आसाराम बापू को फंसाने के लिए रचे गये षड्यंत्र का पर्दाफाश-सुरक्षा गार्ड पर केस दर्ज

जम्मू एवं कश्मीर पुलिस ने शुक्रवार को आध्यात्मिक गुरु प. पू. आसाराम बापू के खिलाफ षड्यंत्र रचने के आरोप में उनके आश्रम के एक सुरक्षा गार्ड के खिलाफ मामला दर्ज किया है। गार्ड ने यह दावा किया था कि कुछ बच्चों की हत्या के बाद शव प. पू. आसाराम बापू के आश्रम में ही दफना दिए गए थे। इससे पहले, जम्मू की अदालत में प. पू. आसाराम बापू के भगवती नगर आश्रम में तीन बच्चों की हत्या के बाद उन्हें दफनाए जाने का आपराधिक मामला दर्ज किया गया था और गार्ड भोलानाथ घटनास्थल की पहचान के लिए तैयार हो गया था। इसके बाद अदालत ने जम्मू पुलिस को मामला दर्ज करने और मामले की जांच करने के आदेश दिए थे।

इधर, शुक्रवार को इस मामले में तब नाटकीय मोड़ आया जब पुलिस ने प. पू. आसाराम बापू को झूठे आरोप में फंसाने के मामले में भोलानाथ के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया। एक पुलिसकर्मी ने बताया कि भोलानाथ ने एक स्थानीय युवक विक्रांत शर्मा को फोन पर आश्रम के नीचे मानव कंकाल दफन करने को कहा ताकि वह पुलिस के सामने इसके नीचे तीन बच्चों की हत्या के बाद उन्हें दफनाने का दावा कर सके।

एक अधिकारी ने कहा कि विक्रांत को अदालत के सामने पेश किया गया। भोलानाथ के साथ उसकी हुई बातचीत की सीडी भी उसके पास थी। अधिकारी ने कहा कि बातचीत असली लग रही है और अदालत के आदेश पर हमने जयपुर निवासी भोलानाथ के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र की प्राथमिकी दर्ज की। हमें यह सूचना मिली है कि वह फिलहाल मुंबई में है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि भोलानाथ को गिरफ्तार करने और जम्मू लाकर जांच करने के लिए पुलिस की एक टीम भेज दी गई है।

इस घटना से यह फिर साबित हो गया है कि प. पू. आसाराम बापू जी के खिलाफ उन्हें फसाने के लिए षडयंत्र रचा जा रहा है । कुछ दिन पहले एक तथाकथित पीडिता के पिता ने कहा था कि शाहजहांपूर पीडिता का परिवार एवं जोधपूर पुलिस उन पर प. पू. आसाराम बापू के खिलाफ बयान देने के लिए दबाव डाल रहे थे । क्या मीडिया यह सब चीजे भी समाज के सामने लाएगा ? 

विहिप पूरी तरह फर्जी संस्था है : नरेश अग्रवाल (सपा नेता)

अपने विवादित और ऊलजलूल बयानों के लिए मशहूर सपा के वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल ने विहिप की संकल्प सभा पर हमला बोलते हुए संगठन को पूरी तरह फर्जी बता दिया है।

नरेश अग्रवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह संकल्प यात्रा सिर्फ सूबे का माहौल खराब करने व अशांति फैलाने के लिए की जा रही है।

अग्रवाल ने यहां तक कह डला कि ‌विश्व हिंदू परिषद का कोई जनाधार नहीं है। न तो प्रदेश सरकार ने इसे कोई मान्यता दी है और न ही देश के हिंदू इसे मानते हैं।

अग्रवाल ने संघ और भाजपा को भी लपेटते हुए कहा कि चुनाव के वक्त सांप्रदायिक ताकतें विहिप का इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने यह भी कहा ‌कि प्रदेश में अगर शांति व्यवस्‍था पर चोट पहुंचाई तो विहिप और भाजपा कार्यकर्ताओं पर रासुका भी लगाया जाएगा।

विहिप के प्रमुख अशोक स‌िंघल अयोध्या तो नहीं पहुंचे, लेकिन उन्होंने बयान दिया है कि प्रदेश सरकार जान बूझ कर माहौल खराब करना चाह रही है। सिंघल ने कहा कि संकल्प सभा को शांतिपूर्वक करने का आह्वाहन किया गया था, न जाने इसमें राज्य सरकार को क्या दिक्कत हो रही है।

सिंघल ने सपा नेता आजम खां का नाम लिए बगैर कहा कि एक मंत्री के इशारे पर समाजवादी पार्टी इतना बवाल कर रही है। संकल्‍प सभा का मकसद प्रदेश में अशांति फैलाना एकदम भी नहीं है।

