हिंदू विचारधारा वाला व्यक्ति ही देश का प्रधानमंत्री बने -बाल ठाकरे

संघ प्रमुख मोहन भागवत के बाद शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी अगले लोकसभा चुनाव में हिंदुत्वादी प्रधानमंत्री का समर्थन किया है। उनका यह समर्थन राजग के सहयोगी जदयू को नागवार गुजर सकता है। संप्रग की ओर से राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी प्रणब मुखर्जी का समर्थन करने वाले ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखा है कि हिंदू विचारधारा को मानने वाला व्यक्ति ही देश का प्रधानमंत्री बनना चाहिए।

हाल ही में जदयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2014 के आम चुनाव में राजग की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति की वकालत की थी। उनके इस बयान को नरेंद्र मोदी के विरोध के तौर पर लिया गया था। इसके बाद नीतीश को संघ और भाजपा की कड़ी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ी थी। शिवसेना प्रमुख ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष शब्द गाली बन चुका है।


मुझे ममता जी का समर्थन मिलने की उम्मीद-संगमा

लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष पी.ए. संगमा ने शुक्रवार को राष्ट्रपति चुनाव में उनकी उम्मीदवारी को तृणमूल कांग्रेस का समर्थन मिलने का विश्वास जताया।

संगमा ने कहा है कि, "मैं लगातार उनके सम्पर्क में हूं। मैं अगले एक-दो दिन में उनसे मिलूंगा। मुझे उनका समर्थन मिलने की बहुत उम्मीद है।"

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी के पक्ष में ज्यादा सदस्य होने के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "चुनाव अनुच्छेद 55 के अनुसार होता है और इस अनुच्छेद में स्पष्ट है कि चुनाव गुप्त मतदान के जरिए होगा। इस समय संख्या का सवाल की नहीं उठता।"

उन्होंने कहा, "गुप्त मतदान का मतलब अंतरात्मा की आवाज सुनकर मतदान करना है और मैं अंतरात्मा की आवाज सुनकर मतदान करने में भरोसा करता हूं।"

संप्रग व वाम मोर्चे के विभाजन के सम्बंध में पूछने पर संगमा ने कहा, "लगभग हर राजनीतिक दल में विभाजन हो रहा है। जो बताता है कि यह चुनाव एक गम्भीर चुनाव है। यह उतना आसान नहीं है जितना कांग्रेस दावा कर रही है। विभाजन हो रहा है क्योंकि लोग इस सम्बंध में गम्भीरता से सोच रहे हैं। यह एक स्वागतयोग्य बदलाव है।"

उन्होंने कहा, "प्रणब मुखर्जी भी अविभाजित संप्रग के उम्मीदवार नहीं है। ममता भी संप्रग का हिस्सा हैं और उन्होंने अभी प्रणब को समर्थन नहीं दिया है।"

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को ही संगमा को समर्थन देने की घोषणा की।

पटौदी खानदान को हिंदू बहू स्वीकार पर हिंदू दामाद नहीं

पटौदी खानदान ने एक हिंदू लड़की करीना कपूर को अपने परिवार का हिस्सा मान लिया है पर सोहा अली खान के ब्वायफ्रेंड से मंगेतर बने एक हिंदू लड़के  कुणाल खेमू आज भी परिवार के लिए अजनबी ही बने हुए हैं। 

हाल में ही लंदन में आयोजित एक समारोह के दौरान यह बेगानापन खुलकर सामने आया। लंदन में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने स्वर्गीय नवाब मंसूर अली पटौदी के सम्मान में एक भोज का आयोजन किया था। 

खास बात यह थी लंदन में होने के बावजूद कुणाल समारोह में नजर नहीं आए। इस बारे में पूछे जाने पर कुणाल ने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि मुझे समारोह में शामिल नहीं किया गया ।

फिल्म जगत को लोगो में इस तरह का व्यवहार कम ही देखने में आता है पर इस पटौदी खानदान को हिंदू बहू तो स्वीकार है पर हिंदू दामाद नहीं ..

स्वंय शर्मिला टैगौर एक हिंदू परिवार से आतीं हैं परन्तु मंसूर अली से शादी के बाद उनके हिंदुओं के प्रति व्यवहार में आश्चर्यजनक रूप से बेगानापन देखा गया है.

