि यह फैक्‍ट्री मध्‍य प्रदेश और आसपास के राज्‍यों के जरूरतमंद लाभार्थियों को उन्‍नत मददगार और सहायक उपकरण तथा ऑटोबॉक (जर्मनी) द्वारा विकसित कृत्रिम अंगों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित कराएगी। उन्‍होंने कहा कि इस कैंप में जो लाभार्थी पंजीकरण नहीं करा सके उन्‍हें बाद में आयोजित शिविरों में शामिल किया जाएगा।


केंद्रीय सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गहलोत उज्‍जैन में एडीआईपी शिविर में संबोधित करते हुए।

डीईपीडब्‍ल्‍यूडी सचिव डॉ. विनोद अग्रवाल ने आश्‍वासन दिया कि आने वाले वर्षों में विभाग वितरण का क्षेत्र बढ़ाएगा ताकि एक साल में एडीआईपी योजना से 10 लाख लाभार्थी लाभ उठा सकें। पिछले डेढ़ वर्ष की अवधि में विभाग के अधीन आयोजित किए जाने वाला उज्‍जैन शिविर 102 वां एडीपी शिविर था।


उज्‍जैन में आयोजित एडीआईपी शिविर में वितरित मददगार एवं सहायक उपकरण

इस शिविर में स्‍मार्ट केन, स्‍मार्ट फोन, डेजी प्‍लेयर, मोटर चालित तिपहिया साइकिल, तिपहिया साइकिल,व्‍हील चेयर, चलने की छड़ी, ब्रेलीस्‍लेट , सीपी चेयर, रोलेटर, हियरिंग ऐड, कृत्रिम अंग, कै‍लिपर्स आदि का वितरण किया गया।

 श्री थावरचंद गहलोत लाभार्थियों को मोटर चालित तिपहिया साइकिल वितरित करते हुए।

मध्‍य प्रदेश के शिक्षा मंत्री श्री पारस जैन, मध्‍य प्रदेश से सांसद (राज्‍यसभा) श्री सत्‍य नारायण जटिया, उज्‍जैन से सांसद चिंतामणि मालवीय भी इस अवसर पर मौजूद थे।

नेपाल के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान किए गए MOU की सूची


क्रम संख्या
 (एमओयू)/समझौता
संक्षिप्त विवरण
हस्ताक्षरकर्ता 

1.
 भूकंप के बाद पुनर्निर्माण मदद के लिए भारत सरकार के सहायता पैकेज के 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुदान  घटक के उपयोग पर एमओयू
 चार क्षेत्रोंअर्थात आवासस्वास्थ्यशिक्षा और सांस्कृतिक विरासत की पहचान की गई है। आवास में, 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर का उपयोग गंभीर रूप से भूकंप प्रभावित 14 जिलों में 50,000मकानों के निर्माण के लिए किया जाएगा।  नेपाल के भूकंप प्रभावित 31 जिलों में स्वास्थ्यशिक्षा और सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्रों में से प्रत्येक में 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल किया जाएगा। 
भारतीय पक्ष की ओर से हस्ताक्षरकर्ता: श्रीमती सुषमा स्वराज,विदेश मंत्री

नेपाली पक्ष की ओर से हस्ताक्षरकर्ता: कमल थापा,डीपीएम और विदेश मंत्री

2.
नेपाल के तराई क्षेत्र में सड़क बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर एमओयू
 इस एमओयू से तराई सड़क प्रथम चरण परियोजना के पैकेज 2345 एवं 6 के तहत कुल 518 किलोमीटर लंबी 17 सड़कों पर शेष काम का त्वरित कार्यान्वयन संभव हो पाएगा।  पैकेज 1 के तहत कुल 87 किलोमीटर लंबी दो सड़कों का निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है।
 भारतीय पक्ष की ओर से हस्ताक्षरकर्ता: रणजीत रायभारत के राजदूत

नेपाली पक्ष की ओर से हस्ताक्षरकर्ता: अर्जुन कुमार कार्की,सचिव,भौतिक परिवहन मंत्रालय

3.
संगीत एवं नाटक की नेपाल अकादमी और संगीत नाटक अकादमी के बीच एमओयू
इस एमओयू का उद्देश्य  विशेषज्ञों,कलाकारोंनर्तकियोंविद्वानों और बुद्धिजीवियों के आदान-प्रदान के जरिए कला प्रदर्शन के क्षेत्र में भारत और नेपाल के बीच आपसी संबंधों को बढ़ाना है।
 हेलेन आचार्य,सचिव,संगीत नाटक अकादमी