यूपी और बिहार में हर वोटर की पहली पसंद बने नरेन्द्र मोदी

यूपी और बिहार में एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की लहर चल रही है। माना जा रहा है कि आने वाले लोकसभा चुनावों में गुजरात के चीफ मिनिस्टर और राहुल गांधी के बीच सीधा मुकाबला होगा। लेकिन अगर इकनॉमिक टाइम्स के सर्वे के नतीजे देखें तो पता चलता है कि काफी हद तक यह मुकाबला एकतरफा होगा। इस रेस में मोदी बड़े मार्जिन से राहुल गांधी से आगे चल रहे हैं। खास तौर से यूपी में हर दूसरा वोटर मोदी को सपोर्ट करता हुआ नजर आ रहा है। बीजेपी इससे खुश हो सकती है, लेकिन उसे पता है कि बगैर अलायंस पार्टनर्स को जोड़े वह केंद्र की सत्ता पर काबिज नहीं हो पाएगी।

रिसर्च फर्म एसी नीलसन की तरफ से 4 से 26 सितंबर के बीच कराए गए इस सर्वे के मुताबिक यूपी और बिहार में बीजेपी को जनता का सपोर्ट तो बढ़ रहा है, लेकिन इतना नहीं कि उससे पार्टी देश के इन दो बड़े राजनीतिक अखाड़ों में क्लीन स्वीप कर जाए। इन दो राज्यों में 120 लोकसभा सीटें हैं। बीजेपी को इनमें से एक-तिहाई से ज्यादा (27 यूपी में और 17 बिहार में) सीटें मिलती नजर आ रही हैं। देश पर कौन राज करेगा, यह तय करने की क्षमता रखने वाले इन दोनों राज्यों में इकनॉमिक टाइम्स की तरफ से कराए गए एक बड़े और व्यापक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है। सर्वेक्षण में लगभग 8,500 वोटर्स शामिल हुए।

यूपी में हर दूसरे वोटर ने नरेंद्र मोदी को पहली पसंद बताया है। उनकी अप्रूवल रेटिंग से इसका पता चलता है। यूपी में सिर्फ 9 फीसदी वोटरों ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए योग्य उम्मीदवार बताया। वहीं, राज्य में 50 फीसदी वोटर मोदी को अगला प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं। बिहार में भी मोदी इस पद के लिए पहली पसंद हैं। जबकि राज्य में केवल 19 फीसदी वोटर राहुल गांधी को अगला प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं। मोदी को चाहने वालों की संख्या उनसे कुछ ज्यादा है। राहुल गांधी की अप्रूवल रेटिंग हर कैटिगरी के वोटरों में मोदी से कम है। फर्स्ट टाइम वोटर्स में भी मोदी की पॉप्युलैरिटी राहुल गांधी से ज्यादा है, जबकि वह राहुल से 19 साल बड़े हैं।

सर्वे से पता चला है कि मोदी को बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने से मुस्लिम वोटरों का झुकाव कांग्रेस की ओर बढ़ा है। हालांकि, इसकी पहले से ही उम्मीद की जा रही थी। मुस्लिम वोटरों को डर है कि इससे हिंदू वोटरों का ध्रुवीकरण मोदी के पक्ष में हो सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो इससे कांग्रेस को नुकसान होगा। लोगों का मानना है कि मोदी इकॉनमी, नैशनल सिक्यॉरिटी और फॉरेन पॉलिसी को हैंडल करने के मामले में राहुल गांधी से बेहतर साबित होंगे। केंद्र में सत्ता के लिए अलायंस बनाना भी बहुत अहमियत रखता है। अलायंस मैनेजर के तौर पर भी राहुल गांधी की इमेज अच्छी नहीं है।

सर्वे के मुताबिक, बीजेपी को दोनों राज्यों में कुल 44 सीटें- यूपी में 27 और बिहार में 17 सीटें मिल सकती हैं। इस बार दिल्ली के तख्त का रास्ता इन्हीं दोनों राज्यों से होकर गुजरेगा, यह बात पक्की लग रही है। ऐसे में सर्वेक्षण के ये आंकड़े बीजेपी को देश भर में कम्फर्ट जोन में लाने के लिए काफी नहीं होंगे। हालांकि, सर्वे में बीजेपी के लिए राहत की बात यह रही है कि मोदी चुनावी नतीजे तय करने वाले मेन फैक्टर हो सकते हैं। सर्वे का एक फेज मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए बीजेपी का उम्मीदवार बनाए जाने से पहले ही पूरा हो गया था। जो बड़ी तस्वीर सामने आई है, उसके हिसाब से मोदी को यूपी में चुनौती देने वाले मुलायम सिंह यादव और बिहार में नीतीश कुमार के दबदबे में कमी आ सकती है। यूपी में बीजेपी 27 सीटों पर जीत हासिल करके सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है। यह आंकड़ा पिछले दो बार के लोकसभा चुनाव में मिली सीटों का लगभग तीन गुना है।