अब कपिल सिब्बल को पड़ेगा हरविंदर सिंह का थप्पड़

2 केंद्रीय मंत्रियों को थप्पड़ मार चुके 27 साल के हरविंदर सिंह के निशाने पर अब एक और केंद्रीय मंत्री हैं। आईबी ने भी एक जनरल अलर्ट जारी किया है, जिसमें कहा है कि पूर्व टेलिकॉम मिनिस्टर सुखराम और केंद्रीय मंत्री शरद पवार को थप्पड़ मार चुके हविंदर सिंह केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को थप्पड़ मारने के फिराक में है। वह किसी पब्लिक फंक्शन में उन्हें थप्पड़ मारना चाहता है।

सूत्रों के मुताबिक, हरविंदर सिंह को कुछ संगठनों का सहयोग भी मिल रहा है। साथ ही अलर्ट जारी करने के बाद बुधवार को आईबी की एक टीम हरविंदर सिंह के घर भी गई थी।

मीडिया  के साथ फोन पर बातचीत में हरविंदर सिंह ने कहा कि हां, मैं कपिल सिब्बल को थप्पड़ मारना चाहता हूं। मैं मौके की तलाश में हूं। साथ ही हरविंदर इस बात की भी पुष्टि की कि उसके घर आईबी की टीम पहुंची थी।

मुल्ला मुलायम भाजपा एजेंट : राशिद अल्वी, कांग्रेस प्रवक्ता

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव बीजेपी के एजेंट हैं. बीजेपी के इशारों पर नाचते हैं मुलायम सिंह. ये आरोप लगाया है कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने. अल्वी बुधवार को मुरादाबाद में कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने गए थे.

कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने मुरादाबाद की एक सभा में कहा, ' समाजवादी पार्टी का बहुत बोलबाला मुसलमानों के अंदर बहुत रहा. मुल्ला मुलायम सिंह कहलाते थे. मैं पिछले दस साल से ये बात कहता था. मुझे नहीं मालूम कि मेरी बात आपको अच्छी लगेगी कि बुरी लगेगी. लेकिन पिछले दस साल से ये बात कह रहा हूं कि देश के अन्दर अगर भारतीय जनता पार्टी का कोई सबसे बड़ा एजेंट कोई है तो वो मुलायम सिंह यादव है. अगर भारतीय जनता पार्टी के इशारों पर इस देश में कोई नाचता है तो वो मुलायम सिंह यादव नाचता है. क्या तारीख के किसी पन्ने में आपने पढ़ा कि दो अलग-अलग मूवमेंट चलाने वाले लोग एक साथ खड़े हो गए.

अपनी बातों को और साफ करते हुए राशिद अल्वी ने मुलायम के उस दौर को याद किया जब उन्होंने कल्याण सिंह से हाथ मिलाया था. अल्‍वी ने कहा, 'बाबरी मस्जिद की लड़ाई लड़ने वाले समाजवादी पार्टी के नेता राम मंदिर की लड़ाई लड़ने वाले कल्याण सिंह जी एक साथ एक झंडे के नीचे सिर्फ सियासी फायदा लेने के लिए आए और उत्तर प्रदेश के अकलियतों को ये बात समझ नहीं आई, मैंने तब भी कहा था की ये सिर्फ इन लोगों की सियासत है.

राशिद अल्वी मुरादाबाद में कांग्रेस पार्टी से मेयर पद के उम्मीदवार डॉक्टर मोहम्मद सादिक के लिए चुनाव प्रचार में आए थे. ऐसे में हो सकता है स्थानीय चुनाव में पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए वो एसपी सुप्रीमो पर बरस पड़े. लेकिन, क्या मुलायम पर वार करते वक्त कांग्रेस के ओजस्वी प्रवक्ता ये भूल गए कि राष्ट्रपति चुनाव में मुलायम इस वक्त कांग्रेस के संकटमोचक बने हुए हैं. कहीं ऐसा तो नहीं दिग्गी राजा की राह पर चल पड़े हैं राशिद अल्वी भी.


नीतीश कुमार खुद को हिंदू कहते हुए डरतें हैं - मोहन भागवत

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की पीएम पद की संभावित दावेदारी को लेकर बिहार के सीएम नीतीश की टिप्पणी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को नागवार गुजरी है। अब संघ सीधे मोदी के बचाव में उतर आया है। 

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नीतीश को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि देश का प्रधानमंत्री हिन्दुत्ववादी ही होना चाहिए। उन्होंने नीतीश के पीएम पद के लिए दिए गए सुझावों के बारे में उल्टे सवाल दागा कि क्या अब नीतीश बताएंगे कि पीएम कौन हो?, क्या अब तक के पीएम सेक्यूलर नहीं थे?। 

उन्होंने नीतीश को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें खुद को हिंदू कहते हुए डर लगता है। संघ प्रमुख के इस बयान के बाद एक बार फिर साफ हो गया है कि भाजपा में मोदी पावरफुल नेता के तौर पर कायम है, संघ की नजर में वे पीएम पद के लिए पहली पसंद हो सकते हैं। 