दीप कुमार उपाध्याय,नेपाल के राजदूत

4.
 पारगमन मार्गों पर आदान-प्रदान के पत्र : (i) ककरबित्ता-बांग्लाबंध कॉरीडोर के जरिए नेपाल और बांग्लादेश के बीच पारगमन (ii)विशाखापत्तनम बंदरगाह का परिचालन
i) भारत और नेपाल के बीच पत्रों के इस आदान-प्रदान से ककरबित्ता (नेपाल) और बांग्लाबंध (बांग्लादेश) कॉरीडोर के जरिएभारत होते हुए पारगमन करते वक्त नेपाल और बांग्लादेश के बीच वस्तुओं की आवाजाही के तौर-तरीकों  का सरलीकरण हो जाएगा  ii) पत्रों के इस आदान-प्रदान से विशाखापत्तनम बंदरगाह के जरिए नेपाल के लिए पारगमन सुविधाएं प्राप्त होंगी।
रीता तिवतिया,वाणिज्य सचिव
[भारत के राजदूत द्वारा आदान-प्रदान किया गया]रीता तिवतिया,वाणिज्य सचिव [भारत के राजदूत द्वारा आदान-प्रदान किया गया] 
नैनद्र प्रसाद उपाध्याय,वाणिज्य सचिव नैनद्रप्रसाद उपाध्याय,वाणिज्य सचिव


5.
रेल परिवहन पर आदान-प्रदान के पत्र: (i) रेल परिवहन  विशाखापत्तनम तक/ विशाखापत्तनम से(ii) बांग्लादेश के जरिए/उसके साथ नेपाल के व्यापार के लिए सिंहाबाद के माध्यम से रेल पारगमन सुविधा  
(i) पत्रों के इस आदान-प्रदान से विशाखापत्तनम तक और विशाखापत्तनम से नेपाल तक रेल परिवहन संभव हो पाएगा (ii) पत्रों के इस आदान-प्रदान से   बांग्लादेश के जरिए/उसके साथ नेपाल के व्यापार के लिए भारत में सिंहाबाद के माध्यम से रेल पारगमन सुविधा  को चालू करने में मदद मिलेगी।
ए.एस. उपाध्याय,सलाहकार (यातायात एवं परिवहन),रेलवे बोर्ड
ए.एस. उपाध्याय,सलाहकार (यातायात एवं परिवहन),रेलवे बोर्ड

ए.एस. उपाध्याय,सलाहकार (यातायात एवं परिवहन),रेलवे बोर्ड
ए.एस. उपाध्याय,सलाहकार (यातायात एवं परिवहन),रेलवे बोर्ड

6.
मुजफ्फरपुर-धाल्केबार पारेषण लाइन का उद्घाटन [80 मेगावाट की प्रारंभिक आपूर्ति,अक्टूबर 2016 तक इसे बढ़ाकर 200 मेगावाट और दिसंबर 2017 तक इसे बढ़ाकर 600 मेगावाट किया जाएगा]
13.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के एलओसी के तहत 400 किलोवाट की मुजफ्फरपुर-धाल्केबार पारेषण लाइन का नेपाली हिस्सा नेपाल सरकार द्वारा क्रियान्वि‍त किया जा रहा है। 132 केवी के प्रारंभिक चार्ज के साथ 80 मेगावाट बिजली का प्रवाह इस लाइन के माध्यम से तुरंत शुरू हो जाएगा।  इसके बाद,इसे 220 केवी पर अक्टूबर 2016 में बढ़ाकर 200 मेगावाट और फि‍र 400 केवी पर दिसंबर 2017 तक बढ़ाकर 600 मेगावाट किया जाएगा।  
दो प्रधानमंत्रियों द्वारा शुभारंभ
7.
प्रख्यात हस्ति‍यों के समूह का गठन
जुलाई 2014 में काठमांडु में आयोजित भारत-नेपाल संयुक्त आयोग की तीसरी बैठक में प्रख्यात हस्ति‍यों के समूह (ईपीजी) के गठन का निर्णय लिया गया था। ईपीजी में आठ सदस्य शामिल हैं जिसके लिए प्रत्येक देश ने चार सदस्यों को नामित कियाजो मुख्यत: एक सांसदएक वकील, एक अर्थशास्त्री और सिविल सोसाइटी कार्यकर्ता हैं।  ईपीजी का अब गठन कर दिया गया है। इसे द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करने एवं द्विपक्षीय संबंधों को और ज्यादा मजबूत करने के लिए संस्थागत व्यवस्थाओं सहित विभि‍न्न उपायों की सिफारिश करने की जिम्मेदारी दी गई है।
नेपाली संरचना : सांसद राजन भट्टाराईपूर्व एफएम भेख  बहादुर थापापूर्व सीआईएए प्रमुख सूर्य नाथ उपाध्यायऔर पूर्व कानून मंत्री नीलाम्बर आचार्य।

भारतीय संरचना: सांसद भगत सिंह कोश्यारी;सिक्किम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति महेंद्र लामाआईडीएसए के डीजी जयंत प्रसादवीआईएफ के वरिष्ठ फेलो बी.सी. उप्रेती 


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