यूपी में बीजेपी सभी विरोधी दलों के सपोर्ट बेस में सेंध लगाती नजर आएगी। यहां उसे 28 फीसदी वोट मिलते नजर आ रहे हैं, जबकि 2009 में 17 फीसदी वोट मिले थे। सर्वेक्षण के मुताबिक, यूपी में एसपी का वोट शेयर 5 पर्सेंट पॉइंट की गिरावट के साथ 18 फीसदी तक आ सकता है। ऐसे में उसकी लोकसभा सीटों का आंकड़ा 16 तक सिमट सकता है। यहां बीएसपी और कांग्रेस को भी नुकसान होता नजर आ रहा है।

मोदी के फेवर में अपर कास्ट का कंसॉलिडेशन होने पर बीएसपी का सपोर्ट बेस घट सकता है। हालांकि, कोर दलित वोट पक्का होने से इसकी सीटें पिछली बार की तरह 20 या इसके आसपास रह सकती हैं। मोदी ज्यादातर मतदाता वर्ग में पॉप्युलैरिटी गेन कर रहे हैं, जिससे कांग्रेस की संभावनाएं खराब हो रही हैं। कांग्रेस को 9 सीटों का नुकसान होता नजर आ रहा है। ऐसे में वह यूपी में खिसक कर चौथे नंबर पर आ जाएगी। बिहार में जेडीयू और बीजेपी के अलगाव पर कहा जा रहा था कि इससे मोदी को नुकसान हो सकता है, लेकिन सर्वेक्षण में कुछ और संकेत मिले हैं। यहां बीजेपी को 40 में 17 जबकि जेडीयू को 2009 की सिर्फ आधी, मतलब 10 सीटें मिलती नजर आ रही हैं। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को पिछली बार से 1 सीट ज्यादा यानी 5 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस का आंकड़ा पिछली बार से डबल होकर 4 सीटों तक पहुंच सकता है।

सीबीआई की एफआईआर से कांग्रेस में हडकंप

कोयला घोटाले को लेकर सीबीआई की ताजा एफआईआर विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए सियासी मुसीबत बन गई है।

विपक्ष को घोटाले का ताजा मुद्दा मिलने से कांग्रेस के लिए मुकाबला करना कठिन हो सकता है। खासकर आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमारमंगलम बिड़ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से पार्टी की परेशान और बढ़ गई है।

अभी कुछ दिन पहले ही कुमारमंगलम राहुल गांधी के साथ मंच पर एक साथ बैठे नजर आए थे। उत्तर प्रदेश के जगदीशपुर में फूड पार्क के शिलान्यास के मौके पर राहुल और बिड़ला साथ-साथ नजर आए थे।

सीबीआई के मामला दर्ज करने पर पार्टी बोलने से बच रही है। पार्टी प्रवक्ता मीम अफजल ने कहा कि सीबीआई की जांच जारी है।

जब तक जांच पूरी नहीं होती, इन मुद्दों पर बोलना ठीक नहीं है। वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साध दिया है।
भाजपा ने कहा है कि जनता भ्रष्टाचार के लिए कांग्रेस को माफ नहीं करेगी।

पार्टी और सरकार में कई लोग कोयले की कालिख से पुते हुए हैं। वहीं कांग्रेस के अंदरखाने मानना है कि सीबीआई की ताजा एफआईआर से एक बार फिर भ्रष्टाचार का मुद्दा उजागर हो गया है, जिससे मुकाबला करना पार्टी को मुश्किल पड़ेगा।

सरेंडर आतंकवादियों के सहारे पाक फैला रहा घाटी में आतंकवाद - भाजपा

प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि आतंकवादियों के पुनर्वास का सीधा फायदा उठाने में जुटा पाकिस्तान सरेंडर आतंकवादियों के सहारे राज्य में हालात बिगाड़ने की कोशिशों में जुटा है। आतंकवाद के प्रति स्थानीय सहयोग में कमी को देखते हुए नेपाल मार्ग से राज्य में आ रहे आतंकवादियों का अपने मकसद के लिए इस्तेमाल करने के प्रयास कर रहा है।

भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य व मुख्य प्रवक्ता डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि खुफिया एजेंसियों को इसकी पुख्ता जानकारी होने के बाद भी राज्य सरकार पुनर्वास नीति के नाम पर राजनीति कर रही है। यह नीति बनाने वाली नेशनल कांफ्रेंस-कांग्रेस सरकार को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को दांव पर लगाकर 400 आतंकवादी नेपाल मार्ग से आकर राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं। पुनर्वास को लेकर राज्य, केंद्र सरकार की नीयत संदिग्ध है। जिस नीति को सरकार की मंजूरी मिली थी, उसे नेपाल मार्ग से वापसी को कोई जिक्र नहीं था।

पुनर्वास नीति के नाम पर लोगों को गुमराह किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि तय की गई शर्तो के अनुसार वापसी के बाद उन पर पूरी नजर रखनी थी। न सिर्फ उनके राज्य वापसी के तरीके से समझौता किया गया अपितु उनके आने के बाद सुरक्षा दृष्टि से उठाए जाने वाले कदम भी नजरअंदाज कर दिए गए।

भाजपा नेता ने कहा कि इन आतंकवादियों के साथ कश्मीर में हजारों ऐसे सरेंडर आतंकवादी है जो सजा काटने के बाद अब सड़कों पर हैं। अगर पाकिस्तान फिर से उन्हें बरगलाने में कामयाब हो गया तो आने वाले समय में हालात बद से बदतर हो जाएंगे। आइएसआइ पहले ही अगले वर्ष अफगान आतंकवादियों को राज्य में घुसाने की तैयारी में है।

1971 में हिंदू-जनसंहार पर चुप थी इंदिरा कांग्रेस और अमेरिका प्रशासन

वर्ष 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता से पहले पाकिस्तानी सेना ने तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में सुनियोजित तरीके से हिंदू समुदाय के जनसंहार को अंजाम दिया था और निक्सन प्रशासन ने इससे आंखें मूंदे रही। एक नई किताब में यह खुलासा किया गया है। ‘द ब्लड टेलीग्राम: निक्सन किसिंगर एंड ए फॉरगॉटन जेनोसाइड’ नामक इस किताब के लेखक गैरी जे बास ने कहा कि हालांकि भारत सरकार इस बारे में जानती थी, लेकिन उसने इसे अधिक महत्व देने के बजाए इसे बांग्लादेश में बंगाली समुदाय के खिलाफ जनसंहार की संज्ञा दी थी, ताकि तत्कालीन जनसंघ के नेताओं इस बात को लेकर हाय तौबा नहीं मचाएं। 

प्रिंसटन विश्वविद्यालय में राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर बास कहते हैं, ‘‘इसे मूल रूप से हिंदुओं की प्रताडऩा के रूप में सामने लाने के बजाए भारत ने इसे बंगालियों के विनाश के रूप में पेश करने पर ध्यान केंद्रित किया।’’ बास ने कहा, ‘‘भारतीय विदेश मंत्रालय ने यह तर्क दिया था कि देश में बंगालियों की संख्या बहुत अधिक होने के कारण चुनाव हार गए पाकिस्तानी जनरल उनकी (बंगालियों की) हत्याएं कर रहे हैं ताकि ‘पूर्वी बंगाल में जनसंख्या में भारी कमी आ सके।’ और यह लोग पाकिस्तान में बहुसंख्यक न बने रह सकें।’’

किताब कहती है कि चूंकि पाकिस्तानी सेना लगातार हिंदू समुदाय को अपना निशाना बना रही थी, ऐसे में भारतीय अधिकारी नहीं चाहते थे कि जन संघ पार्टी के हिंदू राष्ट्रवादी और अधिक भड़कें। बास ने किताब में लिखा है, ‘‘रूस में भारत के राजदूत डी पी धर ने मास्को से पाकिस्तान की सेना पर हिंदुओं को चुन-चुनकर उनकी हत्या करने की पूर्वनियोजित नीति बनाने का दोष लगाया था, लेकिन उन्होंने लिखा है कि जनसंघ जैसे दक्षिणपंथी हिंदू उग्रराष्ट्रवादी दल की उग्र प्रतिक्रिया के भय से हमने इस बात की पूरी कोशिश करी कि यह मामला भारत में प्रचारित न हो।’’ ढाका में तत्कालीन अमेरिकी कूटनीतिज्ञों ने विदेश मंत्रालय और व्हाइट हाउस दोनों को ही लिखा था कि यह हिंदुओं के ‘जनसंहार’ से कम नहीं है।

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