संघ के बयान के बाद जेडीयू की तरफ से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई है। जेडीयू नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि गुजरात में गोधरा की हिंसा हम भूले नहीं है। गठबंधन रहे या न रहे, सरकार भले चली जाए कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन धर्मनिरपेक्षता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 2009 का चुनाव हम गुजरात हिंसा के कारण ही हारे। धर्मनिरपेक्षता नीतीश का नहीं बल्कि देश का सवाल है। मोदी की सरकार हट गई होती तो एनडीए जीत जाता।

संघ प्रवक्ता राम माधव ने कहा कि सेक्यूलर और गैर सेक्यूलर को लेकर देश में लगातार भ्रांतिया फैलाई जाती रही है। नीतीश ने इसी को लेकर फिर बहस छेड दी है। क्या संघ नरेन्द्र मोदी साथ है सवाल के जवाब में राम माधव ने कहा कि संघ संचालक का बयान सभी स्वयंसेवकों के लिए है। इसका कोई भी अपने-अपने हिसाब से मतलब निकाल सकता है। उधर, जेडीयू के बयान के बाद भाजपा नेता बलबीर पुंज ने कहा कि नीतीश को यह नहीं भूलना चाहिए कि गुजरात हिंसा के बाद वे केन्द्र में गठबंधन सरकार में मंत्री थे। तब उन्होंने यह सब क्यों नहीं कहा, मंत्री क्यों बन गए।

मालूम हो कि नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी राजनीति और तल्ख बयानों ने मंगलवार को भाजपा गठबंधन के भीतर भूचाल ला दिया। जदयू की राज्य कार्यकारिणी की बैठक के बाद अब अंग्रेजी दैनिक को दिए साक्षात्कार में यह कहकर नीतीश ने भाजपा के अंदरूनी कश्मकश को गर्मी दे दी कि आगामी आम चुनाव में भाजपा को धर्मनिरपेक्ष छवि वाले नेता को प्रधानमंत्री पद का उमीदवार घोषित करना चाहिए। 

नीतीश ने यह भी कहा कि वे प्रधानमंत्री पद की रेस में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री बनने के बारे में सपने में भी नहीं सोचते। नीतीश कुमार के इस बयान के साथ आम चुनाव से बहुत पहले ही भाजपा गठबंधन में नेतृत्व को लेकर घमासान तेज हो गया है। संकेत इस बात के हैं कि प्रधानमंत्री पद के उमीदवार के लिए चर्चित नरेन्द्र मोदी की बढ़त कम करने वाले भाजपाइयों और दूसरे नेताओं के समर्थन पाकर ही नीतीश कुमार इस कदर कड़े तेवर दिखा रहे हैं।

पी.ए.संगमा ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दिया

यूपीए के उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव लड़ने पर अड़े पी. ए. संगमा ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। एनडीए के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने मीडिया को संगमा का इस्तीफा पढ़कर सुनाया। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि संगमा एनडीए का उम्मीदवार हो सकते हैं।

संगमा पर राष्ट्रपति चुनाव न लड़ने के लिए पार्टी की ओर से काफी दवाब था। उन्हें चुनाव लड़ने पर पार्टी से निकाले जाने और बेटी अगाथा संगमा को यूपीए सरकार में मंत्री पद से हटाने की चेतावनी तक दी गई थी। अपने इस्तीफे में संगमा ने कहा है कि वह पार्टी के रवैये से दुखी हैं और इस्तीफा दे रहे हैं।

गौरतलब है कि बीजेपी प्रणव मुखर्जी को किसी भी हाल में वॉकओवर नहीं देना चाह रही है और इसके लिए वह जयललिता और नवीन पटनायाक के उम्मीदवार संगमा को समर्थन देने के लिए भी तैयार है। 

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के इनकार के बाद गैर-यूपीए दलों को एकजुट करने की बीजेपी को कोशिश परवान नहीं चढ़ पाई। खुद उसके सहयोगी शिवसेना ने खुले तौर पर और जेडीयू ने परोक्ष रूप से प्रणव मुखर्जी को समर्थन की घोषणा कर दी है। इसके बावजूद बीजेपी प्रमुख विपक्षी पार्टी होने के नाते राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर सत्ताधारी पार्टियों के साथ खड़ा नहीं दिखना चाहती है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि संगमा एक बार नामांकन करा लें, तो फिर उन्हें बीजेपी की ओर से समर्थन की घोषणा की जा सकती है।

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